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ठीक है। बमला रहमान रहीम। अल्हम्दुलिल्लाह। ला सलाम रसूला। तफसीर की हम जरा हल्की सी रिवीजन कर लेते हैं। पिछली हमने सर फातिहा के कुछ नाम पढ़े थे। जरा जल्दी जल्दी बता दें कौन-कौन से नाम हैं? अल काफिरून नहीं। अल काफिर तो ना किसी ने अल काफिया। ठीक है। सबल मसानी, उमल कुरान, उमल किताब, अल काफिया हो गया। अस्सला माशाल्लाह। जी, रुकिया रुकिया। ठीक है। यह सब मेरे साथ बोले। रुकिया, रुकैया। कोई नहीं बोलेगा। सर फातिहा का नाम रुकैया नहीं है। जिसका नाम रुकैया, उसी का नाम रुक— सर फाते का नाम क्या है? रुकिया। यह अरबी में थोड़ा सा आगे पीछे करेंगे तो गड़बड़ सकती है। अच्छा, इसके अलावा और क्या क्या पढ़ा था हमने? अजु बिल्लाह के बारे में। हम पनाह जो है किससे ले रहे होते हैं? ठीक है। अल्लाह की मांगते हैं। और अल्लाह किससे हमें बचाए? शैतान से। क्यों अजु बिल्लाह हम पढ़ते हैं? कुरान पढ़ने से पहले। ठीक है। शैतान के अटैक्स होते हैं। वो पहला अटैक वसवसे का। क्या होता है कि आपको कुरान पढ़ने नहीं देगा। तो आप अल्लाह की पनाह मांग रहे होते ताकि वो आप वो नाकाम हो जाए। फिर उसका दूसरा अटैक क्या होता है कि जब आप पढ़ने लगते हैं, उसका अटैक होता है कि आप पढ़ते रहे, दिन रात पढ़ते रहे, लेकिन आपको समझ कुछ ना आए। तो आप इससे भी पनाह मांगते हैं कि अल्लाह मुझे इससे भी बचा ले। फिर उसका तीसरा अटैक क्या होता है कि समझ आ जाए आपको, लेकिन अमल ना आप करें। समझ बहुत कुछ आता है आपको कुरान के बारे, लेकिन अमल नहीं करने देगा आपको। और फिर पांचवा आखरी अटैक क्या होता है उसका कि आपको समझ भी आ गई, अमल भी कर लिया आपने, अब वो बोलेगा कि चलो बस इसकी हद तक रहने दो, यह क दूसरे को जाकर ना बता दे। तो शैतान के ना बेसिकली अटैक्स होते हैं। वो स्टेप बाय स्टेप आपको अप्रोच करता है। तो इसलिए आप अल्लाह से पनाह मांग रहे होते हैं। अल्लाह की पनाह मांग रहे होते हैं कि उसके हर एक एक हमले से जो है वो अल्लाह आपको बचा ले। बिस्मिल्लाह के हमने क्या क्या फायदे पढ़े थे? अल्लाह की मदद होती है, बरकत होती है उस काम में, शैतान से हिफाजत होती है। और सबसे अहम फायदा क्या है? हां, बिल्कुल। सबसे अहम जो फायदा कि अल्लाह और उसके रसूल सला सलम के ऑर्डर पर आप चल रहे, इता कर रहे। बमला रहमान रहीम जो है, ये सर फातिहा का हिस्सा है या नहीं है? हाँ, माशाल्लाह। इस मसले पर इख्तलाफ है। ठीक। बाज़ उलमा कहते हैं है, बाज़ उलमा कहते हैं कि सर फातिहा का हिस्सा नहीं है। क्या इसका सलूशन है? कैसे हम बच सकते हैं इस इख्तलाफ से? पढ़ ले। सबसे बेहतर है बिस्मिल्लाह रहमान रहीम के साथ पढ़े, तो सबसे बेहतर। अच्छा, अब हम आगे आज शुरू करते हैं। देखते हैं तीन से चार आयत इंशाअल्लाह लेंगे, मजीद। चल, अब शुरू करते हैं। जो