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5) Fiqh - Bartano kai Masael (Mas’alah 15 - 25 )- Class 05 - Level 1 || Dr. Mahboob Abu Asim

Dr. Mehboob Abu Asim35:49

Transcription

चलो देखो आज क्या है। हमने पिछले दर्स में पढ़ा था, बल्कि बताया था आपको कि आपके दस्तरखान पर यह दब आज एक मुगालते, मुगालता भी दूर करेंगे हम। तो इसका, इसको अरबी में कहते हैं ब द बा। उर्दू में इसको कहते हैं सांडा। आपके दस्तरखान पर यह खाया गया था, तो आपने खुद जो है इसको नापसंद किया। खाना बात इस मौजू पर हो रही थी कि बाज औकात हमें कोई चीज अच्छी नहीं लगती, लेकिन इसका माना यह नहीं कि वह हराम है। समझे ना कोई चीज हमको गंदी लगती है, इसका मान यह नहीं कि वोह नापाक है। तो पाकी नापाकी, हलाल और हराम शरी अह कामात है कि जिसमें हम अपने मिजाज को नहीं देखेंगे कि मुझे ये चीज कैसे लगती है। तो यह है वो। लाइए दोबारा लाइए इसको, क्योंकि इसमें गलतफमी पाई जाती हो, वो भी हम दूर करना चाहते हैं। बाद भाई कहते हैं कि इसको गो कहते हैं। उर्दू में गो कहते हैं। ये भी मैं बताना चाहता हूं कि सांडा और गो दूसरी चीज है। गो जहरीली होती है और आम तौर पर सांप वगैरह इस के जानवरों को खाती है। समझे बड़ी गो होती है, जहरीली होती है, जबकि ये जो है बिल्कुल बड़ा शरीफ मिजाज है। समझे ना बल्कि बाज बधु को देखा है, सदियों को उने जेब में डाला होता है। हा जी और शेख साहब कहते हैं मैंने पकड़ा है। हाल वैसे लेकिन काट ले तो फिर उसकी गर्दन तो कट जाएगी, लेकिन छोड़ेगा नहीं, ये इसका मजज है। लेकिन बताया कि बड़ा इसमें कोई मादा नहीं, बिल्कुल भी और यह हलाल है और काफी मुफीद है। शायद आपने सुना हो सांडे का तेल, इसका यल बड़ा मुफीद होता है के बाज कात जिस्म को लगाने के लिए। तोला हाल यह हलाल है और गो हराम है। समझे ना दोनों अलग अलग जानवर हैं। हमारे बहुत से लोग दोनों में फर्क नहीं करते, इसको गो बना के इसको हराम कर देते हैं। समझे ना हालाकि ये है जिसको बब कहते हैं और अरबी में गो को कहते हैं वर्ल वर्ल। उसका नाम ही दूसरा है। वा राम लाम ल तो जि बताया है कि उसकी शक्ल इसके करीब मिलती जुलती होती है, लेकिन उसकी टांगे लंबी होती हैं, तेज दौड़ती है और सांप की तरह जबान निकालती है। समझे ना और जहरीली होती है। तो बड़ा फर्क दोनों के अंदर इसलिए वो हराम है और यह हलाल। खैर हम पिछले दर्स में पानी के मसाइल पढ़े थे। हमने तो टाइम हमारे पास काफी कम होता है। हम चाहते हैं कि साथी नमाज के फौरन बाद बैठ जाए करें रिन करने के लिए अपने अपने ग्रुपों में और ग्रुप ड से भी दरखास्त है कि वह नमाज यहीं पर पढ़कर फौर अपने साथियों को लेकर बैठा करें ताकि 10 मिनट जो आपके पास होते हैं, इसमें कोशिश करें कि एक साथी से मसाइल सुन जाए या कम से कम अक्सर मसाइल उसे सुन लिए जाए ताकि न हो जाए। हमारे पास मजीद टाइम नहीं होता न करने का। आज हम आगे चलते हैं। आगे हमारा मौजू है बर्तनों के मसाइल। बर्तन यानी आपके पास जो इस्तेमाल की चीज होती है, खाने की, पीने की, जिसमें खाना पीना डालते हैं। तो यह बर्तन जो है पहली बात आप य पूछ यहां पर तहर के मसाइल पड़ रहे हैं और बर्तन के मसाइल भी आगे अंदर। तो बर्तनों के मसाइल का ताल्लुक क्या है रत के मसाइल से? उसमें पहले आपके पास जो सवाल है 15 नंबर, उसमें दिया गया है कि पानी अमूमन बर्तनों में महफूज किया जाता है। पानी को आमतौर पर बर्तनों में रखा जाता है और असल यह है कि सोने चांदी के अलावा लोहे, तांबे, पीतल, पत्थर, चीनी, प्लास्टर, गैर के तमाम बर्तन पाक हैं। पानी उसमें रखा जा जा सकता है। तो असल इस मसले को तारत के मसाइल में लाने का मकसद यह है कि पानी चक बर्तन में डालते हैं। अब पानी का तो हमने पढ़ लिया कि कब पाक