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पुराने जमाने की बात है। मुल्क जफरान पर एक नेक दिल बादशाह हुकूमत किया करता था। बादशाह का नाम फिरोज था जो अपनी रियायत से बेपनाह मोहब्बत करता था और उनके हर दुख दर्द में उनका साथ देता। बादशाह की सखावत, इंसाफ पसंदी और मोहब्बत की वजह से रियायत भी अपने बादशाह पर जान छिड़कती थी और उसका हर हुक्म मानती थी।
इस बादशाह का एक बेटा था शहजादा रोशन दिल जो अपने बाप की तरह बहुत नेक और मजलूमों की मदद करने वाला था। शहजादा रोशन दिल को सहरा वसत और जंगल में शिकार खेलने का बहुत शौकर था। अपने शौकत को पूरा करते हुए भी वह अपने मुल्क की रियायत की पूरी खबर रखता था। उसे जब भी मालूम होता कि कोई ताकतवर किसी कमजोर पर जुल्म कर रहा है या कोई शख्स किसी मुसीबत का शिकार है तो वह उसी वक्त उसकी मदद को पहुंच जाता और हर मुमकिन तरीके से उसके काम आने की कोशिश करता।
शहजादा रोशन दिल आमतौर पर रात के वक्त रियायत का हाल जानने के लिए निकलता था और वह रियायत का हाल मालूम करने के लिए हमेशा भेष बदल कर जाता था ताकि कोई उसे पहचान ना ले। इसकी वजह यह थी कि वह लोगों पर शहजादा होने की धाक ना बैठाना चाहता था और ना ही वह अपनी शोहरत का भूखा था। वह तो यह नेक काम रियायत की खुशहाली और अल्लाह ताला को रजा करने के लिए करता था।
इस रोज भी शहजादा रोशन दिल एक आम आदमी का भष बदलकर रियायत का हाल जानने के लिए निकला था। उसने आम सा लिबास पहन रखा था। वह उस वक्त एक गरीब आबादी से गुजर रहा था। जहां कच्चे पक्के मकान बने हुए थे। उस वक्त अच्छी खासी रात हो रही थी। शहजादा एक जगह से गुजर रहा था कि अचानक उसके कानों में किसी के चीखने की आवाज सुनाई दी। आवाज गोया बहुत हल्की और दूर से आती हुई महसूस हुई थी। मगर चीख में उस कदर करब और दर्द था कि शहजादा रोशन दिल के कदम खुद ही रुक गए। वहां दूर तक उसे कोई दिखाई ना दे रहा था। शहजादा कुछ लम्हे इधर-उधर देखता रहा और सोचता रहा कि आवाज किस तरफ से आई थी कि इसी लम्हे वही चीख उसे फिर सुनाई दी। इस बार आवाज पहले से ज्यादा वाजह थी।
"ओ यह तो किसी लड़की के चीखने की आवाज है।" शहजादा रोशन दिल बड़बड़ाया। फिर तेजी से उस तरफ कदम उठाने लगा जिस तरफ से उसे चीख की आवाज सुनाई दी थी। वहां मकान एक दूसरे से काफी फासले पर थे और शहजादा रोशन दिल ने चीख की आवाज एक छोटे से मकान से आती हुई सुनी थी। इसलिए वह तेजी से उसी मकान की तरफ आया था। मकान के दरवाजे पर पहुंचकर वह रुक गया। मगर इस मकान में बिल्कुल खामोशी थी जैसे वहां कोई रहता ही ना हो। शहजादा रोशन दिल बिल्कुल खामोश था। उसके कान मकान के दरवाजे पर लगे हुए थे कि इस बार जैसे ही उसे दोबारा चीख सुनाई दे। वह इस मकान का दरवाजा खोलकर अंदर दाखिल हो जाएगा। उसका एक हाथ अपने नफे में अड़से हुए खंजर के दस्ते पर जमा हुआ था।
"मेरी बात मान जाओ। शहजादी सितारा और मुझे शहजादा जान दिलवाज कह दो। जब तक सुनहरी बुध का पता बता दो वरना मैं तुम्हें जान से मार दूंगा।" मकान में से शहजादा रोशन दिल को एक भारी भरकम और कर्त आवाज सुनाई दी और शहजादा बुरी तरह से चौंक उठा।
"शहजादी सितारा शाह इस टूटे फूटे और कच्चे मकान में।" शहजादा रोशन दिल ने हैरतजादा निगाहों से कच्चे मकान की तरफ देखते हुए कहा। "बाजार जादूगर तुम चाहो कोड़े मार मार कर मेरी खाल भी उधार दो। मैं तब भी तुम्हें शहजादा जान दिल नवाज के बुत के बारे में कुछ नहीं बताऊंगी।" इस बार शहजादा रोशन दिल को एक जनाना और निहायत सरीली आवाज सुनाई दी। आवाज में बेपनाह दुख होने के साथ-साथ इंकार की सख्ती भी थी।
"हर जैसे मैंने तुम्हें ढूंढ लिया है। उसी तरह मैं अपनी जादू की ताकत से शहजादा जान दिलनवाज के सुनहरी बुत को भी ढूंढ लूंगा। तुम मेरी ताकतों के बारे में कुछ नहीं जानती। मैं शहजादा जान दिल नवाज के सुनहरी बुत की तलाश में पाताल की आखिरी तह में भी जा सकता हूं। मगर मैं चाहता हूं कि तुम खुद ही उसे मेरे हवाले कर दो। यही तुम्हारे हक में बेहतर होगा।" जाफर नामक जादूगर की गंभीराना आवाज आई।
"तुम पाताल की आखिरी तह में तो क्या आसमा की वसतों में भी चले जाओ। तब भी तुम शहजादा जान दिल नवाज के सुनहरी बुत को तलाश नहीं कर सकते। और जाफर जादूगर मैं यह भी जानती हूं कि तुम खुद कभी उसके बुत को तलाश नहीं पा सकोगे। जब तक शहजादा जान दिल नवाज का सुनहरा बुत मैं खुद तुम्हारे हवाले ना कर दूं उस वक्त तक वह तुम्हारे किसी काम नहीं आ सकता। वह तुम्हारे लिए बेजान मिज्म ही रहेगा। क्योंकि उस वक्त उस बुत पर मेरा कब्जा है और जब तक उस बुत पर से मेरा कब्जा खत्म नहीं हो जाता तब तक तुम ना उससे कोई काम ले सकते हो और ना ही तुम उसे जबरदस्ती मुझसे हासिल कर सकते हो।" शहजादी सितारा ने अंतहाई सख्त लहजे में कहा और शहजादा रोशन दिल को जवाब में जाफर जादूगर की गुर्राहट सुनाई दी।
"हम इसका मतलब है तुम इस सुनहरे बुत के मुताल्लिक बहुत कुछ जान चुकी हो। यह तो बहुत गलत बात है। अब तो वाकई में कोड़े मार मार कर तुम्हारी खाल उधाड़ कर रख दूंगा। मैं तुम्हें उस वक्त तक मारता रहूंगा जब तक तुम सुनहरे बुत को मेरे हवाले ना कर दो।" जाफर जादूगर ने निहायत खौफनाक अंदाज में चीखते हुए कहा और फिर सड़क की आवाज के साथ शहजादी सितारा की तीज और कर्बनाका चीख उभरी जैसे जाफर जादूगर ने वाकई किसी कोड़े से शहजादी सितारा को पीटा हो और फिर मुसलसल कोड़े बरसाए जाने और शहजादी सितारा की चीखों से मकान गूंजने लगा।
अब तो शहजादा रोशन दिल से रहा ना गया। उसने एक झटके से नफे से अपना खंजर निकालकर अपने हाथ में ले लिया। फिर उसने दरवाजे पर जोर से पांव मारा। दरवाजा शायद वैसे ही बंद था। शहजादा रोशन दिल की जोरदार लात मारने की वजह से दरवाजा एक धमाके के साथ खुल गया और शहजादा तेजी के साथ मकान में दाखिल हो गया।
