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तो हमारे जो सबसे पहले दो कैंडल स्टिक पैटर्न हैं, वो हैं हैमर एंड हैंगिंग मैन पैटर्न। ये पैटर्न दिखने में बिल्कुल सिमिलर दिखाई देते हैं। तो आपको ये जो कैंडल दिखाई दे रही है, ये है हमारी हैमर कैंडल और ये जो कैंडल आपको दिखाई दे रही है, ये है हमारी हैंगिंग मैन कैंडल। अब दिखने में दोनों कैंडल सेम है, बस दोनों के कलर में डिफरेंस है। लेकिन मैं आपको बता दूं कि ये कैंडल अगर ग्रीन की जगह रेड भी होगी, तब भी ये हैमर कैंडल ही होगी, जबकि ये कैंडल अगर रेड की जगह ग्रीन भी होगी, तब भी ये हैंगिंग मैन कैंडल ही होगी। क्योंकि यहां पर जो इंपॉर्टेंट होता है, वो होता है ट्रेंड।
ये जो हमारी हैमर कैंडल होती है, ये डाउन ट्रेंड में बनती है और इस पैटर्न के बनने के बाद प्राइस बढ़ने के चांसेस होते हैं, इसलिए ये एक बुलिश कैंडल है। जबकि जो हमारी हैंगिंग मैन कैंडल होती है, ये अप ट्रेंड में बनती है और इस कैंडल के बनने के बाद प्राइस गिरने के चांसेस होते हैं, इसलिए ये एक बेयरिश कैंडल होती है।
अब हमारे जो नेक्स्ट कैंडलिंग पैटर्स हैं, वो हैं इनवर्टेड हैमर और शूटिंग स्टार। ये दोनों पैटर्स भी दिखने में बिल्कुल सिमिलर हैं। आप देख सकते हैं कि ये पैटर्न कुछ इस तरीके के नजर आ रहे हैं। यहां पर डिफरेंस सिर्फ इतना है कि ये ग्रीन कलर का है और ये रेड कलर का है। लेकिन यहां पर भी मैं आपको बता दूं कि अगर ये ग्रीन की जगह रेड भी होगा, तब भी ये इनवर्टेड हैमर पैटर्न ही होगा और अगर ये रेड की जगह ग्रीन भी होगा, तब भी ये हमारा शूटिंग स्टार पैटर्न ही होगा। क्योंकि यहां पर जो मेन इंपॉर्टेंट डिफरेंस होता है, वो होता है ट्रेंड का।
आप देख सकते हैं कि ये जो हमारा इनवर्टेड हैमर पैटर्न है, जो कि कुछ इस तरीके का दिखाई दे रहा है और इसको इनवर्टेड हैमर इसलिए कहा जाता है, क्योंकि ऐसा लग रहा है जैसे एक हथौड़े को उल्टा रखा गया है। तो ये ये जो पैटर्न है, ये डाउन ट्रेंड में बनता है। यानी अगर डाउन ट्रेंड में ये पैटर्न बनेगा, तो ये एक बुलिश पैटर्न होगा और इस पैटर्न के बनने के बाद प्राइस बढ़ने के चांसेस होते हैं। और अगर यही पैटर्न अप ट्रेंड में बनेगा, फिर चाहे वो रेड बने या फिर ग्रीन बने, तो ये एक शूटिंग स्टार पैटर्न होगा और इस पैटर्न के बनने के बाद प्राइस गिरने के चांसेस होते हैं।
यहां पर एक और चीज आपको बता दूं कि ये जो पैटर्न है, इसमें आपको नीचे कोई भी विक दिखाई नहीं दे रही है। लेकिन इस जगह पर अगर छोटी सी कोई विक होती है, तब भी उसको हैमर पैटर्न ही माना जाता है और यहां पर भी अगर इसकी जगह पर एक छोटी सी विक होती है, तो उसको शूटिंग स्टार पैटर्न ही माना जाता है।
नेक्स्ट कैंडलिंग पैटर्न है बुलिश स्पिनिंग टॉप एंड बेयरिश स्पिनिंग टॉप। बुलिश स्पिनिंग टॉप में मार्केट पहले डाउन ट्रेंड में होता है और उसके बाद एक सिंगल कैंडल बनती है, जिसकी जो बॉडी होती है, वो बहुत छोटी होती है और जिसकी जो अपर एंड लोअर विक होती है, वो उसकी बॉडी के लगभग टू टाइम्स होती है। यहां पर अपर एंड लोअर विक थोड़ी बहुत छोटी-बड़ी हो सकती है, लेकिन लगभग ये एक बराबर होती है और ये जो पैटर्न होता है, ये एक लट्टू की तरह दिखाई देता है, इसलिए इसको स्पिनिंग टॉप पैटर्न कहा जाता है।
यहां पर ये पैटर्न हमने आपको ग्रीन कलर का दिखाया है, इसकी जगह पर अगर ये रेड कलर का भी होगा, तब भी वो बुलिश स्पिनिंग टॉप ही होगा, क्योंकि यहां पर ट्रेंड इंपॉर्टेंट है और इस कैंडलिंग पैटर्न बनने के बाद इसका जो हाई है, आपने उसको मार्क कर देना है और उसके बाद जो नेक्स्ट कैंडल बनती है, अगर वो उसके हाई के ऊपर क्लोजिंग दे देती है, तो यहां से माना जाता है कि मार्केट के बढ़ने के चांसेस होते हैं। लेकिन इस कैंडलेस्टिक पैटर्न में आपको वॉल्यूम का यूज करना चाहिए कंफर्मेशन के लिए।
