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इस देश का प्रधानमंत्री 300 लोगों की मौत के 2 साल के बाद 864 दिनों के बाद जा रहा है उस राज्य में जहां पर उनके ही सत्ता थी, उनके ही पार्टी सत्ता में थी। इतने लोगों की मौत के इतने साल बाद उन्हें याद आई है। 46 विदेशी दौरे वो कर चुके हैं। किस तरह से इस पूरे मुद्दे को देखा जाना चाहिए। अब इसे ऐसा दिखाया जाएगा कि कैसे पीएम गए हैं और सब कुछ नॉर्मल हो चुका है।
[संगीत]
वो मणिपुर में जो गए हैं, वो 99% लोग जो उनके साथ या भीड़ में दिखेंगे, वो यहीं से लेके गए होंगे। मणिपुर का कोई व्यक्ति प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए उत्सुक भी नहीं है। आएगा भी नहीं।
मणिपुर का जो क्षेत्र है, अपने क्षेत्र पे सीमित अगर आप पकड़ो तो नेपाल से भयानक हादसा हुआ है वहां पर। वहां पर औरतों को नंगा करके घुमाया गया, जिसमें हमारे अर्धसैनिक बलों का कोई उपयोग नहीं हुआ। हमारे अर्धसैनिक बलों के हथियार लूटे गए और प्रधानमंत्री हर वक्त ये जब हो रहा था, औरतों की हम हमने तस्वीरें देखी, ये तो प्रधानमंत्री कहीं ना कहीं अपनी यदि किसी विदेश दौरे पे डांस-वांस देख रहे थे। बस फूल नहीं था उनके हाथ में, नहीं तो शाहजहां कहते हैं उसको।
अगर राहुल गांधी बोलते हैं कि चीन के जो सैनिक हैं, वो भारत में आ गए तो उनकी देशभक्ति पर यह सवाल उठाते हैं। लेकिन कोई अगर यह कहता है कि पहलगाम में लोग मारे गए हैं, हम पाकिस्तान के साथ क्यों क्रिकेट खेल रहे हैं? तो वही अदालत कहता है कि आपको क्या पता।
जुडिशरी जो है, कुछ अपवाद हम लोग छोड़ देते हैं, दो-तीन प्रतिशत पूरी तरह से सड़ चुकी है। और पूरी तरह से एक पारिवारिक वातावरण है और वो पारिवारिक वातावरण हमारी जुडिशियल कैरेक्टर को देश के खत्म कर चुका है। जिस दिन जज लोया का मृत्यु हुई, जिस दिन उस दिन के बाद इस देश की जुडिशरी के सारे जो चेहरे हैं और नकाब हैं, वो नागपुर के रवि भवन में दफनाए गए हैं। उसके बाद अगर वो खोज के जब तक आप कंकाल उससे निकालते नहीं हो, तब तक इस देश की जुडिशरी को दुरुस्त करना नामुमकिन है।
प्रधानमंत्री अडानी का प्रधानमंत्री है, तो भारत को अपना प्रधानमंत्री चुनने का हक है। नक्सलवाद का समर्थन किया तो आप देशद्रोही हैं। खलिस्तान का समर्थन किया तो आप देशद्रोही है। एकदम बराबर है। पाकिस्तान के बारे में नारे लगाए आप देशद्रोही हैं। गाजा हमारा दोस्त राष्ट्र है, उसका झंडा भी फहरा है तो भी हम लोग जेल में डालते हैं। बराबर। तो हिंदू राष्ट्र बोलना भी देशद्रोह है। सही बात है। सही बात है। तो भागवत भी देशद्रोही है और मोदी भी देशद्रोही है।
मोदी के निर्बल और दुर्बल नेतृत्व की वजह से पूरे साउथ एशिया में पाकिस्तान भारत पर हावी हो चुका है। एसइओ में एंटी टेरर ग्रुप का हेड उसको बनाया गया। चाइना और पाकिस्तान अब अलग ही नहीं है। और रशिया भी अब पाकिस्तान के साथ जा रहा है, क्योंकि चाइना जा रहा है। ऑब्वियसली लीड चाइना लीड कर रहा है। ऐसी स्थिति में अमेरिका से रोज टेरिफ लग रहे हैं और भी कई चीजें हो रही है। अडानी के ऊपर वो संबंध जो है, अडानी तक पहुंचा नहीं, इसके लिए और सख्त हो रहा है अमेरिका। तो इस स्थिति में हमें पाकिस्तान भी एक भारी देश लगने लगा है। नेपाल पूरा हिंदू राष्ट्र है, वहां कोई जिहादी नहीं है। फिर भी क्रांति क्यों हुई? फिर आज की सत्ता भारत की जो है, वो तो मैं हमेशा कहता आया हूं कि ज्वालामुखी पे बैठी हुई है।
दोस्तों नमस्कार और आप सभी का एक नए एपिसोड में बहुत-बहुत स्वागत है। मैं हूं सोहित मिश्रा। देखिए जिस दिन इस वीडियो को शूट किया जा रहा है और आप में से अधिकांश लोग जिस दिन देखेंगे, वो दिन बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे देश के जो प्रधानमंत्री हैं नरेंद्र मोदी, उन्हें शायद 2 साल के बाद समय मिल चुका है मणिपुर जाने का। प्रधानमंत्री मणिपुर जाने वाले हैं। मीडिया वहां पर बताने वाला है कि कैसे सब कुछ शांत हो चुका है। लेकिन उससे पहले कुछ आंकड़े आपके सामने लाने बहुत जरूरी थे।
प्रधानमंत्री मणिपुर जा रहे हैं, जब वहां पर हिंसा को शुरू हुए 864 दिन हो चुके हैं। इस बीच 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। मणिपुर में 67 हजार लोग डिस्प्लेस हो चुके हैं, उनके घर तबाह हो चुके हैं। 1500 लोग जो हैं, वो इंजर्ड हो चुके हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 46 बार अलग-अलग विदेश दौरों पर वो जाकर आ चुके हैं और आखिरी बार वो मणिपुर गए थे, जनवरी 2022 में जब वहां पर चुनाव हो रहे थे। मणिपुर में वैसे सरकार बीजेपी की ही थी। जब यह पूरा हिंसा हुआ, एक तरीके से एथनिक क्लींसिंग हुई है और अब कहीं ना कहीं 46 विदेश दौरों के बाद प्रधानमंत्री मोदी को वि मणिपुर जाने का समय मिला है और अब वो मणिपुर जा रहे हैं। इसे किस तरह से देखा जाए और ये सब चीजें तब हो रही है, जब हमने देखा है नेपाल जो हमारे विदेश हमारे नेबरिंग देश है, वहां पर कैसे हिंसा हुई और कैसे हिंसा की रिस्पांसिबिलिटी लेते हुए वहां पर पहले गृह मंत्री और बाद में प्रधानमंत्री को भी हटाया गया। इन तमाम मुद्दों पर हम चर्चा आज के इस वीडियो में हम करने वाले हैं और इस पर चर्चा करने के लिए हमारे साथ एक खास मेहमान जुड़े हैं। राजू सर नमस्कार, बहुत-बहुत स्वागत है आपका। आपकी तबीयत बहुत समय से खराब चल रही है, लेकिन सबके बीच में यह मुद्दा ऐसा है कि आपको लगा कि बात करना चाहिए। इसलिए आपका बहुत-बहुत स्वागत है और शुरुआत इसी से करते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी मणिपुर गए हैं। जब हम इसे रिकॉर्ड कर रहे हैं तब उनका दौरा चल रहा है और जब तक लोग देखेंगे तब तो उनके भाषण सामने आ जाएंगे। कई हजार करोड़ के प्रोजेक्ट्स वो वहां पर ला रहे हैं। इस देश का प्रधानमंत्री 300 लोगों की मौत के 2 साल के बाद 864 दिनों के बाद जा रहा है उस राज्य में जहां पर उनके ही सत्ता थी। उनके ही पार्टी सत्ता में थी। इतने लोगों की मौत के इतने साल बाद उन्हें याद आई है। 46 विदेशी दौरे वो कर चुके हैं। किस तरह से इस पूरे मुद्दे को देखा जाना चाहिए। अब इसे ऐसा दिखाया जाएगा कि कैसे पीएम गए हैं और सब कुछ नॉर्मल हो चुका है।
