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लोग अलोन रहने को कंफ्यूज करते हैं लोनलीनेस से। अ मैन इज लव्ड कंडीशनली। इफ अ मैन अर्न्स मनी, वन इन फाइव मेन कंसिस्टेंटली रिपोर्ट फीलिंग लोनली एवरी वीक, वन डे ऑफ लोनलीनेस इज इक्वल टू 15 सिगरेट्स। मेन हैव नेवर हैड इट एज बैड इन हिस्ट्री एज दे हैव इट नाउ। मैरिजेस फेल होते जा रहे हैं। बाय 2030, 44 परसेंट ऑफ वुमन विल नॉट गेट मैरिड। एंड दे आर सेइंग, “हम एक विला लेंगे और हम ही रहेंगे लाइफ लॉन्ग।” एक्चुअली, हावर्ड का स्टडी निकला था कि व्हाट इज द की टू अ सक्सेसफुल मैरिज? नंबर वन फैक्टर वाज़ फ्रेंडशिप। अगर आप फ्रेंडशिप के बेसिस पे पार्टनर नहीं सिलेक्ट करेंगे, इट्स नॉट गोइंग टू वर्क आउट।
संदीप दास, आई एम बैंगलोर से, एमबीए और एक विजनरी बिजनेस लीडर। उनके बेस्ट सेलिंग बुक्स ने कॉर्पोरेट दुनिया में नए नजरिए से देखना सिखाया है। इस एपिसोड में हमने बात की है बर्न आउट कैसे अवॉइड करें, चाइना हमसे फाइव टाइम ज्यादा प्रोडक्टिव क्यों है, मेन इतने लोनली क्यों होते जा रहे हैं, और आजकल की मैरिजेस लास्ट क्यों नहीं करती हैं।
इंडियन वर्क कल्चर पे व्हाट इज योर ओपिनियन? इंडियंस ऑन एवरेज वर्क 50 आवर्स अ वीक। दैट इज वन ऑफ द हाईएस्ट इन द वर्ल्ड। इंडिया में क्या होता है? इनपुट के बारे में सोचते हैं। आपने कितने घंटे ऑफिस में काम किया? चाइना में आउटपुट के बारे में सोच रहे हैं। तो जब आप बात करते हो बड़े सपनों की, वर्क लाइफ बैलेंस करके अचीव कराया जा सकता है? वर्क लाइफ बैलेंस का रूट कॉज है लैक ऑफ कंट्रोल। आपका बॉस बोल रहा है, “11 से 12 ये मीटिंग कर, 4:00 बजे तक के स्लाइड भेज दे।” आप लाइफ पे कंट्रोल लूज करिए। हावर्ड की स्टडी है। लोग फायर हो जाता है ना, सब डी-मोटिवेटेड रहते हैं, तो कैसे इसको फिक्स करें? किसी की नौकरी परमानेंट नहीं है। कल आप फायर हो सकते हैं। अब आईटी वाले बम्बे के हैं, आप अहमदाबाद के हैं, आप कहीं से भी हैं, और वो इवेंट आएगा, एवरीबडी लूज़ेस देयर जॉब। एक एंप्लॉई अपनी कंपनी में एक ऐसे कन्वर्सेशन ला सकता है वेयर पीपल आर नॉट आस्किंग कि तुमने 70 घंटे काम करे की नहीं है। आगे बढ़ने से पहले इस चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए ताकि हम आपके लिए इसी तरह से और इनसाइटफुल और बेहतर पॉडकास्ट बनाते रहें। एंड इस पूरे शो का ऑडियो एक्सपीरियंस चार प्लेटफॉर्म पे अवेलेबल है जहां पर आप हमें फॉलो कर सकते हैं। एंजॉय द शो।
मुझे बताओ इंडियन वर्क कल्चर पे व्हाट इज योर ओपिनियन? आर यू अवेयर विद ऑल दिस डिबेट, वर्क लाइफ बैलेंस? हमारी जनरेशन सॉफ्ट हो रही है, हार्ड हो रही है, व्हाटएवर। व्हाट इज योर ओपिनियन? इंडियन वर्क कल्चर में थोड़ा बात करते हैं। सो इफ यू लुक एट जो ट्रेडिशनल रिसर्च है, अभी एक वर्ल्ड लेबर ऑर्गेनाइजेशन से रिसर्च आया था कि इंडियन एवरेज वर्क 50 आवर्स अ वीक ऑन एवरेज। दैट इज वन ऑफ द हाईएस्ट इन द वर्ल्ड। अगर आप हिस्ट्री देखें ऑफ टॉक्सिक कल्चर्स, टॉक्सिक वर्क कल्चर्स, उसमें तीन कंट्रीज टिपिकली आती हैं: इंडिया, चाइना, साउथ कोरिया। इसके मल्टीपल रीज़न्स हैं। तो पहला सवाल है कि इज़ वर्क कल्चर इन इंडिया टॉक्सिक? द आंसर इज़ यस। देयर इज़ नो डाउट, द आंसर इज़ यस। और इसके मल्टीपल रीज़न्स हैं। एक है कि एज़ अ सोसाइटी हम लोग वैसे ही हैं। सोचिए जब आप बचपन में एग्ज़ाम लिखते थे, हम लास्ट मिनट तक लगे हुए हैं, लगे हुए हैं, एक मिनट पहले। तो वो जो पूरा एटीट्यूड है, अभी मार्केट में आ गया है। एंड दैट इज़ हाउ वी रन आवर बिज़नेस: कि आखिरी मोमेंट तक, आखिरी मोमेंट तक करते रहो, करते रहो, एंड तक करते रहो। बट इंडिया और चाइना में एक डिफरेंस है। फॉर एग्ज़ांपल, अगर आप प्रोडक्टिविटी देखेंगे, कहा जाता है कि चाइना की प्रोडक्टिविटी फाइव टाइम्स मोर देन इंडिया है। सिंपल नंबर्स हैं। इंडिया की जीडीपी 4 ट्रिलियन डॉलर है, चाइना की जीडीपी रफ 18 टू 20 ट्रिलियन डॉलर्स है। दोनों की पॉपुलेशन बराबर की है। तो अगर आप जीडीपी पर परसेंट, जीडीपी पर परसेंट देखेंगे, फ़ाइव एक्स का फैक्टर है, रफ़ली वही मैथ्स है। नाउ द क्वेश्चन इज़, ये क्यों है? दोनों के कल्चर तो… चाइना में एक टर्म है, व्हिच इज़ कॉल्ड 996। अब सुबह 9:00 से रात के 9:00 बजे काम कीजिए, 6 दिन तक। तो उनके भी वर्क आवर्स खराब हैं, हमारे भी वर्क आवर्स खराब हैं। तो ये प्रोडक्टिविटी गैप क्यों हो रहा है? हम अगर इतना मेहनत कर रहे हैं, तो प्रोडक्टिविटी हो क्यों नहीं रही है? इसके मल्टीपल रीज़न्स हैं। एक है कि इंफ्रास्ट्रक्चर। मैं बैंगलोर से आता हूं, हम वहां पे पॉइंट ए टू पॉइंट बी, जितने भी किलोमीटर हों, एक घंटा लगता है। हम तो हर हफ्ते में… एनी बैंगलोर पर्सन स्पेंड्स 10 आवर्स ऑन द रोड। उसके बाद वो थका हुआ रहता है, सो जाता है। तो वैसे ही प्रोडक्टिविटी कम है हमारी। द सेकंड बिगर प्रॉब्लम इज़ माइंडसेट। इंडियन वर्कर जो इतना काम कर रहा है, प्रोडक्टिव क्यों नहीं है? इट इज़ द माइंडसेट। आई विल गिव यू एन एग्ज़ांपल। इंडिया में क्या होता है? हम लोग इनपुट के बारे में सोचते हैं, टिपिकली फेस टाइम। आपने कितने घंटे ऑफिस में काम किए? हम चाइना में… आजकल लोग आउटपुट के बारे में सोच रहे हैं। मैं एक आपको एग्ज़ांपल दूंगा। लास्ट ईयर स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने एक रिसर्च किया था एआई के ऊपर कि कौन सी कंट्री एआई में कितनी आगे है। हम… यूएस वाज़ वन, चाइना वाज़ टू, इंडिया वाज़ फोर। तो उन्होंने 40 पैरामीटर्स देखे। एक पैरामीटर उसमें था कि कितने मशीन लैंग्वेज मॉडल्स उस कंट्री से आए हैं। हम… यूएस का नंबर था 61, चाइना का नंबर था 15, इंडिया का ज़ीरो। ओके? जब ये रिसर्च निकला, तो चाइना में पूरा कन्वर्सेशन हो गया, “अरे, यूएस 61 पे है, अगले साल 70 मशीन लैंग्वेज मॉडल्स पे चला जाएगा। हम 15 मॉडल्स से 70 मॉडल्स एक साल में कैसे निकाले?” तो पूरा कन्वर्सेशन हो रहा है। अकादेमिशियन आए, गवर्नमेंट का कोई आया, इंडस्ट्रियलिस्ट आया, स्किल्ड आए, इंडि… तो उधर वो लोग 70 मॉडल्स की बात कर रहे हैं, हम लोग इंडिया में 70 घंटे कैसे निकाले वर्कफोर्स से, वो बात कर रहे हैं। सो दैट इज़ द डिफरेंस। और ऐसा नहीं है इंडिया में टैलेंट कम है। यही आईटी इंजीनियर यूएस में जाके सीईओ बनता है, यही आईटी इंजीनियर यूएस में जाके माइक्रोसॉफ्ट का सीईओ बनता है। टैलेंट का कोई प्रॉब्लम नहीं है, माइंडसेट का प्रॉब्लम है। हम लोग पूरा फेस टाइम के बेसिस पर चलते हैं, वो लोग आउटकम के बेसिस पर चलते हैं। यही इंडियन कल्चर मूव नहीं कर पा रही है। तो ये प्रॉब्लम कहां पर है? दिस इज़ एंप्लॉई प्रॉब्लम, एंप्लॉयर प्रॉब्लम, गवर्नमेंट प्रॉब्लम? कौन प्रॉब्लम है? माइंडसेट कैसे नहीं आ रहा है? एक मैं कहूंगा कि थोड़ा बहुत इंफ्रास्ट्रक्चर का तो प्रॉब्लम है ही, जो मैंने कहा कि ट्रैवल इतना ज्यादा रहता है। प्राइमरी लीडर्स का प्रॉब्लम है। प्राइमरी लीडर्स का प्रॉब्लम। इफ यू सी द हिस्ट्री ऑफ इंडियन बिज़नेस, हमने प्रीमियम, वर्ल्ड-बीटिंग ब्रांड्स नहीं बनाए, बहुत कम बनाए हैं। जैसे आप चाइना में देखिए, अभी सोशल मीडिया में हैज़ बेटर मोबाइल फ़ोन्स देन Apple, मेनी पीपल बिलीव, बिकॉज़ दे आर फ़ोल्डेबल, हाई-टेक, एट लीस्ट… या… बट नॉट इवन क्लोज़, नॉट रेवेन्यू वाइज़, बट यूनिट वाइज़ एंड फ़ीचर वाइज़, दे आर कमिंग देयर। सो अलीबाबा इज़ ऑलरेडी वन ऑफ द वर्ल्ड-बीटिंग प्लेटफ़ॉर्म्स। शीन की बात करें, फ़ास्ट फ़ैशन में, दे आर गोइंग एंड डोमिनेटिंग इन द यूएस। इफ यू लुक एट व्हाट… चैट… दुनिया का बेस्ट सुपर ऐप है। तो चाइना से जो कंपनीज़ बन रही हैं, दे आर कमिंग, गोइंग टू द यूएस, डोमिनेटिंग देयर… इट अक्रॉस द सेगमेंट्स। इंडिया का जो हिस्ट्री ऑफ़ इंडियन बिज़नेस, अगर आप देखेंगे, टिपिकली वी हैव हैड अ ट्रेडर माइंडसेट। हम यहां पे बहुत अच्छी टैलेंट है, बहुत कम पैसे में मिलती है, उसको हम बाहर जाके थोड़ा बहुत सर्विस कर देते हैं। सो वी डोंट हैव वर्ल्ड-बीटिंग ब्रांड्स दैट ऑपरेट इन द प्रीमियम सेगमेंट। वी डोंट हैव इट एज़ अ कंट्री। दैट इज़ वन ऑफ़ द प्रॉब्लम्स। हमारे कितने वर्ल्ड-बीटिंग ब्रांड्स हैं? बहुत कम हैं। कौन से सेक्टर्स में हम रियली वर्ल्ड-बीटिंग हैं? द ओनली वन दैट कम्स टू माय माइंड इज़ द होटल इंडस्ट्री, द ताज एंड द ओबेरॉय ग्रुप विल मैच एनी फ़ाइव-स्टार होटल इन द वेस्ट। बट अदर देन दैट, बाकी हमारी नहीं है हमारी। तो दैट इज़ वेयर द प्रॉब्लम इज़ कि हमें सोचना पड़ेगा कि कल… 1980 में रियली सिमिलर थे इन टर्म्स ऑफ़ साइज़, बट दे टुक ऑफ, एंड वी हैवेंट मैनेज्ड टू टेक ऑफ एज़ मच। आई हैव अनदर प्रॉब्लम कि आप बोल रहे हो कि अगर मैंने माइंडसेट बना लिया कि ओके, हम वर्ल्ड-बीटिंग या वर्ल्ड लेवल, वर्ल्ड लीडिंग प्रोडक्ट कैसे बना लें, राइट? अब ये कन्वर्सेशन कैसे चेंज करेंगे? और ये एक लीडर या एक एंप्लॉई अपनी कंपनी में कैसे ला सकता है? कैसे कन्वर्सेशन ला सकता है वेयर पीपल आर नॉट आस्किंग कि तुमने 70 घंटे काम करे कि नहीं करे? वो वहां से जा रहे हैं कि आउटपुट क्या है, रिजल्ट क्या है? ये कैसे कन्वर्सेशन हो रही है कि तुमने आज जो काम किया है, वो काम इज़ बीटिंग नॉट ओनली लोकल कॉम्पिटिशन बट अ वर्ल्ड कॉम्पिटिशन? दैट्स व्हाट आई थिंक व्हाट यू मेंट, राइट? चाइना यही करने की कोशिश कर रहा है कि हम 15 से… 15 में 70 कैसे हैं? हमें तो उस पे बात करनी है। मतलब ही नहीं है हम कहां हैं। हमें चाहिए कि अगले साल 70 पे कैसे पहुंचे, राइट? तो अगर इंडिया हम ज़ीरो पे हैं, तो ज़ीरो पे हम ये बात ही नहीं करें कि ज़ीरो से वन कैसे? हम ये बात करें 70 कैसे जाए? तो ये कन्वर्सेशन स्टार्ट कैसे होगी? हू डज़ दिस? द एंप्लॉई कैन नॉट डू इट। एंप्लॉई कैन नॉट डू इट। द शॉर्ट आंसर इज़: एंप्लॉई की नियत जितनी भी अच्छी हो, जितना भी टैलेंटेड हो, वो कर नहीं सकता। ये कन्वर्सेशन लीडरशिप से ही शुरू होता है। क्योंकि ये समझना पड़ेगा… क्यों लीडरशिप से शुरू होता है? अगर आपको ये हाई-एंड मॉडल्स बनाने हैं या हाई-एंड प्रोडक्ट्स बनाने हैं, देयर इज़ एन एलिमेंट ऑफ़ रिस्क इनवॉल्व्ड। रिस्क पे पहले शॉर्ट में किसी का सही होता नहीं है। तो आपको बजेट्स एलोकेट करने पड़ेंगे, आपको सेपरेट टीम्स काउट करनी पड़ेंगी। 