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जब दरोगा ने एक साधारण लड़की से की बदतमीजी! उसे नहीं पता था वो SDM है! अंजलि शर्मा की सच्ची कहानी"..

True Spark 14:50

Transcription

नमस्कार दोस्तों। आज हम आपके लिए लेकर आए हैं एक ऐसी घटना जिसे सुनकर आप भी हैरान हो जाओगे। एसडीएम अंजलि शर्मा अपनी साधारण सी साड़ी में स्कूटी पर सवार तेजी से अपने छोटे भाई की शादी में जा रही थी। एकदम सादे भेष में ना कोई सरकारी गाड़ी ना कोई सिक्योरिटी गार्ड। बस एक साधारण लड़की की तरह स्कूटी चलाते हुए जैसे ही वह हाईवे पर पहुंची, सामने पुलिस की बैरिकेडिंग नजर आई। तीन-चार पुलिसकर्मी सड़क पर खड़े थे और बीच में दरोगा विजय कुमार वर्दी में खड़ा था। उसने सामने आते ही अंजलि को हाथ के इशारे से रुकने को कहा तो अंजलि शर्मा ने स्कूटी साइड में लगा दी।

दरोगा की आवाज में रुकावट थी। कहां जा रही हो? दरोगा ने सवाल किया। मेरे भाई की शादी है। वहीं जा रही हूं। अंजलि ने शांत लहजे में जवाब दिया। दोस्तों वीडियो को अंत तक जरूर देखना। और अगर आपने अभी तक हमारे चैनल बोल्ड स्टोरीज को सब्सक्राइब नहीं किया है तो प्लीज सब्सक्राइब जरूर कर लें।

दरोगा विजय कुमार ने ऊपर से नीचे तक अंजलि को घूरा और फिर मुस्कुराते हुए बोला अच्छा तो भाई की शादी में जा रही हो लेकिन हेलमेट नहीं पहना और यह स्कूटी भी बहुत तेज चला रही थी। चलो चालान भरना पड़ेगा। दरोगा विजय कुमार ने चालान बुक निकालते हुए कहा। अंजलि को अंदाजा हो गया कि यह एक बहाना था। वह बोली सर मैंने कोई नियम नहीं तोड़ा है। अरे मैडम कानून हमें मत सिखाओ। उसने साइड में खड़े एक सिपाही को देखा और फिर अंजलि की ओर झुकते हुए फुसफुसाया। ऐसे नहीं मानेगी इसको तरीका सिखाना पड़ेगा।

अचानक दरोगा ने जोरदार थप्पड़ अंजलि के गाल पर जड़ दिया। बहुत सवाल पूछती है। जब पुलिस कुछ कहे तो चुपचाप मान लेना चाहिए। अंजलि का सिर एक पल के लिए झटका खा गया। लेकिन उसने खुद को संभाल लिया। उसकी आंखों में आग थी। दरोगा ठहाका मारकर हंसा और अपने साथियों से बोला, अभी भी अकड़ बाकी है। लगता है अच्छे से सिखाना पड़ेगा। एक सिपाही आगे बढ़ा और बोला, मालिक थाने ले चलो। वहां आराम से मामला देख लेंगे। दरोगा सिर हिलाकर बोला, हां, इसे थाने ले चलते हैं। तब समझ आएगा कि पुलिस से कैसे बात की जाती है।

एक सिपाही ने अंजलि का हाथ पकड़ कर खींचा। चल, जीप में बैठ। अंजलि ने अपना हाथ झटका और गुस्से से बोली, हिम्मत मत करना। दरोगा का पारा चढ़ गया। उसने अपने एक आदमी से कहा, "इसका घमंड तोड़ो।" एक सिपाही ने आगे बढ़कर अंजलि के बाल खींचे और जबरदस्ती घसीटने की कोशिश की। अंजलि दर्द से करा उठी, लेकिन अब भी अपनी पहचान छुपाए रखी। वह देखना चाहती थी कि यह लोग कितनी गिरी हुई हरकत कर सकते हैं। तभी एक पुलिस वाले ने गुस्से में उसकी स्कूटी को लात मार दी। बड़ी शरीफ बनती है। अब तेरा खेल खत्म।