सूरत फातिहा की आयत है, अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन। इसका तर्जुमा क्या है? अल्हम्दु का मतलब आपको ना ये— अल्हम्दु का मतलब, अल्हम्दु का मतलब पहले सिर्फ इसका चले। तमाम तारीफें लिल्लाही। कौन सा बता सकता है? ये किसने कहा? सिर्फ माशाल्लाह। जबरदस्त। माशाल्लाह। बकला लिल्लाही। सिर्फ अल्लाह के लिए। ठीक है। ये जो लाम जेर है ना, यह खास कर रहा है माने को। यह जो शुरू में लिल्ला लिखा हुआ है कि सिर्फ अल्लाह के लिए। अगले लफ्ज का मतलब, तर्जुमा रब्ब चले। ठीक है। इसको रब ही रखते हैं। अल आलमीन का मतलब क्या है? चले, तमाम जहानों का। इंग्लिश में इसकी क्या ट्रांसलेशन है? कौन बता सकता है? इंग्लिश में इसकी क्या ट्रांसलेशन बनती है? आमतौर पर क्या सुनी हुई है आपने? जी, किसी ने हाथ खड़ा किया? यहाँ पर जवाब देना चाहते हैं? जी। यूनिवर्स कह रहे हैं। और भी कोई ट्रांसलेशन करना चाहता है? माशाल्लाह। अच्छी ट्रांसलेशन। जी, आप यूनिवर्स भी देखेंगे, आप ऑल वर्ल्ड्स भी देखेंगे। ठीक है। तमाम जहानों का, चले, ऑल यूनिवर्स। इस तरह के डिफरेंट आते हैं। इंशाअल्लाह उस पर हम आएंगे। अभी सबसे पहले जो सूरत फातिहा, जो इस आयत में पहला लफ्ज है, अल्हम्दु। पहले इससे शुरू करते हैं। यह तो जो लफ्ज है ना, बेसिकली ये दो लफ्ज है, अल और उसके बाद हमद। यह जो अलिफ लाम है ना, यह हर तरह की चीज को शामिल कर लेता है। यानी इंग्लिश में हम इसको बोलेंगे, यह हर चीज को इंक्लूड कर लेता है उसमें कि हर किस्म की तारीफ। असल में जो तारीफ ट्रांसलेशन है, वो कौन से वर्ड की है? हमद की है। लेकिन हम जब तर्जुमा पढ़ रहे होते हैं, अक्सर आपने देखा होगा, लिखा होता है कि तमाम तारीफें अल्लाह की हैं। तो ये तमाम का वर्ड कहां से आया? ये अल से आया, अलिफ लाम से कि आप उसको जनरल कर रहे हैं, हर किस्म की तारीफ। अच्छा, वो तारीफ जो है, चाहे खूबसूरती के लिहाज से हो तो भी किसकी है? अल्लाह ताला की है। चाहे वो ताकत के लिहाज से हो, वो किसकी है? अल्लाह ताला की। चाहे वो जहान के लिहाज से हो, तो वो तारीफ किसकी है? अल्लाह की। बाज़ औकात हम देखते हैं कि दुनिया में ही हमें ये कुछ चीजें नज़र आ रही होती हैं। मिसाल के तौर पे आपने दुनिया में कोई ऐसी चीज देख ली जो बड़ी ताकतवर चीज है, किसी इंसान को देख लिया बहुत ताकतवर है, तो आप उसकी तारीफ कर देते हैं कि यार यह तो बहुत ताकतवर है। असल तारीफ किसकी है? और किस तरह? अल्लाह की। असल तारीफ है। यह उसको ताकत किसने दी है? अल्लाह ताला ने दिया है। आप देखते हैं कोई बड़ा जहीन है, आप कहते हैं यह तो बहुत ही स्मार्ट, बहुत ही शातिर है। यह जो उसकी जहान है, जो स्मार्टनेस है, यह किसने उसको दिया? अल्लाह ताला ने दिया। आप देखते हैं कोई चीज बड़ी खूबसूरत है, एक जगह बड़ी खूबसूरत आपको वो मंज़र देखते हुए