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इस दुनिया में जो जितना अच्छा है, जो किसी को हर्ट नहीं करना चाहता, जो सबको खुश देखना चाहता है, जो सबके साथ मिलकर एक खूबसूरत जिंदगी जीने का सपना देखता है, दुनिया उसी को सबसे ज्यादा तकलीफ देती है। सबसे ज्यादा रुलाती है और सबसे ज्यादा मजाक उड़ाती है। क्योंकि दुनिया समझती है कि यह इंसान ऐसे ही है। इसे कोई बुरा फील नहीं होता। यह बहुत ही अच्छा इंसान है। हम जितना चाहे इसके साथ मजाक कर सकते हैं। गुस्सा भी नहीं करेगा। बुरा भी नहीं मानेगा। इसमें कोई एटीट्यूड, ईगो या सेल्फ रिस्पेक्ट है ही नहीं। तो जितना चाहे इसके साथ फन कर सकते हैं।
पर कोई यह समझने की कोशिश नहीं करता कि उस इंसान को भी बुरा लगता है। वह एटीट्यूड नहीं दिखाता, ईगो नहीं दिखाता, इनोसेंट रहता है। इसका मतलब यह नहीं कि वह कोई खिलौना है। उसकी कोई फीलिंग्स नहीं है। उसका कोई सेंस नहीं है। और यह ज्यादातर कॉलेज में होता है। अगर कोई इंसान गांव से आता है नए शहर की नई कॉलेज में और जैसे गांव में रहता था वैसे ही रहता है। नॉर्मल कपड़े में कॉलेज जाते हैं। नो एटीट्यूड, नो ईगो, नो फैशन, तो सब उसे देखकर हंसते हैं। सब उसके बारे में क्रिटिसिज्म करते हैं। वह इंसान सबके मनोरंजन का टॉपिक बन जाता है। चाहे पढ़ाई में कितना ही अच्छा हो फिर भी उसे कभी ना कभी ट्रोल किया ही जाता है और उसे एक कमजोर इंसान की तरह ही देखा जाता है।
दिस इज द हारश ट्रुथ ऑफ दिस सोसाइटी। यह सोसाइटी हमेशा कहती है कि अच्छे इंसान बनो, अच्छा काम करो। लेकिन यह सोसाइटी उन्हीं लोगों को सपोर्ट करती है जो बुरे से बुरा काम करते हैं जिनसे इस समाज का 1% भी भला नहीं होता। फिर भी वही लोग सपोर्ट पाए जाते हैं। सच अ हिपोक्रेसी। यह दुनिया एक जंगल है और जंगल के अपने रूल्स होते हैं। तुम कितने अच्छे हो, कितने सच्चे हो, इससे किसी को फर्क नहीं पड़ता। तुम जितने ज्यादा लोगों के लिए सॉफ्ट रहोगे, वह तुम्हें उतना ही ज्यादा यूज़ करेंगे। तुम जितना ज्यादा सबको खुश करने की कोशिश करोगे, दुनिया तुम्हें उतना ही ज्यादा दुख देगी।
दुनिया को सिर्फ दो चीजें दिखाई देती हैं। या तो तुम्हारी पावर या तुम्हारी वीकनेस। अगर तुम पावरफुल दिखते हो तो दुनिया तुम्हारी रिस्पेक्ट करती है। वीक दिखते हो तो दुनिया तुम्हारा मजाक बनाती है। तुम्हारे अंदर इतनी स्ट्रेंथ, इतना एटीट्यूड, इतनी सेल्फ रिस्पेक्ट हो कि कोई तुम्हारा मजाक उड़ाने की कोशिश भी ना करे।
दिस इज गैंगस्टर एटीट्यूड। गैंगस्टर एटीट्यूड का मतलब है अंदर से इतना सॉलिड हो जाना कि दुनिया तुम्हारे सामने अपनी औकात में रहे। गैंगस्टर एटीट्यूड का मतलब है अपनी वैल्यू को समझना। बिना किसी से वैलिडेशन मांगे। अपनी रिस्पेक्ट खुद क्रिएट करना। अपने सपनों के लिए लड़ना। बिना दुनिया के रूल्स फॉलो किए। तुम्हारा ओरा इतना स्ट्रांग होता है कि लोग सोच समझकर तुमसे बात करते हैं। तुम्हें लाइटली नहीं लेते। गैंगस्टर एटीट्यूड का मतलब तुम बिना कुछ कहे भी दुनिया को अपनी औकात याद दिलाते हो।