इसका जो अपोजिट कैंडलेस्टिक पैटर्न है, वो है बेयरिश स्पिनिंग टॉप, जिसमें मार्केट पहले अप ट्रेंड में होता है और उसके बाद एक हमारा स्पिनिंग टॉप पैटर्न बनता है, जैसा कि वहां बन रहा था। ये बिल्कुल वैसा ही होता है और इस जगह पर ये हमने आपको रेड कलर का दिखाया है, लेकिन इसकी जगह पर अगर ये ग्रीन कलर का भी होगा, तब भी वो बेयरिश स्पिनिंग टॉप पैटर्न ही होगा, क्योंकि ये अप ट्रेंड में बन रहा है और इस पैटर्न के बनने के बाद हमें क्या करना होता है, हमें इसके लो को मार्क कर देना है और इसको मार्क करने के बाद अगर हमारी जो नेक्स्ट कैंडल है, वो रेड कलर की बनती है और वो इसके लो के नीचे क्लोजिंग दे देती है, तो आप मान के चल सकते हैं कि यहां से मार्केट गिरने के चांसेस हैं। लेकिन इस जगह पर भी आपको कंफर्मेशन के लिए वॉल्यूम का यूज करना चाहिए।
अब जो हमारे नेक्स्ट कैंडलिंग पैटर्स हैं, वो हैं बुलिश एंगल्फिंग और बेयरिश एंगल्फिंग। ये दोनों पैटर्स भी दिखने में बिल्कुल एक जैसे लगते हैं और ये पैटर्स दो कैंडल से मिलकर बनते हैं। इन दोनों के बीच में फर्क ये है कि जो हमारा पहला पैटर्न है, बुलिश एंगल्फिंग, वो डाउन ट्रेंड में बनता है और यहां पर जो हमारी पहली कैंडल बनती है, वो एक रेड कलर की कैंडल होती है, जिसके बाद जो हमारी नेक्स्ट कैंडल बनती है, वो एक ग्रीन कलर की कैंडल होती है, जो कि रेड कलर की कैंडल के नीचे ओपन होती है और पहली रेड कलर की कैंडल के ऊपर जाकर क्लोज होती है, जिससे हमारी जो ग्रीन कलर की कैंडल होती है, वो रेड कलर की कैंडल को पूरा इंगल्फ कर लेती है और इसको बुलिश एंगल्फिंग कहा जाता है। इस कैंडल के बनने के बाद अगर ग्रीन कलर की कैंडल बनती है, तो माना जाता है कि यहां से मार्केट बढ़ सकता है।
अब ऐसा ही हमारा सिमिलर पैटर्न है बेयरिश एंगल्फिंग। इसमें मार्केट पहले अप ट्रेंड में होना चाहिए और यहां पर जो हमारी पहली कैंडल बनती है, वो एक ग्रीन कलर की कैंडल बनती है और इस कैंडल के बनने के बाद जो मार्केट होता है, वो ऊपर ऊपर होता है, यहां पर और उसकी जो क्लोजिंग होती है, वो इससे पहले वाली ग्रीन कलर की कैंडल के नीचे होती है, जिससे हमें एक बड़ी रेड कलर की कैंडल देखने को मिलती है और ये रेड कैंडल ग्रीन कैंडल को पूरा इंगल्फ कर लेती है, इसलिए इसको बेयरिश एंगल्फिंग कहा जाता है और इस कैंडल के बनने के बाद अगर हमारी नेक्स्ट कैंडल रेड कलर की बनती है, तो माना जाता है कि यहां से ट्रेंड रिवर्स हो गया है और मार्केट गिरने के चांसेस होते हैं।
नेक्स्ट कैंडलिंग पैटर्न है बुलिश एंड बेयरिश हरामी। यहां पर हरामी का मतलब प्रेग्नेंट वमन से होता है। तो सबसे पहले बुलिश की बात करें, तो यहां पर मार्केट पहले डाउन ट्रेंड में होता है और उसके बाद एक बड़ी रेड कलर की कैंडल बनती है। अब रेड कैंडल बनने के बाद जो हमारी नेक्स्ट कैंडल होती है, उसकी जो ओपनिंग होती है, वो रेड कैंडल के ऊपर होती है और उसकी जो क्लोजिंग होती है, वो रेड कैंडल के नीचे होती है, जिससे हमारी ये जो सेकंड ग्रीन कैंडल है, ये पूरी रेड कैंडल की बॉडी के अंदर आ जाती है और ऐसा माना जाता है कि ये जो रेड कैंडल है, ये वमन है और ये उसका बेबी है।