>> क्यों वो बीजेपी के वहां के विधायक हैं। उन्होंने रेसिग्नेशन दे दिया है। कल इस्तीफे दे दिए सारे के सारे 43 विधायकों ने बीजेपी के इस्तीफे दे दिए। नॉर्मल क्या हुआ? एक और जो आंकड़े आपने बताए वो प्रधानमंत्री के विदेश दौरे के आंकड़े तो एकदम करेक्ट है। लेकिन बाकी आंकड़े आधिकारिक आंकड़े हैं।
>> वास्तव में वहां पर जो हुआ वो इतना भयानक था। इतने ईसाई घर तोड़े गए। इतने सारे चर्चेस तोड़े गए। और धर्म यानी क्रिश्चियनिटी के खिलाफ फिर कुकीज़ के खिलाफ जिस तरह से वहां पर हिंसा हुई और जिस तरह से हथियार और सारी चीजें वहां पर फैली इतनी तेजी से तो आपको किसी भी नागरिक को यह लगना लगना स्वाभाविक है कि किसी भी देश का प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री या मुखिया उस जगह पर फौरन जाता और वो वहां जो आग है, वो जो हिंसा की आग है उसको रोक लेता।
>> हम
>> लेकिन ऐसा किया नहीं गया। इसकी एक वजह ऐसा कही बताई जाती है कि मणिपुर में नेचुरल रिसोर्सेज बहुत है और वो जंगलों के नीचे हैं। आप समझ लीजिए कि पूरे देश का उत्खनन मोहनजोदड़ो और हड़प्पा से बड़ा वाला उत्खनन अब पूरे देश में अडानी ने हाथ में लिया है। उसमें मणिपुर में जो जंगल है, वो वहां के आदिवासी हैं, जो क्रिश्चियन कन्वर्टेड हैं कहीं तो उनके जल जंगल ज़ स्वाभाविक रूप से उनके अंडर आती है।
>> तो उन्हें विस्थापित किए बिना जंगल तोड़े नहीं जा सकते। जंगल तोड़े बिना वहां का जो लिथियम है, वो नहीं निकाला जा सकता। ऐसी कई चीजें हैं जो देखिए कोई भी हिंसा बिना वजह नहीं होती। पहली बात। हम्।
>> दूसरी इतने दिनों तक इतने महीनों तक अगर हिंसा होती रही है और आपका प्रधानमंत्री आपका गृह मंत्री आपकी पूरी सरकारें आपका मुख्यमंत्री वहां का कुछ भी नहीं कर रहा है। रिजाइन वो तो मुख्यमंत्री तो रिजाइन देना ही चाहता था और विधायक दे रहे हैं। ये इसका मतलब यह है कि कहीं ना कहीं स्टेट जो है, वो उस हिंसा को अह अह रोकने की कोशिश नहीं करना चाहती।
>> हम
>> तो रोकने की कोशिश नहीं करना चाहती का दूसरा मतलब यह है कि बढ़ावा देना चाहती है।
>> स्टेट स्पों्सर्ड वायलेंस है।
>> ऐसा आप कह सकते हैं एक तरह से क्योंकि अगर स्टेट स्पों्सर्ड वायलेंस नहीं है तो स्टेट को इमीडिएटली इंटरवीन करना चाहिए। यानी प्रधानमंत्री गृह मंत्री को इमीडिएटली वहां जाना चाहिए। होम सेक्रेटरी को जाना चाहिए। डोवाल जो एनएसए चीफ है उनको जाना चाहिए। क्योंकि देखिए मणिपुर बहुत सेंसिटिव ज़ोन है।
>> क्योंकि हमारा सीमा के पास जो सटे हुए इलाके हैं उसमें से मणिपुर आता है। नॉर्थ ईस्ट बहुत सेंसिटिव एरिया है और चाइना की नजर है उस पर।
>> तो अरुणाचल अरुणाचल तो चाइना तो खा ही गया। लद्दाख तक आ गया और अब मणिपुर की ऐसी स्थिति ठीक नहीं है देश के लिए अखंड भारत के लिए। तो ऐसी स्थिति में उसे जलने दे रहे हैं। इसका मतलब किसी बड़े का इंटरेस्ट है उस जलने में और वो बड़ा भारत में एक ही बड़ा है अडानी। हम
>> और किसी का आप जिक्र नहीं कर सकते।
>> बाकी तो मेघा इंजीनियरिंग वगैरह है, लेकिन वो मणिपुर में क्या करेंगे? वो वहां पर इंफ्रास्ट्रक्चर करने के लिए पहले जंगलों को मिटाना पड़ेगा। जंगल और देखिए कई जगह पर ऐसा हुआ है। मैं महाराष्ट्र की स्थिति बताता हूं आपको। विदर्भ में जब अलग विदर्भ का आंदोलन चल रहा था तब डॉक्टर श्रीकांत जीचकर जो बहुत इंटेलेक्चुअल जीनियस आदमी थे। कांग्रेसी थे और वो आईएएस थे, आईपीएस थे, डॉक्टर थे। कुछ यानी उन्होंने इतनी सारी डिग्रियां इतने यंग ऐज में लिए थे कि वो बहुत मेधावी माने जाते थे। तो उनका मैंने बहुत बड़ा इंटरव्यू किया था। तो मैंने कहा कि अलग विदर्भ का जो डिमांड है महाराष्ट्र से तो वह कितनी फिजिबल है फाइनेंशियली। तो उन्होंने कहा रिसोर्सेज वाइज कहने के लिए बहुत फिजिबल है। इसकी वजह यह है कि चंद्रपुर है, सुरजागढ़ है, गढ़चरली हर जगह पर जमीन के नीचे बहुत सारे मिनरल्स हैं। लेकिन बोले कि यह फिजिबल इसलिए नहीं है क्योंकि उसके ऊपर जो जंगल है उसकी वजह से हमारा इकोसिस्टम महाराष्ट्र का देश का और यानी पूरा प्राकृतिक बैलेंस जो है, जो बायोडायवर्सिटी है और हमारे फेफड़े एक तरह से जो इंसानों के लिए जो ऑक्सीजन लगता है वो जीवित है सिर्फ इसीलिए क्योंकि ऊपर जंगल है।
>> तो ये इंपॉसिबल है। हम्।
>> तो वह इंपॉसिबल को अभी पॉसिबल कर दिया इन लोगों ने क्योंकि वहां पर सुरजागढ़ से लेके गढ़च से चंद्रपुर से लेके सीधा बिना कुछ सोचे समझे अडानी ने कटाई कर दी और काम चालू किया और नीचे का वो शुरू किया मिनरल्स निकालना। तो बात यह है समझ लीजिए कि जहां पर जंगल है वहां पर आदिवासी हैं, क्रिश्चियंस हैं, माइनॉरिटीज हैं, उनको दबाना उनको या जैसे जैसे गढ़चोले में सुरजागढ़ में चंद्रापुर में आप देखिए हर लड़ने वाला जो अपनी जल जंगल जमीन के लिए जो व्यक्ति है उसको नक्सलाइट बोलते हैं। वैसे ही मणिपुर में जो लोग अपने जंगलों के लिए अपने घर के लिए अपने अह जो प्राकृतिक जो संपदा है भारत की उसके लिए जो खड़ा रहा वो वहां पर दुश्मन बन गया।
>> हम
>> और वो आपसी रंजिश दिखाई गई लेकिन दंगे बिना स्टेट की मदद के इतने दिन नहीं चल सकते।
>> तो प्रधानमंत्री का इतने समय तक नहीं जाना ये क्या दर्शाता है? वो हर जगह पर दूसरे विदेश में यानी क्वीन एलिजाबेथ का जब देहांत होता है तब वहां तक पहुंच जाते हैं वो, लेकिन अपने देश में एक देश का एक इलाका जल रहा है उसके बारे में बात नहीं करना, वहां पर नहीं आना, इतने समय तक रुकना ये क्या दर्शाता है और फिर हम ये कहते हैं कि ये इतिहास के सबसे मजबूत प्रधानमंत्री हैं वगैरह-वगैरह जो चीजें कही जाती है। लेकिन 800 दिनों तक एक राज्य को जलने देना और ऐसा भी नहीं है कि विपक्ष शासित राज्य था वो। बीजेपी शासित राज्य था। केंद्र में आप हो, वहां पर आप हो। अमित शाह आपके गृह मंत्री हैं। इंटेलिजेंस आपके पास है और इतना समय लग गया पीएम मोदी को वहां पर जाने के लिए। इसे कैसे क्या देखा जाए?
