📱

Get Our Mobile App

Take your business learning on the go!

Download on the App StoreGet it on Google Play

बुरी आदतों के दलदल में फँस चुके हो ? | Break the Chain of Addiction | Hindi Audiobook Summary

Kitabi Manzil35:11

Transcription

वह कल जो कभी आता ही नहीं। आप सालों से उस एक भयानक एडिक्शन के दलदल में फंसे हैं। आप खुद से कहते रहे, "बस आज आखिरी बार, कल से पक्का नहीं।" और उस कल का इंतजार करते-करते पीछे मुड़कर देखा तो 5 साल, 7 साल, शायद 10 साल गुजर चुके हैं।

वो एडिक्शन कुछ भी हो सकती है। पोर्न का वो जाल, शराब की वो बोतल, सिगरेट का वो धुआं, या सोशल मीडिया की वो एंडलेस स्क्रॉलिंग। आपने सब कुछ ट्राई किया, पर हर बार वो आदत, वो एडिक्शन आपसे ज्यादा ताकतवर निकली। आप जानते हैं आप हर बार क्यों हारे? क्योंकि यह आपकी विल पावर की लड़ाई थी ही नहीं। यह लड़ाई थी आपके ब्रेन वायरिंग की, और आपने अब तक वह वैज्ञानिक तरीके जाने ही नहीं जो इस वायरिंग को जड़ से बदल सकते हैं।

निक ट्रेंटन इस किताब में वह सीक्रेट चाबी देते हैं, जिससे आप अपने दिमाग के उस ताले को खोल सकते हैं, जिसमें आपकी एडिक्शन का ऐद है। अब बस एक पल के लिए इमेजिन करिए, आपकी लाइफ उस एक एडिक्शन के बिना। वह सुकून, वह आजादी, वह कॉन्फिडेंस, जब आपका कंट्रोल वापस आपके हाथ में होगा। अगर आप उस जिंदगी के लिए तैयार हैं, तो नीचे कमेंट में "यस" लिखकर बताइए। आई एम रेडी।

वेलकम टू किताबी मंजिल, आपके अपने हिंदी ऑडियो बुक चैनल में। चलिए चैप्टर एक पर चलते हैं।

**चैप्टर एक: असली दुश्मन आपकी विल पावर नहीं, आपका दिमाग है।**

चलिए सीधे उस जड़ पर चलते हैं, जहां से हर एडिक्शन जन्म लेती है। यह जगह आपके बाहर नहीं, आपके दिमाग के अंदर है। निक ट्रेंटन कहते हैं, आपकी हर आदत, अच्छी या बुरी, आपके दिमाग में बने एक रास्ते की तरह है। जब आप कोई काम पहली बार करते हैं, तो दिमाग में एक कच्चा, धुंधला सा रास्ता बनता है। जब आप उसे दोहराते हैं, तो वह रास्ता थोड़ा और पक्का होता है, और जब आप उसे हजारों बार दोहराते हैं, तो वह एक सुपर हाईवे बन जाता है। एक ऑटोमेटिक पथ, जिस पर चलने के लिए आपको सोचना भी नहीं पड़ता।

एग्जांपल सोचिए, एक इंसान जो रोज शाम को काम से लौट कर थका हुआ महसूस करता है। यह क्यों है? उसका दिमाग जानता है कि शराब पीने से उसे अस्थाई राहत मिलेगी। यह क्रेविंग है। वह खुद को रोक नहीं पाता और एक ड्रिंक बना लेता है। यह रिस्पांस है। शराब पीते ही दिमाग में डोपामाइन नाम का केमिकल रिलीज होता है, और उसे पल भर का सुकून महसूस होता है। यह रिवॉर्ड है। यह चार स्टेप्स का लूप है: क्यू, क्रेविंग, रिस्पांस, रिवॉर्ड।

आपकी एडिक्शन इसी लूप का नतीजा है। यह कोई मोरल फीलिंग नहीं है। यह सिंपल ब्रेन साइंस है। आपका दिमाग एक रिवॉर्ड सीकिंग मशीन है। उसे बस वो चाहिए, जिससे उसे अच्छा महसूस हो, जिससे उसे डोपामाइन का हिट मिले। उसे इस बात से कोई मतलब नहीं कि वह रिवॉर्ड आपकी जिंदगी बर्बाद कर रहा है। उसका काम बस लूप को चलाना है, बार-बार और बार।

इसलिए, जब आप सिर्फ अपनी विल पावर के दम पर एडिक्शन को रोकने की कोशिश करते हैं, तो आप असल में अपने दिमाग के इस ऑटोमेटिक सुपर हाईवे के सामने एक छोटा सा स्पीड ब्रेकर लगाने की कोशिश कर रहे होते हैं। कुछ देर के लिए शायद गाड़ी धीमी हो जाए, पर हाईवे इतना मजबूत है कि वह ब्रेकर टूट ही जाएगा। इस जंग को जीतने के लिए आपको हाईवे से लड़ना नहीं है। आपको एक नया रास्ता बनाना सीखना होगा। एक ऐसा रास्ता, जो आपको एडिक्शन की तरफ नहीं, बल्कि एक हेल्दी, पीसफुल जिंदगी की तरफ ले जाए।

यह रिवायरिंग कैसे होगी? इसकी शुरुआत होती है पहले स्टेप से, यानी क्यू को पहचानने और उसे बदलने से, और यही हम अगले चैप्टर में सीखेंगे।