हैरान हो रहे हैं और आप बस उसकी खूबसूरती को देखते जा रहे हैं। तो वो खूबसूरती किसने उसको दी है? अल्लाह ताला ने दी है। तो आप सोचें कि ये मखलूक, यह सब मखलूक हैं, इंसान हो, कोई चीज़ें हो, पहाड़ हो गए या आपने समुंदर में एक ऐसा मंज़र देख लिया या समुंदर के अंदर, तय में अंदर जाकर मंज़र देख लिया, कोई ऐसी मखलूक देख ली कि आप कहते हैं क्या खूबसूरती है इसकी, माशाल्लाह। तो असल खूबसूरती किसने उसको दी है? अल्लाह ने दी है। और क्या मखलूक का अल्लाह ताला के साथ हम कोई कंपैरिजन या मुवाज़ा कर सकते हैं? नहीं कर सकते। तो सोचें कि यह तो एक महदूद चीज़ है जिसका कोई मुवाज़ा ही नहीं है। तो अल्लाह ताला अल कवी है, जिसके पास सबसे ज़्यादा ताकत है। अल्लाह ताला अल जमील है। हदीस में आता है ना, इन्नाल्लाह जमील। अल्लाह ताला जमील है। अल्लाह की खूबसूरती इतनी है कि हमारी आँखें दुनिया की नज़र से देख ही नहीं सकती। क़यामत के दिन जिनको अल्लाह ताला का दीदार होगा, अल्लाह उनको वह ताकत देगा आँखों को कि वो अल्लाह ताला को देख सकें। वरना अल्लाह ताला की खूबसूरती, किबरिया और ताकत ऐसी है कि हमारी दुनियावी जो भी चीज़, उसका तसव्वुर भी नहीं कर सकती, देख भी नहीं सकते। और यही वजह है कि जन्नत में जाने के बाद भी जन्नती लोगों को सबसे ज़्यादा मज़ा किस चीज़ का आएगा? अल्लाह के दीदार का। इतना मज़ा आएगा कि उनके लिए अल्लाह ताला ने ख़ास एक दिन रखा होगा कि जिस दिन फ़रिश्ते ऐलान करेंगे उनको कि आओ आज हम रहमान की ज़ियारत करने जाएँगे। वो लोग जाएँगे, जन्नती अपने बीवियों को छोड़कर जाएँगे वहाँ पर अल्लाह का दीदार करने के लिए। फिर अल्लाह के दीदार के बाद वो लोग इतने ज़्यादा खूबसूरत हो जाएँगे कि उनकी बीवियाँ जब वो लौटेंगे, हैरान हो जाएँगी कि आपकी खूबसूरती जाने के बाद ज़्यादा बढ़ चुकी है। अब जब आप वापस आए हैं, तो खूबसूरती, ताक़त, किसी भी चीज़ में आप तारीफ़ कर रहे हो, असल वो किसको लौटती है? वो अल्लाह को लौटती है। तो यह चीज़ हमेशा ज़हन में रखें कि कोई आपकी तारीफ़ कर रहा हो या आप किसी की तारीफ़ कर रहे हो, असल वो किसकी है? वो अल्लाह की है। यह पार्ट हम अक्सर भूल जाते हैं। हम यहाँ तक तो ज़रूर कह देते हैं कि यार ये माशाल्लाह, बड़ा अच्छा लड़का है, बहुत ही अच्छी बच्ची है, नेक है, नमाज़ पढ़ने वाला है, अख़लाक़ अच्छा है। लेकिन यह सब उसको किसने दिया? यह अल्लाह ताला ने दिया। तो असल तारीफ़ लौटती है अल्लाह ताला की तरफ़। तो आप जब नमाज़ शुरू कर रहे होते हैं, आप इस चीज़ का इकरार कर रहे होते हैं। अल्हम्दु, हर किस्म की तारीफ़, इसकी कोई लिमिट नहीं है। हर किस्म की तारीफ़। उसके बाद आप क्या कहते हैं? किसके लिए है? लिल्लाही। असल वर्ड है अल्लाह, लेकिन उससे पहले क्या है? लाम। और यह देखिए, इसको मैं ज़ूम कर लूँ। हाँ, चले, ठीक है। ये