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Unhygienic Indian Street Food: Why People Are Dying After Eating! ft. @AbhiandNiyu

Traya Health22:26

Transcription

अगर आप आजकल बहुत ज्यादा फूड ऑर्डर करते हैं या फिर रास्ते का खाना या जंक फूड कंज्यूम करते हैं, देन दिस वीडियो इज फॉर यू। क्योंकि 250 से ज्यादा बच्चे बिस्किट्स खाकर बीमार पड़ गए हैं। हैदराबाद का डाटा कहता है कि छह में से एक इंसान स्ट्रीट फूड खाकर बीमार पड़ जाता है। यहां तक कि इस साल एक इंसान ने शावर्मा खाया और इस शावर्मा ने उसकी जान ही ले ली। ये सारे इंसीडेंसेस एक सवाल उठाते हैं: क्या भारत का खाना सेफ है और इससे हमें क्या फर्क पड़ता है? आइए जानते हैं आज के इस वीडियो में। वेलकम टू अ न्यू एपिसोड ऑफ द हेल्थ चेक सीरीज, पावर्ड बाय तया।

इस वीडियो में हम आपको अनरियलिस्टिक एडवाइस बिल्कुल नहीं देंगे कि सारा का सारा बाहर का खाना बंद कर दीजिए। नो। इनफैक्ट, वीडियो के एंड में हम आपको कुछ ऐसे प्रैक्टिकल टिप्स और ट्रिक्स बताएंगे जिससे आप आपकी लाइफ भी एंजॉय कर सकते हैं और हेल्थ को भी सिक्योर रख सकते हैं।

चैप्टर वन: डेंजरस खाना। बचपन में हम कहते थे, "अन्न है पूर्ण ब्रह्म," लेकिन आज बाहर के खाने के साथ यमराज से मुला होने के चांसेस बढ़ते नजर आ रहे हैं। रीजंस क्या हैं? इस साल अप्रैल और मई के महीने में रिपोर्ट्स निकल कर आए कि हांगकांग और सिंगापुर में भारत के मसाले बैन हो रहे हैं। रीजन? क्योंकि हमारे मसालों में पेस्टिसाइड्स की मात्रा इतनी ज्यादा थी कि कैंसर होने के चांसेस थे। यह बात सुनने पर हमारी अथॉरिटीज ने क्या किया? पेस्टिसाइड्स कम नहीं किए। इनफैक्ट, हमारे मसालों में मैक्सिमम कितने पेस्टिसाइड्स हो सकते हैं, इसका नंबर 10 गुना बढ़ाया, 10 टाइम्स!

स्ट्रीट फूड हमारे गट के लिए कितना हार्मफुल हो सकता है, इसके पीछे का साइंस समझने के लिए हमने न्यूट्रीशनिस्ट संगीता अयर मैम से बात की। उनसे हमने समझा कि डेंजरस खाने के इस इशू को सॉल्व करने के लिए हम क्या कर सकते हैं। "रेगुलेटरी अथॉरिटीज इन इंडिया नीड टू बिकम एक्सट्रीमली कॉशस, बिकॉज यह पब्लिक हेल्थ प्रॉब्लम बन रही है। अब एंड आई एम सॉरी, आप हर एक को नहीं बोल सकते हो कि ऑर्गेनिक हल्दी खरीदो, ऑर्गेनिक ये खरीदो। मैं खुद नहीं अफोर्ड कर पाती कभी-कभार ये ऑर्गेनिक फूड। ओके, सो दैट इज नॉट द सॉल्यूशन। देयर हैज टू बी स्ट्रिक्ट रेगुलेशन। लॉज बनाने वालों के लिए टॉप प्रायोरिटी कंज्यूमर्स की हेल्थ होनी चाहिए, लेकिन लगता है उनके लिए कंपनियों के इंटरेस्ट ज्यादा इंपॉर्टेंट हैं।"

