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तंत्र में षट्कर्म क्या है EXPLAIN BY TARANATH TANTRIK || Ep-1

TANTRA MANTRA KI DUNIA*25:54

Transcription

गुरुदेव प्रणाम। जय। हम उड़ीसा से आए हैं, संबलपुर संपर महानगर से। हम आपका शिष्य हैं, और हम जो-जो कर रहे हैं, उसमें सफलता हमको मिल रहा है। फिर भी हमको तंत्र साधना के बारे में जिज्ञासा ज्यादा हो रहा है। लोग बोल रहे हैं कि तंत्र के मार्ग में ऐसा-ऐसा बात है क्या? तो हम बोले, ठीक है, हम पूछेंगे गुरुदेव को, आपको बताएंगे। उसमें जो क्या षट्कर्म आता है, षट्कर्म के बारे में थोड़ा जानकारी। षट्कर्म तंत्र के परिभाषा में एक है, वैदिक भाग में एक है, समाज में प्रचलित पद्धति अलग है। तंत्र में षट्कर्म जिसको हम कहते हैं, तंत्र के अनुष्ठान होता है ना, और खास करके वो तरह का अनुष्ठान जिससे लोगों की कोई समस्या का समाधान किया जाता है। कोई प्रॉब्लम, उस प्रॉब्लम को समाधान को छह भाग में बांटा गया है, तंत्र क्षेत्र में उसको षट्कर्म कहा जाता है। क्या पहले आता है? शांति कर्म, पुष्ट कर्म। जिससे शांति कर्म और पुष्ट कर्म एक ही है, लेकिन लोगों के अंदर मैं धीरे-धीरे आऊँगा, इसको समझा दूँगा। थोड़ा ध्यानपूर्वक देखना है, समझना है। अच्छी चीजों को हम देख रहे हैं। आपका जो ये YouTube चैनल में काम कर रहे हैं, हो भी रहा है और उसमें थोड़ा ज्यादा जिज्ञासा होता है। लोग बोलते हैं, ये क्या कर्म होता है? कोई-कोई ये सारे चीज षट्कर्म के अंदर ही आता है। वही मैं क्लियर करता हूँ। पूरा सुनो मेरी बात, तो क्लियर हो जाएगा। सबसे पहले आता है क्या? षट्कर्म के अंदर सबसे पहले शांति कर्म या पुष्टि कर्म आता है। शांति कर्म का मतलब होता है किसी भी चीज को शांत करना। जैसे वास्तु शांति हो गई, किसी ग्रह शांति हो गई, भूत-प्रेत शांति हो गई, पीडा नाश हो गई। ये होता है शांति कर्म। और पुष्ट कर्म होता है किसी भी चीज को आगे बढ़ाना। जैसे सोचिए कि आपके बिजनेस नहीं बढ़ रहा है, उसको बढ़ाना। आपका नौकरी नहीं लग रहा है, उस तरह का नौकरी लग जाए। इस तरह के कोई अनुष्ठान करना जो आगे बढ़ सकता है। अभी है, लेकिन उसको और भी डेवलपमेंट करना है, उसके लिए आता है पुष्ट कर्म। सम। नेक्स्ट आता है आकर्षण या वशीकरण। आकर्षण या वशीकरण दोनों एक चीज नहीं है। 15 और 20 समझो, 19-20 नहीं है। 15 और 20 इतना फर्क है। वशीकरण का मतलब होता है कि भाई किसी का इच्छा हो या ना हो, तुम्हारे इसमें कोई रुचि रहे या ना रहे, जो मैं तुमको बोलूँ, इसमें तुम्हें रुचि रहे या ना रहे, लेकिन तुमको वही काम करना पड़ेगा। यह कभी जबरदस्ती होता है। और जब हम जहाँ पर जबरदस्ती नहीं चलता है, या जब हमारे अनुरोध, हमारे अनुनय-विनय वहाँ पर जब खत्म हो जाता है, तो वहाँ पर तंत्र का सहायता लिया जाता है। तंत्र में कुछ पद्धति या कुछ प्रयोग होता है, जिसके द्वारा किसी को कंट्रोल किया जा सकता है। कंट्रोल मीन्स उसको कंट्रोल करके, उसको वो चाहे या ना चाहे, लेकिन उसको वही कर्म करना पड़ता है। उसको हम कहते हैं वशीकरण। मतलब उसका इच्छा रहे या ना रहे, फिर भी वो वो काम करेगा जो मैं उसके ऊपर इंट्रोडक्शन दूँगा, या जो मैं उसको कमेंट दूँगा कि तुमको ये चीज करना है। अगर किसी के ऊपर वशीकरण प्रयोग जब किया जाता है ना, तो कोई उद्देश्य लेकर तो मैं वशीकरण करूँगा। खामखा तो मैं किसी को वशीकरण नहीं करूँगा। वो किसी भी किसी भी क्षेत्र के लिए हो सकता है। तुमसे मेरा कोई काम है, लेकिन वो काम तुम