2 साल तक आपको सिर्फ़ फेलियर मिलेगा, उसके बाद शायद थोड़ा सक्सेस मिलेगा। यू नीड अ लॉट ऑफ़ करेज टू से, “मैं कंटीन्यूअसली बैक करता रहूंगा,” जब आपके पास इतना सिंपल अल्टरनेटिव है कि यहां पे चीप क्वालिटी लेबर है, उसको हायर वेज में बेच दो। तो व्हाई विल यू डू ऑल ऑफ़ दिस? तो ये लीडरशिप का माइंडसेट है कि अगला खा जाता है। बहुत सारे लीडर्स के बारे में उल्टा सोचा जाता है कि ये तो फैक्ट्री जैसा आउटपुट चाहते हैं, फैक्ट्री जैसे करा रहे हैं। ये 80 घंटे, 70 घंटे काम कराओ और सिर्फ़ रगड़ना चाहते हैं। इनको क्या पता? टॉक्सिक बना रखा है, राइट? टॉक्सिक कल्चर। तो जब आप बात करते हो बड़े सपनों की, डू यू थिंक कि ये वर्क लाइफ बैलेंस की जो कन्वर्सेशन है, वर्क लाइफ बैलेंस करके अचीव कराया जा सकता है? वर्ल्ड लेवल का, वर्ल्ड लेवल के अचीवमेंट्स मिल सकते हैं वर्क लाइफ बैलेंस वालों को? अगर आपका सवाल है कि अगर मैं इंडिया में हूं, आई वांट वर्क लाइफ बैलेंस, कैन आई बिकम सक्सेसफुल एट द ग्लोबल स्टेज? अगर वो आपका सवाल है, आंसर इज़ यस। आंसर इज़ यस। आंसर इज़ यस। तो अगर आप वर्क लाइफ बैलेंस का जो रिसर्च है, इस पे देखेंगे, पीपल डू नॉट हेट द लॉन्ग आवर्स। पर से समवन लाइक यू… आप इतने घंटे काम करते हैं, यू डोंट हेट योर जॉब, यू लव योर जॉब। वर्क लाइफ बैलेंस का नंबर वन सोर्स, जो रूट कॉज है, इज़ लैक ऑफ़ कंट्रोल। लैक ऑफ़ कंट्रोल का मतलब, आपका दिन का एजेंडा कोई और चला रहा है। आपका बॉस बोल रहा है, “11 से 12 ये मीटिंग कर, 4:00 बजे तक ये स्लाइड भेज दे, फ्राइडे शाम को ये कर देना।” आप लाइफ पे कंट्रोल लूज़ करें। ये हावर्ड की स्टडी है। ये हावर्ड की स्टडी है। तो आप… व्हेन यू स्टार्ट लूज़िंग कंट्रोल, इज़ व्हेन यू हैव अ प्रॉब्लम विद वर्क लाइफ बैलेंस। अमिताभ बच्चन इस उम्र में… अमिताभ बच्चन इस उम्र में इतना काम करते हैं, क्लियर? उनके पास वर्क लाइफ बैलेंस नहीं है। ही इज़ 80 प्लस, ही इज़ नॉट कंप्लेनिंग बिकॉज़ ही हैज़ कंट्रोल, एंड ही लव्स व्हाट ही इज़ डूइंग। द ट्रिक टू वर्क लाइफ बैलेंस इज़ ओनली कंट्रोल ओवर योर लाइफ़। हावर्ड स्टडी। क्योंकि नंबर ऑफ़ आवर्स आप कम नहीं कर सकते। एंड सम पीपल लाइक टू वर्क… यू लव योर जॉब, यू लव टू वर्क। सो द क्वेश्चन इज़, हाउ डू यू बिल्ड कंट्रोल? क्योंकि कंट्रोल इज़ एवरीथिंग। अगर आपको लगा कि मुझे अपने पूरे हफ्ते के एजेंडा पे कंट्रोल है, मुझे 10 चीज़ें करनी हैं इस हफ्ते में, तीन क्लाइंट मीटिंग, तीन पावर पॉइंट्स या चार… ये इस हफ्ते पे मेरा कंट्रोल है। मैं डिसाइड करूंगा मंडे को क्या करना है, ट्यूज़डे को क्या करना है। वर्क लाइफ बैलेंस आपका बन जाएगा। क्योंकि फॉर एग्ज़ांपल, वेडनसडे शाम को आपको डिनर पे जाना है, आप सोचेंगे, “कोई बात नहीं, वेडनसडे शाम को मैं चला जाता हूं, थर्सडे में एक घंटा पहले आके कर लूंगा।” मगर जब आपकी ज़िंदगी में कंट्रोल नहीं है, देन योर बॉस विल से… “नहीं, बॉस, वेडनसडे रात के 10 बजे हम ये कॉल करेंगे।” दैट इज़ व्हेन द स्ट्रेस कम्स इन। वर्क लाइफ बैलेंस इज़ ओनली अबाउट कंट्रोल। सो द क्वेश्चन इज़, हाउ डू यू गेट कंट्रोल? सो इंटरेस्टिंग! दिस इज़ सो… वाओ! दिस इज़ अ हावर्ड स्टडी। इट केम डाउन टू कंट्रोल। इट्स नॉट अबाउट आवर्स। पीपल को लगता है 70 घंटे… 70 घंटे में कोई प्रॉब्लम नहीं है। बहुत लोग 70 घंटे काम करते हैं। विराट कोहली 70 घंटे बैटिंग करता होगा, बट ही डज़ंट कंप्लेन अबाउट वर्क लाइफ बैलेंस। कंट्रोल इज़ द ओनली थिंग। इट मेक्स सो मच सेंस। शिट! मैंने इस बारे में कभी इस सेंस में सोचा नहीं। आई लाइक इट। एक ह्यूमन ट्रुथ है। वी ऑल लव टू हैव कंट्रोल। ये ह्यूमन ट्रुथ है। आई डोंट वांट टू गिव माय कंट्रोल टू योर लाइफ़। तो आई वांट टू हैव कंट्रोल। नेगोशिएशन में एक थ्योरी है, एंड स्लाइटली डायवर्टिंग, बट इट्स वेरी इंटरेस्टिंग कि हाउ डू यू मेक द अदर पर्सन फील इन कंट्रोल, बट एक्चुअली आप चला रहे हो? शिप… इट्स वेरी इंटरेस्टिंग थ्योरी। तो फॉर एग्ज़ांपल, यू वॉक इनटू अ रूम, आई विल आस्क यू अ सिंपल थिंग लाइक, “राज, ये एसी का टेंपरेचर कितने पे सेट करना है? प्लीज़ सेट इट।” आई एम गिविंग यू अ सेंस ऑफ़ कंट्रोल। द सेकंड ह्यूमन थ्योरी दैट इज़ एट प्ले इज़ कॉल्ड रेसिप्रोसिटी। मतलब, मैं अगर आपके लिए कुछ अच्छा करूंगा, आप मेरे लिए कुछ अच्छा करेंगे। मैंने आपको एसी का टेंपरेचर दे दिया, मैंने आपको कंट्रोल दे दिया, मैंने आपको कुछ अच्छा कराया। इन द नेक्स्ट 15 मिनट्स, आप एक कंसेशन मुझे देंगे। हम… दिस इज़ हाउ इट प्लेज़ आउट इन नेगोशिएशन। क्योंकि ये पूरा सबकॉन्शियस माइंड के बायस चल रहे हैं हम। एंड दैट इज़ हाउ यू सी कंट्रोल वर्सेस रेसिप्रोसिटी प्ले। इसी की एक एड-ऑन थ्योरी बताता हूं। मैंने… मैं पावर के बारे में पढ़ रहा था, मुझे बहुत अच्छा लगता है पावर डायनामिक्स के बारे में पढ़ना। सो पावर डायनामिक्स में एक थ्योरी है, उसको बोलते हैं कि मेक समवन द मास्टर। या तो… अगर आप चाहते हो कि किसी इंसान को… वो बहुत पावरफुल इंसान है या वो ऐसा इंसान है जिससे आपको कुछ काम कराना है, और उसको आप चाहते हो कि उसको लगे कि आप बहुत अच्छे इंसान हो, तो उसके हाथ में पावर देते जाओ। क्योंकि फिर वो कुछ एक्स्ट्रा कर जाएगा जो आपने सोचा भी नहीं था। सो लिटिल थिंग्स… जैसे आपने एसी का कंट्रोल दिया, उसके हाथ में पावर दे दिया। इन फैक्ट, छोटी-छोटी चीज़… मतलब आप दोनों अगर सेम लेवल के भी हो, दोस्त भी हो, उससे पूछ लिया कि “मैं बैठ जाऊं?” या… बहुत छोटी चीज़। दोस्तों से पूछना… मतलब सेम लेवल वालों से नहीं पूछना, बट यू डिड इट। थर्ड… उसके बैठने के बाद ही आप बैठोगे। तो ये बहुत छोटा-छोटा… हर चीज़ में… “आपको पानी कौन सा चाहिए? आप बताओ। आप बताओ।” हर जगह यू आर प्राइमिंग देम कि मैं हर चीज़ आपसे ही करता हूं। एंड देन जो उस नेगोशिएशन की पार्ट की कन्वर्सेशन नहीं है, लाइफ़ की कोई और दूसरी कन्वर्सेशन है, उसमें उनकी एडवाइस ले लो, और कन्वर्सेशन को ले जाओ ताकि उसको लगे कि “यार, मैं इसके ऊपर… या ये मेरी एडवाइस सीरियसली सुन रहा है, और मेरा कंट्रोल है, मेरी एडवाइस की वैल्यू है, मेरी वैल्यू करी गई है।” तो आपने सब किसी और को मास्टर बना दिया। सामने वाले को लग रहा है कि वो आपकी लाइफ़ का मास्टर है। एंड देन यू गेट योर वर्क डन, जो आपको करवाना है। क्योंकि उसमें भी उसके चांसेस ऑफ़ सेइंग यस गेट्स हायर, एब्सोल्यूटली। तो पावर डायनामिक्स में भी वो है। यू डू दिस, इट्स… तो इसमें एक यंग एंप्लॉई था, आई थिंक इंश्योरेंस एजेंट, समवन… उसकी स्टोरी थी जहां पे वो… उसके सीईओ से उसको कुछ काम करवाना था। इट वाज़ अबाउट प्रमोशन और समथिंग, आई डोंट नो क्या स्टोरी थी। जीएम का कार सेलर था, इंश्योरेंस… उसकी स्टोरी थी। और उसको बता रहा था पावर डायनामिक्स कैसे वर्क आउट किया। तो उसको प्रमोशन कराना था, तो उसने सीईओ के साथ ऑफर किया उसको कि “मैं आपको पूरे… आप ट्रिप पे जा रहे हो, मैं पूरे दिन आपका असिस्ट कर देता हूं।” एंड पूरे दिन उसने हर जगह सिर्फ़ सीईओ की परमिशन ली। सो ही ग्रू… “आपको नहीं लगता कि हमें पेट्रोल भरवा लेना चाहिए? अच्छा, मैं भर दूं, मैं कर दूं।” तो एक-एक छोटी-छोटी-छोटी-छोटी चीज़ कर रहा था वेयर ही प्लेड आउट वेल। एंड लास्ट में जब वो नेक्स्ट… मतलब वो घर गए, तो घर जाने से पहले उसको… तो उसने बोला कि “आपको नहीं लगता कि जो एंप्लॉयीज़ बहुत ज्यादा काम करते हैं, जो करते हैं, जो आपके… सही हैं, उनको आपको रिवॉर्ड करना चाहिए?” छोड़ दिया। फुल डे वो कंट्रोल में था। नेक्स्ट डे सीईओ ने आगे बढ़ के उसको बोला कि “यार, मैं तीन-चार लोगों का तो प्रमोशन कर रहा हूं, बट तेरा भी कर रहा हूं।” नाउ, इफ द सीईओज़ आर लिसनिंग टू दिस पॉडकास्ट, दे विल नो नेक्स्ट टाइम क्या हो रहा है। जस्ट सी… अब आज के जमाने में वर्क करती है कि नहीं करती है, आई डोंट नो। बट इयर्स अगो, जब मीडिया का इन्फ़्लक्स इतना कम था, और ये कन्वर्सेशन नहीं थी, जिसने भी इस आईडिया के साथ सोचा, दिस मस्ट बी समथिंग गुड। आज परमिशन मार्केटिंग इतनी काम नहीं करती है बिकॉज़ नाउ पीपल नो। या… सो दिस वाज़ अ पावर डायनामिक्स। हां, अब मैं को बता रहे थे कि कंट्रोल… लैक ऑफ़ कंट्रोल की वजह से लोगों को वर्क लाइफ बैलेंस इशू… इट्स ओनली अबाउट लैक ऑफ़ कंट्रोल। तो द क्वेश्चन इज़, आप कंट्रोल लाइफ़ में कैसे ला सकते हैं? और इंडिया में एक्चुअली द ओनली आंसर इज़: आपको वैसे बॉसेज़ मिलने चाहिए हू बिलीव इन द सेम कॉन्सेप्ट। नाउ द थिंग इज़, कभी-कभी होता है आपको अच्छे बॉसेज़ मिल जाते हैं। ऐसा नहीं है। तो आपका एक जो मैनेजर है, बहुत अच्छा है, बट क्या गारंटी है जो उसके ऊपर चार-पांच लोग हैं, वो सेम फ़िलॉसफ़ी फ़ॉलो कर रहे हैं? सो दैट इज़ वेयर द वर्क लाइफ़ बैलेंस प्रॉब्लम स्टार्ट्स। ऐसा नहीं है कि ये जो एक मिसकंसेप्शन है कि जेन जेड वर्कर्स काम नहीं करना चाहते, ऐसा नहीं है। वो काम नहीं करना चाहते… बहुत मेहनती भी लोग हैं। प्रॉब्लम है आप उनकी ज़िंदगी को कंट्रोल करेंगे, तो फिर प्रोटेस्ट आने लगेंगे। आप उनको बोलिए, “आप इतना कीजिए, पाँच दिन में कर दीजिए, आप अपने हिसाब से कर दीजिए। बहुत बढ़िया काम मिलेगा आपको।” गिव देम कंट्रोल। दैट इज़ द रूट कॉज ऑफ़ वर्क लाइफ़ बैलेंस। आपने एक स्टेटमेंट यूज़ किया था कि ट्रेडिशनल लीडर्स… बीच में… क्योंकि ट्रेडिशनल लीडर्स एक तरीके से सोचते हैं कि इतने घंटे काम करने… बात… एक्चुअली ट्रेडिशनल लीडर की नहीं है, इवन जो लोग सबसे बड़े इंस्टिट्यूट से आते हैं, हम उनमें भी थोड़े प्रैक्टिसेज़ गलत हैं। आई विल गिव यू एन एग्ज़ांपल फ्रॉम माय ओन लाइफ़। 