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Urdu || (01) Duroos ul Lugah (Vol. 1) || By Ustaad Manzoor Ahmad Mir حفظه الله

Daar ul Hikmah28:43

Transcription

अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह व बरकातहू। आउजु बिल्ला शैत रजीम। बिस्मिल्लाहिर्रहमाहीम। अल्हम्दुलिल्लाह रब आलमीन व मुकीन। व सलात सलाम अशरफ अंबिया मुरसली नबीना मोहम्मद वला वहा। जैसा कि आप सबको मालूम है कि हम दसत अरबिया यह जो सीरीज है, बुक सीरीज, ये शुरू करने जा रहे हैं। और इसमें हम आज से दसत अरबिया नतकीना इसका अलजुल अवल शुरू करेंगे। आज हमारा सेशन वन है इसमें।

तो जो यह किताब पढ़ने का मकसद होना चाहिए हमें, वो यह है कि जो हम हमारा जो शरिया है, कुरान सुन्नत, कुरान और हदीस जो है हमारे पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के, हमारा मकसद यह होना चाहिए कि हम वो समझेंगे। क्योंकि हमारी जो शरीरिया है, वो अरबी शरिया है। तो जो अरबिक में बिगिनर लेवल पर होगा, वह शरीयत के समझने में भी बिगिनर लेवल पर होगा। और जो मुतवस स्थित इंटरमीडिएट लेवल पर होगा, वह शरीयत के समझने में भी उसी लेवल पर होगा, उसी दर्जे पर होगा। और जो एडवांस लेवल पर होगा, वो शरीयत के समझने में भी उसी दर्जे पर होगा। तो यही मकसद है हमारा बुनियादी, कि हम अपने शरीयत को समझे, कुरान और सुन्नत को समझे। और बाकी अरबिक जो है, यह एक इंटरनेशनल लैंग्वेज है, ये बहुत ही वसी जुबान है। इस पर रिसर्च भी हुआ है कि अरबिक जो सीखता है, उसके दिमाग पर इसके पॉजिटिव असरात, यानी रोनुमा होते हैं।

तो आज जो हमारा सेशन वन है, दसत अरबिया नतकी अलजुल अवल, ये है हमारी बुक, बुसुल लुगति अरबिया गैरी गैर। यह है अरबी, यानी अरबी जुबान जो है, लुगा अरबिया उसके दूस लेसंस किन के लिए? गैर नातकी जो ये जुबान बोलने वाले नहीं होंगे, उनके लिए। तो यह बुक जो है, यह है दुखतूर फ़ अब्दुल रहीम। तो यह बहुत ही, यानी सबको पता है इस बुक के बारे में। यह मदीना बुक्स के नाम से भी जानी जाती है। जो इसके नुस्खे बाजार में मिलते हैं। मेरे पास भी है इसका एक। ये है इस्लामिक फाउंडेशन ट्रस्ट चेन्नई। इसका ये है। जूज़ फर्स्ट जो ऑनलाइन इसका मिलता है पीडीएफ, वो भी ऐसा ही है। लेकिन कभी-कभी जो उसमें एग्जांपल्स होती हैं, उसमें फर्क होता है, कभी-कभी। तो उसका हमें ध्यान रखना होगा। लेकिन लेसंस, लेसन, लेसंस जो है इसके, उसका स्ट्रक्चर सेम है। लेकिन कभी-कभी एग्जांपल्स में फर्क होता है। तो उससे कोई हमें मसला नहीं होगा, इंशाल्लाह। तो ये बुक हम शुरू करने जा रहे हैं। दसुलत अरबी गैर नात बिहा फ़ अब्दुल रहीम। डॉक्टर फ अब्दुल रहीम की बुक है। और आज जो हमारा सेशन वन है, हम इसमें अदरसुल अव्वल शुरू करने जा रहे हैं। अदरसुल अव्वल, अदरसुल अव्वल यानी फर्स्ट लेसन। अदरसुल अव्वल, फर्स्ट लेसन।

