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बवासीर, भगेंद्र, फिस्टुला, जिस अक्सर हम बातचीत करते हैं। डॉक्टर परमेल चौधरी एमबीबीएस हैं, एमडी हैं और सेना में रह चुके हैं 5-10 साल और बहुत ही और ट्रॉमा सेंटर रोहतक में 12-13 साल, जहां पे गोलियां, चकू लगे। रोज 20 से 30 मरीज देखते थे।
क्या बवासीर, भगेंद्र, पिस्टुला का इलाज भी लेजर से हो सकता है या संभव है? लेजर सर्जरी मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहा है। पहले क्या होता था कि हम जैसे यह बवासीर, बवासीर का ऑपरेशन करते थे। जैसे बाहर की बवासीर है या अंदरूनी बवासीर, खूनी बवासीर जिसको बोलते हो, इसका ऑपरेशन करते थे। और जैसे फिस्टुला का ऑपरेशन, जैसे इसमें फिस्टुला आपको दिखाई दे रहा होगा। जैसे ये फिस्टुला है। इस तरह से ट्रैक बना हुआ है। एक परमानेंट ट्रैक बन जाता है। इसका ऑपरेशन करते थे और फिशर का ऑपरेशन करते थे। तो ये पहले हम खुले चीरे देके इनको निकालते थे। ये जो बीमारियां होती हैं इनको हम खुले चीरे दे दे के निकालते थे। लेकिन जब से लेजर सर्जरी और दूरबीन सर्जरी आई है, इस डि इस मतलब इस एरिया में, इस क्षेत्र में मलद्वार के आसपास होने वाले जो यह पाइल्स है, पिस्टुला है, साइनस है इनके ट्रीटमेंट में तब से यह मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। और मरीज बहुत ही जल्दी अपने काम पर दोबारा जा सकते हैं। अपने घर वापस जा सकते हैं। अपना जो रूटीन है, जैसे कोई फौज में है, पुलिस में है या कोई ड्राइवर है और तुरंत जाकर दो या चार दिन के बाद अपने जो काम जो करते हैं उस काम को दोबारा सुचारू रूप से कर सकते हैं।
एक्सपर्ट डॉक्टर देखिए, एक्सपर्ट डॉक्टर का तब पता लगेगा आपको जब आप उसकी डिग्रियां देखेंगे। एमबीबीएस कर रखी है, एमएस कर रखी है, एमडी कर रखी है या कहां-कहां उसकी पोस्टिंग रही। वो शुद्ध बिल्कुल आपकी भाषा में आपको कितना आपके रोग के बारे में बता पाता है। यह नहीं कि जाते ही ये कह रहे हो जी आप तो 100% ठीक हो जाओगे। देखिए, जो झूठी जो बातें होती हैं वो सुनने में अच्छा लगता है और मरीज जल्दी झांसे में भी आ जाता है। उसको ये लगता है कि ये शॉर्टकट है। लेकिन क्या होता है कि जो ये छुटभैया वो झोलाछाप बैठे रहते हैं। वो कहते हैं कोई बोलेगा 5 सेकंड में मैं बीमारी ठीक करता हूं। कोई बोलेगा 20 सेकंड में। आप बताइए क्या ये जो कानों को इतनी अच्छी लगती हैं सुनने में कि भई सेकंडों के हिसाब से ना पिस्टुला ठीक हो रहा है या मिनटों के हिसाब से बवासीर ठीक हो रही है तो सुनने में बहुत अच्छा लगता है और मरीज इसके झांसे में आ जाते हैं जाल में जैसे वो फंसा लेते हैं शिकारी। और कोई बोलेगा कि मैं सुबह से ही एक ही सुबह से एक ही जगह पे एक सुबह लगाऊंगा तो उसी से सब कुछ ठीक हो जाएगा। कैसे संभव है? ये सब झूठ, झूठ बातें होती हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि 2 घंटे पहले गए वहां लेटे या उसने सेकंडों के हिसाब से मिनटों के हिसाब से कुछ जादू मंतर या किसी मशीन से कुछ जला दिया आपका या कोई धागा-वागा बांध दिया और आप ठीक हो गए। कैसे ठीक हो गए भाई? जब तक जड़ तक नहीं जाएंगे बीमारी के तब तक तो बीमारी ठीक नहीं हो सकती है।
नमस्कार, एक बार फिर दोबारा से स्वागत है आपका हरियाणा न्यूज़ 24 में। मैं हूं मुन्ना लांबा, मेरे सहयोगी हिमांशु लांबा के साथ और आज हम फिर एक बार दोबारा से चिकित्सा की बातचीत करेंगे और बवासीर, भगेंद्र, फैसुला, जिस अक्सर हम बातचीत करते हैं और हम फिर आज दोबारा से डॉक्टर परमेल चौधरी, एमबीबीएस हैं, एमडी हैं और सेना में रह चुके हैं। 5-10 साल और बहुत ही और ट्रॉमा सेंटर रोहतक में 12-13 साल, जहां पे गोलियां, चकू लगे। रोज 20 से 30 मरीज देखते थे। लेकिन अभी आधुनिक हॉस्पिटल इन्होंने किया है और आधुनिक लेजर है। वो दूरबीन सर्जरी सेंटर भी है और आधुनिक आयुर्वेद चिकित्सा सेंटर भी है यहां पे। तो प्रमील चौधरी से बात करते बड़ा अच्छा लगता है और चिकित्सा और बीमारी को लेके पूरे भारत में बात पहुंचती है इनकी। लोग देखते हैं और आगे बीमारी आपको ना हो वो सजेशन भी देते हैं कि यहां तक आना ही ना पड़े। लेकिन अक्सर लोग कई बातों में मार खा जाते हैं कि बवासीर, पिस्ट और भगंदर एक नॉर्मल सी बीमारी समझ लेते हो आप लेकिन बाद में वो एक भस्मासुर बन जाती है और जान पे आ पड़ती है या फिर किसी नौसखियों के पास पहुंच जाते हो या किसी गली कोपचे में पहुंच जाते हो या किसी झोलाछाप के पास पहुंच जाते हो या फिर जैसे सोशल मीडिया पे अब पता नहीं कौन असली कौन नकली है। आप वो देख के और उनके पास पहुंच जाते हैं। लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नहीं होता। लेकिन फिर भी हम बातचीत करते हैं कि अच्छे और सुलझे डॉक्टरों से वैद्याचार्यों से बात करवाने की। आज की कड़ी में हमारे साथ चिकित्सा में मौजूद हैं डॉक्टर परमेल चौधरी, गुरुकुल हॉस्पिटल, हुड्डा कॉम्प्लेक्स, रोहतक में हम मौजूद हैं और खास बातचीत में और लेजर की बातचीत करें। हॉस्पिटल आधुनिक लेजर और दूरबीन सर्जरी सेंटर गुरुकुल। तो गुरुकुल का नाम जरूर है लेकिन दूरबीन और आधुनिक और ऐसी मशीनें हैं यहां पे जो अमेरिका से मंगाई गई हैं। सारी आधुनिक मशीनें। डॉक्टर साहब, बड़ा अच्छा लगता है आपका। बहुत-बहुत स्वागत है हरियाणा न्यूज़। सर लंबा साहब, आपका बहुत-बहुत स्वागत है और आपके दर्शकों को हम बताएंगे कि लेजर सर्जरी, लेजर और दूरबीन सर्जरी कैसे मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। हम बता दें कि लेजर क्या है? बड़ा कंफ्यूजन रहता है। लेजर सर्जरी क्या होती है? दूरबीन सर्जरी क्या होती? चाहूंगा मैं कि क्या बवासीर, भगेंद्र, पेस्टुला का इलाज भी लेजर से हो सकता है या संभव है? जी जी और कितना आसान है ये भी जानना चाहूंगा। हम क्या एक अलग-अलग जो पद्धति होती हैं क्या लेजर उसमें कहां फिट बैठती है और कितनी आसान है और कितने दिन चारपाई पे रहना पड़ेगा, कितनी दुखदाई है, कितनी आरामदाय है ये सारी बात कुछ पता। जी जी लेजर सर्जरी मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहा है। पहले क्या होता था कि हम जैसे ये बवासीर है। बवासीर का ऑपरेशन करते थे। जैसे बाहर की बवासीर है या अंदरूनी बवासीर, खूनी बवासीर जिसको बोलते हो, इसका ऑपरेशन करते थे। और जैसे फिस्टुला का ऑपरेशन, जैसे इसमें फिस्टुला आपको दिखाई दे रहा होगा, जैसे यह फिस्टुला है, इस तरह से ट्रैक बना हुआ है, एक परमानेंट ट्रैक बन जाता है। इसका ऑपरेशन करते थे और फिशर का ऑपरेशन करते थे। तो ये पहले खुले चीरे देके इनको निकालते थे। ये जो बीमारियां होती हैं इनको हम खुले चीरे दे दे के निकालते थे। लेकिन अब आज के दिन लेजर। अच्छा हां, बिल्कुल खुले चीरे में बड़ा घाव हो जाता है और जो मलद्वार है, जो रेक्टम है, एनल कैनाल है या फिर एनस है, उसके आसपास अगर कोई घाव हो जाता है तो वहां पर क्या होता है कि देखिए मल को हम