📱

Get Our Mobile App

Take your business learning on the go!

Download on the App StoreGet it on Google Play

1) Tafseer Introductory class - Class 1 - Level 1 || Eng. Ebrahim Shabbir

Dr. Mehboob Abu Asim20:24

Transcription

चलिए ठीक है। ला रहमा रहीम, अल्हम्दुलिल्लाह, ला सलाम अला रसूलल्लाह। अमा बाद। हमारे लेवल वन में अभी दूसरा सब्जेक्ट है, तफसीर के हवाले से। और उसकी आज आपके सामने पहली क्लास है। आज इंशाल्लाह हम क्लास छोटी सी होगी, हल्की होगी, लेकिन बेसिकली इस तफसीर के बारे में हम आपको एक मुकदमा और इंट्रोडक्शन देंगे कि तफसीर क्या होती है, क्यों जरूरी है और क्या फायदा तफसीर जानने का? अच्छा, यह सब्जेक्ट रखने का इस दौरा में, जो लेवल वन में है, बड़ा खास एक मकसद है। यह सब्जेक्ट हमने बहुत ही सोच समझ के लेवल वन में रखा है, ऐसे नहीं रखा। हां, कि इसका जो कंटेंट है, आप कौन-कौन सी सूरतों की तफसीर पढ़ेंगे, वह भी पूरा एक स्टडी करके रखा गया है, ताकि आपके लिए आसान भी हो और सेम टाइम पर आप इस दौरे के आखिर में एक फर्क महसूस करें। अब तक जितने भी लोगों ने तफसीर या दौरा इन जनरल में किया, शुरू में उनको लगा था कि यह दौरा आम दर्स की तरह होगा। हम मस्जिदों में जाएँ, दर्स सुनें, उसके बाद आ जाएँ। लेकिन जिन लोगों ने भी किए, 80% से ज्यादा लोगों ने यही कहा रिस्पांस में कि नहीं, यह डिफरेंट है। हमने जो यहां सीखा, अब हमें याद है, अब हमें आगे लोगों को बता सकते हैं, चीज़ क्या है।

तो सबसे पहले ना कुछ क्विज़ होगा आपके साथ, छोटा सा तफसीर सब्जेक्ट से रिलेटेड। मुझे कौन बता सकता है कि तफसीर किस किताब की की जाती है? किस किताब साहब की की जाती है? जी, कुरान की। सिंपल। तो इंशाल्लाह हम भी तफसीर कुरान की करेंगे। अच्छा, कुरान का मतलब क्या है? अच्छा, आपने एक जवाब दे दिया। और कोई बता सकता है जिसको पढ़ा जाए? एक जवाब आ गया। जी, बार-बार पढ़ा जाए। जी, बार-बार पढ़ा जाए। बार-बार पढ़ी जाने वाली किताब वही है। थोड़ा सा अलग अल्फाज़ के साथ। ठीक है। जी, जी, जी। आप बता दीजिए। जी, बार-बार पढ़ी जाने वाली। आप भी कुछ कहना चाह रहे थे? जी, जी। आवाज नहीं आई मुझे। आप बता सकते हैं जवाब क्या? मुझे आवाज नहीं पहुंची। ठीक है, ठीक है। हक और बातिल में फर्क जानने के लिए। यह हम कह सकते हैं, कुरान का मतलब तो नहीं, लेकिन क्या कह सकते हैं इसको? मकसद है। मकसद है कि हक और बातिल में फर्क जानने के लिए। और भी कोई जवाब है? जी, हिदायत वाली किताब। माशाल्लाह। यह थोड़ा और तारुफ हो गया। चूँकि कुरान का जो असल मतलब है, वह यह है कि क से निकला है। ठीक? कुरान। कुरान में कहाँ पर आपने ल पढ़ा? इससे मिलता-जुलता जो कि