अब ये पैटर्न बनने के बाद अगर हमारी जो नेक्स्ट कैंडल है, वो ग्रीन कलर की कैंडल बनती है और वो इस रेड कैंडल के ऊपर क्लोजिंग दे देती है, तो आप यहां पर मानकर चल सकते हैं कि बुलिश पैटर्न बन गया है और इस पैटर्न के बनने के बाद शेयर की प्राइस बढ़ने के चांसेस होते हैं। इसका जस्ट अपोजिट होता है बेयरिश पैटर्न। यहां पर मार्केट पहले अप ट्रेंड में होता है और उसके बाद एक बड़ी ग्रीन कलर की कैंडल बनती है और इस ग्रीन कलर की कैंडल के बनने के बाद जो नेक्स्ट कैंडल होती है, उसकी जो ओपनिंग होती है, वो ग्रीन कलर की कैंडल के नीचे होती है और उसकी जो क्लोजिंग होती है, वो ग्रीन कलर की कैंडल के ऊपर हो जाती है, जिससे ये जो ग्रीन कैंडल है, वो रेड कैंडल को पूरा अपने अंदर रख लेती है, जैसे एक प्रेग्नेंट वमन ने अपने बच्चे को रखा है और इस कैंडलेस्टिक पैटर्न के बनने के बाद जो नेक्स्ट कैंडल है, अगर वो रेड कलर की कैंडल बनती है और वो इस ग्रीन कैंडल के नीचे क्लोजिंग दे देती है, तो यहां पर आप मान के चल सकते हैं कि यहां से मार्केट के गिरने के चांसेस हैं और ये एक बेयरिश पैटर्न है।
नेक्स्ट कैंडलिंग पैटर्न है बुलिश क्रॉस एंड बेयरिश क्रॉस। यहां पर बुलिश क्रॉस की बात करें, तो सबसे पहले मार्केट डाउन ट्रेंड में होता है और उसके बाद एक बड़ी रेड कलर की कैंडल बनती है। रेड कलर की कैंडल के बनने के बाद जो नेक्स्ट कैंडल होती है, वो इतनी छोटी होती है कि क्रॉस जैसी दिखाई देती है और ये कैंडल बनती कैसे है, चलिए समझते हैं। तो मान लीजिए मार्केट यहां पर ओपन हुआ, ओपन होने के बाद जो प्राइस है, वो यहां तक गई और यहां पर उसने अपना हाई बनाया, उसके बाद प्राइस नीचे तक आई और यहां पर उसने अपना लो बनाया और उसके बाद वापस जहां पर जो शेयर की प्राइस ओपन हुई थी, वहीं पर जाकर उसने अपनी क्लोजिंग भी दे दी, जिस वजह से इस कैंडल का या तो कोई रंग नहीं होता है, या फिर बहुत छोटा सा रंग होता है और इस वजह से ये जो कैंडल होती है, ये कुछ इस तरीके की दिखाई देती है।
तो अगर ये कैंडल बनती है, तो इसको कहा जाता है बुलिश क्रॉस और इस कैंडल के बनने के बाद जो अगर नेक्स्ट कैंडल है, वो हमारी रेड कैंडल के ऊपर क्लोजिंग दे देती है, तो इसके बाद प्राइस बढ़ने के चांसेस होते हैं। बट हमेशा कंफर्मेशन के लिए आपको वॉल्यूम का यूज़ करना चाहिए। इसका जस्ट अपोजिट होता है बेयरिश क्रॉस, जिसमें मार्केट पहले अप ट्रेंड में होता है, उसके बाद एक बड़ी ग्रीन कलर की कैंडल बनती है और इस ग्रीन कलर की कैंडल के बनने के बाद वापस से एक क्रॉस बनता है, जो कि मैंने आपको बताया कि किस तरीके से बनता है और इस कैंडल के बनने के बाद अगर जो नेक्स्ट कैंडल है, वो हमारी ग्रीन ग्रीन कलर की कैंडल के नीचे क्लोजिंग दे देती है, तो यहां पर आप मानकर चल सकते हैं कि मार्केट के गिरने के चांसेस हैं और इसको बेयरिश क्रॉस कैंडल स्टिक पैटर्न कहा जाता है।
अब जो हमारा नेक्स्ट कैंडलिंग पैटर्न है, वो है ट्विजर बॉटम एंड ट्विजर टॉप। ट्विजर बॉटम एक बुलिश कैंडलिंग पैटर्न होता है, जो कि डाउन ट्रेंड में बनता है। यानी इससे पहले मार्केट गिर रहा होता है, उसके बाद एक रेड कलर की कैंडल बनती है और इस रेड कलर की कैंडल के बनने के बाद एक ग्रीन कलर की कैंडल बनती है, जिनका जो क्लोज एंड ओपन प्राइस होती है, वो एक बराबर होती है। तो एक तरह से ये जो एरिया है, ये आपके लिए एक सपोर्ट की तरह काम करता है और अगर इस कैंडल के बनने के बाद जो नेक्स्ट कैंडल है, उसने इस कैंडल के ऊपर क्लोजिंग दे दी, तो आप मान के चल सकते हैं कि यहां से मार्केट बढ़ने के चांसेस हैं और इसको ट्विजर बॉटम कैंडलेस्टिक पैटर्न कहा जाता है।