"रुक जाओ जाफर जादूगर। अगर तुमने शहजादी सितारा को और मारा तो मैं तुम्हें जान से मार दूंगा।" उसने मकान में दाखिल होकर बुरी तरह से चीखते हुए कहा। मगर खाली मकान देखकर वह ढटक कर रह गया। सहन के सामने एक कमरा था जिसका दरवाजा खुला हुआ था। मगर वह कमरा भी उसे बिल्कुल खाली नजर आ रहा था। उस वक्त चांद पूरी तरह से चमक रहा था जिसकी वजह से वहां अच्छी खासी रोशनी हो रही थी। शहजादा तेजी से कमरे की तरफ गया। मगर कमरा भी बिल्कुल खाली था। वहां इंसान तो क्या एक छोटा सा चूहा भी दिखाई ना दे रहा था। मकान का एक सहन और एक ही कमरा था जो भाई कर रहा था और शहजादा रोशन दिल हैरत से आंखें फाड़ फाड़ कर चारों तरफ देख रहा था।
"यह क्या यह कैसे हो सकता है? मैंने शहजादी सितारा और जाफर जादूगर की आवाजें अपने कानों से सुनी है। मगर यह मकान तो यूं खाली है जैसे कभी यहां कोई चिड़िया का बच्चा भी ना आया हो।" शहजादा रोशन दिल के मुंह से अंतिहाई हैरतजदा लहजे में निकला।
"शहजादी सितारा जाफर जादूगर कहां हो तुम?" उसने कुछ सोचकर शहजादी सितारा और जाफर जादूगर को आवाजें दी। मगर जवाब में उसे कोई आवाज ना सुनाई दी। अब तो शहजादा रोशन दिल की पेशानी पर परेशानी के साथ-साथ कदरे खौफ भी उभर आया। वह कुछ लम्हे वहां रुका रहा। फिर कुछ सोचकर तेजी से वहां से निकलता चला गया।
मकान से बाहर आकर उसने कुछ सोचकर एक दूसरे करीबी मकान के दरवाजे पर दस्तक दी। कुछ लम्हों बाद दरवाजा खुला और एक बूढ़ा बाहर आ गया। उसके हाथ में लालटेन थी। वह लालटेन ऊंची करके उसकी रोशनी में चुनिया हुई आंखों से शहजादा रोशन दिल की तरफ देखने लगा। शहजादा रोशन दिल ने उसे सलाम किया।
"कौन हो तुम बेटा? और इतनी रात गए यहां क्यों आए हो?" बूढ़े ने उसके सलाम का जवाब देते हुए हैरानी से पूछा।
"बाबा जी मैं एक मुसाफिर हूं। यहां से गुजर रहा था कि मुझे आपके साथ वाले मकान में से किसी लड़की के चीखने की आवाज आई। कोई जालिम इंसान किसी मजलूम लड़की को जैसे कोड़ों से पीट रहा था। मैं उसका पता लगाने के लिए उस मकान में गया। मगर मकान बिल्कुल खाली था। क्या आप इस मकान के बारे में जानते हैं कि उसके मखन कौन है और कहां है?" शहजादा रोशन दिल ने मुख्तसर तौर पर उसे बताते हुए कहा। उसने दानिश्ता तौर पर शहजादी सितारा जाफर जादूगर और शहजादा जान दिल नवाज के सुनहरी बुत के मुताल्लिक उसे कुछ बताने से गरीज किया था।
"ओ तो तुम भी उस अफरीसी मकान का शिकार हो गए। बेटा यह मकान तो बरसों से उसी तरह खाली पड़ा है। इंसान तो इंसान इस मकान में परिंदे भी अपना घोंसला बनाने से गरीज करते हैं। रही चीखों की आवाजें तो यह तो यहां का रोज का ही मामूल है। हर रोज इस मकान में से चीखें और मारपीट की आवाजें सुनाई देती हैं। शुरू शुरू में लोग खौफजदा भी होते थे और तज्जुस से मजबूर होकर मकान में भी जाते। मगर वहां उन्हें कोई ना मिलता क्योंकि इस मकान से आज तक किसी को कोई नुकसान ना पहुंचा था। इसलिए लोगों का खौफ दूर हो गया और जब चीखों और मारपीट की आवाजों का सिलसिला मामूल बन गया तो लोगों ने इस मकान पर तवज्जो देना ही छोड़ दिया।" बूढ़े ने बताया और उसकी बात सुनकर शहजादा रोशन दिल हैरान रह गया और सोचने लगा कि शायद यही वजह थी कि इस कदर चीखों की आवाजें सुनने के बावजूद भी किसी मकान का दरवाजा ना खुला था और ना ही किसी ने इस तरफ आने की कोशिश की थी।
शहजादा रोशन दिल ने बूढ़े से मजीद कोई बात ना की और उसका शुक्रिया अदा करके वापस चल पड़ा। उसके जहन में मुसलसल शहजादी सितारा और जाफर जादूगर की बातें गूंज रही थी और जाफर जादूगर के शहजादी सितारा पर बरसाए जाने वाले कूड़े सड़कसड़क करके जैसे उसके अपने दिल और दिमाग पर बरस रहे थे।
"नजूमी बाबा मैंने आपको सारी तफसील बता दी है। अब आप जल्दी-जल्दी अपना हिसाब लगाइए और यह मालूम कीजिए कि इस अफरीसी मकान का क्या राज है। शहजादी सितारा कौन है? और जाफर नामक जादूगर उसे मार मार कर किस शहजादा जान दिल नवाज के सुनहरे बुत के मुताल्लिक पूछ रहा था। इस सुनहरे बुत का क्या राज है? और जादूगर उसे शहजादी सितारा से क्यों हासिल करना चाहता है?" शहजादा रोशन दिल ने अपने सामने बैठे हुए बूढ़े शाही नजूमी से निहायत बेचैन लहजे में पूछा।
शाही नजूमी जिसके सर के बाल दाढ़ी और भों बालों की तरह बर्फ की तरह सफेद थे। शहजादा रोशन दिल की बेचैनी देखकर धीरे से मुस्कुरा दिया। उसने अपने थैले से सिलेटी और चाकली निकाली और सिलेटी से सिलेट पर कुछ नंबर लिखने लगा। फिर उसने सिलेट पर आड़ी तिरछी लकीरें लगाना शुरू कर दी। शहजादा रोशन दिल गौर से उसकी तरफ देख रहा था। वह रात को सीधा महल में वापस आया था। अपने कमरे में आकर वह निहायत परेशानी के आलम में शहजादी सितारा और जाफर जादूगर के मुताल्लिक सोचता रहा था। जिसकी वजह से वह रात को एक लम्हे के लिए भी ना सोया था। सुबह होते ही उसे शाही नजूमी का ख्याल आया। तो उसने एक मुहाफिज से कहकर शाही नजूमी को अपने पास बुला भेजा और कुछ ही देर में शाही नजूमी वहां आ गया था।
शहजादा रोशन दिल ने शाही नजूमी को रात वाले वाक्य की पूरी तफसील बताई और उसे कहा कि वह अपने इल्म नजूम से इस परासर और हैरतंगेज वाक्य की हकीकत मालूम करें। बूढ़ा नजूमी काफी देर तक सिलेलेट पर गिनती लिखता रहा। आड़ी तिरछी लकीरें बनाता मिटाता रहा। फिर उसने एक तवील सांस लेकर सिलेट और सिलेटी नीचे रख दी। उसके चेहरे पर निहायत संजीदगी थी।
"क्या बात है नजूमी बाबा आप काफी परेशान दिखाई दे रहे हैं। कोई खास बात है क्या?" शहजादा रोशन दिल ने गौर से उसकी तरफ देखते हुए पूछा।
"शहजादा हुजूर अगर जान की अमान पाऊं तो कुछ अर्ज करूं।" बूढ़े शाही नजूमी ने डरतेडरते लहजे में कहा और शहजादा रोशन दिल चौंक पड़ा।
"ओह तो क्या कोई खास बात है? आप मुझसे जान की अमान मांग रहे हैं नजूमी बाबा।" शहजादा रोशन दिल ने हैरानी से पूछा।
"जी हां शहजादा हुजूर बहुत ही खास बात है इसलिए मैं आपसे अपनी जान की अमान मांग रहा हूं।" बूढ़े शाही नजूमी ने जवाब दिया।
"ठीक है। आपको जान की अमान दी जाती है। फरमाइए क्या बात है?" शहजादा रोशन दिल ने कदरे परेशान होकर कहा।
"शहजादा हुजूर आप इस मुआले से खुद को दूर ही रखें तो बेहतर होगा। शहजादी सितारा जाफर जादूगर और शहजादा जान दिल नवाज के सुनहरी बुत के मुताल्लिक अगर मैंने आपको हकीकत से आगाह किया तो आपकी जिंदगी खतरे में पड़ जाएगी और हो सकता है कि आपको अपनी जान से भी हाथ धोना पड़े।" शाही नजूमी ने कहा और शहजादा रोशन दिल बुरी तरह से अचल पड़ा।