होगा, कब ना पाक होगा। अब जिस बर्तन में पानी डालना है, उस बर्तन के भी आप को पता होना चाहिए। बर्तन व कैसा है? उस बर्तन में पानी डालने से कहीं ना पाक तो नहीं हो जाएगा या नापाक ना भी हो। वैसे ही उस बर्तन का वजू या इस तरह की चीजों में इस्तेमाल करना मना हो मुमकिन है। हम पढ़ेंगे इस तरह के मसाइल। तो यह है मकसद इस मसले को या इस चैप्टर को लाने का तहर के मसाइल में। बर्तनों में चकि पानी रखा जाता है, तो इसलिए बर्तनों का मालूम होना चाहिए कि बर्तन का हुक्म क्या है? कौन सा बर्तन पाक है? कौन सा नापाक है और कब नापाक होता है? उसको पाक कि कैसे किया जाता है? ये सारी चीजें इंशाल्लाह हम इसमें देखेंगे। तो 15 नंबर मसला में जैसा आप देख रहे हैं कि पानी आमतौर पर बर्तनों में रखा जाता है और असल यह है कि बर्तन पाक है और हलाल है। पाक भी है और हलाल भी है। सोने चांदी के अलावा, सोने चांदी के अलावा बाकी बर्तन हलाल हैं। पाक तो सभी हैं। सोना चांदी भी पाक ही है, लेकिन इसका इस्तेमाल करना उसे मना किया गया है। तो लोहे के बर्तन हों, तांबा हो, पीतल हो, पत्थर हो, चीनी हो और प्लास्टिक और भी फर्ज करो कोई ऐसी ऐसी मेटल, ऐसी चीज निकल आती है टेक्नोलॉजी के साथ। नई चीज आ रही है। समझे ना कोई भी इस तरह की चीज आ जाए। असल ये कि बर्तन पाक हैं और उनमें पानी रखा जा सकता है। पानी उसमें रखा जा सकता है, उससे वजू किया जा सकता है, उसे गुसल किया जा सकता है, उस पानी को पीने में जिस स भी इस तरह के इस्तेमाल मिलाया जा सकता है। अगरचे वो कीमती हीरे जवाहरात से भी क्यों ना हो या डायमंड का बर्तन हो। वैसे तो नहीं हो स होने को शायद किसी बादशाह के पास हो भी, लेकिन हम इस तरह के मसाइल जिक्र किए जाते हैं कि मुमकिन है कि अगर ऐसा भी बर्तन हो, बड़ा कीमती तरीन डायमंड का बना हुआ, तो तब भी वो पाक है आला और हलाल है। जैसा कि इरशाद बारी ताला है ल मा जमीया ी अल्लाह की व जात है ल कलकम जिसने पैदा किया तुम्हारे लिए मा फल जो कुछ जमीन में है। जमीन सभी का सभी और यह आयत जो है इसको याद कर ले। ये आयत फार्मूला है दुनियावी चीजों के हवाले से। एक वह चीजें जो दीन के तौर पर नेकी इबादत के तौर पर की जाती हैं और एक वह चीज है कि जो हम दुनिया के मामलात में खाने पीने की, रहने सहने की इस्तेमाल करते हैं। तो दोनों के फार्मूले अलग हैं। दीन के हवाले से अल्लाह ताला का फरमान है अमल शरा मन माने अल्ला कैसे शरीक बना दि। ये है कि जिन्होने दीन में ऐसी चीजें निकाल दी है जिसकी अल्लाह ने इजाजत नहीं दी। यानी दीन में ऐसे ऐसे हुकम जारी कर दिए हैं, ऐसी बातें कर दी है कि जिसकी अल्लाह ने इजाजत नहीं दी। इसका मतलब कि दीन में इजाजत चाहिए। दीन का कोई भी मसला, कोई भी हुकम, कोई भी इबादत के तौर पर आप जो चीज कर रहे हैं लाजमा उसकी दलील चाहिए। अभी असर की नमाज पड़ी है। कोई कहे कि असर की अगर पांच रकते पढ़ ले ताकि ज्यादा सवाब मिल जाए। क्या ख्याल है? हम कहेंगे कि जिसने जानबूझकर पाची के लिए जो खड़ा हुआ उसकी वहीं पर पूरी नमाज बातिल। किसलिए उसने वो काम किया कि जिसकी अल्लाह ने इजाजत नहीं दी। लेकिन इसी मस्जिद में जहां पर आप नमाज पढ़ रहे हैं लाइट हैं, पंखे हैं, एसी है। समझे ना नीचे कारपेट है। ये सारी चीजें क्या नबी के जमाने में थीं? माइ माइक्रोफोन इस्तेमाल हो रहा है। माम साहब उसने नमाज पढ़ा रहे हैं। क्या थी चीज आपके जमाने में? को असर की तो पा नहीं पढ पढ़ सकते, लेकिन माइक्रोफोन इस्तेमाल क्यों कर सकते हैं? क्या फर्क दोनों में? दोनों में फर्क यह है कि माइक्रोफोन के इस्तेमाल करना इबादत नहीं है। नमाज में पांच पाच रकत क्या है? वो इबादत है। फर्क ये है और ये मैं चाहता हूं इस मसले को समझे। बहुत अहम मसला है। इसको समझ ले आपको तमाम बिदात की