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VCD 2417

ADHYATMIK VIDYALAYA OR AIVV2:52:20

Transcription

झाल झाल झाल झाल झाल झाल झाल झाल झाल झाल झाल झाल झाल झाल झाल झाल झाल झाल झाल झाल झाल झाल झाल कि प्राकृत इलाज चल रहा था 31 90 1967 अ शुक्रवार को कि पांचवें के पेज के मध्य में की बात चल रही थी हुआ है

ब्रह्मा बाबा कहते हैं मैंने बहुत गुरु कीजिए कि कोई भी साधु संत महात्मा ने नहीं बताया हैं कि आत्मा क्या है ए क्या चीज से बनती है

नहीं सुनाया है कि परमपिता परमात्मा क्या है ए किसकी किसकी बात पूछें मैं परम पिता कि परमात्मा क्या है दो शब्द बोले ए परम पिता और पर मात्र दो कि दोनों की बात नहीं बताई थी

न परमपिता बताया ना परमात्मा बताया नहीं यह बताया कि परमपिता क्यों पहले कहते हैं

और परमात्मा बाद में क्यों कहते हैं

ऐसे क्यों नहीं कहती परम आत्मा परम पिता ऋषि कहते हैं शिव शंकर क्यों क्यों नहीं कैसे शंकर शिव 12 नाम है 6 बटन करें दोनों का नाम साथ लेते हैं

परंतु विश्व मानव कल्याणकारी शंकर माने बिना शिकारी संक्रांति संघार करता है

मैं तो काम तो दोनों के अलग-अलग हैं नाम भी तो अलग अलग होने चाहिए दोनों को मिलाकर क्यों कर दिया तो कोई बात नहीं बताते कि ऐसे नहीं कि सिर्फ कोई परमात्मा को नहीं जानते कि नहीं कि आत्मा को भी नहीं जानते कि आत्मा हुए दें यहां पर अंपायर सुधारिए आत्मा कौन है हीर व रंगमंच पर कौन है

वह भी नहीं जानते और जो सामान्य पाटीदार है आत्माएं हैं

वह क्या है [संगीत] मैं यह भी नहीं जानते हैं

अगर आत्मा को जान देने में जान जा रहे हैं तो परमात्मा को भी फट से जानकारी दी है क्योंकि आत्मा शब्द से पहले क्या लगा है ए परम यहां पर मैंने बड़े परेशान पर कि नीतीश स्टेज पर कोई पहुंची ना सके

ऐसा परिचय पर पधारे हैं

अगर आत्मा को जान गया है तो परमात्मा कोई फट जाने से हैं

परंतु ना आत्मा को जानते ना परमात्मा को जानते

कि दुनिया में भी कोई बच्चा है पंत को जान गए कि मैं कौन से वंश का हूं

किस की औलाद हूं

तो बाप को भी जानी है कि बच्चा जान है क्या ना क्यों आया कहां से फोन

कहां से निकला हुआ है [संगीत]

रे

कोई भी बच्चा होता है संसार में

तो अपन को जान गए है कि मैं कहां से आ जाए हूं तू क्या बताएगा

कहां से आया था

कर दो

अरे दुनिया भी बच्चा और सुनाओ

अपने मां-बाप से आया है

दोनों में से किस से पहले आया से पहले आप आया है

मैं दोनों से इकट्ठा आया है

अगर मां से आया कहते हैं तो मां ने भी पहले किसी से आया कि नहीं आया बात यौ

जाऊंगा मैं

तो मूल तो बाप हुआ ना

बाप ने बीज वाला का मान है संभाला उस वीडियो को मैं मां हूं धरती माता कही जाती है

कि ग्रहण नहीं मापा धारण करने वाली माता के बीजों को धारण किया ना

बात तो अपने बंदर है जिंदगी भर धारण करके नहीं रख सकता कोई ऐसा बाप है जो अपने वीडियो को अपने अंदर के बीजों को जिंदगी और धारण करके रखें न कि

अगर जबरदस्ती भी अपने ऊपर करें

कि मैं जीना बड़ा में करूंगा कि जीवन ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करूंगा मैं

तो हो सकता है

वह भी यह इतना पावरफुल होता है कि वह अपने अंदर करके रखी नहीं सकता है [संगीत]

आप घर बैठे महापापी बन जाएगा

तो कौन धारण करती है माता और कुछ चाहिए ना दाम बढ़ाने के लिए माता या करना चाहिए तो वह माता कन्या रूपी धरणी में इस बीच बोल देता है

अगर बच्चा यह जान जाए है कि यह मेरी माता है और वह मेरा पिता है

पिता ने वीर्य हुआ था और मां का निर्माण किया है

तो

दोनों को जाएगा ना

एग्री विद

क्या है वेद में भी

अगर आत्मा जान जाए क्या है

कि मुझे किसी ने जन्म दिया कुछ कहेगा माता ने जन्म दिया है

कहां से निकला माता से निकले हैं

तो मनुष्य सृष्टि में विचार करना चाहिए कि आत्माएं हैं जितने भी बच्चे हैं इससे मनुष्य रूपी रंगमंच पर है जिसे कहा जाता है वसुधैव कुटुंबकम की सारी वसुधा

एक कुटुंब वह एक परिवार है तो परिवार को पालने वाली ओ मदर

तो आत्मा अगर बन जाए कि मनुष्यों के परिवार को पालने वाली कोई माता थी

फिफ्टीन रूप में है

वह बापू को भी जाएगा कि मनुष्य मात्र की आत्मा इस व्यक्ति पर यह जान पाई है कि हम हाथ समाज रूपी बच्चे मनुष्यात्माएं इस शक्ति पर कहां से आए थे

में से किसी की याद में

आखिर किसी ने तो शुरुआत योगी जी का पहला मनुष्य सच्ची में कोई बच्चा पैदा हुआ होगा कि नहीं हुआ होगा है

मैं तुझे पहला मनुष्य सेक्सी में बच्चा हुआ था आज का बच्चा उससे इतना तो जानते हैं धर्मपिता है

को मुसलमान कहते हैं आदम

अंग्रेजी में कहते हैं डम को हिंदू कहते हैं आदि देव

जेनी लोग कैसे आदिनाथ इतना नाम जानते हैं

और फिर काम नहीं जानते है कि वह जो आदमी था आ

मनुष्य से चिपका 201

बूंद भी झाल बाप था भी कोई पाप कहां जाता है

यह को यह आत्म ने नहीं जाना बड़े-बड़े धर्मपिता में हुए ग्रेट फादर कहीं जाने वाले थे

बेसिक प्राइस

दुनिया के मनुष्यों की अवधि 500 करोड़ है उसमें से आधी आबादी लगभग किस चल सकी है

वह अपना धर्म पिता क्राइस्ट से को तो मानते हैं

128 चलिए मानता था मैडम को

नितिन वह मैडम सारी मनुष्य से चिपका बीजरूप था यह कोई न कोई नहीं अच्छा वह अगर बीजरूप बाप था तो उसने बीजों को कहां हो या इस बीच के लिए तो धरने रूप धारण करने वाली माता कार्य के बीज के धारण करने वाली माता ही नहीं होगी तो बीच पैदा होगा कि हैप्पी पैदा नहीं होगा

तो कोई नहीं जाना है

कि जो मनुष्य सेक्स रूपी नंबरवार बच्चे हैं पोषक तिरुपति रंगमंच पर हाय कहां से हो

अरुण बच्चों में यो यो बी पहला बच्चा होगा कि वह निकला कहां से हो

है

जहां से निकला कि वह गरिमा मुसलमान है जिसने बीच डाला भोग्या बक

तो इसलिए बाप को आना पड़ता है बताने के लिए

कौन सी बात को घटनाक्रमों के बाप को

कि आत्माओं के बाप एक बेहद उम्दा है आधुनिक बेहद का बाप बेहद आत्माएं हैं उन्हें बेहद आत्माओं का रूप है

वॉइस छुट्टी पर आ करके बताता है क्या बताता है कि ऐसे तो लिखा हुआ है इस लुक आम विजय प्रदत पिता

क्या मैं बीज बोने वाला बीज डालने वाला पिता हूं

लेकिन अर्थ करने वालों ने जाना ही नहीं

टीका एडिट की देर कर दी यह किसी ने नहीं जाना कि वह कौन सा बीच है होता है कौन सा बीच डालता है इतना भी जानते थे

कि मनुष्य सेक्सी हुए दो जो पहले उन्हें ब्रह्मा के द्वारा ब्रह्म ने ही उस मनुष्य शेट्टी में जिन पहले चार बच्चों को उत्पन्न किया वह मानसी क्षीण

इतना भी शास्त्रों में लिखा हुआ है मनुष्य हैं लेकिन फिर यही नहीं जान पाए थे

कि जो ब्रह्म जिसका अर्थ होता है ब्रह्मा ने बड़ी मां

वह बड़ी मां

मैं बीज किसने डाला हैं

तो यह बताने के लिए आपको आना पड़ता है

पहले-पहले रियलाइज कराते हैं आत्मा को

क्या है क्योंकि दुनिया में कोई से भी पूछो मनोस्थिति

तुम क्या वह कौन हो तो कोई जवाब देता है हम पुरुष हैं कोई कहता है हम इस्त्री हैं कोई कहता हम डॉक्टर हैं कोई कहता है हम मास्टर हैं कोई कहता हम भिखारी हैं उनसे पूछो जब तुम पैदा हुए थे तब तुम क्या ठीक है

क्या मास्टर है डॉक्टर भिखारी है कि नहीं है

तो फिर तुम क्या हो

वास्तव में तुम क्या हो यह तो सब चक्कर में पड़ जाते हैं

तो बाप बताते हैं हां तुम तो अपने देश है

बात बताते हो कि हम डॉक्टर हैं हमर राजा हैं हम भिखारी हैं देश से जो कर्म करते हो वह कर्म का नाम बता देते हो क्रॉस करने वाले का नाम यह नहीं बताते तुम आंख फिर कौन हो

वास्तव में तुम आत्मा हो

जब पैदा हुए थे तब भी तुम आत्मा मेह और अभी भी तुम आत्मा हो ऐसे नहीं जब तुम बैठ शब्द पैदा हुए थे तब तुम शुरू मेह फिर बढ़े हुए किशोर हो गए फिर और बड़े होंगे इन नौजवान हो गए फिर और बड़े हो गए वृद्ध हो गई हर कोई बदलते रहते हो नहीं यह तो तुम्हारा शरीर बदलता बदलती है

तुम बदलते नहीं हो तुम तो मैं सदा कालात्मा थे और आज भी आत्मा हो तो पहले-पहले यह बात लिए इलाज कराते हैं कि वास्तव में तुम क्या रियल

आत्मा का पहचान देते हैं तो जो आत्मा को रीयलाईज करते हो कि वह आत्मा साथ यौन इन बाप के बगैर कौन कराएगा

क्यों क्या हुआ की वापसी

किधर है

आत्मा का में आत्मा रूपी बच्चों का रियलाइजेशन कोई नहीं करा सकता तो बाप कहते हैं मैं अभी तुम तो समझते हो ना कि बच्चे से पूछा तुम क्या जानती हो आत्मा क्या है कहां रहती है

क्या होती है और तुम बताओ कैसी हो

आत्मा ऑफर लाना है तू मने आत्मा एक ज्योति बिंदु है स्टार मिशन है कि आपका मां

मैं मन बुद्धि की शक्ति हैं कुछ मन बुद्धि रूपी ज्योति बिंदु आत्मा में अनेक जन्मों के संस्कार भरे हुए हैं

यह आत्मा वृक्षों की के मध्य में रहती है

तारे दी है जो है वह पूरी कुछ

कैसी कटी एक बड़ी यह पूरी कोठी में रहती है

जहां रहती है आत्मा

वहां उसको ढूंढ लेंगे

तो जल्दी मिलेगी ना

मना इस शरीर में उसके रहने का स्थान कहां है बहुत बड़ी पूरी छुट्टी है

शरीर में कहीं भी गोली मारो इंदिरा गांधी को छाती में 27 गोलियां दाग दी थी

लोगों को लगा कि जिंदा है और हॉस्पिटल हॉस्पिटल हॉस्पिटल हॉस्पिटल ले जाया करें

अगर एक ही गोली मारने वाले को पता होता कि वृक्षों की में रहती है

स्टोन का निशान है तो आंसू होता है

तब तो बड़े आदमी के बाद रिकॉर्ड बनते हैं

मैं तो एक ही गोली में काम तमाम कर देता है

लेकिन नहीं जानता था

तो बताया इस व्रत को टीमें आत्मा रहती है

और उसकी यादगार में अन्याय माता है आज भी बिंदी लगाती है

क्या

कोई कहीं कन्याएं माता ही क्यों लगाती है

कि पुरूष सूचना क्यों नहीं लगाते यहां कोई पंडित व ढेरों से तो थप्पड़ लगा लेते हैं

तो

यह भावना की बात है

क्या

जैसे कवियों ने बड़ी ऊंची भावना होती है

साधना अच्छी चीज है खराब चीज है

भावना

अच्छी सी पिक भेज दो

खराब चीजें अच्छी भावना भी होती है और बुरी भावना भी होती है

तो माता है एक व्यक्ति के बीच में बिंदी आज भी लगाती है

यह यादगार है

कि देश के रूप में ना देखो कि कोई हमें देखिए तो क्या करें किस रूप में देखें आत्मा के रूप में देखते हैं

क्योंकि

गीता के लिखी गई थी

दो ढाई हजार साल पहले ही

कोई

ऋषि मुनि है नहीं लिखी होगी

ऋषि मुनि सिद्ध होते हैं

तो बहुत बहुत विद्वान थे

तो उन्हें बता दिया जगह मतभेद प्रमेय सम्यक है

जब शरीर छोड़े तो बेवकूफी के मध्य में प्राणों को

स्थिर करके इस स्मरण करें

तो भी कैमरा यह अश्लील इशारा मिलता है कि आत्मा कहां है कहां रहते शरीर तो वह कवियों की जो भावना है

वह भावना माताओं में अभी तक भी बरकरार है जो माताएं बिंदी लगाती है

पुरुष नहीं लगा कर ऐसा क्यों हुआ है पुरुषों में भावना प्रधान होती है या बुद्धि प्रदान होती है और बुद्धि प्रदान होती थी

भावनाप्रधान नहीं होती है तो बुद्धि की प्रधानता के कारण वह Bigg Boss चलाते हैं

चोटा कैसे ही वह बात

कि अ कई ठिकाने पर पहुंच नहीं पाते थे

तो उन्होंने नहीं लगाई है जी हां प्राचीन काल में हिस्ट्री में यह बात मिलती है

कि जब पुरुष युद्ध में जाते थे तो कन्या माताएं उनको टीका लगाती थी एक व्यक्ति में क्या लगाती थी हिस्सा से हां विजय का टीका लगा लो

