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2027 एक ऐसा साल होगा जिसमें क्या सच में पहले बिग बैंग हुआ भी था? क्या इस ब्रह्मांड का कोई क्रिएटर भी है? इसका जवाब हमें मिल जाएगा। क्या इस ब्रह्मांड में एलियंस मौजूद है या हम यहां पर अकेले हैं? क्या मल्टीवरिवर्स जैसा भी कुछ होता है या यूनिवर्स ही अकेला वो सब कुछ है? ये सारे बड़े प्रश्नों के जवाब हमें मिलेंगे और इसे पॉसिबल करेगा कौन? ईलॉन मस्क।
वेल फ्रेंड्स अब आप पूछोगे कैसे? ईलॉन मस्क को Twitter से फुर्सत मिले तब ना। वेल फ्रेंड्स, ह्यूमन बिलीफ बट प्रेजेंट डे शो स्टीलर जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप से भी 100 टाइम्स आधुनिक और 100 टाइम्स बेटर स्पेस टेलिस्कोप ईलॉन मस्क लॉन्च करने वाले हैं जिसका नाम है नसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलिस्कोप। ये स्पेस टेलिस्कोप समथिंग लाइक हबल स्पेस टेलिस्कोप से 200 टाइम्स ज्यादा पावरफुल होगा। और हबल को ये फोटो खींचने में फॉर इंस्टेंस 3 साल लग गए थे। पर यही रोमन स्पेस टेलिस्कोप सिर्फ 90 मिनट्स में कर सकता है। पर फ्रेंड्स बात तो यह है ना कि इतने एडवांस टेलिस्कोप होने के बावजूद भी इस टेलिस्कोप को क्यों डोनल्ड ट्रंप ने दो बार रिजेक्ट कर दिया था?
वेल हेलो फ्रेंड्स मेरा नाम है गौरव और क्या है इस स्पेस टेलिस्कोप की पूरी कहानी और ये क्या-क्या कर सकता है आज आप जानोगे सब कुछ आज के इस वीडियो में। लेट्स गेट स्टार्टेड। साल 2013 जब नासा ने पहली बार इस टेलिस्कोप के डिजाइन को दुनिया के सामने पेश किया था और इस टेलिस्कोप के फॉर्मेशन की शुरुआत कर दी थी। लेकिन जब से इस टेलिस्कोप को पेश किया गया तब से सभी वैज्ञानिकों को बस एक ही चिंता सताई जा रही है। बहुत ही जल्द यह आइंस्टाइन के जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी को गलत साबित कर देगा। इसके डिस्कवरीज इतने माइंड ब्लोइंग हो सकते हैं कि हमारा प्रेजेंट साइंस का पूरा का पूरा अंडरस्टैंडिंग यह गलत साबित कर सकता है। लेकिन उनकी यह चिंता दूर हो उसके पहले ही एक नई मुसीबत ने दस्तक दे दी। जब इस प्रोजेक्ट को लेकर नासा ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के पास गई तब ट्रंप ने इस पूरे प्रोजेक्ट को ही खारिज कर दिया। वो भी एक बार नहीं बल्कि दो-दो बार। अब इस प्रोजेक्ट को रिजेक्ट करने के पीछे इनका मेन कारण क्या था? वेल बजट। वेल ये रीज़न डॉन्ड ट्रंप के हर दम मुंह जुबानी रहती है। पर उनकी हरकतें कुछ और ही कहती है। 2020 कोविड के टाइम पर जब पूरी दुनिया कोरोना की महामारी से लड़ रही थी, तब ट्रंप ने वैक्सीनंस को फंड करने से भी साफ इंकार कर दिया था। 2019 में जब उसके सामने क्लाइमेट क्राइसिस आए, स्पीशीज एक्सटिंशन और एनर्जी सिक्योरिटी के इश्यूज रखे गए तब भी उसने इन सारे प्रॉब्लम्स को नजरअंदाज कर दिया और आप बिलीव नहीं करोगे पर ट्रंप के पूरे टेन्योर में 156 साइंस प्रोजेक्ट्स को नकार दिया गया था। मतलब इनडायरेक्टली ट्रंप साइंस में कभी इंटरेस्टेड था ही नहीं। और ये शायद मेजर रीजन था कि वो रोमन स्पेस टेलिस्कोप को रिजेक्ट कर रहा था।
