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जूम की लिंक तो वही है ना? जूम की वही लिंक है ना? पास क्याल ठीक हो गया? सलाम अला रसूला। अमा बाद।
तफसीर का हमारा यह दूसरा सब्जेक्ट है और टाइम बहुत ही शॉर्ट है आज। अगरचे मैंने और डॉक्टर नबील ने आधे-आधे घंटे की अपनी क्लास लेनी थी, लेकिन लगता है कि हम में से एक को आज क्लास कम मिलेगी। फिर भी कोशिश करेंगे दोनों क्लासेस आपके साथ हो जाए, इंशाल्लाह।
यह बताइए कि मैं जरा सवाल पिछले हवाले से पूछूँ। जी, तफसीर क्यों जरूरी है कुरआने मजीद की? थोड़ा सा जल्दी-जल्दी रिवाइज करके फिर आज आगे चलते हैं। कौन बता सकता है तफसीर सीखना कुरान मजीद की क्यों जरूरी है? जी, जी बता दीजिए। ठीक है, समझना, अमल करना और आगे फैलाने के लिए। मुझे यह बताइए कि कुरान का क्या मतलब है? नहीं नहीं, अभी कोई और बताए। बार-बार पढ़ी जाने वाली किताब। ठीक है। यह बताइए कि कुरान हम पर कितने हुकूक है? पाँच हुकूक हैं। ठीक है, नमाज के साथ इसको अटैच कर ले, सिंपल हो जाएगा। कितनी नमाज है? पाँच। भी कुरान के पाँच हैं। कौन-कौन से? एक-एक करके चलें। पहले आप बताइए, तरतीब से। तरतीब से चलते हैं, वैसे सही है। ईमान लाना। ईमान क्या लाना? कुरान पर अल्लाह की तरफ से वही किताब है। इसमें जो अकामा है अल्लाह ताला की तरफ से, इसमें कोई तब्दीली नहीं हो सकती। दूसरा हक क्या है? तिलावत करना, उसका इल्म हासिल करना, उसको समझना और यह ठीक है, फहम समझना उसका। यह जो आप कर रहे हैं ना, यह तीसरा हक उसका इस तरह अदा करें, तफसीर को प्रॉपर समझकर। अच्छा, चौथा? जी, शाबान स्किप कर दिया आपने। आपने तीसरा, पाँचवाँ बता दिया। दो बताइए। अमल करना। ठीक है। अच्छा, पाँचवाँ? आगे उसका पैगाम पहुँचाना। ठीक, आगे उसकी दावत देना। तफसीर का क्विज किस-किस ने कर लिया? बाकी भी कर लें। ठीक है। यह जो मैं आपको बता रहा हूँ ना, यही सवाल है, तकरीबन तो मैंने आपको आंसर अभी बता दिए। बहुत आसान क्विज है, सिंपल क्विज है, तफसीर का भी, फिकह का भी और अकीदा का भी। फौरन उसको आज ही जाकर हल कर लें, जिन्होंने नहीं किया।
अच्छा, आगे हम आज शुरू करेंगे सूरत फातिहा की। तो सबसे पहले सूरत फातिहा की इंशाल्लाह तिलावत आपके सामने रखते हैं और फिर बल्कि सर फातिहा के हवाले से चंद चीजें आपके सामने होंगी। कु अऊज़ु बिल्लाहि मिन शैतानिर्रजीम [संगीत] अलहम्दुलिल्लाहि रब्बिल आलमीन, अर्रहमानिर्रहीम, मालिकि यौमिद्दीन, इय्याक अनाबुदु व इय्याक अस्ताईन [संगीत] [संगीत] जकला र... यह जो सूरत अभी आप सुन रहे थे, सरल फातिहा थी। इसका जरा आपके सामने तर्जुमा पेश कर लेते हैं। अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन, इसका क्या मतलब है? बल्कि शुरू से करते हैं। बिल्लाहि मिन शैतानिर्रजीम, उसका क्या मतलब है? तर्जुमा क्या है? मैं पनाह पकड़ता हूँ, मांगता हूँ, किसकी? अल्लाह ताला की। किससे? मिन शैतानिर्रजीम, शैतान से, जो रजीम है, मर्दूद है। फिर है बिस्मिल्लाह, इसका मतलब अल्लाह के नाम से। अर्रहमानिर्रहीम, जो बड़ा ही मेहरबान और बहुत रहम करने वाला है। यहाँ तक आज इसका तर्जुमा आपके सामने रखते हैं। बाकी इंशाल्लाह हम अगली क्लास में लेंगे।
