Transcription
हनुमान चालीसा की 40 पंक्तियां, 40 कहानियां, 40 रहस्य। जो श्री हनुमान चालीसा का पाठ करता, उसको छीर नीर का भेद समझ में आने लग जाता है। दूध और जल का क्या गलत है, समाज में क्या अच्छा है, समाज में उसको देखने लग जाता है।
एक बार रावण ने कहा हनुमान जी से, "एक-एक मुक्के का युद्ध हो जाए।" हनुमान जी ने कहा, "हो जाए।" हनुमान जी ने कहा, "रावण, मार भाई।" रावण ने कहा, "नहीं बंदर, पहले तू मार।" हनुमान जी ने कहा, "नहीं नहीं, पहले तू ही मार ले। रावण ऐसा ना हो, मैंने मार दिया तो तू मारने लायक बचे ही ना।"
जैसे ही मुक्का ताना हनुमान जी ने, ब्रह्मा जी ने हाथ जोड़े, "बाबा, हे हनुमान जी, राम जी का सारा प्रोग्राम ही फेल हो जाएगा।" इसलिए मैं दुनिया से कहता हूं, भगवान श्री हनुमान जी से कोई अपना काम कराना हो तो कभी ये मत कहो कि हनुमान जी आपकी जय हो, हनुमान जी आप ये काम कर दो, हनुमान जी आप ये काम कर दो। नहीं, एक बार कह दो, "हे हनुमान जी, मैं श्री राम का भक्त हूं, हे प्रभु ये मेरा काम नहीं है, राम काज है।"
राम जी ने अंगूठी दी तो अंगूठी तो यहां पहनने की चीज है। हनुमान जी के पास जेब तो थी नहीं, जनेऊ में डाल लेते। हनुमान जी ने मुख में रख लिया। किसी ने कहा, "ये मुख में रखने की चीज है?" हनुमान जी ने कहा, "मुद्रिका तो मुख में रखने की चीज नहीं है, लेकिन जो इसमें लिखा है राम नाम, वो मुख में ही रखने।"
सब रो रहे हैं, श्री राम भी रो रहे हैं। लेकिन जैसे ही हनुमान जी ने एक आंसू की धार टपकती हुई श्री राम की आंख से देखी, हनुमान जी ने कहा, "नाय प्रभु, नाय प्रभु, दुनिया में सब देख सकता हूं, लेकिन आपकी आंख में आंसू नहीं।"
करोगे भी तो क्या करोगे? तो इतने आतुर बैठे थे। अच्छा ट की तो मार करके रावण के चाटे बजाता हुआ समुंद्र में लपेट हुआ खींचना, त्रिकूट उखाड़ दो, सीता जी को कांधे पर डाल कर के ले आऊ। दुनिया पर संकट आए तो उसको भगवान हर लेते हैं। भगवान पर ही संकट आए तो उसको हनुमान।
[संगीत]
महाराज जी पॉडकास्ट बाबा में बहुत-बहुत स्वागत है आपका। जय सियाराम, जय सियाराम। कैसे हैं आप? खूब हनुमान जी कृपा। हनुमान जी कृपा तो सभी पर है और आप पर तो मेहरबान है हनुमान जी। जो आपके मुख से हनुमान चालीसा निकलती है, मतलब सुनकर हम लोग तो प्रसन्न होते ही हैं और मैं तो यह मानता हूं, हनुमान जी कहीं ना कहीं बहुत ज्यादा प्रसन्न होते ही होंगे। श्री जी तो राम नाम सुनकर प्रसन्न होते ही हैं। मैंने आपके इतने सारे पॉडकास्ट देखे, सब पर कहीं ना कहीं मिलाकर सेम ही क्वेश्चन आ जाते हैं कि हनुमान जी, हनुमान जी के बारे में यह बताएं, यह बताएं। मैं सिंपल, स्पष्ट एक चीज। हनुमान चालीसा ना कभी कहीं हुआ है, ना कहीं हो रहा है। इसलिए आज यहां हो रहा है। हनुमान चालीसा की 40 पंक्तियां डिकोड कर दीजिए। 40 पंक्तियां, 40 कहानियां, 40 रहस्य। बिल्कुल, बिल्कुल।
सबसे पहला जो यह पढ़े, हनुमान चालीसा जो शब्द लगा है, जो कोई भी पढ़े, पुरुष, नपुंसक, नारवा, जीव, चराचर को है, जो यह पढ़े हनुमान चालीसा।
[संगीत]
होय सिद्धि साखी गौरी सा। तुलसीदास जी कहते हैं, जो हनुमान चालीसा पढ़ेगा, उसको सिद्धि प्राप्त होगी। अच्छा। और यह मैं नहीं कह रहा, साखी गौरी सा। साखी कहते हैं साक्षी को, गारंटर को। ओके। गारंटी कौन ले रहा? जो यह हनुमान चालीसा पढ़ेगा, उसको सिद्धि प्राप्त होगी। भगवान महादेव। भगवान महादेव। गौरी सा, गौरी के ईश, पार्वती मां के ईश, पार्वती के पति, भगवान महादेव कहते, "भाई गारंटी मेरी है, तुम तो हनुमान चालीसा पढ़ो।" जो यह हनुमान चालीसा पढ़ेगा, उसको सिद्धि प्राप्त होगी, इसकी गारंटी मैं ले रहा हूं। गौरी का ईश बोल रहा हूं।
तो तो हनुमान शुरू कहां से होता है? श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकर सुधारि। बरन रघुवर विमल जसु, जो दायक फल चारी। सबसे पहले शब्द लगा श्री गुरु। मैं अपने श्री गुरुदेव के चरण सरोज रज, चरण चरणों में सरोज कमल में प्रणाम कर रहा हूं। श्री गुरु चरण सरोज रज और उनसे प्रार्थना कर रहा हूं, "निज मन मुकुर सुधारि।" मेरे मन रूपी मुकुर कहते दर्पण को, मेरे मन रूपी दर्पण को साफ करो। क्योंकि जब मन का दर्पण साफ होगा, तब ही तो परमात्मा के चरित्र का लेखन होगा। बिल्कुल। ब्रह्मा जी ने गाया है, ब्रह्मानंद जी ने गाया है, "मन का दर्पण साफ कर, दिल का दर्पण साफ कर, दूर कर अभिमान को।" कहता है ये ब्रह्मानंद। ब्रह्मानंद बीच सब आएगा सोई परम पद पावेगा। सोई परम पद पावेगा। राम, दिल के दर्पण को साफ कर लो। हे प्रभु, मेरे मन के मुकुर को निज मन मुकुर सुधारी।
उसके बाद बरन रघुवर। अब यहां तुलसीदास जी ने थोड़ी सी चतुराई करी। अच्छा। बरन रघुवर, यानी कि मैं श्री राम जी के गुण गायन की कथा को प्रारंभ कर रहा हूं और लिख क्या रहे हैं? हनुमान चालीसा। चालीसा और बोल क्या रहे हैं? बरन रघुवर। क्योंकि तुलसीदास जी जानते हैं, मैं कितना भी कहता रहूं, बरन हनुमत विमल जसु, सुनेंगे ही नहीं। फिर मांगते रहना, "सब सुखल है तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काओ को डरना।" कुछ मिलने वाला और मनोर जो कोई लावे, सो जी। कुछ नहीं मिलेगा। मिलेगा हनुमान जी की प्रशंसा करोगे तो। जैसे ही लिखोगे, बरन रघुवर विमल जस, मैं श्री राम जी के निर्मल यश का गायन करने जा रहा हूं और उसको गायन करने क्या होता है? जो दायक फल चारी। जो चार फल देने वाला है। क्या-क्या? अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष। इसका एक अर्थ यह है कि श्री हनुमान चालीसा का जो पाठ करेगा, उसको चारों पदार्थ प्राप्त होंगे। समाज में अर्थ, आध्यात्मिकता में धर्म, उसके बाद अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष, सब कुछ मिलेगा। श्री हनुमान चालीसा के गायन से।
उसके बाद लिखा, "बुद्धिहीन तनु जानि के।" मैं बुद्धिहीन हूं, कवि न हो, नहीं चतुर कहाव। तुलसीदास जी ने भी लिखा, "मति अनुसार अनुरूप राम गुण गाव।" बुद्धिहीन तनु जानि के। अब लिखा, "मैं सुमिर पवन कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, और हरहु कलेश विकार।" हे हनुमान जी, पहले मेरी फिल्टरिंग करो, मेरे भीतर से सफाई करो, मेरी क्या-क्या निकालो? हरहु कलेश विकार। और दो क्या? बल, बुद्धि, विद्या। हे प्रभु, मुझे बल दो, मुझे बुधि दो, मुझे विद्या दो और मेरे क्लेश को मिटाओ। क्लेश मिलते हैं हमें बाहर से, विकार आते हैं अंदर से। तो इनको क्लेश को भी मिटाओ, विकारों को मिटाओ, मुझे क्लेश और विकार रहित करो। हे हनुमान जी, मैं आपके नाम का हनुमान चालीसा शुरू करने जा रहा हूं या जा रही हूं। रोज सुबह उठकर के सबको हनुमान चालीसा करना चाहिए। बिल्कुल। रोज श्री हनुमान चालीसा से अपनी जिंदगी की शुरुआत करनी चाहिए।
