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DAY 10 | HINDI | IV SEM | B.CA | CHITTHA LEKHAN YA BLOG | L1

Vidhyaashram35:14

Transcription

रेडियो का जब आविष्कार हुआ, सिर्फ हम उसे सुन सकते थे, श्रव्य के द्वारा यानी सिर्फ उसे सुना करते थे। ब्लॉक का अर्थ है एक दैनिक डायरी या एक डायरी। अंतराल के पश्चात कुछ ना कुछ नई पाठ्य सामग्री जो है, प्रकाश में लाई जाती है [संगीत]।

प्रणाम। मैरी हाना, यस अति उत्तम। विद्याश्रम की हिंदी प्रवक्ता, मेरे फ़र्स्ट सेमिस्टर के बीसीए के जितने भी विद्यार्थी हैं, आप सबका मेरी कक्षा में स्वागत है। मेरे विद्यार्थियों, जो कि इस सेमिस्टर आपको यूनिट चार के अंतर्गत अंतरजाल पर पत्र-पत्रिकाएँ हैं, उसी के अंतर्गत जो चिट्ठा लेखन या ब्लॉग जिसे कहा जाता है, यानी चिट्ठा लेखन को ही ब्लॉग कहा जाता है, तो इसी के बारे में मैं आपको जानकारी दूँगी। ब्लॉक का अर्थ, उसकी परिभाषा और उसके स्वरूप के बारे में जानेंगे।

मनुष्य का एक सहज स्वभाव है कि वह अपने आसपास में घटित घटनाओं के बारे में जानने और सुनने की उत्सुकता से साहित्य रहता है। उसमें जानने की एक चेष्टा उसके मन में उत्पन्न होती है। किसी भी विषय पर जानकारी देना और जानकारी पाना, मनुष्य का एक सहज स्वभाव है, उसका एक गुण है। इसी स्वभाव के कारण प्राचीन काल से ही राजा और महाराजा जो है, वो प्रजा को आदेश देने के लिए शिलालेखों पर स्तंभ लेख के द्वारा राजनीतियों और युद्ध का संदेश और अन्य जानकारियों को जन साधारण तक पहुँचाते थे। तो यह जो मनुष्य में एक उत्सुकता रहती है कि कोई भी आसपास घटी हुई घटना को जानने, उसे समझने की और उसे देने की, उसी से यह या नहीं, वो जानकारी को वो कहे सभी को बाँटना भी चाहता है और उस जानकारी को पाना भी चाहता है। इसीलिए पुरातन काल में भी राजा-महाराजा लोग जो है, शिलालेख पर स्तंभ लेख में युद्ध का संदेश और राजनीतियों के बारे में और अन्य जानकारियों को जनसाधारण तक लिखकर पहुँचाया करते थे।

आज दुनिया की खबर रखने के लिए अनेक इलेक्ट्रॉनिक तथा प्रिंट माध्यमों का आविष्कार हुआ है, जैसे समाचार पत्र, मास मीडिया, सोशल मीडिया आदि। प्रिंटिंग मशीन के आविष्कार के साथ-साथ पत्रकारिता यानी जर्नलिज्म तथा समाचारों का संकलन, संपादन तथा प्रकाशन का कार्य आरंभ हुआ। रेडियो के आविष्कार से श्रव्य माध्यम, यानी रेडियो का जब आविष्कार हुआ, सिर्फ हम उसे सुन सकते थे, श्रव्य के द्वारा, यानी सिर्फ उसे सुना करते थे। तथा टेलीविजन के आविष्कार से दृश्य माध्यम, यानी टेली यानी दूरदर्शन, टीवी का जब आविष्कार हुआ, तो उसे हम देख भी सकते थे, सुनने के साथ-साथ। तो विश्व के सामने आया, लेकिन आधुनिक दुनिया में कंप्यूटर और इंटरनेट के आविष्कार के साथ सूचना के क्षेत्र में नई क्रांति का जन्म हुआ है। एक नई क्रांति उत्पन्न हुई है। विश्व के किसी भी कोने में घटती आज यथार्थ शीघ्र इंटरनेट के माध्यम से जनता तक पहुँच जाती है। विश्व के किसी भी कोने में कोई घटना घटे तो मिनटों में, सेकंडों में वो न्यूज़ जनता तक पहुँच जाती है। तो एक नई क्रांति है। भारत में पत्रकारिता का आरंभ जन कल्याण के लिए रहा है, इसीलिए इसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। जन के यानी लोगों के कल्याण के लिए पत्रकारिता का आरंभ हुआ, इसीलिए इसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा गया। लेकिन आज मीडिया जन कल्याण से अधिक आत्म कल्याण की तरफ बढ़ता जा रहा है। जन कल्याण से ज़्यादा आत्म कल्याण की तरफ बढ़ता जा रहा है, क्योंकि आज मीडिया मशीन नहीं बल्कि एक व्यवसाय बना हुआ है।

