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Watch an enlightening awakening conversation with Legend @GoldcladWarrior

CANDID KAUSHIK 3:27:25

Transcription

गोल्ड क्लैड हमारे साथ है और मैं कृतज्ञता व्यक्त करता हूं, प्रेम व्यक्त करता हूं क्योंकि इसी फरवरी महीने में हमने इनको बुलाया था। बहुत ही छोटे अंतराल के बाद फिर से मैंने इनको संपर्क किया। तो फिर से भी उन्होंने हमारे आमंत्रण का स्वीकार किया और आज पधारे हैं। तो मैं इनका स्वागत करता हूं और कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। थैंक यू सो मच।

और पिछली बार जब लाइव की शुरुआत की दोस्तों तब परिवार के सभी सदस्यों को मैंने रिक्वेस्ट की थी कि भाई आप लोग बहुत सारे लोग तो सुनते ही होंगे इनको क्योंकि मैं जिक्र करता रहता हूं मेरे वीडियो में मेरी बातों में मेरे लाइव में और अगर किसी ने पहली बार इनको देखा है इनके अस्तित्व के बारे में पहली बार आपको पता चला है तो आप गोल्ड क्लैड वॉरियर चैनल पर जाना उसको सब्सक्राइब करना घंटी ऑन करना करना और जो भी कंटेंट वहां पर अपलोड होता है उसको कंज्यूम करना। यह जीवन को नई दिशा देगा। जीवन में निश्चित तेजस्वीता और क्लेरिटी लाएगा।

आज मैं जो आह्वान करना चाहता हूं वह यह है कि YouTube जब भी हमारी चैनल मोनेटाइज हो जाती है उसके बाद ज्वाइन बटन देती है मेंबरशिप और ये सब विकल्प खुल जाते हैं तो सबके चैनल में होते हैं औपचारिक तौर पे और उसको हम लोग करते भी हैं पर उसको वास्तव में अगर आपको ये ये चीज का अनुभव करना है कि मेंबरशिप क्या होती है और मेंबर बनने के बाद जीवन में क्या अमूल परिवर्तन आ सकता है या मेंबरशिप के अलग-अलग लेयर में जाने के बाद आपको क्या मिल सकता है? वैसे जो ज्ञान यहां से हमें मिल रहा है मुझे और बहुत सारे लोगों को उसका कोई मूल्य नहीं है। उसका कोई मोल कुबेर के कोई खजाने नहीं है इंद्रलोक के जो उसका मूल्य चुका सके। पर फिर भी हम लोग हैं कैपिटलिज्म में पूंजीवादी व्यवस्थाओं में। तो उस व्यवस्थाओं का हम सब हिस्सा है। तो उसी व्यवस्थाओं को फॉलो करते हुए वहां पर मेंबरशिप है। तो उस मेंबरशिप को जरूर आप आज मतलब मैं यह अपील करना चाहता हूं आप लोगों को कि ना सिर्फ चैनल को सब्सक्राइब करें घंटी ऑन करें पर मेंबरशिप लीजिए क्योंकि मैं बहुत ही सार्वजनिक रूप से आज बोलना चाहता हूं कि 41 का हूं और मैंने जीवन में बहुत बहुत लोगों को सुना। बहुत पंच संप्रदायों में गया। बहुत तत्वज्ञान स्क्रिप्चर हर जगह से मैंने के सत्य को जानने की कोशिश की। पर अगर मुझे परम सत्य या तो जो वास्तविकता है जो वास्तव में चीजें आपके आसपास घटित हो रही है उसका अगर कोई परफेक्ट जवाब है बहुत वेदर इट इज रिलजन कोई भी आपके जीवन के आयाम को आप पकड़ लो। आपका व्यक्तिगत जीवन हो, आपके आसपास धर्म हो, अध्यात्म हो, सामाजिक व्यवस्थाएं हो, रिश्तेदार हो, जो कोई भी एज अ होमोसेपियंस अपने आसपास जीवन का जो अनुभव करते हैं, उसके सच्चे जवाब मुझे लॉर्ड गोल्ड क्लेर से ही मिले हैं। और यह परम सत्य है। इसका मैं यहां पर स्वीकार करना चाहता हूं।

तो जब हमें कुछ अच्छा मिलता है तो हम उसको बांटते हैं हमारी संस्कृति में। भारतीय संस्कृति में हम जो कुछ भी अच्छा उपनिषद या जो भी हमारा पूरा स्क्रिप्चर भी बार-बार यही बात करता है कि जो भी हमारे जीवन अनुभव है जो कि आपको उन्नति की ओर ले जा सकते हैं। आपकी चेतना को उच्चतम आयाम की ओर ले जा सकते हैं तो उसको हम साझा करते हैं। तो मैं यह जो मेरा अनुभव है वो मैं यहां पर साझा करना चाहता हूं कि इस चैनल पर अगर आप चले गए और मेंबरशिप में चले गए तो उसके बाद आप जीवन में भटकोगे नहीं और यहां से जो भी आपको मेरे मेरे कंटेंट में भी बहुत बड़ा प्रभाव है। जब से मैं इनको सुनने लगा, मैं पहले बहुत ही समस्याओं के बारे में बात करता था। भले वो समस्याएं जेन्युइन थी पर समाधान के बारे में कम बात होती थी मेरे वीडियोस में। जब से मैं लॉर्ड गोल्ड क्लैड को सुनने लगा हूं। वो समस्या एक दो मिनट होती है पर समाधान ज्यादा होता है क्योंकि ये मैंने महसूस किया जब भी इनका वीडियो मैं देखता हूं कोई भी वीडियो उसमें समस्या दो-ती मिनट होगी। एड्रेस कर लेंगे क्योंकि उसके ऊपर फिर समाधान देना होता है तो वो मैंडेटरी होता है नेसेसरी होता है बोलना समस्या के बारे में फिर 8 मिनट समाधान होता है और ऐसा समाधान होता है जिसमें परम सत्य होता है उसमें कोई इनको रिजेक्शन का कैंसिलेशन का डर नहीं है जो सत्य जैसा होता है और बहुत ही बैलेंस मतलब ऐसा नहीं कि आप एक्सट्रीम चले जा रहे हो अपने अभी के जो आपके जीवन के अनुभव है उसके आधार पर आप एक्सट्रीम जाकर के बोल रहे हो फिर कल उठकर के आप ही मुड़ के बोले कि नहीं नहीं वो मेरा उस वक्त वक्त का अनुभव था। अब मैं ही बात कर रहा हूं। तो जो बातें बोली जाएगी वो स्थिरता स्थिरता के साथ बोली जाएगी जो हमेशा ऐसी ही रहेगी। आप कितने भी सालों के बाद उस पर्टिकुलर वीडियो को देखोगे तो आप अपने आसपास महसूस कर पाओगे कि आज भी इतना ही प्रासंगिक है। आज भी इतना ही रिलेटिव है।

जो भी लोग कमेंट कर रहे हैं दोस्तों आज मैं आप लोगों ने रिक्वेस्ट की थी कि भाई आप एक घंटे के बाद जवाब मत देना। तो जो भी यहां पर कमेंट हमें प्रासंगिक लगेगी जो कि लॉर्ड गोल्ड क्ल को यहां पर मुझे पूछना चाहिए जिस विषय के बारे में तो उसको मैं तुरंत ही यहां पर लेता रहूंगा तो एक घंटा आपको वेट नहीं करना होगा तो इन बिटवीन आप कमेंट भी करते रहना तो मुझे जो बोलना था लॉर्ड गोल्ड क्लेड जी वो मैंने बोल लिया अब मैं चाहता हूं कि आप अगर कुछ बोलना चाहे तो या फिर मैं जो मुझे प्रश्न करना है वो उसकी शुरुआत कर दूं मैं।

धन्यवाद कौशिक जी चैनल पर बुलाने के लिए दोबारा। होपफुली व्यूअर्स को पिछले कन्वर्सेशन से भी हम लोगों के काफी ज्यादा वैल्यू मिली होगी और इस वाले में भी उन्हें काफी ज्यादा वैल्यू मिलेगी। हम लोग कोशिश करेंगे कि सवाल अगर चैट में भी आते हैं तो उनको भी हम लोग एड्रेस करेंगे जो हम लोग के टॉपिक से रिलेटेड होगा। वी विल ट्राई टू एड्रेस अ चैट एस वेल। अभी ऑलरेडी कई सारे मैसेजेस आ रहे हैं। आई कैन सी तो हम लोग बात करेंगे। कौशिक जी कृपया आप टॉपिक्स उठाए उन पर हम लोग डिस्कशन करते हैं।

ओके तो सबसे पहली बात जो मैं यहां पर रखना चाहता हूं वो डिप्रेशन के बारे में। डब्ल्यूho का रिपोर्ट है वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन का। भारत में चार में से एक इंसान को क्लीनिकल डिप्रेशन है। डिप्रेशन का हब बन चुका है। हैप्पीनेस इंडेक्स में तो हमारी वाट लग चुकी है। उसके भी स्टैटिस्टिक आते रहते हैं हर साल मार्च महीने में। तो इस समस्या को लेकर के भाई क्यों हो रहा है? वो कौन से कारण है भारत के समाज के आसपास के माहौल से या व्यक्तिगत जीवन में वो कौन सी त्रुटियां है? जिससे कि इंसान वह चाहे मतलब उसका जेनेटिक्स हो सकता है, डीएनए हो सकता है, आसपास का एनवायरमेंट हो सकता है, डाइट भी हो सकता है। जो कुछ भी है वास्तविक कारण तो वो मैं आज जानना चाहता हूं कि डिप्रेशन का एक तो मूल कारण क्या है भारत में कि इतने बड़े पैमाने पर डिप्रेशन हो रहा है लोगों को और उसके निवारण के बारे में जानना चाहते हैं।

यह तो खैर ऑफिशियल रिपोर्ट है जो कि डिप्रेशन को एड्रेस कर रही है। पर मेरा एक और अनुमान है। मेरा एक अपना एक्सपीरियंस रहा है कि डिप्रेशन ही नहीं। अगर हम लोग जनरल मेंटल इनस्टेबिलिटी की बात करें तो हम लोग का एक बहुत बड़ा चंक है पपुलेशन का जो कि मानसिक रूप से अनस्टेबल हो चुका है। कई सारे लोग बाहर घूम रहे हैं नॉर्मली कपड़े वगैरह नॉर्मल लोगों की तरह पहने और दिमाग से एकदम ब्रोक चुके हैं। टूट चुके हैं और टूट चुके हैं डेंजरस वे में। उनको एक चिंगारी की जरूरत है बस पागल होने में और अपना पूरा गुस्सा उतारने में। इसीलिए यह बैटल और झुनझुनिया चौक के ज्यादा इंसिडेंट होते हैं। छोटी बात पर वायलेंस होता है। ऐसे कई सारे रीज्स है। फैमिली बैकग्राउंड आपका और आप लाइफ का जो कास्टेंट ब्रेन वाशिंग चलता है आदमियों के ऊपर वो तो है ही। लेकिन मैं ऐसा समझता हूं कि अगर आप एस्पेशली किसी भीड़भाड़ वाले इलाके में रह रहे हैं। जहां आप बाहर निकलते ही आपको दुनिया में स्ट्रगल करना है। आपको जो कुछ मिलेगा नहीं। इवन व्हाट इज राइटफुली यर्स वो आपको मिलेगा नहीं। आपको छीनना पड़ेगा। बाहर निकलते ही आपको बहुत ज्यादा एक्सक्यूज मी देयर सम पावर प्रॉब्लम। वेट जस्ट गिव मी। नो प्रॉब्लम लॉर्ड। जी आपके सभी कमेंट लिए जाएंगे। आई विल बी सॉल्व डैडी। टुडे वी विल एड्रेस ऑल कमेंट इन बिटवीन। वी विल नॉट एड्रेस आफ्टर वन आवर। तो डोंट वरी यू कैन राइट बट यू हैव टू वेट बिकॉज़ व्हेन लॉर्ड इज टॉकिंग ओके सो देयर वा सम पावर इशू तो बाय द वे जहां तक कि मैं कह रहा था जो चीज ये सिर्फ एक डिप्रेशन की प्रॉब्लम नहीं है क्योंकि डिप्रेशन तो डिप्रेशन पैसिविटी दिखाता है। डिप्रेशन मतलब आप दुखी हो। आप अकेलेपन में रह रहे हो और आप एक ही जगह बैठ के स्टैगनेट हो रहे हो। सिर्फ डिप्रेशन ही नहीं मेंटल इनस्टेबिलिटी, मेंटल एजिटेशन यह बहुत ही ज्यादा फैल रहा है और कोई इसके बारे में बात नहीं करता है।

बाहर का जो एनवायरमेंट है स्पेशली अगर क्राउडेड एरिया में अगर आप रह रहे हो तो बहुत ज्यादा सेंसरी ओवरलोड हो रहा है आपकी तरफ। कुछ ज्यादा ही आवाजें हो रही है बाहर। हमेशा गाड़ी वगैरह के आने जाने की पै प आवाज हो रही है। आप अगर बाहर हो भीस्पेशली कोई ऐसा लड़का है जो कि स्कूल जाता है और कॉलेज जाता है और शांतिप्रिय है। उसको पीस पसंद है। वो चाहता है कि वो बस आए अपना काम करे शांति से। बातें भी करें तो प्रोडक्टिव बातें करें। अच्छी बातें करें। तो हो पाएगा कि आसपास ढेर सारी फालतू बातें लोग करते हैं। हल्ला वगैरह मचाते हैं। मजाक भी ऐसा करते हैं कि वो आपको समझ में ही नहीं आएगा कि किस टाइप का मजाक कर रहे हैं। ऐसे में दो चीजें होती है। आदमी ओवरवेल्म होता है चीजों से। उनके ऊपर बोझ पड़ता है। काफी ज्यादा स्टिमुलेशन का और दूसरा एक तरीके से आइसोलेशन भी फील होता है। समाज एज अ कलेक्टिव डरा रहा है एक एवरेज आदमी को। बचपन से ही डराता आ रहा है। जैसे एक बच्चा छोटा सा रहता है, स्कूल में आता है, उसको उसी के ऊपर तुरंत बोझ डाल दिया जाता है कि तुम्हारी नौकरी नहीं लगेगी अगर तुम ए बी सी डी नहीं पढ़े तो। याद रखो कि तुमको इस पूरे गेम में जो नौकरी पाने का गेम है, पैसे कमाना भी नहीं, अमीर होना भी नहीं। नौकरी पाने का जो गेम है इसमें बचपन से ही उस बच्चे को डाल दिया जाता है और अब वह डरता रहता है। उसको एमावर बहुत कम लोग करते हैं। कोई अपने डेली एक्सपीरियंस में अगर देखेगा कि कितनी बार उसको एमावरिंग चीजें बताई गई है तो वो पाएगा कि उसको एमावर बहुत कम लोग कर रहे हैं। उसकी तारीफ बहुत कम लोग कर रहे हैं। उसको डरा सब कोई रहा है। स्कूल में टीचर डरा रहा है। घर में पेरेंट्स डरा रहे हैं। घर में पेरेंट्स इतना ज्यादा डरा दे रहे हैं कि जो बच्चे अच्छा स्कोर कर रहे हैं, वह भी बेचारे अपना अच्छा खासा स्कोर बताने से डर रहे हैं कि मेरा इतना ज्यादा नहीं आया। मेरा 99 नहीं आया। मेरा 90 आ गया। सिर्फ मेरा 89 आ गया। सिर्फ अच्छे स्कोर करने वाले भी और जो नहीं कर पा रहे जो एवरेज कर रहे हैं उनको ऑलरेडी लग जा रहा है कि हमारे फ्यूचर में तो कुछ है नहीं यार। फ्यूचर में तो वैसे भी अंधकार है। तो जो मजे करना है अभी ही कर लेते हैं। अब वह मजे कोई मजे नहीं वह चीप मजे हैं। वो चीप मजे हैं कि सड़क पर जाकर एकदम लफंगागिरी कर रहे हैं। मारपीट कर रहे हैं। चीप मजे कर रहे हैं। छोटी-छोटी चीजें जो उन्हें लग रहा है बहुत एंजॉयबल है। क्योंकि बेचारे रेबेलियन कर रहे हैं। एक तरीके से उनको दबा के रखा जा रहा है। तो अब रेबेलियन करेंगे। अब उनको जैसे समझ में आएगा वैसे करेंगे। और ऑल दी लाइफ चॉइससेस क्योंकि एक स्पायरल में उनको धकेल रही है।

बाद में एक पॉइंट पर आकर उनको दो चीजें रियलाइज होती है। पहली यह कि मैं चाहे कितनी भी मेहनत कर लूं मैं वो नहीं बन पा रहा जो मेरे पेरेंट्स मुझे चाहते थे। और दूसरा कि कई सारी ऐसी चीजें जो कि पेरेंट्स ने बोली थी कि इस क्लास के बाद लाइफ स्वर्ग हो जाती है। उस क्लास के बाद सब कुछ सेट। यह डिग्री पाने के बाद सब कुछ सेट। यह नौकरी पाने के बाद सब कुछ सेट। ऐसा कुछ तो हो नहीं रहा। एक आदमी के लिए काम करने के बाद, पैसे कमाने के बाद अगर उसको कोई चीज सबसे ज्यादा पीस देती है तो वह है कि वह घर पर आ रहा है और उसकी एक अच्छी फैमिली है। एक सपोर्टिव फैमिली है। एक सपोर्टिव वाइफ है। खुशहाल बच्चे हैं जो उसको देख के खुश हो रहे हैं। आजकल अब वो भी नहीं हो रहा। वो भी प्रिविलेज चली गई है आदमी के पास। अब बाहर भी एक युद्ध का मैदान है और घर में एक अलग युद्ध का मैदान है। अब जब घर में युद्ध का मैदान है और वो अपने सबसे करीबियों से पूछता है कि अपने घर के युद्ध को कैसे मैं डील करूं तो करीबी उससे वही घिसी पीटी बात बोलते हैं कि तुम्हारा तो भाग्य है। बेटा देखो भाग्य को कोई बदल सकता है क्या आज? भाग्य को एक्सेप्ट कर लो। वो जाता है YouTube पे। वो मेन स्ट्रीम वालों की एडवाइस देखता है। मेन स्ट्रीम वाले बताते हैं कि अगर आपकी वाइफ आपको अच्छे से ट्रीट नहीं कर रही है तो उससे बैठ के बात करो। उससे पूछो कि क्या क्या दिक्कत है। उसको और गिफ्ट दो। उसको घुमाने और ले जाओ। उसको दिखाओ कि तुम किस तुम लायक हो इज्जत के। ओके? कंफ्यूज्ड आदमी जब देख लेता है कि मैंने सब कुछ ट्राई कर लिया तब वो फ्रस्ट्रेट हो जाता है और तब वो डिप्रेशन में चला जाता है। यह कंफ्यूजन जो है ना आपसे हर चीज करवाएगी। आप सोचोगे उम्मीद में आके मैं यह भी कर लूं, मैं यह भी कर लूं, मैं यह भी कर लूं। जो मुझे बताया जा रहा है मैं कर लूं। आप करते रहोगे और आप फेल होते रहोगे तो दूसरा बताएगा नहीं तुमने यू डिड नॉट वर्क हार्ड इनफ। तुमने उतनी एकाग्रता के साथ नहीं किया। तुमने किया पर तुम्हें थोड़ा और करना चाहिए था और तुम्हें डेडिकेशन से करना चाहिए था। तुम पा जाते जो तुम है। इसकी वजह से बिकॉज़ रियलिटी में कोई मेंटर, कोई फादर फिगर, कोई गुरु फिगर नहीं बचा। तो आदमी कंफ्यूज्ड है और जहां कंफ्यूजन है वहां पर दो कॉन्सिक्वेंसेस आते हैं। या तो आदमी फिर गलत कामों में चला जाता है। किसी और ही दुनिया में लिप्त हो जाता है। वो दूसरों का नुकसान पहुंचाने लगता है या फिर वो अपने आप को विड्र कर लेता है एकदम से समाज से। वो एकदम से अपने आप को रेक्सिव बना देता है। और इसी से शुरू होता है डिप्रेशन।

बहुत ही सच्ची बात है यह लॉर्ड कि मैं खुद भी महसूस करता हूं। मैं 41 का हूं। यहीं पर मेरा जन्म हुआ जहां पर अभी बैठा हूं। मैं छोटा था। इतनी आवाजें नहीं थी बाहर। मतलब अभी मैं मैं अवॉयड करता हूं। ज्यादातर खेतों में ही रहता हूं। शाम को भी रात को मैं लेट थोड़ा आता हूं कर क्योंकि वो बहुत बाहर आवाज हो रही है। बहुत हो हल्ला हो रहा है। उसके कारण कुछ कुछ बार फिर हम इरिटेट हो जाते हैं। तो ये पहले मेरा जीवन अनुभव नहीं था जहां पर मैं रह रहा हूं। सिटी की छोड़ दो। मैं गांव में हूं। एक टिपिकल इंडियन जो विलेज होता है। और गांव के बाहर भी मैं देखता हूं कि वो हकिंग करना जोर-जोर से एकदम हकिंग करते-करते बाइक लेकर के निकलना। तो यह सब कहीं ना कहीं हमें भीतर से कुछ बार छोड़ देता है और हम इरिटेट भी हो जाते हैं। हम अपना आपाप ही खो देते हैं।

एक क्वेश्चन है यहां पे हर्ष राजपूत का। माय क्वेश्चन इज आई एम वेरी गुड इन टुडेेस वर्ल्ड। सो हाउ डू आई करेक्ट दिस माइंडसेट एंड बी लेस इमोशनल एंड मोर प्रैक्टिकल वि दिस थॉट पीपल? हर्ष पहली चीज तो यह कि जिन लोगों को ज्यादा इमोशनल होने की प्रॉब्लम है अब वो यह जानने के बाद भी कि कई बार आपको इमोशंस ट्रबल में डालेंगे अपनी इस आदत को दूर नहीं कर पा रहे उनको भी एक तरीके का वेकअप कॉल मिलता है जब वो पाते हैं कि लाइफ में उनके इमोशंस की वजह से उन्हें काफी ज्यादा दिक्कतें आ रही है। उनको थोड़ा सा सफर करना पड़ता है। तब जाके एज अ सेल्फ प्रिजर्वेशन मेजर अपने आप को बचाने के लिए सर्वाइवल के लिए अपने आप उनके अंदर यह आदत आ जाती है कि वो अपने आप को कंट्रोल कर पाते हैं। अभी के लिए यह चीज ट्राई करने की जरूरत है। जैसे कि जिम जाते हो तो जिम में अपने मसल्स को एक्सरसाइज करते हो। पर जिम अपने रूटीन पर जाते हो। जब तुम्हारा मन करे जा सकते हो। जो दिमाग का जिम होता है। दिमाग का जिम होता है कुछ विपरीत परिस्थितियां जब तुम्हें टेस्ट करती हैं आके और वो तुम्हारे टाइम पर नहीं आएंगी। वो यह नहीं होगा कि तुमको हर हफ्ते 5:00 बजे कोई खराब परिस्थिति आएगी। वो बिना बताए आती है। और तुम्हारा एटीट्यूड ये होना चाहिए। तुम्हारा परसेप्शन यह होना चाहिए कि जब कोई मुसीबत आए तुम उसको एक कहर के रूप में देखने की जगह कि अरे बाप रे सब कुछ खत्म हो गया। ऐसे देखने की जगह उसको एक अपोरर्चुनिटी की तरह लो कि देखो मेरा मेंटल जिम आ गया मेरे सामने। अब मुझे वर्कउ करने की जरूरत है। और तुम्हारा वर्कआउट सिर्फ एक है। चाहे कैसा भी कुछ भी आ जाए तुम्हारे सामने। तुम्हारे अंदर की दुनिया जो है वो चेंज नहीं होनी चाहिए। तुम हिलने नहीं चाहिए। तुम्हें तब भी ब्लैंक रहना है। तुम में तब भी अनफेक्टेड रहना है। तुम्हें कोशिश करना है कि एटलीस्ट तुम्हारे चेहरे पे कोई ऐसे चौंकने वाली फीलिंग ना दिखे। कई लोग चौंक जाते हैं। उनकी आंखें फट जाती है। अगर तुम अपने फेस को भी कोशिश कर सकते हो रिलैक्स रखने की इन द टाइम्स ऑफ़ ट्रबल। फेस रिलैक्स रहेगा, बॉडी रिलैक्स रहेगा तो अंदर की भावनाएं अपने आप देखेंगे कि तुम थ्रेट में नहीं। जब भी थ्रेट आता है, मुसीबत आती है तो नेचुरली हम लोग की बॉडी टेंस हो जाती है। हम लोग की आंखें फट जाती है। हम लोग क्या कर रहे हम लोग रिवर्स में काम कर रहे हैं। कोई टेंस सिचुएशन आ रही है। हम लोग और रिलैक्स हो जा रहे हैं। इससे दिमाग देखता है कि यार ये तो इतना रिलैक्स हो गया इसका मतलब कोई खतरा नहीं है यहां पर। कुछ हुआ भी नहीं है इसको। इन रियलिटी अधिकतर सिचुएशनंस में तुम्हें कोई फिजिकल नुकसान नहीं पहुंचता। तुम्हारी जान नहीं जाती। बस नुकसान पहुंचता है ईगो को। नुकसान पहुंचता है इमोशंस को। और उसके चक्कर में हम लोग बहुत ही ज्यादा सीरियस हो जाते हैं। व्हेन यू फोकस ऑन स्टेइंग रिलैक्स थ्रू अ लॉट ऑफ 10 सिचुएशन। तुम ये चीज रियलाइज करोगे कि तुम्हारा दिमाग भी एक पॉइंट पे आके समझ जाएगा कि यार इट्स नॉट अ बिग डील और जब तुम देखोगे कि तुम कंट्रोलोल्ड हो और तुम्हारे आसपास के लोग तुम्हें इस बात का एडमायर कर रहे हैं। जब तुम कंट्रोलोल्ड हो, तुम अच्छे डिसीजंस ले पा रहे हो। अगर रिलेशनशिप्स में हो और दुनिया भर के टेस्ट तुम्हारी तरफ आ रहे हैं और तुम कंट्रोल हो और तुम देख रहे हो कि दैट एक्चुअली गिव्स यू द अपपर हैंड तो तुम खुद ही तुम्हारा दिमाग कहेगा यार मुझे फीडबैक अच्छा मिल रहा है इस चीज से तो अब मुझे यही करना चाहिए ओके तुम शॉर्ट टर्म प्लेजर को ट्रेड कर दोगे फॉर लॉन्ग टर्म प्लेजर डरने से रोने से वरी करने से शॉर्ट टर्म प्लेजर मिलता है इसमें भी एक प्लेजर है अपने आप के लिए बुरा फील करने में विक्टिम फील करने में भी एक तरीके का प्लेजर है यह एडिक्शन है। मैं कह रहा हूं इसको रोक दो और आगे असली प्लेजर पाओ। तुम जानो तुम्हारे अंदर पावर क्या है जो तुमने कभी निकाली नहीं बाहर।

इंडिया में साइकोसोशियल फैक्टर कॉमन है। ऐसा बोल रहे हैं हमारे परिवार के एक सदस्य। इंडिया में साइकोसशल फैक्टर कॉमन है। साइकोसशल फैक्टर कॉमन है। पहली चीज तो ये है कि जहां तक बात करें हम लोग साइकोलॉजिकल एस्पेक्ट्स की सोसाइटी में साइकोसोशल फैक्टर ये बात जो मैंने सिर्फ बोली कि अ लॉट ऑफ पीपल आर वॉकिंग अराउंड विद अ लॉट ऑफ मेंटल इश्यूज। यह चीज ही अगर रिकॉग्नाइज हो जाए तो कुछ रिलीफ मिल सकता है लोगों को। कम से कम हमारे वर्क प्लेस पे, हमारे कॉलेजेस में, हमारे स्कूल्स में कंसीडर किया जा सकता है कि हम लोगों को अपने वर्क प्लेसेस को, हम लोगों को अपने एकेडमिक इंस्टीटश को, हम लोगों को अपने पूरे के पूरे करिकुलम को ऐसा बनाना है कि मेंटल हेल्थ पे टोलना पड़े बच्चों के। हम लोग के कानून भी ऐसे फिर बन सकते हैं कि मेंटल हेल्थ पे टोलना पड़े। मेंटल हेल्थ इज वेरीेंटली इन दिस कंट्री जहां पर पापुलेशन इतनी ज्यादा है। एक पापुलेशन का

बड़ा चंक अगर मान लो अपने माइंड को लूज़ कर देता है तो देयर कैन बी अ लॉट ऑफ़ प्रॉब्लम्स। और हम लोग देखते हैं कई बार क्या होता है कि आप देखते हो मॉब आके अचानक से वो ट्रेन वगैरह पे हमला करने लगता है। वो ट्रेन में घुसने की कोशिश करता है दरवाजा तोड़ के। ऐसा लगता है कि मैं कोई ज़ॉम्बी मूवी का सीन देख रहा हूं। एक मूवी थी ट्रेन टू बुसान। उसमें यही हो रहा था कि कई सारे ज़ॉम्बी ट्रेन के अंदर घुसना चाह रहे थे दरवाजा तोड़ के। वैसे ही अब रियल लाइफ में आप देख रहे हो ये लोग क्या है? इनको ट्रेन तोड़ के दरवाजा तोड़ के क्या कोई करोड़ों रुपए मिल जाएंगे इनको? पागलपन भी कर रहे हैं ये। दे आर ऑल मेंटली इल नाउ। और ये एक फेस्टरिंग क्राइसिस है। एक स्वार्म अगर अपना माइंड लूज़ कर दे तो इट कैन बी वेरी डेंजरस। लोगों को यह चीज।

दूसरी चीज यह है कि अगर आप हम आप इन सब चीजों पर बात करेंगे विद द ऑर्थोडॉक्स समाज तो वह कहेगा कि मेंटल हेल्थ मतलब पागल की बात कर रहे हो तो पागलखाने भेजना पड़ेगा। पीपल थिंक मेंटल हेल्थ मतलब पागल। इस चीज को लेके एक टैबू है जो कि काफी डार्विनिस्टिक नेचर को दर्शाता है सोसाइटी के। एसेंशियली सोसाइटी चाहती नहीं कि जिसका माइंड हल्का सा भी कमजोर हो उसको कोई रिलीफ मिले, उसको उसको कोई हेल्प मिले। हमारी सोसाइटी का स्पेशली यह है कि जो सबसे ज्यादा कॉर्टिसोल टोलरेंट है, जो सबसे ज्यादा मजबूत है, उसको सोसाइटी रिवॉर्ड करेगी। जो ब्रेक हो जाता है, जो टूट जाता है, जो मन से थोड़ा सा भी फ्रजाइल है, उसको ले कोई रेस्क्यू टीम नहीं आती। उसको पोलराइज ही करना है, उसको दबाना ही है। आए दिन आपको कई सारे रेल मिल जाएंगे। जहां पर किसी आदमी के साथ कोई इनजस्टिस हुआ है, कुछ बुरा हुआ है। अब वह हाथ जोड़ के रोता रहता है। एक मैंने एक रील देखा उसमें एक सरकारी ऑफिस में एक बूढ़ा सा आदमी जमीन पर रोल कर रहा था, लौट रहा था क्योंकि उसके साथ भी कुछ इनजस्टिस हुआ था। तो लेट्स बी ऑनेस्ट। उनके लिए किसी को सिंपैथी नहीं। जो मैंने नोटिस किया है वही यह नोटिस किया है कि स्पेशली हमारी जो सोसाइटी है वह आपको रिवॉर्ड तभी करती है जब आप बहुत ही एक्सेप्शनल लेवल पे अंदरूनी रूप से मजबूत हो। बहुत ही एक्सेप्शनल लेवल पे है। और अगर आप वीकनेस दिखाते हो तो फिर किसी को सिंपैथी नहीं होती। लोग बस सोशल मीडिया पे कमेंट कर देते हैं। रियल लाइफ में मैंने देखा है कि जो भी इमोशनल वीकनेस दिखाता है लोग उसको और तोड़ते हैं और उसको बुली करते हैं। ये नेचर है हमारी सोसाइटी का बहुत ही ज्यादा डार्विनिस्टिक बहुत ही ज्यादा जंगल टाइप। लोग बाहरी रूप से कितना भी प्रिटेंस कर ले और यह नेचर है। यह समझने की जरूरत है।

इसीलिए आप पाओगे कि किसी भी एस्पेक्ट मेंटल हेल्थ के बारे में कोई बात नहीं होती है। जहां तक बात है बच्चों पर प्रेशर डालने की। कई सारे बच्चे कोचिंग इंस्टट्यूट में जाके अपने आप को डिलीट कर लेते हैं। पर इसके बारे में कोई बात नहीं होती कि आपने जो एग्जाम सिस्टम बनाया है, आपने जो विशियस कंपटीशन वाला सिस्टम बनाया है और जो कोचिंग मैट्रिक्स को आप चलने दे रहे हो, इससे बच्चों के मेंटल हेल्थ पे क्या इफेक्ट पड़ रहा है? इसके बारे में बात नहीं होती। लेकिन हां ये चीज किया जा सकता है कि अपने आप को डिलीट करने के जितने साधन है उनको रोका जा सकता है। पंखों में जाली लगा दो। पंखे के अंदर स्प्रिंग लगा दो ताकि कोई लड़क ना पाए। है ना? आप कॉज को एड्रेस नहीं करोगे। आप बस यह कोशिश करोगे कि अपने आप को डिलीट करने के रास्ते जो है, साधन जो है उनको रोका जा सके। इससे पता चलता है कि लोग सीरियस नहीं है। किसी किसी जगह पर, किसी प्लेस में अगर ऐसा हो रहा है कि बच्चे अपने आप को डिलीट कर रहे हैं तो यह एक सीरियस टॉपिक होना चाहिए एक देश के लिए, एक सोसाइटी के लिए। यह फैक्ट के कॉज को कारण को एड्रेस करने की जगह पंखों में स्प्रिंग लगाया जा रहा है ताकि पंखे से कोई लटक ना पाए। यह दिखाता है कि यह समाज कितना सीरियस है। एक एवरेज लाइफ के बारे में। एक एवरेज लाइफ की वैल्यू क्या है? एक बच्चे की लाइफ की वैल्यू क्या है? आप करने नहीं दोगे उसे। आप यह नहीं देखोगे कि वो करना क्यों चाहता है। मिनिस्ट्री होनी चाहिए। मतलब जिस प्रकार की मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति है भारतवर्ष की वी नीड मतलब पर्टिकुलर मिनिस्ट्री मेंटल हेल्थ मिनिस्ट्री पर जो बजट है उसमें भी बहुत ही उसको तवज्जो नहीं दिया जा रहा है। तो नहीं है गंभीरता भारत में यह सत्य है।

ध्यान के बारे में मैं पूछना चाहता हूं लॉर्ड आपको क्योंकि आपका जो चेहरा है आपका जो भी पूरा एक कोना है एक व्यक्तित्व है ओरा है उसमें वो योगी चित्त वाली वाइब्स आती है कि जो भारत के योगियों के लिए जो वर्णन है या उनका जिस प्रकार का व्यक्तित्व होता था तो ध्यान के बारे में मैं आपसे क्योंकि ध्यान को लेकर के भी बहुत भ्रमणाएं हैं भारत में। विचारों को रोक देना, पूर्णता से बंद कर देना, दिमाग में कोई थॉट ही ना चले। कुछ जो हमारे आध्यात्मिक गुरु है वो भी ऐसे बोलते हैं कि भाई गाय के सिंह के ऊपर राई का दाना जितनी देर टिक जाए उतनी देर भी अगर तुम्हारे दिमाग में विचारों का प्रवाह रुक गया। उसी पल तुम्हें आत्मज्ञान हो जाएगा और तुम उस चेतना का अनुभव कर लोगे जो वास्तविक तुम्हारी चेतना है वो ना मन है ना बुद्धि है ना अहंकार है ना चित्त है तो मैं लॉर्ड आपसे जानना चाहता हूं आज ध्यान के बारे में क्योंकि कभी आपको ज्यादातर नहीं पूछा जाता है पर मैं पूछना चाहता हूं क्योंकि मुझे जो मैंने पहले भी बोला था जो पहला लाइव किया था कि ठीक है रिलेशनशिप मैट्रिक्स और इन सब चीजों को लेकर के तो आपको सुनना ही एकमात्र उपाय है पर बाकी बाकी भी बहुत सारी चीजें मैं अनुभव करता हूं जब आपको सुनता हूं। ओवर ऑल एक मनुष्य के तौर पर यहां पर कैसे आपको जीना है अपना व्यक्तित्व कैसे लेकर के चलना है वो सभी चीजों का समाधान वहां पर मिलता है। तो आज मुझे ध्यान के बारे में समाधान चाहिए। वास्तविक ध्यान है क्या? और उससे क्या फायदा होता है? वो क्यों जरूरी है?

