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रसूल सल्ला वसल्लम ने कहा, आज से अल्लाह पाक ने जो है सूद को हराम, हराम करार दिया। जो इसका खुलासा है कि अल्लाह पाक सूद को मिटाते हैं और सदकात को बढ़ाते हैं। और ये जान सबसे पहले अल्लाह के रसूल सल्ला वसल्लम ने दी। बिज़नेस के अंदर में, कारोबार के अंदर में, कुछ बिज़नेस, कारोबार ऐसे होते हैं। बिस्मिल्लाह माहीम देखो, माशाअल्लाह आप आप लोग बड़ी कुर्बानी के साथ में आए हो। कुछ बातें हैं। सबसे पहले तो मैं आप लोगों को ये बात बता दूँ कि देखो मैं कोई शेयर मार्केट का एक्सपर्ट नहीं हूँ। और अगर इस बात के अंदर में, मजलिस के अंदर में, अगर हम कोई शेयर के स्टॉक के नाम भी लेते हैं, तो वो सिर्फ एग्जांपल के लिए है। उसके अंदर खरीदने-बेचने की हमारी कोई राय नहीं है। ठीक है?
अब सबसे पहले स्टॉक मार्केट के अंदर में हम यह समझते हैं कि स्टॉक मार्केट जो है, यह जो शेयर मार्केट जो हम बोलते हैं, इसकी बुनियाद कैसे पड़ी और ये शुरू कैसे हुआ? देखो, ये इंडिया के अंदर में ना, हमारे यहां पर रिवाज नहीं है शेयर मार्केट का, स्टॉक मार्केट का। अगर इंडिया के बाहर हम चले जाएँगे, तो अमेरिका है और दूसरी जो कंट्री हैं, वहाँ पर 90% लोग, 95% लोग स्टॉक मार्केट के अंदर में, उसके अंदर में अपना पैसा इन्वेस्ट करते हैं और उससे कमाते हैं। लेकिन क्योंकि हमारे यहां पर रिवाज नहीं है। हमारे यहां पर हिंदुस्तान के अंदर में 150 करोड़ लोग हैं, जिसमें से सिर्फ 3 करोड़ लोगों के पास में डीमैट अकाउंट एक्टिव है। सिर्फ 3 करोड़। कितने फीसद हुआ? 150 करोड़, 3 करोड़। 2%, सिर्फ 2% लोग हैं जो इस स्टॉक मार्केट के अंदर में हैं। अब इसके अंदर भी मुसलमान कितने हैं? अब इसमें बहुतों का नजरिया यह है कि भाई स्टॉक मार्केट जो है, यह हलाल ही नहीं है। स्टॉक मार्केट क्या है? ये हलाल नहीं है, क्योंकि इसमें बोले तो कोई मेहनत नहीं होती। तो इसलिए सबसे पहले हम इसको ये समझते हैं कि स्टॉक मार्केट की बुनियाद, शेयर मार्केट की बुनियाद क्यों पड़ी? यह शेयर मार्केट के अंदर में हम जो शेयर खरीदते हैं, तो यह जिस कंपनी के हम लोग शेयर खरीद रहे हैं, समझो कि ये उस कंपनी के साथ में हम जो हैं, पार्टनरशिप कर रहे हैं और उस कंपनी के अंदर में अपना पैसा लगा रहे हैं, पार्टनरशिप कर रहे हैं।
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जमाने के अंदर में, यह आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के वक्त में क्या होता था? जो मायने तौर पर मजबूत थे, वो यहूदी कौम थी और उनका जो है ज्यादातर जो बिज़नेस था, वो सूद का बिज़नेस था। सूदी निज़ाम, सूदी कारोबार जो है, उन लोगों का चलता था। और फिर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आए, तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सूद को जो है, ये खत्म किया, सूदी निज़ाम को खत्म किया। इसलिए आप लोगों ने किताबों के अंदर में भी पढ़े होंगे कि वो एक आए और हज़रत बिलाल रज़िअल्लाहु ताला से जो है बहुत गलत तरीके से पेश आने लगे कि मेरा कर्ज़ा वापस दे दो, क्योंकि वो मुसलमान नहीं थे, यहूदी लोग थे। तो उस वक्त में ये इन लोगों का कारोबार, कामकाज यही था। फिर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने लाया कि भाई आज से अल्लाह पाक ने जो है सूद को हराम, हराम करार दिया है। इकरार जानते हैं? जो कि यबा सका, जिसका खुलासा है कि अल्लाह पाक सूद को मिटाते हैं और सदकात को बढ़ाते हैं। तो ये सूदी निज़ाम सबसे पहले अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खत्म किया।
अब बिज़नेस के अंदर में, कारोबार के अंदर में, कुछ बिज़नेस, कारोबार ऐसे होते हैं कि जिसके अंदर में आदमी अकेले तौर पर नहीं कर पाएगा। अभी जैसे बड़ी-बड़ी कंपनियां हमारे यहां पर हैं, जिसके अंदर 500 करोड़, 1000 करोड़, बल्कि कुछ कंपनी ऐसी हैं जो एक लाख करोड़, दो लाख करोड़, 10 लाख करोड़ की हैं। तो उसमें अकेला आदमी कैसे करेगा? तो ये अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जमाने में भी ये निज़ाम चलता था। और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खुद ट्रेडर थे। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जो मक्का मुकर्रमा के जो इन्वेस्टर थे, जो ज्यादा माल वाले थे, उन लोगों के पास से पैसा लेते थे और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनका पैसा जमा करके जो है, ये मुल्क-ए-शाम, यहां का जो सामान था, मक्का का ये खरीद कर मुल्क-ए-शाम जाते थे और ये सारा सामान जो है मुल्क-ए-शाम के अंदर में बेचते थे। और मुल्क-ए-शाम उस वक्त के अंदर में ये बिज़नेस का हक़ था, जैसे अभी भी देखेंगे कि भाई कोई भी बड़े बिज़नेस का हो, दुबई के अंदर में और दुनिया के सारे इलाके के लोग दुबई में आ रहे हैं। तो उस वक्त में मुल्क-ए-शाम जो था, ये बिज़नेस का हक़ था और वहाँ पर बिज़नेस बहुत अच्छा चलता था। तो ये कुछ सफ़र और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम वहाँ पर जाते, महीना, दो महीने, तीन महीने जो है वहाँ पर गुजारते। यहां की चीजें जो ले जाते, वो वहाँ पर बेचते, फिर वहाँ की चीजें खरीदते, उसको बेचते। फिर हज के मौके के वक्त में मुल्क-ए-शाम से कुछ चीजें खरीद कर जो है वापस यहां पर लाते हैं, मक्का मुकर्रमा के अंदर और मक्का के अंदर में मीना का बाजार मशहूर और मारूफ़ बाजार था। तो वहाँ से अत्तर, खुशबू, जैतून, जैतून का तेल, ये सारी चीजें लाकर ये मक्का मुकर्रमा के अंदर में बेचते और जब हज का मौका आता, तो उस मौके के ऊपर, साल में एक मर्तबा जो हज के लिए आते, तो उस मौके के ऊपर सारा सामान जो इनका बिक जाता। अब ये जिन लोगों के पैसे लिए हैं, तो इसका सारा हिसाब-किताब लगाते कि भाई जाने का खर्च कितना हुआ, आने का खर्चा कितना हुआ, प्रॉफिट कितना हुआ? इसमें, इसमें सारा हिसाब लगाकर, फिर जिन लोगों ने जितना पैसा दिया है, एग्जांपल के तौर पर ₹1 लाख जो है लगा था, तो उसमें से किसी ने ₹100 दिया है, उनका 10% है, किसी ने 5000 दिया, तो जिनके जितने शेयर के हिसाब से पैसे थे, वो प्रॉफिट गिनकर उनको जो है, उनका प्रॉफिट पहुँचाते थे। और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जो इन्वेस्टर थे, उनके मांगने से पहले उनका हिसाब करके उनके पैसे उनके पास पहुँचा दिया करते थे।
इसलिए आपने देखे होंगे कि जब अल्लाह के रसूल ने लोगों को कलमे की दावत दी, उससे पहले पूछा कि भाई आप मुझे कैसा जानते हो? आप सच्चे हो, अमानतदार हो, अमीन हो? क्योंकि ये लोगों का पैसा इन्वेस्ट करने के लिए लेते थे और लोगों को जो है बिज़नेस करके, प्रॉफिट करके देते थे। तो इस तरीके से ये चलता रहा और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जमाने के अंदर, अल्लाह के रसूल ने सबसे पहली बुनियाद ये, आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जमाने से बुनियाद पड़ी कि सूद को खत्म करो और पार्टनरशिप वाला निज़ाम था। और उसके बाद में जब जो है मदीना मुनव्वरा के अंदर में गए, हज़रत अली बिन अबी तालिब रज़िअल्लाहु अन्हु का किस्सा है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा उनसे कि अली, ये इस्लाम की बरकत से एक दिन ऐसा आएगा कि ज़कात के देने वाले लोगों में ज़कात का लेने वाला कोई नहीं होगा। तो ये निज़ाम जो था, ये सूदी निज़ाम था, इसको खत्म किया और ऐसे तरीके अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पार्टनरशिप के बताए कि इसके ज़रिए से उनका मायने निज़ाम जो था वो मज़बूत बना और कैसा मज़बूत बना कि हज़रत अब्दुल रहमान बिन औफ़ रज़िअल्लाहु ताला ये जब मदीना मुनव्वरा के अंदर में आए, तो मदीना मुनव्वरा के अंदर में आने के बाद में अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हज़रत साद रज़िअल्लाहु अन्हु से उनका भाईचारा करवाया। तो उस वक्त में हज़रत साद ने कहा, मेरे दो मकान हैं, एक मकान आप ले लो। मेरे दो खेत हैं, एक खेत आप ले लो। तो उन्होंने कहा, नहीं, मुझे खेत और मकान नहीं चाहिए, मुझे जो है बाजार का रास्ता बता दो। और वो तिजारत करते रहे और वो उसूल जो है, जो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तरीके थे, उस हिसाब से करते रहे। तो हज़रत अब्दुल रहमान बिन औफ़ रज़िअल्लाहु ताला उस वक्त के अंदर में सबसे ज्यादा जो है मालदार बने। कौन से तरीके के ऊपर? जो तरीके अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जो है बताए थे।
