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क्या अपना सेकंड होम कहे जाने वाला दुबई अब अनसेफ दुबई बन गया?
इजराइल, अमेरिका वर्सेस ईरान की लड़ाई में जब खामनोई का कत्ल हुआ और फिर ईरान ने पलटवार किया, उसने दुनिया को हिला कर रख दिया और पहली बार दुबई ने डर से। क्योंकि एक वक्त था जब लोग अपनी दौलत और सपनों को सुरक्षित रखने के लिए सीधे दुबई भागते थे। आप दुनिया में कहीं रहते हों, लोग कहते थे कि दुबई में एक घर तो होना ही चाहिए। जिंदगी क्या है, वहीं पर नजर आती है।
लेकिन जब दुबई के आसमान में मिसाइलों की चमक और धमाकों की गूंज आई, तो यह सवाल उठा कि क्या दुनिया का सबसे सुरक्षित माने जाने वाला शहर अब युद्ध में फंस गया है? क्या वहां भी डर आ गया है? वो डर जो इन्वेस्टर्स को डरा रहा है, वो डर जो छात्रों को डरा रहा है, वो डर जिससे कलाकार, जिससे फनकार और जिससे तमाम क्रिकेटर्स डर रहे हैं।
डरना चाहिए, क्योंकि पाम जुमेरा जैसे वीवीआईपी इलाकों में मिसाइलों के मलबे मिले हैं। मिसाइलों के गूंजने की आवाज, आसमान में मिसाइलों का दिखना, यह सबको दिख रहा है। यह अलग बात है कि दुबई की सरकार ने सेंसरशिप लगा दी है। यह कहा है कि अगर कोई वीडियोस को वायरल करेगा, तो जो वायरल करेगा उसे अफवाह फैलाने के नाम पर दुबई से हटा देंगे। उस पर लाखों डॉलर का जुर्माना ठोक देंगे।
लेकिन सच यह भी है कि इस सेंसरशिप के बीच में भी वो सेलिब्रिटीज, वो अमीर लोग जो कल तक दुबई की शान को दिन रात इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते थे, आज अपने-अपने देश की सरकारों से हाथ जोड़कर कह रहे हैं कि साहब, हम यहां फंस गए हैं। चाहे वो जॉनी बैरिस्टो हों, चाहे वो भारत के तमाम एक्टर्स-एक्ट्रेस हों, चाहे वो पीवी सिंधु हों, तमाम लोग हैं जो हाथ जोड़ रहे हैं, कह रहे हैं प्लीज हमें बुला लो। इनके घर वाले चिंतित हैं। अमीरों से ज्यादा चिंतित वो गरीब लोग हैं जो दुबई में काम करने गए थे। क्योंकि हिंदुस्तान के 35 लाख लोग ऐसे हैं जिनकी जान दुबई में अटकी है। और इसीलिए सवाल है कि भले ही वीडियोस ना आ रहे हों, लेकिन दुबई से जो यह डर निकल कर आ रहा है, क्या यह डराने वाला है? क्या दुबई भी अब पूरी तरह सेफ नहीं है? यह सवाल बड़ा महत्वपूर्ण है।
आज दुबई की हम बात करेंगे। लेकिन इस बात की शुरुआत हम करें, इससे पहले हमारी फिर से आपसे गुजारिश है कि आप हमारे व्हाट्सएप चैनल को जरूर सब्सक्राइब करें। हमने कमेंट सेक्शन में, डिस्क्रिप्शन में अपना व्हाट्सएप चैनल का लिंक जो है, वो दे रखा है। आप जुड़ेंगे, हमारी ताकत बढ़ेगी, हम आप तक वीडियोस पहुंचाएंगे।
अब सवाल दुबई के सेफ अनसेफ होने को लेकर। देखिए, रिपोर्ट्स कहती है कि 28 फरवरी से जो हमला शुरू हुआ, उसमें ईरान ने यूएई की तरफ सैकड़ों मिसाइल, ड्रोन डाले। दुबई का डिफेंस सिस्टम जो है, वो मजबूत है। अमेरिका और इजराइल की मदद से 90 से ज्यादा हमलों को उसने हवा में ढेर कर दिया। लेकिन असली समस्या हवा में नष्ट हुई मिसाइलों के भारी भरकम मलबों को लेकर है, क्योंकि वो शहर के ऊपर गिरा है। पाम जुमेरा के फेराब होटल के पास मलबा गिरने से आग लग गई, जिसे बाद में बुझाया गया। बुल अर्ज अरब होटल की बाहरी दीवारों के पास भी नुकसान दिखाई पड़ा और बड़ी चिंता जो है, वो जेबल अली पोर्ट को लेकर है, जहां धमाकों और मलबों की वजह से कामकाज रुक गया, व्यापार की रफ्तार धीमी हो गई। दुबई एयरपोर्ट के पास जो मलबा गिरा, रनवे प्रभावित हुआ, उसमें चार कर्मचारियों के घायल होने की खबरें आई।