यह जवाब दो तरह के लोगों के लिए दो अलग-अलग तरह से एस्पेशली अधिकतर लोग क्योंकि वो काफी रैशन होते हैं। वो काफी ज्यादा साइंटिफिक होते हैं। तो उनके लिए बस इतना काफी है कि आपको काम रहने में मदद करता है। आपको फोकस करने में मदद करता है और आपको आपके मन में नेगेटिव थॉट्स वगैरह है तो उनको शांत कर देता है। प्रोवाइड्स अ सर्टेन रिलैक्सेशन। ऐसा आप कह सकते हैं फॉर द एवरेज ग्राउंड। जब बात करते हैं बाकी बेनिफिट्स की जो आप योगिक बेनिफिट्स की बात कर रहे हैं, मेटाफिजिकल बेनिफिट्स की बात कर रहे हैं। तो बेनिफिट्स उसके भी है पर वो उतना फिटिंग नहीं है टू टॉक टॉक अबाउट विद एवरीवन।

एक चीज मैं कहना चाहूंगा कि दुनिया का अभी जो मेकअप है मेरा यह मानना है कि आपके लाइफ में जो सशंस है आपके प्रॉब्लम के आपकी लाइफ में जो रास्ता है आपको अपने आपको बेहतर बनाने का आपकी लाइफ में जो साधन है कि आप मजबूत बने आप स्ट्रांग बने द आंसर्स दे लाई विद इन दे डोंट लाई ऑन द आउटसाइड वो बाहर नहीं होता जो भी बदलाव आना है जो भी चेंज आना है और जो भी सुधार होना है पहले आपके अंदर होगा उसके बाद आपकी हरकतों उससे आपके बिहेवियर से बाहर भी होता है। सबसे पहला चेंज ऑन द इनसाइड।

एक चीज आप नोटिस करोगे कि दुनिया का जो भी मेकअप है अभी चाहे वह सोशल मीडिया की बात करें आप या फिर जितना बाहर कॉलेज स्कूल मैट्रिक्स काम मैट्रिक्स है या फिर बाहर का जो भी आपका मैकेनिजंस है उनका पूरा का पूरा ऑब्जेक्टिव है कैसे भी करके आपका जो ध्यान है वो बाहर की दुनिया पर लगाए रखना और आपको कभी भी अंदर जाने से रोकना इसलिए रात-रात भर तक आप जागोगे और आप फोन पर स्क्रोल करते रहोगे, स्क्रोल करते रहोगे और स्क्रोल करने में भी ऐसी ऐसी चीजें आती हैं मारपीट, नेगेटिविटी, हाईली हाईली पॉलिटिकल कंटेंट कि वो आपको इमोशनली इंप्रिंट हो जाएगा आपके दिमाग में। और फिर आप जल्दी हट नहीं पाओगे स्क्रोलिंग से। जब तक आप स्क्रोलिंग से हटोगे तब तक आपको नींद आ जाएगी आप सो जाओगे। तो आप मेडिटेट वगैरह आप ध्यान वगैरह कैसे करोगे? तो एक चीज ऑब्जर्व करने की जरूरत है कि दुनिया का जितना भी मेकअप है मैट्रिक्स का जो भी मेकअप है उसका पूरा ऑब्जेक्टिव ही यह है कि आप बाहर की दुनिया पे फिक्सेटेड रहे और उसे सीरियसली लेते रह। आप सोचते रहे कि उस वाले पॉलिटिशियन ने यह बोल दिया यार कितना गंदा आदमी है यार वो मेरा वाला अच्छा है। आप सोचते रह कि देखो वो लड़की वहां पर यह बोल रही है वो कितनी खराब लड़की है। वो कैसे ये बोल सकती है? आप सोचते रह कि देखो उस वाले गांव में देखो वहां बैटल ऑफ झुंझुनिया चौक हो रहा है। यह गलत हो रहा है। मुझे इसके खिलाफ कुछ करना होगा। जब आप यह सब सोच रहे होते हैं तो आपकी लाइफ जो है वो वहीं की वहीं रहती है। आपको लगता है कि आप हीरो बन गए। आप समाज के देवता बन गए। आपने सबको बचा लिया। आप नेता बन गए। आप सब कुछ बन गए। आपकी पर्सनल लाइफ जो है वो वहीं की वही है।

यह चीज जरूरी है। क्योंकि अगर आपको इंसानों को यूज़ करना है, उनका इस्तेमाल करना है तो उनको अपने व्यक्तिगत जीवन को छोड़ के बाकी हर चीज में उनका ध्यान लगाओ। उनका ध्यान अपने व्यक्तिगत जीवन को छोड़ के हर चीज में होना चाहिए। एस्पेशली वो कहानियां जो उनकी खुद की नहीं है। वो फिल्में जिनमें वो मेन कैरेक्टर नहीं है। उनकी अपनी फिल्म को छोड़ के उनसे हर फिल्म में उनका किरदार जो है वो होना चाहिए।

ध्यान जो है आप जब करते हो आज के टाइम में करना मुश्किल है। मुझे काफी ज्यादा हैरानी हुई जब मैंने लोगों से सुना कि वो जो स्टेट होता है जब आपके दिमाग में कोई थॉट आता ही नहीं। नो थॉट्स, नथिंग, नो फीलिंग ऑफ ईगो, नो फीलिंग ऑफ कॉन्शियस माइंड कंप्लीटली ऑफ जस्ट एक्सिस्टेंस। मुझे काफी हैरानी हुई यह जान के कि लोगों के लिए इस स्टेट तक पहुंचना बहुत मुश्किल है और कई सारे लोग ट्राई करते रहते हैं पर वो नहीं पहुंच पाते। मैंने सुना लोगों को बोलते हुए कि नहीं एक थॉट तो रहता ही है दिमाग में। तो हम उस एक थॉट पे फोकस करते हैं। तो वो मेडिटेशन कैसे हुआ? वो कोई कंसंट्रेशन एक्सरसाइज हो गया तुम्हारा। नहीं नहीं तो एक नहीं जाता। ऐसा कैसे हो सकता है? कोई थॉट ही ना आए। यह रियलाइज हुआ मुझे काफी हैरानी हुई कि यह कई लोगों के लिए अधिकतर लोगों के लिए काफी मुश्किल है। और अगर वो सीखना चाहते भी तो दुनिया का जो मेकअप है उन्हें करने नहीं देगा। मैट्रिक्स जो है आपको हमेशा रोकेगा अंदर जाने से खुद के अंदर विद इन जाने से। क्योंकि आपकी असली पावर जो है इट इज़ विद इन यू। जो आप वो रियलाइज करते हो, आप कहते हो कि बाहर जो भी हो रहा है, जितनी भी फालतूगिरी हो रही है, जितना भी ड्रामा हो रहा है, जितनी भी स्टोरीज हो रही है, वो मेरी कहानी नहीं है। मेरी फिल्म नहीं है। आई डोंट रियली केयर। मेरी अपनी एक फिल्म है। मुझे सारा फोकस अपनी फिल्म पर रखना है। यह चीज बहुत ही डेंजरस है। किसी भी ऐसे कंस्ट्रक्ट के लिए जो कि आपको एक बाड़े में रख के एक भेड़ की तरह इस्तेमाल करना चाहता है। यह बहुत डेंजरस है। अगर एक-एक आदमी इंडिविजुअलिस्टिक बन गया और अपने तरीके से ग्रो होने लगा। अपने तरीके से अपने पोटेंशियल को रियलाइज करने लगा तो फिर मैट्रिक्स खत्म। इसलिए हर एक आदमी को एक ही सांचे में ढाल देना है। सबको एक ही तरह से बात कराना है। सबको एक ही तरह से दिखने के लिए बोलना है। सबको एक ही तरह से सोचने के लिए बोलना है। अगर एक तरह से सोच भी नहीं रहे हो तो समाज जो है आपको दो खेमे बांट के दे देगा। आप एक खेमा चुन लो। या तो तुम इस साइड को चुनो नहीं तो दूसरे साइड को चुनो। किसी एक को अच्छा मान लो दूसरे को बुरा। दोनों के दोनों तुम्हारे फेवर में नहीं है। लेकिन तुम चुन लो कोई एक साइड ताकि तुम उस गेम में इन्वॉल्वड हो। खबरदार जो तुमने अपना साइड बना रखा है। है ना?

लेकिन अगर लोगों को टाइम मिलता है तो मैं कहूंगा किस्पेशली एट नाइट क्योंकि रात के टाइम में बाहर वगैरह से कोई आवाज नहीं आती। कम आती है गाड़ी वगैरह की आवाज। लोग भी जो है डिस्टर्ब करने के लिए नहीं है। तो आप सोने से पहले भी अगर लेटे हुए भी आप मेडिटेट करने की कोशिश कर रहे हो। आप उस स्टेट में रहने की कोशिश कर रहे हो कि कोई थॉट नहीं, कोई सेंसेशन नहीं, कुछ भी नहीं। जस्ट प्योर एकिस्टेंस। तो, यह आपके लिए बहुत बेनिफिशियल होगा और मैं चाहता हूं कि जो भी यह चीज ट्राई कर रहा है, वह एक जर्नल रखें। मार्क कर ले उस दिन से जब से वह कर रहा है हर रोज करें। जब से वह कर रहा है तब से मार्क करके वह उन बेनिफिट्स को नोट करें क्योंकि कुछ कुछ बेनिफिट्स हैं वह आपको लॉजिक के हिसाब से काफी क्रेजी लगेंगे। तो मतलब एनपीसी है वैसे बाहर की दुनिया में तो हम सब एनपीसी हमें लगता है कि हम वहां पर इनवॉल्व है पर वास्तव में हमारा कोई प्ले है नहीं पर हम वहां पर फंस जाते हैं।

एक कमेंट है लॉर्ड यहां पे कि टुडे आई रीड रिसर्च दैट अ चाइल्ड्स मेंटल हेल्थ इज द बैड इन टॉक्सिक फैमिली कॉन्फ्लिक्ट एस इट इज इन सोल्जर्स मिलिट्री कॉन्फ्लिक्ट। मतलब डिवावरिंग मदर के बारे में भी मैं आपको पूछने वाला था। तो अभी पूछ लेता हूं। ये जो परिवार में जो उसके आत्मबल को आत्मविश्वास को खत्म किया जा रहा है। स्पेशली आई वांट यू टू एड्रेस आल्सो डिवावरिंग मदर क्योंकि मैं बहुत देख रहा हूं। मेरे आसपास मैं बहुत डिवावरिंग मदर को देख रहा हूं और इसको लेकर के कोई जागरूकता नहीं है। सब विक्टिम बने हैं। पति भी विक्टिम है। बच्चे भी विक्टिम है और समाज की चेतना को बड़ा नुकसान पहुंचा रहे हैं।

एक चीज मैंने नोटिस की है कि इन जनरल लोगों के अंदर एक टेंडेंसी है जिसको मैंने शगोन पिल के नाम से एड्रेस किया था कि लोग वायलेंस को बहुत रिस्पेक्ट करते हैं। अब वो वायलेंस फिजिकल वायलेंस हो सकता है। वर्बल वायलेंस भी हो सकता है। इमोशनल वायलेंस भी हो सकता है। और जो लोग वायलेंस नहीं करना चाहते या वायलेंस करने को इनकेबल है तो दूसरे एवरेज लोग भी उसको खाने की कोशिश करते हैं। डिवावरिंग मदर भी एक ऐसा ही फेमिनॉन है। एक एवरेज आदमी सोसाइटी में एक दूसरे एवरेज आदमी को डिवावर करने की कोशिश करता है। यह सबके अंदर नेचर कि एक एवरेज आदमी है। वो दूसरे एवरेज आदमी कोशिश करता है कि मैं उसको दबा के रखूं। इससे मुझे थोड़ा-थोड़ा फायदा मिल जाएगा। थोड़ा-थोड़ा फायदा ज्यादा भी नहीं। थोड़ा-थोड़ा फायदा मिल जाएगा। कोई मेरी इज्जत करता रहेगा हमेशा। कोई मेरे सामने झुकता रहेगा। मैं गुस्से में रहूंगा तो उसके ऊपर फ्रस्ट्रेशन निकाल दूंगा अपना। ज्यादा फायदा भी नहीं होता। इसी को मैं कहता हूं दो डिब्बा बादाम माइंडसेट। यही सेम बिहेवियर कई बार परिवारों में भी आ जाता है। आप परिवार में पैदा तो हो गए हो पर एट द एंड ऑफ द डे आपके मां-बाप आपके भाई बहन वो भी इंसान ही है। और एक एवरेज इंसान के अंदर जो फ्लॉस होते हैं वो उनके अंदर भी है। और वो उन फ्लॉस को आपके खिलाफ दिखाने में भी कोई हिचकिचाएंगे नहीं। डरिंग मदर फिनोमिनान ज्यादा प्रिवेलेंट इसलिए हो गया है अभी क्योंकि मैस्कुलिनिटी जो है फैमिली में आदमी जो है वो काफी ज्यादा वीक हो रहे हैं। उन्हें लीडरशिप का कोई आईडिया नहीं है। उनको लगता है वो दो एक्सट्रीम पे रहते हैं। उनको लगता है कि मैस्कुलिटी और लीडरशिप का मतलब है चिल्लाना बीवी पे उसको गालियां देना मारना पीटना या तो यह या तो वो इस एक्सट्रीम पे है नहीं तो वो दूसरे एक्सट्रीम पे जाते हैं कि वो एकदम कमजोर बन जाते हैं। वो एकदम ओबिडिएंट बन जाते हैं। वो एकदम गुलाम बन जाते हैं। कोई मिडिल पाथ चूज़ नहीं करता। कोई ये नहीं कहता कि ठीक है आई विल डू इट स्मार्टली। आई विल लर्न हाउ टू लीड। कोई सीखता नहीं है। आफ्टर ऑल पेरेंट्स बनने के लिए कोई ट्रेनिंग की जरूरत थोड़ी होती है। कोई कोर्स थोड़ी चलता है। कोई क्वालिफिकेशन की जरूरत थोड़ी होती। कोई भी पैरेंट बन सकता है। अब जब कोई भी पैरेंट बन सकता है और उसे मालूम नहीं है हाउ टू लीड। अब वह मैस्कुलिन नहीं है तो उसकी वाइफ को जबरदस्ती मैस्कुलिन बनना पड़ेगा। वाइफ जब मैस्कुलिन बन जाएगी तो उस हस्बैंड को हेट करेगी जिसकी वजह से उसको मैस्कुलिन बनना पड़ा। अब बच्चे के अंदर भी वह अपने हस्बैंड की ही इमेज देखती है। उस वीक हस्बैंड की इमेज कि यह उसी की इमेज में और अपने रिजेंटमेंट को फिर बच्चे के ऊपर निकालती है। उसे बुरी तरह से मैनपुलेट करके उसे गिल्ट करके इमोशनली ब्लैकमेल करके जितना ज्यादा बच्चा उसके सामने झुकता है। उसके इमोशनल ब्लैकमेल के सामने उसको उतना अच्छा लगता है। एक अजीब सा ट्विस्टेड अकम्प्लिशमेंट की फीलिंग उसे आती है कि देखो मैंने किसी को तो डोमिनेट कर लिया है। कोई तो दवा मेरे सामने। जब लोग मानसिक रूप से दरिद्र हो जाते हैं तो वह बहुत ही अजीबोगरीब चीजें करते हैं। जो लड़का डेटिंग के मामले में उसका ऐसा हालत है कि उसको लड़कियों की भूख रहती है। मुझे लड़की नहीं मिल रही। अब क्या हुआ? वो लड़कियां पाने के लिए बहुत ही अजीबोगरीब हरकतें करता है। जिसको लगता है कि उसके पास पैसे नहीं है। वो पैसे पाने के लिए अजीबोगरीब हरकतें करता है। वो लोगों को स्कैम कर देगा। वो चुरा लेगा पैसे। वैसे जिसको जिंदगी भर कभी इज्जत नहीं मिली होती। जब वो देखता है कि डिफॉल्ट रूप से उसका बच्चा उसकी इज्जत कर रहा है तो वो पागल हो जाता है। वो कहता है नहीं यार मुझे और इज्जत तो किसी और से मिलती नहीं। इसको पकड़ के रखना है। यह अगर चला गया तब मेरी इज्जत कौन करेगा? तब मुझे पावरफुल कौन फील कराएगा?

डिवावरिंग मदर फेनोन एक और रीजन से फैल रहा है। वो रीजन यह है कि एक एवरेज लड़के को यह कहा जाता है कि भले ही तुम सही हो। अगर तुम अपने पेरेंट्स के किसी भी विश के खिलाफ जा रहे हो या उनको ना बोल रहे हो या फिर उनके इमोशनल ब्लैकमेलिंग को नहीं सुन रहे रेिस्ट कर रहे तो तुम एक खराब आदमी हो। तुम्हारा पूरा लाइफ पर्पस खत्म हो गया। है ना? और ऐसी बातें बोल के भी उनको बहुत ही ज्यादा डोसाइल बनाया जाता है कि तुम 50 साल के भी हो जाओगे तब भी पेरेंट्स के लिए बच्चे ही रहोगे और सही में बच्चे बन जाते हैं। 40-40 साल के आदमी बच्चों की तरह मुझसे कुछ ऐसे आदमी हैं जो मुझसे कंसल्टेशन कॉल करते हैं। 35 इयर्स के हो गए हैं। मम्मी से पूछना पड़ता है कि मम्मी मम्मी मैं बाहर जा रहा हूं। कुछ देर के लिए बात कर लूं फोन पे। मम्मी से पूछना पड़ता है। 35 ईयर ओल्ड है। यह उनकी हालत हो गई। और ऐसा इसलिए क्योंकि इन लोगों ने कभी रेजिस्ट नहीं किया। इनको सोसाइटी ने कहा कि आप रेजिस्ट करते हो तो आप गंदे आदमी हो। और ऑफ कोर्स एक एवरेज आदमी को अच्छा आदमी तो बनना है। तभी आप सर्वाइव कर पाओगे मेंटली। इसलिए फिनोनिम बहुत ज्यादा फैल रहा है।

अ आई विल बी सॉल्व योर डेली। सर डिप्रेशन इज सच अ बैड थिंग एंड द मेंटल हेल्थ ऑफ़ बॉयज इज वेरी बैड। दे नीड हेल्प बट सम रैशन पीपल रैशन यूटबर सेइंग दैट व्हाट दो तीन लोग जो कर लेते हैं उसको लेकर के तुम क्राई तो करने लगते हो मतलब अपने जीवन को अंत कर देते हैं डिलीट कर देते हैं। तो ये इन्होंने दो तीन बार पूछा यहां पे कि भाई लोग क्यों इसको गम तो आई थिंक लॉर्ड ने पहले ही बोला कि गंभीरता से कोई नहीं ले रहा है डिप्रेशन को। हम लोगों ने ये चीज पहले एड्रेस किया था। एक चीज समझ लो दोबारा बोल रहा हूं कि हमारा समाज जो है दिमाग के मामले मेंटल हेल्थ के मामले में बहुत ही ज्यादा डार्विनिस्टिक है। बहुत ही ज्यादा डार्विनिस्टिक इस सेंस में है कि अगर तुम दिमागी रूप से हल्का सा भी कमजोर हो गए अगर तुम दुखी हो गए अगर तुम वीक हो गए हेजिटेट करने लगे तुम्हारे को कोई सिंपैथी नहीं मिलेगी एस्पेशली अगर तुम मर्द हो तो सिंपैथी औरतों को मिल जाती तो अगर तुम मर्द हो और तुम वीक हो गए तुम रोने लगे या फिर तुम ब्रेक हो गए समाज तुमको क्रश कर देगा वो बहुत ही बेशर्म है इस मामले में जैसा कि इन लोगों इन्होंने बोला अभी ये जो बात बार-बार बोली जाती है ना कि दो-तीन आदमी मर गए उसमें तुम क्या रो रहे वो दो-तीन आदमी क्यों मरे? उनको भी कुछ क्राइसिस था। उनका भी दिमाग एक ब्रेकिंग पॉइंट पे आ गया। पर आप देखो कि जो

आदमी अब दुनिया में नहीं है। उसको लेके ऐसी बातें हो रही है कि वो आदमी वैसी वैसे भी वो कोई इंडिविजुअल नहीं है। वो दो-तीन आदमियों का हिस्सा है। बस दो ही तीन आदमी तो मरे यार। उसके चले जाने पर भी कोई सीरियस कंसीडरेशन नहीं।

तो अगर आप आदमी हैं तो यह समाज आपको तभी रिवॉर्ड करेगा अगर आप बहुत ही ज्यादा बुलेट प्रूफ हों मेंटली। और इसका एग्जांपल आपको हम लोगों के पॉलिटिशंस में देखना चाहिए। अगर आपको मेंटल स्ट्रेंथ का, आपको रेसिलियंस का एग्जांपल देखना है तो आप किसी भी पार्टी के फेमस पॉलिटिशियन को आप देख लें। ये लोग बहुत ही ज्यादा क्रिटिसिज्म, बहुत ही ज्यादा कॉन्फ्लिक्ट, बहुत ही ज्यादा एक दूसरे को टारगेटिंग, चाहे कुछ भी हो जाए, फ्रेम नहीं टूटता। जो स्पिरिट है वो नहीं टूटती। क्योंकि स्पिरिट टूट जाएगी तो यह समाज उसको रिवॉर्ड नहीं करेगा। यह समाज एडवांटेज लेगा उसका।

लोग भी जो हैं, लोग भी यही देखेंगे कि अगर आप अपना फ्रेम तोड़ते रहते हैं, समाज आपको ये नहीं कहेगा कि यार आई अंडरस्टैंड यू, आई अंडरस्टैंड योर पेन। वो आपका एडवांटेज लेगा और वो कहेगा अच्छा, तुम कमजोर हो। भागो। इतना ज्यादा लोग शगम फील्ड है कि जो कमजोर है उसको डिस्कार तुरंत कर दिया जाए। इसीलिए आप जब कभी ये बातें करोगे कि मेंटल हेल्थ और ये सब, कहा जाएगा ये सब क्या यार, ये लड़कियों वाली बातें करते हो। डिप्रेशन की बात आप खुद घर पर करोगे, अपने लोग कहेंगे पागल, पागलपन की बात कर रहे हो क्या? दवाई खाना है? पागलखाने में जाना है? ठीक है?

मजाक उड़ता है। मेरे चैनल पे एक आदमी आके, वो पिछले जनरेशन का आदमी था, मेरे ख्याल से भूमर था, उसने यह चीज मजाक के रूप में, एक इंसल्ट के रूप में यूज़ की कि देखो, हम लोगों ने तो देश को आजाद कराया, पता नहीं भूमरों ने कैसे देश को आजाद कराया। पर वो कह रहा था कि हम लोगों ने देश को आजाद कराया और तुम लोग की जो जनरेशन है, वो तो बिना कुछ किए ही डिप्रेशन में चली जाती है। तो वो हंसी उड़ाता है डिप्रेशन की। तो डिप्रेशन इज समथिंग टू बी लाफ्ड। अगर आप मर्द हैं तो हां।

इफ यू आर अ वुमन और आप कह दें कि आप डिप्रेस्ड हैं, 50ों सिम आ जाएंगे बताने कि नहीं नहीं, आप सही में, योर फीलिंग्स आर रियल, योर फीलिंग्स आर रियल। आप गलत नहीं सोच रही हो। मैं मैं समझता हूं। और ये अंकल लोग भी आ जाएंगे, तुरंत टपक के, बूमर सब आ जाएंगे वहां पर। और ये पक्का कह देंगे कि तुम्हारे डिप्रेशन का रीजन जो है, वो तो यार लड़के हैं। लड़के बदतमीज, लड़के सब बेकार। ठीक है?

तो जब आप ऐसा परिवेश बना देते हो जहाँ पर ओनली द स्ट्रांग सर्वाइव्स, बहुत ही ज्यादा डार्विनिस्टिक है। ये चीज लोग नोटिस नहीं करते। लोग मोरालिटी की बात करते हैं, संस्कार की बात करते हैं। कहते हैं कि हम तो भाई सबका ध्यान रखते हैं, ये करते हैं, वो करते हैं। आप जब नोटिस करोगे एट एन एवरेज स्कूल, एवरेज कॉलेज, एवरेज वर्कप्लेस, आपके खुद के फ्रेंड्स ग्रुप में, तो मेंटल वीकनेस रिवॉर्ड नहीं की जाती किसी के द्वारा। लोग आपको सिंपैथी दे देंगे। आपको हो सकता है थोड़ा सा घास डाल देंगे कि हाँ, काइंडनेस है, ये है, वो है। पर फिर आपकी रिस्पेक्ट गिर जाएगी और आपकी कोई पोजीशन रहेगी नहीं। फिर नोबडी विल रेस्पेक्ट यू। ओनली द हार्डेस्ट मैन दे कैन बी रिस्पेक्टेड एंड सर्वाइव एंड थ्राइव इन दिस काइंड ऑफ सोसाइटी।

अब यह होना चाहिए या नहीं, इससे मुझे मतलब नहीं है। मैं कभी बात नहीं करता कि क्या होना चाहिए, क्या नहीं होना चाहिए। मैं यह बात करता हूं कि अभी जो है, उसके हिसाब से मुझे क्या एडजस्टमेंट लाना है ताकि तब भी मैं बेनिफिट करूं। मेरा यह मानना है कि एक्सपेक्टिंग समवन एल्स टू कम सेव अस। इट विल बी फ्यू टाइम। यह जनता तो हमेशा से बात करते आई है कि कोई बचा लो हमें। और लोग आते हैं कहते हैं कि मैं आपको बचाने आया हूं। पता चलता है कि वो अपने फायदे के लिए आए थे। उन्हें हमारे फायदे से मतलब नहीं था। फिर से कोई आ जाता है कह देता है कि नहीं, वो झूठ बोल रहा था। मैं सच बोल रहा हूं। मैं बचाने आया हूं इस वर्ष। वो भी वही काम करता है। ऐसे ही तीसरा आता है। ऐसे ही चौथा आता है। मसीहा आते रहते हैं। इंसान मसीह के इंतजार करता रहता है। मसीहा कभी आता नहीं है।

धर्मस्य मतलब टॉकिंगली आई एम सेइंग, आपने बोला लॉर्ड कि नेताग जो है हमारा, वो ऐसे प्रेम तो वो तो बिना साधना के बाय बोर्न कुछ होता है इनमें जन्म से ही ऐसा उनमें कि भाई ये क्योंकि वो इतने वो अवेकंड भी नहीं होते हैं या कुछ-कुछ बार तो वो बड़े ही टॉक्सिक प्रकार के भी होते हैं, नार्सिसिस्टिक प्रकार के भी होते हैं। बाय डिफॉल्ट इनको मिलता है जो कि उनके बेनिफिट में काम करता है क्योंकि बाकी तो आपको साधना करनी पड़ेगी। इसमें दोनों चीजें सही है। कुछ ऐसे गवर्नमेंट में इलिट वर्ग है जो कि वो चीजें भी जानते हैं जो एक कॉमन आदमी नहीं जानता। मैं साइंटिफिक चीजों की बात नहीं कर रहा। ये वो चीजें भी जानते हैं जो कि कॉमन आदमी नहीं जानता।

कुछ लोग मुझसे कहते हैं कि एस्ट्रोलॉजी सही होता है कि नहीं और पामिस्ट्री सही होता है कि नहीं। मैं बोलता हूं कि तुम जो सीख रहे हो वो सही नहीं है। वो तुम तुम स्कैम में जा रहे हो। लेकिन जो सही है वो तुमको नहीं मालूम। वो मालूम है उसको जो कि ऊपरी लेयर पर है सोसाइटी में जहाँ सब कोई नहीं रहता। लेकिन जहाँ तक बात करें एक एवरेज नेता की, एक एवरेज पॉलिटिशियन की, उसने अपने एक्सपीरियंसेस के थ्रू ये चीज सीख ली। आप जब ऐसे एनवायरमेंट में रहते हो जहाँ पर बहुत केस है। अगर आप एक ऐसे नेता हो जो कि बहुत ही रिमोट एरिया से आता है। आप जितने ज्यादा रिमोट एरिया में जाओगे उतना ज्यादा शनम पे उतना ज्यादा आपको दिखाना पड़ेगा मसल पावर, उतना ज्यादा मजबूती दिखानी पड़ेगी।

और ये सिर्फ नेता के लिए कॉमन नहीं है। आप किसी मान लो किसी एवरेज किंग पिन को भी देखोगे, किसी माफिया को भी देखोगे। उसका भी सबसे ज्यादाेंस इस चीज में है कि वह अपने मन को कंट्रोल में रखे। नाउ दिस इज आउट ऑफ सर्वाइवल। यह कोई उसको किसी ने ज्ञान नहीं दिया, किसी किताब ने, किसी ने उसको सिखाया नहीं। उसने खुद देख लिया कि यार मुझे अगर सेफ रहना है। मुझे इंप्रेशन बना के रखना है लोगों के सामने कि मैं मजबूत हूं। तो आई हैव टू बी कोल्ड एंड आई हैव टू बी कैलकुलेटिंग। एस्पेशली मैं शब्दों को सुन के चारा नहीं पा सकता हूं। लोग जो आपको कुछ ना कुछ बोलते हैं वो चारा डाल रहे हैं कि आप जाल में फंस जाओ। मुझे यह चीज स्पेशली अवॉइड करनी है। और एक पॉइंट पे आके उनको रियलाइज हो जाता है कि लोग चाहे आपकी बुराई करें या तारीफ करें, दोनों आपके बेनिफिट में है।

तो जो भी किसी केटिक, किसी खराब एनवायरमेंट में रहा है, किसी बहुत ही ज्यादा भागदौड़ के एनवायरमेंट में रहा है और उस एनवायरमेंट में ही ऊंचाई पर पहुंच गया। एक होता है कॉमन जो धुता पिसता रहता है, जो उसमें भी ऊंचाई पे पहुंच गया है। इसका मतलब यह है कि उसने फिगर आउट कर लिया वि द बिहेवियर कि कैसे अपने कॉर्टिसोल को कंट्रोल करें। कैसे स्ट्रेस के बावजूद काम करते रहें और ये हेल्दी नहीं है असल में। एक पॉइंट पे आने के बाद आपके मेंटल हेल्थ को देन ट्राइंग टू हैंडल ऑल दिस बर्डन। पॉइंट ऐसा आता है जब आप यू लूज इट। बुढ़ापे के बाद आप देखोगे कि आपका पूरा इट इज टेकिंग अ टोल ऑन योर मेंटल हेल्थ।

यह तरीका है बाय लर्निंग फ्रॉम द मटेरियल वर्ल्ड जो भी आपके सामने हो रहा है आप सीख के एज अ रिएक्शन। ये सीख साधना वाला जो आप वे बोल रहे हैं वो एज अ रिएक्शन नहीं है। वो आप खुद अपनी तरफ से ट्राई कर रहे हो या आप अपने मन को तो कंट्रोल करो ही। आप यह भी रियलाइज करो कि ये पूरा जो गेम है, ये पूरा जो ड्रामा है, ये पूरा जो ये साइड वो साइड ऑल दिस एट द एंड ऑल ऑफ दिस वुड नॉट मैटर। हम लोग यहाँ पर मेहमान हैं दुनिया में और यह पूरा एक ड्रामा है, एक स्टेज है, एंजॉय करते हैं इसको। एक ये होता है, एक होता है सर्वाइवल। मुझे सर्वाइव करना है, मुझे बच के रहना है। इससे भी एक डिटैचमेंट आती है कि मुझे बच के रहना है। और एक ये है कि यार ड्रामा है, एक स्टेज है, मुझे बस बैठ के एंजॉय करना एज एन ऑडियंस और कभी-कभी खेलते रहना है गेम को। इसमें भी एक डिटैचमेंट आती है। आपको पता रहेगा कि सामने थिएटर चल रहा है तो आप थिएटर के कैरेक्टर्स जो बोलते हैं उनको सुन के आप उतना सीरियसली नहीं लोगे। आप कहोगे यार लेट्स हैव फन। ये भी गेम है। खेलते हैं, क्या करना है।

लॉर्ड नार्सिसिज्म बढ़ रहा है। और जो है साइकोलॉजिकल स्टैटिस्टिक आ रहे हैं सामने उसमें भी बताया जा रहा है। मैं खुद भी अनुभव करता हूं। मैं मई महीने में जाऊंगा बच्चों को लेकर के मनाली, हर साल जाता हूं तो कैंपिंग करता रहता हूं। मैं गुजरात में भी हम करते हैं तो 20 साल से मैं ये कर रहा हूं पर पिछले 5-10 साल से मैं देख रहा हूं बच्चों में स्पेशली ये जो 15-16 साल के है उनमें बड़ा अविवेशक दिखता है। अब मुझे नहीं पता है, मैं इसको लेकर के थोड़ा कंफ्यूजन में हूं कि शायद ये पहले से रहा है, आज नहीं हो रहा है क्योंकि काफी सारी चीजें हम एड्रेस करते हैं कि आज हो रहा है पर वास्तव में ऐसा होता है कि ऐसा ही होता था। पर मैं व्यक्तिगत रूप से यह अनुभव कर पा रहा हूं कि जो यह टीनएजर है, जुबेनाइल जिनको हम बोलते हैं उनमें मैं ये अनुभव करता हूं क्योंकि वो सुनते नहीं है। उनके टीचर जो साथ में होते हैं उनके साथ उनका जो व्यवहार है, पूरे कैंपिंग के दौरान, ट्रैकिंग के दौरान उनका जो व्यवहार होता है। अभी इधर गांव में भी मैं देखूं तो वो ट्रिक में बैठकर के मोबाइल जोर-जोर से बजाना, दिवाली में जो पटाखे हैं उसको जला के महिलाएं जहाँ पे भजन गा रहे उसके आसपास फेंकना, पकिंग करना, बाइक को तूल उड़ाना मतलब मेरे हिसाब से हम तो ऐसा नहीं था और उस वक्त का माहौल यहाँ पे ऐसा नहीं था। तो मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि क्या ये पहले से था या अभी हो रहा है? इसमें सत्य क्या है? और नार्सिसिज्म वास्तव में बढ़ रहा है। ये भी क्योंकि बहुत सारी मेरी धारणाएं टूटती है आपको सुनने के बाद। तो मैं उसी वे में आपको पूछ रहा हूं कि सत्य क्या है नार्सिसिज्म को लेकर के?

देखिए यह जो बिहेवियर आपने बताया इसको मैं नार्सिसिज्म नहीं कहूंगा। देखिए नार्सिसिज्म जो है वह एक एवरेज आदमी के लिए कुछ लेवल पर इंपॉर्टेंट है। अगर आप एक ऐसे समाज में है जहाँ पर कॉन्फिडेंस मैटर करता है। मैं कहूंगा तुम ओवर कॉन्फिडेंट हो जाओ। लेकिन हेजिटेंट मत हो। टिमेट मत हो। तुम्हें ऑप्शन मिले कि शर्मीला बनना है या फिर ओवर कॉन्फिडेंट बनना है। तुम ओवर कॉन्फिडेंट बन जाओ। ज्यादा फायदे में रहोगे। एज़ कंपेयर टू शर्मीला। नार्सिसिज्म एटलीस्ट आपको एक सेल्फ इमेज को इंप्रूव कर देता है। अगर आप डलजन में भी सोच रहे हो कि आप बहुत इंपॉर्टेंट हो, आप बहुत सुपीरियर हो, आप बहुत ही ज्यादा ग्रैंड डओ में रह रहे हो तब भी एटलीस्ट एज अ डलजन आपका वो कॉन्फिडेंस बढ़ाएगा और कॉन्फिडेंस भले ही फेक है। दुनिया में वो काफी हेल्प करता है। आपको दुनिया सिर्फ अपीयरेंस है। दुनिया में सिर्फ अपीयरेंसेस है। दुनिया में आपको जरूरी नहीं है कि आप जेनुइनली एक कोफिरेंट आदमी बन जाओ। आप जेनुइनली एक बहुत ही वेल रेड आदमी बन जाओ। यू हैव टू मेक श्योर दैट पीपल सी इन द वे यू वांट टू बी सीन। दैट इज इट।

नार्सिसिज्म आजकल एक बहुत ही लिबरली यूज़ वर्ल्ड हो गया है। लोग हर बात पे उसको यूज़ करते हैं। कोई गुस्सैल आदमी है उसको नार्सिसिज्म बोल देंगे। कोई क्रिमिनल है उसको नार्सिसिस्ट बोल देंगे। सम अमाउंट ऑफ़ नार्सिसिज्म इस नेसेसरी। जो बिहेवियर आप बता रहे हो दूसरों को डिस्टर्ब करना, पटाखे फोड़ना, उन सब जगहों पर जाके हुड़दंगबाजी करना, परेशान करना लोगों को, दूसरों की चिंता ना करना। इसका रीजन है लैक ऑफ एमपैथी। लैक ऑफ एमपैथी आपको बहुत ज्यादा दिखेगा। और स्पेशली इट इज़ अ कॉन्सिक्वेंस ऑफ अ लार्ज पपुलेशन। जब पपुलेशन ज्यादा हो जाती है तो एक एवरेज आदमी की वैल्यू उतनी कम हो जाती है। अब आप वहाँ यह देखते हो कि मुझे जो मिल रहा है वह मुझे मिल रहा है कि नहीं। बाकी भाड़ में जाए। मैं छीन लूंगा मुझे। मुझे जो चाहिए बाकी जाए भाड़ में। मुझे दूसरे की चिंता क्यों करनी?