**चैप्टर दो: वो पहला धक्का, अपनी एडिक्शन के ट्रिगर को पहचानिए।**

हर एडिक्शन की शुरुआत एक धक्के से होती है। एक ट्रिगर, एक स्टार्टिंग गन, जो आपके दिमाग की रेस को शुरू कर देता है। निक ट्रेंटन इसे क्यू कहते हैं। यह इतना कॉमन और इनविज़िबल होता है कि हम में से ज्यादातर लोग उसे देख ही नहीं पाते।

एग्जांपल, एक लड़का है जो सोशल मीडिया एडिक्शन से परेशान है। वो दिन भर ठीक रहता है। पर जैसे ही रात को 11:00 बजते हैं (यह टाइम क्यों है?), और वह अपने बिस्तर पर अकेला होता है (यह लोकेशन एंड इमोशनल क्यों है?), उसे एक अजीब सी बेचैनी होती है, एक खालीपन महसूस होता है। और इससे पहले कि वह कुछ सोचे, उसका हाथ खुद ब खुद फोन की तरफ बढ़ जाता है, और अगले 2 घंटे कहां चले जाते हैं, उसे पता ही नहीं चलता। यहां ट्रिगर उसका फोन नहीं है। ट्रिगर है रात का समय, अकेलापन और बिस्तर।

निक ट्रेंटन कहते हैं, लगभग हर एडिक्शन के ट्रिगर्स इन पांच कैटेगरीज में आते हैं:

1. **लोकेशन:** यानी कोई खास जगह।

2. **टाइम:** यानी दिन का कोई खास पहर।

3. **आपकी इमोशनल स्टेट:** यानी आप कैसा महसूस कर रहे हैं? दुखी, बोर या स्ट्रेस्ड।

4. **अदर पीपल:** यानी कुछ खास लोग, जिनके साथ आपकी आदत जुड़ी है।

5. **इमीडिएटली प्रिसीडिंग एक्शन:** यानी वह काम, जो आप ठीक अपनी आदत से पहले करते हैं।

आपको एडिक्शन से नहीं लड़ना है। आपको सबसे पहले इस स्टार्टिंग गन की आवाज को पहचानना है। अगले 24 घंटे आपको बस एक जासूस बनना है, अपनी जिंदगी का जासूस। एक डायरी उठाइए या फोन में नोट्स खोलिए और बस लिखिए, जब भी आपको अपनी एडिक्शन की तरफ जाने की क्रेविंग हो, बस उस पल रुक कर खुद से यह पांच सवाल पूछिए: मैं कहां हूं? समय क्या है? मैं कैसा महसूस कर रहा हूं? मेरे साथ कौन है? और मैं अभी-अभी क्या कर रहा था?

यह अवेयरनेस, यह जागरूकता, उस सुपर हाईवे को तोड़ने का पहला हथौड़ा है। क्योंकि जिस दुश्मन को आप देख सकते हैं, उसी दुश्मन को आप हरा भी सकते हैं। एक बार आपने अपने ट्रिगर्स को पकड़ना सीख लिया, तो अगला कदम है इस रास्ते को बदलना। वो कैसे करना है? यह हम अगले चैप्टर में जानेंगे।

**चैप्टर तीन: लहरों पर सवारी, क्रेविंग को कंट्रोल किए बिना उसे हराइए।**

आपने ट्रिगर पहचान लिया, और अब वह होता है। आपके अंदर एक बेचैनी की लहर उठती है, एक जोर की इच्छा, जिसे हम क्रेविंग कहते हैं। निक ट्रेंटन कहते हैं, ज्यादातर लोग यहीं पर गलती करते हैं। वो इस लहर से लड़ने की कोशिश करते हैं, उसे दबाने की कोशिश करते हैं। पर आप जितनी ताकत से लहर को दबाते हैं, वो उतनी ही ऊंची उठकर वापस आती है।

एग्जांपल, एक लड़की है जो मीठा खाने की एडिक्शन छोड़ना चाहती है। शाम को 4:00 बजते ही ट्रिगर। उसके दिमाग में चॉकलेट केक की इमेज आने लगती है। उसका दिल तेज धड़कने लगता है। मुंह में पानी आने लगता है। वह खुद से कहती है, "नहीं, मुझे नहीं खाना। मैं कंट्रोल कर सकती हूं।" वह लड़ने लगती है। पर जितना वह लड़ती है, क्रेविंग और मजबूत होती जाती है, और आखिर में थक हार कर वह एक नहीं, बल्कि दो पीस केक खा लेती है।

निक ट्रेंटन एक रेवोल्यूशनरी आईडिया देते हैं: क्रेविंग से लड़ो मत। उस पर एक सर्फर की तरह सवारी करो। इसे उर्गे सर्फिंग कहते हैं। जब क्रेविंग की लहर उठे, तो उसे देखो, महसूस करो, बिना कोई जजमेंट पास किए। अपने शरीर में ध्यान दो, कहां-कहां बेचैनी हो रही है, पेट में, सीने में। बस एक वैज्ञानिक की तरह ऑब्जर्व करो, "अच्छा, तो क्रेविंग ऐसी महसूस होती है।" आप हैरान हो जाएंगे, कोई भी क्रेविंग हमेशा के लिए नहीं रहती। वह एक लहर की तरह ही है। वो उठती है, अपने चरम पर पहुंचती है, और फिर खुद ब खुद नीचे चली जाती है। यूजली 15 से 20 मिनट में। आपको बस 15 मिनट तक उस लहर पर टिके रहना है। लड़ना नहीं है, बस टिके रहना है।