अब तक जो आंकड़े आए हैं, उसके मुताबिक तीन लोगों की मौत हुई है, 58 लोग घायल हैं। शहर चल रहा है, लेकिन आसमान से गिरता यह मलबा सुरक्षा पर सवाल उठा रहा है। और ईरान, जिसके पास अब हारने को कुछ नहीं है, वो अमेरिका के खास सभी देशों पर हमला कर रहा है और उसमें दुबई भी है। और यहीं से डर का सवाल शुरू होता है, क्योंकि दुबई में भारत के करीब 35 से 38 लाख भारतीय रहते हैं। और यह वो भारतीय हैं जो बार-बार हिंदुस्तान आकर कहते थे कि भैया, दुबई चलो। हिंदुस्तान में कुछ नहीं रखा है। दुबई में हमारे यह है, दुबई में हमारे वो है, दुबई हमारा ऐसा है, दुबई हमारा ऐसा है। लेकिन अब दुबई सेफेस्ट कंट्री कहने वाले लोग परेशान हो रहे हैं और उनमें भी सबसे ज्यादा मजदूर और छात्र परेशान हो रहे हैं। लेबर कैंप्स में डर का माहौल है, क्योंकि सुरक्षा कारणों से कई बड़े प्रोजेक्ट्स का काम रोक दिया गया है। खाने-पीने की कमी तो नहीं है, लेकिन डर के मारे लोग राशन जमा कर रहे हैं, जिससे सप्लाई में दिक्कत आ रही है। इनफैक्ट, पुणे के 84 छात्र जो स्टडी टूर पर दुबई गए थे, वो उड़ानों की पाबंदी, एयरस्पेस बंद होने की वजह से फिलहाल होटलों में फंसे हैं। करीब 700 उड़ाने रद्द या लेट होने से एयर इंडिया और इंडिगो जैसी एयरलाइंस का पूरा शेड्यूल बिगड़ा है और हजारों भारतीय सैलानी एयरपोर्ट पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। भारत सरकार इस पर नजर रखे हुए है। जरूरत पड़ने पर नागरिकों को निकालने के लिए इवाकेशन प्लान को भी तैयार कर रही है।
लेकिन सवाल यह है कि अब वो जो सेफ्टी दुबई में महसूस हो रही थी, वो इस युद्ध ने क्या अनसेफ फील करा दी? एक सवाल और लोगों के मन में आ सकता है कि ईरान के निशाने पर आखिर दुबई क्यों है? तो देखिए, एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि ईरान का असली निशाना अमेरिका और उसके ठिकाने हैं। लेकिन दुबई अपनी लोकेशन की वजह से इस जंग के लपेटे में आ गया। ईरान का यह तर्क है कि दुबई के पोर्ट और दूसरी आधुनिक सुविधाओं का इस्तेमाल अमेरिकी सेना जो है, वो अपनी लॉजिस्टिक और खुफिया जानकारी के लिए करती है। ईरान ने साफ चेतावनी दी कि जो भी देश अमेरिका या इजराइल को रणनीतिक मदद देंगे, वो खतरे में रहेगा। इसीलिए ईरान ने दुबई को एक सॉफ्ट टारगेट के तौर पर देखा। हालांकि ईरान सीधे तौर पर घरों या फिर रिहाइशी इलाकों पर हमला नहीं कर रहा, लेकिन डिफेंस सिस्टम द्वारा मिसाइलों को हवा में नष्ट करने के बाद जो मलबा गिर रहा, उसने शहर के रिहाइशी इलाकों को नुकसान पहुंचाया।