कुरान का सबसे पहला लफ़्ज़ है। ठीक? जो वही पहली नाज़िल हुई थी, उसे उस तबर से, उस तबर से जो है यह पहला लफ़्ज़ है। तो क़ते पढ़ने को तो यह जो अलिफ़ और नून एक्स्ट्रा ऐड हुआ है, यह किस चीज़ का है? अलिफ़ मद और नून। यह किस, यह क्या माना देता है कुरान वर्ड में? यह देख रहे हैं ना आखिर में अलिफ़ मद और नून? यह क्या माना दे रहा है आपको? कौन बता सकता है? वैसे आप लोगों ने वह जवाब दे दिया। अभी आप लोगों ने दिया था अभी जवाब। जी, पढ़ने की जमा। एक जवाब आ गया, पढ़ने की जमा। और भी कोई जवाब है? हां, बार-बार पढ़ा जाना। ठीक है। यह उसको कहते हैं कि यह है सी मुबा। एक मिनट। सी मुबा। इसको इंग्लिश में क्या कहते हैं? शायद यह सबको समझना है। एजरेट का वर्ड सुना है आपने? एजरेट कर जाना। सी मुलगा है। यह बहुत बार-बार पढ़े जाने वाली किताब है। यह एक ऐसी किताब है दुनिया की जिसको सबसे ज्यादा पढ़ा जाता है। पहले दिन से लेकर शुरू से लेकर क़यामत तक जो है, यही वह वाहिद किताब है जिसको सबसे ज्यादा पढ़ा जाएगा। तो यह मीनिंग है कुरान का।

अच्छा, कुरान के मुतालिक मुझे और आप क्या-क्या बता सकते हैं, जनरल नॉलेज में, आम इंफॉर्मेशन क्या-क्या कुरान के बारे में? एक तो आपने बताया हक और बातिल में। आपने बताया हिदायत उसी से मिलती है। और क्या-क्या है कुरान के बारे में? तौहीद की किताब है। माशाल्लाह। इला कहते हैं पूरा कुरान जो है, तौहीद है। जी, अल्लाह ताला अपने बंदों से मुखातिब। माशाल्लाह। और अल्लाह ताला के ऑर्डर हैं इसमें। जो बादशाहों का बादशाह है, उसके ऑर्डर्स हैं। और नूर है। यह किस किस तरह का नूर है? यह हिदायत का नूर है। यह वह रोशनी है जो आपको खाली रास्ता नहीं दिखाती, वह किस चीज़ का रास्ता दिखाती है? और आखिर में कहाँ लेकर जाती है? जन्नत में। जन्नत का रास्ता दिखाने वाली किताब है। और कौन बता सकता है कुरान के बारे में? शिफ़ा है। माशाल्लाह। कुरान एक मोज़ा है। इसमें क़िस्से अंबिया हैं। बिल्कुल, क़िस्से अंबिया हैं। और और भी अंबिया के अलावा और भी लोगों के हैं। यहाँ से कोई जवाब मैं चाह रहा हूँ। जी, अब्दुर्रहमान भाई। अल्लाह ताला का कलाम है। यह आया जवाब। लेकिन चलिए ठीक है, एक्सेप्ट कर लेते हैं। अल्लाह ताला की क्या है इसमें? अल्लाह ताला के असमा और सिफ़ात भी हैं इसमें। जी, और असन तरा। ठीक। यह वाहिद किताब है जिसको आप जितनी भी इसकी तफसीर करते जाएँगे, ख़त्म होगी? कभी ख़त्म नहीं होने वाली। ठीक है। तो कुरान के हवाले से, चूँकि आपको इतना बता दिया। अच्छा, कोई फ़रिश्तों के नाम बता सकते हैं जो आपको पता हो कुरान में? किस फ़रिश्ते का नाम आया हुआ है? ठीक है। जिब्राइल अलैहि सलाम। काया? अच्छा, यह बताएँ कि