अब यह जो है जमाना धीरे-धीरे गुजरता गया और निज़ाम बिज़नेस के अंदर में यही पार्टनरशिप वाला चलता था। उस वक्त में भी ये था कि मक्का के जो मुहाजिर थे और अंसार, उन दोनों की जो है भाईचारा करवाया और अंसार की जो है ज़मीनें थीं, उनके ऊपर जो मुहाजिर थे, वो खेती किया करते थे और फिर बाद में जो खेती निकलती, तो उसके अंदर दोनों की पार्टनरशिप हुआ करती थी। लेकिन अल्लाह के रसूल के जाने के बाद में, जमाना जैसे-जैसे गुजरता गया, उसके अंदर में जो है फ्रॉड होने लगे, स्कैम होने लगे। अबकी पांच लोगों ने स्कैम किए, तो बाकी 95 के ऊपर भी कोई भरोसा नहीं करता है, ना पांच, 10 ऐसे होते हैं, लेकिन उसकी वजह से बदनाम सब लोग होते। तो अब ये जमाना धीरे-धीरे निकलता गया और ये सारी चीजें जो हटते गए, फिर उसके बाद में बड़े-बड़े फ्रॉड और स्कैम होने लगे। तो ये पूरी दुनिया की जो गवर्नमेंट है, ये जमा हुई और ये बैठे कि भाई अगर बड़े-बड़े ऐसे फ्रॉड होंगे, तो जो बड़े बिज़नेस हैं, वो शुरू कैसे होंगे हमारे मुल्कों के अंदर में और इसको कैसे शुरू किया जाएगा? दुनिया के अंदर में सबसे पहली कार फोर्ड कंपनी की बनी, फोर्ड कंपनी की। तो वो फोर्ड कंपनी की जब कार बनी, तो उसको करोड़ों का कैपिटल लग रहा था। अब उस वक्त में दो ही शक्ल थी, आज से 150 साल, 200 साल पहले। एक तो ये है कि यहूदी जो लोग थे, ये मायने एतबार से मजबूत थे और इनका जो है बिज़नेस सूद का था और आज भी देखेंगे कि बड़ी-बड़ी जो बैंकें हैं, बैंकिंग निज़ाम है, वो किन लोगों का है? यहूदी लोगों का है। ये जो इस्राइल जो है, उनहीं लोगों की ज्यादातर बड़ी बैंकें हैं। तो अब दो निज़ाम था। अब एक तो ये है कि बड़ी कंपनियां खड़ी कर दी आप लोगों को, तो इनसे सूद से पैसे लो, ब्याज से, इंटरेस्ट से पैसे लो या तो फिर लोगों से इन्वेस्ट कराओ। तो अब इसके अंदर ये फ्रॉड, स्कैम होने लगे, तो बड़ी-बड़ी गवर्नमेंट बैठी कि अगर ऐसे ही चलता रहा, तो बड़ी-बड़ी कंपनियां कैसे खड़ी होंगी? फिर इसके अंदर में यह जो शेयर मार्केट है, इसकी बुनियाद पड़ी और यह सिर्फ हिंदुस्तान के अंदर में नहीं है, दुनिया के सारे मुल्कों के अंदर में है। जितने भी मुल्क, आप दुबई ले लो, साउथ अफ्रीका है, अमेरिका है, चाइना है, हांगकांग है, मलेशिया है, जितने मुल्क हैं, सारे मुल्कों के अंदर में ये शेयर मार्केट का निज़ाम चल रहा है। तो यह गवर्नमेंट ने जो है बाकायदा इसके ऊपर बैठे, सोचे और इसको अपने अंडर में लिया कि भाई अब जो भी कंपनी को, बड़ी कंपनी को पैसा इन्वेस्ट करना होगा, तो आप डायरेक्ट किसी से नहीं इन्वेस्ट कर सकते, आप पहले सारी डिटेल हमको दो, हम उसको देखेंगे, जांचेंगे, परखेंगे, उसके बाद में हम आपको अप्रूवल देंगे, तो उसके बाद में तुम लोगों से पैसा ले सकते हो, ताकि जो लगाने वाले इन्वेस्टर हैं, उनको यह भरोसा रहे कि हम जहाँ पर पैसा लगा रहे हैं, हमारा पैसा क्या सेफ है? तो ये चीज़ वजूद में आई। तो फिर उसके बाद में जो है शेयर मार्केट जो है, ये चलने लगा। तो इसकी बुनियाद कैसे पड़ी? इसकी बुनियाद कैसे पड़ी? इसकी बुनियाद की सबसे बड़ी वजह ये थी कि जो सूदी निज़ाम था, जो इंटरेस्ट वाला निज़ाम था, इसको खत्म करना। इसको खत्म करने के लिए शेयर मार्केट की बुनियाद पड़ी।
फिर उसके बाद में हमारे हिंदुस्तान के अंदर में 1992 के अंदर में, यह 1992 के अंदर में बहुत सारे लोगों ने सुने होंगे, हर्षद मेहता का घोटाला हुआ। फिर उसके बाद में हिंदुस्तान के अंदर में सेबी वजूद में आई और सेबी ने ये शेयर मार्केट का, स्टॉक मार्केट का जो जितना कामकाज है, ये अपने अंडर में लिया, अपने उसके अंदर लिया कि हम लोग इसकी सारी निगरानी और वॉच रखेंगे कि इसके अंदर में कुछ फ्रॉड नहीं हो रहा है, कुछ ऊपर-नीचे नहीं हो रहा है, कुछ शेयर के जो है भाव ज्यादा उसको नहीं बढ़ाए जा रहे हैं, पंप एंड डंप नहीं किया जा रहा है। ये सारी चीजें वो सेबी देखती है। इसलिए देखेंगे आप हर छह महीने, आठ महीने के अंदर कुछ ना कुछ नए रूल्स आ रहे हैं, सेबी ला रही है। क्यों? क्योंकि जो लोग पैसा इन्वेस्ट कर रहे हैं, इनका पैसा जो है सेफ रहना चाहिए। इसके लिए अब शेयर मार्केट जो है कैसे वर्क करता है? तो सबसे पहली और मोटी मिसाल ले लो कि हमारे शेयर मार्केट के अंदर में जो लोग कुछ थोड़ा बहुत नॉलेज रखते होंगे, उन्होंने देखे होंगे कि सबसे बड़े, सबसे बड़ी जो कंपनियां हैं, वो निफ्टी 50 हैं। निफ्टी 50 की कंपनियां सबसे बड़ी कंपनी हैं और उसमें सबसे पहली कंपनी कौन सी आती है भाई? Reliance Industries। तो Reliance Industries की मैं आपको एग्जांपल और मिसाल दे देता हूँ। Reliance Industries जिन्होंने शुरू की, धीरूभाई अंबानी, वो जो है पहले यमन के अंदर में पेट्रोल पंप पर काम करते थे, यमन के अंदर। तो वो यमन के अंदर में पेट्रोल पंप पे नौकरी करते थे और माशाअल्लाह आप सब लोगों को पता है, वो वो भी गुजरात के थे और हमारे गुजरात वाले तो जहाँ जाते हैं, वहाँ उनका दिमाग क्या रहता है? बिज़नेस की लाइन से कि भाई हम लोगों को दो पैसा ज्यादा मिलना चाहिए और बिज़नेस होना चाहिए। इसलिए दुनिया के ज्यादातर जो मुल्कों के अंदर में दिखेंगे, वहाँ गुजराती लोग आपको दिखेंगे। अमेरिका के अंदर गुजराती मिलेंगे, साउथ अफ्रीका, साउथ अफ्रीका के अंदर में तो ज्यादातर गुजराती लोग हैं। ऐसे दुनिया की जितनी कंट्री आप देख लेंगे, वहाँ पर गुजरात के लोग आपको मिलेंगे। तो वो यमन के अंदर गए और उन्होंने देखा कि यमन के अंदर में कोई कंपनी, फैक्ट्रियां नहीं हैं और अभी भी जिन लोगों को मालूम होगा, वहाँ पर ज्यादातर माल इम्पोर्ट होता है, वहाँ पर बनता नहीं है। तो उन्होंने देखा कि यहां पर कोई कंपनी, फैक्ट्री नहीं है। अगर हम हिंदुस्तान से माल लाकर यहां पर बेचें, तो हमको प्रॉफिट होगा। तो वो हिंदुस्तान आए और उन्होंने यहां से कपड़े की तिजारत शुरू की और कपड़े खरीद कर वो यमन बेचने लगे। अब कुछ दिन कपड़े बेचे, तो हमने गुजरात वालों का दिमाग कैसा है? अब इसमें ये हो रहा है, तो इससे आगे बढ़े और यही चीज हर एक की थिंकिंग होना चाहिए कि जो जहाँ पर, जिस लेवल पे हम हैं, उस लेवल से हम अपने आप को जो है मायने तौर के ऊपर आगे ले जा रहे हैं। एक आदमी रिक्शा चला रहा है, तो रिक्शा चलाना नाकामी नहीं है, लेकिन आप अगर 10 साल से रिक्शा चला रहे हो, तो अब इसके आगे की कुछ सोचो कि भाई उसके, उसके दादा