सिचुएशन ऐसी है कि बेबी फूड के नाम पर बिकने वाले प्रोडक्ट्स में भी शुगर होती है। सेम कंपनी के सेम प्रोडक्ट्स में यूरोप में शुगर नहीं होती, क्योंकि वहां के रूल्स स्ट्रिक्ट हैं। यानी इंडियन बच्चों को बचपन से ही डायबिटीज दिया जाता है। मार्च 2020 से लेकर 2023 तक, 3 सालों के लिए, एफएसएसएआई ने 4 लाख 300 फूड सैंपल्स टेस्ट किए। इनमें एक शॉकिंग न्यूज़ सामने आई कि 25% सैंपल्स कंटेमिनेटेड थे। हर चार में से एक फूड आइटम एग्ज़िस्टिंग फूड सेफ्टी लॉज को फॉलो ही नहीं करता। चॉकलेट्स में कीड़े निकलने की किस्से हर तीन या चार सालों में हम सुनते ही हैं, लेकिन मेन मुद्दा यह है कि इन रिपीट ऑफेंडर्स पर क्या एक्शन ली जाती है? एक्शन कैसी होनी चाहिए? जापान की ओर देखते हैं। जापान में एक इंडियन के साथ यह इंसीडेंस हुआ: उसने मार्केट से एक पिस्ता का पैकेट खरीदा था जिसमें कुछ कीड़े दिखे। उसने Instagram पर दिए जाते हैं। यह प्रोडक्ट इम्पोर्टेड प्रोडक्ट था और इस एक कंप्लेंट की वजह से वो प्रोडक्ट ही रातों-रात सुपर मार्केट से हट गया। स्विफ्ट एक्शन में हम पीछे छूट जाते हैं। यह एक रियलिटी है। स्ट्रिक्ट लॉज ना होना, उनका इम्प्लीमेंटेशन ना होना और ऑफेंडर्स को सजा ना होना, यह तीन रीजंस हैं कि भारत का खाना सेफ नहीं है। चलिए, स्ट्रीट फूड की ओर मुड़ते हैं।

चैप्टर टू: स्ट्रीट फूड ऑफ इंडिया। इस समर में मुंबई के बीएमसी ने खुद सिटीजंस को स्ट्रीट फूड अवॉइड करने के लिए कहा था। क्यों? चलिए समझते हैं। टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन इंडिया का यह रिसर्च पेपर कहता है कि स्ट्रीट फूड सेफ ना होने के चार रीजंस हैं: माइक्रो ऑर्गेनिज़म्स, केमिकल कंटेमिनेशन, पर्सनल हाइजीन और एनवायरमेंटल हाइजीन। माइक्रो ऑर्गेनिज़म्स: रास्ते पर इलेक्ट्रिसिटी होती है, नहीं तो सुबह-सुबह बनाए हुए खाने में शाम तक हाई टेंपरेचर्स की वजह से साल्मोनेला, ई. कोली और स्टेफिलोकोक्कस ग्रो हो सकता है। केमिकल कंटेमिनेशन: सैम्पल्स हैं जिसके बारे में हम स्कूल से पढ़ते आए हैं। आज मार्केट सिंथेटिक पनीर से भरा पड़ा है जो दूध से नहीं, केमिकल से बनता है। कई बार डिटर्जेंट तक पनीर में यूज़ होता है। रास्ते पर मिलने वाले ₹10 के पनीर रोल में आप ही सोचिए कि पनीर होगा या और कुछ। पर्सनल और एनवायरमेंटल हाइजीन: पर्सनल और एनवायरमेंटल हाइजीन के बारे में क्या ही बोले? गटर के बगल में पानीपुरी के ठेले होते हैं। कोई भी भैया बिना ग्लव्स के ही खाना परोस रहे हैं। इस वीडियो में देखें कि किस तरह से प्लेट्स वॉश हो रहे हैं। सोया चाप नॉर्थ इंडिया में एक फेवरेट स्ट्रीट फूड माना जाता है। यहां आप देख सकते हैं कि किस तरह से वो बनता है। आप ही हमें कमेंट्स में बताइए कि क्या यह सब देखने के बाद आप सोया चाप खा सकते हैं? यही रीजन है कि फॉरेन टूरिस्ट भी जब भारत आते हैं तो स्ट्रीट फूड से दूर ही रहते हैं। इनफैक्ट, हमारी इमेज इतनी खराब बन चुकी है कि फॉरेनर्स भारत में आकर गंदा खाना खाकर होने वाले स्टमक इंफेक्शन को डेली बैली कहते हैं। यह शर्म की बात है कि भारत की राजधानी का नाम एक बीमारी से जुड़ा है। आपको रैंक करना होगा कि जो अलग-अलग स्ट्रीट फूड आपके आसपास हम देखते हैं, हमारे आसपास जो हम देखते हैं, तो स्टार्टिंग फ्रॉम द अनहेल्थीएस्ट, इफ वी हैव टू गो टू समव्हाट हेल्थीएस्ट, हम वैसे कैसे रैंक कर सकते हैं?