जहन्नुम का दरोगा कौन है? जो जहन्नुम के दरवाज़े पर सिक्योरिटी दे रहा है। करीब, बहुत करीब है। लेकिन यह नाम नहीं है। बहुत करीब। सही नाम है, लेकिन आधा सही है। मालिक। ठीक है, मालिक नाम है उसका। जन्नत वाले का क्या नाम है? जो जन्नत के दरवाज़े पर खड़ा है, जिसकी ड्यूटी लगी है? रिवान। माशाल्लाह। रिज़वान नहीं? क्या नाम है? रिज़वान। ठीक है। द के साथ। यह भी थोड़ा हम साथ-साथ सही से करें। हम रिज़वान कहते हैं, लेकिन रिज़वान द के साथ। अच्छा, अब आते हैं वापस इस सब्जेक्ट की तरफ। कुरान के बारे में तो आपको पता चल गया। अब तफसीर कुरान। अब मुझे बताएँ, कुरान की तफसीर जानना क्यों जरूरी है? कौन बता सकता है? अच्छा, मैं चाहूँगा कि नए हाथ खड़े हों यहाँ। आप गलती कर लें, कोई मसला नहीं है। आप हाथ खड़ा करें, गलत जवाब भी दें, कोई मसला नहीं है। मेन चीज़ यह है कि आपको समझ आ जाए सही से। अगर आप बोलेंगे तो ही फ़ायदा होगा, पता चलेगा आप कहाँ गलती कर रहे हैं। जी, जी। ठीक है। सही मानों में ताकि कुरान को हम समझ सकें। एक जवाब आ गया और बिल्कुल ठीक है। जी, आप भी कुछ कहना चाह रहे हैं? आपके पीछे, आपके पीछे। चलिए, और कोई बता दे। जी, शाबाश। हां, यह जानना चाह रहे हैं कि अल्लाह ताला, किसी ने एक जवाब दिया था ना कि अल्लाह ताला का कलाम है, अल्लाह बंदे से मुखातिब हो रहा है, तो आप यह भी जानना चाहते हैं कि अल्लाह ताला मुझसे कह क्या रहा है, मुझसे कहना क्या चाहता है। अल्लाह ताला अगर एक ऑर्डर दिया है, तो उस ऑर्डर की तफ़सील क्या है, एक्सप्लेनेशन क्या है? और भी कोई जवाब दे सकता है कि कुरान की तफसीर जानना क्यों जरूरी है? जी, इल्म हासिल करने के लिए। ठीक है। इस जवाब को कोई मुकम्मल कर सकता है? और कुरान की तफसीर हम इसलिए पढ़ते हैं ताकि इल्म हासिल करें और अमल करें। माशाल्लाह। ठीक है, जवाब मुकम्मल हो गया। जी, हक और बातिल में। ठीक है, यह भी बिल्कुल ठीक है। हो सकता है आप सालों से गलत रास्ते पर चल रहे हो, लेकिन जब तफसीर पढ़ेंगे, आपको तब पता चलेगा, मैं गलत काम कर रहा था। अब आप फ़ौरन अपने आपको क्या करेंगे? फ़ौरन ठीक कर देंगे। जी, नईम भाई। हां, तफसीर में आप यह भी जानते हैं कि जो ऑर्डर है, वह अल्लाह के रसूल, सहाबा ने किस तरह सीखा और आगे सिखाया। यह कह रहा ना? ठीक है। हां, किस तरह सीखा और आगे सिखाया। इसमें यह भी होता है कि अल्लाह ने तो हुक्म दे दिया, लेकिन अब अमल कैसे करना है, उस पर यह तफ़सीर में आता है। जी, आप भी कुछ ऐड करना चाहते थे? हलाल और हराम में फर्क, हक, बातिल, हलाल, हराम। ठीक, काफ़ी है। और भी कोई जवाब देना चाह रहे हैं? ठीक है। ताकि अल्लाह और उसके रसूल की ताअत की जा सके। जी, हां। माशाल्लाह। आपका