उसके बाद फिर हनुमान जी की जय की, "जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।" हे हनुमान जी, आपकी जय हो, जय हो, जय हो। हनुमान जिसने अपने मान का हनन कर लिया। गुण सागर, हे हनुमान जी, आप ज्ञान और गुण के सागर हैं। और उसके बाद, "जय कपीश।" बंदरों के ईश हैं। लोक उजागर, दुनिया जानती है कि आप बंदरों के ईश हैं। हनुमान जी पहले सुग्रीव के यहां नौकरी करते थे, एक तरीके से यह मानिए कि मित्रता में रहते थे, यह यह मानिए कि उसके नीचे काम करते थे। कपीश कौन था? सुग्रीव। सुग्रीव बंदरों का राजा था। सुग्रीव। लेकिन एक दिन सुग्रीव ने हनुमान जी से कहा कि आज तुम्हें एक उपाधि दे दी। बोले, "क्या?" बोले, "बंदरों का राजा मैं नहीं, बंदरों के राजा तो आप।" अच्छा। इसलिए तब कपीर सुग्रीव ने हनुमान जी को बनाया। इसलिए तुलसीदास जी ने कहा, "जय कपीश लोक उजागर।"
उसके बाद, "राम दूत अतुलित बल धामा।" अच्छा, राम जी के दूत हैं। राम जी के दूत हैं, लेकिन बल कितना? अतुलित बल धामा। अतुलित का अर्थ क्या है? जो तोल ना सके। लोग कहते हैं भीम में दज हाथियों का बल, दुशासन में इतनी भुजाओं में इतनी हाथियों का बल। लेकिन हनुमान जी के बल की कोई तौल नहीं है। जिसका कोई मूल नहीं, जिसका कोई तोल नहीं। तोल नहीं है। तुले ना अतुलित। अतुलित। तोल नहीं सकते। अतुलित। रामदूत अतुलित बल धामा। बल धामा, बल के धाम हैं। यह नहीं छोटा-मोटा भंडार है। नहीं नहीं, धाम है। पूरे बल धामा। रामदूत या तुत बल धामा। और है कौन? अंजनी पुत्र मा। अंजनी के पुत्र हैं। अंजनेय। मतिपाट लानन कांचना विग्र। हनुमत स्तवन में लिखा है, "पार जात तर मूल वासन भाया, परमानंद पमा नंदनम।" आंजनेय। हनुमान जी का एक नाम है आंजनेय। आंजनेय नाम कहां से पड़ा? अंजनी पुत्र मा। अंजना से मिला। हे हनुमान जी, आप अंजनी पुत्र हैं। इसलिए भजन भी, "प्रभु रामचंद्र के दूता हनुमंता।"
[संगीत]
"प्रभु रामचंद्र के दूता हनुमंता, हनुमंता आंजनेय।" हे आंजनेय नाम बहुत प्यारा है। आप अपने बच्चों का नाम रख सकते हैं, आंजनेय, अंजना, अंजना। मति पाटना विग्र प मूल वासनम भया पमा नंदनम। अंजनी, अंजनी, अंजनी पुत्र, अंजनी के पुत्र हैं। और "पवन सुत नामा।" आपको पवन सुत कहते हैं, दुनिया कहते हैं। हे पवन सुत, पवन सुत, विनती बारंबार। बजर ना हे दुख भंजन मारुति नंदन, सुन लो मेरी पुकार। पवन सत विनती बारंबार। पवन सुत विनती बारंबार। अंजनी पुत्र पवन सुत नामा। रामदूत त बल धामा। अंजनी पुत्र नामा।
"महावीर।" महावीर हैं। श्री राम को तो कहा, "हा जग एक वीर रघुराया।" राम जी को वीर कहा, लेकिन हनुमान जी को महा वीर। क्योंकि महादेव के अंश हैं। इसलिए महावीर। महावीर ते। अरे भाई, पागल है को पागल, महा पागल है। अरे वीर है। अरे भाई, वीर नहीं है, महावीर है। महावीर। विक्रम। बजरंगी। हनुमान जी महावीर हैं। बजरंग जैसा जिनका शरीर है। जब इंद्र ने श्री हनुमान जी के हनु, ठुड्डी पर प्रहार किया, वज्र का। जैसे ही वज्र का प्रहार किया, तो तुलसीदास जी ने विनय पत्रिका में लिखा है, "जा की चिबुक चोट चूर की, रद मद कुलस कठोर को, ताकी है तमक ता की ओर को, जा को है सब भाति भरोसो, कपि केसरी किशोर को।" कि हनुमान जी की ठुड्डी का कुछ नहीं बिगड़ा। इंद्र का वज्र पत्थर का चूर चूर हो गया। इसलिए हनुमान जी का शरीर वज्र जैसा। इतना बल। महावीर विक्रम बजरंगी।
एक बार रावण ने कहा हनुमान जी से, "एक-एक मुक्के का युद्ध हो जाए।" हनुमान जी ने कहा, "हो जाए।" हनुमान जी ने कहा, "रावण, मार भाई।" रावण ने कहा, "नहीं बंदर, पहले तू मार।" हनुमान जी ने कहा, "नहीं नहीं, पहले तू ही मार ले। रावण ऐसा ना हो, मैंने मार दिया तो तू मारने लायक बचे ही ना।" इतने में रावण, रावण भी रावण था। एक मुक्का दिया हनुमान जी को। लेकिन हनुमान जी जान उठ कप भूमि न गिरा। वीरासिंघे बताएंगे तुझे। जैसे ही मुक्का ताना हनुमान जी ने, ब्रह्मा जी ने हाथ जोड़े, "बाबा, हे हनुमान जी, राम जी का सारा प्रोग्राम ही फेल हो जाएगा।" अगर तुमने मुक्का मार दिया इसको। अब हनुमान जी ने कहा, "उठा लिया तो जरा मजा तो चकाई दे।" हल्का सा एक ही मारा। दो घड़ी तक मुछ आ गई और खड़ा हुआ करने। कप बल विपुल सरा अल्लागा। वाह वाह, क्या बल है। हनुमान जी ने कहा, "बल तो ब्रह्मा जी ने देख नहीं दिया। बल तो तब देखते जब तुम जो है बचते।" इतना बोलने के लिए तो ट्रेलर था। तो हनुमान जी महावीर विक्रम बजरंगी।
और क्या करते हैं? "कुमती निवार।" कुमती कहते हैं कुबुद्धि को। और सुमति के संगी। व्यक्ति को जो गलत मार्ग पर जा रहा होता है, उसको सही मार्ग पर हनुमान जी डाल देते हैं। महावीर विक्रम बजरंगी। जैसे विभीषण। तुलसी का पौधा भी रखता है अपने घर के द्वार पर। राम जी के धनुष बाण के चिन्ह भी लगाए हैं। जागते ही राम राम राम भी बोल रहा है। हनुमान जी जैसे ही लंका में पहुंचे तो युद अंकित रहा। शोभा बरनी न जाई। नव तुलसी का बृंद तहा देख हरष क पिराई। जैसे हनुमान जी ने देखा, "अरे लंका में तुलसी नाई? लंका में राम जी के धनुष प्रणों के चिन्ह ना आए?" अब हनुमान जी को संदेह हुआ। तो हनुमान जी का संदेह दूर करने के लिए भी भगवान ने विभीषण को जगाया। और विभीषण जागते बोला, "राम राम राम राम राम, श्री राम श्री राम राम राम श्री राम राम।" जैसे विभीषण जागते बोला, "राम राम राम राम राम।" हनुमान जी समझ गए कि यह भगवान का भक्त है। अकेले में कोई नहीं है। जागते ही बंदा राम बोल रहा है तो सच्चा है। उसके पास पहुंचे जाकर। विभीषण से क्या, "क्यों भाई?" विभीषण ने हनुमान जी से कहा, "मुझ पर कृपा नहीं होगी राम जी की? सब पर कृपा करते हैं राम जी।" हनुमान जी तो मुझ पर कब होगी? बोले, "तुझ पर कभी नहीं होगी।" क्यों नहीं होगी? "तुझ पर इसलिए नहीं होगी, तू राम राम जपता है, राम जी का काम नहीं करता।" अच्छा। विभीषण ने कहा, "कैसे?" बोले, "10 महीने हो गए सीता जी को लंका में। एक भी बार रावण को जाकर ललकारा तूने? एक भी बार जाकर के कहा कि भाई तूने गलत किया, तू जानकी को हरलाया, जगदंबा को हरलाया?" तो विभीषण ने कहा, "अरे, फिर तो मुझ पर कृपा होगी?" हनुमान जी ने कहा, "बिल्कुल नहीं होगी। अगर मैं जाकर रावण को ललकारूं तो भी कृपा नहीं होगी। उसे समझाऊं तब भी कृपा नहीं होगी।" हनुमान जी ने कहा, "विभीषण, जो राम जपते भी हैं, जो राम का काज भी करते हैं, उन पर कृपा नहीं, भगवान उनसे प्रेम करते हैं।" "करही सदा सेवक पर प्रीति।" फिर तो भगवान तुझसे प्रेम। तो विभीषण की जो कुमती थी, उसको निवार करके हनुमान जी ने सुमति में प्रवेश कर दिया। बुद्धि चेंज कर दी, बुद्धि बदल दी। हनुमान जी अपने भक्त के साथ यह करते हैं।