तो जो ये अरसुल अव्वल है, इसमें हमें पढ़ना है हादा। जैसे हम बाकी लैंग्वेज को पढ़ते हैं ना, जैसे अगर हमारे पास हम अक्सर इंग्लिश जो है वो पढ़ते हैं, तो इंग्लिश में होते हैं अल्फाबेट्स, ए बी सी और आखिर ज़ेड तक। इसी तरह से उर्दू लैंग्वेज हम पढ़ते हैं। उसमें भी अल्फाबेट्स होते हैं। हुरूफ तहजी जिनको बोलते हैं। और अरबिक में भी हुफ तहज्ज है। वो हम सबको पता होगी। जो उर्दू पढ़ने वाला होगा उसको अरब के भी वही हुरूफ तहजी है, सिवाय उर्दू में कुछ एक्स्ट्रा होते हैं, जैसे पा होता है, पेज जिसको बोलते हैं। हुफ हुरूफ तहजी जो है उनको मिला के जब हम हुफ तहज्ज मिलाते हैं, फिर कोई मीनिंगफुल हम वर्ड बनाते हैं, उसको हम कलमा बोलते हैं, अल कलीमा। ठीक है? उसको कलमा हम बोलते हैं, यानी वुड। तो जो कलमा है ये तीन तरह का हो सकता है। एक तो है इस्म, और दूसरा है फेल, फ़ुन, और तीसरा है हर। ठीक है? ये जो कलमा होता है ये तीन अकसाम है इसके। पहला है इस्म, यानी जैसे फॉर एग्जांपल हामिद। किसी का नाम होगा हामिद, हामिदुन। फॉर एग्जांपल। और फेल, यानी इस्म होता है किसी चीज का नाम, किसी शख्स का नाम। ऐसे ही जैसे आपने पढ़ा होगा अंग्रेजी में भी। और फेल जो है यह है वर्ब। इसको बोलते हैं। जैसे हम कहेंगे ज़हबा। ज़हबा का मतलब हुआ वो गया। ही वेंट। इसी तरह से हर्फ, जैसे हम प्रपोज़िशन आता है इसमें। हम कहते हैं फी। फी हो गया। जैसे हम कहेंगे फ़ बैती। यहां हमें सारा पढ़ना है आगे। फिल बैती हम कहेंगे, बैत बोलते हैं घर को। या मकान को हम कहेंगे, इन द हाउस। तो फी का, फी की मीनिंग जो है वो है इन। अंग्रेजी में इन बोलते हैं। किसी चीज में होना। इसके और भी मानी है, वो हम फिर आगे जाके देखेंगे। तो ये कलमा है। अरबिक में कलीमा। जब हुरूफ तहजी मिलते हैं, तो जब मीनिंगफुल से वर्ड बनाते हैं, उसको कलमा कहते हैं। उसकी तीन किस्में हैं। इस्म और फेल और हर्फ। और जो भी हम अरबिक पढ़ेंगे, उसमें यही सब कुछ, यही पढ़ना है हमें। या तो इस्म, या फेल और हर्फ। और इसी से कैसे हम सेंटेंस बनाएंगे, वो सब कुछ हमें इसमें देखना है, इंशाल्लाह ताला।

तो पहला दर्रस जो है, और जब हम हमारे पास पहला दरस शुरू करने से पहले, जो हम कलमा है, अब फिर, फिर, फिर कलमा से जब हम कल मुख्तलिफ कलीमात को मिलाते हैं, तो उससे सेंटेंस बनता है फिर। तो जो वर्ड होता है, जब हम वर्ड्स को मिलाते हैं, तो हमें हमारे सेंटेंस वजूद में आता है। ठीक है? सेंटेंस। और सेंटेंस को हम बोलते हैं अलजुमला, अलजुमलात, त अल जुमलातु बोलते हैं इसको। तो यही हमें यहां तक तो पहले हमारे पास हुफ तहज्ज्ी होते हैं। फिर कलमा बनता है, और फिर कलिमा से जो है वो सेंटेंस बनता है। अल जुमला बनता है। तो ये हमें इंट्रोडक्टरी याद रखना है इस बारे में। तो अब है अदरसुल अव्वल। अदरसुल अव्वल। तो इसमें हमें पढ़ना है हादा। अगर आप अपनी बुक के पहले पेज पर अदर अव्वल देखेंगे, उसमें हादा लिखा है। जो यह हादा है, जब हम अंग्रेजी में देखेंगे, तो इसको हम बोलते हैं डेमोंस्ट्रेटिव प्रोनाउन। ठीक है? डेमोंस्ट्रेटिव प्रोनाउन बोलते हैं इसको। हैदा, या हम याद रखेंगे हैदा जो है इसको इस्म, इस्म इशारा कहते हैं। इस्म इशारा, इस्म इशारति। ये है क्या? इशारे का इस्म। इससे हम किसी चीज की तरफ इशारा करते