समझ आ जाए। हमारे यहां जो बिदात चलती है ना कि यह भी नेकी, यह भी कर लो, यह भी नेकी, यह भी करो। अपनी तरफ से हर कोई नेकिया बनाता फिरता है। तो वहां पर हमें पता चलेगा कि नेकी सिर्फ अल्लाह के इख्तियार में है, उसकी तरफ से है। हमें खुद नेकियां बनाने की इजाजत नहीं है। हा नेकी के काम करें, वो करें कि जिसका अल्लाह ने हुकम दिया है, जो अल्लाह के की सुन्नत है। उसके अलावा को और काम करेंगे तो नेकी नहीं होगा, वो बदत होगा, जो गुमराही। लेकिन दुनिया के हवाले से आपके सामने इसको याद करिए। फार्मूला है क्या है? ल अल्लाह ने जमीन पर जो कुछ पैदा किया है, खाने पीने, रहने सहने के इस्तेमाल का अला माता तुम्हारे लिए है। तुम्हारे लिए उने क माना कि हलाल है सिवाय चंद चीजों को जिनको अल्लाह ने हराम किया है। किसी मकसद के पेशे नजर खाने को जो मर्जी खाइए। चंद जानवरों को इस तरह की चीजों को हराम कर दिया। पीने को जो मर्जी पीजिए, लेकिन शराब जैसी इस तर की चीजों को हराम कर दिया। उसके पीछे मकसद है, उसके गलत नुकसा है, गलत उसके असरात हैं। समझे ना वरना अगर कोई कहे भी फला चीज तुम खा रहे हो, यह तो हराम है। हा खाने वाला दलील देगा या हराम करने वाला दलील देगा? कौन दलील देगा? खाने वाला दलील नहीं देगा, क्योंकि असल हलाल है। जो उसको हराम कह रहा वो दलील देगा कि इसके हराम होने की दलील क्या है? अगर दलील देता है तो ठीक है, वरना उसकी बात रिजेक्ट है, ना काबिले कबूल है। बात समझ आ रही है? इसलिए हमने जिक्र किया है कि नमाज की पांचवी रकत तो नहीं पढ़ सकते असर की, लेकिन माइक के इस्तेमाल, ये सारे एसी पंखे, हर चीज ये दुनिया की चीजें हैं। इन चीजों का आप इस्तेमाल इबादत के लिए नहीं कर रहे, इबादत के तौर पर नहीं कर रहे हैं। सिर्फ दुनिया की एक सहूल अल्लाह ने दी हमको और हम उससे फायदा उठा रहे हैं। इसमें जो भी चीजें आज तो यह है और भी टेक्नोलॉजी में आगे क्या क्या होता जाएगा। असल यह कि सभी चीजें हलाल और जायज हैं। समझे ना तो यह फार्मूला तो बर्तन इसलिए हमने कि कहा कि बर्तन कोई भी हो, सभी के सभी बर्तन हलाल भी है और पाक भी है और दलील उसकी आयत है, सवाय सोने चांदी के। सोने चांदी का 16 नंबर मसला में आ रहा है कि सोने चांदी के बर्तन खाने पीने में इस्तेमाल करना मना है। स खास पर हदीस में जो मना किया गया है वह खाने पीने से। हदीस में आप आपके सामने है लात शरब लात लाता कुहा आप माते हैं के सोने चांदी के बर्तनों में ना तो पानी पियो और ना उसमें खाना खाओ। सोने चांदी के बर्तन ना उसमें पानी पियो ना कोई पीने की चीज पियो ना उसमें कोई खाने की चीज खाओ। और मर्दों के लिए वैसे भी सोने का इस्तेमाल हराम है। औरतों को इसकी इजाजत है, लेकिन सिर्फ पहनने के लिए, जेवर के तौर पर। खाना पना बर्तनों के अंदर सोने सोने चांदी के बर्तनों में खाना पना औरतों के लिए भी उसी तरह हराम है जिस तरह मर्दों के लिए हराम है। हां औरतें सोना पहन सकती हैं, जेवरात के तौर पर, जेबो जीनत के लिए पहन सकती हैं, लेकिन उनको इस्तेमाल करना खाने पीने में यह हराम है। अच्छा आप कहे कि ये तो सिर्फ खाने पीने की बात है और यहां पर तहर की बात हो रही है। इस मसले का जिक्र इसलिए किया है क्योंकि बाज उलमा के नजदीक जो है सोने चांदी के बर्तनों में तहा करना भी मना है, क्योंकि आपने खाना पीना मना किया है, तो कहते हैं कि उसमें तहर भी मना है। बाज उलमा का ये कैन है और असल यह है कि अगर किसी मसले में उलमा का इख्तिलाफ हो और इख्तिलाफ काफी दलील के साथ हो तो आदमी वो काम करे जिसमें इख्तिलाफ ना रहे। समझे ना यानी सोने चांदी के बर्तन को छोड़कर बाकी सारे बर्तन हलाल हैं। उसमें खाओ, पियो, उसमें जो है आप वजू करो, मुश्किल नहीं। लेकिन सोने चांदी के बर्तनों में बाज उलमा के नजदीक जो है वजू करना भी जायज नहीं है। हां सोना चांदी वैसे तो बर्तन उसके हराम है इस्तेमाल करना, लेकिन अगर कोई बर्तन टूट गया हो, मेटल का बर्तन कोई पीतल का लोहे का उसको चांदी से उसका टांका लगाना, उसको जोड़ना इसकी इजाजत है। जिस तरह कि आपके सामने हदीस दी गई है कि आप का प्याला था टूट गया, उसको चांदी से जोड़ा गया। इतने सी इस्तेमाल करना चांदी जोड़ने के लिए इसकी इजाजत है। उससे ज्यादा चांदी के बर्तन या सोने के बर्तन में खाना पीना इससे मना किया गया है। 