रोक नहीं सकते। मरीज खाएगा, पिएगा तो मल त्यागेगा ही त्यागेगा। तो उस दौरान जो ही मल वहां से निकलता है तो वहां से नए-नए बैक्टीरिया डेली उस घाव में मतलब इंफेक्शन देते रहते हैं। इसकी वजह से क्या होता है? बड़े घाव होगा तो उसमें ज्यादा समय लेता था। किसी को 1 1/2 महीना, किसी को 4 महीना, किसी को 6 महीना तक समय लगता था। लेकिन जब से लेजर सर्जरी और दूरबीन सर्जरी आई है, इस डिप इस मतलब इस एरिया में, इस क्षेत्र में मलद्वार के आसपास होने वाले जो ये पाइल्स है, पिस्टुला है, साइनस है इनके ट्रीटमेंट में तब से यह मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है और मरीज बहुत ही जल्दी अपने काम पर दोबारा जा सकते हैं। अपने घर वापस जा सकते हैं। अपना का जो रूटीन है, जैसे कोई फौज में है, पुलिस में है या कोई ड्राइवर है, खासकर बस ड्राइवर जो होते हैं या लॉन्ग जो ड्राइविंग करते हैं या फिर जो लड़के होते हैं जिसको फौज में पुलिस में जाना है तो उनके जो मेडिकलली अनफिट हो जाते हैं इन बीमारियों की वजह से तो उनका इलाज भी लेजर से आसानी से हो जाता है और तुरंत जाकर दो या चार दिन के बाद अपने जो काम जो करते हैं उस काम को दोबारा सुचारू रूप से कर सकते हैं। सिर्फ दो चार रोज में। जी जी बिल्कुल बिल्कुल। और जो बवासीर है, जैसे पाइल्स जिसको बोलते हैं, हेमेरॉइड जिनको बोलते हैं, ग्रेड वन और टू तो ऐसा है कि दो दिन के बाद ही आप अपने काम पे जा सकते हैं और फिशर के केस में भी ऐसा ही है कि आप 2 दिन के बाद अपने काम पर जो काम कर रहे हैं वो कर सकते हैं। हां, छोटी-मोटी अगर कोई छोटा-मोटा जो उसको है, जो वहां पर छोटा-मोटा जो घाव हो तो उसकी पट्टी या मलम पट्टी या कोई जो हम क्रीम या ऑइंटमेंट दे देते हैं वो लगा के अपने काम को स्वरूप से कर सकते हैं। उनको यह नहीं है कि चारपाई पर लेट ही रहना पड़ेगा या हॉस्पिटल के बेड के ऊपर उल्टा हो के लेट रहे हैं। लंबे-लंबे उनके जो ड्रेसिंग के प्रोसीजर चल रहे हैं। ऐसा कुछ नहीं होता लेजर में। हम तो हमारे साथ डॉक्टर परमिल चौधरी खास बातचीत क्षेत्र में मौजूद हैं। बड़ा अच्छा लगता है। इतने सुलझे हुए डॉक्टर जो एमडी हैं, एमबीबीएस रोज के ट्रॉमा सेंटर में रह चुके हैं। फौज में रह चुके हैं। और गोली और चकू लगे तो अक्सर 20-30 मरीज रोज इनको गोली निकालना, चकू का इलाज करना लगे हुए और गंभीर जो एक्सीडेंट हो जाते हैं जिनके अंदर से सब कुछ फट जाता है। अक्सर रोज करते हैं। लेकिन बवासीर की बातचीत करें। सर, बहुत अच्छी बात है। डॉक्टर साहब, मैं एक बात जानना चाहूंगा आप बहुत सुलझे हुए डॉक्टर हैं। पता नहीं हजारों लोगों की जिंदगी बचाई आपने। अब ये जो बवासीर, भगेंद्र और पिस्टुला भरोसा कैसे करें? कैसे जाने? क्योंकि आजकल हम आपकी खबरें कर रहे हैं तो इस तरीके से हजारों लोग खबरें कर रहे हैं तो पहचाने कैसे? अब आप तो यहां रोहतक बैठे हैं और हुड्डा कॉम्प्लेक्स में बैठे हैं। गुरुकुल आपका हॉस्पिटल है। ट्रॉमा सेंटर है। दूरबीन से सर्जरी से लेजर से लैटिस मशीनें। लेकिन सब ऐसे थोड़ी होते हैं। क्या आम डॉक्टर भी यह इलाज कर सकता है जो एमडी या एमबीबीएस ना हो, जो सर्जन ना हो, वो कर सकता? देखिए देखिए सर, ऐसा है अगर कोई हवाई जहाज चलाना है, कोई हेलीकॉप्टर चलाना है तो उसके लिए पायलट चाहिएगा। ऐसा तो है नहीं। आप किसी भी ड्राइवर को उसको में बिठा दो। हवाई जहाज में, हेलीकॉप्टर में वो उड़ चलेगा। ऐसा नहीं है। उसके लिए सही ट्रेनिंग