हैं। लेकिन जो ये हादा है ना, इस जो ये इसमें इस्म इशारा है, ये मुख्तलफ़ अम के होते हैं। तो इसमें पहला है हादा। हादा की क्या खुसूसियत है? ये किसके लिए इस्तेमाल होता है? हादा है इस्म इशारा। लेकिन किसके लिए? लिल करीब। जो कोई चीज करीब होगी, जो हमारे नजदीक होगी, उसके लिए हम हादा इस्तेमाल करेंगे। जैसे मेरे पास ये कलम है, मैं कहूंगा हादा कलमुन। हादा कलमुन, ये कलम है। तो हैजादा मैंने इस्तेमाल किया क्योंकि ये मेरे करीब है। अगर यही मैं दूर फेंकूंगा, उसके लिए और एक डेमोंस्ट्रेटिव प्रोनाउन है, वो हम आगे देखेंगे। लेकिन पहला जो है वो हैजादा, वो है हादा। हैदा है इस्म इशारा लिल करीब। और इसके अलावा इसके लिए क्या हमें रखना है याद? है इस्म इशारा करीब, करीब के लिए इस्तेमाल होता है। और और किसके लिए इस्तेमाल होता है? एक करीब और वाहिद। वाहिद के लिए इस्तेमाल होता है। यानी जिसकी तरफ हम इशारा करेंगे हादा से, वो वाहिद होना चाहिए, सिंगुलर होना चाहिए। वाहिद का मतलब सिंगुलर। ठीक है? सिंगुलर होना चाहिए। और और एक चीज़, मुजकर। मुजकर होना चाहिए। मुजकर यानी [संगीत] मैस्कुलिन। मुजकर यानी मैस्कुलिन। ठीक है? तो ये हादा के बारे में हम, अगर हमें कोई कहेगा कि हादा के बारे में इंट्रोडक्शन दीजिए। हम कहेंगे हादा है इस्म इशारा। इस्म इशारतिन भी कह सकते हैं। जैसे हम कुरान पढ़ते हैं। हम कहते हैं अलकारात मल कार। हालांकि वहां पर लिखा है अल कारतल कारतु, लेकिन हम फिर जब सख्ता करते हैं, रुकते हैं वहां पर, हम कहते हैं। इसी तरह से इस्म इशारतिन या इस्म इशारा। तो ये क्या? हैदा इस्म इशारा, डेमोंस्ट्रेटिव प्रोनाउन, किसके लिए इस्तेमाल होता है? लिल करीब, करीब के लिए, जो नजदीक होगी चीज। और क्या होना चाहिए वो? वाहिद यानी सिंगुलर होना चाहिए, और मुजकर यानी मैस्कुलिन होना चाहिए। मुजकर और मुन्नस हमने उर्दू में भी पढ़ा होगा। तो ये है हादा के बारे में। अब हमें में यही लेसन, हैदा के बारे में जो एग्जांपल्स दी है नीचे, वो हमें देखनी है, इंशा्लाह।

तो अब हम इसमें एग्जांपल्स से हमने देखा, अब हादा क्या है? तो पहली एग्जांपल जो है इसमें वो है हादा बैतुन। हदा बैतुन। ठीक है? तो इस हादा के बारे में और एक चीज जो है हम पढ़ते हैं हादा। हा, लेकिन लिखते हैं हम क्या? हम अलिफ जो पहला वाला अलिफ है वो हम पढ़ते हैं, लेकिन लिखते नहीं है। हम लिखते हैं यहां पर फतहा लिखते हैं। लेकिन पढ़ते हैं हम हाजा। लेकिन लिखते हैं ऐसे। अगर कोई ऐसे भी लिखेगा, ऐसे हाजा, फिर यहां पर ऐसे, ऐसे खड़ी ज़बर रखेगा, तो वो भी ठीक है। लेकिन अरबिक स्क्रिप्ट में हम हा पर फतह ही रखते हैं। लेकिन पढ़ते हैं हम लंबा करके। हादा, हादा बैतुन। अब है हमारे पास हैदा बैतुन। इसका तर्जमा क्या है? इसका तर्जमा अगर हम अंग्रेजी में लिखेंगे तो दिस इज़ अ हाउस। दिस इज़ अ हाउस। अच्छा। ये है बैतुन है ना। जो ये इज़ है ना, इज़ हम जो अंग्रेजी में हम पढ़ते हैं। इज़ का मुतबादिल नहीं है इसमें अरबिक में। लेकिन जब हम ट्रांसलेट करेंगे, तो उस ट्रांसलेशन में कभी-कभी कुछ एक्स्ट्रा चीजें आती है, उस लैंग्वेज के हिसाब में जिसमें जिसमें हम ट्रांसलेट करते हैं। दिस इज़ अ हाउस। इसी तरह से जो है हमने ये ए अ पढ़ा, इस वो वो भी वहां पर नहीं लिखा है। लेकिन वो हम फिर आगे जाके उसके बारे में देखेंगे। दिस इज़ अ हाउस। हैदा बैतुन। या अगर उर्दू में लिखेंगे, ये मकान है। या ये एक मकान है। वो भी लिख लिख सकते हैं। तो ये जो है ना हाजा बैतुन, हाज़ा जो है ये इस्म है। हमने कहा ये इस्म इशारा है। इस्म इशारा, ये मतलब हमने कलमा की तीन किस्में देखी ना। एक हमने इस्म देखा, फ़ेल देखा और हर्फ देखा। तो हाजा जो है ये इस्म है। ये इस्म इशारा है। और जो ये बैतुन है ये भी इस्म है। लेकिन ये वो वाला इस वो इस्म इशारा है। ये नॉर्मल नाउन है बैतुन। तो हैजा बैतुन ये दो इस्म है। ये भी इस्म है और ये भी इस्म है। ये मिले दो इस्म। और हमारे पास एक मीनिंगफुल सेंटेंस आ गया। तो इसको हम कहेंगे ये अल जुमला है। हमारे पास आ गया। दो जो यह कलमा, एक कलमा और एक कलमा, यानी यह भी इस्म है और यह भी इस्म है। यह मिलके हमारे पास एक जुमला आ गया। ठीक है? और ये जो जुमला है ये वाला, हाजा बैतुन, ये शुरू हो गया किससे? इस्म से। क्योंकि हादा इस्म है। तो इसको हम बोलते हैं अल जुमलातुल इस्मिया। इसको हम बोलेंगे अल [संगीत] जुमलातुल। अल जुमलातुल इस्मिया। ठीक है? अल जुमलातुल इस्मिया। और यह अल जुमलातुल इस्मिया जो होता है, या इसको अंग्रेजी में हम लिख सकते हैं नॉमिनल सेंटेंस। इसके दो हिस्से होते हैं। जो इसका जिसके बारे में हम कुछ खबर देते हैं, उसको हम बोलते हैं मुब्तदा। यानी जिससे ये शुरू होगा, मुब्तदा, उन, और जो इसके बारे में हम कहते हैं फिर, उसको बोलते हैं खबरन। खबर, मुब्तदा और खबर। तो ये जो हादा बैतुन है, इसमें हाजा जो है ये है मुब्तदा, और जो बैतुन है ये है खबर। मु्तदा और खबर। हादा बैतुन, हादा बैतुन। हादा है मु्तदा और बैतुन है खबर। और दोनों मिलकर बनाते हैं ये जुमला, लेकिन कौन सा वाला जुमला? अल जुमलातुल इस्मिया। तो ये हम याद रखेंगे। अब हमें यही सेंटेंस पढ़ने हैं। हादा बैतुन, ये एक घर है। हैदा मस्जिद, यह मस्जिद है। यह एक मस्जिद है। जो आपके पास बुक होगी, उस पर पिक्चर भी दी है ऊपर, और फिर नीचे ये लिखा है। इस तरह से हादा बाबुन, हादा बाबुन, ये दरवाजा है। ये दरवाजा है। ऐसा सब चीजों में ये ध्यान रखना है कि ये करीब है। हमारे करीब है। इसलिए हम इनके लिए हादा इस्तेमाल करते हैं। एक तो ये करीब है और वाहिद है और मुदकर है। करीब है यानी नजदीक है हमारे, और वाहिद है यानी सिंगुलर है, और मुजकर है यानी मैस्कुलिन है। हादा बैतुन, ये घर है या ये मकान है। हादा मस्जिदुन, ये मस्जिद है। हादा बाबुन, ये दरवाजा है। हादा किताबुन, ये किताब है। हादा कलमुन, ये कलम है। हादा मिताहु, ये चाबी है। हादा मख्तबुन, ये मेज़ है। हादा शरीर, ये चारपाई है। हा कुर्सी, यह कुर्सी है। तो, यह है यहां तक कि अल्फ़ाज़ के सेंटेंसेस है हमारे पास। अगर कोई कहेगा, हम कहेंगे हादा बैतुन। हम कहेंगे हादा जो है ये मुब्तदा है, और बैतुन जो है वो