भी रिक्शा चला रहे थे, उसका बेटा भी रिक्शा चला रहा है, पोता भी रिक्शा चला रहा है। आप जिस लेवल पे हो, छोटे से छोटा धंधा करो, छोटे से छोटा बिज़नेस करो, लेकिन उस बिज़नेस के अंदर में आप जो है आगे बढ़ने की फ़िक्र करो कि भाई एक आदमी रिक्शा चला रहा है, तो आगे कैसे फ़िक्र करें कि मैं Ola की कार लूँ और मैं Ola चलाऊँ? मेरे पास एक कार है, तो मैं कैसे फ़िक्र करूँ कि मैं दो कार लूँ? तो इन्होंने सोचा कि भाई अब ये कपड़ा लोगों के पास से खरीद रहे हैं, तो ये महंगा आ रहा है। तो ऐसा करते हैं कि ये कपड़े की फैक्ट्री डाल देते हैं। तो उन्होंने हिंदुस्तान में कपड़े की फैक्ट्री डाली और उसका नाम था विमल कंपनी। पहले जमाने के अंदर में विमल कंपनी के कपड़े मिलते थे। तो उन्होंने उसकी तिजारत शुरू की। अब यहां से कपड़े ले जाते थे। जो लोग बाहर मुल्कों में जाते होंगे, वो देखते होंगे कि कुछ सामान यहां से लेकर गए, तो फिर वो बाद में दिमाग लगाते हैं, यहां से तो कुछ सामान ले जा रहे हैं, लेकिन कुछ ऐसा हो जाए कि वहाँ से भी कुछ सामान आ जाए, ताकि कारोबार जो है सही तरीके से हो जाए। तो उन्होंने भी यही सोचा, तो देखा कि यहां से कपड़े लेकर जा रहे हैं, तो देखा कि यमन है और जो खाड़ी देश हैं, वहाँ पर क्रूड ऑयल जो है बहुत होता है। फिर उन्होंने जो है वो क्रूड ऑयल देखा और यहां पर एक फैक्ट्री डाली कि हम यहां पर एक फैक्ट्री डालेंगे और वहाँ से क्रूड ऑयल लाएँगे और वहाँ से क्रूड ऑयल लाकर इसको रिफाइन करके जो है हम यहां पर बेचेंगे। तो उन्होंने फिर इसका बिज़नेस शुरू करने के लिए Reliance Industries का आईपीओ, 1977, 1977 के अंदर उन्होंने Reliance का आईपीओ लाया ₹10 के अंदर में और उनके शेयर, आईपीओ खरीदने के लिए कोई तैयार नहीं था। तो उस वक्त में वो लोगों के घरों पर गए और कहा, देखो ये मैं बिज़नेस कर रहा हूँ और ये खाड़ी देश से यहां पर लाऊँगा और इसको रिफाइन करूँगा और बेचूँगा और इसके अंदर में जो भी प्रॉफिट होगा, उसके अंदर से मैं आप लोगों को हिस्सा दूँगा। मुझे बैंक से भी लोन मिल सकती है, लेकिन 10%, 12% मैं बैंक को दूँगा। फिर टैक्स, जीएसटी, तो उससे बेहतर है कि मैं आप लोगों को प्रॉफिट में हिस्सेदार बना देता हूँ। तो इसी तरीके से उन्होंने लोगों के घर जाकर जो है वो Reliance Industries के जो है आईपीओ पूरा किया और वो अलहम्दुलिल्लाह भर गया और वो शुरू, उसकी बुनियाद वहाँ से पड़ी। अब ये Reliance Industries के अंदर में ये तो 1977 में शुरू हुई थी, लेकिन मैं आपको 1995 का बताऊँ, 1995 का कि जिस आदमी ने 1995 के अंदर में ₹1 लाख Reliance Industries में लगाए होते, तो उसके ₹23 करोड़ आज होते। कितने? ₹23 करोड़ और कंपनी जो है हर तीन महीने में, छह महीने में, साल में डिविडेंड देती है। तो ₹9 करोड़ तो जो उसका डिविडेंड अब तक मिल गया होगा।
फिर अच्छा ये, ये तो हो गया ये शेयर मार्केट के वर्क कैसे कर रहा है कि हम लोग पैसा लगा रहे हैं और उससे के अंदर से जो प्रॉफिट हो रहा है, उसके अंदर से हमको जो हिस्सा मिल रहा है बराबर है। इस तरीके से जो पूरे शेयर मार्केट की जो बुनियाद पड़ी, तो इसलिए हम अभी जहाँ पर हैं, जिस कारोबार में हैं, जिस बिज़नेस में हैं, उसके साथ में रहते हुए और ज्यादातर ये, ये हमारी जो मजलिस है, इसका उनने रखा है कि माशाअल्लाह जो उलमा इकरम हैं, वो अपना मदरसा पढ़ाते हुए, अपनी नमाज़ों का एतमाम कराते हुए, करते हुए ये रोज़ाना कैसे कुछ ना कुछ पैसे कमा सकते हैं? तो ये कोई वो बात नहीं है कि भाई पैसा नहीं कमाना चाहिए। कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने ये बता दिया कि भाई ये नहीं करना चाहिए। हालाँकि मैं आप लोगों को बताऊँ, हम सबकी ये फ़िक्र होनी चाहिए, दीन की मेहनत के साथ में ये फ़िक्र होनी चाहिए कि अपने आप को फ़ाइनेंशियली एतबार से हम कैसे मज़बूत बना रहे हैं। अल्लाह, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया, जिसका खुलासा है कि ऊपर वाला हाथ बेहतर है नीचे वाले हाथ से। तो इसके लिए हमको भी ग़वाह ये ज़रूरी है कि हम कभी कोई ज़रूरत पड़े, तो लोगों के सामने हाथ नहीं फैला रहे, लोगों के सामने हम हाथ नहीं फैला रहे। आज ज्यादातर लोग आप देखोगे तो सबसे लोअर क्लास के लोग और भीख माँगने वाले लोग कौन दिखेंगे? मुसलमान। तो इस्लाम जो है, भीख माँगने का मज़हब नहीं है। और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ऐसे तरीके बताए कि उस तरीके को देखकर सहाबा जो कहाँ से कहाँ पहुँच गए कि ऐसा चंद साल की मेहनत के अंदर में, वो तरीके देखने के बाद में ऐसा वक्त आ गया, ज़कात के देने वाले लोग थे, ज़कात का लेने वाला कोई नहीं था। अशरा मुबशरा, जो टॉप 10 सहाबा कहे जाते हैं, जिनको दुनिया में जन्नत की बशारत थी, वो 10 में से छह सहाबा जो हैं, लखपति, करोड़पति नहीं थे, बल्कि अरबपति थे। अशरा मुबशरा के, जिनको दुनिया में जन्नत की बशारत थी कि ये जन्नती हैं, उसमें से 10 में से छह सहाबा अरबपति थे और हज़रत अब्दुल रहमान बिन औफ़ रज़िअल्लाहु ताला ये जब दुनिया से गए, तो 320, 3 करोड़ 20 लाख दीनार जो है छोड़कर गए थे। कितने? 3 करोड़ 20 लाख दीनार। आज एक जो है दीनार कहते हैं सोने के सिक्के को। एक सोने का सिक्का जो है 10 ग्राम का, ₹1 लाख का है। सोचो कितना हिसाब हो जाएगा। मैं आज सुबह से उसका हिसाब लगा रहा था। इसके अंदर में कैलकुलेटर में लगाया, फेल हो गया। ये लैपटॉप में लगाया, फेल हो गया। मेरा एक दोस्त है जो इसमें एक्सपर्ट है, पुणे। उसको मैं फोन किया। मैं बोला, भाई ये हिसाब लगाओ, कितने पैसे होते हैं, 3 करोड़ 20 लाख। वो बोले, भाई ये कैलकुलेटर काम नहीं कर रहा है। फिर दो-तीन घंटे उसने मेहनत किया और बाद में बोला, आज की अगर उसकी कीमत लगाई जाए, 3 करोड़ 20 लाख सोने की, तो तीन ट्रिलियन, तीन ट्रिलियन होता है। आज दुनिया तरक्की के अंदर में कहाँ से कहाँ पहुँच गई? लेकिन दुनिया के, देखो मैं अभी उसके लिए पूरा बाकायदा रिसर्च करके आया हूँ। इस दुनिया के जो टॉप 10 बोले जाते हैं, आज पूरी दुनिया के अंदर में, जिसमें एलन मस्क का नाम और जेफ़ बेजोस का नाम और वो सबका आता है, उसमें दुनिया के अंदर में सबसे पहला जो नाम आ रहा है, जेफ़ बेजोस का है। तो इसके पास में कितनी दौलत है? 237 बिलियन। अब 1000 बिलियन होता है ना तब एक ट्रिलियन पे इकॉनमी जाती है, एक ट्रिलियन जाता है। और अभी हमारे हिंदुस्तान की इकॉनमी आज से एक साल पहले तीन ट्रिलियन की थी। यानी पूरे हिंदुस्तान की जितनी इकॉनमी है, उतना माल सिर्फ़ हज़रत अब्दुल रहमान बिन औफ़ रज़िअल्लाहु अन्हु छोड़कर गए थे। और ये जेफ़ बेजोस जो दुनिया आज तरक्की के कहाँ तक पहुँच गई? तो ये तरक्की करके आज यहाँ तक पहुँचे, लेकिन फिर भी इनके पास में आज इतनी दौलत नहीं, जितनी हज़रत अब्दुल रहमान बिन औफ़ के पास थी, ना उसका 100वाँ हिस्सा भी नहीं है ये और दुनिया के टॉप 10 को भी गिन लेंगे ना, टॉप 10, तो उनकी मिला के भी इतनी, इतनी प्रॉपर्टी नहीं होगी, इतनी माल, दौलत नहीं होगी, जितनी हज़रत अब्दुल रहमान बिन औफ़ के पास थी। तो इस्लाम में कमाना कोई मना नहीं है। आप लोग कमाओ और माशाअल्लाह ये उलमा इकरम हैं, आप लोग कमाएँगे, तो आप लोगों के ज़रिए से दुनिया के अंदर में दीन का काम होगा। मुफ्ती तारिक मसूद साहब का मैंने आज से तीन-चार साल पहले बयान सुना था, तो मुफ्ती तारिक मसूद साहब ने बयान में बोले कि जिस मुल्क के अंदर में मुसलमान...