लैक ऑफ एमपैथी जब होती है तो आप ऐसे बिहेवियर्स पाओगे कि लोग ट्रेन में, मेट्रो में तेज-तेज़ वॉल्यूम पे गाना बजा रहे हैं। उनको यह फील नहीं होता कि आसपास कोई खड़ा है। उसको डिस्टर्ब हो रहा हो। लोग रात में म्यूजिक बजाएंगे। उनको यह नहीं है कि आसपास कोई खड़ा है उनको डिस्टर्ब हो रहा होगा। रात मर रात में जोर जोर से डीजे बजाना मना है तब भी लोग बजाते हैं। उन्हें यह फीलिंग नहीं आती। एक होता है लीगल इललीगल का। चलो ठीक है आप चालाक हो। आप कानून को डज कर ले रहे हो। लेकिन आपको यह फीलिंग तो आनी चाहिए कि मोहल्ले में लोग सो रहे हैं। उनको भी काम पे जाना है सुबह। नींद जरूरी है हेल्थ के लिए। बिल्कुल नहीं। एम्पैथी नहीं। कहीं कोई बैठा हुआ है आराम से। किसी पीसफुल जगह पे आया हुआ है। आप वहाँ पर हुड़दंगबाजी कर रहे हो। उसको डिस्टर्ब हो रहा होगा।

मैं जब छोटा बच्चा था तो मुझे काफी कंसीडरेशन होती थी दूसरों की भी कि कहीं मेरी हरकतों की वजह से उसे दिक्कत तो नहीं हो रही। बिकॉज़ दिस वाज़ अ पार्ट ऑफ ऑनर। अगर आपकी हरकतें दूसरे को परेशान कर रही है तो इसका मतलब यह है कि आपको भी एक बहुत ही डिसगस्ट से देखा जाए। आपको अच्छे वे में नहीं देखा जाए। और अगर आप दूसरों को कंसीडरेशन में ले रहे हो तो दूसरे भी इस चीज को नोटिस करेंगे कि देखो यह मेरे मेरी नीड्स का भी ध्यान रखता है। यह मेरे डिग्निटी का भी ध्यान रखता है। तो देखो कितना अच्छा है। ये अच्छी चीज है। ये कोई कमजोरी वाली बात नहीं है। प्रॉब्लम ये है कि जो आपने नार्सिसिज्म बोला ना, नार्सिसिज्म तो है। इट इज देयर। इट इज मोर अबाउट क्रिमिनल बिहेवियर। क्रिमिनालिटी, क्रिमिनालिटी, क्रिमिनल बिहेवियर और बड़े होने के बावजूद बंदरों वाला कॉन्शियसनेस रखना। आदमी होने के बावजूद बंदरों वाला कॉन्शियसनेस रखना।

असल में एक एवरेज आदमी की लाइफ इतनी एंटी फन रहती है। एंटी फन मतलब वो कभी भी थोड़ा बहुत भी मजे करता है। वो पास्ट के किसी डोमिनोज में भी चला जाता है। तो वहाँ पर भी उसको काफी शेमिंग होती है पेरेंट्स के द्वारा कि तुम क्यों घूमने चले गए? तुम पढ़ाई क्यों नहीं कर रहे हो? ये क्यों नहीं कर रहे हो? वो क्यों नहीं कर रहे हो? उसके लिए ले दे के फन क्या रहता है लाइफ में कि दोस्तों के साथ बैठ के कोल्ड ड्रिंक पी लिए। पार्टी के नाम पर कुरकुरे खा लिए। डोमिनोज चले गए। पिज़्ज़ा हार्ड चले गए। इधर पार्क में बैठ के चिल्ला लिए। जब वो अपने घर से दूर आता है, किसी और स्टेट में, किसी टूरिस्ट स्पॉट पे आता है, तब उसको लगता है वो फाइनली आजाद हो गया। इस आजादी को वो हैंडल नहीं कर पाता। उस वो पागल हो जाता है। ही लूजस ह माइंड। वो हैंडल नहीं कर पाता इस चीज को।

जो आदमी शहर में ऑलरेडी रह रहा है आप पाओगे कि वह नॉर्मल है, वह एवरेज है। कई लोग रूरल एरिया से जो सिटी में माइग्रेट करते हैं वो शहरियों से ज्यादा शहरी बन जाते हैं। उनसे ज्यादा हाईफाई कोई नहीं रहेगा। फिर वो ऐसी बात ऐसी भाषा में बात करते हैं कि आप खुद कंफ्यूज हो जाओगे। इसकी भाषा इतनी चेंज कैसे हो गई? कई सारे लोग हैं जिनको मैं जानता हूं वो बड़े शहरों में गए। उनकी भाषा दो साल में चेंज हो गई बोलचाल की। मतलब वो बोलने लगे वैसे जैसे वहाँ के लोग बोलते हैं और आप फोन पर बात करते हैं तो लगता है कि कोई और आदमी आ गया। ऐसे ही जब ये आदमी है जो कि अपने घर से दूर चले जाते हैं वहाँ पर लॉन्ग हाउस नहीं है उनको कंट्रोल करने के लिए। मम्मी पापा नहीं है। ये सोचते हैं अरे बाप रे, अब तो यार आ क्या बात है। आजादी मिल गई मुझे। और अब आजादी मिल गई है। प्लस लैक ऑफ एमपैथी। ये सब कौन है? इन सब की चिंता मैं क्यों करूं? भाड़ में जाए ये सब। मुझे मैं मजे करने के लिए आया हूं। दिस इज माय राइट। आई एम अ रेबल। बाकी भाड़ में जाए।

इसका सिर्फ एक रास्ता होता है। मैं इस चीज के फेवर में नहीं रहता कि सरकार हर जगह ऑक्यूपाई करे और अपनी पोजीशन बनाए। लेकिन इसका एक रास्ता यही है कि सरकार बहुत ही स्ट्रिक्टली बंदरों वाले बिहेवियर को रिमूव करें। जो भी बंदरों जैसी हरकतें कर रहा है किसी ऐसी जगह पर जहाँ पर दूसरे डिस्टर्ब हो रहे हैं उसको विद फोर्स रिलीव करें। आप बातें करने जाओगे आप समझाने जाओगे तो कोई समझने वाला नहीं है। कुछ कुछ जगहों पर फोर्स जरूरी होता है। बहुत जरूरी होता है और ऐसा चीज ये जो है हमारा सिस्टम समझता भी है कि कई सारी जगहों पर फोर्स बहुत जरूरी होता है। वो फोर्स को अप्लाई भी करता है। इसका रास्ता सिर्फ एक ही है। आप कहोगे कि लोगों को सिविक सेंस सिखा दो। आप लोगों को बिहेव करना सिखा दो या फिर मैं जो बातें कर रहा हूं कि एमपैथी सीखो, तुम्हारा भी फायदा होगा तो यह लोग समझ जाएंगे। लोग नहीं समझेंगे। सबके कॉन्शियसनेस का अलग-अलग लेवल होता है। अब जो एकदम इंपल्सिव है वो देख ले रहा अरे बाप रे मैं दूर आ गया घर से तो बच्चों वाली उसको एक्साइटमेंट हो रही है। तो वो घंटा नहीं समझेगा। कोई भी समझाने आ जाएगा उसको वो फिर लड़ने लगेगा उससे। ठीक है?

तो नार्सिसिज्म आप रखो। आप रखो। आप साइलेंटली अपने आप को एडमायर करो ना। आप किसी और को डिस्टर्ब मत करो। आप जाओ शीशे में देखो। अपने आप को कहो कि यार मैं तो यार भगवान हूं। ये हूं जो भी हो। लेकिन आपके नार्सिसिज्म की वजह से दूसरे को दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उसमें भी अपने परसेप्शन की चिंता करो ना एज अ नार्सिसिस्ट। आप कहो कि मैं यार क्लास से रहूंगा, मैं अच्छे से रहूंगा तो लोग मुझे और एडमायर करेंगे। मेरे नार्सिसिज्म को और फायदा होगा। ये भी है।

कई जगहों पर क्योंकि हम लोगों ने छूट दे दी है और आप जैसा कि कह रहे हो कि पहले के टाइम में ऐसा नहीं होता था। हो रहा है। असल में अभी यह हो रहा है कि कई सारे ऐसे लोग थे जिनके पास उस समय फाइनेंसियल मीन्स नहीं थे ट्रेवल करने के। अब वो भी ट्रेवल करने लगे हैं क्योंकि इकोनमिक ग्रोथ हो रहा है। अब पैसे आ गए हैं पर आपकी आपका जो माइंड है वो वही पहले वाला है। आपका माइंड नहीं हुआ अभी पहले पैसे वाला। तो आप है आप है न्यूली रिच। आपके पास नए पैसे आ गए। माइंड जो है पहले वाला ही है तो आप पैसे होने के बावजूद वही हरकतें कर रहे हैं उल्टी पुल्टी। इसलिए प्लेन में भी यही हरकतें हो रही है। पहले नहीं होता था कि प्लेन में आप एयर होस्टेस को आप उसके मुंह पे कैमरा लगा के रिकॉर्ड कर रहे हैं। रूल है आप नहीं कर सकते। आजकल रील बनाने के लिए लोग एयर होस्टेस को चोरी से रिकॉर्ड कर रहे हैं। देखो लड़की देखो लड़की दिखा रहा हूं। दिस इज अ वैरी स्ट्रेस थिंग।

क्योंकि एक इंपॉर्टेंट चीज मैंने नोटिस की है। लोग कहते हैं कि इकोनॉमिक ग्रोथ के साथ आदमी का इंटेलेक्चुअल विकास भी होता है। मेरे ख्याल से ये गलत है। मेरे ख्याल से इकोनमिक ग्रोथ स्लो सोलली विल नॉट ग्रो योर इंटेलेक्ट। और योर मोरल्स। आपके मोरल्स करप्ट है और आपको पैसे मिल जाए तो यू विल बी अ रिच डिजनरेटर। यू विल नॉट बी अ गुड ह्यूमन। व अगर आपके पास पैसा नहीं है और आप एक अच्छे इंसान है तो आप जहाँ पर भी जाएंगे आपको लोग वहाँ पर एडमायर करेंगे। आपको पैसा नहीं उड़ाना पड़ेगा उनके ऊपर। आपसे लोग बात करेंगे आपके साथ रहेंगे तो आपको वैलुएबल समझेंगे। वो एक रील बहुत चलती है। तुम्हारा लहजा बता देता है कि तुम अभी-अभी पैसे वाले बने हो।

लॉर्ड नार्सिसिज्म को लेकर के थैंक्स फॉर करेक्शन और टॉक्सिक नार्सिसिस्टिक रिलेशनशिप में लोगों को मैं देखता हूं कि वो फंस जाते हैं। चाहे वो पार्टनर उनका मेल है, फीमेल है। तो उनको पता होता है कि वो गलत नहीं है और सामने वाला इंसान उनको मानसिक रूप से तोड़ रहा है, उनको खत्म कर रहा है, उनकी आत्मा को मार रहा है। गैस लाइट हो जाते हैं। रिवर्स साइकोलॉजी कांडे उनके ऊपर हो जाते हैं। वो निकल नहीं पाते हैं। और बहुत सारे लोग डिलीट कर देते हैं। या तो डिलीट नहीं करते हैं तो अपनी चेतना को खत्म कर देते हैं। डिप्रेशन में चले जाते हैं। तो ऐसे अगर किसी पार्टनर के साथ आप फंसे हो वो चाहे

पत्नी के रूप में है, प्रियतमा के रूप में, प्रेमी के रूप में कोई भी मानवीय संबंध जो हमारे आसपास है, तो उसमें क्या करना चाहिए? क्योंकि इसके बारे में कोई बात नहीं करता। इसको कोई क्राइम भी नहीं गिना जाता है। जब तक कोई डिलीट कर लेता है और चीजें सामने तो ये साइलेंटली जो चीजें होती है जिसमें पीसता जाता है इंसान। ऐसे हालात में क्या करना चाहिए?

व्हेन ही इज रियल नार्सिस्ट, जो मैंने तो शब्द प्रयोग कर लिया गलती से, एड्रेस कुछ और करना चाह रहा था मैं, पर रियल वो जो नार्सिस्ट होते हैं, जो कि आपने जो बोला वो तो सॉफ्ट नार्सिस्ट, आपने बोला कि थोड़ा बहुत जो अपने आप को एडमायर कर रहा है, पर वो जो टॉक्सिक एकदम कि जिसमें इंसान पूर्ण रूप से दब जाता है, वो फिर वहां पे उसका लाइफ ही कंट्रोल हो जाता है।

पहली चीज तो यह कि एक एवरेज आदमी को सबसे पहली प्रायोरिटी बनानी चाहिए लाइफ में कि वह अपने खुद के साथ कंफर्टेबल रहे। वो अकेलेपन में कंफर्टेबल रहे। लोनलीनेस में कंफर्टेबल रहे। उसको एंजॉय करना चाहिए कि हां वो खुद के साथ है। खुद की कंपनी में है। इसके ऊपर फ्रेंडशिप, रिलेशनशिप ये सारी चीजें सप्लीमेंट्री है।

और अगर आप एज अ मैन आपको अकेलेपन से बहुत प्रॉब्लम हो रही है। आपको मन कर रहा है कि आपके साथ लोग रहे, आपके साथ कोई लड़की रहे तो आप कंप्लीट फील करोगे। इसका मतलब यह है कि आपने कई सालों के पूरे ड्यूरेशन में अपने को खोखला बना दिया है। आपने खोखला बना दिया है अपने आपको और आपको अपने आप को लेके उतनी वैल्यू फील नहीं होती। तभी आप लोनली फील करोगे। तभी आपको मन करेगा कि आप दूसरों के साथ लैच ऑन करो। तब जाके आपको कुछ लगेगा कि हां यार मैं अकेला नहीं हूं।

अगर आप खुद पर मेहनत कर रहे हो, खुद को इंप्रूव कर रहे हो और आप खुद को इस वे में एडमायर कर रहे हो कि कल मैं थोड़ा सा कम था। आज मैं थोड़ा सा ज्यादा हूं। क्या बात है? मुझे खुद दिख रहा है अपनी ग्रोथ। आपके पास पर्सनल गोल्स हैं। अभी से छ महीने बाद के गोल्स। अभी से दो महीने बाद के गोल छोटे-छोटे कोई भी हो सकता है। आपका ध्यान इस चीज में आएगा ही नहीं कि आपकी लाइफ में कुछ मिसिंग है। क्योंकि आप बहुत ज्यादा ऑब्सेस्ड रहोगे खुद की अपनी फिल्म से। आप अगर खुद की फिल्म को इंटरेस्टिंग बना दोगे तो आपको दूसरे की फिल्म ज्वाइन करने का मन नहीं करेगा।

अब जब आपकी खुद की फिल्म इंटरेस्टिंग बन जाती है। तब लोग जॉइ करना चाहते हैं आपकी फिल्म क्योंकि एक एवरेज आदमी की लाइफ उतनी इंटरेस्टिंग उसकी इतनी फिल्म इंटरेस्टिंग नहीं होती। बोरिंग फिल्म होती है। वो कहता है यार दूसरे की ही ज्वाइन कर लो। जैसे कि आप सोच रहे हो कि मुझे दोस्त होते गर्लफ्रेंड होती तो अच्छा रहता। आपको मन कर रहा था। ऐसे दूसरों को और मन करता है। आप तो फिर भी कंट्रोल कर रहे हो अपने आपको। दूसरों को और मन करता है और तो अपने सेंसेस के गुलाम है। जो दूसरे आपको देखेंगे कि आपकी लाइफ इंटरेस्टिंग है। आप किसी वे में आगे बढ़ रहे हो तो दे विल कम टू यू। फिर आपको जाने की जरूरत नहीं।

और जहां तक बात है लड़कियों की अगर आपको लग रहा है कि आपके रिलेशनशिप में जो लड़की है वह टॉक्सिक है। वो आपको नार्सिसिस्टिक अब्यूज आपकी तरफ ला रही है। आपको किसी वे में परेशान कर रही है। प्रॉब्लम कर रही है। आपको एक सेकंड भी नहीं लगना चाहिए उसे डंप करने के लिए। भारतीय लड़कों को एक बटन का इस्तेमाल ज्यादा करना चाहिए। वो है डंप बटन। इसको स्पैम करो। इस बटन को दबाते रहो जितनी बार दबाना चाहो। दबाओ कुछ नहीं होगा तुम्हें। तुम तब भी जिंदा रहोगे। तुम्हारी लाइफ तब भी अच्छी चलती रहेगी। पापुलेशन हमारी इतनी ज्यादा है कि तुम्हारे पसंद की भी जो लड़की है वह भी काफी ज्यादा है। ऐसा नहीं है कि दुनिया में सिर्फ एक ही लड़की है।

लेकिन एक आर्टिफिशियल स्कार्सिटी लड़कों के दिमाग में मैन्युफैक्चर की जाती है। ये बोलती है। बहुत शुरू से होता है ये। फिल्मों के द्वारा भी कि एक आदमी जो कि बहुत बड़ा हीरो है। उसको 50 गुंडों को मारना पड़ रहा है एक एक्टर्स को बचाने के लिए। और पूरी की पूरी फिल्म उस एक एक्ट्रेस के अराउंड रिवॉल्व कर रही है। उसकी जिंदगी पूरी की पूरी है कि वो प्यार उसको मिल जाए। बस उसके दोस्त भी कहते हैं भाई यार लड़की नहीं मिल रही है यार। अरे वो तेरे से नहीं पटेगी यार। अरे यार लड़की मिल जाती है यार। पेरेंट्स कह रहे हैं बेटा तुम्हारी ऐज हो चुकी है। अगर तुमने शादी अभी नहीं की तो लड़की नहीं मिलेगी तुमको। कोई तुमको अपनी बेटी नहीं देगा। जो आपको 10 तरह से लोग बता ही रहे हैं ये सारी चीजें। आपको यह ऑफ कोर्स बिलीव होगा कि एक लड़की किसी तरीके से मिली है। अगर यह छोड़कर चली गई मुझे तब तो यार खत्म मेरा खेल है। मैं तो एकदम खत्म। इसने मुझ पर एहसान किया है।

अगर आप यह मान चुके हो कि लड़की ने आपके ऊपर एहसान किया है आपके पास आके तो आप ऑलरेडी हार चुके हो इस गेम में। ये रियलिटी नहीं है। ये पूरी स्कार्सिटी जो है ये मैन्युफैक्चर की गई है आपके दिमाग में। ताकि आप बेचारे इन्हीं सब में लगे रहो। आप अपने पर्पस को रियलाइज ना करो। जो आदमी ऑलरेडी अपनी गर्लफ्रेंड से लड़ रहा है, अपनी बीवी से लड़ रहा है, अपनी बीवी को यह देख के सोच रहा है कि यार फोन में किससे बात कर रही है? वो घंटा क्या अपने आप को इंप्रूव करेगा? वो घंटा क्या किसी और चीज के बारे में सोचेगा? वो यही देखता रहेगा अरे यार वो तीन तीन 14 पे वो लड़की उससे बात कर रही थी। 5:13 पे वो ऑनलाइन थी। किससे बात कर रही होगी? अरे मैंने देखा उसके उसके Instagram में एक नया फेक प्रोफाइल ने उसको फॉलो किया है। वो कौन हो सकता है? चलो ट्रू कॉलर पे प्रीमियम लेके पता करते हैं ये नंबर किसका है। ऐसीसी चीजें लड़के करते हैं। मतलब सीआईए फेल हो जाएगा उनके सामने। इतना इन्वेस्टिगेशन करते हैं।

मैं कहता हूं चोमू इतना इन्वेस्टिगेशन करने से अच्छा डंप कर देते हैं लड़की को। अभी तक दूसरी लड़की से बात कर। ये ज्यादा बेहतर होता है। ये बताते हैं मुझे कि नहीं नहीं मैंने सारा निकाल लिया। किस लड़के से वो बात कर रही थी। मैंने उसका लोकेशन भी निकाल दिया। मैंने गया मैं इंटरनेट को उसको डॉक्स कर दिया और मैंने उसका नंबर मैं ट्रू कॉलर पे प्रीमियम पे सर्च किया तो ये नाम आ रहा था इस पिक्चर को मैंने रिवर्स इमेज सर्च किया ये किया मैंने कहा कि तुम ये करके मतलब अगर तुमको लग रहा है कि लड़की तुम पर चीट कर रही है डंप कर दो ना उसे डंप क्यों नहीं कर रहे हो तुम ये क्या दिखाना चाह रहे हो तुम कोई मोसाद वगैरह के तुम ऑपरेटिव हो तुम सिपाही हो तुम खोज के ले आए उसके आशिक को इससे क्या होगा दिस इज मोसाद लेवल मोर देन सीआईए इवन ये ये दिखा के तुम तुम क्या करोगे? उसके सामने प्रूफ दिखा दोगे कि देखो मैंने तुम्हारे आशिक को पकड़ लिया तो वो कहेगी अरे यार तुम बहुत बड़े स्पाई हो यार। मान गई मैं तो यार तुम्हारे तो फिल्म बननी चाहिए। ये तो कुछ होगा नहीं। मान गए जो आज हम ले दे के ब्रेकअप ही होगा तो भारत पहले कर लो ना।

अगर भारतीय लड़के ये ब्रेकअप वाला बटन ज्यादा दबाने लगे। तो उनके अंदर जो यह भी डर है लड़की वाला कि लड़की छोड़ के चली जाएगी तो कोई मिलेगी नहीं। यह भी हट जाएगा। यह जो डर है कि यह चली जाएगी तो दूसरी नहीं मिलेगी। यह चीज यह क्या करता है? यही कंडीशन क्रिएट करता है। जहां पर लड़के लड़कियों से अब्यूज बर्दाश्त करते हैं। थप्पड़ खा रहे हैं आप। नार्सिसिस्ट अब्यूज की बात कर रहे हो। खुलेआम सड़क पे लड़के थप्पड़ खा रहे हैं चटच लड़कियों से। हां वो मैं आपसे भूलने वाला था। अभी इन बिटवीन आया है तो वो अभी एक रील जो वो पार्किंग में आपने वो देखा था और मैंने उससे पहले भी देखा था पुणे का एक वीडियो था। दिस इज वै कॉमन बाय द वे। मतलब ये होता रहता है और मैंने एक बहुत ही इंटरेस्टिंग चीज देखी है कि ये फेनोमना सबक्टिनेंट में ज्यादा होता है। इंडिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश में ये ज्यादा होता है। मैंने बाहर के किसी देश में नहीं देखा। मैंने स्पेशली वेस्ट में नहीं देखा। कोई वीडियो आ रहा है जिसमें एक औरत एक आदमी को मार रही है पटपट और आदमी खा रहा है मार। आई हैव ऑलवेज सीन देम फाइटिंग बैक।

यह अजीब सा एक प्रॉब्लम यहां पर है कि आदमी बस मार खा रहे हैं। मार खा रहे हैं। और नैरेटिव भी मैंने एक सुना है कि लड़की जो मार रही है उसको मारने देना चाहिए। वो प्यार दिखाने का तरीका है। उसका वो चिल्ला रही है वो गालियां दे रही है तो प्यार दिखाने का तरीका है। मैं कुछ दिन पहले एयरपोर्ट पे था तो मेरे ठीक पीछे एक मैरिड कपल था। न्यूली मैरिड कपल। अब वाइफ उसकी अपने हस्बैंड को अबे तूने तुझे नहीं पता। अबे ऐसे करके बात कर रही थी। लग रहा था कि लफंगों की तरह किसी दारू के ठेके पे बैठे हैं। ऐसे मतलब उसको ऐसा भी नहीं था कि मेरा जो हस्बैंड है ठीक है मैं उसको नहीं इज्जत करती। उसको ऐसे ही जूते पे रखती हूं। तो घर पे उससे ऐसे बात कर लूं। मैं बाहर हूं। पब्लिक में हूं। कोई इंडियन बगल में बैठा हुआ वो समझ जाएगा मेरी बात कि मैं अपने हस्बैंड को बेइज्जत कर रही हूं। तो यहां कंट्रोल कर लूंगा अपने आप को। एक्टिंग तो कर सकती है। नहीं रहो। तुम घटिया हो घर में पर तुम बाहर एक्टिंग कर सकती हो। वहां भी नहीं। क्योंकि वो समझती ही नहीं कि उसका हस्बैंड इस लायक है कि उसको बाहर एक दिखावे के लेवल की भी रिस्पेक्ट मिले।

हस्बैंड को भी ये लगता होगा यार जो मिल रहा है ले लो यार। कुछ तो मिल रहा है ना। बेटर देन नथिंग। एक एवरेज यंग आदमी की मानसिकता जो है जब वो इस दुनिया में आता है जब वो नया नया इस दुनिया में आता है बच्चा रहता है तो बहुत लाइवली रहता है उसके अंदर बहुत ऊर्जा रहती है उसके अंदर जो ऊर्जा रहती है वो उसके अंदर वही ऊर्जा रहती है जो कॉनकरर की रहती है फिर धीरेधीरे जो समाज दुनिया है उसको दबा देती है दबाते दबाते जब वो कॉलेज जब तक पास करता है वो ये कहता है बस जिंदा हूं यार काफी है आप कई सारे कॉलेज वालों को सुनोगे जब वो कॉलेज से निकलते हैं तो वो इस चीज पर संतोष करते हैं कि यार जिंदा तो हूं यार अब क्या करना है? नौकरी लग जाए, चाहे कितना भी मेरे नौकरी में लग जाए, बस शादी हो जाए। बस शादी भी हो जाए और एक दो बिस्किट खिला दे मेरी वाइफ मुझे बस और कुछ नहीं चाहिए। आप जब इतने कम पे सेटल कर रहे हो दैट इज व्हाट यू विल गेट।

लड़की आपको नहीं पसंद आ रही है। आपको वो गालियां दे रही है, परेशान कर रही है, निकालो बाहर। डंप राइट अवे। और आप मान लो अगर आपका स्कार्स सिटी वाला सोचना सही भी है। मैं कहूंगा एक अब्यूसिव डायनामिक पर रहने से अच्छा आप अकेले रहो। बट देन अगेन क्या आप अकेले खुद के साथ कंफर्टेबल हो? क्या आपको लगता है कि आपकी खुद की कंपनी उस लायक है कि आपको अच्छा लगे खुद के साथ? अधिकतर लड़के खुद की वैल्यू नहीं बनाते। वो सोचते हैं कि लड़की के आने से मेरी वैल्यू बन जाएगी। लड़की के साथ रहूंगा तो मेरी लाइफ में कुछ रस रहेगा, कुछ मजा रहेगा। लड़की चली जाती है, लाइफ खत्म मेरी।

डिलीशन वगैरह तभी होता है। उस लड़के को जेनुइनली लगता है कि यह लड़की फाइनल थी। भगवान ने मेरे लिए इसको अलॉट करके रखा था और अब भगवान ने छीन लिया मुझसे। ये अब मैं मर के नहीं जाऊंगा। इसलिए वो अपने को डिलीट कर लेता है।

अकॉर्डिंग टू यू वि आर द हैबिट्स दैट लीड यू टू हैव क्लेरिटी ऑफ़ थॉट। प्रश्न है द हैबिट्स दैट लीड मी टू हैव अ क्लेरिटी ऑफ़ थॉट्स टू अंडरस्टैंड कि अगर मैं एक अप्रोच फॉलो कर रहा हूं लाइफ में और वो मुझे कोई रिजल्ट नहीं दे रही है। तो आई विल राइट अवे अबेंडन दैट अप्रोच एंड स्टार्ट एक्सपेरिमेंटिंग वि डिफरेंट थिंग्स। यह एक्सपेरिमेंट मैं सिर्फ खुद के साथ नहीं करूंगा। मैं दूसरों को भी करते हुए देखूंगा। मैं देखूंगा कि यार दूसरा कोई अप्रोच फॉलो कर रहा है। उसके साथ काम नहीं कर रहा है। कुछ उसको कोई कुछ रिजल्ट नहीं मिल रहा। तो मैं एक क्लियर असमशन ये बना सकता हूं अपने बारे में भी कि इवन इन माय केस इफ आई फॉलो द सेम अप्रोच। ऐसा हो सकता है कि मुझे रिजल्ट ना मिले।

क्लेरिटी तब आती है जब आप कंफ्यूज्ड नहीं रहते हो। आजकल लड़के बस कंफ्यूज्ड है इसलिए दुखी रहते हैं। जो कंफ्यूज्ड नहीं है वह दुखी नहीं है। उसको पता है कि यह चीज इसलिए हो रही है। भले ही वो हार रहा है तब भी दुखी नहीं रहे। उसको पता रहेगा वो क्यों हार रहा है। उसको रीज़ंस पता रहेंगे। दैट इज आल्सो पावर कि आपको पता है आप क्यों हारे? अगर आपको कुछ पता ही नहीं है। क्यों हो रहा है? लोग ऐसे क्यों बोल रहे हैं? मुझे यह चीज क्यों हो रही है? वो चीज क्यों हो रही है? क्यों ब्रेकअप हुआ मेरा? लड़की तो पहले बोल रही थी आई लव यू। आज उसने ब्रेकअप कैसे कर लिया? आप जब कंफ्यूज रहते हो तब आप टूटे रहते हो।

अब वो क्लेरिटी तब आती है जब आप धीरे-धीरे खुद के पैटर्न्स को देख के, खुद के पास्ट को देख के और दूसरों के पैटर्न्स को देख के भी दिमाग में एक सिस्टम बनाते हो कि अच्छा अगर ऐसा है इसका मतलब यह है कि समाज कुछ बिहेवियर्स को रिवॉर्ड कर रहा है। बायोलॉजी कुछ बिहेवियर्स को रिवॉर्ड कर रही है। और यह दोनों के दोनों समाज और बायोलॉजी कुछ बिहेवियर्स को बहुत ही ज्यादा पनिश कर रहे हैं। क्योंकि मैंने देखा है कई सारे लोगों को सेम बिहेवियर दिखाते हुए और सेम तरीके से पनिश होते हुए। इसका मतलब यह है कि आई कैन ड्रा अ क्लियर कंक्लूजन दैट दिस स्पेसिफिक बिहेवियर इज वै डेंजरस टू डिस्प्ले इन द सोसाइटी। तो मैं देखूंगा कौन सा बिहेवियर आपको बेनिफिट कर रहा है।

इसके लिए ऑब्जर्वेंट होना जरूरी है। कोई इसको स्ट्रेस में ना ले कि अब मुझे हमेशा अपनी आंखें खोल के रखनी है और एकाग्र एकाग्रता से लोगों के ऊपर फोकस रखना है। ये सब करने की जरूरत नहीं है। आप अगर चिल भी हो और आप बस बहुत कैजुअली भी नोटिस कर रहे हो कुछ पैटर्न्स को तो यू कैन फिगर इट आउट। क्लेरिटी तभी आती है जब आप इमोशंस से दूर रहो। इमोशनल बातों से दूर रहो। जो कहते हैं कि आपका भाग्य खराब है। आपको भगवान आपसे नाराज हैं। ये सारी बातें जो आपसे करते हैं। ऑब्वियसली वो खुद ही इमोशनल है। उन्हें खुद नहीं पता वो क्या बात कर रहे हैं। बट व्हेन यू स्टार्ट ओपनिंग योर आइज आपके अंदर अपने आप क्लेरिटी आ जाएगी।

कभी-कभी क्या होता है आपको क्लेरिटी नहीं होती। वहां पर आपको लीप ऑफ फेथ लेना पड़ता है। वहां पर आपको ब्लाइंड जंप लेना पड़ता है। आपको कभी-कभी शक भी अगर होता है कि आपके कोई दोस्त हैं जो कि आपके आपके लिए अच्छे नहीं है। आपको होल्ड बैक कर रहे हैं। पर आप कंफर्म नहीं हो। तब भी मैं कहता हूं कि अगर तुमको कंफ्यूजन भी है। कोई दोस्त तुम्हारे को किसी तरीके से हर्ट कर रहा है और तुमको लग रहा है उसने गलती से कर दिया होगा। मैं कहता हूं तुम्हारे को कंफ्यूजन भी है। इफ यू आर कन्फ्यूज बिटवीन इग्नोरेंस एंड मैलिस ऑलवेज लीन टुवर्ड्स मैलिस। अगर आपको यह कंफ्यूजन हो रहा है कि यार उसका इंटेंशन नहीं रहा होगा और गलत है। हमेशा अस्यूम करो कि गलत इंटेंशन और हटा दो उसे। हटा दो। कोई नुकसान नहीं होगा।

लोग सच में बहुत ज्यादा है। अच्छे-अच्छे लोग आपकी लाइफ में आने का इंतजार कर रहे हैं। वो वेट कर रहे हैं कि आप उन्हें जगह दो। आप उनकी जगह पर रखे रहोगे कचरा तो आप कैसे आपकी लाइफ में वह आएंगे? आप उनको भी आने का मौका दो। दुनिया में आप और देखो और कितने लोग हैं। उनसे आप मिलो। तभी मिल पाओगे जब आपके जो फाइनाइट स्पेस है आपके दिमाग में, आपकी पर्सनल लाइफ में थोड़ा-थोड़ा वो खाली होगा।

और एक चीज मैं ऑब्जर्व करता हूं कि बहुत सारे लोगों का बिहेवियर मैंने देखा है। जिन लोगों से वह इनफीरियर फील करते हैं वहां पर वो इनफीरियर ही बॉडी लैंग्वेज रहती है इनकी और वो इनफीरियर ही अपने आप को पोट्रे करते हैं वहां पे। इवन डिस्पाइट दे डिसाइड कि भाई नहीं अब मैं ना सुपीरियरिटी पर एटलीस्ट इनफीरियर नहीं रहूंगा। पर फिर भी उनसे वो हो ही जाता है। उसी प्रकार का व्यवहार जैसे उन लोगों को वो फेस करते हैं। जहां वो सुपीरियर रहते हैं या डोमिनेंस में रहते हैं वहां पे वो नेचुरली ऐसे ही रहते हैं। ये फिनोमिना मैंने नोटिस किया है कि लोग कॉन्शियसली तय करते हैं फिर भी इसमें इधर-उधर हो जाते हैं। यह वही बात है कि अधिकतर लोग जो है वो अपने इमोशंस के गुलाम होते हैं। इसलिए जहां पर उन्हें डर नहीं लगता। जहां पर उन्हें लगता है कि यार एवरीथिंग इज ओके तो वहां पर वह ऑफ कोर्स उनका फ्रेम स्ट्रांग रहता है। जहां पर उन्हें लगता है कि सामने वाला जो है वह किसी वे में सुपीरियर है या फिर किसी वे में उनसे ऊपर है तो उनके इमोशंस उनको बता देते हैं कि तुम नीचे हो और लोग अपने इमोशंस के हिसाब से ही एक्ट करते हैं।

अगर आप कॉन्शियसली जी रहे हैं तो आप अपने इमोशंस के हिसाब से नहीं एक्ट करेंगे। आप जबरदस्ती एक्ट वैसे करेंगे जैसा कि आपके बेनिफिट में हो। मतलब यह कि अगर आपके इमोशंस कह रहे हैं कि डरो और कमजोर रहो और छुप जाओ। आप उसका ठीक उल्टा करोगे। आप जबरदस्ती उल्टा करोगे। आपको जहां पर भी यह फील होगा छुपने का आप और ओपन हो जाओगे। आपको जहां पर भी मन करेगा सिर झुकाने का। आप अपने सिर को और ऊपर करोगे। यू विल डू योर चिन अप। आपको मन करेगा अपने कंधे झुका लो। आप अपने चेस्ट को और आउट कर लोगे। बेसिकली आपकी भावनाएं जो कह रही है एक डर के तहत कि अपने आप को एक कून में डाल लो। आप उसका उल्टा करोगे जबरदस्ती एक स्टबर्न आदमी की तरह और आप देखोगे कि जैसे ही आप इसका उल्टा करना शुरू कर रहे हो यह पूरा जो डर आपके दिमाग में था जो आपको एक डेथ जैसी चीज से बचा रहा था दिमाग हम लोग का सोचता है नॉर्मल सिचुएशन पे भी कि डेथ आ सकती है कहीं मीटिंग में जा रहे हैं वहां नर्वस इट गिव्स यू द सेम फियर एस डेथ किसी आदमी के सामने नर्वसनेस महसूस हो रही है वो भी आपको डेथ वाली फीलिंग देता है तो दिमाग कहता है यार इस तरह ने तो जबरदस्ती कॉन्फिडेंट एक्ट कर लिया। इसको कुछ हुआ ही नहीं। अगली बार से वो डर आपकी तरफ नहीं है।

क्योंकि अधिकतर लोग गुलाम रहते हैं अपने इमोशंस के। वो बाहरी दुनिया के गुलाम रहते हैं। बाहरी दुनिया उनको जैसा फील कराती है वैसे एक्ट करते हैं। तो ये काफी नेचुरल है। जैसे कि लड़के भी जब लड़के लड़की की बात होती है तो लड़के उन लड़कियों के साथ बहुत नेचुरल बात करते हैं जिनको वो पसंद नहीं करते। जो लड़कियां अट्रैक्टिव नहीं होती, लड़के उनसे बहुत आराम से बात कर लेते हैं। जो लड़कियां लड़कों को पसंद रहती है, उनके सामने लड़के एकदम ब्लैंक हो जाते हैं। क्योंकि उनको अंदर ही अंदर ही अंदर लग रहा है कि यार लड़की मुझे बहुत जज कर रही है। ये मुझे हर मामले में जज कर रही है। ये मुझे पॉइंट्स दे रही है। प्लस पॉइंट, माइनस पॉइंट। अब मुझे बहुत ज्यादा अलर्ट रहना होगा। और अलर्ट रहने के चक्कर में सब कुछ बर्बाद हो जाता है।

आप साइकिल भी चला रहे हो अगर आपको कोई साइकिल रिलैक्स तरीके से चला रहे हो। आप चलाओगे आराम से। आपको पता भी नहीं चलेगा कब पैडल चला रहे हो। कब ब्रेक लगा रहे हो। आप हो जाओ बहुत ज्यादा कॉन्शियस। अरे मैं पैडल घुमा रहा हूं। अरे मुझे ब्रेक लगाना है ध्यान लगा के। अरे वो हैंडल घूम रहा है इधर। आप डगमगा के गिर जाओगे। इसीलिए जो सीखता है वो देखता है कि जब वो सीख रहा है साइकिल चलाना या बाइक चलाना। तो वह ज्यादा कॉन्शियस रहता है कि मैं पहला गियर लगा रहा हूं, मैं क्लच दबा रहा हूं और वह ज्यादा रिस्क में भी रहता है। आप जब चलाना सीख जाते हो तो इट बिकम्स सेकंड नेचर। वहीं अगर आपको कोई महंगी बाइक दे दी जाए कि इसमें स्क्रैच नहीं लगना चाहिए, टूटना नहीं चाहिए। आपका वही बिगिनर वाला कॉन्शियसनेस वापस आ जाएगा। आप तब ज्यादा सोचने लगोगे नहीं ये टूटना नहीं चाहिए। और तब सबसे ज्यादा चांस होता है बाइक के लड़ने का। आप किसी ऐसे आदमी को पीछे बैठा लो अपने जो कि बहुत पैरान है। आपको बाइक चलाने बहुत अच्छे से आता है। आप कभी क्रैश नहीं होते। आप किसी ऐसे आदमी को बैठा दो जो कि बहुत डरता है। अब वो आपको हर

10 कदम पे बोलता रहे कि अरे बचा के चलाओ यार। धीरे चलाओ यार। ब्रेक लगाओ। अरे अरे ये हमारे गियर मत चलाओ। अरे मुझे बहुत डर लग रहा है। आप तब देखोगे आप पक्का भी भेड़ोगे। क्योंकि वो आपको कॉन्शियस कर दे। कॉन्शियस ज्यादा हो जाना कभी-कभी नुकसानदायक होता है।

कभी-कभी यह सही रहता है कि आप जो कर रहे हो आप फ्लो स्टेट में रहो। आप एकदम ऑटो पायलट में रहो। आप एकदम सेकंड नेचर बना के करो उस चीज को। आप जहां ध्यान से करने लगे उसे ज्यादा फोकस हो गए तब होती है गड़बड़।

जब भी कन्वर्सेशन करते हैं जितना आप रिलैक्स्ड या फिर आप स्टेज पर बोल रहे हैं। आप स्टेज पर जितना रिलैक्स होके नेचुरली बोल रहे हैं। पीपल विल लाइक यू मोर। आप रट के बोलोगे कॉन्शियसली बोलोगे तो कोई सुनता नहीं। लोग समझते हैं रोबोट है।

What belief do most of your followers still hold that silently keeps them average even after consuming your content?