जब आप क्रेविंग को एनर्जी देना बंद कर देते हैं, जब आप उससे लड़ना बंद कर देते हैं, तो वह धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है। आप अपने दिमाग को एक नया मैसेज दे रहे हैं: "यह लहर मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। मुझे इस पर एक्ट करने की जरूरत नहीं है।" हर बार जब आप क्रेविंग को राइड करते हैं, बिना रिएक्ट किए, आप उस पुराने सुपर हाईवे को थोड़ा सा तोड़ रहे होते हैं।

**चैप्टर चार: रास्ते में दीवार, बुरी आदत को मुश्किल बना दो।**

ट्रिगर हुआ, क्रेविंग उठी, और आपने उसे सर्फ भी कर लिया। लेकिन कई बार क्रेविंग इतनी पावरफुल होती है कि वह आपको रिस्पांस देने पर मजबूर कर ही देती है। तो अब क्या करें? निक ट्रेंटन कहते हैं, अगर आप हाईवे पर स्पीड ब्रेकर नहीं लगा सकते, तो हाईवे के बीच में एक दीवार खड़ी कर दो। अपनी बुरी आदत को इतना मुश्किल बना दो कि आपका दिमाग उसे करने से पहले ही हार मान ले।

एग्जांपल, एक नौजवान है जो रात भर ऑनलाइन गेमिंग की वजह से सो नहीं पाता। उसका ट्रिगर है काम खत्म होने के बाद का खालीपन। उसने विल पावर ट्राई की, पर हर बार हार गया। फिर उसने एक सिंपल सा बदलाव किया। रात को सोने से एक घंटा पहले वो अपना वाईफाई राउटर बंद करके उसे अलमारी में रख देता था, और चाबी अपनी मां के कमरे में। अब जब क्रेविंग उठती भी थी, तो उसके दिमाग को पता था कि गेम खेलने के लिए उसे उठना होगा, मां के कमरे में जाना होगा, चाबी लानी होगी, अलमारी खोलनी होगी, राउटर लगाकर उसके स्टार्ट होने का इंतजार करना होगा। इतने सारे स्टेप्स। दिमाग को आसान रास्ता पसंद है। यह रास्ता बहुत मुश्किल था। कुछ ही दिनों में उसके दिमाग ने गेम खेलने की क्रेविंग को सोने के पीसफुल रिवॉर्ड से रिप्लेस कर दिया।

इसे कहते हैं इंक्रीसिंग फ्रिक्शन। आप अपनी एडिक्शन और अपने बीच में रुकावटें खड़ी कर रहे हैं। अगर आपको सिगरेट की आदत है, तो सिगरेट का पैकेट गाड़ी में रखना शुरू कर दीजिए, घर में नहीं। अगर आपको सोशल मीडिया की लत है, तो फोन से ऐप डिलीट कर दीजिए। चलाने के लिए हर बार ब्राउज़र में लॉग इन करना पड़ेगा। अगर आपको शराब की आदत है, तो घर में एक भी बोतल मत रखिए। दिमाग आलसी है। वह हमेशा वह रास्ता चुनता है, जिसमें सबसे कम एनर्जी लगे। जब आप बुरी आदत का रास्ता मुश्किल और पत्थरों से भरा बना देते हैं, तो दिमाग खुद ब खुद उस रास्ते पर जाना बंद कर देता है। विल पावर की जरूरत ही नहीं पड़ती। आपने गेम का रूल ही बदल दिया है। आपने रिस्पांस देना लगभग नामुमकिन कर दिया है।

**चैप्टर पांच: इनाम बदलो, जिंदगी बदलो।**

दिमाग को एक नया लालच दो। क्यू, क्रेविंग, रिस्पांस, और फिर आता है वह, जिसके लिए दिमाग यह सारा खेल खेलता है: रिवॉर्ड। वो डोपामाइन का हिट, वो पल भर का मजा। निकट्रेंटन कहते हैं, आप लूप के पहले तीन स्टेप्स को बदल सकते हैं। लेकिन अगर आपने दिमाग को पुराना रिवॉर्ड पाने दिया, तो लूप कभी नहीं टूटेगा। आपको उस पुराने जहरीले इनाम की जगह एक नया हेल्दी इनाम रखना होगा।

एग्जांपल, एक महिला है जिसे दिन भर की थकान और स्ट्रेस के बाद क्यू एंड क्रेविंग एक गिलास वाइन पीने की आदत है। रियसन जिससे उसे रिलैक्सेशन महसूस होता है। रिवॉर्ड वो वाइन पीना छोड़ना चाहती है, पर उस रिलैक्सेशन की भावना को नहीं छोड़ पाती। उसने एक नया प्लान बनाया। जैसे ही उसे स्ट्रेस होता, वह वाइन की जगह एक कप गर्म हर्बल टी बनाती और उसे बालकनी में शांति से बैठकर 5 मिनट तक पीती। शुरुआत में अजीब लगा, पर धीरे-धीरे उसके दिमाग ने हर्बल टी के सुकून को वाइन के अस्थाई छूट से जोड़ना शुरू कर दिया। उसे रिवॉर्ड अब भी मिल रहा था, रिलैक्सेशन का, पर उसका सोर्स बदल चुका था।