कि तुम युद्ध में जाओ और विजई हों के आओ यह विजय का टीका लगा दिया इस मिट्टी रखना है ऐसा क्यों भाई यह विजय का टीका यहां बहुत ही नहीं क्यों लगाती थी नाक पर लगा देता है [संगीत]

मैं नहीं समझा

मैं

[संगीत]

कौन से स्कूल में भावना थी माताओं में जैसे हम बिंदी आत्माएं हैं ऐसे वहां जाकर के युद्ध में है

देखिए परवाह न करें कि हम क्या और क्या कर रहा करें कि हम अजाण आत्माएं हैं हम युद्ध में विजई होकर के जाएंगे कोई सब्जी काटने का यह शरीर को खत्म करने का यह हमारी अंदर ना रहेगी जहां कहीं भी जन्म लेंगे यह वहां फिर

हिंदुओं के साथ युद्ध करके फिर भी विजय हासिल करें

तो यह भावना प्रबल की कन्याओं माताओं ने

अपने लिए भी बिंदी और पुरुषों को भी विजय का टीका लगाती थी तो यह सब बात बताने के लिए बाप को आना पड़ता है

इसको आना पड़ता है मां और आप किस को बताने के लिए

है

इसको बताने के लिए बापू को आना पड़ता है

बच्चों को बच्चे एक या बहुत-बहुत बच्चों को बताने के लिए वालों को अच्छा कौन-कौन सी बात तो आना पड़ता है

कि अकबर आत्माओं का बाप सब बच्चों को बताता है

कि विज्ञान पेपर [संगीत]

हां

आत्माओं में जो बड़ा बच्चा है उस बड़े बच्चे को क्या प्लेन मोड आत्माओं में जो बड़ा बच्चा है कोई होगा या नहीं होगा है

कि सेक्सी का आज पुरुष स्वयं कहते भी हैं को मुसलमान कहते हैं ना आदम को खुदा मत कहो आदम खुदा नहीं लेकिन खुदा के नूर से आदम जुदा इसका मतलब यह है कि आदम

खुदा के बहुत नजदीक है

क्या है

जो खुदा खुद जाता है बुलाने से नहीं आता है

और जो बाप के अंदर बेहद के बाप आत्माओं के अंदर है

जो यह खुद ही है

कि मैं खुद ही जाऊं मेरा कर्तव्य है आज

के इस अनुचित शक्तिरूपी रंगमंच के साथ बच्चे अपनों को भूल गए हो

तो उनको जाकर परिचय देशों में

तो वह आता है

कि तुम सब को नहीं परिचय देता है इस बार फाइनल में

मनुष्यात्माओं का बाप है या नहीं है चाणक्य तो आत्माओं का बाप

कब आत्माओं को देगा छुप-छुप के पास है

कि कोई एक को देगा

हां

यह तू क्यों ले रहे हो

अरे हिस्ट्री मिले खोलो जितने भी राज हुए हैं उन राजाओं ने बाप राजा राजा बने थे बाप भी बने थे तो बाप बन तक उन राजाओं ने अपनी राजधानी किसको दी है

तो यह परंपरा कोई नहीं तो चलाई होगे

यह परंपरा चली आ रही है ना कि हर बाप जो है अपने बड़े बच्चे को अपनी दुकान कारखाना सौंप देता है

तो यह परंपरा ही चीते ऊंचा भगवंत जो कहा जाता है मनुष्यात्माओं का बाप

उसने चलाई है

कि जब हिस्से चुनौती रंगमंच पर आता है मनुष्य सृष्टि पर के मंच पर तो मनुष्य से शुरू की रंगमंच पर जो बड़े से बड़ा लंबा पार्ट बजाने वाला या

जो मनुष्य सेक्सी में पहले पैदा होने वाला

इस मनुष्य से तिरुपति रंगमंच पर पहले प्रकार रूप में जन्म लेने वाली आत्मा है उसको अपना सारा ज्ञान का भंडार दी है तो क्या उस बच्चे को अपना भी परिचय देता है कि मैं कौन हूं

आ बच्चे को भी परिचय देता है तुम कौन हो मैं सिर्फ है

कि प्राइमरी बना लीजिए देता होगा कि कैसे भी बेसिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे होते हैं

सीबीसी सकते हैं पकाया

गिनती सीखते हैं पहाड़ों सीखते हैं कल

सुबह इसी ग्यान है या गहराई का ज्ञान-विज्ञान तो बच्चों के स्तर की पढ़ाई भी देता है

कि महात्मा ज्योति बिंदु और तुम्हारा बाप भी ज्योति बिंदु है

हर क्या है तुमने नंबर के चक्कर में आने वाली आत्मा हो

हटो महात्माओं का जो बात है वह जन्म-मरण के चक्र में मिलाकर पिया नहीं जाता है

सब कुछ कारण है कि अ 3 साल तक क्यों लगता है कैसे जान लेता है [संगीत]

आत्मा का पिज़्ज़ा सिलेंडर है वो जान लेता है तीनों कालों को तु इस आधार पर जान लेता है [संगीत]

पी एस वाइस सिटी में रहता है अब हमें पता चल गया हम भी स्थिति में रहे हैं

रहते हैं कि नहीं तुम तीनों जानते हैं क्या ऐश्वर्या राय रहते हैं इस स्थिति में तो उस समय पैरों को एक करने के लिए तो आधार क्या है कोई आधार है ना तो तीनों लोकों का आधार पास थे फ्यूचर वर्तमान तीनों कालों का जानने का आधार है कोई एक मनुष्य सीमेंट की एक आत्मा है जो तीन बालों को क्रास जाती है

क्या

सब है यह देखिए एक ही मनुष्यात्माओं है

जो सतयुग त्रेता द्वापर और कलियुग चारों सीन उदास कर देती है

मैं भूत भविष्य वर्तमान तीनों कालों क्रश कर जाती है

और स्थिति रूपी रंगमंच से नेस्तनाबूद नहीं होती थी

क्या

गायब नहीं होती है

और आत्माएं हैं

इस सच रूपी रंगमंच से गायब हो जाए

तो उस फ़ालतू आत्मा जब तीनों काल को क्रास कर जाती है

पूरे कल्पो क्रश कर जाती है

तो वह त्रिकाल दर्शी बन जाता है

तुम झाला

इसके आधार पर कॉलगर्ल्स बना दो [संगीत]

किसी के तीनों कालों को जाना है या नहीं जाना जाना ऐसी आत्मा होनी चाहिए जो इस चीज उसी रंगमंच के तीनों कोणों को ऑफ कर दो

मेरा टैब रामबोध क्राइस्ट तीनों कालों को प्राप्त नहीं करते वह बीच में जाते हैं

क्या

सचिव तत्व होते हैं

को तनुजा साल पहले आते हैं हां तो वह तो क्रॉस करते ही नहीं आ वह धाम पिता सब मानते हैं कि शक्तिरूपी

रंगमंच पर कोई आदिपुरुष था जिसको आदम मैडम आदि देव कहते हैं

बस इतना ही शांति है

तो बेवकूफ वो बुध त्रिकालदर्शी

किस के आधार पर बनता है

MP3

कोई आत्मा है जिसके आधार पर वह त्रिकालदर्शी बन जाता है

उसके तीनों कालों को जान लेता है

का हिस्सा आत्मा ने यह तीनों काल प्रात सूर्य कौन है

एक

फोन है वह आत्मा है

मनुष्य शेट्टी का वही रूप बाप जो हमारे भारत के शास्त्रों में गाया हुआ है

एक शहर व्यक्तित्व है कि पर्सनल्टी है

क्या एक ही शक्शियत है

जिसका कोई मां-बाप नहीं है कोई बताता ही नहीं जानता ही नहीं हूं

उसका जन्म कब हुआ उसकी मृत्यु कब होती है दुनिया में कोई जानकारी नहीं पॉर्न

सब

शंकर शास्त्रों में गाया हुआ है

तो

जिस संतरे एक ही आत्मा का नाम शिव के साथ जोड़ा जाता है

क्या

और किसी सदा

शास्त्रों में शिव के साथ नहीं जोड़ सिद्ध और किसी का क्यों जोड़ते क्योंकि वही यह आत्मा है

जो शिव सुप्रीम सौल कीर्तिपाल वर्षीय बनने का आधार है अगर वह आत्मा तीनों कालों को क्रश न कर पाए कुछ

तो शर्म त्रिकालदर्शी लिए बने हैं

तो जिसके आधार पर वह त्रिकालदर्शी बनता है उस आत्मा कोई सच रूपी रंगमंच पर से चुनता है और उसमें प्रवेश कर दो

जो गीता में शब्द आया है प्रवेश तुम तो क्या मैं प्रवेश करने योग्य हूं तू मेरा दिल प्रवेश होता है विजन है

[संगीत]

मनुष्यात्माओं के समान प्राणियों के समान गर्भ से जन्म लेता है

अमेज़न मनी लेकर भूत-प्रेतों के समान किसी में प्रवेश करके प्रत्यक्षण होता जन्म लेता है

क्या

इन दोनों की अध्यक्षता रूपी जन्म से अलग मेरा जन्मदिन है

कैसा जन्म दिग्विजय ने ऐसा डिविजन है

कि जब में प्रवेश करता हूं

तो कोई को पता ही नहीं चलता मैं कब आया और कब चला गया

पूछा ब्रह्मा बाबा के दिव्य वाणी मुरली में

इस ब्रह्मा को पता चलता है

मैं इसे ब्रह्मा को भी पतनशीलता मैं कब आता हूं फिल्मों में और कब चला जाता हूं जी हां

कि ब्रह्मवाक्य मुरली में बोला है

कि मैं जिस समय आता हूं जिसमें आता हूं उससे काम निकालने के लिए नाम देता हूं

शास्त्रों में जितने नाम हैं काम के आधार पर नाम है ना

तो वाले पुरुष स्तन में भी आता हूं कि पुरुष स्तन में हुआ था जो पुरुष पिता ने मैं आता हूं तो भी उसका नाम ब्रह्मा देता हूं

जिसे किसी भी पुस्तक में आऊंगा का या ना ब्रह्म है

तो मैं इसे दादा लेखराज कीर्तन में आया दादा लेखराज नाम नहीं दिया क्या नाम दिया भ्रमणम देवी अब सवाल यह है

मैं सिर्फ दादा लेखराज में सबसे आया को खोलें तो कैसे पता चला दो कि जब ऐसा वंडरफुल ऐसी नई-नई बातें सुनाते हैं जो दुनिया में नई-नई सच्ची बातें कोई ने सुनाई तो एहसास हो जाता है यहां भगवान यह बात सुनाता है कि यह देवधारी इन बातों को नहीं जानता कि यह तो अपने साक्षात्कारों का भी रहस्य को नहीं जानते थे तो अब तो विश्वास होता है यहां इसमें भगवान ने प्रवेश किया तो सिद्ध होता है कि पता तब चलता है जब मुरली चलाते हैं है क्या कि जब अब ज्ञानी की बांसुरी बजाते हैं तो पता चलता है कि में बाप भगवान है है है इसलिए आया वह तो पता चल गया किसलिए आया है है अरे दादा लेखराज में है इसलिए आया है झाला और सुनाओ आंखें हैं या एंड नियुक्त वजह से कि अ लुट जेडी मंे ब्रह्म से नर्क नहीं बनता है इस तरह उस ब्रह्म से चार पुत्र पैदा हुए में एक ही पुत्र देवी देवता सनातन धर्म स्वर्ग का मुखिया है स्थापन करने वाला बनता है प्रैक्टिकल वर्क की अपील है तो नर्क बनता ही नहीं तो ब्रह्मा द्वारा स्वर्ग और नर्क दोनों का फाउंडेशन पढ़ा या नहीं पढ़ा ऐसे दिन कि ब्रह्म के द्वारा स्वर्ग विस्थापन होता है जी हां इस दादा लेखराज ब्रह्मा के द्वारा तो स्वर्ग विस्थापन होता भी नहीं वह तो पहले शरीर छोड़ गए 56001 बना ब्रह्माकुमारी कैसी बाबा हमको वर्षा देगा इस वक्त कि मेहमान या हटाएं यदि आप विश्व की भाषा हमारी है हम सब से सब उदासी बनाकर हम काम लेने हैं के व्यक्तित्व रहने वाली माताओं को समझते हैं यह तो गिरी हंसती है के बाप कहते हैं तो गृहस्थ जीवन को समझते हो एक बार आपने बोल दिया अंदर वाले रह जाएंगे आ बार वाले ले जाएंगे तो देखो में ब्रह्माकुमारी विद्यालय हुए दो जो ब्रह्मा कुमारियां समझेंगे बाबा हमको वर्षा देंगे इस वक्त आ आ तो फिर जल्दी क्या हुआ इस चैप्टर में अ इस संयत्र में जो घोषणा की थी लेकिन उनका जन्म हुआ था हुआ है पुरानी दुनिया का ब्राह्मणों की पुरानी दुनिया का विनाश और नई दुनिया की स्थापना की जायेगी है तो वह ब्रह्मा कुमारियां रह गई सरेंडर वाली जो सोचते थे अंदर के अ है और उसे बाप को किसने पहचाना ना झाल कि जो नारायण के रूप में या रामबली आत्मा के रूप में राम बापू को कहा जाता है वह राम बापू को ब्रह्माकुमारियों ने पहचाना अंदर वालों ने पहचाना या बाहर ग्रस्त रहने वालों ने पहचान गांव वालों में पहचान तो बाहर वाले ले गए थे हैं और अंदर वाले अभी भी अभी भी रहे हुए अभी भी वह आपको नहीं जानते और बाहरवाली देती थी कि भोजन तो वह पूरे घर घर छोड़ने वाले साधु संन्यासियों ने सफेद कपड़े वालों ने समझा था है कि हम ऊंची आती हैं और यह सब गिरी 80 यह सीन है लेकिन जीता क्या कहती है गीता में भगवान ने आकर गृहस्थी अर्जुन को पांडवों को ज्ञान दिया हुआ था द्रोणाचार्य कृपाचार्य भीष्म पितामह संन्यासियों की आंधी आ

बेटियों को ज्ञात कि वह बात उस समय कि वह ब्रह्म वाक्य है क्या अंदर वाले रह जाएंगे और बाहर वाले कि वह बात अभी एडवांस पार्टी में भी लागू होगी कि नहीं होगी क्या है कि जो अंदर सरेंडर हो कर के बैठे हैं के बापू ने उनको अंदर रखा है आप बोल रहे हो जाएंगे इस हां हां एक बार वाले लेटर ओं