इसका जो अपोजिट कैंडल स्टिक पैटर्न है, वो है ट्विजर टॉप, जो कि अप ट्रेंड में बनता है, जिसमें जो सबसे पहली कैंडल बनती है, वो एक ग्रीन कलर की कैंडल होती है और उस ग्रीन कलर की कैंडल के बनने के बाद एक रेड कलर की कैंडल बनती है, जो कि जहां पर ग्रीन कलर की कैंडल क्लोज हुई है, वहीं से ओपन होती है और जहां पर ग्रीन कलर की कैंडल ओपन हुई थी, वहीं पर जाकर क्लोज होती है, जिस वजह से ये दोनों कैंडल आपको लगभग बराबर दिखाई देती हैं। तो अगर हम ध्यान से देखें, तो यहां पर हमें दिखाई देगा कि इस जगह पर रेजिस्टेंस है और अगर रेड कैंडल के बनने के बाद जो नेक्स्ट कैंडल बनती है, वो भी एक रेड कलर की कैंडल होती है, जो कि इस रेड कैंडल के नीचे क्लोजिंग दे देती है, तो आप मांग के चल सकते हैं कि यहां से मार्केट गिरने के चांसेस हैं और इसको ट्विजर टॉप कैंडलिंग पैटर्न कहा जाता है।
अब जो हमारे नेक्स्ट कैंडल स्टिक पैटर्न हैं, वो है पियर्सिंग लाइन एंड डार्क क्लाउड कवर। पियर्सिंग लाइन एक बुलिश कैंडलिंग पैटर्न है, जिसमें मार्केट पहले डाउन ट्रेंड में होता है और उसके बाद एक बड़ी रेड कलर की कैंडल बनती है। अब अगर रेड कलर की कैंडल बनने के बाद जो हमारी नेक्स्ट कैंडल बनती है, वो रेड कलर की कैंडल के नीचे ओपन होती है, यानी यहां पर गैप डाउन ओपनिंग होती है और उसके बाद अगर ये जो ग्रीन कलर की कैंडल है, वो रेड कलर की कैंडल के 50% के ऊपर जाकर क्लोज हो जाती है, यानी इस कैंडल का जो आधा है, उसके ऊपर जाकर क्लोज हो जाती है, तो इस पैटर्न को पियर्सिंग लाइन पैटर्न कहा जाता है और इस पैटर्न के बनने के बाद प्राइस बढ़ने के चांसेस होते हैं।
इसका जस्ट उल्टा होता है डार्क क्लाउड कवर पैटर्न। ये एक बेयरिश पैटर्न होता है और इसमें मार्केट पहले अप ट्रेंड में होता है, जिसके बाद एक बड़ी ग्रीन कलर की कैंडल बनती है और इस ग्रीन कलर की कैंडल बनने के बाद जो मार्केट है, उसमें गैप अप ओपनिंग होती है। आप देख सकते हैं कि ये मार्केट यहां पर क्लोज हुआ था और अगले टाइम जब मार्केट ओपन हुआ, तो वो यहां पर ओपन हुआ है, तो बीच में एक गैप है। बट इस गैप अप ओपनिंग होने के बाद मार्केट गिरने लगता है और वो इतना गिरता है कि जो हमारी ग्रीन कलर की कैंडल है, उसके 50% के नीचे जाकर यहां पर मार्केट क्लोज हो जाता है। तो अगर इस तरीके का पैटर्न बनता है, तो इसको डार्क क्लाउड कवर कहा जाता है और इसके बाद प्राइस गिरने के चांसेस होते हैं।
अब जो हमारे नेक्स्ट कैंडलिंग पैटर्स हैं, वो हैं थ्री वाइट सोल्जर्स एंड थ्री ब्लैक क्रोज। थ्री वाइट सोल्जर एक बुलिश कैंडलिंग पैटर्न होता है, जिसमें तीन बड़ी-बड़ी ग्रीन कलर की कैंडल्स बनती हैं, जिनकी या तो बहुत छोटी विक होती है, या फिर इनके ऊपर कोई भी विक नहीं होती है, जैसा यहां पर दिखाई दे रहा है। इस पैटर्न के बनने के बाद प्राइस बढ़ने के चांसेस होते हैं। यहां पर हमने आपको ये जो ट्रेंड है, वो डाउन ट्रेंड में दिखाया है, लेकिन कई बार क्या होता है कि मार्केट अप ट्रेंड में होता है और उसके बाद तीन ऐसी बड़ी ग्रीन कलर की कैंडल्स बन जाती हैं, तो यहां पर भी इसका मतलब है कि जो बायर्स हैं, वो बहुत ज्यादा बुलिश हैं और इसके बाद भी प्राइस बढ़ने के चांसेस होते हैं।
इसका जस्ट अपोजिट होता है थ्री ब्लैक क्रोज, जिसमें तीन बड़ी-बड़ी रेड कलर की कैंडल्स बनती हैं और इसकी भी या तो छोटी सी विक होती है, या इसकी बॉडी में कोई भी विक नहीं होती है। ये पैटर्न हमने आपको अप ट्रेंड में दिखाया है, यानी इससे पहले अप ट्रेंड है और उसके बाद ये पैटर्न बना है, तो यहां से प्राइस गिरने के चांसेस होते हैं। लेकिन अगर मान लीजिए कि शेयर की प्राइस पहले से गिर रही है और उसके बाद भी ये तीन पैटर्स बनते हैं, तो इसका मतलब है कि यहां पर जो सेलर्स हैं, वो बहुत ज्यादा हावी हो चुके हैं और इसके बाद प्राइस गिरने के चांसेस होते हैं। यानी जब भी ये