17 नंबर मसला में उसमें क्या है? अहले किताब और मुशरिकीन के बर्तन और कपड़े अगर पाक हों तो इस्तेमाल किए जा सकते हैं। अहल किताब कौन है? अहले किताब यहूद और नसा और इस्लाम ने आम काफिरों से अहले किताब को अलग किया है। एक तरफ हिंदू है, सिख है, दूसरी तरफ यहूदी ईसाई हैं। है सभी काफिर ही सभी मुशरिक हैं। समझे ना लेकिन इस्लाम में कुछ ना कुछ अह कामात में अहले किताब को यहूद और नसा के लिए उनसे उनके अलग हुक्म दिए हैं। जैसे कि अहले किताब का जिबा किया हु जानवर खा सकते हैं कि नहीं? अगर कोई ईसाई कोई यहूदी जानवर जिबा करता है तो क्या खा सकते हैं? नहीं खा सकते हैं। लेकिन अगर हिंदू बा करे तो नहीं खा सकते, क्योंकि अल्लाह ताला ने अहले किताब की दिबा किए जानवर के खाने की इजाजत दी है। उनके अलावा बाकी किसी मुशरिक काफिर के ब किए जानवर की इजाजत नहीं दी। इसलिए बात कर रहे थे अहले किताब का और मुशरिकीन का। दोनों का अलग अलग नाम इसलिए आता है, वरना सारे मुशरिक ही हैं। अहले किताब भी मुशरिक हैं, वो भी काफिर हैं, लेकिन चूंकि कुछ अह कामात में उनमें फर्क किया गया है इसलिए तो अहले किताब और मुशरिकीन के बर्तन और कपड़े अगर पाक हों, यानी उसमें कोई नापाकी नजर नहीं आ रही, असल पाक हैं तो उनको इस्तेमाल किया जा सकता है और हम करते भी हैं। क्या ख्याल है? आप रेस्टोरेंट में जाते हो खाना खाने। कोई पता नहीं जिस प्लेट बर्तन में आप खाना खा रहे हो, इससे पहले आपसे पहले इसी में कोई हिंदू कोई क्रिश्चन खाके गया हो, लेकिन आपको बर्तन धोकर दिया गया है। समझे ना आग बर्तन धोकर दिया गया है तो आप उसम खा सकते हो। इसी तरह कपड़े हैं। आपने जो कपड़े पहने हुए हैं कहां से बन के आए हैं? इन मसाइल को जानना हमारी कितनी बड़ी जरूरत है। क्या ख्याल है? कपड़े आपने पहने कहां से बने हैं? अक्सर बतर व है कि जो कुफर के काफिर से बने हुए हैं। चाइना, जापान या जो मु इस तर के मुल्कों से। समझे ना तो बनाने वाले कौन हैं? काफिर हैं, कनिस्ट हैं और इस तरह के बुमत इस तर के काफिर हैं। अब वो कपड़े को बना रहे हैं तो कपड़े के साथ क्या क्या उनके मामलात रहे हैं? असल यह है कि कपड़ा अगर पाक है तो उसको इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन बेहतर यही है कि काफिर की तरफ से अगर कपड़ा आए तो उसको धो लिया जाए। काफिर की तरफ से बर्तन मिले तो उसको धो लिया जाए। जसा कि आप देखेंगे अभी इसमें। अच्छा क्या दलील है कि काफिरों के बर्तन इस्तेमाल किए जा सकते हैं? उसकी दलील आपके सामने कि नबी करीम सलम ने मुशरिक औरत के मशकी से पानी पिया और वजू किया। शर का औरत उसका मशकी। मशकी जानते क्या होता है? य दिखाना पड़ेगा। आइ से इस की चीज ना उनको पहले से लेया करें। मछ कीजा। आजकल तो शायद ही क इस्तेमाल होता हो, लेकिन हमने देखा हुआ है। हम बचपन में इस की देखते थे। तो जानवर की चमड़ी जो है ना जिस तर बकरी वगैरा है उसकी चमड़ी उतार कर उस चमड़ी को इस अंदाज से सी दिया जाता है, उसमें पानी भरा जाता है। पानी भरा जाता है, उसको बर्तन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसको कहते हैं मिज तो मिकी क्या चीज है? जानवर की चमड़ी का बना हुआ वो इ बर्तन कह लीजिए कि जिसमें पानी डाला