Transcription
बिमला रहमान रहीम। अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन। स सला सलाम आला रसूलुल्लाह। आली रा आपने रिन तो करली होगी। तो हम दो चार सवाल करके इशाला आगे चलते हैं। हमने साब का दस में जिक्र किया था के इस्लाम में तहा पाकीजा कितनी बड़ी नेमत है। तो इस हवाले से इस्लाम की कोई तालीमाबाद पूछे कोई आधा ईमान कैसे है? फिर क्या बताएंगे कि तहा आधा ईमान कैसे बन जाता है? हाँ जी, कि नमाज, तवाफ, कुरान की तिलावत, मुख्तलिफ चीजें हैं कि जिसके लिए तहा क्या है शर्त है। तो जाहिरी बात है, यह बहुत से ईमान के बहुत बड़ी बुनियाद हैं। इसलिए आप ने फरमाया कि त यह भी हमने जिक्र किया था के पानी जो बारिश का नाजिल होता है, इसका क्या हुक्म है? पाक है या नापाक है? दलील उसकी देखिए भाई। हम यही चीज हम यहां पर सीखना चाहते हैं, वरना आप किसी से बर पूछे ना बारिश का पानी कैसा? यही कहेगा पाक है। लेकिन दलील क्या है? हम पर यहां पर दलील सीखना चाहते हैं। क्या दलील है कि बारिश का पानी पाक है? मन समा मान रा अल्लाह ने खुद इसको तहूर का नाम दिया है, पाकीजा पानी का नाम दिया है। और हम जानते हैं कि जमीन पर जितना भी पानी पाया जाता है कि नहर दरियाओ का हो, तालाबों कु का हो, सभी का कौन सा है? व सभी बारिश का पानी, सभी बारिश का पानी है। और समुंदर का पानी व पाक है, उसकी भी को दलील आपको याद होगी। यह खामोशी है। हम चाहते हैं कि आइंदा ना हो। समझे ना? आपसे पूछा गया समुद्र के पानी के बारे में आपने क्या फरमाया? त मा के समुंदर का पानी क्या है? पाक है। तो इसी तरह हमने यह भी जिक्र किया था कि पानी नापाक कब होता है? पानी में बदबू आ जाए, खड़े खड़े रंग बदल जाए। हाँ, फिर जरा थोड़ा वाज करिए। पानी नापाक कब होता है? बस पानी का जायका बदल जाए, तो नापाक हो जाता है। ऐसे ऐसे ही नापाक हो जाता है। कु ची उसम पड़े तो फिर देखिए, उसम को नापाक चीज पड़ने के बाद उसका जायका, रंग, बू तब्दील हो जाती है, तो फिर नापाक होता है। उसकी स्मेल, उसका कलर, उसका टेस्ट, उसके अंदर कोई नापाक चीज पड़ने के बाद चेंज होता है, तो फिर जो है नापाक है, वरना तो पानी खड़ा खड़ा बाज औकात उसकी स्मेल बदल जाती है, तो ऐसे नापाक तो नहीं होगा ना? उसके अंदर वो घास उगने से उसका कलर बदल जाता है, तो क्या नापाक हो जाता है? ऐसे नापाक नहीं होता। उसके अंदर कोई नापाक चीज पढ़ने के बाद तीन में से एक चीज हो जाए, ज की तीनों चीज हो। बा लोगों को ये भी कंफ्यूजन है कि शायद तीनों चीज होंगी तो फ नापाक होगा। तीनों चीजों का होना जरूरी नहीं है। तीनों में से कोई एक चीज हो जाती है उसमें नापाक चीज पड़ने से, तो क्या होता है? वो नापाक हो जाता है, वरना वो पानी पाक है। समझे ना? यह फर्ज करें को बड़ा तालाब है, उसमें आप देखते हैं एक तरफ कोई जानवर मरा पड़ा हु। आज जानवर मरने के बाद अगरचे हलाल भी