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2021 में यह कंपनी हर जगह था। कपिल देव साहब, पुराने सिंगर्स, क्रिकेटर्स और हमारे जैमी साहब, फेवरेट राहुल द्रविड़ भी चिल्ला रहा था, "इंदिरा नगर का गुंडा हूं मैं।" ये क्रेड ही कर सकता था। एक टाइम पे डार्लिंग्स ऑफ इंडियंस। लोग कुणाल शाह के पीछे पागल थे कि क्या बनाया है? 6 बिलियन डॉलर से ज्यादा वैल्यू्यूएशन और आज कंपनी स्ट्रगल कर रहा है। मालूम है क्यों? क्योंकि उनके पास बिजनेस मॉडल नहीं है और इंडिया का रेगुलेशन हो रहा है स्ट्रिक्ट।
आज हम डिकोड करेंगे कि भाई कैसे क्रेड अपने आप को ल्च करता है। कौन सा प्रॉब्लम सॉल्व करता है मार्केट में और प्रॉब्लम सॉल्व करने के बाद आज शायद वो रास्ता खो गया है। इट इज लॉस्ट एंड इट इज मेकिंग ह्यूज लॉसेस। यानी 6.5 बिलियन डॉलर के वैल्यू्यूएशन के बावजूद भी दोस्तों, 1600 करोड़ का लॉस हर साल करना सभी को अफोर्ड नहीं कर सकते। तो क्रेड का जन्म क्या हुआ? क्रेड और Paytm में क्या सिमिलरिटीज थे? CD ने क्या अच्छे चीजें किए? कितने यूज़र्स एक्वायर किए? क्या प्लान था? कैसे फंड रेिंग किया और आज क्रेड क्यों स्ट्रगल कर रहा है? यह पूरा डिकोड करेंगे आज ये क्रेड के बिनेस केस स्टडी में।
लेकिन केस स्टडी स्टार्ट करने से पहले, मैं हूं आप सभी का फेवरेट बसेश गाला, बिजनेस मेंटोर एंड इन्वेस्टर। मेरे तरफ से आप सभी को जय सियाराम, राधे-राधे, जय जिनेंद्र।
[संगीत]
अब अंडरस्टैंड करते हैं कुणाल शाह। यह आदमी है क्रेजीनियस। बहुत अच्छा नेटवर्क है। लोग उसे पसंद करते हैं। पहले भी उसने एक कंपनी बनाया था जिसका नाम था फ्री चार्ज। अब ये कंपनी क्या करता है? एक जमाना था, क्रेज था कि भाई मोबाइल का रिचार्ज कर लो प्रीपेड का। और मोबाइल का रिचार्ज था बोरिंग। ये रिचार्ज करने पे अगर आपको कुछ कूपों्स मिल जाए, समझो कोई पिज़्ज़ा का कूपन या गिफ्टिंग का कूपन, कॉलेज के टारगेट और यूथ को यह पसंद था। भाई फ्री चार्ज पे आप रिचार्ज कर लो और 10, 20, ₹30 का एक्स्ट्रा कूपन ले लो और वो रिडीम कर लो। ब्रांड्स को भी अच्छा लगता था कि भ हमारा मार्केटिंग हो रहा है। और यह बिज़नेस मॉडल में कुणाल शाह ने बहुत मिलियंस ऑफ़ डॉलर्स खड़े किए।
लेकिन टाइम चेंज हुआ, जज्बात बदल गए, कंपनी हो गई बंद। लेकिन कुणाल शाह ने अपनी गुडविल तो बना ली कि ये आदमी को आता है। और इसने जैसे ही क्रेडिट स्टार्ट किया, आईडिया बहुत वेग था। डे वन से लोग बोल रहे थे कि भ ये कर क्या रहा है? बहुत वेग है। लेकिन इन्वेस्टर्स को मालूम था कि भ ये इनका पैसा डबल करके देगा। तो उसको मिल गया वैल्यूएशन।
