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Meta Ads Terminology | Facebook Ads Basic Terminologies Explained in Hindi | #metaads #facebookads

Marketing Fundas12:41

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Facebook एड्स कोर्स के इस वीडियो में आज हम आपको Facebook ऐड मतलब मेटा ऐड से रिलेटेड कुछ बेसिक टर्मिनोलॉजीस बताएंगे।

दोस्तों बेसिक टर्मिनोलॉजीस का मतलब है वो शब्दावली। जैसे लॉयर्स अगर एक प्रोफेशन में है तो उनके कुछ वर्ड्स होते हैं जो अपनी इंडस्ट्री में यूज़ करते हैं। ऐसे डॉक्टर्स, ऐसी दूसरी इंडस्ट्रीज में। वैसे ही अगर आप एक एड स्पेशलिस्ट हैं, एक मार्केटिंग स्पेशलिस्ट हैं, तो आपको मेटा एड्स से रिलेटेड कुछ बेसिक टर्म्स या टर्मिनोलॉजीस के बारे में पता होना चाहिए। तो वही एक-एक करके मैं आपको समझाऊंगा। आइए समझते हैं।

सबसे पहली जो हमारी टर्मिनोलॉजी है, तो सबसे पहले इंपेशंस। दोस्तों इंपेशंस क्या होते हैं? जब कभी भी आप एड्स रन करते हैं तो उधर आपका जो ऐड है वो अलग-अलग व्यूअर्स द्वारा देखा जाता है। तो जितनी बार भी आपका ऐड देखा जाता है इवन उसमें वो इंपेशंस भी इंक्लूडेड होते हैं जो एक यूजर ने अगर आपके ऐड को मल्टीपल टाइम्स भी देखा है तो वो भी उसमें इंक्लूड होगा। तो उसको इंपेशंस बोला जाता है। मान लीजिए आपने ₹1000 दिन का ऐड चलाया और उसमें जो इंपेशंस आए वो ₹00 इंपेशंस आए। तो मतलब ₹1000 लगा के ₹00 बार आपका ऐड देखा गया। उसमें यूनिक यूज़र्स भी हो सकते हैं व्यूअर्स और कई व्यूअर्स ऐसे जिन्होंने रिपीटेडली आपका ऐड देखा। उम्मीद करता हूं ये आपको अच्छे से समझ में आ गया होगा। इंपेशंस मतलब ऐड का देखे जाना।

सेकंड है रीच। दोस्तों रीच कहते हैं ना कि हमको ज्यादा से ज्यादा रीच लानी है। ठीक है? तो रीच का मतलब है कि मान लीजिए ये सब आपके टारगेट ऑडियंस है। ठीक है? अब यहां पर समझिए लगभग 100 लोग हैं। आपने ऐड चलाया तो रीच का मकसद होता है कि हर एक व्यूअर या आपके टारगेट ऑडियंस को आपका ऐड दिखे। एटलीस्ट एक बार सबको आपका ऐड दिखना चाहिए। ठीक है? इसको कहते हैं रीच। ठीक है? इसमें मल्टीपल टाइम्स की बात नहीं हो रही। रीच का मकसद ये है कि अगर आप कहीं ऐड चला रहे हो और आपका जो टारगेट ऑडियंस है एक पर्टिकुलर एरिया के अंदर मान लीजिए 20,000 लोग हैं तो 20,000 के 20,000 लोगों को एक बार तो आपका ऐड दिखना चाहिए। ठीक है? उसको हम रीच बोलते हैं। ठीक है दोस्तों? समझ में आ गया होगा।

थर्ड है दोस्तों क्लिक्स। अब यहां पर एक व्यूअर कितनी बार आपके ऐड को क्लिक करता है। उसको हम क्लिक मैट्रिक्स कहते हैं। यहां पर क्लिक्स का मतलब है हमारा ऐड कोई भी देख रहा है देख के अगर वो निकल गया तो तो इंप्रेशन हो गया। मगर अगर उसने उस ऐड पे क्लिक कर दिया तो बेसिकली वो एंगेजमेंट हो गई। ठीक है? क्लिक इज अ एंगेजमेंट मैट्रिक्स।