आपको प्रश्न कई सारे मेरे फॉलोअर्स को ऐसा लगता है कि दुनिया ढूंढ है। हर मामले में दुनिया कोलैप्स हो रही है। डेटिंग गेम कोलैप्स हो रहा है। कुछ भी करने का फायदा नहीं है। सब कुछ बहुत मुश्किल है। कंपटीशन बहुत ज्यादा है स्पेशली कंपटीशन को लेके और उनको मैं क्लेरिफाई करना चाहता हूं कि दुनिया हमेशा से हॉरेबल थी अधिकतर लोगों के लिए और होती जाएगी होती जाएगी आपका पर्सनल एक्सपीरियंस सबकी तरह सेम हो जाए यह जरूरी नहीं है आप उसी दुनिया में रहोगे उसी शहर में रहोगे उसी गांव में रहोगे उसी नेबरहुड में रहोगे एक आदमी की लाइफ एकदम नर्क की तरह रहेगी आपकी स्वर्ग की तरह हो सकती है। It all depends on the decisions you make in life and especially on your mental state.

आपका खुद का सेल्फ इमेज क्या है? अगर आपका खुद का सेल्फ इमेज बहुत ही अच्छा है, कॉनकरर वाला है। आप घटिया से घटिया सिचुएशन को डोमिनेट कर लोगे। आपके सामने कोई भी परिस्थिति टिक नहीं पाएगी। क्योंकि आप परिस्थिति को फेस करने पे ये नहीं बोलोगे अरे सब कुछ खत्म हो गया। अब मैं खत्म हो गया। आप रोओगे नहीं। यह रोना उस परिस्थिति को परमानेंट बना देता है। कोई भी दुख, कोई भी प्रॉब्लम हमेशा के लिए नहीं आती। हम बनाते हैं उससे परमानेंट पर अगर आप उसे बोल्ड देखोगे मुसीबत के मुंह पर अगर आप हंसोगे उसे देख के आप बड़े से बड़ी मुसीबत आप कोलैप्स कर दोगे आपका मन नहीं हारना चाहिए लोग सोचते हैं कि सब कुछ खराब हो रहा है हां हो रहा है बट ऑन एन इंडिविजुअल लेवल आपके साथ नहीं होगा अगर आप अपना ध्यान रख रहे हो तो दुनिया के साथ होता रहेगा हम लोग यहां पर रेवोल्यूशनरी बनने की और क्रांतिकारी बनने की बात नहीं कर रहे हैं कि हम उस समाज को जाके बचा लेंगे। वो कभी सही तरीके से प्ले आउट नहीं होता। बट आई एम टॉकिंग टू दी सेलेक्ट फ्यू मैन जिनको लग रहा है कि यह भी उस मैट्रिक्स के हिस्सा है। सब कोई कह रहा है कि यार देखो ये हो जाएगा ये करोगे तो नहीं तुम्हारे साथ होगा। इसका मतलब ये नहीं कि सबके साथ होगा। As long as you are taking care of yourself.

आप किसी भी जगह पर हो, कहीं पर भी हो, किसी भी सिचुएशन में हो, आपके साथ कोई बुरी चीज नहीं होगी। This you can ensure completely bullet proof. वह भी बड़े आराम से कोई मेहनत करके ज्यादा नहीं कोई एकदम बैल की तरह अपने को घिस के नहीं। With a very very relaxed, very calm. As long as you know how to operate your mind properly.

पर एक बात मैं यहां पे ऐड करना चाहूंगा जितना मैं कंटेंट कंज्यूम करता हूं मेंबरशिप में भी हूं तो वहां पे भी कमेंट देखता हूं तो मुझे लगता है कि वहां पे फिर भी फिर भी ये जो मूर्छित समाज है उसमें से तो जाके वो इंसान है क्योंकि कमेंट से हमें पता चल जाता है इनका स्तर तो मेरा जो ओपिनियन है यह है जो भी हमारा परिवार है वहां पे वो फिर भी एक एल वो ऐसे लोग हैं जो जाग रहे हैं या उनके कमेंट से दिख जाता है कि वो इतने भी वो नहीं है कि फर्क तो पड़ रहा है प्रक्रिया में है भाई प्रक्रिया में समय लगता है पर मेरे हिसाब से प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। This is my answer.

Bollman आपने पूछा तो नहीं था पर मैंने अपना यहां पे ऐड कर दिया। Lord मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि इंपोस्टर सिंड्रोम के कारण मैं देखता हूं कि बड़े टैलेंटेड लोग जो वास्तविक है टैलेंटेड परमात्मा ने अस्तित्व ने उनको कुछ खूबियां दी है शक्तियां दी है और इस सिंड्रोम के चलते उनका व्यक्तित्व मारा जाता है। इसके ऊपर मैं आपके विचार जानना चाहता हूं।

एक बहुत ही सैड बात है कि इंपोस्टर सिंड्रोम उनको बहुत अफेक्ट करता है जिनका इंटेलिजेंस हाई है। जिसका इंटेलिजेंस स्लो है वह इतना सोचता भी नहीं है क्योंकि वह बहुत ही बेस इंस्टिंक्ट पर जीता है। उसको अच्छा लग गया वह हंस देगा। उसको बुरा लग गया वह रो देगा। उसको तारीफ मिल जाएगी वह नाचने लगेगा। बहुत ही बेस इंपल्ससेस पे जीता है। और आयरनी यह है कि क्योंकि वो इंपल्ससेस पे जीता है। अगर वो पॉपुलर है अगर वो सिंगर है, वह पॉलिटिशियन है, वह कोई इन्फ्लुएंसरर है तो वो एक्सट्रीम्स में जिएगा। वह तारीफों से बहुत ही ज्यादा कॉफेंट हो जाएगा, उछल जाएगा। नफरत से बहुत ही ज्यादा अफेक्ट हो जाएगा। यह चीज कम से कम होता है कि उसके अंदर पॉजिटिविटी की एक एक्सट्रीम आती है।

लेकिन जो लड़के अपने आप को ले बहुत कॉन्शियस होते हैं जिनका थोड़ा भी ज्यादा इंटेलिजेंस होता है। उनकी लाइफ में अगर ऐसा हुआ होता है कि उनके करीबी लोगों ने उनकी कभी तारीफ नहीं की होती। उसकी पेरेंट्स ने कभी तारीफ नहीं की। करीबी दोस्तों ने कभी तारीफ नहीं की। अगर धीरे-धीरे उनको देखती है दुनिया और दुनिया उनकी तारीफ करना शुरू करती है तो उन्हें लगता है कि असल में दुनिया जो है मेरी तारीफ इसलिए कर रही है क्योंकि मुझे असली में जानती नहीं है। अगर मुझे असली में जानती कि मैं कौन हूं तो मुझे घटिया समझती है। दुनिया मेरी तारीफ नहीं कर रही है। दुनिया मैं जो बस अपना एक फेस दिखा रहा हूं, रूप दिखा रहा हूं, उसकी तारीफ कर रही है। मतलब एक बहुरूपिया हूं। I mean imposter. ये चीज रियलिटी नहीं होती। कई सारे लोगों के अंदर जेनुइन टैलेंट्स होते हैं, खूबियां होती है।

और एक रियलिटी यह है कि घर की मुर्गी दाल बराबर। आपके आसपास के लोग चाहे कितने भी अच्छे हो घर का आदमी कितना भी अच्छा हो क्योंकि आपके साथ वो हमेशा रहा है। फमिलियर है आपके साथ तो आप उसको उतना वैल्यू नहीं करोगे। आप उसकी उतनी तारीफ नहीं करोगे। आपको कभी उसको देख के ये नहीं फील होगा कि अरे बाप रे मैं कितना खुशकिस्मत हूं कि ऐसा आदमी मेरे घर में पैदा हुआ। नहीं आप कहोगे यह तो यार वही है पड़ा रहता है बस। लेकिन जब बाहर के लोग देखते हैं क्योंकि बाहर के लोग आपसे फमिलियर नहीं है आप उनकी लाइफ में कुछ वैल्यू प्रोवाइड कर रहे हो आप अच्छा गा रहे हो आप अच्छा खेल रहे हो आप अच्छा लोगों को एडवाइस दे रहे हो ऐसे में लोग आपकी ऑफकोर्स तारीफ करते हैं। ऐसे में उस आदमी को विश्वास ही नहीं होता वो सोचता है यार कि ये तो सही नहीं हो सकता है अच्छा ये सब तारीफ इसलिए कर रहे होंगे क्योंकि मुझे जानते नहीं। जिस दिन जान जाएंगे उस दिन नहीं करेंगे। तो वो आदमी ये इतनी खराब सिचुएशन है कि ऐसे आदमी की आप तारीफ करते रहो। यह मानेगा ही नहीं कि आप सच बोल रहे हो। यह मानेगा ही नहीं कि इसके अंदर कोई खूबी है जिसकी आप तारीफ कर सको। और सही में खूबी रहती है। पर यह आदमी अपनी खूबी को समझता है कि कुछ नहीं है। अगर है भी तो उस लायक नहीं है कि इसकी तारीफ हो। सबसे सैड बात यह है।

सबसे पहले ऐसे आदमी को यह जानना जरूरी है कि इंपोस्टर सिंड्रोम कुछ होता है। क्योंकि कोई चीज हम लोग अगर एक्सपीरियंस कर रहे होते हैं उसको अगर कुछ नाम दे दिया जाए तो वो टारगेट करने के लिए इजी रहती है। हम लोग को बस कुछ फील हो रहा है। हम लोग उसको पॉइंट आउट नहीं कर पा रहे। नाम नहीं दे पा रहे उसे। तो हम लोग कहते हैं हां ठीक है चलो जो भी हो मेरे पर्सनालिटी का हिस्सा है। जैसे हम लोगों ने उसको नाम दे दिया। हम लोगों ने उसको टारगेट कर दिया। अब पता चलता है कि हां यार यह दिक्कत मुझे है। सबसे पहला स्टेप है टू नेम इट कि हां मुझे है इंपोस्टर सिंड्रोम।

और दूसरा यह है अब आपने कुछ जान लिया कि आपको कोई प्रॉब्लम है। अब आप उसके आने से पहले उसको एंटीिसिपेट कर सकते हो। आपको पता चल गया कि कोई प्रॉब्लम घर में है। आप जान सकते हो कि इस टाइम पर इस सिचुएशन में यह मेरी तरफ आती है। अब आप उसका इंतजार करोगे। पहले वह प्रॉब्लम आपको अचानक से हिट कर रही थी। अब आप जान जाओगे कि मेरी जब भी कोई तारीफ करता है, मुझे जब भी कोई प्रेस करता है, तब यह मुझे फीलिंग आती है कि तुम बहुरूपिया हो। तुम्हें लोग इसलिए प्रज़ कर रहे हो क्योंकि तुम्हें असली में नहीं जानते। पर अब आपको यह भी पता चल गया है कि ये इंपोस्टर सिंड्रोम का नतीजा है। अब अगली बार से जब ये थॉट आएगा तो आप उसको ऑब्जर्व करोगे। उससे आइडेंटिफाई नहीं करोगे। आप कहोगे कि अच्छा इस आदमी ने मेरी तारीफ की। देखो मुझे दोबारा यह फीलिंग आ रही है कि यह आदमी मुझे जानता नहीं इसलिए तारीफ कर रहा है। मैं उस लायक नहीं हूं असली में। पर यह तो होना ही था यार। मुझे इंपोस्टर सिंड्रोम है। अब मैं देख पा रहा हूं इस चीज को। ये एक फिक्स्ड पैटर्न फॉलो हो रहा है। ठीक है?

एक काम करते हैं। धीरे-धीरे एक चीज तो मैंने मान ली है कि ये थॉट जो है यह रियलिटी से इसका कोई नाता नहीं है। It is a result of imposter syndrome. अब धीरे-धीरे मैं क्या करूंगा? मैं इस थॉट को डिसबिलीव करना शुरू करूंगा। यह जो थॉट मेरे अंदर आ रहा है कि मैं उस लायक नहीं हूं। मैं इसको डिसबिलीव करना शुरू करूंगा क्योंकि इट इज अ पार्ट ऑफ इंपोस्टर सिंड्रोम। ये सच्चाई नहीं है। मैंने नाम दे दिया इस चीज को। ये कंडीशन है कि टैलेंट होने के बावजूद मुझे ये फील करा रहा है कि नहीं है मेरी ये सच्चाई। मैं उसको सिर्फ डिनाई करना शुरू करूंगा। इसमें समय लगता है। इसमें समय लगता है क्योंकि आप जब चाहे तब ये नहीं कर सकते। आपको उस अपोरर्चुनिटी का इंतजार करना है जहां के लोग तारीफ कर रहे हैं और तब आप यह बोल पाओ अपने आप से कि नहीं अपोरर्चुनिटी आई है तारीफ मिली है और यह इंपोस्टर सिंड्रोम भी आ रहा है। अब मैं मना करता हूं तुम्हें। मैं तुम्हारी बात सुनूंगा ही नहीं। मैं तारीफ जो मुझे मिल रही है, दैट इज जेन्युइन। आई विल एक्सेप्ट इट। यह जानना जरूरी है।

और अगर आप यह स्टबनेस अपने अंदर बना देते हो। नंबर वन और नंबर टू आप अगर यह कह देते हो कि मैं जैसा भी हूं। I accept myself the way I am और मैं तब भी उसके बावजूद भी अपनी तारीफ करूंगा। तुम कौन होते हो यह बताने वाले कि मैं कब अपनी तारीफ कर सकता हूं। कब नहीं कर सकता। This is the most important. किसी भी खराब सिचुएशन में हूं मैं। I still love myself man. प्राउड कि मैं कहां तक आया है ना ये बोलना बहुत पावरफुल होता है तब उसके बाद से कोई थॉट आएगा कहेगा कि तुम बहरूपिया हो तुम कहोगे हां मैं हूं एंड आई स्टिल लव मायसेल्फ एस अ बहुरूपिया। अब बोलो ये थारे सारे थॉट्स तब जाके न्यूट्रलाइज हो जाते हैं। समय लगता है पर थोड़ी सी बेशर्मी दिखानी पड़ती है हम लोग को बेशर्मी दिखानी पड़ती है ताकि शेमिंग ना हो पाए दिमाग हमारा शेमिंग कर रहा है देखो तुम नकली हो हां मैं हूं नकली अब बोलो फेकिंग इट टिल आई मेक इट अब बोलो। Now the mind loses its power.

Lord हम तेजो द्वेष का अनुभव करते हैं। तेजोद्वेष शब्द शब्द से आप परिचित हो। तेजोद्वेष तो आपने भी किया होगा और बहुत सारे लोग करते हैं जिनमें कुदरत ने या तो उन्होंने अपने आप ऊपर काम करके अपने व्यक्तित्व को निखारा है। अपनी एक अलग ऊर्जा लेकर के सकारात्मक प्रभावशाली वह जब तो ऐसी सिचुएशन में कैसे अपने आप क्योंकि मैं देखता हूं बहुत सारे लोग फंस जाते हैं। बहुत सारे लोग या तो इरिटेट हो जाते हैं वो नकारात्मक हो जाते हैं या तो रिसोंड कर रिसोंड तो नहीं करते रिएक्ट ही करते हैं। क्योंकि जब आप में है वह बातें तो तेजोद मतलब बिना मतलब के लोग जो कि कोई नुकसान नहीं है उनको आपसे और आपके वीडियोस भी मैंने देखे हैं कि बी हैंडसम एट योर रिस्क ये कहीं रिलेटेड थोड़ा बहुत इसी जो तेजोद्वेष वाला मामला है आपने किसी का गलत नहीं किया आप अच्छे भी हो पर अब कुदरत ने आपको निखारा है इस खेल में आप बड़े प्रभावशाली ढंग से अपने आप को कैरी कर पा रहे हो या तो हो ऐसे पूरा आपका बाहरी आयाम अंदरूनी आयाम खिला हुआ है तो मैं देखता हूं काफी सारे लोग अपनी फ्रेम तोड़ देते हैं। उनके व्यक्तित्व को नष्ट कर देते हो। नकारात्मक होकर के तो यह क्या होता है तेजोद? क्यों ऐसा लोग करते हैं और हमें कैसे अपने आप को बचाना है? सुरक्षित रखना है।

कहीं पर भी अगर कोई आदमी दूसरों से किसी वे में एडवांटेज हो जाए। डिस्पैरिटी तो हर जगह है। हर मामले में कहीं लुक्स के मामले में डिस्पेरिटी है। पैसे के मामले में डिस्पेरिटी है। पावर के मामले में डिस्परिटी है। हर जगह जहां पर डिस्पैरिटी होगी तो डिस्पैरिटी में जो ऊपर होगा वह कम रहेगा जो लोग नीचे हैं उनके कंपैरिजन में अमीर हमेशा कम रहेगा गरीबों के कंपैरिजन में अच्छे दिखने वाले कम रहेंगे बाकियों के कंपैरिजन में जिनके पास पावर ज्यादा है वो भी कम रहेंगे पावरलेस के कंपैरिजन में ऐसे में जो आदमी डिस्पैरिटी के स्केल में नीचे है उसके अंदर एक जलन की भावना आती है। कॉमनली लोग जलन पहले फील करते। सेल्फ रिफ्लेक्शन कीजिए। एक हेल्दी आदमी जो है वह कहता है कि ठीक है यह आदमी मुझसे ऊपर है। मैं उसको एडमायर करता हूं और मुझे भी इच्छा है उसकी तरह बनने का। मुझे भी इच्छा है अच्छा बनने का। तो मैं कोशिश करूंगा कि मैं उससे कमपीट करूं। और मैं उसकी तरह बन जाऊं या उससे आगे निकल जाऊं। एक हेल्दी वे।

लेकिन एक एवरेज आदमी यह नहीं सोचता। एक एवरेज आदमी यह सोचता है कि कोई खिलौना अगर मुझे नहीं मिल पाया तो जिसे मिला है मैं उससे छीन के उसे तोड़ दूंगा ताकि अब हम सबके पास ना रहे खिलौना। हम सब लोग बराबर रूप से गरीब रहे। हम सब लोग बराबर रूप से दुखी रहे। हम सब लोग बराबर रूप से सफर करते रहे। अधिकतर लोगों की मानसिकता यह होती है। आप यह चीज हर जगह पाओगे। आप पार्क्स में देखोगे। कोई लड़का लड़की के साथ बैठा हुआ है। कई लड़कों का झुंड आएगा उसको हैरास कर देगा। अब झुंड को पता है कि लड़के लड़की को हैरास करने से लड़की हमसे पटेगी नहीं। हमसे प्यार नहीं हो जाएगा उसको। उनका ये है कि हमें नहीं मिल रही तो हम तुमको भी नहीं पाने देंगे। तुम भी सफर करोगे हमारी तरह। तुम भी अकेलेपन में रहो। तुम भी कैन वी कॉल इट सोशल मिजरी? या इट इज द सोशलाइजेशन ऑफ मिजरी।

और इसमें एक इसमें एक मार्क्सिस्ट एंगल भी है। किसी के पास कुछ है मुझे वो छीन के लेना है उससे। भले ही वो चीज डिस्ट्रॉय हो जाए मुझे मतलब नहीं है। मुझे बस वो चाहिए वो ऊपर क्यों है? ये जलन की भावना रहती है। इसीलिए एक चीज तो आप पाओगे सोसाइटी में। हमारे सोसाइटी में ज्यादा पाओगे यह चीज। जो भी ऊपर है किसी भी मामले में वो बहुत ही खारा है। आप कभी किसी एक्टर को देखे हो किसी सेलिब्रिटी को फैंस के साथ बहुत ही ज्यादा प्यार से वो एक्ट कर रहा है। बहुत प्यार से बात कर रहा है। साथ में बैठ के गोलगप्पे खा रहा है। मैंने तो देखा है जॉन अब्राहम को वो तो एक आदमी का सिर पकड़ के ऐसे धकेल रहा है। एक्टर्स ध्यान नहीं देते। सेलिब्रिटी को बहुत प्यार करते हैं लोग। प्यार करते हैं लोग सेलिब्रिटीज पर सेलिब्रिटी वो प्यार वापस नहीं देते उन्हें। सेलिब्रिटी जो है किसी ना किसी हद तक यह बात समझता है कि किसी ना किसी वे में वो समाज में एडवांटेज है, प्रिविलेज्ड है। कई सारे लोग उसके प्रिविलेज को छीनना चाहते हैं। अगर छीन नहीं सकते तो कम से कम उसे नुकसान इतना पहुंचाना चाहते हैं कि वो भी उन्हीं के बराबर हो जाए। तो वो अपने आप को बचा के रखता है। भले ही उसको इसके लिए रूटनेस भी दिखाना पड़े।

आप पॉलिटिशंस को देखें। एक पॉलिटिशियन के पास आप तभी पहुंच सकते हैं। उससे फमिलियर तभी हो सकते हैं। जब इलेक्शन टाइम आता है और वह अलव करता है आपको। वरना जब वो सड़क से भी पास होता है ना सारे रास्ते बंद है। ठीक है? ये ब्लेम ये गलती पॉलिटिशियन की नहीं है। वो जानता है क्राउड का नेचर क्या होता है। क्राउड के रिलेशन में जो पॉलिटिशियन है वह एडवांटेज है। क्राउड के अंदर इस चीज को देख के कई सारे एक तरीके का रिजेंटमेंट आता है। यह रिजेंटमेंट नुकसानदायक रूप में बाहर आ सकता है।

आप कुछ बाबाओं को देखते होंगे। बाबा स्कैम कर रहा है या नहीं कर रहा। यह चीज तभी बाहर आ पाती है जब बाबा कोई महंगा बैग ले घूमता है। कोई महंगी गाड़ी में घूमता है। तब लोगों को याद आता है। अच्छा ये स्कैम कर रहा था। उससे पहले नहीं किसी को याद आता। उससे पहले कोई बात नहीं करता कि ये स्कैम कर रहा है। जब वो अपनी अमीरी दिखाने लगता है तब लोग रियलाइज करते हैं कि अच्छा ये स्कैम कर रहा था। क्योंकि प्रॉब्लम असल में यह नहीं थी कि वो स्कैम कर रहा था। उससे उससे किसी को मतलब नहीं था। प्रॉब्लम यह है कि मेरे पास पैसा नहीं है। आपके पास कैसे है? मैं पूरी कोशिश करूंगा कि आपका जो पैसा है वो अपना आए। अब आप मेरे बराबर आ जाओ। यह एनवी है, यह जेलसी है।

इसीलिए जो हम लोग का एलट वर्ग है, वह एक चीज बहुत कोशिश करता है कि आपका उस तक पहुंचना बहुत मुश्किल हो। आपका उससे इंटरेक्ट करना बहुत मुश्किल है। आप उससे मिलने से पहले भी कई लेयर की सिक्योरिटी के थ्रू आप गुजरे। आपने अगर सड़क पर वाली गाड़ियां देखी होंगी जो कि लोकल बिजनेसमैन वगैरह के साथ चलती हैं। यह गाड़ी वाले काफी रूथलेस होते हैं। कोई भी हल्का सा भी आसपास आता है ऑटो वाला वगैरह डंडा बजाते हैं उसकी गाड़ी में। ठीक है? यह एक तरीका है जिससे प्रिविलेज जो है वह अपने आप को दूसरों से प्रोटेक्ट करता है, बचाता है। अपने आपको इस जेलसी से बचाता है। इसका मतलब यह नहीं कि सारे के सारे जेलस है जो भी नीचे हैं। पर एक बहुत ही कंसीडरेबल नंबर है जो कि जेलस है और आप शक्ल देख के तो बता नहीं सकते कि कौन जल रहा है आपसे। तो वह क्या करते हैं? वो एक जनरल प्रोटेक्टिव मेजर अपने ऊपर इंप्लीमेंट करते हैं।

कोई एवरेज आदमी है। कोई एवरेज लड़का है जो किसी मामले में अच्छा है। किसी मामले में वो बेहतर है दूसरों से। वो अच्छा दिखता है, अच्छा बोलता है, पढ़ने में अच्छा है, करियर में अच्छा है। या फिर वो किसी ऐसी फैमिली से आता है जो कि बहुत ही ज्यादा वेल ऑफ है। यह बहुत ही क्लियर सी बात है कि उसकी वजह से लोगों के अंदर जलन की भावना आएगी। अब अगर वह लड़का बहुत ही ज्यादा अप्रोचेबल है। वह बहुत ही ज्यादा सरल है। वह बहुत ही ज्यादा नाजुक है। यह जलन उसकी तरफ पहुंचेगी और उसे खत्म कर देगी। ऐसे में उस लड़के को चाहिए कि उसके पास अगर किसी भी वे में एडवांटेज है तो उस एडवांटेज को प्रोटेक्ट करने के लिए अपने स्वभाव में वो थोड़ा सा खारापन लाए और उस खारेपन को वो स्ट्रेटेजिकली यूज़ करे। सबसे वो खराब तरीके से बात ना करे। सबसे अच्छे से रहे और जहां उसे लग जाए कि कोई आ रहा है उससे वह छीनने जो उसके पास है या उसे डिस्ट्रॉय करने आ रहा है तो उसको यह भी दिखाना होगा कि मैं इतनी आसानी से तुम्हें अपने आप को अप्रोच नहीं करने दूंगा। इतनी आसानी से तुम मेरे फ्रेंड सर्कल में नहीं आ पाओगे। इतनी आसानी से तुम्हें इतने नजदीक नहीं आ पाओगे।

समुद्र भी जो होता अगर खारा नहीं होता तो लोग पी जाते। इसलिए वह खा रहा है। तो अगर आप हैं, आपको लगता है कि आप किसी वे में एडवांटेज हैं, तो आप यह जान लें कि आपकी पीठ पे एक टारगेट ऑलरेडी पेंट हो चुका है। और यह टारगेट पक्का पेंट होगा। अगर आप एडवांटेज होने के साथ-साथ बहुत ही नम्र स्वभाव के हैं। तब तो पक्का होगा। आप अगर नम्र है तब होगा। इसीलिए बाबाओं में भी जो सबसे ज्यादा विनम्र बाबा होता है और वह महंगी गाड़ी में घूमता है तो सबसे ज्यादा वो टारगेट होता है। On the other hand जो बाबा थोड़ा सा स्ट्रांग पर्सनालिटी बना के चलते हैं उनकी टारगेटिंग कम होती है। Same thing with politicians. जो पॉलिटिशंस थोड़े

से विनम्र होते हैं, उनका भी यही। तो आजकल जो पॉपुलर लोग हैं, जो पॉपुलर पॉलिटिशंस वगैरह हैं, वो कोशिश करते हैं कि वो अपने आप को उतना प्रिविलेज ना दिखाएं। उनके पास पैसे बहुत ज्यादा हैं, तब भी वो ठेले पर आकर वो गोलगप्पे वगैरह खाएंगे, वो कचौड़ी वगैरह खाएंगे ताकि एक कॉमन आदमी समझे, "तो हमारी तरह ही तो है ही।" तभी वो उनसे प्यार करेगा। अगर वो यह समझेगा कि नहीं, ये मुझसे ऊपर है किसी मामले में, तब तो मामला खत्म है आपका। आपको अगर बनना है कुछ, तो आपको बहुत ही ज्यादा अपने आप को डिप्राइव्ड दिखाना होगा। यह चीज जो करेगा, यहां पर जो अपने आप को जितना ज्यादा डिप्र्राइव दिखाएगा, वह उतना सक्सेसफुल होगा। जो अबंडेंट दिखाएगा अपने आपको जितना ज्यादा, उसको दिक्कत आएगी, स्पेशली उन क्षेत्रों में जहां पर आपको पब्लिक सपोर्ट चाहिए।

एलॉन मस्क कह रहा है कि "पपुलेशन कॉल ऑफ ह थ्रेट।" एलॉन मस्क का जो स्टेटमेंट है कि कॉन्शियसनेस ज्यादा होनी चाहिए, उससे ही फायदा है। उसको लेकर के बड़ा अंतरराष्ट्रीय स्तर से लेकर के प्रादेशिक स्तर तक हल्ला हो रहा है। आपके विचार जानना चाहते हैं हमारे परिवार के साथ।

पापुलेशन की जो प्रॉब्लम है, इसको लेकर कई सारी कास्परेसी थ्योरीज भी हैं। कुछ लोग कहते हैं कि ओवरपुलेशन एक होक्स है, सच्चाई नहीं है इसमें और पपुलेशन जानबूझ के गिराया गिराया जाना, गिराए जाने की कोशिश हो रही है। सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट कास्परेसी थ्योरी ये है कि ओवरपुलेशन एक हुक्क है, ऐसा कुछ सच में नहीं हो रहा। मुझे यह मानना काफी मुश्किल है, क्योंकि मैंने ट्रैवल किया है और मैं देखता हूं ओवरपुलेशन के इफेक्ट्स। मुझे दिखता है अपने सामने कि ओवरपुलेशन सही में हो रही है, लोग बहुत ज्यादा हो रहे हैं। और बहुत ज्यादा होने में एक होता है कि आप उसी रेट से वैल्यू भी बिल्ड कर रहे हो। आप उसी रेट से लोगों को अगर आप स्किल्ड भी बना रहे हो, टैलेंटेड भी बना रहे हो, तो इससे फायदा होता है देश को। और अगर ऐसा नहीं हो रहा, तो इट जस्ट क्रिएट्स अननेसेसरी फाइट फॉर रिसोर्सेज, अननेसेसरी बर्डन। ऑफ कोर्स, पपुलेशन में क्वालिटी की जरूरत ज्यादा है रादर देन क्वांटिटी। सिर्फ पापुलेशन बढ़ा लेना यह कोई गर्व की बात नहीं है, ये बल्कि बहुत ही बड़ा क्राइसिस है देश के लिए।

कई जगहों पर पपुलेशन जब बढ़ जाती है, तो वहां पर कुछ नई-नई प्रॉब्लम्स आ जाती हैं। अब जैसे कि हम लोग मॉब लिंचिंग देख रहे हैं, हम लोग बैटल ऑफ जूनिया चौक देख रहे हैं, हम लोग यह पूरा किलर इंफ्रास्ट्रक्चर वाली प्रॉब्लम देख रहे हैं। मेनी ऑफ दी थिंग्स आर एक्सेस्पिरेटेड बिकॉज़ ऑफ हाई पपुलेशन। उतना ही ज्यादा मुश्किल हो जाएगा सरकार के लिए। हां, अगर पपुलेशन बहुत डिसिप्लिन हो जाए किसी तरीके से, जो कि करंट सिस्टम पॉसिबल नहीं है, तब तो आपको फायदा मिलेगा। पापुलेशन डिसिप्लिन होने वाली नहीं है, बल्कि एक माइनॉरिटी उस पापुलेशन की असल में डिसिप्लिन होगी। यू आर जस्ट क्रिएटिंग केस।

ईलॉन मस्क का जो नैरेटिव है पपुलेशन कोलैप्स का, ही डस नॉट से इट बट ही एंड मेनी अदर पीपल लाइक हिम। वो जब पपुलेशन कोलैप्स की बात करते हैं, तो वह एक स्पेसिफिक रेस के पपुलेशन की कोलप्स की बात करते हैं कि उसको बचाना है, उसका कोलैप्स हो रहा है। वो उसकी बात करते हैं। इन जनरल वो बाहर की दुनिया की बात करें, अफ्रीका के कॉन्टिनेंट की पपुलेशन एक्सप्लोजन की बात करें, तो देयर इज़ नॉट मच कंसर्न इन दी कॉनस्परेसी थ्योरीज व्हेन IT COMES TO THOSE PLACES।

"From the down of time, वि आर द बेस्ट बेस्ट फिलोसफर्स दैट यू थिंक आर रिलेवेंट FOR NAVIGATING THE PRESENT AND FUTURE UNCERTAINTY?"

मुझे काफी ज्यादा इंस्पिरेशन मिली अरिस्टोटल से, आदि शंकराचार्य जी से, एक फ्रांस का फिलॉसफर था रेनेकार्थ, उससे भी और काफी ज्यादा बाद में जाके काल यंग से। मेरे ख्याल से अगर आप सिर्फ यंग को भी पढ़ रहे हो, तो आपको अभी के टाइम को लेसली कुछ जो इंटरेस्टिंग टॉपिक्स हैं, जैसे कि सिंक्रोनसिटी, कलेक्टिव एंड कॉन्शियस, शैडो वर्क, IF YOU ARE IMPLEMENTING DI IN YOUR LIFE, तुमको एक नया र मिलेगा अपने खुद की कॉन्शियसनेस का। मैं काफी ज्यादा वैल्यू पाता हूं काल यंग की वर्क से। इनफ इनफैक्ट लाइव से पहले ही I WAS READING THAT WORK OF IT CALLED सिंक्रोनसिटी। यू गाइस शुड आल्सो चेक IT OUT।

बुली को लेकर के कुछ प्रश्न मुझे करने हैं, क्योंकि बुली होना यह बचपन से ही बहुत बड़ी समस्या होती है। एक इंसान जो बचपन में बुली होता है अपने सोशल में या स्कूल में, तो वहीं से उसका आत्मविश्वास, आत्मबल गिर जाता है और फिर मल्टीप्लाई हो जाता है उसके पूरे व्यक्तित्व में और बहुत सारे लोग तो बाहर ही नहीं आ पाते हैं। तो कौन से लोग एक तो सॉफ्ट टारगेट होते हैं बुली के लिए? कैसे बचा जाए? और आजकल तो नया एक मैं भी यहां पर फील करता हूं ट्वीट में कि जो एजेड लोग हैं, उनको बुली कर रहे हैं छोटे-छोटे बच्चे और इसके ऊपर आपने एक रिसेंट वीडियो भी बनाई और मैं मैं भी महसूस कर रहा हूं। तो यह जो पूरा बुली जो यह कल्चर है या बुली फिनोमिना जो है, उसके ऊपर मैं आपसे क्लेरिटी चाहता हूं कि कौन होते हैं टारगेट? क्या किया जाए? कैसे अपने आप को मेंटेन करके रखा जाए? प्रेम रखा जाए कि इससे बचा जाए? और कौन करते हैं? किस प्रकार की मानसिकता वाले?