होती है। हम बिठा तो किसी भी कोई मशीन है उसको चला तो कोई भी सकता है। कोई टेक्निशियन है तो उसने दो चार छ महीने उसको काम देख लेता है तो उसको चला सकता है। लेकिन जो उस रोग से संबंधित जो गंभीरता है, मान लिया किसी को पाइल्स और पिस्तुला है और उसका कोई छोटा-मोटा ऑपरेशन वो किसी मशीन से कोई कर देता है। कोई झोलाछाप बोलो या खोपचे में बैठा या पुलिया के नीचे जैसे बैठे हुए मिलते हैं लोग ना कर देते हैं। लेकिन उसको यह नहीं पता है कि यह किस वजह से है। इसका कारण क्या है? कारण का जब तक निवारण नहीं होगा तो एक बार पाइल्स को वो जला देगा किसी भी कोई छोटी-मोटी मशीन लेके लेकिन वो फिर से दोबारा हो जाएगी। आप उसके कारण तक किसी मरीज में हो सकता है कि कैंसर हो। किसी हो सकता है कि पेट के अंदर कोई बड़ी रसोली हो। हो सकता है कि उसको लीवर का सिरोसिस है जिसकी वजह से उसको इंटरनल पाइल्स मतलब जो हिमरोइड या पाइल्स जिनको बोलते हैं वह हो रखी हैं। जब तक कि वो एक्सपर्ट डॉक्टर देखिए, एक्सपर्ट डॉक्टर का तब पता लगेगा आपको जब आप उसकी डिग्रियां देखेंगे। एमबीबीएस कर रखी है, एमएस कर रखी है, एमडी कर रखी है या कहां-कहां उसकी पोस्टिंग रही। वो शुद्ध बिल्कुल आपकी भाषा में आपको कितना आपके रोग के बारे में बता पाता है। यह नहीं कि जाते ही ये कह देगा जी आप तो 100% ठीक हो जाओगे। देखिए, जो झूठी जो बातें होती हैं वो सुनने में अच्छा लगता है और मरीज जल्दी झांसे में भी आ जाता है। उसको ये लगता है कि ये शॉर्टकट है। और जो पढ़ा लिखा डॉक्टर को उसको यह पता होता है कि जी देखिए पिस्टुला का केस है। जाते ही कोई बोलेगा मैं धागा बांध दूंगा। धागा मैं भी बांध सकता हूं जिसको सिटोनिंग बोलते हैं। सिटोनिंग हम भी कर देते हैं या कोई बोल देगा कि जी यह फिशर है इसको हम ऐसे करके ट्रीट कर देंगे या कोई बोलेगा बवासीर उसमें इंजेक्शन। इंजेक्शन लगाना कोई बड़ी चीज नहीं है लेकिन इंजेक्शन कहां लगाना है, क्यों लगाना है और किस मरीज में नहीं लगाना है, किस मरीज में आपको कौन सी सर्जरी नहीं करनी है वो महत्वपूर्ण चीज है। किस मरीज में आपको धागा नहीं बांधना है। किस मरीज में कैंसर है तो उस कैंसर का उपचार करना है ना कि नीचे धागा बांधने से कुछ उसका उपचार हो जाएगा। तो कहने का मतलब सर यह है कि अगर आप एक्सपर्ट हैं। आप आपके पास अच्छी डिग्री है। मेडिकल कॉलेज की बड़ी डिग्री है। आप स्पेशलिस्ट हैं। तभी आप इन चीजों के बारे में पूर्ण ज्ञान प्राप्त करते हैं। लंबी सर्विस के बाद आपको पता लगता है मेडिकल कॉलेज में या सिविल हॉस्पिटल में या फौज में जैसे मैं फौज में भी रहा हूं। तो आपको तब पता लगता है कि जी इतने सालों तक जब वो मरीज पढ़े लिखे मरीज हमारे पास आते रहते हैं। हमने किसी का कोई उपचार किया, सर्जरी की उसके बाद वो दोबारा आता है, वो बताता है। लेकिन क्या होता है कि जो ये छुटभैया वो झोलाछाप बैठे रहते हैं। वो कहते हैं कोई बोलेगा 5 सेकंड में मैं बीमारी ठीक करता हूं। कोई बोलेगा 20 सेकंड में। आप बताइए क्या ये जो कानों को इतनी अच्छी लगती हैं सुनने में कि भई सेकंडों के हिसाब से ना फिस्टुला ठीक हो रहा है या मिनटों के हिसाब से बवासीर ठीक हो रही है तो सुनने में बहुत अच्छा लगता है और मरीज इसके झांसे में आ जाते हैं एक जाल में जैसे वो फंसा लेते हैं शिकारी और फिर वो भटकते रहते हैं जब वो कॉम्प्लिकेशन हो जाती है तो मरीज तो यही बोलेगा कि जी मैं तो अपनी मर्जी से गया था अब किसी पे