आपका दिमाग रिवॉर्ड के नेचर को नहीं समझता। वह बस रिवॉर्ड को पहचानता है। आपको यह पता लगाना है कि आपकी एडिक्शन आपको असल में क्या रिवॉर्ड दे रही है। क्या वह आपको बोरिंग से बचाती है? क्या वह आपको सोशल कनेक्शन देती है? क्या वह आपको स्ट्रेस से राहत देती है? उस असली जरूरत को पहचानिए। और फिर उस जरूरत को पूरा करने का एक नया पॉजिटिव तरीका खोजिए। अगर आप बोरियत की वजह से सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हैं, तो 5 मिनट के लिए कोई अच्छी किताब पढ़िए या वॉकिंग पर चले जाइए। अगर आप स्ट्रेस की वजह से सिगरेट पीते हैं, तो 2 मिनट डीप ब्रीथिंग एक्सरसाइज करिए। आपको दिमाग को बेवकूफ नहीं बनाना है। आपको उसे एक बेहतर ऑफर देना है। एक ऐसा इनाम, जो आपको पल भर का मजा नहीं, बल्कि लंबे समय तक सुकून दे। जब नया रिवॉर्ड पुराने से ज्यादा सेटिस्फाइंग हो जाता है, तो पुराना सुपर हाईवे अपने आप बंजर होने लगता है।

**चैप्टर छ: माहौल की माया, अपना मैदान बदलो।**

अपनी लड़ाई जीतो। आप एक जंग लड़ रहे हैं, और अभी तक आप दुश्मन के इलाके में खड़े होकर लड़ रहे थे। आपकी विल पावर, आपकी टेक्निक्स, सब जरूरी हैं। लेकिन निक ट्रेंटन कहते हैं, सबसे स्मार्ट योद्धा वह है, जो लड़ाई शुरू होने से पहले ही लड़ाई का मैदान अपने पक्ष में कर ले। और आपका मैदान है आपका माहौल, आपका एनवायरमेंट। अगर आपका माहौल आपके ट्रिगरर्स से भरा पड़ा है, तो आप यह जंग कभी नहीं जीत सकते।

एग्जांपल सोचिए, एक इंसान जिसे जंक फूड की लत है। वो बहुत मोटिवेशन के साथ डाइट शुरू करता है। पर उसके घर के किचन में चिप्स के पैकेट पड़े हैं, फ्रिज में कोल्ड ड्रिंक्स रखी हैं, और डाइनिंग टेबल पर बिस्कुट का डिब्बा है। वो कितनी देर लड़ेगा? 1 घंटा, एक दिन। उसका माहौल ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन है। वो हर पल उसे उकसा रहा है, उसे याद दिला रहा है।

अब सोचिए, वो डाइट शुरू करने से पहले घर का सारा जंक फूड उठाकर बाहर फेंक देता है, और उसकी जगह फल और सलाद लाकर रख देता है। अब क्या हुआ? उसने विल पावर की जरूरत को ही खत्म कर दिया। जब ट्रिगर सामने होगा ही नहीं, तो क्रेविंग उठेगी कैसे? उसने माहौल बदलकर लड़ाई को 90% आसान बना दिया।

निक ट्रेंटन कहते हैं, "यू डोंट राइज टू द लेवल ऑफ योर गोल्स। यू फॉल टू द लेवल ऑफ योर सिस्टम्स।" आपका एनवायरनमेंट आपका सिस्टम है। इसे अपने लिए काम करने पर लगाइए, अपने खिलाफ नहीं। अपने फोन को देखिए। क्या आपकी होम स्क्रीन पर वो एप्स हैं, जो आपका वक्त बर्बाद करती हैं? उन्हें हटा दीजिए। अपने कमरे को देखिए। क्या वह चीजें आपके आसपास हैं, जो आपको आपकी बुरी आदत की याद दिलाती हैं? उन्हें नजर से दूर कर दीजिए। अपने दोस्तों को देखिए। क्या आप ऐसे लोगों के साथ वक्त बिता रहे हैं, जो आपकी एडिक्शन को बढ़ावा देते हैं?

माहौल को बदलना एडिक्शन छोड़ने का सबसे आसान और सबसे पावरफुल तरीका है। क्योंकि जब आप सही माहौल में होते हैं, तो सही काम करना ऑटोमेटिक हो जाता है, और गलत काम करना लगभग नामुमकिन। आपको तैरना नहीं है। आपको बस पानी के बहाव के साथ बहना है।

**चैप्टर सात: डोपामाइन फास्ट, अपने दिमाग को रिसेट कीजिए।**

आज की दुनिया एक डोपामाइन की मशीन बन चुकी है। सोशल मीडिया, जंक फूड, वेब सीरीज, हर चीज आपको इंस्टेंट प्लेजर देने के लिए डिजाइन की गई है। निक ट्रेंटन कहते हैं, इस वजह से हमारे दिमाग का रिवॉर्ड सिस्टम थक चुका है। अब उसे छोटी-छोटी नेचुरल चीजों में खुशी महसूस ही नहीं होती। आपको एडिक्शन से वही कीक पाने के लिए पहले से ज्यादा डोज की जरूरत पड़ती है।

एग्जांपल, एक बच्चा है जिसे रोज वीडियो गेम्स खेलने की आदत है। शुरू में उसे एक घंटा खेलकर बहुत मजा आता था। पर अब 6 महीने बाद उसे वही मजा पाने के लिए 3 घंटे खेलना पड़ता है। उसका दिमाग चीप डोपामाइन का आदि हो चुका है। अब उसे पढ़ाई या दोस्तों के साथ खेलने में कोई मजा नहीं आता। इस साइकिल को तोड़ने का एक तरीका है: डोपामिन फास्टिंग। इसका सिंपल सा मतलब है, एक तय समय के लिए, जैसे 24 घंटे, आप जानबूझकर उन सभी हाई डोपामाइन एक्टिविटीज से दूर रहते हैं। नो सोशल मीडिया, नो जंक फूड, और खासकर आपकी अपनी एडिक्शन।