2011… आई वाज़ एन एनालिस्ट इन कंसल्टिंग। हमारे लॉन्ग आवर्स होते थे। तो एक… आई वाज़ एन एनालिस्ट, माय फ़्रेंड वाज़ एन एनालिस्ट, और एक प्रिंसिपल आया था, था… प्रिंसिपल, स्लाइटली हायर अप इन अ कंसल्टिंग फ़र्म। तो एक दिन हमने काम खत्म कर दिया, थर्सडे को साढ़े सात बजे तक सारा काम खत्म हो गया। तो हमने बोला कि “जा रहे हैं।” तो उसने बोला, “नहीं-नहीं-नहीं, जा सकते नहीं।” फ़ालतू का रिवर्क कराने लग गया कि “ये चेंज कर दो, फ़ॉर्मेट चेंज कर दो, पेज नंबर चेंज कर दो, कलर चेंज कर दो,” और हमें दो बजे तक बिठा के रखा। अगले दो-तीन दिन तक यही फ़ॉर्मेट चलता रहा। ही कम्स फ्रॉम वन ऑफ़ इंडियाज़ बेस्ट बिज़नेस स्कूल्स। दिस पर्सन… तीन दिन के बाद हमें लगा, “अरे, इसको काम से मतलब नहीं है, इसको हमें दो बजे तक ऑफ़िस में बिठाना है।” तो हम दोनों ने पूरा अपना मोड्स ऑफ़ ऑपरेशन चेंज कर दिया। हम सुबह 9:30 बजे आते थे, हम काम नहीं शुरू करते थे, न्यूज़पेपर पढ़ते थे, ऑनलाइन बैंकिंग करते थे, लोगों से बात करते थे। शाम के पाँच बजे हम लोग काम शुरू करते थे, 12-1 बजे तक चलता था, रात को ईमेल भेज के चले आते थे। यूज़्ड टू बी वेरी हैप्पी। मेरा दोस्त मेरे से स्मार्टर निकला। मेरा दोस्त वाज़ इवन स्मार्टर। वो फ़्राइडे को अपना काम खत्म किया, गोवा चला गया पार्टी करने के लिए। सैटरडे रात को शेड्यूल्ड सेंड… एक फ़ीचर होता है जब आप ईमेल में भेज सकते हो… सैटरडे रात को वो शेड्यूल्ड सेंड फ़ीचर यूज़ किया, आधा काम फ़्राइडे का सैटरडे रात को आया, दो बजे जब वो गोवा में पार्टी कर रहा है। और बाकी आधा काम जो फ़्राइडे का था, संडे शेड्यूल्ड सेंड किया, संडे रात को आया। मंडे वो सुबह ऑफ़िस में आता है, आइज़ आर रेड क्योंकि वो दो रात गोवा में सोया नहीं है। प्रिंसिपल देख के उसको खुश… “तूने पूरा वीकेंड काम किया? वेरी गुड।” उसको एक अबव एंड बियॉन्ड अवार्ड मिला। तो… तो ये हम जो समझते हैं कि ये ट्रेडिशनल लीडर्स का प्रॉब्लम है… ट्रेडिशनल लीडर्स का प्रॉब्लम है, बट ये जो कंटेंपरेरी इंस्टिट्यूट से आते हैं उनका भी ये प्रॉब्लम है। और ये पर्सनली… मेरी लाइफ़ से आपको ये इंसिडेंट बता रहा हूं। रियली… वाओ! मैंने कभी कॉर्पोरेट में काम नहीं किया, तो मुझे पता नहीं होगा ये। दिस इज़… दिस इज़ बिज़ारे। दिस इज़ बिज़ारे। दिस इज़ बिज़ारे। क्या फ़र्क पड़ता है रात को दो बजे आया या सुबह पाँच बजे आया या शाम को? क्योंकि लोगों का पूरा वो फेस टाइम का हमारा कल्चर है। जैसे मैं… आई स्टार्टेड विद फेस टाइम… कितने घंटे तुम दिख रहे हो काम करते हुए? कितने घंटे काम करने वाले हो? अगर आप ऑफ़िस जाएंगे, पूरा दिन बैठेंगे, कुछ काम भी नहीं करेंगे, लोगों को चलेगा कि “अरे, 9:00 बजे आया, 7:00 बजे तक बैठा था, कुछ-कुछ करके चला गया।” बट आप घर पे बैठ के सेम काम तीन घंटे में करोगे, लोगों को प्रॉब्लम होगा। “कितना खराब है! ये क्या बकवास चीज़ है!” दिस नीड्स टू बी चेंज्ड। दिस नीड्स टू बी चेंज्ड। एंड इट हैज़ टू स्टार्ट फ्रॉम द टॉप, लाइक आई सेड। जब
इज अ बिग प्रॉब्लम तो आपको क्या करना चाहिए? फ्यूचर में जब आप कभी भी नेटवर्क में जाएंगे, कोई भी इवेंट में, किसी ने आपको पूछा, “व्हाट डू यू डू?” राज आपको ये नहीं बोलना चाहिए, “आई एम अ डेटा साइंस प्रोफेशनल इन दिस कंपनी।” आपको ये बोलना चाहिए, “आई एम अ डेटा साइंस प्रोफेशनल, आई एम एन एनालिटिक्स प्रोफेशनल, आई एम अ ऑथर, आई एम अ पॉडकास्टर।” इफ यू टॉक अबाउट द फील्ड, वो आपसे कोई ले नहीं सकता। हम कंपनी नेम आपकी चली जा सकती है, बट क्योंकि आप फील्ड में हैं, अगर आप बोलेंगे, “मैं आई हैव वर्क्ड फॉर एट इयर्स इन डेटा साइंस प्रोफेशनल,” वो थोड़ा बहुत कंट्रोल आ जाता है, क्योंकि आपकी आइडेंटिटी इंडस्ट्री से बन रही है जो आपकी कोई ले नहीं सकता।
आप किसी कंपनी में काम कर रहे हो, एक-एक महीना परफॉर्मेंस ठीक नहीं किया, आपको फायर कर दिया गया। हर जगह आपने पूरी आइडेंटिटी बोली है कि आपके पेरेंट्स बोल रहे हैं, “आपका बेटा क्या करता है?” “आपका बेटा इस कंपनी में आईटी इंजीनियर है।” कल वो नौकरी चली गई। पेरेंट्स के दिमाग में वो इमेज बन चुका है, रिलेटिव्स के दिमाग में वो इमेज बन चुका है। तो वो पूरा एक आइडेंटिटी क्राइसिस सब में आ गया। दैट इज दैट इज आल्सो एन एलिमेंट ऑफ डी-इंडिविजुअलाइजेशन, च यू स्पोक अबाउट। इंटरेस्टिंग। तो लोग जब फायर हो जाते हैं, तब क्या करना चाहिए? उन लोगों को हमेशा बोलना चाहिए कि, “आई वर्क फॉर इंडस्ट्री।” मैं एक डेटा साइंस का प्रोफेशनल हूं, मैं एक साइंस का प्रोफेशनल हूं। कभी कंपनी अनलेस पूछा जाए, बोलना नहीं चाहिए। सेकंड है, अगर फॉर सम रीजन नौकरी चली जाती है और नौकरी सबकी जाती है, आपको बोलना चाहिए कि, “ईदर मैं कोई आई एम टेकिंग टाइम ऑफ टू डू अ डिग्री।” शायद आपको पढ़ना भी चाहिए। या फिर, “आई एम जस्ट टेकिंग टाइम ऑफ फॉर सब्बैटिकल।” या अगर आपको कोई छोटा जो साइड हसल है आप करना चाहिए, तब आपको बोलना चाहिए। कभी नहीं बोलना चाहिए कि, “मैं घर पर बैठा हुआ हूं।” हम ऐसा कुछ भी नहीं, कभी नहीं बोलना चाहिए, “मैं घर पर बैठा हूं।” बोलना चाहिए, “मैं इधर पढ़ाई कर रहा हूं, छोटा सा बिजनेस कट कर रहा हूं, या फादर के बिजनेस में हेल्प कर रहा हूं, या जस्ट ट्रेवलिंग द वर्ल्ड टू पर्स माय इंटरेस्ट।” बट कुछ तो दिखाना चाहिए आपको।
क्यों? ऐसे देखिए, एस अ रिक्रूटर, आई विल कम फ्रॉम रिक्रूटर पर्सपेक्टिव। आई हैव डन रिक्रूटिंग फॉर 15 इयर्स। एस अ रिक्रूटर, मुझे पता है सबकी नौकरी जाती है, स्पेशली जॉब्स। सबकी नौकरी जाती है। क्वेश्चन में इवेलुएट कर रहा हूं कि, फॉर एग्जांपल, क्रिकेटर। एवरी क्रिकेटर गेट्स ड्रॉप्ड। ड्रॉप होने के बाद आप क्या कर रहे हो? दैट इज ले इनटू द पर्सन कैरेक्टर। तो आप अगर ड्रॉप हो गए, सौरव गांगुली गॉट ड्रॉप्ड इन 2005। आफ्टर दैट, सौरव गांगुली ने नौ महीने प्रैक्टिस की, फिटनेस पर काम किया। ही केप्ट डूइंग समथिंग, समथिंग एंड ही केम बैक इनटू द इंडियन टीम। तो वो देखना कि आपका जो पाथ है बहुत इंपोर्टेंट है, क्योंकि मुझे पता है सब फायर होंगे, बट उस फायर होने के बाद आप घर पर बैठ के रो रहे हो या कुछ एजुकेशन, स्किल बढ़ा रहे हो, दुनिया घूम रहे हो, छोटा सा बिजनेस ट्राई कर रहे हो, वो देखना बहुत जरूरी है, क्योंकि इसका मतलब इसमें वो पर्सिस्टेंस है, एंड द कमबैक इज अ मैटर ऑफ टाइम। मुझे पता है छह महीने में वापस ये कमबैक कर लेगा। सो दैट इज व्हाई इट इज वेरी इंपोर्टेंट, नेवर टू सिट आइडल। हां, पर सो आई गेट इट। एक चीज है कि आइडल बैठना नहीं चाहिए, तुम्हें करते रहना चाहिए। एक चीज है झूठ बोलना कि मैं कुछ कर रहा हूं, हां, जस्ट टू इंप्रूव माय चांसेस कि इस कंपनी में मिल जाए, क्योंकि रिक्रूटर को ये आंसर अच्छा लगेगा, तो ये तो गलत है। ये गलत है। बट अभी आपको समझना चाहिए, रिक्रूटर अगर 15 साल से रिक्रूटिंग कर रहा है, वो एक वर्ड में समझ जाएगा तुम कितना जानते हो और कितना झूठ है। वो दो क्रॉस क्वेश्चन करेगा, आंसर नहीं कर पाओगे, हम और वो लोगों को समझ में आ जाता है। तो फिर तो फंस गए। अगर फायर करने के लोग बोले, फिर तो फंस गए। अगर आप झूठ बोल रहे हो तो फंस गए।
देखिए, एक नोशन है कि अगर आप फायर हो गए, छोटी सी दुकान है, बट आप उस दुकान में काम कर रहे हो, जो लोग शायद छोटा काम मानते हैं, कोई प्रॉब्लम नहीं है। उस छोटे काम में आप कीजिए, कुछ नया कीजिए। रिक्रूटर को दिखाइए। रिक्रूटर विल अप्रिशिएट इट कि आपने दुकान में गए, आप कैशियर बने, उसमें आपने जस्ट क्यूआर कोड लगा दिया, इतना ही किया, बट उसके लिए इतना एफिशिएंसी आ गया। द रिक्रूटर विल अप्रिशिएट इट। बट अगर आपने बोला कि मैंने अपने फ्रेंड के साथ स्टार्टअप किया, हमने ये किया, वो किया और पूरा झूठ है, एक मिनट में रिक्रूटर पकड़ लेगा हम। एंड तो साइज ऑफ द वर्क डज़ नॉट मैटर। वर्क मैटर्स। वर्क मैटर्स। पर उस टाइम पे जब लोग फायर हो जाते हैं ना, तब डी-मोटिवेटेड रहते हैं। दो जनस होते हैं, मैंने देखा लो। एक तो होता है कि ठीक है, दूसरी जगह मिल जाएगा, दैट्स इट। बाकी दो होते हैं, एक होता है कि जो बोलता है कि शौक की नौकरी चली गई, अब मैं बर्बाद हो गया और डी-मोटिवेट हो जाता है इंसान। उसको समझ नहीं आता करना क्या है। वो डिस्पेयर है। डर, डर, डर, डर, डर, और उस डर की जगह में जो उसका एक्चुअल स्किल, इंटेलिजेंस होता है वो भी काम नहीं कर रहा था। डर टेक ओवर कर देता है। दूसरे टाइप के लोग होते हैं जो रिवेंज में होते हैं, “मैं इस कंपनी को बताऊंगा इसने मेरे को कैसे कर दिया। मैं अब लिंकडइन पर लिखूंगा, मैं ये करूंगा, मैं मारूंगा, मैं इनके नाम बदनाम करूंगा।” दोनों जगह नेगेटिव एनर्जी आपको टेक ओवर कर देती है, तो आपका इतना लॉजिकल ब्रेन या सेंस ही नहीं करता कि भाई मैं इस टाइम पर ट्रेवल करूं, मैं छोटा काम करूं, मैं बड़ा काम करूं। सिंपल फिक्स है। तो कैसे इसको फिक्स करें?