जाता है। आपने मुरका औरत के मशकी से पानी पिया। बड़ा यानी के सुनने वाला वाकया है कि नबी तबू के सफर में थे। मदीना से तबू कितनी दूर है? तकरीबन 700 किलोमीटर और सारा सहरा है और बाज ऐसे इलाके हैं कि जहां पर मीलों तक पानी का कुनाम निशान नहीं। तो आप सलम के साथ 3 हजार की फौज थी। तो ऐसी जगह से गुजर रहे थे जहां पर पानी नहीं था और लोगों के पास भी पानी पानी खत्म हो गया। आपने दो सहाबा को भेजो पानी लेने के लिए कि पानी ढूंढो। तो पानी ढूंढने के लिए निकले तो क्या देखते हैं कि एक औरत अपने जानवर गधे पर किसी चीज पर दो मशकी पानी के लदे हुए लेके आ रही थी। उससे पूछा ये पानी कहां से लाई हो? उसने कहा कि यहां से दो दिन की मुसाफत पर। यानी पानी यहां से कितनी दूर है? दो दिन के फासले पर। हां 3 हज की फौज पीछे प्यासी बैठी है तो दो दिन कैसे? उन्होंने क्या किया? उस औरत को साथ लिया। आप के पास लेकर आ गए। तो आपने उस औरत से कहा कि हम तेरे मशकी से पानी लेंगे। उसके मशकी जा लिया। आपने दुआ पढ़ी और जितने भी साथी आपके साथ थे सभी ने पानी पिया भी, अपने बर्तन भी भरे, अपने जानवरों को भी पिलाया और औरत का मशकी उसी का उसी तरह उसमें कोई पानी कम नहीं हुआ और फिर आपने सहाबा को कहा कि तुमने औरत को रोका है, इसका टाइम लिया है तुम लोगों ने तो कुछ ना कुछ इसको दो। तो साबा के पास जो थोड़ा बहुत किसी के पास कु गंदम है, को ऐसे ऐसी खजूर वग उसको दी ताकि उसको हदय के तौर पर। तो औरत अपने कबीले को जाकर खानदान को कहती है कि मैं ऐसे आदमी के पास से आई हूं या तो अल्लाह के नबी है या को दुनिया का सबसे बड़ा जादूगर है, क्योंकि एक मकीदा मकीदा होता है आमतौर पर को कह लीजिए कोई यानी के 15 20 लीटर से ज्यादा उसका वजन नहीं होता। तो बंदा 20 लीटर पानी कितने लोग पिएंगे? आपके पास 3 हज की फौज। कहती है कि या तो अल्लाह के नबी है या कोई जादूगर है। तो कौम आपके पास आई, देखा कि वाक आप अल्लाह के नबी हैं और सभी के सभी इस्लाम कबूल करते हैं। खैर बात कर रहे थे कि इस वाकया जो आप पढ़ रहे हैं कि आपने इस मुशिका औरत के मशकी से पानी पिया। अब वो मकी किसका था? मुशरिक औरत का था। लेकिन से पानी पीना किस बात की दलील है कि मुशरिक के काफिरों के बर्तनों से उनको इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन बेहतर ये है कि उनको धो लिया जाए। धो लिया जाए तो अफजल है। जिस तरह कि आपके सामने बुखारी की मुस्लिम की हदीस दी गई है। 18 नंबर मसला में इंसान के अलावा खुश्की के तमाम जानदार चीजें मरने से नापाक हो जाती हैं। इंसान के अलावा खुश्की की तमाम जानदार चीजें, जंगली जानवर हों, परिंदे हों, समझे ना जो भी खुश्की के जानवर हैं ये मरने से नापाक हो जाते हैं। चाहे वो जानवर हलाल हो या हराम हो। हलाल जानवर भी मरने से क्या होता है? नापाक हो जाता है। ये बकरी जो है हलाल है, आपने उसको जिबा कर लिया तो ठीक है, हलाल है, वह खाएंगे गोश्त, लेकिन मर गई तो वह हराम भी है और नापाक भी है। समझे ना तो तो खुश्की के तमाम जानवर जो हैं वो मरने से नापाक हो जाते हैं, लेकिन इंसान नापाक नहीं होता। इंसान के नापाक होने की क्या दलील है? अल्लाह ताला का फरमान ल क करमना बनी आदम क्या हमने यकीनन बन आदम को तकरी इज्जत दी है? उस इज्जत में से यह भी है कि इंसान मरने से नापाक नहीं होता और आपका फरमान अमलास के मोमन नापाक नहीं होता। इस मसले हमको मालूम यह हुआ कि खुश्की के त माम जानवर चाहे वो जंगली जानवर हों, परिंदे हों, कुछ भी हो वो सभी मरने से नापाक हो जाते हैं। अच्छा इस मसले को पढ़ने का फायदा क्या है? कि फर्ज करो अगर बकरी किसी कुए में गिर गई, पानी में गिर गई और गिर कर पड़ी रही उसमें हत के पानी में स्मेल आना शुरू हो गई तो पानी का हुक्म क्या होगा? कि