क्या बंदर बात फिर हम हवा के हर समय लाभ होगा तीनों जिलों में लागू होगा तभी लागू होगा नहीं तो भगवान के कह सकते हैं तो अभी भी यह देखने में हुआ था के अंदर वाले पहले होते जा रहे हैं क्या उलटे-पलटे में मौजूद रहती है गीता पाठशाला पता चला रहे हैं कि वह सच्चाई से चला रहे हो मैं तो बाहर वाले ले जाएंगे और अंदर वाले मेरे चैनल ए गुड अभी एक गिलानी का बवंडर निकल रहा है मैं निकल आया ना ज्यादा लाने का जो बवंडर है अफवाहों का झूठी-सच्ची गांव में जो फैलाई जा रही है यह अफवाहें फैलाने में आज के जो साधन है आधुनिक दुनिया के और साइंस के साधन है ना कि मनुष्य बनाए हुए हैं कि वह साइंस के साधन यह अफवाहें बड़ी तेजी से दुनिया में फैला देते हैं से जुड़ी सच्ची बातें फैलाने का इनको बड़ी पार्टियां मिली हुई है है तो यह साधन जो है सत्यानाशी इन्हीं मनुष्य के बनाए हुए घरों में एक साधन है बॉस हुआ है या नहीं कि जो शंकर जी का काम करता है बिना सवा दो

मनुष्यों का बनाया हुआ है

अंदर का बनाया हुआ है यह भगवान का बनाया हुआ ना मनुष्य बनाया है

तो सारी दुनिया में आज दहशत फैली हुई है जो आइटम इन थे गैलरी बनाई है

दहशत पता नहीं कब आइटम बम फटने शुरू हो जाए है

और सारी दुनिया का विनाश बिना सोल्जर क्योंकि

सन 45 में 16 छोटी-छोटी 20 मैगावाट की मुंबई जोड़ी गई थी

और 2 बड़े बड़े शहरों का टोटल विनाश हो गया था

तो अभी तो अब आधे रोगों देते हैं

जिनके पास हजारों-हजार मेगा वाट के अब इन ए पड़े हैं जमीन के अंदर सुरंगों में डाले हुए हैं सुरक्षित करके

[संगीत]

सागर के पानी में पनडुब्बियों में तैर रहे हैं

और आकाश में

मिसाइल रूस

हवाई जहाज मोड़ रहे हैं

[संगीत]

हुआ है

तीन तरफ से घिरा हुआ है

क्या संभावना नहीं है

कि वो टूटे ना पड़े हैं

क्या हमारे घरों की सजावट के लिए बनाए गए नहीं

बहुत से लोग समझते हैं अरे यह तो दुनिया ऐसे ही चलती ढंग से ही चलती रहेगी तो फिर ये तो वही बात हो गई है जैसे बिल्ली कबूतरों के सामने आती है

और कबूतर आंखें बंद कर लेते हैं हमारे डरते बिल्ली आई है तो यह हाल है तो आज मनुष्य से टिकी हुई पड़ी है

कर दो

दुनिया का विनाश का मटेरियल सामने रखा हुआ है

तो दुनिया आंखें बंद करके अंधकारमय चल रही है

कौन-सा अंदर का दहन कार का धक्का मैं देखूं देव ने पांच तत्वों का पुतला पंचभूतों के आलोड़न में सारी बुद्धि मनुष्य की लगी हुई है

यह पंचभूतों से जो यह शरीर बनाया इस देंगे इसे गहराई में घुसने के लिए देखिए है

यह देखिए तत्व क्या है

देखकर मटेरियल क्या है इनमें सीरियल्स की गहराई क्या है उन पंचभूतों में बुरी लगी हो यह बहुत ही ज्ञान ले रहे हैं उन अज्ञान से ज्ञान लेकिन आध्यात्मिक ज्ञान किसी के पास आध्यात्मिकता मतलब यह है यह सोचने की दरकार नहीं है तो जानते ही नहीं तो सोचेंगे क्या है

देख या आज है कल योगी और आत्मक जो अविनाशी ज्ञान व बुद्धि चाहिए वह कर रही है जो मनुष्य की बुद्धि कहां चल रही है देश के पंचभूतों के आलोक में सारी बुद्धि लगी है तो बाप आ कर के

इस सप्ताह को थमाते हैं और क्या बताएं कि

तुम आत्मा हो अविनाशी आत्मा हो बिना सीधे नहीं

और जो अविनाशी आत्मा हो बताया मैं जब भी प्रकृति के अविनाशी आत्मा का परिचय अविनाश भ्रमबे सकता है बेहद के बाप ही रह सकता है और बताता है कि बेहद के बाप हैं

एक आत्माओं का बाप और दूसरा मनुष्यों का बाप

मनुष्यों का आप भी बेहद डकैत

जैसे क्राइस्ट

इतना बड़ा धर्म पिता की दुनिया की लगभग आधी जनरेशन उसे बात मानती है

तो भी हद तक है यह 500 करोड़ सभी मनुष्य मात्र का बाप है लेकिन इस समय शेट्टी का बाप बेहद अब आप है मैंने 500 600 शेट्टी उस बाप को एक दिन पहचानती जरूरत है

इसलिए ब्रह्मवाद के मुरली में है

क्या है क्या बात है क्या बात है

हुआ है

[संगीत]

दो

लुटा दूं

हाजी जी के बाप बताते हैं आज के मनुष्य सृष्टि का जो बाप है वह कौन मुनष्या आत्माओं का बाप कौन है

और आत्माओं का बाप कौन और दोनों में अंतर क्या है

कि भेजो आत्माओं का बाप है बूस्ट सदा ख्याल आप लोग का रहने वाला है तो क्या आप इस सृष्टि रूपी रंगमंच ऊपर आता भी है तो भी मनुष्य रूपी आत्मा से तिरुपति आत्मा से कार्य प्रारंभ रहता है इससे मनुष्य की में उसका कोई के साथ एक सेकिंड का भी लगाव नहीं देता कि उसका लगाओ का लगा हुआ है तो प्रणाम है

[संगीत]

इसलिए कहा जाता है ऊंचे से ऊंचा भगवन आप क्या सोचते ऊंचे है अच्छा ऊंचे से ऊंचा बाप है तो वह क्या वर्षा देता हूं वह बच्चों को यह बात पता मतलब है वर्षा दे दो यह बात हम ऑप्शन बच्चों को तो किस बात का बाप है तो वह वर्षा क्या देता है रूप से ऊंचा है तो ऊंच ते ऊंच वर्षा देता होगा कि यह नीचे वर्षा देता होगा क्या है उसके पास ऊंचे-ऊंचे

जीवन मुक्ति खुद रोकता है तो तुमको कहा कि देगा कि आप यू अरे इन थे होगा तो धन का बढ़ता देगा हैं वह निराकार आत्माओं का बाप है और निराकार आत्माओं का बाप भी निराकार

निराकारी बाप के पास कौन सा वर्षा होगा ताण वर्चस्व कायम वर्ग साकार है या निराकार निर्गुण निराकार साकार और निराकार आत्मा आत्मा आत्मा आत्मा रूपी आप लोग

सौल वर्ल्ड है जिसे मुसलमान आर्य कहते हैं खुदा समय रहता है फर्स्ट में नहीं रहता था

तो उसके पास स्वर्ग है रे

उस सुदाम है नहीं और वह सुख भोगता भी उपभोक्ता बिल रोकता है अब वक्त आ वह तो है ही

तुम लोग ने कवर शांति देगा

इसीलिए वह बताता है क्या कि वह यह बात बताता है

अरे हमारे लिए बहुत से लोग में कानाफूसी बाद जब मैं

क्या बताता है

कि मैं आता हूं मैं तो तेरा परिचय भी देता हूं एक से एक

और अपना परिचय दे देता हूं कि 13 व ने किसका कि मनुष्य से क्रिकेट बाप का परिचय बाप को ही देता है

[संगीत]

बड़े बच्चे को ही रहता है

वहीं छोटे बच्चे उसका परिचय प्राप्त नहीं कर पाते थे बेसिक ज्ञान ले लेते हैं

कि छोटे-छोटे बच्चे हैं यह बहुत अच्छा है

दिल्ली घने कोहरे एक बड़े बच्चे के मुकाबले सब छोटे बच्चे उतरी है

मैं तो बच्चा युवतियों को नहीं देता आ

एक बच्चा युवतियों को सिर्फ बच्चा बुद्धि का बेसिक ज्ञान देता है तुम ज्योति बिंदु आता है कि वह ब्राह्मणों की दुनिया में जो बेसिक ज्ञान लेने वाले ब्रह्माकुमार-कुमारियों है वह दृष्टि हम जानते हैं क्या

[संगीत]

हम आत्मा हमारा बाप भी ज्योति विंदु इसके अलावा कुछ नहीं जानते मैं तुमसे पूछा जाए तुम आप हो तुम को आत्मा का ज्ञान मिला तो यह बताओ तुम कौन-सी आत्माओं को

इस मंत्र से शक्तिरूपी रंगमंच से 500 600 करोड़ मनुष्यात्माएं हैं तुम कौन से नंबर की आत्माओ इससे रूपी रंगमंच पर तुम कब आई थी क्या कोई बताएगा है नहीं बताया कि इस बात की जानकारी ईएस इस समय तक टिके कि रंगमंच पर

उस आत्मा को पहले होती है कि जो मनुष्यात्माओं में बड़ा पार्टधारी योर पार्ट तारीख

वह पहले जानता है मैं कौन हूं और सब जानता है

कि तुम जैसे सब धर्म पर टाइम्स वर्ष के अंदर धर्मस्थान करते हैं वैसे ऊंचे से ऊंचा ऊंचा भगवंत भी क्या जो स्वधर्म का ज्ञान देता है वह Bigg Boss साल के अंदर देता है

तो 100 साल के अंदर उसका जो बड़ा बच्चा है को अपना गहरा ज्ञान तो कब से ले लेता है तो कब से कह है वह अपना गहराई का ज्ञान जान जाता है अपनी आत्मा के बारे में

विशेष जानकारी मिलने लगती है

जो बेसिक वाले बच्चों को मिलती है

बेसिक वाली मस्तिष्क रेखाएं जानते हैं बिंदु आत्मा मेरा बाप ज्योति बिंदु बस यह नहीं जानते कि मैं आत्मा सच्ची रंगमंच पर विशेष पार्ट बजाने वाली तो फिर पहली पहले कौन जानता है

हुआ है

हरे कृष्ण है हां जो मनुष्य शक्ति का बाप है उसकी तरफ इशारा किया है 25 दिसंबर याद है जी हां

राज्य संरक्षित हम हां 5 दिसंबर को

विश्वकप ज्योति बिंदु और उसका बड़ा बच्चा ज्योति बिंदु दोनों आत्माओं का बिंदु बिंदु रूप में मेल हुआ पहली बात

यह बात अव्यक्त वाणी में बता दी पहले सुनाओ

या सुनते रहिए कान से निकाल सुनाओ दूसरे कान से निकाल दिया था

इस निशुल्क हाथ उठाओ

स्नेक हां सुना है तो जिन्होंने सुना वह इस बात की गहराई को समझ सकते हैं

कि जो आत्मा आत्मा भाई-भाई हैं मनुष्य सच्ची में उन्होंने शेट्टी में आत्मा आत्मा भाइयों के बीच जो बड़ा भाई है उस बढ़ाएं भाई ने

[संगीत]

पहले-पहले जान लिया

आ और उसी स्टेज में इसके हो गया प्रैक्टिकल में ज्योति विंदु बनकर बाप से पहले-पहले मिलन मेला हो गया के पहले-पहले बाप की इस मिट्टी की गुय दे कौन सा बच्चा किताब आप मिला बड़ा तारीख बता दी कौन सी तारीख को

इससे 25 दिसंबर है यह सवाल पैदा होता है कौन से सन् का 5 सितंबर को ऐसा क्यों

आगे पीछे क्यों नहीं है इसलिए आगे पीछे गए

यह संसार रूपी जंगल है इस संसार रूपी जंगल में 98100 होता है एक टाइम पर सारे जंगल का राजा

जिसका मुकाबला जंगल के जानवरों में आमने-सामने थीं कि नहीं कर सकता है

वह कौन था सुशीला इससे पहले 18 वर्ष पहले का मन शेट्टी में कौन था प्राणों की दुनिया में जिसका सामने आकर ज्ञान से मुकाबला इस मनुष्य के बड़े-बड़े विद्वान पंडित आचार्यों ने पॉइंट है नहीं कर पाया था इस सांप डरते रहे हो

अंदर-अंदर से डरते थे

कि हम तो ज्ञान सुनाते हैं आत्मा सो परमात्मा यह है और ब्रह्मा के पास जाते थे ब्रह्माकुमारियों के पास जाते थे तो बीच न्यू है सिर्फ देते थे उनको पक्का अंबर से एहसास हो जाता था कि आत्मा सो परमात्मा नहीं है और आत्मा सर्वव्याप्ति परमात्मा सर्वव्यापी नहीं और शिवोहम तो हो सकता है और तू कौन हिम्मत नहीं है

कि उसे शेर के सामने आकर के मुकाबला करने की है

हिस्ट्री कैसी है ब्राह्मणों की दुनिया जी

उन्होंने भी 18 जानवरों को 69 को शरीर छोड़ दी तो 69 में शरीर छोड़ा तो उनकी तरह के बाद उन्नत फैशन में है जो संसार रूपी जंगल है वह राजा के बगैर खाली रहेगा या कोई दूसरा बच्चा जाएगा शेर बनकर

अब वह है उसी वर्ष में आ गया है और उस वर्ष में आने के बाद जब 6 दिन के अंदर से सात दिन के अंदर कोर्स लिया ब्रह्माकुमारियों को मिक्स शरीर तो ब्रह्मा बाबा ने छोड़ा है ब्रह्मवाक्य है मूली में श्री राम खेलो गया है मैं क्या बोला था कि खराब हो गया है तो जो फेल हो गया उसको आपने तीर कमान दे दिया जाओ कमाओ शिकार करो मारो और हो

तो वो आत्मा जो शरीर छोड़ गई जिसके लिए बोला कि लाख भी गुम कर दी ढील

क्या बोला मुरली में लाभ कर दी मारा गया तब बताते हैं जो ब्राह्मण करके शरीर छोड़ते हैं वह दोबारा भ्रमण करके और ज्यादा पावरफुल बंद करेंगे और ज्यादा पावरफुल पूर्व जन्म ले करके आए हैं

तो वह तमाड़ से सिक्सटी नाइन में ज्ञान में जाति और और 1977 शुरू होते वह होने से पहले 169 मूवी 169 पूरा होने से पहले ही

सात दिन का कोर्स लेकर के ज्ञान में मैं पक्का फाउंडेशन पड़ जाता है कि क्या पक्का फाऊंडेशन मैं ज्योति बिंदु आत्माएं स्टार हूं कि जैसे मेरा बाप स्टार है कि आत्माओं का बाप स्टार है और मैं भी इस स्टार मैं बेहद नहीं हूं देखो ग्लास है और क्या याद करना है स्टार को याद करना है घृणित अच्छा तो यह बात है