जो श्री हनुमान चालीसा का पाठ करता, उसको छीर नीर का भेद समझ में आने लग जाता है। दूध और जल का क्या गलत है, समाज में क्या अच्छा है, समाज में उसको देखने लग जाता है। इसलिए आप देखो, जो लोग हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, बहुत से युवान लोग अपने अपने लक्ष्य सफल हो रहे हैं। बिल्कुल। आगे-आगे उनके मार्ग खुलते जा रहे हैं। क्यों? कुमती मिट रही है, सुमति आ रही है। उनको अंदर से महसूस हो जाता है कि यह हमारे लिए सही है, यह गलत है। बिल्कुल। कुमति निवार सुति के संगी।
उसके बाद क्या है? "कंचन बन बराज सुब सा। कानन कुंडल कुंचित केसा।" हाथ बज्र धजा बराज, काधे मज जने उ साजे। हनुमान जी कौन हैं? कंचन वर्ण, सोने की देह है हनुमान जी। गोल्ड की बॉडी है उनकी। सोने का वर्ण चढ़ा, सोने का। इसलिए आपने देखा होगा कहीं-कहीं सिंदूरी हनुमान जी होते हैं, कहीं क बिल्कुल गोल्डन हनुमान जी होते हैं। बिल्कुल। उ गोल्डन बनाया। यह हनुमान जी का स्वरूप है। हमारे पास भी दोनों हैं। अगर हम देख रहे हैं, यह हमारे पास सिंदूरी भी है और पीछे जो फोटो में है, वह पूरे गोल्डन हैं। कंचन। बिल्कुल। तो श्री हनुमान जी कंचन वर्ण।
अब अब मैं कुछ लोगों को यहां सावधान करूं कि हनुमान जी के जो चित्र बनाते हैं, टेढ़े-मेढ़े मुंह बनाकर के, उल्टे-सीधे चित्र बना। आजकल ब अजब-अजीब चित्र। थोड़ा सीखो इस चालीसा से। हनुमान जी को कंचन वर्ण है, तो विराज सुवेश। वेष कैसा है? सुवेश। सुवेश का अर्थ होता है सुंदर वेश। बिल्कुल। हनुमान जी सुंदर हैं। हनुमान जी के मुंह बिगाड़-बिगाड़ करके अगर चित्र बनाओगे तो हनुमान जी का असली स्वरूप नहीं है। तुलसीदास जी कहते हैं, हा कंचन वर्ण विराज सुवेश। सुंदर वेश है। और उसके बाद, "कानन कुंडल और कुंचित केशा।" घुंघराले बाल हैं हनुमान जी के। कैसे बाल हैं? घूंगराले। और घुंघराले बालों को बहुत-बहुत बहुत सुंदरता वाले लोगों को माना जाता है। जिसके राले वाला। अरे वाह भाई, क्या उस श्री कृष्ण की घूंगराली लटा है और मेरे श्री हनुमान जी के भी घुंघराले वाल हैं। कुंचित केस।
श्री हनुमान जी कंचन वर्ण हैं। हनुमान जी ने दुनिया को दिखाया कि तुम मुझे क्या दोगे यार? जो भगवान का भक्त होता है, जो साधु होता है, प्योर गोल्ड होता है। गोल्ड। और यह 22 कैरेट, 24 कैरेट, यह गोल्ड, प्योर गोल्ड है श्री हनुमान जी महाराज। और जैसे हनुमान जी सीता जी की खोज में उड़ान भरी, जैसे हनुमान जी चले, चलते-चलते सिंधु तीर भूदर सुंदरता पर बार-बार रर री ज चरण दे हनुमंता चले सुताल रता करना ही बा चले हनुमाना। उसी समय चलते-चलते जा जलने रघुपति दूत बचारी त मना क हो शमरी। जैसे जल निधि, यानी समुंद्र ने देखा, "ओहो, राम जी का दूत आ रहा है।" हनुमान जी उड़ते-उड़ते जा रहे हैं। उसी समय तई मैनाक, मैनाक पर्वत निकल के आया। अब देखो इधर तो गोल्ड के हनुमान जी जा रहे हैं और इतने में सामने एक पर्वत निकल के आया। समुंद्र पर पानी-पानी दिख रहा हनुमान जी को और इतने में देखा एक पर्वत ऊपर उठ रहा है। जैसे ही पर्वत उठता हुआ आया, तो हनुमान जी ने देखा, यह भी गोल्ड का। उसने क्या कहा? "हे हनुमान जी, थोड़ा सा विश्राम कर लो।" अच्छा। पहले के पर्वत उड़ा करते थे। पहले पर्वत उड़ते थे। उ जैसे माना कोई पहाड़ है, यह सब उड़ते थे अपने आप। निज पंख होते थे इनके। कहीं भी चले जाते थे उड़के। तो इनका यह पर्वत उड़ते-उड़ते फिर किसी भी नगर पर बैठ जाते। अब जिस नगर में बैठ गए, वही द्वत हो जाता। तो इंद्र से जाकर के शिकायत की देवताओं ने। इंद्र ने सभी पव के पंख काट दिए। एक इस मैनाक को समुंद्र ने छुपा लिया था। ओके। और आज जैसे ही यह उड़के बया, उड़ता-उड़ता आया हनुमान जी को और विश्राम देने के लिए, तो हनुमान जी ने क्या कहा? "हनुमान ते परसा उसको हाथ लगा, नहीं भाई भाई नहीं भाई भाई कर पुण की प्रणाम प्रणाम कर रहा हूं भाई तुझे, लेकिन सच कहूं, राम काज कीने बिन मोही कहा विश्राम।" श्री राम जी का काज किए बिना मैं विश्राम नहीं कर सकता।
अब हनुमान जी यहां हमें शिक्षा दे रहे हैं। कोई आपको बार-बार कहे, "भाई भोजन कर लो, भोजन कर लो, भोजन कर लो।" आपको भूख नहीं है या आपको बहुत जल्दी में जाना है, तो उसका सम्मान कर दो। हाथ लगा दिया, "अने भाई भाई भाई, सच में अभी मुझे पहले राम का काम कर लेने थे, फिर विश्राम।" आप भी भाई, "नहीं सच में मुझे भूख नहीं है भाई, सच में तेरे भोजन का बहुत सम्मान है भाई, थैंक यू भाई, लेकिन मैं अभी मुझे समय नहीं।" बिल्कुल उसकी मान भी रख लिया और मान। हनुमान जी का ही काम।
हनुमान का एक अर्थ क्या है? हनन मान। जिसने अपने हनन कर लिया मान का, अभिमान का, उसका नाम हनुमान है। बिल्कुल। जिसने अपने मान का हनन कर लिया। इसलिए ओम हन हनु हनु हनु हनुमंता। श्री हनुमान जी महाराज सोने के हैं, लेकिन इतना रिच परमात्मा था, रिच गोल्ड हनुमान। वो श्री हनुमान जी महाराज दुनिया में दिखाना चाहते हैं, भाई अगर हमारे सामने कोई आए तो उसका सम्मान करो। एटीट्यूड में नहीं, "तू क्या गोल्ड है?" करेक्ट। तेर से जा। तो हमें हनुमान ते परसा कर पु कीन प्रणाम। राम काज कीने बन मोई का विश्राम। तो श्री हनुमान जी ने क्या किया? "कंचन परन विराज सुवे सा, कानन कुंडल कुंचित केसा।"
उसके बाद, "हाथ बज्र धजा बराज।" एक हाथ में वज्र है और एक हाथ में ध्वजा है। एक हाथ में रघुपति कीरति विमल पताका, राम राम जी के यश की ध्वजा है। और एक हाथ में वज्र है। वज्र का अर्थ है काल, जिसको एक बार मार दे तो उसका काल ही निकट आ जाता है। फिर वज्र अर्थात गधा। बिल्कुल। हनुमान जी की गधा को ही वज्र कहा गया है। "हात बज्र बजरंग बजरंगी के पास क्या है? वज्र की गदा। एक जिसको मार दिया तो उसका काल निकट आ गया। यानी कि जिसके हाथ में काल है, उसका नाम कराल, महाकाल, कालम्, महाकाल है। जिसके हाथ में काल है, जिसकी जिस काल के वश में हम सब हैं। बिल्कुल। लेकिन जिसके वश में काल है, वो व महाकाल है। महाकाल मेरा हनुमान।" बिल्कुल। तो हनुमान जी कौ हाथ बज्र, यानी कि जिसको एक बार मार दे, उसका काल निकट आ जाए। अरु ध्वजा विराज। एक हाथ में राम नाम की जय जयकार करते हुए, "जय सियाराम, जय श्री राम, जय श्री राम।" यह करना है आज के युवानों को। एक हाथ में राम काज की ध्वजा लहराते चलो, सनातन की ध्वजा लहराते चलो, हिंदू धर्म बढ़ाते चलो। एक हाथ में बाला भी है, अगर माला है तो बाला भी है। बिल्कुल। हा। यह हनुमान जी के वज्र का अर्थ।