ब्लॉक का इतिहास। ब्लॉक को हिंदी में चिट्ठा लेखन कहते हैं। ब्लॉक को हिंदी में चिट्ठा लेखन कहते हैं। ब्लॉक का अर्थ एक दैनिक डायरी या एक डायरी। अंतराल के पश्चात कुछ ना कुछ नई पाठ्य सामग्री जो है, प्रकाश में लाई जाती है। आधुनिक काल का एक प्रभाव पूर्ण मीडिया ब्लॉगिंग जो जन कल्याण के लिए बढ़ रहा है। इस पर डॉक्टर संध्या गर्ग का मानना है कि जो भी हो, आज ब्लॉगिंग मीडिया के लिए हथियार, कुछ भी हो, आज ब्लॉगिंग एक हथियार बना हुआ है, एक औजार बना हुआ है और यह डॉक्टर संध्या गर्ग कहती हैं, फिर हथियार के रूप में निरंतर विकसित हो रहा है। हथियार के रूप में विकसित यानी उसका प्रोग्रेस हो रहा है और आम आदमी की आवाज इसमें सुनाई दे रही है। हो सकता है कि इस प्रसिद्ध शोर की पंक्ति बदलकर शीघ्र ही ऐसे सुनाई देने लगे कि जो जब तोप मुकाबला हो तो ब्लॉग लिखो। आज ब्लॉग इंटरनेट में उपलब्ध अन्य समूह माध्यमों से प्रभावपूर्ण या असाधारण है, जो कई ज्वलंत मुद्दों तथा समस्याओं का निष्पक्ष चर्चा का मंच है, एक चर्चा का विषय बना हुआ है, निष्पक्ष, किसी के पक्ष में नहीं है, ऐसा एक चर्चा का विषय बना हुआ है।