एक चीज मैंने ऑब्जर्व की है कि समाज क्योंकि बहुत ज्यादा शो पिल्ड है, मैंने कॉमन लोगों को भी देखा है कि कॉमन लोग अगर यह सेंस कर लेते हैं सामने वाले से कि सामने वाला मुझे हार्म नहीं कर सकता किसी दिन, चाहे वो फिजिकली हो या मेंटली हो। अगर मुझे वो हार्म नहीं कर सकता, मतलब मैं उसे हार्म कर सकता हूं। लोग ये अस्यूम करते हैं। वो ये अस्यूम नहीं करते कि वो मुझे हार्म नहीं कर सकता, इसका मतलब यह है कि हम लोग शांति से साथ में रह सकते हैं। नहीं, नहीं, नहीं, अगर वो मुझे नहीं मार सकता तो मैं उसे मारूंगा। तब तो मेरे मजे हैं। लोगों का बिहेवियर यह होता है। बड़ा जंगल टाइप का डायनामिक है जानवरों की तरह: या तो तुम मेरा शिकार करो, वरना मैं करूं। कई बार लोग ऐसा सोचते हैं।

इसलिए आप पाओगे कि कई बार जब बुलिंग होती है, तो आपकी बुलिंग किसी बहुत मजबूत आदमी के द्वारा नहीं होती। कई बार आपके नजदीकियों द्वारा होती है। कई बार आपके नजदीकियों द्वारा होती है जो खुद भी परेशान हैं। दोस्तों के द्वारा होती है जो खुद भी परेशान हैं। उनकी खुद की लाइफ बहुत खराब चल रही है, तब भी वो गोली कर रहे हैं दूसरों को। आप सोचोगे यार कि अगर यह चाहता तो हम लोग साथ मिलके हर दिक्कत को सही करते। हम लोग तो आपस में उलझे हुए हैं, लड़ रहे हैं। ऐसा क्यों हो रहा है? यह वो भूख है: या तो तुम मुझे डोमिनेट करो, वरना मैं कोशिश करूंगा तुम्हें डोमिनेट करने का। दिस इज अ वेरी सैड थिंग।

ऐसे में अगर आप एक सॉफ्ट टारगेट हो और आप इस जंगल में बाहर जा रहे हो। एज अ मैन, आप आदमी हो और आप सॉफ्ट टारगेट हो। आप बहुत ही विनम्र हो, पर आपके अंदर एबिलिटी नहीं है अपनी विनम्रता को बंद करने की और खारा बनने की। आपके पास बस एक ही चॉइस है, वो है विनम्र होना। तो सामने वाला इस विनम्रता की इज्जत नहीं करता। वो कहता है कि नहीं है। ये बहुत ज्यादा विनम्र है। इसका मतलब तो ये कमजोर होगा। यह मर्द नहीं होगा। उसकी कंडीशनिंग ऐसी हुई है कि जब तक वो मार नहीं खाता, जब तक वो प्रताड़ित नहीं होता, तब तक वो रिस्पेक्ट नहीं करता किसी की। उसकी बहुत ही सालों के थ्रू यह कंडीशनिंग हुई है कि एक उसके ऊपर कोई मास्टर बैठा रहे और मास्टर उसको बस प्रताड़ित करता रहे, उसको डोमिनेट करता रहे। तब वो मास्टर की इज्जत करता है कि 'थैंक यू मास्टर।' उसकी यह कंडीशनिंग है। ऐसा आदमी जब भी किसी ऐसे आदमी के साथ आता है जो आदमी दूसरों की इज्जत करता है, जो दूसरों को दबाता नहीं, दूसरों को बराबर का दर्जा देता है, यह आदमी सोचता है कि यार ये तो मुझे दबा नहीं रहा यार पिछले लोगों की तरह। इसका मतलब ये कमजोर होगा। अब मैं इसको दबा सकता हूं।

कई बार यह देखा गया है कि क्लास का जो वह लड़का होता है जिसको सब कोई परेशान करता है, तो आप कभी यह ट्राई करो कि आप जाकर हीरो बनके उसको बचा लो और उससे कोई दोस्ती नहीं कर रहा है, आप दोस्ती कर लो उससे। उसकी आदत है कि उसको लोग हमेशा से प्रताड़ित करते आए हैं और कहीं ना कहीं उसके दिमाग में यह बैठ गया है कि स्ट्रांग डिपेंडेबल आदमी वही है जो मुझे प्रताड़ित करता है। अब जब वो किसी ऐसे आदमी से मिल रहा है जो कि उसे इज्जत से ट्रीट कर रहा है, तो उससे हजम नहीं होता। कहता है, "अरे, ये कैसे हो सकता है? मेरी तो हिस्ट्री रही है यार। मुझे हर आदमी दबाते आया है। इसका मतलब ये जो है, इसके अंदर दम नहीं है, वरना यह भी दबाता मुझे।" दबना उसके लिए नॉर्म है। तो यह एक्सपेक्ट करता है वो हर आदमी से। "अच्छा, नहीं दबा पा रहा मुझे। इसका मतलब यह दम नहीं है, वरना यह दबाता मुझे। अब क्योंकि दम नहीं है, तो मुझे भी अपना मौके पे चौका मारना चाहिए।" ऐसा करते हैं लोग।

इसीलिए बुलिंग कॉमन हो रही है और क्योंकि जंगल है, तो जंगल में अगर आप एक कमजोर जानवर हैं, आप अगर एक शिकार हैं, तो आपका शिकार होगा। आप हैरानी तब होगी आपको जब आपका शिकार होगा और आप जाकर सो कॉल्ड टीचर को, सो कॉल्ड आपके जो घर में बड़े बुजुर्ग हैं, उनको बताओगे और वो बड़े लोग भी बुली का ही साइड लेंगे। चेक डाउन बिल्ड जो ज्यादा अग्रेसिव है, जो ज्यादा वायलेंट है, उसका लोग साइड लेते हैं, है ना? और कुछ-कुछ लोकेशनेशंस में ये ज्यादा होता है। आप जितने ज्यादा अंडर डेवलप्ड एरिया में हो, जितने ज्यादा बैकवर्ड एरिया में हो, उतना ज्यादा वहां पे ये ज्यादा होगा फिनोमना जिसके पास माइट है, वही राइट है। कम से कम कुछ जगहों पर लोगों के अंदर एक जस्टिस की फीलिंग आ जाती है कि कमजोर को परेशान नहीं करना चाहिए।

ऐसे में अगर एक जनरल रूल फॉलो करना है आपको कि आप बोली ना हो, तो कृपया यह कोशिश करें कि आप बहुत ही सेलेक्टिव हो जाएं। किसको आप इज्जत दे रहे हैं? किसको आप पोलाइटनेस से बात कर रहे हैं? आप जनरस सबके साथ रहें, पर जो दोस्ती वाला एक स्टेटस होता है, एक बराबरी का स्टेटस होता है, एक यह स्टेटस होता है कि आप उन्हें करीब आने दे रहे हैं या आप बहुत ही कम लोगों के साथ कर रहे हैं और उनको पहले अर्न करने दें। अपनी इज्जत दूसरों को अर्न करने दें। आपके पास शराफत है, पर आपका एक और डार्क साइड भी होना चाहिए। आपके अंदर भी एक हार्मफुल साइड होना चाहिए कि आप दिखा सको कि हां, मेरे अंदर यह एबिलिटी है कि जरूरत पड़ी तो मैं तुम्हें हार्म करूंगा। मैं सबको हार्म करते हुए घूमूंगा नहीं। नहीं, मैं भूली नहीं हूं। अगर जरूरत पड़ गई तो मैं हार्म करूंगा। अगर आपने यह दिखा दिया कि आपके पास कोई ऐसा वेपन है ही नहीं, तो फिर आप ओपन हो। आप ओपन हो इस पूरे जंगल के लिए। कोई सोचता नहीं है इन सब बातों को कि क्या गलत है, क्या नहीं। लोगों को ओपनिंग मिलती है, लोग कूद जाते हैं। और इसमें लड़कियां भी हैं। लड़कियों को भी लगेगा कि तुम्हारे अंदर कोई वीकनेस है। वो तुमको एक थप्पड़ मार रही है, तुम कुछ नहीं कर रहे हो। तो वो यह नहीं सोचे कि 'यार मैं कितनी गलत हूं यार। देखो इतना अच्छा है। मैंने उसको एक थप्पड़ मार दिया। इसने कुछ किया नहीं। देखो कितना अच्छा है। कितना प्योर है। मैं ही गलत हूं यार।' वो ये नहीं सोचेगी, वो और मारेगी। वो और मारेगी। ये बहुत इंपॉर्टेंट चीज है तुम्हारा समझना।

अगर तुम अब्यूज झेल रहे हो और तुम ये सोच रहे हो कि तुम तुम्हारे अब्यूज झेल के मुस्कुराने से सामने वाला जो है, वो बहुत ही ज्यादा उसको रियलाइजेशन हो जाएगा। जैसे कि पुरानी कहानियों में हम लोगों को सिखाया जाता था कि बुरा आदमी था, तो बुरे आदमी को किसी गांव के किसी बड़े ने उपदेश दे दिया, तो बुरा आदमी कहता था, "माफ कर दीजिए, मैंने अपनी गलती मान ली, मैंने सबक सीख लिया।" लोगों को लगता है कि तुम भी अगर पीसफुलनेस से रहोगे, लोग तुमको अब्यूज कर रहे हैं, तब भी झेलते रहोगे, तो लोगों के अंदर किसी दिन रियलाइजेशन आ जाएगा कि 'यार मैं तो गलत कर रहा था यार, मुझे बहुत बुरा लग रहा है, मुझे बहुत खराब लगा, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था, अब से नहीं करूंगा।' ऐसा तुम्हें इसलिए लगता है क्योंकि तुम खुद इस टाइप के आदमी हो। तुम दूसरों के साथ बुरा करते हो, तो तुमको बुरा लगता है। तुमको गिल्ट महसूस होती है क्योंकि तुम नॉर्मल हो। तुम सोचते हो एक इंसान की तरह। सब कोई एक इंसान की तरह नहीं सोचता। कई सारे लोग जानवर की तरह सोचते हैं: जो कमजोर है, खा जाओ उसे। बस खाने से मतलब है। कमजोर है, उसको खा जाओ। जानवर गिल्ट नहीं फील करता। जब जानवर शिकार करता है, जब कुत्ते एक दूसरे को भी काटते हैं, तो वो गिल्ट नहीं फील महसूस करता है कि 'यार मैंने उसको जख्म दे दिया यार। गलत किया मैंने।' शरीर से कुछ लोग इंसान हो गए हैं, पर कॉन्शसनेस एनिमल वाली है। वह आपको अब्यूज करेंगे AND THEY WILL NOT FEEL EVEN A SINGLE BIT BAD ABOUT IT।

तो आप उसके भरोसे बैठने की जगह आप उन्हें वो दें जो वो चाहते हैं। आप उन्हें दिखाएं कि आपके पास भी फैंस है, आपके पास भी उनको हार्म करने की एक एबिलिटी है। अपने आप पीछे हट जाएंगे। वो बहुत शग बिल्ड है। दे ONLY REPECT अग्रेशन। दे ONLY REPECT THE ABILITY TO HARM। और कई सारे जगहों पर हायरार्की बन जाती है। मैनेजर बॉस से गाली खाता है, फिर मैनेजर अपने अंदर के एम्प्लाइज को गाली दे गाली देता है। मैनेजर कभी बॉस को गाली नहीं देता। HE IS BEING DOMINATED BY THE BOSS AND NOW HE IS DOMINATING OTHERS। IT'S A CYCLE THAT KEEPS ON GOING: माइग्रेशन ऑफ़ एंगर।

निकोलो माक्यावेली और डाई जीनस को लेकर के आप क्योंकि बहुत वीडियो बन रहे हैं। बहुत सारे यूर्स इनके ऊपर वीडियो बना रहे हैं, निकोलो माफियावेली को लेकर के, डजीनस को लेकर के, तो मैं जानना चाहता हूं आपका पॉइंट ऑफ व्यू इनके बारे में, क्योंकि कुछ-कुछ बार मैं देखता हूं कि जैसे वो फिलॉसफर होते ही नहीं हैं, ऐसी बातें यहां पे प्रचलन में होती हैं या लोग करते रहते हैं।

मैंने डायजेनियस को उतना स्टडी नहीं किया है उनकी फिलॉसफी को। उनके बारे में जानता हूं मैं: उनकी हिस्ट्री कि वो सड़कों पर रहते थे, एक बड़े से वेसल में उन्होंने अपना घर बना लिया था। मक्यावेली के बारे में थोड़ा सा मुझे जानकारी है और कहा जाए कि मॉडर्न टाइम, जैसे हम लोग की चाणक्य नीति होती थी, वैसे ही मॉडर्न टाइम में अगर स्टेट क्राफ्ट की बात करें, ब्रनस टाइम में एस्पेशली उस टाइम पर जब फ्लोरेंस में मेडची फैमिली का इतना बड़ा इन्फ्लुएंस था, तो माकिया वैली एक तरीके से मेडची फैमिली के लिए एक बहुत बड़ा एसेट था, जो उन्होंने एक किताब लिखी है इल प्रिंसची पे, द प्रिंस। ITS ITS ACTUALLY A POLITICAL MANUAL जो कि लिखी गई है मेरे ख्याल से अराउंड THE TIME OF लोरेंजो डीमैडीची, THE RULER OF THE मेडिस AT THAT TIME। और आप कह सकते हो, HE WAS A चाणक्य OF इटली, है ना? कई बार कहते हैं चाणक्य को मकिया वैली ऑफ़ इंडिया। I WOULD SAY मक्खिया वैली WAS A चाणक्य ऑफ़ इटली। स्टेट क्राफ्ट की बात करें और कह सकते हो आप कूटनीति की बात करें, HIS WORK IS VERY VERYRI USEFUL। कुछ लोग सोचते हैं कि निकोलो माकियावेली टीचेस मैनपुलेशन, टीचेस पर्सनल डार्क साइकोलॉजी। नहीं, इस मोर ABOUT स्टेट क्राफ्ट। मकियावेनिज्म वर्ड आता है उनकी कुछ स्टडीज पे बेस्ड है। BUT DOES NOT MEAN कि वो जो थे, उनकी किताबों में दूसरों को मैनपुलेट करना और ये कैसे करना वो सब लिखा हुआ है। ITS MORE ABOUT कुटनीति ON A स्टेट लेवल, ON A गवर्नमेंट लेवल। उनकी उनकी द प्रिंस में विष्णु जी का भी एक वर्णन है। एक एग्जांपल के रूप में मुझे सही से याद नहीं आ रहा, पर उन्होंने एक उल्लेख किया है विष्णु जी का उसमें।

"इस कॉन्शियसनेस राइट और रोंग मतलब मानव चेतना जैसा कुछ होता है?" प्रश्न है कि "चेतना जैसा कुछ होता है?" मतलब आपकी आवाज आपकी आवाज कट रही थी बीच में, आप जरा दोबारा बोलें अपना। "ओके, मतलब मानव चेतना जैसा कुछ होता है या सिर्फ हम शरीर ही हैं?" ऐसा प्रश्न है यहां पे।

अब्सोलुटली होता है और आपको तो फील भी होता होगा कि आपके अंदर कॉन्शियसनेस है तभी आप पर्सव कर पा रहे हैं चीजों को। सिर्फ पर्सव ही नहीं कर पा रहे, आप इंटरप्रेट भी कर पा रहे हैं। आप जो देख रहे हैं, आप उसको एनालाइज भी कर पा रहे हैं। आपकी सेंसेस जो है, आप कुछ टच कर रहे हैं तो आपका हाथ नहीं फील कर रहा किसको आप टच कर रहे हैं। दैट इज योर कॉन्शियसनेस। और जब आप अपने सारे सेंसेस को बंद कर देते हैं, अपने माइंड को बंद कर देते हैं, तब भी आपके अंदर एक फीलिंग रहती है THAT YOU EXIST। दैट इज प्योर कॉन्शियसनेस। आप एक्सपीरियंस कर पा रहे हो इस वर्ल्ड को क्योंकि आपकी कॉन्शसनेस है आपकी इस बॉडी में और आपकी बॉडी जो कि सेंस ऑर्गन्स से इक्विप्ड है, वो आपके कॉन्शियसनेस को इस दुनिया को एक्सपीरियंस करने में हेल्प कर रही है।

"रिलेशनशिप में एडम एडमिरेशन को कैसे मतलब बरकरार रखें? एडमिरेशन जो है, वह रिलेशनशिप में कास्टेंट कैसे रहे? क्योंकि बहुत सारे रिश्ते हैं। NOT ONLY मेल फीमेल। हमारे आजू-बाजू बहुत सारे ऐसे रिलेशनशिप के डायनेमिक बनते हैं। पर उसमें एक वो एमरेशन रहता नहीं है। धीरे-धीरे वो आकर्षण खत्म हो जाता है, वो प्रभाव खत्म हो जाता है। और मिस्टीरियस रहना कितना जरूरी है? क्योंकि ठीक है। मेरी तो चैनल का नाम केंद्रित कौशिक है। मैं यहां पर जो भी बातें करूं खुल के और व्यक्तिगत जीवन में संबंधों में मिस्ट्री को थोड़ा बरकरार रखना क्यों जरूरी है? अगर आप पूर्ण रूप से वो हो गए कैंडिडेट निखलस खुल गए, तो इससे क्या नुकसान हो सकता है? तो दो क्वेश्चन हैं कि 'व्हाई IT IS SO MANDATORY TO MAINTAIN MYSTERY AND ADMIRATION कैसे बरकरार रहे?' क्योंकि मैं मुझे कॉल आते हैं काउंसिलिंग कॉल। तो उसमें यही होता है कि पहले थे रिलेशनशिप में वो बातें, वो अपनापन, वो एक दूसरे के लिए जीने की भावना, एक दूसरे का वेट करना, वो धीरे-धीरे कोल्ड हो जाता है। तो उनका यह कहना होता है। मैं तो कुछ-कुछ बार बोलता भी हूं कि भ मैं आपको लिंक शेयर करूंगा चैनल की हमारे और मैं उनको बोलता हूं कि भ I AM NOT RIGHT PERSON TO ASK THIS QUESTION। पर यहां पे मुझे जरूरी लगा ये क्योंकि बार-बार यह आता है प्रश्न क्योंकि मिस्टीरियस रहे और एडमिनिस्ट्रेशन को कैसे मेंटेन करें क्योंकि वो कोल्ड हो जाता है।"

मिस्टीरियस रहने काेंस इस चीज में है कि आपके पर्सनालिटी का एक-एक एस्पेक्ट, आपका हर एक ट्रेड, PEOPLE SHOULD EARN IT IF THEY WANT TO KNOW IT। कोई आपका ऐसा साइड है, आपका कोई फनी साइड है, आपका कोई अच्छा साइड है, वो तभी लोगों को अनलॉक करना चाहिए जब वो इस चीज को अर्न कर पाए। आप किसी के साथ भी, आप अपने मान लीजिए स्कूल में आपको कोई टीचर पसंद थे। आप उनको बहुत ही ज्यादा इज्जत करते थे। तो वो टीचर भी ऐसा नहीं करते थे कि आपके साथ बैठ के वो चाय पीने लगते थे और बातें करते थे, गप्पे लड़ाते थे। अगर आपको उनसे तारीफ भी चाहिए होती थी, तो आपको उसको अर्न करना पड़ता था। अगर आपको उनसे थोड़ी बहुत बात भी करनी चाहिए होती थी, तो आपको उसको अर्न करना पड़ता था। यह मिस्ट्री ही उस टीचर की रिस्पेक्ट कराती थी आपसे। मिस्ट्री का यूज ही यही है कि अगर आप चाहते भी हो कि लोग आपकी पर्सनालिटी को अनकवर करें, तो वह तभी कर पाए जब वो रेडी हों और वो रेडी कब हों जब आप डिसाइड करोगे वो अर्न करें आपके इस। आप जब अपने फोट्रेस में किसी को घुसने दे रहे हो, तो आपके फोट्रेस में घुसना वो पहले अर्न करें, वो दिखाएं कि वो इस लायक है कि आपके फोर्ट्रेस में वो घुस रहे हैं। आपका फोर्ट्रेस कुछ है ही नहीं, दीवार वगैरह कुछ है ही नहीं, पूरा समाज धर्मशाला बन के बैठा हुआ है। आपका किला तो वो किला है नहीं पहली बात से तो धर्मशाला बन गया, फिर जिसको आना है आ जा रहा है, जिसको जाना है चला जा रहा है। NOT OKAY। किला तभी रहता है, किले की इज्जत इसलिए होती है धर्मशाले के ऊपर। किले में दीवारें होती हैं और वो दीवारें सब कोई नहीं घुस सकता। दीवारों में जो अलाउड है, जिसके पास परमिट है, वही घुस सकता है। उसमें भी आउटर वॉल में कुछ लोग रहते हैं, इनर वॉल में जाना है, इनर कीप में जाना है, उसके लिए भी अलग परमिट चाहिए जो उस लायक है, हो जाएगा। अगर आपने ऐसेसे लेयर्स क्रिएट कर लिए अपनी लाइफ में, THINGS WILL BE BETTER। सब कोई आपकी एक ही लेयर में है। सब कोई आपकी इनर वाल में बैठा हुआ है। तो आपकी इनर वाल बहुत सस्ती है। फिर आपका कुछ बचा ही नहीं। धर्मशाला बन गया। और आप देखते हो कि अगर आप अपने घर।

में सबको बुला लोगे तो आप पाओगे कि आपने ऐसे ऐसे लोगों को बुला लिया है जिनको कोई तमीज नहीं है कि घर में कैसे रहते हैं। आप घर में किसी को तभी बुलाते हो जब आपको समझ में आ जाता है कि यार मेरे घर में रहेगा भी ये तो मेरे घर को ध्यान से रखिएगा। ध्यान रखिएगा मेरे घर का। आप बुला लोगे सबको तो फिर चिड़िया घर बन जाएगा आपका।

यही सेम चीज व्यक्तित्व के साथ भी है। किसी को भी आप घुसने दोगे आप मजाक बन जाओगे। फिर दिस इज देंस ऑफ मिस्ट्री। एडमिरेशन मेंटेन करना इन जनरल अगर आप बात कर रहे हैं तो यह डिपेंड करता है आप फ्रॉम पर्सन टू पर्सन। हर एक आदमी उसकी लाइफ में कोई चीज की कमी होती है उसे जिसको वह नीड करता है।

कोई लड़की है हो सकता है उसकी लाइफ में एक अथॉरिटी फिगर की कमी है। कोई लड़की है हो सकता है उसकी लाइफ में किसी ऐसे आदमी की कमी है जो कि उससे डीप कन्वर्सेशन कर पाए। कोई आदमी है हो सकता है उसके लाइफ में कोई ऐसे फिगर की कमी हो। जो कि उसे बता पाए कि दुनिया में कुछ चीजें जो हो रही है वो क्यों हो रही है। कैसे डील करना चाहिए। कोई आदमी है जो कि बहुत बोर्ड है। हो सकता है उसको किसी ऐसे आदमी की जरूरत है जो कि बस एंजॉय कर पाए उसके साथ मजे कर पाए। कोई आदमी बेचारा कमजोर है फिजिकली तो उसको ऐसे आदमी की जरूरत है जो उसे बता पाए कि ठीक है अपने आप को फिजिकली आप स्ट्रांग कैसे बना सकते हो।

आपको जब आप लोगों से मिलोगे तो लोगों के अंदर अलग-अलग वॉइड होता है। लोगों के अंदर अलग-अलग एक तरीके से गैप्स होते हैं। एंड दी पीपल आर लुकिंग टू फिल अप दोस गैप्स इन डिफरेंट वेज़। ऐसे में आपको यह कोशिश करना होगा। अगर आपको एडमिरेशन चाहिए आपको आइडेंटिफाई करना होगा कि व्हाट इज दिस पर्सन मिसिंग इन ह लाइफ एंड यू हैव टू एम्बॉडी दैट। कई बार आपको यह आइडेंटिफाई करने की जरूरत भी नहीं है। अगर आप एज अ मैन अपने आप को ऑन टॉप रख रहे हो गेम में तो इन जनरल लोगों के खुद की लाइफ में जो चीज मिसिंग रहती है आप उसे प्रोवाइड करोगे। आपका प्रेजेंस ही उसे प्रोवाइड करेगा। आपको किसी को कुछ देना नहीं पड़ेगा।

कोई आदमी अगर अपनी लाइफ में स्ट्रांग मैस्कुलिन फिगर लैक करता है। वो आप में उसे देखेगा। आपको एडमायर करेगा। कोई आदमी अपनी लाइफ में इंटरेस्ट को लैग करता है। बोर बोरियत है उसकी लाइफ में। आपकी बातों में वो इंटरेस्ट लेगा। इंटरेस्टेड होगा। कोई लड़की आज तक उसे कोई अथॉरिटी अथॉरिटी फिगर नहीं मिला। वो आपको देखेगी आपको एडमायर करेगी। कोई लड़की है जिसने ऐसी लड़कों से मुलाकात किया जो कि जिनकी अपनी कोई लाइफ नहीं है। वो बस सिंपिंग ही करते हैं। वो बस लड़की के पीछे ही भागते हैं। जब वो आपको देखेगी कि आपकी अपनी एक लाइफ है। आपकी अपनी एक मूवी है। वो आपको देख के एडमायर करेगी कि हां देखो यार यह लड़का जो है यह अपनी भी लाइफ की चिंता करता है। ही हैज़ ह ओन थिंग। ओके?

आपको एडममरेशन कैसे मिलेगा? इट डिपेंड्स फ्रॉम पर्सन टू पर्सन। लेकिन इसका एक जनरल रूल ये है कि अगर आप अपने आप को खुद सिर्फ अपग्रेड कर रहे हो हर मामले में तो अधिकतर लोग जो आप मिलेंगे आपसे वो ऑटोमेटिकली आपको एडमायर करेंगे। बिकॉज़ यू हैव समथिंग दैट दे आर मिसिंग। और जब लोगों के अंदर कुछ मिसिंग होता है और कहीं पर वो चीज मिलती है तो जैसे कि हम लोगों ने देखा था केमिकल बॉन्ड बनता है। इलेक्ट्रॉन्स जिसके पास मिसिंग है वो उसके पास जाता है जिसके पास इलेक्ट्रॉन्स देने को है। और जब इलेक्ट्रॉन्स का एक्सचेंज होता है, मिलता है, एक देता है, दूसरा लेता है तो एक बॉन्ड बन जाता है। फिर दोनों अटैच हो जाते हैं। वैसे ही आपके पास अगर कुछ है एनर्जेटिकली जो दूसरा लैग करता है वो आपके पास आएगा और वो आपसे अटैच हो जाएगा।

भारतीय जो विवाह संस्था है या इंडियन मैरिजेस है वो मुझे बड़े कॉम्प्रोमाइज लगते हैं। एक रियल लाइफ इंसिडेंट है। मेरे आसपास ही हुआ है। एक हमारा बंदा जो कि बड़ा स्वस्थ था। भारतीय जो बंदे अच्छे करके नहीं खाते पीते करके हम बोलते हैं भले उसको सिक्स पैक नहीं था या जो भी फिजिक नहीं था पर वो ऐसा ऐसा भी नहीं था कि उसकी बड़ी टोंद है और छोटे-छोटे वो गुजराती में हमारी एक कहावत है कि हाथ पग दोड़ी ना पेट गागर मतलब ऐसा नहीं था वो बेचारा स्वस्थ था जैसे वो कुश्ती में मल होते हैं उस प्रकार का उसकी एंगेजमेंट हुई लड़की किसी के साथ रिलेशनशिप में थी और लड़की किसी के साथ थी उसके कारण उसको यहां पे रिजेक्ट किया गया कारण ये दिया गया कि तू तो बड़ा मोटा है। पहले इसको गिल्ट में डाला गया। इसके आत्मविश्वास को, आत्मबल को खत्म कर दिया गया। मैंने बहुत समझाया इसको कि भाई तू ठीक है। ऐसे ही भारत में होते हैं लोग। तेरा स्ट्रक्चर ठीक है भाई। तो वो इतना उसके ऊपर सोसाइटी ने प्रेशर बनाया उसके ओबेसिटी नहीं था। वो बस खाते पीते करके जैसे मैं बोलता हूं भाई तंदुरुस्त इंसान होता है। वैसा था। तो उसने सर्जरी कराई अपना वो जो चर्बी निकालते हैं और उसके बाद जो कम खाते हैं कि भाई फिर ज्यादा खा ही ना पाए ऐसी सर्जरी हो रही है आजकल वो करवाया और अब जाकर के वो एक ऐसी दूसरी रिलेशनशिप में मतलब गया है उसके एंगेजमेंट हुई है जहां पे बड़ी ही टॉक्सिक महिला है जिसका रिकॉर्ड रहा है कि अपने शरीर का उपयोग करके अपने को ऑब्जेक्ट के रूप में उपयोग करके लोगों से फाइनेंशियली वेल्थ उनकी ले लेनी और फिर लोगों को डंप करना कोई भी वैल्यू नहीं है।

तो यह समझ नहीं पाते हैं बहुत सारे लोग। उनको इतना वो लो वैल्यू कर दिया जाता है सोसाइटी के द्वारा। ब्लूप्रिंट जो सोसाइटी का उसके द्वारा कि वास्तव में जो उसमें थी ही नहीं कमियां वो उसने मान ली और फिर ये दुष्ट चक्र में वो फंस गए और बहुत सारे ऐसे भी इंसिडेंट है मेरे आजू-बाजू हर रोज यहां से कोई जा रहा है शहरों में बच्चों को पटाने के नाम पे। बहुत सारे पेरेंट्स जा रहे हैं कि बच्चों की उनकी शादी हो जाए, एंगेजमेंट हो जाए क्योंकि उसका पैरामीटर ही है। इधर बड़ा ही उनका राजा जैसा जीवन था। सुकून शांति वाला किसानी में थे वहां पे जाकर के दोद शिफ्ट में काम कर रहे हैं। तो ये क्या माइंडसेट है? मतलब मैं तो बोलता हूं उनको कि भाई इतना अगर सब कुछ करके आपको लड़की मिलती है आपके बेटे को आपके कुलदीपक को लड़की मिलती है तो ये तो अपने आप को खत्म करने वाली बात है मतलब इतना ये करके नहीं करना चाहिए तो मैं इसलिए यहां पे पूछ रहा हूं कि यहां पे ये चीज रहे ऑनलाइन क्योंकि बहुत सारे लोग देख रहे हैं मेरे आसपास यह हो रही है चीजें इतना क्यों कॉम्प्रोमाइज कर रहा है भारतीय लड़का क्या मानसिकता है क्या दबाव है और कैसे इससे ऊपरे शादी का जो सिस्टम है हमारा अब वह सिर्फ एक बिजनेस ट्रांजक्शन की तरह है। फाइनशियल ट्रांजैक्शन आप उसमें जब भी बातचीत सुनोगे शादी की तो जो चीज मैटर करती है उसको छोड़ के बाकी हर चीजें बातें की जाती है उसमें। कितना आपका डिग्री कौन सा है आपके पास? कौन सा आप नौकरी करते हो? आप आपके घर में कितना गाड़ी है? कितना एसी है आपके घर में? आपके पापा के पास कितना जमीन है? यह सारी बातें होती है। लगता है बेच रहे हैं कोई सामान। यह कोई बिजनेस डील कर रहे हैं। मुझे काफी अटपटा लगता था बचपन से। एक होता है कि आप अवेयर हो जाते हो एक टाइम पे आके। पर मुझे बचपन से अटपटा लगता था कि शादी मतलब एक लड़का और एक लड़की शादी कर रहे हैं। यहां पर कितना जमीन है, कितनी गाड़ी है। ये तो बेचना हो गया। ये बेचना खरीदना हो रहा है यहां पर। दैट इज़ व्हाट इज़ हैपनिंग। लड़के और लड़के से रबर स्टैंप। इट इज़ जस्ट अ बिनेस ट्रांजैक्शन व्हिच इज़ हैपनिंग। लड़का लड़की बस स्टैंप लगा दिए गए उसके ऊपर कि इसी बहाने बिज़नेस ट्रांजैक्शन हो गया।

तो जब इतना ज्यादा ग्रीड है और इस ग्रीड को परंपरा के पीछे कल्चर के पीछे छुपाया जा रहा है। वर्चू के पीछे छुपाया जा रहा है। तो जो चीज सबसे ज्यादा मैटर करती है असली में शादी को चलाने के लिए कि लड़का जानता भी है फीमेल नेचर के बारे में कि नहीं। लड़के और लड़की के बीच में अट्रैक्शन मेंटेन हो पाएगा कि नहीं। कहीं लड़की का अतीत जो है वह कोई खतरनाक अतीत तो नहीं है। यह चीजें असल में मैटर करती है। यह मैटर नहीं करता कि लड़की के घर में कितना फ्रिज है। उसकी फ्रिज में कितना गाजर रखा हुआ है। वो मूली खाती है कि नहीं। लड़के घर में किस ब्रांड का दूध आता है। कितना एसी लगाई हुई है। वाशिंग मशीन कौन से ब्रांड का है? यह मैटर कम करता है। मैटर ये करता है कि लड़के को नंबर वन आईडिया है कि नहीं? नहीं हाउ टू डील विथ फीमेल नेचर। नंबर टू रिलेशनशिप में क्या अट्रैक्शन मेंटेन हो पाएगा और नंबर थ्री क्या लड़की का पास्ट क्लियर है? कोई प्रॉब्लम तो नहीं है अतीत में? कोई ऐसी चीजें तो उसने नहीं की है जो कि फ्यूचर में उसे दिक्कत करे। कई बार पागल आशिक भी बैठे रहते हैं। स्टैंड बाय पे एक्टिवेट होते हैं शादी के बाद। ये चीजें मैटर करनी चाहिए। लेकिन ये चीजें मैटर नहीं करती। यह बेवकूफों का दिमाग है। और यह सो कॉल्ड बड़े लोग उम्र में बड़े हो गए हैं। सोचते हैं बच्चों की तरह और मुझे तो ऐसा लगने लगता है कुछ कुछ पॉइंट पर क्योंकि दो दिन पहले मेरी एक ऐसे ही लड़के से बात हो रही थी। बहुत ही प्रेस्टीजियस इंस्टीट्यूशन से उसने एजुकेशन पूरी की है अपनी और उसको भी एक ऐसे ही ड्राइविंग में ढके धकेल दिया गया। शायद ही वही पता चला कि एक और आशिक है मैडम के बाहर। अब वो सफर कर रहा है। ऐसा मुझे फील होता है कभी-कभी कि मां-बाप ने बच्चों का साथ छोड़ दिया है। आपने जो एग्जांपल बताया कि लड़की का कहीं और कोई था। उसने बहाना मार दिया शरीर को लेके लड़के के। यह बहाना उसको समझ में आ जाता लड़के को कि अगर ये अचानक से बहाना मार रही है कि शरीर को लेके कुछ प्रॉब्लम है ये है वो है। उसको थोड़ी सी भी अवेयरनेस होती। अगर उसने ब्लू फिल्म में कनेक्शन रह के आंख मूंद करके समाज की बातें नहीं सुनी होती तो वो लड़की के उस इमेज को खुश करने के लिए जाके अपना ऑपरेशन वगैरह नहीं कराता। वो समझ जाता है कि रीज़ कुछ और है।

आपको ये समझना होगा कि कहीं पर भी अगर लड़की का कोई बाहरी चक्कर है शादी के टाइम पर भी कभी भी उसकी फैमिली अगर जान भी जाएगी तो वो इस चीज को बोलेगी नहीं क्योंकि उसको अपनी इज्जत की चिंता है। वो लड़के वालों को बेवकूफ बना देगी। वह लड़के वालों पर नाम भी लगा देगी, ब्लेम भी कर देगी। पर कभी इस चीज को एक्सेप्ट नहीं करेगी कि उनकी बेटी जो है उनका कहीं और बाहर चक्कर चल रहा है। इससे बदनामी होती है। इज्जत जो है जान से भी ऊपर है। ये चीज आप समझ जाए। खुद की जान की बात नहीं कर रहा। दूसरे की जान के ऊपर है। मतलब इनकी जो इज्जत है इनकी जान से नहीं। इनकी बेटी की जान से नहीं जिनसे बेटी की शादी हो रही है उस लड़के की जान से भी ऊपर है। अगर इज्जत को बचाने के लिए उस लड़के का जिंदगी नर्क बनाना पड़ा तो यह बना देंगे। ये लोग नाम भर के बस कल्चरल होते हैं। नाम भर के ये परंपरा फॉलो करते हैं। असल में ये बहुत ग्रीडी होते हैं। और लड़का जो है एवरेज उसको तो यही प्रोग्राम किया जा रहा है कि कोई लड़की अगर तुमसे शादी कर ले रही है तो एहसान कर रही है तुम्हारे ऊपर। अब वैसे तो करेगी नहीं यार। तुमको सबसे पहले बहुत सारा पैसा कमाना पड़ेगा। तुम जब बहुत सारा पैसा कमाओगे तब एक लड़की आकर तुम्हें एक तरीके से एहसान करेगी। तुम्हें मौका देगी यार देखो अब मैं डिसाइड कर रही हूं तुमसे शादी। अच्छा तुम मोटे हो यार। मैं तुमसे शादी नहीं करूंगी। और नाचो लाइक अ मंकी। अभी खुश नहीं हुई साहिबा। और सर्कस करो और परफस दो। अभी भी खुश नहीं हुई। और दो इस गेम में एक अच्छा खासा लड़का हंस के अगर वह मेंटली पहले सही भी है वह डिस्टर्ब हो जाएगा क्योंकि वो सोच रहा है कि जो सो कॉल्ड लोग उसके बहुत ही ज्यादा वेलविशर्स हैं वो उसको सही बातें बता रहे हैं और उनके लिए वो भागदौड़ कर रहा है। उन्हें खुद कुछ आईडिया नहीं है वो क्या बता रहे हैं। ऐसा लड़का अंत में जाके पागल ही हो जाएगा और वो सफर ही करेगा। जो चीज उसे सीखना था ना उसके पापा ने उसे सिखाया ना मम्मी ने सिखाया ना सीखने दिया जादुई बातों में उसको बिजी रखा मोटापे के लिए उसने तुमको रिजेक्ट कर दिया मोटापे से तो बात भी नहीं शुरू होती फिर मोटापे के लिए रिजेक्ट कर दिया मैंने एक एक्सपेरिमेंट दिया था अपने सब्सक्राइबर्स को कि आज जाना अपनी मम्मी पापा से पूछना कि देखिए मेरी शादी जो आप लोग कराते हैं और अगर ऐसा पता चल गया कि जो मेरी वाइफ है उसका कभी बहुत ही खतरनाक पास्ट है तो आप लोग क्या करेंगे? तो उन लोगों ने इतने अच्छे-अच्छे रिस्पों्ससेस दिए। उन्होंने बताया कि ऐसा होगा नहीं। हम ऐसी लड़की लेके ही नहीं आएंगे और वो अच्छी लड़की जो होती है उसका ऐसा कुछ नहीं होता। संस्कारी लड़की जो होती है उसका ऐसा कुछ नहीं होता। मैं कहता हूं तुम पता कैसे करते हो? कौन संस्कारी है? क्या माथे पे लिखा रहता है एस संस्कारी? ऐसे पता करते हो। ऐसी मैजिकल दुनिया में मां-बाप रह रहे हैं। मैं लड़कों से कहता हूं समझो कौन मैजिकल दुनिया में रह रहा है और अपनी तरह से सोचना मत शुरू कर दो। उनसे बहस मत करो। उनको मत बताओ कि तुम सो रहे हो। मैं तुम्हें जगाने आया हूं। लेकिन खुद को बचाओ। जिसको सोए रहना है सोने दो। तुम खुद को बचाओ। अगर तुम उसके बावजूद इस नशे में तुम भी आ जा रहे हो तो तुम उसी गेम में तुमको भी फेंका जा रहा है जिसमें बाकियों को फेंका जा रहा है। अपने आप को तुम खुद बचा सकते हो और तुम वो चीजें पा सकते हो जो अभी तुमको समाज बता रहा है बहुत मुश्किल है पाना और मतलब तुम नहीं मिलेगा और तुमको पतला होना पड़ेगा ये करना पड़ेगा वो करना पड़ेगा तुम वो भी पा जाओगे पर समाज के भरोसे नहीं लॉर्ड बीटाइजेशन ऑफ मेल वो मतलब स्कूल हो तब टीचर कर देती है। परिवार कर देता है। रिलेशनशिप में भी कर ही दिया जाता है। तो इससे कैसे बचे क्योंकि इससे पूरा एक पौरुष ही मारा जाता है। भारतीय पुरुष का पौरुष सबसे बड़ा इसी के कारण मारा गया। उसको मतलब सिस्टम शुरू से ही उसको डिपटाइजेशन कर ही दिया जाता है। कौन करते हैं? क्यों करते हैं? क्या है मानसिकता? और क्यों विक्टिम बन जाते हैं भारतीय पुरुष इसको? एंड गिव मी वन मिनट आई विल बी बैक इफ यू गिव मी। जरूर तब तक मैं एड्रेस कर लूंगा चैट को। ऑल राइट लेट्स टॉक चैट। लेट अस स्पीक अ लिटिल बिट।