>> एक मैं सिर्फ बात उसमें ऐड करना चाहता हूं कि अ सबसे इतिहास के सबसे दुर्बल प्रधानमंत्री है ये। तो उसको मैं ठीक करना चाहता हूं कि ये ये सबसे शक्तिशाली प्रधानमंत्री में से एक जरा भी नहीं, ऊपर से नीचे तक देखो तो लास्ट नंबर है। ये सबसे दुर्बल प्रधानमंत्री भारत के यही है। एक नरेंद्र मोदी।
>> दूसरी बात है वहां जाने के लिए इतना टाइम लगा क्योंकि अभी कुछ करने लायक दूसरी चीज़ बची नहीं है।
>> क्योंकि अमेरिका अमेरिका ने लताड़ा है। चाइना के पास जाके आए वहां एसइओ के एंटी टेरर ग्रुप का चीफ पाकिस्तान को बना दिया गया है।
>> हम
>> रशिया जितना हमारा अगर जो संबंध था उससे बेहतर होने की कोई उम्मीद नहीं है क्योंकि पाकिस्तान के साथ भी रशिया अब बेहतर और क्योंकि चाइना लीड कर रहा है। अब रशिया लीड नहीं करा पहले जैसे सोवियत यूनियन के टाइम जैसा तो ये सारी चीजें जो बदल गई है और अंतत आप अडानी के ऊपर केसेस जो लगे हुए हैं यूएस में वो अलग से।
>> फिर बाकी जो चीजें हैं देश में और दुनिया में जैसे नेपाल में जो हुआ वो देखते हुए प्रधानमंत्री को और कुछ बचा ही नहीं करने लायक।
>> और वो दिल्ली में बैठे-बैठे कुछ कर नहीं सकते क्योंकि उनको कुछ आता नहीं है।
>> तो वो मणिपुर गए हैं। बाकी मणिपुर जाने की खास कोई वजह उनके लिए नहीं है। जैसे कि विपक्ष नेता जो हैं राहुल जी और कई अन्य विपक्षी नेता कई बार बोल चुके हैं कि प्रधानमंत्री को मणिपुर जाना चाहिए। मणिपुर जाना चाहिए। तब वो गए नहीं। अब वो गए। अब देखिए हर जगह फोटो लगेगी कि मणिपुर गए हुए प्रधानमंत्री। एक्चुअल में असल में प्रधानमंत्री मणिपुर आ रहे हैं तो मणिपुरी लोगों ने एक एक गाना भी बनाया उनके आने पर। वह आपको दिखा सकते हैं। फिर वहां पर जो स्थानिक लोग जो हैं वहां पर जो हालात है, बीजेपी के लोगों ने ही ये कर दिया है। हाथ ऊपर कर दिया तो बाकी लोगों की क्या कहें? हम्।
>> तो प्रधानमंत्री का कोई स्वागत-वक्तगत नहीं हो रहा है। लेकिन अगर आपके जीएसटी की गलती, हम्, आपने सुधारी और व्हीकल की भाव कम हो गए थोड़े से हो गए तो प्रधानमंत्री की तस्वीर चिपकानी पड़ती है। तो अब वो मणिपुर की हर जगह मणिपुर और प्रधानमंत्री ऐसे फोटो हर जगह चिपकेगा। इश्तहार आएंगे। उसका कोई परिणाम लोगों के मन पे नहीं होने वाला।
>> क्योंकि लोग अब समझ चुके हैं। ऊब चुके हैं। समझ क्या चुके हैं। उब चुके हैं। ये ये एक यानी एक बात होती है ना कि आप खीर आपको बहुत पसंद है। समझ लीजिए मोदी जी खीर है। हां मीठी खीर है।
>> और 2014 में हमने खाना शुरू कर दिया। एक पॉइंट आता है जब आप इतना खीर खा लेते हो कि वमन होना शुरू हो जाता है। तो इनके फोटोग्राफ्स इनके एडवर्टाइजमेंट इनके तस्वीरें जो जो जहां जो आप वैक्सीन ले लो या अब देखिए कैंसर का वैक्सीन यूरेशिया ने निकाला, लेकिन वो वैक्सीन के सर्टिफिकेट पे पुतिन की फोटोग्राफ नहीं होगी, भले पुतिन तानाशाह है।
>> तो ये जो नार्सिसिज्म है, उसी नार्सिसिज्म का एक हिस्सा है ये मणिपुर का जाना। वो मणिपुर में जो गए हैं, वो 99% लोग जो उनके साथ या भीड़ में दिखेंगे, वो यहीं से लेके गए होंगे।
>> मणिपुर का कोई व्यक्ति प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए उत्सुक भी नहीं है। आएगा भी नहीं। इनफैक्ट।
>> अगर डेमोक्रेटिक तरीके से प्रधानमंत्री को जाना होता तो उनके खिलाफ निदर्शन होते वहां पर। हम्।
>> आप समझिए कि अह बनारस में अह कुछ कार्यक्रम करना है तो अजय राय को पहले पुलिस कस्टडी में लेते हैं। यानी विपक्ष जो आपने एक्चुअली आप इनके सामने हारे हुए हैं लोकसभा चुनाव, उनको ये इस तरह से लोकतंत्र इनका चलता है। तो आप समझिए कि इनके साथ जो गए हैं या वहां पर जो भीड़ दिखेगी, जो तिरंगा दो-तीन औरतें रोएगी नहीं, ये विदेश में रोती है, यहां पर नहीं रोएगी तो वो जो रोएगी, वो वो जो सारे चीज हो जाएगा, ये सारा यहीं से जाएगा ज्यादातर गुजरात से जाएगा, फिर कुछ स्थानीय निकाय होंगे बीजेपी के उत्तर भारत में, वहां से लोग अह आदमी लड़कियां या फिर पैसे देके गभी भीड़ जो क्राउड कॉन्ट्रैक्टर्स होते हैं, उनको बोलके वह दिखाएंगे, उसके फोटोग्राफ लेंगे, एक तमाशा होगा और वो कल से इश्तहार देखने के लिए आप तैयार हो जाइए। वरना मणिपुर की जो समस्या है, वो मल्टी डायमेंशनल है। एंड इट्स वेरी कॉम्प्लेक्स नाउ। वो समस्या ठीक करने के लिए एक काबिल प्रधानमंत्री के लिए समझ लीजिए आप जैसे कि नेता विपक्ष राहुल गांधी का हम उदाहरण लेते हैं, एक उनके जैसा काबिल आदमी अगर सत्ता में बैठता है, अगर प्रधानमंत्री भी बनता है और इच्छा भी है उसके पास, तब भी अगर वो चाहे तो कम से कम 7 से आठ साल लगेंगे अब मणिपुर को पहले जैसा ठीक करने के लिए।
>> हम
>> क्योंकि देखिए आपको एक जख्म हो जाती है तो भर आने में कितना टाइम लगता है? तो इतना बड़ा कांड हुआ है। मणिपुर का जो हुआ है। मणिपुर का जो क्षेत्र है, अपने क्षेत्र में सीमित अगर आप पकड़ो तो नेपाल से भयानक हादसा हुआ है वहां पर।
>> सही बात है।
>> तो एक बात समझिए कि वहां पर औरतों को नंगा करके घुमाया गया।
>> हम
>> जिसमें हमारे हमारे अर्धसैनिक बलों का कोई उपयोग नहीं हुआ। हमारे सैनिक अर्धसैनिक बलों के हथियार लूटे गए और प्रधानमंत्री हर वक्त यह जब हो रहा था, औरतों की हम हमने तस्वीरें देखी, ये तो प्रधानमंत्री कहीं ना कहीं अपनी कि किसी विदेश दौरे पे डांस वांस देख रहे थे। बस फूल नहीं था उनके हाथ में, नहीं तो शाहजहां कहते हैं उसको।
>> तो बस वो सब चल रहा था। हमारे चुनाव आयुक्त यह कह रहे थे कि हम सीसीटीवी फुटेज नहीं दिखाएंगे, इसलिए क्योंकि औरतों को अपनी मां बहने और बेटियों को ये ऐसे कैसे दिखा सकते हैं? अगर ऐसे नहीं दिखा सकते तो प्रधानमंत्री के दौरे पे वो मां बहने और बेटियां ही तो नाच रही है, उनको दिखा रहे हैं आप।
>> सही बात है।
>> तो बात ये है कि ये सारा नाटक नौटंकी चल रही है। इनके जो इकोसिस्टम इनका जो कार्टल है, गुजू कार्टेल बेसिकली सेंटर में है और बाकी इर्द-गिर्द उनके जो सिस्टम इकोसिस्टम इन्होंने बनाया है, एक गैंग की तरह। तो एक लंपेंट ठग्स की तरह सब इकट्ठे बैठे हुए हैं। वो उनका जो जो चल रहा है ना, उसका एक हिस्सा है ये। इसके सिवाय देश का देश की जनता, देश की जनता की अस्मिता, वहां की जनता की अपनी समस्याएं, वहां का जो इकोसिस्टम है, जो प्राकृतिक संपदाएं हैं, हमारी सीमावर्ती इलाका है, उसकी जो जटिलता है।
>> ये सारी चीजों से हजारों मील दूर है प्रधानमंत्री का दिमाग।
>> हम
>> ठीक आपने एक बात कही अभी कि मणिपुर में जो हुआ वो नेपाल से भी भयंकर है और मैंने इंट्रोडक्शन में भी कहा कि एक तरफ हमने देखा कि कैसे नेपाल में लोग उब गए, लोग सड़कों पर आए। अह उसे सोशल मीडिया का नाम जरूर दिया गया। लेकिन वह जो करप्शन वहां पर बढ़ रहा था, जिस तरह से तानाशाही बढ़ रही थी, कुछ लोग ही तय कर रहे थे क्या होगा, क्या नहीं होगा। ऐसा सुनने में तो ऐसा लगता है कि जो चीजें वहां पर हो रही है, वो तो हमारे यहां पर कई समय से हो रही है। लेकिन उस तरह की चीजें मणिपुर में भी हो रही थी। लेकिन बाकी जगहों पर हमारे देश भर में इसका असर नहीं होता है। लोगों ने लगभग बात करना बंद कर दिया था। यहां तक कि यह देख लीजिए आप। अह अब जब हम इसको रिकॉर्ड कर रहे हैं उसके अगले दिन भारत पाकिस्तान का मैच होगा। यह वही लोग हैं जो नीरज चोपड़ा ने अपने कार्यक्रम में अगर पाकिस्तान के एक एथलीट को बुलाया था तो नीरज चोपड़ा को ये लोगों ने एक तरीके से देशद्रोही बताने की कोशिश की थी और अब सब लोग बैठकर जय शाह के आईसीसी द्वारा आयोजित भारत पाकिस्तान के मैच को देखेंगे। तो हम क्या सोचते नहीं हैं या हमें भूलने की बीमारी है? हमारी याददाश्त कमजोर है। हम जो नेपाल में देख रहे हैं कि कैसे वहां पर युवा सड़कों पर उतरा है और हमारे यहां पर ना मणिपुर को लेकर किसी को फर्क पड़ता है, ना पहलगाम को लेकर किसी को फर्क पड़ता है। जिस पाकिस्तान की मदद चाइना करती है, वहां पर प्रधानमंत्री जाते हैं। प्रधानमंत्री के देशभक्ति को लेकर किसी को फर्क नहीं पड़ता है। यानी जो ऊपर से आएगा, उसे हम सही मान लेते हैं। इस तरह से।