दोस्तों, अगला है सीटीआर। सीटीआर मतलब क्लिक थ्रू रेट। सीटीआर का जो फार्मूला है वो है नंबर ऑफ क्लिक्स डिवाइडेड बाय इंपेशंस इनू 100। मतलब मान लीजिए हमने कोई ऐड चलाया और 10,000 लोगों ने उसको देखा। उसमें से 1000 लोगों ने उसको क्लिक करा। इसको हम डिवाइड कर देंगे। डिवाइड करने के बाद डिवाइड करने के बाद आया 0.1 इसको हम 100 से मल्टीप्लाई कर देंगे तो ये निकलेगा 10% ठीक है ये फार्मूला होता है क्लिक थ्रू रेट निकालने का इससे पता लगता है कि लोग कितना ज्यादा इंटरेस्ट ले रहे हैं एंगेज हो रहे हैं हमारे ऐड में। अगर आपका क्लिक थ्रू रेट तीन चार 5% से ऊपर है और अप टू 10% तक जाता है तो ये बहुत अच्छा माना जाता है। ठीक है? तो क्लिक थ्रू रेट बेसिकली कितने लोग हमारा ऐड देखते हैं उसमें से कितने लोग उस पे क्लिक करते हैं उसके बेसिस पे निकलता है।

दोस्तों अगला है सीपीसी कॉस्ट पर क्लिक। जब हम ऐड चलाते हैं और हमें चार्ज करा जाता है क्लिक्स के हिसाब से कि मतलब जितने क्लिक आएंगे उतना पैसा देना पड़ेगा तो उसको सीपीसी कहते हैं। तो या फिर मतलब हमने कितने के ऐड चलाए उसमें हमें कितने क्लिक आए तो उससे जो निकल के आता है वो सीपीसी होता है कॉस्ट पर क्लिक। इसका बहुत सिंपल फार्मूला है। टोटल स्पेंड मान लीजिए आपने ₹1000 स्पेंड करें और जो टोटल क्लिक्स आए आपको 5000 क्लिक्स आए। तो जब आप इसको डिवाइड करेंगे ठीक है तो आपका निकल के आएगा सीपीसी। तो इसको डिवाइड करने के बाद आया 0.20 मतलब 20 पैसा मेरे को एक क्लिक की कॉस्ट आ रही है। इसको सीपीसी कहते हैं। मान लो अगर ₹1000 खर्च करके मेरे को 1000 क्लिक आते तो मेरे को मोटा-मोटा ₹1 का क्लिक पड़ता। ठीक है?

अब दोस्तों नेक्स्ट है सीपीएम कॉस्ट पराउजेंड इंपेशंस या कॉस्ट पर माइल्स भी बोल सकते हैं। कॉस्ट पराउजेंड इंप्रेशन इसलिए बोला जाता है एम मतलब 1000 रोम रो अगर हम बात करते हैं रोमन भाषा की ठीक है तो उसमें जो नंबर्स है उसमें एम का मतलब 1000 होता है। ठीक है? तो कॉस्ट पराउजेंड इंपेशंस आपने देखा होगा Google हो, Facebook हो या कोई भी प्लेटफार्म हो ऐड दिखाने का पैसा काटता है। अब सीपीएम के बेसिस पे वो हमारा पैसा काटता है। इवन जब जैसे मैं यूबर हूं मेरे को जो YouTube पैसा भी देता है वो भी कितने लोगों ने ऐड देखा उसके बेसिस पे देता है। तो यहां पर कॉस्ट पर इंपेशंस 1000 इंपेशंस तो अगर आपको अपनी कॉस्टिंग निकालनी है कि आपको पर मतलब इंप्रेशन पर थाउजेंड इंप्रेशन कितना कॉस्ट आ रहा है दिखाने का ऐड तो आप ऐसे निकाल सकते हो जो सीपीएम है इक्वल टू टोटल स्पेंड मान लीजिए आपने 1000 रुपए खर्च करे और आपको 1 लाख इंपेशंस आए ठीक है इनू 1000 तो टोटल स्पेंड 1000 हुआ डिवाइडेड बाय इंप्रेशन ठीक है? तो इसको हम डिवाइड करते हैं। कट गया। अब इसको पहले डिवाइड करते हैं। फिर इससे मल्टीप्लाई करते हैं। तो ये डिवाइड करके आया 0.01 * 1000 तो क्या आया ये? 10 तो ₹10 कॉस्ट आ रही है हमें 1000 लोगों को ऐड दिखाने की। ठीक है? तो इसको सीपीएम तो हमारा जो सीपीएम आया वो ₹10 आया। ठीक है? समझ में आया दोस्तों?