"क्या कहा मुझे अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा।" उसने हैरतजाजदा लहजे में कहा।
"जी हां शहजादा आलम यह एक अफरीसी चक्र है और अगर इस अफरीसी चक्र के राज से मैंने आपको आगाह कर दिया तो बहुत से अफरीस आपके पीछे पड़ जाएंगे और आप हर हाल में इस अफरीसी चक्कर के गर्दाब में फंस जाएंगे जहां से निकलना आपके लिए मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी हो सकता है।" शाही नजूमी ने संजीदगी से कहा और शहजादा रोशन दिल हैरानी से उसका चेहरा तकने लगा।
"आपके कहने का यह मतलब तो नहीं कि शहजादी सितारा और जाफर जादूगर इंसान नहीं बल्कि अफरीसी मखलूक है।" उसने अंतिहाई हैरतजाजदा लहजे में पूछा।
"आप ठीक समझे हैं शहजादा आलम शहजादी सितारा अफरीज शहजादी है और जाफर जादूगर भी अफरीज की दुनिया का सबसे बड़ा और खौफनाक अफरीज जादूगर है। यह उनकी अपनी दुनिया का मुआमला है। वह इससे खुद ही निपटते रहे तो बेहतर है। किसी इंसान की मुनासिबत इस इंसान की मौत का भी बायस बन सकती है।" शाही नजूमी ने कहा और शहजादा रोशन दिल सर हिलाने लगा और गहरी सोच में डूब गया।
"नजूमी बाबा जुल्म किसी इंसान पर हो, जानवर पर हो, जिन्नों, भूतों या फरीिसों पर हो। जुल्म जुल्म ही होता है और आप अच्छी तरह जानते हैं कि मैं और सब कुछ बर्दाश्त कर सकता हूं। मगर किसी पर जुल्म होता है तो कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता। जाफर जादूगर शहजादी सितारा पर जुल्म कर रहा था। वह किसी शहजादा जान दिलवाज के बुत के हासिल के लिए अफरीसी शहजादी सीतारा पर कोड़े बरसाकर उसे बेपनाह अज़ाब दे रहा था। शहजादी सितारा की अज़ाब भरी चीखें मैंने खुद सुनी थी। वह जाने कब से उस मजलूम शहजादी पर जुल्म कर रहा था। इसलिए मैं उस शहजादी की मदद को जरूर जाऊंगा। चाहे उसके लिए मुझे जिनात की दुनिया में जाना पड़े या अफरीज की दुनिया में। उसे जुल्म से बचाने के लिए चाहे मुझे अपनी जान से भी क्यों ना हाथ धोना पड़े। मैं उस शहजादी को अफरीज जादूगर से जरूर निजात दिलाऊंगा। इसलिए आप मुझे उनके बारे में सारी तफसील बताइए।" शहजादा रोशन दिल ने फैसला कु लहजे में कहा।
"जो हुक्म शहजादा हुजूर।" शाही नजूमी कुछ लम्हे गौर से शहजादे की तरफ देखता रहा फिर उसने इकरार में सर हिलाया और फिर यूं गूंज उठा।
"शहजादा हुजूर जिस तरह इस रूए जमीन पर इंसानों और जिन्नात की दुनिया आबाद है। उसी तरह इस जमीन के एक सहा ख्ते पर अफरीस की दुनिया भी मौजूद है। जहां इंसानों की तरह कौम अफरीस भी रहती है। इस तरह ख्ते पर अफरीस बादशाह की हुकूमत है जिसका नाम काला बादशाह है। काले बादशाह की एक बेटी है शहजादी सितारा। शहजादी सितारा की शादी कुछ अरसा पहले जिनात के अफरीज के शहजादा जान दिलनवाज से की गई थी। जिसका अफरीज जादूगर को बहुत गुस्सा था। असल में अफरीज जादूगर की एक बेटी है जिसका नाम जरीन था। वह शहजादा जानदिल नवाज को बहुत पसंद करती थी और खुद अफरीज जादूगर भी यही चाहता था कि उसकी बेटी की शादी जिनात के अफरीज शहजादे से हो ताकि वह एक बहुत बड़ा और नाकाबिले तस्खीर अफरीज जादूगर बन जाए। जिनात का अफरीज शहजादा जरीन से सख्त नफरत करता था क्योंकि एक तो वह बहुत बदसूरत थी। दूसरा वह बहुत बदमिजाज और खतरनाक जादूगरनी थी। जब शहजादा जानदिल नवाज ने शहजादी सितारा से शादी कर ली तो अफरीज जादूगर के साथ-साथ उसकी बेटी जरीन को भी शहजादा जानदिल नवाज पर बेपनाह गुस्सा आया। जरीन जो खुद भी जादूजानी थी। गजबनाक होकर शहजादी सितारा को हलाक करने के लिए निकल खड़ी हुई। उसने शहजादी सितारा को मारने की हर मुमकिन कोशिश की। मगर जिनात के शहजादे ने इसका भरपूर मुकाबला किया और उसने अपनी ताकतों से जरीन को हलाक कर दिया। जरीन से लड़ते हुए शहजादा जान दिलनवाज बुरी तरह जख्मी हो गया था और उसकी ताकतें भी कम हो गई थी। शहजादी सितारा भी कुछ हद तक जादू जानी थी। उसे मालूम हो गया कि शहजादा जान दिलनवाज जिस कदर जख्मी है अगर बर मौका उसकी मदद ना की गई तो वह हलाक हो सकता है। और क्योंकि शहजादे जान दिलनवाज ने जरीन को हलाक कर दिया है। इसलिए जरीन का बाप जाफर जादूगर शहजादे से इंतकाम लेने की कोशिश करेगा। इसलिए उसने शहजादे जान दिलवाज को अपने जादू के जोर से सुनहरे रंग के एक बुझ में तब्दील कर दिया और उसे लेकर अफरीज की दुनिया से बाहर आ गई। वह इंसानी दुनिया में एक वीरान मकान में आ छुपी थी ताकि जाफर जादूगर उस तक कभी ना पहुंच सके। इंसानी दुनिया में उसे 40 बरस तक रुकना था ताकि शहजादा जान दिल नवाज के ना सिर्फ जख्म ठीक हो जाए बल्कि उसकी कौतें भी लौट आई। तब वह वापस अपनी दुनिया में जाएगी। मगर उसे यहां आने हुए अभी एक बरस भी ना हुआ होगा कि जाफर जादूगर उसे ढूंढता हुआ यहां तक पहुंच गया। उसके इंसानी दुनिया में आने की खबर शहजादी सितारा को पहले ही मिल गई थी। इसलिए उसने शहजादा जान दिलनवाज के सुनहरी बुत को कहां छुपा दिया? जाफर जादूगर ने शहजादी सितारा को पकड़ लिया। वह अपनी बेटी का इंतकाम लेने के लिए शहजादा जान दिलनवाज को हलाक करना चाहता था। इससे शहजादे के बुत को हासिल करने के लिए वह शहजादी सितारा पर जुल्म करने लगा। मगर शहजादी सितारा उसके जुल्म को बर्दाश्त कर रही है। वह किसी भी तरह शहजादे का बुत जादूगर के हवाले करने पर तैयार ना हो रही। वह जानती है कि अगर उसने शहजादा जान दिल नवाज का बुत अफरीज जादूगर के हवाले कर दिया तो वह बुत का तिलस्म खत्म करके शहजादे जान दिल नवाज को हलाक कर देगा।"
शाही नजूमी शहजादा रोशन दिल को बताता चला गया। शहजादा रोशन दिल इंतहाई हैरानी और दिलचस्पी से शाही नजूमी की बातें सुन रहा था। उसने एक बार भी उसे बीच में टोकने की कोशिश ना की थी।
"ओ तो यह है असल कहानी। मगर नजूमी बाबा शहजादी सितारा अगर जादू जाती है तो वह जाफर जादूगर का मुकाबला क्यों ना करती?" शहजादा रोशन दिल ने पूछा।
"शहजादी सितारा बहुत कम जादू जाती है। जबकि जाफर जादूगर एक ताकतवर और निहायत खौफनाका जादूगर है जिसका मुकाबला करना शहजादी सितारा के बस की बात ना है।" शाही नजूमी ने बताया और शहजादा रोशन दिल ने समझ जाने वाले अंदाज में सर हिला दिया।
