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[संगीत] सयाना सुया [संगीत]
[संगीत] सुनिए तुम यहां क्या कर रही हो? तुम्हें मालूम नहीं नमाज का वक्त हो रहा है? दरखा जाना है तो जल्दी जाओ। [संगीत] वह हमारे मामू जान की बेटी है, मगर आप जो कोई भी हैं, नमाज का वक्त हो रहा है। इस वक्त यहां पर क्यों खड़े हैं? जल्दी कीजिए, वरना इतने बड़े बुजुर्ग के पीछे नमाज पढ़ने से चूक जाएंगे। आइए। [संगीत] रूप बदलकर क्यों बार-बार मुझे आजमा रही हो? [संगीत] हो लाहौल लात, हम गैर मर्द की तरफ क्यों देख रहे थे? अल्लाह अकबर। [संगीत] या अल्लाह, जिसे मैंने चाहा है उसे मेरी तकदीर में लिख दे। या अल्लाह, जिसे आपने हमारी तकदीर का मालिक बनाया है, उसके दिल में हमारी मोहब्बत पैदा कर दीजिए। या अल्लाह, मेरी मोहब्बत कायनात को मेरा मुकदर बना दे। या अल्लाह, मेरी कायनात के लिए तो लड़का मिल गया, अब हमारी सल्तनत के लिए भी कोई अच्छा सा लड़का मिल जाए। [संगीत] वो लड़की कहां गई? के भाई क्या जनाब हमारे नाना के हाथ चूमने के लिए बहुत बेताब हो रहे हैं? [संगीत] हो जीते रहो। अल्लाह को जवानी की इबादत पसंद है। नमाज को कायम करो जी। [संगीत] आ [संगीत] अरे अरे, संभल के। मिया जान, मिया जान, आप ठीक हैं ना? हां, हम बिल्कुल ठीक हैं। [संगीत] इसने ये खेल फिर से शुरू क्यों किया? कहीं इसने मुझे पहचान तो नहीं लिया? क्या हुआ मिया जान? अ, कुछ नहीं। शायद पैर लड़खड़ा गया। सल्तनत जी, आपके सर का [संगीत] दुपट्टा। माफ कर दीजिएगा मिया जान। भूला मत करो कि तुम सैयद शहरियार शाह गाजी की पोती हो। तुम जब घर से निकलती हो बेटा, तो घर की इज्जत तुम्हारे साथ चलती है जी। ये हमारे घर का नहीं, दरगाह का आंगन है। [संगीत] शुक्रिया नौजवान। उस दरगाह का हेड कौन है? हमारे चाचा। तुम्हारे छोटे दादा सैयद शहरियार शाहजी। एक मिनट के लिए। इस वक्त दू र जान से डट पगे। क्या मुझे आपसे बात करनी है? मैसेज कर देना। नंबर बाहर नीलम खड़ी होगी, उससे ले [संगीत] लेना। इंटरेस्टिंग गेम है। लेट्स प्ले, डार्लिंग। [संगीत] अस्सलाम वालेकुम मिया जान। वालेकुम अस्सलाम। जीती रहिए, अल्लाह आपको शऊर दे। [संगीत] बैठो। मामून का बेटा भी उर्स में आ जाता तो अच्छा रहता, मगर नहीं आ पाया। खैर, कल वह अपने मां-बाप के साथ पहुंच रहा [संगीत] है। तुम्हें पता तो है नदीम जी? मिया जान, सारी तैयारियां कर दी हैं मैंने। और हम लोग दिल्ली कब रवाना हो रहे हैं? जी जान मोहम्मद भाई, हमजा, जैनब भाभी आपके साथ गाड़ी में जा रहे हैं, और बाकी के लोग मेरे साथ आ रहे हैं। ट्रेन से? ट्रेन से? हां, वो बच्चे लोग जिद कर रहे थे कि ट्रेन का सफर करना है, तो वो मैंने और हमारे साथ जो गाड़ियां आई थीं वो जी वो आप ही के साथ जाएंगी वापस। खाली हम। सर्फ बेजा यानी कि इस्लाम में फजूल खर्ची भी गुनाह है। बैठो। खैर, तुम बच्चों को खुश [संगीत] रखो। ये ट्रेन में जाने का क्या चक्कर [संगीत] है? ख्वाजा साहब के मेहमान का मैसेज आया। ख्वाजा साहब के मेहमान को ख्वाजा साहब की नगरी नहीं दिखाओगे? वाओ, तो चलिए आइए। ख्वाजा साहब के मेहमान साहेब, आपकी सवारी बिल्कुल तैयार है। ओके। कम [संगीत] [संगीत] आ जाओ। नहीं नहीं, तुम लोग जाओ। मुझे पानी से बहुत डर लग रहा है। अरे ऐसे कैसे? मैं हूं ना? जाना यार। बाय। तुम्हें तो मैं देख लूंगी। अरे मुझे डर लगता