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Do This to CLEAN Cholesterol in 3 Months | Prevent Heart Attack - Dr. Bimal Chhajer | GT Show

GetsetflySCIENCE by Gaurav Thakur1:52:59

Transcription

तेल को लेके बहुत सारे जार्ग्स, चुरेई, सारे बकवास हैं कि इंडियंस आर जेनेटिकली प्रोन टू डेवलप मोर कोलेस्ट्रॉल, मोर ट्राइग्लिसराइड, ब्लड प्रेशर, शुगर और इसको मेटाबॉलिक सिंड्रोम बोलते हैं। अगर आपके 40 ब्लॉकेज है तो भी रोक सकते हो, अगर 70 ब्लॉकेज है तो भी रोक सकते हो और 90 ब्लॉकेज है तो भी रोक सकते हो। यह जानबूझ के बोला जाता है क्योंकि वह पेशेंट के ऊपर प्रेशर क्रिएट हो, फैमिली पे प्रेशर क्रिएट हो कि ऑपरेशन करना जरूरी है, नहीं तो हार्ट अटैक होने वाला है। हार्ट की बीमारी को अगर मैं गिनूँ तो 14 रीजन हैं। तेल से टेस्ट आता है, यह एकदम गलत बात है। आप सब कोई एक चम्मच तेल लीजिए और मुंह में डाल के टेस्ट देखिए, एकदम जीरो है। आपका एक जादू डाइट है जिससे वेट जादू से कम हो जाता है, तो डाइट क्या है जरा बताना? देखिए बहुत सिंपल सा कांसेप्ट है इसमें और ऐसा 40 घंटा कर दूँ तो हार्ट में हजारों नई ट्यूब खुल जाती हैं, इसको बोलते हैं नेचुरल बायपास।

आज का जो पॉडकास्ट है फ्रेंड्स, ये पर्सनली मेरा वन ऑफ द बेस्ट पॉडकास्ट है क्योंकि ये हम इंडियंस के नंबर वन किलर, हार्ट डिजीज को कैसे ट्रीट करना है, विदाउट ऑपरेशन एंड सर्जरी के बारे में अवेयर करता है। यस, आज इंडियन हॉस्पिटल्स में एक हार्ट का माफिया खड़ा हो चुका है जो पेशेंट्स को हार्ट की बीमारियों के मामले में सीधे ऑपरेट होने की सलाह देते हैं और अक्सर पेशेंट्स को डराया भी जाता है ताकि वो जल्द से जल्द ऑपरेट हो जाए। बट डॉक्टर बमल छाजेर इंडिया के लीडिंग हार्ट स्पेशलिस्ट हैं जिन्होंने अब तक 45 लाख लोगों को ट्रीट किया है विदाउट एक्सपेंसिव सर्जरी। उनका मानना है कि मोस्ट ऑफ दी केसेस में कोई भी हार्ट की बीमारी बिना ऑपरेशन के ठीक हो सकती है। उनका एक सिंपल सा प्रोसेस है हार्ट डिजीज को ट्रीट करने का और इवन प्रिवेंट कराने का जो टोटली नॉन इवेसिव, यानी कि नो सर्जरीज वाला है और इस पॉडकास्ट में वो ये पूरा प्रोसेस डिटेल में एक्सप्लेन करेंगे और हार्ट और हेल्थ के बारे में हमें अपने एक्सपीरियंस और विजडम से डिटेल में ज्ञान देंगे। ह्यूमन बॉडी और हेल्थ के बारे में बहुत ही एनलाइनिंग पॉडकास्ट है। इसीलिए इन बीमारियों को प्रिवेंट करने के लिए, आई हाईली सजेस्ट यह पॉडकास्ट आपको अपने पूरे फैमिली के साथ देखना चाहिए। सो लेट्स गेट [संगीत] स्टार्टेड।

सो सर, हार्ट अटैक्स आज इंडिया में नंबर वन कॉज ऑफ डेथ बन चुका है, कैंसर से भी ज्यादा लोग हार्ट अटैक से मर रहे हैं, लेकिन इसके बारे में एजुकेशन बहुत कम है और ये आई थिंक वन ऑफ द प्राइमरी रीजंस है कि ऐसा हो रहा है। सो हार्ट अटैक एगजैक्टली होता क्या है, किन कार की वजह से लोग हार्ट अटैक से मर रहे हैं? हार्ट अटैक के कितने टाइप्स होते हैं? बिकॉज कोई भी टाइप के हार्ट अटैक को, चाहे वो हार्ट फेलियर हो या वो समझ लीजिए स्ट्रोक हो गया, तो हर किसी को लोग हार्ट अटैक बोल के कैटेगरी कर लेते हैं। तो क्या यह हार्ट अटैक को थोड़ा सा डीप तरीके से आप एक्सप्लेन कर सकते हैं कि क्या है, इसके क्या टाइप्स हैं? देखिए हार्ट की बीमारी जो है, यह नेचुरली एक ऐसी बीमारी है जो सेल्फ, ये फिजिकल मेहनत हो नहीं रहा है, खाना बहुत गरिष्ठ खा रहे हैं, फैट वाले खा रहे हैं, स्ट्रेस बहुत ज्यादा है, उसके संग स्मोकिंग, जरदा, गुटखा, यह सारा मिला के हार्ट की बीमारी बढ़ती जा रही है। इसमें होता क्या है, हार्ट के तीन ट्यूब होती हैं जो हार्ट को ब्लड देता है, उनके अंदर चर्बी की लेयर जम जाती है। अगर हम चर्बी खाते हैं और उसको तोड़ते नहीं हैं, वो अंदर जमता रहता है। इस चर्बी का नाम है कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड। ये जमते-जमते ब्लॉकेज को, ट्यूब को ब्लॉक कर देता है। जब-जब तक 70, 80 ब्लॉकेज ना होती है, परसेंटेज में, तब तक तो पता भी नहीं चलता है। फिर ये ब्लॉकेज बढ़ता जाता है तो एक ना एक दिन वो हार्ट अटैक में कन्वर्ट हो जाता है। हार्ट अटैक का मतलब है 100% ब्लॉकेज। ओके, जब वो 100% एक ट्यूब में ब्लॉक हो जाए तो हार्ट के एक हिस्से को ब्लड मिलना बंद हो जाता है, वो हिस्सा डेड होने लगता है। इसको बोलते हैं हार्ट अटैक और अगर बड़ा हार्ट अटैक हो। हार्ट अटैक में दो-तीन कैटेगरी होती है। एक आपने सुना होगा माइनर अटैक, एक हो गया मेजर अटैक, एक हो गया मैसिव अटैक जिसमें लोगों की डेथ भी हो जाती है। हम तो वो तीनों में फर्क क्या होता है कि एक ट्यूब के एकदम लास्ट पार्ट में ब्लॉकेज हुआ और 100 हो गया तो वो एरिया जो डेड हुआ वो बहुत स्मॉल एरिया है तो उससे आदमी का जान नहीं जाता, कभी उसको पता भी नहीं चलता, कभी-कभी इसको माइनर अटैक बोल के निकाल देते हैं। राइट, एक ट्यूब के शुरुआत में ब्लॉकेज हुआ तो उसको मेजर अटैक बोलते हैं, वो अटैक हो गया तो और एकदम ही मुंह में हो गया जो लेफ्ट मेन ट्यूब है जो 70% हार्ट को सप्लाई करता है, लेफ्ट के तरफ उसके अंदर हो गया तो 70% हार्ट एक साथ डेड होता है तो उसमें जान भी जाती है। इसलिए हार्ट अटैक तीन कैटेगरी की होती है: माइनर अटैक, मेजर अटैक और मैसिव अटैक। ये ब्लॉकेज की लोकेशन हम लोग पता कर सकते हैं एक टेस्ट से जिसका नाम है सीटी एंजियोग्राफी, जिससे हम लोग ये देख सकते हैं ब्लॉकेज है कौन से एरिया में। अगर लास्ट के एरिया में तो ऐसी डरने की बात नहीं है और एकदम शुरुआत में है तो उसको बहुत सीरियसली लेना पड़ता है। तो ये हार्ट अटैक में 100% ब्लॉकेज होनी चाहिए। इंडिया में आज के दिन में करीब-करीब 35 लाख लोग हर साल हार्ट अटैक में मारे जाते हैं और यह बीमारी को हम लोग प्रिवेंट कर सकते हैं। एक भी आदमी ना मरे, इसकी बंदोबस्त हो सकती है, सिर्फ लोगों तक जानकारी पहुँच जाए कि किस तरह से यह हार्ट की बीमारी होती है, कैसे ब्लॉकेज बनती है और कैसे यह बढ़ती है, अगर इसको कैसे रोका जा सकता है और यही मैं हार्ट के पेशेंट्स के लिए करता हूँ कि उनको नॉलेज दूँ कि किस तरह से हार्ट की बीमारी को रोक सकें। तो अगर वह रोक लें और हार्ट की बीमारी को रिवर्स करें तो ना ही उसकी हार्ट अटैक होगी ना ही उनको कॉस्टली ऑपरेशंस के लिए जाने की जरूरत पड़ेगी। राइट, राइट।

सो सर, बेसिकली एंजियोप्लास्टी हो गया और ये जो अंदर स्टेंट्स घुसाते हैं और फिर यू नो ये सारे जो प्रोसीजर्स हो गए, बायपास सर्जरीज हो गए, ये सारे तो इन चीज की जरूरत एक्चुअली में देखा जाए तो इतनी नहीं है अगर पहले ही प्रिवेंशन कर लिया जाए तो। राइट, एकदम हार्ट की बीमारी में जो बीमारी बढ़ रही है वो बीमारी जब तक बढ़ेगा तो ये कभी ना कभी उस स्टेज में आएगा जहाँ पे वो हार्ट अटैक या एंजाइना का आकार लेगा। पर अगर लोगों को हम इन एडवांस समझा दें, भाई ब्रोमेजर से बनती है और इस तरह से ब्लॉकेज बढ़ती जाएगी तो अगर आप खान-पीन, रहन-सहन बदल लो, वॉकिंग करो, एक्सरसाइज करो, योगा करो और कुछ चीजें जो हम दवाई से कंट्रोल कर सकते हैं वो दे दें तो हार्ट अटैक होएगी भी नहीं और हार्ट की बीमारी बढ़ेगी नहीं। होता क्या है जब आदमी हार्ट की बीमारी बढ़ा लेता है और हॉस्पिटल में पहुँचता है तो वहाँ पे एक प्रेशर होती है उनके तरफ से कि आपकी कंडीशन बहुत खराब है, आप ऑपरेशन करना पड़ेगा और आम आदमी वहीं फँस जाता है। मैं उनको बोलता हूँ जहाँ पर भी ब्लॉकेज हुई है उसको बढ़ाओ मत, उसको रिवर्स कर लो और रिवर्स करने के लिए जो-जो चीज करना है वो उसको जानकारी करवाना होता है। ओके, सो कह सकते हैं यह सभी के लिए एप्लीकेबल है, लाइक प्रिवेंशन हर कोई कर सकता है चाहे उसका जेनेटिक कॉज की वजह से हो रहा है, लाइफस्टाइल की वजह से हो रहा है, किसी की भी वजह से। बट अगर वो सही टाइम पे प्रिवेंशन करना स्टार्ट कर सकता है तो उसके जो कोलेस्ट्रॉल है वो सारा वापस से रिवर्स होना स्टार्ट हो जाएगा। एकदम देखिए ऐसा है जो आदमी जब पहुँच जाए, मैं कभी यह बोलता हूँ कि भाई अगर आप एडवांस भी हो चुके हो, 70, 80, 90 ब्लॉकेज हो भी गई है तो आज 90 है तो ऐसा नहीं कि कल नहीं था, एक साल पहले हो सकता है 2% कम रहा हो, एक साल पहले और 2% कम रहा हो तो आप जिस स्टेज में भी हो वहाँ से बढ़ो मत, नहीं तो बीमारी बढ़ेगी नहीं, हार्ट अटैक नहीं होगी और वहाँ से आप घटाने लगोगे तो हर स्टेज में आप रोक सकते हो। राइट, अगर आपके 40 ब्लॉकेज है तो भी रोक सकते हो, अगर 70 ब्लॉकेज है तो भी रोक सकते हो और 90 ब्लॉकेज है तो भी रोक सकते हो। और जिसको हार्ट अटैक हो चुका, 100 ब्लॉक हो चुका, उनको तो मैं बहुत सिंपल सी बात बोलता हूँ, 100 के ऊपर कहाँ ले जाओगे ब्लॉकेज को? 100 तो हो गया, जो डैमेज होना था हो गया। अब अगर आप जिंदा हो तो बाकी जो एरियाज में ब्लॉकेज है उसको कम करो। राइट, तो हार्ट अटैक ना हो वो बंदोबस्त करना पड़ेगा। हार्ट की बीमारी में जो शुरुआत होती है वो होती है ब्लॉकेज जीरो से, फिर 10% होता है और बड़ी और बड़ी और बड़ी। ये 30, 40 साल तक ये बढ़ते रहती है। मान लेते हैं ये ब्लॉकेज शुरू कब होती है? एक बच्चा जब जन्मता है तो ब्लॉकेज नहीं लेके जन्मता है। 10 साल, 15 साल, 20 साल तक उसकी ग्रोथ होती है, तब तक फैट खाए तो भी दिक्कत नहीं है। राइट, जिस दिन उसकी ग्रोथ खत्म हो जाती है, हाइट बढ़ना बंद हो गया, उसके बाद जो चर्बी है वो अब ग्रोथ में तो लगेगा नहीं, अब वो या तो चौड़ाई में बढ़ाएगा या अंदर बढ़ाएगा तो ब्लॉकेज चालू होती है। 20 साल की उम्र में आप ब्लॉकेज बढ़ाते जाओ, बढ़ाते जाओ तो पहले 10% लाओगे, 20 लाओगे, 30 लाओगे, 40 लाओगे। अच्छा, 70 तक पता भी नहीं चलता है, टिल यू हैव 70 ब्लॉकेज, मरीज को कोई तकलीफ भी नहीं होती है। तो 70 तक तो आम आदमी बढ़ता रहता है, उसको पता भी नहीं। जिस दिन चलने में दिक्कत होने लग जाए तो समझ लो 80, 70 ब्लॉकेज हो चुका है। तो हार्ट के पेशेंट डॉक्टर के पास 70, 80 के बाद ही पहुँचता है, उसके पहले वो पहुँचते ही नहीं हैं। हाँ, तो प्रिकॉशंस तो हर वक्त लेनी चाहिए, पर आम आदमी को मैंने यह देखा है जब तक उसकी तकलीफ नहीं होती, हार्ट की बीमारी नहीं होती तब तक सो ब डन। इन एडवांस, सो ये ऐसे ही केस है कि आपको एकदम एंड में मालूम पड़ता है जब 70 ब्लॉकेज हो चुका है और फिर उसके बाद इट्स लाइक कि आपके स्ट्रोक आने के चांसेस सर पे हैं। राइट।