"और नजूमी बाबा आप कह रहे थे कि अफरीज दुनिया की बात सुनकर मैं भी इस मामले में मुलव्वस हो जाऊंगा और उनसे मेरी जान को भी खतरा लाहिक हो सकता है।" शहजादा रोशन दिल ने पूछा।
"हां बेटा अब तुम्हें हर हाल में जाकर शहजादी सितारा की मदद करनी पड़ेगी क्योंकि तुम उनकी हकीकत से वाकिफ हो चुके हो। अगर तुम उसकी मदद को ना गए तो अफरीज दुनिया का काला बादशाह अफरीस मुहाफिजों को भेजकर तुम्हें अफरीज दुनिया में ले जाएगा ताकि उनकी अफरीज दुनिया की यह प्राचीन कहानी हमेशा हमेशा के लिए दूसरे इंसानों से पोशीदा रहे।" बूढ़े नजूमी ने बताया और शहजादा रोशन दिल हैरान रह गया।
"यह क्या बात हुई? इस तरह तो वह आपको भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं क्योंकि मुझसे पहले सितारों के इल्म से यह कहानी आपको ही मालूम हुई थी।" शहजादे ने कहा।
"जाहिर है वह मुझे भी अफरीज की दुनिया में ले जाएंगे या फिर हो सकता है कि वह मुझे हलाक करने की कोशिश करें।" शाही नजूमी ने सर हिलाकर कहा।
"ओ फिर तो यह बहुत ही गलत बात हुई। फिर इसका क्या हल हो सकता है?" शहजादा रोशन दिल ने परेशान होकर पूछा।
"इसका एक ही हल है और वही यह कि आप अब शहजादी सितारा की"
मदद करें और उसे जाफर जादूगर की कैद से रिहाई दिलाए और जाफर जादूगर को जाकर हलाक कर दें। उसने कहा और शहजादा रोशन दिल सोच में पड़ गया।
मैं अफरीज जादूगर से किस तरह लड़ सकता हूं बाबा। एक तो वह अफरीस है। दूसरा जादूगर और फिर सबसे बड़ी बात यह कि जाफर जादूगर और शहजादी सितारा मुझे दिखाई नहीं देते। मैं भला किस तरह इस जादूगर को हलाक कर सकता हूं।
शहजादा रोशन दिल ने हैरान होकर कहा।
अगर आप तैयार हो तो इस सिलसिले में मैं आपकी मदद कर सकता हूं। शहजादा हुजूर शाही नजूमी ने कहा और शहजादा रोशन दिल चौंक कर उसकी तरफ देखने लगा।
अगर ऐसी बात है तब तो मैं जरूर शहजादी सितारा की मदद करूंगा बाबा। इसलिए नहीं कि मैं अफरीज की दुनिया के बादशाह से डर गया हूं। बल्कि इसलिए कि जाफर जादूगर नाहक्का शहजादी सितारा पर जुल्म कर रहा है और जालिम कोई भी हो मैं उसे जरूर हलाक कर देता हूं।
शहजादा रोशन दिल ने कहा और शाही नजूमी के लबों पर मुस्कुराहट आ गई और वह सिलेटी से दोबारा हिसाब लगाने के बाद शहजादा रोशन दिल को बताने लगा कि वह किस तरह शहजादी सितारा और जाफर जादूगर तक पहुंच सकता है और किस तरह से जाफर जादूगर को हलाक किया जा सकता है।
घोड़ा अंतिहाई रफ्तार से दौड़ रहा था। शाही नजूमी से सारी तफसील जानने के बाद शहजादा रोशन दिल अगले ही दिन अपनी अजीब व गरीब महम पर निकल खड़ा हुआ था।
शाही नजूमी के कहने के मुताबिक शहजादा रोशन दिल को सबसे पहले सहा पहाड़ियों के स्याह घाट में जाना था। जहां सहा रिछों का जोड़ा रहता था। इन रिछों को मारकर उनका खून किसी बोतल में डालकर उस अफरीसी मकान में जाना था। अफरीसी मकान के खाली कमरे में उस खून से एक दायरा सा बनाना था। उस दायरे में सब सुनहरी नाक की काटी हुई गर्दन रखना थी। जिसकी वजह से वहां एक सहा रंग के कुएं का जाहिर होना था। उस कुएं में उतरने के लिए शहजादा रोशन दिल को एक नीले परिंदे की जरूरत थी। जिसकी मदद से वह कुएं की तह में उतर सकता था। कुएं की तह में उतर कर वह उस रेगिस्तान में पहुंच जाता जहां से अफरीज दुनिया शुरू होती थी।
शाही नजूमी ने बताया था कि अफरीज जादूगर शहजादी सितारा को लेकर वापस अपनी दुनिया में जा चुका है। उस जादूगर को मारने के लिए शहजादा रोशन दिल को सबसे पहले ऊंची पहाड़ियों पर मौजूद रोशन बाबा से मिलना था। वही शहजादा रोशन दिल को उस जादूगर की हलाकत का राज बता सकते थे। रोशन बाबा इंतहाई नेक बूढ़े थे। इस सिलसिले में वह यकीनन शहजादा रोशन दिल की बेपनाह मदद कर सकते थे। इसलिए शहजादा रोशन दिल का उनके पास जाना बहुत जरूरी था।
शहजादा रोशन दिल सबसे पहले इन्हीं बूढ़े से मिलना चाहता था। इसलिए वह अपने घोड़े पर सवार ऊंची पहाड़ियों की जाम चला जा रहा था। सारा दिन मुसलसल सफर करने के बाद आखिरकार वह ऊंची पहाड़ियों तक पहुंचने में कामयाब हो गया। उसने घोड़े को एक तरफ छोड़ा और खुद एक पहाड़ी पर चढ़ने लगा। पहाड़ की चोटी पर एक झोपड़ी दिखाई दे रही थी जिसमें से धुआं निकल रहा था। पहाड़ी पर चढ़ते-चढ़ते शहजादा रोशन दिल बुरी तरह से थक गया था। मगर जब तक वह चोटी पर ना पहुंच गया, उसने उस वक्त तक दम ना लिया।
झोपड़ी का दरवाजा खुला हुआ था। शहजादा रोशन दिल उस झोपड़ी में दाखिल हो गया। झोपड़ी में एक पुरनूर चेहरे वाले बूढ़े आंखें, बंद किए खुदा की इबादत में मुश्तबिल थे। उनके सर, दाढ़ी और भौ के बाल दूध की तरह सफेद दिखाई दे रहे थे। एक तरफ लकड़ियां जल रही थी जो शायद बूढ़े बाबा ने सर्दी से बचने के लिए जला रखी थी। बूढ़े बाबा नमाज के पे बैठे थे। उनके हाथ में तस्बीह थी जिसके दाने मुसलसल हिल रहे थे।
शहजादा रोशन दिल ने उनकी इबादत में दखल देना मुनासिब ना समझा और खामोश और एहतराम से एक तरफ जा बैठा। कुछ देर बाद बूढ़े बाबा ने इबादत खत्म की और आंखें खोल दी। उन्हें आंखें खोलता देखकर शहजादा रोशन दिल ने उनको उकीदत भरे अंदाज में सलाम किया। जिसका बूढ़े बाबा ने निहायत मोहब्बत से जवाब दिया।
बाबा जी मैं आपकी खिदमत में एक जरूरी काम के सिलसिले में हाजिर हुआ हूं। शहजादा रोशन दिल ने कुछ लम्हों बाद बूढ़े बाबा से मुखातिब होकर कहा।
मैं जानता हूं बेटा तुम अफरीसी दुनिया में जाकर अफरीस शहजादी सितारा को जाफर जादूगर की कैद से रिहाई दिलाना चाहते हो। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा और उनकी बात सुनकर शहजादा रोशन दिल हैरान रह गया। उसे यकीन हो गया कि रोशन बाबा बहुत पहुंचे हुए बूढ़े हैं। वह जाफर जादूगर को मारने के सिलसिले में यकीनन उसकी मदद करेंगे। इसलिए उसके चेहरे पर और दिल में बूढ़े बाबा के लिए और ज्यादा उकीदत उभर आई।
अगर आप सब कुछ जानते हैं बाबा जी तो फिर मुझे बताइए कि मैं अफरीसी यानी जाफर जादूगर को किस तरह हलाक कर सकता हूं? उसने पूछा।