प्रताप कह रहे हैं सोसाइटी रंस ऑन ऑटो पायलट वंड हर्ड मेंटालिटी। मोस्ट ऑफ़ पीपल आर नॉट अवेयर। यस इट दे वर्क इन अ फ्लो और यह चीज एक्चुअली बेनिफिशियल है। अगर सारा समाज हर्ड मेंटालिटी में नहीं रहेगा तो कोई सिस्टम काम नहीं करेगा देश में। दुनिया भर में कोई सिस्टम काम नहीं करेगा। देयर नीड्स टू बी अ फ्लो। ऑलराइट। तभी दुनिया स्टेबल रहती है। किसी का सैक्रिफाइस जरूरी है ताकि बाकी लोग बेनिफिट में रहे। यू नो किसी का सैक्रिफाइस जरूरी है।

कैन शम रक्सन कह रहे हैं आई कैन लिसन टू गोल्ड क्लाइड वॉरियर 247 अप्रिशिएट दैट।

अंकुल कुमार कह रहा है भाई अरेंज मैरिज में लड़की को देखते मिलते टाइम कैरेक्टर कैसे आइडेंटिफाई करें? प्लीज भाई रिस्पांस कीजिए गुरु भाई। अरेंज मैरिज में यह एक गैंबल है। नहीं कर सकते तुम आइडेंटिफाई। इट्स अ गैंबल। ऑलराइट। इट्स अ कंप्लीट गैंबल। क्योंकि तुमको कम से कम डेढ़ साल का टाइम चाहिए होता है कि तुम उसको फिगर आउट कर सको। लड़की को जान सको। अरेंज मैरिज एक ब्लाइंड गैंबल है। होप फॉर द बेस्ट फ्रॉम द गड्स।

इंटिमीडेटिंग दिखना बहुत ही जरूरी है। मैंने आपके वीडियोस भी सुना था और एक वीडियोस में तो आपने बताया था कि भाई एलिट वर्ग है, पोस्ट एरिया है, मेट्रोपॉलिटन सेटअप है। तो इस प्रकार के लड़के वहां पे डेटिंग में डोमिनेटिंग रहेंगे। फर्स्ट चॉइस रहेंगे। अगर रूरल रिमोट एरिया है तो वहां पे इस प्रकार के और फिर उसमें पूरा घटनाक्रम भी था कि इंटिमेटिंग दिखना क्योंकि अभी भी हमने चर्चा की कि भाई या तो आप शिकारी हो या तो शिकार हो जाते हो आप जंगल में हो तो जंगल में डेफिनेटली इंटिमीडेटिंग दिखना ही होगा वरना हम शिकार हो जाएंगे तो कैसे दिखे कैसे फ्रेम को सेट करें क्योंकि सब नहीं दिखते हैं और वह ना दिखने के कारण बहुत बार वह शिकार हो जाते हैं।

पहली चीज तो यह कि आपने बेटाइजेशन पे पूछा था सवाल। ये चीज वाइट ब्लैक एंड वाइट नहीं है। थोड़ा सा ग्रे एरिया है क्योंकि बेटाइजेशन इन जनरल जरूरी है सोसाइटी में आदमियों में करना। आप समझ पा रहे हो कि पोरिश को हेल्दी वे में चैनलाइज कैसे करें। कई लड़के समझ पाते हैं कि मैस्कुलिन बनना है और उसको हेल्दी रखना है। पर क्राउड यह चीज नहीं समझ सकता। अगर आप क्राउड को बेटा नहीं करेंगे तो क्राउड वायलेंट हो जाएगा। वो अपने पौरुष का इस्तेमाल करेगा डैमेज करने में, वायलेंस करने में, मारने पीटने में, लोगों को, नुकसान पहुंचाने में। आप ये चीज खुद देखोगे कि आप किसी एक एवरेज नर्ड को ले लो। आप 15 नर्ड्स को बैठा दो जिनको हर तरीके से बेटाइज किया गया है। उनको इतना ज्यादा बेटाइज कर दिया गया है कि अब वह अपने मैस्कुलिनिटी से नफरत करते हैं। वो इस चीज के लिए पछतावा महसूस करते हैं कि वो मर्द क्यों पैदा हुए। आपको उनके साथ बैठा दिया जाए। ऑन द अदर हैंड आपको 15 उन लड़कों के साथ बैठा दिया जाए जिनकी मैस्कुलिटी अनरिस्टेंड है। जिनको दबाया बिल्कुल भी नहीं गया है। आप उन नर्डो के साथ ज्यादा सेफ फील करोगे। आपको कोई ऑर्गेनाइजेशन चलाना है तो वह नर्ड जो है आपके ऑ्गेनाइजेशन को अच्छा चलाएंगे एस कंपेयर टू यह वाइल्ड आदमी प्रॉब्लम यह है कि बेटाइजेशन अगर ना हो तो आदमी जंगली हो जाता है। इट इज अ नेसेसरी इवल क्योंकि अपनी एनर्जी को कंट्रोल करना और चैनलाइज करना यह सबको नहीं आता। सबको नहीं आता कि कैसे एक हेल्दी वे में ट्रांसम्यूट करें अपनी एनर्जी को। कैसे अच्छे वे में लगाएं। तो सोसाइटी जो है अब जैसे कि आप देखते होंगे त्यहार होता है। त्यहार में कई सारे रेस्ट्रिक्शन होते हैं। हर जगह कैमरा लगा रहता है। पुलिस रहती है। पुलिस क्यों रहती है? इसलिए नहीं क्योंकि आप क्राइम कर देंगे। गिने चुने कुछ लोग क्राइम करते हैं वहां पर। पर उसका खामियाजा भुगतना पड़ता है सबको। सबको स्ट्रिक्ट रोल के अंदर रहना पड़ता है। रेस्ट्रिक्शन के अंदर रहना पड़ता है। 10 लोग मारपीट करते हैं। कर्फ्यू लग जाता है। दूसरे लोगों की क्या गलती थी? जिन लोगों ने मारपीट की उनकी गलती थी। कर्फ्यू लग गया। वैसे ही किसी भी जगह पर कोई क्राइम हो गया सबके लिए रूल बन जाता है कि नहीं आप पर वॉच किया जाएगा आप रेस्ट्रिक्टेड रहोगे आपकी चेकिंग होगी कहीं एक कोई क्रिमिनल घुस जाता है किसी एरिया में एक कोई आतंकवादी घुस जाता है सबकी चेकिंग होती है एकदम बराबर रूप से सोसाइटी जब भी देखती है कि कहीं पर हल्का सा भी रिस्क है कुछ लोगों की वजह से तो वो एक ब्लैंकेट मेजर लेती है सबके ऊपर सोसाइटी कहती है कि अगर कुछ लोगों के मर्द बनने से वह डेंजरस हो जाएंगे। तो सबसे अच्छा यह है कि सारे के सारे नामर्द हो जाए फॉर सेफ्टी। तो इट प्रायोटाइजेस स्टेबिलिटी एंड सेफ्टी ऑफ द सिस्टम ओवर इंडिविजुअल ग्रोथ। यही सेम चीज फायर आर्म्स के बारे में भी है कि भारत में अगर राइट्स दे दिया जाए लोगों को फायर आर्म्स रखने का तो जो सिविलाइज्ड आदमी है वह तो अपने प्रोटेक्शन के लिए रखेगा। पर कई सारे ऐसे हैं जो झुनझुनिया चौक के लिए यूज़ करेंगे। उसको हर सड़क पर पट पट पट चलता रहेगा दिवाली की तरह। यह भी तो एक प्रॉब्लम है। तो झुनझुनिया चौक करने वाले लोगों की वजह से एक जो इनोसेंट आदमी भी है जो कि एक प्रोडक्टिव आदमी है उसके पास भी फायर आर्म नहीं रहेगा और वो भी रिस्क में रहेगा मौत के। तो बेटाइजेशन इज अ नेसेसरी इवल जो कि सोसाइटी में होना चाहिए। लेकिन मैं कहता हूं सोसाइटी को करने दो। तुम उस बेटाइजेशन के पार्ट मत बनो। कई सारी चीजें, कई सारी ब्रेन वाशिंग जो सोसाइटी करती है या फिर लोग इलिट की बात करते हैं कि इलिट ब्रेन वाशिंग कर रहा है लोगों की। वो जो कर रहा है वो एक पर्पस से कर रहा है। वो पर्पस तुम्हारे बेनिफिट में भी है। मैं बस कह रहा हूं कि तुम उस ब्रेन वाशिंग के हिस्सा मत बनो। तुम उससे थोड़ा सा अलग अलग खड़े रहो। तुम होने दो ब्रेन वाशिंग। यू विल बी बेनिफिटिंग। लेकिन तुम अलग रहो। तुम

उसके भी हिस्सा बन जाओगे। तुम भी विक्टिम बन जाओगे। देन दैट इज अ प्रॉब्लम।

किसी भी ब्रेन वाशिंग से दूर रहने का बहुत ही आसान, बहुत ही सिंपल तरीका है। वह यह है कि अपने माइंड को इंडिपेंडेंट रखो। सोचो अपनी तरीके से। भीड़ की तरह मत सोचो। मॉब बनके मत सोचो। तुम जब तक अपने माइंड को इंडिपेंडेंट रखोगे, तुम ब्रेन वाशिंग से दूर रहोगे। कुछ नहीं होगा तुम्हें। यू विल नॉट बी द विक्टिम। एवरीवन एल्स विल बी।

दूसरी चीज इंटिमिडेशन। अगर आप जंगल में रह रहे हैं और अगर आप जंगल में हैं तो आपके पास ऑप्शन है या तो आप शिकार देखें या तो शिकारी शिकार देखेंगे। तो आपके साथ वही वाला शिकार वाला व्यवहार होगा। अगर आप शिकारी हैं तो शिकार आपकी रिस्पेक्ट करेगा। अब आपके पास ऑप्शन है कि आप शिकार को मारना चाहते हैं या नहीं। आपको यह ऑप्शन मिल जाता है। शिकार के पास ऑप्शन नहीं होता। शिकार के पास एक ही चॉइस होता है कि भागे वो अपने आप को बचाए। लेकिन जो हंटर है उसके पास चॉइस होता है। अगर हंटर अच्छा है तो आपको मारेगा नहीं। चॉइस देती है आपको पावर।

जितना ज्यादा समाज जंगल की तरह होगा, समाज जितना ज्यादा शो अनफिल्ड होगा। जितना ज्यादा समाज में स्टेट का कंट्रोल ढीला होगा, वहां पर उतना ज्यादा आपको खुद इंटिमिडेटिंग बनना होगा। और इंटिमिडेशन जितना ज्यादा जंगल टाइप सोसाइटी है, उतना ज्यादा फिजिकल फैक्टर जो है ज्यादा डोमिनेट करेगा आपके इंटिमिडेशन में। आपके अराउंड लोग जितने ज्यादा फिजिकली अग्रेसिव हैं, अगर आप फिजिकली स्ट्रांग दिखेंगे तो आप वहां बचे रहेंगे। अग्रेशन अलग तरीके का होता है। कुछ जगहों पर फिजिकल अग्रेशन ज्यादा होता है, कुछ जगहों पर मैनिपुलेशन, मेंटल अग्रेशन ज्यादा होता है। कुछ जगहों पर पॉलिटिकल अग्रेशन ज्यादा होता है। फाइनेंशियल अग्रेशन ज्यादा होता है। लेकिन इन मोस्ट प्लेसेस हैविंग अ फिजिक दैट इंटिमिडेट्स पीपल। दैट इज वेरी इंपॉर्टेंट।

और बाकी आपका जो नेचर है, एस आई सेड, फोर्ट्रेस होना चाहिए, किला होना चाहिए। आपके लेयर बाय लेयर अगर कोई आराम से आ जा रहा है तो आप धर्मशाला बन जाओगे और उस धर्मशाला की सब कोई इज्जत नहीं करेगा। तो आपको रिस्ट्रिक्शन्स लगाने पड़ेंगे अपने पर्सनालिटी में ताकि पीपल अर्न एवरी सिंगल थिंग, एवरी सिंगल एस्पेक्ट ऑफ योर पर्सनालिटी। दैट दिस सी इंटिमिडेशन इज व्हेन पीपल आर नॉट एबल टू फिगर यू आउट। अगर आप लोगों के साथ एकदम घुलमिल जा रहे हो तो उनमें से कई सारे लोग हैं जो अच्छे हैं, कई सारे लोग ऐसे हैं जो इल इंटेंशन के साथ हैं वहां पे। एंड दीज पीपल कैन बी डेंजरस।

दो घंटे से ज्यादा समय हो चुका है पर अगर आपकी अनुमति हो तो थोड़ा मैं चला क्योंकि फिर एक अंतराल के बाद ही आपको हम उस किले में मैं घुसने की कोशिश करूंगा। जरूर तो अगर आपकी अनुमति हो तो मैं थोड़ा चाहता हूं क्योंकि आज हो आप यहां पे तो वी वांटेड टू टेक मैक्सिमम बेनिफिट। अब्सोलुटली, अब्सोलुटली।

नेचुरल अल्फा और अवंडा एक तो होता है प्रकृति ने अस्तित्व ने उसको बनाया। बाकी जो अपने ऊपर काम करके बनता है। इसके दोनों के बारे में थोड़ा आपसे मिला मतलब विवरण चाहता हूं। और जो एक ब्लू पिल सभ्यता है वो नेचर सपोर्ट करती है। पर अगर बीटा अपने ऊपर काम करके इस लीडर में ऊपर जाने की कोशिश करता है, जागृत पुरुष हो के वो अल्फा बनने की कोशिश करता है तो उसके नकारने की कोशिश करते हैं। तो इन दोनों चीजों के ऊपर आपकी अभिवन चाहता हूं।

सोसाइटी जो है वो बीटा को अल्फाज़ बनने से रोकती है क्योंकि नेचर का जो रूल है कि ओनली द बेस्ट जीन शुड कंटिन्यू। लड़कों के मामले में रूल बहुत स्ट्रिक्ट है। नेचुरल अगर देखा जाए सोसाइटी के रूल्स को हटा दिया जाए तो बहुत ही कम परसेंटेज लड़के अपने जींस को आगे बढ़ा पाते थे। 15 टू 20% समटाइम्स 10% लड़कों का ही जीन आगे बढ़ता था और मोस्टली 90% से ऊपर लड़कियों का जीन आगे बढ़ता था। तो लड़कों को लेके ये नेचर का रोल बहुत स्ट्रिक्ट है। नेचुरल सिलेक्शन का। हम लोगों ने नेचुरल सिलेक्शन को किस तरीके से रोका? सोसाइटी बना के, कस्टम्स बना के, परंपरा बना के हम लोगों ने समाज बना के रोका नेचुरल सिलेक्शन को। हम लोगों ने कोशिश किया कि हम आर्टिफिशियल सिलेक्शन को इंट्रोड्यूस कर पाए।

लेकिन नेचर की जो फोर्सेस होती है वह काफी फॉर्मिडेबल होती है। नेचर एग्जिस्ट एवरीवेयर सिर्फ पेड़ों में नहीं है, पौधों में नहीं है, तालाब में नहीं है। वो हमारे अंदर भी है। मतलब यह है कि इन जनरल जो इंसान है वो नेचर के एजेंट्स है। और जो नेचर के एजेंट्स हैं वो नेचर के लॉ को इनफोर्स करने की पूरी कोशिश करेंगे। तो नेचर का जो रूल है कि जो नेचुरल अल्फा है उसी का जीन आगे बढ़ना चाहिए। इसको ना जानते हुए भी समाज के लोग इनफोर्स करते हैं। उनको पता नहीं रहता कि वह क्या कर रहे हैं। उनको पता नहीं रहता कि उन्हें क्यों चिड़ मच रही है। जब एक कमजोर लड़का जिम में जाकर अपने आप को मजबूत बना रहा है। उन्हें पता नहीं रहता कि उन्हें चिड़ क्यों मच रही है। जब एक ऑकवर्ड सा लड़का, एक शर्मीला सा लड़का लड़कियों से बात करने की कोशिश कर रहा है। उन्हें पता नहीं रहता उन्हें चिढ़ क्यों मच रही है। जब एक नर्वस सा लड़का कोशिश करता है कॉन्फिडेंट बनने की और उन्हें चिड़ मचती है। अब वह चिड़ के अकॉर्डिंग एक्ट करते हैं। यह पावर है नेचर की। वह लोगों का इस्तेमाल करता है यह कोशिश करने की कि बीटा जो है वो बीटा रहे। अल्फा जो है वो अल्फा रहे। यह डिमार्केशन मेंटेंड रहे ताकि ओनली द बेस्ट जींस आर मूव फॉरवर्ड। उसके ये फोर्सेस हर जगह काम करते रहेंगे। हम लोग बस कॉन्शियस होके हम लोग बस रेगुलेशन ला ला के सोसाइटी में उसको रोक सकते हैं। रेगुलेशन फिर भी जब ढीला होता रहता है तो ये रूल उतना ही ज्यादा वापस आते रहते हैं।

अब वेदर इट इज गुड और बैड ये आपकी मोरालिटी पे और आपके एक तरीके से परसेप्शन पे डिपेंड करता है कि आप क्या कुछ अनकंफर्टेबल ट्रुथ्स को लेके आप क्या उन्हें एक्सेप्ट कर सकते हो या फिर आप उनसे भागना ही चाहते हो हमेशा। दैट इज अबाउट नेचुरल सिलेक्शन।

जहां तक बात है नेचुरल अल्फा की और अवेकेंट अल्फा की आप ऐसा इमेजिन करो कि नेचुरल अल्फा जो है क्योंकि उसे शुरू से ये सारे ट्रेड्स उसके पास है। उसने कभी डेवलप करने की कोशिश उसने डेवलप करने की जरूरत नहीं पड़ी और ट्रेड्स के साथ जो बेनिफिट्स है वो भी उसको शुरू से मिलते आ रहे हैं। तो वो इन्हें कंट्रोल नहीं कर पाएगा। उसके अंदर इनहिबिशन्स नहीं होते। जो अवेकेंड अल्फा होता है वो ट्रेनिंग के साथ बनता है। मतलब वो एक सोफिस्टिकेटेड एक प्रोसेस फॉलो करता है धीरे-धीरे ब्रिक बाय ब्रिक अपने आप को बनाने के लिए। उसने क्योंकि कॉन्शियसली ये काम किया है तो वो दिमाग का भी इस्तेमाल करता है। वो अलर्ट रहता है।

इसका एक सिंपल सा एग्जांपल मैं देता हूं। अफ्रीका में कई सारे अफ्रीका में कई सारे वॉर लॉर्ड होते हैं। अफ्रीका में कई जगहों पर अभी सिविल वॉर चल रही है। अब ये वॉर लॉर्ड कोई प्रोफेशनल मिलिट्री ट्रेंड वॉर लॉर्ड नहीं है। यह जो है इनका परिवार का प्रोफेशन था। यह इनके पापा भी पहले वॉर लॉर्ड थे। अब यह भी बन गए। अब AK-47 ले कूद रहे इधर उधर और गोलियां चला रहे हैं। इन लोगों ने भी कईयों को मारा है। ये भी रूल करते हैं बड़े-बड़े टेरिटरीज में। ये वॉर लॉर्ड है। इनको युद्ध करने आता है। पर आप इनके लड़ने के तरीके को देखेंगे तो ये बंदूक को ले उछल रहे हैं। आपको देख के हंसी आएगी। इनके लड़ने के तरीके को देख के। जरा से भी प्रोफेशनल प्रोफेशनल तरीका नहीं है। पर ये रहे हैं उसमें। यह उस एनवायरमेंट में जिए हैं और यह नेचुरल बोर्न फाइटर्स है। यह पैदा हुए हैं उसके लिए।

लेकिन आप एक स्पेशल फोर्सेस की टीम को वहां पर उतार दो। ये 500 रहे स्पेशल फोर्सेस 20 रहे। आप उन स्पेशल फोर्सेस को उतार दो वहां पे। आप देख लोगे कि ये सब के सब खत्म हो जाएंगे। आप भेज दो। स्पेशल फोर्सेस वाले कौन है? क्या ये पहले से अल्फा थे? क्या ये पहले से बहुत ही ज्यादा हार्ड कोर थे? इनमें से कई सारे शुरू में नर् थे। एग्जाम इन्होंने क्वालीफाई किया। इन लोगों ने ट्रेनिंग को पास किया। इन लोगों ने दिखाया कि इनके अंदर भी एक पावर है जो खुद नहीं जानते थे वो। फिजिकली ये खुद नहीं जानते थे कि इतने टफ है। इनको बनाया गया। सेना ने इनको बनाया ऐसा। ये अवेकेंड अल्फा है। और जब ये जाते हैं क्योंकि इन्होंने सिस्टमैटिक तरीके से अपने को बनाया है। ब्रिक बाय ब्रिक। इनको पता है कहां पर लड़ना है, कहां पर पीछे हटना है। इनको पता है इनकी लिमिटेशंस क्या है। इनको पता है यह कहां पर कमजोर है। और इनके हर एक मूवमेंट में इनके हर एक मोशन में एक प्रोफेशनलिज्म है। ऐसा लगता है कि ये ट्रेंड है, ट्रेंड है।

इसी तरीके से जो नेचुरल अल्फा है, आप पाओगे कि वो आउट ऑफ कंट्रोल है। अगर उसको लड़कियां ही बहुत पसंद करती है तो वो लड़कियों के चक्कर में भी ट्रेवल में फस जाएगा। उसे यह तो दिखेगा कि लड़कियां उसकी तरफ आ रही है। पर वह कभी यह नहीं सोचेगा कि मैं लड़कियों की तरफ से जो फेक केसेस आते हैं, फेक एलगेशन आते हैं उनसे अपने को कैसे बचाऊं। मुझे किन बातों का ध्यान रखना है कि मैं सेफ रहूं इन चीजों से। नेचुरल अल्फा के अंदर अग्रेशन रहेगा और वो ये नहीं जान पाएगा कि हर मामले में अग्रेशन दिखाना अच्छी बात नहीं होती। कई बार या तो उसे जेल जाना पड़ेगा या तो वो नाली में पड़ा हुआ पाया जाएगा। नेचुरल अल्फा के अंदर उसको लगता है कि यार मैं शुरू से बहुत डोमिनेंट हूं। बहुत ही अल्फा हूं। कभी वो अपनी बोलचाल पर वर्क नहीं करेगा। उसको देख के फीलिंग आएगी कि यार यह बस बहुत ही ज्यादा वाइल्ड है और बातचीत से भी लग रहा है कि इसके ऊपर रिस्ट्रेंट नहीं है।

मीनवाइल जो अवेकेंड है उसने अपनी बातचीत को भी धीरे-धीरे सही किया है। अपनी कम्युनिकेशंस को भी उसने उसने ब्रिक बाय ब्रिक बनाया है। तो बोलने से भी लगता है कि हां रिस्ट्रेंट है इसके अंदर। इसके अंदर ट्रेनिंग है। तो आपके अंदर फिनेस कैसे आती है? जब आप ब्रिक बाय ब्रिक किसी चीज को बनाते हो। अगर आपको ऑलरेडी बना के दे दिया गया है तो आप सर्वाइव तो करते हो उसमें पर आपके अंदर इनहिबिशन्स नहीं होते। रिस्ट्रेंट नहीं होते। और दुनिया में अगर आपके अंदर स्ट्रेटेजिक पॉइंट्स पर रिस्ट्रेंट्स नहीं है तो आप रिस्क में पड़ सकते हो।

ब्रेवरी वॉर लॉर्ड के अंदर भी है। ब्रेवरी स्पेशल फोर्सेस ऑपरेटर के अंदर भी है। ऐसा भी हो सकता है कि वॉर लॉर्ड ज्यादा ब्रेव है। वो कूद जाएगा आग में। वो कूद जाएगा। जहां मार हो रही है वहां गोलियों के बीच में कूद जाएगा। आप वीडियोस देखोगे सामने से गोलियां चल रही है और उन गोलियों के सामने सब नाचते हुए जा रहे हैं बंदूक लेके तो ऐसा भी हो सकता है कि वॉर लॉर्ड और ज्यादा ब्रेव है। वॉर हिम्मती है और स्पेशल फोर्सेस वाला डर रहा है। तब भी जीतेगा स्पेशल फोर्सेस वाला क्योंकि वॉर में डरना यूजफुल होता है। वही आपको बचा के रखता है। आपको पता रहता है कि आप वीडियो गेम में नहीं हो कि आप फिर मरोगे दोबारा रिस्पॉन होके आ जाओगे। यहां पर एक ही चांस मिला है आपको। आपको अपना भी ध्यान रखना है।

जो आदमी फाइटिंग की ट्रेनिंग करता है, जिसने सही में ट्रेन किया है बॉक्सिंग वगैरह में वो पहले अपने को बचाने की कोशिश ज्यादा करता है। जिसने कभी ट्रेनिंग नहीं की पर वो सड़क पर लड़ता आया है। वो झुंझुनिया चौक करता आया है। वो पागलों की तरह लड़ेगा। उसके अंदर हिम्मत है। उसके अंदर बोल्डनेस है। पर जो डरपोक बॉक्सर है उसके सामने वो नहीं टिक पाएगा। यह रियलिटी है।

एक रील मैंने भी देखी, आपने भी देखी कि एक बिहार का है प्रवासन स्थल वहां पे एक महिला बैठी है और उसके ऊपर चार्जेस लग जाते हैं। आसपास लोग घेर लेते हैं। वही जिससे कि मॉब लिंचिंग हुआ है भारतवर्ष में बहुत बार वही चार्जेस उसके ऊपर बच्चे चुराने वाला। बड़ा ही थ्रेटनिंग था वो। हम अपेक्षा नहीं कर सकते हैं। मतलब कि भारतवर्ष में टूरिस्टिक स्पोर्ट पर इस प्रकार से कोई उस महिला की व्यवस्था मैं अनुभव कर पा रहा था, देख पा रहा था कि भाई क्या करें वो क्योंकि वो कितनी भी उछल कूद करके अपने आप को सही साबित करने की कोशिश भी करे तब भी जहां पे क्राउड ने ही तय कर लिया है कि भ तेरे को शिकार करना ही करना है। तो बड़ा मुझे ये थ्रेटनिंग लगा और कंसर्न भी लगा क्योंकि बहुत सारे फिर दूसरा मैं ये बरसाना की होली कीपि देख रहा था। बहुत सारी रील बहुत जगह पर जहां पर महिलाओं को उनके जो गुप्तांग है प्राइवेट पार्ट है वहां पर टच करने की कोशिश हो रही है ये सब हो रहा है तो प्रवास को लेकर के बड़े चिंता का विषय मुझे लगता है और थ्रेटनिंग भी लगता है क्या मानसिकता है क्योंकि आप कोई आया है आपके एरिया में उसके ऊपर फाल्स ये चार्जेस लगाते हो और वो विवशता फिर उस व्यक्ति की वहां पे और बिल्कुल भी अंदर पेट का पानी नहीं हिल रहा है। तो वैसे तो आपने पहले भी बोला कि भाई यहां पे कोई मोरल बोरल नहीं दिखाएगा कि भ तुम अच्छे हो। तुम क्या फील कर रहे हो? वह तो शायद मैंने फील किया या हम फील करते थे संवेदना के तल पे। पर ये पूरा फिनोमिनन क्या है? मतलब ये जो कि भाई उस टूरिस्ट के ऊपर ये चार्जेस लगा दिए गए और फिर उसको बहुत जगह पे ये हो रहा है। व्हाट इज द मेंटालिटी बिहाइंड ऑफ मॉब?

पहली चीज तो यह कि अगर आपको कोई ऐसा मॉब सराउंड किया हुआ है तो यह चीज पहले आप समझ जाओ क्योंकि मैंने कुछ बेवकूफों को देखा वहां कमेंट में वो ये कह रहे थे कि देखिए वो तो बच्चे के गायब होने पर परेशान है। बहुत सारे बच्चे गायब हो रहे हैं इसलिए वो परेशान है। बच्चे गायब होने परेशान नहीं है। उनको मौका चाहिए था किसी को घेरने का और अपना फ्रस्ट्रेशन निकालने का। मॉब कभी जस्टिस के लिए खड़ी नहीं होती। मॉब देखती है कोई कमजोर है, कोई अकेला है, उसको घेर लेते हैं और मारते हैं उसको बस। उसका यही नेचर होता है। मॉब इस नॉट अबाउट जस्टिस।

दूसरी चीज यह है कौन वो भीड़ है। मुझे कोई रैंडम एरा वगैरह आके बोलने लगेगा अपना आधार कार्ड दिखाओ। मैं क्यों दिखाऊंगा तुम हो कौन? तुम पुलिस वाले हो। तुम कोई ऑफिशियल हो। तुम हो कौन? लोग उस लड़की को ब्लेम कर रहे थे जो कि मॉब के द्वारा घिरी हुई है। उसको खतरे में है। ऑब्वियसली उसको हाथ भी लगाया जा रहा है। और लोग कमेंट में लड़की को ब्लेम कर रहे थे कि तो आधार कार्ड मांग रही थी तो दिखा देती। मैं कह रहा हूं वो है कौन कि आधार कार्ड उसे दिखाएगी वो। ऐसे तो एरा कोई भी तब पुलिस वाला बनने लगेगा देश में। वो घर में घुस जाएगा। कहेगा मुझे तलाशी लेनी है तुम्हारे घर की। मुझे लग रहा है तुम्हारे घर में मेरा बच्चा है। ऐसे तो समाज घुस जाएगा आपके घर में। तो कई सारे बेवकूफों को मैंने देखा जो कमेंट में इस चीज को जस्टिफाई कर रहे थे और मैं बता देता हूं। इन सब ने अभी एक्सपीरियंस नहीं किया है मॉब को। यह जो इस चीज को सपोर्ट कर रहे हैं जस्टिस के नाम पर और अच्छी बातों के नाम पर इनके घर में जब मॉब घुसेगी इनको जब मॉब घेरेगी या फिर इनकी बीवी को घेरेगी इनके परिवार को घेरेगी तब ये रियलाइज करेंगे कि ये कितनी होरेफिक चीज है। मॉब कभी भी किसी अच्छे पर्पस के लिए इकट्ठी नहीं होती। मॉब हमेशा किसी एक कमजोर को पकड़ के उसको काट खाने के लिए इकट्ठी होती है और बहाना खोज लेती है कुछ।

कई सारे राज्यों में एक के बाद एक टूरिस्टों को मार दिया गया मॉब के द्वारा इसी एक्विजिशन के चलते कि बच्चा चोरी करके जा रहे थे। कोई बच्चा चोरी नहीं किया उन्होंने। एक जगह पर क्या हुआ? दो टूरिस्ट आए थे गाड़ी से। उन लोगों ने बस वहां के लोकल लोगों से रास्ता पूछ लिया। और पता नहीं ऐसा क्या हो गया कि लोकलों ने उनको लिंच कर दिया कि सब बच्चा चोरी करके ले जा। सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह है कि जब ऐसा कोई इंसिडेंट होता है तो यह लिंच करने वालों को लटकाया नहीं जाता। अगर इनको लटकाया जाना शुरू कर दिया जाए वो भी तुरंत स्फ्टली। क्योंकि ये सीरियस प्रॉब्लम है। अगर ये प्रॉब्लम फैलती गई तो केओस हो जाएगा। एनार्की हो जाएगी समाज में। कोई भी कहीं भी मॉब बनाकर खड़ा हो जाएगा और बहुत बड़ा प्रॉब्लम हो जाएगा सिस्टम के लिए और यह ऑनर के मामले में भी आप कह सकते हो बहुत ही डिसऑनरेबल चीज है कि 50 लोग 20 लोग एक को घेर के काट खा रहे हैं कुत्तों की तरह है ना तो सरकार को पहली बात जो इनफोर्समेंट मैकेनिज्म है वो करना चाहिए था कि जितने ये मॉब वाले हैं उनको लटकाना चाहिए था और ऐसा उन्होंने प्रोविजन बनाया भी है नए वाले क्रिमिनल कोड में मेरे ख्याल से उम्र कैद की सजा या फिर डेथ पेनाल्टी भी है। बट दैट इज नॉट वै स्फ्ट।

एक वायलेंट मॉब को सिर्फ एक वायलेंट रेपरकशन ही डिटर कर सकता है। वरना कोई भी है इसके अंदर थ्रेट। मतलब एनीवन कैन कम अंडर द थ्रेट ऑफ द मॉब। वो औरत वहां किसी से कुछ नहीं कर रही थी। वो अपने बिजनेस से शी वास माइंडिंग हर ओन बिनेस। कोई चुपचाप नदी पार कर रहा है। उसके अराउंड लोग आ जा रहे हैं। कह रहे हैं अपना यह दिखाओ, आधार कार्ड दिखाओ, अपना बैग दिखाओ। वो तो सिंपली बोल रही है कि मैं तुम्हें क्यों दिखाऊं और एक सेकंड में दो सेकंड में मॉब इकट्ठा होता है। अब वो इकट्ठा हो जा रहा है। आप हेल्पलेस है। आप किसको बुलाएंगे वहां पे? यू आर हेल्पलेस। नाउ द मॉब विल डू व्हाटएवर इट वांट्स टू डू विथ यू।

मॉब कभी भी कोई बहाना बनाता है तो ये थोड़ी कहता है कि मैं तुम्हें मारने आया हूं। वो कहता है कि अच्छा तुम मुझे ये कर रहे थे। तुम मुझे देख रहे थे। मैंने देखा तुम इस लड़की को देख रहे थे। अरे तुम उस बच्चे को चोरी करके ले जा रहे थे। मैंने देखा अरे तुम तो ये हो। तुम तो वो हो। कोई ना कोई वो आरोप लगाता है। आरोप जानबूझ के लगाता है ताकि वो आरोप यूज़ कर सके। आपको टारगेट कर रहे थे। सैड बात यह है कि कोई भी ऐसा ग्रुप देश में इस प्रॉब्लम के बारे में चिल्ला के उतना बात नहीं करता है। हम लोग कुत्तों के बारे में ज्यादा बात करते हैं। स्ट्रीट डॉग्स जो है उनको मत हटाओ और उनके लिए प्रोटेस्ट हो जाता है। पर ये जो फिनोमिनन है पांच छ सेकंड में एक बड़ी मॉब का इकट्ठा हो जाना और घेर लेना किसी को। और फिर वायलेंस होना यह बहुत ही सीरियस चीज है और इसके कोई बात नहीं करता। जब बात होती भी है तो होती है एक दूसरे की पार्टी को टारगेट करने में कि उस पार्टी के अंदर होता था हमारे पार्टी में नहीं होता है। इस पार्टी में पहले होता था अब नहीं होता है। होता सब में है। होता हर राज्य में है। हर जगह हो रहा है। बट व्हाट इज हैपनिंग इज दैट इट इज बीइंग यूज्ड एज अ पॉलिटिकल मुद्दा टू राइल अप पीपल। इट इज नॉट बीइंग सॉल्व।

