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एक लड़की थी अफसा। दो घर छोड़कर रहती थी। 22-23 साल की थी बस। खुदकुशी की है उसने। तोमत लगाई थी उस पर। वो ताल लगाया था। वैसे ही जैसे मुझ पर लगाया गया था।
उसके मंगेतर ने भी उस पर यकीन नहीं किया। वो चीखती रही, चिल्लाती रही। अपनी बेगुनाही का यकीन दिलाती रही। फिर लोगों की नजरों में गिर कर जिंदा रहकर थक गई। चली गई।
तुम्हें शर्म नहीं आती है? >> क्यों करते हैं ऐसा लोग? हां। किसी को सफाई का मौका ही नहीं देते। इतने लोगों के सामने रुसवा किया ना तुमने मुझे। अब ये रुसवाई तुम्हारी बेटियों का मुकद्दर बनेगी। जब दिल में शक का बीज उभरता है तो लफ्जों के तानों के खंजर सामने वाले के दिल पे खूब जलाते हैं आप।