नापाक हो जाएगा। पानी में स्मल आना शुरू होगी तो पानी पाक हो जाएगा? हमने यही पढ़ा ना कि पानी कब नापाक होता है? उसमें कोई नापाक चीज पड़ने से, समल आना शुरू हो जाए। लेकिन अगर बकरी उसमें गिरी, मर गई, लेकिन फौरन उसको निकाल लिया गया, पानी तब्दील नहीं हुआ तो पानी पाक है। अगला मसला 19 नंबर, लेकिन जिस जानवर में बहने वाला खून ना हो। देखिए वैसे तो हमने पढ़ा है कि खुश्की के तमाम जानवर, लेकिन जिन जानवरों में बहने वाला खून ना हो, ऐसा जानवर मरने से नापाक नहीं होता। बहने वाला खून से क्या मुराद है? आप मुर्गा दिबा करते हो तो खून बहता है ना, बकरी दिबा करते हो तो खून बहता है, लेकिन बा ऐसे भी जानवर हैं खुश्की के जानवर में से, उसको आप मारोगे, काटोगे तो मामूली सा खून उसम लगेगा लेकिन बहेगा नहीं। समझे ना ऐसे जानवर जो हैं उनके मरने से वो ना वो जानवर मरने से नापाक नहीं होते। दलील क्या है? दलील आपके सामने जिस तर लिखा है के अगर आप फ माते हैं कि अगर किसी के पीने में चाय हो, पानी हो, कुछ भी हो उसमें मक्खी गिर जाए और मक्खी गिर के मर जाए तो क्या करें? मक्खी को डबोक निकाले। मक्खी को डबोक निकाले। देखिए इस तरह के मसाइल हमको जानने की जरूरत है, क्योंकि हमारे आमतौर पर पेश आते रहते हैं। तो चाय पीते पीते मक्खी गिर ग उसके अंदर या पानी दूध के अंदर मक्खी गिर गई। हुक्म क्या है? कि मक्खी को डबोक निकालो। आप कहेंगे डबे तो और गंदगी फैले गी। गंदगी फैले कीी नहीं, बल्कि गंदगी खत्म होगी। कैसे? आप माते की मक्खी के एक पर में बीमारी है और दूसरे पर में उसी बीमारी का इलाज है और मक्खी जब पानी में या किसी चीज में गिरती है तो वह पर ड बोती है जिसमें बीमारी है। दूसरा पर उसका ऊपर रहता है आमतौर पर। इसलिए जब डोग तो क्या होगा कि वोह बीमारी जो जिस पर की वजह से बीमारी पैदा हुई थी दूसरे पर से वो खत्म हो जाएगी और खुद बखुदा माते कि अगर तुम उसके बाद पीना चाहते हो तो पी लो। हालांकि मक्खी तो गिर के मर गई थी उसके अंदर, लेकिन वो वो एक तो यह है कि चक तब्दील भी नहीं होता आमतौर पर, उसका रंग जायका कु बदलता भी नहीं है और दूसरा चकि मक्खी से बहने वाला खून नहीं निकलता होता है। मामूली सा खून लेकिन बहने वाला खून नहीं होता। इससे ये भी हमें मालूम हुआ कि वो जानवर जो खुश्की के जिन में बहने वाला खून नहीं होता, मामूली किस्म का खून होता है, ऐसा जानवर मरने से नापाक नहीं होता या ऐसा जानवर अगर पानी में गिर गया और पड़ा रहा तो पानी के अंदर अगर कोई जायका तब्दील भी हो जाए तब भी पानी नापाक नहीं होगा। अगर पानी के अंदर स्मेल भी आ जाए तब भी पानी नापाक नहीं होगा। ऐसी है जैसे मछली पानी के अंदर पड़ी रही, मछली मरी, मर के पानी के अंदर पड़ी रही तो क्या होगा? पानी के अंदर स्मल आएगी, लेकिन अगला मसला हम यही पढ़ रहे हैं के 20 नंबर मसला में नी ऐसे जानवर का मुर्दार भी नापाक नहीं जो पानी के बगैर जिंदा ना रह सकते हों। जो जानवर पानी के बगैर जिंदा ना रह सकते हों, जिस तर मछली है तो ऐसे जानवर भी मरने से नापाक नहीं होते। मछली पानी में गिर गई, पानी में है, पानी में पड़ी पड़ी मर गई। मछली पानी के अंदर मर गई और पड़ी रही पानी के अंदर ही और मछली की आप जानते हैं बदबू बड़ी सख्त होती है, बहुत शदीद बदबू होती है, बहुत बड़ी सेल होती है। तो पानी में पड़ी रही, चंद घंटों के अंदर ही मुमकिन है उसके अंदर से स्मेल आना शुरू हो जाएगी पानी के अंदर से। अब वो पानी पाक है, नापाक है? पाक है। क्यों पाक है? क्योंकि मछली वोह जानवर है जो पानी के बगैर नहीं रह सकता। यह मरने से नापाक नहीं होता। मरने से नापाक नहीं होती मछली। इसलिए मर भी गई, उस पानी के अंदर स्मेल भी आ गई, जायका भी चेंज हो गया तब भी पानी पाक है, वो नापाक नहीं हुआ। आप