खबर है। हा दोनों मिलकर बनाते हैं अल जुमलातुल इस्मिया। इस तरह से हादा मस्जिद, हादा जो है यह मुब्तदा है, और मस्जिद जो है यह खबर है। दोनों मिलाकर बना बनाते हैं अल जुमलतुल इस्मिया। हादा बाबुन, यह दरवाजा है। हादा जो है यह मुब्तदा है, और बाबु जो है ये खबर है। दोनों मिलाकर बनते हैं जुमलातुल, अल जुमलातुल इस्मिया। एक तो हमने कहा ना हादा बैतुन, जब हमने कहा हादा जो है, हादा असल में अगर हम हाजा की, हाजा के बारे में हमें कहना होगा, हम कहेंगे ये है इस्म इशारा असल में, और ये है वाहिद के लिए, करीब के लिए, मुजकर के लिए। लेकिन इस सेंटेंस में जब यह आया, इस सेंटेंस में इसका इसकी पोजीशन क्या है? हमने कहा इस सेंटेंस में इसकी पोजीशन मुब्तदा है। वो इसका नाम है कि ये क्या है खुद। लेकिन सेंटेंस में क्या पोजीशन है इसकी? ये मुब्तदा है। और बैतुन जो है ये खुद इस्म है। लेकिन इसमें ये क्या बनकर आया? खबर बनके। तो सेंटेंस में क्या पोजीशन है? हम जब कहेंगे मुब्तदा और खबर। ये हम सेंटेंस के बारे में कहते हैं कि इसकी पोजीशन क्या है वहां पर। वरना इस ये खुद कुछ भी हो सकता है। बैतुन की जगह कोई और भी चीज हो सकती है। जैसे हमने देखा। तो हादा बैतुन, हादा मु्तदा और बैतुन जो है खबर है, और मिलाकर बनाते हैं अल जुमलातुल इस्मिया। और और एक बात वो ये है कि जितने भी हमारे पास वर्ड्स आएंगे, जो आपकी बुक फर्स्ट है इसके आखिर में जो है ना वो वोकैबलरी दी है, दी गई है, वो आपको याद रखनी है। ये जो वर्ड्स आएंगे हमारे पास नए अल्फाज़ जो आएंगे, आप अपने पास एक कॉपी रखेंगे, डायरी रखेंगे, उसमें ये वर्ड्स जो हैं वो लिखेंगे, और उस साथ में मीनिंग्स इनकी लिखेंगे। तो इससे एक वोकैबलरी डेवलप होती है एक इंसान की। तो फिर, क्योंकि यही है अरबिक के रूल्स, एक इंसान सीखता है, कोई इंसान, लेकिन फिर वो पढ़ नहीं पाता, वजह क्या होती है उसकी? उसके पास जो वोकैब्स है वो डेवलप नहीं होते। तो ये हमारे पास, यानी हमें इस चीज का भी ख्याल रखना है कि हम रूल्स पढ़ने के साथ-साथ जो भी हमारे पास एक्स्ट्रा वर्ड्स आएंगे, वो हम लिखेंगे किसी कॉपी पर, और उनकी मीनिंग्स भी साथ लिखेंगे, और याद करने की कोशिश करेंगे। क्योंकि यह हमारे बहुत काम आएगा फिर आगे जाके, इंशा्लाह। तो ये है पहला, पहला पेज था इसका, इसमें हमने पढ़ा हादा, हाजा बैतुन। तो हाजा हमने कहा कि ये है इस्म इशारा लिल करीब, इस्म इशारा लिल करीब, करीब के लिए होता है, डेमोंस्ट्रेटिव प्रोनाउन, और वाहिद के लिए और मुजकर के लिए। अब है इस, अभी पहला, पहला ही लेसन हम अभी पढ़ रहे हैं, और उसकी एक्सरसाइज भी आएंगी।