जो लाम जेर है ना, यह ख़ास कर रहा है कि सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह ताला के लिए। तो जो पहला जुमला था, जो पहला क़लमा इसका है, अल्हम्दु, यह आम है, हर चीज़ शामिल हो रही है। लेकिन जो दूसरा है, लिल्लाह, यह क्या कर रही है? यह ख़ास हो रहा है कि हर किस्म की तारीफ़ें किसकी तरफ़ लौट रही हैं? अल्लाह ताला की तरफ़। तो यह है अल्हम्दुलिल्लाह। अब इसमें हर किस्म की तारीफ़ है, चाहे वह आपको— मैंने आपको दो तीन अंदाज़ बताए ना, ताक़त के लिहाज से या खूबसूरती के लिहाज से या फिर जहान के लिहाज से या फिर कुछ भी हो सकता है उसमें। अब वो चीज़ आपको चाहे आसमानों में नज़र आ रही हो, चाहे ज़मीन पर नज़र आ रही हो, समुंदर की गहराइयों में नज़र आ रही हो, कहीं भी नज़र आ रही हो और नज़र ना भी आ रही हो, तो वो तारीफ़ किसको लौटेगी? अल्लाह ताला को। कौन सी चीज़ जो नहीं नज़र आती हमें? हवा नज़र नहीं आती। और कौन सी मखलूक अल्लाह की जो नहीं नज़र आती हमें? जिन्नात। ठीक है। और फ़रिश्ते नहीं नज़र आते। ठीक है। और कितने कितने ऐसे मखलूक हैं जिनका हमें पता तक भी नहीं है? शायद नज़र आ जाए, लेकिन हमने नहीं अभी तक देखा। इंसान अभी तक डिस्कवर ही नहीं किया उनको। वो चाहे ज़मीन पर भी हो सकते हैं, समुंदर में भी हो सकते हैं, हवाओं में भी हो सकते हैं, आसमानों में, कुछ पता नहीं। तो हर किस्म की तारीफ़ जो है किसको लौटती है? अल्लाह ताला की तरफ़। अब उसके बाद अल्लाह ताला अपनी ना एक क्वालिटी और एक सिफ़त बताता है और वह कौन सी है? रब्बिल आलमीन। रब का माना क्या है? यह मुझे कौन बता सकता है? जी, मोहब्बत भाई, पालने वाला। पालने वाला। दो जवाब आ गए। और पालने वाला। सबका यही जवाब है। हमारे यहाँ अक्सर इसका तर्जुमा किया जाता है पालने वाला। आपको पता है बहुत महदूद माना है रब के अंदर। पालने वाला सिर्फ़ एक रब के पूरे माने में से एक हिस्सा है। बिल्कुल, बिल्कुल। माशाल्लाह। असल में रब के अंदर ना, हमारे यहाँ अगर देखें, तर्जुमा किया जाता है पालने वाला। लेकिन पालने वाला ना बहुत, बहुत लिमिटेड है रब के अंदर। तक़रीबन अगर खुलासा किया जाए तो चार किस्म की चीज़ आती है उस चार में से एक में पालने वाला भी आ जाता है, लेकिन मज़ीद और बहुत सारी चीज़। वो कौन-कौन सी चीज़ है? चले, मैं जवाब देने से पहले सुन लेता हूँ। जी, रिज़्क देने वाला और ख़ालिक और ठीक है। रिज़्क देने वाला, राज़िक एक हो गया, ख़ालिक दूसरा हो गया और आक़ नहीं नहीं नहीं, जी, मालिक हो गया। चले, तीन हो गया, चौथा रह गया। मुदब्बिर आती है रब के अंदर। और अच्छा, आपकी मालूमात के लिए, रब का आज तक प्रॉपर ट्रांसलेशन नहीं की गई। कोई कर ही नहीं सकता। इसलिए जो लोग सही ट्रांसलेशन करते हैं ना, चाहे इंग्लिश में भी, वो रब को फिर रब ही लिख देते हैं क्योंकि उनको पता