अफरीज असल में जिनों और भूतों से एक अलग कौम होती है बेटा और यह कौम जिनों भूतों से कहां ज्यादा ताकतवर और खतरनाक होती है उनका मुकाबला करना इंसानों की तो क्या जिनों भूतों के बस की भी बात ना होती और जाफर अफरीस होने के साथ-साथ एक जादूगर भी है। इसलिए उसकी ताकत दूसरे अफरीसों से कहां ज्यादा और खौफनाक है। उसे मारने के लिए तुम्हें कई तकलीफ देह मराहिल से गुजरना पड़ेगा।
शाही नजूमी ने तुम्हें जिन तीन मराहिल के बारे में बताया है उनकी मदद से तुम सिर्फ अफरीज दुनिया में जा सकते हो। मगर जाफर जादूगर से मुकाबला करने के लिए तुम्हें उनसे भी ज्यादा खतरनाक रास्तों से गुजरना होगा जहां तुम्हारी जान भी जा सकती है।
बूढ़े बाबा ने बताया।
इंसान अगर नेकी और किसी अच्छे काम की खातिर कदम उठाए तो उसकी मदद अल्लाह ताला भी करते हैं। बाबा शहजादी सितारा से मेरा कोई ताल्लुक ना है और ना ही उसका ताल्लुक हमारी दुनिया से है। मगर वह उस वक्त मुसीबत का शिकार है और मुसीबत ज्यादा की मदद करना बहुत बड़ी नेकी होती है। क्या इस नेक काम में अल्लाह ताला मेरी मदद ना करेंगे? और फिर मौत तो एक रोज हर किसी को आना ही है। अगर अल्लाह ताला ने मेरी मौत उसी तरह यानी आज से भी दुनिया में ही लिखी हुई है तो मैं भला उसे कैसे टाल सकता हूं।
शहजादा रोशन दिल ने कहा।
बहुत खूब। मुझे तुम्हारे ख्यालात सुनकर बहुत खुशी हुई है शहजादे। अब मुझे यकीन हो गया है कि तुम जाफर जैसे खतरनाक जादूगर को यकीनन हलाक कर दोगे।
जाफर जादूगर अफरीज दुनिया के लिए ही नहीं इंसानों के लिए भी बड़ा जालिम और खतरनाक बना हुआ है। वह इंसानी दुनिया में आकर अक्सर लोगों को सताता रहता है। इंसानों का खून पीना उसका सबसे ज्यादा महबूब मशगला है। बेटा इस जादूगर का वाकई फना होना बहुत जरूरी है।
इस जादूगर की जान उसके अपने जिस्म में ही है। मगर अफरीज होने की वजह से उस पर दुनिया का कोई हथियार असर ना करता ना ही उस पर आग या पानी का असर होता है। इस जादूगर को मारने के लिए तुम्हें चार अलग-अलग दरिंदों के तीज और नुकीले पंजे हासिल करने होंगे। जिनमें एक पंजा सुनहरे शेर का होगा। एक शहर चीते का, तीसरा पंजा सरक उखाब का, चौथा पंजा नीले चमगादड़ का और पांचवा किसी इंसान का नाखून। इन सब पंजों का एक-एक नाखून तुम्हें अपनी उंगलियों के सिरों पर लगाना होगा। जब अपना यह पंजा तुम अफरीज जादूगर को मारोगे, तब अफरीज यानी जाफर जादूगर हलाक हो जाएगा।
अब मैं तुम्हें बताता हूं कि तुम इन दरिंदों के पंजे कहां से और कैसे हासिल कर सकते हो। यह कहकर बूढ़े बाबा कुछ लम्हों के लिए खामोश हो गए। फिर शहजादा रोशन दिल को बताने लगे।
फिर उन्होंने शहजादा रोशन दिल को एक सफेद नगीन वाली अंगूठी दी और अपने हाथ में पकड़ी हुई तस्बीह उन्होंने शहजादे के गले में डाल दी और कहने लगे जब तक यह तस्बीह तुम्हारे गले में रहेगी। उस वक्त तक तुम पर किसी अफरीस के जादू का कोई असर ना होगा और तुम अफरीसों को आसानी से देख भी सकोगे और इस अंगूठी की मदद से तुम उन जगहों तक आसानी से पहुंच सकते हो जिन जगहों पर से तुम्हें सहार रिच्छों के जोड़े का खून नीला परिंदा सबसे सुनहरी नाक का फन और दरिंदों के पंजों के नाखून हासिल करने हैं। चार दरिंदों के नाखून और पांचवा नाखून तुम्हारा अपना होगा। इन सब दरिंदों को हलाक करना, उनके पंजे हासिल करना। यह सब तुम्हारी अपनी अकल, होशियारी और बहादुरी पर मुनहसर होगा।
जब तुम्हारा हाथ खूनी पंजा बन जाएगा, तो तुम उस अफरीसी मकान की तरफ जाओ। और हां, यह मिट्टी के बने हुए दो ऊंट हैं। इन्हें भी अपने पास रख लो। अफरीज दुनिया में सफर के दौरान यह तुम्हारे काम आएंगे। इन्हें जमीन पर रखकर कहना जिंदा हो जाओ। तो, यह जिंदा होकर ऊंट बन जाएंगे।
बूढ़े बाबा ने यह कहकर एक तरफ मौजूद संदूक से मिट्टी के बने हुए दो छोटे-छोटे ऊंट शहजादा रोशन दिल के हवाले कर दिए। शहजादा रोशन दिल ने उनसे सब चीजें लेकर एहतियात के साथ अपने पास रख ली। फिर बूढ़े बाबा ने शहजादे से उसकी तलवार ली और उस पर दम कर दिया।
मैंने तुम्हारी तलवार पर दम कर दिया है। अब इस तलवार को तुम किसी फौलादी चट्टान पर भी मारोगे तो वह भी किसी मोम की तरह काट जाएगी।
बूढ़े बाबा ने मुस्कुराते हुए कहा और शहजादा रोशन दिल भी मुस्कुरा दिया। फिर उसने बूढ़े बाबा का शुक्रिया अदा किया और उनसे इजाजत लेकर और उन्हें सलाम करता हुआ उनकी झोपड़ी से बाहर आ गया।
बूढ़े बाबा की दी हुई अंगूठी उसके हाथ में थी जिसकी मदद से वह आंखें बंद करके दूरदराज का सफर कुछ ही लम्हों में तय कर सकता था। इसलिए उसने अपने घोड़े की परवाह ना की जो वह नीचे पहाड़ियों के पास छोड़ आया था।
शहजादा रोशन दिल ने अंगूठी के सफेद नगीन की तरफ देखते हुए आंखें बंद कर ली और उससे कहा ऐ सफेद नगीन वाली अंगूठी मुझे स पहाड़ के स्याह घाट तक पहुंचा दे। अभी उसने इतना ही कहा था कि उसी वक्त उसे एक हल्का सा झटका लगा। दूसरे ही लम्हे शहजादा रोशन दिल को यूं महसूस हुआ जैसे उसके पांव जमीन से उड़ गए हो और वह निहायत तेजी के साथ हवा के झोंके पर उड़ता चला जा रहा था।
काफी देर मुसलसल उसी तरह उड़ते रहने के बाद शहजादा रोशन दिल के कदम दोबारा जमीन पर आ लगे। जैसे ही उसके पांव जमीन पर लगे, उसने एकदम आंखें खोल दी। उसने देखा कि वह उस वक्त एक काले स्याह रंग के पहाड़ के सामने खड़ा था। यूं मालूम हो रहा था जैसे सारा का सारा पहाड़ कोयले का बना हुआ हो। शहजादा रोशन दिल के बिल्कुल सामने एक गार दिखाई दे रही थी। गार का दहाना काफा चौड़ा था।
शहजादा रोशन दिल ने बूढ़े बाबा की दी हुई तलवार मन से निकालकर हाथ में ले ली और अल्लाह ताला का नाम लेता हुआ गार के दहाने की तरफ बढ़ने लगा। गार में दाखिल होते ही उसके पीछे जैसे गार का मुंह बंद हो गया हो। उसके साथ ही शहजादा रोशन दिल को यूं महसूस हुआ जैसे एकदम उसकी आंखों की बिनाई चली गई हो और वह अंधा हो गया हो।