नहीं कर रहे हो। मैं चाहता हूँ तुम ये काम करो, लेकिन तुम नहीं कर रहा, तो उसके समय में तंत्र में एक प्रयोग होता है, वशीकरण नाम के। तो वो वशीकरण जब प्रयोग किया जाता है, तब तुम्हारी इच्छा रहे या ना रहे, लेकिन तुम वो काम करोगे। इसको वशीकरण कहते हैं। वशीकरण हो गया। फिर आता है विदेशन। उसके नेक्स्ट में आ जाता है विदेशन। विदेशन का मतलब होता है अलग करना। अब अलग करना। विदेशन और उच्चाटन लगभग कोई 15-20 का ही फर्क है। अलग करना। अलग करना मतलब किसी भी चीज से किसी भी चीज को अलग करना होता है, जिसको विदेशन। अलग कर देना। खास करके लोग विदेशन वशीकरण के अगेंस्ट में ही करता है। जैसे कोई किसी के ऊपर वशीभूत है, या कोई वो कोई वशीकरण करे या ना करे, वो होता है ना कभी लड़का या लड़की कोई किसी से प्यार करता है, लेकिन माँ-बाप को पसंद नहीं है, तो माँ-बाप क्या करते हैं, उनके ऊपर विदेशन प्रयोग करवाता है कि वो दोनों अलग हो जाए। ये ऐसा नहीं है, खुद के लिए भी हम भी कभी खुद के लिए करते हैं कि हम चाहते हैं इससे हम दूर हो जाए। विदेशन का मतलब सिर्फ जो किसी लड़की से अलग कर देना, ये नहीं है। बहुत सारे, किसी भी चीज से किसी भी चीज को अलग करने का पद्धति को ही विदेशन कहते हैं। इसमें विद्य शब्द आता है, तो उसी में समझ आ जाता है। फिर चौथे स्टेज में आता है उच्चाटन। उसको किस तरह का होता है? उच्चाटन का मतलब ये। उच्चाटन का चार स्टेज होता है। तो उच्चाटन के जो पहले प्रयोग आता है, उसके अंदर किसी को कई जगह से हटा देना हो, जैसे कोई मैक्सिमम लोग प्रयोग करते हैं, किसी को कोई जगह से भगा देने के लिए। भगाने, उसको उच्चाटन बोलते हैं। उसको उठा, भगा देंगे यहाँ से, उसको, उसको उच्चाटन बोलते हैं। लेकिन ये यहीं पे खत्म नहीं होता। उच्चाटन भगा देने से नहीं। उच्चाटन का दूसरा स्टेज भी होता है, तीसरा स्टेज भी होता है, चौथा स्टेज भी होता है। जब दूसरे स्टेज में आता है, तब आता है, सोचो तुमको मैं बोल रहा हूँ, तुम यहाँ से भाग जाओ, तो तुम थोड़ी भाग जाओगे। तुम नहीं भाग रहे हो, या तुम्हारा ऊर्जा बहुत ताकतवर है। और खास करके ये ऊर्जा के ऊपर ही तंत्र का समय निर्धारित करता है। किसी के ऊपर मैं वशीकरण कर रहा हूँ, उसका ऊर्जा बहुत ज्यादा है। हर शरीर, हर आदमी का एक आकाश तत्व होता है, जो हमारे शरीर का ओड़ा जिसको हम कहते हैं, जिसके जितना बड़े हैं, उसके ऊपर वो प्रयोग करना उतना कठिन होता है। जिसके ओड़ा जितना बड़ा होगा, उसके ऊपर कोई तंत्र प्रयोग करना उतना कठिन होता है। किसका ओड़ा कितना बड़ा है, वो हम बाद में नेक्स्ट में कभी समझाएँगे। तो सेकंड स्टेज में क्या होता है? किसी को मस्तिष्क को इस तरह से, मतलब सोच ही नहीं पाते, दिमाग काम करना बंद कर देता है, संतुलन खो, खो देता है। मतलब पागल नहीं है, लेकिन खो देता है। तीसरी स्टेज में जब वही उच्चाटन का तीसरी स्टेज प्रयोग किया जाता है ना, तब वो दिमागी संतुलन इतना ऊपर से हो जाता है, वो कभी एक्सीडेंट वगैरह कर लेता है, या कोई कुछ होके वो बिस्तर में हो जाता है। उसको कैसे ठीक? जैसे पैरालाइज किया जाए। यही उच्चाटन को ही तोड़ना पड़ता है। फिर उसको कैसे तोड़ा जाएगा? उसका विधान अलग है। जब तुमको जब ये चीज सिखाएँगे ना कि वशीकरण कैसे तोड़ते हैं, उच्चाटन कैसे? इसका तोड़ने का विधि अलग है। पहले चलाना और फिर उसका इलाज करना, दोनों अलग-अलग चीज है। दोनों को जरूरत है। जैसे जहर का भी जरूरत है और खाने का भी जरूरत है। तो जहर अगर हम कम मात्रा में इस्तेमाल