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6) Tafseer - Surah Al Fatihah (Ayah 4 ) - Part ( A ) - Class 6 - Level 1 || Eng. Ebrahim Shabbir

Dr. Mehboob Abu Asim27:04

Transcription

इम इम ये नीचे किस थोड़ा सा नीचे करना ठीक नीचे कर जितना हो सके सला रही अहमदुल्लाह ला सलाम रसूला अमा बाद तफसीर की क्लास हम शुरू करते हैं।

जरा जल्दी से पिछली क्लास की रिवीजन कर लेते हैं ताकि ज्यादा टाइम ना लगे। हम पास टाइम भी कम ही आज अच्छा यह बताए कि जब हम अल्हम्दुलिल्लाह रबल आलमीन तो अल्लाला क्या जवाब में कहता है? ये पिछली नहीं उससे पिछली क्लास का सवाल है लेकिन रिवीजन हो जाएगी। क्या है हमनी मेरे बंदे ने मेरी तारीफ बयान की। जब बंदा पढ़ता है अ रहमान रहीम तब अल्लाह ताला क्या जवाब देते है? कोई जवाब नहीं देता। अनाया ठीक है। इसको आसानी से किस तरह याद करले? अरबी में काउंटिंग में वाहिद और उसके बाद क्या होता है? नेन तो के मेरे बंदे ने दो सिफात जो अल्ला ताला की हम लेते हैं उनका तकरार होता है। अ रहमान और अ रहीम तो अल्लाह जवाब में कहता है मेरे बंदे ने मेरी जो है सना बयान की। आपको इससे जो है ना आसानी से याद हो जाएगा।

उसके बाद जो हमने पिछली क्लास में आयात ली थी मालिक न यह भी ली थी इसमें अल्ला जवाब में क्या कहता है? चले यह हदीस हमने बिल्कुल इंट्रोडक्शन में पढ़ाई थी तो आज बता देते हैं आपको। अल्लाह जवाब में कहता है मनी कि मेरा बंदा जो है मेरी बड़ाई बयान कर रहा है। मतलब मुझे बंदा इकरार कर रहा है कि अल्लाह ताला जो है वो कितना बड़ा है। मदनीय लज है। इसी से एक लज अरबी में कहते हैं जद। जद किसको बोलते हैं? किसको नहीं समझ आई? मुझे? हां दादा को। दादा कौन होता है? घर का या उस खानदान का एक बहुत बड़ा फर्द होता है। ठीक है बल्कि बाज औकात वही होता है हेड पर दादा हो गया तो उससे भी ज्यादा ऊपर तो मदनी के मेरा बंदा जो है वो मेरी बड़ाई बयान कर रहा है। ये अल्लाह जवाब में कहते है।

अब उसके बाद आज हम आते हैं अगली आयत पर और वो है यह वाली आयत याया बुद न। सबसे पहले इसका तर्जुमा ले लेते हैं। क्या तर्जुमा है इसका? याया कना बुद का मतलब सिर्फ तेरी ही इबादत करते हैं व इयान सिर्फ तुझसे ही मदद मांगते हैं। अच्छा ना बुद का मतलब क्या है? यह वाला जो लज है का मतलब हम इबादत करते हैं। याया क्या? यह सिर्फ का तर्जुमा कहां से आ कौन से लफ्ज में? नहीं ना बुद तो हो गया हम इबादत करते हैं। यह तो क्लियर है ना आपको? इया का तर्जुमा क्या है? असल में इया का जो असल मतलब है वह है तेरी। लेकिन यह कहां से आपने कर दिया कि सिर्फ तेरी इबादत करते? यह कहां से आया? फकत का लज भी नहीं है इस आयत में। फकत कहते हैं ना सिर्फ को अरबी में उससे मिलता जुलता भी लज नहीं है। तो कौन बता सकता है सिर्फ का ल कहां से आया? नीचे जेर लगी? नहीं नहीं वो भी नहीं है। हां माशाल्लाह वसीम भाई ने बड़ा जबरदस्त जवाब दिया। वसीम भाई जिस ग्रुप के लीडर है उन्होने जबरदस्त जवाब दिया है। अरबी का ना असल में ग्रामर का रूल है कि असल में लज बनना था हम