>> प्रधानमंत्री की देशद्रोह को लेकर लोगों को फर्क नहीं पड़ता है। ऐसा कहना है।
>> जी जी वही कह रहा हूं। देशभक्ति आपने कहा।
>> नहीं देशद्रोही उन्हें कोई देशद्रोही नहीं कहेगा।
>> हां नहीं है वो देशद्रोही है, मैं कहता हूं।
>> हां।
>> तो और मैं कहता हूं इतना काफी है क्योंकि अ मैं
कोई बात बिना सोचे समझे बात तो एक तो करता नहीं हूं। दूसरा मेरा किसी के साथ कोई पर्सनल चीज तो है नहीं। तीसरी चीज वो प्रधानमंत्री बने हैं तो उनको एनालाइज किया जाएगा और ये ऑब्जेक्टिव एनालिसिस है उनका और कुछ नहीं। वो उसके मैं 10 उदाहरण दे सकता हूं। अगर सामने उनका उनका कोई रिप्रेजेंटेटिव या खुद बैठे वो तो है इंटरव्यू करेंगे और हम दिखाएंगे कि कितने देशभक्त हैं। वो बात वो नहीं है।
मैं ये कहता हूं कि नेपाल में जो हुआ पर्सनली मैं आई आई आई एम आई एम गांधीियन। मुझे नेहरू और गांधी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर इन लोगों पे श्रद्धा है। यानी एक तरह से मैं विश्वास करता हूं कि इनकी आइडियोलॉजी में दम है। तो मैं इस बात से खुश नहीं हूं कि नेपाल में जो हुआ वह सारी चीजें हिंसा में बदल गई।
लेकिन अनफॉर्चूनेट क्या है मालूम है? दूसरी बात दूसरी तरफ से देखते हैं हम कि ये राजनेता जो है ये राजनैतिक जो विरासत लेके आए हुए कुछ चुनिंदा घर हैं हमारे देश में भी है।
अब देखिए आप जब महाराष्ट्र की बात करते हैं तो ब्रांड पवार ब्रांड ठाकरे यही बात करते हैं। तो ये सारी चीजें हैं। ये अलग टाइप का एक ब्राह्मणवाद का एक अलग हिस्सा है। भले जात थोड़ी अलग हो लेकिन ब्राह्मणवाद और उच्च वर्णी का हिस्सा है। ये नेपाल में वही हो। तो जो जो मौका जिन्हें चाहिए ऐसे जो काबिल युवा है उनका इतना दमन होता है इतना दमन होता है उनका दमन बिना हिंसा के बाहर ही नहीं आ पाता।
हम। अब समस्या ये है कि मैं बैठकर गांधीवाद को प्रवचन दे दूं। हम। उसको जिसका दमन हो रहा है। हम। जिसका दमन हो रहा है उसको मैं ये बताऊं कि वो लड़े कैसे ये गलत है ना। हम। वो जिसका दमन हो रहा है वो तय करेगा कि वो लड़ेगा कैसे? क्योंकि उसके पास जो संसाधन हैं और सीमित रूप से जो संसाधन रखे गए हैं या जिस तरह से सत्ता उनका दमन कर रही है उसके बाद उसका अंजाम तय होगा वो मैं तय नहीं कर सकता। मैं गांधीवादी होने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
और मैं ना गांधी जी हूं। हम। कि जिससे मेरा कोई सुने। सही बात है। सुने? तो नेपाल में कोई गांधी भी नहीं था। और कोई गांधीवादी भी नहीं था और गांधीवादी की किसी सुनने की स्थिति में लोग नहीं थे। क्योंकि उस स्थिति में सत्ता ने उन्हें नहीं छोड़ा था जैसे हमारे देश में भी नहीं छोड़ा है।
तो बात ये है कि ये जो रास्ते हैं हिंसा के वो अंततः अ देश को समाज को खुशहाल नहीं बनाते। लेकिन इतिहास में आप हमेशा देखेंगे कि ये रास्ते युवाओं को अपनाने पड़ते हैं। इसकी वजह ये है कि सत्ता कुछ गिनेचुने परिवारों के हाथ में सिमट कर रह जाती है। और वो लोग विदेशों में पैसे भेजते हैं। अपने बच्चों को भेजते हैं। ताकत और पैसा सारा अपने पास लेते हैं। सारा देश अडानी को दे देते हैं। अंबानी को दे देते हैं। और गरीब और पिछड़ों के बच्चों को मस्जिद के सामने जय श्री राम के नारे लगाने पे काम पे लगा देते हैं। उसमें जो मरे सो मरे जिंदा रहे तो अपने दम पे फिर कोई कोविड में जब उनको ऑक्सीजन नहीं मिल रहा था उनको मोदी हैंडल फॉलो कर रहा था तो वो लिख रहे थे तो जवाब कुछ आया नहीं।
हम्म। तो ये एक जो प्रक्रिया है जो प्रक्रिया आपको मालूम है कि फ्रेंच रिवोल्यूशन में अह जो मै एंटोनेट अह जो क्वीन थी। उन्होंने उनको ये समझ में ही नहीं आया कि भीड़ को जिस तरह से दमन हो रहा है तो वो दमन और मेरा जीवन शैली जो मैं जिस तरह से जी रही हूं। अब देखिए ऊपर ऊपर देखिए कि आप सत्ता में और विपक्ष में राहुल गांधी लड़ रहे हैं। कुछ लोग लड़ रहे हैं संजय सिंह वगैरह लड़ रहे लेकिन बाकी देखिए कनीमोली जी सुप्रिया अपना सुप्रिया सुरेश जी फिर वो चतुर्वेदी प्रियंका चतुर्वेदी ये शशि थरूर ये सारे लोग विदेश प्रधानमंत्री ने पीआर विजिट के लिए भेजे उसका कोई फायदा देश का नुकस आर्थिक नुकसान हुआ बाकी कुछ हुआ ही नहीं।
तो ये लोग गए अब ये देखिए कि ये जिन लोगों ने उनको चुनकर दिया है या जिन लोगों की वजह से वो वहां पर बैठे हैं। उस जनता के कुछ वाजिब सवाल है और जिस टेररिज्म पाकिस्तान के खिलाफ वह बोलने गए थे, वह पाकिस्तान के खिलाफ कल पाकिस्तान के साथ कल मैच खेली जाएगी। उसके ऊपर इनकी भूमिका क्या है?
अगर देश के युवाओं को इन सारे सवालों के जवाब नहीं मिलते तो सत्ता पक्ष क्या और विपक्ष क्या? हम्म। ये सारे लोग जो है वो मिलकर हमें हमारा संसाधन हमारे से छीन रहे हैं और हमारा दमन कर रहे हैं। ऐसा युवाओं को लगा और उसका विस्फोट हुआ और वो हिंसा में तब्दील हुआ तो आप युवाओं को दोष नहीं दे सकते। इसका दोष सत्ता को जाता है।
यह बात आप समझिए कि देखिए गांधी जी के बारे में मैंने जितना गांधी जी को पढ़ा है अ मुझे लगता है हमेशा कम ही पढ़ा है। तो उनका देखता लेकिन उसमें एक बात मुझे दिखाई देती है कि उस वक्त जो सत्ता थी उन्होंने गांधी जी के कहने को एक स्पेस रखी थी।
हम। जो स्पेस से गांधी जी अपनी बात रख पाते थे। रख सकते थे। उसे दबाया नहीं जाता था। हां दबाया जाता था तो भी स्पेस थी वो स्पेस थी दबाया जाना अलग बात है यानी उनको जेल हो जाती थी उनको सब कुछ किया जाता था लेकिन उनका रिस्पेक्ट है यानी आपके विरोधी जो है उनका रिस्पेक्ट होना एक अलग सिविलाइजेशन की बात है।
हम। वो रिस्पेक्ट अगर आज सत्ता में नहीं है तो आप गांधीवाद के माध्यम से कोई आंदोलन होगा ऐसी अपेक्षा मत रखिए। कुछ भी हो सकता है। और आज की सत्ता भारत की जो है वह तो मैं हमेशा कहता आया हूं कि ज्वालामुखी पर बैठी हुई है।
हम। देखिए आपको अ मुझे नहीं पता कि आपको जब कि कोविड के बारे में कितना जानकारी क्योंकि मुझे कोविड थी दो बार हो चुका है। अब तीसरी बार हुआ कि नहीं मुझे नहीं पता लेकिन वो हुआ भी होगा। हम। तो दो बार तो हुआ है तो पहले दिन सारे लक्षण नहीं आते।
हम। पहले दिन एक छोटी सी ठंड लगती है और फिर थोड़ा लगता है कि थोड़ी कसक है। थोड़ा सा सर दर्द हो रहा है छोटा-मोटा और बस एक पैरासिटामॉल लेने से ठीक हो जाएगा। दूसरे दिन उसमें थोड़ा सा बदलाव हो जाता है। अब इंटेलिजेंट आदमी अगर है तो वो फौरन समझ जाएगा कि ये आने वाले एक बड़े संकट की सूचना है। अभी से इसको हमको ठीक से देखना चाहिए। अब जो सत्ता है भारत में मोदी शाह अडानी और अंबानी और बाकी लोगों के हाथ में सब विपक्ष के भी है पवार है उसमें अडानी और पवार अलग नहीं है। तो ये लोग सब जो मिलकर कर रहे हैं उनको ऐसा लग रहा है कि चलो ये तो लक्षण है। छोटे-छोटे लक्षण है। यहां वहां मणिपुर में हो रहा है ना। वो मणिपुर तो दूर है।