पैटर्न आपको दिखता है, इसका मतलब है कि यहां से अब प्राइस गिरने के चांसेस हैं और जब भी ये पैटर्न आपको दिखता है, इसका मतलब है कि यहां से प्राइस बढ़ सकती है। लेकिन क्लियर कर दूं कि सिर्फ ये देखकर आपको ट्रेड नहीं करना होता है। कंफर्मेशन के लिए हमेशा आपको और भी तरीके यूज करने होते हैं, जैसे आप वॉल्यूम इंडिकेटर का यूज कर सकते हैं। वैसे अभी तक आपको वीडियो पसंद आ रही है, तो वीडियो को लाइक लाइक जरूर कर दीजिएगा और हां, अगर आप चाहते हैं कि इसी तरीके से हम आपको चार्ट पैटर्न भी सिखाएं, तो उसके लिए चार्ट पैटर्स लिखकर कमेंट जरूर कर दीजिएगा।
अब हमारे जो नेक्स्ट कैंडलिंग पैटर्न हैं, वो हैं मॉर्निंग स्टार एंड इवनिंग स्टार। मॉर्निंग स्टार एक बुलिश कैंडलिंग पैटर्न होता है, इवनिंग स्टार एक बेयरिश कैंडलिंग पैटर्न होता है और ये दोनों पैटर्न भी दिखने में काफी हद तक सिमिलर हैं। मॉर्निंग स्टार पैटर्न में मार्केट पहले डाउन ट्रेन में होना चाहिए, यानी पहले गिर रहा होना चाहिए और उसके बाद एक बड़ी रेड कलर की कैंडल बनती है और इस रेड कलर की कैंडल के बनने के बाद एक छोटी सी कैंडल बनती है, जो कि यहां पर हमने ग्रीन कलर की दिखाई है, लेकिन इसकी जगह पर ये रेड कलर की भी हो सकती है। बस मेन इंपॉर्टेंट है कि वो कैंडल छोटी सी होनी चाहिए, कुछ इस तरीके की, क्योंकि ये जो छोटी कैंडल है, ये यहां पर हमें इन डिसीजन बता रही है।
अब सेकंड कैंडल बनने के बाद जो हमारी थर्ड कैंडल है, अगर उसमें गैप अप ओपनिंग होती है, गैप अप ओपनिंग का मतलब है कि ये कैंडल यहां पर क्लोज हुई है और अगली कैंडल यहां पर ओपन हुई है, तो बीच में एक छोटा सा गैप है और गैप अप ओपनिंग होने के बाद जो हमारी थर्ड कैंडल है, वो अगर एक बड़ी ग्रीन कलर की कैंडल बनती है, तो माना जाता है कि यहां से मार्केट बढ़ सकता है और वो कैंडल कितनी बड़ी होनी चाहिए, वो कैंडल होनी चाहिए जो हमारी रेड कलर की कैंडल है, उसकी 50% से ऊपर जाकर क्लोज होनी चाहिए। तो यहां पर आप देख सकते हैं कि इस कैंडल के आधे से ऊपर जाकर ये कैंडल क्लोज हुई है, तो अगर इस तरीके का पैटर्न बनता है, तो उसको मॉर्निंग स्टार कहा जाता है और इसके बाद मार्केट बढ़ने के चांसेस होते हैं।
इसका जस्ट अपोजिट होता है इवनिंग स्टार, जिसमें मार्केट पहले अप ट्रेंड में होता है, उसके बाद एक बड़ी ग्रीन कलर की कैंडल बनती है और इस ग्रीन कलर की कैंडल के बनने के बाद यहां पर एक छोटी सी कैंडल बनती है। ये यहां पर हमने रेड कलर में दिखाई है, लेकिन अगर ये ग्रीन में भी होगी, तो भी ये इवनिंग स्टार पैटर्न ही होगा, क्योंकि ये कैंडल इन डिसीजन को बताती है और इस पैटर्न के बनने के बाद अगर हमारी जो थर्ड कैंडल है, वो गैप डाउन में ओपन होती है, आप देख सकते हैं कि ये जो कैंडल थी, ये यहां पर क्लोज हुई थी और अगली जो कैंडल है, वो हमारी यहां पर ओपन हुई है, तो बीच में एक गैप है। तो अगर इस तरीके से गैप डाउन ओपनिंग होती है और उसके बाद एक बड़ी रेड कलर की कैंडल बनती है, जो कि ग्रीन कलर की बॉडी के 50% से नीचे जाकर क्लोज हो जाती है, यानी यहां पर, तो इस तरीके का जो कैंडलिंग पैटर्न होता है, उसको इवनिंग स्टार कैंडलिंग पैटर्न कहा जाता है और इसके बाद प्राइस गिरने के चांसेस होते हैं, क्योंकि ये एक बेयरिश पैटर्न है।