जानवर हो, मरने के बाद क्या हो जाता है? नापाक हो जाता है। सम। अब आप देखेंगे उस तालाब का पानी दूसरी तरफ, उसके अंदर स्मेल है, उसका जायका चेंज है, उसके अंदर कोई उसका कलर चेंज नहीं है, तो फिर इसका मतलब पानी पाक है। आप उससे वजू कर सकते हैं, उसको इस्तेमाल कर सकते हैं, चाहे वो एक साइड पर वो नापाक जानवर पड़ा भी हो। समझे? तो सारी वो चीज है कि जो हमारी हर रोज की है, जिसे हमें हर रोज इन चीजों की जरूरत पड़ती है, उनसे वास्ता पड़ता है। अच्छा, उसके बाद आगे चलते हैं। मसला नंबर आठ में अगर पानी में कोई पाक चीज मिल जाए। ये तो हमने बताया था कि नापाक चीज मिल जाए तो फिर तो उसका कलर, उसका टेस्ट, उसका रंग यानी के या उसका जो है अपने स्मेल उसकी चेंज हो जाए, तो वो नापाक होता है। नापाक चीज पढ़ने से। लेकिन अगर पाक चीज पानी में पड़ जाए, यानी बाल्टी पानी, बाल्टी पानी पड़ा, बाल्टी के अंदर, उसमें कोई स्याही का कतरा गिर जाता है, इं गिर जाती है, तो कलर तो चेंज होगा ना? तो पानी पाक है? नापाक है? पाक है। अच्छा, इसी तरह आप क्या करते हैं? बाज औकात हम पानी में लवन डाल देते हैं या दूध डाल देते हैं, उसको पीने के लिए या कुछ शरबत डाल देते हैं। बिटो का, रू अफजा का जो भी तरह तरह के हमारे पाए जाते हैं ना, वो डाल देते हैं, तो पानी पाक है? नापाक है? वजू करेंगे उसे? हाँ, क्यों भाई? पाक तो है, वो वजू क्यों नहीं करेंगे? यहां पर एक और चीज आपके सामने आ गई कि अगर पानी में कोई पाक पढ़ने से वह पानी ही रहता है, उसका नाम पानी ही है, उसका नाम चेंज नहीं हुआ। उसके अंदर इक पड़ गई, कतरा स्याही का पड़ा, प फिर कहेंगे पानी है। उसके अंदर मामूली किस्म की कोई दूध, क्या मामूली किस्म की चीज पड़ गई? आप क्या कहोगे? यह पानी है। तो जब तक उसका नाम पानी है, आप व पाक तो है, तो आप उससे वजू भी कर सकेंगे, उसको पिएंगे भी, इस्तेमाल भी करेंगे। लेकिन अगर उसका नाम चेंज हो गया, आपने स् कंज भी बना ली, लेमन डालकर। समझे ना? शरबत डाल के, रू अफजा के शरबत बना लिया या उसमें लवन, दूध डाल के लस्सी बना ली। अब क्या है वो? क्या बन गई? लस्सी। वो बन गया शरबत। अब वो पानी नहीं रहा है। तो पाक लेकिन वजू उससे नहीं करेंगे। तो यहां पर हमें एक चीज और मालूम हुई कि वजू किससे करना है? पानी से करना है। मधु पानी से करना है, जिसको हम पानी कहते हैं। जब उसका नाम चेंज हो जाएगा, पानी नहीं रहेगा। अगरचे व पाक ही होगा, आप उसको पिए और उसको इस्तेमाल करें जो करना है, लेकिन उससे वजू तहर यह चीज नहीं होंगी। क्योंकि अल्लाह ने वजू के लिए पानी का इस्तेमाल करने का हुक्म दिया है। समझ? फल कुराने करीम में अल्लाह ता तुमको पानी ना मिले तो तब जो है येय आपके सामने दलील दी गई है। अच्छा, क्या दलील है कि अगर मामूली किस्म की उसमें कोई पाक चीज पड़ी हो तो तब भी वह पाक तो है, लेकिन वजू भी कर सकते हैं