अब दोस्तों सेवंथ और बहुत ही इंपॉर्टेंट है कन्वर्जंस। दोस्तों बेसिकली कन्वर्ज़ क्या है? कन्वर्ज़ है जो हम ऐड चला रहे हैं उससे जो हमें डिजायर्ड रिजल्ट आ रहा है जो हमारा गोल है वो अचीव हो रहा है उसको हम कन्वर्ज़ कहते हैं वो अलग-अलग हो सकते हैं। देखो किसी के लिए कन्वर्ज़ इंप्रेशन भी हो सकते हैं। कोई ज्यादा से ज्यादा अपना ऐड दिखाना चाहता है तो उसके लिए इंप्रेशन कन्वर्शन है। किसी के लिए लीड फॉर्म ज्यादा से ज्यादा लीड फॉर्म कोई भर रहा है। इंक्वायरी आ रही है वो कन्वर्शन है। किसी के लिए कुछ डाउनलोड करा जा रहा है। ब्रशर डाउनलोड हो रहा है। ठीक है? तो वह उसके लिए कन्वर्जंस है। किसी के लिए वीडियो व्यूज कन्वर्जंस है। ठीक है? किसी के लिए ज्यादा से ज्यादा सेल आ रही है या कोई प्रोडक्ट बाय हो रहा है। ठीक है? उसके लिए वो कन्वर्ज़ है। ऐसे ही अलग-अलग कन्वर्ज़न्स हो सकते हैं। डिपेंड है कि आप वो ऐड किस पे किस लिए चला रहे हैं और आप क्या चाहते हैं उससे क्या कन्वर्ज़ आए। तो जो कन्वर्शन गोल आपने सेट कर रखा होगा वो कन्वर्जन एज अ कन्वर्शन काउंट होगा। तो दोस्तों कन्वर्जन हमारा एंड गोल होता है। किसी भी कैंपेन को चलाते हैं उसमें हम पैसा लगाते हैं। ठीक है? तो उसका जो एंड गोल हम चाहते हैं उसको कन्वर्जन बोला जाता है।