पैसे वाले होंगे, मुसलमान मालदार मालदार होंगे, मुसलमान मजबूत होंगे, उस मुल्क के अंदर में इस्लाम मजबूत होगा। तो मैं सुना, लेकिन वो बात मुझे समझ में नहीं आई। बोले, यार ये मौलाना पैसे से इस्लाम का क्या ताल्लुक है? तो मैं कुछ बोला नहीं, लेकिन समझ में नहीं आया।
लेकिन अभी पिछले साल मैं साउथ अफ्रीका गया, तो माशाअल्लाह साउथ अफ्रीका के अंदर की मस्जिद, साउथ अफ्रीका के मदरसे और साउथ अफ्रीका के लोग, वहां का सब कुछ देखा और वहां पे जो मुसलमान पैसे वाले और वहां का जो दीनदारी वाला माहौल मैंने देखा, तो वाकई में मेरा दिमाग हिल गया और मुझे वो बात याद आ गई मुफ्ती तारिक मसूद साहब की कि यार उन्होंने तीन चार साल पहले बोले थे कि जिस मुल्क के अंदर में मुसलमान मजबूत होंगे, वहां का इस्लाम भी मजबूत होगा। तो इसलिए कमाना यह कोई जो है मना नहीं है। हम जो है हलाल तरीके से कमाएँ और अगर आप लोगों के पास में पैसा होगा, तो कहां पर खर्च होगा? और देखो, माशाअल्लाह इकराम बैठे हैं। आप लोग अगर अपने आपको माशियार से अगर मजबूत नहीं करोगे, तो मैं नाम तो नहीं लेता यहां पर, लेकिन आप लोग खुद देख लो कि कितने सारे उलमा इकराम जो मेरी नजर के अंदर में जो माशाअल्लाह कई सालों से मदरसे के अंदर में, मस्जिद में खिदमत अंजाम दे रहे हैं।
लेकिन उनके बच्चों को वो उलमा नहीं बना रहे। उनके बच्चों को माशाअल्लाह यह सारी बात सही है कि इनको मरने के बाद में आखिरत के अंदर में इनका जो मकाम होगा, वो सब देखकर हैरान हो जाएंगे, लेकिन बहुत सारे उलमा देखो कि उनके बच्चे जो है वो वापस आलिम नहीं बन रहे। क्यों? इन्होंने देखा कि भाई वो जो है हमारे अब्बा ₹000 ₹100, हालांकि ये पगार के लिए काम नहीं कर रहे। ये तो सिर्फ अल्लाह ही के लिए काम कर रहे। इनका इलास है। लेकिन ये लोग देख रहे हैं कि इन्होंने कैसे हालात के अंदर वक्त गुजारा और अब उसके भी मुकाबिल जो दूसरे लोगों को देख रहे हैं, उनका एक-एक लाख पगार, तो वो जो है उधर कन्वर्ट हो रहे हैं। अगर आज के जमाने के अंदर ये उलमा इकराम ने अगर अपने फाइनेंसली हालात को मजबूत नहीं किया, तो हमारी जो पीछे वाली जो नस्ल है, वह जो ये दीन की मेहनत के ऊपर रहेंगे और जिस ऐतबार से माशाअल्लाह आप लोग खिदमत अंजाम दे रहे हैं, उसमें धीरे-धीरे लोग जो है कम होते जा रहे हैं। तो इसलिए अपने आप को जो है फाइनेंसियली मजबूत बनाना ये भी बहुत जरूरी है।
और इसके अंदर में सबसे आसान, क्योंकि कारोबार के अंदर में, तिजारत में हम लोग अगर जाएंगे, 8 घंटे, 12 घंटे, 14 घंटे करने वाले वो भी कर रहे हैं, लेकिन उसके अंदर में हमारी जो खिदमत जो हम अंजाम दे रहे हैं, उसके अंदर में कुछ ना कुछ तरीके से जो है खलल होगा, तो इसके लिए जो स्टॉक मार्केट का, शेयर मार्केट का जो कांसेप्ट है, वो बहुत अच्छा और बहुत आसान कांसेप्ट है और इसके जरिए से माशाअल्लाह आप लोग कर सकते हो और कमा सकते हो। देखो, जिन लोगों ने माशाअल्लाह बहुत सारे इकराम बैठे, तो जिन लोगों ने मेरी बात सुनी होगी, उनको पता है मैंने इससे पहले वाले मेरे वीडियो के अंदर भी बताया था, अरब के एक मौलाना है, वो मौलाना का नाम है शेख आसिम इब्ने लुकमान, तो वो ज्यादातर उनके बयानात सारे इंग्लिश के अंदर में होते हैं और बहुत सारे फतवे वगैरह के काम भी वो करते हैं और बहुत सारे लोग माशाअल्लाह जानते भी होंगे। तो उनसे एक इंटरव्यू के अंदर में पूछा गया कि आपके कितने घर हैं? तो बोले, मेरे कई घर हैं। अच्छा, तो फिर कई घर है, तो सब घर के लिए कुछ दो चार पांच गाड़ियां भी होंगी। तो बोले, मेरी पार्किंग के अंदर में 35 गाड़ियां हैं। 35 कार हैं। और दुनिया की जो अच्छी से अच्छी कार है ना, वो सारी मेरे पास में मौजूद है। वो भी उलमा इकराम है। वो भी कर रहे हैं। अब ये तो बाहर मुल्क की बात हो गई। वहां को छोड़ो और हिंदुस्तान के अंदर में आओ। मैं वो बयान के अंदर भी बोला था कि मौलाना अजमल ये आसाम के और हिंदुस्तान के अंदर में आसाम इलाका ये गरीब लोगों का इलाका समझा जाता है। लेकिन वो वहां के उन्होंने मेहनत की, उन्होंने फिक्र की, उन्होंने सोचा, तो हिंदुस्तान के हर इलाके के अंदर आपको बताऊंगा अजमल का अत्तर मिलता होगा। देखे होंगे बहुत सारे लोगों ने। बल्कि हिंदुस्तान क्या, हिंदुस्तान के बाहर आप दुबई चले जाओ, सऊदी अरब चले जाओ, कुवैत चले जाओ, मलेशिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, दुनिया के 45 मुल्कों के अंदर में उनका अत्तर आज दिख रहा है। तो वो भी कर रहे हैं माशाअल्लाह। तो हम लोगों के लिए कोई मुश्किल नहीं है।
इसके बिल मुकाबिल अगर हमने ये चीजों के ऊपर में ध्यान नहीं दिया, तो आज दुनिया के हालात ऐसे होते जा रहे हैं कि अभी बहुत सारे लोगों को पता होगा कि एक मौलाना ने जो है खुदकुशी कर ली। बल्कि मदरसे के अंदर और ये इसके अंदर में पढ़ाया जाता था और के साथ में बताया जाता था कि सुसाइड करने वाले, खुदकुशी करने वाले आप लोग देख लो पढ़े-लिखे लोग मिलेंगे। कभी कोई दीनदार नहीं मिलेगा। लेकिन अभी ये हालत आ गई। तो वो पुलिस वालों को बुलाए और वो सारी चीजें हुई, तो उनके पास से एक लेटर निकला। तो पुलिस वालों ने जब लेटर पढ़ा, मीडिया के सामने, तो उसमें उन्होंने बताया कि मौलाना ने यूं लिखा है कि मेरे हालात बहुत खराब थे और मेरे ऊपर कुछ कर्जा हो गया था। इसके लिए जो है मैंने खुदकुशी कर दी। तो इसलिए अच्छा इसके अंदर बहुत सारे लोग जो है नेगेटिविटी भी बोलेंगे। भाई तुम दुनिया के पीछे लग गए। ये लग गए। इन लोगों की बिल्कुल कोई बातों के अंदर में नहीं आओ। हमारे हालात हम सुधारेंगे, तो हमको जो है फायदा होगा। और ये जितने बोलने वाले हैं ना, जब अगर कभी कोई तकलीफ आ गई और आप फोन करके बोलेंगे ना कि भाई 5000 की जरूरत है। अरे यार तुम मौलाना लोग इसके अलावा कुछ काम तो इसलिए ये किसी के बोलने के अंदर, नेगेटिविटी फैलाने के अंदर, किसी की बातों के अंदर में हम ना आएँ और हम फिक्र ये करें और इस नियत से कमाएँ कि हमारा हाथ हमेशा जो है ऊपर हो और हमारा ऊपर वाला हाथ हो, नीचे वाला हाथ ना हो। तो इसके अंदर में ये स्टॉक मार्केट के अंदर में बहुत आसान तरीका है और बहुत आसान तरीके से हम लोग कमा सकते हैं।
तो इसके अंदर में कुछ चीजें जो है हलाल है और कुछ चीजें जो है इसके अंदर में जो हलाल नहीं है। इसको हमें जो है समझना, माशाअल्लाह बहुत सारे उलमा इकराम हैं, सबको सारी चीजें पता हैं। लेकिन फिर भी जो कुछ चीजें मुझे पता है, जिसके अंदर में बोलता हूं कि स्टॉक मार्केट के अंदर में फ्यूचर ऑप्शन ये हमारे लिए बिल्कुल हराम है। और ये जो मंथली एक्सपायरी, वीकली एक्सपायरी ये सारी चीजें हमारे लिए क्या है? हराम है। इसमें काम नहीं कर सकते। अब शेयर मार्केट के अंदर में तो बहुत सारी कंपनियां हैं। तो क्या सबके अंदर में हम काम कर सकते हैं? तो इसके अंदर मुफ्ती खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने अपनी किताब के अंदर में बहुत आसान सी बात लिखी है कि जो बिज़नेस इस्लाम के अंदर हम कर सकते हैं। भाई मैंने कारोबार खोला तो ये बिज़नेस हम कर सकते हैं। उस कंपनी के, उस कंपनी के अंदर में हम जो है शेयर खरीद सकते हैं। कंपनी के अंदर में शेयर खरीदना है, तो सबसे पहले चेक करोगे इसका बिज़नेस क्या है? अगर वो बिज़नेस इस्लाम में हलाल है, तो उस कंपनी के शेयर हम खरीद सकते। जैसे बैंकिंग के शेयर हो गए, HDFC Bank, SBI बैंक, ICICI बैंक, तो इसके शेयर हम लोग नहीं खरीद सकते। है ना? अभी कुछ दिन पहले वो मैं अभी कुछ ग्रुप के अंदर में मैसेज डालता हूं। तो एक का मुझे मैसेज आया। बोले, सलमान भाई वो SBI का शेयर अभी बढ़ने वाला है। उसकी न्यूज़ अच्छी है। तो क्या करें? ले ले, 10-20% प्रॉफिट मिलेगा। तो भाई बैंकिंग शेयर है, अपने लिए हलाल नहीं है। अब ये हो गया बैंकिंग शेयर। Finance कंपनी के जो शेयर हैं, जैसे Bajaj Finance है और जितनी Finance कंपनी के शेयर हैं। अब इनका प्रॉफिट कहां से आता है? सूद के ऊपर से। तो ये कंपनी के शेयर हमारे लिए बिल्कुल हलाल नहीं है। इसके अलावा कुछ शुगर कंपनी है। कुछ कंपनी शुगर कंपनी है। उसके शेयर हमारे लिए हलाल नहीं है। कोई बताएगा शुगर कंपनी के शेयर हम क्यों नहीं ले सकते? मौलाना माशाअल्लाह जी, मौलाना उसके अंदर में से बहुत सारी शुगर कंपनी के अंदर में अल्कोहल, जो शराब की जो कंपनियां होती हैं, उनको वो लोग अल्कोहल बनाकर देते हैं, तो ज्यादातर उनका प्रॉफिट जो है उससे आता है, तो इसके लिए वो कंपनी के शेयर भी हम जो है नहीं खरीदेंगे।
