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America का सबसे घातक B2 Bomber बनाने वाला Indian Engineer क्यों भुगत रहा Jail की सजा?। Hindi News

Dainik Jagran - दैनिक जागरण4:51

Transcription

वी प्रोवाइड यू द प्लेटफार्म टू टर्न योर ड्रीम्स इनटू रियलिटी। गिविंग्स टू योर एस्पिरेशंस विद के आर मंगलम यूनिवर्सिटी।

बी-2 स्टील्थ बॉम्बर, अमेरिका की सबसे गोपनीय और महंगी फौजी तकनीक। दुनिया के सबसे घातक बॉम्बर विमान की तब खूब चर्चा हुई जब इसने ईरान में घुसकर उसकी परमाणु फैसिलिटीज को उड़ा दिया। शीत युद्ध के चरम पर अमेरिका ने एक ऐसी तकनीक विकसित की थी जिसने ना केवल उसे अपने प्रतिद्वंदियों पर रणनीतिक बढ़त बनाने का मौका दिया बल्कि छह दशक बाद भी उसने अपनी ताकत का पूरी दुनिया को एहसास कराए रखा। यह तकनीक थी स्टील्थ, जिसको पाने की होड़ आज भी लगी हुई है। लेकिन क्या हो अगर इस बॉम्बर का डिजाइन बनाने वाला ही इसे दुश्मनों को बेच दे?

चीन ने कथित तौर पर जासूसी के जरिए इस स्टील्थ तकनीक को हासिल किया, जिसमें एक अमेरिकी भारतीय इंजीनियर, नौशीर गोवाडिया की भूमिका सामने आई है। वर्तमान में केवल तीन देशों—अमेरिका, रूस और चीन—के पास ही स्टील्थ तकनीक है। अमेरिका ने 1958 में इसकी शुरुआत की। जबकि सोवियत संघ, जो अब रूस है, उसने इसे 1974 में हासिल कर लिया। वहीं चीन ने 2011 में J-20 फाइटर जेट के परीक्षण के साथ ही इसे हासिल किया। जहां अमेरिका और रूस ने अपनी तकनीक खुद विकसित की, वहीं चीन ने कथित तौर पर जासूसी के जरिए इसे हासिल किया। जिसे एक भारतीय अमेरिकी, नौशीर गोवाडिया ने हासिल किया गया।

1944 में मुंबई में जन्मे नौशीर गोवाडिया 1960 के दशक में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए थे। जहां उन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन में डिजाइन इंजीनियर की नौकरी हासिल की, जो B-2 स्टील्थ बॉम्बर विमान बनाती है। नौशीर ने B-2 के रडार और इंफ्रारेड डिटेक्शन को कम करने, इसके हीट सिग्नेचर को घटाने, एग्जॉस्ट कॉन्फ़िगरेशन और रडार तरंगों से जुड़े पार्ट्स में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने विमान को बेहतर बनाने में भी काम किया। 1980 के दशक के अंत में नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन से जल्दी रिटायरमेंट के बाद भी नौशीर ने 1997 तक अमेरिकी सरकार के साथ ठेकेदार के रूप में गोपनीय जानकारी संभाली। लेकिन 2000 के दशक की शुरुआत में उनकी चीन यात्राओं ने जांच एजेंसियों का ध्यान अपनी तरफ खींचा। साल 2005 में उनकी गिरफ्तारी हुई और 2010 में उन्हें जासूसी, साजिश और अमेरिकी हथियार निर्यात नियंत्रण अधिनियम के उल्लंघन में 14 आरोपों में दोषी ठहराया गया। उन्हें 32 साल की सजा सुनाई गई।

जांच में खुलासा हुआ कि नौशीर ने चीन को स्टील्थ तकनीक से जुड़ी गोपनीय जानकारियां लीक कीं, जिसके बदले उन्हें मोटी रकम मिली। इस पैसे से उन्होंने हवाई के माउई द्वीप पर समुद्र के किनारे आलीशान विला खरीदा। उन्होंने चीन में सैन्य फैसिलिटीज का दौरा किया, स्टील्थ विमानों की हीट सिग्नेचर को कम करने जैसी तकनीक पहलुओं पर भी प्रेजेंटेशन दी और यहां तक कि एक क्रूज मिसाइल को भी डिजाइन किया, जिसकी तुलना अमेरिकी हवा से हवा मिसाइलों से की गई। अदालत में नौशीर के वकीलों ने तर्क दिया कि उन्होंने केवल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डाटा साझा किया और उन्होंने दावा किया कि वह सिर्फ एक इंजीनियर थे जिनका मकसद एयरोस्पेस तकनीक को आगे बढ़ाना था, ना कि अमेरिका को कोई नुकसान पहुंचाना। लेकिन अभियोजन पक्ष ने इसे खारिज करते हुए कहा कि लीक की गई जानकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर किया है।

नौशीर की सजा के दो महीने बाद, जनवरी 2011 में चीन ने अपना पहला स्टील्थ विमान J-20 की टेस्टिंग की। साल 2016 में चीन ने H-20 लंबी दूरी के स्टील्थ कम वर्ष की घोषणा की, जो B-2 स्पिरिट से मिलता-जुलता है। नौशीर ने चीन के अलावा जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड को भी गोपनीय जानकारियां लीक की थीं। साल 2010 में सजा सुनाते हुए सहायक अटॉर्नी जनरल डेविड क्रिस ने कहा कि नौशीर ने पैसे के लिए चीन को हमारे सबसे संवेदनशील हथियार डिजाइन दिए।

सोचिए अगर यह भारतीय इंजीनियर भारत में रहकर इस तकनीक को विकसित करता तो आज भारत की ताकत का दूर-दूर तक कोई सानी ना होता। लेकिन रुपयों के लालच में नौशीर ने दुश्मन चीन को ऐसी तकनीक लीक कर दी जो आज भारत के लिए भी बहुत बड़ा खतरा है। नौशीर ने क्या सही किया? आप अपनी राय कमेंट के जरिए हमें जरूर भेजें।