सो अभी अगर हम यह पैटर्न देखेंगे ना तो बहुत सारे जो यंगस्टर्स हैं तो पहले तो मैंने एक डेटा स्टडी किया था जिसमें कुछ 40 इयर्स से जल्दी भी लोगों को स्ट्रोक्स आ रहे हैं और वो करीब 30% के आसपास हो चुका है, मतलब 40 इयर्स से भी पहले। क्योंकि एक टाइम था जब हम मानते थे कि चलो यह बुढ़ापे में होने वाली एक चीज है। एक ऐसा भी डाटा देखा था जहाँ पर गुजरात का ही एक न्यूज़ है कि छह महीने में बहुत सारे यंगस्टर्स को हार्ट अटैक्स आए, एक कार्डियोलॉजिस्ट की भी डेथ हुई थी हार्ट अटैक से गुजरात में। राइट, राइट। सो ये जो यंग जनरेशन में आजकल जो हार्ट अटैक्स आ रहे हैं इसके पीछे क्या रीजन हो सकता है और क्या आज का जो जमाना है, मॉडर्न जमाना वो किसी तरीके से बहुत ज्यादा कंट्रीब्यूट कर रहा है, एम्पलीफाई कर रहा है कि ये केसेस अभी भर-भर के आ रहे हैं, इस पे आपका क्या? देखिए ऐसा है, हार्ट की बीमारी को हम लोग बोलते हैं रीजंस उसके मल्टीपल होते हैं, एक रीजन नहीं है। अगर मैं गिनूँ तो 14 रीजन्स हैं: कोलेस्ट्रॉल खून में ज्यादा होना, खाने में ज्यादा खाना, ट्राइग्लिसराइड, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, मोटापा, स्मोकिंग, खाने में ज्यादा तेल खाना या नॉनवेज ज्यादा खाना, फ्रूट्स कम खाना, दूध ज्यादा पीना या दूध का मक्खन ज्यादा खाना, या स्ट्रेस, या उनका वॉकिंग ना होना, टेंशन लेना, योगा ना करना। तो मैं ये लोगों को बोलता हूँ, ये 14 कारण हैं, उनमें से दो-चार मोटे-मोटे हो तो ब्लॉकेज की स्पीड बढ़ जाएगी। अगर आगे के जमाने में मैं देखता हूँ कि 60 साल में कोई को हार्ट की बीमारी हुई है तो 20 साल से शुरू हुआ, 60 साल में हुआ तो 40 साल लग गए ब्लॉकेज को तो 40 साल में अगर 80 ब्लॉकेज है तो 2% पर ईयर है। हाँ, अब आज के जो यंगस्टर्स हैं वो स्ट्रेस में भी हैं, खाना भी गलत खा रहा है, स्मोक भी कर रहा है, टाइम नहीं है, ओवरवेट हो गया तो उसके पास बहुत ज्यादा रीजन होने की वजह से ब्लॉकेज की स्पीड बढ़ गई। अगर कोई आदमी बोलता है सर 2% वो करते थे, मैं 4% की स्पीड करूँगा तो 4% करेगा तो 40 साल में, 20 साल में वो 80 ब्लॉक पहुँच जाएगा तो वो 40 साल की एज में हार्ट का बीमार हो जाता है आजकल। और एक आ गया वो बोलता है सर मैं 6% करूँगा तो 30 साल में हार्ट का पेशेंट बन जाएगा। तो ब्लॉकेज की स्पीड किस स्पीड से आप चला रहे हो उसके हिसाब से होती है। अब जो सो फार एज हार्ट अटैक इज कंसर्न, ब्लॉकेज बढ़ता जाए, 50% ब्लॉकेज के बाद यह हार्ट अटैक होने की संभावना बढ़ जाता है। हार्ट अटैक होता क्या है वो एक बार समझते हैं कि ब्लॉकेज बढ़ रहा है, ब्लॉकेज के ऊपर एक मेंब्रेन होता है वो स्ट्रेच होता रहता है। ओके, 50% के बाद वो मेंब्रेन फटने के चांसेस होते हैं। अगर ब्लॉकेज में 50% तो ब्लॉक है, 50% में ब्लड जा रहा है, लिक्विड ब्लड, मेंब्रेन फटने के साथ-साथ कुछ केमिकल निकलती है, क्लॉटिंग केमिकल, वो-वो ब्लड में मिक्स होते, ब्लड क्लॉट कर जाती है तो वो 50 का सीधा 100 बनता है और 100 जैसे ही बनी वो एरिया हार्ट का ब्लड सप्लाई बंद हो गया, वो हार्ट अटैक हो गई। तो आजकल 50, 60 में भी पर्दे फटने लग गए हैं तो ये जो पर्दा फटता है यह ब्लॉकेज की स्पीड से बढ़ने से जल्दी पर्दा फटता है, जैसे रबर बैंड को आप धीरे-धीरे खींचें तो बहुत देर तक खींचेगा और जल्दी खींचने जाएगा तो टूट जाएगा। तो अगर आप स्पीडली ब्लॉकेज बढ़ा रहे हो तो बहुत जल्दी फट जाते हो पर्दा। ओके, तो इसलिए यंगस्टर्स को आजकल हार्ट अटैक बहुत जल्दी हो रहा है, बिकॉज द स्पीड ऑफ ब्लॉकेज इज वेरी हाई, वो 50, 60 में ही फट जाता है, 70, 80 जाने की जरूरत ही नहीं है। 70, 80 जो पहुँच गया उसका 50, 60 में फटा नहीं है, इसका मतलब पर्दा स्ट्रांग था और पर्दा फटा नहीं। पर्दा फटते ही अगर 80 के बाद पर्दा फटा तो 100 होगा, 90 के बाद पर्दा फटा तो 100 होगा, क्लॉट छोटा-बड़ा हो जाएगा। बट जिसका 50 में हार्ट अटैक हो गया वो तो यंग ही है, वो तो अभी ब्लॉकेज बढ़ाया ही नहीं है और 50 ही में ही उसके पर्दे फट गए तो बेसिक बात है कि एट एवरी एज यू शुड प्रिवेंट हार्ट अटैक, मतलब आपका खान-पीन, रहन-सहन में चेंज चाहिए। कोलेस्ट्रॉल की सप्लाई बंद करो, अगर आपकी बॉडी में बन रही है तो उसकी दवाइयाँ लो, कैसे भी हो। कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड, ये दो मेजर फैक्टर हैं जो ब्लॉकेज बनाते हैं, उनको रोको। सो बेसिकली 14 फैक्टर्स हैं, राइट, जैसे आपने कहा कि 14 फैक्टर्स हैं, मोटे-मोटे जो कंट्रीब्यूट कर रहे हैं और 2% अगर ये एक टाइम पर लोगों के बढ़ाते थे तो आज हमारी मॉडर्न लाइफस्टाइल ऐसी हो गई है कि सारी चीजें हम एक साथ कर रहे हैं और किसी का इस पर कोई ध्यान नहीं है तो एक साथ लोग 10-10% सीधा बढ़ा रहे हैं, जो काम 50, 60 साल में होने वाला था वो अभी 30, 40 की उम्र में ही होने लगली। तो थोड़ा सा डिटेल में एक्सप्लेन कर सकते हैं सर कि लाइफस्टाइल की अगर हम बात करें तो उसमें डायट आ गया हमारा, ठीक है, फिर हमारे स्ट्रेस लेवल्स हो गए, हमारा ब्लड प्रेशर हो गया, फिर ओवरऑल लाइक मतलब हम कुछ अगर कुछ सप्लीमेंट्स ले रहे हैं या कुछ स्ट्रीट फूड वगैरह खा रहे हैं तो उसमें कुछ केमिकल्स वगैरह हो गए जो आज के मॉडर्न लाइफ में काफी कॉमन हो चुके हैं तो ऐसे कितने फैक्टर्स होंगे जो जाने-अनजाने में कंट्रीब्यूट कर रहे हैं हमारी हार्ट हेल्थ को बिगाड़ने में और हमें पता भी नहीं चल रहा इसके बारे में? देखिए ऐसा है जब हमारे यहाँ प्रोस्पेरिटी आई तो नेचुरली फूड ज्यादा गरिष्ठ खाने लग गए। राइट, अभी फ्राइड फूड, वेस्टर्न फूड, फैटी फूड ये वाइड अवेलेबल है एंड पीपल कैन अफोर्ड इट। सीधा मैप में फोन में किया और संग-संग उसके घर पे पहुँच गई फैटी फूड, तो फैट का इंटेक बहुत बढ़ चुका है। ओके, और फैट नेचुरली एडिक्टिव भी है, काफी एडिक्टिव है। जब एक बार फैट खाता है तो आदमी फिर और भी खाने लगता है, हाई कैलोरी और उसमें उसके साथ क्या होता है जो फ्राइड आइटम है उसके ऊपर टेस्ट का एक आ गया है कि टेस्ट उसी से आता है तो लोग ये सोचते हैं फ्राइड छोड़ के टेस्ट नहीं होता जबकि हम लोग बिना फ्राइड में, हम लोग बिना ऑयल के इतनी बढ़िया या खाना बना सकते हैं। तो एक तो हो गया खाने में ऑयल जो है जिसका नाम है ट्राइग्लिसराइड। दो चीज ब्लॉकेज बनाती है, एक कोलेस्ट्रॉल, एक ट्राइग्लिसराइड। कोलेस्ट्रॉल होती है नॉनवेज फूड में और दूध में, एनिमल फूड में कोलेस्ट्रॉल होता है। तो पहला काम हम लोग बोलते हैं आप कोलेस्ट्रॉल को बंद करो, मतलब नॉनवेज बंद करो। नॉनवेज में भी कैटेगरी है, सबसे ज्यादा मटन में कोलेस्ट्रॉल होता है, उसके बाद चिकन में होता है, उसके बाद फिश में होता है। तो ये सारे को ही अगर हार्ट का पेशेंट कोई होना नहीं चाहता है तो ये सारे को बंद कर देना चाहिए, इसके लिए जो भी करना है वो करना पड़ेगा और हार्ट के पेशेंट को तो हम लोग पूरे ही बंद करवा देते हैं नॉनवेज क्योंकि कोलेस्ट्रॉल बंद। अच्छा, दूध में भी फैट निकाल देना चाहिए। हम तो कोलेस्ट्रॉल खत्म हुई। नेक्स्ट हो गया हाँ, स्किम मिल्क ले, डबल टोन पहले उससे और ज्यादा चाहिए तो स्किम मिल्क ले तो फैट खत्म हो गई, कोलेस्ट्रॉल खत्म हो गई, खाने में अब हो गई ट्राइग्लिसराइड। हो गया तेल, तेल में आप देखेंगे कोई स्वाद नहीं है, आप तेल में उंगली डालिए, मुंह में डालिए, कोई स्वाद नहीं है। राइट, पर तेल से लोगों को लगता है टेस्ट है, टेस्ट है ही नहीं उसमें, मसालों का टेस्ट होता है। मैं मसाले का डब्बा रख लूँ और बोलूँ तेल से खाना बनाओ, बना ही नहीं पाएंगे कोई, उसका टेस्ट ही नहीं आएगा, मसालों का टेस्ट होता है पर मसाले को हमने सीखा है फ्राई करना है तेल से और उसको हम लोग पानी से भी फ्राई कर सकते हैं। तो हमने सांवल में हमने सिखाया लोगों को किस तरह से खाने को आप पानी से ही मसाले को भून सकते हैं और उसमें कोई भी ट्राइग्लिसराइड नहीं जाएगा। तो जीरो ऑयल कुकिंग इसके ऊपर हमारे चैनल हैं जहाँ पर लोग सीख सकते हैं कैसे बिना तेल के खाना बन सकता है और वह खाना अगर बनाना सीख जाए तो हमारे खाने में ट्राइग्लिसराइड कम हो गई और ड्राई फ्रूट्स, नट्स जो है जिससे तेल बनती है वो भी मना करना है और सीड्स जैसे अलसी है, खसखस है वो भी तेल बनाता है तो तेल वाले सारे सामान बंद कर दें तो यह दोनों करते ही हार्ट की बीमारी आधे हो जाए और उसके संग अगर स्मोकिंग है, लैक ऑफ एक्सरसाइज है, टेंशन कम करना सीख जाए, मेडिटेशन करे, योगा करें। देखिए लाइफ सबको जीना है और जितने खराब जियोगे उतना जल्दी बीमारी होगा। एक जमाना था इंफेक्शन वाज़ अ मेजर रीजन ऑफ हार्ट ऑफ डेथ। अब लाइफस्टाइल डिजीज 75% डेथ, लाइफस्टाइल है जिसमें डायबिटीज है, जिसमें ब्लड प्रेशर है, जिसमें खाने है, जिसमें स्मोकिंग, टोबेको है, ये सारे बीमारियाँ लाइफस्टाइल से हो रहा है। इनफैक्ट कैंसर भी लाइफस्टाइल की बीमारी है। पर अभी भी नंबर वन बीमारी का डेथ का कारण हार्ट की बीमारी है और इसको कंट्रोल करने के लिए हमें ये सारे चेंजेज करने पड़ेंगे। स्ट्रेस कम करना पड़ेगा, वजन कम करना पड़ेगा। ये जो 14 फैक्टर वो बोला और आजकल एक नया फैक्टर और आ गया वो है पोल्यूशन। ये देखा जाता है शहरों में हार्ट अटैक बढ़ रहे हैं, वहाँ पोल्यूशन बढ़ रहा है। पोल्यूशन से होता क्या है कोलेस्ट्रॉल ऑक्सीडाइज़ होता है। पोल्यूशन भी एक मेजर कारण आ के खड़ा हुआ है हार्ट की बीमारी का। तो अब हम लोग 14 की जगह 15 रीजन बोल सकते हैं आप और यह 15 को न्यूट्रलाइज़ करने के बाद ही हम लोग ब्लॉकेज को रोक पाएंगे और उसको रिवर्स कर पाएंगे और हार्ट अटैक को हम लोग रोक सकते हैं। सो अभी रिसेंटली जब हम वीडियो बना रहे थे एक क्यूआई के ऊपर ही, एयर क्वालिटी इंडेक्स का इम्पॉर्टेंस हर सिटीज़ में तो एक डॉक्टर की रिपोर्ट हमने सामने डाली थी उन्होंने कहा था कि आज के टाइम पे जो भी पेशेंट्स उनको आते हैं एक टाइम था जब मोस्ट ऑफ दी पेशेंट्स स्मोकर्स होते थे तो जब वो यू नो लंग्स खोलते थे तो बेसिकली स्मोकर्स का लंग्स ऐसे ब्लैक हो जाता है। बट आज के टाइम पर 50% ऐसे पेशेंट्स हैं जो कि जिन्होंने कभी स्मोकिंग नहीं किया है लेकिन उनको कोई ना कोई लंग की प्रॉब्लम हो गई है, रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम हो चुकी है। देखिए ये सो लंग्स को हम फिल्टर मानते हैं जो ऑक्सीजन अंदर जाती है उसके संग जितना डस्ट और स्मोक जाता है वो जा के लंग्स में जमा होता है। तो आप समझ लीजिए लंग्स पूरा गंदा हो गया, जैसे ए एयर कंडीशनर में फिल्टर को खोलो तो आप देखिए उसमें कितने कचरे होते हैं। तो ये लंग्स इज़ अ फिल्टर, वो सब सारे कचरे वहीं पे कड़ा जाता है और वो हार्ट में जब वो ऑक्सीजन का जो फ्री रेडिकल जाती है वो ब्लॉकेज की स्पीड बढ़ा देता है। एटली, तो यही कारण है कि शहरों में, बड़े शहरों में स्पेशली, बड़े-बड़े शहरों में जहाँ पे ये पोल्यूशन बढ़ रहा है वहाँ हार्ट की बीमारी बढ़ रही है, हार्ट की बीमारी। सो 60% कॉसेज़ में जो हार्ट की बीमारियाँ हो रही है उसमें कुछ कंट्रीब्यूशन पोल्यूशन का भी।

है फैट का तो है ही, ये पोल्यूशन का भी है। यही कारण मैं आपको बता रहा था। मैं दिल्ली से शिफ्ट करके देहरादून गया हूँ। दिल्ली में 480 AQI था, एक्यूआई और अभी वहाँ पे 40 की AQI है, हमारी। तो अपने को बचाने का यही है, अ शहर छोड़ो, गाँव में जाओ और वहाँ पे नॉन पोल्यूशन में रहो। आजकल इंटरनेट हर जगह है, वहीं से बैठ के काम करो, राइट राइट। या फिर अगर आप शिफ्ट नहीं कर सकते, तो एटलीस्ट आप मास्क वगैरह यूज़ कर सकते हो। जहाँ पे अपने एनवायरमेंट में ऐसा करिए कि डस्ट ना जा पाए और अपने हाउस में एयर प्यूरीफायर वगैरह ऐसा कुछ लगा सकते हो। ऐसा लगाएँ। आप प्लांट रखिए, जो ऑक्सीजन दें। ग्रीनरी से अपने आप को सराउंड करे।

तो सर आपने एक बहुत इंटरेस्टिंग बात कही कि लोगों का, स्पेशली इंडियन्स की मेंटालिटी यह है कि खाने में यू नो, या तो ऑयल तो होना ही चाहिए, वरना उसके बिना मसाले में स्वाद नहीं आता, या फिर घी खाना चाहिए। सो हर घर पर माँएँ बोलती हैं अपने बच्चों को कि यार घी डालेंगे तो तंदुरुस्ती बढ़ेगी। यह सारी चीजें। तो इंडियन मेंटालिटी में ये ऑयल और घी का कल्चर एकदम घुस चुका है। और फिर उसके बाद बहुत सारे कंपनीज़ हैं जो मार्केटिंग करते हैं, अलग-अलग किस्म के ऑयल्स को लेकर, राइट। तो कोई बोलता है कि यार ये राइस ब्रान ऑयल बेस्ट है, कोई बोलता है कि ऑलिव ऑयल बेस्ट है। कोई कंपनी बोलती है कि हमारा जो ये नए टाइप का जो तेल है, इसमें पॉली अनसैचुरेटेड फैट्स हैं, इसमें मोनो अनसैचुरेटेड फैट्स हैं। तो सर इसमें डिफरेंसेस क्या हैं और क्या कोई एक पर्टिकुलर टाइप का ऑयल बेटर है एज़ कंपेयर टू अदर वन और उसका हमारे हार्ट पर क्या असर है?

देखिए, पहले क्वेश्चंस की बात सोचते हैं कि तेल से टेस्ट आता है। यह एकदम गलत बात है। आप सब को एक चम्मच तेल लीजिए और मुँह में डाल के टेस्ट देखिए। एकदम ज़ीरो है। टेस्ट होता है मसालों का। तो यह छोटे से जो महिलाएँ खाना बनाती हैं, आजकल जेंट्स भी खाना बनाते हैं, उनको यह सिखाया गया, मसाले को तेल से फ़्राई किया जाता है तो उससे टेस्ट आएगा। तो वो एकदम गलत बात है। मसाले को हम पानी से भी फ़्राई कर सकते हैं। इसको हम लोग बोलते हैं ज़ीरो ऑयल कुकिंग। यह अगर प्रमोट होगी, तो यह तेल जो है… आगे के जमाने… देखिए, खाते थे लोग तेल-घी। पर 10 किलोमीटर एक गाँव से दूसरे गाँव पैदल जाते थे, 10 किमी आते थे, हल चलाते थे। जो तेल-घी खाया, उसको पचा जाते थे, राइट। अब हमने सारे खत्म कर दिए। फ़ैट जमा हो रहा है। अभी सिर्फ़ जमा हो रहा है, वो अभी खर्चा करने वाला काम खत्म कर दिया। कोई मेहनत है ही नहीं। सारा दिन एक आदमी सुबह उठता है और चाय पीता है और कंप्यूटर लेकर बैठ जाता है। न्यूज़ सुनता है, गाना सुनता है, जो भी है और खाना खाके ब्रेकफ़ास्ट किया और गाड़ी में बैठ के ऑफ़िस पहुँचा। ऑफ़िस में सारा दिन बैठा रहा। शाम को गाड़ी से घर आया। घर पे आके टीवी भी देखा, गप किया। मतलब एक्सरसाइज़ हो गई, खत्म। वो वो तेल तोड़ेगा कौन? तो वो तेल जमता जा रहा है और उसी से हार्ट की बीमारी बढ़ रही है। तो तेल नहीं चाहिए।

अब दूसरा होता है कौन सा तेल अच्छा है? तेल का जो मेडिकल नाम है, वो है ट्राइग्लिसराइड्स। आपने सुना होगा, जब भी आप कोलेस्ट्रॉल की रिपोर्ट कराते हो, तो बोलते हैं लिपिड प्रोफ़ाइल। उसमें कोलेस्ट्रॉल नंबर वन होता है। वो तो नॉनवेज और एनिमल फ़ूड से होता है और ट्राइग्लिसराइड होता है तेल। अब ये तेल को लेकर बहुत सारे जर्ग़न चलते हैं: सैचुरेटेड, मोनो अनसैचुरेटेड, पॉली अनसैचुरेटेड। ये सारे बकवास हैं। तेल का नाम है ट्राइग्लिसराइड। आपको कभी ऐसा करना हो, ये सैचुरेटेड, मोनो… आप पैथोलॉजी लैब को रिक्वेस्ट करिए कि सर मेरा ट्राइग्लिसराइड में कितना सैचुरेटेड है, कितना मोनो है, कितना पॉली है, लिख के देना। वो लोग रिफ़्यूज़ कर जाएगा। बोलेगा आप… अच्छा उसमें लिख के दो कि ये वाली ऑयल है, उसमें तेल… मेरे… मैं… मैं फ़लाना ऑयल खाता हूँ, उसमें लिख दो ये ऑयल मिला। उसमें बोलेगा सारे ऑयल एक से हैं। याद रखिए, जितने तेल हैं, वो सारे एक से हैं। मैं एक एग्ज़ांपल देके समझाता हूँ। एक तीन गिलास में मैंने पानी डाला: एक बिस्लरी, एक किन्ले, एक एक्वाफ़ाइना और मैंने एक आदमी को बोला इसको टेस्ट करके बताओ कौन सा कौन सा पानी है। बोलता सर सेम ही तो है। मैं बोला कोई डिफ़रेंस तो हो। बोला कोई डिफ़रेंस नहीं है। अगर मैं तीन सब्ज़ी बना दूँ तीन तेल से और उनको बोलूँ खा के बताओ कौन सा सफ़ोला, कौन सा कनोला, कौन सा धारा, वो नहीं बता पाएँगे। तो याद रखिए, सारे तेल जो हैं, वो बेसिकली ट्राइग्लिसराइड हैं। अब वो जो सैचुरेटेड, मोनोपॉली का हिसाब भी समझा के देता हूँ मैं। जो तेल होती है, ट्राई मतलब तीन, तो उसमें तीन फ़ैटी एसिड होता है, एक ग्लिसरोल मॉलिक्यूल होता है। उसमें तीन चेन लग जाती हैं फ़ैटी एसिड की। फ़ैटी एसिड चेन, चेन ऑफ़ कार्बन। अब उस कार्बन में मान लेते हैं 15 कार्बन हैं, तो कार्बन के वैलेंसी के हिसाब से दो तरफ़ दो हाइड्रोजन लग जाएँ, तो 15 में 30 हाइड्रोजन लग जाएँ, तो वो तेल सैचुरेटेड हो जाता है। मान लेते हैं 15 चेन, 15 कार्बन का चेन है, उसमें 30 हाइड्रोजन लग गए, तो सारे के सारे सीट फ़िल्ड अप हो गए, वो हो गया सैचुरेटेड। सैचुरेटेड। अब इसमें से एक हाइड्रोजन हटा लो, तो ये अब अनसैचुरेटेड हो गया, पर मोनो अनसैचुरेटेड। मोनो मतलब एक कम है। एक कम है और दो हटा लो, तो पॉली अनसैचुरेटेड। मतलब क्या हो गया? एक में 30 हाइड्रोजन हैं, वो सैचुरेटेड है, एक में 29 हाइड्रोजन हैं, वो मोनो अनसैचुरेटेड, एक में 28 हैं, वो पॉली अनसैचुरेटेड। आप बताओ क्या डिफ़रेंस हो गई? मतलब तीन क्रिमिनल हैं। एक बोलता है मेरे अगेंस्ट में 30 केस हैं, बोलेगा 29 केस हैं, बोलता 28 केस हैं। अब आप कौन सा क्रिमिनल को सपोर्ट करोगे, बता दो। तो ये आप समझ लो, सारे ऑयल एक से हैं। ये जर्ग़न हैं। ये ऑयल अच्छा, वो ऑयल अच्छा। सारे ऑयल एक से हैं। सारे मार्केटिंग जार्ग्स और जो हार्ट के हॉस्पिटल्स हैं, वो लोग भी जानते हैं कि कोई भी तेल अच्छा नहीं। आप किसी डॉक्टर को पूछिए, सर तेल अगर अच्छी है, तो मैं एक आध लीटर ले लेता हूँ, मेरे पास पैसे की कमी नहीं है। वो बोले ना ना, अच्छी नहीं है। तो फिर देख क्यों रहे हो? हाँ, अच्छी नहीं है। कम तेल खाओ। यह हर कोई बोलेगा। हाँ, मैं बोलता हूँ जब तेल का टेस्ट ही नहीं है, हाँ तो आप क्यों लेते हो? अच्छा, मुश्किल कहाँ पे? जिन्होंने पहले से ही कुकिंग सिखा हुआ है तेल वाला, हाँ, उनको… आपकी माँ है, आपकी बहन है, उनको बोलो कि अब तेल मत देना। तो वो क्या बोलेगी? मालूम है? उनको भी मालूम है नहीं देना चाहिए, पर उन्होंने सीखा ही है तेल से भुना, तो बोलेगी मैं इतना डालूँगी। हाँ, फिर आप बोलो नो नो, मुझे चाहिए ही नहीं। बोलेगी इतना डालूँगी। अब बोला नो नो, नहीं चाहिए। बोलेगी इतनी सी डालूँगी। फिर आप बोलिए एकदम ही नहीं देना है, तो बोलेगी फिर उबला हुआ खा लो। अच्छा आदमी को मैं जब बोलता हूँ बिना तेल का खाना, बोलता उबला हुआ खाना पड़ेगा। मैं बोला नहीं यार, सारे मसाले होंगे। भूनने का तरीका बदलो। तो मेरे को कोई ने बोला सर फिर कौन सा तेल बेस्ट है? मैं बोला मैं पानी से भुँता हूँ और इसका नाम मैंने रख दिया सावल ऑयल। हमारी जो संस्था है, उसका नाम है सावल। तो मैं बोलता हूँ सावल ऑयल, मतलब पानी से बनाओ। तो आजकल मेरे पेशेंट मिलते हैं सर आजकल खाना मैं सावल ऑयल में ही बनाता हूँ, मतलब पानी से बनाता हूँ। तो उसमें ना कोलेस्ट्रॉल है। पानी में देखिए, पानी का ब्यूटी देखिए, ना कोलेस्ट्रॉल है, ना ट्राइग्लिसराइड है, ना कैलोरीज़, ना पैसे लगेंगे आपके घर पे, फ़्री सप्लाई है। तो अब मैं ये क्या बोलता हूँ? तेल के जगह आप सावल ऑयल से खाना बनाओ, पानी से खाना बनाओ और पानी का पैसा भी नहीं लगा, आपके लिए भला ही भला है।