अब वक्त आ गया है कि तुम अपने अंदर एक गैंगस्टर को जन्म दो जो तुम्हें दुनिया के सामने बिना वजह झुकने ना दे जो तुम्हें तुम्हारी फिल्म का साइड कॉमेडियन नहीं हीरो बनाकर रखे।
अब तुम्हारे लिए एक चैलेंज रखता हूं मैं। अगर तुम इस वीडियो को एक भी सेकंड बिना स्किप किए ध्यान से देख सकते हो तो तुम उन 99% लोगों से कहीं ज्यादा फोकस्ड, डिसिप्लिंड और मेंटली स्ट्रांग हो जो Instagram की गंदी रील्स या Facebook शॉर्ट वीडियोस के गुलाम बन चुके हैं। कमेंट में जरूर बताना क्या तुमने बिना एक सेकंड भी स्किप किए यह वीडियो पूरा देखा या नहीं। मुझे देखना है कितने हैं जो अपने माइंड को कंट्रोल कर सकते हैं। लेट्स स्टार्ट।
जो इंसान शारीरिक रूप से कमजोर होता है उसे लोग या तो इग्नोर करते हैं या उसे नीचा दिखाते हैं। चाहे तुम्हारा दिमाग तेज हो, चाहे तुम्हारा दिल साफ हो, लेकिन अगर तुम दिखने में कमजोर हो, तो दुनिया तुम्हारी वैल्यू घटाकर जीरो कर देती है। तुम्हारे इमोशंस किसी को समझ नहीं आते, तुम्हारे सपने किसी को दिखाई नहीं देते।
इसलिए गैंगस्टर एटीट्यूड बनाने का पहला स्टेप है अपने शरीर को ऐसा बनाना जिसे देखते ही लोग समझ जाए। इस बंदे से पंगा नहीं लेना चाहिए। जब तुम जिम जाते हो या अपने रूम में ही मेहनत करना स्टार्ट करते हो। समझ लो तुम सिर्फ बॉडी नहीं बनाते हो बल्कि हर दिन तुम उन सब लोगों को जवाब देते हो जो तुम्हें कमजोर समझते हैं जो तुम्हारा मजाक उड़ाते हैं। गैंगस्टर एटीट्यूड उन्हीं लोगों का होता है जो हर पेन को मेहनत में कन्वर्ट करना जानते हैं।
जब तुम्हारा शरीर मजबूत होता है तो सिर्फ मसल्स नहीं बढ़ते। तुम्हारा सेल्फ रिस्पेक्ट भी बढ़ता है। तुम्हारी वॉक कॉन्फिडेंट होती है। तुम्हारी आंखों में एक आग होती है जो लोग महसूस करते हैं। स्ट्रांग बॉडी सिर्फ दिखावा नहीं होती। यह तुम्हारी लैंग्वेज बन जाती है। तुम्हारा पोश्चर, तुम्हारा अंदाज, तुम्हारे बाईसेप्स, तुम्हारा सीना। यह वह सब कह देते हैं जो शब्दों में कहना जरूरी नहीं होता। तो अगर तुम गैंगस्टर एटीट्यूड चाहते हो तो सबसे पहले उस शरीर को बिल्ड करो जो तुम्हारे हर दर्द, हर रिजेक्ट, हर इंसल्ट का जवाब हो।
आंखों में वह शब्द होते हैं जो जुबान कभी कह नहीं पाती। जब तुम किसी की आंखों में डायरेक्टली देखते हो, तुम उसके माइंड के अंदर घुस जाते हो। जब तुम किसी से आंखों से बात करते हो तो सामने वाले को यह महसूस होना चाहिए इस बंदे के साथ अगर मैंने पंगा लिया तो खुद का नुकसान कर बैठूंगा। तुम्हारी आंखें दिखनी चाहिए काम कोल्ड और कैलकुलेटेड। जैसे तुम किसी बंदे को पूरा स्कैन कर रहे हो और उसके दिमाग का पासवर्ड तुम्हें मिल चुका है। आई कांटेक्ट का मतलब होता है डोमिनेंस। आई कांटेक्ट का मतलब होता है पावर विदाउट नॉइज़।