इबादत करते हैं तेरी नादया। लेकिन जब वो इया का का लफ्ज पहले आ गया ना ना बुद से क्योंकि असल में बनना चाहिए था ना बुदुक हम तेरी इबादत करते हैं या फिर ना बुद इया हम तेरी इबादत करते हैं। लेकिन इया का वर्ड जब पहले आ गया तो उसने उस कलमे में उस जुमले में जो है ना वो उसको बिल्कुल स्पेसिफिक कर दिया खास कि हम सिर्फ तेरी इबादत करते हैं। वना लजी तर्जुमा किसी का भी सिर्फ नहीं बनता इस आयत में। इया का भी नहीं है ना बुद का भी नहीं है। वाज हो गया आपको? यह अरबी का ग्रामर का रूल है तो उस रूल से यह तर्जुमा इसका निकला है। याया कनाद के हम सिर्फ तेरी इबादत करते हैं और उसके बाद क्या है? वया नन का क्या बनेगा? फिर सिर्फ तुझसे मदद मांगते हैं। ठीक है और ज्यादा गहराई में नहीं लेकर जाएंगे बस इतना सा रूल आप समझ ले के बाद का जुमला अगर पहले आ जाए तो उस कलमे पर जो है फिर वो जोर आ जाता है कि खास सिर्फ तेरी। अच्छा अब पहले जो बोल्ड किया हु ना ब्लैक से इसको पहले ले लेते हैं। याया ना बुद इस आयत के बारे में हमने शुरू में कुछ बताया था। किसको याद है? व बात जी माशाल्लाह बकला फ यह आयत जो है सूरत फातिहा का खुलासा है। सर फातिहा किसका खुलासा है? पूरे कुरान का तो पूरे दन का निचोड़ कहां है? इस आयत में इया क ना बुदन हत्ता कि मैं और आप यहां इस दुनिया में मौजूद क्यों है? इस वक्त क्यों है हम लोग यहां पर? ये एक सवाल है हम यहां पर इस वक्त इस दुनिया में क्यों हैं? कुरान क्या कहता है कि अल्लाह कहता है कि मैंने जिन्न और इंसानों को क्यों पैदा किया? हालियाद ताकि वो मेरी इबादत करें। तो मेरा और आपका यहां मकसद इस वक इबादत है। आप कंपनी में या कहीं भी जॉब करते हैं वो लोग आपसे कांट्रैक्ट साइन करवाते हैं। उस कांट्रैक्ट में क्या लिखते हैं कि आप मिसाल के तौर पर सुबह 8 बजे से 5:00 बजे तक ये जॉब करेंगे और बीच में एक घंटे की क्या मिलेगी आपको? चलिए ब्रेक मिल जाएगी। फर्ज कर लेते हैं कि आप कहते हैं कि मैं काम करता हूं मैं आठ घंटे की ब्रेक लेता हूं और एक घंटे का काम करता हूं। अब कंपनी क्या करेगी आपके साथ? क्या करेगी? फायर कर देगी टर्मिनेट कर देगी आपको उसी वक्त। ठीक है। अस्सलाम वालेकुम वालेकुम अस्सलाम।

तो हमारा दुनिया में आने का क्या मकसद है? इबादत। सोचे कि अगर इंसान इबादत करता नहीं और बाकी सारे काम कर ले तो क्या वह दुनिया माने का मकसद पूरा कर रहे हैं? नहीं। यह उसी तरह है जिस तरह जिसको जि कंपनी ने हायर किया है या किसी भी इदार ने हायर किया और उसको बोला कि तुम्हारा यह टास्क होगा डेली का पूरे महीने का यह टास्क होगा साल का यह टारगेट होगा और वो ना करे उसको तो कंपनी उसको फौरन निकाल देगी और सजा देगी। तो अल्लाह ताला ने भी हमें यहां भेजना है भेजा है एक मकसद से कुछ टाइम के लिए भेजा है। अब वो टाइम इतना हमें पता है अभी चल रहा है लेकिन कब वो खत्म होना है हमें नहीं पता। लेकिन जब खत्म हो जाएगा तो उसके बाद सवाल यह होगा कि जिस मकसद के लिए भेजा था वह टारगेट तुमने कितना अचीव कर लिया? कितना उस टारगेट पर तुम उतरे