ब्लॉक की शुरुआत सर्वप्रथम 17 दिसंबर 1997 में हुई थी। 1997 में ज्वार बर्गर द्वारा वेब लॉग शब्द का इस्तेमाल किया गया। ब्लॉक शब्द का प्रयोग पीटर मर होल्ज़ ने मज़ाक में अपने ब्लॉग में, पीटर मीड कॉ के साइबर पर 1999 में किया था। ईवन विलियम ने पैरो लॉप्स में ब्लॉक शब्द का सन्‍या और क्रिया, अर्थात पोस्ट लिखना या पोस्ट करने के अर्थ में किया। हिंदी ब्लॉगिंग की शुरुआत 21 अप्रैल 2003 से मानी जाती है। इस दिन को हिंदी चिट्ठा लेखन का ऐतिहासिक दिन माना जाता है। आलोक कुमार ने 9211 ब्लॉग लिखा था। उन्होंने लिखा था, चलिए अब ब्लॉग बना लिया है तो कुछ लिखा भी जाए। वैसे ब्लॉग की हिंदी क्या होगी, पता नहीं है। अब तक ब्लॉग ही रखते हैं। पैदा होने के कुछ समय बाद ही नामकरण होता है ना। हिंदी में पहला ब्लॉग बनाने का श्रेय आलोक कुमार को जाता है। पहला ब्लॉग हिंदी में आलोक कुमार ने किया था। आलोक कुमार ने पहला ब्लॉग हिंदी में बनाया। ब्लॉक शब्द का अर्थ। ब्लॉग अंग्रेजी शब्द है, इसका मूल शब्द है वेब ब्लॉग। यह एक व्यक्तिगत वेबसाइट है, जिन्हें दैनिक डायरी की तरह लिखा जाता है। इसमें कुछ लेख, फोटो और बाहरी कड़ियाँ होती हैं। इनके विषय सामान्य भी हो सकते हैं और विशेष भी। चिट्ठा लेखन को ब्लॉगिंग कहा जाता है। तो ब्लॉग अंग्रेजी का शब्द है और जो कि मूल शब्द इसका वेब ब्लॉग है। एक व्यक्तिगत वेबसाइट जहाँ पर हर दिन का एक विवरण, हर एक दिन की दैनिक डायरी भी इसे कही जाती है। हर एक दिन की जो बात है उसमें लिखी जाती है। इसमें कुछ लेख, फोटो और बाहरी कड़ियाँ होती हैं। बाहरी कड़ियाँ होती हैं। इनके विषय सामान्य में हो सकता है और विशेष भी। चिट्ठा यानी ब्लॉगिंग कहा जाता है। इसे चिट्ठा लेख या ब्लॉगिंग भी कहा जाता है। फिर ब्लॉग इंटरनेट पर उपलब्ध एक स्वतंत्र नई पत्रिका, जिसके माध्यम से रोज हर घंटे कुछ ना कुछ लिखा जाता है। यानी रोज हर घंटे कुछ ना कुछ इसमें लिखा जाता है। इसमें ब्लॉगर ही संपादक, प्रकाशक, एडिटर होता है। ब्लॉगर ही जो लिखता है वही एडिटर है, संपादक है, वही सब कुछ इसमें लिखता है। यह व्यक्तिगत भी होता है या एक छोटे समुदाय द्वारा भी चलाया जा सकता है। इसमें टिप्पणी भी दे सकते हैं और एक छोटा समूह यानी समुदाय द्वारा भी इसे चलाया जा सकता है।

ब्लॉगर आकांक्षा यादव के अनुसार, एक इंटरनेट वेबसाइट जिसमें किसी की लचीली अभिव्यक्ति का चयन संकलन होता है और उसे हमेशा अपडेट होते रहता है, उसे ब्लॉक कहते हैं। यहाँ पर ब्लॉगर आकांक्षा यादव कहते हैं कि जो हमेशा अपडेट होता रहता है, उसी को हर एक यानी हमेशा जो अपडेट होता है, जिसमें किसी ना किसी यानी लचीली अभिव्यक्ति का चयन संकलित होता है, हमेशा वह अपडेट होता है, उसी को ब्लॉक कहा जाता है। इस तरह से यादव के अनुसार, यानी आकांक्षा यादव इस प्रकार कहते हैं। तो आगे देखिए, ब्लॉक का निर्माण। चिट्ठा बनाने के कई तरीके होते हैं। सबसे सरल तरीका है किसी अंतरजाल पर किसी चिट्ठा वेबसाइट जैसे ब्लॉग स्पॉट या लाइफ जर्नल या वर्ड प्रेस आदि जैसे स्थलों में से किसी एक खाता खोलकर लिखना शुरू करना है। दो आधार पर ब्लॉक बनाए जाते हैं, एक शुल्क सहित यानी पेड ब्लॉग और शुल्क रहित यानी अनपेड ब्लॉग। यह दो आधार पर ब्लॉक बनाए जाते हैं। फिर ब्लॉक के विभिन्न प्रकार। ब्लॉगिंग करने के विभिन्न कारण होते हैं, जैसे कुछ लोग अपने शौक के लिए ब्लॉगिंग करते हैं, सिर्फ अपने शौक के लिए ब्लॉगिंग करते हैं, तो कुछ इसे एक व्यवसाय बना लेते हैं। अपना एक बिजनेस की तरह इसे इस्तेमाल करते हैं, इससे धनार्जन भी करते हैं, इससे वो कमाई भी करते हैं। बिजनेस करते हैं, से कमाई भी होती है और इसके अतिरिक्त कुछ ब्लॉक किसी विशेष प्रयोजन से भी बनाए जाते हैं। किसी विशेष प्रयोजन के लिए भी यह ब्लॉग बनाए जाते हैं और किसी कार्यक्रम, गोष्ठी या सम्मेलन है तो उससे संबंधित ब्लॉग बनाते हैं, वह उस कार्यक्रम तक ही सीमित होता है और फिर शायद एक समय के बाद बंद भी हो जाता है। इसके अलावा कुछ ब्लॉग ऐसे भी हो सकते हैं जो एक समूह विशेष के लिए ही लिखे जाते हैं और सार्वजनिक रूप से सबके लिए उपलब्ध नहीं होते। सिर्फ यह ग्रुप के लिए लिखा जाता है और यह एक ब्लॉग जो कि कार्यक्रम के लिए बनाया जाता है, जो कि वहीं तक सीमित होता है। इस तरह से व्यक्ति अपने शौक के लिए भी ब्लॉगिंग करते हैं, कोई व्यवसाय के लिए, कोई एक कार्यक्रम की सूची या एक कार्यक्रम के लिए ब्लॉक तैयार करते हैं, वो वहीं तक सीमित हो जाती है। इस तरह से व्यक्ति अपने शौक के लिए, व्यवसाय के लिए बहुत तरीकों से ब्लॉगिंग करता है।