"इन माय ओपिनियन, फ्रॉम अ हेल्थ स्टैंड पॉइंट, द वर्स्ट इज़ भेलपुरी, सेवपुरी, पानीपुरी, ऑल दैट वैरायटी, रगड़ा पट्टिस। ओके, जहां पे आपने ठेले वाले भैया को देखा होगा काफी अपना हाथ यूज़ करके-करके, फिर उसके ऊपर कटा हुआ अनियन और सेव। इसमें क्या हो गया है? मैनुअल इंटरवेंशन और रॉ फूड का इंटरवेंशन बहुत ज्यादा है। सो द एबिलिटी फॉर यू टू गेट एन इंफेक्शन इज़ द हाईएस्ट। इसके बाद आता है एनीथिंग दैट इज़ रॉ एंड कट, जैसे आपने रोड साइड पे फ्रूट प्लेटेर कटा-कटा हुआ ले लिया या फ्रूट एंड वेजिटेबल कटा हुआ ले लिया या बना-बनाए वाली झटपट ले लिए। वो रॉ स्पॉट, कुक्ड नहीं हुआ है। आपको पता नहीं है कि वो कब कटा था, उसमें कौन सी मक्खी बैठी है, कितना पोल्यूशन आया। वो मत लीजिए। इससे अच्छा फ्रूट आप अपना कैरी कीजिए। द थर्ड थिंग दैट आई विल टेल यू दैट इन द ऑर्डर दैट यू शुड नॉट हैव इज़ एनीथिंग दैट इज़ डीप-फ्राइड: ब्रेड पकोड़ा, बड़ा पौआ, ओके, कंप्लीटली अवॉयडेबल, बिकॉज़ दैट ऑयल हैज़ बीन रीयूज़्ड बहुत-बहुत बार। द थिंग्स दैट यू कैन हैव, ओके, और समथिंग लाइक अ आलू सैंडविच, नॉट द हेल्थीएस्ट थिंग, बट से द बॉम्बे आलू सैंडविच, वे ग्रेवी में करके या बहुत जगह पे मिलता है। आलू का मसाला ऑलरेडी पका हुआ है, वापस ग्रिल में जाता है। ऑल दीज़ पीपल हू सर्व गुड साउथ इंडियन खाना लाइक इडली जो सवेरे पक के आती है, एनीथिंग दैट इज़ स्टीम-कुक्ड इज़ स्टिल ओके टू हैव इट। इट विल नॉट कॉज़ यू ट्रबल, यू विल नॉट गो रॉन्ग विथ एग्स आल्सो।"

चैप्टर थ्री: जंक फूड ऑफ इंडिया। जंक फूड क्या होता है? जंक फूड यानी वो खाना जो न्यूट्रिशन में कम और कन्वीनियंस में ज्यादा होता है। इंस्टेंट नूडल्स, चिप्स एंड वेफर्स, पिज़्ज़ाज़, बर्गर, बिस्किट्स, सब कुछ इस कैटेगरी में आता है। जंक फूड में अनहेल्दी फैट्स, एडेड शुगर और ढेर सारा साल्ट होता है। चलिए, सिर्फ चिप्स का एग्जांपल लेते हैं। ये चिप्स इतने अनहेल्दी हैं कि अगर आपने 100 ग्राम चिप्स खाए तो एक दिन में जितना साल्ट खाना चाहिए, उससे 4.4 टाइम्स एक्स्ट्रा साल्ट आप कंज्यूम करेंगे। हाई सोडियम डैमेज ब्लड प्रेशर, ओबेसिटी, किडनी डिजीज, यहां तक गैस्ट्रिक कैंसर जैसी बीमारियां आपको दे सकता है। हम सबको इंस्टेंट नूडल्स तो बहुत पसंद है ना, लेकिन फूड फार्मर ने रिसेंटली एक्सपोज़ किया कि हमारे फेवरेट इंस्टेंट नूडल्स में कितना ज्यादा सोडियम होता है। हमें एक दिन में 1500 से 2000 मिलीग्राम सोडियम सफ़िशिएंट होता है और नूडल्स के एक पैक में ही 700 से 1800 मिलीग्राम सोडियम होता है। एंड दैट इज़ डेंजरस। इंस्टेंट नूडल्स में जब