कि फाऊंडेशन शुरुआत में जितना पक्का होगा पुरुषार्थ का कोई मकान बनाते हैं

तो मकान का फाऊंडेशन न्यू जितनी गहरी योगी जी है

उतना ऊंचा मंजिल का मकान बन सकता है

तो वह आत्मा जब से इस बात को जानती है कि मैं आत्मा ज्योति बिंदु विस्तार मिशन व्वे है तब उसे इस वृद्धि का पक्का अभ्यास करने लग जाता है जाती है कि मैं भूल और मुझे याद रहे हैं

आधे

तो अच्छे दिन का कोर्स लेते-लेते ही 25 दिसंबर आते-आते ही बुद्धिमान पक्का बाग स्मृति हो जाती है कि मैं दौड़ में हूं क्या हूं स्टार और जैसे वह इस प्रति पक्की होती है स्टार की वैसे ही जो बाप है वह बच्चे से मिलता है बिलकुल समान होंगे तब लोगों का यह एक चींटी और हाथी उनकी शादी तो बिलकुल समान से ही हो सकता है कि ऐसे तो वह ज्योति बिंदु बाप बेहतर तो बच्चा भी प्रैक्टिकल में कैसा होना चाहिए इस स्मृति स्वरूप से देखिए इस वृद्धि करने वाला नहीं टाइप इस मिट्टी में छिपा हुआ है और ज्योति बिंदु स्टार आत्माओं की स्मृति में टिका हुआ बने चार जैसे कि नहीं सही है

मैं तो दोनों आत्माओं का पहली बार मिलनसार टाइम बताया डेट बता दी क्या बताइए 25 दिसंबर पहुंच क्षमता

कि 6969 में एक शेयर ने शरीर छोड़ा संसार रूपी जंगल में जो दहाड़ मार रहा था जयंती जिसका कोई मुकाबला नहीं कर सकता था

और उसके सही छोड़ने के बाद उसी वर्ष में का दूसरा चेहरा तैयार हो गया कि वह भी ऐसा चेहरे

ब्रह्माकुमारी ईएस ब्राह्मणों की नियुक्ति और उसका कोई भी मुकाबला ब्रह्माकुमार-कुमारियों वाचा से कर ही नहीं सकती हैं

क्यों क्या हुआ से साबुन की बट्टी होती थी उस समय

क्या 69 से

सात दिन की छुट्टी पर मुख्य अतिथि स्पेशल भट्ठी में कभी अदरक को मारोगे बुलाया जाता था तभी माताओं को बुलाया जाता था तभी कुमारों को बुलाया जाता था तो कुमारों की ऑल इंडिया से इकट्ठा करके जो बच्चे हुई

अजय को

हुआ है

थे उस आफ ऑल इंडिया से इकट्ठे हुए

ब्रह्माकुमारियों की भट्ठी में

ब्रह्माकुमारियों ने हिम्मत की है

जिस भाई को जो प्रश्न पूछने हो तो क्लास में पूछ सकते हैं तो उन्होंने दो-तीन दिन के बाद घोषणा कर देंगे जैसे दो प्रश्न पूछना हो तो पूछो और कुमार तो बुद्धि के बहुत तीखे होते हैं

कि वह पूछना शुरू किया सुविधाओं को जवाब आया ही नहीं हुआ आगे क्रश क्वेश्चंस करना शुरू कर दिए कुमारों ने और वह बड़ा गए और अगले दिन सिर्फ कैंसिल है

प्रश्न उत्तर का क्लास

कैंसिल हो गया है

तो जरूर उसे बच्ची हुए दो पावरफुल आत्माएं आई हुई थी उनका मुकाबला ब्राह्मणों की कोई नहीं कर सकता है

और बाहर की दुनियां में भी जो पंडित-पुजारी विद्वान मौलवी कोई भी उनका मुकाबला नहीं कर सकते हैं

तो यही बात है और दूसरा शेर आया है और उसके ज्ञान की दहाड़ का कोई जवाब नहीं आ सकता आमना सामना करने के लिए कोई भी हिम्मत नहीं कर सकता है

ब्राह्मणों की दुनिया का भी कोई दिग्गज नहीं जो सामने आकर के सवाल-जवाब करें तो क्यों क्या हुआ कि फेरों की जमा कि उसका परिवार होगा ना जमा कैसी है

कि वह प्रश्न करें यह कि उनका जवाब भी देंगे लेकिन देश के प्राणों की दुनियां में कोई दादी-दादा या पार्टी नहीं है दोनों प्रश्नों का जवाब दे सके थे

प्रैक्टिकल बातें है यह सिर्फ बोलने की शक्ल बात थे ऑल इंडिया के लगभग सभी सेंट रोमांस

कि वह प्रश्न दिए गए लेकिन कोई ब्रह्म कुमारी ने जवाब दिया है

तो देखो

तो बाप आ करके रिलाइज कराते हैं आत्म कर दो

कि तू महात्मा कौन हो कौन सा पार्टधारी हो कौन

कौन सा स्पेशल तुम्हारा पार्ट है और जन्म-जन्मांतर में भी तुम्हारा विशेष पार्टी क्या रहा है

मैं आत्मा ताजधारी है ना का जन्म जन्मांतर इस चोले बदल-बदलकर के इस अक्षर उसी रंगमंच पर पार्ट बन जाती है यह जाती है

तो पार्ट धारी को मैं अपने पार्ट का अच्छी तरह से रिलाइजेशन होना चाहिए होना चाहिए आप ब्रह्मवाक्य में आपने बोलिए आपने कि इसके वह पार्टधारी बेवकूफ है जो अपने पार्ट को ही रंगमंच पर भूल जाए तो

तो हम सब आत्मा रूपी पार्टधारी है 284 जन्मों हुए दो अलग-अलग चोले बदल करके हमने पार्ट बजाय हैं इतना जान लिया है लेकिन क्या-क्या पार्ट बजाइए हैं

सदन में कैसे चोली पहने क्या नाम का त्योहार रूपता चाय संता कौन से देश है जिसके हमरा जाते प्रजा तेल दा किसे दा का राज अधिकारी थे और

अगर पता है

तो

उसे बेवकूफ नहीं देंगे

कि उच्च डायरेक्टर की नजर में है जो डायरेक्टर पर्दे के पीछे रहकर के प्रॉन्प्टिंग करता है उसकी नजर में वही पार्टधारी सेट और जो आपने अनेक जन्मों को जान ले जैसे मिसाल के तौर पर

श्री राम वाली आत्मा होगी

श्री राम बापू कहा जाता है कि इस बच्चे को कहा जाता है मानो हिस्सा मनुष्य से चुनौती रंगमंच पर जो बड़े से बड़े बाप का पाठ बजाने वाली आत्मा है राम वह रामबली आत्मा के लिए इशारा दे दिया ब्रह्मवाक्य मुरली में आ

कि शास्त्रों में अपने-अपने कथा कहानी लिख दी है

इशारा दिया कि नहीं आ

जो देव आत्माएं होती नंबरवार उनको इशारा ही काफी तो जो बड़े से बड़ा देवात्मा महादेव बनने वाली आत्मा होगी वह तो इशारे को पकड़ेगी ही नहीं वह पकड़े भी और पक्ष से उसकी बुद्धि चली गई बाल्मिकी तरफ द्वापर युग के बारे में की रामायण किसने लिखी बाप कहते हैं अपने-अपने छात्रों ने अपनी-अपनी कथा कहने लगी अरे बालमीक रामायण में किसकी कथा राम की कथाएं है तो बाल्मीक वाली आत्मा जो हिस्ट्री में प्रसिद्ध है वह कौन सी आत्मा परम लिया इसी तरह कलियुग तुलसीदास हिंदी

लिखिए तो बाप का वर्क ओं दोनों के अपने-अपने शास्त्रों में अपनी अपनी फैमिली तो रामायण में जो हिंदी में लिखी गई उसमें कि कौन है तुम्हें इसे अपन ही महिमा है थे सैंट तुलसीदास तुलसीदास की महिमा थोड़े यह रामायण इसकी महिमा तो इससे क्या साबित होगा रामबाण आत्मा को है कि मैं हैरान हूं कि आप अ और दूसरी बात के बाप कहते हैं कि मैं भारत में आता हूं मैं तो क्या मेरा भूमि ए मेरा जन्म स्थान भारत है कि भावना ज्ञान की रोशनी दे है और रकम आने लगा रहने वाला किस में आता हूं जो सदा ज्ञान की रोशनी में लगा रहता है मैं उस मैं आता हूं कर दो

[संगीत]

अब चलो संगम हूं मैं तो सभी ब्राह्मण नंबर वार्ड ज्ञान की रोशनी में लगे हुए होते हैं कि कोई सौ परसेंट होगा कोई 50 कोई लब्बैक लेकिन सतयुग त्रेता में में कि ज्ञानी की ओर से उन्हें कोई लगा रहता है क्या नहीं एक बुड्ढे होते हैं सब अ जी हां ऐसा कहा जाता है कि देवताएं बुद्धू होते हैं है अरे बुद्धू होंगे तो दुखी होंगे या सुखी होंगे अ को कुएं में फैंका कि अज्ञान से तो दिखाता है और देवता की होते-होते मुसलमान लोग करते अंग्रेज लोग याद करते हैं

फैमिली कोर्ट पागल कहते हैं थे गॉडफादर नहीं आता है बैंक की स्थापना की थी है तो देखो कि हेविंग को तो सूखे आंवलों धाम कहा जाता है जो सुखधाम जहाज दुखता नाम निशान वह तैयार है तो स्वर्ग के नाम से तो सब के मुंह में पानी आ जाता है चाहे कोई भी धर्म का हो मैं नास्तिक क्यों हूं

तो बताया कि स्वर्ग जो है वहां बी जो देव आत्माएं कहे जाते हैं यह बुड्ढे होते हैं क्योंकि ज्ञान का विस्तार नहीं होता वहां लेकिन अनुसार होता है कि मैं आत्मा ज्योति दूं यह सार होता है या नहीं होता है कि हरेक देवात्मा पंखों को ज्योति बिंदु समझता है यह देखिए और जाती है कि जब एक दूसरे को देखेंगे जैसे लक्ष्मण के चित्रण के बच्चे राधाकृष्णन खड़े हैं वह एक दूसरे को देखते हैं तो क्या पेट को देखते हैं कि पांव को देखते हैं कि मैं को देखते हैं कहां पे अतुलित की तरह उनकी बुद्धि जाती है तो वह आत्माभिमानी है आपकी किस्मत में रहते हैं ताकि में टिकते हैं अब इस शरीर का सार क्या है आत्मा वृक्ष का सार क्या है V ऐसे सतयुग त्रेता में में ज्ञान का सार है लेकिन डेट वादी द्वारा प्रयोग होता है

तो वहां क्या होता है वहां ज्ञान का विस्तार होता है या नहीं होता है ज्ञान का विस्तार होने लगते हैं तुम लोग ज्ञान का विस्तार होता है उस ज्ञान का विस्तार करने में कोई आत्मा अब रगड़ने होगी यह नहीं होगी तो में सबसे आगे आने वाले हैं का ज्ञान की रोशनी को विषय द्वापर युग की दुनिया में फैलाने वाली कोई एक आत्मा होगी या नहीं होगी तो

[संगीत]

थैंक यू का परिचय विक्रम जी का गुरु जो कि आप मिल जाते हैं कि विक्रमादित्य राजा था उसका जो गुरु था वह इसको रास्ता बताता है राजा को क्योंकि राजा ये दाव क्षेत्राधिकारी होते हैं मनुष्य है तू भिखारी मनुष्यों की बुद्धिजीवी कैसी होगी उनकी पुत्रियों का भोग है तो उनको सेठ मत देने वाला कि कोई गुरु होता था एक गिलास पानी में जितने भी राजा हुए उनके राज परिवार में कोई राजगुरु तथा तो विक्रमादित्य का भी कोई गुरु था जिसने विक्रमादित्य को बताया कि के कि शिवलिंग यह बनाओ और उस शिवलिंग की स्थापना करो मंदिर बनाओ वहां पूजा करो तो बुद्धि तुम्हारी वहां एक रहेगी और यही फिर हुआ सारे भारत में शिवलिंग बने कि शिवाले बने तुम था उस गुरु ने हां जान दिया

तुम बड़े से बड़ा गुरु कौन है शास्त्रों में है शास्त्रों में प्रसिद्ध है कोई बड़े से बड़ा गुरू है और ब्रह्म बाबा की मुरली में है आज के पहले पहला साफ हैव श्रीमद भगवत गीता आ ब्रह्मा के मुख से वैध निकले कि वह वेग पहले गीता साधु पहले शांत नहीं है उनसे भी पहले गीता शास्त्र था तो वह भी तासात समय आज भी लिखा हुआ है एक व्यस्क प्रताणित यह गीता ज्ञान किसकी प्रसन्नता से मिला व्यास की प्रथम तस्वीर अच्छा आगे बढ़ो बाद जब है जो कहते हैं ब्रह्मा के मुख से निकले बेदर्द ज़माने के लिए तो वेद ने भी नाम आता है ख्याल है किसका नाम आता है वेदव्यास वेदों की जानकारी में जो अलार्म्स मैंने बैठ गया बीमारी विशेष रूप से बैठ गया की जानकारी लेने के लिए भाषण है और भी आगे चलो तो वे रुक की जोड़ी चाहे हैं वृद्धों काजोल व्याख्या वह आगे के छात्रों की गई में शतपथ ब्राह्मण आरण्यक तत्व है और उसके बाद उपनिषद है यह उपनिषद के बाद पुराण है तो है पुराणों में भी जो सबसे बड़ा पुराण है वह है महाभारत में महारत जो है उसमें कौन-कौन से ऋषि-मुनि का नाम आता है जिसमें लिखा एक व्यक्ति ने लिखा था है और श्रीमद्भागवत गीता बॉस श्रीमद् भागवत वह भागवत ग्रंथ बी व्यास ने लिखा था कि जो भागवत आज भारत में गांव में शहर में तथा होती है गीता ज्ञान सुनने के लिए लोग इतना मजबूत नहीं लगाते और भागवत सुनने के लिए उधेर का दौर में भले ही अभिभावक बच्चे की कथा अजय को