अंजलि पूरी तरह समझ गई थी कि यह लोग कितने नीचे गिर सकते हैं। दरोगा की आंखों में गुस्सा था। उसने जोर से चिल्लाकर कहा बहुत देखे हैं तेरे जैसे अकड़ू लोग पुलिस से भिड़ेगी अभी मजा दिखाता हूं। ले चलो इसे थाने वहीं समझाएंगे। एसडीएम अंजलि शर्मा अब भी चुप थी। उन्होंने अपनी पहचान बताने का कोई इरादा नहीं किया। वह देखना चाहती थी कि प्रशासन कितना नीचे गिर चुका है। कितनी हद तक यह लोग अत्याचार कर सकते हैं।

दरोगा विजय कुमार अब झुझला चुका था। उसके सामने एक लड़की खड़ी थी जिसने उसके तमाचे खाए जिसके बाल खींचे गए जिसे हाथ पकड़ कर खींचा गया। लेकिन वह अब भी चुप थी। दरोगा ने सिपाहियों को घूरते हुए कहा, ले चलो इसे थाने। वहीं देखेंगे इसका क्या करना है? दो सिपाही अंजलि के दोनों हाथ पकड़ कर घसीटने लगे। छोड़ो मुझे। अंजलि पहली बार जोर से बोली दरोगा हंसा अब जुबान खोली। चलो थाने में देखेंगे कितना बोलती है।

थाने में घुसते ही दरोगा ने जोर से चिल्लाया। बोलो चाय पानी लाओ। एक स्पेशल केस आया है। अंजलि अब भी शांत थी। वह देख रही थी कि आम जनता के साथ पुलिस कैसा व्यवहार करती है। दरोगा ने अपने जूनियर से फुसफुसाया। क्या केस सर? दरोगा हंसा। कोई भी चोरी झेबकतरी बस अंदर डालना है। अंजलि सब सुन रही थी लेकिन अब भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

दरोगा टेबल पर बैठ गया और कलम घुमाते हुए बोला नाम बता घर का पता बता। अंजलि चुप रही। दरोगा ने फिर से पूछा नाम क्या है? अंजलि अब भी चुप रही। दरोगा ने मेज पर जोर से हाथ मारा। सुनाई नहीं देता तुझे? नाम बता अपना। नेहा कपूर अंजलि ने झूठा नाम बताया। दरोगा हंसा। बहुत समझदार है तू लेकिन ज्यादा चालाकी मत कर वरना बड़ी गलती होगी।

अंजलि को जबरदस्ती लॉकअप में डाल दिया गया। एक गंदा बदबूदार कमरा जहां पहले से दो महिलाएं बैठी थी। क्या किया तूने? एक औरत ने पूछा। कुछ नहीं। अंजलि ने हल्की मुस्कान दी। अब वह देख रही थी कि प्रशासन कितना गंदा हो चुका है। अगर एक एसडीएम तक को इस तरह बिना सबूत अंदर कर सकते हैं तो आम जनता का क्या हाल होगा। अंजलि अब लॉकअप के अंदर थी। वह बस देख रही थी, सुन रही थी और सब कुछ समझ रही थी कि आखिर प्रशासन कितना गिर चुका है। वह हर हर पर गौर कर रही थी।

दरोगा ने एक फर्जी रिपोर्ट तैयार करवाई। इस पर चोरी और ब्लैकमेलिंग का केस डाल दो। दरोगा ने फाइल को ठोकते हुए कहा। सिपाही जिज्ञासु था। लेकिन सर बिना सबूत के दरोगा हंस पड़ा। सबूत इस थाने में सबूत बनाए जाते हैं। थोड़ी देर बाद एक सिपाही आगे बढ़ा और जोर से अंजलि के कंधे पर धक्का मारा। अंजलि दीवार से टकराई लेकिन उसके चेहरे पर कोई डर नहीं था। दरोगा ने हाथ उठाया और थप्पड़ मारने ही वाला था कि रुक जाओ।