"हाथ बज्र और धजा बराज।" फिर "कांधे मूज जने उ साजे।" मूंज की सो ग। आपने देखा खटिया आती है, रस्सी होती है खाट की मोटी वाली, चुभती है। उसका जने पहनते हैं हनुमान। अच्छा। कांधे मूज। इसलिए हमारे सनातन धर्म में जनेऊ संस्कार की बहुत बड़ी व्यवस्था है। जनेऊ को संस्कार कहा गया। हनुमान जी कौन सा मज का जनेऊ पहनते हैं? काधे मु जने उ साजे। तो इस आजकल कैसे ब जो पहनते हैं, वह सूत का होता है। तो हनुमान जी इसका क पहन? हनुमान जी का जनेऊ कौन सा मज का? जो रस्सी, जो खींचते हैं रस्सी, खटिया की रस्सी, वो वो वाला। मुह काधे मु जने उ साजे। उसके बाद कौन है? "शंकर सोवन।" यहां दो बातें हैं। कुछ लोग कहते शंकर सुवन, नहीं शंकर स्वयं। लेकिन दोनों बातें सत्य हैं। शंकर सुवन हनुमान जी शंकर पुत्र हैं। इसका कारण क्या है? इसका एक अर्थ यह है कि जब विश्व महापुराण के अनुसार, जब भगवान ने विश्व मोहिनी का अवतार लिया, तो शंकर।
जी देखकर मोहित हो गए। शंकर जी का वीर्य तेज स्खलित हो गया। उसको अंजनी माता के कण से भगवान पवन देव ने गर्भ में स्थापित किया। इसलिए वह शंकर सुवन भी है। और अगर रुद्र देवत जिने बस हरत भय हनुमान विकट वेष मुख पंच पुरारी शिव के रूप में हनुमान बन कर के आए हैं तो शंकर स्वयं केसरी केसरी नंदन। इसलिए अगली लाइन लिखिए।
तेज प्रता दुनिया में जग बंदन बन गए हनुमान जी और जग बंदन नहीं महा जग [संगीत] बंदन। इतना वंदन इतनी पूजा इतने मंदिर श्री राम के भी नहीं है जितने श्री हनुमान जी का वंदन होर जगत में। जग जग पर पेड़ पेड़ के नीचे गांव गांव के द्वार पर मंदिर मंदिर के कोने पर हर वो मंदिर अधूरा है जब तक श्री हनुमान जी नहीं। कहने दो राम मंदिर भी अधूरा है जब तक श्री हनुमान जी नहीं है। लेकिन वो हनुमान वो मंदिर व हनुमान मंदिर पूर्ण है जहां श्री राम नहीं है। गलत मैसेज ना जाए बिल्कुल गलत मैसेज ना जाए। लेकिन इसके पीछे कारण क्या है क्योंकि जिसके हृदय में ही बसते हैं राम। बिल्कुल तो वो प्रणम पवन कुमार खल बन पावक ज्ञान घन जासु हृदय आगार बसई राम सर चाप धर। जिसके हृदय में कोई कता राम जी की स्थापना नहीं की राम मंदिर नहीं ब अरे हनुमान जी कते ये र ये रहे यही स्थापना है। कोई हीरे के द्वार बनाता है कोई मोती के द्वार बनाता है कोई लकड़ी के द्वार बनाता है कोई लोहे के द्वार बनाता है। धन्य है मेरे श्री हनुमान जी छाती फाड़ के अपनी मास मज्जा का द्वार बना के बंद कर लिया श्री राम को निकाल के दिखाओ। इसलिए गाया ना उन्होने श्री राम श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में विश्वास ना हो तो देख लो चाहे दिल के नगीने में श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में।
श्री राम तो हनुमान जी तेज प्रताप महा जग बंदन। उसके बाद इतना सब कुछ होते हुए क्वालिफिकेशन तो देखो जी कोई ऐसे वैसे नहीं है कि अनपढ है परम विद्यावान है। कौन है परम विद्यावान विद्यावान गुण यति चातु राम काज करीब को आतुर श्री हनुमान जी। कौन है विद्यावान जब श्री राम के सामने बोले हैं वाल्मीकि रामायण देखो तो क्या संस्कृत का वाचन किया है। ओ पांडित्य तो देखो श्री हनुमान जी बिल्कुल। श्री राम भी देख रहा भाई कौन गया कहां सीता जी के विरय में दुखी लक्ष्मण जी और राम दौड़ रहे थे और वहां आकर के वीर रस हास्य रस विद्वता का जो हनुमान जी ने बखान किया आहा श्रीराम भी देख कर के कहने लगे कौन हो कौन हो। हनुमान जी ने कहा पहले आप बताओ कौन हो को तुम शामल गल सरीरा क्यों धरती पर घूम रहे हो। ऐसे भक्त और भगवान दोनों बातें कर रहे हैं आपस में दोनों एक दूसरे को पहचान रहे हैं लेकिन बोल नहीं रहे क्या दृश्य होगा मैं वो सोच रहा क्या दृश्य होगा उस समय जब पहली बार और जब प्रभु पहचान कहे प्रभु चरना जब पहली बार श्री राम को पहचान करके और जब दंडवत लेट गए हनुमान जी उस पर्वत की भूमि पर ज राम और लक्ष्मण वनवासी देश में घूम रहे हैं जैसे ही देखा तो हनुमान जी दंडोत लेट आज मुझे राम मिल गए जिस कार्य के लिए मेरा जन्म हुआ है मानो आज मेरा जन्म हुआ है। आज तक तो सुग्रीव की नौकरी बजा रहा था जन्म तो आज हु जन्म तो आज हुआ।
और ध्यान रखना हर व्यक्ति का जन्म उस दिन होता है जिस दिन उसके जीवन में राम आ जाते हैं। हर व्यक्ति जन्म तो दुनिया ले रही है कीट पतंगे बन बन करके कीड़े मकोड़ों की तरह दुनिया जहां जाओ दुनिया आदमियों का सैलाब है बिल्कुल लेकिन सच में जन्म तो उसका होता है जन्म व्यक्ति का तब होता है जन्म ना जाए ते जंतु जन्म से सब जंतु है जन्म से हर व्यक्ति जंतु है लेकिन जब उसके जीवन में राम आते हैं तब जन्म होता है तब वो फिर श्री हनुमान जी की तरह मानव मन में यह सोचने लगता है बस आज प्रभु इसलिए तो अवतार लिया था यार इसलिए तो जन्म लिया था बिल्कुल हम सबने भी इसीलिए जन्म लिया है लेकिन कुछ लोग होते हैं जिनको 10 20 50 100 साल की जिंदगी में राम भक्ति मिल जाती है राम नाम मिल जाता है तो उनका जन्म हो जाता है। कुछ लोग होते हैं पूरा जन्म गवा देते हैं वो मरे ही है पैदा ही नहीं हुए ही जानिए तब जीव जग जागा जब सब विषय विलास विरागा हरि तुम बहुत अनुग्रह कीनो साधन धाम विभु दुर्लभ तन मोही कृपा करि दीनो हरि तुम बहुत अनुग्रह की तो श्री हनुमान जी विद्यावान विद्यावान।
उसके बाद कौन है गुण जय हनुमान ज्ञान गुण सागर गुण है। उसके बाद कहा अति चतुर क्या है अति चातु विद्यावान गुण अति चातु। हम बारबार रोज हनुमान जी को कहते हैं बहुत श अति चातु का सीधा सधा आ स्याने बकुल स्याने नहीं अति स्याने बहुत स्याने और आज के किसी बंदे को कह दो स्याना मत बन जादा बयाना बनता है भाई तो गुस्सा हो जाएगा गुस्सा हो जाएगा हनुमान जी को रोज कहते हनुमान जी कभी गुस्सा नहीं होता कक हनुमान जी जानते दुनिया में अति चातुर्य वो हनुमान जी [संगीत] और हम भी अगर भगवान ने जन्म दिया अपनी ड्यूटी ऑफिस जॉब बच्चों के साथ घर में परिवार में सब कार्य करिए यह सांसारिक कार्य है जी लेकिन वह करते करते अगर थोड़ी देर राम भजने का समय निकाल ले तो हम कौन है अति चतुर अति चतुर।