व्यक्तिगत या निजी ब्लॉक, पर्सनल ब्लॉग, जो कि यहाँ पर देखिए, निजी ब्लॉग व्यक्तिगत होता है। इसे अक्सर कोई सेलिब्रिटी, कोई सेलिब्रिटी और खिलाड़ी या मशहूर व्यक्ति लिखते हैं। कोई सेलिब्रिटी या खिलाड़ी या एक खिलाड़ी लिखते हैं, एक मशहूर खिलाड़ी के बारे में लिखते हैं। पर निजी ब्लॉगिंग यहीं तक सीमित नहीं है। आम जनता भी निजी ब्लॉगिंग बना सकते हैं, जिसमें निजी ब्लॉक पर अपने संस्मरण और निजी भाव और सामान्य लेखन जिसमें होते हैं। यह निजी ब्लॉक। तो व्यापारिक ब्लॉक जो कि बिज़नेस ब्लॉक कहा जाता है। कोई भी उत्पादक अपने उत्पादन की वेबसाइट पर एक ब्लॉग भी बनाता है, जिसके माध्यम से अपने ग्राहकों को अपने प्रोजेक्ट या सेवा से संबंधित नियमित सूचना आदि प्रदान करता है। अपने ग्राहकों तक जो भी निजी सूचना होती है, कोई भी एक सूचना उसे देने के लिए होती है, उस वक्त यह बनाया जाता है, जिसका लाभ उसे और उसके ग्राहकों को दोनों को होता है। एक ब्लॉग पोस्ट द्वारा एक ही समय पर हज़ारों लोगों को यह जानकारी दे सकता है। हज़ारों लोगों को इसकी जानकारी होती है। यह बिज़नेस ब्लॉग। व्यवसायी क्या पेशेवर ब्लॉगिंग, यानी प्रोफ़ेशनल ब्लॉगिंग। यह सबसे प्रसिद्ध ब्लॉगिंग है, यानी यह सबसे प्रसिद्ध ब्लॉगिंग में से एक प्रकार। आजकल यह खूब प्रचलित है। बहुत से लोग ब्लॉगिंग और वीडियो कंटेंट निर्माण में लगे हैं। वे अपने ऑनलाइन ब्लॉग या वीडियो चैनल से कुछ धन भी कमा लेते हैं। अपने चैनल से धन कमा लेते हैं। पेशा यानी पेशेवर ब्लॉगर एक तरह से रोज कुछ ना कुछ नया लिखता, पोस्ट करता रहता है अथवा वीडियो अपलोड करते हैं और अपने कंटेंट को ताज़ा बनाए रखते हैं। यह पेशेवर ब्लॉगर जो पैसे कमाने के लिए इस तरह का ब्लॉग बनाते हैं, उसे प्रोफ़ेशनल ब्लॉगर कहते हैं।