शुरू में यह बहुत मुश्किल लगेगा। पर अगर आप टिके रहे, तो एक जादू होगा। आपका दिमाग खुद को रिसेट कर देगा। 24 घंटे बाद जब आप एक सेब खाएंगे या सूरज को डूबते हुए देखेंगे, तो आपको उसमें पहले से 10 गुना ज्यादा खुशी महसूस होगी। डोपामिन फास्ट आपके दिमाग के लिए एक रिब्यूट बटन की तरह है।

**चैप्टर आठ: भावनाओं का भंवर, जब दर्द आदत बन जाता है।**

कभी आपने सोचा है, आप अपनी एडिक्शन की तरफ जाते ही क्यों हैं? क्या आपको सच में उस चीज से इतना प्यार है, या आप किसी और चीज से भाग रहे हैं? निक ट्रेंटन कहते हैं, ज्यादातर एडिक्शन किसी ना किसी इमोशनल पेन को दबाने का एक तरीका होती है। अकेलापन, स्ट्रेस, बोरियत, नाकामी का डर। यह वह असली जख्म है, जिन पर आपकी एडिक्शन एक अस्थाई पट्टी की तरह काम करती है।

एग्जांपल, एक ऑफिस में काम करने वाला आदमी है। जब भी उसका बॉस उसे डांटता है, तो उसे बहुत स्ट्रेस और शम महसूस होता है। इन फीलिंग्स से डील करने के बजाय, वह ऑफिस के बाद ड्रिंकिंग करने चला जाता है। कुछ घंटों के लिए शराब उसे अपना दर्द भुला देती है। पर अगली सुबह दर्द वापस आ जाता है। यहां उसकी असली प्रॉब्लम शराब नहीं है। असली प्रॉब्लम है स्ट्रेस को हैंडल ना कर पाना। शराब बस एक भागने का रास्ता है।

निक ट्रेंटन हमें एक मुश्किल सवाल पूछने को कहते हैं: "मेरी यह आदत मुझे किस भावना से बचा रही है?" उस भावना को महसूस करना सीखिए। उसे दबाइए मत। जब आप अपनी भावनाओं से भागना बंद कर देते हैं, तो आपको उन्हें शून्य करने के लिए किसी बाहरी चीज की जरूरत नहीं पड़ती। आपकी एडिक्शन की पावर अपने आप खत्म होने लगती है। क्योंकि जिस आग को वह बुझा रही थी, वो आग अब है ही नहीं।

**चैप्टर नौ: एक के साथ एक फ्री, नई आदतों का हाईवे बनाइए।**

पुराने हाईवे को तोड़ना लड़ाई का सिर्फ आधा हिस्सा है। अगर आपने उसकी जगह एक नया मजबूत हाईवे नहीं बनाया, तो दिमाग खाली जगह देखकर वापस पुराने रास्ते पर ही चला जाएगा। निक ट्रेंटन इसे करने का एक बहुत ही पावरफुल तरीका बताते हैं: हैबिट स्टकिंग, यानी एक नई अच्छी आदत को अपनी किसी पुरानी, पहले से बनी हुई आदत के साथ जोड़ देना।

एग्जांपल, एक लड़की है जो रोज सुबह उठकर सबसे पहले अपना फोन चेक करती है। यह पुरानी आदत है। वो मेडिटेशन करने की आदत डालना चाहती है, पर भूल जाती है। उसने फैसला किया, "जैसे ही मैं सुबह अपना अलार्म बंद करूंगी (पुरानी आदत), मैं बिस्तर पर ही 1 मिनट के लिए मेडिटेशन करूंगी (नई आदत)।" अलार्म बंद करना उसके लिए ऑटोमेटिक था। अब मेडिटेशन भी उसके साथ जुड़ गया।

यह टेक्निक इतनी पावरफुल इसलिए है, क्योंकि आप शून्य से शुरू नहीं कर रहे हैं। आप अपने दिमाग में पहले से बने एक रास्ते का फायदा उठा रहे हैं। अपनी जिंदगी में वह पल ढूंढिए, जो फिक्स्ड है। आपका सुबह का चाय पीना, आपका रात को ब्रश करना, और उसके साथ एक नई छोटी सी आदत जोड़ दीजिए। फार्मूला: "रात को ब्रश करने के बाद, मैं एक पेज किताब पढूंगा।" छोटे से शुरू कीजिए। इतना छोटा कि आप फेल हो ही ना सकें। जब आप अच्छी आदतों का एक पॉजिटिव लूप बनाना शुरू करते हैं, तो बुरी आदतों के लिए जगह ही नहीं बचती।

**चैप्टर दस: दो बार नहीं, जब आप रास्ते से भटक जाएं।**

आप एक प्लान बनाएंगे। आप पूरी मेहनत करेंगे। और फिर भी एक दिन ऐसा आएगा, जब आप फिसल जाएंगे। आप वह काम कर बैठेंगे, जिसे ना करने की आपने कसम खाई थी। और उस एक गलती के बाद असली खतरा शुरू होता है। निक ट्रेंटन कहते हैं, प्रॉब्लम एक बार गलती करने में नहीं है। प्रॉब्लम उस गलती के बाद शुरू होने वाली सोच में है। हम खुद से कहते हैं, "देखा, मैं तो हूं ही ऐसा, मैं कभी नहीं बदल सकता। आज का दिन तो खराब हो ही गया, अब कल से ही शुरू करूंगा।" इसे व्हाट दल इफेक्ट कहते हैं।

एग्जांपल, एक आदमी है जो पिछले 20 दिनों से डाइट पर है। एक दिन वह ऑफिस पार्टी में जाता है और एक समोसा खा लेता है। पर उसके दिमाग में आवाज आती है, "लो, तोड़ दिया डाइट। तुम फेल हो गए।" फिर वह सोचता है, "जब डाइट टूट ही गई है, तो अब ठीक से ही खाते हैं।" और वो उस रात पेट भरकर जंक फूड खा लेता है। एक समोसे ने डाइट नहीं तोड़ी। उसकी सोच ने तोड़ी।