लेकिन अब आता है कहानी में एक ट्विस्ट। अगर यह प्रोजेक्ट रिजेक्ट हो चुका था तो फिर अचानक से ऐसा क्या हुआ कि इसका लॉन्च ईयर एकदम से रिवील हो गया? वेल फ्रेंड्स ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने जैसे ही इस प्रोजेक्ट को रिजेक्ट किया वैसे ही नासा जहां पहुंचा कांग्रेस के पास। एंड यू वोंट बिलीव यूएस कांग्रेस को यह प्रोजेक्ट इतना प्रॉमिसिंग लगा कि ना ही उन्होंने इस प्रोजेक्ट को अप्रूव किया बल्कि 8% से इनके बजट को भी इनक्रीस कर दिया। जिसका फायदा यह हुआ कि अब यह टेलिस्कोप एक साथ चार टेलिस्कोप का काम करने वाला है। देखो ये थोड़ा टेक्निकल है पर काफी सिंपल है। एडिटर्स प्लीज 1 मिनट का टाइमर चालू करो। मैं 1 मिनट में समझाता हूं। सो इसमें दो इंस्ट्रूमेंट्स लगे हुए हैं। एक वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट और दूसरा कोरोना ग्राफ। अब इनका काम क्या है? सिंपल फोटो खींचना। वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट नाम से ही सुनके आपको ये समझ गया होगा कि इसका लेंस वाइड एंगल लेंस है। जो एक ही टाइम पे मेजर फील्ड ऑफ विज़न को कैप्चर कर सकता है। और इसीलिए इस फोटो को खींचने में जहां हबल को 3 साल लगे। वहीं पर यह टेलिस्कोप सिर्फ 90 मिनट्स में खींचने की काबिलियत रखता है। और इसके इसी इंस्ट्रूमेंट की वजह से हम 13 बिलियन लाइट इयर्स से भी ज्यादा दूर से आती लाइट को डिटेक्ट कर पाएंगे। एंड हेंस कोई क्रिएटर है या नहीं इसका जवाब शायद हमें पता चल सके। बिग बैंग हुआ था कि नहीं? डार्क एनर्जी और डार्क मैटर के एक्सिस्टेंस का सारा कच्छा चिट्टा ये सब कुछ हमारे सामने हो सकता है। जिसके बाद यह भी हो सकता है कि हमारा पूरा साइंस सही साबित हो या फिर पूरा का पूरा गलत भी। और रही बात कोरोनाग्राफ की तो यह छोटा सा इंस्ट्रूमेंट दूसरे सोलर सिस्टम के स्टार्स की लाइट को आर्टिफिशियली डम करके एक्सो प्लेनेट्स और उनके एटमॉस्फियर को स्टडी करके हमें बताएगा कि क्या उस प्लेनेट पर लाइफ है? नहीं है पॉसिबल है या कुछ भी। और इस तरीके से हम यह समझ पाएंगे कि क्या दूसरे ग्रहों में भी एलियन लाइफ मौजूद है कि नहीं।
अब इसे देखा जाए ना फ्रेंड्स, तो इस टेलिस्कोप के सिलेबस में एक्सोप्लांस को स्टडी करना कभी था ही नहीं। वो तो बस नासा को लाइक लिटरली फोकट में एक मिरर मिल गया। जिसकी वजह से उन्होंने इस टेलिस्कोप को एक नया काम सौंप दे दिया। ओरिजिनली अगर देखा जाए तो रोमन स्पेस टेलिस्कोप का काम सिर्फ डार्क मैटर, डार्क एनर्जी और रिलेटिविटी थ्यरीज पर फोकस करना था। पर नेशनल रिकॉनसेंस एजेंसी जो कि यूएस गवर्नमेंट के लिए स्पाई सैटेलाइट्स बनाती थी। उनके पास एक स्पेयर टेलिस्कोप मिरर पड़ा हुआ था जो किसी के भी काम का नहीं था। और इसीलिए 2012 में उन्होंने नासा को वो मिरर फ्री में सौंप दिया और नासा ने उस मिरर पर एक कोरोना ग्राफ बिठाकर टेलिस्कोप का सेकंड ऑब्जेक्टिव डिसाइड कर लिया जो था एक्सोप्लेनेट डिटेक्शन। और