हर दिन मिरर के सामने खुद की आंखों में देखो बिना ब्लिंक किए। अपने कमजोर वर्जन से बात करो। आंखों में वो एक्सप्रेशन लाओ जैसे तुम किसी के इंटेंशन समझ चुके हो। तुम रिएक्शन नहीं दोगे लेकिन कौन से पॉइंट पर क्या करना है सब डिसाइड कर चुके हो। जब कोई लड़ने आए तुम्हारी आंखें कहनी चाहिए। मैं डरता नहीं। हर सक्सेसफुल लीडर, गैंगस्टर या पावरफुल पर्सन आंखों से बात करता है। तुम किसी भी माफिया मूवी या रियल डॉन का इंटरव्यू देख लो। आंखें हमेशा फोकस्ड, स्टेबल और एक्सप्रेशनलेस होती हैं। क्यों? क्योंकि आंखें तुम्हारी एनर्जी रिवील करती है और अगर तुम्हारी आंखों में कंट्रोल है तो समझ लो तुम्हारा ओरा बाकी सब पर भारी है।
ज्यादातर लोग बोलने में एक्सपर्ट होते हैं लेकिन समझने में जीरो। जो जितना ज्यादा बोलता है उनके सीक्रेट्स उतने ही ज्यादा दुनिया के सामने खुलते हैं। इसलिए ज्यादा बोलो मत जितना हो सके इग्नोर करो। ऑब्जर्व करो और जब बोलने की बारी आए तब ऐसा कुछ बोलो कि सामने वाले की सोच भी हिल जाए। अगर तुम सीधा नहीं डार्क और साइकोलॉजिकल रिप्लाई दोगे तो लोग कंफ्यूज भी होंगे और डरेंगे भी।
जब कोई तुम्हें प्रोवोक करे तुम्हारा पहला स्टेप होना चाहिए साइलेंस। साइलेंस का मतलब होता है ऑब्जर्व करना। फिर आंखों में आंखें डाल के रिप्लाई दो जैसे देख भाई मैं चाहूं तो तेरे से भी निच लेवल पर उतर सकता हूं। पर तेरे लेवल पर उतरना मेरे टाइम का इंसल्ट होगा। सो बाय। और यह कुछ लाइंस याद रखना। यह तुम्हारे आर्सनल का पार्ट बन सकते हैं। जैसे मैं वो नहीं हूं जो दिख रहा हूं। और तू वह नहीं समझ पाएगा जो मैं सच में हूं। यह वर्ड्स तुम्हें मेंटली पावरफुल बनाते हैं। तुम अपनी वीकनेस को भी स्ट्रेंथ बनाकर लोगों को कंफ्यूज कर सकते हो।
गैंगस्टर एटीट्यूड का मतलब है ऑब्जर्व करो, समझो। हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं। लेकिन जब दोगे तो लोग चुप हो जाने चाहिए। यह चैप्टर एक साइकोलॉजिकल रियलिटी पर बेस्ड है। जब तुम्हें लोगों के बारे में वह सब पता होता है जो वह दुनिया को बताना नहीं चाहते तब वह सिर्फ डरते नहीं बल्कि तुम्हारे सामने झुक जाते हैं। तुम्हें हर कन्वर्सेशन में एक साइलेंट प्रिडेटर बनना होगा। चुप कर सब सुनना है। ज्यादा बोलो मत। एक दो बातें बोलो और बस ध्यान से उनकी बातें सुनो। उन्हें फील करवाओ कि तुम उनको प्रायोरिटी दे रहे हो। लोग अपनी लाइफ के बिगेस्ट सीक्रेट्स खुद एक्सपोज करते हैं। बस तुम्हें ऑब्जर्व करना आना चाहिए। तुम्हारा दिमाग एक आर्काइव होना चाहिए। हर छोटी बात, हर पैटर्न, हर आदत तुम्हारे दिमाग में रिकॉर्ड हो जानी चाहिए। किस बंदे का ईगो कब हर्ट होता है? किस बंदे की वीकनेस क्या है?