करेंगे खाने में, तो सब्जियाँ बचेंगे, हम खाके पेट भर सकते हैं। और अगर जहर ज्यादा दे दिए, तो क्या होगा? खुद मरेंगे, खुद मर जाएंगे। तो यही पे बिल्कुल ऐसा ही कुछ काम कर जाता है। अब जब तीसरे स्टेज आता है उच्चाटन का, जैसे मैंने कह दिया कि वो हम बिस्तर, बिस्तर में को लकवा मर जाता है। कोई कहता है ना, पैरालाइसिस हो जाता है। हो जाता है। हाँ, ये उच्चाटन का तीसरा स्टेज है, लेकिन वो मरेगा नहीं बंदा। तीसरे स्टेज में। अब कभी-कभी किसी का ऊर्जा बहुत कम हो जाता है, और उसके ऊपर प्रयोग ज्यादा हो जाता है, तो वो खत्म हो जाता है। अब आता है चौथी स्टेज। चौथी स्टेज में वो बंदा, उसके शरीर से पूरी तरह से उसका आत्मा अलग हो जाता है, जिसको हम मारण क्रिया भी कहते हैं। अब मारण क्रिया के बारे में लोगों के मन में बहुत सारे, बहुत भ्रांत धारणा है। वो कैसे? बहुत सारे लोग बोलते हैं ना कि गुरुजी मारने वाला, ये बचाने वाला, वो तो ऊपर वाले के हाथ में है। नहीं। बहुत सारे लोग बोलते हैं ना कि भाई तो हम अगर ऊपर वाले ने मेरा परमायु खत्म नहीं किया, तुम कोई किसी मेरे ऊपर कैसे मार देगा? ये है ना बहुत सारे लोग के मन में ये डाउट्स होता है। बहुत लोग पूछते भी हमें कि गुरुजी हमें तो भगवान ने आयु दिया, जन्म दिया है, तो मारने वाला कौन है? नहीं, उसको काट दिया जाता है। हाँ, काट तो दिया जाता है। हर चीज का तोड़ है दुनिया में। जो भी चीज बना है, उसका अस्तित्व है। तुम ऐसा चीज, एक चीज का नाम बताओ जो दुनिया में उसका अस्तित्व नहीं है? सबका है। जिसका नाम है, उनका अस्तित्व है। जिसका नाम हम जानते हैं, ये भी बिल्कुल ऐसा ही है। मारण कि जब हम किसी के ऊपर प्रयोग करते हैं, या कोई किसी के ऊपर करता है। बहुत सारे मरण, मरण के प्रयोग होते हैं, लेकिन मूल उद्देश्य होता है उसके शरीर से उसके आत्मा को अलग कर देना। मतलब उसको हम जो फिजिकल शरीर है ना, इसको नष्ट कर देना। अब किसी के शरीर से आत्मा निकल जाता है, शरीर अगर नष्ट हो जाता है, तो वो जिंदा है थोड़ी? जिंदा नहीं रहने से भी उसका आत्मा को तो, आत्मा को मुक्ति नहीं मिलता। मुक्ति नहीं मिलता। वो सबका भी होता है। यस। तो ये हो जाता है मारण क्रिया। इसके भीतर मैंने पाँच बताए, एक छोड़ दिए। क्या? स्तंभन। स्तंभन। स्तंभन। बहुत सारे चीज। स्तंभन का मतलब होता है, बातों में क्या? स्तंभन मतलब रोक देना। स्तंभन का मतलब रोक देना। किसी भी चीज को स्टॉप कर देना। सोचो, किसी का कोई बड़ी बीमारी है, अभी इलाज करने का समय नहीं है, तुम दूर से क्या किया कि उसको बीमारी को स्तंभित कर दिया। ये स्तंभन बहुत सारे चीजों के ऊपर इस्तेमाल होता है। रो, स्तंभन का मतलब बस रोक देना। वही पे। जैसे कोई हाथ कट जाता है ना, निकलता है, तो पहले क्या दवाई दे या ना दे, पहले हम उसको बैंडेज कर देते कि खून रुक जाए, तो वो स्तंभन हो गया। इलाज जहाँ पे होगा, उस स्थान पे पहुँच के फिर इलाज होगा। तभी आता है काम। यस। हर ये छह कामों के भीतर ही सारे दुनिया के काम होते हैं। तो आप कृपा करके एक-एक तो हमें बताते जाएँगे। शांति कर्म हो गया, वशीकरण हो गया, उच्चाटन हो गया, स्तंभन हो गया, विदेशन हो गया और मारण हो गया। ये छह कर्म को एक साथ षट्कर्म कहते हैं। षट्कर्म के अलग से भी बहुत सारा नुस्खा होता है। ये मेन-मेन चीज है। तो वशीकरण में भी ऐसा कोई-कोई तो विधान होता जाएगा। स्टेप बाय स्टेप। वशीकरण बहुत सारे मार्ग, वशीकरण करने का, लेकिन खास करके तीन मार्ग प्रधान है। सबसे पहले किसी