अच्छा, सूरतुल फातिहा जो है, यह कुरान मजीद की बहुत ही अजीम सूरत है। इसका जो नाम है, वह क्या है? फातिहा। लेकिन क्या इसका यही नाम है? इस सूरत के और बहुत सारे नाम हैं। लेकिन जो फातिहा नाम है, इससे आपको क्या माना मिलता है? फातिहा का क्या मतलब है? कौन बता सकता है? फातिहा जो है, यह लफ्ज़ निकला है फतह से। फतह आपने कभी अरबी में वर्ड सुना होगा, इफ्ताह अल बाब, क्या मतलब? दरवाज़ा खोलो। तो इसको फातिहा इसलिए कहते हैं क्योंकि यह क्या करती है? कुरआने मजीद का आगाज़ यहाँ से होता है। इसके आगे पूरा का पूरा कुरान खुलता है। और इतनी अजीम सूरत है कि बाज़ उलमा कहते हैं कि पूरे कुरान मजीद का जो खुलासा है, जो समरी है, वह कौन सी सूरत है? वही सूरत फातिहा है। इसको नोट कर लें आप। ठीक है। पूरे कुरआने मजीद का जो खुलासा है, जो समरी है, वह सूरतुल फातिहा है। क्यों? इसमें आपको अल्लाह ताला की तारीफ़ सुनने को मिलेगी। इसमें आपको क़यामत के बारे में कुछ सुनने को, सीखने को, समझने को मिलेगा। इसमें आपको इबादत के हवाले से पता चलेगा। इसमें आपको यह पता चलेगा कि अल्लाह ने आपको दुनिया में भेजा क्यों है। फिर इसमें आपको यह पता चलेगा, जन्नत में जाने वाले कौन लोग हैं। आपको यह पता चलेगा, जो लोग जन्नत के रास्ते को छोड़कर जहन्नुम के रास्ते पर चल रहे हैं, वह कौन लोग हैं और क्या वजह थी कि वह जहन्नुम की तरफ़ जा रहे हैं। नेक लोग कौन होते हैं? बुरे लोग कौन होते हैं? नेक लोगों का अंजाम क्या होता है? और बुरे लोग कहाँ खत्म होते हैं? यानी हर चीज जो कुरान मजीद में अल्लाह ताला ने चीजें बताई हैं, उस सबका खुलासा आपको सूरत फातिहा में मिलेगा। सरल फातिहा का खुलासा कौन सी आयत है? कौन मुझे बता सकता है? जी हाँ, माशाल्लाह। उलमा कहते हैं, सूरत फातिहा जो है, यह पूरे कुरआने मजीद का खुलासा है। लेकिन सरल फातिहा का भी खुलासा है, उसकी भी समरी है और वह एक आयत में है: इय्याक अनाबुदु व इय्याक अस्ताईन। तो इससे आपको अंदाजा होता है कि कितनी अजीम सूरत है। और इंशाल्लाह इसको हम तफ़सील से आगे आएंगे कि यह क्यों सरल फातिहा का खुलासा है, आयत।
अच्छा, सूरतुल फातिहा की फज़ीलत के हवाले से हम आपको बता दें, क्योंकि हर सूरत की ना आप देखेंगे, कुरान मजीद में बहुत सारी सूरतें हैं। कई सूरतों की फज़ीलतें हैं और कुछ सूरतों की फज़ीलत वाकई सुन्नत से साबित है, हदीस से साबित है और कुछ सूरतें ऐसी हैं जिनकी फज़ीलत लोगों ने खुद बना दी है। वह नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से साबित नहीं है, सहाबा किराम रज़िअल्लाहु अन्हु से साबित नहीं है। लेकिन लोगों ने खुद से बना दी कि जी इस सूरत की यह फज़ीलत है। इसकी कोई मिसाल मुझे दे सकते हैं? और हमारे यहाँ बाज़ ऐसी फज़ीलतें जो बिल्कुल आम हैं, लोगों के यहाँ आम हैं, जबकि वह