अच्छा इतने अति चातुर्य [संगीत] राम काज करने के लिए आतुर है इसलिए मैं दुनिया से कहता हूं भगवान श्री हनुमान जी से कोई अपना काम कराना हो तो कभी ये मत कहो कि हनुमान जी आपकी जय हो हनुमान जी आप ये काम कर दो हनुमान जी आप ये काम कर दो नहीं राम का नाम लो एक बार कह दो हे हनुमान जी मैं श्री राम का भक्त हूं हे प्रभु ये मेरा काम नहीं है राम का आज है। कुछ लोग कहते इतने हनुमान चालीसा पड़े हमने ये काम नहीं हुआ वो काम नहीं हुआ वो काम नहीं होगा भी नहीं कब होगा जब अच्छा काज होगा बिल्कुल इसलिए बजरंग बाण पर सवाल उठाने वाले लोगों को ये समझना चाहिए जो लोग कहते हैं कि हनुमान जी को शपत दे दी हनुमान जी को हनुमान जी कोई ऐसे मूर्ख नहीं है बिल्कुल हनुमान जी के पास बुद्धि है बुद्धि मता मटम है वो तल करते व्यक्ति की हनुमान जी वो काज करते हैं जो राम काज होता है। राम काज का शुभ कार्य अच्छा कार्य राम काज का एक ये तो अर्थ है कि मंदिरों में झाड़ू लगाई जाए मंदिरों में आरती घंटे बजाए यह भी राम काज है लेकिन कोई गरीब दीन हीन व्यक्ति कोई वंचित व्यक्ति उसको कभी राम काज शुभ कार्य करके देखो मन को तसल्ली मिलेगी ये ये राम काज है जो यह राम काज करता उसके काज करते हैं हनुमान जी बिल्कुल और फिर जब आप कहेंगे ना हे प्रभु ये मेरा काम नहीं है मेरे प्रभु का काम है हनुमान जी तो आतुर है व तो आतुर का मतलब बड़ी जल्दी में बता तो तू अभी कर देता हूं तू एक बार कह तो तू राम का बंदा है एक बार कह तो जरा आ शरण मेरे राम की मेरा राम करुणा निधान है हनुमान जी कहते बेटा एक बार आ तो जरा क जरा आ तो बताऊं तुझे कहते ना या एक बार आ तो हनुमान जी कह जरा आ जरा आ शरण मेरे राम की मेरा राम करुणा निधान है घट घट में वही रम रहा वही जगत का भगवान है जरा आ शरण मेरे राम की मेरा राम करुणा [संगीत] निधान है मेरा राम करुणा निधान है करुणा निधान रवा जगत के दाता है श्री भगवान रवा जगत के दाता है भोजपुरी भजन है मति के फेर दनी मति के फेर दनी केवट के तार दनी भजन है करके बखान रहुआ जगत के दाता है भगवान श्री राम जगत के दाता है इसलिए जरा आ शरण मेरे राम एक बार आ तो जा मेरे शरण मेरे राम की शरण में तेरे सब काम क करने के लिए मैं आतुर हूं राम काज करी वे को आतुर।
आप य देखो जब जा मंत जी बार बार बार बार जगा रहे हैं बार बार बार बारबार जगा रहे हैं जब पता लग गया कि सीता जी दूर समुंद्र पार अशोक के वृक्ष के नीचे बैठी क्या हनुमान जी नहीं जानते थे लेकिन राम काज करने के लिए जो आतुर है वो चुप बैठा है लेकिन जैसे ही कहा राम काज लग तब अवतारा तो इतने आतुर बैठे थे अच्छा ट ट टकी तो मार कर के रावण के चाटे बजाता हुआ समुंद्र में लपेट हुआ खींचना त्रिकूट उखाड़ दो सीता जी को कांधे पर डाल कर के ले आऊ आ त्र पूरी लंका जिस पर बसी है उखाड़ लूगा इतना तु राम काज करवे को आतुर आतुर बैठे।
अच्छा उसके बाद प्रभु चरित सोनी वे [संगीत] रसिया राम लखन सीता मन बसिया। प्रभु चरित प्रभु चरित का अर्थ है जैसे राम चरित मानस क्या हैय राम चरित मानस ऐसे प्रभु चरित मानस है ओके भगवान की कथा सुनने का जो रसिया है वो ये है है उनका नाम है हनुमान जी। जहां जहां कीर्तन होता श्री राम का लगता है पहरा वहां वीर हनुमान का दुनिया में भक्त बड़ा दुनिया ने माना छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना राम राम सियाराम सियाराम राम सियाराम। दुनिया में जहां जहां कीर्तन होता है भगवान का वहां वहां मेरे हनुमान जी विराजमान यत्र यत्र रघुनाथ कीर्तनम तत्र तत्र कृत मस्त कांजले वास्प बरी परिपूर्ण लोचन मारुति नम राक्षस तगम। इसलिए प्रभु चरित सु निवे को रसिया हम लोग हमें भगवान ने शरीर दिया है अगर हमारे एरिया में कहीं भगवान की कथा हो रही है तो हम एक समय में एक जगह कथा सुन सकते हैं आप एक समय में यहां बैठ कर के पटका सुन सकते हैं लेकिन मेरे हनुमान जी यहां भी बैठ कर के कथा सुन रहे हैं कहीं और कथा हो रही है वहां भी सुन रहे हैं जहां-जहां पूरे ब्रह्मांड में राम कथा गाई जा रही है वहां वहां श्री हनुमान जी रसिया है प्रभु चरित सु निवे को रसिया।
रसिया और उसके बाद राम लखन सीता मन बसिया तीनों के मन में बसते हैं हनुमान जी के हृदय में कौन बसते हैं दस हदय आगार बसई राम सर चाप धर श्री राम जिसके हृदय में धनुष माण लेकर के बैठे हैं उन राम देखिए हमारे मन में भगवान बसे बिल्कुल यह तो कुछ बात है हम भगवान को अपने मन में बसा के रखते और भगवान के मन में हम बस जाए यह बहुत बड़ी बात है बहुत बहुत बहुत बड़ी बात है और तीनों के मन में बसे हैं प्रभु चरित सुनि को रसिया राम लखन सीता मन बसिया। तीनों के मन में बसते हैं मेरे मन में बसे है राम मेरे मन में बसे है हनुमान जैसे हनुमान जी के हृदय में श्री बसे हैं ऐसे प्रभु के हृदय में हनुमान बसे हैं जानकी जी के हृदय में हनुमान है लक्ष्मण भैया भी कहते हैं हनुमान जी हे हनुमान जी आप ना होते तो आज मैं श्री राम के साथ ना होता सीता जी कह रही है हनुमान तुम ना होते तो मैं लंका में प्राण त्याग देती श्री राम भी कहते हैं हनुमान तू ना होता लक्ष्मण को कुछ हो जाता तो आज मैं भी ना होता। सब इंटरकनेक्ट है एक दूसरे से पूरे सबका स्तंभ बाबा डोरी पकड़े बैठा है दुनिया पर संकट आए तो उसको भगवान हर लेते हैं भगवान पर ही संकट आए तो उसको हनुमान हर लेते हैं इसलिए कहा को नहीं जानत है जग में कपी संकट मोचन नाम तिहारो हे हनुमान जी आप संकट मोचन है संकट कटे मिटे परा जो सुमिरे हनुमत बलवीरा।
तो कहां चल रहे प्रभु च सु को रसिया राम लगन सीता मन बसिया सूक्ष्म रूप धरी ध धरी ध धरी धार धार धार धा धार धा धार धारी धारी सीता जी के सामने इतने बलवान इतने विद्यावान इतने अतुलित बलधाम इतना सब कुछ होने के बाद भी सूक्ष्म रूप धर के आ गए यह है हनुमान जी का डाउन टू अर्थ काम करते बड़े बन के रहते छोटे हम लोग काम करते छोटे बनते बड़े हम हम हम हम हम हम हम हमसे बंगार होगे हम टम समझते अपने आप हम खा जाता है हम लोग सीता जी ने एक ही बार कहा बेटा राम जी की सेना में सब बंदर तेरे जितने ही हनुमान जी ने भी कह दिया मां मैं तो बहुत बड़ा हूं मुझसे तो छोटे छोटे ही है सीता जी तो मानो हे भगवान डिप्रेशन में चली इतना बड़ा संदेह हो गया कि छोटे से बंदर यहां तो राक्षस इतने बड़े बड़े भगवान ने मैत्री की तो किनसे कर ली छोटे छोटे बंदर क्या बिगाड़े राक्षसों का तो हनुमान जी ने पूछा मां कोई संदेह मां ने कहा बेटा संदेह नहीं मोरे हृदय परम संदेह इतने तो एक पांव दबा हनुमान जी ने क भूरा का शरीरा समर भयंकर य बलवीरा कनक भूरा का शरीरा स भयंकर अल जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय जय श्री राम जय जय श्री राम जय जय श्री राम जय जय श्री राम जय जय श्री राम जय जय श्री राम जय जय श्री राम र भयंकर रूप बना मां ने कहा बेटा छोटा हो जा छोटा हो जा विश्वास हो गया बेटा छोटा हो जा तो उसी समय सक्षम रूप धरी सियाही दिखावा और जरूरत पड़ी तो बिकट रूप धरी कप बड़ लाग आकाश लंक जरावा पूरी लंका जला डाली श्री हनुमान जीने भीव रूप धरी पकड़े मारे पकड़े मारे नान भीम रूप धरी।
अच्छा इसके बाद लाइन क्या है असुर सहारे भीम रूप धरी असुर सहारे लेकिन उसके बाद रामचंद्र के कास सवारे सबके पीछे मोटिवेशन एक ही काम कर रहा है मेरा अपना काम नहीं है राम अगर सूक्ष्म रूप धरि से यही दिखावा तो राम जी के काज के लिए और विकट रूप धरी लंक जरावा तो राम जी के काज के लिए और भीम रूप धरी असुर सखारे तो रामचंद्र की काज सवारे हर जगह राम जी राम जी के काज के लिए हो जो हो भाई अपने कोई काम नहीं है महात्मा आदमी है साधु आदमी तो राम भजना है तो भीम रूप धरे जार रामचंद्र की का सार।
