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Winding up part 1

Rahul Mittal12:09

Transcription

कि वाइंडिंग आफ वाइन निगम का मतलब क्या होता है? कि हम कंपनी की लाइट को खत्म कर रहे हैं। वोटिंग एंड कंपनी लाइफ बेसिकली यह लीगल प्रोसेस होता है जिसके थ्रू कंपनी बंद हो रहा है। कंपनी कभी भी इंसॉल्वेंट हो, हम कंपनी को कभी भी डिक्लेयर नहीं कर सकते, इवन अगर उसकी पोजीशन टैक्स पर करने की भी नहीं है, नाम तब भी हम उसे इंसॉल्वेंट कंपनी को कभी भी डिक्लेयर नहीं कर सकते। Company हमेशा वाइंडिंग अप कित्रंगी डिसोल्वड गीत ओके। वाइंडिंग अप एंड डिसोल्यूशन यह तो दिखने में तो सेम टाइम सेम लेकिन डीजल पॉइंट ऑफ व्यू से वाइंडिंग और डीसिल्लूशंड बहुत ही डिफरेंट है। अब डिफरेंट कैसे? आइए सबसे पहले तो फाइंडिंग आफ प्रेजेंट करते हैं डिसोल्यूशन को। पहले वाइंडिंग अप होता है, डिसोल्यूशन बाद में होता है।

वाइंडिंग अप वर्सेज डिसोल्यूशन से पहले और वाइंडिंग अप के बाद में डिफरेंस क्या हुआ नहीं है और वाइंडिंग अप हो चुका है फिर वाइल्ड कार्ड प्रविष्टि रिकॉर्ड सलूशन को। जो कंपनी का लीगल स्टेटस है वह चलता रहेगा। वाइंडिंग आफ हो गया डिसोल्यूशन नहीं हुआ, लेकिन यह जो पीरियड के बीच में जो कंपनी का जो स्टेटस है वो कंटिन्यू रहेगा। लेकिन जैसे ही डिसोल्यूशन हो जाएगा, कंपनी का स्टेटस खत्म हो जाएगा और कंपनी का जो नाम है वह रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में से रिमूव हो जाएगा, स्ट्राइक हो जाएगा। कोर पैकिंग डिफरेंस यह है कि वाइंडिंग अप में जो प्रोसीडिंग होती है वह करता है लिक्विडेटर, लेकिन डिसोल्यूशन में इस तरह की कोई भी प्रोसीडिंग नहीं होती। अब भी बाइंडिंग आफ में जो लिक्विडेटर होता है वह कंपनी को रिप्रेजेंट करता है। मतलब इट इज ए प्रूफ कंपनी की इमेज है, कंपनी को रिप्रेजेंट करता है लिक्विडेटर। लेकिन डिसोल्यूशन में ऐसा कुछ भी नहीं होता। वाइंडिंग अप में जो क्रेडिटर्स हैं उन्हें अपना डेट प्रूफ करने की ज़िन्दगी बढ़ती है, लेकिन डिसोल्यूशन में ऐसा कुछ नहीं होता। और जो कोर्ट का जो पॉवर होता है वह वाइंडिंग अप में जरूरी होता है। कोर्ट का ऑर्डर आना जरूरी होता है, कोर्ट का बुलावा आना जरूरी होता है, लेकिन डिसोल्यूशन में ऐसा होना जरूरी नहीं होता। वाइंडिंग अप में कोर्ट का बुलावा ना आए तो भी काम हो जाता है। तो डिफरेंट के भाई ने ब्रिटेन में पहले डिफरेंस है कि वाइंडिंग आफ डिसोल्यूशन से पहले होता है। डिसोल्यूशन वाइंडिंग अप के बाद होता है।