मैं तो बारामती में बैठा हूं। मैं तो दिल्ली में बैठा हूं। मैं तो पंजाब में बैठा हूं। वो तो पंजाब में इतनी बड़ी बाढ़ आई। इतना नुकसान हुआ लेकिन बीजेपी की तरफ से कोई बड़ी वो नहीं पहले देखिए एक बात मैं आपको बताता हूं कि आप सिर्फ पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच हो रहा है। उसके ऊपर बोल रहे हैं।
इस प्रधानमंत्री ने मैंने देशद्रोही कहा तो इन्होंने ये कहा था कि खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे।
हम। तो कल एक संवाद में बीजेपी के एक प्रवक्ता यानी नेता बैठे उनको लोगों ने पूछा एक लड़की ने पूछा कि यह तो प्रधानमंत्री ने कहा था। तो बोला कि खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे ऐसा कहा था। खून और क्रिकेट नहीं बहेगा ऐसा नहीं कहा था। ये जवाब है ऑन रिकॉर्ड है। आप रिकॉर्ड दिखा सकते हैं लोगों को।
तो ये जो बात है वो मैंने जो फ्रेंच क्वीन की उदाहरण दिया रेवोल्यूशन से पहले अगर आपको ब्रेड नहीं है। लोग कह रहे थे कि खाने के लिए ब्रेड नहीं है। अरे ब्रेड नहीं है तो आप केक खाइए।
हम्म। यानी उसकी सुध इतनी चली गई थी। यानी वास्तव से नाता इतना टूट गया था जैसे मोदी जी का टूटा हुआ है। वो वो हवा में भी हाथ हिलाते हैं और कहीं भी अपनी तस्वीरें छापते हैं। उनको लगता है कि वो तस्वीरें देख के लोग बहुत उनको भगवान मानेंगे। लोग को लोगों को घिन आ गई है तस्वीर और हाथ उनके देखने की। तो उनकी पॉपुलैरिटी बढ़ नहीं रही है। ऐसे कामों से उनकी पॉपुलरिटी कम होती गई है और अब तो पूरी रसातल में पहुंच चुकी है। लेकिन वो देखिए ऐसे ही सत्ता का पतन जो होता है वो ऐसे ही होता है। फ्रेंच रेवोल्यूशन के मैं उदाहरण इसलिए दे रहा हूं क्योंकि यही मैं हमने खून और पानी कहा था। हमने खून और क्रिकेट नहीं कहा था। यही है अगर खाने के लिए तो आपको अगर ब्रेड नहीं मिल रहा है तो केक खाओ।
हम्म। तो ऐसे वक्त आप जनता से ये अपेक्षा नहीं कर सकते कि चाहे वो नेपाल की हो, चाहे वो फ्रांस की हो, चाहे वो श्रीलंका की हो, चाहे वो हिंदुस्तान की हो। ऐसे वक्त आप जनता से अपेक्षा नहीं कर सकते कि किसी अहिंसावादी गांधीवादी मेरे जैसे आपके जैसे व्यक्ति को वो जनता सुने।
हम। क्योंकि उनके पास उनके दमन की प्रतिक्रिया देने के लिए जो संसाधन है वो हम नहीं तय कर रहे हैं।
सही बात। वो सत्ता तय कर रही है।
हम। तो हम तय नहीं कर सकते कि वो लड़े कैसे।
हम। तो यह यह मुझे कई बार इस बात से बहुत अफसोस होता है कि मैं यह चाहता हूं कि इस देश में जो भी परिवर्तन आए और आता रहे परिवर्तन तो पीसफुल आए।
हम। ट्रांसफर ऑफ पावर भी पीसफुल हो यह सत्ता जाए लेकिन वो पीसफुल ही जाए और एक दूसरे का सम्मान कायम रहे लेकिन मोदी शाह अडानी और उनके जो पूरा कार्टल है ये नहीं चाहता अगर वो नहीं चाहते तो संसाधन उनके हाथ में वो दबाए बैठे बैठे हुए हैं। एक तो वोट चोर है।
उनको गद्दी छोड़नी चाहिए। दूसरा उनको लोगों का समर्थन नहीं है। वोट चोरी से आए हुए हैं। और सबसे बड़ी बात यह है कि इसके बावजूद आप लोगों को धमका रहे हैं। दमन कर रहे हैं। उनकी पीड़ा को आप समझ नहीं रहे हैं। उसका मरहम नहीं लगा रहे। अपनी तस्वीरें छाप रहे हैं। आपको मालूम है गडकरी का क्या बयान आया है? कल?
देशद्रोही बोला।
नहीं। गडकरी का यह बयान आया है। गाड़ियां बहुत चलती है इसलिए रास्ते खराब हो जाते हैं।
अच्छा। इसलिए हर किलोमीटर पे प्रति किलोमीटर ₹5 हम लोग अभी टैक्स लगाएंगे।
अच्छा। हां तो गाड़ियां हवा से चलेगी।
अगर गडकरी का टैक्स नहीं चाहिए। तो यह इस तरह की जो बातें हैं आप देखिए इनमें अलग-अलग गुट हैं। गडकरी एक गुट अलग है। मोदी एक अलग गुट है। लेकिन कार्टिल एक ही है।
ये ठगी जो हो रही है देश के साथ वो एक जैसी हो रही है। तो अब देश की जनता को उसकी प्रतिक्रिया कैसी देनी है और उसके कॉन्सिक्वेंसेस क्या हो जाएंगे? ये ना मेरे हाथ में है ना आपके हाथ में है। हम सिर्फ भों हैं। हाथ में लेके बोल रहे हैं बस। कमेंट्री कर रहे हैं।
सही बात है। हम लोग खिलाड़ी नहीं है। वो पिच पे है वो बॉल अच्छा खेला, अच्छा खेला, अच्छा खेला। अच्छा खेला, बुरा खेला जो खेला तुम बोलोगे तो तुम दिखोगे लेकिन वो खेल रहा है।
सही बात है। लेकिन आपको सच में लगता है कि हमारी जनता ये सब चीज देख रही है, समझ रही है। मैं आपको एक कारण और उदाहरण बताता हूं। पंजाब के किसान जब आंदोलन कर रहे थे, यह पीसफुल आंदोलन था। उन्हें ख़स्तानी बताया गया। उनकी जितनी बदनामी कर सकते थे, की गई। सीए एनआरसी जितनी बदनामी कर सकते थे, की गई। और फिर उन्हें।
वो आंदोलन में जो मुसलमान लड़के और लड़कियां और मेधावी लड़के और लड़कियां जो जेल गए हैं उनकी केस जुडिशरी हाथ में नहीं ये भारत की जुडिशरी किसी भी तरह से उसको क्या कहते हैं न्याय बुद्धि।
हम। जुडिशियल कैरेक्टर जो है वो जीरो है।
अभी क्योंकि जुडिशरी पे आए मैं आपको एक एग्जांपल के साथ बताना चाहता हूं। दो उदाहरण मैं आपको देता हूं जिससे लोगों को भी यह समझ में आ जाएगा कि जुडिशरी की परिस्थिति कैसे है। आपको याद होगा एक जज था जिन्होंने राहुल गांधी को कहा जब उन्होंने कहा था कि चीन भारत में घुस गया है कि तुम देशद्रोही हो या देशभक्त हो क्योंकि कोई देशभक्त ऐसा बात नहीं करेगा जो तुमने कहा। परसों एक पीआईएल फाइल हुई थी इसी इंडिया पाकिस्तान मैच को लेकर और फिर अदालत ने कहा कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच में मैच होती है तो इसमें फर्क क्या पड़ता है? आप क्यों इसे लेकर सवाल उठा रहे हो? यानी एक अदालत या अदालत के जो दो जजेस हैं, वह कौन सत्ता पक्ष में और कौन विपक्ष में है, उसे देखकर अगर राहुल गांधी बोलते हैं कि चीन के जो सैनिक हैं वो भारत में आ गए, तो उनकी देशभक्ति पर ये सवाल उठाते हैं। लेकिन कोई अगर यह कहता है कि पैगाम में लोग मारे गए हैं। हम पाकिस्तान के साथ क्यों क्रिकेट खेल रहे हैं? तो वही अदालत कहता है कि आपको क्या फर्क पड़ता?
मैं आपको एक बात बताता हूं कि जुडिशरी जो है।
हां। कुछ अपवाद हम लोग छोड़ देते हैं दोती% पूरी तरह से सड़ चुकी है हम। और पूरी तरह से एक पारिवारिक वातावरण है और वो पारिवारिक वातावरण हमारी जुडिशियल कैरेक्टर को देश के खत्म कर चुका है।
ये एक अलग टाइप का ब्राह्मणवाद ही भी है। क्योंकि देखिए इस देश में जितने मुसलमान हैं, जितने सिख हैं, जितने जैन हैं, जितने पिछड़े हैं, ओबीसीज हैं, एससी, एसटी हैं और जितनी महिलाएं हैं उतना प्रतिनिधित्व रिप्रेजेंटेशन कोजियम में मिल ही नहीं रहा है जुडिशरी में। और वहां पर आरती साठे जैसी बीजेपी की स्पोक्सपर्सन को इमीडिएटली लिया जा रहा है। 54 जजेस को बाईपास करके पंचोली को सुप्रीम कोर्ट में लिया जा रहा है क्योंकि वो बस अमित शाह और मोदी जी के पक्ष में हमेशा और अपने अरुण मिश्रा जी उन्होंने अडानी के पक्ष में जिस तरह से जजमेंट्स दिए ये सारी चीजें दर्शाती है कि आपको ये जो पहले कहते थे लोग कि कुछ भी हो लेकिन मुझे इस देश के न्याय संस्था पे पूरा भरोसा है। मेरा बिल्कुल भरोसा नहीं है।
हम। जिस दिन जज लोया का मृत्यु हुई जिस जिस दिन उस दिन के बाद इस देश की जुडिशरी के सारे जो चेहरे हैं और नकाब है वो नागपुर के रवि भवन में दफनाए गए हैं। उसके बाद अगर वो खोद के जब तक आप कंकाल उससे निकालते नहीं हो तब तक इस देश की जुडिशरी को दुरुस्त करना नामुमकिन है।
तो आप उससे आशा तो बिल्कुल मत रखिए। ज्ञानेश गुप्ता क्या कहते हैं वो तो आपने देख ही लिया कि आप 7 दिन के अंदर एफिडेविट दे दीजिए नहीं तो सजा के लिए तैयार हो जाइए। अरे आप लीडर ऑफ अपोजिशन को क्या बात कर रहे हो आप? आप हो कौन?