फिर उसके बाद लाय सजीवन लखन जिहा लक्ष्मण म पड़े राम जी रो रहे लक्ष्मण अगर तू चला गया तो तेरा भाई भी यही प्राण त्याग देगा सब रो रहे हैं श्री राम भी रो रहे हैं लेकिन जैसे ही हनुमान जी ने एक आंसू की धार टपकती हुई श्री राम की आंख से देखी हनुमान जी ने कहा नाय प्रभु ना प्रभु दुनिया में सब देख सकता हूं लेकिन आपकी आंख में आंसू नहीं दिख हनुमान करोगे भी तो क्या करोगे बोले प्रभु ये लक्ष्मण को जीवित करने के लिए कुछ भी करना पड़ेगा मि सबसे पहला काम देखो जामवंत कह वैद सुखना लंका रई को पठ लेना लंका में एक सुषण नाम का वैद है उसको लेकर के आए अगर कोई तो वो उपाय कर सकता है हनुमान जी ने कहा बस हम जाएंगे अब देखो इतना कड़ा पहरा रावण को पता है कि लक्ष्मण बेहोश है पूरे वैद के घर के आसपास पूरा पहरा लगा दिया लेकिन उसी समय भी कितनी देर लगाई आनि भवन समेत तुरंत तुलसीदास शब्द लिखे तुरंत तुरंत गए और जाकर के वैद को कहा कि चलिए ले वैद ने समझ गया नहीं वैद ने सो बात कही नहीं दुश्मन का भाई है मैं नहीं जा सकता उसको वैद का धर्म बताया कि तो डॉक्टर है तेरे लिए ना कोई दुश्मन है तेरे लिए ना कोई मित्र है सब समान तेरे लिए रोगी ही तेरा मित्र है तो उसने कहा कि भाई जाऊंगा तो दिक्कत होगी हनुमान जी ने कहा जाना ही नहीं है कहीं घर समेत उठा कर ले चलू हॉस्पिटल समेत उठाकर ले जाऊंगा पूरा वैद का जो घर था उसी समय वैद को घर समेत उठा लिया कि वैद गायब हो जाएगा तो पता लगेगा घर ही गायब हो जाएगा तो कौन देख रहा पूरा वैद का घर ही उठा लिया और पूरा घर इसलिए उठा लिया पूरा हॉस्पिटल इसलिए उठा लिया वहां जाकर क यह वाली दवाई भूल गया यह वाली चीज रह गई फलानी र सब पूरा हॉस्पिटल यही है जो रह गया इलाज करो खर वैद ने आकर के संजीवनी बताई और उस संजीवनी को लाय सजीवन ये लखन जी आए और जैसे ही लक्ष्मण उठक बैठे तो राम जी ने लक्ष्मण को गले नहीं लगाया श्री रघुवीर हरष र लाए श्री राम जी रोते रोते हंसने लगे और हंसते हंसते हा लक्ष्मण हा लक्ष्मण नहीं हा हनुमान हे हनुमान हे हनुमान उसको अपने गले से लगा लि लाय सजीवन लखन जि आए श्री रघुवीर हरर।
और फिर अपने मुख से रघुपति [संगीत] कीनी यह राम जी की क्वालिटी है क्या स्थान दिया रघुपति कीनी बहुत बढाई थोड़ी बड़ाई नहीं बहुत बड़ाई बहुत बड़ाई थक जाए सरस्वती गाते गाते तेरी महिमा इतनी बढ़ाई और उसके बाद तो उपाधि दे डाली तुम मम प्रिय भरत साम भाई जिस श्री राम को श्री हनुमान जी अपना पिता कहते थे माता रामो मत पिता रामचंद्र स्वामी रामो मत सखा रामचंद्र आज वो श्री राम ने हनुमान जी को अपना भाई मान तुम मम प्रिय भरत सम भाई हे हनुमान सच कह रहा हूं यार तू मुझे मेरे भरत के समान प्रिय है इतना बड़ा दर्जा दे दिया कितना बड़ा दर्जा दे दिया श्री राम की क्वालिटी है कैसे बैलेंस रखना है नहीं तो लक्ष्मण जी कहते यही इनको ही रखो भरत के समान यह प्रिय है तो इनको ही रखो हम 13 साल से टूट गए वन में आपके साथ बिल्कुल लेकिन बैलेंसिंग श्री राम की देखो लक्ष्मण मेरे भाई लक्ष्मण मेरे भाई आपका कोई दोस्त हो कोई मित्र हो उसके प्यार से क क्या हाल है मेरे भाई किसी से काम लेना हो और भाई अरे भाई ऐसे कर लेते बिल्कुल क्वालिटी है भगवान श्री राम की क्वालिटी उससे कांधे पर हाथ रख रख के दो चार बार बात कर लो तो उसको अपनापन नजर आता इसलिए यार दो उस कंधे पर हाथ धर के चलते ये रघुपति कीनी बहुत बड़ाई तुमम प्रिय भरत सम भाई।
उसके बाद सहस बदन तुम रोय सगावे सस बन तुम रो गावे अस श्रीपति कंठ लगावे हजारों मुखो से भी मैं तेरा यश नहीं गा सकता हनुमान आ गले लग जा आ गले जा अस कई श्रीपति राम जी कह रहे हा असक श्रीपति तुल जी कह रहे पति भगवान या लक्ष्मीपति हो गए अच्छा हो राम जी कौन है नारायण ही तो है नारायण के अवतार तो श्री लक्ष्मी लक्ष्मी के पति यानी कि जब हनुमान को गले लगा रहे हैं तो अस कही श्रीपति कंठ लगावे गोल्ड वान व्यक्ति से वनवासी राम नहीं मिल रहे एक दुनिया का सबसे रिच जो मेरा हनुमान है उससे मैं वनवासी राम होकर नहीं मिल रहा कहते मित्रता तो बराबर के लोगो में होती है यह कहने की बात है लेकिन बस ये सिर्फ कहने की बात है लेकिन हा एक बात और है इसके पीछे कारण एकय है कि सुदामा को सुदामा मिल जाए तो उद्धार कैसे होगा बिल्कुल सुदामा को कृष्ण मिलना चाहिए और जब सुदामा को कृष्ण मिला तो सुदामा को ही कृष्ण बना दिया इसलिए भाई आप मित्रता तो आपस के लोग अपनी एक साथ निभाते हैं ना भाई या हम उम्र निभाते बिल्कुल तो श्री राम भी उस समय जलवा देखो तुम गोल्ड के हो हनुमान जी तो मैं भी अस कही श्रीपति लक्ष्मी पति कंठ लगावे हनुमान जी को श्रीपति लक्ष्मी पति नारायण कंठ लगा रहे रघुपति की नहीं बहुत बड़ा क लगावे।
उसके बाद सनकादिक ब्रह्मा मुनी सा नारद शारद सहित अहिसा जम कुबेर दिग पाल जहां आते कवि को विद क सक कहा आते इतने सब लोग भी तुम्हारा गुणगान नहीं गा सकते कौन कन सनकादिक सनकादिक कौन सनक सनन सनातन सनत कुमार चारों भाई जो हमारे सनातन धर्म के प्रथम भगवान माने जाते 24 अवतारों में सनक स सनातन सनत कुमार कहां से चौपाई आई सनकादिक ब्रह्मादेवी जी वीणा लेकर के तुम्हारी महिमा नहीं सकते शारद सरस्वती सहित अहिसा शेष ना और यम कुबेर यम यमराज कुबेर दिगपाल दिशाओं के दिग्गज म कुबेर दिगपाल जहां थे कवि कोविद बड़े बड़े कवि कोविद वेद को जानने वाले कवि कोविंद कई सक कहा ते।
उसके बाद तुम उपकार सुग्रीव कीना राम मिलाय राज पद दना फिर हनुमान जी तुमने सुग्रीव पर उपकार किया जिसने श्री राम से मिलाया हो सुग्रीव पर उपकार क्यों किया कु लो अपने दोस्त पर कर दिया अरे दोस्त पर नहीं उसने दिया क्या व वनवासी पर राम जब उसने देखे राम और लक्ष्मण तो सबसे पहले हनुमान जी को बुला हनुमान जी आप जाओ आप जाकर देख करके आओ क बाली के भेजे हुए कोई दूध तो नहीं है क्यक बाली से छुप कर के सुग्रीव इस पर्वत पर रहता था और बाली को श्राप लगा था कि इस पर्वत पर आएगा तो मारा जाएगा अच्छा तो जैसे ही राम और लक्ष्मण आए तो सुग्रीव को भय हुआ बाली ने तो नहीं भेजा मुझे मारने सुग्रीव ने हनुमान जी को भेजा चेक कर आप जाओ हनुमान जी तो कहते भाई मुझे तो राम जी से मिलवा दिया सुग्रीव ने और जिसने मुझे सराम से मिला दिया उसको मैं किष्किंदा का राजा बना दूंगा इसलिए मैं कहता हूं जितना हनुमान जी को राम नाम सुनाओ राम से मिलाओ तुम्हें दुनिया में राजा बना देंगे तुम्ह उपकार सुग्रीव कीना।