जो आज के आधुनिक यंत्र हित मेरे मोबाइल कि आप [संगीत] अ क्या बड़े इस्तेमाल क्या है कंप्यूटर टीवी ये दुनिया मंत्रों के द्वारा उनका दुरुपयोग करके हुआ है अफवाहें फैलाने के काम में ज्यादा लिया जा रहा है और सच्चाई को जानने के लिए विल का जिक्र इन संसाधनों का जो माई बाप निकला है इंटरनेट पर उसे इंटरनेट की वेबसाइट में वह ईश्वरीय ज्ञान सारा ही बेसिक और एडवांस सारा ही डाला गया है उसे कोई नहीं देखता आ क्या देखते हैं क्यों अपनों को ब्रह्माकुमारी समझ प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी समझते हैं समझते हैं वह पूरा देखते हैं मैं जो बोला है ब्रह्म वाक्य भी बढ़ेगी बड़ा बम भय परमात्मा प्रत्यक्षता बम है यह दुनिया में बांबे फूटता है तो इतनी गहरी बदबू निकलती है कि सुनते ही को खोल दो ऐसे ही ज्यादा परमात्मा प्रत्यक्षता बंब है कि जो फुट है तो ऐसी बदबू निकलती है बयान कारण कि जो सकलानी को सूंघता है को देखता है पढ़ता है बस चावल जाता है कि माया अनिश्चय की गोद में सुला देती है या जिंदा रखती है अभिषेक की गोद में होने लगते हैं सुन-सुन कर के चहराय उतरने लगता है [संगीत]

क्यों तू उससे पहले राम रहेंगे है और कौन सा बाबा आसाराम बापू इग्नोर बातें सुनी मीडिया में अखबारों ने अपने मोबाइल में देखी कि मीडिया की इंटरनेट में देगी और आप यह तीसरा बम बम फूट पड़ा कि परमात्मा प्रत्यक्षता अब हम बड़े से बड़ा बम है तो वह गिलानी को सुनने मात्र से व्यवस्थित होने लगते और कोई तो मर ही जाते मर जाते हैं तो कहते हैं हमने तो अपनी कन्या दी हुई है वह अपनी कमियां अरे यू टीवी चैनल वाले भी दरवाजे पर भीड़ लगाकर खड़े होते हैं कि हमें साक्षात्कार लेने दो अंदर वालों का हम कैमरा लेकर आए हैं चीन सच्चाई डालेंगे क्या कौन सा टीवी चैनल ने को और उदार उसी दरवाजे पर राधे राधे मां बाप को रोते हैं कि लाते हैं पीटते हैं हमको हमारी लड़की वापस करवाओ हम अपनी लड़की को लेकर गए थे [संगीत] अब हमें विश्वास उठ गया है वो बहुत याद आते हैं कि हमने इतना पैसा दिया था हमारा पैसा वापस ग्रुप है भगवान हम कुछ नहीं जानते हैं ने पूछा जाता है भाई काहे के लिए दिया था तो नहीं बोलेंगे गाय के लिए दिया था क्योंकि बताएंगे मैं तो बोला जाएगा जिस काम के लिए तो मैंने दिया था उस काम में खर्च कर दिया है ऐश्वर्या सेवा के लिए दिया था तो इश्वरी सेवा में खर्च कर दिया है तो फिर लगने लगती है फोन कहां अरे वहीं धूल जहां ब्रह्म वाक्य है भी माउंट आबू से इसी वर्ष ब्रह्मवाक्य बोला ब्रह्माकुमार-कुमारियों के सामने गुना अधिक द्वारा बोला दिल्ली में राजधानी बगदाद और स्थापन कर रहे हैं काम कर रहे हैं गाने स्थान पर रहे हैं अरे राजा की राजधानी राजस्थान होता है तो कोई नया राज्य ऐसे ही स्थापना हो जाता है बिना लड़ाई के लड़ाई लड़नी पड़ती है कि नहीं लड़नी पड़ती है तो यह के सामने बोलते चले आए ब्राह्मण बात कि क्या म्हारी महाभारत ब्राह्मणों की दुनिया में गृह युद्ध के रूप में सामने खड़ा था तो यह बड़ी लड़ाई इंटरनेट में अखबारों में टीवी चैनल्स में मोबाइल सिम में और पब्लिक के चक्कर में चारों और यह आवाज़ फैलती है 98 और रामानी आत्मा ने तुलसीदास ने रामायण में क्या बोला सद्गुरु अनिरुद्ध सुनिए ना कहना हो पापा शुभे लोगों ने समझ लिया गांव तो जानवर है जानवरों को खाने से क्या फायदा होगा आप तो भारत में गांव में कटाने के कसाई खाने ढेर-के-ढेर सरकार ने खुद रखें उनका मांस काटकर के विदेशों में भेजा गया है उसे कोई पापा बनता है क्या वो पापी पापा बनता हो तो यह दुनिया कैसी चल रही है मैं तो कोई नहीं मानता किसी की बुद्धि में नहीं है कि जानवर गमों को भगवान ने नहीं पाला था भगवान ने तो यूं ही लुटना है गांव क्यों कहा कि जानवरों के बीच में एक ऐसा जानवर है जो सीधे साधे स्वभाव भी विदेशी लोगों ने जर्सी लगाएं क्या नाम है जरा सी जगह यौन और बाकी सब पता नहीं कौन सा जानवर है उस दूध को पीने से कैंसर ही कैंसर की बीमारियां हो रही है उसमें घी का नाम निशान नहीं निकलता है आर इन द ईयर एगो जर्सी गाय पाल रहे हैं जो ज्यादा दूध देती है यह देख पा रहे हैं जो एक दो तीन किलो दूध देती है हेलो दोस्तों कैसे भारतवासियों के ऊपर विदेशों का पूरा प्रभाव पड़ गया भारत देश एक मात्र ऐसा देश है जो मात्र दो माताओं का देश है यहां की खासियत बताइए कि जैसे माता [संगीत] है ताकि कोई भी बच्चा फूटा शो को टायर क्यों हो मां के पास आएगा तो गोद में पालेगी दूर नहीं करना चाहिए तो यह भारत देश ऐसा है कि विदेशों से इतने यातायात विधर्मी आए और सब को भारत ने को अपना लिया सब को स्थान दिया है

मैं तुझे को मत वर्षीय एक मात्र है जहां से दुनिया की आधी दूसरे धर्मों की शुरू होती है क्या है क्योंकि पहले ढाई हजार साल पहले सिर्फ भारत देश में ही था और अविनाशी धर्मदंड हां भाई यार साल पहले की दूसरे धर्म अखंड समुद्र के गर्त में समाए हुए थे डाइजेशन पहले की को इधर-उधर नियुक्ति न धन न मुस्लिम धर्म में अश्लीलता की न धीर व है पुष्टि नहीं मेज़ नावेल चलते रहेंगे में एक भारत देश है विनष्टीकरण और उस धर्म मंदिर में अविनाशी घंटे में भगवान आता है जमीन पर टपक पड़ता है या गीता के अनुसार प्रवेश तुम शब्द आता है प्रवेश करता हूं मैं प्रवेश करता है अरे कोई जानवर में प्रवेश करता है क्या कोई मनुष्य है जिस मनुष्य में प्रवेश कर के लिए वह भगवान प्रत्यक्ष होता है मनुष्य सच्चे का जो भी रूप है उसमें प्रवेश करके वह मनुष्य सचिका फाऊंडेशन डालता है जो मनुष्य सृष्टि का फाऊंडेशन मनुष्य डालें का यह या निराकार डालेगा मंत्रालय है तो उस मनुष्य को जो मनुष्य से का बीजरूप बाप है उस आत्मा के बाप को बाप को यह एहसास होता है कि मैं यहां पर रिसर्च रूपी रंगमंच पर जाऊं जहां साहिब ज्ञानी हो गए है वहीं आपने आत्मा को जानता न परमात्मा को जानता उनको जाकर के परिचय दूं तो परिचय देने के लिए तीनों काल में पार्ट बजाने वाली आत्मा को पकड़ता है उसमें प्रवेश करता है और वह आत्मा पहने पहले अपने स्वरूप का विजुअलाइजेशन करती है कि मैं आत्मा इस सच रूपी रंगमंच पर क्या विशेष पार्ट बनाने वाली हूं कि कब्र इलाज करती है कि अ रियल लाइफ करने का कोई टाइम होगा या नहीं होगा अपनी आत्मा के पार्ट को विशेष पार्ट को पहचानने का कोई टाइम हुआ या नहीं होगा मेरा टैब 25 दिसंबर तो यह रियल लाइफ किया कि मैं ज्योति बिंदु आत्मा 14 मेरा बाप स्टार बेसिक नॉलेज करिए लेकिन इसके बाद और गहरा यह कि मैं स्टार आत्मा जन्म-जन्मांतर क्या-क्या पार्ट बनाने वाली हूं कि 1760 में घोषणा कर दी ब्रह्मलोक में लक्ष्मी नारायण का जन्म कब हुआ 8 से 10 वर्ष 5,000 वर्ष तो इस आप लगाते हैं तो है लेकिन उनके चित्र के नीचे भी घोषणा भी हुई है 10 वर्षों में पुरानी दुनिया का विनाश नहीं है इसका पूरा लिए ब्राह्मणों को यह पुरानी दुनिया का विनाश हो आ ब्राह्मणों की नई दुनिया की स्थापना हो जाएगी मैंने ब्राह्मणों ने जो शास्त्रों में गाय नहर नौकरियां ब्राह्मणों की मानी गई उनमें बल नंबर है कि उसकी स्थापना और बाकी जो नंबर 2 से लेकर के थर्ड क्लास फोर्थ क्लास जितने भी कुंकूम का ब्राह्मणों का बिना विनाश का मतलब जी हां है तुझको एहसास दिया जाएगा कि तुम तो मर गए तो अपने बाप कोई नहीं जानते हैं हां तुम तो मुर्दे हो जो पाप को जानते हैं कि हमारा बाप प्रजापिता ब्रह्मा कौन है ब्वॉय जानकार है माप को भी जानते हैं अम्मा को भी जानते हैं मैं तुझे बात को जानते हैं जानते हैं कि सृष्टि रूपी रंगमंच पर जो 500 700 करोड़ समूची प्रक्रिया का पिता है वह प्रजापिता है शास्त्रों में जो शास्त्रों में अंत में संपन्न इस स्टेज प्राप्त करने पर प्रजापति कहा जाता है विश्व पति कि पहले विश्व पति होता है पहले पति होता है कि पहले पता होता है पति पहले-पहले पिता होता है बीज बौने वाला कि 501 प्रोडक्ट सत्य तैयार होती है उन शेट्टी ज्ञान लेती है कि मैं आत्मा हूं तो वह आत्माओं का बाप इस मनुष्य शक्तिरूपी रंगमंच पर मनुष्य रूप में प्रकट होता है मैं जो बोला है ब्रह्मा बाबा की मुरली में क्या फादर है तो फादर ज़रूर मिलना चाहिए और फादर से पक जाए और फादर कभी मिले ही नहीं वह फादर है जो हो सकता वाली दुनिया की जो भी आत्मा वो आत्मा सकते हैं कि से मनुष्यात्माओं से मिलते हैं या शुभ का अवतार से मिलते हैं मनुष्य समिति तू मने एक हमेशा आता है