नाम क्या है? अरशद। अरशद नाम। अरशद भाई ने एक डिफ़रेंट एंगल से जवाब दिया। वह कह रहे हैं कि कुरान की जो तफसीर है, वह उससे हमें यह पता चलता है कि वह आयत अल्लाह ताला ने किस कांटेक्स्ट में, यानी किस मौके पर नाज़िल की और उसका बैकग्राउंड क्या था। ठीक है? यानी आयत का बैकग्राउंड जानना बहुत जरूरी है। अगर आपको बैकग्राउंड नहीं पता होगा ना, नुकसान हो जाएगा। आप गलत डिसीज़न भी ले लेंगे, कभी-कभी गलत काम करेंगे। अच्छा, इस बात की कोई मुझे मिसाल दे सकता है कि अगर आपको आयत का बैकग्राउंड नहीं पता हो तो आप जब नहीं सही से समझेंगे, आप गलत स्टेप भी उठा सकते हैं? माशाल्लाह। जी, शराब के हवाले से अल्लाह ताला ने क्या ऑर्डर दिया कुरान में? हां, अल्लाह ताला ने कुरान में एक जगह फ़रमाया, लाला, कौन बता सकता है? क्या मतलब है? ला सलातें, नमाज़ के करीब भी ना जाओ तुम शराब जब तुम शराब की हालत में हो। इसका मतलब यह है कि जब आप शराब पीते हैं, आपको नमाज़ के करीब नहीं आना। अब शराब पी ले हम लोग, मगरिब में टाइम है अभी। फिर, फिर यह आयत का बैकग्राउंड क्या है? कि यह अल्लाह ताला ने कुछ टाइम के लिए ऑर्डर दिया था और उसके बाद इसके आगे एक नया ऑर्डर जारी किया, जिससे यह कैंसिल हो गया और वह ऑर्डर ने रिप्लेस कर दिया और वह क्या था? कि शराब अब हराम है। तो इसलिए तफ़सीर में आपको यह फ़ायदा पता चलता है कि यह जो आयत है। अच्छा, इसलिए जब आपको पता होगा ना, तो आप इसी को बताते हुए समझा सकते हैं। अब एक बंदा है, उसको आप ही जैसे स्टूडेंट, पिछले सेमेस्टर, पिछले बैच में, यह वह आकर हमें बोलता है कि मैंने अपने दोस्त को नमाज़ के लिए बुलाया, उसने मुझे दो दलील पेश की, नमाज़ पढ़ना जायज़ नहीं है। एक दलील यह, ला सलाते, अल्लाह ताला ने कुरान में फ़रमाया, यानी वह लोग जो ईमान लाएँ, नमाज़ के करीब भी ना जाओ। दूसरी दलील क्या है? उसने अगला पार्ट नहीं बोला। दूसरी दलील कौन बता सकता है? वह सबको आती है। जी, क्या-क्या दलील है? कुरान की एक और आयत है जिसमें कुछ ऐसा आता है जिससे आप यह माना निकाल सकते हैं, नमाज़ नहीं। सूरत सबको आती है, तक़रीबन 80% लोगों को आती है। जी, नहीं, नहीं, नहीं, नहीं, नहीं। और कोई है? चलिए, 10 सूरतों में से चूँकि और आसान कर लेते हैं, आठ सूरतों में से, सूरत मान में से सरल मान आयत आती है। जी, फि मुसली अल्लाह फ़रमाता है, बर्बादी हो नमाज़ियों के लिए, तबाही हो नमाज़ियों के लिए। देखो, तुम मुझे बर्बादी की तरफ़ लेकर जा रहे हो, तुम मुझे अल्लाह ताला के डर के ख़िलाफ़ ले जा रहे हो। तो इसलिए तफ़सीर से आपको जो है ना, पूरा बैकग्राउंड समझ आता है। यह क्लियर हो गया ना आपको? तो यह फ़ायदा है तफ़सीर पढ़ने का। इसलिए हमने सब्जेक्ट रखा है।