क्या ही इल्जाम लगाऊं उनको जो आता था उन्होंने कर दिया। लेकिन बिना ट्रेनिंग के लोग ऐसे कर कैसे रहे हैं? मैं तो कह रहा हूं कि आपका आपका जो मलद्वार है उसको आप चेक भी कैसे करा रहे हो और चेक क्या ही कराना? किसी के पास अगर उसके पास डिग्री नहीं है, उसके पास किसी मेडिकल कॉलेज का एक्सपीरियंस नहीं है, किसी बड़े हॉस्पिटल का उसके पास एक्सपीरियंस नहीं है, उसके पास बड़ा ऑपरेशन थिएटर ही नहीं है। हमारे पास लेप्रोस्कोपी की मशीनें हैं, हमारे पास दूरबीन की सर्जरी की जैसे लेजर की मशीनें हैं, हमारे पास हार्मोनिक जो मशीनें हैं जो अल्ट्रासाउंड से चलती हैं, अल्ट्रासोनिक जनरेटर से चलती हैं। ऐसी-ऐसी मशीनें जो बनाती आती ही कुछ कंपनियां हैं वर्ल्ड में और वह करोड़ों की मशीनें आती हैं। एक कोई बोल देगा जी लेजर से ऑपरेशन कर रहे हैं। भाई किस चीज से कर रहे हो? कहां है तुम्हारी लेजर की मशीन? कौन सी मशीन है? क्या है? वो कोई बोलेगा जी दूरबीन से ऑपरेशन कर रहे हैं। अरे कौन सी मशीन है आपके पास? आप उसका ऑपरेशन थिएटर जाके देखिए। आपको पता लग जाएगा 2 मिनट में कि क्या है? ऐसे तामझाम उसने दिखाने के लिए नीचे तो कुछ भी बोल देगा कोई भी। हम कैमरे के सामने तो कोई कुछ भी बोल देगा। लेकिन आप उसके एक्चुअल में उस हॉस्पिटल की विजिट करो। तो उसका ऑपरेशन थिएटर देखो क्या है क्या नहीं है। आपको तुरंत पता लग जाएगा कि उसके पास कुछ है भी कि नहीं है। लेजर का जो ऑपरेशन है या हार्मोनिक हमारे पास जनरेटर होता है। कहां पर हमें हार्मोनी से हार्मोनिक एक होता है जिसमें खून ज्यादा नहीं निकलेगा। घाव भी ज्यादा नहीं होता है। वो तुरंत जैसे जिस भी बवासीर को जिसको देसी भाषा में बवासीर को हम वहां से हटाते हैं तो साथ ही साथ जो जो घाव होता है वो एक तुरंत बंद हो जाता है। कुछ दिन के लिए छोटा-मोटा दर्द होता है या हल्की-फुल्की कुछ ब्लीडिंग आएगी उसके बाद वो घाव सही तरीके से बंद हो जाता है। ऐसे हम लेजर से करते हैं। लेकिन लेजर कई बार एक ये बड़ी टेक्निकल चीज है कि अगर किसी पेशेंट में कई बार क्या होता है? उसको फिस्टुला भी होता है। उसको बवासीर भी होती हैं और छोटे-मोटे साइनस भी बने रहते हैं और फिशर भी मिल जाते हैं। एक ही मरीज में सारी कंडीशन मिल जाती हैं। और कोई बोलेगा कि मैं सुबह से ही एक ही सुबह से एक ही जगह पे एक सुबह लगाऊंगा तो उसी से सब कुछ ठीक हो जाएगा। कैसे संभव है? ये सब झूठ, झूठ बातें होती हैं। तो झूठी बातों में ये बड़ी मनभावन सी बातें होती हैं। आदमी जल्दी झांसे में आ जाता है। आप अपनी बीमारी की तह तक जाइए कि आपको ही यह बीमारी क्यों है? हम क्या आपके लीवर में कोई दिक्कत है या बड़ी आंत में कोई दिक्कत है? कहीं अल्सरेटिव कोलाइटिस तो नहीं हो गया आपको या आपको आईबीएस तो नहीं है या फिर जो ट्यूबरक्लोसिस, ट्यूबरक्लोसिस हमारे देश में बहुत ही कॉमन इंफेक्शन। ट्यूबरक्लोसिस फेफड़े फेफड़े का नहीं होता है। ट्यूबरक्लोसिस आतड़ियों का भी होता है। ट्यूबरक्लोसिस मलद्वार के आसपास की जो लिंफ नोड होते हैं उनका भी होता है और कई बार लिंफ नोड में से पिस्टुला मतलब जो जो मवाद जो आती है, जो खून आता है वह कई बार लिंफ नोड में से आ रहा होता है वो ऊपर से कहीं से नहीं आ रहा। जब तक आप ट्यूबरक्लोसिस वह डायग्नोसिस नहीं करेंगे, आप ट्यूबरक्लोसिस का या अल्सरेटिव कोलाइटिस है किसी को उसका डायग्नोसिस नहीं करेंगे, उसका ट्रीटमेंट नहीं देंगे तब तक आप पिस्टुला, साइनस, बवासीर, भगंदर