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16 December 2025

Kishore Kunal2:39

Transcription

रहिएगा। मेरा सवाल है किशोर कुणाल जी से। मैं सीधा सवाल करूंगी बिना लाग लपेट के। इस देश में हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई कोई भी महिला है वो क्या पहनेगी? क्या नहीं पहनेगी? घूंघट करेगी, चेहरा छिपाएगी या नहीं छिपाएगी? क्या आजकल राजनेता तय करने लगे हैं क्या?

बिल्कुल नहीं। लेकिन ये होता है अपने घर में निजी स्थान पे निजी घर में निजी कस्टम में। जब आप सरकारी कस्टम का हिस्सा होते हैं, जब आप सरकारी स्थल पे होते हैं तो सरकार का एक डेकोरम होता है। अब आप बताएं कि क्या कोई पुलिस में महिला हो, पुलिस इंस्पेक्टर हो चाहे वो हिंदू हो या मुस्लिम हो अगर वो घूंघट में चली जाए या हिजाब में चली जाए या नकार में चली जाए तो क्या लॉ एंड ऑर्डर को मेंटेन किया?

इस तरह की बातें आप एक मिनट, एक मिनट। मुझे आपने कहा आपने कहा घूंघट पहनना है या हिजाब पहनना है यह अपने निजी कार्यक्रम में या घर में आप पहन सकते हैं सार्वजनिक मंच पर नहीं। ठीक है। आप मुझे यह बताइएगा सरकार की तरफ से बहुत सी योजनाएं चलती हैं जिसमें लाभार्थी जो महिलाएं होती हैं गांव देहात की वो अक्सर सर पर पल्लू रख के या घूंघट करके मंच पर पहुंचती हैं। लाभार्थी होती हैं और योजना का लाभ लेते हुए कई फोटोग्राफ्स खींचते हैं। ऐसी कई वीडियोस आपने भी देखी होंगी। फोटो आती उनका भी घूंघट हटना चाहिए क्या?

नहीं नहीं, लाभार्थी का होना और एक सरकारी कर्मचारी का होना आपने कहा करते हैं तो नहीं। आप अगर इस तरह से अगर इस तरह से इंप करेंगे तो फिर अपनी बात कंप्लीट नहीं कर पाएंगे। अच्छा मतलब मेरे मन में आ रहा है ना और सरकारी कर्मचारी में अंतर नहीं पूछिए ना आप मेरी बात को कंप्लीट होने दीजिए। आप पूछिए 100 से पूछिए डेढ़ घंटे मैं बैठा रहूंगा आपके साथ बात तो बात यहां पर जो लॉजिक दिया यहां जो वाली महिला है उसके पीछे लॉजिक आपने यह दिया कि वह महिला जो है जो नियुक्ति पत्र लेने आई है वह ठीक है या नहीं चेहरा उन्हें पहचानना या उसकी पहचान सुनिश्चित करना तो हिजाब खींच दिया एक पिता की तरह खींच दिया। ऐसे ही अगर कोई लाभार्थी महिला आ रही है वो उससे रिलेटेड है या नहीं या कोई गलत महिला तो घूंघट में नहीं आई है ये कैसे सुनिश्चित होगा फिर उनका भी घूंघटना?

ये आपका ये ये आपका इनेशन है। हमारा सिंपल मानना है और हमारी पार्टी का माना है कि महिला आज हमारे प्रदेश में एक समृद्धि और संवर्धन का सिंबल है। उस सिंबल को देखना चाहिए। लोग देखें और जाने कि ये महिला है जिसने पढ़ाई की और आज डॉक्टर के तौर पे अपनी सेवा देने जा रही है। दूसरी बात इस बात को लगातार बढ़ाया जा रहा है कि भाई खींच दिया खींचा नहीं। उसको हराया गया है ताकि उनका फोटो फ्रेम में आ सके और प्रदेश की महिलाएं या