अब इस तफ़सीर में आप क्या-क्या पढ़ेंगे? सबसे पहला, हम आपको इंशाल्लाह सूरतुल फ़ातिहा की तफ़सीर पढ़ाएँगे, ताकि नमाज़ में जो आप सूरतुल फ़ातिहा पढ़ते हैं, उसका माना आपको आता हो। बहुत प्यारी सूरत है। ऐसी सूरत है कि अगर हम तीन क्लासों में भी ख़त्म करना चाहें, मुश्किल है इसकी तफ़सीर, इतनी ज़्यादा है। और जिस बंदे को सही से सूरतुल फ़ातिहा की तफ़सीर आ गई ना, वह कभी भी नमाज़ में यह नहीं बोलेगा, मेरा ध्यान नहीं लग रहा, क्योंकि इतनी ख़ूबसूरत सूरत है, बंदा जो है, उसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं, वह हैरान भी हो जाता है, खुश भी होता है और ईमान भी ताज़ा हो जाता है। लेकिन हम, क्योंकि एक तो वक़्त की भी किल्लत है, तो हम कोशिश करेंगे कि आपको सारी वह अहम अहम चीज़ सूरतुल फ़ातिहा के हवाले से बता सकें। फिर उसके बाद सूरतुल असर से लेकर सूरत नास तक यह तफ़सीर होंगी। यह कितनी सूरतें बनती हैं? तक़रीबन असर से लेकर नास तक कितनी सूरतें बनती हैं? कोई काउंट करके बता सकता है? जी, 11। 12। और सूरतुल फ़ातिहा मिलाकर 13। तो इंशाल्लाह सेमेस्टर वन में हमारा प्लान यह होगा कि इंशाल्लाह ताला के फ़ज़ल से यह 13 सूरतों की तफ़सीर आपको सिखा दें, ताकि आप नमाज़ में छोटी सूरतें जो कि हम अक्सर पढ़ते हैं, हमारी रूटीन यही है कि अल्हम्दुलिल्लाह के बाद कुल हुव अल्लाह, कुल हुव अल्लाह के बाद, ताकि नमाज़ भी हो जाए और जल्दी भी हो जाए, तो इसकी तफ़सीर कम से कम आपको आ जाए, नमाज़ ठीक से पढ़ सकें। और इंशाल्लाह सेमेस्टर टू में जो है, वह फिर और कुछ सूरतें होंगी, वह इंशाल्लाह हम आपको उस टाइम बताएँगे। कुरान के हवाले से कुछ चीज़ें मज़ीद आपके सामने रखना चाहते हैं। यह बताएँ, कौन मुझे बता सकता है कि कुरान में और आम किताब में क्या फ़र्क है? कुरान में और आम किताबों में क्या फ़र्क है? पहले ख़ास कर। ठीक है। आम। एक पहला जवाब यह है कि कुरान आसमानी किताब है। यह किसका कलाम है? अल्लाह ताला का। दुनिया की किताबें वह बंदों ने लिखी हुई हैं, तो वह आसमानी किताब नहीं हैं। अच्छा, और भी यहाँ कोई हाथ खड़े हुए थे? जी। माशाल्लाह। बहुत साफ़ आवाज़ है और जबरदस्त जवाब। कुरान में कोई तब्दीली नहीं हो सकती। ठीक है, कोई चेंजेज़ नहीं हो सकती। आप आज ख़ूबसूरत सी अच्छी कैलीग्राफ़ी के साथ भी चेंजेज़ कर दें, मुसलमान मानेंगे नहीं, मानेंगे? ठीक है। अच्छा, और भी कोई हाथ खड़ा हुआ था? कुरान में और आम किताब में क्या फ़र्क है? कोई गलती नहीं है, कुरान में कोई उसमें मिस्टेक नहीं है। जी, हां। यह नाज़िल किया किसने है? अल्लाह की तरफ़ से नाज़िल हुआ है। तो पहली इसकी अज़मत यह हो गई कि इसको