तो अब है एक तो हमने इसमें अब देखा हाजा, एक तो हमने देखा क्या? हैजादा, और अब हमें देखना है वो है माह। माह या तो हम खुद ही से कहेंगे कि हमारे पास कोई चीज है। मैं कहूंगा हादा कलमुन, या मेरे पास ये बुक है। मैं कहूंगा हादा किताबुन। ठीक है? या और कोई चीज़, जैसे मेरे पास मोबाइल है, मैं कहूंगा हाज़ जवालुन। ठीक है? तो, जो भी हमारे पास चीज़ होंगी, लेकिन ये तो हम अपनी तरफ से खबर देते हैं। अगर हमें पूछना होगा, अगर हमें किसी चीज़ के बारे में पता नहीं है कि ये क्या है? तो हम कहेंगे ऐसे क्वेश्चन करेंगे, महादा। तो इसका तर्जमा क्या होता है? ये क्या है? या अंग्रेजी में व्हाट इज दिस? ठीक है? तो हम क्वेश्चन मार्क इसके लास्ट में लगाते हैं। मादा, ये क्या है? जो ये मा है, ये जो ये जो मा है, इसको हम बोलते हैं मा इस्तिफहामिया। मा इस्तिफ हामिया, मा इस्तिफिक्य। ठीक है? इस्तफाम इसको बोलते हैं इस्तहाम, यानी क्वेश्चन, यानी पूछना, फ़हम तलब करना। मुझे किसी चीज़ के बारे में पता नहीं है, ये क्या है? मैं मा से, मा के जरिए से सवाल करता हूं। माहदा, ये क्या है? तो इसको इसके जरिए से हम क्या करते हैं? इंटेरोगेट करते हैं ना, पूछते हैं। तो इसको हम बोल सकते हैं इंटेरोगेटिव, इंटेरोगेटिव मा। यह है इंटेरोगेटिव, कौन सा मगर मा? ठीक है? इंटेरोगेटिव, इंटेरोगेशन के लिए, यानी पूछने के लिए ये मा इस्तेमाल किया जाता है। मादा, ये क्या है? एक इंसान को एक इंसान कहेगा, मैं अभी हमने कुछ नहीं पढ़ा, अभी हमें वो बहुत सारी चीजें याद रखनी है, और बचपन से हम याद रखते आए हैं, ए बी सी डी हमने याद किया, अलिफ बा याद याद किया, ए फॉर एप्पल, और फ्रूट्स के नाम, वेजिटेबल्स के नाम, बहुत सारी इनेशन हमने कलेक्ट कलेक्ट की, Facebook पर हम कितना पढ़ते हैं और कितना याद रखते हैं, और बचपन से लेकर आज तक हमने कितना याद रखा। तो ये जरूरी, कुछ बहुत सारी चीजें ऐसी है वो हमें याद रखनी पड़ती है। ठीक है? तो इसी तरह से अरबिक सीखने के लिए इसका एक जो है एक हिस्सा वो है मेमोराइजेशन। कोई इंसान कहेगा नहीं, मैं मेमोराइज कुछ नहीं करूंगा। वो भी है एक इंसान जो है वो लैंग्वेज सीख सकता है, कन्वर्सेशन और बाकी। लेकिन फिर अगर कुरान, कुरान और सुन्नत सीखना होगा एक इंसान को। सिर्फ कन्वर्सेशन के जरिए से नहीं सीखेगा। कि वो कोई एक इंसान ऐसा होता है, वो अंग्रेजी करना जानता है। लेकिन लिखना और ग्रामर और बाकी, वो फिर वो नहीं पढ़ पाता। वो उस पर कुरान और सुन्नत पर गौर फ़िक्र नहीं कर पाता। उसके लिए ठीक तरीके से सीखना है। तो ये है, ये हमें याद भी रखना है। जो भी हम चीजें इसमें कहेंगे, वो याद रख रखनी है, वो सारी चीजें। तो वो आगे जाके हमें बहुत काम आएगी। अगर हम आज याद नहीं रखेंगे, तो फिर क्या होगा? फिर लोड जो है वो बढ़ जाएगा। फिर हम छोड़ ही देंगे। हम कहेंगे इतना खून याद रखिएगा। लेकिन अभी-अभी जैसे हमने हाजा पढ़ा। तो वो हुआ। इसके बाद हमने मा हादा पढ़ा, तो मा के बारे में हमने कहा कि ये है मा इस्तिफामिया। इससे इसके जरिए से हम सवाल करते हैं किसी चीज़ के बारे में कि ये क्या है? मा हाजा। तो जब हमने कहा मा हाजा, तो ये किसके बारे में हम सवाल करते हैं? जो करीब होगा और मुदकर होगा और वाहिद होगा। जो हमने पहले ही हाज़ा के बारे में कहा था कि ये किसके लिए इस्तेमाल होता है। महादा, महादा क्या होता है? महादा, ये क्या है? व्हाट इज़ दिस? लिखा है नीचे, फिर हैदा बैतुन। ये घर है। यहां पर एक मकान बना हुआ है। मकान बना हुआ है। तो इसने