उस पीरियड के बीच में जो कंपनी का लीगल स्टेटस है वह चलता ही रहेगा, लेकिन जैसे ही डिसोल्यूशन हो जाएगा, लीगल स्टेटस कंपनी का खत्म हो जाएगा। सेकंड डिफरेंस है कि वाइंडिंग अप में लिक्विडेटर अपॉइंट होता है, डिसोल्यूशन में ऐसा कुछ नहीं होता। थर्ड थिंग, लिक्विडेटर कंपनी को रिप्रेजेंट करता है वाइंडिंग आफ जबकि डिसोल्यूशन में ऐसी कोई चीज नहीं होती। वाइंडिंग अप में क्रेडिटर्स अपनी डेट प्रूफ करनी पड़ती है कि इस कंपनी को मेरे इतने रुपए देने बाकी है, वह यह प्रूफ करना पड़ता है क्रेडिटर्स को, लेकिन डिसोल्यूशन में ऐसा कुछ नहीं होता। और वाइंडिंग अप में जो कोर्ट का आर्डर होता है वह जरूरी नहीं होता, लेकिन डिसोल्यूशन में कोर्ट का ऑर्डर नेसेसरी होता है। और उसके बाद नेक्स्ट है डिसोल्यूशन के नोट्स विद सलूशन। दो तरह का, दो तरीके से डिसोल्यूशन वर्ल्ड कप हो सकता है। सबसे पहला कंपलसरी वाइंडिंग आफ, 10th एनसीआरटी, एनसीआरटी 9th, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल, ए कंपलसरी वाइंडिंग आफ है और एक वॉलंटरी वाइंडिंग आफ। सबसे पहले बात करते हैं रिगार्डिंग कंपलसरी वाइंडिंग आफ। कंपलसरी वाइंडिंग आफ में किस-किस सर्कमस्टांसिज से कंपलसरी वाइंडिंग अप हो सकता है? सबसे पहले तो कंपनी का स्पेशल रिजोल्यूशन का पिटारा हो सकता है तो कंपल्सिव वाइंडिंग आफ बाय एनसीआरटी। अगर स्पेशल रिजोल्यूशन कंपनी ने स्पेशल रिजोल्यूशन पास कर दिया कि हमें वाइंडिंग अप करना है बाय एनसीआरटी तो उसके थ्रू हमारा वाइंडिंग अप हो सकता है। लेकिन जो हमारा टेंपर्ड ग्लास है वह बिल्कुल भी बांट नहीं है और इसमें के तो ट्रैक बैलेस नॉट वांट विद रिलेशन। जो पावर एडाप्टर एनसीईआरटी की, YouTube चैनल की जो पॉवर है वह डिस्क्रीशनरी है। मतलब ऐसा नहीं है कि कंपनी ने इस साल में कह दिया कि वह वाइट विनेगर, वाइट विनेगर तो यह यहां पर ट्रिब्यूनल की मर्जी चलेगी कि उसे अगर ठीक लगता है कि यह पब्लिक इंटरेस्ट मैटर है, कंपनी के इंटरेस्ट में ठीक है तो ही वह वाइंडिंग अप करेगा कंपनी को, तो ही वह कंपनी का वाइंडिंग अप करेगा। अदरवाइज वह कंपनी का वाइंडिंग आफ नहीं करेगा। तो कि टिकटों स्पेशल रिजोल्यूशन के प्रमाणिक अप कर सकते हैं। नेक्स्ट मोड इस कंपनी हैव एक्टेड अगेंस्ट थे नेशनल इंटरेस्ट। अगर कंपनी ने कुछ ऐसी चीज कर दी है जो नेशनल इंटरेस्ट के अगेंस्ट है, जो इंडिया की यूनिटी इंटिग्रिटी को भाई सारा इंडिग्निटीज यूनिटी को ग्राफिक करती है तो उस केस में भी वाइंडिंग अप कर सकता है एनसीएलटी। थर्ड इस वाइंडिंग अप बेसिक कंपनीज। फिर कंपनी के मीनिंग ऑफ कंपनीज