जब तक पानी के नाम से है। आप आपके सामने दलील दी गई है कि नबी करीम सलाम आपने वजू किया ऐसे टब से जिसमें गंदे हुए आटे का असर था। यानी टब में आटा गंधा गया था। आटा गूंदने के बाद आटे के थोड़े बहुत बाकी थे, निशाना उसी में पानी डाल दिया गया। अब पानी का थोड़ा बहुत कलर तो चेंज हुआ, शायद जायका भी बदला होगा, लेकिन पानी क्योंकि पाक है, तो आपने क्या किया? इससे वजू किया। इससे मालूम क्या हुआ? बल्कि गुसल किया। इससे मालूम क्या हुआ कि अगर वो पानी के नाम से ही है, चाहे उसका थोड़ा कलर चेंज हो गया है, पाक चीज पड़ने से, तो उससे आप वजू, गुसल कर सकते हैं। लेकिन जब पानी उसका नाम नहीं रहा, उसका नाम चेंज हो गया, लस्सी बन गई, दूध और शरबत बन गया, और चीज बन गई, तो फिर आप उससे वजू नहीं करेंगे। वैसे उसको पी सकते हैं, पाक हो। बात समझ आई? सभी को समझ आ गया मसला कि नापाक कब होता है? जब उसमें कोई नापाक चीज पड़ने से कलर चेंज हो गया, टेस्ट चेंज हो गया, उसका जो है वो उसके अंदर जो स्मेल आ गई, तो फिर वो नापाक हो गया। लेकिन उसके अंदर को पाक चीज पड़ गई और पाक चीज पड़ने से उसका कलर या टेस्ट तो चेंज हो गया, लेकिन पानी ही है, तो उससे वजू करेंगे, तहर करेंगे। लेकिन पानी नहीं रहा, पानी का नाम बदल गया, तो फिर जो है उससे वजू तत नहीं करेंगे, लेकिन उसको वैसे और इस्तेमाल में ला सकते हैं। अच्छा, आगे चलते हैं। पानी को वजू या गुसल वगैरह में इस्तेमाल करने से वह नापाक नहीं होता। पानी बाल्टी में, पानी टब में, पानी पड़ा है। आप उसी टब में वजू कर लेते हैं, वजू करते हुए छींटे पानी के सारे उसमें गिर रहे हैं। समझे ना? अक्सर तो वैसे हम टूटी से वजू करते हैं ना, लेकिन कभी आपके पास टब हो, बाल्टी हो, उससे आप वजू कर रहे हैं या गुसल कर रहे हैं और गुसल करते हुए, वजू करते हुए उसके पानी गिर रहा है, आपके वजू के जो पानी है, उसमें गिर रहा है, तो क्या वो वजू या गुसल का जो पानी उसमें गिर रहा है, उस वजह से वो नापाक हो जाएगा? वो नापाक नहीं होता। चाहे गुसले जनाब भी क्यों ना हो, नापाकी का गुसल भी क्यों ना हो, तब भी उसकी दलील आपके सामने है के जाबर रज अल्लाह ताला अ बड़े जलील कदर सहाबी है, बीमार हो गए, तो नबी करीम सला सलाम उनकी बीमार पुसी, उनकी आदत के लिए, उनकी विज करने के लिए जाते हैं, तो आपने क्या किया? आपने वजू करके, वजू का जो बचा हुआ पानी था, उनके ऊपर डाला, उनके ऊपर डाला। और यह भी आपके इल्म होना चाहिए कि बुखार का बेहतरीन इलाज क्या है? पानी। क् बुखार होता, गर्मी, उसको ठंडा करने के लिए नबी स ने खुद भी पानी का इस्तेमाल भी किया और इसका बयान भी किया है कि पानी का इस्तेमाल किया जाए। तो आपने वजू का बचा हुआ पानी उसके ऊपर डाला। इसका माना क्या है? पानी पाक है। तोला कुली हाल ये हमें यह मसला मालूम हुआ। अगर आप किसी टप, बाल्टी में वजू करते हैं, गुसल करते