निक ट्रेंटन एक सिंपल सा रूल देते हैं: "नेवर मिस ट्वाइस।" कभी भी लगातार दो बार गलती मत करो। आज आपसे गलती हो गई। कोई बात नहीं। आप इंसान हैं, रोबोट नहीं। खुद को माफ कीजिए और बस यह पक्का कीजिए कि अगला काम, जो आप करेंगे, वह सही होगा। आज शाम को जंक फूड खा लिया। कोई बात नहीं। कल सुबह की शुरुआत हेल्दी ब्रेकफास्ट से कीजिए। जरूरी यह नहीं है कि आप कभी गिरे ही नहीं। जरूरी यह है कि आप हर बार गिरकर वापस उठ खड़े हों।

**चैप्टर ग्यारह: अपनी पहचान बदलिए, आदतें कहानी का अंत है।**

आपकी आदतें आपकी पहचान का सबूत होती हैं। आप जो रोज करते हैं, आप वही बन जाते हैं। निक ट्रेंटन कहते हैं, एडिक्शन छोड़ने का सबसे गहरा तरीका है अपनी पहचान को बदलना। आप यह मत कहिए, "मैं सिगरेट छोड़ने की कोशिश कर रहा हूं।" आप कहिए, "मैं स्मोकर नहीं हूं।" कोशिश करने का मतलब है कि आप अब भी पुराने इंसान हैं, जो लड़ रहा है। पर जब आप कहते हैं, "मैं ऐसा नहीं हूं," तो आप अपने दिमाग को एक नया पावरफुल मैसेज देते हैं।

एग्जांपल, दो लोग हैं जिन्हें सिगरेट ऑफर की जाती है। पहला कहता है, "नहीं शुक्रिया, मैं छोड़ने की कोशिश कर रहा हूं।" यह

जवाब दिखाता है कि वह अब भी खुद को एक स्मोकर मानता है। दूसरा कहता है, "नहीं शुक्रिया, मैं स्मोक नहीं करता।" यह जवाब एक नॉन-स्मोकर का है। यह उसकी नई पहचान है। आपका लक्ष्य सिर्फ एक बुरी आदत छोड़ना नहीं है। आपका लक्ष्य वो इंसान बनना है जिसे उस आदत की जरूरत ही नहीं है। खुद से पूछिए। एक हेल्दी इंसान क्या करेगा? एक फ्री इंसान क्या चुनेगा? जब आपकी पहचान बदलती है, तो आपकी आदतें उस नई पहचान से मैच करने के लिए अपने आप बदल जाती हैं। यह लड़ाई नहीं, यह ट्रांसफॉर्मेशन है।

चैप्टर 12: खामोशी की ताकत

अपने विचारों के मालिक बनिए। आपकी क्रेविंग सिर्फ एक विचार है। एक बादल की तरह जो आता है और चला जाता है। निक ट्रेंटन कहते हैं, "आप विचार नहीं हैं। आप विचारों को देखने वाले हैं।" माइंडफुलनेस आपको उस विचार और आपके बीच में एक छोटी सी जगह बनाना सिखाती है। और उसी छोटी सी जगह में आपकी आजादी छिपी है।

उदाहरण: एक लड़की को स्ट्रेस में शॉपिंग करने की आदत थी। अगली बार जब शॉपिंग का विचार आया, उसने रिएक्ट करने के बजाय बस उस विचार को एक बादल की तरह देखा। वो आया और अपने आप चला गया। उसने कुछ नहीं किया। आपको विचारों को रोकना नहीं है। बस उन्हें खुद को कंट्रोल करने की इजाजत नहीं देनी है।

चैप्टर 13: अकेले मत लड़िए। अपनी फौज तैयार कीजिए।

आपने शायद अपनी एडिक्शन को सालों तक एक राज बनाकर रखा होगा। शर्म की वजह से, डर की वजह से। निक ट्रेंटन कहते हैं, "अकेलेपन में एडिक्शन और मजबूत होती है और हिम्मत दिखाने से वो कमजोर होती है।" इस लड़ाई को जीतने के लिए आपको एक फौज चाहिए। एक सपोर्ट सिस्टम।

उदाहरण: एक लड़का अपनी गेमिंग एडिक्शन से तंग आ चुका था। उसने सालों तक किसी को नहीं बताया। एक दिन उसने हिम्मत करके अपने सबसे अच्छे दोस्त को सब सच बता दिया। उसका दोस्त उस पर हंसा नहीं। उसने कहा, "कोई बात नहीं। हम मिलकर इसका हल निकालेंगे।" अब जब भी लड़के को गेम खेलने की क्रेविंग होती थी, वह अपने दोस्त को कॉल कर लेता था। सिर्फ बात करने से ही उसकी आधी क्रेविंग खत्म हो जाती थी।

अकाउंटेबिलिटी एक ताकतवर हथियार है। जब आप किसी को ज़बान दे देते हैं, तो आप सिर्फ खुद के लिए नहीं, उसके लिए भी लड़ते हैं। वो इंसान आपका दोस्त हो सकता है। आपका पार्टनर या कोई ऑनलाइन सपोर्ट ग्रुप। किसी ऐसे इंसान को चुनिए जो आपको जज ना करे, बल्कि आपको समझे। अपनी कहानी बताने से आप अपने ऊपर पड़े शर्म के बोझ को हटा देते हैं। और जब वह बोझ हटता है, तो आपको लड़ने की नई ताकत मिलती है।