इन सबके अलावा जिसके अंदर में जो कंपनियां ऐसी हैं, जिसके अंदर जिसका कारोबार जो इस्लाम में जायज है, उन कंपनियों के अंदर में हम कर सकते हैं। 1800 कंपनियां ऐसी हैं स्टॉक मार्केट के अंदर में जो हमारे लिए हलाल है, जायज है, जिसके अंदर में हम काम कर सकते हैं। तो वो 1800 को छोड़कर बाकी सबके ऊपर निगाह डालने की क्या जरूरत है? बताओ, 1800 कंपनियां ऐसी हैं। अब इसके अंदर भी कुछ क्राइटेरिया है कि भाई कंपनी तो हलाल है। उसका कारोबार तो हलाल है। लेकिन अगर उस कंपनी के अंदर में 33% से ज्यादा डेप्ट होगा, लोन होगा, तो वो कंपनी के शेयर भी हम लोग नहीं खरीद सकते। इसलिए कोई भी कंपनी अगर हम परचेस कर रहे हैं, तो सबसे पहले क्या देखेंगे? उसका बिज़नेस क्या है? अभी बहुत सारे लोग, मैं नाम नहीं लूंगा, लेकिन बहुत सारे लोग जो अच्छे खासे लोग हैं। एक मौलाना जो माशाअल्लाह उनके अब्बा और उनके अब्बा उनके दादा के जमाने से वो लोग ये शेयर मार्केट का काम कर रहे हैं। तो उन्होंने उस दिन पोर्टफोलियो दिखाया, तो बोला, मौलाना ये तो शुगर कंपनी है और इसका तो शेयर नहीं ले सकते। नहीं-नहीं, शक्कर तो हमारे लिए जायज है। अपुन काम कर सकते हैं। अच्छा, इसका क्या बिज़नेस है, वो कुछ नहीं मालूम। ये शुगर कंपनी है ना, तो अपने लिए अला तो ये शेयर मार्केट के अंदर में जो शेयर मार्केट के जो बाप, दादा, गॉड फादर कहे जाते हैं, वारेन बफे, उनका एक कॉल है कि अगर स्टॉक मार्केट के अंदर में आप बगैर तहकीक के कि भाई इसका बिज़नेस क्या है? इसका फंडामेंटल क्या है? प्रमोटर की होल्डिंग क्या है? इसके ऊपर डेप्थ क्या है? कंपनी का ये क्वार्टर का रिजल्ट क्या है? पिछले महीने का रिजल्ट, पिछले तीन महीने का रिजल्ट क्या है? ये देखे बगैर अगर आप इसके अंदर में काम कर रहे हो, तो ये आप ट्रेडिंग नहीं कर रहे हो, बल्कि ये सट्टा, सट्टा खेल रहे हो और जुआ खेल रहे हो आप। कुछ मालूम ही नहीं आपको। कुछ मालूम ही नहीं कि कंपनी का क्या काम है, क्या कारोबार है। अब ये चीज हो गई। अब इसके बाद में एक कंपनी के अंदर में प्रॉफिट कैसे होता है। देखो, स्टॉक मार्केट जो है ना, पूरा का पूरा जो है न्यूज़ के ऊपर में चलता है। है ना? अब हम देखेंगे कि कंपनी का रिजल्ट तो तीन महीने में एक मर्तबा आता है और उसको जितना प्रॉफिट नहीं हो रहा है, उससे ज्यादा जो है शेयर की कीमत बढ़ जा रही है और कभी उसको नुकसान नहीं हुआ, फिर भी शेयर की कीमत नीचे आ गई, तो ये कैसे वर्क कर रहा है? क्या फिर ये हमारे लिए हलाल होगा? भाई कंपनी ने कमाए इस तीन महीने के अंदर में ₹100 करोड़, लेकिन कंपनी का मार्केट कैप ₹1000 करोड़ बन गया, तो फिर बोलो क्या करेंगे? इसमें हम काम कर सकते हैं। इस, ये कंपनी जो है, इसकी मिसाल, एग्जांपल मैं देता हूं कि कम इसके लिए स्टॉक मार्केट पूरा का पूरा जो है न्यूज़ के ऊपर चलता है। इसलिए जो भी शेयर हम खरीदेंगे, वो न्यूज़ पहले उसकी चेक करेंगे।
जैसे मैं आपको मिसाल, मिसाल और एग्जांपल दे दूं कि भाई यहां पर एक होटल किसी ने चाय की चालू की और उसमें 10 लोगों को पार्टनरशिप में रखा कि भाई ये 10 लोग पार्टनरशिप में रहेंगे और 10-10 लोग एक-एक लाख लगाओ, इन्होंने जो है शुरू कर दी। अब इनका रूल्स ऐसा था कि साल में एक मर्तबा हम हिसाब करेंगे और हिसाब करके फिर जितना-जितना जिनको नफा होगा देंगे। अब एक साल जो है ये चाय की होटल चली और इसका नफा हुआ ₹1 लाख, तो सबको एक-एक लाख मिल गए। अब पहले से लगे हुए कितने हैं? एक-एक लाख तो लगे हुए हैं। इन्होंने हिस्सा कितना लगाया? ₹1 लाख का। अब बहुत सारे लोगों को पता चला है, यार ये ₹1 लाख लगाए थे। ₹1 लाख एक साल का प्रॉफिट हुआ। तो अब मैं गया उनके पास में। अरे यार ये जो तुम्हारी एक पार्टनरशिप है, ये तुम छोड़ दो और मुझे दे दो। तो उसमें इन्होंने ये कहा, हाकि वैल्यू तो इसकी कितनी है? ₹1 लाख एक आदमी की, ₹1 लाख की वैल्यू और एक आदमी की ₹1 लाख। उन्होंने कहा, मैं छोड़ने के लिए तो तैयार हूं, लेकिन मुझे ₹10 लाख चाहिए। कितना चाहिए? ₹10 लाख चाहिए। तो अब ये बेचने के लिए रेडी हो गए। वो लेने के लिए रेडी हो गए। तो हालांकि प्रॉफिट जो था वो तो साल में एक बार तक हो गया। ऐसे बहुत सारी ऐसी कंपनी है जो जिनका प्रॉफिट होता है वो डिविडेंड के जरिए दे देती है, लेकिन फिर भी उसकी शेयर की प्राइस ऊपर जा रही है और कभी-कभी कंपनी को नुकसान नहीं हो रहा, फिर भी शेयर की प्राइस नीचे आ रही है, तो ये वर्क कर रहा है किसके ऊपर? न्यूज़ के ऊपर, जैसे ये चाय की होटल की न्यूज़ आ गई, क्या ये ₹1 लाख कमाए, अभी इसकी न्यूज़ अच्छी है, तो इसके भाव क्या हो गए? ऊपर हो गए। अब वही ₹10 लाख की वो भाई ने पार्टनरशिप खरीदी और पता चला कि इसका धंधा और चल रहा है, तो दूसरा बैक आया, भाई मैंने लिया था, अभी तो उससे ज्यादा और बिज़नेस बढ़ गया। मुझे 4 लाख में बेचना है। हालांकि अभी साल खत्म नहीं हुआ और प्रॉफिट नहीं आया। लेकिन फिर भी एक महीने बाद इन्होंने बेची या दूसरे ही दिन बेच दी ₹4 लाख में। तो इनके लिए क्या है? कोई मसला नहीं है। बराबर है। उलमा इकराम माशाअल्लाह बैठे, कुछ अगर गलती हो तो लुकमा दे सकते हैं। तो इन्होंने 4 लाख में बेची। अब उन्होंने 4 लाख में बेची। ये भाई ने खरीदी और दूसरे दिन वहां पर ऐसी न्यूज़ आ गई कि भाई ये जो-जो रोड के ऊपर में चाय की होटल है, वहां पर जो है एसएमसी वाले कटिंग में, एसएमसी वाले कटिंग में है, तो शायद ये रोड का आधा पट्टा कट जाएगा या ऐसा कुछ भी होगा, ऐसी गलत न्यूज़ आ गया, हालांकि हुआ भी कुछ भी नहीं होने वाला, छह महीने के बाद है और इन्होंने जो 10 लाख लगाए, उनके 10 लाख में कोई नुकसान नहीं है, इनका 10 लाख पूरा वापस मिल जाएगा, लेकिन इन्होंने पार्टनरशिप कितने में खरीदी थी? 4 लाख में, तो अब इसकी न्यूज़ क्या हो गई? थोड़ी, हालांकि अभी धंधा पूरा जैसा चल रहा था वैसा ही चल रहा है, कोई फर्क नहीं। तो अब ये टेंशन में आ गया, मुझे बेचना है। अब दूसरे किसी को पकड़े, भाई बेचना है, बोले ₹2 लाख में लूंगा, देना हो तो दे दो, बिज़नेस अपना ही चल रहा है, हालांकि पहले से ज्यादा चल रहा है, फिर इन्होंने ₹2 लाख में बेच दिया और फिर वो चार-पांच महीने बाद ऐसा हुआ कि यार वो जो न्यूज़ थी वो सारी खत्म हो गई और वो जो डिमोलिशन आने वाला था या कटिंग में आने वाला था वो सारी चीजें खत्म हो गई और पहले धंधा था, उससे अच्छा चल रहा है, तो अभी वो ₹2 लाख वाला के पास में कोई लेने के लिए अगर भाई मैं 5 लाख में बेचूंगा। पहले से अच्छा बिज़नेस चल रहा है। तो बताओ इसमें कोई मसला है? कोई भी मसला नहीं। इसी तरीके से ये स्टॉक मार्केट वर्क करता है। इसलिए इसको सबसे पहले आप समझो कि आप देखेंगे यार आज शेयर खरीदा सुबह में और वो तो कल ही बढ़ गया। तो बढ़ा कैसे? कंपनी का प्रॉफिट तो तीन महीने के बाद आता है। तो ये एक ही दिन के अंदर में बढ़ गया। अब क्या हम इसके अंदर में काम कर सकते हैं? क्या ये हमारे लिए जायज है? तो ये सारी इसके अंदर में हम लोग बिल्कुल काम कर सकते हैं। ये बिल्कुल एक तिजारत है और बिज़नेस के अंदर में अल्लाह रब्बुल इज्जत ने 10 में से नौ हिस्से अल्लाह पाक ने बरकत जो है ये बिज़नेस के अंदर में रखी। तिजारत के अंदर में रखी। तो ये बिल्कुल हम कर सकते हैं। हज़रत अब्दुल रहमान बिन औफ़ रदी अल्लाह ताला की जो तिजारत होती थी, तो एक ऊंट तिजारत का मदीना में रहता था। और एक ऊंट मुल्क शाम के अंदर में, आखिरी ऊंट मुल्क शाम के अंदर में रहता था। ऐसी तिजारत होती थी। तिजारत के लिए कोई मसला नहीं है। तो इसके अंदर में ऐसे कंपनी वर्क करती है और ऐसे काम करती है।