क्रेडिट का प्रॉमिस एक ही था। मुझे इंडिया को सर्व नहीं करना है। टारगेट ऑडियंस बहुत क्लियर था। मुझे सिर्फ 1% रिच इंडियंस को सर्व करना है। जो लग्जरी एंजॉय करते हैं, जो ट्रैवल करते हैं, जो इंटरनेशनल घूमते हैं, जो बहुत स्पेंड करते हैं, स्वाइप करो, जीते जाओ। और ये लोगों के अंदर मुझे डिसिप्लिन बिल्ड करना है और मुझे जो एस्पिरेशनल मिडिल क्लास है, जो कूल दिखना चाहता है, उनको भी फाइनेंसियल डिसिप्लिन में लाना है। उनको एनश्योर करना है कि वो क्रेडिट कार्ड यूज़ करें। क्रेडिट कार्ड टाइम पे भरे और यह बिहेवियर के बाद मेरे पास देश के बेस्ट फाइनशियल डिसिप्लिन अपर मिडिल क्लास रिच क्लास का डाटा रहेगा और उससे मैं कमाऊंगा।
क्रेट का बिज़नेस मॉडल था, वाओ! और उसने कैसे किया? गेमिफिकेशन किया। भाई इंडिया में जबभी भी कोई ल्च करता है, इंडियंस का दिल जीतने का सबसे सिंपल तरीका है कैशबैक, कॉइंस और गेम खिलाओ। और क्रेडिट ने वही किया। आप क्रेडिट कार्ड भरो। जितने का क्रेडिट कार्ड का बिल भरते हो, उतना आपको कॉइंस मिलता है। वो कॉइंस आप कैशबैक में या गिफ्ट में या कूपंस में यूज़ कर लो। अब ब्रांड्स आ गए सब साथ में, क्योंकि उनके लिए मार्केटिंग है। बैंक्स आ गए ऑनबोर्ड, क्योंकि क्रेडिट कार्ड उनका सेल बढ़ेगा। पेमेंट्स ऑन टाइम होगा। डिस्कवरी बढ़ेगा और क्रेड बीच पे बहुत खुश था।
और यह करने के लिए इमेजिन करो: ₹1 के रेवेन्यू के लिए, क्रेड ₹730 अप्रोक्सिममेटली लॉस कर रहा था। प्रॉफिट नहीं, रेवेन्यू के लिए ₹730 लॉस इन मार्केटिंग, इन CAC (कस्टमर एक्विजेशन कॉस्ट)! यानी पहले 2 साल का रेवेन्यू 50 लाख के अंदर था और लॉसेस करोड़ों में: मोर देन 300-400 करोड़, 387 करोड़ के आसपास का लॉस। क्रेजी! लेकिन लोगों को लगा, भाई प्रॉमिस है इसमें, प्रॉमिस है। और क्रेड ने धीरे-धीरे करके अग्रेसिव मार्केटिंग करके, खास करके आईपीएल में फनी एड्स डाल के, डिजिटल पे अग्रेसिवली इन्फ्लुएंसरर मार्केटिंग करके, क्रेड ने 'हा' मोमेंट लगा दिया। काफी लोग बोल रहे थे कि भ इनका बिज़नेस मॉडल क्या है, बट वो बहुत श्रूडली बोल रहा था: देश के टॉप 1% लोग मेरे पास है, उनका डेटा मेरे पास है, उनका परचेसिंग पैटर्न मेरे पास है। मैं उनसे मोनेटाइज कर लूंगा।
देखते ही देखते 13 मिलियन एक्टिव यूज़र्स, यानी 1 करोड़ 30 लाख यूज़र्स, क्रेडिट पे आ गए। भारत देश में 150 करोड़ है, तो 1 करोड़ क्रेडिट पे आ गए। लेकिन ये टॉप 1% नहीं रहेंगे। इसमें कुछ ना कुछ कॉलेज के यंगस्टर्स भी रहेंगे जो फ्री का कूपंस, कैशबैक एक्सप्लइट कर रहे थे। अब क्रेडिट पे आया प्रेशर, क्योंकि 18 में ल्च किया, कोविड में मिला हाइपर बूस्ट। 6.5 बिलियन डॉलर का वैल्यू्यूएशन अच्छे-अच्छे इन्वेस्टर्स ने किया। लेकिन उसके बाद आया फंडिंग विंटर। 2022, 23, 24 वर बैड फॉर टेक कंपनीज़। bjूस का हवा निकल रहा है। टेक कंपनीज़ फेल हो रहे हैं और एक नया क्रेज चालू हो गया जिसे कहते हैं क्विक कॉमर्स और एआई। अब क्रेड के पास ना बहुत स्ट्रांग एआई मॉडल है ना क्विक कॉमर्स है। तो क्रेड को फंडिंग मिल नहीं रहा। तो उसके ऊपर अब आया प्रेशर कि भ हम मोनेटाइज कैसे करेंगे? हाउ विल बी अर्न मनी?