उसको इस्तेमाल कर सकते हैं। तो यह मसाइल जैसे आप देख रहे हैं, मैं समझता हूं कि बहुत से लोग, बहुत से भाई पहली बार सुन रहे होंगे। यही हमारा इस कोर्स का सबसे बड़ा मकसद है कि रोज मरा के हमारी चीजें हैं जिसके साथ हमें वासता पड़ता है और ताकि हमें इल्म हो कि पानी कब नापाक होता है, कब नापाक नहीं होता। तो अब जानवरों के हवाले से हमने तीन तरह की चीज देखी। एक तो यह कि खुश्की के जानवर, कोई हलाल जानवर भी क्यों ना हो, मरने के बाद नापाक हो जाता है। लेन वो खुश्की के जानवर जिसमें बहने वाला खून ना हो वो मरने के बाद नापाक नहीं होता और वो भी जानवर जो समुंद्र के जानवर हैं, जो पानी के बगैर नहीं रहते, मछली जैसे वो भी मरने से नापाक नहीं होते। तो इससे आपको पता चल जाना चाहिए कि कौन सा जानवर पानी के गिरने से पानी का अगर स्मेल जायका चेंज होता है तो पाक होगा पानी और कौन से जानवर के गिरने से पानी नापाक होगा। आपको इससे पता चल जाना। अच्छा मछली के बारे में क्या दरी है? है आप का फरमान हुआ कि समुंद्र के पानी के बारे में आपसे पूछा गया कि समुंदर का पानी पाक है और उसका मुर्दार समुंदर का मुर्दार हलाल है। समुंदर के मुर्दार के मुराद जो समुद्री जानवर है। ये नहीं कि खुश्की का जानवर समुद्र में गिर गया तो वो तो हराम ही है। समझे ना लेकिन जो समुद्री जानवर है वो समुद्र में मर गया तो मरा हुआ भी खा सकते हैं। अगर उसके अंदर कोई या स्मेल पैदा हो, उसके अंदर बदबू पैदा होगी, जहरीला हो गया वो अलग बात है, लेकिन वैसे वो हलाल है। अच्छा 21 और 22 नंबर में टाइम तो हमारा खत्म हो गया। हम चाहते हैं इसको मुकम्मल कर ले जल्दी से। मुर्दा जानवर की खाल दबाग से पाक हो जाती है। जो जानवर हम दिबा कर लेते हैं, बकरी, गाय वगैरा उसकी तो खाल

का मुश्किल कोई सभी जानते हैं कि पाक है समझे ना लेकिन फर्ज करो बकरी मर गई, गाय मर गई, भैंस मर गई। अब आप की खाल उतार लेते हैं तो उस उस खाल का क्या हुक्म है? हमने अभी पढ़ा है कि जानवर मरने से क्या हो गया? नापाक हो गया। लेकिन खाल जो है, चमड़ी जो है उसकी जानते हैं चमड़ी खाल चमड़ी उसकी चमड़ी जो है उसको दबाग दबाग क्या चीज है ये? वो प्रोसेस है जिसके जरिए से खाल को खुश किया जाता है, चमड़ा बनता है समझे ना? जिससे वो खाल वो चमड़ी जो है उसको चमड़ी की शक्ल दी जाती है तो वो यह प्रोसेस है। सारा साब का जवानों में नमक से इस तरह की चीजों से करते थे। आज आजकल बा केमिकल आ गए उसके लिए तो यह इस प्रोफेसर प्रोसेस से गुजारने के बाद वो खाल जो है, चमड़ी जो है वह पाक हो जाती है, चाहे वह मुर्दा जानवर की भी क्यों ना हो। री बकरी की खाल उतार के उसको द बागत कर ले तो पाक हो जाएगी। पाक होने का माना उस उस बकरी की खाल का मछ कीजा बना सकते हैं, उसमें पानी डाल सकते हैं, समझे बात? अच्छा लेकिन दरिंदों की जान की खाले जो है दंद दंद कौन से? जो चीर फाड़ करने वाले हैं शेर, चीता, कुत्ता, भेड़िया वगैरा समझे? सांप हमारे यहां सांपों के वो बैग बनते हैं, चीते के जूते होते हैं, बैग आते हैं। इसके बारे में पता होना चाहिए कि दरिंदों की खाले जो है यह नापाक है। दरिंदों की खाल दबाग से पाक नहीं होती। दोनों की दलील आपके सामने दी गई है। बकरी के बारे में आप इसका चमड़ा उतार लो, इसको दबाग कर लो, हो जाएगा। और द दरिंदों की खाल इस्तेमाल करने से आपने मना फरमाया है। तो जो भी दरिंदा है जो चीर फाड़ करने वाला, काटने वाला जानवर है उसकी खाल बागल से भी पाक नहीं होती। बस दो मस हमारे बाकी दो तीन बा अच्छा इसी तरह हलाल जानवरों के अलावा हराम जानवर, हलाल और हराम सभी जानवर के ऊन, उनके बाल, उनके पर ये सभी क्या है? पाक है। हत्ता कि हराम जानवरों के भी। फर्ज करो चील हलाल है, आराम है, ईगल हराम है ना? उसके पर, उसके पर इस्तेमाल कर सकते हैं। इसलिए इन परों को इस्तेमाल किया जा सकता है, उनके कपड़े, लिहाफ बनाना, कारपेट बनाना कोई भी करना उसमें इस्तेमाल की जा सकती है क्योंकि उनके हलाल होने की वजह क्या है? क्योंकि इन चीजों के अंदर जान नहीं होती। पर के अंदर जान है, बालो के अंदर जान होती है? हाँ बेजान चीज है। इसलिए यह चीज अगर हराम जानवर भी के हो तब भी वो पाक है, उनको इस्तेमाल किया जा सकता है।