अभी मैं जो है रोज़ाना रात में 10:30 बजे जो है ये स्टॉक मार्केट का सिखाने की क्लास लेता हूं, 10:30 बजे से 11 बजे तक, जिसमें तकरीबन मेरे पास में अभी 70-80 स्टूडेंट हैं। स्टूडेंट को क्या बोलें कि हमारे साथी हैं, क्योंकि बेचारे बहुत सारे उलमा भी हैं इसके अंदर। जिसके अंदर में हिंदुस्तान से भी बहुत सारे जुड़े। कुछ साउथ अफ्रीका से, कुछ यूएसए से, कुछ यूके से और कुछ कुवैत से, दुबई से, तो ये लोग सब जुड़े हुए हैं। तो उन लोगों को मैं रात में बता रहा था, तो मैंने बताया, ठीक है, स्टॉक मार्केट न्यूज़ से चलता है। अब पांच कंपनी है और पांचों-पांच ऑयल की कंपनी है। एक HPCL, HPCL का फुल फॉर्म क्या है? हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड। एक BPCL, एक IOC, ये तीन कंपनी हो गई। एक ONGC और एक ऑयल इंडिया, ये पांच कंपनी हैं। अब ये जो वॉर हुई, ईरान, इजराइल की, तो HPCL, BPCL और IOC ये तीन कंपनी के शेयर नीचे आ गए और ONGC और ऑयल इंडिया के शेयर ऊपर आ गए। फिर जैसे ऐलान हुआ कि ये वॉर खत्म, तो ONGC के और ऑयल इंडिया के शेयर नीचे आ गए और HPCL, BPCL, IOC ऊपर आ गए। तो पांचों ऑयल की कंपनी है, लेकिन दो के शेयर नीचे जा रहे हैं, तीन के ऊपर, तीन के नीचे जा रहे हैं, तो दो के ऊपर क्यों? ऐसा कोई बताएगा इसके अंदर से? वो कंपनियां बाहर से मंगाती है माल, ने बेचती है। BPCL, वो ONGC ने, वो ONGC ने, वो यहां प्रोड्यूसर करती है, वो अच्छा। और कोई बताएगा? माशाअल्लाह मौलाना तो जानकार हैं। और कोई बताएगा कि क्यों ऐसा है? एकदम देखो, स्टॉक मार्केट आदमी यूं समझता है कि बहुत मुश्किल है, बहुत मुश्किल नहीं, बहुत आसान है। थोड़ा सा आदमी इसको समझ ले ना, तो बहुत आसान है और एकदम मैं तो कहता हूं दुनिया के अंदर में ना स्टॉक मार्केट से आसान पैसा कमाना कहीं है ही नहीं। अगर आदमी थोड़ा सा इसको समझ ले, तो बस थोड़ा सा समझना है। अब लोग क्या करते हैं? स्टॉक मार्केट में बहुत पैसा, बहुत पैसा आए, कोई भी कंपनी उठाए और फिर देखे क्या न्यूज़ है, कुछ नहीं पता, क्या वर्क कर रहा है, कुछ नहीं पता। बोले, हमको नुकसान हो रहा है। अगर आप इसको समझकर सिंक नहीं करोगे, तो इसमें नुकसान होगा। और कोई बताएगा? इन्होंने माशाअल्लाह सही जवाब दिया और हमारे रफीक भाई तो माशाअल्लाह पुराने हैं। सारी चीजें बताएँ। जी, रफीक भाई रिफाइन कर दी। हां, अभी देखो ONGC और ऑयल इंडिया, इन दोनों का जो काम है, ये भी ऑयल की कंपनी, HPCL, BPCL, IOC ये भी ऑयल की कंपनी है, लेकिन ONGC और ऑयल इंडिया का काम ये है कि ये हिंदुस्तान के अंदर में जो तेल के कुएं निकलते हैं, उसको ड्रिलिंग करते हैं और ड्रिलिंग करके इसके अंदर में से ऑयल निकालते हैं। अभी आप लोगों ने न्यूज़ के अंदर में भी पढ़ा होगा कि ये यहां पर मुंबई के अंदर में एक समंदर के अंदर से ONGC ने जो है ड्रिलिंग की और वहां से ऑयल निकला। तो अब ये लोग जो है अपने-अपने हिंदुस्तान की जमीनों से ऑयल निकालते हैं। अब उस वक्त में ईरान, इजराइल की वॉर शुरू हो रही थी। उस वक्त में $65 बैरल का रेट था। $65 का बैरल का रेट था। अब जैसे वॉर शुरू हुई, तो ईरान की तरफ से तो पूरी दुनिया के अंदर में से 20% क्रूड ऑयल जो है ये ईरान की तरफ से आता है। अब हुआ क्या? वॉर शुरू हुई, तो भाई वहां से जो है ऑयल जाना जो है बंद हो जाएगा। तो अब अगर माल कम आएगा, तो भाव क्या होंगे? खुद ब खुद बढ़ेंगे। इसकी आसान मिसाल दे दूं। आप लोगों ने सबने माशाअल्लाह उलमा इकराम में बहुत सारे लोग पान, मावा, गुटखा खाते हैं। तो लॉकडाउन के अंदर में देखे होंगे कि कंपनियों में माल नहीं बन रहा था। तो जो ₹5 की बीड़ी थी, वो कितने की हो गई? हां। उसके भाव बढ़ गए। और जैसे वही कंपनियां शुरू हुई, तो उसके भाव धड़ाधड़-धड़ाधड़ नीचे आ गए। माल नहीं मिल रहा है, तो भाव ऑटोमेटिक क्या होगा? बढ़ जाएगा। तो अब ये न्यूज़ आ गई कि वो 20% जहां से ऑयल आता है, वहां पर जो है वॉर शुरू हुई, तो क्रूड ऑयल के भाव बढ़ गए। $80 पहुंच गए। इसके भाव क्या हो गए? $80 पहुंच गए। अब ये जो दो कंपनी थी, ONGC और ऑयल इंडिया, ये तो इंडिया के अंदर में से ही ऑयल निकाल रही थी। तो इनका तो खर्चा भी कोई नहीं बढ़ा। 50 कारीगर काम कर रहे हैं, एग्जांपल, और उनको जो है ₹1000 के हिसाब से ₹50000 पार देना है, तो सैलरी उनकी उतनी ही जा रही है। खर्चा उतना ही हो रहा है। लेकिन जहां पर एक बैरल के $65 मिल रहे थे, वहां पर कितने मिल रहे हैं उनको? $80, $80, तो प्रॉफिट इनका बढ़ गया। तो स्टॉक के भाव क्या हुए? ऊपर हुए। इसलिए जो जितने लोग मेरे साथ में जुड़े होंगे, वो बहुत सारे लोगों के सवाल आए। सलमान भाई, पूरा मार्केट डाउन है, लेकिन आप शेयर दे रहे हो, वो ऊपर जा रहे हैं। हम ONGC का शेयर दे रहे थे। वो हमारे शाहिद भाई खड़े हैं। उन्होंने ऑयल इंडिया के शेयर लिए थे। तो ONGC के शेयर जब पूरा मार्केट डाउन है और तुम बोल रहे हो 4-5%, 4-5% शेयर नीचे, तो हमने ONGC बोला, भाई ONGC खरीदो। तो ONGC के ऊपर
गए तो सब हैरान, कि भाई क्यों? तो ये शेयर मार्केट को, न्यूज़ को और इसको देखना पड़ेगा। बिज़नेस क्या है? कंपनी कहाँ वर्क कर रही है? फिर जैसे वॉर खत्म का ऐलान हुआ। अब बहुत सारे लोगों ने तीन दिन, चार दिन, अब उन्होंने तो कुछ न्यूज़ वगैरह या कंपनी क्या वर्क है कुछ देखा ही नहीं। तो देखिए आज भी ओएनजीसी में मिला, कल भी मिला, परसों भी मिला। तो वो लोग डेली ओएनजीसी में काम करने लग गए, ऑल इंडिया में काम करने लग गए और बाद में जो है इसके अंदर में लॉस आने लग गया। क्यों लॉस जा रहा है, कुछ पता ही नहीं उनको।
जैसे ईरान-इज़राइल की वॉर बुधवार के दिन खत्म हुई और वहाँ से ट्रम्प की तरफ से ऐलान हुआ कि हमने सीज़ फायर कर दिया और इधर इज़राइल की तरफ से ऐलान हो गया। क्योंकि ईरान ने इतना बड़ा हमला जो है इज़राइल के ऊपर किया था कि जब से इज़राइल पैदा हुआ, जब से इज़राइल बना है, इतना बड़ा हमला नहीं हुआ था, जितना बड़ा हमला ईरान ने किया। तो वो भी गुड ने टेक दिए कि भाई ठीक है, हम सीज़ फायर करने के लिए तैयार हैं। तो जैसे ये खबर मार्केट के अंदर में सुबह में फैली, जो $80 भाव था वो सीधा $66 का रेट हो गया। अब एचपीसीएल, बीपीसीएल, आईओसी ये क्या करती है? यहां पर नहीं बना दी। इन लोगों का काम है डायरेक्ट वहाँ से ऑइल खरीद कर लाना और रिफाइन करके बेचना। अब ये लोग $80 में खरीद के लाए तो भी इनको पेट्रोल पंप पे कितने रुपए बेचना है? ₹100। अगर 65 लाए तो भी 100 बेचना है। तो अब जैसे 65 हुआ तो इनका प्रॉफिट क्या हो गया? बढ़ने लग गया। तो हमने उसके बाद में बोला, भाई ये बीपीसीएल है, एचपीसीएल है, इसके अंदर खरीदो, भाव बढ़ेंगे। और अभी जुमा के दिन एचपीसीएल के अंदर में ₹17 बढ़े, जुमा के दिन और बीपीसीएल हमने जिस दिन बुल के दिन दिया, अच्छा कभी-कभी देखो ये, ये तो मैं बता दिया कि भाई ये पूरा मार्केट न्यूज़ के ऊपर में वर्क कर रहा है। लेकिन हम स्टॉक मार्केट के अंदर में कितना पैसा लेकर आ रहे हैं? ₹1 लाख, ₹1 लाख, ₹1 करोड़, ₹1 करोड़, इतने में हम ट्रेडिंग करते हैं। ठीक है? अब इसके अंदर में कुछ बड़े-बड़े लोग हैं जो 500 करोड़, 1000 करोड़, 2000 करोड़ लेकर आ रहे हैं। और अब ये देखते हैं कि भाई इसकी न्यूज़ है तो एक काम करो, इसका माल बेचना शुरू करो और इसको नीचे लेकर आओ ताकि कुछ लोगों ने माल खरीदा है तो वो डर जावे, घबरा जावे और लॉस में अपना माल बेचकर क्या हो जाए? गायब हो जाए और फिर बाद में दो-तीन दिन बाद ये लोग इसको, तो हमने ये बुधवार के दिन में बीपीसीएल दिया था। जो लोग होंगे बहुत सारे लोग, माशाअल्लाह मेरे ग्रुप में जुड़े हुए हैं कि भाई बीपीसीएल अभी ₹320 चल रहा है, ₹325 के टारगेट से आप लोग खरीद लो। उस दिन ₹318 में वो बंद हुआ। बहुत सारे के मैसेज आए, ऊपर, 322 तक गया, 318 में आकर बंद हुआ। बहुत सारे के मैसेज आए, क्या करें? बेच दें। इसकी न्यूज़ अच्छी है, क्रूड ऑयल का भाव कम हुआ है, इसका भाव बढ़ेगा। जुमेरात के दिन में शुरू हुआ तो वो ₹321 तक गया, वापस 317 में