आप इस देश की जनता के ट्रस्टी हो सब लोग। आप मालिक नहीं हो हमारे। तो ये सारी जो बातें हैं उसका रिएक्शन जो जनता की तरफ से जाएगा वो जाएगा। वो जाएगा। तो तुम आपने अभी श्रीलंका में देखा, नेपाल में देखा, बांग्लादेश में देखा और अभी साहब गए भूटान में। वहां क्या करके आए? अडानी को एनर्जी का वो भारत सरकार की पीएसयू की जगह अडानी को एनर्जी में घुसा के आए।
हम। तो अगर प्रधानमंत्री अडानी का प्रधानमंत्री है तो भारत को अपना प्रधानमंत्री चुनने का हक है।
बिल्कुल। मैं इसी से जुड़ा हुआ जो सवाल था जुडिशरी के वजह से अटक गया। मैं कह रहा था कि ऐसे तो आंदोलन कई जगहों पर हुए हैं।
नहीं मैं जुडिशरी की बात इसलिए मैंने ली क्योंकि मणिपुर के मामले में जैसे सीए एनआरसी में जो उमर खलीद से लेके आई कई लड़के लड़कियां अंदर है। आप बहुत सारे राजनीतिक कैदी तो बहुत बहुत ज्यादा तय पैमाने पर है हर राज्य के जेलों में।
तो वो लोगों इन लोगों को लास्ट बचाव का साधन क्या है? जुडिशरी अगर जुडिशरी अगर साथ नहीं दे रही मणिपुर बंद हो सकता इस देश में मणिपुर जैसा कांड हो सकता है इस देश में सीए एनआरसी का हो सकता है इस देश में किसानों को न्याय नहीं मिलता है। इस सबकी वजह संसद में बैठे हुए कार्टेल तो है लेकिन जुडिशरी ज्यादा है।
क्योंकि हम आखिरी जो हमारा हां हम अन्याय के लिए हम जिनके पास जाएंगे उनकी उनका जुडिशियल कैरेक्टर नहीं 1919 में ब्रिटिशों ने कहा था। कि ब्राह्मणवाद जो भारत में है उसमें जुडिशियल कैरेक्टर नहीं है। न्याय बुद्धि नहीं है। इसलिए ब्राह्मणों को अपॉइंट मत करो जज।
हम। ये और अभी नेपाल में जो आंदोलन हुआ उसमें भी यही बात बोली गई। ब्राह्मणवाद का मतलब एक परिवारवाद भी है जो आज सारे राजनैतिक परिवार मिलकर काम कर रहे हैं। जो मैंने उदाहरण दिया। तो यह जो ये जो ब्राह्मणवाद है यह भारत को भी उसी तरह से जकड़ के रखा है उसने जिस तरह से नेपाल को रखा था।
नेपाल पूरा हिंदू राष्ट्र है। वहां कोई जिहादी नहीं है। फिर भी क्रांति क्यों हुई?
हम्म। सही बात है।
हां। तो इसका मतलब अब्दुल दोषी नहीं है। दोष आप में है और वो आपने सुधारना नहीं है तो लोग सुधार देंगे। सही बात है। और यहां पर यह भी मैं बता दूं कि राजू सर ने भी इसे कहा कि जब हम कहते हैं कि क्रांति हो तो हम वायलेंस की बात नहीं करते। हम कह रहे हैं ये गांधी का देश है। ये नेहरू का देश है। लोगों को सवाल पूछने का अपने मुद्दों को उठाने का यहां पर मौका मिलना चाहिए। और राजू सर वही जो मेरा सवाल था उसे आगे बढ़ाता हूं।
मैं एक बात बताता हूं। हम लोग कहते हैं ये गांधी का देश है। नेहरू का देश है। है ना? प्रधानमंत्री से लेके सारे बीजेपी के लोगों ने अपने दीवारों पर हेडगेवार गोवलकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी और वो उनके एक और नेता कौन वो वो उनका फोटो लगाना शुरू कर दिया जो हिंसा का समर्थन करते हैं और गांधी का विरोध करते हैं। तो आपने प्रो प्रोपोगेट किया है। गांधीवाद का विरोध की शुरुआत आपने की है। गोडसे की पूजा आपके अलग-अलग टाइप के लोग करते हैं। तो बात समझिए कि गांधीवाद के हम हम प्रचारक हैं। गांधीवाद को हम जीना चाहते हैं। हम गांधीवादी हैं। लेकिन उस गांधीवाद को दफन करने के लिए सारी पुरजोर कोशिशें आप कर रहे हैं।
सही बात है। हम। तो ये महत्वपूर्ण बातें हैं दर्शकों और राजू सर मैं यही कह रहा था कि ऐसा नहीं है कि हमारे यहां पर मुद्दे नहीं बनते हैं। पंजाब के किसानों ने बता दिया कि अगर आप।
मैंने इसलिए बोला कि बाद में रोइए मत।
हां। सही बात है। नेपाल में जो हुआ उसके लिए मुझे बड़ा अफसोस है। जिस तरह से दौड़ा दौड़ा कर पीटा वित्त मंत्री को या पूर्व प्रधानमंत्री यानी केपी ओली केपी ओली का एक भाषण है। आपने देखा होगा मुझे केपी ओली को बोलते हैं रिजाइन करो। अरे केपी ओली को सत्ता से हटाना इतना आसान है क्या? मैं केपी ओली हूं। केपी ओली वही केपी ओली हेलीकॉप्टर को पकड़ कर भाग रहा है।
देखो जनता के सामने कोई शेर नहीं है।
हम। जनता जब तक आपको सहती है देखिए समंदर और जनता में एक समानता है।
हम। दोनों हो सके उतनी अपनी मर्यादा को नहीं छोड़ते।
हम। लेकिन अगर सुनामी आ जाती है तो सबको खा जाती है।
सही बात है।
हम। तो ऐसे मुद्दे तो हमारे यहां पर भी उठे। सीए एनआरसी उठा खलिस्तान बोल दिया गया किसानों को और लेकिन प्रधानमंत्री को वो जो नियम है।
नहीं मैं दूसरी बात बोलता हूं यहां खलिस्तान के बाद दो बार आपने जिक्र किया।
हां। नक्सलवाद का समर्थन किया तो आप देशद्रोही है। खलिस्तान का समर्थन किया तो आप देशद्रोही है एकदम बराबर है पाकिस्तान के बारे में नारे लगाए आप देशद्रोही है गाजा हमारा दोस्त राष्ट्र है उसका झंडा भी फहराए तो भी हम लोग जेल में डालते हैं बराबर।
तो हिंदू राष्ट्र बोलना भी देशद्रोह है।
सही बात है। सही बात है।
तो भागवत भी देशद्रोही है और मोदी भी देशद्रोही है।
ये बात मैं उम्मीद करता हूं कि कम से कम अ जो लोग न्यायालय में बैठे हुए हैं अगर वो सभी को एक तराजू में नाप रहे हैं तो ये जो बात की गई है बहुत महत्वपूर्ण बात है जो की गई है और इसे आप मानेंगे। लेकिन क्या हमारे यहां पर जो आंदोलन होते थे ऐसा नहीं है कि नहीं होते आए हैं। अह उसका जोेंस है वो 2011 से 14 के बाद खत्म हो चुका है। कम हो चुका है। इसलिए आंदोलन को ये आइसोलेट कर देते हैं। ये मैंने बार-बार देखा है।
क्योंकि हमने नेपाल का भी जिक्र किया। अब यहां पर जब मराठा आंदोलन हो रहा था तो मुंबईकर वर्सेस मराठा करते हुए दिखाया गया कि अरे वो स्टेशन पर सो रहे हैं। उन्हें बाकी जगह खराब कर रहे हैं। शहर को हाईजैक कर रहे हैं। जबकि मराठा जो आंदोलनकारी आए थे उनके लिए भी उतना ही शहर था।
नहीं, लेकिन बाद में अक्षय कुमार निरंजन हिरानंदानी ने मिलकर मुंबई को साफ भी तो किया। हां, वो दिखाने के लिए क्या, कितना... नहीं, दिखा नहीं यार, वो उनकी जेन्युइननेस देखी, कितनी, कितनी उसमें मेहनत थी, उनके चेहरे पे मायूसी थी और मुंबई की हर जगह का कचरा हटाने के लिए जो उनमें लगन है। वो तो अभी मुझे लगता है उनके फोन नंबर सार्वजनिक कर देना चाहिए। अगर आपके इधर कचरा है तो निरंजन निरानंदानी या अक्षय कुमार को फोन... बुलाइए।
हां, सही बात है। लेकिन ये जो अस वर्सेस देम कर दिया जाता है हर जगह पर। पंजाब में हुआ, अब यहां पर महाराष्ट्र में मराठा बनाम मुंबई के हिसाब से कर दिया गया। या फिर हमने सीएए एनआरसी में देखा कि कैसे उसे बताया गया कि केवल एक धर्म का यह मुद्दा है। या फिर पहलगाम में हमला होता है तो कश्मीरी कैसे भारत से अलग है। तो हर जगह पर सरकार छोड़कर बाकी जो गलती होती है, वो हर किसी की होती है। क्या यह बात जनता समझती है?