दरवाजे पर एक पुलिस अधिकारी खड़ा था। दरोगा राहुल सिंह। थाने में उसकी छवि थोड़ी ईमानदार अफसर की थी। उसने थाने के अंदर की महिलाओं को देखा। उनकी हालत देखकर उसके माथे पर शिकन आ गई। यह सब क्या हो रहा है? उसने सख्त आवाज में पूछा। दरोगा विजय कुमार मुस्कुराया। कुछ नहीं सर। एक सड़क छाप लड़की ज्यादा होशियारी दिखा रही है। जरा सबक सिखा रहे हैं। राहुल ने गौर से अंजलि को देखा। उनके हावभाव किसी साधारण महिला जैसे नहीं थे। इसका क्या जुर्म है? राहुल ने विजय कुमार से पूछा।

विजय कुमार हड़बड़ा गया। सर इसने चेकिंग के दौरान बदतमीजी की थी। राहुल सिंह को कुछ गड़बड़ लगी। राहुल ने अंजलि की तरफ देखा। तुम्हारा नाम क्या है? अंजलि शांत थी। दरोगा विजय कुमार ने हंसते हुए कहा, "सर, यह तो अपना नाम तक नहीं बता रही।" राहुल अब पूरी तरह सतर्क हो गया था। ठीक है, इसे दूसरी कोठरी में डालो। उसने सिपाही को आदेश दिया। विजय कुमार हैरान रह गया। सर लेकिन मैं देखूंगा कि यह कौन है। राहुल सिंह ने सख्ती से कहा।

राहुल सिंह के आदेश पर अंजलि को एक दूसरी कोठरी में डाल दिया गया। यह कोठरी पहले से भी ज्यादा अंधेरी और गंदी थी। अंजलि ने चारों तरफ नजर दौड़ाई। कमरे में एक टूटा हुआ टेबल और एक जंग लगा लोहे का रड पड़ा था। अंजलि अब इस प्रशासन का गंदा चेहरा और गहराई से देख रही थी। यह सिस्टम कितना गिर चुका है। उसका हर मिनट का अनुभव यह साबित कर रहा था कि कानून सिर्फ कागजों में ही था।

अचानक एक सिपाही भागते हुए आया। सर एक बड़ी गाड़ी बाहर खड़ी है। विजय कुमार चौंका। गाड़ी कौन आया है? सिपाही ने घबरा कर कहा। सर गाड़ी सरकारी है। सिपाही बाहर गया। लेकिन जैसे ही उसने गाड़ी के अंदर झांका, उसकी आंखें फटी रह गई। सिपाही हड़बड़ाते हुए अंदर आया और धीरे से बोला सर क्या हुआ कौन है विजय कुमार झुंझुला उठा सिपाही ने कांपते हुए कहा सर डीएम साहब विजय कुमार का चेहरा सफेद पड़ गया राहुल सिंह भी चौकन्ना हो गया अब मामला बहुत बड़ा हो चुका था।

डीएम साहब ने थाने में कदम रखा उनकी आंखों में गुस्सा था उन्होंने विजय कुमार की ओर देखा और कड़क आवाज में पूछा दरोगा विजय कुमार क्या चल रहा है यहां विजय कुमार कुमार घबराया हुआ बोला सब ठीक है सर कुछ नहीं बस एक मामूली केस था डीएम साहब ने टेबल पर पड़ी अंजलि की फाइल उठाई और ध्यान से पढ़ी उनका माथा सिकुड़ गया फिर उन्होंने अंजलि की ओर देखा इस महिला पर 420 और ठगी का केस डीएम साहब की आवाज गूंज उठी उन्होंने विजय कुमार की ओर देखा क्या सबूत है तुम्हारे पास विजय कुमार अब पूरी तरह फंस चुका था डीएम साहब ने अंजलि से सीधा सवाल किया आपका नाम अंजलि ने हल्की मुस्कान दी और पहली बार अपना नाम बताया।