हो? तो यह बात हमें दुनियावी तौर पर तो समझ आती है लेकिन अफसोस य होता है कि हमें दन के हा से समझ नहीं आती। हम यह जरूर प्लान कर लेते हैं कि आज क्या करना है एक साल में मैंने कहां तक पहुंचना है 10 सालों में कहां तक पहुंचना है मेरी पे अगर आज इतनी है तो इतनी ज्यादा होनी चाहिए कुछ सालों बाद। कंपनी का प्रॉफिट अगर आज इतना है तो इतने परसेंट मैंने बढ़ है लेकिन ईमान को कितने परसेंट बढ़ाना है हम भूल जाते हैं अपने आप को। इल्म कितना सीखना है अमल कितना करना वह हम उसको खाली छोड़ देते हैं। जबक असल मकसद ही वही था कि हम अल्लाह के दन को सीखे और उस पर अमल करें और उसको आगे फैलाए। तो यह असल मकसद है हम सबका इस वक्त जो हम यहां पर मौजूद हत्ता कि जो चले गए ना उनका भी मकसद यही था यहां पर और जो आएंगे इस दुनिया में उनका भी यही मकसद होगा। किसी का मकसद अलग नहीं होगा। जो नबी भी आया है अल्लाह का कोई वली भी आया अल्लाह ने उसको इसी मकसद से यहां भेजा है। यह जगह है यहां इबादत करनी है उसके बाद वापस आ जाना है। तो टोटल हमारा असल मकसद यहां पर एक लज क्या है? इबादत। अल्लाह की इबादत करना। इतना क्लियर हो गया आपको? तो यह इस आयत में लिखा है इयाना बुद। बंदा अल्लाह के सामने इकरार कर रहा होता है कि या अल्लाह हम सिर्फ तेरी इबादत करते हैं यानी जिस मकसद से हमें यहां भेजा ना इस दुनिया में जिस मिशन के लिए हम उस मिशन पर पूरा उतर रहे हैं। अब मसला क्या है कि जो मिशन पर उतरता नहीं है लेकिन दिन में बार-बार कहता रहता है कि मैं मिशन पर उतर रहा हूं। जो बार-बार कहता है इयाना बुद लेकिन करता नहीं है शायद नमाज में पढ़ ले और उसके बाद जाके अल्लाह को छोड़ के औरों की इबादत करना शुरू कर दे तो अल्लाह के सामने तो वो यही कह रहा है कि या अल्लाह मैं सिर्फ तेरी इबादत करता हूं लेकिन जब वो किसी और के सामने सजदा करेगा तो वो क्या हो जाता है? वो शिर्क कर रहा है। तो जबान से कुछ और कह रहा है और अमली अमली तौर पे कुछ और कर रहा है और यह अल्लाह के साथ सबसे बड़ी गद्दारी है। क्या आप अल्लाह को एक तरफ बोले इक ना बुद हम सिर्फ तेरी इबादत करते हैं और दूसरी तरफ जाकर आप सारे वह काम करना शुरू कर दे जिससे अल्लाह नाराज होता है और अल्लाह के सामने बल्कि वो शिर्क तक पहुंच जाता है। आज बहुत सारे लोग हमारे मुल्कों में नमाज भी पढ़ते हैं कब्रों की जाके पूजा भी करते हैं या फिर कह ले उनके हां सजदे करते हैं। सजदे नहीं तो जाकर उनसे दुआएं मांगते हैं मन्नतें चढ़ाते हैं और यह भी कहते हैं इया नाद अल्लाह हम सिर्फ तेरी इबादत करते हैं लेकिन बहुत सारी इबादत में औरों को भी साथ शरीक करते हैं। इस तरह की इबादत को अल्लाह कबूल नहीं करता। तो बंदा जब कहता है ना इया ना बुद उसको देखना होता है क्या मैं वाकई अल्लाह की इबादत कर रहा हूं? मैं नमाज पढ़ रहा हूं तो जब मैं कह रहा हूं अल्लाह अकबर तो क्या वाकई अल्लाह अकबर या फिर मेरी दुनिया की चीजें जो इस वक्त मेरे जहन में घूम रही है वो ज्यादा बड़ी है अल्लाह से? मैं जो अपने पैसे कैलकुलेट कर रहा हूं काउंट कर रहा हूं