सिंपल फिक्स है। देखिए, एक रियलिटी है कि जो भी आपका पॉडकास्ट अभी सुन रहा है, किसी की नौकरी परमानेंट नहीं है। ये आप मान के रखिए, कल आप फायर हो सकते हैं। अब आईटी बॉम्बे के हैं, आई एम अहमदाबाद के हैं, आप कहीं से भी हैं, टुमारो एनीबडी लिसनिंग टू द पॉडकास्ट, यू कैन गेट फायर्ड। नंबर वन, न यू स्टार्ट द ईयर, जैसे हम जनवरी में ये पॉडकास्ट रिकॉर्ड कर रहे हैं, प्लीज आपको एक सवाल खुद से पूछे, अगर इस साल मेरी नौकरी जाती है, मैं अगले छह महीने क्या करूंगा? अभी भी अगर लाइफ में कोई प्रॉब्लम नहीं है, बट खुद से सवाल पूछिए, रात को। अगर ये छह महीने बाद मेरी नौकरी जाएगी, मैं छह महीने के लिए क्या करूंगा? अगर आपके दिमाग में ये आपने सोचा है और हर साल जनवरी में आपको ये सवाल खुद से पूछना चाहिए कि मैं क्या करूंगा? तो जब वो इवेंट आएगा और वो इवेंट आएगा, एवरीबडी लूज़ेज़ द जॉब, तब आपको वो शॉक उतना लगेगा नहीं। तो दूसरा टाइप आपने बोला जी कि, “तू जानता है मैं कौन हूं, मैं ये करूंगा, मैं वो करूंगा।” देयर इज अ रिसर्च दैट सेज़ एंगर इज इम्पोर्टेन्ट फॉर सक्सेस, या एंगर इज इम्पोर्टेन्ट फॉर सक्सेस। आप विराट कोहली इज अ क्लासिकल एग्जांपल। किसी ने जाके विराट कोहली को ऐसे पोक किया, विराट कोहली 100 मारता है। तो एंगर इज इम्पोर्टेन्ट फॉर सक्सेस, बट द थिंग इज आपको वो एंगर सही डायरेक्शन में लेकर जाना चाहिए। अगर आप ग्लास डोर पर जाके कचरा लिखेंगे कोई फायदा नहीं होगा, बट आप सुबह 5:00 बजे उठ के कुछ स्किल सीखेंगे, छह महीने, दैट एंगर विल डिलीवर रिजल्ट्स फॉर यू। तो वो एंगर को चैनलाइज़ करना बहुत जरूरी है।
बहुत लोग ये भी बोलते हैं कि एक हम एक कंपनी में जॉइन करते हैं, हम लोग बहुत एक्साइटेड थे, हमें बहुत काम करना था, बहुत एंबिशियस थे। उसके बाद लेकिन उस कंपनी का स्टैंडर्ड बहुत ऊपर था, तो वी अचीव करने के चक्कर में ना बर्न आउट हो गया। व्हाट डू यू फील बर्न आउट क्यों होता है? आई हैव अ डिफरेंट थ्योरी। आई विल टेल यू। व्हाट डू यू थिंक बर्न आउट क्यों होता है? आई थिंक बर्न आउट इसलिए होता है कि एक तो वो कंट्रोल की बात आती है। दूसरा है, आप अपने काम में वैल्यू नहीं देख रहे। अगर आप जो दिन में आठ-ग्यारह घंटे काम कर रहे हैं, आपको लग रहा है कि वैल्यू है। वैल्यू का मतलब क्या है? फॉर एग्जांपल, एक जर्मनी में, बहुत जर्मनी में मैन्युफैक्चरिंग में लोग बहुत खुश हैं। पीपल हू मेक, बिकॉज़ दे कुड सी द आउटपुट ऑफ देयर प्रोडक्ट। मैंने एक स्क्रू डाला, वो बट उस स्क्रू वेयर डज़ इट फिट इनटू द बिग पिक्चर ऑफ़ आवर प्रोडक्ट? जब वो एम्प्लॉई समझेगा कि मेरा एक ये स्क्रू यहां पे फिट हो रहा है, ऑटोमेटिक वो काम करना लाइन पे आ जाएगा, क्योंकि उसको बिग पिक्चर दिख रहा है। अभी उसको लग रहा है, “यार ये तो मेरे से एक एक्सेल टेबल करा रहा है।” बट अगर कल उसको बोला जाएगा, “तू ये एक्सेल टेबल कर रहा है, इसमें से मैं निकालूंगा कौन सा रीजन में प्रायोरिटी है, उसमें से मैं नया प्रोडक्ट लॉन्च करूंगा, उससे मेरा दो टाइम्स बिजनेस आएगा,” जो फुल पिक्चर उसको समझ में आएगा, फिर उसको लगेगा, “यार मेरे काम से तो बहुत हो रहा है।” हम दैट इज द टेक ऑन हाउ यू शो एन एम्प्लॉई कि आपके कंट्रीब्यूशन से कंपनी को क्या फायदा हो रहा है। दैट इज वन। तो बर्न आउट विल नेवर हैपन टिल द एम्प्लॉई हैज़ कंट्रोल एंड टिल द एम्प्लॉई बिलीव्स हिज़ वर्क इज़ एडिंग वैल्यू। बर्न आउट विल नेवर हैपन। इट मेक्स सेंस। एंड मुझे ये भी लगता है कि बर्न आउट इसलिए नहीं होता कि तुम्हें बहुत काम करना पड़ रहा है या तुम बहुत स्ट्रेस्ड हो। बर्न आउट इसलिए होता है कि तुम्हारी कोई एक इंटरनल वैल्यू या इमोशनल नीड मीट नहीं हो रही है। या लाइक तुम चाहते हो कि तुम्हारी इमोशनल नीड है, मुझे खुश रहना है और तुम्हें वो काम से मिल नहीं रही है। तुम्हारी अगर एक इमोशनल नीड है कि तुम्हें लोग इम्पोर्टेंस दें, वो तुम्हें तुम्हारे काम से मिल नहीं रही है। तुम्हारी अगर एक इम्पोर्टेन्ट नीड है कि मुझे एप्रिसिएशन चाहिए या तुम ऐसा कि मुझे सेफ्टी चाहिए, फैमिली लाइक फील करना है या सिक्योर प्लेस चाहिए। अगर वो एक इमोशनल नीड मीट नहीं हो रही ना, या ग्रोथ किसी के लिए बहुत बड़ी इमोशनल नीड हो सकती है। जब वो इमोशनल नीड मीट नहीं होती, तब बर्न आउट फील होता है। नॉट कि मुझे काम ज्यादा करना पड़ता है। या बहुत लोग बहुत कम काम करते हैं तो भी बर्न आउट फील करते हैं। बहुत लोग बहुत ज्यादा काम करते हैं तो भी बर्न आउट नहीं फील करते हैं, क्योंकि जो उनकी इंटरनल इमोशनल नीड्स हैं वो मीट हो रही हैं।
या हियर अ क्वेश्चन जो मेरे मेरे कोच ने मुझसे पूछा था कि, “लिखो टॉप थ्री वैल्यूज। व्हाट डू यू वांट इन योर लाइफ?” हम राइट, तुम क्या करना चाहते हो? तो मैंने बोला, “मतलब क्या होता है?” नहीं, लाइफ में, फॉरगेट वर्क, तुम सब भूल जाओ। सिर्फ तीन चीज ऐसी लिखो कि जो तुझे बहुत इम्पोर्टेन्ट, तुझे वो चाहिए ही चाहिए, कुछ भी करेगा जिंदगी में, वो तीनों चाहिए, चाहिए, राइट? कुछ भी हो, पैसा, वेल्थ, मतलब वेल्थ है, हेल्थ है, फैमिली है, रिलेशनशिप्स है, ग्रोथ है, एडवेंचर है, इम्पोर्टेंस है, जो भी है, जस्ट राइट इट डाउन। या मैंने वो टॉप थ्री चीजें लिखी। एंड देन ही इज लाइक, “सी अब जो तू काम करता है, उससे ये तीनों आता है कि नहीं आता है?” एंड टू मी इट मेक्स सो मच सेंस। जो मेरी टॉप वन वैल्यू थी, वही मेरे काम से आती है। इसकी वजह से मुझे काम में बर्न आउट फील नहीं होता। हम वर्सेज़ जो दूसरे काम मुझे जबरदस्ती करने पड़ते हैं, व्हाटएवर, लेट्स से हेल्थ, फॉर एग्जांपल, मुझे जिम जाना पड़ता है, मैं आधे घंटे में बोर हो जाता हूं, क्योंकि मेरी वो टॉप थ्री वैल्यूज़ में ही नहीं था। फॉर द लॉंगेस्ट टाइम, जब से अब मेरी वो एक वैल्यू बन गई ना, मैं नंबर टू वैल्यू इज़ हेल्थ। एंड मेरी टॉप थ्री में हेल्थ नंबर टू है, तब से अगर मेरे पास जिम जाने का टाइम नहीं है, मतलब काम करने का टाइम नहीं है, मैं घर में रीज़न ढूंढ लेता हूं कि मैं आधा घंटा कैसे वर्कआउट करूं। एंड इट कम्स नेचुरली। नहीं तो आई हेड गोइंग टू जिम। सो दिस वन इट हैपन्ड ना, सो इट जस्ट चेंज्ड एवरीथिंग फॉर मी। मुझे कोई भी काम करने में अजीब नहीं लगने लगा। एंड इनफैक्ट वो सारे काम जिनसे मुझे ऐसा लगता था, “क्यों कर रहा हूं?” वो सब ड्रॉप हो गए, बिकॉज़ दे वर नॉट कंट्रीब्यूटिंग टू द टॉप थ्री वैल्यूज़।
इंटरेस्टिंग। सो हम लोग बात कर रहे थे इंडिया वर्सेज़ चाइना वर्सेज़ यूएस। इन तीनों कंट्रीज़ में वर्क कल्चर अलग-अलग है। एब्सोल्यूटली। क्या डिफरेंसेज़ हैं? क्यों कोई कंट्री बहुत आगे बढ़ती है, कोई कंट्री बहुत कम रहती है? सब में तीनों जगह व्हाट आई हैव नोटिस कि लोग काम तो बहुत करते हैं, एटलीस्ट जो काम करने वाले हैं वो बहुत काम करते हैं। स्टिल प्रोडक्टिविटी में, वर्क आर्स में, माइंडसेट में सब बहुत डिफरेंस है। सो व्हाट इज़ द डिफरेंस? इज़ इनसे लार्जर कल्चर पे क्या फर्क पड़ता है जिसकी वजह से कंट्री ग्रो होती है या नहीं होती है? मैं अपने एक्सपीरियंस से बोलूंगा, एंड देन आई विल कोट सम रिसर्च जो मैंने यूएस में देखा है कि वो लोग प्रायोरिटाइज़ेशन बहुत अच्छा करते हैं। वो लोग कहेंगे कि, “ये 10 अपॉर्चुनिटी हैं, बट हम ये तीन बड़े अपॉर्चुनिटी में रिसोर्स लगा के काम करेंगे।” तो वो स्केल पे खेलते हैं। इट्स अ वेरी यूएस थिंग। इंडिया में मैंने वो प्रायोरिटाइज़ेशन उतना देखा नहीं। हमारे पास 10 छोटी अपॉर्चुनिटी हैं, हम 10 को चेज करेंगे। तो एज़ अ रिजल्ट क्या होता है? क्योंकि एक कंपनी के पास लिमिटेड लोग हैं या लिमिटेड टाइम है या लिमिटेड पैसा है, तो उस बैटल में 10 में से कुछ भी नहीं होता है कभी-कभी, या फिर एम्प्लॉई बर्न आउट हो जाता है। तो आई थिंक यूएस का एक वो फिलॉसफी है कि ऑपरेट एट स्केल, पिक द टॉप थ्री, रन आफ्टर इट। आई थिंक दैट इज़ अ वेरी यूएस फिनोमेना। वर्क्स वेरी वेल। दैट इज़ वन डिफरेंस। मैंने देखा है फोकस ऑन आउटकम यूएस एंड चाइना में बहुत बहुत है। हमें दुनिया का बेस्ट प्रोडक्ट बनाना है, वो विज़न है, वहीं से बात शुरू होती है। अब उसके लिए को 40 घंटे लगे, 140 घंटे लगे, वो अलग बात है। दैट इज़ द सेकंड नुआंस। एक्चुअली एक लार्जर थ्योरी है ऑन कल्चर एंड हाउ ईच कंट्री वर्क्स वेरी डिफरेंटली। नाउ कल्चर, जैसे यूएस में फिलॉसफी है कि आप मुझे पहले इनसाइट बताइए, प्रोसेस रहने दीजिए। पहले मुझे इनसाइट बताइए। इसको पिरामिड प्रिंसिपल ऑफ़ कम्युनिकेशन कहा जाता है, जो बिज़नेस स्कूल में पढ़ा जाता है। यूएस का कांसेप्ट है। बेसिकली अगर आपने मार्केट रिसर्च किया, तो स्टैंडर्ड वे टू प्रेजेंट रिजल्ट क्या है कि हमने 30 कंज्यूमर से बात की, दो एक्सपर्ट से बात की, 25 दिन का रिसर्च था, इतने पैसे लगे, ये क्वेश्चनर है। एज़ अ रिजल्ट ये पांच इनसाइट निकल के आ रही हैं। ये लॉजिकल फ्लो। यूएस में पूरा फ्लो उल्टा हो जाता है। यस, प्रोसेस वर्सेज़ ठीक है। पांच इनसाइट्स पहले बताओ, काम उस पर करते हैं। सो उन पर जो रिवर्स ऑर्डर हो जाता है ना, इट कम्स बिकॉज़ ऑफ़ देयर लीगल सिस्टम एंड देयर एजुकेशन। देयर एंटायर सिस्टम ऑफ़ एजुकेशन इज़ बेस्ड ऑन एनेक्ट्स, प्रेसीडेंट्स, केस लॉ, एग्जांपल्स। तो इसलिए द इनसाइट कम्स फर्स्ट। अगर आप इंडिया और चाइना देखेंगे, हम लोग प्रोसेस को भी उतना सोचते हैं कि पहले बताओ ये स्टडी किया कैसे, फिर इनसाइट पर आते हैं। सही या गलत नहीं है, ये डिफरेंस है। तो ये एक डिफरेंस होता है कि वहां पर आउटकम फर्स्ट, यहां पर हम लोग प्रोसेस एंड देन आउटकम कहते