तो आगे है विशेष विषय पर ब्लॉग, क्लोज्ड ब्लॉग। इसमें ब्लॉगर किसी खास विषय पर ब्लॉगिंग करता है और एक तरह से उसे विषय में दक्षता के साथ उसका पूरा विवरण देता है। इसके लिए ब्लॉगर को सबसे पहले अपने विषय का चयन करना होता है और एक अनुक्रम में लेख लिखना होता है। ब्लॉगिंग में जैसे सौंदर्य ब्लॉग, मनोरंजन ब्लॉग, फिटनेस ब्लॉग, फैशन ब्लॉग, संगीत आदि विषय होते हैं। तो यहाँ पर इसमें यह क्लोज्ड ब्लॉग, क्लोज्ड ब्लॉग में ब्लॉगर किसी एक विषय पर यानी क्रम रूप से काम करना पड़ता है। कोई अगर मनोरंजन के लिए कर रहा है ब्लॉगिंग, तो वो क्रमबद्ध रूप से ही करना है और सौंदर्य यानी जो सौंदर्य का ब्लॉगिंग यानी जो कांति को बढ़ाने के लिए, सौंदर्य को बढ़ाने के लिए कोई ब्लॉगिंग कर रहा है तो वो भी क्रम अनुसार और फिटनेस के बारे में, फैशन के बारे में, संगीत के बारे में कह रहा है तो वह भी एक वो क्रमबद्ध रूप से इसका ब्लॉगिंग करता है। वही विशेष विषय पर ब्लॉगिंग करना कहा जाता है।

फिर आगे है सीमित ब्लॉग। यहाँ पर सीमित ब्लॉग जो कि इसमें ब्लॉगिंग जिसके तहत बने ब्लॉग सार्वजनिक रूप से इंटरनेट पर उपलब्ध नहीं होते। यह इंटरनेट पर उपलब्ध नहीं होते, सार्वजनिक के लिए आम वह इंटरनेट पर नहीं होते। यह बड़ी कॉपीराइट संस्था या शिक्षण संस्थाओं द्वारा सीमित, अपने इंटरनेट पर देखे और पढ़े जा सकते हैं। इनमें लिखी गई सामग्री आंतरिक दृष्टि से ही महत्त्वपूर्ण होती है और अपने सहकर्मी या छात्रों के लिए ही सीमित की जाती है। इसको लिमिटेड ब्लॉगिंग भी कहा जाता है। सिर्फ अपने छात्रों को, जो कि सीमित ब्लॉगिंग है, जो कि जितने लोगों को यह ब्लॉगिंग जाना चाहिए, इतना ही वह प्रसारित होता है। इसे सीमित ब्लॉगिंग कहा जाता है।

ब्लॉगिंग के लाभ। अपनी सूची पूरी कर सकते हैं और प्रसिद्धि पा सकते हैं। यह एक लाभ है। ब्लॉग द्वारा धन भी कमा सकते हैं। यह दूसरा लाभ है। और किसी विषय पर गहरी समझ है तो अपने ब्लॉग द्वारा दूसरों को मार्गदर्शन भी कर सकते हैं। ब्लॉग पर लोगों द्वारा कमेंट प्राप्त होते हैं तो उसका जवाब देकर चर्चाओं में भाग भी ले सकते हैं। यह भी एक लाभ है। ब्लॉग की आवश्यकता। तो अच्छे लेखक और लेखन कार्य कर सकते हैं। यह एक आवश्यकता है और अपने विषय में विशेषज्ञ बनते हैं। स्वतंत्र ज़िन्दगी जी सकते हैं, ऑनलाइन में अपनी पहचान बना सकते हैं। नई स्किल सीख सकते हैं, अपना ब्रांड बना सकते हैं, अच्छी नौकरी प्राप्त कर सकते हैं, लोगों की मदद और समस्याओं का हल कर सकते हैं, अपना व्यवसाय खड़ा कर सकते हैं। यह सब इसकी आवश्यकता है।