का क्या इलाज कर पाएंगे? जी तो रोगी जैसे अक्सर आप बड़े-बड़े ऑपरेशन करते हैं सारे दिन तो बवासीर वाले तो बहुत नॉर्मल होते हैं और आपकी एक थ्योरी है हमेशा बीमारी को जड़ से निकाल दीजिए। अंदर रखने का कोई औचित्य नहीं है। आप अक्सर कहते हैं बीमारी कोई भी हो उसको जड़ से ही हटाना बेहतर है। वहां दाबने की बजाय, दबाने की बजाय या कुछ और ट्रीटमेंट झूठा चर्चा करने की बजाय तो आप भरोसा अक्सर करते हैं कि भई कोई भी बीमारी हो उसको जड़ से हटा दीजिए। तो अक्सर आप कहते हैं कि ऑपरेशन में हम जड़ से हटाते हैं। बीमारी को एक बीमारी के लिए करते हैं। अंदर देखते हो तो चार बीमारी और हैं। उनको भी साथ में हटा देते हैं। जी जी जी बिल्कुल। जैसे हमने मेडिकल कॉलेज में हमारी ट्रेनिंग रही है। हमारी फौज के अंदर ट्रेनिंग रही है कि भाई अगर कोई पेशेंट आता है बेचारा आपके सामने प्रस्तुत हो जाता है। हो सकता है कि आपको ये देखना पड़ेगा उसका पेट क्यों खराब है। कई बार क्या होता है पित्त की थैली के अंदर पथरियां मिल जाती हैं या पित्त की थैली के अंदर पथरी से पहले की कंडीशन जिसको स्लज बोलते हैं वो बना हुआ होता है। जिसकी वजह से उसका सारा पाचन तंत्र गड़बड़ाया हुआ है। कई बार किसी पेशेंट को पैंकक्रियाज की बीमारी होती है। किसी को लीवर की है। किसी को स्प्लीन की बीमारी है या किसी को एक तरह से अंदर इंफेक्शन का इनफेक्शन की तकलीफ है। किसी को लगातार टाइफाइड की बीमारी है। टाइफाइड और ये किसी को ट्यूबरक्लोसिस है। किसी को कोई ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है आंतड़ियों से संबंधित मतलब कि जो ऑटोइम्यून क्या होता है कि हमारे जो ब्लड खुद ही हमारे ऑर्गन्स के खिलाफ काम करने लगता है। जब तक आप उस बीमारी की तह तक नहीं जाएंगे, जड़ तक नहीं जाएंगे तब तक आप उस पे कैसे हाथ लगा सकते हो? किसी पेशेंट को यह थोड़ी ना है कोई भी गया उसको सुबह लगा दो जी कोई गया उसको लेजर से उसकी बवासीर को हटा दो जी कोई गया और उसको कह दो जी आपको पिस्टुला है साइनस है उसको चीरा लगा दो या कुछ लगा ऐसा नहीं है जब तक आप उसकी तह तक नहीं जाएंगे क्यों ऐसी गड़बड़ हुई क्यों उसको बार-बार इंफेक्शन हुई कहीं उसको डायबिटीज तो नहीं है कहीं उसको शुगर तो हाई शुगर लेवल तो नहीं रहता जिसकी वजह से उसकी इम्युनिटी कम हुई है किसी को कहीं एचआईवी होता है एड्स होता है मतलब जब तक आप बीमारी की जड़ तक नहीं जाएंगे तब तक आप बीमारी का ठीक नहीं कर सकते। हां, लेजर जब से आई है, दूरबीन सर्जरी जब से आई है या हार्मोनिक जो जनरेटर जब से आया है, तब से क्या हो गया कि हमें उस एरिया में घाव कम करना होता है। कम करना करने की जरूरत होती है और बीमारी को हम जड़ से हटा देते हैं। कोशिश यह करते हैं कि अगर उस आपने पूछा ना कि एक मरीज में कई सारी, तो हम कोशिश यह करते हैं कि उस पूरे उसके शरीर का चेकअप करके जरूरत है उसको अल्ट्रासाउंड कराएंगे, एमआरआई कराएंगे, सिटी स्कैन कराएंगे। लेकिन जब उसके ऊपर हाथ लगाएंगे तब तक उसका कोपरेशन नहीं करेंगे जब तक कि हम खुद सेटिस्फाई नहीं हो जाते कि भई है क्या इसको बेचारे को है ना जी और तब जाके हम उसका ट्रीटमेंट करते हैं लेजर से करना है, हारमोनियस से करना है और मैं एक बात और बताऊं कई बार क्या होता है कि कोई जो उसकी बवासीर है ग्रेड वन की होती है, किसी ग्रेड टू की होती है और उसी पेशेंट में हो सकता है उसको चार बवासीर हो चारों अलग-अलग ग्रेड की है तो