हैं। दूसरा और आप चीज़ देखेंगे कि लोग नो कैसे बोलते हैं। इन चाइना और कंट्रीज़ लाइक जापान, नो बोलना बहुत मुश्किल है। अगर मैं बॉस हूं और मैं कहता हूं, “राज, विल यू कम एंड वर्क ऑन संडे फॉर मी?” समझ? यू आर पार्ट ऑफ़ माय टीम। इन चाइना, दे विल से, “यस, आई कैन,” बट मेरी बेटी का बर्थडे है और आपकी एक्सपेक्टेशन है कि मैं समझ जाऊंगा कि आप तो यस बोल रहे हो, बट नो है। यूएस में वो बोलेगा, “सॉरी, आई कैन नॉट।” बेटी का बर्थडे है। तो कल्चरल नो का बहुत डिफरेंस होता है। एंड इंडिया में, इंडिया में आई थिंक थोड़ा मिक्स्ड है। इंडिया में भी आई थिंक इज़ वेरी क्लोज़ टू चाइना एंड जापान, बट अ लॉट ऑफ़ बॉसेज़ नो एक्सेप्ट। जैसे जापान में अगर आप बोलेंगे कि मेरी बेटी का बर्थडे, बॉस मान जाएगा। इंडिया में शायद बॉसेज़ मानते नहीं हैं या नो है ही नहीं। नो है ही नहीं, कांसेप्ट नहीं है। सो दैट इज़ अनदर डिफरेंस इन कल्चर दैट कम्स। तीसरा है, सेंस ऑफ़ टाइम। तीसरा है, सेंस ऑफ़ टाइम। जैसे अगर 7:00 ओ क्लॉक को आपको इनवाइट किया गया है, यूएस में 6:58 आपको पहुंच जाना चाहिए, प्राइवेट सेशन हो, पब्लिक सेशन हो, घर पे हो, ऑफिस में हो। अगर दिल्ली में एक शादी हो रही है और 7:00 बजे आपको बुलाया गया है, अगर आप 7:00 बजे पहुंच जाएंगे तो वो इंसल्ट माना जाता है ब्राइड को। अगर दिल्ली में 7:00 बजे शादी हो रही है, तो रात के 12:00 बजे जाइए, वो है लेट। तो इंडिया में जो कंट्रोल ऑफ़ टाइम है और ये सही गलत नहीं है, ये हमारा कल्चर है कि हम 7:00 बजे मतलब, ऑफिस का मीटिंग अगर 11 बजे शुरू हो रहा है, हम 11 बजे नहीं आते। अ लॉट ऑफ़ एशियन कल्चर्स डोंट। यूएस में 11 बजे मतलब 11 बजे मीटिंग शुरू होगी। जर्मनी में 11 बजे मतलब 10:58 को मीटिंग शुरू होगी। तो ये सेंस ऑफ़ टाइम भी बहुत अलग होता है। डिफरेंट कल्चरल नुआंसेज़ हैं कि आप ईमेल्स कैसे लिखते हैं। सो देयर इज़ समथिंग, कांसेप्ट कॉल्ड लो कॉन्टेक्स्ट कंट्री, हाई कॉन्टेक्स्ट कंट्री। जैसे हम अमेरिकन सिस्टम पे आज जा रहे हैं, तो इसका मतलब है आज आपने और मैंने मीटिंग की। मीटिंग के बाद मैं लिखूंगा, “राज, हियर आर द 10 पॉइंट्स वी डिस्कस्ड। इसके बाद आपको ये करना है, मेरे को ये करना है।” ये बहुत नॉर्मल है, क्योंकि उनका लो कॉन्टेक्स्ट सोसाइटी है। अगर आप मार्केट्स लाइक जापान और चाइना में ऑपरेट करेंगे, व्हिच आर हाई कॉन्टेक्स्ट, ईमेल लिखना थोड़ा सा रूड माना जाता है। “राज, आई हैव गिवन यू माय वर्ड। आप कांट्रैक्ट में क्यों लिख रहे हो?” हम। सो हियर आर स्मॉल नुआंसेज़ दैट कम इन डिफरेंट वर्किंग कल्चर्स कि कहां पे ईमेल लिखा जाता है, कैसे नो बोला जाता है, कौन से टाइम पे मीटिंग शुरू होती है।
एक और है कांसेप्ट बिटवीन द वर्किंग कल्चर्स इज़ कांसेप्ट ऑफ़ ट्रस्ट। हम वी हैव बीन टचिंग अपॉन कि ट्रस्ट बहुत जरूरी है। ट्रस्ट से बिज़नेस आता है। यूएस में ट्रस्ट इज़ व्हाट इज़ कॉल्ड हेड लेड ट्रस्ट। मतलब, इफ आई बिलीव यू आर गुड एट योर वर्क, और अगर आप मेरे सोशल सर्कल में नहीं हैं, बट मैं समझता हूं आप अपने काम में गुड हैं, आई विल डू बिज़नेस विद यू। चाइना में समथिंग कॉल्ड हार्ट लेड ट्रस्ट, व्हिच इज़ आल्सो इन इंडिया। और ये कांसेप्ट आता है कॉल्ड गुंज। इसका मतलब ये है कि यू मे बी गुड एट योर वर्क, अगर आप मेरे सोशल सर्कल में नहीं हैं, मैं आपसे बिज़नेस नहीं करूंगा। तो यूएस और चाइना में हार्ट लेड ट्रस्ट है, यूएस में हेड लेड ट्रस्ट। इसका मतलब क्या है? अगर आप बिज़नेस करेंगे चाइना और इंडिया में, हार्ट लेड ट्रस्ट। हार्ट लेड ट्रस्ट है। अगर आप बिज़नेस करेंगे इन इंडिया, चाइना, यूएई, इन तीन मार्केट में, स्पेंड टाइम ऑन डिनर्स, स्पेंड टाइम गेटिंग टू नो देम पर्सनली। ये आपको बिज़नेस में बहुत हेल्प करेगा। आई डिड अ वर्कशॉप इन दुबई, पिछले दिन तीन घंटे मैंने डिनर पे स्पेंड किया, अगले दिन ऑफिस में 15 मिनट में काम खत्म हो गया, बिकॉज़ ये हार्ट लेड ट्रस्ट का मॉडल है। तो द रोल ऑफ़ द डिनर, रोल ऑफ़ द पर्सनल टाइम इज़ वेरी वेरी इम्पोर्टेन्ट इन हाई कॉन्टेक्स्ट कल्चर। यूएस में अगर आप तीन घंटा डिनर पे स्पेंड करें, वो आपको पागल समझेगा। बट ये सब का से ट्रस्ट का डेफिनेशन बहुत अलग है। जैसे आप चाइना में ऑपरेट कर रहे हैं, यूएस में यू कैन डू कोल्ड कॉलिंग, आप लिंकडइन में किसी को लिख सकते हैं, वो रिस्पॉन्ड करेगा शायद। चाइना में नहीं करेगा, क्योंकि आप उसकी सोशल सर्कल में नहीं हैं। तो जब तक उसकी इनर सर्कल से आपको कोई रेफरेंस नहीं दे रहा है, आप उस सर्कल में बिज़नेस नहीं कर सकते। वाओ। सो दैट इज़ हार्ट लेड ट्रस्ट। दिस इज़ हेड लेड ट्रस्ट। एंड दिस इज़ हाउ वर्किंग कल्चर्स डिफर। तो ये काम करना और बढ़ाना और समझना इट्स लाइक वेरी डिफिकल्ट। इंडिया में इज़ मोर लाइक चाइना, राइट? इंडिया इज़ इट डिपेंड्स ऑन सर्टेन एक्सेस पे। हम लोग स्लाइटली लाइक यूएस। जैसे हमें ईमेल लिखने का कल्चर है, हां, कोल्ड ईमेलिंग, कोल्ड कॉलिंग का है, बट ट्रस्ट में हम मोर हार्ट लेड हैं। एक बार आपसे मेरी दोस्ती बन गई, मैं आप ही के साथ बिज़नेस करूंगा।
टेल मी थ्री वेज़ यूएस में ट्रस्ट कैसे बना सकते हैं और इंडिया में कैसे बना सकते हैं? अगर आपको यूएस में ट्रस्ट बनाना है, यू हैव टू प्रूव टू द पर्सन कि मैं अपने काम में 30 मार्क्स खान हूं। यू हैव टू प्रूव टू द पर्सन। तो एक आपको टेस्टिमोनियल्स लगेंगे, क्लाइंट लोगोस लगेंगे। यू नीड टू प्रूव थ्री, यू हैव टू गो मीट देम एंड प्रूव टू देम यू नो योर जॉब। इफ यू कैन प्रूव टू देम यू नो योर जॉब, आपको बिज़नेस मिल जाएगा। हम रेस नहीं आएगा, कुछ नहीं आएगा इक्वेशन में। जेंडर नहीं आएगा, रेस नहीं आएगा। यू प्रूव टू देम यू नो योर जॉब, यू विल गेट इट। इंडिया में इवन इफ यू प्रूव, यू मे नॉट गेट द जॉब। पर्सन हैज़ टू लाइक यू। पर्सन हैज़ टू वांट टू वर्क विद यू। तो एक इमोशनल कनेक्शन इंडिया में ज्यादा चलता है। कैसे किसी के साथ इमोशनल कनेक्शन बना सकते हैं ताकि वो आपसे आप पे ट्रस्ट करे और आपको बिज़नेस दे, आपके साथ काम करना चाहे? तो आई थिंक एक जेनुइननेस होनी चाहिए कन्वर्सेशन में। सो, फॉर एग्जांपल, शेयरिंग अबाउट योर फैमिली, शेयरिंग अबाउट योर जर्नी, एक ऑनेस्टी होनी चाहिए, दूसरे पर्सन की स्टोरी को सुनने में। तो जब दूसरा पर्सन बात कर रहा है, ऐसा ना दिखे कि आप सिर्फ बिज़नेस के लिए उनसे बात कर रहे हैं। वो इनऑथेंटिक हो जाता है। तो अगर आप जेनुइनली दोस्ती बना रहे हैं, वो शायद उस दिन आपको बिज़नेस नहीं देगा, बट कभी ना कभी आपको बहुत अच्छा बिज़नेस देगा। सो दैट ऑथेंटिसिटी इन कम्युनिकेशन एंड दैट पर्सनल रिलेशनशिप मैटर्स अ लॉट।
एंड इज़ इट डिफरेंट फॉर यू, इज़ इट डिफरेंट फॉर वुमेन एम्प्लॉईज़? कि सेम होता है? देखिए, फंडामेंटल ह्यूमन बिहेवियर डज़ नॉट चेंज, बट वुमेन एम्प्लॉईज़ के एक सेपरेट सेट ऑफ़ बायसेज़ आ जाते हैं। द अमाउंट ऑफ़ टाइम, फॉर इंस्टेंस, इफ यू आर अ मैन, आई एम अ मैन, वी कैन बोथ गो एंड प्ले वीडियो गेम्स इन द नाइट। द वुमन, इट गेट्स अ लिटिल डिफिकल्ट। सो, फॉर इंस्टेंस, दे से अ लॉट ऑफ़ सी-लेवल डिसीज़ंस आर टेकन ओवर स्मोकिंग ब्रेक्स। तो मैं और सीईओ नीचे चले गए, वो सिगरेट स्मोक कर रहा है, मैंने चाय पी ली, डिसीज़न हो गया। लड़कियों के लिए वो थोड़ा मुश्किल हो जाता है। सो सम ऑफ़ दोस बायसेज़ दे फेस, बट फंडामेंटल ह्यूमन बिहेवियर रिमेंस द सेम, बट वो अपॉर्चुनिटी थोड़ा मुश्किल होता है उनके लिए। तो वो क्या कर सकती है? आई थिंक उनको थोड़ा जैसे, फॉर इंस्टेंस, इफ यू आर अ वुमन एंड इफ यू वांट टू डू बिज़नेस इन दीज़ कंट्रीज़, यूज़ द लंच वेरी वेल। यूज़ द लंच वेरी वेल। हैव अ टू आवर लंच, हैव अ हाफ अ डे वर्कशॉप और हाफ अ डे कस्टमर मीट आउटसाइड द ऑफिस। आप और उनके मेन काउंटरपार्ट, कस्टमर के घर जा रही हैं एंड स्पेंडिंग टाइम टुगेदर। तो डोंट मेक इट आफ्टर सनसेट, मेक इट बिफोर सनसेट। दैट इज़ हाउ यू गेट टू स्पेंड द स्पेंड द टाइम।
सीखा है मैं अपने आपको खुद को बहुत सारे एंपेन और टॉप % लोगों से। क्योंकि जब आप उनके साथ रहते हो, उनको देखते हो, उनको सीखते हो, उनकी चीजें समझते हो, आपको एक इन एंड मोटिवेशन आता है कि यार बहुत बड़ा काम करना है।
जब आप सिर्फ कस्टमर्स और ऑब्जर्वेशन वाले फेज में रहते हो, वहां पर आप एग्जीक्यूशनर बहुत स्मार्ट बन जाते हो। आपको पता होता है कि कस्टमर को चाहिए क्या। तो आपको जो भी चीज बना रहे हो, आप वो बेटर होती है। आपकी प्रोडक्ट बेटर होते हैं, आपका प्रोडक्शन बेटर हो जाता है। आपको कंज्यूमर साइकोलॉजी बेटर समझ में आती है। तो आप सही लोगों से बात कर सकते हो, सही लोगों को समझ के प्रोडक्ट नीड को समझ के आप प्रोडक्ट बना सकते हो। अच्छे एंटनर बनोगे, अच्छे इंसान बनोगे। पर उसमें ना उसी में ही रह जाते हो कि हां ओ वाओ इस कस्टमर को दिया मैंने, इसको बहुत मजा आया, ग्रेट अब मैं और को देता हूं, बस इट्स इट। आप उधर से निकल के बड़े लेवल पर सोचते ही नहीं हो। सो यर इज अ डिफरेंस।
सो जो आप अपनी जर्नी डिस्क्राइब कर रहे थे, अगर आपने वो पार्ट वन नहीं किया होता ना, पार्ट टू आपको कभी चमकता ही नहीं। एग्रीड, दैट वाज फाउंडेशन, बैंग ऑन। अगर आपको कल रैंडम कोई आके बोलता है ना, आपको वो पार्ट टू चमक रहा है क्योंकि पार्ट वन आपका बहुत सॉलिड है। एंड यू हैड अ फैमिली बिजनेस, आपो बिजनेस ऑल ऑफ दैट, यू अंडरस्टूड। ग्रीड, विदाउट दिस, दिस इज यूजलेस। दैट्ची पीपल, अ लॉट ऑफ दीस थॉट्स, वेरी इंटरेस्टिंग थॉट्स। ये बुक्स में है। अगर अ लॉट ऑफ दिस जो आप स्टीव जॉब्स की बायोग्राफी पढ़ेंगे तो अ लॉट ऑफ दिस थिंग इज बोल चुके हैं। अ लॉट ऑफ इनसाइटफुल कमेंट्स यू हियर इन पॉडकास्ट टुडे, ही सेड इट इन बुक, सो दैट्स आर नॉट न्यू थिंग्स।