इनफ़ैक्ट मैं कभी-कभी यह भी समझाता हूँ कि जैसे हम लोग नॉर्मल वे में काम करवा लेते हैं सरकारी का, हम फिर करप्शन आ गया। हाँ, अब करप्शन इतनी फैल गई कि कोई बोले मैं सरकारी काम ऐसे ही करा लूँगा। तो बोलता बेकार की बात मत करो, इससे बिना पैसे दिए बगर काम नहीं होगा। तो अभी नॉर्मल वे हो गया करप्शन, हाँ, और सच्चाई लास्ट हो गया, राइट राइट। तेल इज़ एन एबनॉर्मल फ़ूड। आप सोचिए तेल को जो सीड से पेड़ बनने के लिए सीड बनी थी, उसको आप इकट्ठा किया, उसको क्रैश करके उसका जूस निकाले, वो तेल है। वो एबनॉर्मल फ़ूड है, हाँ। जबकि पानी नेचुरल चीज है। तो अब ये हो गया कि करप्शन इज़ नॉर्मल, मतलब तेल वाला खाना नॉर्मल है और पानी वाला अब नॉर्मल है, जबकि होना उल्टा चाहिए। तो अब लोग, हम लोग लगे हुए हैं कि आप हमारी हज़ारों आइटम बनाया हमने बिना तेल के, टेस्ट सेम टू सेम हो। तो आपको क्या ज़रूरत है? हम लोग पकौड़े, समोसे, कचौड़ी, हर चीज बना रहे हैं, गोलगप्पे, हर चीज बना रहे हैं विदाउट ऑयल। बिरयानी खिला रहे हैं, हर चीज खिला रहे हैं। हज़ारों आइटम बना दिए, 50 दिन की मेनू बना दिए। तो तेल का मतलब नहीं है। तेल खाने की ज़रूरत भी नहीं है। और कुछ-कुछ कंपनी तो ऐसा तेल को घुमा के देते हैं। मान लेते हैं 5% उसमें सैचुरेटेड है और बाकी अनसैचुरेटेड है, पॉली और मोनो। वो लोग लिखते हैं 95% सैचुरेटेड फ़ैट फ़्री और सैचुरेटेड हटा के एंड में लिख देते हैं सैचुरेटेड (ब्रैकेट में)। तो पता ही नहीं चले। तो लोग पढ़ते हैं 95% सैचुरेटेड फ़ैट फ़्री। फ़ैट फ़्री और उसमें कोलेस्ट्रॉल भी नहीं है। देखिए, तेल में जानवर से तो बना हुआ है नहीं। कोलेस्ट्रॉल जानवर के खाने में होता है। हाँ, तो उस… उसमें वो लोग लिख देते हैं 100% कोलेस्ट्रॉल फ़्री। अरे भाई, तेल में तो ट्राइग्लिसराइड 100%। वो लिखो। कोई भी चीज के ऊपर लिखो 100% ट्राइग्लिसराइड। तेल के ऊपर। वो तेल का नाम ही नहीं है। ट्राइग्लिसराइड का नाम ही नहीं है। जो चीज है उसका नाम नहीं है, जो चीज नहीं है कोलेस्ट्रॉल, उसका लिख रहे हैं 100% कोलेस्ट्रॉल फ़्री। और जो सैचुरेटेड नहीं है, मोनोपॉली उसके लिखते हैं फ़ैट फ़्री। हाँ, लोगों को ऐसा इन लोगों ने गुमराह कर दिया, ऑयल कंपनियों ने।

आगे… अच्छा सर ने इसको बैन भी किया? हाँ, आगे के जमाने में फ़लाना तेल अच्छा है, हार्ट का ऐसा एडवर्टाइज़मेंट कर सकते थे। हाँ, सरकार ने बैन लगा दी कि तेल गुड फ़ॉर हार्ट, आप कहीं नहीं लिख सकते, राइट राइट। अब देखिए, वो लोग किस तरह से इसको मोड़ देते हैं। एक फ़िल्म दिख रहा है जिसमें माँ-बाप, बच्चे सारे मिलके खाना खा रहे हैं। खूब तेल-वेल वाला सामान, बड़ा खुश खा रहा है और उसके बाद उसका फ़ादर हाथ लगाता है यहाँ पर छाती में। तो आप समझ गए, उसको हार्ट अटैक हुआ और सँगसँग एम्बुलेंस का आवाज़ और पी पी पी पी और आईसीयू में ईसीजी चल रहा है। हम तो वहाँ… वो आदमी एडमिट है। आप समझ गए कि इसको तेल वाला खा रहा था, हार्ट अटैक हुआ और उसके बाद उसकी वाइफ़ बोलती है मैं फ़लाना तेल खाती थी इसलिए बच गया। तो आदमी क्या पढ़ता है इससे कि तेल खाओगे तो हार्ट अटैक नहीं होगा। जबकि पूरा उल्टा बात है। तेल से हार्ट अटैक का एक मेज़र कारण है। कारण है कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड और तेल की ज़रूरत ही नहीं है। नेचर ने हमें हर खाने के अंदर तेल डाल के दिया है। हम रोटी में 1% तेल है, चावल में 1% तेल है, दाल में 45% तेल है। हर फ़्रूट में, हर वेजिटेबल में तेल होता है। आप टमाटर का सूप बना लो और उसके ऊपर देखो तेल का एक आध बूँद घूम रहा है। कहाँ से आया भाई? हमने तो डाला ही नहीं और टमाटर में भी तेल है। तो हमारे बॉडी की जितनी तेल की ज़रूरत है, वो ऑटोमेटिक आ रहा है। बाहर से तेल की ज़रूरत नहीं है। है ही नहीं। पर यह पूरा प्रोसेस ऐसा हो गया और तेल ऐसा मार्केट हो गया है, बड़े-बड़े कंपनियाँ खुल गई हैं, तेल बेचो, तेल बेचो और घी तो और भी ख़राब है। एक फ़ॉरेनर ने मेरे को पूछ लिया व्हाट इज़ घी? हम… मैं सोचा कैसे जवाब दूँ भाई? सोयाबीन का तेल है, मूँगफ़ली का तेल है। मैं बोला मिल्क ऑयल। बोलता नाउ आई अंडरस्टैंड। तो घी इज़ मिल्क ऑयल। मिल्क से जो तेल निकलता है वो घी है। घी भी वही है। घी में एक और एडिशनल चीज है क्योंकि एनिमल प्रोडक्ट है, इसमें कोलेस्ट्रॉल भी है। हाँ, घी में आप नहीं लिख सकते कोलेस्ट्रॉल फ़्री क्योंकि उसमें कोलेस्ट्रॉल भी है। ट्राइग्लिसराइड तो है ही है, उसमें कोलेस्ट्रॉल भी है। तो घी तो डबल मार खाता है। पर क्या हमारे इंडियन कल्चर में घी चलता था? तो लोगों को है नहीं नहीं, पुरानी चीज बहुत अच्छी है तो घी अच्छी है। पर घी में भी कुछ भी नहीं है। वो सेम चीज है, ट्राइग्लिसराइड। तो अगर हार्ट की बीमारी आज इतनी बढ़ रही है, उसमें से मेज़र कंट्रीब्यूशन तेल का है और ज़ीरो ऑयल खाना खाना अब बहुत ज़रूरी हो गया है। अगर हार्ट की बीमारी, मोटापा का बीमारी, डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर से बचना चाहते हैं, तो तेल बंद करना बहुत ज़रूरी है। बहुत ज़रूरी है, राइट।

सो सर यह जो तेल का जो कल्चर है, अब ये धीरे-धीरे कहीं ना कहीं आपको लग रहा है थोड़ा कम हो रहा है। ये अवेयरनेस अभी तक फैल रही है लोगों में। बड़ी जबरदस्त हो रही है। बहुत जबरदस्त। मैं अभी जब मैं इसका बिना तेल का किया था, मुझे याद है बहुत सारे लोग बोले थे अरे ऐसे कैसे बनेगा? बट अब मैं ग्रैजुअली ओवर द इयर्स देख रहा हूँ इट्स बिकम सो पॉपुलर। अभी मेरी एक बिना तेल का वीडियो वायरल हुआ है। इट हैज़ बीन सीन बाय 37 करोड़ पीपल। हम तो आप ये समझ लीजिए इंडिया के 37 करोड़ ने वो वीडियो देखा है और उसको फ़ॉरवर्ड किया है, एक दूसरे को शेयर किया है। तो यह जो तेल का काम है, यह बंद हो जाना चाहिए। मैं तो अभी सरकार को ये करना चाहूँगा, जैसे आप स्मोकिंग पे, सिगरेट पे टैक्स लगा रहे हो, तेल पे टैक्स लगाओ। तेल को अगर आपको लेना है, तो ₹100 के जगह ₹200 टैक्स और देना पड़ेगा आपको। तो तेल के ऊपर टैक्स लगेगा तब ये जाके बात बन पाएगी। जैसे स्मोकिंग के लिए सिगरेट के ऊपर टैक्स लग रहा है, जर्दे के ऊपर टैक्स लग रहा है, तेल के ऊपर टैक्स लगना चाहिए। कुकिंग ऑयल पे टैक्स लगना चाहिए। कुकिंग ऑयल के जगह पानी से खाना बनाने का ट्रेनिंग देना पड़ेगा, इसको प्रमोट करना पड़ेगा। तो हम लोग प्लान कर रहे हैं इंडिया में एक बहुत बड़ा कैंपेन, जहाँ पर ज़ीरो ऑयल को हम लोग आम आदमी तक पहुँचाएँ। पहुँचाएँ। लेकिन गवर्नमेंट के साइड से ये करवा पाना थोड़ा सा मुश्किल होगा, बिकॉज़… ये मुश्कि हेलीपेड, यू नो, टैक्सेस वगैरह आते रहेंगे। लार्ज कंपनीज़ हैं, गवर्नमेंट को तो फ़ायदा होने वाला है। आज जो टैक्सिंग कर रहे हैं कि भाई तेल के ऊपर टैक्स, वो स्मोकिंग के ऊपर टैक्स किया जा रहा है, जर्दे के ऊपर टैक्स कर रहा है, उसे पैसे तो मिल ही रहे हैं, तो तेल में भी पैसे मिल जाएँगे सरकार को। ख़ाली सरकार के लोगों को यह बात पहुँचाना कि तेल के जगह हम लोग पानी यूज़ करेंगे तो अननेसेसरी तेल की यूज़ खत्म हो जाएगी, आधी बीमारियाँ लाइफ़स्टाइल वाली खत्म हो जाएगी। तेल में हाई कैलोरी होता है, वो मोटापा करता है। अब तेल बंद कर दीजिए, धड़ाधड़ वज़न कम होता रहता है। अच्छा ये भी बहुत सारे लोग शायद… लोग… एक टेबलस्पून तेल में, किसी भी तेल में 120 कैलोरीज़ होते हैं। आप समझ लीजिए 1 ग्राम में 9 कैलोरी है। हाँ, एक चाय का चम्मच 5 ग्राम है, उसमें 45 कैलोरी है। ओ हो हो! और 15 ग्राम में आप 9 * 15… हाँ, इतनी कैलोरीज़ हैं। आप ये समझ के चल लीजिए कि ये तेल… आपका एक खीरा में, 100 ग्राम का खीरा इतना बड़ा लेंगे, उसमें 13 कैलोरी है और वो 10 खीरा के बराबर है एक चम्मच। टेबलस्पून। टेबलस्पून। अगर आप खीरा से पेट भरते हो, सब्ज़ियों से पेट भरते हो, कितनी कैलोरी कट हो गई। धड़ाधड़ वज़न कम होगा। हमारी ज़ीरो ऑयल का खाना खाके लाखों ने, करोड़ों लोगों ने वज़न कम किया है हम। और सर जैसे एक वे प्रोटीन का जो स्कूप आता है उसमें भी 120 कैलोरीज़ होते हैं, लेकिन 24 ग्राम प्रोटीन होता है। बट एक टेबलस्पून ऑयल में सिर्फ़ और सिर्फ़ फ़ैट होता है और 120 कैलोरी है, ज़ीरो न्यूट्रिशन। ये ज़ीरो न्यूट्रिशन… ये बहुत ज़रूरी है। ज़ीरो तो ख़ाली ब्लोट कर रहा है और फिर अंदर के आर्टरी को भी चोक कर रहा है, मर रहा है, मार रहा है। आप सोचो एक दिन करना क्या है? तेल से खाना बन जाए। आप किचन में जाओ, पूरे दिन खाना बनाओ तेल में। जहाँ गैस का चूल्हा रखा है, उसके बगल वाले दीवाल में हाथ लगाओ, चिपचिप करेगा और एक महीने तक उनको बोलो साफ़ ना करने देना। देखना लेयर जम जाएगी और वही हार्ट के ट्यूब में हो रहा है। मर रहे हैं लोग। तो तेल तो बंद होना ही चाहिए।

नॉनवेज को भी पूरा अवॉइड करें। नॉनवेज के ऊपर भी मैं एक छोटा सा एग्ज़ांपल देके समझाना चाहता हूँ। लोगों के अंदर एक बैठ गया है कि नॉनवेज नहीं खाएँगे तो खुशी नहीं होगी, टेस्ट नहीं आएगा। टेस्ट नहीं आएगा, प्रोटीन नहीं मिलेगा। ये भी चीज… प्रोटीन तो चलो दाल से मिल जाता है। देखिए, दाल इज़ अ वेरी गुड प्रोटीन। दाल और नॉनवेज में थोड़ी सी फ़र्क है। नॉनवेज में हमारे को जो अमीनो एसिड चाहिए नौ तरह का, कंप्लीट चेन आ जाएँ, वो सारे मिल जाती हैं। दाल में एक में ये कमी है, दूसरे में दूसरा कमी है, तीसरे में तीसरा कमी है। अगर आप दाल को मिक्स करके खा लेते हो तो मेकअप हो जाता है। तो अगर दाल को आप पाँच-पाँच तरह का मिला-मिला के खाते हो या एक दिन ये दाल, एक दिन वो दाल, एक दिन वो दाल, तो प्रोटीन में जो कमियाँ होती हैं वो सारा मेकअप हो जाता है। तो दाल से प्रोटीन मिल सकता है। अब आते हैं नॉनवेज में। कोलेस्ट्रॉल होती है, राइट? वो बंद करना पड़ेगा। नॉनवेज के लिए मैं एक छोटा सा एग्ज़ांपल देता हूँ। मेरे पास एक बंगाली आए, उनको मैंने बोला भाई आप तेल-घी ये सब बंद कर दो। बोला सर नो प्रॉब्लम, सर बंद कर दूँगा। फिर मैंने बोला आप मछली बंद कर देना। बोलता मर जाऊँगा, मोरे जापो। तो मैं… मैं बोला देखो खाओगे तो ज़रूर मरोगे, उसमें कोलेस्ट्रॉल है, तुम्हारी ऑलरेडी ब्लॉकेज हो चुकी है। तो बड़ा दुखी होकर गया। दो मिनट बाद आके बोलता सर एक बात पूछूँ? मैं बोला पूछो। सर आप तो मछली नहीं खाते हो? मैं बोला नहीं खाता हूँ। बोलता ओहो, आपके लाइफ़ में खुशी आएगी कहाँ से? हाँ, मैं बोला मेरे को देख के दुखी लग रहा है। बोलता नहीं, देखने तो ठीक लग रहा है। बोला कुछ नहीं है, जाओ। फिर दो मिनट बाद आ गया। बोलता सर एक क्वेश्चन पूछूँ? मैं पूछूँ… सर अपने बच्चों को मछली खिलाते हो ना? मैं बोला एकदम सवाल ही पैदा नहीं होता है। तो बोलता बच्चों पे अत्याचार। हाँ, ज़िन्दगी भर वर्ल्ड का बेस्ट खाना नहीं खाएगा, रो-रो के मर जाएगा। इतनी बड़ी अन्याय मत करिए, उनको मछली तो खाने दीजिए कम से कम। नेक्स्ट दिन मुझे मारवाड़ी मिल गया। उसको मैंने बोला आप मछली और मीट मत खाना। बोलता है कोई एक लाख रुपए देगा तो भी नहीं खाऊँगा, तो भी नहीं खाऊँगा। तो मैंने उसको बोला आपना घी मत खाना। बोला घी बिना रोटी उतरें कोनी। तो ये उसके दिमाग में घी बैठ गई। बंगाली के दिमाग में मछली बैठ गई। दिल्ली में हमारे पास लोग मिलते हैं हरियाणा वाले, उनको बोलता हूँ भाई आप सब चीज छोड़ दो, मछली छोड़ दो। बोलता नो प्रॉब्लम। घी छोड़ दो। बोलता नो प्रॉब्लम। मैं बोला दूध? बोलता देखिए, दो लीटर भैंस का दूध चाहिए, उसके बिना ज़िन्दगी में क्या रह जाता है? दूध ना पियो? ये क्या मतलब है? और मैं बोलता हूँ उसको फ़ैट खत्म करो। बोले ना ना ना, वो भैंस के दूध में ही तो जान है। अच्छा फिर पंजाबी मिलता है। बोलता सब छोड़ दूँगा बस दो पैग शाम को। तो वो उनको शराब चाहिए। तो ये क्या हमारे दिमाग में बैठ जाता है कि खुशी मछली में मिलती है, खुशी मीट में मिलती है, खुशी घी में मिलता है, शराब में मिलती है। कोई चीज का खुशी नहीं। अगर आपके मन में असंतुष्टि है तो आप कोई भी खाना आपको खुश नहीं करेगा और मन में दुखी है तो आप ख़ाली आली-बाई खुश हो, खुशी नहीं है। दिस आर स्मॉल डिजायर्स। तो आपको अगर हेल्दी रहना है तो हेल्दी खाना पड़ेगा। आज वर्ल्ड भर में लोग वेजिटेरियन बन रहे हैं। कोई भी इंटरनेशनल फ़्लाइट में जाइए, वेजिटेरियन खाना देगा। अब आपको… आप जैन खाना मांगोगे, देगा। तो तेल-घी ये बंद होना चाहिए। नॉनवेज कम कर देना चाहिए सबको और स्पेशली हार्ट के पेशेंट हो तो बंद कर देना चाहिए। ये दो तो बहुत ज़रूरी है। सलाद, सब्ज़ी, फ़्रूट्स। इसमें होता है फ़ाइबर और एंटीऑक्सीडेंट। ये दोनों बहुत काम की हैं और स्मोकिंग अगर छोड़ दें या जर्दा-गुटका… आजकल ये बहुत बड़ा बात है। जर्दा-गुटका जो है ये ब्लॉकेज बनाता है। खैनी जो है ये ब्लॉकेज बनाता है। तम्बाकू इन एनी फ़ॉर्म ब्लॉकेज बनाता है और करता क्या है वो भी समझा देता हूँ मैं। एक सरफ़ेस है उसमें आपने डस्ट डाला और फूँक दिया, धूल उड़ गई। उसमें गोंद लगा के धूल डाल दिया और चिपक गई। हम तो… जो लोग स्मोक करते हैं, जो लोग जर्दा-गुटका, खैनी ये सब खाते हैं उनकी ट्यूब अंदर से स्टिकी बन जाती है, उसमें कोलेस्ट्रॉल चिपक जाती है। हम तो… वो ब्लॉकेज की स्पीड को बढ़ा देता है। उसको अगर 30-60 साल में हार्ट की बीमारी है, अगर वो स्मोक करेगा तो 50 साल में हार्ट अटैक हो जाएगी और अगर वो हाई ब्लड प्रेशर रखेगा तो 40 साल में हो जाएगा। अगर वो डायबिटीज़ रखेगा तो और भी कम एज में होगा। ये सब ब्लॉकेज को बढ़ाने का काम करता है। मोटापा, ब्लड प्रेशर, शुगर ये खुद ब्लॉक नहीं बनाता। शुगर ब्लॉकेज में नहीं जमती है। जमती है कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड। इनको मदद करते हैं। ये चार-पाँच लोग… तो अगर ये सपोर्टर… जैसे एक ने खून किया… हाँ… और उसके अंप्स हैं, अंप्स… ये…