तो उसने डीप सोचा और बोला कि इंडियंस को एक चीज की कमी है, वो है इंस्टेंट फंडिंग। अगर आपका सिविल स्कोर मेरे पास क्रेडिट हिस्ट्री है और आपका बिहेवियर मेरे पास है, तो आई कैन गिव यू इंस्टेंट लोनस। क्रेडिट गए बैंक्स के पास और उन्होंने बहुत सिंपल बोल दिया, "भाई हमारा बिजनेस बहुत क्लियर है। वी विल प्रोवाइड फंडिंग्स और हम 1-1.5% कमीशन चार्ज करेंगे।" अब ये तो लगता था सबको खुश। बैंक्स भी खुश और जो यंग इंडियंस थे, रिच क्लास थे, उन्हें पर्सनल लोन इज़ली मिल जाता था। ये ऐसा बिजनेस मॉडल है: फर्स्ट लॉस डिफॉल्ट गारंटी। यानी अगर कोई ईएमआई स्किप करता है, तो पहला लॉस क्रेडिट अस्यूम करेगा। वो डिफॉल्ट गारंटर है। तो बैंक्स भी खुश थे कि भाई भले डेढ़ टका ले रहा है। क्रेडिट रिस्क कम हो रहा है। कस्टमर्स हमें ऑनबोर्ड हो रहे हैं। हमारा बिज़नेस बढ़ रहा है। कस्टमर्स भी खुश हो रहे थे। क्रेडिट भी खुश हो रहा था। जब मियां बीवी हो राजी, क्या करेगा काजी? लेकिन इस केस में काजी था आरबीआई और आरबीआई ने 2024 में बजा दी घंटी के भाई क्रेड और बाकी एप्स इंडिया को खतरे में आप डाल रहे हो। यू आर गिविंग अनसिक्यर्ड पर्सनल लोंस और आप उन लोगों को लोंस दे रहे हो जिनके पास वो क्षमता नहीं है, डिसिप्लिन नहीं है, जिनके पास वो ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है और ये क्राइसिस बन सकता है, डिफॉल्ट हो सकता है। और जैसे 2008 में लीमन ब्रदर्स और ये फाइनेंसियल इंस्टीटश ने अमेरिका और दुनिया को हिलाया, इंडिया के ऊपर रिस्क हो सकता है। क्योंकि यहां पे एक पैटर्न दिखा कि लोग ये लोंस लेके क्या कर रहे थे? आईपीओ में पैसा लगा रहे थे या ड्रीम लेवल में पैसा लगा रहे थे या जब ऐश कर रहे थे, ये स्टॉक मार्केट भी बढ़ रहा है तो वहां से पैसे कमा लेंगे। बट ये पर्सनल लोंस विदाउट गारंटर, विदाउट कोलaterल, विदाउट डिसिप्लिन देना, आरबीआई ने लगा दिया इस पे रोक और इनका बिजनेस मॉडल हिल गया।
यानी अच्छा खासा इनका रेवेन्यू बढ़ा, लॉसेस भी बढ़े, लेकिन 80% रेवेन्यू लेंडिंग से आ रहा था। अच्छा खासा रेवेन्यू आ रहा था। आरबीआई ने लगा दिया हैंड ब्रेक के भाई स्ट्रिक्ट नॉर्म्स, अच्छे डिसिप्लिन। अच्छा, आरबीआई ने अच्छा किया। बट क्रेडिट ने और इनोवेट किया, बोला, "अरे, तू ये रुक रहा है, हम और निकालेंगे!" क्या निकालेंगे? उन्होंने बोल दिया एक सेक्सीी चीज कि भ क्रेडिट कार्ड से आप रेंट नहीं भर सकते? क्या क्रेडिट कार्ड से आप रेंट भर सकते हो? इमेजिन करो आपको रेंट भरना है। आप क्रेडिट कार्ड से रेंट भर रहे हो। आपको 40, 50, 60 डेज का क्रेडिट पीरियड मिल गया। और क्रेडिट कार्ड पे जब आप रीप करते हो, तो आपको क्रेडिट कार्ड के पॉइंट्स मिलते हैं, कैशबैक मिलता है, आपको क्रेडिट कार्ड के लाउंज एक्सेस जैसे फीचर्स मिलते हैं। और फिर वो क्रेडिट कार्ड का बिल आप डायरेक्टली मत भरो। आप क्रेडिट के थ्रू भरो। तो आपको डबल कैशबैक, डबल पॉइंट्स मिलता है। सोने पे सुहागा। ये भी हिट हो गया।
लेकिन आरबीआई ने इसमें भी ब्रेक लगा दिया कि भाई रेंट पेमेंट्स भी रेगुलेटेड रखो। और हम इंडियंस तो है जुगाडू। वी आर स्मार्ट। हमने इसमें भी खेल लिया। बहुत लोगों ने Paytm को इसमें ही लूटा था। विजय शंकर शर्मा ने खुद कपिल शर्मा शो में कहा था कि मैंने करोड़ों रुपए स्पेंड किए लोगों को एडुकेट करने के लिए कि डिजिटल पेमेंट्स वॉलेट क्या होता है? बट क्या फायदा? Paytm के पास कहां मार्केट शेयर है? कहां प्रॉफिट्स है? कमिंग बैक टू क्रेडिट। क्रेडिट में भी यही हुआ। रेंट पेमेंट्स थे, तो लोगों ने क्या किया? अपने फादर को ही लैंडर्ड बना दिया। अपने फ्रेंड्स को लैंडोड दिखा दिया। उनको पे कर दिया। कैशबैक ले लिया और इंटरनली सेटल कर लिया। यानी क्रेडिट कार्ड, कंपनीज़ और क्रेडिट को हो गया डबल लॉस। और इंटरनल सेटलमेंट में वो पैसे घुमा रहे थे। सर्कुलर ट्रांजैक्शन कर रहे थे। यह इंडिया में बहुत कॉमन है।
तो अब क्रेड को रेवेन्यू मिले नहीं। क्रेड ने नए प्रोडक्ट्स ल्च किए। डिजिटल गोल्ड ल्च किया। आरबीआई ने बोल दिया, "ये रेगुलेटेड नहीं है।" "इसमें रिस्क है।" "सोच समझ के काम करो, जैसे गुल्लक है।" थर्ड पार्टी बहुत सारे फाइनेंसियल इंक्लूजंस लाए: इंश्योरेंस लाए, म्यूच्यूल फंड्स लाए, लेंडिंग लाए। लेकिन अब धीरे-धीरे इसमें रेवेन्यू आ रहा है। लेकिन उसका प्रॉमिस क्या था कि हम फाइनेंसियल डिसिप्लिन और फाइनशियल एक्सक्लूसिव क्लब करेंगे? है जो शरण हेगड़े साहब 1% क्लब में करना चाहते हैं। तो ये अब स्पेस में बहुत कंपटीशन भी धीरे-धीरे आ रहा है। लेकिन आज क्रेड ने गाड़ी का गराज खोल दिया। आपके गाड़ी को रजिस्टर कर लो। उसका पीयूसी भरा कि नहीं भरा? उसके ऊपर चालान्स है कि नहीं है? उसके ऊपर इंश्योरेंस है कि नहीं है? वो ये कर रहा है। तो क्रेड है क्या? इन्वेस्टर्स भी कंफ्यूज्ड है।
और 2025 में सर्वाइवल के लिए क्रेड ने खुद 72 से 75 मिलियन जीआईसी से रेज किए, एट 3.5 मिलियन वैल्यू्यूएशन। यानी पीक पे जो 6.5 बिलियन डॉलर का वैल्यू्यूएशन था, उससे 45% डाउन और मुझे लगता है वह और डाउन हो सकता है। अगर वह कैश फ्लो जनरेट नहीं करेंगे। अगर यह साल भी 1600-1800 करोड़ लॉस करते जाएंगे, तो वेयर इज द ब्लडी प्रॉफिट एंड वेयर इज द बिनेस मॉडल? लोग बोलते हैं कुणाल शाह जीनियस है। मुझे लगता है कि उसको इजी वैल्यू्यूएशन मिलता है। वो ट्राई करता है, एडिक्वेट करता है, बट प्रॉफिट मेकिंग सक्सेसफुल सस्टेनेबल कंपनी नहीं बना पाया। और अब तो ट्रेंड एi, सेमीकंडक्टर और ये सब का है और क्रेड में अभी तक एआई का शार्प यूसेज दिख नहीं रहा है। इट कुड हैव जंप् ऑन एi।
तो क्रेड है क्या? कभी-कभी लगता है ई-कॉमर्स प्लेटफार्म है जहां पे आपको डील ऑफ द डे मिलता है। आप वो चीज ले लो। कभी-कभी लगता है सुपर ऐप है कि वो सब ऑल इन वन करता है। कभी-कभी लगता है बिहेवियर फाइनेंस रिवॉर्डिंग ऐप है। कभी-कभी लगता है कंफ्यूज्ड ऐप है। इसका बिनेस मॉर्ड का क्लेरिटी नहीं है। मेरा पर्सनल प्रेडिक्शन है। अगर 2 साल में इन्होंने अपना बिज़नेस मॉडल फर्म नहीं किया, नीश नहीं पकड़ा और ऑपरेटिंग प्रॉफिट, कैश फ्लो जनरेट नहीं किया, तो फ्री चार्ज जैसे क्रेडिट भी बंद हो जाएगा और सब ताली बजाएंगे कुणाल शाह के लिए कि वाह, अच्छे एंटरप्रेन्योर थे लेकिन बिनेस नहीं चला।
आपको क्या लगता है, विल क्रेडिट बी एबल टू सी 2028? क्या उसे और वैल्यू्यूएशन और फंडिंग मिलेगा या वो पेवेट करके कंफ्यूज्ड ऐप बन जाएगा और स्टीम हार जाएगा? आप मुझे बताइए अपने कमेंट्स में। और ऐसे ही शानदार बिजनेस स्टडीज ऑन स्ट्रेटजी, फाइनेंस, बिनेस, फंड रेिंग के लिए कीप फॉलोइंग बिनेस वि बश।
[संगीत]