कहा मादा, ये क्या है? और जवाब में कहा, हादा बैतुन, ये मकान है। ये मकान है। ये एक मकान है। तो हादा बैतुन के बारे में हम क्या कहेंगे? हैदा मु्तदा और बैतुन जो है वो खबर है। दोनों मिलाकर बनाते हैं अल जुमलातुल इस्मिया। जो क्वेश्चंस हैं उनको हम अभी ऐसे ही छोड़ेंगे। उनकी एनाल एनालिसिस हम नहीं करेंगे। उनकी एराब हम नहीं करेंगे। हम मुब्तदा खबर नहीं कहेंगे, क्योंकि वो थोड़ा टफ होता है इब्तदा में समझना। फिर आगे जाके आप खुद वो समझ जाएंगे, इंशाल्लाह। तो मा हदा, हैदा बैतुन। ये क्या है? ये जब हम कहेंगे ना मा हदा, तो इसमें क्वेश्चन की टोन होनी चाहिए। ठीक है? मादा, जैसे हम क्वेश्चन पूछते हैं। यह क्या है? जब जवाब देंगे तो हैदा बैत, इसमें आंसर की टोन होनी चाहिए। वरना एक इंसान जो है वो क्वेश्चन करेगा, वो ऐसे कहेगा मादा, कोई जो सुनने वाला होगा वो जवाब नहीं देगा। वो कहेगा इसको क्या हुआ है? ये बीमार है शायद। तो हम कहेंगे मादा, ये क्या है? हादा बैतुन, ये मकान है। फिर है उसके बाद अहादा बैतुन। उसके बाद है अहादा बैतुन। क्या ये मकान है? अहादा बैतुन। तो हमने कहा मा हाजा, मा हाजा को हमने क्या कहा? यह क्या है? अब है अहाजा बैतुन, इससे पहले हमने कहा माहजा, तो हो गया ये हमने कहा हा हैजादा बैतन। ठीक है? बैतुन। अब हम कह कह कह रहे हैं अहजादा बैतुन। ठीक है? क्या ये मकान है? ये जो ये पहले है ना, ये हमजा, इसको हम बोलते हैं हमतु, हमतु इस्तफामियत, इस्तिफियत। ये भी है वही क्वेश्चन के लिए इस्तेमाल होता है। हमतु इस्तफामिया, हमतुन इस्तफामियत, यानी ये भी क्वेश्चन पूछने के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन उस और इसमें फर्क है। माजा, वो पहले ही पूछ रहा है ये क्या है? मुमकिन है कि उसको पता नहीं होगा। इसी तरह से अहाजा बैतुन, क्या ये मकान है? इसको, इसको शुभा है कि ये क्या है? ये मकान ही है या कोई और चीज़। ठीक है? तो ये भी क्वेश्चन के लिए इस्तेमाल होता है। तो अगर हम एक काम करेंगे, हम हटाएंगे ये आ। हमजा हटाएंगे आगे से। तो ये बन गया सीधा सेंटेंस। हैजा बैतुन। तो ये मकान है। जब हमने आगे हम रखा तो क्या बना? अहाजा बैतुन। तो ये क्वेश्चन बन गया। क्या ये मकान है? अहजा बैतुन, क्या ये मकान है? तो माजा जब पूछा तो उसका जवाब क्या हुआ? हाजा बैतुन। जो उसने पूछा कि यह क्या है? हमने उसके बारे में जवाब दिया कि यह मकान है। लेकिन जब पूछा अहाजा बैतुन, क्या ये मकान है? जवाब क्या दिया? नम। तो इसका जो, जब ये सवाल पूछेगा हमजा के जरिए से, अहाजा बैतुन, अहाजा कुर्सी या बाकी, तो हम या तो जवाब देंगे नाम से, या तो जवाब देंगे ला से। या तो नाम से, नाम का मतलब हो गया यस, और ला का मतलब हो गया नो। तो ये दोनों है ना, इससे हम क्या देते हैं? जवाब देते हैं। तो इनको बोलते हैं हम हरफू जवाब। इसको बोलते हैं हरफू जवाबिन। यानी इन दो हर्फ से हम क्या देते हैं? जवाब देते हैं। ठीक है? तो हर्फू जवाबिन। ये जो ये नाम है, ये है किसके लिए? यस कहने के लिए। इसको बोलते हैं इस बात। वो हम आगे देखेंगे। ये ज़रूरी