लोग हैं हार्ट अटैक किया। वो आदमी को मारा। उसको हेल्प कौन किया? ब्लड प्रेशर, शुगर, स्मोकिंग, तो ये सबको कंट्रोल करना पड़ेगा। तब जाके बात बनेगी सर। शुगर भी एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो गई है आज के मॉडर्न लाइफ स्टाइल में। हर चीज में शुगर होता है, राइट? और शुगर एक एडिक्शन भी है। तो शुगर एगजैक्टली कैसे कंट्रीब्यूट कर रहा है, ये इसमें जरा अगर हमारी ब्लड शुगर ज्यादा रहती है और मैं आपको बता दूं, इंडिया को बोलते हैं डायबिटिक कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड। इतने डायबिटिक हो गए हैं। इसका मेजर कारण है स्ट्रेस, लैक ऑफ फिजिकल एक्टिविटी। इंडिया में एक होता है सेंट्रल ओबेसिटी, पेट मोटा होता है, पेट में ज्यादा फैट होता है। तो यह सारा डायबिटीज का कंट्रीब्यूशन है। और शुगर अगर ब्लड में ज्यादा होता है तो यह काम करता है जिसको बोलते हैं माइक्रो एंजियोपेथी। हम माइक्रो एंजियोपेथी का मतलब है छोटे-छोटे ट्यूब जितने बॉडी में सब में, वो एंजियोपेथी कर देता है। पैथी मतलब बीमारी, एंजियोपेथी मतलब छोटे-छोटे ट्यूब की बीमारी। उससे ब्लॉकेज होती है, उससे आंख खराब होती है, उससे किडनी खराब होती है, उसमें नर्व में न्यूरोपैथी होती है। तो यह डायबिटीज पूरे बॉडी को खोखला कर देता है। और डायबिटीज अगर कंट्रोल करना है तो आपको वही हार्ट के लिए जो करना है सारा काम करना पड़ेगा। वॉक करना है, योगा करना है, स्ट्रेस कम करना है, फ्रूट्स ज्यादा खाना, वेजिटेबल ज्यादा खाना, तेल ही बंद करना है। और एक्स्ट्रा आपको करना पड़ेगा, शुगर बंद करो। जो मिठास है उसको बंद करना पड़ेगा जिससे शुगर का… मैं चाइना गया, वहां चीनी मिलते ही नहीं है कहीं पे। नमक मिलता नहीं है। बताइए, नमक ढूंढो तो मिलता नहीं है। वो लोग नमक और चीनी दोनों बंद कर चुके हैं। उनके वहां अलग प्रॉब्लम है, मीट खूब खाते हैं। हां, पर वहां पे, वहां पे मैं आइसक्रीम एक दिन खाया, उसमें चीनी नहीं है। मैं बोला ये कैसा आइसक्रीम है? बोला सर यहां चीनी नहीं मिलता है रेस्टोरेंट में। बोला मुझे नमक चाहिए। इंडियंस को नमक कम है। हां, तो ढूंढ ही नहीं पाए। बोलते रेस्टोरेंट में नमक ही नहीं है। मैं बोला यार तो ये क्या हमारे मन की है? पर शुगर अगर आपको कंट्रोल करना है तो नेचुरली शुगर खाना बंद करना पड़ेगा और आप वॉक करिए, एक्सरसाइज कीजिए। जो हार्ट के लिए करना है वही देखिए। चार बीमारियां जिसको हम लोग बोलते हैं आपस में कजन भाई लोग हैं। हां, एक है हार्ट की बीमारी और तीन उसके छोटे भाई लोग हैं। एक है ब्लड प्रेशर, एक है डायबिटीज, एक है मोटापा। हां, तो ये तीनों, चारों एक साथ चलते हैं और तीनों, चारों का ट्रीटमेंट एक ही है। वही वॉकिंग, वही योगा, वही स्ट्रेस मैनेजमेंट। ये सारे एक ही 14 चीजों को इंप्रूव करना, 14 चीजों को ये चार मिलके मेन कंट्रोल करता है और बाकी इनको फिर कंट्रोल करने वाले फैक्टर्स को कंट्रोल करना पड़ेगा।

हां सो सर अभी अगर हम बात करें नॉनवेज की तो आपने कहा कि नॉनवेज को हो सके जितना हो सके छोड़ना चाहिए, अवॉइड करना चाहिए। तो इसके पीछे मेजर रीजन यह है कि इसमें बेसिकली सैचुरेटेड फैट्स होते हैं। इसमें कोलेस्ट्रॉल, कोलेस्ट्रॉल होता है। तो कोलेस्ट्रॉल ये डायरेक्टली फूड से आपका बॉडी अब्जॉर्ब कर रहा है। तो इसके अलावा और कोई रीजन है कि मतलब नॉनवेज को देखिए, कोई भी जानवर से बना हुआ खाना ना हो, उसमें कोलेस्ट्रॉल नहीं होता। माने आंख मिच के आप तेल में बोल सकते हैं कोलेस्ट्रॉल फ्री। हां, पानी को बोल सकते हैं कोलेस्ट्रॉल और वो मार्केटिंग के लिए यूज किया जाता है। और रोटी में कोई कोलेस्ट्रॉल नहीं होता। जो भी चीज प्लांट से बना है उसमें कोलेस्ट्रॉल होता ही नहीं है, राइट? उसमें ट्राइग्लिसराइड हो सकता है लेकिन उसमें ट्राइग्लिसराइड हो सकता है, कोलेस्ट्रॉल नहीं होता है। कोलेस्ट्रॉल नहीं होगा। कोलेस्ट्रॉल हमारी बॉडी में भी बनती है। अगर आपके खून में 100 कोलेस्ट्रॉल है उनमें से 70 लीवर बनाता है और 30 हम लोग खाने में लेते हैं, फूड से। तो खाने वाला तो हम खत्म कर दें। हार्ट की बीमारी का वो 30 पर तो खत्म कर दिया। लीवर में कुछ लोगों की जेनेटिक होती है, उनका 70 नहीं बनता, 170 बनता है। और इंडिया में ऐसे लोग हैं जिनके परिवार में हार्ट की बीमारी है, उनके सारे मेंबर्स को बोलते कोलेस्ट्रॉल चेक करो। 130 से 200 तक की रेंज लिखी होती है। अगर आप 170 के ऊपर हो, 150 के ऊपर हो तो ब्लॉकेज बढ़ा रहे हो हम तो। अगर आप 200 हो तब तो आप डेफिनेटली हार्ट अटैक में आगे जाओगे हम तो। कोलेस्ट्रॉल को 130 लाके रखना चाहिए। तो अगर कोई की फैमिली हिस्ट्री है हार्ट की बीमारी का, इसका मतलब है उनके लीवर में डबल कोलेस्ट्रॉल बनती है। वो खाना में ना भी खाए तो भी हार्ट अटैक हो सकता है। तो बहुत सारे लोग बोलते हैं मैं तो वेजिटेरियन हूं, मुझे हार्ट अटैक कैसे हो गया? मेरा कोलेस्ट्रॉल ज्यादा कैसे? अरे भाई आपके लीवर बना रही है कोलेस्ट्रॉल। जेनेटिक होता है, मोटिक है वो। फिर हम दवाई देके कंट्रोल कर देते हैं। हमारे एलोपैथी में स्टैटिन ग्रुप्स है और अब नए-नए ग्रुप भी आ गए हैं। एक तो कोलेस्ट्रॉल की ऐसी इंजेक्शन आ रही है वो 6 महीने तक आपकी कोलेस्ट्रॉल बढ़ने नहीं देगी। एक इंजेक्शन लगाओ, 6 महीने तक कोलेस्ट्रॉल बंद। सर एक ड्रग है एजेटी माइप करके वो भी काफी हद तक फूड से लिया हुआ कोलेस्ट्रॉल को ब्लॉक करता है, राइट? वो क्या करता है हमारे इंटेस्टाइन से कोलेस्ट्रॉल एब्जॉर्ब होती है उसको रोक देता है। तो जो आपके लीवर से जो कोलेस्ट्रॉल बाकी में सिक्रेट होती है उसको रिअब्जॉर्ब नहीं होता, तो कोलेस्ट्रॉल निकल जाती है। तो आजकल स्टेटिन के संग ईजीटी में भी दवाई दी जाती है, उससे कोलेस्ट्रॉल डबल कंट्रोल हो जाता है, राइट? राइट? और स्टैटिंस का क्या सीन है? क्योंकि बहुत सारे डॉक्टर्स यह बोलते हैं, मतलब ये कंट्रोवर्शियल है। बहुत सारे डॉक्टर्स यह बोलते हैं कि अर्ली स्टेजेस से ही अगर लोग लेना स्टार्ट कर सकते हैं जिनको बहुत ही अर्ली स्टेज के सिम्टम्स दिख रहे हैं, इवन लाइक 50, 60 पर ब्लॉकेज से भी पहले अगर लेना स्टार्ट कर दे तो। वो हर किसी के लिए लीगल होना चाहिए, मतलब प्रिस्क्रिप्शन की जरूरत नहीं होना चाहिए। एक्चुअली मैं आपको बता दूं, देखिए जेनेटिक केसेस में आप तेल खाओ, आप बहुत ज्यादा नॉनवेज खा रहे हो। बांग्लादेश में मेरे तीन क्लिनिक हैं, ढाका, चिटगांव और सिलहट, राइट? वहां पे लोग एक दिन में तीन बार मीट खाते हैं, ब्रेकफास्ट में, लंच में, डिनर में। उनका स्टेपल ही है। पूरे वीक में 21 बार मीट खाते हैं। ओ हो हो! वहां पे हार्ट की बीमारी हम लोग से डबल है। आप चले जाइए कलकत्ता के किसी भी हार्ट हॉस्पिटल में, बेंगलोर के किसी हार्ट में, चेन्नई में, बांग्लादेशी भरे हुए हैं। हां, वो सब हार्ट की बीमारी है। वो लोग खाने से हैं। हम जेनेटिक जो है वो नहीं भी खाएगा तो भी हाई रहेगा कोलेस्ट्रॉल। तो इसलिए जेनेटिक केसेस में तो वो आपको देखना ही पड़ेगा। पर अगर आपका कहीं पे भी कोलेस्ट्रॉल है उसको कम करना पड़ेगा। जेनेटिक केसेस में और उसके लिए स्टैटिन जो दवाई है इसको बोलते हैं एचएमजी को ए रिडक्टेस इनहिबिटर। हमारे लीवर में जो कोलेस्ट्रॉल बनती है उसमें एक एंजाइम है एचएमजी को ए रिडक्टेस, उसको इन्हींबिट कर दो तो कोलेस्ट्रॉल बनना बंद हो जाएगा, होस्टल बंद हो जाएगा। यह दवाई आज वर्ल्ड का हाईएस्ट सेलिंग ड्रग है। बिलियन डॉलर ड्रग माना जाता है और यह दवाई इसलिए ली जाती है कि लाखों लोगों को हार्ट अटैक को रोक देता है, स्पेशली जिसकी कोलेस्ट्रॉल हाई है, राइट? और यह इतनी यूज्ड है पर इसका साइड इफेक्ट नहीं है। है भी तो बहुत हाई डोज में है और वो उतनी हाई डोज इंडिया में यूज ही नहीं होती है। इंडिया, अमेरिका में सीधा 40 से 80 मिलीग्राम देते हैं। हम लोग अभी 5, 10, 20 मिलीग्राम से लेते हैं। कंट्रोल तो स्टैटिन शुड बी गिवन, इसमें कहीं कोई शक नहीं है। जिसकी हाई कोलेस्ट्रॉल है या जिसको कोलेस्ट्रॉल की वजह से हार्ट की बीमारी है उनको स्टैटिन देना चाहिए, इसमें कहीं डाउट नहीं है। आई यूज इट और मेरे को लगता है ये यूज होनी चाहिए। अब उसके संग अगर आपका डोज कम करना है तो आप ईजीटी में भी ऐड कर लो। और अब, अब नए-नए और दवाई आने लग गई। तो अब ऐसा नहीं कि स्टैटिन कोई टॉलरेट नहीं हो रहा है। मेरे पास अभी थोड़े दिन पहले एक पेशेंट वीडियो कंसल्टेशन में, वीडियो कंसल्ट करता हूं अमेरिका से की, हां, बोलती है मेरे फादर को कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा था, उन्होंने स्टैटिन लिखा था, मैंने नहीं खिलाया। मैं बोला क्यों नहीं खिलाया? बोलता मैं गूगल में देखी इसका साइड इफेक्ट है तो मैंने इसलिए बंद कर दिया। मैंने उसको डांट लगाई। मैं बोला तुम्हारे वजह से हार्ट अटैक हुआ, तुम कौन होती हो बंद करने वाली जब डॉक्टर लिख के दिया है? रोना चालू कि मेरे फादर का हार्ट अटैक, मैं का… मैं बोला आप हो कॉज, आपने कैसे बंद कर दिया? एलोपैथी में कोई भी दवाई की साइड इफेक्ट नहीं हो, ऐसा क्यों नहीं हो सकता? जब रिसर्च की जाती है दवाई की तो उसमें लिखा होता है 100 लोगों को दोगे अगर एक आदमी भी बोलता है मेरा पेट दर्द है, दो ने बोला मेरे को एलर्जी है, तीसरे ने बोला यूरिन में मेरे को जलन हो रहा है तो लिखना पड़ेगा, सब लिखना पड़ेगा, राइट? अगर नहीं लिखोगे दवाई पास ही नहीं होगा। अच्छा लोग क्या सोचते हैं कि अब 100 लोगों में से एक आदमी को, दो आदमी को पेट दर्द होगा तो वो सोचता है मैं उस दो में ही हूं, जबकि वो 98 में होगा। पर क्या लोगों के एक ना है कि पढ़ लिया था तो ये तो मेरे को साइड इफेक्ट हो गई। मुझे याद है मैं कभी लेक्चर दे रहा था उसमें मैं दवाई लिखा, उसका साइड इफेक्ट लिख दिया, सारे लोग आ गए, दवाई मैं नहीं खाऊंगा। अरे मैं बोला यार तेरे को होता है कुछ बोलता नहीं पर आपने बोला ना ये सब हो सकता है। मैं बोला भाई एक दो परसेंट को हो सकता है। उस दिन से मैंने दिखाना ही बंद कर दिया। मैं बोला साइड इफेक्ट लिखो मत। मैं जब दवाई लिख रहा हूं मैं जानता हूं इसका इफेक्ट क्या, साइड इफेक्ट क्या है। अब अगर मैं साइड इफेक्ट जानने के बाद भी लिख रहा हूं तो जरूर उसकी जरूरत है, तब भी लिख रहा हूं, राइट? तो आप ये जो करते हो ना गूगल देख के इसका का साइड इफेक्ट देख के दवाई बंद कर दे तो दिस इज एंटायर्सली साइड इफेक्ट होगा। आप 2% में हो तो नेक्स्ट डे आप आ जाओगे कि सर सॉर्टेड काखा के मेरे हेडेक हो रहा है। हम 2% में होता है मैं उसको बंद कर दूंगा। हम कोई ये बोलता है सर मैं खाया वो एस इनहिबिटर खाया मेरे को खांसी हो रहा है तो मैं बंद कर दूंगा। पर आप बिना कुछ के आपने बंद कर दिया, ये साइड इफेक्ट होगा। एलोपैथी की साइड इफेक्ट, दिस इज नॉट करेक्ट। सो वो वो दवाई छोड़ के कोई दूसरा दवाई ट्राई करा लेंगे बिकॉज़ बहुत सारे दवाइयां हैं। कोलेस्ट्रॉल कम करना अपना बेसिक बात है। हार्ट की बीमारी, हार्ट अटैक को अगर रोकना है तो कोलेस्ट्रॉल कम करना पड़ेगा, इसमें कहीं कोई शक नहीं है, राइट? राइट? सो राइट। यह जो फियर मोंगरिंग दवाइयों को लेकर होता है यह भी एक बहुत बड़ा प्रॉब्लम है बिकॉज़ इससे लोग फिर बाद में ट्रस्ट नहीं कर पाते। एक मेडिकल प्रोसीजर को, एक प्रॉपर मेडिकल प्रोसीजर को नहीं। नहीं, देखिए जहां पे जो चीज में कहीं डाउट नहीं है वो स्टैटिन। आज आज ब्लड प्रेशर की दवाई नहीं लोगे ये क्या बात है? साइड इफेक्ट तो हर दवाई की है। ब्लड प्रेशर नहीं लोगे दवाई तो आपका पूरा बॉडी, ब्रेन सब जगह डैमेज होगा। आज ब्रेन में स्ट्रोक हो जाएगी, आज हार्ट ब्लॉकेज हो जाएगी, आज किडनी खराब हो जाएगी। तो दवाई ना लेना तो ये है बहुत ही गलत बात है। अगर आज आपसे कंट्रोल कर रहे हो, कर लो हम। मैं लोगों को बोलता हूं चलो आपको दवाई नहीं लेना, आप एक काम करो मैं अभी दवाई देके बीपी कम कर देता हूं, शुगर कम कर देता हूं, कोलेस्ट्रॉल कम कर देता हूं। अब आप बाकी चीजों को करो। हां, अगर मेरे रेंज से नीचे ले आओगे तो मैं दवाई कटाने तैयार हूं। मैं दवाई के वो नहीं हूं, प्रमोशन के लिए नहीं हूं पर मैं रिजल्ट के लिए हूं हम। मेरे को आप रिजल्ट ला दो खाने पीने से, मैं अपनी दवाई विड्रॉ करूंगा। पर पहला दिन मैं हार्ट के पेशेंट को दवाई देके उसको सेफ कर लूंगा। ट उसकी अगर कोलेस्ट्रॉल हाई है उससे हार्ट अटैक हो सकता है, अगर उसकी ट्राइग्लिसराइड है हार्ट अटैक हो सकता है, अगर उसकी बीपी कंट्रोल नहीं है, शुगर कंट्रोल नहीं है ये तो मैं चारों को दवाई से कंट्रोल कर दूं तो मेरा काम एज अ डॉक्टर यह नहीं है कि हम एकदम वो जाए, रूढ़िवादी हो जाए, नहीं। हमें अपने सारे फैक्टर्स को कंट्रोल चाहिए। आपसे नहीं होता मैं करके देता हूं और बाकी एफर्ट लगाओ। आप कम करोगे, मेरे हजारों लोगों के बीपी की दवाई बंद कर दी है, शुगर की दवाई बंद कर दी है क्योंकि उनका बेटर कंट्रोल आने लगा। मेरे को 100 चाहिए शुगर आप 80 ले आओ, मैं दवाई कम करने तैयार बैठा हूं।

