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यह कौन सी मैथ्स है अहमद भाई जिसमें लोगों को इंडोनेशिया के 28 करोड़ तो नजर आते हैं। पाकिस्तान के 25 करोड़ नजर ही नहीं आ रहे किसी को। इट्स नॉट अबाउट पीपल, अबाउट द वैल्यू।
आप अगर एक और ओखरा खोल देंगे कराची में, एक और कैफे फ्लो खोल के देखें, खाली हो जाएगा। जनरंतो हैड द सेम चॉइस जो जन मुशरफ के पास था 2000 का। उन्होंने क्या किया? उन्होंने कहा कि जी, आर्मी को उन्होंने पुलबक किया और उन्होंने सिविलियन को आगे करा। डेमोक्रेसी ले लिया। पाकिस्तान में ना आईडियास को वैल्यू किया जाता है, ना आईडियास के पैसे हैं। पैसे किस काम के? काम करा दो। हर कोई ये कहता है कि मार्केटिंग, मार्केटिंग का मसला है। मेरे ख्याल में हमारा प्रोडक्ट का भी मसला है। क्या हमारे बिजनेसमैन भी माठे हैं? द प्रॉब्लम इज कि हमारे मुल्क में रॉ टैलेंट है। मगर हमारे मुल्क में वो रिफाइनरी नहीं है। वो एजुकेशनेशनल इंस्टीट्यूट नहीं है।
पाकिस्तान में जब तक स्टेट का क्वांटम कम नहीं किया जाएगा, जो कि 1992-93 में मनमोहन सिंह और मोते सिंह वालिया ने किया था। दे टूक एन एक्ट्स एंड दे बेसिकली चोप पार्ट ऑफ द स्टेट आउट कंप्लीटली। द ओनली वे टू डू इट इज नॉट कि ये गवर्नमेंट रिफॉर्म कर दे। ठीक है? रिफॉर्म इज अ वैरी पुअर वर्ड। वर्ड वेरी पुअर वर्ड। नॉट, यू हैव टू टेक इट आउट। वाओ। कि सबसे पहले निशान, आज से तीन साल पहले एक स्टॉक में गेम हुआ था अमेरिका में, उसका नाम था गेम स्टॉक। आप जो वॉलस्ट्रीट है और जो आपका डिफेंस कंक्लमरेट है, आप जरा साइड पे हो। हमें, हमें जगह दें। हम जो मस्ट ने करने की कोशिश की है अभी। मस ने करने की कोशिश की है और उसने ज्यादा ही करने की कोशिश की थी।
पाकिस्तान में द बिगेस्ट पोटेंशियल ऑफ़ क्रिप्टो इज़ इफ लॉट ऑफ़ मनी इज़ स्टक इन पाकिस्तान, देन क्रिप्टो कैन गिव यू एंड अ रूट टू टेक द मनी आउट ऑफ़ पाकिस्तान। दैट्स द बिगेस्ट लॉन्डर करने का तरीका। जब डीप स्टेट जो कि बहुत से मुल्कों में होता है। यू नो, जब अपने इंटरेस्ट में ज्यादा हो जाता है। अपनी सर्वाइवल में, अपनी बका में, अपनी सक्सेस में, एज़ कंपेयर टू सर्वाइव, सक्सेस ऑफ़ द कंट्री, देन द कंट्री इज़ इंट्रो। पे टू प्ले गेम। ठीक है? अगर आपने खेलना है, आप पैसे दें या आप उनके साथ इंटरेस्ट टोकन डालें, टोकन टोकन डालें। दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। एक मुझ जैसे जो जिंदगी भर वर्क फॉर मनी और दूसरे मेरे आज के गेस्ट के जैसे लोग होते हैं। हु आर वेरी स्मार्ट, हु मेक मनी वर्क फॉर देम।
आज के हमारे जो गेस्ट हैं, हावर्ड फेलो हैं, गोल्डमन सैक्स में काम कर चुके हैं। अमेरिकन इलीट का हिस्सा हैं। लेकिन पता नहीं क्यों वापस पाकिस्तान आ गए। जबरदस्त शख्सियत है। कमाल बात करते हैं और इससे ज्यादा आजकल कोडोबा वेंचर्स नामी एक वेंचर कैपिटल फंड को हेड कर रहे हैं। लीड कर रहे हैं। अहमद दिलाल साहब, वेलकम टू रफ्तार नाउ। कैसे हैं आप?
फरहान, आई एम ग्लैड टू बी हियर। बहुत-बहुत शुक्रिया आपका मुझे इनवाइट करने का। थैंक यू सो मच। भाई, 2018-2019 की बात है। मैं समर टीवी में डायरेक्टेड न्यूज़ था, तो हमारे Google के दो या तीन ट्रिप्स लगे। उन ट्रिप्स में हम जब भी Google की मैनेजमेंट से मिलते थे, तो उनको एक ही मंजन बेचते थे। भाई, 20 करोड़ आबादी का मुल्क है। 20 करोड़ आबादी का मुल्क है। आप आइए पाकिस्तान में। पाकिस्तान में Google क्यों नहीं आता? पाकिस्तान में आए। आप बहरेन में है, आप कुवैत में है, आप कतर में हैं। आप यू नो, आप बड़े छोटे-छोटे मुल्कों में हैं। पाकिस्तान की आबादी 20 से 25 करोड़ हो गई। Google नहीं आया। ये, ये कौन सी मैथ्स है अहमद भाई जिसमें लोगों को इंडोनेशिया के 28 करोड़ तो नजर आते हैं। पाकिस्तान के 25 करोड़ नजर ही नहीं आ रहे किसी को।
देखिए, इंडोनेशिया को तो आप छोड़ दें ना। अब साउथ कोरिया में मुश्किल से 45 मिलियन, 4.5 करोड़ लोग हैं। साउथ कोरिया की कितनी बड़ी इकॉनमी है। सो साउथ कोरिया एक बहुत छोटी इकॉनमी होने के नंबर्स के लिहाज से तो हमारा कोई भी मुकाबला नहीं है। लेकिन इन्वेस्टमेंट में साउथ कोरिया में जो कोका कोला की सेल्स हैं, वो पाकिस्तान से बहुत ज्यादा सेल्स हैं। उसकी क्या वजह है? इसकी वजह, इट्स नॉट अबाउट पीपल, इट्स अबाउट द वैल्यू। ठीक है? व्हाट इज़ रेवेन्यू? प्राइस टाइम्स क्वांटिटी। क्वांटिटी हमारी बहुत हाई है। प्राइस जो होती है, जो हम अफोर्ड भी कर सकते हैं, वो बहुत कम है। जिसकी वजह से आप देख रहे हैं कि बहुत बड़े स्टार्टअप्स शुरू होती हैं। बिजनेस स्केल करती हैं। वॉल्यूम्स बहुत ज्यादा गेन करती हैं। मगर वो सस्टेनेबल नहीं हो सकती। प्रॉफिटेबल नहीं हो सकती। बिकॉज़ हमारे यहां मुल्क में जिसे कहते हैं अफोर्डेबिलिटी या लोग की पेइंग कैपेसिटी वो बहुत कम है। तो जिसकी वजह से कंपनीज़, दैट्स वै स्ट्रेंज, बिकॉज़ मैं अभी वो बॉयकॉट कैंपेन के कुछ डाटा मैं पढ़ रहा था। हम भाई, हम 25 करोड़ आबादी का मुल्क है। मतलब ग्लोबल पॉपुलेशन का कितना हो गए हम? तीन-चार % तो हो गए। हां, हम कोक और पेप्सी की कंबाइंड, मतलब सॉफ्ट फिजी ड्रिंक्स की कंबाइंड सेल्स का लेस देन 1% है। ही एक्सप्लेंस इट। पर कैसे? मतलब क्या ड्रिंक्स वहां महंगी बिक जाती हैं? यहां उतनी बिकती नहीं है। हो चक्कर क्या है ये? नहीं, तो वही एक्सप्लेन करते हैं ना कि देखिए, एक तो प्राइसेस वहां पे ज्यादा हायर होती हैं, तो मार्जिन भी बेहतर होता है। यहां पे थोड़ा सा प्राइस अगर आप कोई चीज को बढ़ा दें, अब करीम की जाने की क्या वजह है कि वो प्राइस बढ़ा नहीं सके? बिकॉज़ पीपल वुड स्विच टू चीपर, मे बी नॉट दैट बेटर। लोग क्वालिटी कॉन्शियस नहीं है। वो प्राइस कॉन्शियस है। अगर प्राइस उनको ज्यादा बेहतर मिल जाती है, कम मिल जाती है, तो लोग स्विच कर जाते हैं। तो जिसकी वजह से वो अफोर्ड नहीं कर, मार्केट में अफोर्डेबिलिटी नहीं है। ताकत नहीं है लोगों की। आपने तो सबसे बड़ी खबर पे खुद ही वो कर दिया, करीम गुड बाय हो चुकी है।
पहले तो बात ये है कि करीम पाकिस्तानी है या मिडिल ईस्टर्न कंपनी। एसके तो मुदसर शेखा ने ट्वीट किया था कि इट हैज़ अ पाकिस्तानी डीएनए। हां, तो मेरे ख्याल से वो एक्सक्लूड करना चाह रहे थे पाकिस्तान को जब उन्होंने डीएनए तक महदूद किया। आई थिंक वो आते वक्त पाकिस्तानी है। जाते वक्त वो मिडिल ईस्ट नाम बना लेते हैं कि हमारे, हमारे नहीं है। यस, बट इट्स अ बिग न्यूज़। इट्स, इट्स अ मैसिव न्यूज़, स्विवल एयरलिफ्ट, करीम, नोबडी सर्वाइव्ड। व्हाट इज द रीज़न? आई मीन, दैट्स अ क्यू-कॉमर्स, ई-कॉमर्स, एवरीथिंग। पूरी दुनिया में है। अब मैं आपको बात बता रहा हूं। गोचेक। इंडोनेशिया के आपने नाम लिया। गोचेक स्टार्ट हुए इंडोनेशिया से। इंडियन में भी आपने बताया, 280 मिलियन पापुलेशन है। लेकिन गोजक की वैल्यूएशन 10 बिलियन डॉलर्स है। $ बिलियन। इवन करीम की इतनी वैल्यूएशन नहीं थी। लेकिन इसकी 10 बिलियन डॉलर है। पाकिस्तान में कोई 100 मिलियन या 1 बिलियन डॉलर का भी राइड हेलिंग में, जो कि दुनिया भर में बहुत सी इस तरह की खड़ी हुई है, नहीं बन सकी। क्या वजह है? एक तो ये है कि वॉल्यूम इंडोनेशिया में ज्यादा है। बट लोगों की अफोर्डेबिलिटी ज्यादा है। लोगों की, कि आपको पता है इंडोनेशिया का जीडीपी पर कैपिटा 1998 में जब उनके फाइनेंसियल क्राइसिस आया था, $800 था। उफ, पर पर कैपिटा पाकिस्तान का कितना था? $800 था। वाओ! 1998, बांग्लादेश का कितना था? $800। इंडिया का कितना था? $800। अब हम कितने हैं? $800। इंडिया है कोई 2000 से $2500। $2600 भी बांग्लादेश भी 2600 है और इंडोनेशिया कितना है? $4800। अब इमेजिन करें, इन द सेम पीरियड जब हम 800 से 1000 तक पहुंचे, इंडोनेशिया जो है 800 से 4800 तक पहुंचे। ये तो बहुत ही क्रिटिकल है। आप ये तो फिर एक मतलब हमारे अंदर जान ही नहीं है। हमारी इकॉनमी में आप बेसिकली एक परचेसिंग पावर नहीं है। लोग हैं, वो हैं तो सही, बंदे, इंसान मौजूद हैं। उनकी जेब में पैसा नहीं है। आप अगर एक और ओखरा खोल देंगे कराची में, तो खाली हो जाएगा। इतनी कैपेसिटी है। ओह माय गॉड। अब आप इमेजिन करिए ना, अब लिखते हैं, लोग देखते हैं कि यार बहुत