के ऊपर कोई शक्ति चला के, उसके ऊपर वशीभूत कर दे। जो कर देते हैं, उसको काटने का भी हो हाँ, उसके लिए अलग-अलग विधान है। पहले ये पता जरूरी है कि उसके ऊपर वशीकरण किस तरह से किया गया है। और सबसे ज्यादा नुकसान तब हो जाता है, जब कोई किसी के ऊपर कोई तंत्र प्रयोग कर देता है ना, 84 डेज गुजर जाता है, तब भाई पता करना बहुत मुश्किल हो जाता है, उसके ऊपर कौन सी तंत्र किस तरह से प्रयोग किया गया है। तीन महीने का नहीं, सम 84 डेज। मतलब किसी को सोचो, कोई किसी के ऊपर वशीकरण किया है, लेकिन उसके ऊपर 84 दिन बीत गया, फिर वो मेरे पास आया पता करने के लिए। मुश्किल हो जाता है भाई, कौन सी तंत्र के द्वारा इसके ऊपर प्रयोग किया जाता है। उसको पहचानने के लिए दिक्कत हो जाता है। दिक्कत हो जाता है। तब उस हिसाब से एक होता है ना कि भाई एक ऑर्डिनरी दवाई होता है सबके लिए। फिर तब समय लग जाता है। लेकिन अगर किसी के ऊपर इंस्टेंट किया गया है ना, तो तुरंत उसके ऊपर प्रयोग पता करना भी आसान हो जाता है, और उसका इलाज करना भी आसान हो जाता है। लेकिन जब बहुत समय हो जाता है, 84 डेज अगर गुजर जाता है, तो भाई उसके ऊपर पता करना बहुत मुश्किल हो जाता है कि कौन सी तंत्र इसके ऊपर प्रयोग किया गया है। फिर वो जैसे मैंने कहा है, एक ऑर्डिनरी दवाई होता है, उस तरह से उसके ऊपर इलाज शुरू किया जाता है। एक अंदाजा लगाया जाता है कि ये हो सकता है। कोई पेन हो रहा है, उसको नापने का तो कोई मीटर नहीं है ना। बुखार हुआ तो हम थर्मोमीटर से उसको नापते हैं, नाप सकते हैं। लेकिन किसे कितना दर्द हो रहा है, वो नापने का कोई तो जरिया नहीं है। तब क्या होता है? तब डॉक्टर एक अनुमान से उनको दवाई देते हैं। लेकिन फिर भी कोई नापने का तो कोई जरिया नहीं है। तो हर चीज में होता है। आप एक-एक करके सब बताते जाइए। जो वशीकरण में जो टोटका सब है, कैसे-कैसे? उसका मंत्र साधना के बारे में। ये जो तुम ओपनली देखते हो ना, ये बहुत गुप्त चीज है। कुछ-कुछ लोग बोलते हैं कि 24 घंटे में ठीक कर देंगे, चार घंटे में ठीक हो जाएगा। ऐसा होता क्या? जो बोल रहा है कि 24 घंटे में हो जाता है, तीन दिन में हो जाता है, 10 घंटे में हो जाता है, चार घंटे में, चार घंटे में हो जाता है। कभी तुमने देखा है? नहीं देखा। इसलिए आपको उसका रिजल्ट की बात नहीं कर रहा हूँ मैं। किसी का चार घंटे में वशीकरण हो, बोल रहा हूँ। चार घंटे के रिजल्ट नहीं कह रहा हूँ। मैं भी बहुत सारे लोगों को काम किया, ताला पीट में मैंने काम करके दिया। वो बस ट्रेन में जाते-जाते या गाड़ी में जाते-जाते वो फोन करता है मुझे, गुरुजी। उसका फोन आ गया था आज छह महीने बाद उसका फोन आया मेरे से कुछ पूछने के लिए। तो ये मैं थोड़ी कहूँगा कि भाई ये चार घंटे में मेरा काम हो गया। ये नहीं होता है। अपने नसीब के ऊपर होता है। लेकिन अगर तुमने कभी किसी को देखा है कि कोई चार घंटे में वशीकरण इस तरह से होता है, कोई दिखा रहा है इस तरह से इस तंत्र का प्रयोग होता है, चार घंटे में हो जाता है। सिर्फ सुने हो। नहीं नहीं, देखा। सिर्फ सुने हो। वीडियो में कभी देखे हो? लेकिन जो लोग बोल रहा है, जो ये अपने वीडियो में दावा कर रहा है, कभी तुम उनको नहीं देखेगी। कोई तंत्र प्रयोग बोलो, कर रहा है, ने देखा। वीडियो लिख के भेजते हैं, बस लिख देता है, चार घंटे में वशीकरण हो जाएगा। तो लिख देने से क्या होगा भाई? माने वास्तविकता क्या है? उसका करके देना चाहिए। करके देना चाहिए। तो करके देने की बात तो बहुत दूर