इसका सॉल्व करने का एक ही तरीका है। स्वफ्ट कैपिटल पनिशमेंट ऑफ एवरीवन हु इस इनवॉल्व इन दैट मॉब। हर किसी की हिम्मत नहीं होगी। आप अग्रेसिव जो है जो वायलेंट है, जो हिंसक है आप उसको हिंसा से ही शांत कर सकते हो। आप उससे बातचीत नहीं कर सकते। आपने खुद वीडियो में देखा कि वो औरत इतने एजुकेटेड तरीके से, इतने सभ्य तरीके से बात कर रही थी। सामने वाले उसे गाली दे रहे थे। है ना? उसे थ्रेटन कर रहे थे, धमकियां दे रहे थे। आप नहीं कर सकते रैशनलाइज इन लोगों से और जब भी ऐसा होता है आप तो खैर अपना बचाव नहीं कर सकते। एटलीस्ट स्टेट के पास यह रिस्पांसिबिलिटी है कि वो यह कॉन्फिडेंस बनाए भारत के प्रोडक्टिव लोगों में, भारत की जनता में कि कभी ऐसा फिनोमिनन अगर होता है को लोग घेर लेते हैं तो ऐसे में आपका बचाव होगा और जो भी परपेट्रेटर है उसके साथ तो ऐसा सजा होगी उसकी कि वो एग्जांपल बन जाए दूसरों के लिए। ऐसा होना चाहिए दी थिंग्स वर्क। पहले के टाइम में राजा बेवकूफ नहीं थे कि ऐसी सजाएं देते थे। कम से कम लोग डर के रहते थे कि ऐसे काम ना करें अपने फेलो सिटीजन के साथ। वरना कोर्ट वगैरह तब किसी काम की नहीं है। अगर सड़क पे ही मॉब ही सब कुछ सारा सुनवाई कर देगी कि कौन बच्चा बच्चा चोर है और कौन ये चोरी कर लिया वो चोरी कर लिया। और क्लियर दिख रहा है आपको उस वीडियो में कि यह बहाना है पर उससे भी ज्यादा निराशाजनक चीज मुझे दिखी कमेंट सेक्शन में कई सारे सो कॉल्ड एजुकेटेड लोग ये कह रहे थे कि तो बहन दिखा देती ना आधार कार्ड बहन वो सब ऐसे नहीं बोल रहे हो वो बच्चा सही में चोरी हो रहा है इसलिए सब बोल रहे हैं।

तो मैं क्या करूं? मैं कर रहा हूं चोरी वहां पर। प्रॉब्लम तुम लोगों की है। तुम्हारे यहां जो कानून व्यवस्था है वो खराब हो रही है। मैं आया हूं बाहर से। तुम मुझ पर उतरोगे उसका गुस्सा। तुम लोग असली में बच्चों को नहीं खोज पा रहे, बचा नहीं पा रहे। तुम बच्चा चोर को नहीं पकड़ पा रहे। अब तुम इतने पागल हो चुके हो, इतने फेरल हो चुके हो कि जानवरों की तरह हंट कर रहे हो हर एक इंसान को। कि अरे ये बच्चा चोर है, इसको मार दो। ये बच्चा चोर है, उसको मार दो। ऐसे यूरोप में होता था मध्यकाल में। किसी भी औरत को विच बोल के, चुड़ैल बोल के जला दिया जाता था। मध्यकाल में होता था, समझ में आता है। हमारे हमारे यहां मध्यकाल क्यों चल रहा है 2026 में? तो जो मध्यकाल में रह रहा है, मेरे हिसाब से उसको मध्यकाल वाली सजा होनी चाहिए। उसको मॉडर्न ह्यूमन राइट्स बेस सजा नहीं होनी चाहिए। आप मध्यकाल में रहिए। आपके साथ ट्रीटमेंट वही होगा। मेडिवल पनिशमेंट फॉर मेडिवजेस। दैट इज व्हाट आई आस्क फॉर।

इन जनरल एक बहुत बड़ी गलती है लोगों के बीच में। पीपल टॉक अबाउट मोरालिटी। मॉब घेर लेगा, लोग कहेंगे क्यों तुमने मारा इसको? तुम लोग को मारना नहीं चाहिए था। अरे वो बच्चा थोड़ी चुरा रही थी। इन लोगों को ये नहीं समझ में आता कि मॉब को पता है ऑलरेडी। मॉब आई है दूसरे पर्पस से। उसके अंदर एक तरीके का वायलेंट अर्ज है, ब्लड लस्ट है और उसको वो पूरा करना है। वो सोचती नहीं कि ये क्या सही है, क्या नहीं सही है। लोगों को मॉब का मैकेनिज्म समझना होगा क्योंकि इट इज बिकमिंग मोर एंड मोर कॉमन नाउन। आप आपके सामने जब मॉब आ जाए, आपका सारा एडवांटेज खत्म। फिर आप एक वो 20 अब चांस भी नहीं रहता लड़ने का। कोई ऑनर नहीं, कुछ नहीं। एक होता है कि आपके पास डिफेंड डिफेंस करने का चांस होता है। व्हेन मॉब्स सराउंड्स यू यू लूज दैट चांस।

बेसिकली रिलेशनशिप में कुछ बार लोग चले जाते हैं और फिर धीरे-धीरे इनको पता चलता है कि जिनके साथ ये रिलेशनशिप में है वो ऐसे नहीं है जैसे उन्होंने सोच के। ब्लैकमेलिंग हो जाता है। लड़कियों का भी होता है, लड़कों का भी होता है। पता भी चल जाता है कि साला फंसे। आत्मा खत्म हो रहा है, ऊर्जा खत्म हो रही है, समय खत्म हो रहा है, चेतना खत्म हो रही है। पर निकल नहीं पाते। डर लगता है कि कुछ-कुछ बार थ्रेट ऐसे होते हैं कि अगर आपने बंद किया, आपने मुझे पोस्ट किया, डिलीट किया तो मैं अपने आप को खत्म कर दूंगी, खत्म कर दूंगा। या तो अन्य प्रकार के जो भी थ्रेट। इस प्रकार की सिचुएशन में अपने आप को कैसे बचाया जाए क्योंकि बहुत कंफ्यूजन के स्टेट में होते हैं ये लोग। एक तो इनको लगता है कि अगर नहीं निकलेंगे तो भी मरेंगे क्योंकि वहां पे तो जब आपको पता ही चल जाता है कि अब वहां पे वो मॉन्सर बन चुका है आपका साथी संगी प्रेमी प्रियतम जो भी है तो निकलना भी है और निकलेंगे तो वो डरते हैं। तो बहुत सारे ऐसे लोगों को मैं देखता हूं वहां रहते हैं वो। व्हाट क्योंकि वो रिलेशनशिप एडवाइजर के पास जहां पे जाते हैं और मैं देखता हूं यहां पे ब्लू कंटेंट बनाने वाले बहुत सारे वो तो उल्टा फंसाने की बात करते हैं। मैं ऐसे बहुत सारे चैनल्स या लोगों को सुनता हूं जस्ट बिकॉज़ ऑफ माय क्यूरियसिटी। तो उल्टा तो उनको वो ऐसी एडवाइस देते हैं कि वो वहां पर फंस के रह जाए या तो अपना हार्म कर ले कि वो सोरे फिनोमिन। आई वांट प्योर एडवाइस लॉट रिगार्डिंग इट।

जैसे कि मैंने इससे पहले बोला था कि आपके किले के कई सारे लेयर्स हैं। कई सारे वाल्स हैं। धीरे-धीरे लोग अंदर आते हैं। यही सेम चीज रिलेशनशिप में भी होती है। प्रॉब्लम यह है कि लड़कों में स्पेशली लड़के जैसे ही गर्लफ्रेंड बनाते हैं तो पहले दिन से ही, पहले हफ्ते में शादी वगैरह सब डिसाइड हो जाती है। अब मेरी यह बीवी ही बनेगी। शादी वगैरह सब कुछ। मेंटल अटैचमेंट इतना ज्यादा इनका हो जाता है कि अब मतलब मुझे प्यार हो गया इससे, अब यही सब कुछ है। पहले हफ्ते के अंदर। दिस इज हाउ क्विक दे आर टू फॉल इन लव। जोकि करना यह चाहिए कि आपको सबसे पहले इवैल्यूएट करना चाहिए। चलो ठीक है, देखते हैं कहां तक जाता है रिलेशनशिप। अभी देखते हैं, अभी देखते हैं। अच्छा ठीक है, एवरीथिंग इज गोइंग वेल, देखते हैं, वॉच करते हैं। समय बीत रहा है, छ महीने बीते, हम अच्छी चल रही है चीजें, मुझे कोई अभी तक दिक्कत नहीं दिखी। साल भर बीता है, हम चीजें अच्छी चल रही है। जाके दो साल कम से कम हो जाए तब आप डिसाइड करें कि हां यार, अब मैं इससे अटैच हो सकता हूं। अब मैं इससे एकदम शादी के बारे में सोच सकता हूं। अब मैं इसको सीरियसली ले सकता हूं। यह जो आपने इतना लंबा टाइम दिया, यह इवैल्यूएशन पीरियड था। इस बीच कोई दिक्कत आती, आप आराम से छोड़ देते। आपको लगता है कि ये लड़की पागल है। आपको लगता है कि कुछ और दिक्कत है इसके अंदर। कोई और आप पर चीट कर रही है। आप आराम से छोड़ देते क्योंकि आपने पहले हफ्ते में ये डिसाइड नहीं कर लिया कि ये आपकी बीवी है। आप तुरंत ही नहीं जाके एकदम अटैच हो गए। ये बेवकूफी होती है। यू आर लेटिंग समवन इनू योर लाइफ और आपने सीधे जाके उसको अपने पूरे सटम में डाल दिया। इसने आपको ये श्योरिटी दी कि एवरीथिंग विल बी फाइन। अगर आप एकदम अंदर उसको घुसने दोगे एक ही बार में। तो सबसे पहले इट हैज़ टू बी ग्रेजुअल। यू हैव टू सी क्योंकि है वह बाहर की लड़की। आप उसे जानते नहीं हो। लड़की भी जब देख रही है तो वह जान रही है कि है वह बाहर का लड़का। आप उसे जानते नहीं। यू गिव अ टाइम। आप तुरंत ही पहले अटैच हो जाओगे तो आपका खेल खत्म है। क्योंकि लोग बदल जाते हैं या फिर लोग बदलते नहीं। लोग बेसिकली अपने असली जो व्यक्तित्व है उसको छुपा के रखते हैं कुछ समय तक। फिर वो असली व्यक्ति तो बाहर आ जाता है। जब बाहर आ जाता है तब तक आप इतने अटैच हो चुके हैं पहले ही हफ्ते में कि अब छोड़ने से डर लगता है और तब लगता है कि अब तो खत्म हो जाएंगे यार, छोड़ देंगे।

एस्पेशली लड़कों के अंदर इतना सेल्फ रिस्ट्रेंट होना चाहिए कि लड़की जो है उनके अटैचमेंट को अर्न करे। एक लड़के को एक लड़की से तभी बोलना चाहिए कि मैं तुमसे शादी करूंगा। बाप रे बाप रे। जब लड़की सही में अर्न करे उसके इस अफेक्शन को। तुम बिना उसके अर्न किए तीन दिन में ही कह दे रहे हो अरे बाप रे, मैं तुमसे बहुत अटैच हो चुका हूं। व्हाट डड शी हैव टू उसको तो कुछ करना ही नहीं पड़ा इसके लिए। तुम तो फ्री में अटैच हो गए। तुम देखो उसका एफर्ट कितना है। तुम देखो उसका अटैचमेंट, उसकी वैल्यू कितनी है इस रिलेशनशिप में और धीरे-धीरे उसे अपने अटैचमेंट का रिवॉर्ड दो। अब इस फ्रेम में तो एक एवरेज लड़का सोचता भी नहीं कि मैं लड़की को रिवॉर्ड कर रहा हूं। उसके लिए लड़की एक रिवॉर्ड है। अगर मैं यह कहूं कि तुम इस फ्रेम में देखो कि यू आर द वन हु इज द प्राइस और तुम अलऊ कर रहे हो लड़की को अपनी लाइफ में रहने के लिए। ऐसा तो अधिकतर लड़के सोच नहीं सकते। क्योंकि इसी तरीके की सोच में आपके पास पावर है। इनफैक्ट लड़की भी चाहती है कि आप ऐसे सोचे। आप एकदम सस्ते ना बन जाए। तो उसका यही सोचता है कि आप ऐसे सोचे कि आप बोलती वो बोलती नहीं इस बात को। बोलती उल्टा है कि मुझे चाहिए कि एक लड़का जो कि जिसकी कोई स्पाइन ना हो, जो कि ऐसा रहे वैसा रहे। अंदर ही अंदर वो चाहती है कि नहीं आई वांट अ मैन हु इस हेड स्ट्रांग वि अ स्पाइन। पर ये बहुत मुश्किल है। अब ये चीज आप अक्सर लड़कों को बताओगे वो कहेंगे ये क्या, ये तो होता भी है क्या? ये तो पॉसिबल नहीं है। वो चाहती है कि कोई सिम पकोड़े पे चढ़ के ना आए। मेरे सपनों का राजकुमार कोई अल्फा ही आए। सिम से लड़कियों को फायदा होता है। सिम से लड़कियों का सेल्फ एस्टीम बढ़ता है। तारीफें करता रहता है। सिम तो अच्छा लगता है। किसी को भी अच्छा लगेगा। अगर आप अपना मैसेज खोल रहे हो और देख रहे हो 500 लोग तारीफ कर रहे हैं आपकी तो आपका सेल्फ एस्टीम बढ़ेगा। पर आप उन सिमो को चाहोगे नहीं। लड़कियां सिमो की इज्जत नहीं करती। सिमो को अप्रिशिएट करती है कि हां चलो ठीक है, तारीफ कर रहे हैं, फ्री में। रिचार्ज करा दे रहे हैं मेरा। पैसे खर्च कर रहे हैं मेरे ऊपर। और उन्हें वो सिम चाहिए नहीं। एज अ लवर। सेल्फ एस्टिंग बूस्टर एस अ लवर। एस अ लवर उनको वो चाहिए जिसके लिए वो लड़कियां सिंपिंग करें। ये भी बात सिम सोच के अरे पागल हो जाएंगे। अरे लड़कियां भी सिंपिंग करती है क्या?

सिंपिंग से मुझे याद आया लॉर्ड कि जो बेचारे सिंपिंग छोड़ के अपने अधिकार के लिए खड़े रहने चाहते हैं। लड़के या थोड़े मतलब टफ होने की कोशिश करते हैं। वास्तव में पौरुष होना चाहिए। पोष वही है मैस्कुलन एनर्जी। मिसोजेनिस्ट बोला जाता है मतलब आप तो ये बहुत बड़ा और वो फस जाते हैं। उनको पता है उनका आत्मा बोल रहा है, इंस्टिंक्ट बोल रहा है, प्राइमल सब कुछ बोल रहा है कि नहीं नहीं यार, ये कुछ मैं गलत तो नहीं कर रहा हूं। मैं तो किसी को दबा नहीं रहा हूं, बस मैं अपने अधिकारों की रक्षा कर रहा हूं कि मुझे कोई सिंपिंग ना करवाए या मुझे सिंप ना बनाए। तो ऐसे में क्योंकि बहुत मैं देख रहा हूं मेल भी है, लड़के भी है क्योंकि उसको कैंसिल कर देंगे। बहुत ही सिंपल इसका रीजन। सिंपल रीजन कि बेटा मेल को अल्फा मेल नहीं बनने देना है। नेचर का यह आर्डर है। पहले के टाइम में आप हथियारों का इस्तेमाल करके, डंडे मार के ये ऑर्डर को आप इनफोर्स करते थे। अब सभ्य समाज हो गया है। तो अब शेमिंग करते हैं। अगर एक लड़के को मैं सिर्फ इतना बोल के मिसिस्ट बोल के डरा सकता हूं। डरने मारने की जरूरत नहीं है। नेचर का जो रूल है बेटा को बेटा ही रहना है और अल्फा को अल्फा, बेटा को अल्फा नहीं बनने देना है। यह चीज बस इनफोर्स करना है किसी भी तरीके से और सबके अंदर कहीं ना कहीं एट अ सबकॉशियस लेवल यह ऑर्डर चलता रहता है। इसलिए आप पाओगे कि आप जो कह रहे हो मिसजेजनिस्ट, एक लड़की जो कि गुजरात में रहेगी वो भी यही सेम भाषा बोलेगी जब सिम चेंज होने लगेगा। एक लड़की जो कि यूपी में रहेगी वो भी यही सेम भाषा बोलेगी। एक लड़की जो कि अमेरिका में रहेगी वो भी यही सेम भाषा बोलेगी। जब देखेंगे कि सिम अपने लिए खड़े हो रहे हैं। एस अ हाई माइंड लगता है कहीं से आर्डर आ रहा है और सिर में वह फीड हो रहा है और उसके चलते वो बोल रही है सेम भाषा, सेम तरीके से बोलने का तरीका, सेम इमोजीस। एस इफ इंशन इस बीइंग फेट टू देम फ्रॉम समवेयर एल्स। ये नेचुरल फर्सेस है जो कि हर एक आदमी के अंदर एज एन इंस्टिंक्ट एक्सिस्ट करते हैं।

फिर आप लड़कों को भी देखते हो कि लड़के भी इसी चीज को ज्वाइन कर लेते हैं। लड़कों का यह है कि भाई हम बेटा है। दूसरों को ही बेटा रहना चाहिए। उनको खींच के रखना है अपनी तरह। वहां सोशलिज्म ऑफ मिजरी भी आ जाता है। और एक और एंगल रहता है कि अगर मैं लड़कियों को दिखा दूं कि आपके लिए मैं अपने मर्द समाज सुकारी दे सकता हूं। तो लड़कियां सोचेंग वाह यार, इतना अट्रैक्टिव है यार। अरे बाप है। मैं तो फ्लैट हो गई इसके ऊपर। इधर सिंपिंग कर रहा है मेरे लिए। मैं तो फ्लैट हो गई। लड़के सही में ऐसा मानते हैं कि अगर वो मसीहा बन जाए इस टाइप इस टाइप के तो लड़कियां इस चीज से अट्रैक्ट होती है। लड़के को खुद पता होता है कि वह जो रियलिटी है उसका उल्टा बोल रही है। और जब वह देखती है कि ये बेवकूफ लड़के उस उल्टी रियलिटी को सपोर्ट करने आ जाते हैं जो कि एट द एंड ऑफ द डे उन्हीं को खराब करेगी, उन्हीं को डिस्ट्रॉय करेगी तो ये लड़कियां भी समझ जाती है कि ये तो सबसे ज्यादा निकृष्ट है। मतलब मुर्गियां बोलना शुरू कर दे कि हमें कसाई पसंद है। काटो हमें। कसाई भी कहेगा यार, ये तो बड़े स्पेशल कैटेगरी की मुर्गियां है यार तो मेरा ही सपोर्ट कर रही है। इन्हें पता नहीं है कि मैं नहीं काटने वाला।

डिफरेंस बिटवीन ब्लू फिल स्पिरिचुअलिटी एंड रेड फिल स्पिरिचुअलिटी। बिकॉज देयर आर टू टाइप्स ऑफ़ ओन नेम ऑफ़ सनातन वन नेम ऑफ़ 7000 ईयर ओल्ड सिविलाइजेशन एंड ऑल टाइप्स ऑफ स्पिरिचुअल प्रैक्टिस इन बिटवीन। यू से लॉर्ड आदि शंकराचार्य। सो आई हैव बिकम वै क्यूरियस रिगार्डिंग दिस। जी जी। ग्लोबल स्पिरिचुअलिटी जो है वो लोग एस्केपिज्म के लिए यूज़ करते हैं। ग्लोबल स्पिरिचुअलिटी बहुत ही ज्यादा लिमिटेड रहती है। वो लिमिटेड रहती है कि माया जो है वो इरिलेवेंट है। माया में कुछ करके क्या फायदा? माया को एंजॉय करके क्या फायदा? जो मटेरियल प्लेजर्स है उनको एंजॉय करके क्या फायदा? उनको छोड़ देते हैं। हम तो दूर रहते हैं। वो बेसिकली क्या करते हैं? अपना डिफॉल्ट स्टेट जो है, एक आदमी डिफॉल्ट स्टेट में क्या होता है? वह अकेला रहता है। उसके दोस्त नहीं होते। उसके जिंदगी में प्यार नहीं होता। उसकी जिंदगी में प्लेजर्स नहीं होते। तो वो ये कहने के बजाय कि मैं डिफॉल्ट स्टेट पर रहना चाहता हूं। वो ये कहता है कि नहीं मुझे माया से मतलब नहीं है। मैं दूर दूर हट रहा हूं चीज से। और आप पाओगे ऐसे आदमी के अंदर दुख दुख लगता है उसके चेहरे पे कि वो बहुत दुखी है। लगता नहीं है उसे देख के कि वो दुनिया को एंजॉय कर रहा है, प्लेजर्स को एंजॉय कर रहा है। वो स्पिरिचुअलिटी का यूज़ करता है। अपने इनएक्शन को जस्टिफाई करने के लिए। डिप्रेस्ड हो जाता है। बेचारा सोचता है कि यार दुनिया ही असली नहीं है। दुनिया ही इल्लुजन है। दुनिया ही माया है। तो फायदा क्या है? वो बार-बार ये बोलता है फायदा क्या है? काइंड ऑफ़ ब्लैक। अच्छा तुम मतलब तुम जा कल पार्टी में गए थे, तुम मजे कर रहे थे लेकिन फायदा क्या है यार? देखो तुम माया में हो। मुझे देखो, मैं रूम में पड़ा हुआ था, मैं चिपचिप्स खा रहा था। ठीक है। वही वही।

रेड कल स्पिरिचुअलिटी जो है आपको दो अवेकनिंग्स देती है। अगर आप यह भी बिलीव करते हो कि दुनिया जो है माया है, आपके अंदर एक बहुत ही लिबरेटिंग सा चिल सा एटीट्यूड डाल देती है। एस अ रेड पिल पर्सन जो आप बिलीव करते हो कि द वर्ल्ड इज एन इलजन, माया है तो फिर आप उसे और भी ज्यादा चिल वे में लेने लगते हो। फिर आपको चीजें उतना अफेक्ट नहीं करती। आप हंसते हो चीजों के ऊपर। आप अम्यूज्ड रहते हो। आप खुश रहते हो देख के। ये चीज बहुत हेल्प करती है। रियल लाइफ में कहीं केस हो रहा है, कुछ दिक्कत हो रही है, सब चिल्ला रहे हैं और आप हंस रहे हो बस देख के। इंटरेस्टिंग। दैट शोस पावर। बाहर के रूप में भी और अंदर से जो पावर की बात है उसके रूप में। अगर आप सिचुएशन को देख के बस स्माइल कर रहे हो और एक ड्रामा के रूप में देख रहे हो। दैट इज वेरी पावरफुल। एक रेड पिल आदमी कभी भी वर्ल्डली प्लेजर्स को डिनाई नहीं करता। वो कहता है आई विल यूज़ माय अवेयरनेस। आई विल यूज़ माय नॉलेज टू एंजॉय द माया। मैं इन माया को एंजॉय करूंगा। इसमें भी लूजर्स और विनर्स होते हैं। इन द वर्ल्ड ऑफ़ माया। देयर आर लूजर्स और विनर्स। देयर आर सर्टेन फेवरेट्स ऑफ़ माया। हु स एट द टॉप ऑफ माया। रेडपिल गाइस दे वांट टू रूल माया फर्स्ट एंड देन वरी अबाउट द आफ्टर लाइफ लेटर। वो जस्टिफाई नहीं करते अपने लोनलीनेस को, अपने डिफॉल्ट मोड को कि नहीं, मैं तो अब अवेकेंड हो गया हूं तो मैं दुनिया से दूर रहो। ओके। वो कहता है नहीं, मैं तो जो मुझे नॉलेज मिला, मैं इसको भी अपने एडवांटेज में यूज़ करूंगा। आई विल मेक श्योर कि इससे मेरा फ्रेम फ्रेम और मजबूत हो और आई विल यूज़ इट टू मेक श्योर कि मैं दुनिया को और एंजॉय करूं और अब तो मैं एडवांटेज हूं क्योंकि मैं अवेकेंड हूं। दुनिया मुझे अपने इशारे पर नचा नहीं पाएगी पपेट की तरह। लोग मुझे कहेंगे तुम सफर करोगे, तुम इस शादी को तुमने मना कर दिया तो कोई लड़की तुमको पसंद नहीं करेगी। यार, ठीक है ना। नो प्रॉब्लम। देख लेंगे आगे। लड़की माया रहे या ना रहे, एट द एंड इट डजंट मैटर। और यही नॉन शलांत डिटच्ड एटीट्यूड भी जो रहता है लड़कों का लड़कियों के लिए अट्रैक्टिव रहता है। लड़कियों के साथ भी जो है रिलेशनशिप में जो है भी वो भी एटीट्यूड रखा हुआ है। लड़की कह रही है तुम ऐसे मुझे बोलो, मैं तुमसे ब्रेकअप कर लूंगी यार। लड़का कहता है ठीक है, कर लो। नो प्रॉब्लम। यू आर जस्ट अ पार्ट ऑफ द इल्लुजन। अनदर पार्ट ऑफ द इल्लुजन विल कम टू मी। जाओ चिल।

एक रेड पिलर के लिए स्पिरिचुअल होना पावरफुल इसलिए है क्योंकि रेडवेल की सच्चाई यह है कि आप अपने पे सेंटर्ड रहे, दुनिया पे नहीं। और अगर स्पिरिचुअलिटी के साथ आप यह भी जानना जानना शुरू कर देते हैं कि दुनिया भी इल्लुजन है तब तो वो सेंटरिंग और ज्यादा केंद्रित हो जाता है आपकी तरफ। फ्रॉम बॉडी, फ्रॉम माइंड, इट बिकम्स राइट टू द कॉन्शियस सनेस और पावरफुल हो जाता है। आप पहले भी इस दुनिया को सीरियसली नहीं ले रहे थे। आप दुनिया की बात पहले भी नहीं सुन रहे थे। आपका फ्रेम तब भी आप ही पे सेंटर्ड था। अब और हो गया। अब आप हंस भी रहे हो दुनिया में। आप देख रहे हो दुनिया भर की नौटंकी हो रही है। दो खेमे में बट रहे हैं हर चीज में। ये ड्रामा हो रहा है, वो ड्रामा हो रहा है। आप कह रहे हो क्या थिएटर है यार, मजा आ रहा है देख के। बाकी लोग सीरियस हो रहे हैं। देखो यार, उसने ऐसा बोल दिया, उसने वैसा बोल दिया। आप कह रहे हो सब थिएटर है। लेट्स एंजॉय। टेंशन फिर नहीं होता। यह टेंशन नहीं होता कि दुनिया खत्म हो रही है। दुनिया तबाह हो जाएगी। यह हो जाएगा, वह हो जाएगा। दी आर लॉट ऑफ डिफरेंसेस एंड आपको देख के पता चल जाएगा बिहेवियर में, वाइब में, एनर्जी में क्या फर्क होता है। आप ना हीलिस्ट नहीं बनोगे। ब्लैक पिल्ड आप नहीं बनोगे। इफ यू आर रेड पिल्ल स्पिरिचुअल।

आपको सुनते-सुनते बहुत चीजों को लेकर मैं क्लियर हुआ। मतलब अभी तक जो भी मुझे जवाब नहीं मिले ऐसी बहुत सारी चीजें है। उसमें से एक चीज मैं यहां पे मेंशन करना चाहूंगा कि इस्लाम को लेकर के। इस्लाम को लेकर के जो मैं समझ ही नहीं पा रहा था कि यार ये दुनिया भर के जो सूडो फेमिनिस्ट है, दुनिया भर के जो मानव अधिकार के ये जो मसीहा बने हुए लोग हैं, ये जो भी है बहुत सारे बॉलीवुड सेलिब्रिटीज है, एलिट लोग हैं, जो भी ये है पूरे लोग वो हमेशा वहां पे आकर के चुप क्यों हो जाते हैं? मतलब वो प्रश्न मेरे दिमाग में था। मतलब एड्रेस ही नहीं करेंगे आप। आप मतलब देखो हिंदू या सनातन है दुनिया के इस क्षेत्र में, आजूबाजू के हमारे सबक्टिनेंट में। इस्लाम, क्रिश्चियनिटी सभ्यता के रूप में और खास करके इस्लाम बहुत बड़े मानव समुदाय को कवर करता है, बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र को भी कवर करता है। लॉर्ड में वहां पे इनकी छुट्टी रहती है। तो ठीक है, मुझे थोड़ा बहुत तो था कि ये स्टॉप ऑन सिंड्रोम जैसा कुछ है, थोड़ा बहुत कि ये भय है, ये फियर है जो इनको यहां पे चुप रखता है। पर परफेक्ट आंसर सर मुझे मिला आपको सुनने के बाद कि भाई वो कभी जवाब ही नहीं देते हैं। आप बोलते हो कि आपको मिसिस्ट आप ही है। है हम तो क्या करोगे? आप तो ह्यूमन राइट्स का पूरा वायलेशन कर देते हो। आप तो ये हो। हां भाई करते हैं। बोलो अब आगे और क्या बोलना चाहते हो? तो ये बड़ा मुझे आई वास वेरी हैप्पी। मतलब मैं उस दिन बड़ा कंटेंटमेंट में था लॉर्ड आपका वीडियो देखने के बाद कि मुझे ये जो फाइनल डेस्टिनेशन लिख रहे हैं, यस कुणाल का ये सब तो ये मुझे आई वास वेरी कंटेंटेड एंड हैप्पी कि मुझे पहली बार जवाब मिला। जवाब इतना बिटर भी नहीं था, इतना नकारात्मक भी नहीं था। उसमें वो इतना फ्रस्ट्रेशन भी नहीं था। आपने जो जवाब दिया वो बड़ा ही एक स्थिर जवाब था जो कि आपका व्यक्तित्व योगी चित्त की जो मैंने बात की। एक शब्द मेरे लिए काफी था। लॉर्ड फिर वो बोलते हैं हां, ठीक है तो क्या क्या करना है? मतलब हां है हम। मतलब और ये मैं व्यक्तिगत जीवन में भी देखता हूं, चाहे ऑफिस हो, रिलेशनशिप हो, पत्नी हो, प्रेमी हो, प्रियतमा हो, जितने भी ह्यूमन रिलेशनशिप के डायमेंशन है, डायनेमिक द लॉर्ड जो कूल रहता है मतलब तो बोलो मतलब कोई नहीं दबाता है। तो ये फिर से मैं आपके मुंह से यहां पर सुनना चाहता हूं।

फेमिनिज्म जो है और दुनिया भर का जो शेमिंग है, जैसे कि ह्यूमन राइट्स वाले शेमिंग करते हैं, फेमिनिस्ट लोग शेमिंग करते हैं। ह्यूमन राइट्स वाले सरकार की शेमिंग करते हैं। जब सरकार, जब हमारी सेना आतंकवादियों को मारती है, तो सरकार की भी शेमिंग करते हैं कि आपने मारा क्यों? आप उनसे, आप उनसे बात कर सकते थे यार। ठीक है?

आपका जो पोजीशन है तब डाउन होगा जब आप लगेंगे इनको एक्सप्लेन करने। कि नहीं, असल में बात ये है कि हमने बात करने की कोशिश की थी, पर उन्होंने, उन लोगों ने माना नहीं, तो हमको उनको मारना पड़ा यार, आतंकवादी को इसलिए मारना पड़ा। वरना हम लोग बात करने लगते हैं उनसे, है ना? तो अब जिसको अपने आप को एक्सप्लेन करना पड़ रहा है कि हमने आतंकवादी को क्यों मारा, तो आप समझ लो कि वो कितना ज्यादा कॉम्प्रोमाइज हो सकता है बाहरी शक्तियों की वजह से, है ना? आतंकवादी था, इसलिए मार दिया। उसने हथियार उठाया, जनता के खिलाफ, इसलिए हमने मार दिया। दिस इज द सिंपल आंसर। ये चीज आप इन जनरल देखोगे कि व्हेन वी आर टॉकिंग अबाउट मुस्लिम्स, क्योंकि फेमिनिज्म और लेफ्टिज्म इन जनरल एक बहुत बड़ा टेस्ट है पूरे ह्यूमैनिटी के ऊपर और लीगल सिस्टम्स के ऊपर, जहां सारे सिस्टम्स उनको खुश करने की कोशिश करते हैं। इस्लाम उन्हें खुश करने की कोई इच्छा नहीं रखता है।

एक फेमिनिस्ट जाके एक क्रिश्चियन को बोल सकती है, एक मॉडर्न क्रिश्चियन को कि तुम मिसोजिनिस्ट हो। देखो, तुम्हारे स्क्रिप्चर में ये लिखा हुआ है। तो वो समझाएगा बैठ के कि नहीं, असल में बात ये है कि वो समय अलग था और अब हम लोग ऐसा नहीं करते। एक हिंदू को एक फेमिनिस्ट आकर बोल सकती है कि देखो, तुम्हारे स्क्रिप्चर में ये लिखा हुआ था। तुम क्या इसके बारे में कहना चाहते हो? तो कहेगा, नहीं, असल में बात ये है कि देखो, हम लोगों ने, देखो, इतना चेंज लाया और इसका मतलब ये नहीं था, तुम उस कॉन्टेक्स्ट में इसको नहीं पढ़ रही हो। तुम दूसरे कॉन्टेक्स्ट में पढ़ रही हो। तुम देखो, ये वाले बाबा का तुमको मैं वीडियो भेज रहा हूं। तुमको ये दिखा दे रहा हूं। वो एक्सप्लेन करने की कोशिश करेगा। और आप, आपने जैसे ही टेस्ट को एक्सप्लेन करना शुरू कर दिया, आप हार गए। और जब आप हार गए, तो सामने वाला साइड आपको फिर और ज्यादा डोमिनेट करेगा। आपने जहां समझाना शुरू कर दिया कि नहीं, हम नहीं हैं ऐसे जैसा आप सोच रहे हैं, वो तब और आप पर एक्विजिशन नहीं, तुम हो। अब तो तुम हो। अब तुम और एक्सप्लेन करो अपने को।

मुस्लिम्स ऑन द अदर हैंड, दे हैव नो इंटरेस्ट इन एक्सप्लेन। उन पर, उन पर ये सब लगाते रहे आरोप कि तुम ऐसे हो, तुम वैसे हो। व्हाटएवर, आई डोंट केयर, है ना? वो नहीं बैठ के आपको समझाएगा कि नहीं, ऐसा नहीं है, प्लीज मानो मेरी बात। और क्योंकि वो इस गेम को खेलता नहीं, क्योंकि वो इनके साथ इंगेज करता नहीं, क्योंकि इनको समझाने के लिए इनके पीछे पड़ता नहीं, उसकी इज्जत होती है। वही फ्रेम है ना? एस अ रिलिजन, वो फ्रेम मेंटेन कर रहा है। जब आपकी फ्रेम की बात होती है, कोई आपसे कहता है, तुम तो बहुत, तुम बहुत टॉक्सिक हो यार। अब लगो समझाने उसको, नहीं, मैं टॉक्सिक नहीं हूं। असल में मेरे साथ यह हुआ था लाइफ में। फिर यह हो गया था, इसलिए मैं ऐसे बात करता हूं। अब वो आपको और टारगेट करेगा। किसी ने कह दिया, तुम बहुत टॉक्सिक है। तुम, हां, और काफी हूं। खत्म। उसकी पावर वहां से, उसकी पावर खत्म। तो ये रीजन काफी ज्यादा प्रोमिनेंट है। और यह एक एग्जांपल है। अगर आपको एक बड़े लेवल पे टेस्ट का और टेस्ट को पास करने का एग्जांपल देखना है, तो आप बस यही देख लो कि बिकॉज़ मुस्लिम्स कैन डील विद दिस टेस्ट, इन जनरल इस्लाम कैन डील विथ दिस टेस्ट वेरी वेल। इसलिए जितने भी सबवर्सिव पावर्स हैं, वो इस्लाम की बहुत रिस्पेक्ट करते हैं। मुस्लिम्स की बहुत रिस्पेक्ट करते हैं। उनको नहीं, वो छेड़ते। उनको परेशान नहीं करते। उनके देशों की भी बात नहीं करते कभी। वो बात करेंगे कि अमेरिका के लॉस एंजेलस में फेमिनिज्म का क्या हाल है। दे विल नॉट टॉक अबाउट फेमिनिज्म इन अफगानिस्तान।

और एक वीडियो बहुत ही फेमस होता है, जिसमें एक शायद ब्रिटिश जर्नलिस्ट थी। वो तालिबान के कुछ लोगों से पूछ रही थी कि पीपल हैव द राइट टू वोट इन फीमेल पॉलिटिशियन। वो मुंह पे हंसता है उसके और कहता है, बंद कर कैमरा। ठीक है? आपको मैं गारंटी देता हूं कि अगर किसी और देश का कोई आदमी ऐसी बात करता है, मान लीजिए फिलीपींस का कोई आदमी बात करता है या भारत का कोई पॉलिटिशियन ऐसा बोल देता, दुनिया पीछे पड़ जाती उसके। पूरा यूएन तक बात चली जाती कि देखिए, देखिए, इसने ऐसा बोल दिया। इसने हंस दिया वोट करने के नाम पे, फीमेल पॉलिटिशियन के नाम पे, इसने हंस दिया। ठीक है? तो इट्स ऑल अबाउट टेस्ट, इट्स ऑल अबाउट फ्रेम। अब क्या गलत है, क्या सही है, वो अलग टॉपिक है। आई एम टॉकिंग अबाउट कि दूसरा आदमी अगर आपके ऊपर कुछ सबवर्शन ट्राई कर रहा है और आप उससे डील कैसे करते हैं, तो वहां पर आपकी फ्रेम मैटर करती है। आप एक्सप्लेन करोगे, तो आप ऑलरेडी हार चुके हो। आप कहोगे ना, आई डोंट केयर। जो कि, व्हाटएवर, जो सोचना है, सोचो। आप जीत चुके।