ज्यादा पाकिस्तान में पैसा है। आप एक और ओकरा, एक और कैफे फ्लो खोल के देखें, तो आप देखेंगे के खाली पड़ा होगा, खाली पड़ जाएगा। बिकॉज़, बिकॉज़ देयर इज़ नॉट डेप्थ टू द मार्केट। ये तो मैंने हेल्थ केयर में, बिकॉज़ मेरा काफी कोई नंबर है आपके पास। इसके मैंने हेल्थ केयर में काफी इसको देखा था कि टॉप फाइव टू 10% ऑफ़ द मार्केट जो है आपकी है, उससे बियॉन्ड अफोर्डेबिलिटी बहुत गिर जाती है। दैट्स व्हाई आपके मुल्क में हेल्थ केयर चंदे पे चलती है। इफ यू थिंक अबाउट इट, बिग एक्सपेंडिचर। हेल्थ केयर एक ऐसा एक्सपेंडिचर है जो लाख, दो तीन, चार लाख का खर्च होता है। ठीक? सो दैट इज़ वेयर अफोर्डेबिलिटी जो है बहुत कम होती है। पीपल हैव द अफोर्डेबिलिटी टू पे। तो एक तो ये है कि लोग पे नहीं करते। हेल्थ केयर के ऊपर स्पेंड नहीं करते। उस वक्त एक्सपेंड करते हैं जब बहुत हालात खराब हो जाते हैं और फिर उसके ऊपर वो चैरिटी के ऊपर रिलाई करते हैं। दैट्स व्हाई चैरिटी सेक्टर इज़ ह्यूज इन हेल्थ केयर। बिकॉज़ लोगों में अफोर्डेबिलिटी नहीं है। लोगों में जान नहीं है। चैरिटी इज़ द बेस्ट बिज़नेस। चैरिटी इज़ द बेस्ट बिज़नेस। उससे पहले, जीएस एड से पहले, डोनेशन और डोनर सेक्टर वाज़ द बेस्ट बिज़नेस आल्सो। यस, एक्साक्ट्ली। नहीं। तो इसकी जस्ट, जस्ट ब्रेक इट डाउन अ लिटिल फॉर मी। आप कह रहे हैं कि 98 में हम सब एक ही जगह खड़े थे। एक जगह खड़े कहा जाता है, 98 वाज़ द लॉस्ट डेकेड फॉर पाकिस्तान। के भाई, वहां तो कुछ भी नहीं हो सका और नवाज शरीफ और बेनजीर की लड़ाई में तबाही, तबाही, फिर मुशरफ साहब आए, तो बड़े अच्छे जमाना देखे हमने, फिर नवाज शरीफ के जमाने में भी थोड़ी, ये जो 25-26 साल है, हम इन 25-26 सालों में हुआ क्या है? हमारी, हमारी इकॉनमी ने अंडर परफॉर्म किया है दुनिया भर की इकॉनमी से, या वो इकॉनमी जरा तगड़ी परफॉर्म कर गई, हमने अंडर परफॉर्म किया है, एज़ कंपेयर टू अदर्स, फॉर श्योर। ठीक है? फॉर इंस्टेंस, आई मीन, इंडोनेशिया में क्या-क्या हुआ? इंडोनेशिया में द डिफरेंस बिटवीन इंडोनेशिया एंड पाकिस्तान आर टू पीपल, जनरल वेरानो, जल मुशराफ। हम जनरल वेरानो हैड द सेम चॉइस जो जनरल मुशरफ के पास था 2000 का। उन्होंने क्या किया? उन्होंने कहा कि जी, आर्मी को उन्होंने पुलबक किया, हम और उन्होंने सिविलियन को आगे, डेमोक्रेसी ले लिया। जनरल विराटो टूक आउट द यूनिफार्म एंड कंटेस्टेड द इलेक्शंस एंड ही कंटेस्ट एंड ही लॉस्ट, एंड देन देयर वाज़ अनदर जनरल, जनरल एसबी वाई, ही आल्सो कंटेस्ट द इलेक्शन एंड ही वॉन, एंड देन ही बीम द प्रेसिडेंट, द सिविलियन, सिविल प्राइम मिनिस्टर और प्रेसिडेंट, मगर उनके यहां कंटिन्यूटी रही जो आज तक है। आज उनसे पहले अभी कोई छह-दो दफा एक बंदा है, जोकोविडो, जो कि एक गरीब बंदा था, फर्नीचर का उसका बिज़नेस था, उसने फॉर्मर एक तरह से चीफ ऑफ़ जनरल स्टाफ, इंडोनेशियन आर्मी का चीफ ऑफ़ जनरल स्टाफ, स्पेशल सर्विज ग्रुप का बंदा, उसको डिफिट किया था। कैन यू इमेजिन दैट? तो वो ऐसी कंट्री में, एक जहां पे डेमोक्रेसी आई, लोगों को मौका मिला, फ्रीडम्स आई, तो उन लोगों ने ग्रो किया। आई थिंक मेरे, हमारे ख्याल में द प्रॉब्लम दैट हैपेंड इज़ कि गवर्नमेंट हैज़ बिकम द बिगेस्ट बिज़नेस। ठीक है? दैट्स, गवर्नमेंट इज़ द बिगेस्ट बिज़नेस इज़ द बिगेस्ट इंपेडमेंट टू प्राइवेट सेक्टर। मैं अमेरिका में था या इंग्लैंड में था। मुझे तो कभी कोई बंदा नहीं मिला। मेरे साथ जो टॉप नच था, जो कहते हो कि जो उनके टॉप नच जो लोग थे, कभी कोई गवर्नमेंट में कोई जाने नहीं चाह रहा था। क्या बात है। ठीक है। वह तो चाहते थे कि हम वाल स्ट्रीट जाएंगे, हम सिलिकॉन वैली जाएंगे। ठीक है। जो भी बंदा जाता था वो पब्लिक सर्विस के लिए जाता था। ठीक है। वो चाहता था कि कोई मैं खिदमत करूं। मगर कोई ठूंठ, शान और शौकत, पैसे उसके लिए, उसके लिए उस है ही नहीं। मैं बहुत से लोगों को जानता हूं जो यूएस गवर्नमेंट में काम करते हैं। वो एक गवर्नमेंट से निकलते हैं, दूसरी गवर्नमेंट में उनके दरमियान में वो कोई प्रोफेसरशिप ले लेते हैं या कोई रिसर्च फेलोशिप ले लेते हैं। बिकॉज़ उनके पास ऐसा पैसा नहीं होता कि वो अपने को सस्टेन कर सके विदाउट अ जॉब, इन्हीं हालात में।
टेकन, आई एम गोइंग टू ब्रिंग यू बैक टू द कोर पर्पस ऑफ़ दिस पॉडकास्ट, जो कि हम स्टार्टअप्स, वेंचर कैपिटल, इन्वेस्टमेंट इन पाकिस्तान का जो टॉपिक है, उस थोड़ा सा वापस आते हैं। इन्हीं हालात में हमने कोई चार-पांच साल पहले अचानक एक हंगामा देखा। एक हंगामा मचा, स्टार्टअप्स पाकिस्तान का, शुमार, हॉट, पाकिस्तान वाज़ बीइंग कंसीडर्ड अ हॉट स्टार्टअप फंडिंग मार्केट। हम बड़े पैसे आना शुरू हो गए। जी, बहुत नए-नए नाम आए, बड़े पैसे आए। फिर एकदम झाक की तरह बैठ गया और अब तो सन्नाटा है। क्या अब यहां कोई आएगा? पहला सवाल हम इसको आप दूसरा भी कर सकते हैं। और पहला सवाल ये कर लें कि वो क्यों आए थे? और फिर क्या वो, क्या कैलकुलेशन ही गलत थी? मतलब हम तो ऐसे ही थे ना यार अहमद भाई। सो उसकी वजह बहुत इंटरेस्टिंग। इसकी बहुत इंटरेस्टिंग क्वेश्चन है। उसकी वजह भी बहुत इंटरेस्टिंग है। देखिए, द बिगेस्ट कैपिटल जो पाकिस्तान में आया था, जो मूव किया था मार्केट को, यूएस कैपिटल था। ठीक है? वो सिलिकॉन वैली का था और सिलिकॉन वैली में उनके लिए 10-20 मिलियन डॉलर वैसे खर्च करना है जिस तरह हम पान खरीद रहे होते हैं। ठीक है ना? उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं है। तो वो उनके लिए पैसा फेंकना, इतना, मैं 19-20 की बात कर रहे हैं आप। मैं आपको 2021 की बात कर रहा हूं। तो बेसिकली कोविड की बात कर रहा हूं। कोविड, और कोविड क्या आया? किस-किस चीज में फंड? एयर लिफ्ट हुई थी। हुई थी। इसी बिल्डिंग में थी। अच्छा, इट्स अब्सोलुटली दस्तगीर था एंड ऑल ऑफ़ दोज़ बिग प्लेयर्स जो थे, जिनकी बहुत बड़ी-बड़ी, तो फर्स्ट टाइम द फंडिंग राउंड शुरू हुआ, शुरू हुआ था। फर्स्ट राउंड कैपिटल पाकिस्तान में आया था। ड्रैगन ईयर आए थे। ये सारे के सारे बहुत बड़े-बड़े आए थे और उसके साथ बाजार की फंडिंग हुई थी। बहुत बड़ी-बड़ी, 30 मिलियन, 40 मिलियन, 110 मिलियन की फंडिंग हुई थी। उसकी बहुत बड़ी वजह, एक दराज भी उसी जमाने में, दराज नहीं, दराज तो शुरू उससे पहले। 2014 से आई थिंक दराज स्टार्ट, बाईकिया भी उससे पुराना था। बाईकिया भी उससे पुराना था। बाइकियाज़ एंड एवरीवन इज़ अर्लियर देन दैट। ये वो जमाना है जब एयरलिफ्ट, एयरलिफ्ट वाज़ द फर्स्ट वन जिन्होंने वाकई एक बहुत बड़े लेवल पे बस क्रिएट किया था। ठीक है? फिर सुबेल भी आया था एंड एवरीथिंग। तो उसकी बहुत इंटरेस्टिंग वजह थी। उसकी वजह ये थी कि सिलिकॉन वैली का में पहले ये होता था कि जो भी सिलिकॉन वैली के फाउंडर्स होते थे, वो सिलिकॉन वैली में रहते थे। हम सो अगर आप मैं फाउंडर हूं और आप इन्वेस्टर हैं, वीसी हैं, तो आप क्या कहते थे, यार मुझे कॉफी पे मिल लो। एवरीथिंग वाज़ डन फेस टू फेस। सो यू ओनली इन्वेस्टेड इन पीपल हु लिव्ड इन सिलिकॉन वैली और यू लिव्ड अराउंड देम। ठीक है? ठीक है? जब कोविड हुआ तो वो सब कुछ बंद हो गया। तो क्या होने लगा कि सारी इन्वेस्टमेंट ज़ूम पे होने लगी। हम सो जो वीसीस ने सोचा कि यार पहले तो हम सिर्फ वीसी, हम इन्वेस्टमेंट अपने इर्द-गिर्द, अपने मोहल्ले में करते थे। अब तो हम एलए में करते हैं। सॉर्ट लेक सिटी में करते हैं, न्यूयॉर्क में करते हैं। तो हम तो दैट वर्क्स आउट वेल। तो अगर हम वहां भी कर सकते हैं तो क्या हम पाकिस्तान में नहीं कर सकते? तो क्या हम अफ्रीका में नहीं कर सकते? कहीं और नहीं कर सकते। हर जगह गए। सो वो हर जगह गए। ठीक है? अच्छा वो हर जगह गए, ऑन द बेसिस ऑफ द सिलिकॉन वैली माइंडसेट, व्हिच इज, यार ओपोरर्चुनिटी देयर, यू पुट इन द मनी, यू पुट इन अ लॉट ऑफ़ मनी एंड यू ट्राई टू क्रिएट द मार्केट एंड देन यू नो, क्रिएट डिसरप्शन और उसकी वजह से एंड में यू नो, यू मेक, यू क्रिएट वैल्यू एंड आपको उसका रिटर्न्स मिलेगा। उनका, उनका एक, उनका एक माइंडसेट है। आई थिंक वाज़ बहुत पुअर असेसमेंट थी। फ्रंटियर मार्केट की जो, जो डायनामिक्स होते हैं, बहुत डिफरेंट होते हैं, सिलिकॉन वैली, सिलिकॉन वैली