जब तुम किसी की रियलिटी उसके सामने रख सकते हो, तो तुम उस बंदे के लिए साइकोलॉजिकल थ्रेट बन जाते हो। सब कुछ देख लो पर कुछ भी एक्सप्रेस मत करो। तुम्हारे अंदर क्या चल रहा है, यह किसी को पता नहीं चलना चाहिए। उनके सीक्रेट्स का यूज़ तब करो जब वह तुम्हारे खिलाफ होने लगे। तुम जब किसी के सामने बैठते हो तो उसे यह महसूस होना चाहिए। यह बंदा मुझे कभी भी तोड़ सकता है। यह तब होता है जब तुम्हारे पास लोगों के बारे में वह सब पता हो जो उन्होंने दुनिया से छुपाया है।
हर चैप्टर में तुमने कुछ सीखा। तुमने अपने अंदर एक नया पर्सना फील किया। तुमने सीखा कि अगर तुम्हारा शरीर कमजोर है तो तुम्हारा दिमाग, तुम्हारा टैलेंट, तुम्हारा सपना सब बेकार हो जाता है। इसलिए तुम्हें अपने बॉडी को एक आर्मर बनाना पड़ेगा। तुमने साइलेंस और शार्प रिप्लाई की पावर को समझा। तुमने आंखों की पावर को समझा। आई कांटेक्ट में जो फियर होता है वह सामने वाले के ईगो को साइलेंट करा देता है। तुमने सीखा सबसे बड़ी पावर होती है लोगों के सीक्रेट्स जानना और उनसे कुछ भी ना कहना। तुम्हें सबके साथ लड़ना नहीं है। लेकिन जब कोई सामने आए तो उसके दिमाग में एक ही बात आए। इस बंदे से उलझना खुद की बर्बादी है। तुम्हें सब पर हावी नहीं होना है। तुम्हें बस इतना करना है कि कोई तुम्हें लाइटली लेने की गलती ना करे।
अब मैं तुम्हें दो ऐसी किताबों के बारे में बताने जा रहा हूं जो तुम्हें जिंदगी में एक बार जरूर पढ़नी चाहिए। यह दो बुक्स तुम्हें एक डेंजरस माइंड वाले इंसान बनाने के लिए काफी हैं। यह दोनों बुक्स तुम्हें इस वीडियो के नीचे कॉर्नर में शो हो जाएगा या डिस्क्रिप्शन में लिंक दे दूंगा। मैं हाईली रिकमेंड कर रहा हूं एक बार इन्हें जरूर खरीदना और पढ़ना।
नंबर एक द 48 लॉस ऑफ पावर रॉबर्ट ग्रीन। यह सिर्फ एक किताब नहीं है। यह एक माइंड गेम मैनुअल है। यह बताती है कैसे दुनिया में लोग पावर का गेम खेलते हैं। कब चुप रहना है, कब अटैक करना है और कब सिर्फ गेम का हिस्सा बनकर पूरा गेम जीतना है।
नंबर टू, नो मोर मिस्टर नाइस गाय डॉ. रॉबर्ट ग्लोवर। दुनिया अच्छे लोगों की कभी कदर नहीं करती। और यह बुक उस दर्द का क्यूर है। यह बुक उन लोगों के लिए है जो लोगों को खुश करते-करते खुद को ही भूल चुके हैं। पर अब वक्त आ गया है अपनी असली आइडेंटिटी को जगाने का। सो बाय करो, पढ़ो और अपनी लाइफ बदलने दो।
लेकिन ब्रो इस दुनिया में सबसे पावरफुल चीज क्या है? सो अगर तुम फाइनेंशियली फ्री होना चाहते हो तो तुम्हें उन चार चीजों को बिल्ड करना पड़ेगा जो मैंने इस वीडियो में डिटेल में बताया है। सो, इस वीडियो पे क्लिक करके उन चार चीजों के बारे में अच्छे से जान।