अंजलि शर्मा एसडीएम पूरा थाना हक्का बक्का रह गया। विजय कुमार के हाथ पैर कांपने लगे। सारे पुलिस वाले चौंक कर खड़े हो गए। विजय कुमार के पैरों तले जमीन खिसक गई। ऐसा डीएम मैडम जिसे वह ठग समझकर फर्जी केस में फंसा रहा था। वह खुद एसडीएम निकली। थाने के सारे पुलिसकर्मी सख्त में आ गए। डीएम साहब ने घूरते हुए कहा दरोगा विजय कुमार तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई एसडीएम मैडम पर झूठा केस डालने की विजय कुमार कुछ बोलने ही वाला था कि राहुल सिंह ने तेज आवाज में कहा सर मैंने पहले ही कहा था कि कुछ गड़बड़ है अब विजय कुमार अकेला पड़ चुका था अंजलि ने अब अपना असली रुख दिखाया उन्होंने शांत लेकिन सख्त आवाज में कहा दरोगा विजय कुमार तुम सस्पेंड हो तुम्हारे खिलाफ विभागीय जांच जांच होगी और तुम पर केस दर्ज किया जाएगा।

विजय कुमार के होश उड़ गए। सारे पुलिसकर्मी अब विजय कुमार से दूरी बनाने लगे। राहुल सिंह ने तुरंत हवलदार को आदेश दिया। विजय कुमार को हिरासत में लो। जैसे ही हवलदार विजय कुमार को पकड़ने आगे बढ़ा, अचानक विजय कुमार ने जेब से कागज निकाला। उसने मुस्कुराते हुए कहा, लेकिन यह देखिए उसने वह कागज हवा में लहराया। डीएम साहब और एसडीएम अंजलि ने उसे ध्यान से देखा। विजय कुमार ने ठाका लगाया। यह रहा मेरा ट्रांसफर ऑर्डर। 3 दिन पहले ही मेरा ट्रांसफर हो चुका है। तो अब आप मुझे सस्पेंड नहीं कर सकती।

थाने में फिर से सन्नाटा छा गया। अंजलि ने कागज अपने हाथ में लिया और गौर से पढ़ा। क्या यह असली है? डीएम साहब ने कड़े स्वर में पूछा। डीएम साहब ने राहुल सिंह की ओर देखा और बोले, "इस कागज की तुरंत जांच करो।" अगर यह असली निकला तो भी विजय कुमार का निलंबन रोका नहीं जा सकता। विजय कुमार की हंसी अचानक गायब हो गई क्योंकि अगर कोई भी सरकारी कर्मचारी ट्रांसफर के बाद भी गलत गतिविधियों में शामिल होता है तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है। अब विजय कुमार की हालत बिगड़ने लगी।

राहुल सिंह तुरंत ऑनलाइन सिस्टम में विजय कुमार का रिकॉर्ड चेक करने लगे। राहुल ने सिर उठाया और कहा सर यह कागज असली है। लेकिन विजय कुमार ने अभी कार्यभार नहीं सौंपा था। मतलब यह कि विजय कुमार अब भी इस थाने का प्रभारी था और उसी दौरान उसने यह सब किया था। अब कोई भी विजय कुमार को बचा नहीं सकता था। एसडीएम अंजलि ने सीधी नजर विजय कुमार पर डाली और कहा अब तुम्हारी असली जगह तुम्हारी अपनी जेल में होगी। गिरफ्तार करो इसे। डीएम साहब ने आदेश दिया।

जैसे ही विजय कुमार को गिरफ्तार करने का आदेश हुआ, पूरा थाना हिल गया। विजय कुमार को पहली बार एहसास हुआ कि अब वह बच नहीं सकता। लेकिन अचानक उसने कहा ठहरिए एसडीएम मैडम मैं अकेला नहीं हूं। विजय कुमार ने हंसते हुए कहा मैडम क्या आपको लगता है कि इस थाने में सिर्फ मैं भ्रष्ट हूं? उसने थाने के बाकी पुलिस वालों की तरफ इशारा किया और कहा यह सब मेरे साथ है। पूरी कड़ियां ऊपर तक जुड़ी है। थाने के कुछ पुलिस वाले घबराने लगे। राहुल सिंह भी चौकन्ने हो गए।

एसडीएम अंजलि ने डीएम साहब की तरफ देखा और कहा, "इस पूरे थाने की जांच की जाएगी। अब कोई भी सुरक्षित नहीं है। डीएम साहब ने तुरंत आदेश दिया एंटी करप्शन पुलिस टीम को बुलाया जाए। अब पूरे थाने में हड़कंप मच गया। जैसे ही टीम ने जांच शुरू की कुछ पुलिस वालों के चेहरे पीले पड़ने लगे। एक हवलदार आगे आया और एसडीएम मैडम के सामने हाथ जोड़कर बोला मैडम मुझे माफ कर दीजिए। मैं सिर्फ आदेशों का पालन कर रहा था। तभी अचानक एक पुलिस वाले ने फाइल निकाली और कहा मैडम हमारे बड़े साहब भी इसमें शामिल हैं।