इज़ बेस्ट ऑफ़ द बेस्ट। ठीक है? वहां पे लेवल ऑफ़ ट्रांसपेरेंसी, वहां पे लेवल, बर्गर बच्चे थे, वो बर्गर बच्चे थे, लेकिन तेज बच्चे थे। अब तो लिहाज़ से तेज, लेकिन इस, मैं आपसे एक और सवाल भी करूंगा। चले, आप मुकम्मल करें। तो वो, वो जो है ना उसमें वो फंस गए। ठीक है? एंड दे केम टू पाकिस्तान। उनको नंबर्स देखे, मै लेवल पे इन्वेस्ट करते थे ना। बिकॉज़ उनकी माइक्रो लेवल प्रॉब्लम्स नहीं है। इफ यू थिंक अबाउट सिलिकॉन वैली, दे लेवल पे वो देखते हैं, आइडिया, बंदा ठीक है। नीचे माइक्रो लेवल पे, डेप्थ ऑफ़ द मार्केट, टेक्नोलॉजी, ऑल द प्रॉब्लम्स आर सॉल्वड ओवर देयर इन, इन अमेरिका। दे आर नॉट, बट दे आर नॉट सॉल्वड इन हियर। ठीक है? तो वो एक्चुअल रनिंग ऑफ़ द बिज़नेस। एक्चुअल रनिंग ऑफ़ द बिज़नेस। तो वो नहीं है। लेकिन इसमें दो चीजें हैं, पूछूंगा। एक तो पहला सवाल ये बताएं मुझे कि ये जो बर्गर बच्चे आए, सिलिकॉन वैली के, एक तासुर है और मैंने ये मिस्टर मायर से भी पूछा था, बैकिया वाले, तो वो तो खैर डिफेंड कर रहे थे, लेकिन मैंने उनसे ये पूछा था, मैंने कहा था यहां पर एक तासुर ये बना कि अगर आप आईबी यूनिवर्सिटी से पढ़े हुए हैं, तो ये एक पॉइंट ऑफ़ रेलेवेंस बन गया था सिलिकॉन वैली इन्वेस्टर्स के लिए और वो चार में से एक ना एक को-फाउंडर कोई अगर आईबी लीग बाहर का पढ़ा हुआ है, तो उसको फंडिंग मिल जाती थी। हां, ये जानने वाला है हमारा यार, ये इससे हमारा डाटा मिल गया और वो सारे के सारे बच्चे, वो पैसे लेके, उन्होंने जिस तरह से उस पैसे को बर्न किया है और जिस लेवल की, मतलब मैं नाम लेना अच्छी बात नहीं है। मुझे किसी ने बताया कि फैसला के सबसे महंगे इलाके में वेयरहाउस बनाया गया, वन ऑफ़ दीज़ स्टार्टअप्स जिसको फंडिंग मिली। दे रियली बर्न कैश। मतलब, समटाइम्स ऑन थिंग्स दैट वर नॉट इवन नेसेसरी। क्या ये भी, क्या ये मिसजजमेंट सिर्फ इकॉनमी नहीं, बंदों के ऊपर भी मिसजजमेंट किया, नहीं किया? उन्होंने, आई थिंक आई डोंट नो, नी ने डिसग्री किया था बिकॉज़ आई थिंक स्पॉट ऑन, आई थिंक उन्होंने जब देखा कि किसमें इन्वेस्ट करेंगे, दे लुक अराउंड, उनके कोई जो बॉडीज होंगे, आईबी लीग के पाकिस्तानी थे, जिनके साथ उनकी रिलेशनशिप थी, दे आर पीपल, एंड दैट्स नेचुरली द राइट थिंग टू डू। ठीक है, मैं जानता हूं, उसको जानता हूं, लड़का है, वैल्यू सिस्टम है, मैं नाज़माबाद का रहने वाला, मोहल्ले का था, ये था, कहां भागे जाएगा। ठीक है ना, मेरे से कम, दैट्स द फर्स्ट स्पॉट ऑफ़ कॉल एंड दैट्स द वे इट्स ऑलवेज वर्क। तो ये तो बाद में उसमें कोई गलत नहीं थी। लेकिन जो यहां पे उनकी गलती हुई थी, उनको असेसमेंट करना चाहिए था कि यार, दिस इज़ अ डिफरेंट मार्केट। यहां पे ऑपरेशनल रियलिटी इसकी बहुत डिफरेंट है। आप अमेरिका में आप फ्रंट एंड देखते हैं। हम यहां पे बैक एंड देखते हैं। बाय दैट आई मीन इज़, वहां पे ऐप बना लें। जैज़ ऐड बना दें। बहुत अच्छा है। यहां पे होता है, वेयरहाउस में कौन अपनी जेब में कितने हजार का पैसा लेके निकल रहा है? कौन उसी चीज को खुद बस कस्टमर बना के सस्ता खरीद के फिर कहीं और पे बेच रहा है? आपके मसले बहुत माइक्रो लेवल पे मसले हैं। आपके मसले बहुत प्रोसेस कंट्रोल्स के मसले हैं। हम तो, तो आई थिंक दैट वे दे डिडंट रियलाइज़। हमारे मुल्क में व्हाट दे आल्सो डिड रियलाइज़ के व्हेन यू हैव अ सिस्टम जहां पे लूज़ वैल्यूज़ या वीक वैल्यूज़ बहुत कम बात है और लूज़ और वीक प्रोसेसेस हो, एंड देन यू पुश अ लॉट ऑफ़ मनी, ओह, बहुत लीकेजेस होती है। ठीक है, टू, टू गेट ग्रोथ, देन 30% ऑफ़ दैट मनी इज़ जस्ट गोंना लीक। जस्ट गोंकली। इट्स जस्ट गोंना लीक। दैट डज़ंट हैपन इन सिलिकॉन वैली। सो यू आर सेइंग कि इट वाज़ मोर ऑफ़ अ सोसाइटल प्रॉब्लम दैट वी हैव एज़ वेल। रोते हुए गए हैं लोग। रोते हुए गए। पीपल रोते हुए गए और ये भी बात सुनेंगे, रोते हुए नासिर बेचारे वो गए हैं, रोते हुए हर पाकिस्तानी, जो सिलिकॉन वैली का इन्वेस्टर, जो कि पाकिस्तान, पिछले 20 साल इन्वेस्ट किया है। सारे के सारे रोते हुए गए हैं। टेल मी सम स्टोरीज। कोई आपके, जान सफी कुरैशी वगैरह, दे आर बिग फाउंडर्स जिन्होंने इन्वेस्ट किया था। दे ट्रस्टेड द पीपल, दे ट्रस्टेड। दैट्स द वे द अमेरिकन सिस्टम वर्क। देखिए, अमेरिकन सिस्टम का मैं आपको बात बता रहा हूं। आई वंस वेंट इंटू अ मार्केट, वंस इनू अ रोड आइलैंड, एक जगह है, प्रोब्ली में, तो आई वेंट एंड मेट ए बेसिकली टेक्नोलॉजी कंपनी का फैमिली ऑफिस था, बेसिकली टू थ्री वेल्थी पीपल गॉट टुगेदर एंड दे वर इन्वेस्टिंग देयर फंड, सो आई वाज़ रेइजिंग अ पाकिस्तान फंड, सो आई वेंट देयर, यंग पर्सन, आई वाज़ यू नो, अबाउट 10-12 साल पुरानी बात है, एंड आई वेंट एंड मेट देम, नॉट थैंक यू वैरी मच, लाइक आई वाज़ यंगर, यंगर, सो आई वेंट एंड मेट देम, देयर वर फोर ऑफ़ देम, दे क्वेश्चन, दे बेसिकली इंटेरोगेटेड मी फॉर वन ऑवर 45 मिनट्स। ठीक है? लेफ्ट, राइट, सेंटर, ये करना है, वो करना। मैं बाहर निकला, अच्छा, आई वी, दे वर मोस्ट इंटरेस्टेड इन नॉर्थ अफ्रीका और मिडिल ईस्ट की मार्केट्स। पाकिस्तान को में मुझे, मुझे किसी ने ऐसे ही भेजा। वो पाकिस्तानी नहीं थे। पाकिस्तानी नहीं थे। गोरे, गोरे थे। गोरे थे। गोरे थे। वो सिलिकॉन वैली के एक बहुत मशहूर बंदा है। ब्राइन मिक्सर उसका नाम है। वो टेलीकॉम्स के बिलियनेयर्स हैं। तो उनका जो है ना, प्राइवेट फैमिली ऑफिस था जो कि इन्वेस्ट कर रहा था। मुझे दो हफ्ते बाद मेरे जो कोलीग थी, सारा अलेक्जेंडर, उनकी कॉल आई, उन्होंने कहा, दे हैव एलोकेटेड 15 मिलियन फॉर पाकिस्तान, जस्ट ऑन वन मीटिंग, 15 मिलियन डॉलर। व्हाई? दे लुक एट यंग पीपल, नंबर वन, उनकी आईडिया है ना, उन्होंने देखा है, बिकॉज़ दे फील कि यार एक यंग बंदा है, वो शायद वो काम कर जाए जो जेडेड लोग और जिन्होंने बहुत बार किया है वो ना कर सके। ठीक, यंग बंदे के
एटलीस्ट इफ ही हैज़ रिगरस ही इज़ कमिटेड दे आर विलिंग टू बेड अमेरिका की ये बड़ी बड़ी बात है। वैसे यू हैव टू दे टेक अ बेट ऑन यू। दे विल नॉट आस्क यू।
मेरी दुनिया में हर जगह जब मैं गया हूं कहा यार हु इज द ग्रे हेड गाय बिहाइंड यू? देव ऑलवेज आस्क मी। ठीक है? तुम्हारे पीछे कौन है? अमेरिका वो वाहिद जगह है जहां पे देव नेवर आस्क मी। कि यार आपके पीछे कौन खड़ा है। दैट्स व्हाई अमेरिका इज़ वन ऑफ़ द ग्रेटेस्ट टू डू। दैट इज़ व्हाई इफ यू दिस एन अमेरिकन ड्रीम एंड एव्रीथिंग। देयर इज़ द रीज़न फॉर दैट। दैट्स व्हाई यंग पीपल इज़ द बेस्ट प्लेस फॉर यंग पीपल टू बी। सो मैं सो वो लोग ट्रस्ट करते हैं। ठीक है? इंटरेस्ट उसके ऊपर उनका सिस्टम भी है। वहां पे लॉज़ रेगुलेशन भी है। अगर आप उनको वो भी नहीं है। वहां पे वो भी नहीं है। ठीक है? यहां पे डेप्थ ऑफ़ टैलेंट भी नहीं है।
सो या तो आपकी अगर वैल्यू सिस्टम भी अच्छा मिल जाए तो शायद स्किल सेट आपको अच्छा ना मिल सके वो एक्सजीक्यूशन करने का। दूसरी बात है आपका जो इंफ्रास्ट्रक्चर है जिसके ऊपर आप स्केल करते हैं। जैसे टर्म देयर इज़ यूज़ कॉल्ड ब्लिड स्केलिंग। वै फेमस ब्लिट स्केलिंग। आप इमेजिन करें आपका फरारी है और आपकी गाड़ी है जो कि खड्डा मार्केट से या कहां से गुजर रही है तो आप गाड़ी में डक डक डक डक डक डक करते जाएंगे सड़क ही नहीं है सड़क गाड़ी आपके पास होगी टेस्ला कोई सी भी गाड़ी है और आप उसके ऊपर तेज तेजी से चला रहे हैं तो थोड़ी देर बाद गाड़ी टूटेगी आप इमेजिन करें दैट्स द सिचुएशन व्हाट्स द रीज़न व्हाई इट्स डिफिकल्ट टू स्केल इन द कंट्री दैट इज दैट इज यू हैव जस्ट अनलोडेड सो मच इन फ्रंट ऑफ मी आपने तो पूरा ना यूं एक पेंडोरास बॉक्स खोल दिया है तो यानी कि दे वर नॉट ओनली मतलब अमेरिकनंस जो थे वो तो चले बेचारे नाइव थे। हमारे वाले लोगों ने जो हमारे बच्चे थे जो आईबी लीग से पढ़ के आए थे और जो उनकी जिन्होंने उनसे पैसे लिए क्या उनकी भी नियतें ठीक नहीं थी? नहीं नियतों का फैसला करना मुश्किल होता है। बट बट स्टिल वी कैन ओनली गो बाई परफॉर्मस। देखिए वो वी कैन ओनली गंदा भी जानकारी निकला।
