Transcription
[संगीत] [हंसी] हेलो। डीएम ऑफिस कंट्रोल रूम। इंस्पेक्टर विक्रम बात कर रहा हूं।
हेलो कौन है भाई? डरो मत। अरे बताओ क्या बात है? तुम रो क्यों रहे हो?
साहब मैं रामदीन बोल रहा हूं। रामपुर गांव का एक किसान हूं साहब। मैं लूट गया। जीते जी मर गया साहब।
रामदीन, शांत हो जाओ। पूरी बात बताओ। किसने क्या किया?
साहब मेरी घरवाली बहुत बीमार है। मैं उसके लिए शहर दवा लेने जा रहा था। मेरे पास ₹5,000 थे जो मैंने बहुत मुश्किल से जोड़े थे। लेकिन गांव के बाहर पक्की सड़क वाले मोड़ पर जो नया दरोगा बैठा है उसने चेकिंग के नाम पर मुझे रोका। उसने मेरी जेब की तलाशी ली और सारे पैसे निकाल लिए। जब मैंने गिड़गिड़ाया कि यह मेरी पत्नी की दवा के पैसे हैं। तो उसने मुझे धक्का दे दिया। और कहा कि यह इस सड़क पर चलने का टैक्स है। मैंने कहा साहब मेरे पास कागज पूरे हैं। लेकिन उसने मेरी एक ना सुनी। साहब वो केवल पैसे नहीं लेता। वो उस रास्ते से जाने वाली औरतों को गंदी नजरों से देखता है। उन पर फतियां कसता है। हम गरीब लोग हैं साहब। किससे शिकायत करें? अगर मैं वापस गया तो वो मुझे मार डालेगा।
रामदेव, तुम अब रोना बंद करो। तुमने सही जगह फोन किया है। मैं वादा करता हूं तुम्हारे आंसू बेकार नहीं जाएंगे। तुम घर जाओ और अपनी पत्नी का ख्याल रखो। इंसाफ होगा और बहुत जल्द होगा।
यू मे एंटर। जय हिंद।
मैडम, माफी चाहता हूं लेकिन खबर ही ऐसी है। अभी-अभी कंट्रोल रूम में एक किसान का फोन आया था। वो आपके ही पैतृक गांव रामपुर के पास का रहने वाला है।
मेरे गांव से? क्या हुआ? सब ठीक तो है?
मैडम, रामपुर और शहर को जोड़ने वाली पक्की सड़क पर जो पुलिस चौकी है, वहां तैनात दरोगा बलवंत सिंह के खिलाफ शिकायत मिली है। उसने एक गरीब किसान से दवा के ₹5,000 छीन लिए। चेकिंग तो बस एक बहाना था। असल में वो वसूली कर रहा था। और बात सिर्फ पैसों की नहीं है मैडम।
रुकिए मत इंस्पेक्टर। पूरी बात बताइए।
मैडम, शिकायत यह भी है कि वो दरोगा उस रास्ते से गुजरने वाली महिलाओं के साथ बदतमीजी करता है। अभद्र भाषा का प्रयोग करता है और उन्हें परेशान करता है। गांव वाले डरे हुए हैं। उन्हें लगता है कि वर्दी वाला है तो उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
मेरे जिले में मेरे ही गांव के पास एक सरकारी मुलाजिम जनता का रक्षक बनने के बजाय भक्षक बन गया है।
इंस्पेक्टर विक्रम, गाड़ी तैयार करवाइए।
जी मैडम। मैं अभी फोर्स को अलर्ट करता हूं और एस्कॉट तैयार करवाता हूं।
फोर्स नहीं जाएगी विक्रम। और ना ही कोई एस्कॉट जाएगा। ठीक है। मुझे हाथों पकड़ना है। मुझे वो देखना है जो एक आम आदमी देखता है।
तो आप क्या करेंगी मैडम?