है कि रब की कोई ट्रांसलेशन नहीं है। इसकी एक्सप्लेनेशन ज़रूर है, इसकी शरह है, लेकिन प्रॉपर वर्ड, कोई ऐसा लफ़्ज़ जो रब का माना बता सके, वह आपको किसी दूसरी ज़बान में नहीं मिलेगा। यह अरबी की ख़ासियत है। तो रब के अंदर जो है ना, खुलासा ये है कि चार चीज़ आती है, ख़ालिक, मालिक, राज़िक और मुदब्बिर। अमर। अच्छा, ख़ालिक को इंग्लिश में क्या कहते हैं? अच्छा, मैं अब ना, मैं एक चीज़ बताता हूँ, मुझे ना जवाब यहाँ से सुनना है। ख़ालिक को इंग्लिश में क्या कहते हैं? चले। ये मालिक को इंग्लिश में क्या कहते हैं? यहाँ से जवाब देना है, पीछे से नहीं। नहीं, यहाँ से। यहाँ से। मैं उधर आऊँगा इंशाअल्लाह। मदद। ओनर। ओनर। ठीक हो गया। चले। राज़िक को क्या कहते हैं? यहाँ से कोई जवाब? चले, प्रोवाइडर हो गया। और आख़िरी मुदब्बिर। ये सबसे मैं पूछ रहा हूँ। हेल्पर, थोड़ा सा यानी उसका जवाब कुछ हद तक ठीक है। प्रोटेक्टर, यह भी कुछ हद तक ठीक है। इसकी भी कोई प्रॉपर ट्रांसलेशन नहीं। तो इसलिए, जी, डिसीजन मेकर। देखिए, हेल्पर, प्रोटेक्टर, डिसीजन मेकर उसी के अंदर आते हैं। इसलिए इसका आम तौर पर एक वर्ड कर देते हैं, मास्टर माइंड, कि जिसने सारी तदबीरें, सारी प्लानिंग, कायनात में सूरज कब आएगा, चाँद कब आएगा, ज़मीन कहाँ पर होगी, किस तरह घूमेगी, साल किस तरह चलेगा और फिर स्टार्स कितने होंगे, कौन सी किसकी क्या लोकेशन होगी, यह सब पूरी प्लानिंग जो है, तदबीर करने वाला कौन है? अल्लाह ताला। कौन सा इंसान कब इस दुनिया में आएगा, किस लम्हे में आएगा, कब बड़ा होगा, कब उसकी शादी होगी, फिर उसके बाद कब उसकी जॉब लगेगी, कब वह मरेगा, हर चीज़ उसके अंदर एक एक स्टेप की जो प्लानिंग है, ये मुदब्बिर। तदबीर करने वाला कौन है? अल्लाह ताला। तो रब के अंदर यह चार चीज़ें आप समझ ले, आपको रब का मिल जाएगा। यह है रब। अच्छा, उसके बाद अगला वर्ड उसको लेते हैं और फिर हम इस पूरी आयत को जोड़ देंगे ताकि आपको सही से एक माना इसका समझ आ जाए। आख़िरी लफ़्ज़ क्या है? अल आलमीन। ठीक है। आलमीन जिसका आमतौर पर तर्जुमा ये किया जाता है कि तमाम जहानों का रब और हर किस्म के जो भी जहान हैं। अच्छा, आलमीन जो है, यह जमा है। यह जो है ना प्लूरल वर्ड है। इसका मुफ़र्रद या इसका सिंगुलर वर्ड क्या है? मैं थोड़ा और सुनना चाहता हूँ। यह जवाब सही है वैसे। और भी कोई जवाब दे इसका? वैसे लिखा हुआ देख के पढ़। ठीक है। एक होता है आलम और इसी से मिलता जुलता लफ़्ज़ है वो क्या? आलिम। इल्म। एक तरह का आलिम। दोनों में क्या फ़र्क़ है? आलिम किसको बोलते हैं? इल्म सीखने वाला? नहीं। जिसके पास इल्म होता है वो सिखाता है। ठीक है। जिसके पास इल्म होता है, आलिम। तो आलम यह जबर के साथ है। ठीक है। इसलिए इसको आप कंफ़्यूज़ नहीं होना। आलिम कोई और होता है जो दीन का इल्म जिसके पास होता है और