नेपाल में यही सारी चीजें होती थी और अचानक से एक दिन वो सोशल मीडिया हो सकता है, वो आखिरी एक चीज रहा होगा जिस वजह से ये पूरा जो नेपाल में पूरी चीजें हुई। सोशल मीडिया के लिए ही नहीं किया गया है। वो एक आखिरी कील थी जिसकी वजह से पूरा हिंसा भड़की या जो सारी चीजें वहां पर हुई। नहीं, ये वहां पर जाकर यहां की गोदी मीडिया ने ये फैलाने की कोशिश की कि सोशल मीडिया को बंदी बनाई गई इसलिए हुआ। तो वहां थप्पड़ मार दिया उनको और वापस भेज दिया और कहा तुम लोग उधर अपने देश में जाकर मोदी-मोदी के नारे लगाओ, यहां मत आओ।
सही बात है। तो खैर, आप जो पूछ रहे थे, आगे पूछ बताइए। तो वो जो आंदोलन है, ये तो यहां पर भी हो रहे थे, लेकिन क्या जनता समझ रही है कि कैसे हर एक आंदोलन को तोड़ा जाता है? कैसे हर बार जो बेचारा किसान अपने गांव से मांगों को लेकर आया है, तो कभी उसे नक्सलाइट बता दिया जाता है। कभी उसे किसी पार्टी से जोड़ दिया जाता है। और हर बार विक्टिम सरकार ही बन जाती है। अगर कोई एक कार्यकर्ता कहीं पर गाली देता है मोदी को, मां की गाली दी अगर किसी ने, तो ऐसा बोलते हैं कि मेरे मां को गाली दी है और मोदी की मां को गाली नहीं दिया था किसी ने। अगर दिया भी था। लेकिन हर जगह पर जो सरकार... और वो कार्यकर्ता बीजेपी का ही था और उसका कोई संबंध नहीं था। यह बस एक इशू बनाने के लिए। लेकिन यह जो थिएटिक्स है, मोदी और गैंग के। वो थिएटिक्स को जनता ऊब चुकी है और आपने ये पूछा कि लोगों में, लोग, लोगों के समझ में।
देखिए, रोज-रोज सुनामी भी नहीं आती। सुनामी तो एक ही बार आती है, सब धोकर ले जाती है। तो आपको ऐसा लगता होगा कि लोगों के समझ में नहीं आ रहा है। तो लोग फिर वही बात ना कि लोगों की समझ जो है, वो समंदर जैसी है। वो मर्यादा तोड़ने के लिए एक पॉइंट आता है। और जिस दिन वो मर्यादा तोड़ेगी, सारी मर्यादा तोड़ेगी। सही बात है।
अब जब आप और मैं बात कर रहे हैं सर, प्रधानमंत्री पहुंच चुके हैं और उनकी ओर से लिखा गया है, "मणिपुर इज अ वाइटल पिलर ऑफ इंडियास प्रोग्रेस" और फिर कई सारे जो लॉन्च हैं, उसकी बात करते हुए प्रधानमंत्री वहां पर भाषण दे रहे हैं। अब ये बातें प्रधानमंत्री को क्या 2 साल बाद याद आई कि मणिपुर इतना वाइटल है? अब कई हजार करोड़ के लेकर आए हैं। 2022 में चुनाव हुए थे। 2027 में चुनाव हो रहा है। तो ऐसा नहीं हो कि सवाल उठे, क्योंकि अब तक वह पहलगाम भी नहीं गए। तो जहां-जहां पर हमला होता है, वहां पर प्रधानमंत्री जाते नहीं है। दूसरे देश, विदेश जरूर घूमते हैं।
नहीं, नहीं, पहलगाम के तो आतंकवादी भी नहीं मिले। कहां मिले? वो सब झूठ-मूठ का सब चलता रहा। लेकिन आतंकवादी और यशवंत सिन्हा साहब ने तो बोल ही दिया था, कि कभी नहीं मिलेंगे, क्योंकि पुलवामा के भी नहीं मिले। ये दुश्मन कौन है हमारा? हमारे आतंकवादी हमारे देश में कौन आ रहे हैं? 2014 से। उनके नाम, पता, उनके चेहरे, ये सब हमको पता नहीं चल रहे हैं। और यह इतने बड़े देश को, इतने बड़े देश की एजेंसीज को अगर यह नहीं पता चल रहा है, तो या तो वो हमारे ही हैं, और या तो फिर पूरी तरह से देश एक स्टेट फेल्ड स्टेट है। दो ही विकल्प हैं।
सही बात है। अब आप... अब वहां जाकर प्रधानमंत्री ने जो आप कह रहे हैं कि बंदरबाट कर रहे हैं। कौन देखा यार? जंगल में मोर नाचा किसने देखा? मणिपुर में मैं जाकर कल प्रधानमंत्री बोले, 10,000 करोड़ का यह पैकेज, वो पैकेज। मैं बताता हूं। देखिए, देखिए, एक मिनट, एक मिनट। मैंने पैकेज की छोड़िए, वो डोलेरो सिटी किधर है? वो साउथ स्मार्क सिटीज किधर है? फिर सर, बुलेट ट्रेन किधर है? सर, ऐसी इतनी सारी चीजें। अब अटल सेतु के पहले जो गड्ढे हुए हैं, वो नेहरू ने किए हैं क्या? या राहुल गांधी वहां से चलकर गए, इसलिए गड्ढे हुए हैं? तो सर, मैं एक बात बताना चाहता हूं कि 10,000 करोड़, 2000 करोड़, 400 करोड़। यह तो सर, कल मध्य प्रदेश में भाजपा का कार्यकर्ता की गाड़ी में जितना ड्रग्स मिला है, उतने पैसे हैं। वो ड्रग्स की कीमत उतनी है। और मुद्रा पोर्ट पर तो ड्रग आते-जाते रहते हैं। तो ये पैसों का कोई वो नहीं है। ये बात करना, ये सब करना।
आप देखिए कि मणिपुर में, सबसे अहम चीज कौन सी जरूरी थी? एमथी और कंपैशन। आपको वो गांधी चाहिए जो दंगों की रात नौखाली में जाए ना कि आजादी के महोत्सव में शामिल हो। ये, ये सबसे अहम है नेता के लिए। ये जो पैकेज वाली बात है ना, वो व्यापारी की है। नेता की नहीं। और ये पैकेज इसलिए बोले जाते हैं, क्योंकि देने पड़े ही नहीं कभी। देखिए, ये इतने ठोस पैकेज हैं, कभी उठ नहीं पाएंगे। हम, यह थिएट्रिक्स मानते हैं इसे और। थिएट्रिक्स, यानी कल से मोदी की फोटो लगाकर एडवर्टाइजमेंट्स आएंगी। उसके सामने ये सारी रकम लिखी जाएगी।
कल तो ये भी बात आई थी कि कुछ कार्यक्रम करना चाहते थे, जहां पर प्रधानमंत्री का स्वागत किया जाएगा, तो वहां के लोकल्स ने कहा कि किस चीज के लिए स्वागत किया जाए, जिसके वजह से वो कार्यक्रम कैंसिल। लोकल्स ने एक गाना वीडियो किया है और वो फैलाया है। अगर आप दिखा सके तो आप थोड़ा सा दिखाइए उसको। मैं उसका लोगों को यह बता देता हूं, उसमें वही है कि एक छोटी सी बच्ची पूछ रही है कि प्रधानमंत्री, आप क्वीन एलिजाबेथ के मौत के बाद आप लंदन चले गए, यूके चले गए, आप देश भर, दुनिया भर घूमे। मेरी मां की मौत हुई। उस तरह से सैकड़ों लोग। दो लाइनें आप अगर दिखा सके आपके प्रोग्राम में तो बेहतर होगा। वो अगर कॉपीराइट नहीं लगेगा तो मैं बिल्कुल दिखाऊंगा। लेकिन उसका अर्थ जो है, वो मैं यही बता रहा हूं कि मेरी मम्मी की मौत हो गई, मणिपुर में। अगर ये देखिए, जनता की आवाज है, तो कॉपीराइट किस चीज का? ये टी सीरीज तो प्रस्तुत नहीं करेगा, क्योंकि टी सीरीज बंद हो जाएगा दूसरे दिन। अडानी टेकओवर करेगा टी सीरीज। अचानक ए सीरीज हो जाएगा वो। बिल्कुल, ये सीरीज ही, ये पूरा देश हो रहा है।
लेकिन सर, मैं ये पूछ रहा था कि ये जो थिएट्रिक्स है, इसे, इससे क्या ये जो पूरा मूल मुद्दा है, जो वहां पर लोग मैट्रीज और कुकीज में बट चुके हैं। वहां पर जो जमीन है, वो लोगों ने अपने-अपने हिसाब से बांट लिया है। आर्मी कहां पर रहेगी? वहां के लोकल्स तय करेंगे। तो ये प्रधानमंत्री की ओर से 7300 करोड़ के प्रोजेक्ट्स को लाना या 800 दिनों के बाद वहां पर जाना। क्या इससे ये जो मूल मुद्दे हैं, इस पर कोई असर पड़ेगा? सरकार उनकी है। केंद्र में वो हैं। राज्य में... उनके लोगों ने रेजिग्नेशन दे दिया है। बीजेपी के खुद जो चुन के आए हुए उम्मीदवार हैं, यानी प्रतिनिधि हैं, उन्होंने कल इस्तीफा दे दिया है। निषेध में। तो प्रधानमंत्री के जाने का कोई असर नहीं है, उनकी खुद की पार्टी पर। बाकी लोगों की तो दूर की बात है। एक बात दूसरी बात, प्रधानमंत्री की कोई सुनता नहीं है। अब।
देखिए, जबरदस्ती आप पुलिस बेच के या एनफोर्समेंट एजेंसीज बेच के किसी को जबरदस्ती जेल में डाल दो या लिखवा लो उससे या मारो उसको और करो, वो सब माफिया ट्रिक्स है। एक लोकतंत्र में जो प्रधानमंत्री पद की गरिमा, इज्जत होती है और उनका सुना जाता है, वो सब नहीं हो रहा है। आप समझिए कि आप, आप सोचिए, आप एक मणिपुरी आदमी हो। क्या इज्जत है आपकी प्रधानमंत्री के प्रति? आपके मन में क्या होगी? एक कश्मीरी हो आप? क्या इज्जत होगी? अरे, लद्दाख में देखिए, वो सोनम वांगचुक बोल रहे हैं कि झूठे बोले, अब वो फिर से वो वंचन पे बैठ गए। वो बोले कि हमें अलग राज्य देने वाले थे, झूठ बोले हमसे। क्या इज्जत है उनकी? कोई सुन नहीं रहा है। प्रधानमंत्री को कोई, देखिए, वो चुन के ही नहीं आए हैं। वोट, वोट चोर, गद्दी छोड़। यही एक लास्ट, अंतिम सत्य है इस देश का।