नेक्स्ट कैंडलिंग पैटर्स हैं थ्री इनसाइड अप एंड थ्री इनसाइड डाउन। थ्री इनसाइड अप एक बुलिश कैंडलिंग पैटर्न होता है, जो कि डाउन ट्रेंड में बनता है। यहां पर सबसे पहले एक रेड कलर की कैंडल बनती है। रेड कलर की बॉडी के अंदर ही एक ग्रीन कलर की कैंडल बनती है। आप देख सकते हैं कि इसकी जो ओपनिंग है, वो यहां पर है और क्लोजिंग है, वो यहां पर है और इसकी बॉडी के अंदर ही ग्रीन कलर की कैंडल बन रही है। अगर इन दोनों कैंडल्स को आप देखोगे, तो आपको पता चलेगा कि ये एक बुलिश पैटर्न है। तो अगर इस पैटर्न के साथ-साथ अगर एक तीसरी कैंडल बनती है, जो कि हमारी रेड कैंडल के ऊपर क्लोजिंग दे देती है, तो आप समझ सकते हैं कि ये एक थ्री इनसाइड अप पैटर्न है और इस पैटर्न के बनने के बाद ज्यादा चांसेस होते हैं कि मार्केट बढ़ जाएगा और इसके साथ ही यहां पर वॉल्यूम भी बड़ा होना चाहिए फॉर द कंफर्मेशन।
इसका जस्ट अपोजिट कैंडल स्टिक पैटर्न होता है थ्री इनसाइड डाउन। यहां पर मार्केट पहले अप ट्रेंड में होता है, उसके बाद एक बड़ी ग्रीन कलर की कैंडल बनती है और इस ग्रीन कलर की कैंडल के बनने के बाद जो हमारी नेक्स्ट कैंडल होती है, वो ग्रीन कलर की बॉडी के अंदर ही बनती है। आप देख सकते हैं कि बॉडी के अंदर बनी है और इसके बाद हमारी जो थर्ड कैंडल होती है, अगर वो एक रेड कलर की बनती है और वो हमारी फर्स्ट कैंडल के नीचे क्लोजिंग दे देती है, तो इन तीनों कैंडल्स को मिलाकर थ्री इनसाइड डाउन पैटर्न कहा जाता है और इस पैटर्न के बनने के बाद मार्केट के गिरने के चांसेस होते हैं।
नेक्स्ट कैंडलिंग पैटर्न है बुलिश एंड बेयरिश एबंडेंट बेबी। सबसे पहले बुलिश की बात करें, तो यहां पर मार्केट पहले डाउन ट्रेंड में होता है और उसके बाद सबसे पहले एक रेड कलर की कैंडल बनती है। इस रेड कलर की कैंडल के बनने के बाद जो नेक्स्ट कैंडल होती है, उसमें मार्केट में गैप डाउन ओपनिंग होती है।
यानी आप देख सकते हैं यहां पर मार्केट क्लोज हुआ था, उसकी जो ओपनिंग होती है वो यहां पर होती है। उसके बाद ये कैंडल कैसे बनती है, वो भी मैं आपको बता देता हूं। तो यहां पर कैंडल की ओपनिंग हुई, उसके बाद मार्केट मान लीजिए बड़ा और वो यहां तक गया और उसने अपना हाई बनाया। उसके बाद मार्केट नीचे आया और उसने अपना लो बनाया। लेकिन इसके बाद क्या होता है, मार्केट वापस से रिकवर करता है और जहां पर उसकी ओपनिंग हुई थी, वहीं पर उसकी क्लोजिंग हो जाती है। और इस तरीके से जो कैंडल बनती है, उसको कहा जाता है डोजी कैंडल।
अब इस कैंडल के बनने के बाद क्या होता है कि जो नेक्स्ट कैंडल होती है, उसमें जो ओपनिंग होती है वो ऊपर होती है। आप देख सकते हैं यहां पर ओपन हुई है, जिससे यहां पर एक गैप बन जाता है। तो इसको गैप अप कहा जाता है। यानी यहां पर गैप डाउन ओपनिंग होती है, यहां पर गैप अप ओपनिंग होती है। और उसके बाद जो हमारी थर्ड कैंडल बनती है, अगर वो एक ग्रीन कलर की कैंडल है, तो इसको बुलिश एबंडेंट बेबी कहा जाता है। क्योंकि यहां पर आप मान के चल सकते हैं कि जो हमारी सेकंड कैंडल है, वो इन दोनों कैंडल के नीचे है, जिससे वहां पर गैप बना हुआ है। तो ऐसा कहा जा रहा है कि किसी ने अपने बच्चे को छोड़ दिया है। तो इस पैटर्न के बनने के बाद अगर नेक्स्ट एक ग्रीन कलर की कैंडल बनती है, तो यहां पर आप कंफर्म हो सकते हैं कि मार्केट के बढ़ने के चांसेस हैं और इसको बुलिश एबंडेंट बेबी पैटर्न कहा जाता है।
इसका जस्ट अपोजिट होता है बेयरिश एबंडेंट बेबी, जिसमें मार्केट पहले अप ट्रेंड में होता है। उसके बाद जो फर्स्ट कैंडल बनती है, वो एक ग्रीन कलर की कैंडल होती है, जिसके बाद मार्केट में गैप अप ओपनिंग होती है। और उसके बाद ये एक डोजी कैंडल बनती है। इस कैंडल के बनने के बाद मार्केट में गैप डाउन ओपनिंग होती है। और उसके बाद जो हमारी थर्ड कैंडल बनती है, वो एक रेड कलर की कैंडल बनती है। तो जब यह पैटर्न बन जाता है, तो आप समझ सकते हैं कि हमारा बेयरिश एबंडेंट बेबी पैटर्न बन गया है और इसके बाद हमारी जो नेक्स्ट कैंडल है, वो भी अगर एक रेड कलर की कैंडल बनती है, तो यहां पर आप कंफर्म हो सकते हैं कि अब मार्केट के गिरने के चांसेस हैं।
