Transcription
अब आपसे थोड़ा मुश्किल और सबसे जुड़ा हुआ सवाल पूछता हूँ। क्या आप अपनी मृत्यु पर विचार करते हैं? क्या आपको मौत से डर लगता है? मैं आपको एक सवाल पूछूँ, पूछिए। जन्म के बाद आप मुझे बताइए जीवन है, मृत्यु है। इसमें से सबसे निश्चित क्या है? मृत्यु। मृत्यु। अब मुझे बताइए, आपने मुझे सही जवाब दिया कि जन्म के साथ जो जन्म लेता है, वो मृत्यु है। जीवन तो पनपता है। जी, जीवन और मृत्यु में मृत्यु ही निश्चित है। आपको पता है कि ये निश्चित है और जो निश्चित है उसका डर कहे का भाई? तो फिर शक्ति, समय, जीवन पर लगाओ दिमाग। मृत्यु पर मत खो पाओ। तो जीवन पनपे। जो अनिश्चित है वह जीवन है, फिर उसके लिए मेहनत करनी चाहिए। उसको स्ट्रीमलाइन करना चाहिए। स्टेज बाय स्टेज उसको अपग्रेड करते जाना चाहिए ताकि आप मृत्यु जब तक ना आए तब आप जीवन को फुल बाहार में खिला सको। और इसलिए दिमाग में से मृत्यु निकाल देना चाहिए। वो तो निश्चित है, वो तो लिखा हुआ है, आने वाला है। कब आएगा? कब आएगा? वो जाने। जब आना है तब आएगा। उसको जब फुरसत होगी तब आएगा।