चैप्टर 14: भविष्य की तस्वीर

उस जिंदगी को महसूस कीजिए। आपका दिमाग शब्दों से ज्यादा तस्वीरों को समझता है। निक ट्रेंटन कहते हैं, "अपने भविष्य की एक साफ और इमोशनल तस्वीर बनाइए। एक ऐसी जिंदगी जिसमें आप आ जाते हैं।"

उदाहरण: एक पिता इमेजिन करता है, वह अपनी बेटी के साथ हंस रहा है और उसकी बेटी की आंखों में डर नहीं, प्यार है। जब उसे शराब पीने की क्रेविंग होती, तो यह तस्वीर उसे रोक लेती थी। शराब का पल भर का मजा उस तस्वीर से मिलने वाली खुशी के सामने बहुत छोटा था। विजुअलाइजेशन सिर्फ सोचना नहीं, यह उस एहसास को आज, अभी महसूस करने के बारे में है। वो सुकून, वो गर्व। जब आप उसे पहले ही महसूस कर लेते हैं, तो आपका दिमाग उसे पाने के लिए रास्ता बनाना शुरू कर देता है। आपकी भविष्य की तस्वीर आपका नॉर्थ स्टार है, जो आपको हमेशा सही रास्ता दिखाएगी।

चैप्टर 15: उस खालीपन का क्या करें?

अपनी जिंदगी को भरिए। आपकी एडिक्शन आपकी जिंदगी में सिर्फ एक बुरी आदत नहीं थी। वह आपका वक्त लेती थी। आपकी एनर्जी लेती थी। आपका ध्यान लेती थी। निक ट्रेंटन कहते हैं, "जब आप उसे छोड़ते हैं, तो आपकी जिंदगी में एक खालीपन आ जाता है। अगर आपने उस खालीपन को किसी अच्छी चीज से नहीं भरा, तो दिमाग वापस पुरानी आदत से ही उसे भर देगा।"

उदाहरण: एक महिला थी जिसे टीवी सीरियल्स देखने की लत थी। वो दिन में 4 से 5 घंटे बर्बाद कर देती थी। जब उसने सीरियल्स देखना बंद किया, तो उसे दिन बहुत लंबा और खाली लगने लगा। वो बोर होने लगी। उसे पता था कि वो जल्दी ही वापस टीवी देखने लगेगी। इसलिए उसने वो काम करना शुरू किया जिसे वो सालों से टाल रही थी। पेंटिंग। अब वो अपना खाली वक्त पेंटिंग में लगाने लगी। उसे एक नया पैशन मिल गया था। एक ऐसा काम जो उसे खुशी और सुकून देता था।

आपको एडिक्शन को सिर्फ हटाना नहीं है। आपको उसे रिप्लेस करना है। एक नई हॉबी, एक नई स्किल, दोस्तों के साथ ज्यादा वक्त बिताना, एक्सरसाइज करना। कुछ ऐसा खोजिए जो आपको एक्साइटेड करे, जो आपको वो रिवॉर्ड दे जो आपकी एडिक्शन कभी नहीं दे सकती थी। ग्रोथ का रिवॉर्ड, पर्पस का रिवॉर्ड। जब आपकी जिंदगी अच्छी चीजों से भरी होती है, तो बुरी चीजों के लिए जगह ही नहीं बचती।

चैप्टर 16: मैं क्यों कर रहा हूं?

अपने सबसे बड़े कारण को खोजिए। मोटिवेशन एक लहर की तरह है। आज है, कल नहीं। आप सिर्फ मोटिवेशन के भरोसे यह लंबी लड़ाई नहीं जीत सकते। निक ट्रेंटन कहते हैं, "आपको मोटिवेशन से ज्यादा गहरी चीज चाहिए। आपको एक कारण चाहिए। एक व्हाई, एक ऐसा कारण जो आपकी भावनाओं से जुड़ा हो।"

उदाहरण: एक पिता थे जो बहुत ज्यादा स्मोक करते थे। उन्होंने हेल्थ वार्निंग्स पढ़ीं। सब ट्राई किया, पर कुछ नहीं बदला। एक दिन उनकी 5 साल की बेटी ने उनसे पूछा, "पापा, क्या आप मेरी शादी में नहीं आओगे?" यह सवाल उनके दिल में तीर की तरह लगा। उन्हें अपना 'वाई' मिल गया था। अब वो अपनी हेल्थ के लिए नहीं, अपनी बेटी के लिए सिगरेट छोड़ रहे थे। यह कारण इतना पावरफुल था कि क्रेविंग उसके सामने टिक नहीं पाई।

सतही कारण काम नहीं करते। "मुझे वजन कम करना है।" "मुझे पैसे बचाने हैं।" यह लॉजिकल है। इमोशनल नहीं। अपने दिल के अंदर झांकिए। आप यह बदलाव किसके लिए कर रहे हैं? अपने बच्चों के भविष्य के लिए, अपने पार्टनर के साथ एक खुशहाल जिंदगी के लिए, उस आत्मसम्मान के लिए जो आपने खो दिया है। उस एक कारण को खोजिए और उसे एक कागज पर लिखकर ऐसी जगह लगा दीजिए जहां वह रोज आपको दिखे। जब इरादे कमजोर पड़ें, तो आपका 'वाई' आपको ताकत देगा।