हिंदी के प्रमुख चिट्ठा लेखक। यहाँ पर अमित अग्रवाल, वर्तमान काल में भारत के सबसे बड़े ब्लॉगर, अमित अग्रवाल, सबसे बड़े ब्लॉगर अमित अग्रवाल, जो सभी ब्लॉगर्स के लिए प्रेरणा बने हुए हैं, एक मार्गदर्शी, एक प्रेरणा बने हुए हैं, एक प्रेरणा के श्रोता बने हुए हैं। हिंदी चिट्ठा लेखन के पितामह, ये हिंदी चिट्ठा लेखन के पितामह हैं। इनका जन्म फ़रवरी 1977 को नई दिल्ली में हुआ था। बचपन से ही इनको टेक्नोलॉजी में रुचि होने की वजह से वे आईआईटी से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की। फिर इसके बाद गोल्डमैन में नौकरी करने लगे। परंतु ब्लॉगिंग के बारे में जानने के बाद 2004 में, बचपन से ही इनको टेक्नोलॉजी में बहुत ज़्यादा रुचि होने की वजह से ये इंजीनियरिंग करके गोल्डमैन में नौकरी की। जब इनको 2004 में ब्लॉगिंग का पता चला तो उन्होंने नौकरी छोड़कर लब नोल ऑर्ग नाम की वेबसाइट शुरू की और यह पूर्णकालिक ब्लॉगर है। दूसरे हैं राजीव कृष्णा सक्सेना। तो यह गीत-कविता डॉट कॉम की स्थापना 2005 में राजीव कृष्णा सक्सेना द्वारा हुई। सक्सेना पेशे से प्रोफ़ेसर हैं और इस वेबसाइट पर उन्होंने गीत को सरलीकृत हिंदी में समझाया। वेबसाइट का दूसरा पक्ष कविता का है, जहाँ 1400 से अधिक कविताओं का संग्रह है। 1400 कविताओं का संग्रह है। श्रद्धा शर्मा, यह ब्लॉगर युवर स्टोरी की जनक और संपादक है। युवर स्टोरी की जनक और संपादक श्रद्धा शर्मा। अपना ब्लॉक 2008 में यूअर स्टोरी डॉट इन डोमेन से इन्होंने शुरू किया था और आज इनके ब्लॉग पर 10 मिलियन ग्राहक प्रति महीने आते हैं। श्रद्धा शर्मा एकमात्र ऐसी महिला ब्लॉगर है जिनकी गणना 10 ब्लॉगर्स की सूची में होती है। इन्होंने अपने वृत्ति की शुरुआत एक पत्रकार के तौर पर की थी, जिसमें से सीएनबीसी, टीवी18 और टाइम्स ऑफ़ इंडिया की पत्रकार रही थीं। इनके ब्लॉग से संबंधित आलेख प्रकाशन करती हैं। इनकी कमाई तो इनकी कमाई तो 40000 डॉलर महीना है, जो भारतीय रुपए में लगभग 28 लाख रुपए है। आशुतोष डूबे, हिंदी कुंज डॉट कॉम, कोलकाता निवासी श्री आशुतोष दुबे जी द्वारा संचालित ब्लॉग जो 2009 में प्रकाशित हुआ। इसमें हिंदी साहित्य से जुड़े लेखों का एक विशाल कोष है, जहाँ से एक वेब पत्रिका प्रकाशित की जाती है। एक वेब पत्रिका प्रकाशित की जाती है। हर्ष अग्रवाल, शूट मेलोड, यानी ब्लॉक के जनक हैं। शूट मेलोड ब्लॉग के जनक हैं। शूट मेलोड ब्लॉग के जनक हैं, जिसकी शुरुआत इन्होंने 2015 में की थी। इन्होंने पढ़ाई में इंजीनियरिंग की है, जबकि यह व्यवसाय से ब्लॉगर है। डोमेन लेने के पैसे नहीं थे और इन्होंने अपने दोस्त से उधार पैसे लेकर डोमेन खरीदा और चिट्ठा लेखन के सफ़र की शुरुआत की, जो आज छोटे ब्लॉगर्स के लिए एक प्रेरणा है। एक छोटे ब्लॉगर के लिए एक प्रेरणा बने हुए हैं और हर्ष अग्रवाल अपने ब्लॉग पर ब्लॉगिंग, मेक मनी ऑनलाइन आदि वर्ग पर आर्टिकल प्रकाशन करते हैं। इनका मासिक आया है 5434 डॉलर, जो कि भारतीय रुपयों में 370000 रुपए होगा। 3700000 होते हैं और शूट मेलोड के अलावा इनकी शूट मी हिंदी प्रमुख ब्लॉग बहुत ही मशहूर है। शूट मी हिंदी यह बहुत ही प्रसिद्ध है।