कौन से ग्रेड में क्या उपचार ठीक रहेगा तब तो ये तो नहीं कि हम सारी की सारी लेजर से ही कर देंगे। हो सकता है कि आप दो बड़ी बवासीर हैं उसको लेजर से कर दो और तीसरी को सिंपल एक बेंडिंग करने से ठीक हो जाएगी। ठीक है? तो और हो सकता है किसी किसी में सिर्फ इंजेक्शन लगाने से काम चल जाए और हो सकता है कि किसी का आप लिवर ही ठीक कर दो। हो सकता है उसको बीमारी से ही निजात मिल जाए। हां हां कई बार कॉन्स्टिपेशन होता है। किसी को हाइपोथायडिज्म होता है। थायराइड की समस्या होती है। जिसकी वजह से उसको लगातार एक तरह से उसको कॉन्स्टिपेशन रह रही है, कब्ज रह रही है जिसकी वजह से उसको बवासीर है। आप उसका थायराइड का ट्रीटमेंट कर दो। उसकी बवासीर अपने आप ही ठीक हो जाएंगी। तो सर ये है कि लेजर है हमारे पास। तो दूरबीन है, लेजर है। सारी तरह की मशीनें हैं बड़ी-बड़ी। लेकिन किस मरीज में उपचार करना और किस मरीज को उपचार की जरूरत नहीं है। यह टेक्निकली डिपेंड करता है आपकी ट्रेनिंग पे। आप कितनी लंबी ट्रेनिंग रही है। आप मेडिकल कॉलेज में रहे हो कि नहीं रहे हो। आप डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल्स में आपने कितने मरीजों सैकड़ों मरीज वहां पे तो हम गोली चाकू बड़े-बड़े एक्सीडेंट्स के मरीजों आपने देखा ही होगा। आप आते थे मेडिकल कॉलेज में हमारे पास तब हम करते थे बड़े-बड़े ऑपरेशन। अब छोटे ये जो फील्ड मैंने इसलिए पकड़ा है बार-बार इसी के ऊपर वीडियो इसलिए बनवा रहा हूं कि ये मरीज सबसे ज्यादा परेशान रहते हैं। महा परेशान रहते हैं। लड़कियां परेशान हैं। महिलाएं परेशान है बेचारी के। अब उसको यह नहीं पता होता कि उसकी बच्चेदानी की दिक्कत है या फिस्टुला है या क्या है? बूढ़ी-बूढ़ी महिलाएं आती हैं हमारे पास। उनको बवासीर है या फिशर है या साइनस है या पायलोनडल साइनस है या क्या है? टीबी किसी को कुछ पता ही नहीं होता। बस वह एक भेड़चाल में चले जा रहे होते हैं। कहीं भी नाम सुन के वहां जाते हैं छोटे-मोटे। वो चाहते हैं कि जिस दिन जाए उसी दिन उपचार हो जाए। मतलब मरीज कई बार खुद ही सोच के आता है कि जिस दिन जाए उस दिन जादू टोना करा के बस जैसा भी छुआ मंत्र करा के अपने वापस घूम के वापस आ जाए। देखिए वो सिर्फ घूमना ही हो जाता है। उसमें जड़ से कुछ खत्म नहीं होगा क्योंकि एक दिन में कैसे पता लगेगा कि आपको क्या बीमारी है एग्जैक्टली? चाहे वह सालों से बीमारी से आप परेशान हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि 2 घंटे पहले गए वहां लेटे उसने सेकंडों के हिसाब से मिनटों के हिसाब से कुछ जादू मंतर या किसी मशीन से कुछ जला दिया आपका या कोई धागा-वागा बांध दिया और आप ठीक हो गए। कैसे ठीक हो गए भाई? जब तक ये जड़ तक नहीं जाएंगे बीमारी के तब तक तो बीमारी ठीक नहीं हो सकती है। फिसुला, भगेंद्र और बवासीर को लेके लोग डॉक्टर साहब बता रहे हैं कि महिलाएं, बच्चे, पुरुष कहीं भटकते फिरते हैं। सही जगह नहीं मिलती। हजारों रुपए खर्च कर देते हैं और दर्द झेलते रहते हैं। लेकिन इलाज तो सब सही सुलझे डॉक्टर कोई भी हो आपके अलावा कहीं भी हो। जी जी देखिए इस तरह की कोई बीमारी है तो सबसे बेहतरीन डॉक्टर है आपके लिए सर्जन डॉक्टर और सर्जन डॉक्टर जिसकी ट्रेनिंग अच्छी खासी रही हो जिसका लंबा एक्सपीरियंस हो तो आपके आसपास का जो भी सर्जन डॉक्टर है पहले आप उसको चेक कराएंगे भाई आपको कैंसर है, ट्यूबरक्लोसिस है या कोई सिंपल लीवर की बीमारी है या