हैं, उसमें पानी गिरता है, वजू का, गुसल का, तो उस पानी से वह, उस गिरे हुए पानी से व पानी पाक ही रहता है, नापाक नहीं होता। आप उससे दोबारा भी वजू कर सकते हैं, कोई दूसरा भी उसे वजू कर सकता है। समझे ना? तो ये चीज मालूम होनी चाहिए। उसके बाद 10 नंबर मसला। जनात की हालत में पानी में हाथ डालने से नापाक नहीं होता। जनात यानी आदमी जब नापाक होता है, जब उसको गुसल की जरूरत होती है। औरत है, मर्द है, कोई भी, जब उसको गुसल की जरूरत होती है, इसको कहते हैं जनाब। इस हालत में आदमी असल तो है कि वह नापाकी की हालत में है, उसको गुसल की जरूरत है, तब वह पाक पाक होगा। लेकिन अगर कोई आदमी इस जनाब की हालत में ही गुसल करने से पहले ही अपना हाथ पानी में डाल देता है, तो तो क्या उससे पानी नापाक हो जाएगा? वैसे अल्लाह के नबी ने मना किया से, क्योंकि आदमी को कराह होती, दूसरा आदमी आएगा, लेकिन पानी नापाक नहीं होगा। उसकी दलील भी आपके सामने दी गई है। इब्ने अब्बास रला ता की हदीस है कि नबी करीम सला सलम ने एक बर्तन से वजू किया जिसमें आपकी किसी बीवी ने गुस्ल किया हुआ था। समझे ना? आपकी किसी बीवी ने उसी पानी से गुस्ल किया हुआ था, आपने उस बचे हुए पानी से क्या किया? वजू किया। तो किसी ने देखा तो आपको बताया कि इससे तो फला फला औरत ने गुसल किया है। आपने क्या फरमाया? य हदीस के अल्फाज आपके सामने क्या लिखे हुए हैं? इनल मा लाय के पानी नापाक नहीं होता। इस तरह से पानी नापाक नहीं होता। तो यहां पर हम यह भी मालूम हुआ अगर नापाकी की हालत में भी आप पानी में हाथ डाल देते हैं या पानी से गुसल करते हैं, वो पानी बचा हुआ रह जाता है या पानी के कतरा उसमें गिर जाते हैं, तो वह पानी भी पाक ही है, नापाक नहीं हुआ। वो पानी भी पाक है और दलील आपके सामने सही हदीस है। 11 नंबर मसला में इन तमाम इंसानों के झूठ। झूठ क्या होता है? खाने पीने से जो बच जाता है। आपको खाना खाते हैं, जो खाना बच जाता है या पानी पीते हैं, जो पानी बच जाता है, उसको क्या कहते हैं? झूठ। तो तमाम इंसान के झूठ जो है पाक है और बल्कि तमाम हलाल जानवरों के भी, तमाम हलाल जानवर भी और बल्के तमाम हराम जानवर भी, सिवाय कुत्ते और सूअर के। इस मसले में तीन चीज आ गई। इंसानों का झूठ, चाहे मुसलमान हो या काफिर हो, नी काफिर किसी गिलास से पानी पी के आधा पानी छोड़ देता है। अब उसका छोड़ा हुआ पानी पाक है या नापाक है? पाक है। किसी हिंदू ने, किसी कृष्ण ने पानी पिया, उसका बचा हुआ पानी पाक है। आप चाहे तो उसको पी भी सकते हैं, उसे वजू, गुसल भी कर सकते हैं। अच्छा, यह इंसान है। हलाल जानवर कौन से हैं? बकरी, गाय, ऊंट वगैरा जो तो बकरी ने पानी पिया किसी बाल्टी से और पानी पीने के बाद बाकी बा पानी पड़ा हुआ है। बाकी पानी का हुक्म क्या है? पाक है। पानी बाकी जो बच गया है वो पाक है। अच्छा, अच्छ हता कि हराम जानवर भी