शहजादा रोशन दिल तुम उस वक्त स्याह पहाड़ के स्याह गार में हो जहां स्याह रिछों के बादशाहों का सबसे ताकतवर जोड़ा रहता है। जब तक तुम इन दोनों को हलाक ना करोगे उस वक्त तक तुम गहार से ना निकल सकोगे। तुम्हारे लिए गहार में कुछ लम्हों के लिए रोशनी की जा रही है। रोशनी में तुम्हें स्याह रिक्षों का जोड़ा दिखाई देगा जो तुम पर हमला करेगा। तुम्हें ना सिर्फ उसके हमलों से बचना होगा बल्कि उन्हें हल्लाक भी करना होगा। याद रखना रोशनी कुछ देर के लिए ही होगी और फिर आहिस्ता-आहिस्ता मध्यम होना शुरू हो जाएगी। अगर तुम रोशनी खत्म होने से पहले स्याह रिछों को हलाक ना कर सके तो अंधेरा होते ही स्याह रिच तुम्हें हलाक कर देंगे।
शहजादा रोशन दिल को एक चीखती हुई आवाज सुनाई दी और शहजादा चौंक पड़ा। उसी वक्त जैसे घार रोशनी से भर गया। हर तरफ तीज रोशनी फैलने लगी। तीज रोशनी में शहजादा रोशन दिल को सामने दो निहायत बड़े-बड़े और खौफनाक रिच दिखाई दिए जो रोशनी होते ही निहायत खौफनाक अंदाज में चीखने चिल्लाने लगे थे और सामने से दौड़ते हुए निहायत खौफनाक अंदाज में शहजादा रोशन दिल की तरफ आने लगे। उनके दांत और हाथ-पांव के पंजे बहुत बड़े नुकीले और खौफनाक थे।
इस कदर बड़े और खौफनाक रिछों को देखकर एक लम्हे के लिए शहजादा रोशन दिल बौखला गया और कई कदम पीछे हटाया। मगर फिर अचानक उसे जैसे किसी ने जोर से आगे धकेल दिया हो और शहजादा तेजी से उन रिच्छों के करीब आ गया। रिच्छों ने खौफनाक आवाजें निकालते हुए अचानक निहायत जारहाना अंदाज में शहजादे पर हमला कर दिया। मगर शहजादा रोशन दिल तेजी से नीचा हो गया और अपने जिस्म को बल देता हुआ दाएं जानिब घूम गया। वरना रिछों के खौफनाक पंजे उसे एक लम्हे में बुरी तरह से उधाड़ कर रख देते।
जिस तेजी से शहजादा दाएं जानिब हुआ था। दोनों रिच भी उसी तरफ पलटे थे। उनके मुंह से तीज और दिल दहला देने वाली खौफनाक चीखें निकल रही थी और वह अपने तीजधार पंजों से बार-बार शहजादे पर हमला कर रहे थे। मगर शहजादा हर बार उनके हमलों से बचने के लिए इधर-उधर हो जाता। वह भी रिछों पर तलवार की मदद से हमला कर रहा था। मगर तेज रफ्तार और फर्तीले रिछों में से वह अभी तक किसी एक को हल्ला करना तो एक तरफ रखें। हल्का सा जख्म भी ना लगा सका।
और फिर शहजादा रोशन दिल ने गार में रोशनी कम होती हुई महसूस की। यह देखकर शहजादा बौखला गया। उसने रिछों पर तीज-तीज हमले करना शुरू कर दिए। एक बार जब उसने तलवार घुमाई तो एक सरदार रिच की गर्दन काटकर दूर जा गिरी और उसका बेसर का धड़ जमीन पर गिरकर बुरी तरह से तड़पना शुरू हो गया। उसकी काटी हुई गर्दन से खून फव्वारे की तरह उबल रहा था।
सरदार रिच की गर्दन काटते देखकर रक्षनी और ज्यादा गजबनाक हो गई। उसके हमलों और गुर्राहटों में बेपनाह इजाफा हो गया। मगर शहजादा रोशन दिल ने कुछ ही लम्हों में उसे भी ढेर कर दिया। दोनों रिच्छों को हलाक करके शहजादे ने अपने लिबास में से जल्दी से एक बोतल निकाली जो वह अपने साथ लाया था। उसने दोनों रिछों का उबलता हुआ खून उस बोतल में डालकर बोतल का मुंह बंद कर दिया।
कुछ देर तक शहजादा रोशन दिल वहीं सुस्ताता रहा। उस वक्त तक गार की रोशनी बहुत कम हो गई थी। तब शहजादा रोशन दिल ने सबसे सुनहरी नाक के इलाके में जाने का इरादा किया। उसने बूढ़े बाबा की सफेद नगीन वाली अंगूठी की तरफ देखा। ऐ इस सफेद नगीन वाली अंगूठी मुझे सबसे सुनहरी नाक तक पहुंचा दे। उसने कहा और आंखें बंद कर ली। उसी वक्त उसे झटका लगा और उसके कदम जमीन से उठ गए।
कुछ लम्हों बाद जब उसके कदम दोबारा जमीन से लगे तो उसे तीज और खौफनाक फनक की आवाज सुनाई दी और शहजादे ने आंखें खोल दी। उसने देखा कि वह सहा रिछों जैसी ही एक गार में मौजूद था और उसके सामने एक कई फीट लंबा और मोटा नाग मौजूद था। जिस पर सब और सुनहरी धब्बे नजर आ रहे थे। नाग ने शहजादा रोशन दिल को देखते ही खौफनाक अंदाज में फनकारते हुए उस पर हमला कर दिया। वह फन उठाकर अपनी लंबी और दो शाखा जबान निकाल निकालकर शहजादे को मारने की कोशिश कर रहा था। मगर शहजादा रोशन दिल होशियारी और निहायत भरती से उसके डंक से खुद को बचा रहा था। फिर उसने मौका पाते ही नाक की गर्दन उड़ा दी। जैसे ही नाक की गर्दन काटी, नाक का बाकी जिस्म जलकर स्याह हो गया। शहजादे ने नाक की काटी हुई गर्दन एक रुमाल में लपेट कर अपने पास रख ली।
ऐ सफेद नगीन वाली अंगूठी अब मुझे नीले परिंदे के पास ले चलो। नाक को मारने के बाद शहजादा रोशन दिल ने सफेद नगीन वाली अंगूठी की तरफ देखते हुए कहा और आंखें बंद कर ली। उसे पहले की तरह झटका लगा और कुछ देर हवा के झोंके पर उड़ता रहा। फिर उसके कदम जमीन से आ लगे। उसने जब आंखें खोली तो उसने खुद को फिर एक गार में मौजूद पाया। इस गार में चिड़िया जितना एक नीले रंग का अजीब व गरीब परिंदा इधर-उधर उड़ रहा था।
शहजादा रोशन दिल ने इस नीले परिंदे को जिंदा पकड़ना था। वह सोचने लगा कि अब उसे किस तरह से पकड़ा जाए। कुछ लम्हे सोचते रहने के बाद उसने अपने सर पर से टोपी उतारी और फिर उस टोपी की मदद से वह इस परिंदे को पकड़ने की कोशिश करने लगा। मगर परिंदा बहुत तेज और फर्तीला था। वह गार में नहाए तेजी से इधर-उधर चकराता उड़ रहा था। शहजादा रोशन दिल उसे झपट फट कर पकड़ने की कोशिश कर रहा था। फिर उसने करीब से गुजरते हुए परिंदे पर अपनी टोपी से झपटा मारा। दूसरे ही लम्हे नीला परिंदा उसकी टोपी में आ चुका था। शहजादा रोशन दिल ने जल्दी से उसे पकड़ लिया और उसे टोपी में ही रखकर टोपी सर पर डाल दी।
अब वह अफरीस की दुनिया में जाने के लिए पूरी तरह से तैयार था। मगर अभी उस जाफर जादूगर को हलाक करने के लिए चार अलग-अलग दरिंदों के तीज नाखूनों की जरूरत थी। उसने वक्त जाया करना मुनासिब ना समझा और सफेद नगीन वाली अंगूठी की मदद से सुनहरे शेर तक जा पहुंचा। सुनहरा शेर उसकी तवकको से कहां ज्यादा बड़ा खौफनाका और खनकार था। उसका सामना करते और उससे मुकाबला करते हुए शहजादा रोशन दिल को वाकई दांतों तले पसीना आ गया। मगर बूढ़े बाबा की दी हुई तलवार की मदद से वह सुनहरे शेर को भी मारने में कामयाब हो गया। फिर उसने खंजर की मदद से सुनहरे शेर का एक नुकीला नाखून काटकर अपने पास रख लिया और सफेद नगीन वाली अंगूठी के जरिए शहर चीते के जंगल में जा पहुंचा। शहर चीते को मारकर और उसका नाखून काटकर वह अंगूठी की मदद से एक दूसरे जंगल में पहुंच गया। इस जंगल में सरख उकाबों की बहुलत थी। शहजादा रोशन दिल ने खंजर को नोक से पकड़ कर एक सरख उकाब का निशाना लेकर खंजर उस पर छोड़ मारा। खंजर जनी का वह चौके माहिर था। फिर भला उसका निशाना क्यों कर चुक सकता था? दूसरे ही लम्हे सरख रंग का एक उकाब खंजर में फंसकर फड़फड़ाता हुआ नीचे आ गिरा और कुछ ही लम्हों में तड़प-तड़प कर हलाक हो गया और शहजादा रोशन दिल ने उसके पंजे का भी एक नाखून उतार कर अपने पास रख लिया। उसी तरह शहजादा सफेद नगीन वाली अंगूठी के जरिए नीले चमगादड़ों के जंगल में पहुंचा और उसने खंजर मारकर एक चमगादड़ को भी मार गिराया और उसका भी नुकीला नाखून हासिल कर लिया।