आलम क्या है? जो जबर के साथ है। शबाब भाई, बिल्कुल इशारा करके बता रहे हैं, तमाम जहानों का। ठीक है। तमाम जहानों का। रब्बिल आलमीन का मतलब, तमाम जहान। अच्छा, अब मैं चाहता हूँ सब ग़ौर से सुनें क्योंकि इसकी थोड़ी सी दो तीन मिसाल में एक्सप्लेनेशन है। आलम का जो वर्ड है, यह एक है मुफ़र्रद। ठीक है और इसकी जमा आलमीन है। आलम जो है, यह असल में ना दो तरह के होते हैं। ये दो तबक़ा से होते हैं। कौन-कौन से तबक़ा से? इसको लिख ले अपने पास। ठीक है। एक होता है ज़माने के तबक़ा से। इंग्लिश में आप इसको कह ले, टाइम के लिहाज से जो उसका ज़माना है, उस लिहाज से एक आलम होता है और दूसरा एक और आलम होता है। वो किस लिहाज से? लिखा हुआ है, किस लिहाज से? मखलूक़ के लिहाज से। क्रिएशन्स के लिहाज से। यह दो चीज़ आपको समझ आ गई। अच्छा, अब दोनों की मैं तफ़सील में थोड़ा सा आपको लेकर जाऊँगा। पहले जाते हैं इसमें एक आलम है ज़माने के तबक़ा से, दूसरा आलम है मखलूक़ के तबक़ा से। पहले जरा ज़माने को देखें। ज़माने के तबक़ा से हमारे पास चार आलम हैं। इसको मैं ज़ूम करता हूँ। अच्छा, ये कौन-कौन से चार आलम हैं? पहली है, पहला जो है वो है आलम अरवाहा। पहले हम लोग कहाँ थे? आलम अरवाहा में थे। उसके बाद है आलम दुनिया। यह दूसरा आलम है ज़माने के तबक़ा से। फिर तीसरा कौन सा आता है? आलम बरज़ख़। बरज़ख़ कौन सा आलम है? क़बर का। माशाल्लाह। और उसके बाद आलम आख़िरत। हर कोई इन चार मिसाल से गुज़र के जाता है। पहले आलम अरवाहा में थे हम लोग, अभी इस वक़्त हम आलम दुनिया में हैं। इसके बाद कहाँ पर जाना है? आलम बरज़ख़ में और उसके बाद आलम आख़िरत में। तो यह चार तरह के आलम हैं ज़माने के तबक़ा से और हर कोई इस स्टेट से गुज़र के जाता है। तो यह आलम का जो है एक ज़माने के लिहाज से, दूसरा जो है वो किस लिहाज से है? मखलूक़ के लिहाज से। ज़माने के लिहाज से कितने आलम बताए आपको? चार। मखलूक़ के लिहाज से कितने आलम हैं? ये चार। जिन्होंने स्लाइड देखी है वो बोल रहे हैं। ये जानकर ये दिखाया था। असल में चार नहीं है मखलूक़ के लिहाज से। बाज़ उलमा कहते हैं कि इसकी कोई तादाद ही नहीं है। इनफिनिटी नंबर है, अनगिनत है। हमें पता ही नहीं है मखलूक़ के तबक़ा से किस क़दर आलम हैं। और अच्छा उसमें जो कैटेगरी है ना वो इस तरह है कि एक है आलम इंसान। एक आलम है दूसरा आलम जिन। जिन अलग से एक आलम है। अब वो छोड़ दें। जिन की तादाद कितनी है? इंसानों की तादाद कितनी है? वो एक अलग से है। लेकिन ये एक आलम है। इंसान एक है, आलम जिन। इसी तरह और कौन सा बता सकते हैं? जी। माशाल्लाह। फ़रिश्तों का आलम, मलाइका। ठीक है। हवा, जानवरों का, समुंदरी मखलूक़ का। यानी हर एक एक को उलमा ने अलग से एक आलम क़रार दिया और इसकी टोटल कितनी तादाद है? इसकी कोई तादाद नहीं। यह अनलिमिटेड नंबर तक, इनफिनिटी