के होती हैं जहां पर मोर देन 50% उनके सिक्योर्ड क्रेडिटर्स कंपनी के सिग्नल के पास जाते हैं एविडेंस के साथ कि हमारा कंपनी यह बिल्कुल खराब कंपनी है, ना हमें कुछ पैसे मिले इतने सालों तक तो उस केस में भी टर्मिनल वाइंडिंग अप कर सकता है कंपनी का। फोर्स वाइंडिंग बाय एप्लीकेशन टू आरओसी। अगर आरओसी को, रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज को अगर एप्लीकेशन किसी ने दे दी कि कंपनी फ्रॉड में, रोड में, प्रोडक्ट पैनल में काम कर रही है तो उस केस में भी इसका कंपलसरेली वाइंडिंग आफ हो सकता है बाय अपने फेस। अगर कंपनी अपनी फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स और एनुअल रिटर्न आरओसी को नहीं फाइल किया विद इन टाइम। फाइल विद इन टाइम। इस कंपनी को एवरी ईयर अपनी फाइनेंशियल स्टेटमेंट और एनुअल रिटर्न आरओसी को फाइल करनी होती है और लेकिन अगर कंपनी 5 साल तक लगातार, पांच साल तक अगर कंपनी नेम एंड फाइनेंशियल स्टेटमेंट एंड रिटर्न आरओसी को फाइल नहीं किया तो कंपनी का कंपलसरी वाइंडिंग अप हो जाएगा। सिक्सेस नॉट टू कमेंस बिजनस इन टाइम और सस्पेंड बिजनस। अगर कंपनी ने अपना बिजनेस कमेंट नहीं किया, शुरुआत नहीं की अपने बिजनेस की एक साल के अंदर-अंदर कंपनी बना ली। अब कंपनी बना ली लेकिन काम शुरू नहीं किया एक साल के अंदर-अंदर या फिर अगर सस्पेंड कह दिया कि वह हम सस्पेंड खत्म हो रहे हैं अवैध और है लेकिन पूरे साल आ बैठे हुए होली व और आपने सस्पेंड नहीं किया अपना बिजनेस तो इस केस में थे कंपलसरी वाइंडिंग आफ हो सकता है। लेकिन यहां पर एनसीएलटी के डिस्क्रीशनरी चलेगा। मतलब एनसीएलटी की मर्जी चलेगी कि वह चाहे तो वाइंडिंग अप कर दें इस कंपनी का, चाहे तो ना करें। सेवंथ, इनेबिलिटी टू पे डेट्स। अब इनेबिलिटी कब-कब ऐसा माना जाएगा कि कंपनी ने डेट पर नहीं किए? सबसे पहले अगर क्रेडिटर्स जितने कंपनी को पैसा दे रखा है, एक लाख से ज्यादा, ग्रेटर देन वन लाख रुपीस और जिसने कंपनी को 1 लाख रुपए से ज्यादा पैसा दे रखा है अगर वह कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस पर एक डिमांड नोटिस देते हैं, अभी डिमांड नोटिस दिया है। डिमांड फॉर पेमेंट, अपनी पेमेंट के लिए डिमांड कर रहे हैं, उसका नोटिस अगर कंपनी के रजिस्ट्रार ऑफिस में देते हैं और कंपनी ने अगर उनकी डिमांड सेटिस्फाई कर ली तो ठीक है, लेकिन अगर कंपनी ने उनको नहीं दिया और वह सारा पैसा टू मंथ के अंदर-अंदर तो ऐसा माना जाएगा कि कंपनी उनकी डेट्स पर नहीं कर रही है। या फिर अगर एनसीएलटी क्लास 10, एनसीएलटी