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हेलो, हेलो एवरीवन! आज हम पढ़ेंगे थर्ड चैप्टर ऑफ जियोग्राफी: ड्रेनेज। द फ्लोर वॉटर थ्रू वेल डिफाइंड चैनल्स। इमेज यानी कोई भी एरिया में रिवर सिस्टम कैसा है, उसे ड्रेनेज कहते हैं। रिवर सिस्टम एक मैन रिवर होती है और बहुत सारी छोटी रिवर्स जो मेन रिवर्स जाकर मिल जाती हैं और गिव फाइनली कोई लेक, पोषण या सी में बह जाती हैं। तो रिवर सिस्टम जो भी एरिया ग्रीन करती है, वह होता है ड्रेनेज बेसिन।
ड्रेनेज सिस्टम इन इंडिया: इंडियन रिवर्स दो मेजर ग्रुप्स में डिवाइड हैं - हिमालयन रिवर्स और पेनिनसुलर रिवर्स। यह दोनों तरह की रिवर्स एक-दूसरे से काफी अलग हैं।
पहले बात करते हैं हिमालयन रिवर्स की। ये अस्तर एलियन होते हैं, मतलब कि इसमें साल भर पानी रहता है - या तो बारिश से या फिर माउंटेंस में जो स्नो है, उसके मेल्ट होने की वजह से। हिमालयन रिवर्स बहुत लंबा ट्रैवल करते हैं और रास्ते में इंटेंसिव रोशेल एक्टिविटी करती हैं, जिसकी वजह से टपक उसमें वह बहुत सारा एसिड हुसैन कार्य करते हैं और मिडिल और लोअर कोर्ट ने मिडल आफ ए लेक और बहुत सी डिपोजिशन फीचर्स बनाती हैं। इनको विल डेवलप डेल्टा होता है।
और ज्यादा पेंशन रिवाइज न होती हैं। इनका रेनफॉल पर डिपेंड करता है। ब्राजील में जो बड़ी रिवर्स हैं, उनका भी वाटर फ्लो कम हो जाता है क्योंकि उस समय बारिश नहीं होती। इनका कोर्स छोटा और स्लो होता है, एस कंपेयर टो हिमालयन रिवर्स। ज्यादातर पेंशन व वेस्टर्न घाट में रीज़न होते हैं और वह बंगाल की तरफ जाती हैं।
हिमालयन रिवर्स: हिमालय की तीन मेजर रिवर्स हैं - न इंडस, गंगा और ब्रह्मपुत्र। चलो, हम लोग इन दिनों के बारे में यह करके जानते हैं।
इन थिस इंडस्ट्री व मानसरोवर लेक, जोगी टैबलेट में है, वहां से शुरू होती है और यह वेस्ट की तरफ से इंडिया में एंटर करती है लद्दाख से और यहां पर बहुत ही लुभावना गौर बनाती है। फिर ट्रिब्यूटरीज जैसे जांच कार और शोक इसमें मिलती हैं और फिर यह बल्टिस्तान और गिरगिट फीचर में जाती है और वहां से पाकिस्तान में चली को हैं। यहां इसमें चेहरा आप, झेलम, सतलज, व्यास और रवि आंखें मिल जाती हैं। इसके बाद वह साथ जाती है और रेजीडेंसी में मिल जाती है। इसकी टोटल m20 किलोमीटर है।
गंगा रिवर: उत्तराखंड में गंगोत्री ग्लेशियर है, वहां से भागीरथी निकलती हैं और यह जॉइंट करती है अलकनंदा को देवप्रयाग में और इन दोनों नदियों के संगम से गंगा बनती हैं। हरिद्वार में गंगा माउंटेन से प्लेंस में आते हैं। हिमालय से आने वाली कई नदियां गंगा की ट्रिब्यूटरीज हैं, जैसे या मना, जो कि यमुनोत्री ग्लेशियर से आती है और गंगा की पैरंट्स टो करती रहती है और गंगा की राइट बैंक में उसमें समाहित हो जाती है प्रयागराज में। गंगा में नेपाल हिमालय से भी नदियां आकर मिलती हैं, जैसे घाघरा, गंडक और कोसी। मइया