सो बेसिकली सर जैसे अभी जब भी कोई पेशेंट आता है तो अगर उसके वैल्यूज एकदम वे अब द चार्ट है तो उसे अभी कुछ कैटास्ट्रोफीज़ प्रेशर को मैनेज कर दिया, एसीई आरबीआई बिटर्स हो गए। फिर अगर हार्ट रेट के प्रॉब्लम है तो बीटा ब्लॉकर दे दिया, उसको प्रॉपर कर दिया। फिर उसके बाद अगर कोई दूसरा प्रॉब्लम है तो उस पर्टिकुलर दवाई देके उसको कंट्रोल में ला दिया। बट इन द मतलब ये टेंपरेरी सलूशन है। लॉन्ग रन में वो 14 चीजों पर काम करना स्टार्ट करना पड़ेगा। हां, फिर जैसे वो चीजों में इंप्रूवमेंट आने लग जाए तो दवाइयों को धीरे-धीरे करके साइडलाइन कर देना है। मेरा काम है कि पहले दिन सेव करो पेशेंट को। आज उसको बोला गया कल हार्ट अटैक हो सकता है, वो ना हो उसका बंदोबस्त कर देना, राइट? राइट? मैं बोलता हूं देखो मेरे साथ चलोगे मैं दवाई दे देता हूं एक-एक चीज कंट्रोल कर देता हूं और बाकी आपको खाने में जो चेंज चाहिए वो मैं बता दिया हूं। ये कर लो। कल से वॉकिंग शुरू करो, कल से योगा शुरू करो। स्मोक कर रहे हो तो बंद करो, जर्दा खा रहे हो बंद करो, फ्रूट ज्यादा खाओ और ये सब करके ही आपका बीमारी ठीक हो जाए, राइट? राइट? रिवर्स हो जाए। ब्लॉकेज तो फिर क्यों आप ये ऑपरेशन के चक्कर में हो? क्यों? और बायपास, एंजियोप्लास्टी करने के बाद भी आपको यह सब करना पड़ेगा, नहीं तो बंद होने वाली है। बिल्कुल, बिल्कुल। तो सर आई थिंक बहुत ही ब्रिलियंट सलूशन है कि एक तरफ हम नेचुरल मेथड्स और एकदम रूट कॉज पर जा रहे हैं और उसको उसको फिक्स कर रहे हैं। फिर सेकंड लाइन ऑफ ट्रीटमेंट में हम ये जो एलोपैथिक ड्रग्स हैं इनको बना रहे हैं। तो दोनों के एक सिनर्जेटिक इफेक्ट से ये प्रॉब्लम आराम से सॉल्व हो सकता है कि सर्जरी की जरूरत ही ना पड़े। मेरे प्रोसेस में बोलता हूं तीन लोग इंपॉर्टेंट हैं। एक फैमिली जो खाना-पीना ठीक दे, दूसरा पेशेंट जो वॉकिंग, योगा, स्मोकिंग बंद करे, अल्कोहल बंद करें। तीसरा मैं डॉक्टर जो बाकी चीजों को कंट्रोल कर दे, ब्लड को पतला कर दे, एंजाइना कम कर दे, कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड, बीपी, शुगर को आज के दिन कंट्रोल कर दे। अब पेशेंट मेरा सेफ हो गया। अब उसके बाद उसके हार्ट अटैक नहीं होगा, ये बात पक्की हो गई। अब इसके बाद और एडिशनल कोई ट्रीटमेंट है तो हम लोग नेचुरल बायपास भी कराते हैं, डिटॉक्स भी कराते हैं। पर मैं बोलता हूं बॉडी को छेड़े बगैर जो जो काम हो वो कर लो। बॉडी काटो मत। बॉडी को काटोगे वो बॉडी अननेचुरल हो गया। नेचर के संग छेड़खानी ना करो, ये अच्छा है, राइट? राइट? सो अभी सर बात करते हैं जैसे ब्लड प्रेशर का। फॉर एग्जांपल, ब्लड प्रेशर भी एक बहुत बड़ा कॉज है, वन ऑफ द मेजर कॉज है जिससे हार्ट अटैक ट्रिगर होता है। बहुत सारे लोगों के ब्लड प्रेशर वैल्यूज ऊपर-नीचे होते हैं, उनको पता भी नहीं होता है। थ्रू आउट द लाइफ उनका ब्लड प्रेशर हाई रहा हुआ होता है और उनको बहुत सारी प्रॉब्लम्स हो रही है, ठीक है? शरीर पे अलग-अलग प्रॉब्लम्स हो रहे हैं, उनको तनाव हो रहा है, हाइपरटेंशन ये सब चीजें हो रही हैं। तो ब्लड प्रेशर एगजैक्टली कैसे इफेक्ट करता है हार्ट हेल्थ को? मैं बताऊं ब्लड प्रेशर हमारा 120/80 सिस्टोलिक और डायस्टोलिक होना चाहिए। बहुत सारे लोगों की धारणा है उम्र के संग ज्यादा हो तो। मैं तो 100 साल में 200 देना होगा मुझे तो। ये उम्र का कोई चक्कर नहीं है। हर उम्र में 120 ही होना चाहिए। ओके? हमारी जो ट्यूब बनी होती है ना वो 120 प्रेशर के हिसाब से बनी है। ओके? आप उसमें 140 का धक्का मारोगे तो वो डैमेज होगा और डैमेज जहां पे खुरदरा हो गया वहां कोलेस्ट्रॉल जल्दी पकड़ लेता है, अच्छा डिपॉजिट होने लगता है। आप अगर ब्लड प्रेशर कंट्रोल नहीं रखोगे तो हार्ट की बीमारी को बढ़ावा दे रहे हो। हां, और उसके बाद ब्लड प्रेशर से किडनी खराब होता है, आंख खराब होती है, ब्लड प्रेशर से ब्रेन में पैरालिसिस होती है, स्ट्रोक होती है। हां, तो यह सारा तो ब्लड प्रेशर का साइड इफेक्ट है ही। अगर आप ये ब्लड प्रेशर को कंट्रोल नहीं करोगे तो मेरा एम है 120/80 ला दो। नीचे वाली उससे भी कम हो दिक्कत नहीं है, ऊपर वाली 120, 110 रहे तो बेस्ट है। हां, अब इसके लिए क्या करना चाहिए, वो सोचते हैं। पहला ब्लड प्रेशर का सबसे बड़ा कारण है स्ट्रेस। स्ट्रेस को कम करना बहुत जरूरी है। उसके लिए हम लोग योग एडवाइस करते हैं, उसके लिए हम एनालिटिकल चेंज समझाते हैं कि स्ट्रेस को कैसे कम हो। उसके संग वॉक करो, उससे भी वॉकिंग से बीपी कम होती है। वजन 10 किलो कम कर दिया तो आपके आधी दवाइयां हो जाएगी कम। और अगर आप उसके साथ नमक कम कर लेते हो, बहुत सारा फ्रूट्स और वेजिटेबल खाते हो, तेल-घी बंद करते हो, नॉनवेज बंद करते हो तो ऐसे ही ब्लड प्रेशर कंट्रोल हो जाती है। ओके? तो ब्लड प्रेशर में ये भी एक मिथ है, एक बार दवाई शुरू हो गया जिंदगी भर चलेगी, राइट? ये भी गलत बात है। और एक बार और समझा दूं, कभी ये ब्लड प्रेशर की गोली हो, शुगर की गोली हो, कोलेस्ट्रॉल की गोली हो, ये एक ही दिन काम करता है। इस बात को आपको मालूम होना चाहिए। मैं एक बार समझाना चाहता हूं गोलियां कैसे काम करती हैं। एक एलोपैथी की टेबलेट आप मुंह में डाले, स्टमक में गया, इंटेस्टाइन में गया, ब्लड में गई। एक घंटे में ब्लड में पहुंच गया। मान लेते हैं हमने ब्लड प्रेशर कम करने के लिए दिया था। हां, वो ब्लड प्रेशर कम कर दिया। हां, अब वो दवाई ब्लड में है, ब्लड के संग सर्कुलेट करेगा पूरे बॉडी में, किडनी के थ्रू जाएगा। किडनी का काम है डिटेक्ट करना कौन सी फॉरेन केमिकल अंदर है। किडनी उसको पकड़ लेता है, भाई कौन हो तुम? वो बोलता है मैं दवाई हूं, केमिकल हूं। बोला बाहर निकलो। किडनी उसको आठ घंटे में अगर निकाल दिया तो आठ घंटे बाद दवाई का असर खत्म। तो ऐसी दवाई जो आठ घंटे में खत्म होता है हम लोग को मालूम होता है आठ घंटा चलेगा तो हम तीन बार लिखते हैं, राइट? जब 12 घंटे में खत्म होती है तो हम दो-दो बार लिखते हैं। जो 24 घंटा चलते हैं हम एक बार लिखते हैं। जब हम लिख के देते हैं एक दिन का एक गोली तो इसका मतलब 24 घंटे बाद उस दवाई का असर खत्म, खत्म है। अगर आप नेक्स्ट नहीं लेते हो तो दवाई का असर खत्म है, बीपी बढ़ जाएगी। हां, तो लोग क्या बोलते हैं सर मैं ना जब लेता हूं तब कंट्रोल रहता है, जब बंद करता हूं बढ़ जाती है। अरे यार तो ये नहीं है तो ये टेंपरेरी सलूशन ही है वो। तुम्हें अगर कंट्रोल करना है तो दवाई हर दिन लेना पड़ेगा। पर उसके साथ अगर आप बाकी चीजें करोगे और बीपी कम होने लगे तो मैं दवाई नहीं दूंगा, राइट? पर ये तो नहीं कि आप दवाई एक दिन खाओगे, दो दिन नहीं खाओगे, ये नहीं चलेगा। चाहे ब्लड प्रेशर हो, चाहे कोलेस्ट्रॉल, चाहे ब्लड शुगर हो, दवाइयां चलेगी लंबा। हां, आप एफर्ट करके उनको कम करना चाहते हो तो मैं बोलता हूं मेरा 120 बीपी आप 110 ला दो मैं कम कर दूंगा। पर आप 120 लाए और फिर दो दिन बाद बंद कर दिया, बोला मेरा बीपी बढ़ गया वापस। अरे बढ़ेगा। एक ही दिन काम करता है दवाई तो। ये कंसेप्ट लोगों के दिमाग में बैठना चाहिए कि वो दवाई एक दिन वाली होती है, एक ही दिन काम करेगा। अभी ऐसी दवाई नहीं निकली है एक बार दे दो साल भर काम करेगा, ऐसा नहीं है दवाई। और फिर वो 100 अलग प्रॉब्लम क्रिएट करेगा, वो भी फिर साइड इफेक्ट होगा, हाई डोज में देना पड़ेगा, राइट? राइट? तो आपको दवाई लेना है तो लेना। ये बीमारियां एक दिन की बीमारी नहीं है जैसे एंटीबायोटिक है, पांच दिन लो बीमारी ठीक हो गई, बंद कर दिया, राइट? ये बीमारी लंबा चलेगा तो आपको लंबा दवाई लेना पड़ेगा, इसमें कहीं शक नहीं है। हम सो दवाइयां बेसिकली वो बफर टाइम दे देती है कि आप रूट कॉसेस पे फोकस करो, अपनी लाइफस्टाइल को बदलो ताकि आप रूट लेवल से वो प्रॉब्लम्स को सॉल्व करो। फिर धीरे-धीरे दवाइयों को कम करना स्टार्ट करने लगेगी, राइट?

तो सर आपने स्ट्रेस के बारे में बोला। आज आई थिंक स्ट्रेस भी एक बहुत बड़ा फैक्टर हो चुका है पूरे मतलब सिटीज में तो हो ही चुका है लेकिन मेरे ख्याल से अभी ये जो स्ट्रेसफुल कल्चर है ये अभी टियर थ्री, टियर फोर सिटीज में भी अभी आ ही रहा है। तो स्ट्रेस से एग्जैक्टली कैसे हार्ट हेल्थ खराब हो रही है और हार्ट अटैक क्रिएट हो रहा है? मैं आपको बताऊं स्ट्रेस जो होता है ना स्ट्रेस है क्या? पहले समझते हैं। स्ट्रेस है कि मैं जैसा चाहता हूं वैसे ना हो तो ये स्ट्रेस है। मैं जो-जो चाहता हूं वही सुबह से शाम तक होता रहे तो स्ट्रेस है ही नहीं, राइट? मैं जो चाहता हूं वो नहीं हो रहा है। हां, अब इसमें दो फैक्टर है। क्या हो रहा है और मैं क्या चाहता हूं? यस। क्या हो रहा है वो मेरे कंट्रोल में नहीं है? नहीं है। मेरा बेटा, मेरा भाई, मेरा दोस्त, मेरा एम्प्लॉई, मेरा एम्प्लॉयर…

ये मैं कंट्रोल नहीं कर सकता। अब आप अपने एक्सपेक्टेशन को चेंज कर लोगे तो आधी स्ट्रेस कम हो जाएगा। हां, आप दुनिया को बोल रहे हो मेरे हिसाब से चेंज हो, वो नहीं होगा। नहीं होगा। आप अपने आप को चेंज करने लगोगे। हर जगह चेंज नहीं करो, छोटे-मोटे जगह कर दो। छोटे-मोटे जगह मतलब आधा स्ट्रेस। स्ट्रेस जीरो नहीं हो सकता, ये भी बात बता दूं, क्योंकि ना मेरा स्ट्रेस जीरो, ना आपका रहेगा, ना किसी का रहेगा। स्ट्रेस तो रहेगा। स्ट्रेस अगर जीरो कर दूं तो आदमी काम करना बंद कर देगा, मोटिवेशन ही नहीं रहेगा किसी चीज़ का। वो बोलेगा, "क्यों काम करूं भाई?" बोलेगा, "खाओगे क्या?" बोलेगा, "नहीं।" खा लेथार्जिक हो जाएगा। वो बोलेगा, "मुझे नौकरी चेंज करने दो।" हां, जाने दो। तो ऐसा नहीं चलेगा। आज लाइफ में रहोगे तो स्ट्रेस तो रहेगा। कोई आपका प्रॉपर्टी छीन लेगा, आप दे दोगे, "जा ले जा।" तो स्ट्रेस तो रखना पड़ेगा। पर छोटे-मोटे वाले बंद कर दो। छोटे-मोटे क्या होता है? ये सामान यहां क्यों रखा हुआ है? ये गंदा क्यों है? ये तुम दो मिनट लेट क्यों आ गए? हां, तुम ऐसे कैसे बोल दिए? इससे आपकी लाइफ में कोई फर्क नहीं पड़ता। सामान यहां हो वहां हो क्या फर्क पड़ता है? लाइफ में पूरा फर्क नहीं पड़ेगा। ये छोटे-मोटे वाले बंद कर दो। बड़े वाले रखना पड़ेगा। आज पैसे नहीं कमाऊं तो खाऊंगा क्या? हां, वो बड़ा स्ट्रेस है। तो बड़े-बड़े स्ट्रेस रखो। छोटे-मोटे आलोचना, क्रिटिसिजम, ये सब छोड़ दो। उससे आधी स्ट्रेस कम हो जाती है।

स्ट्रेस जब होता है तो हमारा ब्लड प्रेशर बढ़ता है, एड्रीनलीन करके केमिकल निकलती है, हमारा शुगर बढ़ता है, हमारे मसल कंट्रक्शन बढ़ता है, हमारे हार्ट की स्पीड बढ़ती है, हमारी कोलेस्ट्रॉल बढ़ती है और स्ट्रेस बढ़ता है। अच्छा, स्ट्रेस का एक और प्रॉब्लम है, मेजरमेंट नहीं होता है। हम आप पूछो, "भाई कितना किलोग्राम स्ट्रेस है? कितना मिलीग्राम स्ट्रेस है?" ऐसा कुछ है ही नहीं। कोई मेजरमेंट नहीं है। तो डॉक्टर्स बात ही नहीं करते इसके बारे में। राइट? हार्मोन्स की उतल-पुतल हो जाती है, बट कोई मेज़र नहीं कर सकता। मेज़र नहीं कर सकता भाई, "इतना किलो स्ट्रेस है मेरे, इतना टन स्ट्रेस है, इतना किलोमीटर स्ट्रेस है।" ऐसा नहीं होता है। तो स्ट्रेस को कम करने के लिए आपको करना होगा मेडिटेशन, छोटे-मोटे चीज़ों को चेंज करना पड़ेगा, अपने दिमाग को रिसेट करना पड़ेगा, एक्सपेक्टेशन को चेंज करना पड़ेगा। तब जाके स्ट्रेस कंट्रोल होगा। तो हम हार्ट के पेशेंट को इसका भी ट्रेनिंग देते हैं। हमारे स्ट्रेस मैनेजमेंट के बहुत सारे लेक्चर हैं, हमारे YouTube चैनल में मिलेगा। उससे हम बोलते हैं, "आप स्ट्रेस को कम करो। जीरो नहीं होगा। यू रिड्यूस द स्ट्रेस। मैनेजमेंट करना सीख लो।" तुम दो हाथ से काम नहीं करो, बारह हाथ से काम करवाओ। लोगों से काम कराओ, स्ट्रेस कम होगी। तो स्ट्रेस आज पूरे इंडिया में नहीं, पूरे वर्ल्ड भर में बढ़ रही है, क्योंकि रिसोर्सेस कम हो रहा है, कंपटीशन बढ़ रहा है। स्ट्रेस रहेगा, राइट? रोक नहीं सकते। पर स्ट्रेस कम कर दोगे तो बहुत सारे फैक्टर कम होगा। और मैंने देखा है लोगों को जब हम लोग एजुकेट करते हैं स्ट्रेस के बारे में, बहुत फर्क पड़ता है। बीपी थोड़ा-सा कम होती है, शुगर थोड़ा-सा कम होती है। तो स्ट्रेस कम करो। उसके लिए योगा बहुत काम की चीज़ है, मेडिटेशन बहुत काम की चीज़ है। वो क्या करता है? हमारे एड्रिनल लेवल को कम कर देता है, हमारे ब्रेन में अल्फा वेव्स बनाता है। तो अगर आप दस मिनट मेडिटेशन करते हो, आधा घंटा योगा करते हो, वॉक में भी स्ट्रेस कम होती है। तो दैट आर ऑल कंट्रीब्यूटेड। च अदर? तो स्ट्रेस मैनेजमेंट हार्ट की बीमारी के कंट्रोल में बहुत काम करता है।