चैप्टर 17: छोटी जीत का जश्न

दिमाग को नया इनाम दीजिए। आपका दिमाग एक बच्चे की तरह है। जब वह कुछ अच्छा करता है और आप उसे शाबाशी देते हैं, तो वह उस काम को दोबारा करना चाहता है। निक ट्रेंटन कहते हैं, "एडिक्शन छोड़ने के प्रोसेस में आपको अपनी छोटी-छोटी जीतों का जश्न मनाना होगा। इससे आप अपने दिमाग को रिट्रेन करते हैं।"

उदाहरण: एक लड़का पोर्न एडिक्शन छोड़ना चाहता था। उसने एक टारगेट बनाया, "मैं 24 घंटे पोर्न नहीं देखूंगा।" जब उसने 24 घंटे पूरे कर लिए, तो उसने खुद को एक रिवॉर्ड दिया। उसने अपनी पसंदीदा आइसक्रीम खाई। फिर उसने 3 दिन का टारगेट रखा। पूरा होने पर उसने एक मूवी देखी। हर छोटी जीत के बाद वो खुद को एक हेल्दी ट्रीट देता था। उसका दिमाग सीखने लगा कि पोर्न ना देखने से रिवॉर्ड मिलता है। वो एक नया पॉजिटिव लूप बना रहा था।

यह जश्न मनाना जरूरी है। यह आपके दिमाग को बताता है कि आप सही रास्ते पर हैं। यह मुश्किल सफर में खुशी के छोटे-छोटे पल लाता है। आपका रिवॉर्ड कुछ भी हो सकता है। एक अच्छा गाना सुनना, एक दोस्त से बात करना, नेचर में वॉक पर जाना। बस यह ध्यान रखिए कि आपका रिवॉर्ड आपकी पुरानी एडिक्शन से जुड़ा ना हो। हर बार जब आप एक क्रेविंग को हराते हैं, रुकिए और खुद की पीठ थपथपाइए। आप एक जंग जीत रहे हैं और हर जीत जश्न के लायक है।

चैप्टर 18: शर्म और अपराध बोध से आगे

खुद के दोस्त बनिए। एडिक्शन का सबसे भारी बोझ शर्म और अपराध बोध (गिल्ट) है। आप खुद से नफरत करने लगते हैं। आप सोचते हैं, "मैं कितना कमजोर हूं।" निक ट्रेंटन कहते हैं, "यह सेल्फ-क्रिटिसिज्म आपको दलदल में और नीचे धकेलता है। ठीक होने के लिए आपको सेल्फ-कम्पेसन की जरूरत है। आपको खुद का दुश्मन नहीं, दोस्त बनना होगा।"

उदाहरण: एक लड़की जब भी ज्यादा खा लेती थी, तो खुद को कोसती थी। इस स्ट्रेस में वो और ज्यादा खा लेती थी। फिर उसने खुद से कहना शुरू किया, "कोई बात नहीं, तुम इंसान हो। मैं तुमसे प्यार करती हूं।" यह शब्द जादू की तरह थे। उसका स्ट्रेस कम हो गया और उसने अगला कदम सही उठाया।

जब आपका दोस्त गिरता है, तो क्या आप उस पर चिल्लाते हैं या उसे सहारा देते हैं? तो फिर आप खुद के साथ इतने कठोर क्यों हैं? जब आप खुद को प्यार देना शुरू करते हैं, तो आप उन आदतों को छोड़ना शुरू कर देते हैं जो आपका सम्मान नहीं करतीं।

चैप्टर 19: धैर्य का खेल

रातोंरात कुछ नहीं बदलता। आपने यह आदत रातोंरात नहीं बनाई थी, तो यह रातोंरात जाएगी भी नहीं। निक ट्रेंटन हमें याद दिलाते हैं, "एडिक्शन छोड़ना एक स्प्रिंट नहीं है। यह एक मैराथन है और इस मैराथन में धैर्य जरूरी है।"

उदाहरण: एक आदमी एक महीने जिम जाकर छोड़ देता है क्योंकि उसे रिजल्ट नहीं दिखता। दूसरा आदमी रिजल्ट की चिंता किए बिना प्रोसेस पर फोकस करता है। वो बस रोज जाता है। एक साल बाद उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी होती है। शुरुआत में आपको लगेगा कि कुछ नहीं बदल रहा, पर सतह के नीचे आपके दिमाग में एक नया हाईवे बन रहा होता है। हर बार जब आप क्रेविंग को ना कहते हैं, वह थोड़ा और पक्का होता है। प्रोसेस पर भरोसा कीजिए। धैर्य आपकी सबसे बड़ी ताकत है।

चैप्टर 20: आजादी की पहली सुबह

आप अब आजाद हैं। यह सफर सिर्फ कुछ छोड़ने का नहीं था। यह कुछ बनने का सफर था। एक गुलाम से अपने दिमाग का मालिक बनने का। निक ट्रेंटन कहते हैं, "असली आजादी वह नहीं है जब क्रेविंग आना बंद हो जाती है। असली आजादी वह है जब क्रेविंग आती है और आपको उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आप अब उसके आने से डरते नहीं हैं।"

लड़ाई खत्म हो चुकी है। आप जीत चुके हैं। यह आपकी जिंदगी का नया चैप्टर है। एक खाली किताब, जिसे अब आप अपनी मर्जी से भरेंगे। उस आजादी को महसूस कीजिए। उस हल्केपन को महसूस कीजिए। यह आपकी आजादी की पहली सुबह है। इसे जी भरकर जी लीजिए।

अगली ऑडियो बुक जरूर सुनिए। "रिवायर यूअर एशियस ब्रेन" आई बटन और एंड स्क्रीन में उपलब्ध है। धन्यवाद कि आपने किताबी मंजिल के इस सफर में साथ दिया।

[संगीत]