चंदन कुमार साहू, भारत के प्रमुख ब्लॉगर्स में बहुत मशहूर, हिंदी डॉट नेट वेबसाइट जिसका संस्थापक चंदन कुमार साहू है। इस ब्लॉगर को 2016 में, इस ब्लॉगर का इन्होंने 2016 में शुरू किया गया था, जिस पर टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर के साथ-साथ अन्य सूचनाएँ साझा की जाती हैं। इस वेबसाइट से कमाई का मुख्य जरिया Google Adsense के साथ-साथ Affiliate Marketing है। हिंदी भाषा में एक पुराना ब्लॉग, हिंदी मड नेट, हिंदी और भारत का एक मशहूर ब्लॉग वेबसाइट है।

हिंदी ब्लॉग लेखन, देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली एक भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा हिंदी में लिखी जाने वाली ब्लॉग लेखन, हिंदी ब्लॉग राइटिंग, सही साधनों की उपलब्धता की कमी के चलते वर्ष 2006 और सात तक अपने आप में बहुत कठिन कार्य था। धीरे-धीरे इंटरनेट पर नए-नए लेखन के साधन आते गए और आज हिंदी ब्लॉग लिखना उतना ही सरल हो चुका है जितना अंग्रेजी या अन्य भाषा में है। पर लेखन के साथ-साथ Google Search में भी इन ब्लॉग या वेबसाइट को खोज परिणामों में उचित स्थान नहीं मिलता था, जिसके चलते आज कंटेंट होते हुए भी हिंदी ब्लॉगर ट्रैफ़िक के लिए तरसते हैं। स्मार्टफोन के तेजी से विकास के साथ ही हिंदी भाषी पाठकों की खोज के तौर-तरीके भी बदल गए हैं और हिंदी खोजों में तेजी से उछाल आया। 2015 के आसपास मुख्य सर्च इंजन कंपनियों को लगा कि हिंदी सामग्री की सर्च इंडेक्सिंग को बढ़ावा देकर वे बड़े पाठक वर्गों की ज़रूरतों को पूरा कर सकते हैं और सटीक खोज परिणाम भी प्रदान कर सकते हैं। इसी क्रम से उन्होंने हिंदी कंटेंट की सटीक रैंकिंग के साथ ठीक खोज परिणाम प्रदान करने के लिए अपने एल्गोरिथम में कुछ बदलाव किया। एल्गोरिथम में हिंदी का महत्व बढ़ता चला गया। Google ने Adsense Account के लिए भी हिंदी कंटेंट का समर्थन शुरू किया। बस यह एक मोड़ था हिंदी ब्लॉग लिखने वालों के लिए। लोगों का रुझान अचानक से हिंदी लेखन की ओर बढ़ गया। अचानक हिंदी लेखन की तरफ बढ़ गया और एक से बढ़कर एक हिंदी ब्लॉगर जन्म लेने लगे। आज के समय कोई भी व्यक्ति आसानी से अपना हिंदी ब्लॉग बना सकता है और ऑनलाइन कमाई शुरू कर सकता है।