के पास अपना टुकड़ा लेकर गए कि हमारी डेट पे नहीं हो रही है तो वहां पर क्रेडिटर की मर्जी चलेगी। और तीसरी चीज है अगर एनसीएलटी सेटिस्फाइड हो गई कि कंपनी अपनी डेट पर नहीं कर रही है तो उस केस में दिन मान लिया जाएगा, मतलब एनसीएलटी का डिस्क्रीशनरी चलेगा। और लास्ट के इस झाला सर्कमस्टांसिज जिसमें माना जाए तो इसमें कंपलसरी वाइंडिंग अप होगा। वह है जस्ट एंड इक्विटेबल।

में 9 एनसीएलटी को लगता है कि बिल्कुल जस्ट बिल्कुल सही है, एनसीएलटी को कोई भी ऐसा सर्कमस्टांसिज जिसके थ्रू से लगता है कि इस कंपनी का वाइंडिंग अप तो होना ही होना चाहिए तो उस केस में वह वाइंडिंग अप कर देगी। कुछ सर्कमस्टांसिज बताए गए हैं जब एनसीएलटी को लगे कि 20,000 जस्ट एग्जांपल, ऐसा जरूरी नहीं है कि यह सिचुएशन सॉन्ग जस्ट एंड इक्विटेबल वाइंडिंग अप के लिए। सबसे पहला अगर बिजनेस लॉस में ऑपरेट हो रहा है तो एंटीक लग सकता है। कंपनी के ऑब्जेक्ट ही लीगल नहीं है, इंडिकेशन में काम कर रही है या फिर यह कंपनी वन फ्री ही बिजनेस नौकरी करना चाहें तो एनसीएलटी भी क्या करें। ओके और तीसरा है कंपनी की पूरी की पूरी कैपिटल ही खत्म हो चुके, डिस्ट्रॉय हो चुकी है या मैनेजमेंट में कोई डायलॉग है या अगर मैजॉरिटी शेयरहोल्डर्स माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स को धमकाते हैं, एग्रेसिव नेचर आफ मेजॉरिटी स्टेक होल्डर का टुवर्ड्स माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स तो उस केस में भी कंपनी का वाइंडिंग अप हो सकता है। तो क्या वह Bigg Boss आंसर है? जिसके थ्रू वाइंडिंग अप होता है वह वाइंडिंग अप, वाइंडिंग आफ, उत्तरा एनसीएलटी। सबसे पहला है स्पेशल रिजोल्यूशन, और कंपनी कंपनी साथ ए खुदा एंट्री बैंक व आसपास कर दिया है मेंबर्स ने कुछ सेकंड्स। अगर कंपनी ने नेशनल इंटरेस्ट के अगेंस्ट कुछ भी काम किया है या फिर तक कंपनी इसका वाइड इनफ या फिर अगर एप्लीकेशन आरओसी को मिल्ट किया कि कंपनी फ्रॉड है जी रोड आइलैंड काम कर रही है या फिर अगर कंपनी ने फाइनेंशियल स्टेटमेंट और एनुअल रिटर्न आरओसी को फांसी पर्स में फाइल नहीं किए हैं या फिर अगर कंपनी अपना बिजनेस शुरुआत नहीं कर रही है टाइम पर या फिर अपना बिजनेस पेश नहीं कर रही है अब वे दिन होल ईयर। अगर कंपनी अपडेट्स पर नहीं कर पा रही और जब एनसीएलटी को लगता है कि जस्ट एंड इक्विटेबल है कंपनी को वाइंडिंग अप करना है।