आपकी मम्मी, मैं एक बार आपको नेगोशिएट करके स्कूल में बनाती थी, वो उसमें पीज़, गाजर, ये कैप्सिकम, अनियन, टोमेटो सब डाल के एक छोटे नूडल्स के पैकेट को फाइबर के साथ मिला के आपके पेट भर्ने के लिए देती थी। आपका पेट भर जाता था। अब हमने कॉलेज में जाते ही डिस्कवर कर लिया कि रात के 12 बजे दो पैकेट इंस्टेंट नूडल्स में चीज़ डालो, एक स्लैप बटर डालो और उसको खाओ। द टेस्ट इज़ हेवनली। व्हाट डिड यू जस्ट ऐड? आपने एक रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट लिया, उसमें ढेर सारा बटर और चीज़ डाला जिसमें फैट है और साल्ट है, उसके बाद उसके ऊपर आपने केचप डाल के खाया। देयर इज़ ज़ीरो सेटायटी टू सच फूड, एंड यस, ऑल फ़ास्ट फ़ूड्स हैव दिस प्रॉब्लम। व्हाट इज़ इवन मोर डेंजरस कि ये सारा जंक फूड बच्चों की ओर टारगेट किया जाता है। स्कूल के कैंटींस में इज़िली अवेलेबल होता है। कलरफुल पैकेट्स में बेचा जाता है और तो और, पैकेट पर कोई वार्निंग भी नहीं होती कि यह हमारे हेल्थ के लिए कितना हानिकारक हो सकता है। बिस्किट्स की बात करें तो हर बिस्किट में एक चम्मच पाम ऑयल होता है, यानी आपको 10 मिनट, 10 की स्पीड पर जॉगिंग करनी पड़ेगी सिर्फ़ ये एक चम्मच पाम ऑयल की कैलोरी बर्न करने के लिए। पाम ऑयल 50% सैचुरेटेड फैट से बनता है जो बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है। एंड यू नो द वर्स्ट पार्ट, पाम ऑयल को कोई फ्रेगरेंस नहीं होता, टेस्ट भी बेकार होता है। पाम ऑयल पंप या कैरेट जैसा टेस्ट करता है, लेकिन आपका बिस्किट तो वैसा टेस्ट नहीं करता ना, यानी आप समझ रहे हैं कि हो क्या रहा है। बिस्किट की कंपनियां पाम ऑयल भी यूज़ कर रही हैं और उसके टेस्ट को काउंटर करने के लिए एक्स्ट्रा शुगर भी ऐड कर रही हैं। शुगर को दुनिया का सबसे डेंजरस ड्रग मानते हैं, जिसके बारे में हमने इस वीडियो में बात भी की है। आई फील द वर्स्ट पार्ट अबाउट ऑल द जंक फूड, ऑल द स्वीट फूड इज़ दैट हम एक खा के रुक नहीं पाते। हम कभी-कभार एक-एक खा ले, जलेबी खाए तो इट्स फाइन, आवर बॉडी कैन डील विद इट, बट एक भी खाकर हम रुकते नहीं हैं। दैट इज़ एग्ज़ैक्टली द डेफ़िनेशन अभी ऑफ़ हाइपर पलटेबल फूड। मतलब आपके बॉडी में कोई मैकेनिज़्म ही नहीं है टू से अब बस हो गया। एंड आई से दिस अ लॉट। आप अनलिमिटेड अंडे नहीं खा सकते हो, आप अनलिमिटेड पनीर नहीं खा सकते हो, आप अनलिमिटेड दाल नहीं खा सकते हो, लेकिन आप छह गुलाब जामुन खा सकते हो और उसके बाद कुछ और भी खा सकते हो। देयर इज़ अ ब्लिस पॉइंट इन फूड, ठीक है? जो फ़ूड साइंटिस्ट जब एक अल्ट्रा प्रोसेस्ड फ़ूड को