हिंदी ब्लॉग लेखन के लाभ और हानियाँ। जिस प्रकार हर वस्तु या विषय के नकारात्मक और सकारात्मक दोनों ही पक्ष होते हैं, वैसे ही हिंदी ब्लॉग लेखक को अपनी मनपसंद भाषा में लिखने के भी कुछ लाभ और हानियाँ हैं। आमतौर पर अधिकांश ब्लॉगर हिंदी ब्लॉग जगत में बिना तैयारी और बिना पूर्व अध्याय के कूद पड़ते हैं, पर कुछ ही समय में निराश होकर या तो ब्लॉग को ही बंद कर देते हैं, फिर उस पर लिखना छोड़ देते हैं। हिंदी ब्लॉग लेखन के लाभ। हिंदी भाषा लिखते समय इसमें सहजता महसूस होती है। फिर अपने विचारों को हिंदी में प्रकट करना आसान होगा, यानी आसानी से अपनी बात यहाँ पर अपने विचारों को हिंदी में प्रकट करना बहुत ही आसान होगा। यह एक लाभ है और अपनी बातों को करोड़ों हिंदी भाषियों तथा विश्व भर तक आसानी से पहुँचाया जा सकता है। हिंदी भाषा और साहित्य का विकास कर सकते हैं। अच्छी हिंदी भाषी ब्लॉगर अभी बहुत कम हैं, इसीलिए अपना व्यवसाय भी शुरू कर सकते हैं।

फिर हिंदी ब्लॉक लिखने की समस्याएँ या चुनौतियाँ। तो यहाँ पर हिंदी में लिखने के लिए कीबोर्ड आदि का इस्तेमाल थोड़ा कठिन है। सर्च इंजन अभी भी पूर्ण रूप से हिंदी कंटेंट की रैंकिंग ठीक से नहीं कर पाते। तो यहाँ पर हिंदी की रैंकिंग ठीक से नहीं कर पाते। Google Adsense से होने वाली कमाई बहुत कम ही रहती है। Google से होने वाली कमाई बहुत कम रहती है। हिंदी ब्लॉगिंग का दायरा अभी छोटा है। ब्लॉगर का परिणाम, कमेंट आने में समय लगता है।

हिंदी ब्लॉग लेखन का भविष्य। किसी भी क्षेत्र में शुरुआत के बाद ही उतार-चढ़ाव के बाद ही एक स्थायित्व का दौर आता है, जब वहाँ केवल गुणवत्ता और अच्छी सामग्री ही टिक पाती है। ठीक वैसे ही अच्छे हिंदी ब्लॉग लेखकों के लिए आने वाला समय एक स्थायी उद्योग का रूप लेगा। आज भी इंटरनेट पर पढ़ने वाले अधिक हैं और लिखने वाले बहुत कम हैं। ऐसे में अनंत संभावनाओं से भरा हिंदी ब्लॉग जगत खुला है। विश्व में लगभग 35 करोड़ लोग हिंदी बोल और पढ़ सकते हैं। यह अपने आप में एक बड़ी संख्या है। अपने आप में एक बहुत बड़ी संख्या है। कोई भी हिंदी ब्लॉग लिखने वाले यदि शुरू में छह महीने मन लगाकर मेहनत कर ले तो वह भविष्य का सफ़र बहुत ही आसानी से बिता सकते हैं। यानी बहुत आसान उनके लिए यह हो जाएगा। यह स्थान बनाने के लिए ईमानदारी बहुत ज़रूरी होती है। स्थान बनाने के लिए ईमानदारी बहुत ज़रूरी होती है। आज बहुत से सफल हिंदी ब्लॉगर लेखकों ने कठिन मार्ग पर चलकर सफलता प्राप्त कर ली है। सफलता प्राप्त कर ली है। हिंदी ब्लॉगिंग दुनिया में सफलता प्राप्त करने के लिए लेखकों की गुणवत्ता और ईमानदारी ही सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान होगा। फिर हिंदी के ब्लॉक पर शुरुआत में प्रति क्लिक कमाई थोड़ी कम होती है, पर धीरे-धीरे पाठकों की अधिकता के चलने से ब्लॉक पर ट्रैफ़िक बहुत अधिक आ रही है और कमाई भी बढ़ रही है। इस प्रक्रिया में कम से कम छह महीनों से लेकर एक वर्ष तक का इंतज़ार भी करना पड़ सकता है। इस प्रकार आज हिंदी ब्लॉगिंग एक व्यवसाय के रूप में बढ़ रहा है। चिट्ठा लेखन या ब्लॉक के बारे में आज मैंने आपको जानकारी दी है। धन्यवाद।