वो इलाका सुनसान है और वो दरोगा बदमाश किस्म का है।
चिंता मत करो इंस्पेक्टर। मुझे अपनी मां से मिले बहुत दिन हो गए हैं। मैं आज एक डीएम बनकर नहीं बल्कि रामपुर की बेटी बनकर अपने घर जाऊंगी। एक आम महिला जो अपनी बीमार मां को देखने जा रही है।
लेकिन मैडम, मैं आपको अकेले नहीं जाने दे सकता।
प्रोटोकॉल जनता की सेवा के लिए होते हैं विक्रम। जनता से दूर रहने के लिए नहीं। मुझे मेरी [संगीत] प्राइवेट गाड़ी वाइट स्कर्पियो चाहिए। और हां किसी को कानों कान खबर नहीं होनी चाहिए कि मैं कहां जा रही हूं।
और जी मैडम। आपके आदेश का पालन होगा। आज फैसला होगा। आज उस किसान के हर एक आंसू का हिसाब होगा।
[संगीत] [संगीत]
मां। मां। ओ मां। ओ मां। ओ मां।
दोपहर का समय है। [संगीत] [संगीत] हालेलुया। [संगीत] [संगीत] [संगीत]
मां। मां। मां। अदिति। दी। मेरी बच्ची। कब आई तू? बताया भी नहीं। मैं तो बस तुझे याद ही कर रही थी।
बस अभी आई हूं मां। घर गई थी तुम नहीं मिली तो समझ गई कि मेरी मेहनती मां खेतों में ही होगी। अब तुम आराम करो। बाकी के आलू मैं खोद दूंगी।
नहीं नहीं रहने दे। नहीं मां। अब मेरा ही समय है।
ठीक है। पर ध्यान से।
अरे नहीं नहीं तू रहने दे। तू इतनी बड़ी अफसर है। तेरे कपड़े गंदे हो जाएंगे।
नहीं मां। नहीं। अफसर दफ्तर में हूं मां। यहां तो है यहां तो मैं तुम्हारी बेटी हूं।
अरे छोड़ो भी मां। बुआ जी की तो आदत है तिल का ताड़ बनाने की। तुम क्यों परेशान होती हो? [हंसी]
मां। अब घर चलें। यह आलू गाड़ी में रख लेते हैं।
चल बेटा हो गया काम। ध्यान से मां। यह वाली थोड़ी भारी है।
बस आ गई। चलो मां तुम आगे बैठो। अब घर चलते हैं। चलो। अब घर चलकर गरमा गरम चाय पिएंगे।
अरे अरे बेटी उधर कहां जा रही है?
क्यों मां? यह रास्ता तो छोटा है ना। इससे हम जल्दी पहुंच जाएंगे।
[संगीत] नहीं बेटी उस रास्ते से मत जा। वहां। वहां वो पुलिस चौकी है। वहां का दरोगा बहुत बुरा है।
क्या हुआ मां? बताओ मुझे।
बेटी वो पुलिस वाला नहीं गुंडा है। वो लोगों को रोकता है। उनसे बिना वजह पैसे वसूलता है। और अगर कोई सुंदर औरत या लड़की उस रास्ते से गुजरती है तो वो वो बहुत गंदी बात।
मां क्या उस दरोगा को कोई रोकता नहीं?
कौन रोकेगा बेटी? वो वर्दी वाला है। उसके पास पिस्तौल है। सब डरते हैं। तू कच्ची सड़क से [संगीत] चल। भले ही देर हो जाए पर।
मां अगर हम डर कर रास्ता बदल लेंगे तो वो रास्ता कभी साफ नहीं होगा। आज मैं हूं ना तुम्हारे साथ। तुम डरो मत। विश्वास रखो मां। आज उस रास्ते से हम ही जाएंगे। मैं भी तो देखूं कि किसकी मजाल है जो मेरी मां के सामने आंख उठाकर भी देखे।
साहब वाह। देखो ओ एक सफेद गाड़ी आ रही है। लगता है कोई बड़ा मुर्गा है। आने दो। आज की बोहनी इसी से करते हैं। गाड़ी तो बड़ी महंगी है। खेती करके खरीदी है या कुछ और धंधा है?
साहब जाने दीजिए। हमें घर जाना है। आलू।
ये क्या नौटंकी है? हमें बेवकूफ समझते हो?
नहीं सर। ऐसा नहीं है। [हंसी] [हंसी] यस दैट [हंसी]
साहब ऐसा मत करो। बहुत मेहनत से उगाए हैं।
देख लिया? [संगीत] अब भी 5000 नहीं देगी तो अगला नंबर तेरा है।
मैं एक पैसा नहीं दूंगी। तुमने जो किया है वो कानूनन जुर्म है।
साली। ओ मुझे कानून सिखाएगी? अब तो तुझे पैसे देने पर भी नहीं छोडूंगा। पकड़ो इसे और इस बुढ़िया को भी। दोनों को जीप में डालो। आज रात ये थाने में गुजारेंगी।
नहीं। मेरी मां को छोड़ दो। हाय राम, हमें कहां ले जा रहे हो?