आखिर में क्या लिखा है? जबक हराम जानवर के बारे में सही यह है कि कुत्ते और सूअर के अलावा बाकी जानवरों का झूठ पाक है। कुत्ते, सूअर का झूठ जो है वो पाक नहीं, नापाक है। बल्कि कुत्ता किसी बर्तन में मुंह डाल देता, आगे हम पढ़ेंगे कि वो चीज भी नापाक हो जाएगी, बर्तन भी नापाक हो जाएगा, उसको सात मर्तबा धोना पड़ेगा। कुत्ते की नापाकी बहुत सखत है, इस सूअर उसका भी, उसके अलावा जितने भी जानवर है या इस मसले की समरी ये हुई कि कुत्ते, सूअर के अलावा जितने भी जानदार चीज हैं, इंसान हो या हैवान हो, हलाल जानवर हो या हराम हो, उन सभी का झूठ जो है वो नापाक नहीं, पाक है। आप पूछेंगे इसकी दलील? इसकी दलील ह आयशा की हदीस है के खाई या पी जाने वाली चीजों के वहा हजरत आशा कहीं से पानी पीती, आप वहीं पर मुंह रख के पानी पीते। हजरत आयशा रज अल्लाह ताला अहा कोई चीज खाती, बटी वगैरह को हड्डी से, आप वहीं से वो चीज खाते। इसका माना क्या हुआ कि झूठ है ना ये बची हुई चीज है ना तो पाक है। जानों के हवाले से यहां उसकी दलील नहीं जिक्र की गई। जानवरों के हवाले से नबी करम सहाबा के दौर में आम जो तालाब होते हैं, पोल होते हैं, खुले सराव में तो सहाबा वहां से गुजरते हुए पानी पीते, वजू करते, गुसल करते, पानी से। हालांकि उन तालाबों के अंदर हर तरह के जानवर आके पानी पीते थे, यानी गधे वगैरह, ऊंट वगैरह, हर तरह के जानवर उसमें पानी पीते थे, लेकिन फिर भी वो उससे वजू करते, गुसल करते। समझे? तो जो इस बात की दलील है कि सवाय कुत्ते और सूअर के बाकी जानवरों का झूठ जो है वह पाक है। आप उसको इस्तेमाल कर सकते हैं, तहर में भी, किसी भी चीज में। और यह वह चीज है कि जो हमारे आम रोज मरा की चीजों में आती है। इसकी दलील हता कि हराम जानवर की। आप पूछेंगे दलील? सही हदीस में आता है। अबू दाऊद की हदीस सही ह अबू कता ला ताला साबी रसूल है। वजू कर रहे थे और उनकी बहू, बेटी की बीवी उनको वजू करवा रही थी। तो उनके वजू के दौरान बिल्ली आ जाती है। बिल्ली आती है तो उन्होने क्या किया? जिस बर्तन से वजू कर रहे थे, बर्तन बिल्ली के सामने कर दिया। बिल्ली ने उसे पानी पिया। बिल्ली ने उस बर्तन से पानी पिया। अब उनकी बहू बड़ी हैरान होकर देख रही कि ये क्या कर रहे हैं? उसी पानी से वजू कर रहे हैं, वही वही पानी बिल्ली को पिला रहे हैं। तो उने जब देखा कि बहू बड़ी हैरान हो रही है, तो फिर उन्होंने रसूल करीम सलाम की हदीस सुनाई बिल्ली के बारे में। खास तौर पर इय नापाक नहीं है क्योंकि घरों में आती जाती है, तो बिल्ली का जूठ जो है, छोड़ा हुआ पानी हो, कुछ भी हो, वह नापाक नहीं है। समझे ना? तो ये दलील है हता कि बिल्ली हलाल है या हराम है? हां, ह हराम है, कभी नहीं खाई आपने तो बिल्ली हराम है, कोई शक नहीं। समझे ना? तो उन्होंने बकायदा बहू को ये चीज दिखाई भी और साथ दलील भी पेश की कि नबी सलाम ने इसके बारे