देखिए आई थिंक फर्स्टली स्केलिंग अ बिज़नेस इज टफ। ठीक है? ठीक है स्केलिंग बिज़नेस आप यू आर एंटरप्रेन्योर। आई एम अ एंटरप्रेन्योर बड़ा मुश्किल है। जहाद है पाकिस्तान में तो करना जहाद है। नंबर वन स्केलिंग एनीवेयर इन द वर्ल्ड इज़ वैरी टफ। यू ओनली हियर द गुड न्यूज़ गुड स्टोरी डोंट गेट। नंबर वन। सो लेट्स लेट्स लेट्स बी फेयर। नंबर टू स्केलिंग अ प्लेस इन अ प्लेस लाइक पाकिस्तान। विद नो इंफ्रास्ट्रक्चर इज़ डब्ली टफ। स्केलिंग इन अ प्लेस लाइक पाकिस्तान व्हिच हैज़ गॉट एन ओवर एक्स इंट्रूसिव हम एंड एक्सपेंसिव गवर्नमेंट। हम व्हिच इज़ नॉन लॉजिकल डज रिसोंड टू रीज़ ठीक है एंड इट ओनली गिव्स डिक्टेट व्हेन यू डील वि द गवर्नमेंट दैट्स व्हाट हैपन इट्स वेरी टफ जॉब सो दैट्स दैट्स वन रियलिटी ऑफ़ इंडिया बट उसके बावजूद आई वुड थिंक के यू नो आई थिंक पाकिस्तान का मसला ये रहा है और ये हमारा और बाय द वे ये पाकिस्तान का नहीं है ये तमाम फ्रंटियर इकॉनमीज़ का होता है जो बंदा टेढ़ा होता है जो दूसरा तरफ शरीफ बंदा होता है ना वो उसको दबा देता है बिल्कुल ऐसे ठीक है सो जहां पे फाउंडर हम तगड़े थे हम और अपना और और जो इन्वेस्टर था वो शरीफ था या ट्रस्टिंग था तो फाउंडर ने हम हम ऐसी की तैसी कर दी और जहां पे इन्वेस्टर होते हैं और फाउंडर ज्यादा शरीफ होता है तो वहां पे इन्वेस्टर ज्यादा हावी हो जाते हैं और वो बेसिकली ज्यादा इक्विटी ले लेते हैं। सो दे इट्स अ प्रॉब्लम ऑन बोथ साइड्स ऑफ़ द ऑफ़ द इक्वेशन।
बट मेरे ख्याल में जो इन चीज़ में हुआ था कि आई थिंक मोस्ट ऑफ़ द फाउंडर्स हु केम व फ्रॉम द फ्रंट ऑफिस। सो आई वुड कॉल दे वर मार्केटिंग, ब्रांडिंग, ऐप डेवलपमेंट, रूट टू मार्केट पीपल। दे वर दे वर बेसिकली स्ट्रेटेजिस्ट एंड आई वुड से विज़नरीज़ इफ आई वुड से दैट बट दे आर नॉट ऑपरेटर्स। पाकिस्तान इज़ एन ऑपरेटिंग मार्केट। द गैप बिटवीन विज़न, स्ट्रेटजी एंड ऑपरेशंस इज़ ह्यूज इन अ कंट्री लाइक पाकिस्तान। इफ यू हैवंट रन अ बिज़नेस इन पाकिस्तान, यू लूज़ योर शर्ट वैरी ईजीली। बिकॉज़ आप समझते हैं कि मार्केट में एक्स होगा। वो एक्स नहीं व नहीं जेड नहीं वो पता नहीं डीसी पता नहीं क्या चल रहा होता है। क्या जुगाड़ चल रहा होता है।
भाई आपकी बात सुनकर तो लग रहा है कि पाकिस्तान के अंदर ये वीसीस को सारे पैसे कुछ 40 से 50 साल की उम्र के खाबड़ बिज़नेस रन किए हुए लोगों के आइडियाज पे लगाने चाहिए थे। जिनको मार्केट चलाने का जिनको पता होता यहां पे रूल्स ऑफ एंगेजमेंट क्या है।
अब्सोलुटली आई थिंक आपको पता है तो पाकिस्तान में यू आर बेटर ऑफ अ लिटिल ओल्डर। आई आई थिंक सो जनरली डोंट इवन इन पाकिस्तान। जो जो सबसे दुनिया में बहुत मशहूर लोग हैं वो 30 साल से कम के हैं। बट ऑन एवरेज अगर देखें तो ज्यादातर जो है ना स्टार्ट 35 साल या 40 साल यस देयर इज़ अ स्टैटिस्टिक कि सबसे ज्यादा हाईएस्ट सक्सेस रेट है 40ज में आती है। देयर इज़ अ स और यूएस में भी है। सो आई थिंक डेफिनेटली इन अ केस केस लाइक पाकिस्तान बट आपको जो देखना चाहिए वो ये देखना चाहिए स्ट्रेटजी से कहीं ज्यादा पाकिस्तान में जरूरत नहीं है। नोबडी केयर्स अबाउट आइडियाज। व्हाट पीपल केयर अबाउट इज़ एडमिनिस्ट्रेटिव एक्स एक्सक्यूशन। ठीक है ना? डंडा डंडा दुनिया में आइडियाज को आइडियाज को वैल्यू किया जाता है। चाहते आइडियाज के पैसे भी हैं। आइडियाज के वैल्यू पाकिस्तान में ना आइडियाज को वैल्यू किया जाता है ना आइडियाज के पैसे हैं। ठीक है? सो स्ट्रेटजी के पैसे नहीं है। पैसे किस काम के हैं? काम करा दो। हां।
मुझे एक चीज समझाएं। बहुत ही मैं आमियाना सी बात पूछ रहा हूं। लेकिन एक्सक्यूज माय इग्नोरेंस। मेरी मेरी कम इल्मी पे मुझे जज ना कीजिएगा। मुझे ये बताएं। एक बंदा एक रेस्टोरेंट खोलता है। वो तो बिजनेस स्टार्ट करता है। हम लेकिन एक बिजनेस खोलने में और स्टार्टअप में क्या फर्क होता है? नहीं कोई फर्क नहीं होता। टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप में वैसे ये होगा कि आपके पास थोड़ा सा एडवांटेज होता है। आप टेक्नोलॉजी को यूज़ कर रहे होते हैं, लेवल कर रहे होते हैं। और उससे फायदा ये होता है कि चंद बार जो ह्यूमन एरर या ह्यूमन जो चीजें हो रही होती है जहां पे यू हैव टू हायर पीपल। भी ह्यूमन इन्वॉल्वमेंट होती है ना तो आपकी परफॉर्मेंस ऊपर नीचे हो सकती है। पर अगर आपका सॉफ्टवेयर है सॉफ्टवेयर तो ना थकता है एंड सॉफ्टवेयर में कोई वेरिएशन नहीं आती है तो टेक्निकली उसका एक फायदा होता है। मैं मैं कहीं पढ़ रहा था। आई थिंक पीटर थियोल की किताब थी एक किसकी थी कि बेसिकली उसने शायद ये लिखा मुझे समझ नहीं आया था इसलिए आपसे पूछ रहा हूं। उसने कहा कि हर वो धंधा जिसका मुस्तकबिल इंतहाई अनसर्टेन हो हम उसको मैं स्टार्टअप समझता हूं। जो किसी लगे लिपटे बंधे हुए सर्टेन फ्यूचर वाले धंधे में जैसे मैंने नाई की दुकान खोली है। ये स्टार्टअप नहीं है। नाई की दुकान एक सर्ट रेस्टोरेंट खोलना है। स्टार्टअप नहीं है। ये चलता ही है। या जैसे फर्टिलाइजर की दुकान खोल ली। मुझे पता है क्या होगा। मेरे मेरे बड़े नोन किस्म के स्केल स्केल्स हैं। मुझे पता है व्हाट्स गोना हैपन। अगर चला भी तो ये होगा, नहीं चला तो ये होगा। सही सही। बट इन स्टार्टअप्स यस। यू डोंट नो। देखिए स्टार्टअप तो वो पीटर दिल बात कर रहा है पैलेंटियर वगैरह और इस तरह की चीजें जो कि बहुत डिसरप्टिव है। दुनिया में बहुत यूनिक उनकी इनोवेशन है। ठीक है? तो वो वहां पे पाकिस्तान में कौन सा ऐसा स्टार्टअप हो सकता है या है या हुआ है?
पाकिस्तान में वही चीज हुई है जो दुनिया भर में हो रही है और पाकिस्तान में रिपीट हो रहा है। ठीक है? या पाकिस्तान में जो चीज बड़ी अच्छी हुई है जो कि आपका आई बहुत अच्छा एग्जांपल ज़.com उन्होंने क्या किया? एक चीज जो फिजिकल होती थी उसको डिजिटाइज कर दिया। देयर इज़ वैल्यू इन लॉट ऑफ़ वैल्यू इन इट। आई थिंक पाकिस्तान में लोग अंडरस्टिमेट करते हैं। फिर हसान में बहुत बड़ी एक ओपोरर्चुनिटी है डिजिटाइजेशन ऑफ फिजिकल बिनेसेस एंड टू गेन स्केल क्विकली और उसका फायदा आप इंप्रूव प्रॉफिटेबिलिटी बिकॉज़ जहां पे आप सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करेंगे वहां पे वो भी आबिट्राज में वो भी आब्राज जो ऑलरेडी काम चल रहा है चल रहा है उसको सबसे पहले डिजिटाइज करें सबसे पहले डिजिट उसके आब्राज पे कमा लो उसके ऊपर आपके आपका है उसमें जमीन ने बहुत अच्छा काम किया आप जो भी देखेंगे बिज़नेस जिन्होंने अच्छा किया है उन्होंने या तो अच्छा उसला किया कि पाकिस्तान में सर्विस सेंटर बना के बाहर को किया है या उन्होंने पाकिस्तान का लोकल इस पूरी बिल्डिंग में बैक ऑफिसिसेस भरे हुए हैं। मैं हम जवान हुए ये सोचते हुए कि हमारे पास कहानी का मसला है। हम किरदार है कहानी नहीं है। अब तो ये शक होने लगा है कि मतलब हम समझते थे प्रोडक्ट है। पाकिस्तान में जान है। स्टोरी नहीं है। पाकिस्तान की आवाम के पास टैलेंट बहुत है। डायरेक्शन नहीं है। ये कुछ हमने हमारे कुछ थे नजरियात। अब ये जैसे-जैसे बुढ़ापे की दहलीज पर कदम रख रहे हैं तो ये गुमान होने लगा है कि पार्टनर प्रोडक्ट भी कोई खास नहीं है। स्टोरी तो नहीं है लेकिन वो इसी वजह से नहीं है कि प्रोडक्ट भी कोई खास नहीं है। और टैलेंट भी कोई खास नहीं है। आपने कहा ना टैलेंट डेप्थ नहीं है। आपने भी कहा ये कि ये इज दिस ट्रू? क्या वाकई इतना ही ब्लक पिक्चर है हमारी? जो आप यानी एक जमाने में आइडियलिस्ट होते थे आप प्रैक्टिकल हो गए यानी दुनिया ने आपको बना दिया ठोकरे खा के आपने रोमांटिक था रोमांटिक था आई थिंक के दिस इज़ ऑलवेज इज इट अ प्रोडक्ट प्रोडक्ट का मसला है मार्केटिंग का मसला है ये हमेशा ये होता है ठीक है ना ये सो द क्वेश्चन इस पाकिस्तान में हम अगर किसी को हर कोई ये कहता है कि मार्केटिंग मार्केटिंग का मसला है हमारा इमेज खराब है कहीं किसी को कहेंगे कि प्रोडक्ट का मसला है तो आपको फतवा जारी हो जाता है ठीक है बट बट मेरे ख्याल में हमारा प्रोडक्ट का भी मसला है। वाओ जी और प्रोडक्ट का मसला ये है जिसकी वजह से हम कंसिस्टेंटली आउट अंडर परफॉर्म आपने बताया इंडोनेशिया गया। अच्छा उसी अरसे में इंडिया कहां चला गया? बांग्लादेश कहां चला गया? सऊदी अरेबिया कहां जा रहा है? आगे पीछे कहां जा रहा है? तो हम क्यों नहीं आगे जा रहे?