महाविनाश के समय जब महा मृत्यु होती है हर मनुष्य आत्मा के शरीर का नाश होता है वो टाइम तक तक हर मनुष्य आत्मा विशेष रूपी रंगमंच पर मैं अपनी आत्मा के बाप को भी पहचानती है और जो शरीर का बाप है कि मनुष्य शेट्टी का तार बाप है उसको भी पहचानते है क्या कोई थोड़े समय के लिए पहचानेंगे और कोई लंबे समय से संचित पर से लेकर के तब तक आंतक महा मृत्यु के समय तक पहचानते हैं मैं तुझे खून जितनी गहराई से पहचानते हैं पुतली गहराई से याद कर सकते हैं ज्यादा ज्ञान होगा पहचान होगी तो याद भी गहरी घी पूरी पहचान नहीं होगी तो ज्ञान भी नहीं होगा कि हो तो यह याद भी नहीं आएगी तो बताया कि एक टाइम ऐसा आएगा महा मृत्यु के समय के 500 700 करोड़ मनुष्यात्माएं उसे साकार निराकार को पहचाने गी क्या चाहे वह किसी भी धर्म में कंवर्ट करके भारतवासी गए हो कि भारतवासी कंवर्ट हुए ना वह आत्म संयम समय पहचाने गी और जो अपने-अपने धर्म के पक्के हैं वह भी परेशानी जो हमेशा यही कहते आए है कि गौ थिस मेरा काम है अपने वॉइस मेल में विदेशी यह नहीं मानता कि भगवान साकार होता है लेकिन अनु को मानती पड़ेगा जानेंगे कि मनुष्य व्यक्ति पर एक आत्मा है जो कालों का काल है महाकाल है जिसको कोई काल हानि सकता वह सारी दुनिया को खा जाएगा वह बरकरार रहेगी तो बताया था कि किस आधार पर बरकरार रहेगा अरे यू ब्रह्मा बाबा की मुरली में है जो अपने बाप को याद करो जो सुखधाम स्वर्ग को याद करो कि क्या याद करो बापू को याद करो कि सुखराम पर को याद करो और अपने घर को याद करो जहां तुम्हें जाना है यह ज्योति विंदु आत्माओं जहां जाना है उसका पति को याद करें यह तीनों की तीनों कोई एक है जिसमें तीनों ही स्वरूप समय हुए वह स्वरूप आज भी मंदिरों में पूजा जाता है शिवालयों में शिव लिंग है जिसको गीता में कहा है अब व्यक्त मोड़ते ना क्या वह लिंग अव्यक्त मूर्ति है मूर्ति माने साक्षात् मूर्तिमान इरादा है कि वह अगस्त क्यों कहा क्यों को उससे लिंक मूर्ति में हाथ-पांव ना का पान इंद्रियां दिखाई नहीं देती हूं इसलिए वह बेहतर कि वह आत्मा जो लिंग रूप बड़ा रूप है शरीरधारी वह आत्मा निराकारी चेक में ऐसी स्त्री होती है उसे इंद्रियों की स्मृति रहती में इसलिए वह व्यक्ति है कि लिंग की भी है बड़ा रूप भी है और बिंदु भी है कि जो सोमनाथ मंदिर में साकार रूप में दिखाया गया है कि वह बिंदु है और बढ़ा रुख जो ब्रह्मवाक्य मुरली में बोला तो फिर छोटे रूप को याद नहीं कर सकते हो तो बड़े रूपों को याद करो जिस बड़े रूप में मैं आता हूं को चित्रों में भी दिखाते हैं गीता के मुख्य पृष्ठ पर किया चित्र दिखाते हैं मैं अर्जुन का रथ है शरीर अमरीकन वृद्धि शरीर को रख समझ साथ तो आइए जो शरीर रूपी रखा है उसमें वह प्रवेश करता है और उसकी इंद्रियों को चलाता है इंद्रियों रूपी घोड़ों को लुटी लगा अपने गुर्जरों पर हाथ में लेता है विचित्र दिखाते हैं तो इससे साबित होता है मैं तुझे निराकार शिव है वह कोई मनुष्य शरीर में जाता है जो मनुष्य शरीर है ज्ञान का अर्जन करता है इसलिए अर्जुन कहा जाता है क्या में बुद्धिमान नाराज न हों में बुद्धिमान ही अर्जुन करेगा कि वह पूजन करेगा अ बुद्धिमान होगा वहीं धनार्जन करेगा आपके बुद्धू लोग कैश ऊपर बन पाते हैं तो मैं अर्जुन का नाम पड़ा है क्योंकि उसने ज्ञान धन का आयोजन किया है अर्जुन नाम इसलिए पड़ा है कि ज्ञान का अर्जन करके वह भाग्य सदैव हैं कार्य करता है कि क्या जन्म-जन्मांतर का सद्भाव की समाता है तो ऐसा सदभाग्य कराने वाला अर्जुन उसकी तरफ इशारा करके गीता मे बोला मैं बोला तो क्या बोला और सुनाओ क्विडम रिरम कोणते है यह कुंतीपुत्र अर्जुन यह जो तेरा शरीर है चित्र है जो गीता का पहले अध्याय में बोला धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्र कि जो भी अनेकानेक धर्म इस दुनिया में फैले हुए हैं वहीं धर्मों के युद्ध क्षेत्र में सुधारों के आधार पर जो कर मकान बनाए हैं कि भाई मरने के बाद जलाना चाहिए मरने के बाद जमीन में गाड़ ना चाहिए मरने के बाद तालाब या कुएं के पास छोड़ना चाहिए और पार्टियों में बोला है तो यह जो कर्मकांड हैं धर्म के आधार पर और सब आपस में लड़ाई लड़ रहे हैं धर्म वाले हैं कि हम जो कहते हैं हमारा धर्म जो कहता है वह सकते हैं कि एक दूसरे को काट करते हैं और बड़े-बड़े युक्त होते रहते हैं तो बोला कि अब यह बड़ा भारी वृध्दि भगवान कराने के लिए आया हुआ है कि यह युद्ध इस क्षेत्र से निकलता है कि कौन सा चित्र अर्जुन का शरीर रूपी चित्र इस क्षेत्र का इस युद्ध क्षेत्र का ज्ञाता कौन है जानने वाला कौन है इस क्षेत्र के बारे में कौन जानता है जो शरीर रूपी यह क्षेत्र है इसका पूरा जानकारी कौन-कौन जी हां वह ज्ञाता है वह मजबूत शरीर रूपी इस क्षेत्र है वह गेज व माने जाने योग्य है क्या जान नहीं होगी है कि इस शहर मनुष्य शक्तिरूपी रंगमंच पर कौन-कौन सा यज्ञ कुंड है जिसे कि कुंड के आदेश पर हम अपना तन-मन-धन स्वाहा करेंगे तो हमारी मुक्ति और जीवन हो जाएगी वह भी यज्ञ कुंड भी है वह व्यक्ति पेट यह सब उस स्थिति में है कि क्या और यह कैसा है अब हम उसी रूद्र ज्ञान यज्ञ है कि यज्ञ कुंड भी अविनाशी है कि ऐसी अविनाशी रूद्र ज्ञान यज्ञ कुंड है इसका विन्यास कवि होने वाला नहीं सारी दुनिया का विनाश होगा लेकिन इस अज्ञान का विनाश हुआ रूप में ज्योति विंदु रूप शिव-आत्मा नियुक्त और इसका विस्तार इस ज्ञान का मैं तो उस समय से लेकर के अंत तक भी विजिट शरीर रूपी क्षेत्र है से मुकर रथ मेरा यह मुकर्रर रूपी आत्मा जो है वह अविनाशी अ इसका रथ का विनाश होने वाला नहीं है द्वापर युग मे जो बड़े-बड़े युद्ध हुए दोनों युद्धों में भी यह जीत पाने वाला है हार खाने वाला नहीं है जो अलार्म्स अंदर आया था ना बड़ी सेना लेकर आया ना है कि द्वापर युग की बात है हजारों साल पहले घी टो किसने लगाया है इसलिए मुकाबला किया है कोई था है जिसके डर से मुकाबला करके भाग्य कि चंद्रगुप्त हुआ कि चाणक्य हुआ है कि चाणक्य उसका गुरु अ चंद्र गुप्त

ए राजा है तो भला दिया। यही नहीं ऐसे ही कलियुग में है कि राणा प्रताप को एक फोटो से राज्य का राजा था है और आप वायरल मेरे सारे देखा सम्राट में लाखों लाख से लेकर आता था। अ है और महाराणा प्रताप की सेना हजारों में भी नहीं 10,000 20,000 30,000 कि उनकी सेना हजारों ने और उनकी सेना लाखों में और फिर भी पूछ दबाकर कौन पाते थे में लाखों की सेना वाला खबर उसको पलायन करना पड़ा था थे। महाराणा प्रताप ने हाल नहीं भाई।

ऐसे ही शिवाजी अ कि बीजापुर के सुल्तान कि शिवाजी का बाप कि उस सुल्तान के यहां नौकर था। के बाप सुबह सामने आकर के सुल्तान के सामने पूर्ण करता था। शिवाजी ने उसके सामने सर ने बुलाया है है क्या कि सुलतान ने कहा कि उसके बाप से कि शिवाजी के बाप से तुमने अपने लड़के को कुंठित है टॉर्च बंद करना नहीं सिखाया मालिक हैं है तो उसने बाप ने जवाब दिया मैंने सिखाया है तो क्यों नहीं यह बंदगी करता पॉलिश करता है है तो शिवाजी आगे-आगे शिवाजी इंटर मैं जानता हूं किस तरह और इसकी जाती है है और वह मुड़ गया अपने बाप की तरफ और बात के चरणों में सिर रख दिया और हाथ जोड़कर खड़ा हो गया कि मैं ऐसी कोर्स करना जानता हूं कि मैं अपने बाप के सिवाय और किसी के सामने सर नहीं भुला सकता है। बोला हां सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं। आप चाहे तो सरकार तो ताकत हो तो कल लेकिन शाहजी बड़े लड़इया आपके है क्या जो भी पड़े दक्षिण भारत में युद्ध होते थे उन सभी युद्धों में वह जीत कर आते थे है इसलिए वह उनके रुतबे से डरता था अंदर से कौन सुल्तान के साथ जीने का साथ अभी बच्चा है कि इस बच्चे की बुद्धि पर क्यों जाते हैं आगे चलकर सिंह रहेगा वह तुम अंदर से डरता था रास्ता मिल गया साथ ही है तो देखो कि इस मंत्र शक्ति की बीच रूप पावरफुल एक ऐसी आत्मा है कि जिसने संस्कृति रंगमंच पर जिस रूप में जन्म लेकर पार्ट बनाया हो चाहिए राजा के रूप में चाहिए साहित्यकार के रूप में आ है जहां अभी पार्ट बनाया होगा।

ही पाकिस्तानी बंकर पार्ट बजाया है आप किसी के सामने झुकने की तो बात है [संगीत] है तो बताया था हां बच्चा मैं अपने को भी जाने का यह और अपने बाप को दिया गया कि बोरामणी आत्मा है ना वह अपने को भी जानती है मैं सूर्यवंशी हो कि उनके परिवार में कि एक नहीं स्वामी चाहिए की पूजा होती है कि एक लेंगे के अलावा कोई दूसरे लिंग को मानने वाले नहीं है है जो शिवलिंग में शिवालय में पूजा जाता है गांव में या शहर में कि देश-विदेश में खुद्दारियां हुई तो सबसे ज्यादा तादाद में वह लिंग मूर्तियां मिलेगी। इससे साबित होता है कि कोई एक ऐसा टाइम हुआ है जो सारी दुनिया में बोलेंगे मूर्तियां विक्षत हो गई थी है तो वह मनुष्य शेट्टी का बाप है जो शिवलिंग के रूप में दिखाया जाता है वह शिवलिंग को साकार भी है है है जिसका टेस्ट यादगार सोमनाथ मंदिर में दिखाया गया हीरे के रूप में बिंदु जुड़ा हुआ था है और लाल पत्थर के रूप में लिंग था। हां बोल पत्थर लाल क्यों क्योंकि लाल रंग क्रांति का सूचक है कि कैसे हमारी झंडे में एक साबुत से ऊपर का वस्त्र कैसे रंग का हुआ है केसरिया रंग लाल रंग कार कि सारे संसार में ग्रंथी ज्ञानी की कर देता है कि अ क्रांति के आधार पर अशांति पैदा करता है ये दुनिया शांत हो जाती है क्योंकि सारी वसुधा ही एक बाप का कुटुंब एक बाप का परिवार बन जाती है वसुधैव कुटुंबकम ये दुनिया आज बोलती तो है हिंदू मुस्लिम सिख इसाई सब आपस में भाई-भाई बोलते हैं कि प्रैक्टिकल में बनते भी बोलते हैं यह पॉइंट धर्मपिता एक बड़ा करके यह काम नहीं कर सका एक ही मुश्किल मात्रै है कि जिस मनुष्य मात्र का हीरो पार्टधारी का नाम संक्रमण शिव के साथ जोड़ा जाता है कि वह शंकरिया दम है कि शेट्टी का आज पुरुष है दम है आदित्यनाथ आधे है बॉयज यह बताओ कि दुनिया में महादेव है क्योंकि आज भारत में गांव-गांव शहर-शहर में है शिवालयों में उसी की पूजा होती है कि ऊपर वाली ज्योति बिंदु आत्मा की या नीचे वाले मनुष्यात्मा यह ऊपर तरीके उसकी नहीं।