है। मैं क्यों बनूं इनके बीच में? कबाब में हड्डी। [संगीत] क्या? तो बताइए, कैसा लगा आपको हमारा अजमेर? ख्वाजा साहिब के मेहमान साहिब, आपको दरगाह से लेकर अन्ना सागर तक पूरा अजमेर इतनी अच्छी तरह घुमा दिया है ना? कोई गाइड भी ऐसे नहीं घुमाएगा। सवाल ही पैदा नहीं होता है। अब मेहमानदारी खत्म। और मुझे दीजिए [संगीत] इजाजत। ऐसे क्या देख रहे हो? एक बात बताइए, आप सचमुच इसलिए हमारी गाइड बनी है कि हम ख्वाजा साहब के मेहमान हैं? आपके ख्याल में और क्या वजह हो सकती है? दोस्ती? दोस्ती भी तो एक वजह हो सकती [प्रशंसा] है। आप ख्वाजा साहेब के मेहमान हैं। वही र भैया वापस ले [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] लीजिए। कुछ कह सके, कुछ सुन लिया। इस दिल को बिना मौका मिला। हां, कुछ कह सके, कुछ सुन लिया। इस दिल को भी ना मौका मिला। अ, हम अपने साथ लेकर आई थीं तो अपने साथ वापस दिल्ली लेक नहीं जाएंगे। सियाना इश्क सूफियाना सूफियाना सूफियाना इश्क सूफियाना सूफियाना सूफियाना मेरा इश्क सूफियाना सूफियाना सूफियाना मेरा इश्क सूफियाना सूफियाना सुफियाना इश्क सुफियाना सुफियाना सुफियाना [संगीत] मेरा एक्सक्यूज मी। इस बार मेरा हाथ पकड़ लिया। आगे से ऐसी कोई हिम्मत ना करना। और वैसे भी यह कोई जयपुर एयरपोर्ट नहीं है जहां से आपको सवारी ना मिले। बस, ट्रेन, टैक्सी जो चाहिए सब मिलेगा। ठीक है भैया, वापस ले लीजिए। [संगीत] हाय, वेलकम बैक। कैसी थी तुम लोगों की राइड? हेलो, तुझसे पूछ रही हूं मैं। राइड कैसी थी सल्तनत? इसको क्या हो गया? सुनो, 345 जयपुर डेली एक्सप्रेस और हा कोच नंबर सी याद रखना। सी। य। देर बाय सल्तनत। [संगीत] बस एक दिन और। रे सारे खेल से पर्दा उठ जाएगा। तुम दोस्ती भी करोगी और मोहब्बत भी। मैं आया तो इंकार करने था, पर अब मैंने अपनी दुल्हन चुन ली है और वह तुम हो सल्तनत। [संगीत] आपकी मेहमानदारी सुपर्ब थी सर। नाउ अलाव मी टू लीव। आखरी सलाम कबूल कीजिए। ख्वाजा साहिब और दुआ दीजिए जिसे दिल ने चाहा है वह मिल [संगीत] जाए। कहां जा रहे हो भैया? ख्वाजा साहब के दर पर फूल चढ़ाने जा रहे हैं। भाई पर भाई तुम अंदर नहीं जा सकते। पर क्यों? क्योंकि तुम मुसलमान नहीं हो। भाई बहुत दूर से आए हैं, फूल चढ़ाने हैं। चढ़ा लेने दो। हां हां, कोई बात नहीं। लाइए, आपके ये फूल हम चढ़ देंगे। [संगीत] सबको पता है हिंदू मंदिर जाते हैं और मुसलमान मस्जिद। यह एक सूफी दरबार है, ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह और यहां पर मजहब की नहीं, अकीदत की पूछ होती है। समझा? [संगीत] यह लो भाई, जैसे चाहे वैसे हाजरी दो। ख्वाजा साहिब हम सबके हैं। आओ। [संगीत] खुदा हाफिज। खुदा [संगीत] [संगीत] हाफिज। आप सचमुच इसलिए हमारी गाइड बनी है कि हम ख्वाजा साहब के मेहमान हैं? आपके ख्याल में और क्या वजह हो सकती है? [संगीत] दोस्ती? सर सर सर सर। दिल्ली के लिए कहां से है ट्रेन सर? दो नंबर पे चले जाइए आप। यात्री कृपया ध्यान दें, जयपुर दिल्ली एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से प्लेटफार्म नंबर दो से निकल रही है। [संगीत] [संगीत] [संगीत] अला खैर आ गया। मतलब हाथ पकड़ना, उसका ट्रेन छूट जाएगी? क्या सोच रही है? हाथ उसकी ट्रेन छूट जाएगी। [संगीत] हमारी अम्मी की परवरिश पर तो सवाल करती है और खुद गैर मर्दों से [संगीत] दोस्ती? हम