की बात है। तुम कभी उनका चेहरा ही नहीं देखे हो। कभी किसी का चेहरा देखा कि वो डायरेक्टली वीडियो में आके बोल रहा है, मेरे पास आ जाइए, मैं चार घंटे में वशीकरण कर दूँगा। कभी देखे? नहीं देखते। ऐसा क्यों नहीं देखते? वो लोग नहीं होता होगा, तो यही समझ लेना जरूरी है। ठीक है। लेकिन लोग यही बात को बोलते हैं। किसे? जैसे लोग मुझे फोन, जब फोन करता है, तो बहुत सारे लोग मेरे नाम फेक अकाउंट चलाते हैं। तो मैं सिर्फ मेरे नाम से नहीं, मैं सबको कहता हूँ कि किसी, अगर कोई तांत्रिक से अगर आपको संपर्क करना है, तो ये तांत्रिक, तंत्र क्षेत्र में ठग क्यों हो जाता है? बहुत सारे लोग सवाल, ठग हो जाता है। मैंने पैसा दिया, मेरा काम नहीं किया। इस तरह के बात होता है। क्यों होता है? एग्जामिनेशन नहीं करते, उसको जानने की कोशिश नहीं करता, भाई ये बंदा चार घंटे में बोल रहा है, तो ये बंदा कैसे बोल रहा है? कोई बोल रहा है कि चार घंटे में वशीकरण हो जाएगा। जो भी होना, चार घंटा हो, एक घंटा हो, दो घंटा हो, कोई आर-पार नहीं दिखा। सबसे बात यही है। समझ में आ रही है मेरी बात? कुछ तंत्र क्षेत्र में ठगी क्यों हो जाता है? जानते हो उसका मूल कारण है? जरूरत। तुम सोचो, हमारे तांत्रिकों के पास लोग ऐसा क्या कोई समस्या लेकर आता है कि जो किसी और से वो बातचीत कर सकता है? नहीं। कोई पुरुष या कोई हस्बैंड भी सोच रहा है वो, अगर मेरे से आके कोई बातचीत बोल रहा है, वो अपने पत्नी को अगर वही बात वो अपने पत्नी को समझा पाते, तो उसका समस्या वही पे 50% पे खत्म हो जाता है। लेकिन वो अपने पत्नी को ना समझा के मेरे पास आता है समाधान के लिए। उस तरह के लड़के भी, लड़कियाँ भी ऐसे ही होती है। उसको समझा नहीं पाते हैं। वो लोग डायरेक्टली समझा देते हैं, आमने-सामने बैठ के बातचीत कर लेते, तो समस्या बहुत कम हो जाता। लेकिन हमारे पास लोग वही अपनी याचिका लेके आते हैं जो इलीगल है। हाँ, मतलब वो आमने-सामने एक 100% लीगल चीज लेकर हम लोग के पास बहुत कम लोग आता है। और इसलिए बदनाम करते हैं। वो लोग बदनाम, बदनाम कुछ और तरह से होता है। आप सोचो, जिस चीज का जरूरत से, मैंने कहावत है ना कि कोई प्रोडक्ट अगर इलीगल तरीके से ही बेचा जा रहा है, तो उसको तुम बंद कर सकते हो कभी? जो प्रोडक्ट पैदा होते ही इलीगल तरीके से, इलीगल तरीके से लोग क्यों कर पा रहे हैं इस चीज के? ऐसा ऐसा जरूरत है ना जो तुम सबके सामने नहीं बोल सकते। हमारे तांत्रिकों के पास लोग ऐसा समस्या लेके आते हैं, वो सबको नहीं बोल सकता। नहीं बोल सकता। उसका इच्छा बहुत गोपनीय है। और तुम, तुमसे अगर कोई पैसा इस तरह से अट भी दिया ना, रट भी लिए ना, तो भी तुम उसको कुछ बोल नहीं सकते। हाँ, हाँ। क्यों नहीं बोल सकते? क्योंकि तुमने ऐसा कोई इरादा लेके गया था या गए थे। समझ में आ रही है मेरी बात? पूरा तो ओपन नहीं किया जा सकता, कुछ बातों का। नहीं बोल सकता। ठीक है। अब समझ लो। तो लोग, कुछ लोग क्या करते हैं, इसका कुछ गलत उपयोग करता है। जैसे कोई कुछ किताब खरीद लिए, YouTube पे 400-500 वीडियो देख लिए तंत्र के ऊपर। हाँ, फिर उनका एक एक्सपीरियंस हो जाता है, उसको बोलने का टेक्निक मिल जाता है। कुछ भाई ये तंत्र का प्रॉब्लम है, ये है, ये है, वो है। ऐसे ना हमारे घर में छोटा-मोटा बीमारी होने से क्या? थोड़ा बुखार आ गया, हम डॉक्टर के पास जाते हैं। पहले क्या करते हैं? खुद दवाई, खुद दवाई ले लेते हैं कि हम थोड़ी डॉक्टर हैं? खुद तो डॉक्टर नहीं है। लेकिन कुछ दवाई हम