सो जेफ बेजोस फॉर इंस्टेंस है स्पोकन अबाउट हाउ डू आई मेक। इंडिया में लोग अभी बात करें, अगर आपको वह सीखना है, वह आप कहीं से भी सीख सकते हैं। स्टीव जॉब्स की बायोग्राफी में, इफ यू जस्ट पिक अप एनी स्टीव जॉब्स बायो, सब लिखा हुआ है। हाउ डू वी मेक एप्पल दिस, हाउ डू वी मेक एप्पल दैट? आप उसको कॉपी कीजिए, दैट इज गुड इनफ।
द रिस्क दैट हैपेंस इज, अगर आप सिर्फ हाइपर अचीवर्स के साथ सराउंड करेंगे, जनरली एवरी हाइपर अचीवर हैज अ नेगेटिव पर्सनालिटी, जनरली, दैट्स हाउ दे बिकम। और अगर आपको लगने लगा कि यही दुनिया है और यही तरीका है सक्सेस करने को, आपकी पर्सनालिटी में एक नेगेटिव कोनोटेशन आ जाएगा। और दूसरा आप सोचेंगे कि यही जिंदगी है, लोग ऐसे ही बिहेव करते हैं। लोग ऐसे बिहेव नहीं करते। सो ट्रू। लोग ऐसे बिहेव नारियल वाला जो बिहेव करता है, वो असली इंडिया है। और जब तक इन योर लैंग्वेज, जब अगर वो पार्ट वन आप समझते नहीं ना, ये पार्ट टू आपको चमकता ही नहीं। सो ट्रू। सो ट्रू।
मैं नेटवर्किंग की वैल्यू मेरी लाइफ में कम हो गई थी, जब मैं एक्चुअल समझने लगा नेटवर्किंग की वैल्यू। क्योंकि जिस इंसान के पास डेप्थ नहीं है, जिस इंसान को खुद को कुछ नहीं आता और उम खुद में दम नहीं है, औकात नहीं है उसकी, उससे कोई नेटवर्क नहीं करना था। तो वो कितने नेटवर्क इवेंट में चले थे? करेक्ट। सो पार्ट टू में सही लोग मुझे एंटरटेन इसलिए करते थे, क्यों? पार्ट क्योंकि पार्ट वन मेरा सो इतना सॉलिड था। अनदर साइड टू इट। ये मैं बहुत लोगों को बोलता हूं नेटवर्किंग के बारे में। पहले ना मैंने मेरी लार्ज पार्ट ऑफ माय लाइफ आई स्पेंड, डूइंग 10 इयर्स तक मैं करता था कि रीच आउट टू वन पर्सन अ डे, एवरी डे। मैं रोज मिलता था एक किसी नए इंसान से, सीखता था। इसकी वजह से ही मेरे मेंटर्स बने हैं, इसी वजह से मेरे गेस्ट बने, फ्रेंड्स बने हैं, लोग मेरे इन्वेस्टर ऐसे बहुत सारी चीज मेरी लाइफ में रिलेशनशिप ऐसे स्टार्ट हुए, सब ऐसे हुआ है। राइट? तो मैं बिलीव करता हूं इसको बहुत टाइम तक। एंड देन सो आई वाज अ ह्यूज बिलीवर ऑफ बिल्डिंग द ह्यूमन नेटवर्क। एंड द मोर आई लर्न अबाउट इट, आई लॉस्ट फेथ इन बिल्डिंग द ह्यूमन नेटवर्क। कि आपको लोगों से बात करना जरूरी है, साइट के लिए, नेटवर्क बनाने के लिए नहीं, फोर्स करने की जरूरत नहीं है। तो अगर आप अकेले भी हो एंड इफ यू डोंट हैव एनी वन, यू कैन स्टिल विन।
या एंड यहां पर एक प्रिंसिपल मुझे हेल्प करता है, जहां लोग बोलते हैं फिर हम सीखें कैसे, आगे कैसे बढ़े, सही जगह कैसे जाए, क्या करें, किनसे? तो चार्ली मंगर, हु इज, हु वाज वॉरेन बफेट पार्टनर, राइट? वो उनका एक बहुत बढ़िया प्रिंसिपल है, वो बोलते हैं, बिकम फ्रेंड्स विद द डेड। एंड आई लव इट। ही इज लाइक कि तुम बात कर रहे हो कि तुम्हें ना देश की इकोनॉमिक्स समझने के लिए बड़े इंसान के साथ बैठना उठना ना जरूरी है। क्यों यार? जिसने इकोनॉमिक्स बनाई है देश की, जो एक्सपर्ट था, जो मर गया, जिसने करके लिख दी ना उसकी किताब है और उसके बारे में बात करो और फिर सोचो वो कैसा सोचता है सिचुएशन में। सो द मोमेंट यू सराउंड योरसेल्फ विथ रियली हाई लेवल ऑफ एक्सपर्ट पीपल, जो सालों साल जिनकी थ्योरी सही रहती है, टेस्ट ऑफ टाइम 100 साल में उनका सब सेम है, उन लोगों को अपना फ्रेंड बना लो, भले वो डेड है, बट उनके बारे में इतना पढ़ो, दैट यू स्टार्ट थिंकिंग इन द वे दे आर थिंकिंग। दैट्स हाउ यू अचीव सक्सेस। एंड आई वाज लाइक इफ यू आर लोनली, यू डोंट हैव एनी फ्रेंड, बिकम फ्रेंड्स विद द डेड। एंड इट्स अ ब्रिलियंट एडवाइस बाय चार्ली मंगर। आई एम वेरी हैप्पी यू सेड बी फ्रेंड्स विद द डेड। क्योंकि हमें लगता है कि बीइंग अलोन इज रंग। इट्स कंपलीटली ऑलराइट टू बी अलोन। बीइंग अलोन इज कंपलीटली ओके। देयर इज नथिंग रंग। यू कनेक्टिंग विथ योरसेल्फ, और द पावर अब परफेक्टली ऑलराइट। एंड दैट इज द फ्यूचर फॉर अ लॉट ऑफ पीपल। बट लोग अलोन रहने को कंफ्यूज करते हैं लोनलीनेस से। दैट इज अ देखिए लोनलीनेस आजकल बहुत लोडेड वर्ड बन गया है। लोनलीनेस बहुत लोडेड वर्ड बन गया है। अलोन का मतलब है मैं खुद में काबिल हूं और सक्षम हूं। लोनलीनेस है कि मैं अकेला हूं, बट मुझे किसी दूसरे पर्सन की जरूरत है। स्लाइट नुआंस है। आई एम, आई कैन बी अलोन एंड हैप्पी, बट आई डोंट नीड अनदर पर्सन। मी एंड गॉड इज गुड इनफ। लोनली इज आई एम अलोन, बट आई एम अनहैप्पी बिकॉज आई नीड अनदर पर्सन। तो दोनों में अलग है। लोनलीनेस एक्चुअली बहुत बड़ा प्रॉब्लम आजकल है। देयर इज नो डाउट। जो रिसेंटली एक गैलप पोल आया था कि स्पेशली मेन, लोनलीनेस की वन थर्ड, वन फोर्थ ऑफ पीपल कंसिस्टेंटली फील लोनली। देयर वाज वन मोर स्टेट आई रेड की वन इन सिक्स मेन हैव जीरो फ्रेंड्स। स्टेटमेंट केम आउट, गैलप पोल आउट दैट जीरो फ्रेंड्स, वन इन सिक्स मेन अक्रॉस द वर्ल्ड, अनबिलीवेबल, फीलिंगलेस एवरी वीक। तो यह एक एक प्रॉब्लम है, एक एक बहुत बड़ा प्रॉब्लम है। एंड इट इज, देयर वाज अनदर स्टैटिस्टिक्स इज इक्वल टू 15 सिगरेट्स। वन डे ऑफ लोनलीनेस, 15 सिगरेट्स। यू डैमेज योर बॉडी एंड योरसेल्फ दैट मच। और अगर ये दिल्ली के, दिल्ली में हो रहा है जहां पोल्यूशन ज्यादा है, तो वन डे ऑफ लोनलीनेस, 30 सिगरेट्स। तो वन डे ऑफ लोनलीनेस, 15 सिगरेट्स, वेरी वेरी स्केरी। इट इज, इट इज वाइल्ड। एंड मेन लोनलीनेस तो बहुत तेजी से बढ़ते जा रही है। यस, दैट्स द रीजन व्हाई आई वाज़ रीडिंग दैट इतने सारे मेन को एलेक्सिथिमिया होते जा रहा है। यू नो, एलेक्सिथिमिया, कि मेन फाइंड इट डिफिकल्ट कि उनको पता ही नहीं होता कि वो कोई सर्टन इमोशन फील कर रहे हैं, फिर उसके बारे में एक्सप्रेस कैसे करते हैं और उसे डील कैसे करते हैं। उनकी एबिलिटी जिंदगी में इमोशंस को पहचानने में, एक्सप्रेस करने में खत्म हो जाती है क्योंकि बचपन से उन्हें कोई रिकॉग्नाइज करना ही नहीं सिखाता। एंड इसी की वजह से मेन सफर करते हैं, उन्हें पता भी नहीं क्यों सफर कर रहा हूं। इसकी वजह से वो लोनली होते जा रहे हैं, उन्हें पता भी नहीं क्यों लोनली हो रहा हूं। उन्हें यही नहीं पता कि उनकी जो प्रॉब्लम है उसको सही तरीकों से डिस्क्राइब कैसे किया जाए। एंड वो अकेले अकेले सहते जा रहे हैं, सहते जा रहे हैं। एंड देन प्रेशर बनते जाता है, स्ट्रेस बनते जाता है और फिर उनके बिहेवियर में रिफ्लेक्ट होता है। सामने वाले को लगता है कि यार ये इंसान इरिटेटिंग क्यों हो गया, पागल क्यों हो गया है? ये अकेले में चुपचाप चुपचाप क्यों हो गया? इसका पावर क्यों लूज हो गया? क्योंकि उसे एक्चुअली यह पता ही नहीं है कि वह कैसे अपनी एक प्रॉब्लम सॉल्व करें और उसके ऊपर फिर एक से एक पूरे सोसाइटी की प्रॉब्लम देते जा रहे हो आप उसके ऊपर। आज भी कितनी भी बात करो, जेंडर रोल्स के शोल्डर हैं कि अगर उसको घर से निकलना है और वो निकला है तो उसे काम करके कमा के ही घर आना पड़ेगा। मैन टाइम पास करने नहीं जा सकते घर से बाहर। इट्स नॉट अलाउड, इट्स नॉट एक्सेप्टेड इन द सोसाइटी। तो अगर तुम लड़के हो तो तुम्हारे पर ये प्रेशर है कि तुम्हें उठ के बाहर जाके फील गुड के लिए नहीं जा सकते, तुम तुम्हें काम करना है। तो तुमके तुम्हारे पर ये प्रेशर है, फिर घर आके सोशल कंपैरिजन का प्रेशर है या कि तुम्हारे दोस्तों ने तो यह कर लिया, या तुम्हारे मां-बाप ने ये कर लिया, या दूसरे लोग कितने अच्छे से कर रहे हैं, या दूसरों की फैमिलीज़ देखो कितना कर रही है, छोटा भाई, बड़ा भाई कैसा कर रहा है, कंपैरिजन। फिर तीसरा प्रॉब्लम है कि इमोशनल गिल्ट, कि मां-बाप कैसे भी हो, कुछ भी हो, फैमिली कैसी भी हो, कहीं से भी तुम्हारे ऊपर ही लोड है इसको आगे ले जाने का, राइट? तो उसके पास इतने प्रेशर्स हैं। एंड अब चौथा उससे बड़ा प्रॉब्लम बन गया कि दोस्त ही नहीं है। और इन सब प्रॉब्लम्स होने के बाद, द पर्सन, मतलब मेन को पता भी नहीं है कि यार मैं कैसे मेरे इमोशंस रिवील करके लोगों को बताऊं, फिर जाके बहुस अलग गालियां देता है। सो आई हैव मैसिव एंपैथी फॉर सो मेनी मेन कि इतनी सारी बैटल्स हम अकेले में सफर कर रहे हैं ना और किसी को पता भी नहीं है। यस, आई मैंने कहीं तो लिखा था कि मेन हैव नेवर हैड इट एज बैड इन हिस्ट्री एज दे हैव इट नाउ। वन इन फाइव रिपोर्ट कंसिस्टेंट लोनलीनेस, वन इन सिक्स हैव नो फ्रेंड्स। अगर आप लाइफ में देखेंगे, देयर आई थिंक फेमस स्टैंड अप कॉमिक इन द यूएस सेड दैट अ मैन इज लव्ड कंडीशनली, इफ अ मैन अर्न्स मनी। वेरी फेमस कोट, कि अगर एक 25 साल का लड़का पैसा नहीं कमाए, सोसाइटी क्वेश्चन करेगी, तू जी क्या रहा है? 