बंद हो गया। तो अब ये जो बड़े-बड़े लोग हैं, हालांकि न्यूज़ अच्छी है, कंपनी में कोई प्रॉब्लम नहीं है और लोग खरीद भी रहे हैं। लेकिन जो बड़े लोग हैं, अब वो सोच रहे हैं कि भाई इसको गिराओ ताकि ये जो जितने रिटेल लोग हैं नुकसान में माल बेचो और प्रॉफिट किसको हो? जिसने 1000 करोड़, 2000 करोड़ लगाया, उनको। तो जितने लोग हमारे साथ जुड़े थे, बोला नहीं अभी बीपीसीएल को अपने को बेचना नहीं है, बीपीसीएल प्रॉफिट देकर जाएगा। अब वो जुमेरात के दिन में जो 317 से चलना शुरू हुआ तो ₹329 तक गया। जिनके टारगेट थे, सब प्रॉफिट में आ गए। अब जिसने जुमेरात के दिन में डर कर बेच डाला तो वो तो लॉस में गया। अब दूसरा उसने स्टॉक खरीदा, इसमें से लॉस में निकला, दूसरा स्टॉक खरीद लिया। उस दिन वो नीचे आ गया और देखा कि बीपीसीएल ऊपर चला गया। तो इसके लिए मैं क्या बोला कि थोड़ा सा इसको समझने की जरूरत है कि भाई कंपनी क्या काम कर रही है? कंपनी का बिज़नेस क्या है? और अभी हाल में क्या न्यूज़ है? बस ये थोड़ी बहुत चीजें अगर आप समझ कर काम करेंगे तो स्टॉक मार्केट बहुत आसान है। लेकिन बस इसको समझना पड़ेगा और समझ के करना पड़ेगा। अगर समझ कर नहीं करे तो जैसे वो वॉरेन बफे बोलते हैं के आदमी फिर इसके अंदर में ट्रेडिंग नहीं कर रहा है, जुआ खेल रहा है, सट्टा खेल रहा है। इसलिए इसकी कंपनी चेक करो, इसका फंडामेंटल चेक करो, इसकी सारी चीजें चेक करो और इसके अंदर में काम करो तो बहुत आसान है।
अभी हमने बताया जुमा के दिन में जो है जिंक है, एलुमिनियम है, इन सब चीजों के भाव बढ़ने लगे। चांदी के भाव बढ़ रहे हैं। तो मैं बोला हिंदुस्तान जिंक जो है ये खरीदो। गवर्नमेंट कंपनी है, अच्छी कंपनी है और अभी ये सब चीजों के भाव बढ़ रहे हैं तो इसका प्रॉफिट बढ़ेगा, भाव ऊपर आएगा। तो इसका ₹12 नीचे आया जुम्मा के। कुछ लोगों के फोन आए, मतलब कोई बेचने की जरूरत नहीं, इसका भाव बढ़ रहा है, ये कंपनी ऊपर जाएगी। तो ऐसे स्टॉक मार्केट जो है वर्क करता है, ये न्यूज़ के ऊपर में वर्क करता है। तो बस ये थोड़ी सी चीजें हैं। अब इसके अलावा तो ऐसा है कि हम लोग जैसे-जैसे मार्केट के अंदर में रहेंगे, धीरे-धीरे-धीरे-धीरे हमको उसके अंदर में आईडिया आता जाएगा। लेकिन बस शुरुआत में ये है कि हम शेयर मार्केट के अंदर में आएं और शेयर मार्केट के अंदर में एंट्री करके हम कुछ कंपनी को देखकर उसके अंदर में रिसर्च करके पैसा डालें और इससे पैसा कमाएं और कोई मुश्किल नहीं है। बहुत सारे लोग कमा रहे हैं। देखो अभी वो रफीक भाई को पूछा ना क्या बताएं? ₹4000 कमा रहे हैं। अभी वो बेचारे शाहिद भाई, अल्लाह उनको जज़ा-ए-खैर दे, पूरा ये इंतज़ाम उन्होंने ही किया है यहां पर। वो शाहिद भाई ने मेरा स्टेटस देखा। हालांकि मेरी उनकी मुलाकात 2016 में हुई थी, उसके बाद 2016 के बाद मेरी उनकी मुलाकात शायद तो नहीं हुई, शायद नहीं हुई। एक मर्तबा मेरे अब्बा जो हैं यहां से सफ़र कर रहे थे तो मैंने उनको फ़ोन किया, शाहिद भाई मेरे अब्बा इधर से सफ़र कर रहे हैं अहमदाबाद से तो आप खाना पहुँचा देंगे। तो बोले, हाँ खाना पहुँचा देंगे। तो उस वक़्त में उनसे फ़ोन पर बात हुई। बस खाली कांटेक्ट में थे लेकिन मुलाकात नहीं हुई थी। उन्होंने मेरा स्टेटस देख के बोले, सलमान भाई अपने को शेयर मार्केट करना है, बिस्मिल्लाह शुरू करो। कैसे? बोला ये अकाउंट ओपन करो। तो उन्होंने अकाउंट ओपन करते-करते छह मर्तबा स्क्रीनशॉट भेजे। अभी यहां पर क्या भरना है? यहां पर क्या भरना है? यहां पर क्या भरना है? मैंने बताया, उन्होंने भर दिए। कुछ भी नहीं आता था। ए से जे से वो पैसे डालो मेरे शाहिद भाई और शुरू करो। तो उन्होंने ₹10,000 ऐड किए। बोले ₹10,000 ऐड हो गए, अभी क्या करूँ? मैंने उनको बताया ये कंपनी का नाम, पता है कि इसका शेयर खरीद लो। पहले दिन मैंने उनको एनबीसीसी बताया था। एनबीसीसी के, एनबीसीसी का शेयर खरीदो। तो बोले एनबीसीसी लिखना कहाँ है? मुझे तो ये भी नहीं पता। फिर मैंने उनको, उन्होंने स्क्रीनशॉट भेजा, बोला यहां पर एनबीसीसी लिखो और ये बाय कर दो। फिर उनका वापस दूसरा मैसेज आया कि एनबीसीसी बाय करना है लेकिन कैसे करना? नीचे देखो ग्रीन बटन दिख रहा है। फिर तीसरा स्क्रीनशॉट आया कि कितने रुपए में खरीदना, कैसे खरीदना? फिर मैंने वो तीसरा बताया। फिर उन्होंने बाय किया। अब उस दिन जुमा का दिन था और मैं बनारस में था। तो मैं बनारस में था और मुझे थोड़ा लेट हो गया था तो मैं 2:30 बजे की जुम्मा पढ़ने जाने वाला था। अब मैं 2:30 बजे की जुम्मा पढ़ने गया। अब इनको ऐसा कि मैं नमाज़ पढ़ गया तो इनके तीन-चार फ़ोन आ गए। मैं नमाज़ पढ़ कर निकला। क्या हुआ शाहिद भाई? अरे वो जो ₹10 में लिया था ₹500 बढ़ गए अपने ऊपर। तो भेज डालो ना। तो भेज डालो बराबर है। लेकिन बेचते ही नहीं आता है मुझे। फिर मैंने उनको फ़ोन किया, उनको बताया तो उन्होंने सेल किया। तो अल्हम्दुलिल्लाह उसके बाद से अभी तक उन्होंने कोई कोई भी स्टॉक के अंदर में नुकसान नहीं खाया। सब प्रॉफिट में वो बेच रहे हैं। कभी-कभार एक दिन, दो दिन अगर मार्केट नीचे भी आ जाता है तो बिल्कुल सबसे पहली बात ये है कि हम जो कंपनी खरीदेंगे, जिस कंपनी के स्टॉक हम खरीदेंगे, फंडामेंटल कंपनी जो मज़बूत होंगी उसी के हम स्टॉक खरीदेंगे। तो अगर वो एक दिन, दो दिन के लिए नीचे भी आती है तो हमको डरते, घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है कि भाई कोई प्रॉब्लम नहीं, कोई मसला नहीं, इंशाअल्लाह एक दिन, दो दिन नीचे आए वो वापस ऊपर आ जाए। तो ऐसे इसके अंदर में अगर हम काम करेंगे, मेरे जिन लोगों ने वीडियो सुने होंगे तो मैंने वो वीडियो के अंदर में बोला था के भाई आदमी अगर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तरीके से काम करेगा तो क़यामत तक उसको नुकसान नहीं होगा। तो वो बिल्कुल, जितने लोग काम कर रहे थे उनके दिमाग हैंग हो गए। साला हम इतने नुकसान खाकर बैठे और ये बोल रहे हैं नुकसान नहीं होगा। तो अपनी स्ट्रेटेजी ये है कि फंडामेंटल मज़बूत कंपनी, लोग एक दिन, दो दिन, तीन दिन वेट करो और प्रॉफिट में बेचो। लॉस में बेचते क्यों? अब आदमी को भरोसा नहीं होता है कंपनी के ऊपर। तो एक दिन नीचे गिरी तो आदमी डरने लग जाता है। क्या करूँ? बेच दो, बेच दो। तो स्टॉक मार्केट के अंदर में अगर आपके पास सब्र नहीं है तो फिर आप पैसा नहीं कमा सकते। इसके अंदर में सब्र रखना पड़ेगा।
इसके अलावा स्टॉक मार्केट के अंदर में हम जो पैसा डाल रहे हैं वो कौन सा पैसा डालेंगे? किसी को बोले यार साला स्टॉक मार्केट के अंदर में पैसा अच्छा मिल रहा है। एक काम कर तेरे ₹5 लाख एक हफ़्ते बाद लगने वाले हैं ना तो अपने हिसाब जोड़ेंगे एक दिन के 5000 तो 5 दिन के ₹25,000 हो गए। एक काम कर तू ₹5 लाख दे दे, मैं तेरे को एक हफ़्ते के बाद में वापस दे दूँगा। अब हमने डाले स्टॉक मार्केट के अंदर में और उस दिन रात में डाले तब तक सब बराबर था। लेकिन सुबह में पता चल गया कि वो वहाँ पर कोई जगह पर वॉर शुरू हो गई तो अभी 7-8 दिन मार्केट डाउन रहेगा। अब उसको 7 दिन के बाद में पैसे देने थे और अब अपना लॉस बता रहा है ₹00 तो फिर क्या करेंगे? हालांकि वो एक हफ़्ते के बाद में वो 500 लॉस भी रिकवर हो जाएगा और और ₹00 प्रॉफिट में आएंगे। लेकिन अभी उसको पैसा देना है। तो फिर क्या करेगा आदमी? नुकसान खाएगा, उसके पैसे रिटर्न देगा और फिर तौबा कर लेगा। आज के बाद कभी स्टॉक मार्केट की तरफ़ तो ऐसे किसी से कर्ज़ा लेकर, शादी के पैसे, हज, उमरा में जाने के पैसे, ऐसे पैसे हम नहीं लगाएंगे। ऐसे पैसे लगाएंगे जिनकी अभी फ़िलहाल में हमको कोई ज़रूरत नहीं है। वैसे पैसे, छोटे से स्टार्ट करें, ज़रूरी नहीं आप ₹20 लाख पहले दिन में डाल दो और काम करो। ₹100, ₹2000 से स्टार्ट करो, छोटे से स्टार्ट करो लेकिन ऐसा पैसा डालो कि दो-चार दिन आपका पैसा अगर वहाँ अटका है तो आपको कोई टेंशन नहीं, आपको नींद अच्छी आ रही है रात में, नहीं तो नींद नहीं के सुबह में और अमित भाई को अपने को पैसा देने का है, ऐसा नहीं होना चाहिए। तो इसके लिए ये पैसा लेकर हम स्टॉक मार्केट के अंदर में आते हैं। ठीक है? और इसके अलावा और एक बात मैं बता दूँ, जब आप लोग स्टॉक मार्केट के अंदर में काम करेंगे तो बहुत सारे लोगों के फ़ोन आएंगे क्योंकि जब आप अकाउंट ओपन करते हैं तो आपके नंबर जाते हैं। भाई आप ₹1 लाख के अंदर में कितना कमा रहे हैं? बोले ₹1000, ये माशाअल्लाह उलमा इकराम हैं, ये तो इसके अंदर नहीं पड़ेंगे। लेकिन कुछ नए लोग भी हैं। 