याद नहीं रखना है। और ला जो है इससे हम नफी करते हैं। नेगेशन करते हैं। तो ये है जो ये नाम है ये है अफमेशन के लिए। ठीक है? और जो ये ला है ये है नेगेशन के लिए। ठीक है? तो अहादा बैतुन। फिर क्या कहा? नम है बैतुन। नम, हां हाजा बैतुन, ये मकान है। हादा बैतुन। तो हम अगर हम कोई कहेगा, अगर कोई कहेगा इसको एनालाइज़ करो। तो हम कहेंगे नाम, हरफ जवाब, फिर हमें पता है ये किसके लिए आया है? अमेशन के लिए आया है। और हैदा बैतुन, हादा मु्तदा, बैतुन खबर, मिला के बन गया ये अल जुमलातुल इस्म। ठीक है? तो इसके आगे तो आ गया हमारे पास मादा, मादा, ये क्या है? और अहाजा बैतुन, क्या ये मकान है? ठीक है? तो ये दो, ये है मा इस्तिफामिया, और ये है हमजतु, हमतुन इस्तहामियतन। ये भी, यानी इंटेरोगेशन के लिए आता है, पूछने के लिए, और ये भी पूछने के लिए आता है, लेकिन फर्क क्या है? उसमें सीधे वह पूछता है कि यह क्या है? इसमें उसको मुमकिन है कि शुभा होगा। वह कहेगा कि क्या यह सच में मकान ही है? तो हम उसका वो शुभा दूर करते हैं, नाम या ला कह के।

इसके बाद आगे है मादा। ये क्या है? हादा कमीसुन। ये कमीस है। मादा, मा ये क्या है? मा हादा। तो जवाब में कहता है हादा कमीस। ये कमीज़ है। ये शर्ट है। तो हादा क्या है? है मुब्तदा, और कमीसुन है खबर, अल जुमलातुल इस्मिया। फिर पूछता है अहादा शरीर। अहादा शरीर, क्या ये चार चारपाई है? शरीर, बेड है। अहादा शरीर, क्या ये चारपाई है? तो इसको शक है कि क्या पता ये चारपाई है, क्या है? तो जवाब में हमने कहा ला, नहीं है, कुर्सी, ये कुर्सी है, ये चेयर है। ठीक है? ला क्या है? हरफ जवाब। लेकिन किसके लिए? नेगेशन के लिए। और फिर है हादा कुर्सी, हादा मु्तदा और कुर्सी जो है वो है खबर, अल अल जुमलातुल इस्मिया। ठीक है? अहादा मिताहु, अब ये पूछ रहा है क्या ये चाबी है? आगे कलम बना हुआ है। ये पूछ रहा है अहादा मिताहु, क्या ये चाबी है? ला, हमने जवाब कहा ला, नहीं, हादा कलम, ये कलम है। हादा मु्तदा और कलमुन जो है वो क्या है? खबर, अल जुमलातुल इस्मिया बन गया ये मुता, मु्तदा और खबर मिला के। फिर पूछता है मा हादा, ये क्या है? हादा नजमुन, ये तारा है। इट इज़ अ स्टार, दिस इज़ अ स्टार। ठीक है? मादा, तो हाजा जो है वो है मु्तदा, और नजमुन जो है वो है खबर। तो मिलकर बन गया ये अल जुमलातुल इस्मिया, अल जुमलातुल इस्मिया। तो ये है हमने एक तो देखा हादा, और दूसरा हमने देखा मा हादा। तो ये हमें याद रखना है हादा क्या होता है, हमने देखा वो। और मा हादा, इसे क्या हम करते हैं? और अहादा बैतुन, हमजा जो है इसके, इसको क्या कहते हैं? नाम, किसको नाम क्या है? हर्फ जवाब। और ला क्या है? हर जवाब। वो इस बात के लिए आता है, यानी अर्मेशन के लिए, और ला जो है वो नेगेशन के लिए आता है। इतना हम देखेंगे, इंशाल्लाह। और इसके बाद हमें जो लेसन, जो सेशन टू होगा हमारा, उसमें हम तमारीन देखेंगे। इसकी एक्सरसाइज देखेंगे। तो अल्लाह ताला हमें यह समझने की तौफीक अता करें। मुदा इ्तियार करने की तौफीक अता करे। आमीन या रब्बुल आलमीन। अस्तफ्लाह