मैं अपना जो इधर उधर घर की सारी चीजें देख रहा हूं जो ख्यालात में गया हूं वो बड़ी है या अल्लाह अकबर? अल्लाह ताला बारबार हमें चीज याद दिलाता है याया कनाद हम सिर्फ तेरी इबादत करते हैं। अच्छा इसका ना एक लजी माना हम लेते हैं। अबद का मतलब क्या है? गुलाम। ठीक है आपको? तो नजर आ गया इंग्लिश में क्या बोलते हैं? स्लेव हो गया गुलाम का या स्लेव का क्या काम होता है? अपने मास्टर के लिए अपने आका की क्या करना? इता करना उसकी खिदमत करनी है। एक रूल आप समझ ले इस वक्त दुनिया में हर कोई गुलाम है हर कोई अब्द है हम सबको शामिल करते हुए लेकिन अल्लाह ने हमें एक चॉइस जरूर दी है कि हम अगर गुलाम या अब बनना चाहते हैं तो किसके बने? कुछ लोग ऐसे हैं जो अब्दुल्लाह है अल्लाह के गुलाम है और हदीस में इशारा आता है कि कुछ लोग ऐसे हैं जिनको हदीस में कहा गया है अब्दु दीनार ये किसके बंदे हैं? ये दीनार के बंदे हैं। हदीस में आता हैना अब्दु दिरहम कुछ ऐसे भी लोग हैं जो दीनार और दिरहम के बंदे हैं। क्या मतलब है इनका? अब्दु दीनार अब्दु दिरहम का क्या मतलब बना कि वो सजदा करते हैं ये दीनार का नोट लेके उसके आगे क्या करते हैं वो उसकी उनकी पूरी जिंदगी हर फैसला हर चीज कहां घूम रही होती है? किसके इर्दगिर्द? इस पैसे के इर्दगिर्द। जहां यह मिलेगा वहां मैंने जाना है जहां ये नहीं मिलेगा वो मैंने करना ही नहीं है। जहां यह मिलेगा वहां मैंने जाना है भले वो अल्लाह को नाराज कर रहा हो और जहां यह नहीं मिलेगा मैंने नहीं जाना भले व अल्लाह का ऑर्डर भी हो। अगर जाना मैं नहीं जाऊंगा तो इख्तियार अल्लाह ने हमें दिया हम अब्दुल्ला बनना चाहे अब्दुल दीनार। तो इस आयत में बारबार हम इकरार करते हैं। अब चेक करना है कि क्या हम सब सच्चे हैं इस इकरार में झूठे हैं? अब्दुल्लाह है अब्दुल दीनार है? अच्छा इबादत के हवाले से ना आपको मैं एक डेफिनेशन बता दूं। यह आपको अकीदा के सब्जेक्ट में भी पढ़ाई थी। किसी को याद आ रही है डेफिनेशन? क्या डेफिनेशन है? नहीं पढ़ाई अभी तक अगर आपने बोल दिया नहीं पढ़ाई अकीदा के टीचर जो है नाराज हो जाएंगे। हां बिल्कुल देखि इबादत की एक डेफिनेशन आप ले वैसे इबादत किसे कहते हैं? बंद कर द इबादत किसे कहते हैं? यह तो आपने जो नजर आ गया व पढ़ लिया। बाज लोगों से पूछा इबादत किसे कहते तो कहते नमाज को जकात को यह सिर्फ एक मिसाल है। जी श माशाल्लाह पिछले सेमेस्टर में पढ़ लि तो अदला फायदा हो गया। इबादत की जो डेफिनेशन है ना मैं आपको अरबी में भी उर्दू में भी और इंग्लिश में भी इंशाल्लाह होगी। हा इंग्लिश में भी खोल देते हैं सारी आपको समझ आ जाएगी। ये इबादत की है डेफिनेशन इने तम रला ने डेफिनेशन की है कि हर वह जाहिरी और बातन कल हो या अमल हो जिससे अल्लाह ताला मोहब्बत करता हो और उससे राजी हो। यह छह चीजें जिस चीज के अंदर शामिल हो जाएंगी ना या इबादत को आपने चेक करना छ चीज उसम होनी चाहिए सारी की सारी छह नहीं लेकिन कहीं ना कहीं य छह चीज फिट हो रही है उसमें ठीक है। अच्छा आसान थोड़ा करते हैं य जरा देखें स्क्रीन प य आपको ब्लैक