रिवर नॉर्दर्न प्लेंस में हर साल बढ़ जाते हैं, जिससे सोल्ड टो एग्रीकल्चर परपस के लिए हम रस होता है और उसके साथ ही लाइफ एंड प्रॉपर्टी का भी बहुत नुकसान होता है। मेन रिवर्स जो पैन सोलर रूम से आती हैं और गंगा की ट्रिब्यूटरीज हैं, वह चंबल, बेतवा और सोन। Tubelight और लव बांध दोनों तरफ से व्यवस्थित सेव वाटर लेने के बाद, गंगा इष्ट की तरह चलती है दिल फर्क का इनवेस्ट तंग और यहां यह क्रिएट हो जाती है भागीरथी और हुबली में। हुगली कोलकाता से जाते हुए वृंदावन में मिल जाते हैं। जो मेन स्ट्रीम है, वह बांग्लादेश में जाकर ब्रह्मपुत्र से मिलकर मेघालय वह बना लेती है और फिर यह रिवर जाकर बे ऑफ बंगाल में चली जाती है। इन रिवर का जो डरता बनता है, उसको सुंदरबन डेल्टा कहते हैं। गंगा की लेंथ 2500 किलोमीटर है।
वाटर डिवाइड: जब कोई हेल्प, माउंटेन या एलिवेशन दो डी इमेज बेसन को अलग करे, उसको वाटर डिवाइड बोलते हैं। तो इंडस रिवर सिस्टम और गंगा रिवर सिस्टम का वाटर डिवाइड हरियाणा में अंबाला है।
ब्रह्मपुत्र रिवर सिस्टम: ब्रह्मपुत्र रिवर अट से आती है, फ्रॉम मानसरोवर लेक। इसकी लेंथ इंडस रिवर से ज़्यादा है। इसको टिप्स वृक्षों कहते हैं। रिमिक्स जाते हुए रिवर में बहुत ही कम वॉल्यूम होता है वाटर का और फ्रंट भी कम होता है क्योंकि कोड और ड्राई एरिया है यह। हिमालय से इष्ट की तरफ वो करती है और नामचा बरवा आते ही यूटर्न लेते है और इंडिया में एंटर करते हैं अरुणाचल प्रदेश में। यहां पर इसे भी हम कहते हैं। फिर यह दिबांग, लोहित और कई नदियों से मिलती है और असम में जाकर ब्रह्मपुत्र कहलाती है। इंडिया में क्योंकि यह रीजन में बहुत बारिश होती है, इसलिए रिवर में बहुत wall-e हो जाता है पानी का और फ्रंट का। असम में ब्रह्मपुत्र रिवर क्रेडिट चैनल बनाती है और बहुत सी विवरण ऑनलाइन भी बनाती है। ब्रम्हपुत्र को बांग्लादेश में जमुना कहते हैं। हर साल बारिश के मौसम में रिवॉल्वर लोग हो जाते हैं और तबाही मचाती है असम और बांग्लादेश में।
पेनिनसुलर रिवर्स: अब बात करते हैं पेंशन रिवर्स की। पेंशन का वाटर डिवाइड है वेस्टर्न घाट, चौकी वेस्टर्न कोस्ट की तरफ नोट से लेकर साउथ। ज्यादातर पैंशनर्स की तरह बहती और बेवकूफ बंगाल में जाती हैं, जैसे महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी। बहुत ही छोटी व्यास की तरफ जाती है वेस्टर्न घाट के। नर्मदा तापी से बड़ी रिवर है जो वेस्ट की तरफ जाते हैं और स्टोरीस बनाती हैं।
नर्मदा रिवर: नरमादा रिवर मध्य प्रदेश में अमरकंटक से निकालते हैं और पॉन्टिंग की वजह से जूरिस्ट वाली बनी है, नर्मदा रिवर उसमें ही बहती है। अपने रास्ते में जाते वक्त, नर्मदा बहुत सी ईश्वरीय ट्रैक्टर लोकेशन बनाते हैं, जैसे मार्बल रोम कुक और धुआंधार फॉल्स। फिर नर्मदा फाइनली अरेबियन सी में बह जाती है।