नेक्स्ट कैंडलिंग पैटर्न है बुलिश थ्री लाइन स्ट्राइक एंड बेयरिश थ्री लाइन स्ट्राइक। ये एक ट्रेंड कंटिन्यूएशन पैटर्न होता है। तो यहां पर बुलिश के केस में मार्केट पहले अप ट्रेंड में चल रहा होता है। और उसके बाद तीन बड़ी-बड़ी ग्रीन कलर की कैंडल्स आपको देखने को मिलती हैं। ये तीन कैंडल्स बनने के बाद जो हमारी चौथी कैंडल होती है, उसकी जो ओपनिंग होती है, वो हमारी थर्ड कैंडल के ऊपर, यानी यहां पर होती है। लेकिन उसकी जो क्लोजिंग होती है, वो हमारी जो पहली कैंडल थी, उसके नीचे जाकर हो जाती है, जिससे हमारी जो रेड कैंडल है, वो इन तीनों कैंडल को ढक लेती है।
अब अगर यहां पर देखा जाए, तो यहां पर आपको दो तरह के पैटर्स देखने को मिल रहे हैं। एक तो यहां पर आपको थ्री वाइट सोल्जर्स वाला पैटर्न देखने को मिल रहा है। इसके साथ ही अगर इन दोनों पैटर्न को देखें, तो यहां पर हमें बेयरिश एल्फिन पैटर्न भी देखने को मिल रहा है। तो अगर आप ऐसे देखोगे, तो आपको बहुत ज्यादा कंफ्यूजन होगा। लेकिन मैंने आपको बताया कि ये एक ट्रेंड कंटिन्यूएशन पैटर्न है। तो अगर मार्केट पहले से बढ़ रहा है और उसके बाद ये पैटर्न बनता है। लेकिन इस बुलिश थ्री लाइन स्ट्राइक पैटर्न में, जो इसके बाद वाली कैंडल हमारी बनती है, उसमें गैप अप ओपनिंग होती है। यानी ये वाली जो कैंडल है, वो यहां पर क्लोज हुई है, जबकि अगली जो कैंडल है, वो यहां पर ओपन होती है और उसकी जो क्लोजिंग होती है, वो हमारी इस रेड कैंडल के ऊपर जाकर हो जाती है। तो इस केस में आप ये मान के चल सकते हैं कि अभी मार्केट बढ़ रहा था, तो आगे भी अभी बढ़ता रहने के चांसेस हैं।
जबकि इसका जो अपोजिट कैंडल इसिक पैटर्न है, वो है बेयरिश थ्री लाइन स्ट्राइक। यहां पर मार्केट पहले डाउन ट्रेंड में होता है। और उसके बाद हमारी तीन बड़ी-बड़ी रेड कलर की कैंडल्स बनती हैं। इन तीन रेड कैंडल्स बनने के बाद जो हमारी चौथी कैंडल होती है, उसकी ओपनिंग नीचे होती है। आप देख सकते हैं कि इसकी क्लोजिंग यहां पर हुई थी, इसकी अगली कैंडल की ओपनिंग नीचे हुई है, यानी यहां पर एक गैप डाउन ओपनिंग हुई है। लेकिन इसके बाद मार्केट बढ़ने लगता है और बढ़ते बढ़ते, जो हमारी फर्स्ट कैंडल थी, उससे ऊपर जाकर, यानी यहां पर क्लोजिंग दे देता है। तो ये हमारा बेयरिश थ्री लाइन स्ट्राइक पैटर्न है, जो कि आपको कंफ्यूज करेगा। लेकिन इसके बाद अगर मान लीजिए मार्केट में गैप डाउन ओपनिंग होती है, यानी यहां पर मार्केट ओपन हुआ और उसकी अगली जो कैंडल है, वो हमारी ग्रीन कैंडल के नीचे क्लोजिंग दे देती है। तो यहां पर आप यह मान के चल सकते हैं कि मार्केट पहले डाउन ट्रेंड में था और अभी भी वो ट्रेंड कंटिन्यू रहेगा और मार्केट गिरता रहेगा।
नेक्स्ट कैंडलिंग पैटर्न है बुलिश एंड बेयरिश किकर। सबसे पहले बुलिश किकर पैटर्न की बात करें, तो यहां पर मार्केट पहले डाउन ट्रेंड में होता है। और उसके बाद एक बड़ी रेड कलर की कैंडल बनती है। अब इस रेड कलर की कैंडल के बनने के बाद होता क्या है कि ये कैंडल ओपन यहां पर हुई थी, क्लोज यहां पर हुई थी। लेकिन इसके बाद जो हमारी नेक्स्ट कैंडल बननी चाहिए, वो एक ग्रीन कलर की कैंडल होनी चाहिए और उसकी जो ओपनिंग होनी चाहिए, उसमें गैप होना चाहिए। आप देख सकते हैं कि ये जो कैंडल है, वो यहां पर क्लोज हुई, मान लो ₹1 पे ये क्लोज हुई। लेकिन अगली जो कैंडल ओपन होती है, वो यहां पर ओपन हुई है। अब हो सकता है कि ₹10 पर ओपन हुई, तो यहां पर आपको ₹10 का गैप दिखाई दे रहा है। तो इसका मतलब है कि यहां पर गैप अप ओपनिंग हुई है। और अगर गैप अप ओपनिंग होने के बाद ये एक बड़ी ग्रीन कलर की कैंडल बन जाती है, तो इसको बुलिश किकर पैटर्न कहा जाता है। क्योंकि यहां पर आप समझ सकते हैं कि इस कैंडल ने इसको लात मारकर ऊपर पहुंचा दिया है। तो इस पैटर्न के बनने के बाद प्राइस बढ़ने के चांसेस होते हैं।