27 साल का लड़का अगर इनफ पैसे नहीं कमाए, उसकी शादी नहीं होगी। तो मैन, इट इज वेरी वेरी डिफिकल्ट। और इसके बहुत सारे आपने राइट पॉइंट किया कि एक है जेंडर रोल्स। मैं ना टोल्ड कि आप स्टोइक रहो, जो भी प्रॉब्लम है बात मत करो। एक तो है वो जेंडर रोल है, एक है देयर इज अ केमिकल थिंग आल्सो, जैसे वुमन हैव एस्ट्रोजन और उसकी वजह से क्या होता है? बिकॉज़ ऑफ एस्ट्रोजन आप वर्ड्स बेटर यूज़ कर सकते, यू हैव मोर इमोशनली मैच्योर। तो अगर आपको कुछ टेंशन हो रहा है तो यू आर एबल टू यूज़ द वर्ड्स, यू आर एबल टू एक्सप्रेस विद योर फ्रेंड सर्कल और रात गई बात गई टाइप हो जाता है। मेन कैन नॉट डू दैट, क्योंकि एक तो वो केमिकल कम है और ऊपर एक सोसाइटल नॉर्म है। सो द मैन हैज़ टू कीप गोइंग एंड गोइंग एंड गोइंग। और हु विल ही टेक हेल्प फ्रॉम? थेरेपिस्ट। एक मैन जाएगा तो लोग अभी भी थोड़ा बहुत टैबू समझते हैं। सो वेयर आर मेन गोइंग? देयर वाज़ वेरी इंटरेस्टिंग स्टडी दैट आई सॉ, यू हर्ड ऑफ एस्ट्रोटेक प्लेटफॉर्म्स? सो एस्ट्रोसेज, एस्ट्रोसेज, एस्ट्रोटेक, दे आर डूइंग वेरी वेल दीज़ डेज। द फास्टेस्ट ग्रोइंग सेक्टर्स इज़ एस्ट्रोटेक प्लेटफॉर्म। सो पीपल आर गोइंग ऑन दोस प्लेटफॉर्म्स एंड आस्किंग द एस्ट्रोलॉजर कि पंडित जी ये इसका क्या है, उसका क्या है? एसेंशियली मेन आर गोइंग ऑन दैट प्लेटफॉर्म लुकिंग फॉर थेरेपिस्ट, क्योंकि पंडित जी बोल रहा है, टेंशन मत लो, हो जाएगा। ऑल द पंडित जी सेइंग, आपकी एक्स वापस आ जाएगी, आपको ये जॉब मिल जाएगा। तो पंडित्स आर ऑपरेटिंग एज़ थेरेपिस्ट। दैट्सी मैंने पढ़ी थी साइकोलॉजी टुडे में कि वुमन आर बेटर एट मेकिंग अ नेटवर्क्स विद इन देम। और कभी-कभी वुमेन्स फ्रेंडशिप्स आर आल्सो वेरी स्ट्रांग। एंड मेंस फ्रेंडशिप्स आर गुड, बट सम टाइम्स दे आर नॉट दैट स्ट्रांग। एंड द इट्स अ काउंटर इंट्यूटिव प्रिंसिपल, क्योंकि मुझे लगता था लड़कों की दोस्ती। द प्रिंसिपल इज़ दिस, द रिसर्च व्हाट दे डिड इज़, एंड टेक इट विथ अ पिंच ऑफ सॉल्ट। व्हेन टू मेन हैंग आउट, व्हाट डू दे डू? प्ले वीडियो गेम, गो फॉर क्रिकेट मैच, आईपीएल मैच। व्हेन वुमन हैंग आउट, दे लुक एट ईच अदर, सो आई कांटेक्ट से बहुत एक इमोशनल डेप्थ बढ़ता है। सो व्हेन वुमेन हैंग आउट, दे टॉक टू ईच अदर, मेक आई कांटेक्ट, और उससे एक इन्हेरेंट इमोशनल अटैचमेंट बढ़ता है। नाउ द काउंटर थ्योरी इज़ आल्सो ट्रू, दैट माय फ्रेंड फ्रॉम क्लास फोर, इफ आई जस्ट कॉल हिम, ही विल लीव एवरीथिंग एंड कम। तो वो भी ट्रू है, बट ये एक काउंटर थ्योरी भी है कि लड़कियों के जो इमोशनल सोशल सपोर्ट होता है वह बेटर भी होता है। सो इन चाइना, फॉर एग्जांपल, देयर अ वेरी इंटरेस्टिंग ट्रेंड इन बीजिंग एंड शंघाई। मेनी वुमेन, पांच छह लड़कियां जो वर्किंग है, सक्सेसफुल है, वो कह रहे हैं कि हम शादी नहीं करेंगे। तो मॉर्गन स्टैंडली का रिपोर्ट आया था कि बाय 2030, 44% ऑफ वुमेन विल नॉट गेट मैरिड, नॉट गेट मैरिड। सो व्हाट आर दीज़ वुमेन डूइंग? फाइव और सिक्स आर कमिंग टुगेदर, सक्सेसफुल, एजुकेटेड वुमेन, एंड दे सेइंग हम एक विला लेंगे और हम ही रहेंगे, लाइफ लॉन्ग, हम ही रहेंगे, लाइफ लॉन्ग। तो देयर आर मल्टीपल मल्टीपल इश्यूज़ दैट आर कमिंग हियर। एंड फॉर अ मैन इट इज वेरी वेरी डिफिकल्ट, बिकॉज़ रिलेशनशिप पे प्रॉब्लम्स एज़ मच एज़ वी अनडरस्टैंड जेंडर रोल्स पे प्रॉब्लम्स हो रहे हैं। फुल फैमिली का सपोर्ट है, फैमिली का इशू है, यू कांट टॉक टू एनीबडी। अ अगर यू लुक एट अ इंडियन वर्कप्लेस, अ बॉस विल स्क्रीम एट अ मैन, बट विल बी अ लिटिल पोलाइट विद अ वुमन। तो फुल ऑनस्लॉट ऑफ़ द गाली अ मैन को मिलती है एट द प्लेस ऑफ़ वर्क। एंड इट्स अ थैंकलेस रोल। सैलरी चली गई, जॉब चली गई, करियर चला गया, जिंदा रहने का क्या फायदा? आपका वेरी वेरी डिफिकल्ट फॉर अ मैन। वेरी वेरी। अ मैन हैज़ नेवर हैड इट सो बैड इन हिस्ट्री। आई समवॉट एग्री टू इट एंड समवॉट डिसएग्री टू इट। आई विल टॉक अबाउट बोथ द थिंग्स। एग्रीमेंट, कि मेन के लिए ना हर चीज एक प्रेशर बना दिया है, एक रेस बना दिए और एक कुछ ना कुछ डायरेक्टली या इनडायरेक्टली उनके ऊपर ही रिस्पांसिबिलिटी बना दी कि उन्हें ही ठीक करना है। हम उन्हें हर चीज की रिस्पांसिबिलिटी दे दी, एक प्रेशर दे दिया। घर में पैसे नहीं हैं, लड़का लेके आएगा, वो उसकी लाइफ सॉर्टेड नहीं है, वो खुद ठीक करेगा। रिलेशनशिप में प्रॉब्लम है, लड़की और लड़के में, लड़का ही सॉर्ट करेगा। व्हाट टाइम नहीं देता है तो टाइम कैसे बेटर करना है, वो करेगा। इमोशंस अगर साथ में दोनों में ऑफ है तो लड़का ही बेटर करेगा। सेक्सुअल में कुछ प्रॉब्लम है तो लड़का, लड़के के ऊपर ही प्रॉब्लम है। कहीं पर भी जाए, राइट? इमोशनली एक्सप्रेस करना, वो क्या फील कर रहा है, कोई उसको नहीं पूछेगा कि तुझे आता भी है क्या? तुझे बताए कैसे कर सकते हैं? तुझसे कोई पूछे नहीं, वो नहीं कर पा रहा है, उसी की प्रेशर है उस पे कि वो फिगर आउट करे कैसे ये सीखे और कैसे आगे दुनिया को बताए, राइट? हर जगह काम आगे बढ़ने का प्रेशर, घर वालों को सपोर्ट करने का प्रेशर, दुनिया में दोस्त बनाने का, दिखने का प्रेशर, सोशल कंपैरिजन का प्रेशर, हर चीज में मेरा स्टेटस बढ़ता जाए क्योंकि पावरफुल मेन की इज्जत ज्यादा होती है देन पावरलेस, उसका प्रेशर। एंड हर टाइम स्टोइक रहने का प्रेशर कि इसको तो कुछ दुनिया से अफेक्ट ही नहीं होता है, इसका प्रेशर। हर चीज उन पर इतना खतरनाक प्रेशर है, देयर शोल्डर्स आर लाइक गोइंग डाउन डे बाय डे, बिकॉज़ हर चीज प्रेशर ही बना दी है। हर चीज में मेन को जीतना जरूर, कोई और फिक्स नहीं करेगा उनके लिए, राइट? और उसको बहुत हैवली एसोसिएट कर दिया है अगर वो मेन बोलते हैं कि यार मे बी ना मेरे फाइनेंस सही नहीं चल रहे हैं, तो सोशल शेम से एसोसिएट कर दिया। एक और चीज है, लेट मी मेक दिस कि अगर वो बोलते हैं कि या मेरी लाइफ में कुछ प्रॉब्लम चल रही है और वो बता देते हैं ना पब्लिकली या किसी को या दोस्त में या सोशल सर्कल में या फैमिली में, उसे पावरलेस होने का एहसास कराया जाता है, बार बार बार बार बार बार, व्हिच इज शेमफुल फॉर दैट पर्सन। या तुम्हारी रिलेशनशिप अच्छी नहीं चल रही है, उसे बुरा बनाया जाता है, तुझसे कुछ हो नहीं पा रहा है, तू ढंग का इंसान नहीं है। फाइनेंस अच्छे चल नहीं रहे, तुझसे ढंग नहीं हो, ढंग से कुछ हो नहीं पा रहा है। थेरेपी पे जाता है, शिट, तू थेरेपी पे जाता है, ऐसी बातें कर रहा है, राइट? वो अगर डोमिनेंट है तो वो खराब है, अल्फा क्या कैसा बन जा रहा है? वो अगर सबमिसिव है, क्या ऐसे रहते हैं मर्द लोग? हर चीज अगर मेन में कोई प्रॉब्लम है और वो अपनी प्रॉब्लम दुनिया में बता देते हैं तो उसे शेम किया जाता है, उन्हें मैरेस किया जाता है, और उसकी वजह से वो प्रॉब्लम ही नहीं बताते। तो पहले ही उनको एक तो आता नहीं है, एलेक्सिथिमिया से गुजर रहे हैं, उनको आता नहीं है एक्सप्रेस करना। फिर जब एक्सप्रेस नहीं कर पाते हैं तो वो किसी भी तरीके से थोड़ा सा एक्सप्रेस करते हैं और गलती से कर दिया, वो बताते हैं कि यार प्रॉब्लम चल रही है, इसको कोई फिक्स करो, तो उन्हें शेम कर दिया जाता है, उनकी प्रॉब्लम शट डाउन की जाती है। एंड दैट्सी हेल्प करें। एंड इफ ऑल द ब्रदर्स आर लिसनिंग राइट नाउ, माय थिंग इज़ ओनली ब्रदर्स वी ऑल कैन सेव ईच अदर। एंड ऑल दोस सिस्टर्स, ऑल द वुमन आउट देयर, इफ यू थिंक कि अगर आपका मेन, आपका पार्टनर, आपका भाई, आपका बॉयफ्रेंड, आपका हस्बैंड, इज़ गोइंग थ्रू, फादर इज़ गोइंग थ्रू अ टफ टाइम, हेल्प देम आउट इंस्टेड ऑफ़ हैविंग सम एक्सपेक्टेशंस एट दिस पॉइंट, एटलीस्ट व्हेन देयर सफरिंग। बिकॉज़ यू डोंट इवन नो कि उनकी कितनी साइलेंट बैटल्स एंड सफरिंग जा रही है। फिगर आउट अ वे टू फिक्स दिस। एंड वेयर आई डिसएग्री विद यू वाज़ द पार्ट, मेन फ्रेंडशिप्स। सो आई सेड दैट्स अ काउंटर थ्योरी आल्सो। आई बिलीव की दैट्स सेड, या लाइक लड़कों को इमोशनल आई कांटेक्ट बनाने की कोई जरूरत नहीं है दूसरे लड़कों के साथ। भाई है, मैं समझ जाता हूं। दैट्स लाइक लड़की आधी रात में अगर अपना भाई रो रहा है तो सारे खड़े हो जाएंगे। दैट आई एग्री। मेन फ्रेंडशिप इज़, लड़के साथ में टाइम अगर स्पेंड करते हैं ना, वही थेरेपी है। व्हिच इज़, आई नो अ लॉट ऑफ़ थेरेपिस्ट गोना हेट मी फॉर दिस, बट लेट मी टेल यू, लड़के साथ में बैठ गए ना, बस बैठ गए, कुछ भी कोई ऑब्जेक्टिव नहीं है। अगर वो वीडियो गेम खेल रहे हैं या टाइम पास करें, पॉलिटिक्स की बात कर रहे हैं या लड़कियों की बात कर रहे हैं, दारू की बात कर रहे हैं या बैठ के सिर्फ पुराने जमाने की बात कर रहे हैं या फ्यूचर में फालतू बात कर रहे हो, भाई एक दिन ऐसा होगा, बकवास कर रहे हैं, वो सब उनके लिए एक थेरेपी जैसा एक्ट करती है। एंड वो उनका बॉन्ड बना देती है। उनको एक्चुअली जो इमोशनल नीड्स एंड इमोशनल बॉन्डिंग के जो टूल्स होते हैं ना वो करने की जरूरत नहीं है। आई डोंट नो हाउ दिस वर्क्स, पर जस्ट बिकॉज़ आपने किसी को मान लिया ना वो भाई है, इट डज़ंट मैटर, आप उसके साथ एक दिन बताओगे, साल में या दो साल में एक दिन बताओगे या रोज़ टाइम बताओगे, वो भाई है, मतलब वो भाई है और बहुत स्ट्रांग हो जाती है। लाइक यू गेट अ सेंस ऑफ़ पर्पस, यू गेट अ सेंस ऑफ़ रिस्पांसिबिलिटी, एंड यू गेट अ सेंस ऑफ़ सर्विस कि इसके लिए खड़ा रहना है। आल्सो सम टाइम्स जब लड़के मिलते हैं, एक दूसरे को रोस्ट करते हैं और वो रोस्टिंग का बहुत बेनिफिट है। यस, क्योंकि अगर मेरा प्रॉब्लम है कि मेरा प्रमोशन नहीं हुआ, मेरे चार दोस्त मेरे ऊपर इतना हसेंगे कि एंड ऑफ़ द डे वो इशू ही खत्म हो जाएगा। सो मेन हैव अ वे टू रिड्यूस इश्यूज़ इन अ वे, थ्रू थेरेपी। द वन पॉइंट आई वांटेड टू ऐड इज़, एक और रीज़न प्रॉब्लम हो रहा है कि अगर आप देखेंगे मीडिया में, देयर इज़ अ डिमेनिजेशन ऑफ़ मेन दैट इज़ गोइंग ऑन। यूएस में एक सोशल मीडिया ट्रेंड है, रिटिकुलर अस, नंबर ऑफ़ हिट्स आ रहे हैं। इफ यू गो टू रैंडम पीपल ऑन द स्ट्रीट इन द यूएस एंड से, डू यू बिलीव मेन शुड डाई? बहुत लोग बोलेंगे, यस, यस। अ लॉट ऑफ़ वुमन विल से, यस, मेन शुड डाई, मेन शुड डाई। व्हाट वैल्यू आर दे एडिंग? तो ये जो डिमेनिजेशन चल रहा है एंड यू शुड चेक दिस आउट ऑन अगेंस्ट मी, द मॉडल इज़ अगेंस्ट मी, एंड ऑल दिस प्रेशर्स दैट आर ऑन मी, आई कैन नॉट टॉक टू एनीबडी। इट इज़ अ ह्यूज ह्यूज प्रॉब्लम। सो आपने जो कहा कि फ्रेंड्स मीटिंग इज़ वेरी इम्पोर्टेंट, मैं तो कहूंगा कि आपको यू हैव टू टर्न टू स्पिरिचुअलिटी एट सम पॉइंट। आपको कोई देखने नहीं वाला, थोड़े दोस्त मिल जाएंगे, मां-बाप मिल जाएंगे, टिल योर पेरेंट्स आर देयर, दे विल लुक आफ्टर यू। आपको अकेले ही इस रास्ते पर चलना है। जब एक स्टैंड अप कॉमिक ने कहा था, मेन आर लव्ड कंडीशनली, इट इज़ अ वेरी गुड इनसाइट। आपको अकेले ही इस रास्ते पर चलना है, यू हैव टू फाइंड योर सुपर पावर विद इन यू। एंड द पर्सन अबाउट कनेक्ट एंड मूव ऑन। ऑल मेन हैव टू लर्न हाउ टू बी अलोन एंड हैप्पी। यू हैव टू लर्न। अगर आपके पास न्यू ईयर्स में या क्रिसमस में किसी से बात करने का अपॉर्चुनिटी नहीं है, कोई बुरी बात नहीं है। आप एक अपना रूटीन बनाइए, बाहर जाइए, खाइए, इधर जाइए एंड लर्न टू लिव लाइफ लाइक दैट। आपको बचाने कोई नहीं आने वाला, आपको अकेले ही बचना है। आई थिंक इट इज़ वेरी वेरी इम्पोर्टेंट कि हमें लगना नहीं चाहिए कि कोई और आएगा, मोस्ट लाइक नहीं आएगा। द थिंग अबाउट सोशल साइकोलॉजी, आई वाज़ रीडिंग दिस इन अ बुक, एंड इट सेज़ लड़के पॉजिटिव अफेक्शन, क्रिटिसिज्म एंड नेगेटिविटी एंड बुलिंग से सिखाते हैं, लड़कियां पॉजिटिव अफेक्शन, फिक्सिंग और एम्पावरमेंट से दिखाती हैं। सो तभी होता है, मैरिजस फेल होते जा रही हैं। बिकॉज़ लड़के क्या करते हैं, क्रिटिसाइज़ करते हैं लड़कियों को भी, अपनी पार्टनर को बोलते हैं कि अरे ये देखो ये तो ऐसी होती जा रही है और उसको बुली करते हैं, उसको रोस्ट करते हैं, थोड़ा एक दूसरे को उसका मजाक उड़ाते हैं। उसका तरीका है, पॉजिटिव अफर्मेशन करके? कौन सा हस्बैंड इंडिया में अपनी वाइफ को रोस्ट कर सकता है? नहीं, रोस्ट नहीं कर सकता। आई विल टेल यू व्हाट दे डू, पॉजिटिव एक्शन बाय नेगेटिव थिंग्स, एग्जांपल कि अरे मैडम की तो चलती है दिन भर, हम ही जस्ट ट्राइंग टू मेक लिटिल जोक अबाउट इट, राइट? किसने बोला वाइफ हमेशा सही होती है? किसने फालतू जोक्स मारते हैं लोग, राइट? उनका पॉजिटिव अफेक्शन शो करने का तरीका जोक्स है, कोई नेगेटिव स्टेटमेंट है, कोई ह्यूमर है और दूसरे अपने दोस्तों के साथ भी यही करते हैं। हम तो वो अपने दोस्त को अगर उनका दोस्त थोड़ा फैट है तो मोटा करके ही बुलाएंगे और प्यार से,
वमन र आफ्टर रिसोर्सेस और यह केव मैन टाइप से चल रहा है। क्योंकि तब क्या था? अ वुमन वांटेड प्रोटेक्शन। केव मैन टाइम तो बेसिक एवोल्यूशन है। सो यू वांटेड अ स्ट्रांग मैन, ताकि रात को शेर आ जाए तो आप मुझे प्रोटेक्ट कर पाओ। और मेन को चाहिए था कि दे वांटेड टू बी द अल्फा मेल, एंड दे बिकम द अल्फा मेल बाय हैविंग द मोस्ट ब्यूटीफुल वुमन। एब्सलूट, हां। एंड इस तो ये हमेशा से चलता है और इसमें कोई प्रॉब्लम नहीं है। प्रॉब्लम अब क्या हो गई है? प्रॉब्लम क्या हो गई है कि अब ना हम चूज तो कर लेते हैं इसी बेसिस पर, जो हमारा बेस्ट है। उनके लिए बेस्ट से जो भी वैल्यू सिस्टम है, जो भी जिस चीज में भी ब्यूटी देखते हैं। कोई लुक्स पे ब्यूटी देखता है, कोई हार्ट पे ब्यूटी देखता है, कोई माइंड में ब्यूटी देखता है। कोई मल्टीपल चीजें हैं, राइट? वो दोनों मैच तो करते हैं। मैच करने के बाद जब रिलेशनशिप में आते हैं, उसके बाद एक इल्यूजन में रह रहे हैं, बिकॉज ऑफ सोशल मीडिया, कि देयर आर एंडलेस ऑप्शंस। भले वो आपके लिए ऑप्शन है भी नहीं, पर बिकॉज आपको रोज Instagram पे लोग दिखते हैं। आपके पास Tinder है, Bumble है, सोसाइटीज हैं, कंसर्ट्स हैं, प्लेसेस हैं, ट्रेवल है। आपको ऑप्शन ही ऑप्शन दिख रहे हैं। आपको लगता है, वाओ, दैट लाइक अ, लाइक फुल सी इज फुल ऑफ फिशेज। मे बी आप वो सिर्फ इल्यूजन है, आपके लिए है भी नहीं ऑप्शन, बट आपको लगता है इतने सारे ऑप्शन हैं, तो यू कांस्टेंटली कीप टेलिंग योरसेल्फ कि मे बी व्हाट इफ देयर इज समवन बेटर? सो व्हाट इफ समवन बेटर? सो अगर मुझे ज्यादा रिसोर्सफुल चाहिए, तो ओ मे बी समवन इज बेटर, मोर रिसोर्सफुल देन दिस पर्सन। ओ मे बी देयर इज समवन बेटर, मोर ब्यूटीफुल देन व्हाटएवर दैट लाइन इज, जो आपने ड्रॉ करी थी रिलेशनशिप में आने के लिए। अब आपको लगती है कि ओ इतने ज्यादा हैं दुनिया में चीजें हैं तो ठीक है। हैव यू हर्ड दैट? इल्यूजन की वजह से हम जीते हैं। एंड इफ यू जस्ट वाना कंप्लीट विद दैट, देयर इज अ फिनोमिना, इसको बोलते हैं फ्रीक्वेंसी। फ्रीक्वेंसी इल्यूजन फिनोमिना। आप जिस चीज पे फोकस करते हो, वही आपको ज्यादा दिखती है। तो अगर आपने सोच लिया कि यार मेरे बॉयफ्रेंड से या मेरे हस्बैंड से या मेरी वाइफ से या मेरी गर्लफ्रेंड से बेटर है ऑप्शन मेरे पास। एक बार आपने देख लिया, आप दूसरी बार भी देखते हो, तीसरी बार भी देखते हो। फिर आपको हर जगह, हर सिचुएशन में वही दिखने लग जाती है आपको पहले। फिर वो न दैट या सो आई मीन आई एम जस्ट गोइंग टू डू ऑन। यू हर्ड ऑफ़ द आईसीके फैक्टर, आईसीके? आई नो, आई नो। गो अहेड एंड एक्सप्लेन फैक्टर। सो आई विल टॉक ऑफ़ टू थिंग्स। वन इज, मैं एक मूवी देखा था, इसमें थी। सो एक है कि जो डेटिंग ऐप से कभी मीनिंगफुल रिलेशनशिप बहुत कम बनते हैं। क्योंकि क्या होता है? आपने किसी ने आपका प्रोफाइल एक्सेप्ट किया, तो एक डोपामाइन किक मिलता है। फिर आपको सेकंड टाइम और डोपामाइन किक चाहिए, तो वापस उसी ऐप में जाएंगे। होपफुली एक और लेंगे। बट वो सेकंड टाइम डोपामाइन किक इज नॉट एज गुड एज द फर्स्ट टाइम। मार्जिनल यूटिलिटी का प्रिंसिपल है। तो फिर आपको और चाहिए। एक और डोपामाइन किक चाहिए। तीसरा आ गया, तीसरे को मैच करने के लिए चौथा नहीं है। चौथा और पांचवां चाहिए। तो ये नेवर एंडिंग स्क्रोल चलता है। इसलिए जो आप कह रहे हैं, ये उसकी अंडरलाइन साइकोलॉजी है। एंड दैट इज व्हाई आई थिंक यूएस में एक और ट्रेंड बना है कि व्हेन इट कम्स टू डेटिंग, अ लॉट ऑफ़ कपल्स आर नाउ लुकिंग एट ऑफलाइन इवेंट्स। दे वांट रियल कनेक्शन। तो ऑफलाइन इवेंट में बनता है। लेट्स गो टू ऑफलाइन इवेंट्स एंड लेट अस फाइंड। द आईसीके फैक्टर इज वेरी इंटरेस्टिंग। आई एम नॉट जज, बट मैं इसके बारे में पढ़ रहा था। आपने 90s में एली मबल सीरीज देखी है? बहुत हिट थी। एली मबल एक सीरीज थी, तो उसमें ये टर्म पहली बार आया था। बेसिकली आईसीके का मतलब यह है कि अ द बॉय एंड द गर्ल आर इन अ स्टेबल रिलेशनशिप, मगर देयर इज वन स्मॉल एक्ट व्हिच द इदर पर्सन डज़, एंड एज अ रिजल्ट ऑफ़ व्हिच आपको लगता है, इसके साथ तो रहना ही नहीं चाहिए। और वो स्मॉल एक्ट इतना हो सकता है कि मेरे को चॉपस्टिक यूज़ करना नहीं आता, मेरे लिप्स में मैंने क्रीम नहीं लगाया, या मैं खाने के टाइम फोर्क और स्पून गलत हाथ में रखा हूँ। तो बिकॉज ऑफ़ दैट मुझे लगता है, इसके साथ मैं कैसे रह सकता हूँ? एंड दैट इज द आईसीके फैक्टर, व्हिच इज आल्सो कंट्रीब्यूटिंग अ लॉट टू इश्यूज दैट हैव, दैट हैव। इट इज बिग। आप छोटी चीज को इतनी बड़ी बना देते हो कि देन यू स्टार्ट हेटिंग। एक आ गई, मेरे को अब नहीं करना, अब तो नहीं करेंगे। बिकॉज़ यू थिंक मेरे पास उतने सारे ऑप्शंस हैं, जब शायद ऑप्शंस हैं ही नहीं। हां, दैट्स अ बट इंटरेस्टिंग। थैंक यू सो मच फॉर कमिंग हियर। एक्चुअली मैं आपसे बात करते ही जा सकता हूँ, करते जा सकता हूँ। इट्स अ नेवर एंडिंग कन्वर्सेशन। आई लव इट। हमने स्टार्ट किया था इंडियन वर्क कल्चर पे, वी एंडेड ऑन लोनलीनेस एंड पार्टनर्स, एंड वाओ, लाइक इट्स इट्स ऑलवेज लाइक दैट। इफ यू नोटिस हमारा पैटर्न यूँ होता है। एंड इट्स बट थैंक यू सो मच फॉर कमिंग। अगेन, ऑलवेज अ प्लेज़र। ऑलवेज अ प्लेज़र। कमिंग, कम, लाइक हैविंग यू हियर। एंड आई होप टू सी यू अगेन एंड अगेन एंड अगेन। वी विल मेक दिस इदर अ सिक्स मंथली अफेयर और अ यरली अफेयर टू डू दिस, बट इट्स फन। यू आर डूइंग वेरी वेरी वेल। जस्ट जस्ट कीप डूइंग व्हाट यू आर डूइंग। थैंक यू सो मच। लवली टू सी यू। हाँ, हाउ इज़ लाइफ? वेरी गुड। सो इन द बिगिनिंग मुझे ऐसा लगता है कि कुछ तुम्हें ना एक डंडा पड़ा रहना चाहिए, राइट? तो उस टाइम पे जब मैं मूव किया था इंदौर से मुंबई, सो मेरा बजट था अराउंड 50000, मैं रेंट दूंगा मैक्स, राइट? और वो वाला घर था 75000। ओके? और मुझे बहुत अच्छा लगा। तो आई वाज़ लाइक कि अगर मैंने 75 लिया तो मुझे पड़ा रहेगा कि मैं ये एक्स्ट्रा 25000 मुझे निकालने ही निकालने। आई वोंट बी एबल टू बी कंटेंट, क्योंकि मैं ₹1 लाख महीने के आसपास पहुँच गया। हम वॉक आउट, पुश इट। सो माय मोटिवेशन वाज़ मोर कि थोड़ा मैं, क्योंकि मेरा और कहीं खर्चा नहीं था। मैं एक्स्ट्रा खर्चा करूंगा, तो दैट वाज़ जस्ट अ स्टुपिड लॉजिक आई यूज़्ड टू फीड मायसेल्फ़। इट्स नॉट स्टुपिड। शाहरुख खान की फिलॉसफी है, घर अपने औकात से थोड़ा ज्यादा लो। हां हां, आई नो, शाहरुख खान की फिलॉसफी है ये। बट ये मुझे अभी पता चला, शाहरुख खान की, जब राजकुमार राव ने बोला और वो वायरल हुआ। उसके पहले मुझे नहीं पता था ये। थैंक यू सो मच फॉर वाचिंग दिस पॉडकास्ट टिल दी एंड। अब आपको तीन चीजें करनी हैं। सबसे पहले चैनल को सब्सक्राइब कर लो। नंबर टू, कमेंट्स में हमें बताओ कि और कौन से गेस्ट हैं एंड और ऐसे कौन से टॉपिक्स हैं जिनमें आप चाहते हो कि हम पॉडकास्ट बनाएं, और आपकी उससे ज्यादा बेटर हेल्प होगी एंड आपको ज्यादा वैल्यू मिलेगी। एंड नंबर थ्री, ये एपिसोड किसी एक इंसान के साथ जरूर शेयर करना जिसकी लाइफ में एक पॉजिटिव चेंज आएगा, जिसको इस पॉडकास्ट कन्वर्सेशन सुनने के बाद लाइफ में हेल्प होगी। क्योंकि एक कन्वर्सेशन इज़ इनफ टू चेंज समवनज़ लाइफ। आई विल सी यू नेक्स्ट टाइम। आ [संगीत]