तापी रिवर: तापी मध्य प्रदेश से आती है, सतपुरा रेंजेस से। यह भी रिप्लाई में से बहती है और नर्मदा के पैरलल या करती रहती है। यह नर्मदा रिवer से छोटी होती है लेंथ में। इनवेस्ट प्रिय है वह है साबरमती, मां ही, भारत को।
यह महाराष्ट्र के नासिक में वेस्टर्न घटस से शुरू कर दी जाती है। दादरी पेनिनसुलर इंडिया में लार्जेस्ट रिवर है, जिसकी वजह से इसको दक्षिण गंगा भी कहते हैं। इसकी लेंथ फिफ्टीन हंड्रेड किलोमीटर है। गोदावरी बहुत ही ट्रिब्यूटरी से जुड़ी है, जैसे पूर्णा, वर्धते रंग का या व्रण और महानदी रिवर।
महानदी रिवर: महानदी छत्तीसगढ़ की लेंथ से शुरू होती है। इसे बहते हुए की लेंथ किलोमीटर।
महाबलेश्वर से शुरू होती है और किलोमीटर की यात्रा और प्रभात।
कावेरी रिवर ब्रम्हगिरी और तमिलनाडु के कुड्डालोर झुक जाती। इसकी लेंथ किलोमीटर। अमरावती और पानी रिवर समुद्रम वाटरफॉल भी बनाती है।
यह तो रहे विवाद के बाद। बहुत ही सिंपल है जो की तरफ जाती हैं, जैसे दामोदर, सुवर्णरेखा और बेताल ने।
अभी तक तो हमने नियुक्त करते हैं कि जैसे नेता लोग पानी में पानी की वजह से कुछ विंड, रिवर और एक्टिविटी की वजह से ले ले ले ले ले। यहां पानी बनाने में यूज होता है। यह लेस जॉइंट की वजह से यह की लार्जेस्ट फ्रेश वॉटर कि। नाचूरल लेख के अलावा, डांस बनाने की वजह से भी लेख बनती हैं, जैसे गुरु गोविंद सागर या भाखड़ा नंगल प्रोजेक्ट।
लेकिन हमारे लिए बहुत वैल्युएबल है। यह रिवर वॉटर को रेगुलेट करती है। बारिश के मौसम में यह बाढ़ से बचाती है और गर्मी के मौसम में पानी का कांस्टेंट सप्लाई मेंटेन करते हैं। लेकिन हाइडल पॉवर को भी डेवलप करने में हेल्प करती हैं। क्लाइमेट को मोटिवेट करती है, डिफिकल्ट सिस्टम मेंटेन करते हैं, ना चूर ब्यूटी बढ़ाते हैं, रिएक्शन और टूरिज्म में भी हेल्प करते हैं।
सिमिलरली, रिवर्स भी बहुत महत्वपूर्ण हैं हमारे लिए। नदियों का पानी हमारे लिए सब्सक्राइब बेटी के लिए हम यूज करते। नदी का पानी रिएक्शन, नैविगेशन और हाइड्रो पावर जनरेशन में यूज होता है। कि कोई नहीं तो हमने इस जीवन देने वाली नदियों को बर्बाद कर दिया। इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ रही है, जिसकी वजह से यह बहुत ज्यादा क्वांटिटी में पानी निकाला जा रहा है और रिवर में पानी कम हो रहा है। और दूसरी तरफ, इंडस्ट्रीज के इंप्रूवमेंट्स फॉर सीवेज वाटर में बिना ट्रीट करें दिल्ली गवर्नमेंट छोड़ दिए जा रहे हैं। इसकी वजह से ना केवल पानी की क्वालिटी खराब हो रही है, बल्कि रिवर अपने आप को सबस्क्राइब भी नहीं कर पा रही और कई भी कारणों की वजह से नदियों का पानी खराब हो रहा है, जैसे इंक्रीजिंग अर्बनाइजेशन, इंडस्ट्रियलाइजेशन एंड राइजिंग पोल्यूशन। तो हमें इन सब चीजों को देखकर इससे निपटने का प्रयास करना चाहिए ताकि हमारी नदियां और झीलें साफ-सुथरी रह सकें।
तो, इट्स एन ऑर्डर वीडियो। थैंक यू सो मच फॉर वॉचिंग एंड बाय।