इसके बाद फाइनली वो स्टेप आ गया जब डिसाइड होना था कि इसका नाम क्या रखा जाए। स्टार्टिंग में तो सबसे पहले इसका नाम सारे वैज्ञानिकों ने डब्ल्यू फर्स्ट यानी वाइट फील्ड इंफ्रारेड स्पेस टेलिस्कोप रखा। पर 2018 में नसी ग्रेस रोमन द फर्स्ट फीमेल साइंटिस्ट ऑफ nसा की मृत्यु के बाद 2022 में नासा ने इस टेलिस्कोप का नाम बदलकर नसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलिस्कोप रख दिया इन मेमोरियल। वो दुनिया को यह बताना चाहते थे कि यह टेलिस्कोप उनके लिए कितना स्पेशल है और इसको लेके वह काफी ज्यादा सीरियस हैं। और इन स्पेस टेलिस्कोप्स की कहानी जो नसी ने आज से 60 साल पहले शुरू की थी उसे वो कभी नहीं रोकेंगे। एज अ मैटर ऑफ़ फैक्ट अगर नसी को नासा में रिक्रूट ही नहीं किया गया होता तो शायद आज तक हम कभी भी टेलिस्कोप को स्पेस में भेजने के बारे में नहीं सोचते या फिर हम ग्रेटली डिले हो जाते। हमारे पास आज तक ब्लैक होल का पहला पिक्चर नहीं होता। यहां तक कि एक्सोप्लेनेट्स भी सिर्फ बुक्स में ही एक्सिस्ट करते हैं। सबसे ओल्डेस्ट गैलेक्सी को शायद हम आज तक नहीं देख पाए होते और यूनिवर्स का एज भी हमने अभी तक प्रेडिक्ट नहीं किया होता। यह जो भी स्पेस टेलिस्कोप्स की दुनिया में रेवोल्यूशन आया है वो सिर्फ और सिर्फ नसी की वजह से ही है। नसी का जन्म 1925 में हुआ था जब लड़कियों को ज्यादा पढ़ाया भी नहीं जाता था। उस वक्त में नसी ने पीएचडी इन एस्ट्रोनॉमी को कंप्लीट किया और अपने पैशन से नासा को ज्वॉइ कर लिया। नासा में उनका काम था नासा के बाहर मौजूद एस्ट्रोनॉमर्स को नासा के साथ काम करने के लिए कन्विंस करना। इनडायरेक्टली तुम इन्हें नासा का पीआर या फिर टैलेंट एक्विजिशन कह सकते हो। पर उस वक्त वो लोगों के साथ नासा को भी कंटीन्यूअसली फोर्स कर रही थी कि उन्हें स्पेस में एक टेलिस्कोप भेजना चाहिए। अर्थ के थिक एटमॉस्फियर की वजह से हम सरफेस से बहुत कुछ नहीं देख पाते। और इसीलिए हमें स्पेस में टेलिस्कोप भेजना चाहिए क्लियर इमेजेस के लिए। काफी बार पुश करते रहने के बाद फाइनली नासा के डिसीजन मेकिंग अथॉरिटीज ने उनकी बात सुनी और सबसे पहला स्पेस टेलिस्कोप हबल स्पेस टेलिस्कोप स्पेस में भेजा 24th अप्रैल 1990 को और उसके बाद जो रेवोल्यूशन आया यह तो आप देख ही सकते हो और यही वो कारण है जिसकी वजह से नसी को मदर ऑफ हर्बल भी बुलाया जाता है।
सो अब यह टेलिस्कोप रेडी है। उसका नाम भी रेडी है। पर सबसे बड़े सवाल का जवाब अभी तक रेडी नहीं है। आखिर इसे स्पेस में रखा कहां पे जाने वाला है? इसे किसी ऐसी जगह पर रखना होगा जहां पर सन से आता हुआ रेडिएशन इसके ऑब्जरवेशन को अफेक्ट ना करे और जहां पर इसे ना के बराबर फ्यूल को यूज करना पड़े। अब इन प्रॉब्लम्स को लिस्ट करने के बाद सलूशन हमारे सामने था। एल टू लेगज पॉइंट टू। अब आई नो हमने इस पॉइंट का जिक्र पहले भी बहुत सारे वीडियोस में किया है। पर एक और एक बार मैं आपको इसकाेंस बता देता हूं। एक्चुअली में हमारे सन और अर्थ के बीच ऐसे पांच पॉइंट्स हैं जहां अर्थ और सन की ग्रेविटी