नंबर तक चलते जाते हैं क्योंकि हमें पता ही नहीं है ना। इसलिए इसका सबसे जो बेहतरीन जवाब है वो अल्लाह ताला ने कुरान मजीद में दिया है। वर इला तेरे रब के जो लश्कर हैं उनको कोई नहीं जानता सिवाय अल्लाह के। कितने इंसान हैं? कितने इंसान थे? कितने आएंगे? कुछ पता नहीं। कितने जिन्नात थे? हैं? आएंगे? कुछ पता नहीं है। फ़रिश्ते कितने हैं? कुछ पता नहीं है। समुंदरी मखलूक़, उसके बाद आसमान में जो मखलूक़ है, प्लेनेट हैं, सोलर सिस्टम है, सियार हैं, सितारे हैं। यह सब कितने हैं? कहाँ-कहाँ हैं? कौन सा कब शुरू होता है? कब ख़त्म होता है? इन सब का इल्म किसको है? सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह ताला को है। अब आप सोचें जब आप नमाज़ में ये आयत पढ़ रहे होते हैं, अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन, तो आप क्या कह रहे होते हैं? कि इन तमाम जहानों का रब कौन है? अल्लाह ताला है और उसकी उसके लिए जो है वो हर किस्म की तारीफ़ है। अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन। जब ये माना आपको समझ आएगा, आप ख़ुद सोचें नमाज़ में ध्यान जाएगा आपका। आपको समझ आ रही है अल्लाह ताला इतना बड़ा है कि आलम इतने ज़्यादा हैं, ज़माने इतने ज़्यादा हैं, मखलूक़ इतनी ज़्यादा है। कौन उनको कंट्रोल कर रहा है? कौन कैसे चला रहा है? और फिर ये जो एक यूनिवर्स का सिस्टम है उसको कौन कैसे चला रहा है? हमें कुछ पता नहीं है और कितना बड़ा है वो भी नहीं पता। ज़मीन का ये जो अर्थ है हमारा, दुनिया है, ये आपको पता है सूरज के मुक़ाबले में कितना छोटा है? कितना छोटा है? सूरज इतना बड़ा है कि लाखों आप ज़मीन भी डाल दें तो सूरज आप भर नहीं सकते। हम उस ज़मीन में छोटा सा एक नुक्ता हैं कई दूर अंदर जाकर और यह सूरज जो है यह बाकी कितने जो स्टार्स हैं जो सितारे उनसे कितना छोटा है और वो सितारे आगे जाते जाते गैलेक्सी बनती है, फिर गैलेक्सी के आगे क्लस्टर बनता है और फिर इतना बड़ा यूनिवर्स। इन सबको ख़ालिक कौन है? इनका अल्लाह ताला। मालिक कौन है इनका? अल्लाह ताला। राज़िक कौन है इनका? अल्लाह ताला। मुदब्बिर, सारी तदबीर करने वाला कौन है? अल्लाह ताला। अल्लाह ने एक एक को रोज़ी भी देनी है, हर रोज़ देनी है, कई बार देनी है, बड़ी बड़ी क्वांटिटी में भी देनी है। अल्लाह ने उनको पैदा भी करना है, उन पर अल्लाह का ऑर्डर भी चलता है। अभी इस वक़्त इस मस्जिद में कितनी चींटियाँ हैं? हमें ये नहीं पता। लेकिन दूर अंधेरे में एक काले पहाड़ के ऊपर काली चींटी भी चल रही होगी। अल्लाह ताला को पता है उसको मैंने रोज़ी किस तरह देनी है। अल्लाह को पता है कितनी चींटियाँ होंगी, उसको मैंने किस तरह रोज़ी पहुँचाना है। अल्लाह का काम है। हमारा ज़हन वहाँ तक जा ही नहीं सकता। हम इतने छोटे से और फिर भी देखिए इंसान