इसका जो जस्ट अपोजिट कैंडलेस्टिक पैटर्न है, वो है बेयरिश किकर। जिसमें मार्केट पहले अप ट्रेंड में होता है। और उसके बाद एक बड़ी ग्रीन कलर की कैंडल बनती है, जिसकी जो ओपनिंग हुई थी, वो तो यहां पर हुई थी, लेकिन उसकी जो क्लोजिंग हुई, वो यहां पर हुई। बट यहां पर क्लोज होने के बाद नेक्स्ट कैंडल जो ओपन होती है, उसमें काफी गैप डाउन ओपनिंग होती है। आप देख सकते हैं कि ये कैंडल यहां पर ओपन हुई है और यहां पर इसकी क्लोजिंग हुई है। तो यहां पर आपको एक बहुत बड़ा गैप देखने को मिल रहा है, जिस गैप को देखकर लग रहा है कि इस ग्रीन कैंडल ने इसको लात मारकर नीचे फेंका है। तो अगर ये जो थर्ड हमारी रेड कलर की कैंडल है, इसकी जो क्लोजिंग होती है, वो इस ग्रीन कलर की कैंडल के काफी नीचे होती है, तो माना ये जाता है कि यहां से जो ट्रेंड है, वो रिवर्स हो चुका है और अब मार्केट के गिरने के चांसेस होते हैं। इसलिए इसको बेयरिश किकर पैटर्न कहा जाता है।
अब जो हमारे नेक्स्ट कैंडलिंग पैटर्न है, वो है राइजिंग एंड फॉलिंग थ्री मेथड्स। सबसे पहले राइजिंग थ्री मेथड की बात करें, तो ये एक बुलिश कंटिन्यूएशन पैटर्न होता है। यानी इस पैटर्न के बनने से पहले मार्केट बढ़ रहा होता है। उसके बाद एक बड़ी ग्रीन कलर की कैंडल बनती है। जिस ग्रीन कलर की कैंडल के बनने के बाद एक रेड कलर की कैंडल बनती है। उस रेड कैंडल के बाद अगली भी रेड कलर की कैंडल बनती है, जो कि इस कैंडल के नीचे क्लोजिंग देती है। फिर उसके बाद भी जो हमारी कैंडल बनती है, वो भी एक रेड कलर की कैंडल होती है, जो कि उससे पहले वाली कैंडल के नीचे क्लोजिंग देती है। लेकिन इसके बाद जो हमारी नेक्स्ट कैंडल बनती है, वो एक बुलिश कैंडल होती है, जिसकी जो ओपनिंग होती है, वो तो थर्ड कैंडल की क्लोजिंग के आसपास होती है। लेकिन इस इस कैंडल की जो क्लोजिंग होती है, वो हमारी फर्स्ट जो ग्रीन कलर की कैंडल थी, इसके ऊपर हो जाती है। आप देख सकते हैं कि इस कैंडल का जो हाई है, वो यहां पर है और अगली जो कैंडल है, वो यहां पर क्लोज हुई है। तो जब इस तरीके का पैटर्न बनता है, तो यहां पर ये माना जाता है कि मार्केट पहले बढ़ रहा था और अभी भी मार्केट आगे बढ़ने के चांसेस हैं।
इसका जस्ट अपोजिट होता है फॉलिंग थ्री मेथड्स, जो कि एक बेयरिश कंटिन्यूएशन पैटर्न है। यानी इससे पहले मार्केट गिर रहा था। उसके बाद एक बड़ी रेड कलर की कैंडल बनती है। जिस रेड कैंडल के बाद एक ग्रीन कलर की कैंडल बन बनती है। इस ग्रीन कैंडल के बाद अगली भी ग्रीन कलर की कैंडल बनती है, जो कि इसकी क्लोजिंग के ऊपर क्लोजिंग देती है। उसके बाद थर्ड कैंडल भी ग्रीन कलर की होती है, जो कि इस ग्रीन कलर की कैंडल के ऊपर क्लोजिंग देती है। और इसके बाद जो हमारी फोर्थ कैंडल बनती है, उसकी जो ओपनिंग होती है, वो तो हमारी थर्ड कैंडल के आसपास ही होती है। लेकिन जो उसकी क्लोजिंग होती है, वो हमारी ये जो पहली कैंडल थी, इस कैंडल के नीचे होती है। तो आप देख सकते हैं कि इसका जो लो है, वो यहां पर है और इसकी जो क्लोजिंग हुई है, वो यहां पर हुई है। तो अगर कभी ऐसा पैटर्न बनता है, तो इसका मतलब होता है कि मार्केट पहले गिर रहा था और आगे भी मार्केट के गिरने के ही चांसेस हैं।
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