वाले वर्ड्स नजर आ रहे हैं। यह मेन अल्फाज है इबादत की डेफिनेशन में। जाहिरी और उसके बाद क्या है? बात। जाहिरी किसे कहते हैं? एक्सटर्नल ठीक है जो आपको नजर आ रहा है। बानी अंदर है इंटरनल हो गया। स्पिच रू से तालुक उसका दिल से है। कल किसे कहते हैं? चले य ठीक अमल ठीक है आपका जो हरकत होगी एक्शन हो उस तरह जिससे अल्ला ला मोहब्बत करे यह तो वाज है और अल्ला उससे राजी भी हो। इसको थोड़ा सा और आसान कर देता अभी देख स्क्रीन पर क्लियर हो गया आपको य यह छ चीज जो है ना आपको इबादत की डेफिनेशन पूरा खुलासा है। य सवाल है मेरा आपसे कोई जाहिरी कल बताएं मुझे जो इबादत बनती है। जाहिरी कल कल तिलावत माशाल्लाह ठीक है जाहिरी भी है कल भी है अल्लाह की मोहब्बत भी और अल्लाह राजी भी है। अच्छा अब बताए जाहिरी अमल नमाज हो ग जाहिरी भी है नजर भी आ रही है अमल भी है अल्लाह मोहब्बत भी करता है और अल्लाह राजी भी है। अब आते बात नहीं चले कल ले लेते हैं बात नहीं कल जिक्र तो जबान से होता है ना दिल में जिक्र नहीं होता। नियत माशाल्लाह बिल्कुल नियत जो है वो असल में दिल के इरादे का नाम है तो ये जो बात कौल है क्योंकि नियत जबान से कहते हैं या नहीं? नहीं नियत जबान से नहीं होती नियत होती है दिल से तो यह दिल का कौल है। अच्छा बात अमल इंटरनल जो आपका एक्शन हो उसकी कोई एग्जांपल अच्छा मैं ना यहां से चाता हूं एग्जांपल कोई यहां से जी बात नहीं अमल चल ठीक है रोजा जाहिरी में भी आ गया बात नहीं दोनों में आ गया ठीक है उसमें नहीं ई मानी लिहाज से लेकिन एक तरह से नजर भी आता है। खालिस कोई बात नहीं अमल बता सकता है जी? गुसल गुस्सा नहीं गुस्सा इबादत नहीं है हम इबादत की डेफिनेशन ठीक है बात नहीं अमल जरूर है लेकिन क्या अल्लाह खुश रहेगा आपके गुस्से से? जी गुस्से को कंट्रोल करना हां ठीक है ये सही है उससे को जी तवक माशाल्लाह बेहतरीन एक मिसाल तवक जो है आप किसम करते हैं दिल में करते हैं ना अल्लाह ताला पर अपने दिल को आप जगाते हैं ना कि मैंने अपना ईमान अल्लाह पर रखना है। चले ये एक मिसाल हो गई बेहतरीन और कोई मिसाल दे सकता है बातन अमल की? जी तवल हो गया ट्रस्ट तवक खुशु खुजू ठीक है ये भी स बिल्कुल बेहतरीन माशाल्लाह और इखलास जी तकवा माशाल्लाह सबब बिल्कुल बेहतरीन हो गया माशाल्लाह यह सारे बानी अमल अगरचे इनका असर बाहर नजर आता है। गुस्सा कंट्रोल कर होंगे क्या शक्ल बन जाएगी आपकी कंट्रोल करे लेकिन होता स अंदर से मोहब्बत भी कहां होती है दिल में होती है ना खौफ कहां होता है अल्ला ताला से दिल में य होता है ना जी आप भी कोई मिसाल दे रहे हैं ये असल में इबादत नहीं हुई ना हम इबादत की ठीक है हसद बगज य गुस्सा ठीक है गुस्से पर कंट्रोल हसद को कंट्रोल करना कह सकते हैं बगज से अपने आप को रोकना कह सकते हैं ये इबादत में आ जाएगा। अच्छा अब मैं आपको ना थोड़ा सा कंफ्यूज करना है सोचने दे हां चले यह बताएं कि सजदा किसम आता है? जाहिरी क्या हुआ? वो अमल हो गया अल्लाह की मोहब्बत है उसमें अल्लाह की रजामंदी भी है। अच्छा क्या फर्क है मोहब्बत और रजामंदी? दोनों