साहब, लेडीज हैं, कोई महिला सिपाही नहीं है।
तुझे बड़ा कानून पता है? जो मैं कहूं वही कानून है। डालो इन्हें गाड़ी में।
छोड़ो मुझे। तुम मुझे हाथ नहीं लगा सकते।
बस करिए मैडम। चलिए।
क्या कर रहे हो? बेटी, मैंने कहा था ना उस रास्ते से मत जाना।
मैंने सुना। मां, मैं समझती।
नहीं तू नहीं समझती वो तुझे। क्यों मैडम? क्यों मैडम? निकल गई हेकड़ी। अब थाने चल के तेरी अच्छी तरह खातिरदारी करेंगे।
रो मत मां। बस थोड़ी देर और। इनका पाप का घड़ा भर चुका है।
चलो अंदर।
हमने कुछ नहीं किया।
चुप रहो। आगे देखो।
मैं मर जाऊंगा। डाल दो इनको लॉकअप में। जब तक अकल ठिकाने नहीं आती वहीं सड़ने दो।
नो प्लीज लेट अस गो। अदिति। आई एम स्केर्ड। व्हाई आर यू डूइंग दिस?
अभी तो शुरुआत है मैडम। रात बाकी है। सोच लो। अगर अब भी माफी मांग लो और जुर्माना भर दो तो शायद छोड़ दूं। वक्त तुम्हारा है लेकिन याद रखना हर रात की सुबह जरूर होती है।
पागल हो गई है डर के मारे। [हंसी] बेटी अब क्या होगा? ये लोग हमें छोड़ेंगे नहीं। मैंने कहा था ना हम गरीब लोग हैं।
चिंता मत करो मां। मैं हूं ना तुम्हारे। मां झुकते वो हैं जो गलत होते हैं। हम सही हैं। और रही बात गरीबी की तो आज रात ये भ्रम भी टूट जाएगा।
ले खा ले। सरकारी मेहमान हो भूखा तो नहीं मारेंगे। वैसे भी सुबह कोर्ट में पेशी होगी। जज साहब पूछेंगे तो कह देना कि दरोगा जी ने बहुत खातिरदारी की।
दरोगा बलवंत सिंह, तुम्हें आखिरी मौका दे रही हूं। ताला खोलो माफी मांगो। शायद तुम्हारी नौकरी बच जाए।
अरे ओ महारानी [हंसी] है। कल सुबह तुझ पे सरकारी काम में बाधा डालने का ऐसा केस बनाऊंगा कि पूरी जिंदगी कोर्ट के चक्कर काटती रहेगी। तेरा वो अहंकार कल सुबह तक निकाल दूंगा मैं।
मेरा अहंकार नहीं, तुम्हारी वर्दी का गुरूर टूटेगा। और वो कल नहीं, आज ही, अभी।
हेलो। हेलो। रामपुर थाना। साहब। साहब। क्या है बे? नहीं नहीं मैं बात कर रहा हूं साहब। साहब। एसपी साहब का फोन है।
क्या है बे? जय हिंद सर। दरोगा बलवंत सिंह बोल रहा हूं।
बलवंत, तुम्हारे थाने में अभी कोई महिला है?
जी जी सर। एक औरत है हंगामा कर रही थी पुलिस पे हमला किया इसलिए अरेस्ट किया है।
बेवकूफ। तुमने जिसे अरेस्ट किया है जानते हो वो कौन है? इतनी फोर्स किसके लिए है?
मैडम। मैडम आप ठीक तो हैं? चाबी दे साले।
यू अंडरएस्टेटेड मी। इंस्पेक्टर बलवंत सिंह। पढ़ना आता है? दरोगा जी। डी डी डी एम साहब। जय हिंद मैडम।
मैडम मैडम मुझे माफ कर दीजिए। मुझे नहीं पता था। मैं मर जाऊंगा। मेरे बीवी बच्चे हैं।
ये गलती नहीं है बलवंत सिंह। ये अपराध है। पाप है।
मेरी मां आप सुरक्षित हैं। अदिति। मेरी बच्ची।
जब एक गरीब किसान गिड़गिड़ाता है तब तुम्हें उसके बीवी बच्चे याद नहीं आते? जब तुम एक बुजुर्ग महिला के आलू सड़क पे फेंकते हो तब तुम्हें शर्म नहीं आती?
मैडम। अगर मैं सच में एक साधारण औरत होती तो क्या तुम माफी मांगते?
नहीं। तुम मुझे नोच खाते। इस आदमी की वर्दी अभी। इसी वक्त उतरवाइए। यह वर्दी पहनने के लायक नहीं है। यह पुलिस विभाग पर एक कलंक है।
लेट गो ऑफ मी। हाउ डेयर यू टच मी। यू विल ऑल पे फॉर दिस।
चलो मां, घर चलते हैं। बहुत काम बाकी है। सरकारी जीभ से इन्हें घर तक छोड़ा जाए और इनकी पत्नी की दवा का इंतजाम किया जाए। हम्म।