अब शहजादा रोशन दिल जाफर जादूगर को हलाक करने के लिए चारों नाखून हासिल कर चुका था। उसने बारीक डोरियों की मदद से नाखून अपनी उंगलियों के सिरों पर बांध लिए। ऐ सफेद नगीन वाली अंगूठी अब मुझे अफरीसी मकान में ले चलो। शहजादे ने चारों नाखून उंगलियों के सिरों से बांध लेने के बाद बूढ़े बाबा की दी हुई अंगूठी की तरफ देखते हुए कहा और आंखें बंद कर ली। उसे झटका लगा और उसके कदम जमीन से उठ गए। काफी देर मुसलसल उड़ते रहने के बाद जब उसके पांव जमीन से लगे तो उसने आंखें खोल दी। इस बार वह उस अफरीसी मकान में मौजूद था जहां उसने रात के वक्त शहजादी, सितारा और जाफर जादूगर की बातें सुनी थी। कमरा उसी तरह खुला हुआ और खाली था।
शहजादे ने स्याह रिछों के खून से कमरे के वसत में एक दायरा बनाया और दायरे के ऐन दरमियान में सबसे सुनहरी धब्बों वाले नाग का कांटा हुआ सर रख दिया। एक जोरदार धमाका हुआ और जमीन के उस हिस्से से एक बहुत बड़े कुएं का दहाना उभर कर बाहर आ गया। तब शहजादा रोशन दिल ने सर से टोपी थोड़ी सी उठाकर नीला परिंदा पकड़ा और उसकी टांगे पकड़ कर कुएं के मुंह में छलांग लगा दी। चिड़िया नमा परिंदा जोर-जोर से पर मारने लगा और शहजादा रोशन दिल आहिस्ताआहिस्ता जैसे कुएं में उतरता जा रहा था। कुएं में हर तरफ गहरी तारी की छाई हुई थी। शहजादा रोशन दिल काफी देर तक कुएं में नीले परिंदे की मदद से उतरता रहा। फिर उसके कदम कुएं की तह से जा लगे। जैसे ही उसके पांव जमीन से लगे। एक जोरदार कड़ाका हुआ। 30 बिजलियां सी चमकी। दूसरे ही लम्हे एक लख्त तारीकी छट गई। और शहजादा रोशन दिल ने खुद को एक बेआबूग रेगिस्तान में मौजूद पाया। रेगिस्तान बहुत बड़ा और वसीय वरीस था। हर तरफ रेत ही रेत का समंदर फैला हुआ दिखाई दे रहा था। आसमान पर सूरज चमक रहा था।
जिसकी वजह से रेत तप रही थी और सूरज भी [संगीत] जैसे आग बरसाता हुआ मालूम हो रहा था। शहजादा रोशन दिल परेशान ज्यादा निगाहों [संगीत] से चारों तरफ देख रहा था और सोच रहा था कि अब वह क्या करें और किस तरफ जाए।
शहजादा रोशन दिल, तुम उस वक्त अफरीज दुनिया में हो। इस रेगिस्तान में कुछ गज के [संगीत] फासले पर टीले के पीछे शहजादी सितारा बेहोश पड़ी हुई है। उसने जाफर जादूगर की कैद से भागने की कोशिश की थी और [संगीत] रेगिस्तान में गिरकर बेहोश हो गई। उसे होश में लाओ और मेरे दिए हुए तिलिस्मी ऊंटों को [संगीत] जमीन पर डालकर जिंदा करो और उस पर बैठकर जिस कदर जल्द मुमकिन हो इस रेगिस्तान [संगीत] से निकल जाओ।
अचानक शहजादे को बूढ़े बाबा की आवाजें सुनाई दीं और शहजादा रोशन दिल बुरी तरह से चौंक पड़ा। करीब ही रेत का एक [संगीत] टीला था। शहजादा रोशन दिल तेजी से उस टीले पर चढ़कर दूसरी जानिब देखने लगा। उसे वाकई कुछ [संगीत] दूर सरक कपड़ों का एक ढेर सा पड़ा दिखाई दिया। शहजादा रोशन दिल तेजी से उस तरफ आ गया। उसने देखा सरक कपड़ों में एक निहायत खौफनाक शक्ल वाली लड़की बेहोश गिरी पड़ी थी। शहजादा समझ गया कि यह जरूर अफरीस शहजादी सितारा है।
[संगीत] वह उसे होश में लाने का तरफा सोचने लगा। फिर उसने शहजादी की नाक और मुंह पकड़ कर [संगीत] जोर से दबाना शुरू कर दिया। जिससे शहजादी सितारा का दम घुटने लगा और खौफनाक शक्ल वाली शहजादी को होश आ गया।
"मैं कहां हूं? यह कौन सी जगह है और तुम कौन हो? तुम्हारे जिस्म से तो मुझे आदमीजादों जैसी ब आ रही है।" होश में आते ही शहजादी सीतारा [संगीत] ने चौंक कर और बड़े घबराए हुए लहजे में कहा।
जवाब में शहजादा रोशन दिल ने जल्दी-जल्दी उसे सारी बात सुना दी और यह जानकर कि शहजादा रोशन दिल ने उसकी जान बचाने के लिए इस कदर कठिन [संगीत] मंजिल तय की है और वह किस मुश्किलों से गुजर कर उसके तक पहुंचा है, वह हैरान रह गई और शहजादे का शुक्रिया अदा करने लगी।
"यह शुक्रिया अदा करने का वक्त ना है शहजादी [संगीत] साहिबा, हमें यहां से जल्द निकलना है। अगर जाफर जादूगर [संगीत] यहां आ गया तो हमारे लिए मुश्किल हो जाएगी। मगर इससे पहले तुम अपनी शक्ल बदल लो। मुझे तुम्हारी शक्ल देखकर खौफ आ रहा है।" शहजादा रोशन दिल ने शहजादी सितारा से कहा और फिर बूढ़े बाबा के दिए हुए मिट्टी के बने हुए छोटे-छोटे ऊंट निकालकर [संगीत] जमीन पर रखने लगा।
शहजादी सितारा ने एक लम्हे में अपना चेहरा तब्दील कर लिया था और अब वह एक खूबसूरत [संगीत] लड़की नजर आ रही थी, जो हैरानी से शहजादा रोशन दिल के मिट्टी के [संगीत] छोटे-छोटे ऊंट देख रही थी। फिर जैसे ही शहजादे ने मिट्टी के ऊंटों [संगीत] को जिंदा होने का हुक्म दिया, मिट्टी के ऊंट तेजी से बड़े होते चले गए और फिर जैसे उनमें जान सी पड़ गई, दूसरे ही लम्हे उसके सामने दोझिए जागते [संगीत] ऊंट खड़े थे, जिन पर महफिल भी थी और उनके कोहनों पर सरख और सब्ज रंगों के कपड़े भी थे।
शहजादा रोशन दिल ने शहजादी सितारा को एक ऊंट पर बिठाया और दूसरे ऊंट पर खुद बैठ गया। दूसरे ही लम्हे ऊंट उन्हें लेकर [संगीत] तेजी से रेगिस्तान में दौड़ने लगे। शहजादा रोशन दिल का ऊंट आगे और शहजादी सितारा का उसके पीछे था। ऊंट निहायत [संगीत] तेजी से भागे जा रहे थे कि उसी वक्त आसमान पर एक कड़ाका हुआ। शहजादी ने आसमान का रंग गुलाबी होते देखा। ठीक उसी लम्हे उसने शहजादी सितारा [संगीत] के पीछे आसमान पर एक फटी फटी आंखों वाला सरक रंग का एक भयानक खौफनाक का चेहरा नुमूदार होते देखा।
यह देखकर [संगीत] शहजादे रोशन दिल ने जल्दी से अपनी मान से तलवार खींच ली।