अच्छा बाय द वे मैं आप सेंट्रल एशियन रिपब्लिक चले जाएं। ओ यार उज़्बेकिस्तानकिस्तान उज़्बेकिस्तान अज़रान दे वर बास्केट केसेस होते थे आज से 15 साल पहले 2007 2008 में उनके वहां पे रेवोल्यूशन वगैरह ममारी चल रही थी अब आप वहां जाए वहां पे 25-25 मिलियन डॉलर का फंड रे हो रहा है एग्जिट्स हो रहे हैं चीजें हो रही है उज़्बेकिस्तान टाइप की जगह पे उन्होंने अपना कोई ना कोई तरीका निकाला है अपने आप को बेहतर करने का स्टेबिलिटी लाने का सो प्रोडक्ट का हमारा है वेदर कि यहां पे गवर्नमेंट हुकूमते बहुत जल्दी चेंज चेंज हो जाती है। दूसरी बात है कि एक तरह से एक तरह से हुकूमत तो दुनिया भर में चेंज हो जाती है लेकिन पॉलिसी नहीं चेंज होती। हमारे यहां ये होता है कि जी अब आप बात बिस पोता था। फिर बिस के ऊपर वो जिना कार्ड बन गया। फिर जिना कार्ड के बाद वो वतन कार्ड बन गया। मतलब हर बंदा आता है और अपने अपना उसको कोई फ्लेवर देने की कोशिश करती है। उसकी क्या वजह है? मतलब उसकी वजह पिछले दिनों हमारी बिगे फिरोज हसन है। ईटिंग ग्रास के ऑथर हैं। बहुत ही उन्होंने जबरदस्त किताब लिखी है पाकिस्तान न्यूक्लियर प्रोग्राम की। उनके साथ हमने पडकास्ट की थी रफ्तार पे। उन्होंने एक बड़ी जबरदस्त तरफ इशारा किया। उन्होंने बोला शायद पाकिस्तान की तारीख का वाहिद एक प्रोजेक्ट है जिस पर कंसिस्टेंटली हर हुकूमत सेम पेज पे रही है। यस चाहे वो डिक्टेटरशिप्स हो या सिविलियन हुकूमत हो चाहे वो कोई भी न्यूक्लियर है। और उसमें हमने परफेंस दिखाई है। बिल्कुल सही। इफ दे अगेंस्ट ऑल ऑ्स इफ देयर इज वन इंडस्ट्री अगर हमारे मुल्क में है जहां पे हम ग्लोबली कंपेटिटिव है टेक्सटाइल्स में नहीं है किसी चीज में नहीं एग्रीकल्चर भी नहीं है वो है न्यूक्लियर तो उसका मतलब है कि कहीं ना कहीं अगर हम कंसिस्टेंसी लगाते हैं नेशनल मिशन बनाते हैं हम कर लेते हैं और उसकी वजह क्या है बहुत बड़ी वजह है उसकी वजह ये है कि उसका नट बोल्ट से लेके हर चीज की हमने आरएडी की हुई है और हर चीज हम खुद बना रहे हैं सेल्फ सफिशिएंसी की है जिसकी वजह क्वेश्चन इज़ कि ये सिर्फ न्यूक्लियर तक क्यों महदूद रहा ये हमने इकॉनमी पे क्यों नहीं किया ये हमने टैक्स टू जीडीपी पे क्यों नहीं किया हमारी एग्रीकल्चरल यड्स हम एग्री इकॉनमी एग्री इकॉनमी एग्री इकॉनमी बोलते रहे वर्स्ट ईयर फॉर मेजर क्रॉप्स जी जी मतलब हम तो जो हमारी थी चीजें एक टेक्सटाइल यार मतलब हम ये लोग हमसे आपको पता है टेक्सटाइल की सब्सिडीज ज्यादा है बिनिस्ब हमने जो न्यूक्लियर वेपन डेवलप करने के लिए ऐसा हो सकता है इट्स रेडिकुलस ठीक है और टेक्सटाइल हमेशा और मांग रहे होते और मांग रहे होते हैं और वही 20 बिलियन डॉलर पे रुके बैठे हुए हैं पिछले 20 साल से आगे पीछे कहीं नहीं हो रहे ना जितना हो जाए कुछ हो जाए वही बैठे हुए हैं। सो ये ये हम तो कहीं भी नहीं कर सके। सो इसकी वजह क्या थी? क्या हमारे बिजनेसमैन भी माठे हैं?
अच्छा देखिए दो तीन चार चीजें एक तो ये कि हमारा टैलेंट का बहुत ज्यादा इरोजन हुई है और ब्रेन से ज्यादा क्वालिटी हमारा अभी मुझे किसी से मैं बात कर रहा था के एक जमाने में वर्ल्ड बैंक में और आईएमएफ में बहुत सीनियर पाकिस्तानी थे। पाकिस्तानी होते थे। ठीक है। दैट वाज 1990 तक और 2000 तक रहे। पाकिस्तानी बैंकर्स दुनिया में मशहूर थे। और खास तौर पे एचबीएल के लोग जाते एचबीएल के जाते थे बट पाकिस्तानी ब्यूरोक्रेट्स इकोनॉमिस्ट वो अकबर एक होते थे वो गए थे डॉक्टर इशरत थे फिर मोइन कुरैशी थे सर शाह फैसल का पेट्रोलियम का और रिफॉर्म्स का मॉनिटरी पॉलिसी का हेड वाज़ अ पाकिस्तानी अहमद जखिया क्या नाम था अब्सोलुटली सो पाकिस्तानी यूएन में और उसमें बहुत अब आप जाके देखें वी हैव नॉट हमारे बहुत कम लोग हैं। उसकी वजह ये है हमारी जो पाइपलाइन आ रही है बच्चों की स्टूडेंट्स की जो बनती है प्रोवाइडेड इनू प्रोफेशनल्स या ब्यूरोक्रेसी ये सारे के सारे जो गए थे डॉक्टर वगैरह ब्यूरोक्रेसी से गए थे वो अब वो क्वालिटी आ ही नहीं रही है बिकॉज़ हमारे एजुकेशन का सिस्टम इतना ज्यादा या हम हम या ये ये ऐसा है कि हम वहीं खड़े रह गए और दुनिया की डिमांड्स रिक्वायरमेंट बहुत बेहतर हो गई है। नहीं आई थिंक हमने प्रोग्रेस नहीं किया। हमने नहीं किया। हमने प्रोग्रेस नहीं किया। दुनिया दुनिया दुनिया भी आगे गई है। आगे गई है। दुनिया ने फायदा उठाया लेकिन हमने भी स्पेशली ये जो एक पोस्ट इंटरनेट दौर है उसमें तो हम बिल्कुल कोलैप्स कर गए। मिड 90ज के बाद से जो टाइम आया है पिछले 30 साल। अभी आप मुशर्रफ की भी बात कर लें। मुशर्रफ के जमाने में भी वो रियलस्टेट का बूम आया था। थोड़ा सा मोबाइल फोन का बूम आया था। बट दैट इज़ बट क्या हुआ था इनोवेशन? क्या हुआ था? पता चला ना आपको क्या हुआ? क्या हुआ? फिर आप फाइनेंसियल क्राइसिस में आ गया आप। 2007 से आपके मसाइल खड़े हो गया। ₹ से ₹1 पे जी पहुंच गया। दूसरी बात मैंने जो आपकी बात करना है ना टैलेंट के ऊपर देखिए टैलेंट जिस तरह होता है ना तेल की तरह होता है। हम ठीक है? तेल जिस तरह होता है इट्स सोर्स ऑफ़ एनर्जी। हम पर तेल को मैं क्या करूंगा? हम तेल से मैं जो जमीन के अंदर तेल होता है उससे मैं क्या करूंगा? कुछ नहीं कर सकता। मैं पी नहीं सकता। मैं कुछ नहीं कर सकता। सो रॉ टैलेंट है पाकिस्तान में बहुत ज्यादा। एक होता है रॉ टैलेंट एक होता है डिप्लॉयबल टैलेंट। ठीक। तो मैं हम बात कर रहे हैं जो हम कह रहे हैं हमें टैलेंट नहीं मिलता उसका मतलब नहीं है कि हमारे पास रॉयल नहीं है वो हमारे डिप्लॉयबल टैलेंट नहीं है। आई कॉल डिप्लॉयबल उसका मतलब क्या है? जिस तरह आप तेल निकालते हैं तेल को रिफाइनरी में डालते हैं। रिफाइनरी से आप उसको स्प्लिट करते हैं। उसका जो स्पेसिफिक तेल निकलता है वो गाड़ी में डालते हैं। गाड़ी के वो कमशन इंजन में जाता है और फिर उससे आगे जाता है। दैट इज द डिप्लॉयमेंट ऑफ़ ऑयल। ठीक? द प्रॉब्लम इज कि हमारे मुल्क में रॉ टैलेंट है। मगर हमारे मुल्क में वो रिफाइनरी नहीं है। वो एजुकेशनल इंस्टीटश नहीं है। हम जो उन टैलेंट को रिफाइन कर सके। ठीक है? और फिर उसके बाद हमारे मुल्क में वो कॉर्पोरेट्स नहीं रही है। अब आपको पता है पिछले 10-15 साल में कितने मल्टी नेशनल हैं जो मुल्क से देन चले गए हैं। तो मल्टीनेशनल का क्या फायदा होता है? इंडिया में क्या होता है कि मेकिंजी भी है और Intel भी है और आईबीएम भी है। सारे निकल गए हैं यहां से। उसकी वजह ये है कि जिस तरह गाड़ी में होता है ना आप उसको आप पेट्रोल में डालते हैं उसको कंबस्शन इंजन में उसको इस्तेमाल करते हैं वो एक रॉ टैलेंट जो कि रिफाइन होता है गाड़ी में लगता है तो कंपनी में आता है तो उसको प्रोसेस समझाया जाता है उसको सिस्टम समझाया जाता है उसको वो बाहर के सिस्टम वाली कंपनी होती है वो बाहर की सिस्टम वाली होती है उनको पता होता है कि किस तरह स्केल में किस तरह कंट्रोल में किस तरह इनोवेशन करना है किस तरह चीजें करनी है तो फिर जाके आपका जो रॉ टैलेंट है वो डिप्लॉयबल टैलेंट इंटरनेशनल टैलेंट के लेवल पे जाता बिल्कुल इंटरनेशनल टैलेंट के लेवल पे जाता है हम हम लोग तो वो मिस कर रहे हैं ना हमारी एजुकेशन इंस्टीटश भी नहीं है। हमारे कॉर्पोरेट और आपको पता है कि क्या कल्चर है इन टर्म्स ऑफ़ रिगर इन टर्म्स ऑफ़ हार्ड वर्क या प्रोडक्टिविटी प्रोडक्टिविटी क्या है? सर वी हैव सर दो नंबर्स आपके सामने रखता हूं। बड़ा मुझे पता है शायद लोग नाराज हो लेकिन भाई ये मतलब हमको आप डुलू नॉट कहीं ऐसा ना हो बहुत डुलू इज़ इज़ नॉट द सलुलू। वो कहते हैं ना कि डलजन इज़ नॉट अ सशन। तो दो नंबर्स आपके सामने रखते हैं। एक तो लेबर प्रोडक्टिविटी पाकिस्तान अफगानिस्तान से भी नीचे है। बांग्लादेश को और इंडिया को और वियतनाम को और चाइना को तो भूल जाइए। हम अफगानिस्तान से भी बुरी मतलब एक पाकिस्तानी लेबर 8 घंटे में जितना काम करता है वो हमारे पूरे थर्ड वर्ल्ड के अंदर भी सबसे कम है। वाओ। ठीक है? पहला ये ये हमारी आम आवाम के सतह पे और फिर है एक ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स जो वर्ल्ड बैंक बनाता है। ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स बेसिकली एक बैरोमीटर है कि वो यह इस चीज का पता करते हैं कि अगर एक इंसान के पास 100 यूनिट्स ऑफ टैलेंट है हम तो इस मुल्क के अंदर पैदा होने के बाद जब वो पूरा स्कूल मुआशरा यूनिवर्सिटी से गुजर के जॉब पे आएगा तो वो उस टैलेंट का कितना परसेंट पोटेंशियल अचीव अपने ह्यूमन पोटेंशियल का सेल्फ एक्चुअलाइजेशन को कहां तक पहुंच जाएगा तो जो जापान है दुनिया के स्वीडन है स्कैंड उनमें ये 85 80% तक है। अमेरिका में 60 या 70 के दरमियान है। पाकिस्तान में 42% है। देखिए अंडर यूटिलाइजेशन पेस्टाइन में 46 है। वाओ सोबरिंग नंबर्स हैं। हमारा एक सबसे बड़ा मसला ये रहा है कि हम हमारे डीएनए के अंदर डलूजन है। मुझे मुझे महसूस होता है कि हम होते कुछ हैं, दिखाते कुछ हैं। हम वो मतलब हम सबसे पहले गाड़ी ले लेंगे। हम सबसे पहले यू नो वी वी वी बिलीव इन अ लॉट ऑफ़ शबशबा हम हवामा वलबला दबदबा। यही आप गवर्नमेंट देखते हैं। ₹971 बिलियनस विफाकी हुकूमत का खर्चा होगा इस दफा। हम 2.6 बिलियन अ डे। हम दिस गवर्नमेंट जो क्या काम करती है पता है? आपके सामने बिल्कुल वो ₹5 अरब फी दिन की रफ्तार से पैसे खर्च करेगी अपने ऊपर। हम देखिए सबसे पहले तो ये है कि अगर पाकिस्तान का कोई सशन निकलना है तो उसमें सिर्फ एक बहुत बड़ा सशन है जो कि मेरा एक एक्सपीरियंस हो गया। पाकिस्तान को एनजीओस नहीं चेंज कर सकी। पाकिस्तान को प्राइवेट सेक्टर नहीं चेंज कर सकते। इसका स्केल ही नहीं है। एक ब्यूरोक्रेट 18 ग्रेड का 19 ग्रेड का कल में वो ताकत है जो किसी के पास नहीं है। किसी बड़े सीईओ के पास नहीं है। उनके पास स्केल बहुत है। द ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ अ कंट्री इज़ अ ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ़ ह पब्लिक सेक्टर। ये मेरे जिंदगी का एक्सपीरियंस है। मैं पहले नहीं समझता। आप देखें। फैंटास्टिक एग्जांपल है। पड़ोस में यार खुदा की कसम। कैसे यार स्टेट मतलब उन्होंने दे बिकम द मोस्ट मॉडर्न स्टेट। अब्सोलुटली। अच्छा और स्टेट का ये है ना कि माइक्रो आप जो भी है माइक्रो आपका इतना पॉजिटिव हो गया है गवर्नमेंट की वजह से स्टेट इज़ लीडिंग द इनोवेशन भाई सो बिल्कुल तो हमारे मुल्क में जो हमारे इधर बेचारे अमेरिकनंस भी हल्के हैं वैसे नहीं नहीं वहां पे वाकई अमेरिका भी हल्के हैं दैट्स व्हाई मैंने तो ये है कि पाकिस्तान में जब तक स्टेट का क्वांटम कम नहीं किया जाएगा जो के 1992 93 में मनमोहन सिंह और मोन सिंह आवलावालिया ने किया था दे टूक एन एक्ट्स एंड दे बेसिकली चोपड पार्ट ऑफ द स्टेट आउट कंप्लीटली ठीक है? दिस वास नॉट नीडेड। आप कोई चीज कराना चाहे आपको चार एनओसी चाहिए होती है। नो नॉन डि नॉन क्लेम्स, नो ऑब्जेक्शन, नॉन ड्यूस। पता नहीं आप तो उसी में लगे रहते हैं। और उसका क्या मकसद है? उसका मकसद सिर्फ है फ्रिक्शन क्रिएट करना। व्हाई जब आप फ्रिक्शन क्रिएट करते हैं तो कमाई होती है। कमाई होती है। तो आप इंसान के लिए बाबू बाबू बाबू अमीर हो जाता है। अच्छा और बाबू को इससे कोई गर्ज नहीं है कि पाकिस्तान मतलब आपने बात की कि अमेरिका में कोई इस पब्लिक सेक्टर में काम नहीं करना चाहता। शब्बर ज़री साहब पिछले साल दो साल पहले आए पडकास्ट में। कहने लगे कि जब वो एफबीआर के डायरेक्ट चेयरमैन थे तो उन्होंने एक कह एक लड़ी नई लड़की इंडक्ट। अब सुना है सुना
है यार। यार उन्होंने उस बंदी को बोला, "बेटा, तुमको ऐसा करता हूँ, ₹ लाख तनख्वाह भी दूंगा। गाड़ी भी दूंगा। तुम अभी रिक्शे पे आती हो। तुम गाड़ी पे, अपनी गाड़ी पे आना। तुम जरा हम प्राइवेटाइज्ड एफबीआई, प्राइवेट नौकरी करेगा, बताओ।" उसने बोला, "नहीं सर। मैं तो रिक्शे पे आऊंगी, लेकिन सरकारी नौकरी करोगी।"
और आपको पता है उन्हें वो सरकारी नौकरी की मोहब्बत क्यों होती है? नो चेक्स एंड बैलेंस। नो चेक्स, नो अकाउंटेबिलिटी। नो अकाउंटेबिलिटी, नो नथिंग। सो ये जो है ना, नॉन अकाउंटेबिलिटी ऑफ़ इट, दो चीजें हैं। टाइम की कोई वैल्यू नहीं है। एक बार दो-दो चीजें होती है। ठीक है ना कि एक सिविल सर्विस में टाइम की वैल्यू नहीं है। जो काम आज हो सकता है, कल भी हो सकता है, पाँच साल भी हो सकता है। पॉलिटिशियन का फिर भी 5 साल की इनकी कोई टाइम की होती है ना? हमने भागना है। हमने दुखाना है। सिविल सर्विस की नियत है। ठीक है।
दूसरी बात है, इनको मटेरियलिटी का कोई कांसेप्ट नहीं होता। वही चीज जो हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए करना होगा, वही चीज़ होगी जो आपको एक पेन खरीदने के लिए। ठीक है? तो कोई वैल्यू नहीं है उस चीज़ की। तो आपको जो है ना, ये सारा जो ब्यूरोक्रेसी है, इसको काफी कम करना पड़ेगा। यू हैव टू अनलीच इट। देखिए, पाकिस्तान की सबसे बड़ी जो टैलेंट है, जो रॉ टैलेंट है, उसका उसके ऊपर ये एक डैंपनर है। हुकूमत जो है, हुकूमत है। एक प्रोसेस लगे हुए हैं और ये नहीं कर सकते और वो नहीं कर सकते। और एसआरओस और ये वो ये इन्होंने बिल्कुल लोगों को जकड़ के रखा हुआ है। दी ओनली वे टू डू इट इज़ नॉट कि ये गवर्नमेंट रिफॉर्म कर दे। ठीक है? यू रिफॉर्म इज़ अ वैरी पुअर वर्ड, पुअर वर्ड, वै पुअर वर्ड, नॉट, यू हैव टू टेक इट आउट, वाओ, ठीक, द गवर्नमेंट हैस टू बी 30 टू 40% स्मॉलर, कम से कम, ठीक है, और इनके प्रोसेस को छोड़ दें, लेट पीपल ट्रेड, फ्रीडम हो, ट्रेड करने की, इकोनॉमिक फ्रीडम जिसे हम कहते हैं।
और अली हसनैन है, फॉर्मर हेड ऑफ इकोनॉमिक्स हैं, लम्स में, बहुत ही प्यारे आदमी हैं। उन्होंने एक पूरा बनाया कि हाउ पाकिस्तान इकॉनमी कैन बी रिवाइव, रिवाइव, उनका नंबर वन क्या चीज है? कॉन्ट्रैक्ट्स, सेंटिटी ऑफ़ कॉन्ट्रैक्ट्स, कानून की हुक्मरानी। बिल्कुल मैंने उनसे पूछा, मैंने कहा, "अली भाई, कह रहे हैं क्या बात कर रहे हो भाई, यहां पे कॉन्ट्रैक्ट्स की कोई सेंटिटी ही नहीं है। ऑल बिज़नेसेस पेपर के ऊपर चलते हैं ना बॉस, प्राइवेट लिमिटेड, एवरीथिंग इज़ अ पीस ऑफ़ पेपर।" कह रहे, "यहाँ पीस ऑफ़ पेपर की कोई वैल्यू ही नहीं होती, सिर्फ सरकार के पीस ऑफ़ पेपर की वैल्यू है।" हमारे आपने मेरे साथ कुछ भी कर दिया, मैं कोर्ट में खार होता रहूंगा, कोई मेरे पास डिस्कोर्स नहीं होता, मेरे पास कोई रेमेडी नहीं होती। मेरे कॉन्ट्रैक्ट्स की कोई सेंटिटी नहीं होती। तो जब तक कॉन्ट्रैक्ट्स की सेंटिटी नहीं आएगी। सो लीगल रिकॉर्ड्स भी बड़ा जरूरी होता है बिज़नेस के लिए। लेकिन मैं, मैं बात करूंगा। ऐसे, इट्स इज़ बाय डिज़ाइन। हां। इट्स बाय डिज़ाइन। उसकी वजह ये है कि अगर मेरा कॉन्ट्रैक्ट पे मुझे नहीं है, मुझे पता है मुझे सीधे तरीके से मुझे मेरा हक नहीं मिलेगा। तो मैं क्या करूंगा? मुझे एक एफआईए का रिटायर्ड एएसआई हायर करना पड़ेगा। या टू टू फील्ड इंटेलिजेंस बटालियन का एमआई, एक मुझे जो है ना मेजर साहब और कर्नल साहब हायर करना पड़ेगा। ठीक है। बिकॉज़ व्हाई? बिकॉज़ मुझे पता है मेरा मुझे कोई निकाल मुझे काम नहीं, लेकिन मुझे मेरा काम निकल जाएगा और जब वो काम निकलने में आएगा तो अच्छा काम भी निकलेगा, उसके उसके बाद आप 15-15, 2000 एकड़ अराजी के ऊपर कब्जे करके शहर भी आबाद कर देंगे, तो कुछ नहीं होता, कुछ नहीं होगा। ऐसे ही है ना, ऐसे ही।
लेट्स, आई नो, डिस्कशन हमारा स्टार्ट हुआ था करीम से और उससे, लेकिन बढ़ता चला जा रहा है, लेकिन इस पूरी सिचुएशन की एक रीज़न है, ये जो मुल्क में अनसर्टेनिटी रही है, जो मुल्क के हालात रहे हैं, इसमें एक चीज हमेशा कांस्टेंट रही है। वो रहा है कि पाकिस्तानी रियासत के मामलात में, मतलब यूनाइटेड स्टेट्स का रोल। हम, हमने एक डॉक्यूमेंट्री भी की पिछले साल, स्लीपिंग विथ द एनिमी। हम्म, के बीमार हुए, जिसके सबब उसी अतार के लौंडे से दवा लेते हैं। सही। यू हैव, यू हैव, यू बीन एन इनाइडर इन द यूनाइटेड स्टेट्स फाइनेंसियल, यू हैव बीन, वी हैव वर्क विद गोल्डमैन सैक्स, हावर्ड से आप पड़े हुए हैं। आप अमेरिकन इलीट के साथ शोल्डर्स रब कर चुके हैं। 24 में जब ट्रंप साहब इलेक्शंस जीते, लैंडस्लाइड, तो न्यूकॉन्स को और जो दूसरे लोग थे वहाँ के इंटरवेंशनिस्ट थे, उनको बड़ा धज्जा लगा, घबराए हुए थे कि भाई अब तो ट्रंप आ गया और ट्रंप तो आइसोलेशनिस्ट है, मागा है, अमेरिका फर्स्ट है। बदला तो कुछ भी नहीं। व्हाई इज़ दैट? व्हाई डू यू, यू, यू, यू, यू, यू, यू, दैट्स हैपनिंग, एंड पाकिस्तान के से भी कुछ खास बदलता हुआ, बहुत उम्मीदें थी एक पार्टी के लोगों को कि हमारे के साथ बड़ा कुछ अच्छा हो जाएगा। लेकिन उन्होंने अपने वही ट्रस्टेड पार्टनर्स के ऊपर ट्रस्ट किया है जिसपे वो 70 साल से ट्रस्ट कर रहे हैं। दैट्स द पाकिस्तानी इस्टैब्लिशमेंट।
देखिए, एक तो ये कि आपने बात सही की कि मैं हावर्ड कैनडी स्कूल का हूँ और वहाँ के लोग गवर्नमेंट में बहुत ज्यादा, उनका एक तरह से माफिया है। लेकिन आजकल इताब में आए हुए हैं, बिकॉज़ मागा के लोग कहते हैं कि यार ये कौन इलीट्स लोग हैं? ये कहाँ से आ गए? ये खुद हावर्ड में घुसने नहीं देते हमें और ये सारी नौकरियां पकड़ लेते हैं और सारे स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ़ डिपार्टमेंट हो जाते हैं, तो इनको बैंड बजाओ। तो आजकल हम जरा थोड़े से किताब में आए हुए हैं। बहरहाल, मेरी उसके साथ बातचीत है। देखिए, वै सिंपल वो ये है, वही से आप केव ऑफ़ थ्रोन्स का बहुत मशहूर एक डायलॉग है। पावर इज़ पावर। पावर इज़ पावर। पावर इज़ पावर। इन पाकिस्तान, बिकॉज़ वी डोंट हैव रूल्स। वी डोंट हैव लॉ। वी डोंट हैव अ सिस्टम। द पावर इज़ डंडा। और वो जिसके पास है, उसी से बात करता है। अमेरिका उसी को समझता है। अमेरिका उसी को समझता है।