ए रुक इसके बाद एक चीज और है कंपलसरी वॉटर, व्हेन इज वॉलंटरी वाइंडिंग आफ? अगर आप वॉलंटरी वाइंडिंग अप करते थे तो कंपलसरी आर्डर देना जरूरी है जो ऊपर कि हमने जितनी पॉइंट्स करके यहां पर टर्मिनल चाहे तो कंपनी का वाइंडिंग आफ कर सकता है। आप वॉलंटरी तब भी कर सकते हो। अगर कंपनी वॉलंटरी वाइंडिंग अप कंपनी पोलिंग हुई एक टेक्स्ट फाइल करेगी है जो कंपनी के लिक्विड है। कंपनी का यह लिक्विड रोड ऑफिस लिक्विड आह वह एक पेशेंट पिटिशन फाइल करेगा। फिर पिटिशन किसको फाइल करेगा? एनसीएलटी कोई पिटिशन फाइल करेगा या तो वह पिटिशन कौन पाइल कर सकता है तो कंपनी का लिक्विडेटर, ऑफिस लिक्विड फाइल कर सकता है या फिर कोई भी दूसरा पर्सन जो फ्राइडे अंडर सेक्शन नंबर टू फैमिली टू दो जने लिक्विडेटर के अलसी के पास पिटिशन फाइल कर सकते हैं। कौन से हैं? 20 ऑफिस लिक्विड या फिर कोई भी और थाइस पर सेंट्रल सेक्टर नंबर 272 क्रिमिनल जो है वह तभी लागू करेगी इस वाइंडिंग अप को अगर वह सेटिस्फाइड हो कि यह क्रेडिटर्स के साथ कोई धोखाधड़ी नहीं हो रही इस वाइंडिंग अप को, रॉय कंट्रीब्यूटर जो भी हैं उनके साथ कोई धोखाधड़ी नहीं की। क्वांटिटी इसको है, क्वांटिटी का दिल दी गल रिप्ले सेंटर लीगल एंड सिस्टर्स हैं। इसके बाद नेक्स्ट वाइंडिंग अमेज़न, फ्री मिनिमम बैलेंस रिवाइंडिंग ऑफ क्या होता है? जब कंपनी भी वाइंडिंग आफ कंपनी का और है बाय मेंबर्स और क्रेडिटर्स बिना एनसीएलटी के इंटरफेरेंस के थ्रू। अभी एनसीएलटी का कुछ नहीं है। अब कंपनी खुद ही चाहते हैं कि हमारी वाइंडिंग अप करेगी विदाउट इंटरफेरेंस फ्रॉम एनसीएलटी, उसे वॉलंटरी वाइंडिंग अप कहते हैं। अब कौन से-कौन से सर्कमस्टांसिज इंच इसमें यह बढ़ेगी वाइंडिंग अप होता है? सबसे पहला है बाय पासिंग ऑर्डिनरी रेजोल्यूशन। कंपनी ऑर्डिनरी रेजोल्यूशन पास करके वॉलंटरी वाइंडिंग अप कर सकती है। अगर पिछले दिनों जो भी आर्टिकल्स में मेंशन है अगर ए ग्राफिकल में लाइक सिचुएशन हो सकते हैं कि हमारा कंपनी का बिजनेस सपोच क्लियर चलेगा पर अगर वह थ्री ईयर्स खत्म हो चुके हैं तो उस केस में कंपनी ओवर वॉलंटरी रिजोल्यूशन पास करके कंपनी बंद कर सकती है। ओके। इसके बाद एक्सेस बाय पासिंग स्पेशल रिजोल्यूशन। स्पेशल रिजोल्यूशन के लिए ऐसा कोई युद्ध नहीं है, कंपनी स्पेशल रिजोल्यूशन पास करें कंपनी कि कश्मीर कोई भी ऐसा कोई भी डिजाइन स्पेसिफाइड नहीं है कि कंपनी को इस सिचुएशन में ऐसा पास करना पड़ेगा, लेकिन कंपनी ऐस्सार पास करके पॉजिटिव वाइंडिंग अप कर सकती है। तो वॉलंटरी वाइंडिंग आफ दोनों ही तरीकों से हो सकता है, बार्कर या तो आप और बात कर लो या फिर आप ऐसा पास कर लो। कि आपके यह नेक्स्ट पॉइंट नेक्स्ट वीडियो में कवर कर देता हूं।