में यह फरमाया है। ला कुहा। इस मसले के खुलासा, समरी ये हुई कि जितने भी जानदार चीज हैं, सिवाय कुत्ते और सूअर के, उनका छोड़ा हुआ पानी, खाना जो है व हलाल है, पाक है, उसको इस्तेमाल किया जा सकता है। आगे 12 नंबर मसलों में, मसला में एक नया मसला जो आज के दौर का है। क्या है? गटरों का पानी। फिल्ट्रेशन और केमिकल मराल से गुजर कर अपनी असली हालत में वापस आ जाए और उसमें नजासत का कोई असर बाकी ना रहे तो पाक हो जाता है। यह मसला बहुत से लोगों को अजीब लगेगा। गटर का पानी, यह तो होते असल नापाकी है। लेकिन इसके साथ क्या किया जाता है? इसके काफी इसके प्रोसेस होता है लंबा कि जिसमें पहली बात उसको सफाई की जाती है। उसके अंदर जो गंदगी होती है की चीजों को निकाला जाता है। उन गंदगी को निकालने के बाद फिर पानी को उसके अंदर मुख्तलिफ तरह की चीजें मिक्स की जाती है, केमिकल वगैरह कि जिससे उसके मजीद भी उसके अंदर गंदगी वगैरह है तो अलग हो जाए, दूर हो जाए और फिर उसको एक खास नी जगह से गुजारा जाता है जिसमें ऐसी रेज होती है कि जिससे उसके उससे जरासी मर जाते हैं और हत्ता के पानी आखिर में ऐसे होता है जिस तर आम नॉर्मल पानी है ना, उसके अंदर कोई बू होती है, स्मेल होती है, ना उसके रंग के अंदर को फर्क होता है। आम पानी की तरह उसका कलर होता है और अगर आप उसको चेंगे तो देखेंगे आम पानी की तरह है। अब इस मसले की आप कहे क्या? इतनी जरूरत है इस इस तरह के मसाइल को जानने की? हमें बड़े अश जरूरत है। अगरचे आप इस तरह का पानी पीने के इस्तेमाल कर नहीं भी करेंगे, लेकिन कभी यह पानी आपके कपड़ों पर लग जाता है, पड़ जाता है। किसी पार्क में जाते हैं, आमतौर पर पार्कों में बहुत से पार्कों में इसी तरह का पानी जो है वह वहां या की खतों को, पौधों को दिया जा रहा होता है। समझे ना? एग्रीकल्चर में आमतौर पर यह पानी इस्तेमाल किया जाता है जो पार्को वगैरह में, आम जो रोड़ों वगैरह, प दरख्त होते हैं, ये बकायदा गवर्नमेंट के आजकल प्रोजेक्ट चल रहे हैं कि पानी की फिल्ट्रेशन करना, उसकी इस तरीके से बिल्कुल साफ करके फिर उसको जो है पीने में इस्तेमाल नहीं, लेकिन इस तरह की चीजों में इस्तेमाल करते हैं। तो अगर आपको फर्ज करो किसी पार्क में जाते हैं, किसी जगह से गुजरते हुए आपके ऊपर पानी गिर जाता है इस तरह का, तो आपके कपड़े क्या? नापाक हो गए? हाँ? आपके इससे पता चलेगा कि अगर वो पानी अपनी असली हालत में आ चुका था, जिस तरह के आम पानी होता है, उसके अंदर कोई स्मेल नहीं, उसके अंदर कोई उसका रंग बिल्कुल नेचुरल है, कोई उसके अंदर यानी कि उसका जायका बिल्कुल ठीक है। इसका माना कि वो पानी नापाक नहीं है, आपके कपड़ों पर गिर गया तो आपके कपड़े पाक हैं, आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। वरना अगर हम इस पानी को नापाक कहे तो बा सिर्फ कपड़ों पर गिरने की नहीं, आप पार्क