अच्छा, दूसरी बात है, अमेरिका के एक कंफर्ट भी है। उनके डायरेक्टली भी है। जानते भी हैं। तो वो उसको मानते भी हैं। पावर को तो हर कोई मानता है। लेकिन उस रिलेशनशिप से पाकिस्तान को, लेट्स बी ऑनेस्ट, पाकिस्तान को ओवरऑल फायदा हुआ है, आपकी नज़र में? इस इस रिलेशनशिप से जो पाकिस्तान और अमेरिका की ट्रांजैक्शनल बड़ी जियो स्ट्रेटेजिक सिक्योरिटी रिलेशनशिप है। सिक्योरिटी बेस्ड रिलेशनशिप है। शीट सेंटो बता रहा हूँ। कोल्ड वॉर हो, पाकिस्तान में, दे व्हेनएवर देयर इज़ ए बूम, इकोनॉमिक बूम, जब भी हुआ है, वो अमेरिका की वजह से हुआ है। अमेरिका की जंग की वजह से हुआ है। 1960 में हुआ था यूकान का कोल्ड वॉर। 1980 में हुआ था अफ़ग़ान वॉर, जाकिया में, और 1900 में हुआ था, और ठीक है? सिंपल एज़ दैट। सो हमने तो फायदा उठा लिया है। फायदा, फायदे, फायदे, शॉर्ट टर्म। लेकिन उसके बाद हमारे ऊपर डिपेंड करता है ना कि हम उस फायदे को, शॉर्ट टर्म विंडो को एक्सप्लॉइट करके कोई लॉन्ग टर्म गेम क्रिएट करें। बाय द वे, आपको पता है कि साउथ कोरिया में भी यही हिसाब था। साउथ कोरिया में भी वहाँ पे मिलिट्री थी, जलपाक। चिल पार्क वास दे, चिली में, जहाँ जहाँ पिनोशे, पिनोशे भी तो वहाँ पे उनकी अलायंस थी यूएस के साथ, उन्होंने उनको इस्तेमाल भी किया, कम्युनिस्ट के अगेंस्ट, साउथ कोरिया में इस्तेमाल किया, मगर जो वो थे, जल पाक और जल, उनका एक तरह से सोशियोइकोनॉमिक विज़न था मुल्क के बारे में, हम कि यार हम किस तरह सेल्फ रिलायंट बनेंगे, हम तो उन्होंने प्राइवेट सेक्टर को उभारा, एंड एवरीथिंग, एंड एंड, साउथ कोरिया बिकम साउथ कोरिया, साउथ कोरिया, एंड चिली बिकम चिली, एंड द मोस्ट रिचेस्ट लैटिन अमेरिका में कंट्री, एंड नाउ इट इज़ द मोस्ट स्ट्रांगेस्ट डेमोक्रेसी इन इन लैटिन अमेरिका, इन लैटिन अमेरिका। तो द क्वेश्चन इज़ नॉट के अमेरिका के साथ अच्छा हुआ या बुरा हुआ, तो क्वेश्चन ये है कि हमने उनके उनके साथ का या उनकी जो विंडो उन्होंने दी थी और उनकी, तो आपको पता है मूड होता है, चार साल मैक्सिमम आठ साल, ठीक है, उसके बाद वो मूड चेंज हो जाता है। अमेरिका इज़ अ पे टू प्ले गेम, हम, ठीक है, अगर आपने खेलना है, पैसे दें, या आप उनके साथ इंटरेस्ट, टोकन, टोकन डालें, टोकन डालें, और फिर आप खेलना शुरू, खेलना शुरू कर दें, खेलना शुरू कर दें। अच्छा, कुछ लोग सोच रहे हैं हमारा भी ये हिसाब किताब था कि हम भी कहते हैं यार, टोकन डाले हुए, खेलना शुरू कर दें, लेकिन आप दोनों टोकन वाले, दोनों टोकन वाले नहीं, लेकिन चल, ये तो हमने पाकिस्तान के लेंस से बात कर ली, जरा अमेरिकन लेंस से बात करें। यू वर इन स्टेट फ्यू वीक्स? यस सर। हाउ इज़ राइट नाउ? ट्रंप इस बड़ा कह रहे हैं कि ये इसको बड़ा बैकलैश आ रहा है। मतलब, एलेक्स जोन्स, कार्लसन, मार्ज टेलग्रीन, बड़े हार्ड कोर मागा वॉइससेस थे। वो तो उसके उसके खिलाफ बंदूक तान के खड़े हो गए।
नहीं नहीं, देखिए, देखो एक बड़ी अच्छी बात है रिपब्लिकंस वगैरह की, एज़ कंपेयर टू डेमोक्रेट्स। रिपब्लिकंस ने पहले टी पार्टी मूवमेंट शुरू की और उन और उन्होंने ट्रंप को अडॉप्ट कर लिया। ठीक है? हालांकि ट्रंप इज़ नॉट अ रिपब्लिकन। रिपब्लिकन है तो वो खड़े हैं, बेसिकली जो सही होती है वो बोल देते, तो अगर ऐसी चीज़ हो रही होती ना, ओबामा ने कितना 2008 में, "यस वी कैन, यस वी कैन," और एंड में क्या किया उसने, कुछ भी नहीं किया, उसने ज्यादा जंग खराब किए, ज्यादा जंगें की, उसने ज्यादा क्या होता है, लोगों ने नोन स्ट्राइक्स पाकिस्तान में एक्चुअली उससे ज्यादा ओबामा ने की थी। ओबामा ने ज्यादा जंगें शुरू की हैं एज़ कंपेयर टू एनी अदर प्रेसिडेंट, सबसे ज्यादा बम्बिंग की, सबसे ज्यादा बम्बिंग की है, लिबिया में शुरू हो गया, यमन में हो गया, सीरिया में हो गया, सीरिया में, लेकिन डेमोक्रेसी तरफ से हुआ, नहीं हुआ। सारे के सारे लोग खामोश हैं। लेकिन रिपब्लिक तरफ से हो रहा है। अच्छा अब ये है कि मागा का जो है बेस, इसमें बेसिकली बहुत बड़ा टेंट है। तो सो ट्रंप ने क्या किया था? [संगीत] फैंटास्टिक मार्केटियर, ठीक है। प्रोडक्ट एंड मार्केट, सेल पर्सन, जबरदस्त है। जबरदस्त है। प्रोडक्ट, मार्केट। तो उसने कहा कि जी, "मेक अमेरिका ग्रेट अगेन", अमेरिका फर्स्ट। अच्छा, व्हाट, व्हाट मीन्स अमेरिका फर्स्ट? अब आपने टालसन और टेट क्रूस का इंटरव्यू देखा है। वो दोनों आर्ग्यू कर रहे हैं कि भाई, व्हाट इज़ अमेरिका फर्स्ट? बेसिकली। ठीक है ना? तो व्हाट इज़ अमेरिका फर्स्ट? सो उसने एटलीस्ट एक मंजन तो बेचा है, अमेरिका फर्स्ट का। अब वो मंजन मेरे लिए है कि जी, मैं अमेरिका, मैं इज़राइल के साथ हूँगा, तो अमेरिका फर्स्ट है, आपके लिए कि नहीं, मैं अपने लोगों के साथ हूँ, तो अमेरिका फर्स्ट है, तो वो अब जो है जो बिग टेंट में, लेकिन उसमें सभी हैं, उस टेंट में सब हैं, उसमें सब में बहुत बहुत से लोग हैं, सब लोग हैं। अब उसमें शग़ाफ़ आ गया, हां, और वो शग़ाफ़ बढ़ता रहेगा। अच्छा, उस शग़ाफ़ का बहुत बड़ा हिस्सा पैसा है। पावर इज़ पावर, बिकॉज़ ऑफ़ कोर्स, द बिगेस्ट मनी, बिगेस्ट फंड इज़ एडलसन, एक फैमिली है, उनकी वाइफ है, मैरी एडलसन, 100 मिलियन, $50 मिलियन उन्होंने ट्रंप को दिए हुए हैं। ऑफ़ कोर्स, वै प्रोल। सो दैट थिंग, एयर पैक, ए पैक इटसेल्फ इज़ वै स्ट्रांग। सो ये आपको देखना पड़ेगा। देखिए, द थिंग, द गुड थिंग, द बैड थिंग इज़ मनी। ठीक है? द गुड, बैड थिंग इज़ कि मनी, व्हेन यू वर्क्स, आपके अगेंस्ट काम करता है तो आपको बुरा लगता है। लेकिन आप भी पैसा डालें। आपके लिए भी वो काम करना शुरू करेगा, सिस्टम। दैट्स द ब्यूटी ऑफ़ इट। सो ट्रंप, इस वक्त जो चल रहा है, आई थिंक, मेरे ख्याल में, मेरा जो पर्सनल व्यू है, ट्रंप बाय नेचर इज़ नॉट लाइक दैट। हां, वह लड़ाई ना करना चाहता है, ना वह कुछ करना चाहता है, ठीक है, वो शोर मचाएगा, चीखना, गंदा करेगा, गंदा करेगा, धंधा करना, धंधा, धंधा करना चाहता है, थोड़ा सा गंदा भी करेगा, अपने आप को शोबाज करेगा, लेकिन वो वॉर मंगर नहीं है कि वो जाएगा और जाके वो करेगा, मगर ऑफ़ कोर्स उसके ऊपर प्रेशर है। मैं आपसे पूछना ये चाह रहा था कि नारा तो आपने खुद ही कह दिया कि ओबामा भी लगा के आए थे कि "नो मोर वॉर्स" और इस तरह, "यस वी कैन", लेकिन उन्होंने यही किया। तो एक बात बड़ी वाज़ है कि एक एक किताब मैं पढ़ रहा था, उसमें उसका मौजू था, परपचुअल वॉर्स, कि क्लिंटन के जमाने से अमेरिका एक हालत है, जंग में, बल्कि रेगन से एक जंग में, उससे पहले कोल्ड वॉर थी, लेकिन रेगन के बाद तो एक्टिव काइनेटिक वॉरफेयर में अमेरिका, रेगन, उसके बाद फिर पहला बुश, तो इराक वॉर, कुवैत वॉर, फिर क्लिंटन ने मिसाइल मारे इधर-उधर, फिर बड़ा बुश, छोटा बुश, और उसके बाद ओबामा, उसके बाद फिर ये ट्रंप के उस जमाने में भी वॉर्स होती रही, फिर बाइडन में भी वॉरर्स होती, तो अमेरिका एक काइनेटिक वॉरफेयर में है पिछले 40 सालों, 40, 40, 45 सालों से। अब लाज़िमी बात है, वॉरफेयर की एक मशीनरी होती है, जिसको आप एक यूएस डीप स्टेट कहते हैं। यस, वो वो लोग होते हैं जिनका ताल्लुक होमलैंड सिक्योरिटी से भी है, सीआईए से भी है, मुख्तलिफ़ डिपार्टमेंट्स केिया से भी है, सब है, वो एक इलीट है जो फैसले करती है कि मुल्क की डायरेक्शन क्या होगी और बड़ी जबरदस्त बात पता चली, मिली कि उस दिन कि 2000, हेनरी क्लिंटन वाज़ द फॉरेन सेक्रेटरी क्या? तो रॉबर्ट गेट्स वाज़ द डिफेंस सेक्रेटरी, हेनरी फॉरेन सेक्रेटरी, उनको ब्रीफ़िंग मिली कि नाइजीरिया में किसी हमले में चार अमेरिकी फौजी मर गए, तो उन्होंने कहा कि अच्छा, नाइजीरिया में भी हमारे फौजी बैठे हुए थे, जितनी जगह बैठे हुए हैं, सही, मतलब दे वर सरप्राइज्ड। सो एस्टैब्लिशमेंट तो वहाँ भी बहुत तगड़ी है, बॉस, नहीं तो आपको पता है, नपोजन ने कहा था, "हर अमेरिकन प्रेसिडेंट आता है विद राइट इंटेंशन, अंटिल डार्क सूट्स के लोग उसके घूम जाते हैं।" उसके कानों में बातें करते हैं। उसके बाद वो वही करता है जो जो सिस्टम चाहता है। तो अमेरिकन डीप स्टेट, ऑफ़ कोर्स, देखिए, डीप स्टेट एक्ज़िस्ट, एंड डीप स्टेट शुड एक्ज़िस्ट। ठीक है? ठीक है? उसकी वजह बहुत सिंपल है। उसकी वजह ये है, एव्री सिस्टम जिसमें वेरिएशन, वैरायटी ऑफ़ लोग हो, इंटरेस्ट हो वगैरह हो। यू नीड सम पीपल हु इंश्योर स्टेबिलिटी। ठीक है? अगर आप एक फैमिली हैं, एक फैमिली का भी एक पेट्रियाक होता है, उसके ऊपर होता है। जी, और उसमें मसला ये होता है कि जब भी कोई मसलेस वसले हो तो ही इज़ द वन हु डस दैट, हु सॉल्व्स अ प्रॉब्लम। द प्रॉब्लम अराइज़ेस इन अ डीप स्टेट, जब द डेफिनेशन ऑफ़ अ डीप स्टेट इज़, ए डीप स्टेट इज़ मोर इंटरेस्टेड इन द सर्वाइवल एंड द सक्सेस ऑफ़ द सिस्टम देन इट्स ओन सर्वाइवल एंड सक्सेस। ये है क्रिटिकल डेफिनेशन है। सो जो जब फेल करता है कि हम सिस्टम्स वो के हम फेवर में है और हम अपने अपने आप को सैक्रिफाइस करते हैं। कोई मसला नहीं है। मगर जब डीप स्टेट, जो कि बहुत से मुल्कों में होता है, जब अपने इंटरेस्ट में ज्यादा हो जाता है। अपनी सर्वाइवल में, अपनी बका में, अपनी सक्सेस में, एस कंपेयर टू सक्सेस ऑफ़ द कंट्री, देन द कंट्री इज़ इन ट्रबल। हम, ठीक है?