हकीकत से दूर हैं। जी, माशाल्लाह। सूरत यासीन के बारे में आपने कुछ सुना होगा? क्या सुना है? कुरान मजीद का दिल है। सूरत रहमान के बारे में भी सुना होगा? क्या है वो? कुरान की दुल्हन है। किसी हदीस से जब ऐसा साबित नहीं है, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने किसी हदीस में से इसका ज़िक्र ही नहीं किया। यह लोगों ने बाद में खुद से गढ़ना शुरू किया, खुद से एक बात बना दी और आम लोगों में जो है यह बिल्कुल आम होने लग गई। तो इसलिए सूरतों में आपको जानना बहुत जरूरी है कि किस सूरत की फज़ीलत साबित है, कुरान मजीद में मौजूद है, हदीस में है और किस सूरत की नहीं है। अच्छा, फज़ीलत का मतलब क्या है? कौन बता सकता है? फज़ीलत का मतलब अफ़ज़लियत। अफ़ज़लियत का मतलब बड़ापन। अच्छा, और इंग्लिश में इसका क्या मीनिंग है? फज़ीलत का? बेनिफ़िट। चलिए थोड़ा सा और करीब जाते हैं। एडवांटेजेस। और एक टेक्निकल टर्म है इंग्लिश में। नहीं, कंपेरिज़न नहीं। वर्च्यू का वर्ड ना कभी आपने वर्च्यू, बेनिफ़िट, उसमें आ जाता है, एडवांटेज उसमें आ जाता है। सूरत के क्या-क्या फ़ायदे? ठीक है। अब आपको क्योंकि टाइम कम है, हम सिर्फ़ आज सूरत के बारे में कुछ फ़ायदे बताएँगे। फ़ायदा आप इसका सुन लीजिए। पहली बात के फ़ज़ीलत सुन लीजिए। हदीस में आता है कि एक मर्तबा अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बैठे हुए थे, जिब्रील अलैहि सलाम आए और अचानक आसमान से जो है ना, जोरदार आवाज़ आई, जोर से आवाज़ आई आसमान से। जिब्रील अलैहि सलाम अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को बताते हैं कि यह आवाज़ आपको पता है किस चीज़ की है? आज आसमान से एक ऐसा दरवाज़ा खोला है जो इससे पहले कभी नहीं खुला था। फिर उस दरवाज़े से एक ऐसा फ़रिश्ता निकला है, नाज़िल हुआ है, जो आज से पहले वह फ़रिश्ता कभी भी नाज़िल नहीं हुआ, उस दरवाज़े को गुज़र के वह नीचे कभी नहीं आया। वह फ़रिश्ता आता है, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आता है और खुशखबरी देता है, बशारत देता है, दो नूर की कि मैं आपके पास यह दो नूर लेकर आ रहा हूँ। उसमें से एक नूर कौन सी होती है? सूरत फातिहा। और दूसरी नूर कौन बता सकता है? जी जी, अब्दुल माशाल्लाह, सरल बकरा की आखिरी दो आयतें। यह दो नूर हैं जो वह फ़रिश्ता कहता है कि अल्लाह ताला ने आपको दिए हैं। तो इससे आपको अंदाजा होता है कि सूरत फातिहा कितनी इसकी फ़ज़ीलत है कि इसके लिए ख़ास तरीके से एक फ़रिश्ता नाज़िल हुआ। इसी तरह इस सूरत के बारे में आता है कि एक मर्तबा सहाबा किराम रज़िअल्लाहु अन्हु एक बस्ती, एक जगह से गुज़र रहे थे तो एक बस्ती से ना, एक जगह से उनका गुज़रना हुआ। वहाँ पर एक बंदा चिल्ला रहा है, जोर-जोर से चिल्ला रहा है, जैसे उसको किसी चीज़ ने डस दिया, किसी नुकसान देने वाले जानवर ने डसा, उसको जो है नुकसान दिया। बाज़ कहते हैं वो बिच्छू है, बाज़ उलमा, बाज़ रिवायत में आता है कि वो कोई नुकसान देने वाला जानवर