सर, एक्सरसाइज और ऐसे चीज़ों का, जैसे बोलते हैं कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइजेस होते हैं, जॉगिंग करना। तो ये सारी चीज़ें क्या ये हार्ट हेल्थ के लिए अच्छी होती है? क्या इससे हार्ट अटैक्स को रोका जा सकता है? देखिए, एक्सरसाइज चाहिए हमारे बॉडी में। देखिए, हम लोग चौबीस घंटे में एक घंटा भी हम टाइम नहीं देते एक्सरसाइज के लिए। तो एक्सरसाइज की जरूरत है। आदमी बोलता है, "चलो चलो।" एक तो हुआ। एक्सरसाइज कितना होना चाहिए? मैं बोलता हूं, देखो जो हार्ट का पेशेंट नहीं है उसको तो जॉगिंग-वॉगिंग में अलाउ कर दूंगा, पर जो हार्ट का पेशेंट है उसको मैं वॉकिंग ही अलाउ करूंगा। तो वॉकिंग उस स्पीड में करो जिसमें आपको तकलीफ ना हो, एंजाइना ना हो, ब्रेथलेस ना हो। उस स्पीड में चलो, आधा घंटा चलो। और उसके संग उसको बोलते हैं फिटनेस एक्सरसाइज, कार्डियो एक्सरसाइज। फिटनेस एक्सरसाइज, उसके संग फ्लेक्सिबल बनाने के लिए हम योगा करवाते हैं। योगा करेंगे तो फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ेगा, स्ट्रेस कम होगा और फिटनेस बढ़ेगी। वॉकिंग से जॉगिंग या स्पोर्ट्स खेलेगा हार्ट का पेशेंट, तो उसको हार्ट अटैक होने के चांसेस हैं। सीवियर एक्सरसाइज कर लिए, हार्ट अटैक प्रेसिपिटेटर है। तो इसके लिए हार्ट के पेशेंट को हम लोग बोलते हैं, "आप वॉक करो आधा घंटा, पैंतीस मिनट और उसके संग योगा करो।" यह दो कॉम्बिनेशन इज़ द बेस्ट एंड द सेफेस्ट कॉम्बिनेशन। सो कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइजेस, कार्डियो प्रोटेक्शन तो करती है, पर देखना पड़ेगा कौन हार्ट का पेशेंट है कौन नहीं है। अच्छा, और किसको किस इंटेंसिटी में करना चाहिए? वो इंटेंसिटी कम करना होगा अगर हार्ट का पेशेंट है। और अगर हार्ट का पेशेंट नहीं है तो इंटेंसिटी बढ़ाए, वो भी फायदा करेगा। राइट? राइट। ओके। अब सर जैसे थोड़ा सा सर्जरी के बारे में बात करते हैं, हार्ट सर्जरी। सो यू स्पेशलाइज इन नॉन-इनवेसिव ट्रीटमेंट। मतलब आपको ऐसा लगता है और आपने प्रूफ करके भी दिखाया लाखों पेशेंट्स पर कि सर्जरी की एक्चुअल में जरूरत पड़नी ही नहीं चाहिए अगर आपने पहले से ही प्रीवेंटिव केयर लिया। बट सर्जरी के बारे में थोड़ा बात करते हैं। तो सर्जरीज़ जो होती है हार्ट की वो एग्जैक्टली कैसे होती है और क्यों वो सर्जरीज़ मतलब यू नो जो है उसमें ज़्यादा प्रॉब्लम्स क्रिएट होते हैं, फ्रॉम अ लॉन्ग टर्म व्यू के साइड से देखा जाए तो लॉन्ग टर्म में वो ज़्यादा हार्म करती है एज़ कंपेयर टू देखिए पहले समझते हैं ये हार्ट की सर्जरी करता क्या है। एक ट्यूब आपने ब्लॉक किया, चर्बी डाल-डाल के, खाना-पीना गलत करके, वो ट्यूब अस्सी-नब्बे परसेंट ब्लॉक हो गई। उसके जगह एक नई ट्यूब लगवा दी। वो नया ट्यूब आपको बाज़ार से नहीं मिलेगा, बॉडी के कहीं पार्ट से खोल के उसको लगाना पड़ेगा। हां, मतलब अगर देखूं शहर की रोड को बचाने के लिए अपने गांव की रोड लाके यहां डाल दिया तो गांव में तो तकलीफ होगा। जहां से ट्यूब काट लोगे वो जगह तकलीफ होगा। अभी जो नई ट्यूब है ये ओरिजिनल के बराबर नहीं है। ब्लॉकेज बनता है चालीस साल में। बाईपास के बाद चालीस साल की कभी गारंटी नहीं होती। वो दो साल, पाँच साल में बंद हो जाती है क्योंकि डुप्लीकेट ट्यूब ओरिजिनल नहीं है। हां, तो वो जो नई ट्यूब लगा दी आपको, भाई कचरा डाल रहे थे। हां, अब उसको रोके नहीं और नया ट्यूब लगा दिया। नया फिर बंद कर दोगे, कचरा डालोगे तो और वो जल्दी ब्लॉक होगा। अगर पाँच साल चलती है, पाँच साल बाद अस्सी परसेंट ब्लॉक होती है तो कितनी परसेंटेज हो गई? अठारह परसेंट पर ईयर हो गई। हां, और जबकि ओरिजिनल ट्यूब दो परसेंट पर ईयर था। हां, तो मैं इसलिए रेफर नहीं करता। मैं बोलता हूं, देखो अगर आप लाइफस्टाइल से ब्लॉकेज को रिवर्स कर लेते हो, आदमी बाईपास क्यों मानता है? क्योंकि उसको ये बोला जाता है अगर नहीं कराओगे हार्ट अटैक होगा। हां, हार्ट सर बाईपास सर्जरी का एक बेसिक साइंस एक्सप्लेन कर देंगे कि किस तरीके से ट्रीटमेंट किया जाता है। क्या करते हैं? जैसे एक ट्यूब ब्लॉक है, अस्सी परसेंट ब्लॉक है। हां, कार्डियोलॉजिस्ट के पास आप पहुंचे, हार्ट सर्जन के पास पहुंचे। उन्होंने बोला, ये हार्ट अटैक कर सकता है। कब होगा? जब वो पर्दा फटेगा, उसमें क्लॉट आएगा तो हार्ट अटैक होगा। पर वो बोल देते हैं, "कल ही होने वाला, आज ही होने वाला है। अब घर पहुंचोगे उससे पहले होने वाला है।" ये उनको भी नहीं मालूम होता कब होने वाला होता है, पर बोल देते हैं, "इट्स अ वेरी हाई रिस्क, एनीथिंग कैन हैपन एनी टाइम।" तो आदमी डर जाता है कि हार्ट अटैक होने में दो ही मिनट रह गया है। हां, जबकि आप देखोगे ब्लॉकेज को सत्तर, अस्सी, नब्बे लिखा जाता है। हां, सत्तर ब्लॉकेज के बाद इकहत्तर भी होना चाहिए, बहत्तर भी होना चाहिए, पर वो अस्सी है, नब्बे है। ये फिगर्स अब नॉर्मल है, हो ही नहीं सकता। एक ब्लॉक सत्तर में, एक अस्सी में, नब्बे में कैसे संभव है? भाई, इकहत्तर भी हो सकता है। हां, तो ये रफ फिगर होता है, सत्तर, अस्सी, नब्बे। हां, पर डॉक्टर एक श्योर बोलता है कि हार्ट अटैक होने में दो-चार मिनट ही रह गए। हां, ये जानबूझ के बोला जाता है क्योंकि वो पेशेंट के ऊपर प्रेशर क्रिएट हो, फैमिली पे प्रेशर क्रिएट हो कि ऑपरेशन करना बहुत ज़रूरी है, नहीं तो हार्ट अटैक होने वाला है। अब उस बात से वो मान जाता है। अब डॉक्टर को बाईपास में करना क्या है? पहले एक, दो, तीन जगह बाईपास करेंगे तो दो-तीन जगह से ट्यूब काटना पड़ेगा। हाथ से काटेंगे, पैर से काटेंगे। हां, बाज़ार से नहीं मिलेगा ये ट्यूब। अब इसको डालने के लिए चेस्ट को काटना पड़ेगा, इसको खोलना पड़ेगा। अब हार्ट ऐसे मूव कर रहा है, उसमें स्टिचिंग प्रॉब्लम है तो हार्ट को रोकना पड़ेगा। हां, हां, उसमें वो ऑपरेशन होगा। हां, अब वो जो नई ट्यूब लगेगी वो कितने दिन चलेगा उसका भी भरोसा नहीं है। और जिस वक्त ऑपरेशन हो रहा है मशीन से पूरा बॉडी चल रहा है, उस वक्त ब्रेन को डैमेज होता है, पूरे बॉडी को डैमेज होती है। और जो कटिंग हुई है वो कभी वो वही का वही नहीं होता है। मैं लोगों को बोलता हूं, "नेचर को छेड़छाड़ से पहले एक बात सोचो। नेचर को वैसे का वैसा बना सकोगे?" हां, एक फूल को तोड़ देता हूं, आप लगा के दिखा दो। एक अनार के दाने को खोल लो, फिर से पैक करके दिखा दो। ये पूरे बॉडी को खोल के जब पैक करोगे वो सेम टू सेम नहीं रहेगा। नहीं होगा। और उसकी कॉम्प्लिकेशन हज़ारों हैं। इतनी बड़ी ऑपरेशन है, उस वक्त ब्रेन डेड होने के चांसेस हैं। तो मैं लोगों को बोलता हूं, "ऑपरेशन ज़रूरत नहीं है तो ना कराओ।" यस। और ज़रूरत कब होगी? जब आप ब्लॉकेज बढ़ाने के लिए रेडी बैठे हो कि मैं तो ब्लॉकेज बढ़ाऊंगा तो कभी ना कभी तो हार्ट अटैक होगा। तो मोस्ट ऑफ़ द सर्जरीज़ आर डन अंडर प्रेशर और वो इमरजेंसी क्रिएट किया जाता है कि आपको होने वाला है हार्ट अटैक। मेरा एक पेशेंट था, बोला, "सर मेरे को ऐसे ही बोला था कि बस दो-चार मिनट ही है।" मैं बोला, "देखो मैं समझ गया, पर मेरे को एक-दो दिन तो पैसे लाने दोगे।" तब उन्होंने इमीडिएट स्टैंड चेंज किया। बोला, "नहीं, दो दिन बाद आप पैसे लाओ तब कर देंगे।" अब रुक जाएगा हार्ट अटैक। अब ये दो दिन तो उसको बज गया। अब हार्ट अटैक नहीं होगा। दो दिन। एक और पेशेंट बोला, "सर मैं…" उनको बोला कि, "देखो मेरे को एक महीना लग जाएगा। मैं प्रोविडेंट फंड से लोन लेके पैसे लेके आऊंगा।" तो उन्होंने दो महीने का टाइम दे दिया। तो इसका मतलब क्या है कि ये क्राइसिस क्रिएट किया जाता है हॉस्पिटल में कि आप बहुत जल्दी-जल्दी ऑपरेशन कराओ, टाइम नहीं है आपके पास। जबकि ब्लॉकेज परसेंटेज उनको नहीं मालूम, पक्का सत्तर है, अस्सी। राउंडेड ऑफ़ फ़िगर है। और सत्तर और अस्सी में कितना साल का फ़र्क है? मतलब पाँच साल का फ़र्क होती है। तो एक साल में आदमी दो परसेंट ब्लॉक होता है। तो आप ये सोच के चलो सत्तर और अस्सी बोल दिया या सत्तर या अस्सी। डॉक्टर टू डॉक्टर अस्सी, सत्तर भी चेंज हो सकता है। हां, तो ये डॉक्टर का जो पूरी प्रोसेस है वो थोड़ा इसमें इकोनॉमिक कंसीडरेशन के वजह से ये सारा काम हो रहा है।

सो सर ये मतलब मेडिकल फील्ड के कॉरपोरेटाइजेशन की वजह से आपको लगता है हॉस्पिटल के तरफ़ से प्रेशर होता है, टारगेट्स होती है डॉक्टर्स को कि तुम्हें इतनी सैलरी दी गई है, उतना पैसा आप रिकवर करके दोगे? इट्स नोन टू एवरीबॉडी। कॉरपोरेट होने से प्रेशर पड़ेगा एम्प्लॉयी से, उनको एक्स्ट्रा लेना है, सेल्स टारगेट। सेल्स टारगेट, रॉ मटेरियल कौन है? हार्ट के पेशेंट्स। देखिए, फैक्ट्री में रॉ मटेरियल होता है अलग। हां, कॉरपोरेट हॉस्पिटल का रॉ मटेरियल है पेशेंट। हां, जिस तरीके से तेल की कंपनियां भी कस्टमर को चिपका रही है तेल मार्केटिंग करके, उस तरीके से कॉरपोरेट हॉस्पिटल्स भी। तो मैं ये समझता हूं कोई आदमी को आप… अच्छा, एक और चीज़ देखिए, अमेरिका में चले जाइए, यही प्रोसेस है। पर आप कनाडा में चले जाइए, उतनी एडवांस्ड है। आप ब्रिटेन में चले जाइए, वहां बाईपास सर्जरी आज का आज नहीं हो सकता। ओके? क्यों? वहां सरकार पे कर रही है सारा। हां, यहां पे प्राइवेट है तो पैसे मिलेंगे हॉस्पिटल को, कॉरपोरेट हॉस्पिटल को। इन्होंने ब्रिटेन में क्या कर दिया? सारा एनएचएस है। हां, तो उसने बोला, "आपकी अस्सी परसेंट ब्लॉक है, आपका बाईपास सर्जरी होगा, पर अभी एक साल वेटिंग है। आप वेट कर लो एक साल, तब तक खाना-पीना चलते रहो।" मतलब सेम एडवांस्ड कंट्री है जहां पर प्रोसेस उन्होंने रख दिया कि डॉक्टर को पैसे उतने ही मिलने हैं वो करे या ना करे। वहां बाईपास सर्जरी की कोई जल्दी नहीं होती है। कनाडा में एक साल वेटिंग की रहेगी कि ठीक है आपका बाईपास करना है, आप लाइन में आ जाओ। स्टेंट लगाना, लाइन में आ जाओ। क्योंकि सरकार पे कर रही है और कोई को डॉक्टर को कुछ मिलना नहीं है। यहाँ तो वहां वेट कर सकता है। यहां पे कॉरपोरेट हॉस्पिटल है, प्राइवेटली रेज़्ड आ रहा है पैसा तो यहां पर आज ही करना पड़ेगा। अमेरिका में आज ही करना पड़ेगा। तो ये प्रोसेस क्या है? ये आप अगर थोड़ा सा दिमाग लगाओगे इसमें पूरी इकॉनमी भरी हुई है इसमें। सो सिस्टम कस्टमर के या पेशेंट के सॉल्यूशन से नहीं चल रहा बल्कि इंसेंटिवाइज़ेशन से चल रहा है, मॉनिटरी इंसेंटिवाइज़ेशन। आई थिंक ये पेशेंट्स को पता होना चाहिए ताकि वो यू नो ये सारी चीज़ें देख सके और अल्टीमेटली वो ट्रीटमेंट और क्योर के पीछे जा सके जो एक्चुअल में उन्हें बेनिफ़िट करेगा। मेरे को याद है मेरा एक पेशेंट है, उसकी गाड़ी की शोरूम है। हां, तो मेरे को बोला वो दिल्ली का वो हार्ट का हॉस्पिटल है ना, उसने मेरे से पंद्रह गाड़ी एक साथ खरीदी। बोला, "पंद्रह क्या करेगा वो लोग एक साथ?" बोला, "नहीं, जो-जो डॉक्टर टारगेट अचीव किया सबको एक-एक गाड़ी गिफ्ट मिलेगी, इंसेंटिव।" तो आप ये समझ लीजिए, टारगेट का बात है इसमें। एंड आई नो इट्स लुकिंग बैड बट इट इज़ अ फैक्ट। मैं फ़ेस कर रहा हूं हर पेशेंट। कल तक ठीक था, आज हॉस्पिटल गया, भाई एंजियोग्राफी हुई। आप सीटी एंजियो भी तो करा सकते हो, उसमें भी ब्लॉकेज पता चलेगा। वो रेडियोलॉजिस्ट करता है। आदमी आके बोलता है, "सर मेरा अस्सी परसेंट ब्लॉकेज है, सत्तर परसेंट ब्लॉकेज है।" मैं बोला, "कल भी था, आज भी है, क्या दिक्कत है?" हां, वही एंजियोग्राफी कार्डियोलॉजिस्ट जब कर लेता है हॉस्पिटल में तो उसके ऊपर प्रेशर पड़ जाती है कि अस्सी परसेंट है, अभी ऑपरेशन करना पड़ेगा क्योंकि ही नोज़ कि ये रिपोर्ट करना मेरा मेन काम नहीं है, आगे हमारे इस आदमी को अगर मैं कन्विंस कर लूं तो ऑपरेशन का केस बनता है, उस पे पैसे और ज़्यादा आएंगे, अपसेलिंग हो जाएगी। तो वो करते हैं इसलिए कि ऐसा होना नहीं चाहिए। बगैर उनको ऑपरेशन का नहीं नंबर बढ़ेगा तो हॉस्पिटल उसको निकाल भी सकता है। एक डॉक्टर है, अभी थोड़े दिन पहले उन्होंने एक इसके ऊपर किताब लिखा है, उसका नाम है समीर जवाहर। हम और… उस… उस किताब का नाम है, "डॉक्टर्ड डॉक्टर ईडी।" हां, मतलब डॉक्टर्स क्या करते हैं उसके ऊपर। आप किताब पढ़िए। इट्स अ वंडरफुल पीस। सारी खोल के रख दिया है कि डॉक्टर्स लोगों को कैसे प्रेशर रहता है हॉस्पिटल का और डॉक्टर कैसे फंसा हुआ है। स्पेशली हार्ट में, बाकी में उतनी नहीं है, पर है कुछ। कॉरपोरेटाइजेशन का साइड इफ़ेक्ट है। ये अच्छी बात है कि आप जाओगे जब ट्रीटमेंट मिल जाएगा, पैसे हैं तो कुछ भी करा सकते हो तो आपको हो जाएगा। तो पर ये बीमारी का जड़… और एक बात और सोचते हैं। इंडिया में आज के दिन हम लोग कलेक्ट कर रहे हैं सात-आठ, दस करोड़ पेशेंट्स हैं। हम बाईपास सर्जन कितने करेंगे सर्जरी? पाँच लाख पर ईयर बाईपास सर्जरी, एंजियोप्लास्टी मिला के इंडिया में पाँच से छह लाख लोग करते हैं। बाकी लोगों का क्या होगा? मर जाएंगे वो। वो लाइफस्टाइल से चेंज… तो ये जो क्या? हॉस्पिटल में जो पहुंच गया क्रीम उसकी ऑपरेशन हो जाती है। राइट? और बाकी लोग दवाई लेके चला ही रहे हैं। हम तो दवाई लेकर चलाने वाले बहुत बैठे हैं। बट दवाई के संग अगर लाइफस्टाइल चेंज कर ले तो दवाई की मात्रा भी कम होगी, हार्ट अटैक भी नहीं होगी। एक और एग्जांपल दे दूं, फ़िनलैंड एक कंट्री है। आज के दिन में यूरोप का सबसे लोएस्ट हार्ट अटैक है। हां, क्यों है? उन्होंने एक नॉर्थ कैरेलिया स्टेट है, वहां पे सोलह सौ हज़ार पॉपुलेशन थी, वहां पर जो हार्ट अटैक होता था उन्होंने उनके एक-एक आदमी को पकड़ के हार्ट के बारे में एजुकेट करवाया। घर-घर जाके एजुकेट कराया। और उन्होंने दिखाया पाँच-सात साल बाद उनके हार्ट अटैक के स्पीड पचहत्तर परसेंट खत्म हो गई। हार्ट अटैक होने ही बंद हो गया। पचहत्तर परसेंट कब? पंद्रह परसेंट में आ गई। फिर उन्होंने पूरे फ़िनलैंड में लागू किया। इसका नाम है नॉर्थ कैरेलिया स्टडी। आप Google करो, दिखेगा। ओ हो हो हो। सो देखो सिर्फ़ एजुकेशन से, एजुकेशन से पचहत्तर परसेंट हार्ट अटैक कम हो गई। तो आप समझ लो बाईपास भी पचहत्तर परसेंट कम हो जाएगी। तो व्हाट इज़ नीडेड इज़ एजुकेशन। तो हम लोग अभी प्लान कर रहे हैं इंडिया के एक-एक आदमी को हार्ट के बारे में एजुकेशन। आपने जो ये आज मुहिम लिया है कि भाई लोगों को एजुकेट करना हार्ट के बारे में, ये बहुत इम्पॉर्टेंट है। आम आदमी तक बात पहुंचनी चाहिए कि भाई हार्ट की बीमारी में हार्ट अटैक आपके वजह से है, आप उसको कंट्रोल कर सकते हो, ऑपरेशन की ज़रूरत नहीं। और ऑपरेशन के बाद भी करोगे तो फिर ब्लॉक हो जाएगी। बिल्कुल-बिल्कुल। वही बात है। एज़ मेन रूट आपका लाइफस्टाइल ही है। ये टेंपरेरी मेज़र्स हैं, ये पैलिएटिव सर्जरी है कि जी आपका बीमारी में रोक नहीं रहा हूं, एक ट्यूब लगा के टाइम दे दे रहा हूं। ये ट्यूब जब तक ब्लॉक ना हो तब तक आपके पास टाइम। हां, लोगों का एक साल में ब्लॉक हो जाती है वापस। तो अल्टीमेटली लाइफस्टाइल इज़ द की, उसको करना पड़ेगा। एंजियोप्लास्टी की भी वही बात है। ओके। सो सर ट्रैक कैसे रख सकते हैं? मतलब अगर कोई एक लेट्स से तीस, पैंतीस इयर्स का आदमी है, ठीक है? तो ट्रैक कैसे रख पाएगा कि उसके हार्ट का हेल्थ कैसा है? देखिए, पहले तो हम लोग बोलते हैं जितने ब्लॉकेज के कारण है, खाना-पीना, लाइफस्टाइल, ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल, इनको कंट्रोल करते ही आप ट्रैक रख सकते हो। मेरा कंट्रोल, आज ब्लॉकेज बढ़ रहा है, नहीं बढ़ रहा है? हां, और अभी तक क्या हुआ? उसको जानकारी करनी है तो आजकल एक बहुत सिंपल टेस्ट आ गई है, उसका नाम है सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी। आगे जब एंजियोग्राफी की जाती थी तो एडमिट करके तार घुसाई जाती थी बॉडी के अंदर। एक कैथेटर बोलते हैं इसको। सिंपल फ़ॉर्म में तार है। ये तार एक मीटर तक बॉडी के अंदर जाएगी तो स्क्रैच करेगा अंदर, रिस्क है उसका और उसके लिए एडमिट भी करना पड़ेगा क्योंकि एडमिट नहीं करके किया और कुछ बीच में अटैक हो गई, कोई पंक्चर हो गई तो आदमी मर सकता है। तो ये टेस्ट ऑपरेशन से कोई छोटा नहीं है। हां, हां। तो आम आदमी कभी नहीं कराता था। कोई को बोलो, "भाई मेरे को पेट में दर्द हो रहा है तो मैं पेट काट के चेक करूंगा।" बोलेगा, "सर दर्द कम हो गया।" तो ऐसे ही होता है। हार्ट का पेशेंट कभी वो तार वाली… अगर उसको खाली चेक कराना है वो बोलता है, "कैसे करोगे?" बोलता है, "एडमिट करूंगा, तार घुसाऊंगा।" बोलता है, "सर अभी मैं ठीक हूं, अभी नहीं कराऊंगा।" तो अब आ गई एक सीटी एंजियोग्राफी जिसमें आपको कुछ करने की ज़रूरत नहीं है। आप लेट जाओ, एक इंजेक्शन देंगे, एक एक्स-रे करेंगे और आपके अंदर कितनी ब्लॉकेज है पता कर देगा। तो ये टेस्ट आजकल वाइड अवेलेबल है इंडिया में। नॉन-इनवेसिव है। टोटल पाँच सेकंड में वो बता सकता है आपके अंदर कितनी ब्लॉकेज है। ओके? आगे ये 64 स्लाइस होता था, अब 128 स्लाइस होगी। इसमें रेडिएशन भी कम जाती है, एडमिशन की ज़रूरत नहीं है, कोई तार घुसाने की ज़रूरत नहीं है और वही बताएगा सत्तर, अस्सी, नब्बे एक्यूरेसी से। जो एंजियोग्राफी एक्यूरेसी है। तो अगर कोई आदमी जानना चाहता है मेरा ब्लॉकेज का स्टेटस आज के दिन कितना है, दस है, बीस है, कितना परसेंटेज ब्लॉक हुआ है तो सिटी स्कैन कराए। और उसमें एक और फ़ायदा है कि रेडियोलॉजिस्ट करेगा। हां, फ़्यूचर ट्रीटमेंट के लिए वो कोई प्रेशर नहीं डाल सकता। उसका काम हो गया, रिपोर्ट देगा। उसको आप सेलिंग का ज़रूरत नहीं, उसको ऑपरेशन करने का कोई फ़ायदा भी नहीं है। उसने बोला, "भाई ये रिपोर्ट है। अब जिसको दिखाना आप दिखा लो। ये ब्लॉकेज कितनी है, मैं बता दिया आपको।" तो वहां पे वो प्रेशर नहीं बनता जो कार्डियोलॉजिस्ट, हॉस्पिटल वाले बना देते हैं। बिल्कुल-बिल्कुल। सर हार्ट अटैक के सिम्पटम्स कैसे मालूम पड़ेंगे? कैसे पता चलेगा कि आपको कोई पेन हो रहा है तो वो हार्ट अटैक से रिलेटेड? देखिए, हार्ट अटैक जब होती है आपको मैंने पहले ही बताया था कि हमारी हार्ट की जो ज़रूरत है, हां, वो तीन तरह का है, ब्लड की ज़रूरत। यस। सौ यूनिट की सप्लाई है, मान लेते हैं ट्यूब में। हार्ट की ज़रूरत है दस यूनिट। जब हार्ट की स्पीड कम है, जैसे मैं बैठा हूं, लेटा हूं, खड़ा हूं तो हार्ट की स्पीड कम है, तब दस यूनिट ब्लड चाहिए। ओके? चलते वक्त बीस यूनिट। हां, दौड़ते वक्त तीस यूनिट। हार्ट की स्पीड बहुत बढ़ जाती है। हां, तो एक आदमी बोलता है, "मुझे दौड़ने में दिक्कत है।" तो समझ लीजिए सत्तर परसेंट ब्लॉक हो चुका। वो बोलता है, "मुझे चलने में दिक्कत है।" तो अस्सी परसेंट ब्लॉक हो चुका। बोलता है, "मुझे बाथरूम जाने में दर्द हो रहा है।" तो नब्बे परसेंट ब्लॉक हो गया। बोला, "बैठे-बैठे दर्द हो रहा है, बैठे-बैठे सांस फूल रहा है।" तो ये हार्ट अटैक है। सौ परसेंट ब्लॉकेज हो गया। तो जब हार्ट का पेशेंट बोलता है, "मुझे चलने में दिक्कत है, बैठ जाता हूं, ठीक हो जाता हूं।" ये एंजाइना है, सांस फूलना एंजाइना है। और जिस दिन बोले, "बैठे-बैठे पेन हो रहा है बहुत ज़्यादा…"