एक दूसरे को कैंसिल करके नलिफाई कर देती है। इन पॉइंट्स पर जाके अगर आपने कुछ भी रख दिया तो वो सदियों तक बिना हिले वहीं पर पड़ा रहेगा। क्योंकि उसे इन्फ्लुएंस करने के लिए कोई फोर्स वहां पर मौजूद ही नहीं है। सारी एक्सटर्नल फोर्सेस कैंसिल आउट हो जा रही है। पर अब सवाल आता है इन पांच लेग्स पॉइंट्स में से स्पेसिफिकली L2 ही क्यों? वेल ये समझने के लिए आप ये डायग्राम देखो। इसमें आपको क्लियरली ये दिख रहा होगा L1, L3, L4 और L5 ऐसे पॉइंट्स हैं जो सन के साथ डायरेक्ट कांटेक्ट में आते हैं। और L2 अकेला ऐसा पॉइंट है जो अर्थ के बाद आता है। इसी वजह से सन के रेडिएशन से हमारा अर्थ उसे प्रोटेक्ट करेगा और उसके ऑब्जरवेशंस में ना के बराबर एरर्स आएंगे।
सो अब तक हुए इस पूरे डिस्कशन में एक चीज बिल्कुल क्लियर है। इस टेलिस्कोप को बनाने का काम नासा कर रहा है। इसका नाम के एक साइंटिस्ट पर रखा गया है। इसे फ्यूल एफिशिएंट कैसे बनाया जाए उस पर भी नासा ही वर्क कर रहा है। तो फिर जब सब कुछ नासा कर रहा है तो हर जगह पर ईलॉन मस्क का नाम क्यों आ रहा है? क्योंकि ईलॉन मस्क यह अब सिर्फ एक नाम नहीं रहा बल्कि इंटरनेट पर सेवंथ मोस्ट सर्च कीवर्ड बन चुका है। मतलब अगर आप किसी भी आर्टिकल ब्लॉग वीडियो में ईलॉन मस्क ये नाम यूज करोगे तो ज्यादा रीच मिलने के चांसेस हो जाते हैं। सो क्या मैंने भी इसी वजह से ईलॉन मस्क का नाम यूज कर लिया? अब फ्रेंड्स आपने इस वीडियो का टाइटल अगर देखा होगा ऑब्वियसली उसे क्लिक करके ही आप यहां पर आए हो तो इसमें लिखा हुआ है कि ईलॉन मस्क लॉन्च करेगा एक टेलिस्कोप 100 टाइम्स बेटर देन जेडब्ल्यूएसटी और यह सच है यह बात भी सच है कि ईलॉन मस्क अपना खुद का कोई टेलिस्कोप नहीं बनाने वाले बट यह टेलिस्कोप को लॉन्च करने का काम ईलॉन मस्क को ही सौंपा गया है। नासा ने ईलॉन मस्क को यह काम इसीलिए सौंपा है क्योंकि उन्होंने सक्सेसफुली अपने टेस्ला रोडस्टर को स्पेस में लॉन्च किया था। अब उस रोडस्टर का वजन और इस टेलिस्कोप का वजन सेम टू सेम है। प्लस अगर नासा खुद इस टेलिस्कोप को लॉन्च करेगा तो उसे इस लॉन्च का खर्चा कुछ $138000 आएगा। पर मस्क का फेल्कन हैवी तो एक रीयूजेबल प्लस फ्यूल एफिशिएंट रॉकेट है और इसीलिए अगर वो इसे लॉन्च करेगा तो इस लॉन्च के पीछे का खर्चा सिर्फ $24,000 आएगा। यानी लगभग छह गुना कम। और रिसेंटली आप मानोगे नहीं पर यूएस गवर्नमेंट ने मस्क को एक कॉन्ट्रैक्ट दिया है जिसके मुताबिक मस्क यूएस गवर्नमेंट को एक ऐसा जेट बना के देगा जो रशिया यूक्रेन कॉन्फ्लिक्ट को खत्म कर सकता है। सो ईलॉन मस्क को अब अमेरिकन गवर्नमेंट यूटिलाइज कर रही है इनडायरेक्टली रशिया को डराने के लिए। अब इसमें मस्क क्या करता है ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन जब तक ये नया रोमन स्पेस टेलिस्कोप इमेजेस भेजना शुरू करेगा क्या आप लोग तब तक इंतजार कर सकते हो? वेल मुझे पर्सनली तो इंतजार नहीं हो रहा है और क्या लगता है आप लोग को कि क्या यह हमारे वो बड़े से बड़े क्वेश्चन को आंसर करने में मदद कर पाएगा?