को क्यों हमने ऐड किया हुआ है? हम एक चीज कह देते काफी नहीं था वो कि अगर हम कह देते अल्ला राजी है बस ये काफी था या हम कह देते अल्लाह की मोहब्बत है राजी नहीं था? वो सवाल आपको समझ आ गया कि इस डेफिनेशन में जाहिरी बात नहीं वाजे है कोल अमल भी वाजे है लेकिन यह क्यों आ रहा है कि अल्लाह की मोहब्बत भी हो और अल्लाह राजी भी हो? खालिस अल्लाह के लिए होगी तो ऑटोमेटिक अल्लाह राजी भी होगा अल्लाह की मोहब्बत भी होगी। जी अल्लाह की अच्छा एक जवाब आया कि अल्लाह की मोहब्बत हो लेकिन रजामंदी है कि उसके तरीके से हो तो अल्लाह मोहब्बत करेगा ही नहीं अगर आप उसके तरीके के मुताबिक नहीं करेंगे। जी जी अशद भाई अच्छा एक जवाब आया कि मोहब्बत हमें करनी है रजामंदी अल्लाह की नहीं नहीं अल्लाह की मोहब्बत है उसके लिए ठीक है हमारी मोहब्बत तो होनी चाहिए यह बात नहीं अमल हो गया। चलिए सुन्नत के मुताबिक जी मसू साहब अल्लाह के बताए तरीके से तकरीबन जवाब आपके करीब है लेकिन मैं थोड़ा सा आपको और वाज कर देता हूं नहीं नहीं ये मोहब्बत भी अल्लाह की तरफ से बाज ये कह रहे हैं कि मोहब्बत हम करेंगे तो राजी अल्लाह होगा अल्लाह की मोहब्बत उस अच्छा यह बताए कि सजदा करने से अल्लाह मोहब्बत करता है बंदे से या नहीं करता है? ना लेकिन यह वो सजदा है जो आप तीसरा सजदा कर रहे हैं रकात में। अब बताए अल्लाह राजी होगा? नहीं हो सजदे से अल्लाह को मोहब्बत जरूर है लेकिन वह सजदा अगर तीसरा सजदा है रकात में तो अल्लाह राजी होगा? नाराज होगा? अल्लाह नाराज होगा ऑटोमेटिक मोहबत भी चली जाएगी। समझ आया आपको फर्क? ठीक है इंशाल्लाह तो यह है इबादत की डेफिनेशन। जी जुबैर भा हां और इस सब में रूल यह है कि अल्लाह ताला के लिए खालिस होकर भी हो और किसके तरीके पर हो? सुन्नत के मुताबिक हो ठीक है इसकी बहुत सारी मिसाले हम पहले दे चुके हैं मे खल से तो टाइम उसम लग जाएगा इशाला तो ये हो गया नाद अब एक सवाल है हमारा दुनिया में आने का क्या मकसद है? इबादत। मकसद का मतलब यह है कि हमें हर टाइम क्या करना है? चले फिर यह सवाल पढ़े और मुझे बताए कि इसका क्या जवाब दे सकते हैं? यह ऑनलाइन वालो को भी नजर आ रहा है ना सवाल? ठीक है अगर मकसद इबादत है तो फिर कैसे हर वक्त हम इबादत कर सकते हैं? कैसे यह रूल ठीक है सुन्नत पर फॉलो करेंगे तो इबादत ठीक है लेकिन हर वक्त 24 घंटे सात दिन हफ्ते के पूरा महीना कैसे इबादत हम कर सकते हैं और 300 से ऊपर दिन जो है साल के? चलिए मैं एक करके ले जी रमजान भाई यानी हर वक्त दिल में अल्लाह का खौफ हो बा वजू रहेंगे ठीक और मैं इनसे ले लू पहले अगर इजाजत जी जी आप बताए अच्छा जो भी काम कर हो सुन्नत के मुताबिक हो ठीक है अल्लाह के रसूल की सुन्नत के मुताबिक कर रहे हो जिंदगी का एक एक हिस्सा तो पूरा हफ्ता क्या बल्कि पूरी जिंदगी जो है सुन्नत के मुताबिक हो जाएगी। जी म ठीक है जवाब सही है जवाब कुरान और हदीस पर जी ठीक है मोमद अली भाई कहते हैं कि नबी सला सलम ने हर एक बात वाज बता दी उस पर चलेंगे तो 24 घंटे दिन के जो है हमारे लिए अजर होगा। चले मुझे