तो बात यह है कि ये सब ऊपरी जो सब सुपरफिशियल है ना, जैसे कि जिस मिठाई की दुकान 8 दिन के बाद बंद होनी है, उसके अंदर कोई हलवाई नहीं है, कोई हलवा बन नहीं रहा है। मिठाई बस बाहर कांच के पीछे बॉक्से रखे हैं। इससे लोगों को लग रहा है कि ये बड़ी मिठाई की दुकान है। ऐसा हालत है आज बीजेपी, आरएसएस और मोदी कार्टेल की।
बिल्कुल और दर्शकों, देखिए ये बातें हम क्यों कर रहे हैं? ये बातें इसलिए क्योंकि अगर हमारे देश के प्रधानमंत्री को 800 दिन लग जाए एक ऐसे राज्य में जाने के लिए जहां पर उनकी ही पार्टी सत्ता में थी और वह राज्य जल रहे थे। और यहां पर एक बात मैं कहना चाहूंगा, 800 दिन मणिपुर जाने के लिए प्रधानमंत्री ने इंतजार किया, लेकिन पहलगाम में 26 निर्दोष मारे गए, उनकी मौत का 800 दिन भी इंतजार नहीं किया पाकिस्तान के साथ मैच खेलने के लिए। सही बात है। ये जो दोगलापन है इनका। पाकिस्तान के प्रति, जो मैं हमेशा ये चाहता हूं कि भारत-पाकिस्तान दोस्त रहें। भारत, पाकिस्तान, चाइना, सारे, सारे देश दोस्त ही रहें। ज्यादातर उसी में सभी का फायदा है। लेकिन अगर आप पाकिस्तान को दुश्मन मानते हो, तो इसमें पता चलता है कि जहां आपको फायदा है, पैसा है, जिसमें अंबानी, अडानी, आईसीसी सब लगे हुए हैं, वहां पर आपको पाकिस्तान के साथ हाथ मिलाने में कोई शर्म नहीं है। उन 26 लोगों का खून सूखा भी नहीं है। और यहां मणिपुर के लोगों को 800 दिन खून बह रहा है, अभी भी तब आप वहां जाकर पैकेज डिक्लेअर कर रहे हो। आप पहलगाम के लोगों को क्या पैकेज डिक्लेअर किए? और ये पाकिस्तान और हिंदुस्तान के मैच किस-किस लिए खेली जा रही है? मुझे बताइए, इसकी नेसेसिटी क्या है? जैसे कि देश में बहुत अनाज हो जाएगा, ग्रीन रेवोल्यूशन हो जाएगी, वाइट रेवोल्यूशन हो जाएगी। एक जय शाह छोड़कर किसी के करियर को कुछ फर्क पड़ने वाला नहीं। उल्टा आप नहीं खेलते तो दुनिया भर में एक संदेश जाता कि भारत कितना सीरियस है इस मुद्दे को लेकर। आप अपने एमपीज को अलग-अलग देश में भेजते हो, जब आप तो ये तो सबसे बड़ा संदेश आप दे सकते थे। अब कोई सीरियसली क्यों लेगा?
मोदी के निर्बल और दुर्बल नेतृत्व की वजह से पूरे साउथ एशिया में पाकिस्तान भारत पर हावी हो चुका है। एसईओ में एंटी टेरर ग्रुप का हेड उसको बनाया गया। चाइना और पाकिस्तान अब अलग ही नहीं है। और रशिया भी अब पाकिस्तान के साथ जा रहा है, क्योंकि चाइना जा रहा है। ऑब्वियसली, लीड, चाइना लीड कर रहा है। ऐसी स्थिति में अमेरिका से रोज टेरिफ लग रहे हैं, और भी कई चीजें हो रही हैं। अडानी के ऊपर वो समंस जो है, अडानी तक पहुंचा नहीं, इसके लिए और सख्त हो रहा है अमेरिका। तो इस स्थिति में हमें पाकिस्तान भी एक भारी देश लगने लगा है, जो हमारे लिए कुछ भी नहीं था। आप विश्वास रखिए, अगर यही प्रधानमंत्री इस वोट चोरी से, इसी गद्दी पे रहे, तो एक साल में हम बांग्लादेश, मालदीव्स, भूटान से कम हो जाएगा। आज की तारीख में हमारी डॉलर और रुपी 88.33 हो गया। जब ₹ नहीं था तो मोदी जी कहते थे कि डॉलर नहीं बढ़ता है। डॉलर गिरता है तो प्रधानमंत्री की गरिमा गिरती है, साग गिरती है। रुपया गिरता है तो, रुपया, रुपया गिरता है तो, मैं शासन का तो।
यह सारी जो बड़बोलापन है, आरएसएस वालों का। अब मोहन भागवत बोल रहे हैं, "उनको पूछता कौन है? मैं पता नहीं, मुझे और सुनता भी कौन है?" लेकिन वो बोल रहे हैं। तो अब बोल रहे हैं, तो हमको भी मजे लेने के लिए क्या जाता है कि देश एक महाशक्ति बनने जा रहा था, इसलिए लोग टेरीफ लगा रहे हैं। अरे, कुछ भी मत बोलो यार। आप महाशक्ति यानी चा, आप पाकिस्तान को परास्त नहीं कर पाए। एक-एक ट्वीट डालकर आप अध्यक्ष, अमेरिका ने आपको चुप किया। और वहां पर पाकिस्तान के सामने आप, आप हाथ मिलाने के लिए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री को आगे हाथ करते हो, तो वो पीछे कर लेता है अपना हाथ। यह हालत है। कोई आपको पूछता नहीं है। और आप, आप ये इतनी दुर्बल और इतने निर्बल देश के नागरिक होने का एहसास मुझे इससे पहले कभी नहीं हुआ था। शायद जो एहसास मणिपुर के लोगों को हो रहा है, दर्शकों, वही एहसास इस देश में तमाम लोगों को हो रहा है। और इसलिए आज इस वीडियो के जरिए हमने कई सवाल पूछे। प्रधानमंत्री के इतनी देरी से हुए यात्रा पर सवाल पूछे।
एक ही सवाल अब बाकी है। मुझे अब मणिपुर खोदने के लिए अडानी कब जा रहा है? बिल्कुल, इस पर भी हमारी नजर बनी होगी कि इतनी देरी के बाद जब आए हैं, तो मणिपुर में जो कुछ हुआ, जो लोगों की मौतें हुई हैं, लोग डिस्प्लेस हुए हैं, महिलाओं को निर्वस्त्र सड़कों पर चढ़ाया गया और इसके बावजूद सरकार चुप रही। इसके पीछे का उद्देश्य क्या है? किसे फायदा होगा? कितने जमीन और जमीन के नीचे के मिनरल्स किसे दिए जाएंगे? यह तमाम चीजें हैं, जिसके बारे में हर एक देशवासी को चिंतित होनी चाहिए। और कम से कम यह काम राजू सर, इस पूरे इंटरव्यू के जरिए आपको बार-बार बताने की कोशिश कर रहे हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि आपको इसकी गंभीरता समझ में आई होगी। हमने इसके साथ ही साथ भारत के स्टैंड, देश के अंदर भी, देश के बाहर भी, नेपाल में जो कुछ हो रहा है, पहलगाम में जो कुछ हुआ और इसके बीच जो भारत-पाकिस्तान का मैच होने वाला है, इस पर भी चर्चा की है और एक व्यापक चर्चा रही है। और जो शुरुआत में कहा, वो याद रखिएगा। ये तमाम चीजें हम तब कर रहे हैं, जब सर की तबीयत भी ठीक नहीं है। कई दिनों से उनकी तबीयत खराब थी। उसके बावजूद अगर वह इन मुद्दों को रखते हैं आपके सामने, तो आप समझिए कि वो क्यों चाहते हैं कि आप गंभीरता से इन तमाम मुद्दों के बारे में सोचें। मैं उम्मीद करता हूं कि आपको ये बातें ना केवल समझ में आ रही होंगी, आपको इसके पीछे की गंभीरता भी समझ में आएगी और केवल जो एक तरीके से सोशल मीडिया पर या फिर गोदी मीडिया में एक जो ड्रामा चलता है या एक तरीके से जो थिएटरिक्स होते हैं, उसके आगे जाकर जो आप असली खबर है, उसे समझ पाएंगे।
राजू सर, बहुत-बहुत शुक्रिया। आप जुड़े, आपने बातचीत की है। एक गंभीर मुद्दे पर आपने जिस तरह से अपने मुद्दों को रखा है, मैं समझता हूं कि यह लोगों के लिए आंख खुलने वाला विषय है और लोग भी इसे गंभीरता से लेंगे। दर्शकों, आपको यह वीडियो कैसा लगा, जरूर बताइएगा। पसंद आया तो इसे लाइक करें। ज्यादा से ज्यादा लोगों तक हो सके, जितने ज्यादा लोगों तक आप इसे साझा कर सकते हैं, वो करें। इतने क्रिस्टल क्लियर शब्दों में शायद ही और कोई बात कर सकता है, जितने क्रिस्टल क्लियर शब्दों में यहां पर इन तमाम मुद्दों पर बात की गई है। साथ ही साथ, अगर आपने अब तक इस चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है, तो वो भी कर लें। हम इस तरह के वीडियोस लगातार आगे भी करते आएंगे। राहुल सर, फिलहाल के लिए आप आराम कीजिए। आपको बहुत-बहुत शुक्रिया और हम जल्दी अलग एक नए वीडियो के साथ आएंगे, जहां पर आपसे इन्हीं तरह से, इसी आपके जो स्टाइल है, उसमें उन तमाम मुद्दों पर हम बात करेंगे। फिलहाल, आप दीजिए इजाजत, नमस्कार।