तो राम।
मिलाए राजपत दीना पहले राम जी से मिलाया मैत्री करवाई उसके बाद अग्नि जला कर के उसकी साक्षी में उनकी मित्रता करवाई अग्नि की साक्षी में फिर उसके बाद बड़े बड़े ताड़ के वृक्ष भगवान ने एक ही बाण में ढा दिए सुग्रीव ने कहा कि अगर इतना बल है तो दिखाओ जरा बाली को ऐसे मार देंगे क्या फिर उसके बाद बाली को उद्धार करवा कर के बालिका फिर सुग्रीव को किष्किंदा का नरेश बना दिया तुम उपकार सुग्रीव कीना राम मिलाए राज पद और यही एक व्यक्ति पर और कृपा की तुमरो मंत्र विभीषण माना लंके स्वर भ सब जग जान विभीषण को भी क्या किया पहले राम से मिलाया उसके बाद लंका का लंकेश बना दिया जब विभीषण भगवान के पास आया आते ही भगवान ने कहा आओ लंकेश लक्ष्मण जी ने कहा लंका का राजा रावण है विभीषण नहीं भगवान ने कहा कह दिया तो कह दिया समुद्र का जल मांगा और अभिषेक कर दिया लक्ष्मण जी ने कहा कल को रावण हमारी शरण में आ गया तो रावण को क्या देंगे भगवान ने कहा नहीं आए प्रभु कोई भरोसा नहीं एक बार को अगर रावण हमारी शरण में आ गया तो रावण को क्या देंगे भगवान ने कहा विभीषण लक्ष्मण मैंने लंका दी है विभीषण को वैसे तो रावण आएगा नहीं अगर रावण मेरी शरण में आ गया तो वचन देता हूं अयोध्या रावण के नाम कर दूंगा अयोध्या रावण के नाम कर दूंगा राम जी ने कहा राम जी ने लक्ष्मण जी ने कहा बहुत बढ़िया अभी तो हम दो भाई वन में है दो अयोध्या में और दो का क्या होगा राम जी ने कहा अभी दो भाई वन में है पिता का वचन निभाने के लिए हम दो वन में है रावण को लंका दे दूंगा तो बड़े भाई का वचन निभाने के लिए छोटे भी वन में आ जाएंगे यह है राम इतना भरोसा है इनी इतनी इसलिए रामो विग्रहवां विषण माना लंकेश्वर जग जाना युग सह जोजन परमान इसके पीछे बड़ी कथा है तुलसीदास जी ने पहले लिख दिया कितने किलोमीटर सूर्य दूर है युग अर्थात दो सहस्त्र अर्थात हज योजन अर्थात 1200 इनका मल्टीप्लाई यह सब करके जो गणना आती है इतनी दूरी पर सूर्य है युग सहस जोजन परवान और उसको भी लीलो ही जन्म से जगी जठर में ज्वाल गगन में मारी एक उछाल से रवी जाली लाल फल लाल आप की जय हो जय हो जय हो एक बार में भक खा गए युग सहस्त्र जोजन परवान लील मधु जान और फिर प्रभु मुद्रिका मेल मुख माही जलदी लाग गए किसी ने हनुमान जी से कहा ये पार कैसे आ गए हनुमान जी ने कहा पार मैं नहीं आया मुझे पार कोई लेकर आया कौन लेकर के आया प्रभु मुद्रिका जब राम जी ने अंगूठी दी तो अंगूठी तो यहां पहनने की चीज है हनुमान जी के पास जेब तो थी नहीं जने में डाल लेते हनुमान जी ने मुख में रख लिया किसी ने कहाय मुख में रखने की चीज है हनुमान जी ने कहा मुद्रिका तो मुख में रखने की चीज नहीं है लेकिन जो इसम लिखा है राम नाम वो मुख में ही रखने की और जर दिलांग गए इसलिए दुर्गम का जगत के ते समुद्र लाना दुर्गम का लेकिन सुगम अनुग्रह तुमरे तेथे उसके बाद दुर्गम का जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम रहते थे राम द्वारे तुम रखवारे जैसे हम अपने घरों के बाहर सिक्योरिटी गार्ड रखते हैं अपने रक्षक रखते हैं ऐसे श्री हनुमान जी के हर बंदी के द्वार पर हर जिस जो जो अपने घर को राम जी का घर मानता है उसके घर के द्वार के रक्षक है श्री हनुमान राम द्वारे तुम रखवारे होत ना आज्ञा बिन पै सारे इनकी आज्ञा के बिना प्रवेश नहीं होता भाई सारे कहते प्रवेश को कु लोग कहते रिश्वत पहले चल रही है मैंने क्यों भाई बोले आप ही कह रहे होत ना आज्ञा बिन पई सारे पै सारे का अर्थ होता प्रवेश जब हनुमान जी की आज्ञा हो जाती है तब प्रवेश मिलता है अफसर के मिलने से पहले दरबान से मिलना पड़ता है श्री को पाने से पहले हनुमान से मिलना पड़ता है तो राम द्वारे तुम रखवारे होतना पसारे सब सुख ला तुम्हारी शरणा दुनिया के जितने सुख है एक हनुमान जी की शरण में प्राप्त होते और जिसकी रक्षा हनुमान जी करे उसका कोई बिगाड़े कौन तुम रक्षक काह को डरना ऐसा है विश्वास हमारा जहां जहां में जा जागा पवन पुत्र बजरंग बली को वहां वहां मैं पाऊंगा जय बजरंग बली बोलो जय बजरंग बली जय बजरंग बली बोलो जय बजरंग बली सब सुकला है तुम्हारी शरणा तुम रक्षक का हो को डरना आगे आपन आपन सार आप जब हनुमान जी ने भयंकर गर्जना कीना तो राम जी ने कहा बा पन ते सवारो आप तीनों लोग हाते काप भूत पिशाच निकट नहीं आवे महावीर जब नाम क्यों नहीं आते क्योंकि शिव के गण है भूत पिशाच इनकी झोली में रहते जेब में रहते हनुमान जी शिव का अवतार है इसलिए इनके कंट्रोल में रहते भूत पिशाच निकट नहीं महावीर जब नाम सुनावे फिर नास रोग हनुमान जी वैद है डॉक्टर है हनुमान जी कृपा से बड़े बड़े रोग मिट जा विश्वास हो तो सदगुरु वैद वचन विश्वासा संजम यह विषय है आसा तो नास रोग हरे सब पीड़ा नासे रोग हरे सब पीड़ा जो दुनिया पीड़ा देती है दुख देती है उनको भी हनुमान जी कृपा से वहर लेते यानी कि छुपा लेते जैसे कोई कहे बड़ा दुखी कर दिया इसने मुझे उसको हनुमान जी हरण कर लेते जा ना से रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर काम एकही करना जपत निरंतर हनुमत फिर संकट ते हनुमान छुड़ा लेकिन तीन बातें ध्यान रखो मन मन क्रम कर्म और वचन चचन ध्यान जो लावे मन क्रम वचन से जो ध्यान रेगा इनका उसको सं हनुमान छुड़ा मन क्रम वचन ध्यान जो लावे फिर सब पर राम तपस्वी राजा तिनके काज सकल तुम साजा जो राम राजा बनने की और थे उनको जंगल का राजा बना दिया गया तपस्वी राजा बना दिया गया और उनके भी सकल काज को हे हनुमान जी आपने संवारा रामचंद्र के काज सवा सवारे सब पर राम तपस्वी राजा तिन के का सकल तुम साजा और मनोरथ शब्द लगा और स्टॉप नहीं है इतना सब कुछ मिल गया सब सुखल है तुम्हारी शरणा यह सब मिल गया य स्टॉप नहीं है बेटा और मांग और मोर मनोरथ करके तो देख सोई अमित अकाट्य है व जो किसी को एक बार दे देता कटता नहीं है सोई अमित जीवन फल पावे इसलिए चारों जुग सतयुग त्रेता द्वापर कलयुग सब में हनुमान जी का वास है इसके लिए बहुत लंबी कथा हो जाएगी चारों जुग प्रताप तुम्हारा है प्रसिद्ध जगत उजियारा और साधु संत के तुम रखवारे साधु संत के रखवारे का अर्थ कि ये नहीं कि जो भगवा धारण किए हैं उनके रखवारे उनके तो रखवार हैं ही लेकिन जो व्यक्ति हृदय से साधु है जो अच्छे कार्य कर रहा है जो दुनिया में साधु होता से जीवन जी रहा है उसके तो है ही उसके भी रखवा साधु संत के तुम रखवारे असुर निकंदन राम दुलारे असरो को मारने वाले और राम जी के प्यारे हैं हनुमान लला मेरे प्यारे लला हनुमान लला दुलारे हैं राम जी के हमारा बड़ा दुलारा है भाई ऐसे राम जी के दुलारे राम दुलारे असुर निकंदन राम दुलारे फिर अष्ट सिद्धि अमा महिमा