नाज़िल करने वाली कोई आम हस्ती नहीं है, वह अल्लाह ताला है। दूसरी इसकी अज़मत क्या है? कि नाज़िल किस पर हुआ? यह किस पर हुआ? अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर। यह एक और फ़र्क है कि उन जैसी हस्ती कोई भी नहीं है दुनिया में, ना कोई था, ना क़यामत तक कोई होगा। तो यह उसका दूसरा और। हां, माशाल्लाह। तीसरी अज़मत, इसको नाज़िल किया किसने? कौन लेकर आया? जिब्राइल अलैहि सलाम। जो कि फ़रिश्तों के कौन हैं? सरदार हैं। फ़रिश्तों में जो सबसे अज़ीम फ़रिश्ते हैं, उन्होंने नाज़िल किया। और क्या फ़र्क है? माशाल्लाह। आप लोग लगता है किताब पढ़कर आए, हालाँकि अभी हमने शेयर नहीं की। जी, रमज़ान के महीने में नाज़िल हुआ। माशाल्लाह। और क़यामत तक आने वाले सब लोगों के लिए चैलेंज है कि इस किताब को गलत साबित करके दिखा दें। हार जाएगा वह। मुझे इधर से जवाब चाहिए, इधर से। यहाँ तो आपको सब कुछ आता है या आप शर्मा रहे हैं, दोनों में से कोई एक। ठीक है। जी, मुसन्निफ़ अल्लाह ताला है, बाक़ी किताब। ठीक है, यह भी जवाब आ गया। लेकिन जी, इसकी हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी किसने ली है? अल्लाह ताला ने। कुरान के कितने एडिशन हैं? एक ही एडिशन है। दुनिया की किताबों के कितने होते हैं? मल्टीपल एडिशन होते हैं। पहला एडिशन छपता है और बेहद हैरान क़ुन बात यह है कि जो राइटर है, वह खुद लिखता है कि अगर इस किताब में कोई मिस्टेक है तो इस इदारे को इन्फ़ॉर्म करें, नेक्स्ट एडिशन में हम उसको ठीक कर देंगे। क़ुरान में अल्लाह ताला क्या बोलता है? लिकल किताब, ला एडिशन। क्या इस किताब में शक की गुंजाइश नहीं है? ठीक है। तो यह कुरान का एक बहुत बड़ा फ़र्क है। और भी कोई जवाब? सर जी, आप बताएँ। माशाल्लाह। इसको पढ़ने से क्या मिलती है? क्या मिलती है? मुझे पैसों की आवाज़ भी समझ आई है। हिदायत मिलती है और नेकियाँ मिलती हैं। पैसे इससे कह सकते हैं, लेकिन अभी वह सब्जेक्ट उस तरह नहीं है। तो इससे क्या मिलती है? नेकियाँ। कितनी नेकियाँ मिलती हैं? 10 नेकियाँ। क्या क्राइटेरिया? 10 नेकियाँ किस तरह मिलेंगी? ठीक है। हर हरफ़ पर 10 नेकियाँ। अब मुझे बताएँ, अलिफ़ लाम मीम पढ़ते हुए कितनी नेकियाँ मिलेंगी? 30। चलिए, अब हम खोलते हैं इसके, कुरान को बंद करते हैं और एक किताब खोलते हैं फ़िज़िक्स की। उसमें आप एक लॉ पढ़ते हैं, वह पढ़ने में कितना आपको अज़र मिलेगा? ज़ीरो। कोई नेकी नहीं मिलेगी। ठीक है? 