प्रकार है मजबूर नियुक्त हां वह तो फ्रेंड है ब्रह्मवाक्य मुरली में मैंने पूंजी बनता हूं न पुजारी बनता है कि पूंजी बन ओं तो मुझे पूछ बनने योग्य देवताओं के श्रेष्ठ कर्म करने पड़े मैंने टेस्ट कर्म करता हूं न भ्रष्ट कर्म करता हूं मैं करता हूं ही नहीं मैं करता हूं या करता हूं वह तो अगर मैं देवात्मा बंद करके सुख भोगता नहीं कि मैं भोगता हूं या अब वो कहूं तो अब वो आता हूं हां इस शक्तिरूपी रंगमंच पर आता हूं तो आत्मा आत्मा भाई-बहनों के बीच जो बड़ा भाई है उस अ बड़े भाई वो अपने एक्यूट बंदा जो मुझे बाप का बरसा है क्या यौनता अकूत भंडार वह अपने बच्चे को देता हूं कि वह फूट भंडार को वही बच्चा ग्रहण करता है इस मनुष्य व्यक्ति पर कोई बच्चा एक दाण इनका सकता है कि मुझे खुद पूरा-पूरा पहचानता नहीं हूं है कि मैं आकर क्या करता हूं जब मैं आता हूं बुखार आता है मैं आता हूं कि मैं स स्वरूप ही रंगमंच कारण प्रत्यक्ष अथवा रूप में जन्म लेता हूं उसकी यादगार है महाशिवरात्रि क्या बड़े पेड़ बड़ी अज्ञान अंधकार की रात्रि ये कैसी अज्ञान अंधकार की रात्रि जिसमें साड़ी क्यों नहीं है कि सभी धर्म के प्रमुख मत व अज्ञान अंधकार में होते हैं लेकिन वह भारतवासी आत्माएं जो दूसरे दूसरे धर्मों में कन्वर्ट हो गई थी हुई थी ना जान उत्तर सभी धर्मों में भारतवासी कंवर्ट हुए ना वह कंवर्ट हुई आत्माएं चीफ अभी ब्राह्मण बनिए कि क्या बनी है ब्रह्मा बने नंबरवार 9th मई तुम नौकरियों के ब्राह्मण बने हैं मैं तुझे नौकरियों के ब्राह्मण बने हैं वह नौकरियों के ब्राह्मण बेसिक ब्राह्मण है ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय हुए दो अभी भी पढ़ रहे हैं अभी तुम बच्चे भी ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में पले हो कोई इस जन्म में कोई पिछले जन्म में कि तुमने भी बेसिक बना लिया है मैं अभी तुम एडवांस ज्ञान दे रहे हो क्या और जो सुप्रीम टीचर है वह तुमको एडवांस क्लास दे रहा है कि उस एडवांस हमारे इसके बगैर तुम समझ सकते हो है कि मैं सूर्यवंशी आत्मा हूं कि चंद्रवंशी आत्मा हूं इस्लाम धर्म में कंवर्ट होने वाली आत्मा हूं या किस धर्म तंवर ने आत्माओं ने जन्म जन्मांतर जन्म लेकर पार्ट है मैं अभी तुम बच्चे जान सकते हो है क्योंकि तुम कि मनुष्य शक्ति के जो बीज रूप बाप है उसके डायरेक्ट बच्चे हो कि क्या तुमने किसके घर में जन्म लिया है एक बच्चा होता है तो आपके घर में जाति जन्म लेता है ना का कहां जन्म लिया तुमने जाकर जो प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी टाइटल मिल गया है अरे कि तुमने जैसे गर्भ में आत्मा 9 महीने पड़ती है ऐसे तुमने इस वर्ष के शूटिंग पियर सा टाइम में 9 दिन की बच्ची की यह नहीं कि अ थे उस गांव में बाप के घर में जाकर प्ले नहीं प्ले की पूजा ऐसा हो जो ने पहला व हाव-भाव और को कैमरा घुमाओ हाथ उठाओ कर दो मां सरस्वती का कोई आकार नहीं उठा इसका मतलब है कि सभी आत्मा रूपी बच्चों ने बीच रूप आत्माओं ने बाप के घर में जो बाप का घर है वहां जाकर खेड़ी नौध सिंह भट्टी में जैसे गर्भ में बच्चा बनता है वहीं खाता है वहीं पीता है वहीं सांस लेता है बाहर की दुनियां का उसको समिति ने रहती ऐसे तुम बच्चों ने 9 दिन भर मुक्त रहकर एक दिन आना एक दिन जाना और सात दिन बीच मेल मैं नागिन तुम बाप के घर में प्ले हो कि गर्भ में ज्ञान गर्भ वजह से कहा जाता है और पलकर फिर तुमने पहचाना कि मेरा बाप कौन है कि इस नंबर पैसा न कोई तो ऐसे भी होते हैं गर्म नहीं पड़ते हैं होते हैं कि नहीं के 9 महीने पूरे हुए नहीं में अच्छे दिन के अंदर ही बार पांव निकाल दिया बाहर की दुनियां में चलेंगे मैं तो बच्चा कि विपक्ष हुआ नहीं और पहले गर्भपात हो गया ऐसे भी बच्चे हैं कि आगे चलकर क्या जाएंगे जाएंगे कहां है एक बार आए हैं तो दोबारा आएंगे हटी तो एक ही है दूसरी कोई व्यक्ति को है हुआ है से मुक्ति और जीवन मुक्ति प्राप्त करने की दुकान एक ही है क्या इसमें तीव्र अनुभूति प्राप्त कराने वाला दुकानदार एक ही है मैं कौन हूं मैं सिर्फ साकार यह सिर्फ निराकार हैं या साकार निराकार का मेल है साकार निराकार का निषेध आप कब मिल होता है जब वह साकार पुरुषार्थ करते करते कि निरंतन चीज में चिपक जाता है जो ब्रह्म वाक्य मुरली का महावाक्य है क्या कि कि मैं तुम बच्चों को क्या कहता है मैं तुम बच्चों को आप समान बनाने आया हूं तो जैसे मैं कि निराकारी ईएस निर्विकारी निरहंकारी हों वैसे तुम बच्चों को विनम्र और निराकारी निर्विकारी निरहंकारी बना कर दो तो कोई आत्मा तो बाप समान निराकार ज्योति विंदु बनती होगी या नहीं बनती होगी जो बनती है वहीं हीरो पार्ट धरि ओ हीरो पार्टधारी वह या वह नीचे वाला साकार यह ऊपर वाला निराकार साकार है यह ऊपर चाहिए में जो हीरो पार्ट 11 है वह हीरा होता है हीरा को हीरो पार्टधारी कहा जाता है देश की अनुमति दी कि मैं नहीं तो बनता हूं तो बनता है वह हीरो नहीं बनता मैं किसी गिनती में नहीं आता क्या मैं तो निराला हूं तू या हूं मेरे जैसी कोई आत्मा सच रूपी रंगमंच पर है तू है तो तुलना किससे करोगे हुआ है अरे थे उन्होंने बड़ा सुकून कमल फूल कहा जाता है तो सारे फूल लगे हां तब तो कमल फूल के बराबर कहा गया और पूजन के बीच में हुए गुलाब के फूलों की रानी कही जाती है तो सभी फूल हैं सुगंध आने वाले क्या-क्या उनमें * दिव्य गुणों की खुशबू का भंडार है उनमें से फिल्म में रानी ने पवित्रताका पवित्रता की खुशियों का भंडार है जहां पवित्रता होती है बेटियां होती हैं उनके शरीर में से बदबू आती है मेरे दोस्त की शादी होती है बुक बदबू का नाम-निशान ने मैं तो बोला वेश्याओं में जेपी का खून पड़ता है भी नहीं है तो जाति का खून पड़ेगा तो कौन देखेगा कि सुधरेगा तो तुम बच्चों में है जो राजा रानी बनने वाले हैं उनमें कोई मुनावर गुय व्हो कैन कमल के फूल हैं छोटे-बड़े नंबरवार और कोई गुलाब के फूल कुरु है गुलाब हैं कोई ऐसे भी गुलाब हैं जिनमें रूहानियत की खूबसूरती नहीं देखने में सुंदर है है देखने में सुंदर है लेकिन विमान कूट-कूट कर भरा हुआ है को देखे संघ के रंग के विनायक रहते हैं तो देवगन की बदबू भरी हुई है इसलिए उन्हें खुशबू नहीं आती है विदेश विभाग को लाल बड़े कितनी सुंदर लेकिन खुश नहीं होती तो ऐसे ही तुम बच्चे नंबरवार फूल हो उनमें जो अव्वल नंबर फूल कमल का फूल है क्या में शंकर जी को कौन सा फूल के ऊपर बैठा हुआ दिखाते हैं कमल के फूल भूल बैठा हूं मैं [संगीत] तुम कमल आसन है के गृह सचिवों के बीच रहता है ग्रंथियों को ज्ञान देता है दृष्टियों के पास खाता है तीसरा रहता है और गृहस्थी बनकर रहता है कि घर ग्रेट की कीचड़ में रहता है कि क्या विश्व पाई है या नहीं है तो खिंचा हुआ था कि जड़ में रहता है लेकिन उद्योग से प्रणाम रहता है यह खबर फूल का डिजाइन है कमर को ऊपर उठायें रहेगा एक टीचर की एक बूंद भी नहीं रहेगी है तो बताया कि निशानी है एक से करने में शाकाहारी एक पैकेट में कार्स में रखा है ही कमल फूल जैसा जीवन बिताने वालों की यादगार है तो बताया था यह बच्चा अपने आप को भी पहचानता है और अपने बाप को भी पहचानते हैं मैं अपने कोई पहचान न तो बाप को भी नहीं पहचाने न और यह तो कि तुलसीदास की रामायण में ही तुलसी ने लिखा है क्या और जी जान नव्हते ही देव जना ई और जान हो तो तुम्हें तुम्हें हुई जाएगी है क्या तो क्या बोला मैं बोला कि तुलसीदास में अपने भगवान को बुला लो तो यही जान ही जानो तुम 123 उसको देव जनाई है जिसको तुम जानते हो और दुनिया में 500 करोड़ मनुष्य में से को यूं से हीरो पार्टधारी को नहीं जानता हूं हां जी यही जानो तुम जानते हो तेही उसको देवगन आई उसको तुम जानकारी दे देते जानकारी दे रहे हो कि उसके स्वरूप की भी जानकारी दे देते हो और उसका बाप कौन है है उसको प्रत्यक्षत आरोपी जन्म देने वाला बाप कौन है है उसकी जानकारी थे तू मने कि हे भगवान कि तुम अपनी जानकारी भी उसे देते हो और उसकी भी जानकारी उसे दे देते हैं कुछ समझ नहीं आया तो यही जाना हो तहत योजना की और जान तुम्हें वह क्या करता है तुमको जान करके घू कि वह तुमको जान जाता है तो क्या बन जाता है तुम्हें हुई जाएगी तुम ही बन जाता है क्या बन जाता है घृ लेकिन तुम निराकार को जानकर के क्या बन जाता है निराकार ज्योति बिंदु बन जाता है जो शिवलिंग कि सोमनाथ मंदिर में और निराकार आत्मा के रूप में हीरा के रूप में और साकार लिंग के रूप में पूजा गया वह शिवलिंग यह किसकी याद गार हुआ कि सिर्फ रफ्तार कि यह सिर्फ आकार की या निराकार साकार दोनों के मिल्की वे को साकार में निराकार निरंतर स्मृति में रहे कि उसे साकार निराकार के मेल को तुम बच्चे कहते हो शिव बाबा कि भक्तिमार्ग में भी कहते हो ना शिवबाबा क्या कहते हो हैं कि भक्तिमार्ग में तुम शिव बाप बोलते आए या शिवबाबा बोलते क्या बोलते शिवबाबा शिवलिंग बोलते आए या शंकर लिंग बड़ा शिवलिंग क्यों हुआ है तो शंकर लाल यादव अ जो शरीर है लिए यादगार है बड़ा रूप वह शंकर का शरीर रूपी लिंग लिंग होता तो जो कहता है कि मेरे लिंग की पूजा होती है क्या कि देवताओं के लिंग की पूजा नहीं होती है वो मेरे लिंग की पूजा होती है देवताओं की और स्त्रियों की पूजा होती है हद तक अमल पार्षद कमल मुख कमल नीलकमल है या होती है ना है तो देवताओं की अंतड़ियों की पूजा और तुम्हारी वह है अब मेरे लिंग की पूजा यह कहने वाला कौन कि वह कैसे मेरे लिंग की पूजा होती है उसको लिंग होता है तो इसको होता है वह ऐसा तार मोनू शेट्टी का बाप कि वह कहता है मेरे लिंग की पूजा होती है वह तो कहते है नमक पूरी बनता हूं ना पुजारी बनता हूं मेरी पूजा होती है मैं तुझे इसकी पूजा होती है लिंग की व है मन शिकार टाकावा मनुष्य कि जो अविनाशी मनुष्य है जिसका शरीर इस शक्तिरूपी रंगमंच पर भूत भविष्य वर्तमान में कभी लोप होता ही नहीं है तू बताया है एक बीयर के बाप को मैं अपना है और तेरा परिचय देने के लिए आना पड़ता है कि वह किस लिए आता है कि किसलिए आता है अपना भी परिचय देता है और जब तेरा मन शेट्टी के बाप का परिचय देता है कि किसको देता है ने अपने बड़े बच्चे को देता है तो फिर बड़ा बच्चा कि वह परिचय प्राप्त करके अपना और अपने बाप का परिचय प्राप्त करके बाप समान बन जाता है कि अथॉरिटी कि हिस्ट्री में को दूर राजाओं के बड़े बच्चे हुए हैं कि वह अपने बाप की अथारिटी बने हैं या नहीं बने राज्याधिकारी बने या न बने तो यह परंपरा है यहां से शुरू हुई थे उस सुप्रीम सौल बाप ने यह परंपरा डाली दुनिया की जितनी अच्छी अच्छी परंपरा हैं वह बापा कर डालते हैं और जितनी गलत गलत खराब खराब परंपराएं हैं वह मूर्ति डालते हैं इसलिए न तो बनाता है कि क्या बनाता है नर्क बनाता है और स्थिति में रहने वाला स्वभाव वह बनाता है सुनना है रुक कौन बनाता है जिसमें प्रवेश करता है वह स्वर्ग बनाता है कैसे सदा काल परिस्थिति में रहने की प्रैक्टिस करते थे ये सदैव शुभ स्थिति में रहेगा तो स्वर्ग बना सकेगा ये सदैव शुभ स्थिति में नहीं रह का या स्वधर्मे निधनं हमसे या के कार्यक्रमों भयावह है सामने आत्मा के धर्म में आत्मा की स्मृति में जो रहेगा का यह वही सिस्टर है यहां पर धर्म मुसलमानों का धर्म विज्ञान का धर्म सिक्खों का घर रॉक ओं का धर्म या कोई भी अपनाएगा तो वहां पर धर्म है पर आने पर आए हैं कि स्व 28 व मनीष सूर्यवंशी बाप के बच्चे नहीं है ओम श्री बोला स्वधर्मे निधनं हमसे है अ स्वमान मैं आत्मा के धर्म में शरीर छूट जाए आत्मा की स्मृति में से सूख जाएगा स्वर्ग में जायेगा है और दूसरा की स्मृति में दूसरे धर्म पितरों की स्मृति में सभी छोड़ेगा एक तू ना मिला है चाहे वह ब्रह्म हो कि चाहे वह इब्राहिम ओं चाहे वह क्राइप्टों कोई भी धर्म पिता को का गुस्सा पर हैं कि क्या पर आए हैं आप अपने नहीं है मैं तुम्हारा अपना एक बाप तो बताया पहले-पहले बाप आकर आत्मा को रिलैक्स रहिए आत्मा तुम्हारा विशेष पार्टी रंगमंच पर है कौन-कौन सी आत्मा को अ दूसरे मनुष्य सृष्टि का है जो बड़ा भाई यात्रियों के बीच में है आत्मा भाई भाई कैसे हैं आप यह तो सब बड़े भाई को रियलाइज कराते हैं कि तुम्हारा विशेष पार्ट क्या है तो जो आत्मा करिए लाइट्स करते हो कि वह आत्मा का ढूंढ रिलाइजेशन और पिंटू महात्मा का पाठ क्या तुम आत्मा का पाठ क्या तुम आत्मा का पाठ क्या तुम्हारा पार्ट क्या उनका पार्टी क्या यह आत्माओं के पार्टी कार्यालय सैनिक उनका यह कि अरे के लिए दाढ़ी बहुत जूस वह का यह कोई नीचे वाला कराएगा हैं तो यही जानो तेरी देव जनाई उसके पार्ट को तुम जानकारी दे देते हो वह जान जाता है मैं इस पुष्टि का बाप हूं तो मुझे इस चीज का बाप है वह सब उन छात्रों को अपने पार्टी की जानकारी ऐसा ज्ञान देता है जो ज्ञान श्वेतकेतु आप एक पारदर्शी होता है है क्या [संगीत] ऐसा विद्यालय स्थापना करता है जिसे कहा जाता है मधुबन मधुबन में मुरलिया बाजे क्या मुरली कहां बजे मधुबन में और मधुबन कोशिश महल बनाता है कौन सा महल शीशे का महल इधर भी चीज पे से ऊपर अपना और दूसरों का चेहरा ढक आया और सबसे बड़ा बताया है कि मुरली में सबसे बड़ा शीघ्र शेट्टी का कि आत्माओं का पाप परमात्मा क्या कहा आत्मा को कौन करेगा आत्माओं का बाप परमात्मा आत्मा सो परमात्मा आत्मा सो परमात्मा बनती है लेकिन हर आत्मा को परमात्मा निबंधित एक आत्मा है जो कि परमेज़न चीज में पुरुषार्थ करके पहुंच जाती है ए पप्पु परमात्मा के ही धरती है जिसकी याद गार मंदिर बनता है यहां नीचे ऊंचा मंदिर बनता घ्र अरे कि यह कहते हुए चीज तेरी में कोई मंदिर नहीं है कौन सा मंदिर अमरनाथ मैं इसका नाम अमर माने जो मरते ही नहीं देवता अपनी इच्छा से शरीर छोड़ ना चाहे तो छोड़ते हैं इच्छा नहीं है तो शरीर नहीं छोड़ते इच्छामृत्यु को कहा जाता है अमर है ऐसे अमर देवताओं का नात है क्या कि ऐसी आत्मा में जो अमर बनती हैं तो अमर बनने से पहले उन आत्माओं को नाक में नकेल डाल देता है ना डाल ना बन जाता है नाथ ने स्वामी नाथ मनीष स्वामी की शादी होती है तो पत्नी को नाक में डाल देते हैं नकेल डाल देते घोड़ा होता है घोड़े को कब्जे में करते हैं तो क्या डाल लेते हैं अब हम डाल देते हैं और होता है तो बैलेंस से काम लेने के लिए क्या करते हैं कि नाक में के नाते डाल देते हैं ना वैसे भी भक्तिमार्ग में में कितने नाथ लगाए हुए हैं नॉर्थ गए हुए हैं कितने ना फैलाए हुए हैं नॉर्थ गए हुए थे उन नवनाथों मेंं एक है वैल्यूलेस है और आठ है वैल्यू बल यो यो आवत दिशाओं के मालिक पढावत दिगपाल कह जाते हैं गोपालमणि दिशाओं को पालने वाले पूर्व दिशा को कोई पश्चिम दिशा को को उत्तर दिशा को कोई दक्षिण दिशा को पालना करते हैं फिर उनकी कौन-कौन की दिशाएं भी है कि चारों दिशाओं के कोण में भी हैं उनको भी पालने वाले कोई है तो आवाज जगपाल गए हुए थे और अब तो दांव लगाए हुए हैं है क्या जो अश्क देवों की पूजा कहां होती है जो सत्य है दक्षिण भारत में होती है आदि देवों की पूजा नार्थ इंडिया में नहीं होती है मैं अक्सर देवों के मंदिर दक्षिण भारत में यादगार बनते हैं मूर्तियां बनती हैं पूजा भी होती है नार्थ इंडिया में पूजन क्या कारण है क्योंकि दक्षिण भारत है भारत का विदेश है क्या जो विदेशी है वह विदेशी नीति भगवान को प्रैक्टिस करते हैं विदेशी बुद्धिमान होते हैं या भारतवासी बुद्धिमान होते हैं तो वह विदेशी भगवान को पहचान लेते हैं और पहचान करके उनकी मूर्तियां बनाते हैं और अब तो देवों की है जो पहले पहचानते हैं और दक्षिण भारत वालों को पहचान देते भी हैं मूर्तियां बनाते हैं मंदिर और उदार बनाते हैं हुआ है और दक्षिण भारत में ही उनकी पूजा होती है कि नार्थ इंडिया में स्थित देवों की मूर्तियां सांप

नहीं बनाई जाती है कि उड़ीसा में बनाई जाती है के अवशेषों के मंदिर है। नहीं दक्षिण भाग में है उसका अरुण व्यास फोन कहां पर छोड़ते हैं? इस प्रकार उपयोग उनका जन्मदिन के बीच में होता है। अरे बच्चा पैदा होता है तो पहले घर वाले पहचानेंगे इस या बाहर वाले पैसा नहीं लिया। सदैव विदेशों में प्रत्यक्षता रूपी जन्म लेते हैं या कि स्वदेश जो भारत नार्थ इंडिया कहा जाता है कि वह पहले पहचानते। वैसे भी देखो एडवांस ध्यान नार्थ इंडिया वाले पहले लेते हैं या दक्षिण इंडिया वाले लेते हैं कि ऐश्वर्या ज्ञान को पहले कौन पहचानते हो?