हो रहा है पसीना पसीना हो रहा है, वोमिटिंग हो रहा है, तो ये समझ लीजिए हार्ट अटैक। हार्ट अटैक। दिस इज़ अ साइन। प्री साइन क्या है? कि एंजाइना हो रहा था, चलने में दर्द होता था। प्री साइन है। फिर वो ब्लॉकेज बढ़ा, आपने ध्यान ही नहीं दिया। बोला, ये तो हार्ट का ही नहीं। तो एक दिन वो पर्दा फटा, 100 हुआ। 100 होते ही हार्ट अटैक हुआ। उस वक्त हार्ट का एक हिस्सा डेड हो रहा है, तो चेस्ट पेन होगा, सीवियर चेस्ट पेन, या ब्रेथलेस होगा, बड़े बैठे-बैठे, एट रेस्ट, और पसीना होगा, वोमिटिंग होगा। ये हार्ट अटैक का साइन है। आप ये समझ जाइए, 100 ब्लॉकेज हो चुका है। उस वक्त, उस वक्त। इसको अगर प्रूफ करना है आपको कि हार्ट अटैक है, तो आपको एक टेस्ट कराना, जिसका नाम है ईसीजी, और एक कराना ट्रोपोनिन आई या ट्रोपी टेस्ट। ये ब्लड से होता है। हाँ, जैसे ही हार्ट का अटैक होता है, हार्ट के मसल्स डैमेज होने लगते हैं, केमिकल निकलता है। वो केमिकल ट्रोपोनिन माना जाता है, उसको टेस्ट किया जा सकता है। एक स्लाइड में एक बूंद ब्लड डाल दो, वो आ जाएगा पॉजिटिव। पॉजिटिव मतलब हार्ट अटैक। तो वो कर सकते हैं, और इको से पता चल सकता है कितना बड़ा हार्ट अटैक था, छोटा था, हार्ट अटैक कम बड़ा था। इको कार्डियोग्राम। हाँ, तो हार्ट अटैक होगा कब? जब पर्दा फटा है। तो ये याद रखिए। और अच्छा, उस वक्त हार्ट के हॉस्पिटल की जरूरत है। मैं हार्ट के हॉस्पिटल के बहुत जग के अगेंस्ट हूँ, पर इमरजेंसी कब हो गया? जब हार्ट अटैक हो चुका है, वो क्लॉट आ चुका है। अगर एक घंटे के अंदर उस क्लॉट को आप हटा सकते हो, तो कार्डियक डैमेज रुक जाएगा। एक घंटे तक टिशू थोड़ा-बहुत मरता नहीं है, पूरा। अगर घंटे भर, आधे घंटे के अंदर वो क्लॉट निकल गई, तो उस वक्त हॉस्पिटल की क्रेडिट में मानता हूँ कि वो आदमी पाँच मिनट, दस मिनट में हॉस्पिटल पहुँच गया, और उसी वक्त वो क्लॉट को उन्होंने डिसोल्व कर दिया, तो हार्ट मसल्स डेड नहीं होगा, डैमेज नहीं होगा। हाँ, तो ये जो है, उस वक्त उसकी जरूरत है। आज अमेरिका जैसे कंट्री में ये काम हो रहा है। वहाँ पे इन्होंने इतनी बढ़िया सिस्टम बना के रखी है, हार्ट अटैक को रोकने का, हार्ट अटैक से लोग ना मरें, उसके लिए उन्होंने एक नंबर दिया हुआ है, 911। आपको लग रहा है चेस्ट पेन है, और पसीना आ रहा है, आप बोले हार्ट अटैक लग रहा है, आपने फ़ोन कर दिया 911 में। हाँ, विद इन वन मिनट दे विल डिटेक्ट योर फ़ोन नंबर एंड एड्रेस। हाँ, विद इन थ्री-फ़ोर मिनट्स नियरेस्ट एम्बुलेंस विल कम। ओके, दे विल पिक यू अप, नियरेस्ट हॉस्पिटल को। ईसीजी करते हुए देखा, हार्ट अटैक है, उसने नियरेस्ट हॉस्पिटल को इन्फ़ॉर्म किया, हम पेशेंट ला रहे हैं। हाँ, नो सिग्नेचर रिक्वायर्ड, नो मनी डिपॉजिटेड। हाँ, और वो पाँच मिनट में वहाँ पहुँचते ही उसकी क्लॉट को रिजॉल्व कर देंगे, और वो काम हो गया, उसको पेशेंट का डैमेज ख़त्म हो गई। इंडिया में ये हो नहीं सकता। इंडिया में पहले पेशेंट बोलता है, ये पेन ना, ये गैस का पेन है, मैं हार्ट का मानते ही नहीं हूँ। वो एक घंटा उसमें वेस्ट करता है, फिर वो डॉक्टर को बुलाने में एक घंटा लग जाता है, फिर डॉक्टर बोलता है, ये तो हार्ट अटैक है, फिर वो जाने में एक घंटा लगता है, फिर हॉस्पिटल में जाने के बाद वो पैसे जमा करो, उसमें अधिक घंटा, मतलब तीन-चार घंटे बाद जो होना था वो हो चुका है।

तो ये बात। इससे एक इंटरेस्टिंग बात और याद आ गई, एक मेरे को मरीज़ मिला। बोला, सर, अगर ये बात है तो आप अगर बोलते हैं कि बहुत जल्दी पहुँचना है, तो मैं हॉस्पिटल के बगल वाले बिल्डिंग में मकान ले लूँ, तो कैसे रहेगा? मैं बोला, क्यों? बोला, जैसे ही हार्ट अटैक होगा अंदर घुस जाऊँगा। मैं बोला, फिर एक और काम कर लो आप, आप तो हॉस्पिटल में बेड ले लो। हाँ, बस जैसे ही हार्ट अटैक हो, वहीं पे पहुँच जाना। और अच्छा, चाहते हो ना, आईसीयू में बेड ले लो, वहीं पे हार्ट अटैक करना, वहीं पे डॉक्टर मिल जाएगा, वहीं पे ठीक कर लेगा। और उससे अच्छा क्या मालूम है? हार्ट अटैक होने ही मत दो। बोलता है, उसके लिए क्या करूँ? मैं बोला, जो रहा था आप ब्लॉकेज बढ़ाओ ही मत, आप खाना-पीना चेंज करो। तो ये जो लोगों के अंदर है ना, सर, हार्ट अटैक हो तब क्या करूँ? अरे, मैं बोला, यार, हार्ट अटैक ना, उसके लिए क्यों हो ही क्यों? अगर हार्ट अटैक हो रहा है, तो वो कार्डियोलॉजिस्ट की इनएफिशिएंसी की वजह से हो रहा है, राइट? आज जो हार्ट अटैक के नंबर बढ़ रहे हैं, इट शोज़ द फेलियर ऑफ़ मेडिकल साइंस। एग्ज़ैक्टली। एग्ज़ैक्टली। पास एक दिन एक आदमी आया, आके क्या बोलता है? सर, देयर इज़ अ ट्रिमेंडस प्रोग्रेस इन कार्डियोलॉजी। बोला, तुमने कहाँ प्रोग्रेस देखा? बोला, सर, दिल्ली में दो हार्ट के हॉस्पिटल थे, 50 हैं। हाँ, मैं बोला, और कुछ प्रोग्रेस देखा? बोला, हर हॉस्पिटल के बिल्डिंग लम्बे-लम्बे, छोड़े-छोड़े हो रहे हैं। मैं बोला, अच्छा। मैं बोला, और कुछ? बोला, देखिए भीड़ देखिए, वहाँ कितने लोग अटेंड कर रहे हैं। मैं बोला, एक बात बताओ, हार्ट के पेशेंट्स के नंबर तो कम होते जा रहे हैं ना? नहीं-नहीं सर, नंबर तो बढ़ते ही जा रहा है। मैं बोला, नंबर बढ़ना सक्सेस की बात नहीं है, फेलियर की बात है। आज पोलियो के पेशेंट देखते हो, बोलते एक भी नहीं देखा। मैं बोला, स्मॉल पॉक्स, बोलते एक भी नहीं देखा। मैं बोला, ये सक्सेस था। हार्ट के पेशेंट के नंबर बढ़ना सक्सेस की बात नहीं है। आप ये बिल्डिंग नए-नए, बड़े-बड़े बिल्डिंग देख के इम्प्रेस्ड मत हो जाओ, ये कार्डियोलॉजिस्ट के बड़े-बड़े गाड़ी से इम्प्रेस्ड मत हो जाओ। ये सोचो कि नंबर ऑफ़ हार्ट पेशेंट्स बढ़ रहे हैं, इसका मतलब है कार्डियोलॉजी इज़ अ फेलियर। जहाँ सक्सेस होता है, वहाँ पे नंबर ऑफ़ पेशेंट्स कम होने चाहिए, और ये कम क्यों नहीं हो रहा है? क्योंकि कार्डियोलॉजी का मेजॉरिटी इज़ इन्वेस्टेड इन बाइपास सर्जरी, एंजियोप्लास्टी, और दवाइयाँ। लाइफ़ स्टाइल की बात ही नहीं कर रहा है, प्रीवेंटिव केयर कोई बात नहीं कर रहा। प्रीवेंटिव एंड क्यूरेटिव। हार्ट के खाना-पीने को लोग प्रीवेंटिव मानते हैं, मैं क्यूरेटिव मानता हूँ, क्योंकि अगर हर को एक साथ कर लो, तो ब्लॉकेज कम हो जाती है। आज मेडिकल साइंस के पास प्रूफ हो चुका कि अगर सारे फैक्टर्स को आप कंट्रोल कर सकते हो, मेरी एक सेफ्टी सर्कल है, उसमें सारे फैक्टर का तीन जोन बना दिया, रेड, येलो, ग्रीन। अगर सारे ग्रीन में ला दो, तो ब्लॉकेज बढ़ेगा भी नहीं, वो घटेगा, और अगर घट सकता है, तो फिर तो बाइपास, एंजियोप्लास्टी और हार्ट अटैक होगा नहीं। तो अगर आप इंडिया को हार्ट अटैक फ्री करना चाहते हो, तो यू हैव टू एजुकेट एवरीबडी। एवरी इंडियन मस्ट बी एजुकेटेड, एंड दिस इज़ नॉट अ बिग थिंग। इतनी सी नॉलेज है, हर आदमी तक पहुँच जाए, ये करना बहुत जरूरी है।

अगर किसी इंसान को हार्ट अटैक आ रहा है हमारे सामने, तो कैसे पहचान सकते हैं? देखिए, उनको बैठे-बैठे पसीना होगा, या साँस फूल लेगी, और बैठे-बैठे पसीना-पसीना आने लगेगा, लगेगा गला चोक कर रहा है, तो ये हार्ट अटैक का डेफिनेट साइन है। पर कभी-कभी ये भी नहीं होता, कोई को जलन होती है छाती के बीच में, अनईज़ीनेस होती है, कम्फ़र्ट-डिस्कम्फ़र्ट होता है। ये भी हो सकता है, पर ज्यादातर लोगों को चेस्ट पेन, स्प्रेडिंग टू द लेफ्ट आर्म, एट रेस्ट, और ब्रेथलेसनेस एट रेस्ट। दीज़ आर द टू मेज़र इंडिकेशंस ऑफ़ हार्ट अटैक। तो ऐसे में हम क्या कर सकते हैं उन्हें बचाने के लिए अपने लेवल पे? उस वक्त देखिए, एक तो जो हम लोग सीपीआर बोलते हैं, अगर हार्ट बंद हो गई है, बेहोश हो गया है, तो सीपीआर किया जा सकता है। उस वक्त, उस वक्त कुछ दवाई है, जिसको इमरजेंसी ड्रग बताया जाता है। हम लोग बोलते हैं, ये पाउच आप रख लो, इसमें टर्बो स्टन 80 मिलीग्राम, जो कोलेस्ट्रॉल कम करने की दवाई होती है, उसमें दो एस्पिरिन, जो कि टोटल मिला के 325 मिलीग्राम डिस्प्रिन मिलती है, और दो क्लोपिडोग्रेल। ये टेबलेट मिक्स करके आप चबा के खिला सकते हो। अगर ये पाउच को हम लोग, हमने इमरजेंसी पाउच का नाम दिया है। ये लेने से उस वक्त वो जो क्लॉट है, उसको डिसोल्व होने का चांस है, जब तक आप हॉस्पिटल पहुँचो, तब तक के लिए। तो नेचुरली उस वक्त हॉस्पिटल रश करना चाहिए। वो जगह, उनको क्रेडिट देना ही पड़ेगा। और इस इन बिटवीन ये दोनों काम कर सकते हो, अगर जरूरत हो तो। पर नियरेस्ट हॉस्पिटल में जाके और वो क्लॉट को डिसोल्व करने का काम करना चाहिए। सो ऐसे वक्त में से चेस्ट को पंप करके रि-रिससिटेट करना पॉसिबल हो सकता है, उसकी ट्रेनिंग होती है। है। और एक बात याद रखिएगा, उस वक्त आपको इंडिया में एक प्रॉब्लम है, इंडिया के लोग इतने एजुकेटेड नहीं हैं, तो ये करने से पहले जो भी रिश्तेदार है, उनको पूछ के करिएगा। मेरे को याद है, मेरा एक पेशेंट था, उसने ऐसे-ऐसे किया, हाँ, और वो मारा भी गया। वो आदमी। उसकी वाइफ बोली, उस छाती पर चढ़ के उसने दबा के मारा है इसको। तो ऐसा ना हो जाए कभी। तो आप थोड़ा परमिशन लेकर, अगर उनके कोई हो, देखो कोई है ही नहीं, तब तो आप कर लो। यस। ऑन लुकर्स को समझ आ जाएगा, लोगों को समझ आ जाएगा। पर अगर कोई रिश्तेदार है, उनको बोलो, देखो मैं सीपीआर कर रहा हूँ, और ये स्टैंडर्ड है, मैंने ट्रेनिंग लिया है। तो आजकल सीपीआर की ट्रेनिंग होती है, बेसिक लाइफ़ सपोर्ट के हिसाब से। तो सीपीआर का ट्रेनिंग जिसको वो कर पाएगा, उसमें चेस्ट को कितना दबाना, कैसे दबाना, उसके संग मुँह से उनको हवा देना, और उससे लोग बचते हैं, वो जान बच जाता है। अगर कोई ऑन लुकर भी उसको कर दे, तो बाहर के कंट्री में इसके अवार्ड दी जाती है। ओके। उसके पीछे का साइन सर, एकदम शॉर्ट में एक्सप्लेन कर सकते हैं? उस वक्त क्या होता है? हार्ट अटैक के वक्त सडन हार्ट बंद हो गया। हाँ, उस वक्त उसको इलेक्ट्रिक शॉक मार के हॉस्पिटल तो रिवाइव कर लेता है। उस वक्त उसको एक थोड़ा धक्का मारो, वो हार्ट पंप कर लिया, चालू हो गया, और उसके साथ आप हार्ट के मसल्स को ऐसे पकड़ के दबाना होता है, और पाँच बार दबाया, एक बार साँस मुँह में लेके साँस दिया, फिर पाँच बार दबाया, फिर साँस लिया, फिर पाँच बार दबाया, साँस लिया। हाँ, प्रेशर इतना ना हो कि हड्डी टूट जाए। हाँ, तो वो देख के करना पड़ता है, और दिस में सडन रिवाइव द हार्ट। हाँ, जब तक लोग केयर ले लेगा, तो दिस इज़ इमरजेंसी केयर, इसको बोलते हैं कार्डियो-पल्मोनरी रिससिटेशन, सीपीआर। सर, इंडियंस में वेस्टर्न लोगों के मुक़ाबले जो इंडियंस की आर्टरी जो होती है, वो कहते हैं कि पतली होती है। सो वेस्टर्न लोगों की आर्टरी मोटी होती है, तो इंडियंस की पतली होती है, तो इस वजह से वी आर मोर प्रोन टू दिस कार्डियोवैस्कुलर डिज़ीज़। फैक्ट्स है। और एक फैक्ट है कि इंडियंस आर जेनेटिकली प्रोन टू डेवलप मोर कोलेस्ट्रॉल, मोर ट्राइग्लिसराइड, ब्लड प्रेशर, शुगर, और इसको मेटाबॉलिक सिंड्रोम बोलते हैं। ओके। तो ये वाली प्रॉब्लम आज इंडिया के बहुत सारे क्लास में आ गई है। पहले गाँवों में नहीं होते थे, फिजिकली एक्टिव होते थे, गलत खाना नहीं खाते थे। अब प्रोस्पेरिटी आने के बाद गाँव-शहर सब बराबर सा हो गया है, हर जगह ये आज हो रहा है, और हार्ट की बीमारी में मैं जो बोल रहा था, हर दस सेकंड में इंडिया में एक आदमी मर रहा है। हाँ, एक महीने में करीब-करीब आप मान के चलिए 35, 3.5 लाख, 3 लाख पीपल डाई ऑफ़ हार्ट अटैक्स। हम सो इंडियंस का लीवर कह सकते हैं, ज्यादा कोलेस्ट्रॉल ऑन एन एवरेज प्रोड्यूस करता है। इसको हम लोग बोलते हैं डबल इंजन लीवर। आजकल बोलते हैं डबल इंजन सरकार, वैसे डबल इंजन लीवर है, ये डबल कोलेस्ट्रॉल बना रहा है, डबल ट्राइग्लिसराइड बना रहा है। इसको दवाई से ही रोकना पड़ेगा। तो इंडिया में स्टैटिन की यूज़ और ट्राइग्लिसराइड कम करने की दवाई की यूज़ बढ़नी चाहिए, और इसको आप आम आदमी को समझाना पड़ेगा। अगर लीवर में बन रहा है, आपको दवाई लेना पड़ेगा, जेनेटिक केस है तो दवाई लो, इसमें सोचो मत।