गरिमा लघु मा विश प्रा और प्रका इनके दाता है शंख निधि कश्यप निधि पद्म निधि इन सबके दाता है अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता और यह किसने दी अवर दन जानकी माता माने सीता जीने रसायन वैज्ञानिक है हनुमान जी कौन है वैज्ञानिक मैं नहीं कह रहा तुलसीदास जी कहते सीताराम गुण ग्रम पुण्य विहार वंदे विशुद्ध विज्ञान कविश्वर कपीश्वर वाल्मीकि और हनुमान जी को वैज्ञानिक कहा है और रसायन किसके पास होते हैं वैज्ञानिक राम रसायन तुमरे पासा सदा र रघुपति के दासा फिर तुमहरे भजन हनुमान जी का भजन करोगे तो राम को भाव है हनुमान जी का भजन करोगे तो राम प्रसन्न होंगे राम का भजन करोगे तो हनुमान प्रसन्न होंगे और जन्म जन्म के दुख विसरा फिर अंत काल रघुवर पुर जाई अंत काल में वह बंदा भगवान के धाम जाता है और अगला जन्म जहां होता है जहा जन्म हरि भक्त काई लोग कहते भाई पित जिस घर के पित शांति हो पित सुखी हो उसके घर में कृपा होती है भगवान की मैं कहता हूं जो श्री हनुमान चालीसा का पाठ करते रोज मानो अपने पित्र को श्रद्धांजली दे रहे अंत काल रघुवर पुर जाई जहां जन्म हरि फिर और देवता चित न धर हनुमत से सर्व सुख करई संकट कटे मिटे सब पीरा जो सुरे हनुमत बलवीरा फिर जय जय जय हनुमान गोसाई कृपा करो गुरुदेव किनाई हे हनुमान जी आपकी जय हो जय हो जय हो आप गोसाई है गोसाई है ब्राह्मण है आप गोस्वामी है आप हे हनुमान जी कृपा करो गुरु बन कर के मेरे गुरुदेव की तरह मुझ पर कृपा करो मुझे अपना शिष्य बना लो जय जय जय हनुमान गोसाई कृपा कर गुरुदेव की ना फिर जो शत बार यहां कंट्रोवर्सी है लोग कहते 100 बार करें सत कुछ कहते सात बार करें कुछ लोग कहते सत भाई एक बारही कर लो सच्चे मन से सत जो सत बार सच्चे मन से एक बार बार करलो पाठ कर जोई छूटे बंधी म सुख होई महा सुख होई फिर जो यह पढ़े यह मैंने शुरुआत यही से की बिल्कुल जो यह पढ़े पुरुष न पुस ना हनुमान चालीसा तो हो सिद्धि फिर तुलसीदास जी कहते तुलसीदास सदा ह की ज नाथ हृदय मा डेरा यहां आकर बैठ जाओ जाना नहीं फिर डेरा डेरा डेरा का मतलब यहां पर घर कर लो आप यही रहो बस हा अब जाना नहीं तुलसी दास सदा हरि चेरा है की जय नाथ हृदय मा तेरा फिर पवन तन है हे पवन पुत्र संकट हरण हे आप मंगल मूर्ति रूप है राम लगन सीता सहित हृदय बसो सुभ देवताओं के राजा मेरे हृदय में सदा निवास करो तो यह है श्री हनुमान 4 अद्भुत महाराज जी अद्भुत मतलब पहला पॉडकास्ट होगा मेरा जिसमें मैं बिल्कुल क्वाइट मैं सुन रहा हूं और मोहित हो गया हूं कि इतनी सारी चीजें अभी माइंड में चल रही है बहुत सारी चीजें ऐसी है जो हनुमान चालीसा के बारे में मुझे भी आज पहली बार पता चली और दर्शको कोसे हनुमान चालीसा मैंने पहली बार गाया है हालाकि हनुमान चालीसा और विस्तार से गाया जा सकता है लेकिन एक गागर में सागर भर देने वाला बिल्कुल वो ये 40 पंक्तियां 40 रहस्य ही है 40 पंक्तियां है तीन दोहे है 43 हैय 43 है तीन दोहे हैं श्री गुरु चरण सरोज रज निमन मुग सुधारी बरन रघुवर विबल जस जोय फल चार एक दोहा बुद्धिहीन जान के सुमरो पवन कुमारे बल विद्या देव मही हरो गलेश विकार दो दो [संगीत] संक ह मंगल गुरू राम लखता और 4 चौपाया 43 है टोटल हम तो रोज हवन करते श गुरु च स्वाहा बुद्धिहीन न जानकार स्वा इसम क्वेन आता है महाराज जी बहुत से लोग कहते सुबह हनुमान जी का मल हन नहीं प पढ़नी चाहिए 8:00 बजे के बाद भैया कहां से आए ये लोग और कौन है मैं समझ नहीं पा रहा कहते हैं कि मतलब सुबह तो हनुमान जी ड्यूटी पे है हनुमान जी के बा हनुमान जी ड्यूटी पर है उस समय राम जी की ड्यूटी बजा रहे हैं तो इसलिए आपकी सुनेंगे नहीं अच्छा और रात के 8:00 बजे के बात करें उनको कहो तुम 8:00 बजे के बाद करने दो हमें सुबह से ही शुरू करने दो बिल्कुल एक दिन में कितनी महमान चालीसा का पाठ करना चाहिए 11 बार कम से कम 11 बार एक आसन प बैठ के जरूरी नहीं जरूरी नहीं है चलते फिरते उठते बैठते गाड़ी चलाते हुए भी कर सते पढ़े ना पढ़े जो यह पढ़े पढ़े भाई पढ़ना है ना पढ़ लो बिल्कुल हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है सिंदूर इसलिए चढ़ाया जाता है हनुमान जी को कि माता सीता जब राम जी लंक विजय होकर के आए तो ऐसे करके सिंदूर भरते हुए देख लिया अच्छा तो हनुमान जी ने पूछा मां ये क्या है बोले प्रभु इससे स्वस्थ रहेंगे मस्त रहेंगे आनंद में रहे उम्र लंबी होगी यह पति की स्वास्थ्य की मंगल कामना के लिए सुहागन स्त्रियां सिंदूर लगाती है लगाती है हनुमान जी ने अपने आप को सिंदूर ही सिंदूर में भर लिया और आ गए दरबार में सबने कहा यह क्या है हनुमान जी ने कहा कि मां को देखा था सिंदूर लगाते हुए जब इतने चुटकी भर सिंदूर से आप स्वस्थ रहेंगे मस्त रहेंगे प्रसन्न रहेंगे आनंद में रहेंगे तो पूरा सिंधूर लपेट लेने से तो कितना आनंद में रहेंगे तो बोले भाई ये तो पत्नियां करती है तो हनुमान जी ने कहा हम भी पत्नी है तुलसीदास जी ने चौपाई लिखी है अस अभिमान जाई जन भोरे मैं सेवक रघुपति पति मोरे भक्त तो भगवान की पत्नी है हर दंगी नहीं है म कहां से कहां वो निकला है इसका सार अद्भुत हो गया मतलब आज का पॉडकास्ट हमारा अद्भुत हो गया है बहुत जदा बहुत आनंद आया आज हनुमान जी की महिमा गा कर के खूब हनुमान चालीसा की महिमा गा कर के चौपाइयां तो सब गाते हैं रोज गाते हैं लेकिन हनुमान चालीसा को समझना यह बड़ी बात है मा जी लास्ट रिक्वेस्ट मेरीय रहेगी जाते जाते मतलब एक ऐसा जो सबके दिल में बस जाए और मुझे तो मतलब यहां पर इतनी ऊर्जा फील हो र लग रहा हनुमान जी यही है हमारे साथ और एक प्रसन हो जाए जब जब भी मुझ पर संकट का कोई घेरा होता है जब जब भी मुझ पे संकट का कोई घेरा होता है तो मेरे दरवाजे पे हनुमान का पहरा होता है मेरे दरवाजे पे हनुमान का पहरा होता है बोलो जय श्रीराम जय जय हनुमान बोलो जय सियाराम जय जय हनुमान जब से मेरे घर में आए घर के स ट भाग रहे हम तो सोते घर के अंदर हनुमान जी जाग रहे गली गली कूचे में इनका पहरा होता है गली गली और कूचे में इनका पहरा होता है मेरे दरवाजे पे हनुमान का पहरा होता है मेरे दरवाजे पे हनुमान का पहरा होता है बोलो जय सियाराम जय जय हनुमान जय सियाराम जय हनुमान महाराज जी बहुत-बहुत शुक्रिया आपने इतना एक्सप्लेन किया हनुमान चालीसा को खूब खुश रहिए खूब हनुमान जी कृपा करें सब ऐसी हनुमान चालीसा की गौरव गाथा को सुने और हनुमान लीसा के बारे में जाने आपने बहुत ही अच्छे अच्छे प्रश्न किए और श्री हनुमान चालीसा के बारे में किया तो यह बहुत अच्छा लगा मुझे शुक्रिया महाराज जी आप लोगों कोय वीडियो अच्छा लगा हो लाइक शेयर सब्सक्राइब करना ना भूले थैंक यू