हुआ है दक्षिण भारत वाली पहचानते हैं कि नार्थ इंडिया वाले नहीं पहचानते और आज भी नार्थ इंडिया में पहचान नहीं है। इसलिए नार्थ लिया कि जो चैनल से टीवी चैनल आप कुछ ज्यादा हो हल्ला मचा रहे हैं कि दक्षिण भारत में उनका प्रभाव नहीं है कि दक्षिण भारत वाले में अंधश्रद्धा के आधार पर सुनी सुनाई बातों पर विश्वास नहीं करते। यह भारतवासी हैं जिनके लिए ब्रह्मा बाबा की मुरली में है कि भारतवासियों ने सुनी सुनाई बातों से दुर्गति पाई है। कि यह टीवी चैनल सु सु करके यह मोबाइल देख-देख करके यह इंटरनेट को सु करके अखबारों की बातें सुनकर कि इंटरनेट को सब्सक्राइब करें मां था खराब कर लेते इतना माथा खराब करते हैं कि चेहरे उतर जाते हैं कि खुशी गायब हो जाती है।

हो तो क्या करना चाहिए? यह संख्याओं का योग है। मैं सिया चेहरा लटकाने का योग है रोने का मजमून हूं मैं। कि इस संगम युग के थोड़े से समय में अगर हमने मौजूद को गंवा दिया चेहरा उतर गया खुशी चली गई तो वहां लंबे समय तक खुशी चली जाएगी जन्म-जन्मांतर के लिए।

वह ड्रामा 5,000 वर्ष का है और यहां शूटिंग सिर्फ सौ वर्ष में होती है। मैं तुझको कितना अंतर पड़ेगा इतना ज्ञान का भंडार होना चाहिए आत्मा के अंदर कि कैसी भी स्थिति आ जाए कैसी भी परिस्थिति आ जाए लेकिन खुशी न जाए तो है क्या का बाप आकर हमको क्या देते हैं?

हुआ है कि क्या देते हैं? ज्ञान से आते हैं खुशी।

अभियान से आता है देख लो। है क्या के ज्ञान से सुख आता है खुशियां आती है और अज्ञान से दुर्गंध मनुष्यों से जो मिलता है सुनी-सुनाई बातों से जो कुछ मिलता है वह मिलता है अज्ञान में। आ भगवान से जो मिलता है वह ज्ञान जिसे खुशी है वह ज्ञान है।

ए ट्री पहचान है तो सुनी सुनाई बातों पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए। हां सुनी सुनाई बातों पर विश्वास करेंगे दुर्गति को पाएंगे।

तो वहां भी द्वापर युग से जो धर्मपिता में आएंगे सुनी-सुनाई बातें सुनाएंगे।

तो उनकी बातों से हमारी दुर्गति होगी दूसरे धर्म में चले जाएंगे। हैं क्या दूसरे धर्म में बोले जाएंगे तो हम को दास बनाकर रखेंगे या राजा बना बैठाएंगे? दासी बना कर बैठा हूं।

और दांत दासी मैं दुखी होते हैं। कि उनके ऊपर राज्य करने वाले सुखी रहते हैं और दासियों के पास ज़्यादा धन संपत्ति होती है साकार होते हैं या उनके ऊपर कंट्रोल करने वाले ज्यादा साकार होते हैं उनके ऊपर कंट्रोल करने वाले जो मालिक होते हैं वह ज्यादा सा उपाय होते हैं।

वह गरीब होते हैं और वह साकार होते हैं।

इसलिए तुलसीदास ने बोला नहीं दरिद्रतम पाठक का पुन झाला। गरीबी के समान दुनिया में कोई भी पाप का ढेर नहीं है।

हुआ है? क्या सबसे बड़ा दुख है गरीबी रोटी कपड़ा और मकान नहीं मिला हुआ था खाने के लिए रोटी नहीं बच्चे भूख मर रहे हैं।

पुलिस वाले तो अच्छी तरह से जानते हैं कि ऑल स्टेट्स में इतना मरा नहीं पड़ता है भूखों से। इसे उड़ीसा तो प्रसिद्ध है यहां कि ऐसे-ऐसे परिवार हुए हैं जो पूरे के पूरे परिवार भूख से मर गए।

अखबारों ने ऑल इंडिया में सारे विश्व में प्रसिद्ध हो गया यहां की माताएं उसी हो गई भूख से व्याकुल अपने बच्चों को काट कर दो [संगीत]

और वैसे भी देखा जाए तो

अभिषेक भारत का कौन सा स्टेट है जहां सबसे ज्यादा गरीबी के?

19th

अभी बाप कहते हैं।

सबसे बाप कहते हैं ऐसी याद में जुड़े जो कभी कोई पकड़ नहीं सकता है।

कर दो

पक्ष लेते हैं और गिरा देते हैं।

जन्म जन्मांतर की कमाई चट्टों जाती है। 25 मार से नीचे गिरते हैं तो अ गुड डे को टूट जाते हैं।

प्रोत्साहित करने योग्य ही नहीं रहते है।

इसलिए बताया कि आत्मा का रियलाइजेशन परमात्मा के सिवाय कोई नहीं हरा सकता। परमपिता शिव यहां कुछ नहीं बोला था।

क्या

ब्रह्म बाबा की मुरली में कि परमात्मा बोला परमात्मा से पहले परमपिता शब्द नहीं बोला। कि आत्मा का रियलाइजेशन पहन कर आ सकता है परमात्मा जो परमात्मा का नाम शब्द है परम पिता के बाद आता है जैसे शिव के बाद शंकर आता है।

मैं तो शिव है परमपिता जिसका कोई पिता ने।

और शंकर है

क्या मनुष्यों का बार देवताओं का वास। हां बोल राक्षसों का भी बाप है वह देवताओं का भी बाप है वह मनुष्यों का भी बाप है।

ब्रह्मा बाद के मुरली में।

सूरत की दुनिया मेरी है तो नर्क दुनिया मेरी नहीं है क्या? स्वार्थी दुनिया किसकी है देवताओं की? देवता में बड़ा देवता कौन महादेव है तो नर्क की दुनिया उसकी नहीं है नरक की दुनिया है। मैं पराई स्त्री पर पुरुष का विष पीते हैं। इस बीच किसे कहा जाता है? 12 इस स्त्री पर पुरुष के भोग करने को विश कहा जाता है।

और कौन है?

सफाई

हुआ है इस संसार में शास्त्रों में कोई भी सफाई गाया हुआ है।

संकलन

वह भी से पीता है।

तो जो भी स्पिनर वाला है वह बड़े से बड़ा खुश हुआ या नहीं हुआ है? बंटे बड़ा खुश हुं। जो हम अर्पित है वह बड़े से बड़ा देव बताओ है। जो ब्रह्म वाक्य और यह बोला मैं अभी गीता ज्ञान अमृत नहीं कहेंगे।

कि हमारे ब्रह्मा के मुख से जब तक बोलते रहे तब तक गीता ज्ञान था ने क्या कहा? क्या कहा? गीता ज्ञान था पर अम्मा के जीते जी अम्रत नहीं था क्यों?

क्योंकि उसे गीता ज्ञान का ब्रह्माकुमार-कुमारियों ने मन धुंध किया भ्रमण किया भ्रमण किया तो ब्रह्म कुमारी करें ब्रह्मा जी झाला कोई ब्रह्म कुमारी ने व्यक्तियों ने किया ब्रह्म की सर्विस तोड़ने के बाद जो आया दूसरा संसार रूपी जंगल में।

हर रामबली आत्मा वह मंथन करती है।

जिसके लिए के साथ में बोला गया है क्या? तू क्या बोला है? क्या बोला और सातवें बोला गया कि चित्रकूट महिमा अमित न कहीं मामु निगाहें।

है क्या?

टूटने पहाड़ में एक विचित्र पहाड़ है जिसकी बड़ी भारी महिमा है।

कैसा पहाड़ विचित्र पहाड़ चित्रकूट?

उस चित्रकूट में

परं ब्रह्म का आवास है।

क्या?

किसका पर्स है? परं ब्रह्म परं भ्रमण।

अरे तेरे पड़े रहने वाला ब्रह्मा में पूछते ऊंची स्टेज वाला ब्रह्मा।

कौन है ऊंची-ऊंची स्टेज वाला ब्राह्मण?

आपने किस चीज ध्यान करने वाले रुद्र बच्चों का मां। हां यह idea धुंध ब्रह्माकुमारी से तैयार होती है मेरा फोन कहां बा ब्रह्मा ब्रह्मा विष्णु व है विष्णु की अरुण माला।

विष्णु की है और रुद्र की है रूद्र रूद्र माला मुंड माला मुनमुन आत्मा है मनन चिंतन मंथन करने वाली।

कि यार उन है धड़क यह मनन चिंतन मंथन नहीं करता पवित्र सकता है।

क्या पवित्र रह सकता है और पवित्रता में सिस्टम है विष्णु कौन से स्टेट है कविता में से एक है विष्णु बैठा हूं। थैंक यू।

तो

पुरूषों दोनों मामलों में पहले कौन तैयार होती है?

मुंडमाला जिससे उत्तरमाला कहा जाता है।

अरुण माला धड़क। पहले कौन सा वाला तैयार होती है?

रूद्र वाला मुर्गा वाला चिंतन मंथन करने वाली।

तो जो रुद्राक्ष की याद आ रहे हैं।

कहा कि अधिकांश रुद्राक्ष की यादगार पल।

बोर उधर की आंखें हैं। अपने आंख।

वह रुद्राक्ष के मनके रुद्र की आंखें हैं।

जिनमें मुख्य विषय बने हुए हैं।

कोई में एक मुख्य कोई मैं चार मुखर कोई नया यह तो यह बहुत तो यह क्या कहते हैं?

भले लूले लंगड़े हैं लेकिन रुद्र की आंख हैं बुजुर्ग उसकी आंखों से देखता है।

कि रुद्राक्ष के जो मरते हैं सोंठ उनकी आंखों से देखता है।

कि उन्हें पहला मां का कौन सा है?

हुआ है

मैं स्वयं रूद्र पहला बनता है।

और उसके साथ जो दूसरा लड़का है।

उसको कहते हैं रुद्राणी।

क्या? रूद्र और रुद्राणी बुर्र गिराने।

बड़े से बड़े योगी हैं।

यह नंबर वार्ड की लिस्ट में है।

रूद्र।

पुरुषों में बायो घी। रुद्राणी स्त्रियों में बड़ी योगिनी योगिनी माता का नाम सुना है? योगिनी माता तू क्या करती है?

हुआ है?

योगिनी माता क्या करते हैं? माता है ना धैर्य ना है और निराकार इस स्टेज में रहती है ना? तुझे निराकार यह चीज में रहती है उस पर दारू पी माता का नाम तुलसीदास ने दिया है चित्रकूट को उठवाने पहाड़।

कैसा पहाड़ विचित्र पहाड़ है उस विचित्र पहाड़ की ऊंचाई पर वह मैं मंगवा।

जो क्या कहा जाता है? रुद्राणी दें।

क्या मना योगिनी माता में निवास करती है?

जो भी जाएगा चित्रकूट में उस माता का दर्शन जरूर करेगा। कहां है?

कि चित्रकूट पहाड़ पर है जहां बस्ती बसी हुई है वहां रहती है या जंगल में रहती है कहां रहती है?

जंग यह मंदिर दिखाया हुआ है।

क्या?

किसी से लगाओ लगाने वाली सी लगाओ लगाने वाली नहीं। वह निराकार यह स्टेज में रहने वाली योग्य नहीं है।

वो योगिनी योगी राज के साथ क्या काम करती है?

आप क्या काम करती है?

जिस काम के लिए वह बाप स्थिति पर आता है आता है ना? यदि किसी मनुष्य में प्रवेश करता है? करता है या नहीं? जिस मनुष्य में प्रवेश करता है?

पुलिस होता है या स्त्री-पुरुष लेकिन उससे काम पहले क्या लेना है? माता का या पिता का? माता का काम लेना है कि माता का काम लेना है? तो माता का काम है राजधानी स्थापन करना है।

सूर्यवंशी की स्थापना करना है।

बॉस सूर्य इस एक्ट की पालना करने वाली माता है जब से वृक्षों के बीच में प्रत्यक्ष होती है तब से वृक्ष पुष्पों की माला बनना आरंभ हो जाता है। हां।

और वह आत्मा की राजधानी विस्थापन करने में।

विशेष कार्य करती है।

योगी विशेष काम करेगा राजधानी स्थापित करने में? या भोग ही करेगा योगिनियां योगिनी माता उपयोगी है?

मैं तो दोनों से मिलकर के राजधानी स्थापना होती है। राजा की धारणा शक्ति विस्थापन होती है।

एक नई दुनिया की धारणा शक्ति कौन?

हुआ है?

सी है छोटी मां।

नई दुनिया की धारणा शक्ति कौन छोटी मां को आएगी और तक राजधानी स्थापना की जय हो।

ओम शांति ओम।