खुद भी जानते हैं। कोई गैस का प्रॉब्लम हो गया, तो कुछ दवाई होता है, बुखार का कुछ दवाई होता है, जो ऑर्डिनरी यूज होता है। जब उसमें काम नहीं बनता, फिर हम डॉक्टर के पास दौड़ते हैं। यहाँ पे भी बिल्कुल ऐसा ही। कुछ लोग क्या करते हैं, कुछ बेसिक चीज जान लेता है। अब कुछ बात तो लोग ऐसा भी होता है कि कोई सोचो, कोई अच्छा तांत्रिक या कोई साधक है, उनके पास कोई रह लेता है। होता है ना? तो वो कुछ दिन गुरुदेव को देखा है, भाई इस तरह, इस तरह से काम करने के लिए, बीच में क्या रहा? वो उसको जानने की जरूरत नहीं है। वो बस ऊपर-ऊपर से देख लिया, ऐसा-ऐसा होता है। बस वही लोगों को फिर वो डॉक्टर बन गया, मतलब वही तांत्रिक बन गया। फिर आप सोचो कि यहाँ पे कोई रेगुलेशन नहीं है। कोई भी कुछ भी कर सकता है। जैसे तुम डॉक्टर बनोगे ना, तो एक रेगुलेशन कमेटी है, एक रेगुलेशन है, उसके अंदर एक विधि-विधान है। यहाँ पे तो कोई नहीं है। तुम भी कल लाल टीका धारण करके, लाल रंग का वस्त्र पहने या काले रंग का कोई वस्त्र पहनो, फिर उतर जाओ। कोई तुम्हें रोकने वाला नहीं है। कोई है रोकने वाला? तुम कल एक डॉक्टर बनके एक क्लीनिक खोल के तो देखो, पूरा खानदान को जेल में डाल देगा। हाँ, क्लीनिक खोल के, खा। ठीक बोले। तो ये तंत्र क्षेत्र में इसलिए ठग हो जाता है, लोगों के इरादा ही गलत होता है। जिनका इरादा भी सच होता है, लेकिन वो तो गलत लोगों के ट्रैक में, ट्रैप में आ जाता है ना। हाँ हाँ। इसलिए भरोसा नहीं कर। कोई बोलेगा कि भाई इसका कोई गारंटी नहीं होता है, तो उसके पास कोई काम नहीं करेगा। जो बोलेगा कि भाई मेरे चार घंटे में मैं कर दूँगा, दो घंटे में कर दूँगा, वो उनको पैसा तुरंत ट्रांसफर कर देगा। फिर जब उसका पैसा ट्रांसफर करते, उसका नंबर जब ब्लॉक हो जाएगा, तब फोन करेगा तारानाथ को, गुरुजी, मेरा नंबर तो ब्लॉक कर दिया, मेरा तो पैसा हो गया। ऐसा हो गया, वैसा हो गया, वैसा। लोग कब ठगते हैं? तुम एक बात थोड़ा-थोड़ा अपने माइंड में एकदम फोकस करके डाल के देखो। लोग ठगते हैं कब? जब वो लोभ करता है। हाँ। किसी ना किसी भी तरह जब वो लोभ के झांसे में आता है ना, ये लोभ आ जाता है मन में, किसी को पैसे दे देना या समय नहीं देना। इस तरह बहुत सारी चीजों के ऊपर होता है। कहीं ना कहीं से तुम्हारे अंदर लोभ आएगा, तभी तुम ठगो गे। अगर तुम्हारे अंदर कोई लोभ नहीं आया ना, तो तुमको ठगी करना बहुत मुश्किल है। कहा, चार घंटे में मैं काम कर दूँगा, तब तुम्हारे मन में लालच आ गया। साला अभी मैं 10 बजे पैसे भेजूँगा, 2 बजे तक मेरे गर्लफ्रेंड मेरे घर में। और लोग ऐसा ही सोचता है ना, जैसे एक मुर्गी जब अंडा देता है ना, सोचो आज कोई मुर्गी ने अंडा दिया, तो उस अंडे के अंदर चूजे है कि नहीं? हाँ, चूजे हैं। तो अभी अंडा दिया और अभी बोलेंगे कि इसके अंदर चूजे निकल तो निकलेगा नहीं। लेकिन तुमको अभी चूजे चाहिए। समय का इंतजार करना पड़ेगा। उसका प्रोसेस है, उसका समय है। फिर जाके वो अंडे से चूजे निकलेगा। नहीं तो अभी अंडे फोड़ोगे तो ऑमलेट ही बनेगा। 10 मिनट के लिए, 10 मिनट के अंदर। वक्त समझ लो, दो मिनट में, चार मिनट, 10 मिनट, एक घंटा, दो घंटे।