60 पेज की बुक होती है, 100 पेज की बुक होती है, नेकियाँ कोई मिलेंगी नहीं। मिलेगी? लेकिन कुरान को आप पढ़ेंगे तो नेकियाँ मिलेगी। दुनिया की कोई किताब, बग़ैर समझे पढ़ेंगे, फ़ेल हो जाएँगे। एग्ज़ाम होगा, आप फ़ेल हो जाएँगे। बर समझे पढ़े। यही एक ही तरीक़ा पास होने का। चीटिंग कर लें। लेकिन कुरान ऐसी किताब है कि इसको लोग बग़ैर समझे भी पढ़ें तो अल्लाह ताला उस पर भी अज़र दे देता है। जो समझ के पढ़ते हैं, उसको और ज़्यादा अज़र मिलता है, लेकिन जो बग़ैर समझे भी पढ़े, अल्लाह उनको भी इस पर अज़र दे देता है। ठीक है? और आख़िरी बात इस सब्जेक्ट के हवाले से, आज हमने बताना है कि जो कुरान मज़ीद अल्लाह ताला ने नाज़िल किया ना, इसके अल्लाह ने हम पर पाँच हुक़ूक रखे। कुरान के हम पर कितने हुक़ूक हैं? पाँच। अच्छा, इस जुमले का क्या मतलब है? पहले मुझे यह कोई एक्सप्लेन कर सकते हैं कि कुरान के पाँच हुक़ूक हैं हम पर, क्या मतलब है इसका? कि यह जो पाँच चीज़ें होंगी, वह किसने करनी हैं? वह हमने करनी हैं। वह राइट किसका है? वह हक़ किसका है? कुरान का है। ज़िम्मेदारी किसकी है? इंसान की है। रिस्पॉन्सिबिलिटी किसकी है? वह इंसान की। ठीक है। उर्दू, इंग्लिश में बोलें ताकि सबको समझ आ जाए। हक़ किसका है? कुरान का। ज़िम्मेदारी इंसानों की है। पहला हक़ क्या है? थोड़ा उससे पहले, उससे पहले ईमान। माशाल्लाह। सबसे पहला हक़ इस किताब पर ईमान लाना है। क्या ईमान लाना है? हमने यह किताब हक़ है अल्लाह ताला की तरफ़ से, इसमें कोई शक नहीं है। दूसरा हक़ क्या है? उससे पहले, उससे समझने से पहले एक स्टेप है। नहीं, बाज़ू उसका हक़ नहीं है, यह बाद में है, उससे पहले स्टेप है। तिलावत करना। माशाल्लाह। पढ़ना उस किताब को। यह दूसरा हक़ है कुरान का, उसको आप पढ़ें। तीसरा हक़ क्या है? अभी आपका जवाब बनेगा। समझकर पढ़ें। कुछ अक्सर लोग ख़ाली पढ़ते हैं, बहुत कम लोग होते हैं जो क्या करते हैं? समझकर पढ़ते हैं। तो तीसरा हक़ यह है, समझकर पढ़ें। चौथा क्या है? अमल करना। माशाल्लाह। और पाँचवाँ? आगे फैलाना। यह जो चार नेमत अल्लाह ताला ने आपको तौफ़ीक़ दे दी ना कि आपने ईमान भी लिया है, पढ़ भी लिया, समझ भी लिया, अमल भी कर लिया, अब इसको आगे लोगों तक फैलाएँ। तो यह पाँच हक़ हैं कुरान के। इसको नोट कर लें, हो सकता है इम्तिहान में सवाल आ जाए। हम इंशाल्लाह कोशिश करेंगे आने वाले जुम्मे तक आपको बुक्स भी दे दें। तो आज के हवाले से हम इतना ही आपके सामने रखते हैं। चीज़ें आपको सही से समझ आ गई? कोई उसमें डाउट तो नहीं है? कोई मुश्किल चीज़ तो नहीं थी? इंशाल्लाह हमारी क्लासेज़ जो हैं, वह इसी तरह होंगी। अभी अगले सब्जेक्ट के लिए डॉक्टर नबील आ चुके हैं, तो हम तफ़सीर का सब्जेक्ट आज हमारा यही होगा। आने वाले जुम्मे हम इंशाल्लाह इसको कंटिन्यू करेंगे। तो अभी आपका तीसरा सब्जेक्ट होगा अक़ीदा के हवाले से। ठीक है? बारकल्लाह फ़ीकुम। जज़ाकल्लाह ख़ैर।