मैन्युफैक्चर करते हैं, वो बस पॉइंट लाते हैं, बिकॉज़ वो ब्लिस पॉइंट जब आपके टेस्ट बड्स को हिट करता है, आपकी सेटायटी वाला जो सिग्नल है वो बंद हो जाता है और यह ब्लिस पॉइंट आता है विथ अ सर्टेन कॉम्बिनेशन ऑफ़ कार्बोहाइड्रेट और शुगर, फैट एंड साल्ट। एवरी हाइपर पलटेबल फ़ूड हैज़ बीन डिज़ाइन्ड विथ दिस ब्लिस पॉइंट साथ। तो व्हाई इज़ गट हेल्थ इम्पोर्टेंट एंड हाउ आर पीपल डैमेजिंग देयर गट माइक्रोबायोम बाय इंक्रीजिंगली कंज्यूमिंग स्ट्रीट फ़ूड और आउटसाइड फ़ूड? गट को एक्चुअली लोग सेकंड ब्रेन बोलते हैं। इन मेनी वेज़, इट्स व्हाई यू से, "गट। मुझे गट फ़ीलिंग है।" आई एम श्योर यू वुड हैव हर्ड अबाउट द गट-ब्रेन एक्सिस। बेसिकली योर मूड्स, योर मेंटल हेल्थ, योर वेल-बीइंग, योर प्रोडक्टिविटी, योर फ़ोकस इज़ इन मेनी वेज़ रिलेटेड टू कितना अच्छा है। द मोर यू ईट प्रोसेस्ड फ़ूड, अल्ट्रा प्रोसेस्ड, जहां पे आपने एक खाने को उसके ओरिजिनल फ़ॉर्म से इतना दूर कर दिया है, इट विल हैव एन इफ़ेक्ट ऑन योर गट। आपने एक एप्पल लिया, ठीक है, और एक एप्पल को खाया। यू आर ईटिंग इट एज़ क्लोज़ टू नेचर, करेक्ट? आपने एप्पल को अब कट किया और पीसेज़ किया और उसका छिलका हटा दिया। आपने उसको थोड़ा प्रोसेस किया क्योंकि आपने एक पोर्शन उसका हटा के खाया। फिर भी बेटर है। आपने एप्पल का अब एप्पल पाई बनाया। ओके? आपने उस एप्पल की न्यूट्रिशन को और थोड़ा चेंज करके उसमें कुछ ज्यादा ऐड करके उसका कुछ और बनाया। अब आपने एप्पल को एप्पल जूस बनाया। बेसिकली सिर्फ़ फ़्रुक्टोज़ लिया, उसके माइक्रोन्यूट्रिएंट्स चले गए, उसका फाइबर वैल्यू चला गया। वी आर ईटिंग फ़ूड्स दैट आर कैलोरिक हाई इन वैल्यू बट आर न्यूट्रिशनली लो इन वैल्यू, एंड दैट इज़ व्हाट हैपन्स विथ फ़ास्ट फ़ूड एंड जंक फ़ूड। इन अ नटशेल, द प्रॉब्लम विथ ईटिंग फ़ूड्स दैट आर कंप्लीटली जंक और हाइपर पलटेबल एंड प्रोसेस्ड रेगुलरली इज़ दैट यू आर ओवरफ़ेड बट अंडरन्यूट्रिशन्ड। जब आप बार-बार, हर रोज़, ओवर अ पीरियड ऑफ़ टाइम, वॉयड ऑफ़ फाइबर, न्यूट्रिएंट्स, आप अपना खाना खाते हो, देयर इज़ अ चेंज इन प्रोफ़ाइल ऑफ़ योर गट माइक्रोबायोम, एंड दैट स्टार्ट्स टू गिव यू साइंस ऑफ़ एक्ने, ब्लोटिंग, वाटर रिटेंशन, नॉट फ़ीलिंग ग्रेट, नॉट बीइंग एबल टू स्लीप। ये सारे साइंस होते हैं। यानी इस वीडियो में हमने समझा कि पैकेज्ड खाना, स्ट्रीट फ़ूड और जंक फ़ूड में क्या-क्या प्रॉब्लम्स हैं, लेकिन यह तो सबको पता है। आपकी मम्मी भी आपको यही कहेगी कि बाहर का खाना आपके लिए बुरा है। जब तक हम सॉल्यूशंस पर बात नहीं करते, तब तक हम आगे कैसे बढ़ पाएंगे?