जो वशीकरण कहता है, तो कोई तंत्र का प्रयोग कर देंगे। बोलते तो उसका मतलब यही होता है। और दिन-बार हिसाब से जो होता है, उसका हिसाब से हर चीज का आप सोचो, वही सोचो। कोई अंडे के भीतर चूजा बन चुका है, फिर आके तुमको बोल रहा है, देखो मैं अभी इसके अंदर चूजे निकाल के दिखाऊंगा। नहीं हो तो क्या? वो तो पहले से प्रोसेस करके रखा है ना, उसका हिसाब से होगा। इंस्टेंट तो नहीं होगा ना। अभी-अभी मुर्गी ने कोई अंडा दिया और उसी से चूज़ निकलना नामुमकिन है। तो अभी जिसको दो-चार घंटे में, दो दिन, चार दिन जिसको चाहिए, तो उनके साथ ऐसा होने वाला है। दुनिया में कोई नहीं रोक सकता। इसीलिए कहता हूँ कि जो अगर कोई तुमको बोलेगा ना कि मैं दो घंटे, चार घंटे, पाँच घंटे में मैं तुम्हारा काम कर दूँगा, उनको वीडियो कॉल करो। वीडियो कॉल करो और उनके सामने जाओ, बैठो, बोलो चार घंटा है ना। तुमको अगर वो कोई काम के लिए अगर 500 बोला है तो तुम और भी 10000 खर्चा करके फ्लाइट में उनके पास पहुँचो। वो आपका एड्रेस ही नहीं देगा। सबसे पहले जो चार घंटा बोलेगा ना, वो अपना एड्रेस ही नहीं देगा। देगा और तारानाथ के साथ लोग तो पर डे कोई ना कोई मिलने के लिए तारापीठ में आता ही है। जो चार घंटा बोलता है, दो घंटा बोलता है, कभी उनके पास कोई एक बंदा दिखा दो। उनको एड्रेस दिया कि आप यहाँ पर आ जाइए, मैं चार घंटे में आपका काम कर देता हूँ। नहीं देगा, नहीं देगा। हर चीज के प्रोसेस है ना, तो प्रोसेस के बाद कोई काम बनता है। जैसे जो प्रयोग मैं करता हूँ, मैं पहले दिन कोई शक्ति को आहवान करता हूँ। दूसरी स्टेज में उसको भोग लगाता हूँ। तीसरी स्टेज में उसको वो शक्ति को चलाता हूँ। तो कोई काम करने के लिए मुझे तीन दिन चाहिए ही चाहिए, कार्य करने के लिए। अब समझ लो, तुमको कोई खेती करनी है, तो पहले दिन बीज बोए, फिर उनका सिंचाई करना, कटाई करना, फिर पानी ना, सब उसको देखभाल कि पहले उसको बोए, फिर देखभाल किए, फिर कटाई किए, फिर फसल घर आए। ऐसा कभी होता है कि जमीन में बीज डाला, बुवाई की और कली फसल लेके घर आ गए? यहाँ आज अभी बोए तो दो-चार घंटे बाद ही फसल आ जाएगा, ऐसे कभी होता है? नहीं, नहीं। वो सब जो आपका जो बताए हैं, हम देखे हैं, उसमें सब उसका दिन का हिसाब रहता है। अपने आप होते जाएगा, एकदम सुनसान हो जाएगा, पता नहीं चलेगा, ठीक हो जाएगा, पता नहीं चलेगा। यही बात होता है कि कैसे ठीक होगा, हमें खुद भी नहीं मालूम, लेकिन हो जाता है, हो जाता है। जैसे हम खाना खाते हैं, पचाते हैं, हमको दिखाई पड़ता है, लेकिन खाना खाते ही तुरंत हमें एनर्जी महसूस जरूर होती है, आ जाता है। यहाँ पर बिल्कुल वैसा ही है। हर चीज नहीं दिखता, लेकिन न दिखने का मतलब यह नहीं…

और कुछ लोग गलत… मैं तुमको एक बात और क्लियर कर दूँगा, तुम थोड़ा समझ लेना। तांत्रिकों के पास क्यों जाना चाहिए और कौन सी समस्या को लेकर जाना चाहिए? सबसे पहले समझ लेना, वो सारा समस्या जो नहीं दिखता, तंत्र कभी दिखता नहीं है। नहीं दिखता है, तंत्र दिखता है? लोग बोलते हैं, दिखा दो बोलते हैं। हाँ, वो अलग बात है। हर चीज नहीं दिखाया जा सकता। हर चीज नहीं दिखाया जा सकता है, बस महसूस किया जा सकता है। तो तंत्र कभी नहीं दिखता, उसका रिजल्ट कभी नहीं दिखेगा, सामने में नहीं होगा, लेकिन सब हो जाएगा, अपने आप, अपने आप होगा। क्योंकि एक प्रोसेस है ना, तुमने अगर धान बोए तो क्या गेहूँ का चारा निकलेगा? नहीं, धान, नहीं धान निकलेगा। तो यहाँ पर बिल्कुल ऐसे, तुम जिस तरह के तंत्र प्रयोग करोगे ना, वैसे ही उसका रिजल्ट आएगा। कभी किसी का जल्दी आता है, कभी किसी को लेट हो जाता है, लेट आता है। हम वशीकरण करेंगे, हम चलेगा। चलो, तुम सिखा रहा हूँ, एक करके, धीरे-धीरे, धीरे-धीरे, सब एक करके, उसमें जो कौन स्टेप सब है, स्टेप करके बता देंगे। सा-ध देखिए, ये सारे बहुत