पनक्रियाज की बीमारी है या आंतड़ियों की कोई ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है। जब तक कि सर्जन उसको मोहर नहीं लगाता अपनी बीमारी लिख के तब तक उस जब तक उसकी जड़ तक नहीं पहुंचेगा जो उसके कारण जो बीमारी का जो कारण है तो सर्जन ये सारी बीमारियां हैं सर्जन से संबंधित सर्जरी और सर्जन से संबंधित भले ही आप सर्जरी कराएं ना कराएं वो बाद की बात है। लेकिन आपको जो डायग्नोसिस करानी है, जो एग्जामिनेशन कराना है अपने शरीर का वो आप सर्जन से ही कराइए। जो भी आपके आसपास है आप उससे भी अपना इलाज करा सकते हैं। आप सलाह ले सकते हैं। एग्जामिनेशन उसका जो जो एरिया है जो बीमारी से ग्रसित जो एरिया है चाहे वह मलद है या पेट का कोई हिस्सा है उसको अपने सर्जन से चेक कराइए और वो बताएगा कि भाई आपको यह बीमारी है और इसका जो कारण है यह कारण है तो बता सकता है। तो डॉक्टर साहब बहुत मरीज आते होंगे आपके पास गोली लगे, चाकू लगे इसके हृदय रोग, जोड़ों के दर्द के और ये लीवर के रोग, गुर्दे की बीमारी, पथरी काफी रोगी आते होते हैं। बवासीर भी बहुत आते हैं। जी जी जी जी बहुत तरह के पेशेंट आते हैं क्योंकि जो बड़े ऑपरेशन जैसे हम मेडिकल कॉलेज में करते ही थे तो अब हमने एक ऐसा सेंटर बनाया है जहां पर आयुर्वेदा भी है जहां पे हमारी मॉडर्न जो मेडिकल साइंस है वो भी है हमारे पास सर्जरी सर्जरी का बड़ा सेंटर है यह और आयुर्वेदा पंचकर्मा का भी बड़ा सेंटर है तो हम हर मरीज पर सारी तरह की जो उसको जरूरत है चाहे उसको फिजियोथेरेपी की जरूरत है, चाहे उसको आयुर्वेदा की जरूरत है, चाहे उसको पंचकर्मा की जरूरत है, चाहे उसको इंजेक्शंस की जरूरत है, चाहे उसको सर्जरी की जरूरत है। तो हम मॉडर्न मेडिसिन और जो हमारी जो ट्रेडिशनल मेडिसिन है वो सारी उस मरीज को ठीक करने में झोंक देते हैं, लगा देते हैं ताकि वो मरीज ठीक हो जाए। हमारा मेन मकसद है कि मरीज ठीक हो जाएगा तो फिर क्या है? फिर तो बल्ले-बल्ले है। जी जी बहुत-बहुत धन्यवाद। बड़ा अच्छा लगा आपसे बातचीत करके। डॉ. प्रमील चौधरी जी, बहुत-बहुत धन्यवाद आपका। हमारे दर्शकों को हिंदुस्तान के जनता को ऐसे ही अवेयरनेस करते रहिए और उनको संचार उनको जागृति जगाते रहिए। जी जी बिल्कुल बिल्कुल सर आपके दर्शकों का स्वागत है। कोई भी आके आपके वीडियो के माध्यम से मेरे पास एग्जामिनेशन करा सकता है और मैं बताऊंगा कि उसको क्या दिक्कत है। जी जी जी सर तो हमारे साथी डॉक्टर प्रमील चौधरी खास बातचीत में गुरुकुल हॉस्पिटल और हुड्डा कॉम्प्लेक्स रोहतक से खास बातचीत में बने हुए थे। तो इस बारे में आप क्या सोचते हैं? वास्तव में अगर आपको लूटना-पीटना है तो लूटते-पीटते रहिए। अगर किसी अच्छे सर्जन के पास जाके आप अपना चेक नहीं करवाएंगे। बाबा श्री भगेंद्र फेस्ट और भी कोई अन्य बीमारी तो आपको कैसे सर्जन के पास तो जाना पड़ेगा और सर्जन के पास जाएंगे तो भी पता चल पाएगा क्योंकि डॉक्टर साहब यह भी नहीं कहते आप मेरे पास भाग के आइए। आपके पास कोई भी अच्छा सर्जन है नजदीक वहां आप जरूर उनसे सलाह मशवरा लें। उसके बाद ही कहेंगे अगला स्टेप उठाएं क्योंकि और यहां भी आ सकते हैं। डॉक्टर साहब ने कहा है कि आप यहां आ सकते हैं 24 घंटे इनके दरवाजे खुले आपके लिए भी। तो मुझे अच्छा लगता है। तो डॉक्टर साहब के बारे में आपके क्या विचार हैं? तो इन्हीं सब बातों के साथ मैं मुन्ना लांबा, मेरे सहयोगी हिमांशु लांबा के साथ हरियाणा न्यूज़ 24 नमस्कार जय।