चैप्टर फोर: सॉल्यूशंस। भारत के फ़ूड प्रॉब्लम को सॉल्व करना हमारे साथ-साथ सरकार की भी जिम्मेदारी है। सरकारी लेवल पर तीन सॉल्यूशंस इम्प्लीमेंट हो सकते हैं: इंस्पेक्शंस, इंफ्रास्ट्रक्चर और पनिशमेंट। फ़्रीक्वेंसी रद्द करना छोड़कर, इंस्पेक्टर्स रिश्वत लेकर उन्हें ऑपरेट करने दे रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर में कोल्ड स्टोरेज एक इम्पोर्टेंट फ़ैक्टर है। भारत की वार्म क्लाइमेट की वजह से यहां खाना जल्दी खराब हो जाता है। जहां रेफ्रिजरेशन पॉसिबल नहीं है, वहां इनोवेटिव आइडियाज़ की ज़रूरत है। पिछले साल हम स्टार्टअप इंडिया की ओर से फ़्रांस विवाटेक के लिए गए थे। यहां हमने T90 थर्मल सॉल्यूशंस के बारे में जाना। यह एक इंडियन स्टार्टअप है जो ऐसे कोल्ड जेल्स बेचते हैं जिनसे खाना बिना इलेक्ट्रिसिटी के ज्यादा समय के लिए फ़्रेश रह सकता है। ऐसे सॉल्यूशंस को आइडेंटिफ़िकेशन मेंटेन करना होगा। जब तक कंपनीज़ को कंज्यूमर्स की हेल्थ के साथ खेलने की सजा नहीं मिलती, तब तक वह सुधरने वाली है नहीं। यूरोप में स्ट्रिक्ट लॉज़ हैं, तो सेम कंपनीज़ यूरोप में खाना बेचते समय ज्यादा केयरफुल रहती हैं और इंडिया आते ही कॉस्ट कटिंग करके प्रॉफ़िट मार्जिन बढ़ाती हैं। यह गलत है और इससे कंज्यूमर्स को प्रोटेक्ट करना सरकार की जिम्मेदारी है। जब हम फ़्रांस में गए तो हमने देखा कि उनके पैकेज्ड प्रोडक्ट्स पर लेबल्स तो होते हैं ही, साथ ही साथ ऐसे A टू E रेटिंग भी होती है ताकि आप कंपेयर कर पाओ कि कौन सा प्रोडक्ट ज्यादा हेल्दी है, वेयर A इज़ वेरी हेल्दी एंड E इज़ वेरी अनहेल्दी। वी नो कि हमें लेबल्स पढ़ने चाहिए, लेकिन छोटे-छोटे अक्षरों में दिए गए लेबल्स हर बार पढ़ना पॉसिबल नहीं होता, तो यह सिस्टम वहां काम आता है। फ़ॉर एग्ज़ांपल, मैंने देखा कि एक बिस्किट की रेटिंग B थी और एक बिस्किट की रेटिंग E। वैसे तो दोनों अनहेल्दी ही हैं, लेकिन B रेटिंग वाला बिस्किट E रेटिंग वाली बिस्किट से बेटर है। तो इस एक पैकेजिंग के बदलाव से, एज़ अ कंज्यूमर, मैं बेहतर डिसीज़न ले पाया। ऐसे क्रिएटिव सॉल्यूशंस की भारत को सख्त ज़रूरत है। अगर आप भी ये सॉल्यूशन सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं तो इस वीडियो को WhatsApp करें। कैसे सेफ रह सकते हैं? वीडियो की शुरुआत में मैंने आपसे कहा था कि हम आपको कंप्लीटली स्ट्रीट फ़ूड अवॉइड कीजिए, ऐसा बिल्कुल नहीं कहेंगे, बिकॉज़ हमारे कहने से क्या फ़र्क पड़ता है, लेकिन कुछ आइडियाज़, कुछ सॉल्यूशंस ज़रूर बताएंगे जिससे आप थोड़े ज्यादा सेफ रह पाएं। सॉल्यूशन नंबर वन है पानी। पानीपुरी देख के खाइए। आप कहां खा रहे हो, बिकॉज़ वो पूरी में प्रॉब्लम नहीं होगा, लेकिन वो पानी में ज़रूर प्रॉब्लम हो सकता है। शुगर केन जूस समर्स का फेवरेट ड्रिंक है, लेकिन अक्सर लोग जूस में आइस डालते हैं। ये आइस कैसे पानी से बनता है और किस कंडीशन में दुकान तक पहुंचता है, नोबडी नोज़। वैसे ही फ़ूड आइटम्स जिनमें पानी ज्यादा यूज़ होता है, जैसे चटनी, उसे अवॉइड कीजिए। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ कहता है कि भारत के 9 से 13% कंटेमिनेटेड पानी में एच. पाइलोरी बैक्टीरिया पाया जाता है, जिससे पेट का अल्सर, यहां तक कैंसर भी हो सकता है। तो पानी वाले आइटम से संभल कर रहिए।

सॉल्यूशन नंबर टू: ईट फ़्रेश। वीडियो की शुरुआत में हमने माइक्रो ऑर्गेनिज़म्स, केमिकल कंटेमिनेशन और हाइजीन की बात की। यह तीन ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें स्ट्रीट फ़ूड खाते समय आपको हमेशा याद रखना है। जब आप फ़्रेशली बना हुआ सैंडविच खाते हैं, वो कंपैरेटिवली सेफ है। ऑफ़कोर्स, केमिकल कंटेमिनेशन पर और हाइजीन पर इसका कोई असर नहीं होता, लेकिन सीरियस इलनेसेस के चांसेस कम ज़रूर होते हैं। पर्सनली स्पीकिंग, मुझे भुट्टा खाना बहुत पसंद है, क्योंकि वो कवर्ड होता है, मेरी आंखों के सामने बनता है और गर्म होता है। सॉल्यूशन नंबर थ्री: चीप इज़ नॉट ऑलवेज़ द बेस्ट। आपसे प्रीटेंडर आपको ₹1 का समोसा हर बार जब तल रहा है, वो तेल चेंज नहीं कर रहा है, वरना वो आपको ₹1 में मिलता नहीं। यू सी, हम सब मिडिल क्लास से आते हैं, तो जो भी सस्ता है, उसे अच्छा समझकर मुंह में डाल देते हैं। लेकिन चीप समोसा मीन्स चीप ऑयल, चीप पाव भाजी मीन्स चीप बटर और रास्तों पर नॉनवेज के नाम पर कौन से पंछी को मारकर उसकी बिरयानी बनाते हैं, किसी को पता नहीं होता। अगर आपको स्ट्रीट फ़ूड खाने का मन करे तो ऐसे जगह का खाना खाइए जहां आप किचन देख पाओ, उसकी इर्द-गिर्द का आप अपना नज़र एक बार घुमाइए। ओके, कैन यू सी गार्बेज कैन्स? कैन यू सी अ रीयूज़ेबल प्लेट्स दैट आर बीइंग डिप्ड इन एक बकेट पानी में, डिप-डिप हो के उसी पे हो रहा है? कैन यू प्लीज़ टॉलरेट अनफॉर्चूनेटली, बट लुक एट द हाइजीन ऑफ़ द पर्सन प्रिपेयरिंग इट। बर्तन कैसे धुल रहे हैं, यह आपके आंखों से देखो। इंग्रेडिएंट्स पर मक्खियां तो नहीं, यह देखो और यह याद रखो कि हमारी इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग बनाना सबसे बेहतर सॉल्यूशन होता है, क्योंकि कितनी भी कोशिश करें हम, हमेशा-हमेशा के लिए तो स्ट्रीट फ़ूड या जंक फ़ूड से दूर नहीं रह सकते। मैं ऑल-इन या ऑल-आउट कभी नहीं बोलती हूं, क्योंकि वो प्रैक्टिकल नहीं। इंस्टेंसेस को मिनिमाइज़ कीजिए। इनस्टेड ऑफ़ डूइंग इट एवरी डे, अगर