23 नंबर मसला में अगर हलाल जानवर से कोई हिस्सा काट दे या कट जाए। बकरी की एक टांग कट के अलग हो गई, एक्सीडेंट हुआ, एक टांग कट के अलग हो गई। आप कहे चलो बकी तो ठीक है वो तो बच गई, उसकी टांग हम खाते हैं? क्या ख्याल है? आप मानते हैं कि हलाल जानवर का जो कटा हुआ हिस्सा है जबकि जानवर भी जिंदा ही हो तो कटा हुआ हिस्सा है वह हराम है, हराम भी है और नापाक भी है? कि बकरी का एक टांग कट के कुए में गिर गई, पड़ी रही। हत्ता कि कुए के अंदर स्मेल पैदा हो गई तो क्या होगा? कुए का पानी नापाक हो गया, समझे ना बात? यह इसका इस मसले का फायदा है। तो जो भी जिंदा जानवर का कटा हुआ हिस्सा है वह नापाक है, हराम है, उसको खाना भी हराम है, है भी नापाक। बिल्ली के मुतालिक आप बाते हैं कि बिल्ली जो है अगरचे है तो हराम जानवरों में से लेकिन नापाक नहीं है। क्यों? क्योंकि आप माते कि घर में रहती आती जाती रहती है इसलिए इस्लाम ने इसकी इसमें गुंजाइश द है, इसमें आसानी कर दी है। तो हम आते हैं कि बिल्ली तुम्हारे घर में आने जाने वाली है, इसमें इससे बिल्ली अगर किसी चीज में पानी में मुह डाल देती है तो पानी पाक है। लेकिन बिल्ली अगर मर जाती है किसी पानी में गिरकर तो फिर व भी नापाक है और पानी भी नापाक हो जाएगा अगर उसकी स्मेल चेंज होती है तो।

आखरी मसला आप परफ्यूम इस्तेमाल करते हो और परफ्यूम में क्या होता है? अल्कोहल होता है तो क्या हुक्म इसका? फिर हाँ जी अल्कोहल क्या है? शराब है। वैसे तो जो रिसर्च है कि आमतौर पर जो परफ्यूम के अंदर या चीजों के अंदर कोहल इस्तेमाल होते हैं, मेडिसिन के अंदर वो अल्कोहल नहीं है जो शराब की शक्ल में है जिसमें नशा हो। लेकिन अगर हम मान भी ले कि वही अल्कोहल हो जिसमें नशा हो यही आपके परफ्यूम में आपकी मेडिसन इस्तेमाल हो रहा है तो फिर इसको अल्कोहल का क्या हुक्म है? क्या हराम तो है वो तो हराम तो है। ब देख शराब हराम है उसम कोई शक नहीं है लेकिन वो पाक है? नापाक है? हाँ इस मसले में उलमा का इलाफ है। बहुत से उलमा शराब को नापाक कहते है तो हराम हराम होने में किसी का शक नहीं कोई इलाफ नहीं लेकिन पाक है कि नापाक है तो बहुत से उलमा शराब को नापाक कहते हैं। लेकिन जो सही है कुरान सुन्नत के दलाल के मुताबिक कि शराब के नापाक होने की कोई ठोस वाद दलील नहीं है और बल्कि दलील यही है कि शराब हराम तो है लेकिन नापाक नहीं है। इसका माना फिर यह हु अल्कोहल भी फिर नापाक नहीं है। आप परफ्यूम इस्तेमाल कर सकते हो। इस तर के अंदर अल्कोहल जो इस्तेमाल होता है वह बहुत मामूली मिकर में होता है और वोह इस अंदाज से इस्तेमाल होता है कि उसकी हकीकत खत्म हो जाती है। यह भी अक्सर सवाल आता है खुसूस जो होम्योपैथिक केने मेडिसन है उसमें काफी अल्कोहल का इस्तेमाल किया जाता है तो अल्कोहल जिस मेडिसिन के अंदर है वो भी इस्तेमाल कर सकते हैं उसको खाया जा सकता है। तो अल्कोहल जो है वैसे तो हराम है शराब की तरह लेकिन नापाक नहीं है। अगर परफ्यूम वगैरह किसी चीज के अंदर है, परफ्यूम के अंदर होता है, मुख्तलिफ आपके पास टचर होते हैं, स्ट उसम इस्तेमाल होता है तो यह नापाक नहीं है इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। ब को मसले है तो इम से आप पूछ ले। अच्छा इससे पहले कि हम उठे यह एक पोस्टर आपके सामने है।