था। अब यह लोग जो बस्ती वाले थे ना, ये काफ़िर थे, लेकिन इनको पता था कि मुसलमान जो हैं यह कुछ दम करके पढ़ते हैं तो क्या होता है? शिफ़ा मिल जाती है। अब यह काफ़िर लोग आते हैं सहाबा किराम के पास और आकर कहते हैं कि इस तरह हमारे पास एक बंदा है उसको जो है वो चिल्ला रहा है, इस वक़्त तकलीफ़ में है तो उस पर आप अपना कोई दम कर दें। अब वह सहाबी क्या करते हैं? वह जाते हैं जहाँ पर उसको तकलीफ़ होती है, उधर हाथ रख के कौन सी सूरत पढ़ते हैं? सूरत फातिहा पढ़ते हैं। जैसे ही सूरत फातिहा पढ़ लेते हैं, वह बंदा ऐसा ख़ामोश होता है, उसको ऐसा सुकून मिलता है और ऐसा महसूस होता है उसको कि जैसे मुझे किसी चीज़ ने नुकसान नहीं दिया था कभी। अब सहाबा किराम रज़िअल्लाहु अन्हु को यह बस्ती वाले जो हैं, इस वजह से बकरियाँ देते हैं, तोहफ़े में बकरियाँ दे देते हैं। सहाबा किराम ने दम कर दिया, वो बंदे को शिफ़ा मिल गई। हालाँकि मुसलमान है या काफ़िर, वो काफ़िर था जिस पर दम किया, बकरियाँ भी मिल गईं। अब सहाबा किराम को शक हुआ कि बकरियाँ जो हमने ले ली हैं, ठीक है या नहीं? तो यह बकरियों के साथ आते हैं और यह पूरा मामला नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को बताते हैं कि इस तरह एक वाक़या पेश आया, एक शख़्स तकलीफ़ में था तो उस पर दम करने के लिए हमने सूरतुल फातिहा पढ़ी और उसके बाद सवाल यह है कि हमने जो बकरे लिए हैं, जायज़ हैं या नहीं? कौन मुझे बता सकता है अगर किसी ने हदीस सुनी है कि अल्लाह के रसूल ने क्या जवाब दिया? जी, चलिए, एक जवाब आ गया। नहीं, आपको आता है? नहीं, आप भी नहीं? क्या जवाब दिया था? माशाल्लाह, मुख्तलिफ़ रिवायतें आती हैं। पहली रिवायत आती है, अल्लाह के रसूल ने सहाबी को कहा, मुझे बताओ तुम्हें कैसे पता था कि सूरतुल फातिहा जो है वो दम के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं, इसमें शिफ़ा है, यह रु़क़िया के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। और साथ ही कहा कि यह बकरियों में मेरा हिस्सा किधर है? क्योंकि किसने सिखाई? सूरत फातिहा किसने सिखाई है? अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सिखाई है ना, आगे तो आपने कहा मेरा हिस्सा कहाँ है? इससे अंदाजा क्या हुआ कि सूरत फातिहा जो है वो दम के लिए इस्तेमाल की जा सकती है, बल्कि करनी चाहिए और सबसे बेहतर यह है कि अगर कभी आपको बीमारी हो तो खुद फातिहा पढ़ के उस पर दम करें। ठीक है। इंशाल्लाह तो यह सूरत फातिहा की चंद फज़ीलतें। बाकी जो दूसरा टॉपिक है, वह हम इंशाल्लाह इसका अगले जुमे लेंगे। आज वक़्त की किल्लत की वजह से। और यह होगा कि सूरत फातिहा के कितने-कितने नाम हैं? पढ़ के आइएगा ताकि आपको सवाल का जवाब पहले से पता हो। ठीक है? तो आज का हम इसी के साथ ख़त्म करते हैं आज की क्लास और अभी इंशाल्लाह बाकी जो टाइम रहेगा वो हम तीसरी क्लास अकीदा की लेंगे। बकला वाज़ है। यह चीज़ कोई मुश्किल तो नहीं थी? आज हर चीज़ क्लियर हो गई है ना? जी।