सार चीज होता है। क्योंकि मैं तुम ओपन स्टेज में बता दिया ना, कोई गलत नहीं है। विद्या ओपन हो ही सकता है। नहीं, वो जो क्या-क्या जो टोटका करते हैं, YouTube में देखो। टोटके का तो काम करता है, ऐसा नहीं कि टोटका काम नहीं करता, लेकिन हर समय हर टोटका काम नहीं करता। तुम देखोगे मेरे [संगीत] YouTube, एक मिनट, दो मिनट का टोटका बताने लग गए, जिसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। तुम मुझसे पूछ लो कि गुरुजी आपने वो टोटका बताए थे, फोन नंबर तो होता ही है। जो टोटका बताते हैं, फोन करके पूछो, गुरुजी आपने YouTube में टोटका बताया था, उसमें क्या मंत्र बताया था? वो नहीं बता सकते, उसका मंत्र भी होता है। बोलता है, नाय मंत्र करो तो उसको बोलो, फोन करके पूछो, आपने जो मंत्र बताए थे, वो क्या मंत्र था? वो नहीं बता सकते। ऐसे ही बोलते हैं। हम देख के एक बार क्या था, काम दिया यार, वो तो खुद ही नहीं जानता, टोटका उसको कहाँ से मिला, क्या था, बा दिया, नहीं काम दिया। इसलिए आपको पूछा के बारे में, ऐसा नहीं है कि काम नहीं होता है। तंत्र का प्रयोग तीन तरह होता है, चार तरह से होता है, सॉरी। एक हवा से होता है, पानी से होता है, अग्नि से होता है और आकाश से होता है। चार तत्व, हवा नहीं, हवा… इस दुनिया में चार शक्तियों से तंत्र सबसे ज्यादा प्रयोग होता है। इस दुनिया में पंचभूत से इस धरती बना हुआ है। एक जमीन हो गया, एक हवा हो गया, एक अग्नि हो गया, एक वायु हो गया और एक आकाश हो गया। तो सबसे ज्यादा तंत्र जो प्रयोग होता है वो अग्नि वाला होता है। तंत्र जैसे जब तुम लोगों को मैं सिखाऊँगा ना, तब देखना, वहाँ पर मैंने चार्ट बना के रखा है कि वशीकरण का काम करने के लिए कौन सी दिशा जरूरी है, कौन सी देव वशीकरण का देवता कौन है, कौन सी दिशा में रहता है, वशीकरण कौन सी दिशा में वशीकरण करना पड़ता है। हर चीज का एक चार्ट सिखाऊँगा। वो एक चार्ट अगर कोई लेके बैठ जाए ना तो उसको कोई काम में उसको रुकावट नहीं आएंगे, हर काम उसका बनेगा। वहाँ पर सब बता दूँगा। जब सिखाना शुरू किया तो मुझे तो वो सारी चीज एक जगह पर करना पड़ा ना। हा हा। वशीकरण कैसे चलता है? वशीकरण का कोई भी तंत्र प्रयोग हो जाए। आज सुन लो एक गुप्त बात, बिना अग्नि के कोई भी वशीकरण प्रयोग नहीं होता। बिना अग्नि के, बिना अग्नि के कोई वशीकरण प्रयोग नहीं होता और बिना जमीन के कोई मारण क्रिया नहीं होता, जिसको हम पृथ्वी तत्व कहते हैं। कोई भी वशीकरण क्रिया में बिना अग्नि जलाए कभी तुम कर ही नहीं सकते, कोई प्रयोग नहीं है। क्योंकि वशीकरण का तत्व ही अग्नि है। वशीकरण वो अग्नि तत्व के अंदर ही आता है, जो आग है। तुम्हारा खाना कभी बिना आग के पका सकते हो? नहीं, नहीं। वो जलाने का काम करता है, या तुम बोलोगे मैं तो रोस्ट कर दूँगा। अरे, वो तप तो चाहिए ना, अग्नि तो चाहिए। ताप जहाँ से निकल रहा है, थर्मल जहाँ पे निकल रहा है तो वहाँ पे तो टेंपरेचर है ही ना। बिना टेंपरेचर के वो कभी हो ही नहीं सकते। वशीकरण में तुमको आग चाहिए ही चाहिए। एक अगरबत्ती भी तुमको जलाना पड़ेगा, कोई भी वशीकरण के प्रयोग के अंदर। मतलब आग तुमको चाहिए ही चाहिए। बिना आग के तुम वशीकरण क्रिया कर ही नहीं सकते। आप सोचो, कोई तुम लटक दे रहे हो, तो कभी वो वशीकरण बनेगा? और आग कहाँ से आ रहा है? तो पहले या बाद में उसके साथ आग जोड़ना ही पड़ेगा। आग का जरूरी है, आग जरूरी है। जरूरी मतलब अत्यावश्यक, चाहिए ही चाहिए। आग के बिना कोई वशीकरण नहीं होता।