कौन बड़े साहब? डीएम साहब ने गुस्से में पूछा। पुलिस वाले ने डरते-डरते जवाब दिया, एसपी साहब, अब पूरा मामला ऊपर तक जुड़ चुका था। थाने में सन्नाटा छा गया। डीएम साहब ने गहरी सांस ली और फिर सख्त आवाज में बोले। इस थाने का पूरा स्टाफ तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। जैसे ही यह आदेश मिला, थाने के पुलिस वालों के होश उड़ गए। कुछ पुलिस वाले अपने फोन निकालकर किसी को कॉल करने लगे। कुछ लोग चुपचाप सिर झुका कर खड़े हो गए तो कुछ दरोगा भी बचने का रास्ता ढूंढ रहे थे लेकिन कोई नहीं बच सकता था।

एस डीएम अंजली ने डीएम साहब की तरफ देखा और बोली अब हमें एसएसपी साहब से भी जवाब लेना होगा। डीएम ने तुरंत आदेश दिया एसएसपी को भी बुलाया जाए। अब इस मामले ने पूरे जिले में हलचल मचा दी थी। थाने के बाहर कुछ पत्रकार गुप्त रूप से खड़े थे। जैसे ही उन्हें भनक लगी कि पूरा थाना सस्पेंड हो चुका है, वे तुरंत खबर फैलाने लगे। अब मामला खुलकर सामने आने वाला था। तभी एक काले शीशे वाली गाड़ी थाने के सामने आकर रुकी। एसएसपी साहब खुद आ गए थे।

एसएसपी साहब थाने पहुंचे। उन्होंने चारों तरफ नजर दौड़ाई। पूरा थाना सस्पेंड हो चुका था। उन्होंने गुस्से में कहा, "यह क्या नाटक चल रहा है?" लेकिन एसडीएम अंजली शांत थी। उन्होंने एसएसपी की आंखों में देखते हुए कहा, आपको लगता है कि आप बच जाएंगे? राहुल सिंह ने एसडीएम को एक फाइल दी। यह फाइल एसएसपी साहब के भ्रष्टाचार के सबूतों से भरी थी। अंजलि ने ठोस आवाज में कहा, "एसआईएसपी साहब, यह देखिए आपके सारे काले कारनामे।" अब एसआईएसपी के चेहरे से पसीना टपकने लगा।

डीएम साहब ने आदेश दिया, "एसआईएसपी को तुरंत गिरफ्तार करो। अब पूरी पुलिस फोर्स हैरान थी। इतने बड़े अधिकारी को पहली बार किसी ने खुली चुनौती दी थी। जैसे ही एएसआईएसपी की गिरफ्तारी हुई, पूरा मामला हिल गया। अब यह मामला राज्य स्तर तक पहुंच गया था। मुख्यमंत्री ने तुरंत आदेश दिया जिले के सभी भ्रष्ट अधिकारी गिरफ्तार किए जाएं। इस आदेश के बाद 40 से ज्यादा पुलिस अधिकारी, 10 से ज्यादा आईएएस अफसर और कई राजनेता गिरफ्तार कर लिए गए।

एसडीएम अंजलि शर्मा की ईमानदारी ने सिस्टम को हिला दिया था। पूरे प्रकाशपुर जिले में एक नया प्रशासन लाया गया। भ्रष्टाचार पर अब कड़ी नजर रखी जाने लगी। अब एसडीएम अंजलि का मिशन पूरा हो चुका था। उन्होंने दिखा दिया कि ईमानदारी से पूरा सिस्टम बदला जा सकता है। तो दोस्तों, आपको यह वीडियो कैसी लगी? अगर अच्छी लगी हो, तो प्लीज वीडियो को लाइक और हमारे चैनल बोल्ड स्टोरीज को सब्सक्राइब जरूर कर लेना। धन्यवाद।