आपने हफ़्ते में एक बार एक पीस ऑफ़ चकली खा लिया, कुछ नहीं होगा। हर रोज़ पानीपुरी खाना, हर रोज़ सेवपुरी खाना, हर रोज़ यू नो, लीली, ब्रेड पकोड़ा ये मत कीजिए। एंड देयर आर मेनी वेज़ टू मिनिमाइज़ दिस। कीप सम फ़्रूट एंड नट्स इन योर बैग। इट्स नॉट रॉकेट साइंस। जब आपका 80% ऑफ़ योर न्यूट्रिशन एंड लाइफ़स्टाइल ठीक रहेगा, 20% आपकी बॉडी सारे डेविएशन अलाव करती है। हमें सतर्क रहना है, खुद को एजुकेट करना है, जैसे आप आज यह वीडियो देख रहे हैं, वैसे ही आप एफएसएसएआई के वेबसाइट पर जाकर एडल्ट्रेशन के बारे में पढ़ सकते हैं। वहां आपको आजकल मार्केट में कैसे एडल्ट्रेशन हो रहा है, इसकी जानकारी मिल सकती है। फिर आप वैसे प्रोडक्ट्स अवॉइड कर सकते हैं या फिर टेस्ट करके खरीद सकते हैं। केसर रियल है या फ़ेक, पनीर रियल है या फ़ेक, हल्दी में मिलावट कैसे होती है, यह पहचानने के तरीके आप ऑनलाइन ढूंढ सकते हैं। मेक योर फ़र्स्ट टू मील्स, व्हिच इज़ योर ब्रेकफ़ास्ट एंड लंच, अ हाईली न्यूट्रिशस मील, जहां पे प्रोटीन ज़रूर हो। हम ओके, रिसर्च एंड मेनी स्टडीज़ हैव शोन दैट व्हेन यू आर प्रोटीन डिफ़िशिएंट इन योर फ़ूड इन द फ़र्स्ट हाफ़ ऑफ़ द डे, यू बिंज ऑन द सेकंड हाफ़ ऑफ़ द डे और ओवरईट ऑन द सेकंड हाफ़ ऑफ़ द डे। ओके, सो देयर आर टू मील्स देयर फ़ॉर यू बिफ़ोर फ़ोर। मेक श्योर दैट दोज़ मील्स आर राइट, एंड ओवर अ पीरियड ऑफ़ टाइम यू विल रिलाइज़ दैट द फ़ोर टू सिक्स फ़िनोमिना विल स्लोली रिड्यूस। नाउ, ओके, लेट्स से इट इज़ हैपनिंग द फ़ोर टू सिक्स। नाउ, अनफ़ॉर्चूनेटली, आवर एंटायर ऑफ़िस, कॉलेज एनवायरमेंट, फ़ोर से छह के बीच में सबसे गंदा खाना है, सब कुछ तला हुआ है और सब कुछ ये... देयर आर सम थिंग्स दैट यू कैन डू। ओके, ऑप्ट फ़ॉर अ फ़्रूट, नंबर वन। ओके? यू कैन ईट टू बोइल्ड एग्स, अगेन एज़ अ स्नैक, नो प्रॉब्लम। आप नट्स रखो, सीड मिक्स रखो। आप थोड़ा छाछ पी लो। ओके? भाभी तो वी हैव सम हेल्दी ऑप्शंस लाइक अनफ़्लेवर्ड ग्रीक योगर्ट। ओके? आपने नट्स और ग्रीक योगर्ट खाया या फ़्रूट और ग्रीक योगर्ट का एक कॉम्बिनेशन रखा, दैट इज़ बेटर। ओके? ट्राई एंड नॉट टू रीच आउट फ़ॉर दोज़ सॉल्टी, स्वीट, सेवरी स्नैक्स, क्योंकि अनफ़ॉर्चूनेटली, अ क्रेविंग इज़ लाइक एन एडिक्शन, राइट? ओके? वो एक इच होता है। आप हर रोज़ उसको स्क्रैच करोगे, हर रोज़ उस टाइम पे बॉडी मांगेगा। अगर आपको इस वीडियो से वैल्यू मिली, कुछ नया सीखने मिला, तो इस वीडियो को अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिए और हमें कमेंट्स में बताइए कि फ़ूड में मिलावट आपके शहर में कैसे होती है। अगर आपको यह वीडियो अच्छा लगा तो राया हेल्थ के [संगीत]