गुजरात का एक यंग पॉलिटिशियन है। उसको जब उसकी एक सीडी बाहर आ गई थी शारीरिक संबंधों की, तो उसको इस प्रकार से तो बोला कि हां यार, अब नेक्स्ट टाइम मतलब ऐसे ही कूल कि नेक्स्ट टाइम गलती नहीं करूंगा, कुंडली अच्छे से लगाऊंगा। और वो फिर दूसरी बार क्वेश्चन पूछा गया, तो बोला, नहीं, नहीं, आपके पास तो वो कम उसमें मैं ठीक नहीं दिख रहा हूं। मैं दूसरी सीडी आपको भेजूंगा इस इंटरव्यू के बाद, जिसमें मैं पूरा और पूरा पोश्चर मेरा कामसूत्र के वात्सयन के जो पोश्चर हैं, उस रूप में देख रहा हूं। परफेक्ट। दूसरों को भी मैंने देखा है जिन्होंने वो, नहीं, नहीं, हम मॉर्फ किया गया है मेरा वीडियो, डॉक्टर किया गया है मेरा वीडियो। आपके एग्जांपल से मुझे याद आया, काफी फेमस कहा जाता है कि इंडोनेशिया के जो प्रेसिडेंट थे, सुकर्णो, काफी पहले नॉन अलाइन मूवमेंट में उनका काफी नाम था, नेहरू जी के साथ। तो सुकर्णो के टाइम पे, उनके, उनके ऊपर सोवियत यूनियन ने कुछ जासूस भेजे। लड़कियां थी। अब उन लड़कियों ने उनके साथ एक वीडियो बनाया और उस वीडियो को सीक्रेटली रिकॉर्ड कर दिया, है ना? इंटिमेट मोमेंट्स का। अब इस वीडियो का यूज़ होना था सुकर्णो को ब्लैकमेल करने के लिए कि तुम हमारे हिसाब से काम करो, वरना तुमको ये लीक कर देंगे हम सारा। अब वो आदमी ब्लैकमेल होने की जगह और खुश हो गया। ये सुनके किसका वीडियो रिकॉर्ड हुआ है। वो और खुश हो गया। और एक्साइटेड हो गया। कहा कि हां, रिलीज कर दो।

प्लान फेल। ऐसा कई लोगों का ब्लैकमेल होता है। अगर आप किसी चीज को अपने तक लगने दोगे और आप उसको बेशर्मी से ओन नहीं करोगे, तो वो चीज आप पर लगेगी। कोई चीज बाहर आ गई आपके बारे में और अगर आपने उसको लगने दिया, आपने लगे आप माफी मांगने लगे, आप एक्सप्लेन करने, तो आपका खेल खत्म। कौन है पॉलिटिशियन? इस चीज को समझते हैं, क्योंकि वो दुनिया को बहुत ही ज्यादा एक्सपीरियंस किए हैं, तरह-तरह के लोगों से मिले हैं। वो लोगों ने भी पैटर्न्स देखे हैं। तभी वो पॉलिटिशियन है। वो कॉमन आदमी नहीं है। वो जानता है कि लोगों का दिमाग कैसे काम करता है। लोग कैसे रिस्पॉन्ड करते हैं। वो यह भी जानता है कि पीपल डू नॉट रिस्पॉन्ड टू व्हाट इज गुड और व्हाट इज बैड। पीपल रिस्पॉन्ड टू पावर। लोगों को मतलब नहीं होता कि नेता अच्छा है या बुरा। लोग कहते हैं, नेता पावरफुल है कि नहीं? बाहुबली है कि नहीं? इन सब चीजों में पावर दिखती है। जो माफी मांगने लगता है, जो एक्सप्लेन करने लगता है, नहीं, नहीं, वो नकली वीडियो है। उस पर लोग और कूदते हैं।

रणवीर अलाबादिया का जो एग्जांपल था, कुछ समय पहले हुआ था। रणवीर अलाबादिया को लगा कि वो माफी मांग लेगा, तो कैंसिलेशन बंद हो जाएगी। उसके माफी मांगने के बाद और शुरू हुई कैंसिलेशन। एक आदमी ने तो यह बोल दिया वीडियो पे कि उसको फांसी की सजा होनी चाहिए। और जो करेगा उसको मैं इनाम दूंगा या तो मैं वध करूंगा, ऐसा। पता नहीं ऐसा उसने क्या कर दिया था कि उसको फांसी की सजा होनी चाहिए। उससे ज्यादा घटिया काम हो रहे हैं देश में। पर यह लोग कूद पड़े उसके ऊपर। इसके बारे में मैंने एक्सप्लेन किया एक वीडियो में कि उसके ऊपर लोग क्यों कूदे? इसलिए नहीं क्योंकि उसने कुछ गलत किया। इसलिए क्योंकि एक पॉइंट मिल गया, एक मौका मिल गया उसके ऊपर कूदने का और उसने भी अपने आप को ओपन कर दिया कि मैं शर्मिंदा हूं। बंद हो गए। तो वो पोस्टिंग करना बंद कर दिया, अपलोड बंद कर दिया। और आप अगर देखिए, गिल्ट फील करना बुरा काम करने पे कोई गलत बात नहीं है। पर एक चीज याद रखने लायक है। अगर आप गलत काम करके गिल्ट फील कर रहे हैं और आपके सामने जो लोग खड़े हैं, वो एनिमल कॉन्शियसनेस के हैं। अब उनको गिल्ट-गिल्ट से मतलब नहीं है। गिल्ट मतलब वीकनेस। वो आपको क्रश कर देंगे। आपको जस्टिस नहीं देंगे। वो क्रश कर देंगे। आप गिल्ट भी उन्हीं के सामने फील कर सकते हो, एक्सेप्ट कर सकते हो, जो लोग समझते हैं आपको, जो लोग कम से कम सोच सकते हैं राइट और रॉन्ग क्या है। जो मॉब बन के खड़ा है, जो इंतजार कर रहा है कि आप दरवाजा खोले, बस आप गिल्ट फील करके तो दरवाजा खोल रहे हो। अब वो कूद जाएंगे।

एक दो वीडियो मैंने आपके ही माध्यम से देखे। एक में बिहार में रिपोर्टर कवरेज कर रहा था कि कैसे एग्जाम में जो फिर उसका हालत हुआ वहां पे, मतलब बच्चों ने जो अल्फा जयंती पे। और दूसरा एक वीडियो, दोनों मतलब चिंता का विषय है। एक दूसरा वीडियो जिसमें कि एक क्रिश्चियन धर्म की जो महिला है, उनकी जो संत होती है, महिला नन बोलते हैं उनको शायद, तो उसको जिस प्रकार की अश्लील भाषा में उसके साथ ये अल्फा जयंती बात कर रहे थे। कंटिन्यू क्या मानसिकता है लॉर्ड अल्फा जयंती की यहां पे? क्योंकि वो रिपोर्टर भी मैं देख रहा, इतना परेशान है, जान बचा के भाग रहा है। नन कुछ नहीं कर पा रही है, वल्नरेबल है। वहां पे दो चीजें इसमें एक साथ काम कर रही हैं। पहला है ऑफकोर्स अनसिविलाइज्ड बिहेवियर। सभ्यता नहीं है लोगों के अंदर। हम लोग बहुत ही अजीब बात है कि पढ़ाई हो जा रही है, शिक्षा भी मिल जा रही है, पर सभ्यता नहीं मिल रही। हमारा शिक्षा व्यवस्था जो है, वो सभ्यता नहीं सिखाता। वो सिखाता है नंबर कैसे आ? ये वाला क्वेश्चन रट लो, 15 नंबर मिल जाएगा। वो वाला क्वेश्चन रट लो, पांच नंबर मिल जाएगा। यही चलता है स्कूल में। यह नहीं चलता कि एक प्रॉपर नागरिक होता कैसा है? तुमको कैसे बाहर एक्ट करना चाहिए? कैसे नहीं करना चाहिए? ये नन वाले एग्जांपल में आप जो देख रहे थे, वो इसका नतीजा है असभ्यता का। और दूसरा है सेक्सुअल रिप्रेशन का। अधिकतर लोग सेक्सुअली फ्रस्ट्रेटेड हैं, रिप्रेस्ड हैं। उनके लिए वो नया-नया उन्होंने पोर्न को डिस्कवर किया रहता है। तो पोर्न वो देखते हैं, तो एक्साइटेड हो जाते हैं। अरे बाप रे। अरे, यह भी कुछ होता है क्या? और सोचते हैं कि हम इनके बारे में बात कर रहे हैं। हम गालियां दे रहे हैं। हम नन को ऐसे छेड़ रहे हैं। तो हम किस टाइप का विद्रोह कर रहे हैं समाज में? हम रिबेलियन कर रहे हैं। घर में इनको दबाया गया है। स्कूल में इनको दबाया गया है। रूल जो है, स्कूल में इनको दबा के रखा हुआ। बात तक नहीं करने देता। इनको लगता है कि गालियां देके और उल्टी-पुल्टी बातें करके और छेड़ के औरतों को, ये किसी टाइप का फ्रीडम पा रहे हैं। क्योंकि दिमाग में सोचने का उतना लेवल अभी है नहीं कि फ्रीडम क्या होता है? लिमिटेशंस क्या होती हैं बिहेवियर पर? अच्छा बिहेवियर क्या होता है? दिमाग सोच रहा है जानवरों की तरह। तो वो सोचता है कि वो चिल्ला देगा, वो लड़की को छेड़ देगा, वो जाके उसको हैरेस कर देगा। तो ये उसके लिए फ्रीडम है सब। यह भी चीज लैक ऑफ डिटरेंस का नतीजा है। ये चीजें बहुत बुरी तरीके से पनिश होनी चाहिए सोसाइटी में। एग्जांपल के तौर पर, मतलब दिखा के सीरियस तरीके से। ऐसे कुछ लोग हैं जो कि ऑन मास क्राउड में एग्जिस्ट करते हैं, जिनको समाज में एग्जिस्ट नहीं करना चाहिए। उनको अलग रखना चाहिए। यह पूरी भीड़ जो आप देख रहे थे लड़की को हैरेस करते हुए, इस भीड़ को अगर आप दो डंडे मार के आज माफी भी मंगवा दोगे, ये कल दोबारा वही काम करेंगे। इनका नेचर ऐसा रहता है कि आप इनको मारोगे। ये गिरेंगे, उठेंगे और फिर वही काम करेंगे। प्रॉपर इसका रास्ता यह होता है कि इन लोगों ने अपना दिखा दिया नेचर, जो स्वभाव है कि लड़की दिखी नहीं कि कूद पड़े उसके ऊपर। आप इनको हटाएं और डाल दें किसी अलग जगह पे और वहीं रखें इनको फॉर एन एक्सटेंडेड पीरियड ऑफ टाइम, जब तक समाज कम से कम फिगर आउट ना कर ले कि क्या हो रहा है। आप इनको दो डंडा मारेंगे। इनसे माफी मंगवा देंगे और छोड़ देंगे इनको दोबारा। आपको लगेगा कि माफी मांग लिया है। अब सुधर गया। दोबारा वही करेगा। अगली बार ध्यान रखेगा कि पकड़ा ना जाए। आज वीडियो पर कर रहा है। कल ध्यान रखेगा कि वीडियो ना बन पाए इसका। नेचर नहीं चेंज होता लोगों का। और क्योंकि इस चीज को बहुत इग्नोर किया गया है, जैसा कि मैंने कहा कि कई लोग एग्जिस्ट कर रहे हैं मध्यकाल में दिमागी रूप से और उन पर आप लोगों ने लगा दिया है मॉडर्न टाइम का ह्यूमन राइट्स। और मॉडर्न टाइम का आप लोगों ने लगा दिया है लीगल सिस्टम। वो उसका एडवांटेज लेगा। वो मजे करेगा उससे। वो छूट के आएगा जेल से, बेल पर आएगा बाहर और फिर दोबारा वही काम करेगा, है ना? ये, ये प्रॉब्लम है पूरे के पूरे देश में, पूरे के पूरे हर जगह। आप सेम लीगल सिस्टम अगर चलाएंगे, बहुत सारी दिक्कतें आएंगी। आप देखोगे कुछ-कुछ रीजंस में औरतों के खिलाफ सही में प्रताड़ना होती है। कुछ-कुछ ऐसे रीजंस है जहां लगता है लॉलेस है एकदम से। औरतों को मारा जा रहा है, पीटा जा रहा है। अजीब तरीके से रह रही है औरतें। उनको बचाने के लिए बायस्ड लॉज बनाए गए कि उनके पास एक एज रहे। तो यह बायस लॉज उन्हीं एरियाज में अप्लाई होने चाहिए जहां पर यह चीजें कॉमन है। जहां पर यह चीजें हो रही है। अब किसी बीहड़ में कोई आदमी अपनी पत्नी को उल्टा लटका के मार रहा है। उसको बचाने के लिए जो लॉ है, वो सम हाउ साउथ मुंबई में भी लागू हो रही है, जहां पर एक आईटी वर्कर की बीवी उस पर फेक केस करके उसको जेल भेज रही है। मीनवाइल, जो आदमी सही में मार रहा है, पेड़ से लटका के अपनी बीवी को, वो जेल नहीं जा रहा। क्योंकि उसकी बीवी को पता ही नहीं है कि उसको बचाने के लिए कोई कानून है। भारत में क्योंकि रीजनल वेरिएशन बहुत ज्यादा है। कुछ जगह बहुत सेफ है, कुछ जगह बहुत अनसेफ है। लॉ को भी एक तरीके से लोकलाइज करना जरूरी है। अकॉर्डिंग टू द नीड्स ऑफ दैट रीजन। आप अगर हाईली बायस्ड लॉ बना रहे हो किसी एकदम लॉलेस एरिया को कंट्रोल में लाने के लिए, पर आप उस बायस्ड लॉ को एकदम जो लॉफुल एरिया है, वहां पर भी लगा दे रहे हो। इसका गलत इस्तेमाल होगा। आपने एक पावरफुल वेपन दे दिया। जो वेपन यूज करना था उन औरतों को बचाने के लिए। अब प्रिविलेज्ड औरतें उसका इस्तेमाल करेंगी अपने फायदे के लिए। यह होता है।

ब्लूपिल मूर्छित समाज। लॉर्ड हमें बोलता है कि नीतिमान बनो। एथिक्स में रहो, अच्छे रहो, नाइस रहो। कर भला तो हो भला, अच्छे कर्म करो। उसके अच्छे फल मिलते हैं। 18 पुराण, ब्लू पिल, स्पिरिचुअलिटी, ये सब मिलकर के ये हलवा हमको परोस देते हैं। पर जैसे हम आपसे जब संवाद करते हैं, आपके वीडियो सुनते हैं, तो पता चलता है कि यह तो जंगल है। तो जंगल में डार्क साइड को हमेशा बाहर निकलना कुछ-कुछ बार जरूरी बन जाता है। या आपको खुद को पता होना चाहिए आपकी डार्क साइड। ये आपको कुछ-कुछ बार दिखाना ही होता है। कितना महत्वपूर्ण है अपने इस डार्क साइड को इस जंगल में दिखाना और फिर वो जब घटनाक्रम समाप्त हो जाता है, उसके बाद उसको रख के फिर से अपने पुराने अवतार में वापस आना। सो आई वांटेड टू विवरण, पूरा डार्क साइड के ऊपर ह्यूमन कॉन्शियसनेस में कितना जरूरी है। ह्यूमन सिविलाइजेशन जिसके अंदर भी सेल्फ-प्रिजर्वेशन की भावना है कि मुझे अपनी रक्षा करनी है। पहली बात तो ये कि आप बचाते भी उस चीज को है, जो कि आपको लगता है इंपॉर्टेंट है। अगर आपको लगता है कि आप खुद इंपॉर्टेंट नहीं है, तो आप अपने को बचाना नहीं चाहोगे। कहोगे, यार, जो है, चलने दो, नो प्रॉब्लम। तो अगर सेल्फ-प्रिजर्वेशन की भावना है, अगर आपको लगता है कि आप इतने महत्वपूर्ण हैं कि आपको खुद को बचाना चाहिए, तो आप खुद ही से डिसाइड कर लोगे कि दुनिया में थोड़ी सी डार्कनेस आपके अंदर जरूरी है, ताकि आप जो डार्क एलिमेंट्स हैं, उनसे डील कर सको। दुनिया में जो इविल है, उससे डील कर सको। अपने आप को बचा सको। समाज तो बताता ही है कि अच्छे बनके रहो और अच्छे के साथ अच्छा होता है, ताकि जैसा कि मैंने बताया, बेटा जरूरी है। बेटा होगा। आदमी कमजोर रहेंगे, तो समाज स्टेबल रहेगा। आप कमजोर आदमियों के अराउंड ज्यादा सेफ फील करोगे, एस कंपेयर टू जंगली आदमियों के अराउंड। क्योंकि बीच वाला जो हेल्दी स्टेज है कि आप ना जंगली हो, ना कमजोर हो, आप सिविलाइज्ड हो, ये बहुत ही रेयर होता है मेंटेन करना। सोसाइटी कोशिश करती है सबको कमजोर बना दो। ऐसे में आपका माइंड जो है, अगर इंडिपेंडेंट है, अगर आप खुद की चिंता करते हो, आपको लगता है आप इंपॉर्टेंट हो, अगर आप ब्रेनवाशिंग में नहीं फंसे हुए हो, क्योंकि कुछ लड़कों का माइंड कमजोर रहता है, वो वो अपने लिए कभी सोचते ही नहीं। उनको हमेशा सोचवाया जाता है। समाज उनसे सोचवाता है। तो उनका तो वैसे भी जो होना है, वो होगा। दे विल जस्ट सर्व अ डिफरेंट मैट्रिक्स। जरूरी इसलिए है कि आप अपने आप को बचाएं। अगर आपके अंदर कम से कम यह डिस्प्ले नहीं है, अगर आपके अंदर डिस्प्ले नहीं है कि आप हार्म कर सकते हैं, आप ही हार्मफुल हैं, तो दूसरे आपको हार्म करेंगे। जानवर करते हैं ये चीज। कई सारे जानवर ऐसे हैं जो कि स्ट्रेस में आने पे अपने को बड़ा दिखाते हैं। अपने आपको, अपने पंखों को फैला देंगे, अपने हाथों को ऐसे फैला देंगे, दिखाने के लिए कि वो थ्रेटनिंग है, ताकि सामने वाला डर जाए। इंसानों में ये चीजें होती हैं, बट सबटल होती हैं। कम से कम आपको वो डिस्प्ले करना पड़ेगा। कुछ-कुछ जगहों पर, हर जगह नहीं। जब भी आप इविल एनकाउंटर करोगे। इविल का विक्टिम कोई ना कोई बनता रहेगा समाज में। आपको कोशिश करना है कि आप ना बनो।

लॉर्ड, तीन घंटे हो चुके हैं और एक अंतिम सवाल, उसके बाद मैं ऑन बिहाफ ऑफ लीजन किले से बाहर आऊंगा। तो अंतिम सवाल मेरा लॉर्ड ये है कि सोशल मीडिया हमारे जीवन का प्रमुख अंग है। और ऐसा अंग है कि कितने भी वीडियो मैं बना लूं, कोई भी बना ले, 10 टॉक्सिक हार्मफुल इफेक्ट ऑफ सोशल मीडिया पर हम उससे बच नहीं सकते हैं। और इसके सकारात्मक भी आयाम हैं, परिणाम हैं कि जैसे आप और मैं बात कर रहे हैं। आपके साथ ये जो संवाद या वार्तालाप मैं कर पा रहा हूं, वो भी इसी के माध्यम से हो रहा है। आपकी पूरी चैनल, आपका पूरा कंटेंट और आपकी मेंबरशिप से जो ज्ञान के उस समुद्र में मैं भी गोता लगा रहा हूं, वो भी इसी सोशल मीडिया से हो रहा है। तो हम एकदम अनफेयर नहीं हो सकते हैं एक्सट्रीम उस छोर पर कि भाई पूर्णता से नुकसान ही कर रहा है। पर हां, हम जब देखते हैं तो ये अटेंशन को खा रहा है, आंखें खराब कर रहा है। मनुष्य की चेतना, उसके ऊर्जा, उसके विचार, उसका बर्ताव, उसका रियल लाइफ कन्वर्सेशन, उसका सामाजिक जीवन, उसका सामाजिक परिवेश, उसकी आइडियोलॉजी, देश की राजनीति, मानसिक स्वास्थ्य, सब कुछ भी प्रभावित कर रहा है। तो रेड पिल एडवाइस लॉर्ड, मैं आपसे चाहता हूं अंतिम प्रश्न में कि इसमें भी हम भवरा बने, रस ले लें, पंखुड़ियां छोड़ दें। सोशल मीडिया एक वरदान है यूथ के लिए, स्पेशली। सोशल मीडिया ने दूरियों को एकदम खत्म कर दिया है। आपके आसपास भले ही किसी को कुछ ना मालूम हो, कैसे आपकी समस्या को सही करें। अब आपके पास आपकी रीच में पूरी दुनिया है। पूरी दुनिया के एक से एक एक्सपर्ट लोग हैं, जिनसे आप बात कर सकते हैं, जिनकी नॉलेज का आप फायदा उठा सकते हैं, वो भी फ्री में। ऐसे में यह बहुत बड़ा ब्लेसिंग है। पर अगर मैं उस ब्लेसिंग का इस्तेमाल कर रहा हूं फालतू की रील्स देखने में, जिसमें एक आदमी अपनी पत्नी से लड़ रहा है, उसकी पत्नी चटनी बना रही है, चटनी पीस रही है, तो उसको वो चिल्ला रहा है उसके ऊपर। या फिर मैं कोई ऐसी फालतू की रील देख रहा हूं जहां पर मारपीट हो रही है। कुछ वैल्यूएबल नहीं मिल रहा। या फिर कोई ऐसी मैंने तो

लाइव स्ट्रीम्स में देखा है कि कुछ गांव में कुछ आंटियां चारपाई पर सोई हुई हैं और उसको 300 लोग देख रहे हैं। 300 नहीं, उसको एक-दो हजार लोग देख रहे हैं। ऐसे भी लाइव स्ट्रीम, यही YouTube पे होती है। शॉर्ट वाली लाइव स्ट्रीम पे देखिएगा। आंटी जी सोई हुई हैं। लाइव स्ट्रीम पे दो-तीन हजार लोग हैं। कुछ-कुछ अंकल लोग मैसेज कर रहे हैं कि अपना तुम ये UPI दो। मैं तुमको पैसे भेजूंगा। तुम बताओ कितना पैसा तुमको चाहिए? मुझसे शादी कर लो।

सोशल मीडिया वो भी है। सोशल मीडिया ये भी है। सोशल मीडिया वो भी है। अब आपका डिस्कशन है, आपका फ्री विल है कि आप किस तरफ जा रहे हो सोशल मीडिया।

सोशल मीडिया की एक रियलिटी यह है कि जो वैल्युएबल सामान है, सोशल मीडिया पे जो वैल्युएबल सामग्री है, वो बहुत ही ज्यादा यूजलेस सामग्री के पीछे छुपी हुई है। मतलब कोहरा बहुत ज्यादा है। मिस बहुत ज्यादा है यहां पे। आपको पहले कूड़ा पहले मिलेगा। उसके बाद आपको बहुत खोजने पे कुछ वैल्यूएबल मिलेगा। इट्स अबाउट क्वालिटी बहुत कम है। क्वांटिटी ज्यादा है। इसलिए लोग जो हैं, जिनका एक पर्पस नहीं होता क्लियर पर्पस कि मैं क्यों यूज कर रहा हूं, तो वो बह जाते हैं।

लोग कभी आंटी को देखने लगेंगे लाइव स्ट्रीम पे आंटी सोई हुई है। उसपे वो 3000 भेज देंगे पैसा। फिर किसी और जगह चले जाएंगे। वहां दिखाएगा मारपीट हो रहा है। फिर किसी से कमेंट में लड़ने लगेंगे। फिर किसी लड़की के सिम पर बन जाएंगे। तो जो बह रहा है, वैसे तो वो तो बहता रहेगा। जिसको फाइंड करना है अपनी लाइफ को लेकर कुछ सवाल हैं, कुछ प्रॉब्लम है, उसको सॉल्व करना है, तो उसका भी जवाब उसे मिल जाएगा सोशल मीडिया पे।

इट इज वेरी इजी। इट इज वेरी इजी फॉर लाइक-माइंडेड पीपल एंड फॉर वैल्यूएबल पीपल टू कनेक्ट सोशल मीडिया। मैं ये कहता हूं कि सोशल मीडिया का यूज सेलेक्टिव होना चाहिए। अपने किसी गोल से रिलेटेड होना चाहिए। एंटरटेनमेंट भी अच्छी बात है। वो भी करो। लेकिन कुछ एंटरटेनमेंट फालतू होता है। जैसे कि आंटी सोई हुई है चारपाई पे, उसको ये फालतू एंटरटेनमेंट है। गाने सुनो, गाने सुनो तुम। मूवीज देखो तुम। कॉमेडी देख लो। Whatever you want to watch, but focus on consuming content that improves your life.

फिजिकली इंप्रूव कर रहा है। तुम्हारे माइंड को इंप्रूव कर रहा है। कम्युनिकेशन स्किल्स को इंप्रूव कर रहा है। इन्वेस्ट कर रहे हो खुद में, वो भी फ्री में। सोचो पैसा नहीं खर्च करना पड़ा किसी ट्रेनिंग के लिए। YouTube पे आपके वीडियो फ्री हैं। आप चीजें सीख रहे हो। अपने आप इतना इन्वेस्ट कर रहे हो। आप कितने अच्छे बन जाओगे। कितने इंप्रूव कर जाओगे। अगर सही में अप्लाई कर लो इस एडवाइस को, तीन महीने के अंदर बहुत इंप्रूवमेंट आ जाएगा।

पहले लोग पैसे देते थे इसके लिए। लोग जाते थे एक ग्रूमिंग क्लास के लिए। लोग जाते थे पर्सनालिटी डेवलपमेंट क्लास के लिए। लोग जाते थे इंग्लिश। 30 दिन में इंग्लिश सीखें, वो वाली जो क्लास चलती है। फर्राटेदार अंग्रेजी बोलें 30 दिन में, उसके लिए जाते थे। आज आप कोई भी भाषा फ्री में सीख सकते हैं YouTube पे। है ना? तो बहुत ही ज्यादा आसान कर दिया आज सोशल मीडिया ने ये सब।

अब उसके बावजूद अगर आप नहीं जा रहे हो, उसको अवेल नहीं कर रहे हो उस फैसिलिटी को, तो आपका चॉइस है भाई। आपको वही पसंद है चारपाई मैट्रिक्स। अब चारपाई और घटिया मैट्रिक्स में ही आप लगे रहोगे। मैंने जब पहली बार देखा तो मुझे इतनी हंसी आई थी और आज फिर से आप बोले तो आई कांट कंट्रोल माय लाफ। मैं कई बार मुझे बोरियत होती है। मुझे कभी बोरियत होती है तो मैं जाता हूं इस पे जो शॉर्ट वाली फीड होती है, स्क्रॉल करते-करते लाइव स्ट्रीम की आ जाती है फीड और लाइव स्ट्रीम की फीड कभी अगर देखोगे तो बड़े ही हंसी आएगी आपको। आंटी लोग जो हैं, बस लाइव लगा के बैठ जाएंगे। अंकल लोग भाई, उसके बाद से दे लूज योर माइंड। तो वो भी एक मैट्रिक्स है। वो उसको मैं कहता हूं चारपाई मैट्रिक्स। एक घटिया मैट्रिक्स। वन वीडियो ऑन दिस इन अपकमिंग डेज इफ यू कैन।

या तो ये जो मैट्रिक्स है, इसमें भी आप जा सकते हो या फिर आप दूसरे मैट्रिक्स में भी जा सकते हो जो कि आपको बेनिफिट करे। ये चॉइस है आपकी। सब कुछ आपकी चॉइस है। आप कहां जा रहे हो? एकदम ब्लैंकेट रूप से हटा देना, एकदम से हटा देना ये बेनिफिशियल नहीं है, बल्कि नुकसानदायक है। आप डार्कनेस में चले जाओगे। क्योंकि प्रॉक्सिमिटी में हमारे उतने अच्छे सोर्सेज नहीं हैं नॉलेज के।

पहले ट्रेवल करना पड़ता था। लोग आते थे नालंदा आते थे, चलते हुए लोग आते थे तक्षशिला आते थे, दूर-दूर से आते थे। उस समय सोशल मीडिया होता तो वहीं से बैठे-बैठे एक्सेस करते। ठीक है, लोग नॉलेज के लिए कहां से कहां चले जाते थे। फाहियान को यहां भारत तक आना पड़ा जानने के लिए बुद्धिज्म के बारे में। उसको ज्ञान के लिए यहां तक आना पड़ा। अब हमारे को कहीं ट्रेवल करने की जरूरत नहीं है। हम यहां घर बैठे सब कुछ जान सकते हैं। यह कितना बड़ा वरदान है। नालंदा और तक्षशिला स्क्रीन में है।

एब्सोल्यूटली लॉर्ड। मैंने अपनी छोटी बुद्धि, सीमित जीवन अनुभव और मिथ्या जो ज्ञान है, उससे आपके विराट व्यक्तित्व को नापने की कोशिश की। हर बार करता हूं। हर लाइव में करता हूं। आज भी की। अगर कहीं पर भी फ्लो मतलब बातों-बातों में कुछ मैंने ऐसा पूछ लिया हो या कुछ ऐसा हुआ हो, तो वो मेरा है। आपका व्यक्तित्व तो विराट है। आपका जीवन अनुभव भी गहन है। उसमें मैं हमेशा प्रयास करता हूं कि जितना हो सके उतना गहरा उसपे जाऊं।

एक मंत्रालय के बाद फिर से आऊंगा मैं किले के बाहर। ऑन बिहाफ ऑफ लीजन, क्योंकि लीजन यहां पर बहुत ही मुझे काउंसलिंग कॉल में भी बोलती है। और कमेंट में भी बोलते रहते हैं। और व्यक्तिगत रूप में मैं भी रूप से हमेशा मेरे वीडियो के माध्यम से बोलता हूं। यहां पर भी स्वीकार करता हूं कि भाई, मैं बहुत सीखता हूं। तो एक भाव रहता है आपसे जुड़ने का। पर किले में हम एक अंतराल के बाद ही फिर से मैं आऊंगा किले के बाहर। तो जब पर आओ, आओ तब फिर से आप स्वीकार करना है। ऐसी आपसे प्रार्थना है।

बाकी जितने भी परिवार के लोग यहां पर देख रहे हैं, अगर आप मुझे सुन रहे हो, मुझ में श्रद्धा है। मेरी बातों में आपको कोई मतलब उसमें वजूद दिख रहा है। कुछ भी आपको ठीक लग रहा है उसमें। परफेक्ट तो हम कोई नहीं होते हैं। तो आपसे यह अपील करता हूं कि मेंबरशिप लेना। प्रेस बेल आइकॉन, घंटी ऑन करो। तो उस स्तर से तो हम आगे निकल चुके हैं। लीजन को लेकर के, लॉर्ड को लेकर के। तो सबसे दरखास्त करूंगा कि मेंबर क्योंकि कोई मूल्य नहीं है। इस ज्ञान का कोई मूल्य हम नहीं चुका सकते हैं। पूरे त्रिभुवन का भी साम्राज्य लगा दो और कुबेर का पूरा जो धन संपत्ति है, उसको लगा दो। फिर भी इसका मोल ही नहीं है कोई।

पर फिर भी मैं बोलता हूं कि व्यवस्थाओं में जो व्यवस्थाएं हैं, उसको हम भी फॉलो करते हैं। लॉर्ड भी फॉलो करते हैं। उसी माध्यम का हम सब उपयोग करते हैं। तो मेंबरशिप लेना। मुझ में श्रद्धा रखिए। मैं बार-बार इसलिए इंसिस्ट करता हूं कि एक ऐसी दुनिया खुलेगी, एक ऐसा जीवन अनुभव मिलेगा, ऐसा रास्ता मिलेगा। आप इस गेम में, इस खेल में सिकंदर हो जाओगे, विजेता हो जाओगे। आप झोपड़ी में हो, महल में हो, कॉरपोरेट में हो, जंगल में हो।

मेरा खुद का जीवन अनुभव बदला है। कुछ चीजों को लेकर के मैं एक्सट्रीम था जब मैंने लॉर्ड को सुनना शुरू किया। शादी नहीं ही करनी है। काफी सारी ऐसी मेरी मान्यताएं थी। जैसे-जैसे मैंने लॉर्ड के तत्वज्ञान का रसपान शुरू किया, आचमन शुरू किया, चिंतन, मनन, निध्यासन किया, कंटेंप्लेट किया, मुझे पता खुद को मेरे जो फ्लॉज़ थे, जो मेरी कमियां थी, वो मेरे सामने आई। आज मेरे एक बैलेंस व्यू है सभी चीजों को लेकर के। मैंने ही वीडियो बनाए हैं कैंडिड कौशिक के कि भाई, शादी नहीं ही करनी चाहिए। अब लॉर्ड को सुनने के बाद मुझे मन कर रहा है, मैं फिर से वीडियो बनाऊंगा कि भाई, ऐसा नहीं होता है। मैं गलत था। मेरी काफी सारी धारणाएं दोस्तों टूटी हैं और बहुत पंच संप्रदायों में गया। बहुत मैंने इधर-उधर, मुझे कहीं जवाब नहीं मिले हैं, जो जवाब यहां पर मिले हैं।

तो जब कोहिनूर इरादा मिल जाता है, तो हमें यह भावना आती है। कुछ-कुछ बार लोग लिखते हैं कि आप प्रशंसा करते हो लॉर्ड को। कोई। अरे भाई, मुझे पता है लॉर्ड को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। पर मैं अपने भाव क्यों ना साझा करूं भाई? जो मेरा जीवन अनुभव है, उसको मैं क्यों यहां पर कैंडिड। अगर नाम है मेरी चैनल का, तो कैंडिड हो के, निखलस हो कर के, ट्रांसपेरेंट हो कर के मैं क्यों ना रखूं? वो भी तो गलती है। उसको अगर आप दबा देते हो अच्छी चीजों को, तो आह्वान करूंगा आपको रिक्वेस्ट भी करूंगा, विनती करूंगा कि मेंबरशिप में जाना। इसका कोई मूल्य नहीं है। मूल्य हम चुका नहीं सकते हैं। पर अगर आप गए वहां पे, आप मुझे निश्चित बोलोगे एक दिन में।

तो लॉर्ड बहुत सारे लोग जो कॉल लेते हैं, उनको बोल बोलता हूं रिलेशनशिप को लेकर के कि भाई, पहली बात बोलता हूं, एक चैनल मैं आपको भेजूंगा इस कन्वर्सेशन के बाद। वहां पर आप जाना और वहीं पर आपको आपके सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे। तो फिर से बोलता हूं, लास्ट टाइम बोलता हूं, ये खत्म होने के पहले, प्लीज प्लीज प्लीज मेंबरशिप लेना। क्योंकि ना लॉर्ड को कुछ ऐसा है, वो कभी बोलते नहीं है। मैं खुद भी बोला शुरुआत में लॉर्ड कि जॉइन बटन तो मोनेटाइज होने के बाद मिलता है। औपचारिकता के रूप में हम वो कर देते हैं। भीतर जाकर के पर वास्तव में उस मेंबरशिप का कोई मीनिंग नहीं होता है। ना हमारा कंटेंट भी ऐसा होता है कि कोई वहां पर मेंबरशिप लेगा। मतलब पर यहां पर आपको लिटरली फील होगा कि साला, ओह माय गॉड।

वो जैसे किले के अलग-अलग दरवाजे खुलते हैं ना, वो पुराणों की वार्ताओं में और दुनिया के बहुत सारे तत्वज्ञान में। वो जो एक दुनिया है, हमारे यहां पे भी है, आपको पता हो तो क्रिया योगा, स्वर्गाश्रम का कॉन्सेप्ट कि जो कि हमें बड़ा ही काल्पनिक लगता है। पर वो मुझे ऐसा मतलब वो खुलते हैं लेयर। मानव सभ्यता के लेयर खुल रहे हैं। मनुष्य की चेतना के अलग-अलग लेयर खुल रहे हैं। आपकी समझ के लेयर खुलेंगे। एंटीनेटलिज्म को लेकर के, शादी को लेकर के, बहुत सारी चीजों को लेकर। एक महीने पहले जब मैंने लॉर्ड को नहीं, लॉर्ड नहीं आए थे मेरी फीड में। तब जो मेरे पॉइंट ऑफ व्यू थे, आज पूरे के पूरे बदल चुके। तब मैं डंके की चोट पर बोलता था। यही सत्य है। यही सत्य है। तो बहुत सारी परमानें टूटी हैं दोस्तों।

समय इसलिए बोल रहा हूं। अतिशयोक्ति नहीं कर रहा हूं। या फिगर नहीं कर रहा हूं। जरूरी लग रहा है इसलिए बार-बार बोल रहा हूं। प्लीज मेंबरशिप लेना। एक ऐसा अगोचर, एक ऐसा अगोचर विश्व खुल जाएगा जिसको कि स्यूडो साइंस बोला जाता है। जिसको कि हम ब्लूप्रिंट स्पिरिचुअलिटी बोल के कैंसिल कर देते हैं। वहां पर भी मेरी समझ लॉर्ड विकसित हुई है। स्यूडो साइंस को लेकर के मेरी जो समझ थी, वो भी बड़ी बदली है और आने वाले दिनों में बदलेगी।

तो थैंक यू सो मच। लव यू। एंड ऑन बिहाफ ऑफ लीजन, आई विल कम आउट ऑफ आउटसाइड ऑफ द फोर्ट। एक अंतराल के बाद मैं फिर से आऊंगा। जब भी आऊंगा, तब हमारी प्रार्थना को स्वीकार करना और यहां पे आना। लव यू। थैंक यू सो मच। थैंक यू सो मच फॉर। वी विल सी। ओके ओके। थैंक यू। थैंक यू। ग्रेट।