लेकिन यह एक चीज़ को हम और आप अगर मेरे ख्याल से आप तो बिलकुल भी मिस नहीं कर सकते क्योंकि आप तो यू आर स्टिल इन्वेस्टिंग इन स्टार्टअप्स, पाकिस्तान में भी और ग्लोबली, यू आर, यू आर इन्वेस्टिंग, एक तो तब्दीली आई है ना दुनिया में, ये जो टेक डिस्ट्रप्शन आया है, इसने मुआशरों को बिल्कुल उठा पटक कर दिया है ना, ये तो आप मानते हैं ना? ये जो जज़ीब है, ये जो एक नई नस्ल है, ये बिल्कुल एक मुख्तलिफ़ ब्रीड के मॉन्सर्स हैं, बीस्ट हैं। ये आपके ख्याल से क्या, ये ऐसा ऐसा नहीं है कि एक वर्ल्ड ऑर्डर तब्दील होने का वक्त आ चुका है? नहीं, वर्ल्ड ऑर्डर का तब्दील ना सिर्फ आ चुका है बल्कि आ रहा है। हम ब्रेग्जिट एंड ट्रंप, जस्ट सबसे पहला उसका शुरुआत है। ये हर जगह होगा। जिस तरह 17वीं सदी, 18वीं सदी में रेवोल्यूशंस आए थे। ठीक है? और वो रेवोल्यूशन कब आया था? रेवोल्यूशन उस वक्त आया था जब इंडस्ट्र एक एग्रेरियन सोसाइटी से, जहाँ पे फ्यूडल बहुत स्ट्रांग थे। हम एक इंडस्ट्रियलाइज़ सोसाइटी बन गए। ठीक है? सो द पावर शिफ्ट हुआ था, जिसकी वजह से बहुत ज्यादा लड़ाईयाँ हुई थी कि किसके पास पावर है। वो पावर शिफ्ट अभी भी हुई है और उसमें इंडस्ट्रियल एज की पावर डिजिटल एज में जा रही है की। सो अभी भी जो आप चीज देख रहे हैं जो मागा में और उसमें जो जिसे टेक ब्रोस कहते हैं, जिसे टेक ब्रॉस कहते हैं, जिसमें पीटर थिल शामिल है और ये है सैम अल्टन वगैरह है, तो उसमें भी यही है कि वो कहते हैं जो टेक्नोलॉजी की जो डीप स्टेट है, सिलग कि जी हमारे लिए दरवाज़ा खोलो, हमारे लिए दरवाज़ा, हम फॉर्च्यून 500 की बड़ी कंपनीज़ हो गई है, हम सबसे ज्यादा क्या कहते हैं, तो आप जो वॉल स्ट्रीट है और जो आपका डिफेंस कोंग्लोमेरेट है, आप जरा साइड, हमें हमें जगह दें, हम जो मस्क ने करने की कोशिश की है, अभी मस्क ने करने की कोशिश की है और उसने कुछ ज्यादा ही करने की कोशिश की थी जिसकी वजह से थोड़ा सा पुश आया था, बट ये चीज चलेगी। आपके सामने देखिए, इसकी सबसे पहले निशान आज से तीन साल पहले एक स्टॉक में गेम हुआ था अमेरिका में, उसका नाम था गेम स्टॉक। आपको याद, कोविड के जमाने में, कोविड के जमाने में क्या ब्यूटीफुल चीज हुई थी, क्रेज़ी, आई रिमेंबर, आई वाज़ लाइक ब्लोन अवे बाय, और वो चीज कभी पाकिस्तान में हमारे यहाँ पेनी स्टॉक से $150, $50 पे हुआ था, उसमें बच्चों ने किया, बच्चों ने किया, रेडिट नहीं हुआ था, बिल्कुल। यू, यू नो, यू नो द गेम दैट हैपन, एंड इट वाज़ बेसिकली, और उसमें मर्लिन था, मर्लिन कैपिटल, बिग हैज़ फंड, इफ मर्लिन आपके अगेंस्ट होता, यू आर डेड इन वाटर, इफ बेट अगेंस्ट यू, कंट्रीज़, आपको पता है जोस ने इंग्लैंड को उड़ा दिया था, हैज़ फंड होना, मर्लिन और दो तीन कैप ने बेट किया था, शॉट्स किया था लोगों ने और टेक्नोलॉजी के जो टेक्नोलॉजिस्ट थे उन्होंने पैसा इतना डाला, कचरा कि मर्लिन को बैंककरप्ट कर लिया। ठीक है? दैट वाज़ द फर्स्ट साइन, ओल्ड, ओल्ड ऑर्डर जो वॉल स्ट्रीट का, ओल्ड मनी, ओल्ड पावर, हैज़ फंड्स, नो लॉन्गर कंट्रोल द गेम। आपने एक गोल्डन लव नहीं लिखा, मैजिकल वर्ड, क्रिप्टो। [हंसी] जी जी, क्रिप्टो तो बहुत जबरदस्त चीज है। क्रिप्टो आपको बहुत कुछ कमा देता है। दुनिया में बहुत जगह पे पहुँचा देता है। क्रिप्टो, क्रिप्टो के बारे में क्या है आपका ओपिनियन? नहीं, मेरा ओपिनियन ये है कि देखें, पहले क्रिप्टो, द करेंसी की बात कर लें, फिर क्रिप्टो, द ट्रक की बत्ती की बात कर, ट्रक की, ऐसे। सो मेरे ख्याल में, अच्छा देखिए ये तो बहुत बड़ा डिस्कशन है और ये बहुत ऑब्स्ट्रैक्ट भी हो जाता है। क्रिप्टो उस वक्त शुरू हुआ है जब फैट ने कंट्रोल करना शुरू कर दिया, ऑन फ्लोज़ ऑफ़ मनी। हम फाइनेंसियल क्राइसिस के बाद, फाइनेंसियल क्राइसिस के बाद, फैटिफ़ बहुत टाइट होने लगा, तो ये वो नाकामुतो, एक बंदा आया, उसने उसने शायद कोई सीआईए हो, तो मेरा ये, मेरा ये व्यू है, दिस इज़ माय पर्सनल व्यू, जस्ट लॉजिकल, आई हैव नो एविडेंस बेस्ड ऑन इट, कि ये कोई अंदर ही की गेम है कि हम किस तरह एक ट्रांजैक्शन या एक करेंसी बनाए कि हमारे जो सा ऑप्स होते हैं या हमारे ऑपरेशन या क्लाइंटस्टाइन होते हैं, कहीं हर जगह, हर जगह हो रहे होते हैं, हमें पैसे मूव नहीं कर सकते, पहले तो पैसे मूव कर देते थे, सेठ आबेट का नाम आपको याद है, कितनी फंडिंग हुई है हमारी न्यूक्लियर बेसिस की, पीसीआई वगैरह की, कितनी फंडिंग हुई है, तो अब अब तो वो नहीं हो सकती, अब तो बहुत जल्दी जल्दी पता चल जाता है। तो मेरे ख्याल में उन्होंने शुरू किया कि यार ये चीज हम कर देते हैं। ठीक है ना? नो मसला ये होता है कि जब आप एक रास्ता खोलते हैं ना, एंड दिस इज़ ऑलवेज द केस, विंड साइन सर्विज के, दैट्स व्हाई यू हैव ब्लोबैक्स। आपने अफ़ग़ान मुजाहिदीन को सपोर्ट किया। उन्होंने तालिबान खड़ा कर दिया। उन्होंने अलकायदा हो गया। ठीक है? दिस ऑलवेज, अब जब जहाँ पे एक रास्ता खोलते हैं हम। ठीक है? तो वहाँ से जो फिर नेक्स्ट चीज जो आती है उसको आप कंट्रोल नहीं करते। सो आपको लगता है कि क्या क्या अब भी क्रिप्टो उन खुफिया हाथों के काबू में है या अब क्रिप्टो डेमोक्रेटाइज़ हो चुका है? नहीं, क्रिप्टो, बिटकॉइन की बात, बिटकॉइन की बात है, डेमोक्रेटाइज़ हो चुकी है, अब किसी के हाथ में नहीं है, तो अब वो किसके हाथ में है? वो डार्क वेब में है, वो अच्छी चीज कर रही है, वो बुरी चीज कर रही है, द जीनी इज़ आउट ऑफ़ इट, और अब वो मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल हो रही है, स्टोर ऑफ़ वैल्यू इस्तेमाल हो रही है, और का कुछ हिस्सा इन्वेस्ट नहीं, मैंने मेरा मेरा बहुत कम है क्रिप्टो के अंदर, आई कुड नॉट अंडरस्टैंड, आई डोंट इन्वेस्ट, मैं जहाँ पे मैं अंडरस्टैंड सही तरह की चीजों को नहीं कर सकता। तो मैंने उसके लिए उसमें मैंने उसे, आई हैव रिमेन अवे फ्रॉम इट, एंड आई हैव नो रिग्रेट्स ऑन दैट। ठीक है। जिओपॉलिटिक्स के अंदर, पाकिस्तान, यूएस रिलेशंस के अंदर भी अभी क्रिप्टो, क्रिप्टो की बात हो रही है। आपको लगता है पाकिस्तान में कोई क्रिप्टो पोटेंशियल है? चाहे वह माइनिंग हो या ट्रेडिंग हो या पाकिस्तान में? द बिगेस्ट पोटेंशियल ऑफ़ क्रिप्टो इज़ इफ लॉट ऑफ़ मनी इज़ स्टक इन पाकिस्तान, देन क्रिप्टो कैन गेट यू एन अ रूट टू टेक द मनी आउट ऑफ़ पाकिस्तान, दैट्स द बिगेस्ट करने का तरीका जो हो रहा है, दैट्स द बिगेस्ट। बिलाल बिन साकिब साहब जो हैं, उन्होंने कहा है कि 2 करोड़ क्रिप्टो अकाउंट्स हैं पाकिस्तान में, स्टॉक मार्केट में पता पता है कितने हैं? ₹ लाख या 4 लाख, 3 लाख, 3 लाख, दैट्स इट। खैर, वो होंगे ₹1000 के, 5000 इस तरह भी हैं क्रिप्टो में अकाउंट्स, वो मसला नहीं है। लेकिन अगेन, मैं ये बात क्यों लाया यहाँ पे कि जमाने के अंदाज बदले गए। नया राग है, साज़ बदले गए। हम पुराना निजाम, वो वो बड़ा जबरदस्त कोट जरार खोड़ो ने कहा था कि के द ओल्ड वर्ल्ड इज़
डेड एंड द न्यू वर्ल्ड स्ट्रगल्स टू बी बोर्न। नाउ इज द टाइम फॉर मॉन्सर्स। हम यस।
एंड नाउ इट्स द टाइम टू मेक इनसेन अमाउंट ऑफ़ मनी। आल्सो वी विल टॉक मोर अबाउट दैट।
इट्स ऑलवेज अ प्लेजर टू हैव सलाम वालेकुम।