में जाके बैठते हो, घास पर, अब घास उसी पानी से उसको सारी उसके होता है, सारा सिलसिला। समझे ना? तो फिर क्या घास पाक होगी? नापाक होगी? इसलिए इस मसले को जानने की हमें जरूरत है और आजकल इसलिए आगे लिख दलील क्या लिखी है? चकि कुरान और हदीस का मसला नहीं है, लेकिन लोग उलमा के इतहाद मसाइल, इतहाद का होता है कि वह मसला जिस पर कुरान या हदीस की कोई दलील ना हो, यानी एक नया मसला है, नई चीज सामने आई, लोगों के उस उस परमा फिर क्या करते हैं? तो कुरान और हदीस की रोशनी में उसका हुक्म देते हैं कि क्या होना चाहिए। तो पानी नापाक क्यों है? क्योंकि उसका कलर चेंज है, क्योंकि उसके अंदर स्मेल है, क्योंकि उसका जायका चेंज है। लेकिन अब उसको पानी को बिल्कुल फिल्टर करके आम नेचुरल हालत में उसको वापस लौटा लिया गया, तो इसका मतलब के वो पानी अपनी असली हालत में वापस आ गया। 13 नंबर मसला में अगर पाक पानी के मुतालिक नापाक नापाकी का शक हो जाए तो ऐसे शक को नजरअंदाज किया जाए। आप के बास को पानी, पानी पड़ा किसी बाल्टी में, किसी इस तरह की चीज में आपको शक है कि पानी पाक है? नापाक है? असल है कि पाक है। उसमें शक करने की जरूरत नहीं है। समझे ना? इला यह कि अगर शक वाज हो, नापाकी नजर आ रही है उसके अंदर, फिर तो कोई शक शक की बात नहीं, फिर तो वाज है। लेकिन बात कर रहे शक की कि सिर्फ शक की बुनियाद पर जो है वो पानी को नहीं छोड़ेंगे। शक है, नापाक होगा, ये चीज गलत है। तो और अगर नापाक और पाक पानी मुस्तबेशन को ज्यादा आपका दिल किस पर मुतमइन होता है? इस बर्तन पर या इस बर्तन पर? हाँ नहीं, आप देखिए आपका दिल आपको क्या, कौन सा बर्तन लगता है कि जो आप समझते हैं कि पाक होगा, तो जो आपका दिल का यानी कि आपको जिस तरफ रुझान हो जाए, आपका दिल जिस तरफ मुतमइन हो जाए, उस पानी को आप इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर तो भी कलर में फर्क है। समझे ना? बाज कात पानी पाक और नापाक पता चल रहा होता है कि इसका कलर और है, दूसरे का कलर और है। इस तरह की चीज है, लेकिन दोनों एक ही तरह के हैं, एक ही तरह के पानी आपको नजर आ रहे हैं, लेकिन कोई पता नहीं कि कौन सा पाक है, कौन सा नापाक है और यकीनी तौर पर एक पाक और दूसरा पाक है तो फिर जो है यहां पर उलमा फ माते हैं कि आप कोशिश करें अपनी तरफ से मालूम करने की कि कौन सा पाक हो सकता है। आप उसको ले और जो नापाक, जिसके मुतालिक आपको यकीन है कि नापाक होगा, उसको छोड़ें। तो इस म इसमें दो चीज आ गई। एक है कि आपको पानी में वैसे ही शक हो जाए, एक ही बर्तन में पानी है और आपको शक हो जा है कि पानी पाक होगा। वो शक दूर करिए और पानी को इस्तेमाल करिए क्योंकि असल जो है पानी क्या है? पाक है। इसकी दलील यहां परिक नहीं की गई, लेकिन आपको बता देते हैं के दो सहाबी गुजर रहे थे गली से तो किसी मकान के पास से गुजरे तो मकान के ऊपर