निवेशकों का जो अनमैच भरोसा था, वो थोड़ा डगमगाने लगा है और दुबई में घर खरीदने वाले लोगों की जो तमन्ना थी, वो वेट एंड वॉच की स्थिति ठ गई है। दुबई की पूरी चमक वहां के आलीशान रियल एस्टेट पर टिकी है, लेकिन इन तनाव ने निवेशकों के भरोसे को सुस्त किया है। जो लोग यहां सेकंड होम खरीदने वाले थे, वो फिलहाल वेट एंड वॉश में हैं। रियल एस्टेट मार्केट में फिलहाल एक पॉज दिख रहा है। नई बड़ी खरीदारी फिलहाल कम हुई है। बड़े विदेशी निवेश और नए प्रोजेक्ट्स पर कोई क्रैश तो नहीं आया, लेकिन रफ्तार जरूर धीमी पड़ी है। कई डेवलपर्स ने अपनी नई घोषणाओं को टाल दिया है।
होटल इंडस्ट्री और टूरिज्म पर बड़ा इंपैक्ट पड़ा है, क्योंकि सुरक्षा और फ्लाइट की कमी की वजह से सैलानी कम आ रहे हैं। और अगर यह अनिश्चितता लंबे समय तक बनी रही, तो दुबई की इकॉनमी के लिए अपनी पुरानी रफ्तार को बरकरार रखना भी एक बड़ी चुनौती होगा। इधर जेविल अली पोर्ट पर कामकाज प्रभावित होने से सप्लाई चेन पर दबाव दिखा। दुबई अपनी ज्यादातर जरूरतों के लिए इंपोर्ट पर निर्भर करता है, इसलिए पोर्ट या एयरपोर्ट पर अगर कोई रुकावट होती है, तो वो वहां के बाजार को प्रभावित करती है। बंदरगाह का काम धीमा होने की वजह से जरूरी चीजों की सप्लाई में अड़चन आती है। दुकानों में सामान की भारी कमी तो नहीं, लेकिन लोग पैनिक कर रहे हैं, सामान इकट्ठा कर रहे हैं, क्योंकि वो जानते हैं कि ईरान कुछ भी कर सकता है। इसीलिए शायद डर पैदा हो रहा है कि युद्ध कितना लंबा जाएगा और इसकी वजह से कीमतों में उछाल भी देखने को मिलेगा। दूध, ब्रेड, ताजी सब्जियों के दाम कुछ जगहों पर बढ़ गए हैं। कई जगह भविष्य में और बढ़ सकते हैं। लेकिन इन सबके बीच में दुबई में आम परिवारों और मजदूरों के लिए खर्चों को मैनेज करना मुश्किल होगा। प्रशासन हालांकि सप्लाई बनाए रखने के लिए कोशिशें कर रहा है, लेकिन युद्ध के डर ने बाजार की मनोवैज्ञानिक स्थिति को बिगाड़ा है।
कुल मिलाकर कहें तो दुबई के लिए अस्तित्व और साख की लड़ाई है। एक तरफ दुबई प्रशासन अपने ग्लोबल इमेज को बचाने के लिए सूचनाओं के प्रचार पर सख्त पाबंदी लगा चुका है। सोशल मीडिया पर हमले की तस्वीर या मलबे की तस्वीरें डालना उसके लिए भारी जुर्माना और जेल की सजा दिला सकता है। दूसरी तरफ अपने एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए वो यह कोशिश भी कर रहा है कि हम काफी अपडेटेड हैं। लेकिन सच यह भी है कि युद्ध के दौर में 100% सुरक्षा मुमकिन नहीं होती। आज दुबई अपने अस्तित्व की एक अलग लड़ाई लड़ रहा है। जो शहर कल तक सुरक्षित स्वर्ग था, वो आज युद्ध की अनिश्चितताओं के बीच में अपनी साख को बचाने की कोशिश कर रहा है।
भविष्य अब कूटनीति पर निर्भर है? क्या दुबई फिर से वही चमक हासिल कर पाएगा या महाशक्तियों के इस जंग में अपनी वैश्विक पहचान को वो खो देगा? क्या इजराइल, अमेरिका, ईरान के युद्ध में दुबई सैंडविच बन जाएगा? यह सवाल बड़ा महत्वपूर्ण है।
क्या आपका भी कोई अपना दुबई में फंसा है? क्या उन्हें भी वहां डर लग रहा है? क्या वो खुलकर जो बात फोन पर आपसे कहते हैं, वो बात वीडियोस के जरिए सोशल मीडिया पर डाल पा रहे हैं, या आप मान रहे हैं कि दुबई का पीआर और दुबई प्रशासन की सख्त चेतावनियों ने दुबई की खबरों को फिलहाल सेंसरशिप कर रखा है? कमेंट सेक्शन में अपना फर्स्ट हैंड एक्सपीरियंस बताएं और हमारे व्हाट्सएप चैनल से जरूर जुड़ें। नमस्ते।