1000 कमा रहे हैं। भाई आप हमारे साथ में जुड़ो, ₹1 लाख में हम आपको ₹00 प्रॉफिट करके देंगे। वो आदमी भी हैरान हो जाएगा अगर ₹00 प्रॉफिट हो रहा है तो बहुत अच्छी बात है। और वो लोग कराते हैं तो पहले दिन, दूसरे दिन में कुछ प्रॉफिट भी हो जाता है। लेकिन वो फ़्यूचर ऑप्शन के अंदर में एक्सपायरी के अंदर में अगर मार्केट हमारे हिसाब से नहीं चला तो पूरा पैसा जीरो हो जाता है। मुंबई के अंदर में एक फ़र्म था, ये फ़्यूचर ऑप्शन के अंदर में काम करता था। वो सबके पैसे लेते थे और वो बोलते थे हमारे पास में एक करोड़ लगा है तो हर महीने 10 लाख का रिटर्न लेके जाओ। तो बड़े-बड़े जो फ़िल्म इंडस्ट्रीज़ वाले थे उन्होंने बहुत सारा पैसा दिए थे कि भाई ठीक है, इनको ₹ करोड़ दे दिए, हर साल कितना, हर महीने में कितना मिल जाएगा? 50 लाख लेकर जाओ, कोई टेंशन नहीं जो हो रहा है वो देखेंगे। अब उन्होंने ₹300 करोड़ टोटल जमा किए थे और सबको प्रॉफिट भी बराबर दे रहे थे क्योंकि उसमें एक्सपर्ट थे वो। अब रूस-यूक्रेन की लड़ाई हो गई और मार्केट 2 दिन, 4 दिन, 8 दिन तक ऊपर ही नहीं आया और एक्सपायरी हो गए, पूरा पैसा जीरो हो गया। रातोंरात वो लोग मुंबई छोड़कर चले गए, किधर है कोई अता-पता ही नहीं। तो इसलिए ऐसे कोई चक्कर के अंदर में रातोंरात करोड़पति बनने के चक्कर में नहीं पड़ने का। इसलिए हम जो स्टॉक मार्केट के अंदर में माशाअल्लाह और रफीक भाई भी जो बोल रहे थे और हम जो तरतीब अपनाते हैं वो हज़रत अब्दुल रहमान बिन औफ रदी अल्लाह ताला अनहू के चार उसूल थे। हज़रत अब्दुल रहमान बिन औफ से किसी ने पूछा कि आप माशाअल्लाह तिजारत के अंदर में इतने कामयाब हो तो क्या तरीका है? अपने पूछते हैं भाई यार तू माशाअल्लाह बहुत पैसा कमाता है तो अच्छी बात है, हमने भी तो बताओ। तो पूछा उससे हज़रत अब्दुल रहमान से कि भाई आपके तिजारत के अंदर में कामयाबी इतनी है तो क्या वजह है? तो बोले मेरे चार उसूल हैं। सबसे पहला उसूल ये है कि मैं उधार खरीदता नहीं हूँ, उधार बेचता नहीं हूँ। दूसरा माल के अंदर ऐब हो तो बगैर ऐब दिखाए माल नहीं बेचता हूँ। तीसरा जो माल मैं खरीदा हूँ अगर उसके अंदर थोड़ा बहुत भी प्रॉफिट हो रहा है तो माल को रोक कर जमा करके नहीं रखता हूँ, फ़ौरन बेच देता हूँ। तो यही उसूल के ऊपर में जो हज़रत अब्दुल रहमान बिन औफ का उसूल है उसी के ऊपर हम स्टॉक मार्केट में काम करते हैं कि भाई बहुत ज़्यादा के लालच में चक्कर में नहीं पड़ना, अगर 1% एक दिन में प्रॉफिट आ रहा है, माल बेच दो। तो हम लोग टारगेट ही ये लेकर चलते हैं कि 1% प्रॉफिट आया, माल बेच दो, अपना प्रॉफिट ले लो, ख़त्म, ख़त्म कर दो। अब मेरे, मैंने अभी जो-जो लोगों को रिकमेंड करता हूँ उसके अंदर में 1500, 2000 लोग, बहुत सारे लोग मैसेज करते हैं, कॉल कर रहे हैं। तो सलमान भाई तुम जो स्टॉक दो वो टारगेट को जाता ही है, क्या बात है? हम ज़्यादा लंबा लगाते ही नहीं। ₹2, ₹3, ₹100 का स्टॉक है। अब वो 99 गया, 103 गया, अपने इतना स्टॉक लगा ही नहीं। भाई ₹100 में खरीदो, 101 में बेच दो, ख़त्म। बाद में उसको ऊपर जाना है, नीचे जाना है, जहाँ जाना है जाना दो। हमने ₹1 कमा लिया, हमारा काम पूरा हो गया। तो बस 1% का टारगेट लेकर चलते हैं। कोई लाख डाले, ₹100 का माल खरीदे 1000 क्वांटिटी और ₹101 में बेच दी, ₹1000 मिलने में पूरा कर दिया। ज़्यादा लालच में उसके अंदर में भी नहीं पड़ने का इसके अंदर।
अभी पिछले साल में जिनको पता होगा 2024 के अंदर जून महीने में इलेक्शन थे। देखो इलेक्शन के टाइम पे मेरे पहचान के अंदर में एक आदमी है। तो इलेक्शन के दो दिन पहले उनका मैसेज, फ़ोन आया। कैसा है? क्या हाल-चाल है? जब भी उनका फ़ोन आता है क्योंकि वो स्टॉक मार्केट के बहुत बड़े एक्सपर्ट हैं और तक़रीबन 20-22 साल से वो काम कर रहे हैं तो मेरे से बातचीत होते रहती है। तो आधा घंटा जब भी फ़ोन आता है तो बात होती है। तो वो जब रिजल्ट आने वाला था, दो दिन पहले उनकी बातचीत हुई तो मुझे बोले थे, लोगों ने किसी को भी वोट दिया हो लेकिन आएंगी तो आएंगी। तो बोले ठीक है अभी स्टॉक मार्केट के अंदर में कॉल खरीद लो, मार्केट बढ़ने ही वाला है, पैसा डबल हो जाएगा, जाएगा। अब उस वक़्त में मेरे भी कुछ 17-18 लाख थे। मैं बोला नहीं ये काम अपन को नहीं करना है। उन्होंने कॉल खरीद लिया। मैंने जो अपने स्टॉक थे वो दो कंपनी के स्टॉक खरीद लिए। दूसरे दिन सुबह उसका उनके 20 लाख के सीधे ₹40 लाख हो गए। कितने? ₹40 लाख और मेरे को उस दिन, क्योंकि उस दिन का देखेंगे ना जो रिजल्ट आने के एक दिन पहले जिन लोगों जो मार्केट में होंगे उनको पता होगा स्टॉक ऐसे दौड़े थे के देखने नहीं मिले, 5% ऊपर, 10% ऊपर, 15% ऊपर, 20-25% के अपर सर्किट लग गए। तो ₹4 लाख उस दिन में प्रॉफ़िट बताया। उनका फ़ोन आया, देख अभी भी मौका है, पैसे डाल दे कल और डबल हो जाएंगे। ये काम नहीं करता अपना, जो चल रहा है वही अच्छा है। क्योंकि अपनों को बस ये सीधी लाइन। इसमें जरा भी आपने सोचा कि बस एक बार के लिए कर देता हूँ फिर तौबा कर दूँगा तो फिर ख़त्म हो गया सब काम। बहुत सारे रहते हैं, अरे यार चलो ना अपन को खाने तो नहीं, अपने तो हरराम नहीं खाते लेकिन वो फ़लाँ को एक तो कर्ज़ा देना है, वो इसमें से बस वो उतना निकाल लेते हैं फिर ख़त्म। वो उतना निकालने के चक्कर में गया ना तो जितना तुम्हारे अकाउंट में सब निकल जाएगा। इसके लिए इतना भी निकालने के चक्कर में उसके अंदर नहीं पड़ेगा। अभी वो एक आदमी सवाल पूछ रहा था, बोले वो एक जगह से मसला ऐसा पता चला है कि वो मस्जिद की और मदरसे की टॉयलेट में इस्तेमाल कर सकते हैं तो अपुन करें क्या? लेकिन तेरा ही नहीं बचेगा तो फिर तू करेगा क्या? तो फिर दूसरे दिन जब जैसे मार्केट खुला और वो एग्ज़िट पोल आया ना तो जो 400 सीटें के जो एग्ज़िट पोल में बता रहे थे और दूसरे दिन जब काउंटिंग हुई तो काउंटिंग में सीटें कम आई, धड़ाधड़-धड़ाधड़ मार्केट ऐसा गिरा, जिन्होंने और बहुत सारे लोगों ने उस दिन ख़रीदारी की थी तो जिन लोगों ने उस दिन 10-10 करोड़ की ख़रीदारी की थी ना, दूसरे दिन सुबह को उठे ना तो उनके स्टॉक 8 करोड़ के ही बचे थे और मेरे भी जो है ₹4 लाख प्रॉफ़िट बता रहा था, दूसरे दिन देखा तो ₹45 लाख माइनस प्रॉफ़िट चले गए और अपने में से भी ₹50 लाख चले गए। मैं बिल्कुल टेंशन में नहीं था। कोई नहीं, अभी गिरा है, दो दिन, चार दिन, इंशाअल्लाह जाएगा, वहाँ जाएगा ही, कोई प्रॉब्लम नहीं है। मैं मस्त आराम से सोया था। तो दोपहर बाद उनसे बातचीत हुई तो बोले वो ₹40 लाख था ना वो अभी ₹4 लाख तक भी नहीं बचा है। तो इसलिए ये चक्कर में बिल्कुल भी नहीं पड़ना और फ़ोन आएंगे आप लोगों को बकायदा। अरे तुम हमारे साथ में काम करो, हम तुमको प्रॉफ़िट करके देंगे। हमारे को सिर्फ़ 10% देना। हम तो इतने टाइम के एक्सपर्ट हैं। ये बड़े-बड़े एक्सपर्ट इसके अंदर में जो हैं टाइम पे ख़त्म हो जाते हैं। जो ये स्टॉक मार्केट चलाते हैं। जो मैंने अभी सेबी बोला, सेबी का खुद रिपोर्ट है के फ़्यूचर ऑप्शन के अंदर में 100 में से 90 लोग नुकसान करते हैं। 100 में से 90 लोग नुकसान करते हैं। जो सालों से काम कर रहे हैं वो नुकसान करते हैं। इसके लिए ये चक्कर के अंदर में हम लोग बिल्कुल भी नहीं पड़ेंगे। ठीक है? इंशाअल्लाह। तो देखो अभी भी आख़िरी में बात बता दूँ, स्टॉक मार्केट बहुत आसान तरीका है अभी आज के जमाने के अंदर में कमाने का लेकिन इसको थोड़ा सा हम सीख लेंगे, समझ लेंगे तो इंशाअल्लाह इसके अंदर में करना क्या होगा बहुत आसान होगा। ठीक है? इंशाअल्लाह। अच्छा अब अगर...