दोस्तों एट्थ है प्लेसमेंट। बेसिकली प्लेसमेंट क्या है? जब हम Facebook पे ऐड चलाते हैं तो चाहे वो Facebook है, Instagram है, मैसेंजर है या फिर ऑडियंस नेटवर्क है। अब अगर Facebook पे ऐड चला रहे हैं तो Facebook फीड भी होती है, स्टोरीज, रील्स और ऐसे कई जगह जहां पर Facebook का जो कंटेंट है वो दिखता है। ऐसे ही Instagram का भी फीड हो गया, स्टोरी हो गई, सेम रील्स वगैरह हो गया। ऐसे मैसेंजर पे जब आप टाइम स्पेंड करते हो तो वहां पर भी आपको एड्स दिखते हैं। और ऐसे ही ऑडियंस नेटवर्क में वो वेबसाइट्स वो एप्स आती हैं जो Facebook के संग अटैच है, जुड़ी हुई है। जैसे Google का अपना एक नेटवर्क होता है जिसके संग YouTube चैनल अलग-अलग वेबसाइट और एप्स जुड़ी हुई है। वैसे इनका भी अपना ऑडियंस नेटवर्क होता है। तो बेसिकली जब आप कभी ऐड चलाते हो कोई भी कैंपेन बनाते हो तो वहां पर प्लेसमेंट टारगेटिंग करके एक चीज होती है। है। प्लेसमेंट मैनुअल प्लेसमेंट भी होती है और ऑटोमेटिक प्लेसमेंट भी होती है। वैसे तो इस कोर्स में हमने इसके बारे में बताया है, प्रैक्टिकली दिखाया भी है। प्लेसमेंट अगर आपको मान लीजिए आपका ऐसा कोई प्रोडक्ट है जो Instagram के लिए ही बना है और तो आप इन सारे दूसरे एरियाज में या जो प्लेसमेंट्स है वहां पर अपना ऐड क्यों दिखाओगे? आप तो सिर्फ Instagram पे दिखाओगे ना। तो अगर आपका कोई ऐसा प्रोडक्ट है जो आपको मैसेंजर पे ही दिखाना है और कहीं नहीं दिखाना है। तो इस तरीके से या आपको सिर्फ स्टोरीज में दिखाना है या आपको ऐड अपना सिर्फ रील्स में दिखाना है या आपको ऐड अपना सिर्फ फीड में दिखाना है। तो ये जो चीजें हैं ये डिसाइड करेंगी जो मैं आपको बता रहा हूं। ये सब चीजें डिसाइड करती हैं कि आपका ऐड कहां दिखाई देगा। कौन सी प्लेसमेंट पे दिखाई देगा और ये आप मैनुअली भी मैनेज कर सकते हो और ये आप ऑटोमेटिकली Facebook के ऊपर भी छोड़ सकते हो। भाई तुम मैनेज करो। तो प्लेसमेंट बेसिकली आपको समझ में आ गया होगा वो अलग-अलग मतलब जगह जहां पर हमारे ऐड शो हो सकते हैं तो उसको हम प्लेसमेंट कहते हैं।

अब दोस्तों नाइंथ है बहुत ही इंपॉर्टेंट ऑडियंस। क्योंकि ऑडियंस ही है जिसको ऐड दिखाएंगे और वहां से हमें रिजल्ट आएगा। अब Facebook एड्स में हम कई तरीके से ऑडियंस को टारगेट कर सकते हैं। लोकेशन के हिसाब से, एज के हिसाब से, जेंडर के हिसाब से और इंटरेस्ट के हिसाब से, बिहेवियर के हिसाब से, डेमोग्राफिक्स के हिसाब से और भी कई ऑप्शन आपको मिल जाएंगे। कस्टम ऑडियंस, लुक लाइक ऑडियंस ऐसे कई ऑप्शंस मिल जाएंगे। ठीक है? तो बेसिकली ऑडियंस वो मतलब हमारे पास हमारे जो यूज़र्स हैं व्यूअर्स हैं उसमें से जो हमारे प्रोडक्ट या सर्विज के लिए बेस्ट है उसको हम चूज़ करते हैं। तो हमारे टारगेटेड ऑडियंस कई तरीके से हम चूज़ कर सकते हैं। जब कैंपेन चलाते हैं तो बेसिकली इसको हम ऑडियंस बोलते हैं जो एक्चुअल में हमारे फ्यूचर या प्रोस्पेक्ट्स होते हैं या फ्यूचर कस्टमर्स होते हैं।

तो यह था बेसिक टर्मिनोलॉजीस कि आपको पता होना चाहिए किस टर्म को क्या बोला जाता है। उम्मीद करता हूं यह वीडियो आपके लिए इनफेटिव रही होगी और ये कोर्स आप पूरा अच्छे से सीखिएगा। एंड टू एंड सीखिएगा बिकॉज़ बेसिक से लेके एडवांस लेवल तक एआई भी आपको अच्छे से सिखाया जाएगा इस Facebook एड्स कोर्स विद एआई में। थैंक यू।

[संगीत]