के अंदर तक़ब्बुर कभी ख़त्म ही नहीं होता। छोटी सी एक जीत आ जाती है तो कहता है कि मैं हूँ। एक कामयाबी आ जाती है, कहता है देखो मेरा कमाल है, मेरी ज़हनियत देखो, मेरी प्लानिंग देखो, मेरे फ़ैसले देखो। हालाँकि सब उसको किसने दिया? अल्लाह ताला ने। और इतना बड़ा अल्लाह ताला होने के बावजूद, इतना अल्लाह अकबर होने के बावजूद सोचें कि इंसान दूसरों के सामने जाकर सजदा कर रहा हो, अपने जैसे लोगों के सामने जाकर सजदा कर रहा हो, उनसे दुआएँ माँग रहा हो, तो इंसान की कितनी बड़ी बदबख़्ती है? कितना बड़ा लॉस है कि इतने बड़े रब को वो छोड़कर किसी और के पास जाता है और इतने बड़े रब से वो डरता भी नहीं है। तो यह है अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन के हवाले से कि जो पहली आयत में आपको बताया। उसके बाद आज अगरचे और भी लेना था हमने। चले, एक और तस्वीर आपको दिखा देते हैं। इसमें ज़मीन कहाँ पर है? यह है क्या? पहले तस्वीर, सोलर सिस्टम है। ठीक है। ज़मीन किधर है? ये देखिए। ये हम लोग हैं? ये हम लोग नहीं हैं। ये हमारी ज़मीन है। हम इधर कई हैं। यह कौन सा प्लेनेट है? जिन लोगों ने ठीक है, जुपिटर है। सिर्फ़ आप देख लें, ज़मीन जो है जुपिटर से कितनी छोटी है? सूरज से कितनी छोटी है? सूरज तो भी आपको कुछ हिस्सा दिखा रहे हैं, 10, 20 पर दिखा रहे हैं। कहा जाता है 10, 1 लाख आप ज़मीन पर डाल दें तब जाकर भी सूरज भरेगा नहीं पूरा प्रॉपर। इतना बड़ा सूरज है। तो इंसान जब अल्लाह अकबर बोल रहा होता है, अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन कह रहा होता है, सोचें, तसव्वुर करें कि आप तसव्वुर नहीं कर सकते। इतनी बड़ी पहुँच इंसान की ज़हन की है ही नहीं। तो यह अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन और मज़ीद जो है इंशाअल्लाह फिर हम अगले क्लास में कंटिन्यू करेंगे। आख़िरी पॉइंट के साथ कि जब हम अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन बोलते, तो अल्लाह जवाब में क्या कहता है? हमनी अब्द अल्लाह कहता है। देखो मेरे बंदे ने मेरी तारीफ़ बयान की। वो बंदे का ज़हन ही नहीं है तो क्या उसको फ़ायदा हो रहा है? उसको क्या तसव्वुर है कि मैं किस रब के सामने खड़ा हूँ? अल्लाह ताला से दुआ करते हैं कि अल्लाह हमें सही अंदाज़ से सीखने की, समझने की और अमल करने की तौफ़ीक़ दे। बलाक़ टाइम मेरा हो गया। अभी हो गया। चले, ठीक है। जला जी। अल्लाह का दीदार जो है वो हर किसी के लिए है। ये एक हदीस जो है उसकी शरह है। जन्नती जब छोड़कर जाएँगे अल्लाह ताला के दीदार के लिए। सवाल ये था क्या क्या औरत अल्लाह ताला को नहीं देखेंगी? बीवियाँ को छोड़ के चले गए। तो जो दीदार है वो अल्लाह ताला की ऐसी अज़मत है, हर किसी को देगा और जो जितने ऊँचे लेवल पर होगा उसके लिए उतना ज़्यादा उस पर होगा। बला।