एक बात बताएं यहां कौन-कौन गाड़ी में ड्राइव करके आया? अच्छा क्यों नहीं इबादत की आप लोगों ने गाड़ी में? क्यों नहीं इबादत की आप लोगों ने? जी इबादत की गाड़ी में किस तरह की? माशा अल्लाह देखि दिन की आपकी जितनी रूटीन है उसको जरा हम ब्रेक डाउन कर लेते हैं। सुबह उठते ही सबसे पहले हम क्या करते हैं? उठ के सबसे पहले दुआ पढ़ ले कौन सी? अलुला य पूरी दुआ आखर तक र तक तो आपने दिन की शुरुआत की अल्लाह को याद करके इबादत आपकी शुरू हो गई। अच्छा अब आप उठे आपने नमाज भी पढ़ ली चले कह उसके बाद जो भी काम कि अब आप ड्यूटी कौन कन य करता है हाथ खड़ा करके बता दे या फिर ड्यूटी वाले या स्कूल कॉलेज वाले यूनिवर्सिटी वाले भी हाथ खड़ा कर ले ठीक है कोई बिजनेस करते इधर चले ठीक है सुबह सबसे पहले आप क्या करते हैं घर निकलने से पहले उससे पहले मैं आपको कुछ तस्वीर दिखाता हूं अभी आपके मुंह में पानी आ जाएगा। सबसे पहले क्या करते हैं आप लोग एक नॉर्मल रूटीन इंसान की क्या है? नाश्ता। अब नाश्ता कैसे बन जाएगी? बिस्मिल्लाह पढ़ के शुरू कर दिया और कैसे इसको इबादत बना सकते हैं? जी दाए हाथ से खाया ठीक है डॉक्टर नबील नहीं आया ना अभी तक चले ठीक है मैं क्लास ले सकता हूं जी बिस्मिल्लाह पढ़ के सुन्नत के मुताबिक उंगलियों से सामने से अच्छा और किस तरह खाने इस नाश्ते को इबादत कैसे बना सकते हैं? अब मुझे नहीं पता आपका नाश्ता अंडा होता है कुछ और होता है लेकिन अंडे की मिसाल लेते हैं तो कैसे इस अंडे को आप इबादत बना सकते? जी अल्लाह का शुक्र अदा करना कि अल्लाह ने आपको नाश्ता की तौफीक दी ठीक है और रिजक हलाल से आपने कमाया और यह आप आज अल्लाह की मदद से अपने सामने रख पा रहे हैं तो यह इसका शुक्र अदा करना और किस तरह इस अंडे को इबादत बना सकते हैं? जी किस तरह जिक्र करके यह तो हो गया ना शुरू में भी और आखर में चले किस नियत से हम नाश्ता करें? नाश्ता करते हुए क्या नियत कर ले कि वो नाश्ता पूरा आपको अजर देता जाएगा कि इसको जब मैं खाऊंगा जो एनर्जी आएगी उस एनर्जी को किस काम के लिए यूज करूंगा? हलाल रोजी कमाने के लिए मेहनत करने के लिए सब क्या हो गया अजर हो गया। चले अब कहते हैं आप निकल गए निकलने से पहले आपको आता है कपड़े तो मैंने पहनने अभी ठीक है अब आपने कबर्ड खोली कपड़े अब क्या? किस तरह इस कपड़े पहनने को इबादत कर सकते हैं? इस कपड़ में कपड़े कुछ नहीं है अभी वैसे ठीक है बिस्मिल्लाह पढ़ के शुरू किया अल्हम्दुलिल्लाह कहा और ये इस नियत से इस इरादे से कि अल्लाह ने जो मुझे दिए हैं नेमत उनको मैं पहनू। सुन्नत है जो अल्लाह की नेमत है उनको जाहिर करना। आप निकल गए जॉब पर अब किस नियत से जाएंगे जॉब पर या फिर कह ले स्कूल या यूनिवर्सिटी पढ़ने के लिए? दिल ना भी करता हो लेकिन चले एक नियत कर ले किस किस नियत से जाए? हम दुआ पढ़ के निकले और किस नियत से कि मैं जो सारी मेहनत करूंगा किस लिए? हलाल रोजी कमाने के लिए घर वालों को खिलाने के लिए। हदीस में आता है सबसे बेहतरीन सदका कौन सा है? जो तुम घर वालों को खिलाते हो उस हदीस पर अमल करने के लिए