"रुक जाओ आदमीजाद। शहजादी सितारा को लेकर कहां जा रहे हो? रुक जाओ ना तो जलाकर भस्म कर दूंगा।" खौफनाका चेहरे वाले जादूगर ने कड़क कर कहा।
उसकी आवाज सुनकर शहजादी सितारा बौखला गई और खौफजादा अंदाज में चीखते हुए ऊंट की रस्सी जोर से खींचने लगी।
"रुक जाओ आदमीजाद [संगीत] मैं कहता हूं रुक जाओ।" जाफर जादूगर खौफनाक अंदाज में गुर्राया। [संगीत] उसी वक्त उसके मुंह से आग के शोले निकले और रेत पर पड़े। दूसरे ही लम्हे रेत अंगारों [संगीत] की तरह सरक होती चली गई।
"घबराओ ना शहजादी सीतारा। हम उस वक्त इन ऊंटों पर महफूज हैं [संगीत] या फिर जादूगर का कोई जादू हम पर असर ना कर सकता।" शहजादा रोशन दिल ने चीख कर शहजादी सितारा से कहा, मगर रेत को सरक [संगीत] होते देखकर शहजादी सितारा बुरी तरह से चीख रही थी।
जाफर जादूगर के मुंह से [संगीत] मुसलसल आग के शोले निकल रहे थे और रेगिस्तान तेजी से सरक होता जा रहा था और फिर अचानक पूरे रेगिस्तान में आग भड़क उठी और बड़े-बड़े शोले निकलने लगे। आग के शोलों में ऊंट, शहजादी सितारा और शहजादा रोशन दिल को लेकर तेजी से भागे जा रहे थे। मगर इस आग का उन पर धर्म भर [संगीत] भी असर ना हो रहा था। यह देखकर जाफर जादूगर हैरान रह गया। उसने मुंह से आग उगलना बंद कर दिया और कुछ लम्हों के बाद रेगिस्तान [संगीत] भी अपनी असल हालत में आ गया।
जाफर जादूगर ने कोई मंत्र पढ़कर फूंका तो [संगीत] रेगिस्तान में एक निहायत जखीम हल और खौफनाका शेर नुमूदार हुआ और बुरी तरह से दहाड़ने लगा। उसके दांत और पंजे बहुत लंबे और नुकीले थे और शेर भूरे रंग का था।
"जादुई शेर शहजादे और शहजादी [संगीत] को ऊंटों समेत चीर फाड़ डालो। उन पर मेरा कोई जादू असर ना कर रहा।" जाफर जादूगर ने चीख कर कहा और शेर खौफनाका अंदाज में दहाड़ता हुआ ऊंटों की जाम दौड़ा।
शहजादा [संगीत] रोशन दिल तो ना घबराया। अलबत्ता शहजादी सितारा ने डर कर अपनी टांगे जरूर ऊंची [संगीत] कर ली थीं। अगरचे शेर दहाड़ता हुआ और निहायत तेजी से छलांगे लगाता हुआ शहजादा रोशन दिल की जाब आ रहा था और फिर शेर भागते हुए [संगीत] ऊंट के साथ तेजी से भागने लगा। शहजादे ने ऊंट की महफिल एक हाथ में और दूसरे हाथ में तलवार पकड़ रखी थी। जैसे ही शेर [संगीत] ने शहजादे पर छलांग लगाई, शहजादा रोशन दिल का तलवार वाला हाथ पूरी कुवत [संगीत] से घूम गया और दूसरे ही लम्हे शेर की गर्दन काटकर दूर जा गिरी और वह रेत पर गिरकर बुरी तरह से [संगीत] तड़पने लगा। फिर एक धमाका सा हुआ और शेर का धड़ और उसकी गर्दन भड़क से जलकर [संगीत] राख हो गई।
यह देखकर जाफर जादूगर सख्त गजबनाक हो गया। उसने कोई मंत्र [संगीत] पढ़ा और जिस्म के साथ नुमूदार होकर जमीन पर उतर आया। उसे जमीन पर आते देखकर शहजादे ने अपना ऊंट रोक [संगीत] लिया और छलांग लगाकर नीचे उतर आया।
"मैं जानता हूं शहजादे कि जादू के जोर से मैं तुम्हारा कुछ ना बिगाड़ सकता, मगर मैं अफरीज हूं और मेरे जिस्म में बेपनाह ताकत मौजूद है। आओ मेरा मुकाबला करो। मैंने अपने हाथों से तुम्हारी गर्दन ना तोड़ दी तो कहना।" जाफर जादूगर ने चीख कर कहा।
शहजादा रोशन दिल उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दिया। [संगीत] उसने तलवार अपनी मन में डाल दी और जाफर जादूगर के मुकाबले में आ गया और फिर दोनों में जोरदार जंग शुरू हो गई। जाफर जादूगर के बदन में वाकई बिजियां [संगीत] भरी हुई थीं। वह निहायत खौफनाक अंदाज में शहजादे पर हमले कर रहा था। मगर शहजादा रोशन दिल भी लड़ाई भिड़ाई [संगीत] में माहिर था। उसने जाम करके जाफर जादूगर का मुकाबला किया और मौका मिलते ही 30 नाखूनों वाला पंजा उसके सीने पर मार दिया। [संगीत] जाफर जादूगर का जिस्म तीज पंजों से चीरता चला गया और उसका दिल शहजादा रोशन दिल के हाथ में आ गया। शहजादे ने अपने पंजे के तीज नाखूनों से जाफर जादूगर का दिल भी चीर डाला। जाफर जादूगर के मुंह से एक खौफनाक चीख निकली और वह लड़खड़ाता हुआ उलट [संगीत] कर गिर पड़ा। उसके जख्मों पर आग सी भड़की और फिर उस आग ने उसे एक लम्हे में जलाकर राख [संगीत] कर दिया।
उस वक्त तक शहजादी सितारा भी अपना ऊंट रोक चुकी थी। जाफर जादूगर [संगीत] को हलाक होते देखकर खुशी से चीख उठी और भागकर शहजादे के करीब आ गई।
"तुम बहुत बहादुर और नेक दिल आदमीज शहजादे, तुमने जाफर जादूगर जैसे अफरीज जादूगर को मारकर मुझ पर और मेरे शहजादा [संगीत] जान दिल नवाज पर बहुत बड़ा एहसान किया है। अब शहजादा जान दिल नवाज की जिंदगी महफूज़ हो चुकी है। मैं शहजादे को सुनहरे बुत से दोबारा अफरीज शहजादा बनाकर अपने मुल्क ले जाऊंगी। अब हम आराम से जिंदगी गुजार सकेंगे। हमें कोई डर, कोई खौफ ना [संगीत] रहेगा। यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है। नेक दिल आदमी जाद। इसके लिए मैं तुम्हारा जिस कदर भी शुक्रिया अदा करूं कम है। आओ मैं [संगीत] तुम्हें अपनी दुनिया में ले जाऊं। मेरे बाबा और शहजादा जान तुमसे मिलकर बहुत खुश होंगे।" शहजादी सितारा ने खुश होते हुए कहा और शहजादा मुस्कुरा दिया।
"ना अच्छी शहजादी। मेरा मकसद तुम्हें जाफर जादूगर को मारकर उसके [संगीत] जुल्म से निजात दिलाना था। सो वह मैं तुम्हें दला चुका हूं। अब मैं वापस अपनी दुनिया में जाना चाहता हूं। हो सकता है तुम्हारी तरह किसी [संगीत] और मजलूम को मेरी जरूरत हो। मेरा मकसद सिर्फ और सिर्फ जुल्म का खात्मा है जो मैं करता रहूंगा।" शहजादे ने कहा।
शहजादी सितारा ने उसे बहुत रोकना [संगीत] चाहा, मगर शहजादा ना माना और बूढ़े बाबा की सफेद नगीन वाली अंगूठी की मदद से वहां से गायब [संगीत] होकर वापस अपनी दुनिया में आ गया। यह वही पहाड़ी इलाका था जहां उसने अपना घोड़ा छोड़ा था। कुछ ही लम्हों में वह अपने घोड़े पर [संगीत] सवार अपने महल की तरफ वापस जा रहा था। वह खुश था कि उसने अफरीज दुनिया की ही [संगीत] सही, मगर एक मजलूम शहजादी की जान तो बचा ली और खतरनाक और जालिम जादूगर को हलाक कर दिया। बूढ़े बाबा की करामाती [संगीत] चीजें उसके पास थीं जिनसे वह आइंदा भी मदद लेकर मजलूमों की मदद कर सकता था।
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