से क्या है? पानी गिरा। कान के ऊपर से पानी गिरा। तो एक आदमी को शक हुआ कि पानी पानी कैसा है? पाक है? नापाक है? दूसरा सहाबी कहने लगा मकान के मालिक को हमें बताने की कुछ जरूरत नहीं कि पानी कैसा है। हमें यकीन है कि पाक है। यह है असल क्योंकि असल क्या है कि जो चीज असल पाक है वो अपनी असली हालत में बाकी है जब तक उसके अंदर चेंजिंग ना आ जाए। समझे ना? हमने यही पढ़ा है कि जब तक उसके अंदर को चेंजिंग महसूस ना हो, मालूम ना हो, उस वकत तक वो असली हालत में बाकी है। असली हालत पानी की क्या है? वो पाक है। इसलिए अगर पानी का आपको शक होता है, पाक है? नापाक है? असल य है पाक है। उसमें शक करने की जरूरत नहीं। लेकिन अगर दो बर्तनों के अंदर एक में पानी पाक है, दूसरे में नापाक है। अब यहां पर आप कोशिश करिए, देखिए कि आपका रुझान किस तरफ होता है, क्या आपकी नी के क्या ज्यादा आपको क्या मालूम होता है? कौन सा पाक होगा? तो जो पाक है उसको इस्तेमाल कर ले और जो नापाक है उसको छोड़ दें। आखरी मसला ताकि हम इस बाप को खत्म कर लें। यह सिर्फ मसला पानी का नहीं है, कपड़ों का, बर्तन का, किसी भी चीज का। उसमें शुभ हो जाता है कि पानी पाक है? नापाक है? अगर तो आपके पास एक से ज्यादा चीज है तो फिर फर्ज करो कपड़ा पाक भी है, नापाक भी है। पाक पकड़ कपड़े के बारे में आपको शक है या पाक है और नापाक, उसको छोड़ें और पाक चीज इस्तेमाल करें। असल ये है। लेकिन अगर दोनों में शक है कि कौन सा पाक है, यहां पर भी वही करेंगे जिस हमने पानी में किया है। समझे ना? बर्तन के बारे में यही चीज है। तो जब तक किसी के बारे चीज के बारे में यकीन ना हो जाए, वाक ही इसके अंदर नापाकी है, उस वक्त उसको छोड़ा नहीं जाएगा। उसकी दलील आपको दी गई है नबी सलाम से। किसी साबी ने शिकायत की कि नमाज के अंदर, नमाज के दौरान पेट में गैसे वगैरह होती है और शक होता है कि शायद मेरा वजू टूट ना गया हो। शक हो जाता है वजू टूटने का, तो क्या करेंगे? फिर नमाज छोड़ेंगे? शक हुआ है सिर्फ, तो क्या करेंगे? आप माते कि सिर्फ शक की वजह से नमाज नहीं छोड़ो, नमाज पढ़ते रहो जब तक तुम्हें यकीन ना हो जाए। यकीन होने का माना कि वाक ही तुम्हें यकीन हो जाए कि हवा खारिज हुई है या कोई इस तरह का मसला हुआ है कि जिससे वजू टूटा है। सिर्फ शक की बुनियाद पर नमाज नहीं छोड़ेंगे, ना वजू टूटेगा, बल्कि वजू बाकी है, नमाज जारी रखेंगे। तो यह हदीस कायदा कुलिया है, रूल है इस सारे मसले का कि अगर आपको शक हो जाता है किसी चीज के बारे में तो जब तक आपको यकीन नहीं हो जाता कि वाक ही वो आपको जो शक था अब यकीन में बदल गया कि वाक ही नापाकी है, वाक वजू टूट गया है, फिर आप नमाज छोड़ेंगे, वरना नहीं छोड़ेंगे। तो यह कायदा कुलिया है बहुत सी चीजों के अंदर कि जहां पर शक हो जाए हमें क्या करना है। बारक अल्लाह वकला खैर। आपके मजीद अगर कुछ सवालात?