तरह तरह की चीज अपने दिल में ले वो आपकी जॉब जो है इबादत हो जाएगी। चले आप जॉब से थके वापस आए और कहते हैं कि अब आपकी शादी हो चुकी है तो आपकी बीवी ने आपके लिए खाना रखा हुआ है डिनर अब उसको किस इरादे से खाएंगे? याय आपकी मां ने कोई भी हो सकता है जिसने रखा हो जिसकी शादी नहीं उसके लिए वादा कह लेते हैं बहन कह लेते हैं भाई कह लेते हैं चलो खुद सर्व कर लिया तो फिर वही जो नाश्ते की नियत थी वही फर्क य कि व अंडा था या अंडा नहीं है। ठीक है अच्छा रात को सोएंगे किस तरह सोना इबादत बना सकते हैं? माशाल्लाह दुआ पढ़ के सब पूरी दुनिया सोती है ना लेकिन पूरी दुनिया को सोने का अजर नहीं मिलता। आप सोएंगे आपको सोने का भी अजर मिलेगा। पूरी दुनिया नाश्ता करती है लेकिन पूरी दुनिया को नाश्ते का अजर नहीं मिलता। आप नाश्ता करके भी अजर सकते। आप स्कूल जाते हैं पढ़ने जाते हैं यूनिवर्सिटी जाते हैं जहां जाते हैं पूरी दुनिया जाती है वहां पर लेकिन आप उसको इबादत बना सकते हैं। अच्छा अगली मिसाल देते हैं डॉक्टर नबील माजर बस एक और स्लाइड लेकर खत्म करते हैं इंशाल्लाह अच्छा यह चले कह आप दन का इल्म सीख रहे हैं किस नियत से सीख रहे हैं कि मैं अपने अंदर से जहालत है उसको खत्म करना है मैंने और मैंने दीन के सीधे रास्ते पर चलना है। यह आपका बैठना आपके घुटनों में रान में पैर में जहां दर्द होती है वो सब आपके लिए आ जा रहा है। थक गए हैं उठ के स्ट्रेचिंग कर रहे हैं वो सब आपके लिए आ जा रहा है। अच्छा गाड़ी में कौन-कौन सफर करके आया? दुआ पढ़ के बैठे इस नियत से कि मैं इस गाड़ी को किस लिए इस्तेमाल कर रहा हूं? अल्लाह के घर जाने के लिए अल्लाह का दन सीखने के लिए वो सफर भी आपके लिए इबादत हो गया। चलिए कहते हैं अब आपने सोचा आज क्लास के बाद बच्चों को गार्डन लेकर जाना है इसको किस तरह इबादत बना सकते हैं? हां ताकि उनका भी जहन फ्रेश हो उसके बाद उनका फ्रेश हो तो उनकी फिजिकल हिल जुल हो और फिजिकल जो है व मुसलमान की होनी चाहिए। सुन्नत के मुताबिक मुसलमान मजबूत होना चाहिए। चले आखरी तस्वीर लेते हैं फर खत्म करते हैं। यह क्या है तस्वीर? स्माइल। क्या हो गया ये? आप सिर्फ मुस्कुरा कर अपने भाई को देख ले क्या हो गया? वो आपके लिए सदका हो गया इबादत हो गई सिर्फ मुस्कुरा के देखा आपने ठीक है कुछ तकलीफ नहीं दी अपने आपको अस्सलाम वालेकुम कहने की कुछ भी कहने की सिर्फ मुस्कुराए आप तो क्या बन गया? सदका बन गया आपके लिए और उसके बाद वो जिस जिस को खुश करेगा वो सारा सदका किसको मिलेगा? वो सब आपके अकाउंट में आता जाएगा तो हम जो है ना इसलिए दुनिया में और इस तरह पूरी दिन की रूटीन को इबादत बना ले। आपका पूरा

हफ्ता पूरा साल पूरी जिंदगी इबादत होगी। ठीक है। तो अगरचे आज लेना था और लेकिन टाइम काफी हो चुका है। अल्लाह ताला से दुआ करते हैं कि अल्लाह ने हमें जो कुछ तौफीक दी है, सीखने की, समझने की, उस पर अमल करने की भी तौफीक दे। और इसी के साथ खत्म करते हैं आज की क्लास। बकला फला खर वाज है ना क्लास कोई मुश्किल चीज तो नहीं थी आपके लिए। चलिए ठीक है। आया