अच्छा, कुछ स्टडीज़ मैंने पढ़े थे, जिसमें ये बताया गया था कि मेल्स को ऑन एन एवरेज ज्यादा हार्ट अटैक्स होता है, एज़ कंपेयर टू फ़ीमेल्स। इसके पीछे रोल एस्ट्रोजन, टेस्टोस्टेरोन का भी है। तो क्या आप लिंक करके बता सकते हैं, क्या रोल है? और क्या आज के जमाने में भी वो जो रेशो है कि मेल्स को ज्यादा हार्ट अटैक्स हो रहे हैं, क्या वो आज भी चलता है? आज से बहुत साल पहले। हाँ, मैं प्रैक्टिस तीस साल से कर रहा हूँ, बहुत साल पहले होता था, दस में नौ मेल होते थे, एक फ़ीमेल होती थी। क्यों फ़ीमेल को नहीं होती थी? देखो, मेल का ब्लॉकेज चालू हो जाता है बीस साल की उम्र में। हाँ, और बीस-तीस साल, मतलब पचास में वो हार्ट का पेशेंट बन गया। हाँ, फ़ीमेल का जब तक मेंस्ट्रुएशन चलता रहता है, हार्मोन्स की इफ़ेक्ट रहती है, तब तक वो ब्लॉकेज बनता नहीं है। हाँ, तो मान लेते हैं 45 में उसकी ब्लॉकेज शुरू हुई, तो उनको तो तीस साल में 75 साल हो गए, ऐसे ही मर जाए, तब तक तो लोग। तो ये समझ लीजिए, मेल इज़ ए डिसएडवांटेज बिकॉज़ ऑफ़ लैक ऑफ़ दिस हार्मोन्स। तो जो ये बच्चा पैदा करने के लिए जो हार्मोन्स वगैरह दी गई है, वो लेडीज़ के लिए प्रोटेक्टिव, मतलब गॉड एक पनिशमेंट दिया, एक अवार्ड भी दिया कि तुम्हें हार्ट की बीमारी कम होगी। पर अब आजकल की लेडीज़ ना, वो भी थोड़ी तेज हो गई है, वो भी खाना गलत कर रही है, एक्सरसाइज़ कम कर दिया है, तो ये रेशो धीरे-धीरे चेंज हो रहा है। अभी मैं समझता हूँ, 3:7 हो गया है। ओके। मतलब बहुत ही क्लोज आ गए। अब क्लोज आने लग गए हैं, क्योंकि लेडीज़ में हार्ट बीमारी आजकल बहुत होने लग गई है, बिकॉज़ ऑफ़ स्ट्रेस, लैक ऑफ़ एक्टिविटी, पैसे आ गए तो फिर खाना-पीना गलत हो गया, फिजिकल एक्टिविटी कम हो गए। आगे चक्की पीसते थे, अब बटन दबा रहे हैं, नौकरानी सारा काम कर रही है। तो ये लेडीज़ में हार्ट की बीमारी होने लग गई है, और वेस्टर्न लाइफ़ स्टाइल चेंज। और एक चीज़ था और वो बात आपको बता दूँ, ये जो हमारी मेंस्ट्रुअल पीरियड्स होते हैं ना, उसमें हमारे जो वो बोलते हैं भ्रूण, जिसको बोलते हैं ओवम, ये एक बार मेंस्ट्रुअल पीरियड होता है, उसमें दस-बारह ओवम निकलती है, उसमें से एक मैच्योर होती है। हाँ, तो दस-ग्यारह गया। हाँ, अब एक लेडी प्रेग्नेंट हो गई, तो बारह महीने तक उसके ओवम लॉस बंद हो गए। हम तो आगे के जमाने में ऐसे लेडीज़ होते थे, जो दस-दस बच्चा पैदा कर दिया, तो दस साल के ओवम उसके बच गए, उसकी पीरियड्स ऑफ होती थी 60 साल में जाके। ओह, तो उनके हार्ट की बीमारी और कम होती थी। आजकल, आजकल बच्चे पैदा बंद हो गए, वो भी एक कारण है कि ओवम लॉस हो जाता है, पीरियड जल्दी खत्म हो जाते हैं, 35-40 साल में आजकल पीरियड, मेनोपॉज़ आने लग गई है, तो इससे उनको और जल्दी हार्ट की बीमारी होने लग, और जल्दी हो जाता है। तो सर, ये एंड्रोजन्स का हार्ट अटैक से क्या लिंक है? टेस्टोस्टेरोन जैसे माना जाता है, पर अभी डायरेक्ट अभी भी कोई लिंक नहीं बना पा रहे हैं। बट ये माना जाता है कि मेल्स में हार्ट की बीमारी इसलिए नहीं होती है कि एंड्रोजन का असर है, इसलिए कि उनकी लाइफ़ स्टाइल खराब है। तो कोई ऐसा डायरेक्ट लिंक मिला-मिला है? हाँ? नहीं, बहुत डायरेक्ट कोई भी नहीं है। नहीं, तो फिर हम टेस्टोस्टेरोन ब्लॉक करने की दवाइयाँ दे देते हैं? ऐसा नहीं है। सो एस्ट्रोजन का कार्डियो प्रोटेक्टिव बेनिफ़िट्स है, लेकिन बेनिफ़िट है। ऐसे कौन से डेली फ़ूड्स हैं जो हार्ट अटैक से बचा सकते हैं? सबसे बढ़िया फ़ूड हार्ट अटैक को प्रोटेक्शन करने के लिए होता है, फ़्रूट्स और वेजिटेबल्स। बहुत ज्यादा वेजिटेबल खाइए, सलाद खाइए, फ़्रूट्स खाइए। ये सबसे बड़ा प्रोटेक्शन देगा। दूसरा, हाई फ़ाइबर फ़ूड में, जैसे ओट्स है। अच्छा, दालों को आप छिलके के साथ खाइए, तो वो दाल में बहुत सारा प्रोटीन, वो आ जाता है फ़ाइबर, दैट इंप्रूव्स इट। हाँ, सॉल्युबल, जितने सॉल्युबल फ़ाइबर हो। ये तीन-चार चीज़ तो आपको बहुत अच्छे से खाना चाहिए, फ़्रूट्स, वेजिटेबल, और जितने भी बेरीज़ हैं, उसमें मिलता है एंटीऑक्सीडेंट्स। एंटीऑक्सीडेंट बहुत काम की चीज़ है। तो फ़्रूट्स, वेजिटेबल, सलाद, ये नंबर वन है। हाई फ़ाइबर फ़ूड और खाना चाहिए, दाल को छिलके के साथ खाना चाहिए। ओट्स एक अच्छी फ़ूड मानी जाती है। आजकल मिलेट्स आप सुनते होंगे, मिलेट्स में बहुत हाई फ़ाइबर होता है। मैदे के जगह आटा खाइए, और कोशिश करिए हर खाने में आप, जैसे खिचड़ी भी बनाते हैं, दाल और चावल को मिला के, उसमें बहुत सारा वेजिटेबल डाल दीजिए। कोशिश करिए दाल को मिला-मिला के खाए, एक दिन एक दाल, एक दिन एक दाल, एक दिन और ज़ीरो ऑयल का खाना खाए। इसमें कहीं कोई शक नहीं है, बहुत सारा सब्ज़ी खाइए, पर वो बनेगा बिना तेल के। वो आप ख्याल करिए। सो ज़ीरो ऑयल का खाना बनता कैसे है? देखिए, ऑयल का टेस्ट नहीं होता, मैंने आपको पहले ही बताया है। ऑयल को फ़्राई करने के लिए, मसाले को फ़्राई करने के लिए यूज़ होता है। हम लोग उसको पानी से फ़्राई कर देते हैं। देखिए, पाँच मसाले बेसिक होते हैं, एक होता है नमक, मिर्ची, इनको फ़्राई करने की जरूरत नहीं, ऐसे ही डाल सकते हो। हल्दी, धनिया, जीरा, इनको भूना पड़ता है, और टमाटर और प्याज़, इनको भूना पड़ता है, तो उसका टेस्ट बढ़ जाती है। तो इसको हम लोग पानी से भूनते हैं। कैसे भूनते हैं? कोई भी बर्तन में कर सकते हो, कोई नॉन-स्टिक का जरूरत नहीं। कोई भी बर्तन को गर्म किया, कढ़ाई गर्म हो गई, उसमें पहले जीरा डाल दो, अगर राई देना है, एक आधा बूँद राई डाल दो, और उसको ऐसे ही भून लो, थोड़ा हिला लिया, चारों तरफ़ से भून जाती है। जैसे ही वो भून के ब्राउन होने लगा, उस पे आप प्याज़ डाल दो, हम और प्याज़ को भूनते रहो, प्याज़ को हिलाते रहे, जब तक पानी रहेगा, आवाज़ करता रहेगा। जैसे ही पानी ख़त्म हो जाए, वो चिपकने लगेगा, आधा चम्मच, एक चम्मच पानी डाल दीजिए, और पानी डाल के उसको भिगा दीजिए, फिर भूनिए, फिर पानी उड़ जाए, फिर फिर भूनिए, फिर भूनिए, तीन-चार बार भून जाए, तो प्याज़ भून गई। अब उसी प्याज़ के ऊपर, देखिए कढ़ाई में दो एरिया है, एक प्याज़ है, एक कढ़ाई है। कढ़ाई में आपको नहीं डालना, मसाले को कढ़ाई में डाल दिया, जल जाएगी। प्याज़ के ऊपर डाल दीजिए, प्याज़ के ऊपर सॉफ़्ट मिलेगा वहाँ पे, हल्दी, धनिया, मिर्ची, नमक, अदरक, जितने लहसुन-वहसन सब डाल दीजिए, और उसको पानी देके भूनते जाइए। अब वो मसाला चिपका हुआ रहेगा प्याज़ में, उसको भूनते रहिए, दो-तीन-चार मिनट में प्याज़ और के संग मसाले-वसाले भी भून गए। अब इसमें टमाटर डालो, अब टमाटर को भून-भून के सारा पानी ख़त्म कर दीजिए। अब ये जो पेस्ट है, इसको भूनते जाइए, जब तक हल्दी का स्वाद बदल ना जाए। हल्दी कच्चा होता है, लास्ट भूनता है। जहाँ हल्दी कच्चे का पक्का हो गया, बस वहीं पे उसको रोक दिया। अब उसको आपने टेस्ट करके, या स्मेल से भी पता चल जाता है, ये हल्दी भून चुका है। अब इसमें पानी डालिए, और बॉईल कीजिए। ये जो ग्रेवी है, उसमें सारे मसाले हैं, भुने हुए हैं, और टेस्ट सेम टू सेम है। अब इसमें जो सब्ज़ी डालना है डाल लो। तो सब्ज़ी बिना तेल के बनाने में ना, तेल का खर्चा हुआ, तेल के पैसे बच गए, और हार्ट के लिए अच्छा है, ब्लड प्रेशर के लिए अच्छा है, शुगर के लिए अच्छा है, वज़न कम करने के लिए एक्स्ट्रा कैलोरीज़ भी नहीं मिले, एक्स्ट्रा कैलोरी नहीं मिला।

ऐसे कौन से स्ट्रीट फ़ूड्स हैं जो हार्ट अटैक कॉज़ करते हैं? देखिए, स्ट्रीट फ़ूड तो भरा हुआ है आजकल। ये जलेबी, पकोड़े, समोसे, ये ब्रेड पकोड़ा इंडिया में इतनी फैल गई है। ये पूरा। ये जो आलू को फ़्राई करके ऊपर से वो बेसन लगा के देते हैं, आलू बोंडा बोलते हैं। ये दीज़ आर ऑल बैड फ़ॉर हार्ट। अच्छा, अगर नॉनवेज में देखेंगे तो चिकन तंदूरी और मटन का कोई भी कबाब, ये सारे जहर हैं हार्ट के लिए। और तीसरा हो गया वो जो दूध से बने हुए, बहुत हाई डेज़र्ट, रबड़ी हो गई, और मलाई हो गई, और आइसक्रीम हो गई। ये क्रीम होता है, भरा हुआ होता है तेल, हम और बटर। ये सारे जहर हैं। बटर से, बटर में तल के देते हैं। आप देखो, वो आप बोलते हो, भाई पाव भाजी दे दो, वो बटर में लगा के देते हैं, वो बटर जहर है। तो आज स्ट्रीट फ़ूड हम लोग लोग खा ही रहे हैं। आप देखेंगे, ये बहुत खराब है, और आजकल बड़े शहरों में यही हो गया है कि लोग बाहर खाना चाहते हैं, और बाहर में सस्ता लेना है, तो स्ट्रीट फ़ूड मिल जाता है, और वो खाते हैं। और अभी ये देखा गया है कि मिडिल क्लास में हार्ट की बीमारी ज्यादा होने लग गई है। आगे रिच क्लास में होता था, रिच वाले समझदार हो गए हैं, वो लोग जाके वहाँ पे बड़े रेस्टोरेंट में फ़्रूट्स और वेजिटेबल खाते हैं, और बॉईल्ड वेजिटेबल खाते हैं। और जो गरीब है, वो ज्यादातर स्ट्रीट फ़ूड जो खाते हैं, उसमें मिडिल क्लास मिलते हैं, वो लोग पैसे के चक्कर में बड़े जगह जाके या फ़्रूट्स खरीदते नहीं है, फ़्रूट्स महँगा है करके, वो लोगों को हार्ट की बीमारी ज्यादा होता है। तो अभी एक इंग्लैंड में स्टडी हुई है, वो लोग दिखाए कि मिडिल क्लास इज़ मोर अफ़ेक्टेड देन द रिच क्लास। नाउ, आगे बोलता था, हार्ट की बीमारी रिच लोगों की बीमारी है, अब वो ख़त्म हो गया, अभी मास बीमारी हो गई है, राइट? और यहाँ पे एजुकेशन का भी रोल है। हाई क्लास, हाई सोसाइटी अपने आप को एजुकेट कर लेते हैं, कर लेते हैं। उनके पास अच्छे एडवाइज़र्स हैं, अच्छे हेल्थ एक्सपर्ट, नहीं, वो पढ़ भी लेते हैं, और उनको हेल्थ कॉन्शियस हो जाते हैं। वो बोलते हैं, मैं नहीं खाऊँगा, इसमें तेल है, मैं तो नहीं खाती। आजकल के गर्ल्स और बॉयज़ पढ़े-लिखों को देख सब समझदार है, बोला, इसमें ये तो कोलेस्ट्रॉल है, नॉनवेज है, मैं तो नहीं खाऊँगी। ये बहुत कॉमन हो गया। एंड दिस एजुकेशन इज़ अब्सोल्यूटली चेंजिंग द पैटर्न, राइट? तो अब जो मिडिल क्लास है, अनएजुकेटेड क्लास है, इनको हार्ट की बीमारी ज्यादा हो रही है, मास हो रही है। सो सर, जैसे

आपने व फिनलैंड का भी एग्जांपल दिया कि 85 पर प्रॉब्लम सॉल्व हो गए, हाट हार्ट से रिलेटेड, जस्ट एजुकेशन को फैलाकर। सो आप अपने लेवल पर क्या करना करने की कोशिश कर रहे हैं, ये एजुकेशन को फैलाने के लिए? बिकॉज़ आई सी कि लाइक यू आर ड्रिवन विथ अ कॉज। तो आपने अब तक क्या-क्या कोशिशें की और किस तरीके से आप देख रहे हैं कि आज इंडिया में अगर कम लोग तक यह जानकारी है तो इसे हम हर इंडियंस तक पहुंचाए, तो कैसे कर सकते हैं?

देखिए, मैं आज से 30 साल पहले, 29 साल टू बी मोर प्रेसा, 95 में एम्स की नौकरी छोड़ी थी, एज एन असिस्टेंट प्रोफेसर। इसलिए कि मेरे को लगा था यह बात बहुत बड़ा है और यह एम्स में लेकर नहीं होगा। आई वाज बाउंड बाय रूल्स एंड रेगुलेशंस। मैं निकला और पहला क्लीनिक खोला था दिल्ली में, लाजपत नगर में। आज हमारी 134 क्लीनिक इंडिया भर में, 110 सिटी में प्रेजेंट है। बांग्लादेश में हमारी तीन क्लीनिक है, काठमांडू में क्लीनिक है। हमने हार्ट की बीमारी का अवेयरनेस बहुत फैलाया, हम एजुकेट करते थे, कैंप्स करते थे। पर अब देखिए, इंटरनेट आया और सोशल मीडिया आया। मैं YouTube पे लोग देख रहे हैं और YouTube पे लाख फॉलोअर हो गए, वो फैला रहे हैं बात को। तो हमने एजुकेशन को फैलाया है, पर यहां पे मैं नहीं रोक रहा हूं, क्योंकि मैं अब यह सोचता हूं इंडिया के 140 करोड़ लोगों को अगर एजुकेट करना है तो मैं फिल्म्स बना रहा हूं हार्ट के ऊपर। एंड वी आर मेकिंग अ प्लान कि इंडिया को बीट हार्ट डिजीज मिशन में डालूं कि हार्ट की बीमारी को हटाना है और इसके लिए आम जनता तक पहुंचना होगा। तो हम लोग 770 डिस्ट्रिक्ट हमारे इंडिया की है, हर डिस्ट्रिक्ट में वॉलेंटियर्स ढूंढ रहे हैं जो ये फिल्म, जो हम बनाएंगे, वो लोकल लोगों को दिखाएं। एक-एक आदमी तक ये फिल्म जाए। मैं कॉरपोरेट से हेल्प लूंगा, मैं कोई क्लब्स, रोटरी क्लब, लायंस क्लब, सबसे हेल्प लूंगा। कोई भी संस्था हो, जो लोकल सोसाइटीज हैं, हर को हम लोग पकड़ेंगे कि आप एजुकेट करो लोगों को और यह एजुकेशन फ्री ऑफ कॉस्ट है, इसमें पैसे नहीं लगते हैं। भाई, खाना कैसे बनाना है, आजकल फिल्म बना दो और ये तो इंटरनेट के थ्रू फैलता रहेगा।

तो मेरा अभी प्लान है, मैंने एक पुण्य हार्ट फाउंडेशन करके बनाया है, उसमें हमने यह प्लान किया कि इंडिया के हर आदमी को ये एजुकेट करना है और मैं इसलिए अभी फिनलैंड गया, उनके उनसे इंटरेक्ट किया कि कैसे वह करते थे। तो अब वो प्लान हम लोग इंडिया में करने वाले हैं। वाओ, यह बात बहुत बड़ी होगी और इंडिया की अगर मैं हार्ट अटैक को आधा भी कर दूं तो समझ लीजिए 100-100 हॉस्पिटल के बराबर हम इस एजुकेशन से काम कर पाएंगे। 85 पर अगर कम कर दिया तो यह बहुत बड़ा बात होगी और इट इज पॉसिबल और इसमें पैसे की ज्यादा जरूरत नहीं है, लोगों की जरूरत है हमारे को जो मेरे संग जुड़े और ये एजुकेशन को गांव-गांव तक फैलाए। हार्ट की बीमारी प्रिवेंटेबल है, हार्ट अटैक प्रिवेंटेबल है। इंडिया में 1 तिहाई डेथ को हम बचा सकते हैं और यह बहुत बड़ा बात है। कोई भी वॉर में 1000-2000 मरते हैं, आज इजराइल के वॉर में 300 लोग मर गए, कितना हल्ला हो रहा है और हर दिन इंडिया में 9000 लोग मर रहे हैं, इसका कोई पत्ता नहीं है। सो बहुत ही नोबल कॉज है और आई थिंक बिकॉज़ 30 पर अगर डेथ्स हार्ट अटैक की वजह से हो रहे हैं तो इस पर एजुकेशन तो सबसे ज्यादा होना चाहिए, लेकिन सबसे कम है आज की तारीख में।

सो सर, सावल में आप और क्या-क्या तरीके अपनाते हैं जिससे कि ये प्रॉब्लम को रूट से सॉल्व करें? देखिए, सावल की क्लीनिक आज इंडिया भर में है, हम लोग उनको एजुकेट करते हैं, हार्ट के पेशेंट्स को, उसके संग दवाइयां भी देते हैं। हमारी एक दवाई की भी प्रोसेस बनी हुई है और जिसमें बहुत सस्ते में दवाई हम लोग की अवेलेबल होती है और उसके साथ अगर कोई एडवांस पेशेंट आता है हमारे पास जिनको बहुत ही सीरियस हार्ट की बीमारी है, उनको हम लोग एक नेचुरल बायपास करवाते हैं, एक मशीन से। हार्ट में हजारों एक्स्ट्रा ट्यूब है, गॉड ने जैसे हमारे को दो किडनी दिया, एक किडनी एक्स्ट्रा है, वैसे हार्ट में भी एक-एक एक्स्ट्रा ट्यूब छोड़ा हुआ है जिनको कैपिलरीज एंड कोलेट बोलते हैं। तो एक मशीन है जो यूएस एफडीए अप्रूव्ड मशीन है, इसको बोलते हैं नेचुरल बायपास ईसीपी मशीन, इससे ट्रीट करते हैं, उससे हज़ार ट्यूब खुल जाती है। ऑपरेशन की जरूरत नहीं है, एडमिशन की जरूरत नहीं है, बॉडी में खरोच भी नहीं आई और उसके संग एक ट्रीटमेंट करते जिसको बोलते हैं डिटॉक्स थेरेपी, उसमें कुछ डिटॉक्सिफिकेशन करते हैं जिससे ब्लॉकेज की रिवर्सल की स्पीड बढ़ जाए। तो लाइफस्टाइल नंबर वन, खाना पीना नंबर वन, उसके संग दवाइयां, उसके संग नेचुरल बायपास, उसके डिटॉक्स और इससे हम लोग ने इंडिया भर में करीब 5 लाख से ऊपर पेशेंट को ट्रीट किया है और लोग 25-2 साल हमारे ट्रीटमेंट से चल रहे हैं, उनको ना बाईपास की जरूरत पड़ी है ना एंजियोप्लास्टिक की जरूरत पड़ी है। सो दिस इज व्हाट वी डू और उसके संग हम लोग अब ऐप डेवलप कर रहे हैं जिससे आदमी फोन से अपने आपको को कंट्रोल करने लगे। हमने एक सेफ्टी सर्कल बनाया है जिससे आप पता कर सकते हो आप कितने सेफ में हो। एक हमने हार्ट अटैक प्रोटेक्शन स्कोर बनाया है जिससे आपकी हर दिन की स्कोरिंग कर सकते हो, आज मैं कितना हार्ट के लिए काम किया हूं। ओके? तो ये सारे आ रहे हैं और हमारी जो ऐप आ रही है, एक मैं ब्लॉकेज डिटेक्टर बना रहा हूं कि आपको 10-15 क्वेश्चन पूछूंगा और मेरी सॉफ्टवेयर आपको बता देगा कितने ब्लॉकेज के चांस हैं। हम लोग क्या कर रहे हैं, जितने भी हमारे पेशेंट आ रहे हैं, आज लाखों में, उनका डाटा डाल रहे हैं इसमें डेटा में और वो डेटा में ये दिख रहे हैं इतना-इतना कोलेस्ट्रॉल, इतना ट्राइग्लिसराइड्स, स्मोकिंग इतनी, ब्लॉकेज आई ये कारण है, इतनी ब्लॉकेज आई। 1000, 2000, 5000, 10000 डालने के बाद अब हम वो डाटा डालेंगे और कंप्यूटर एआई से बताएगा कि कितनी ब्लॉकेज के चांसेस और जिसके हाई रिस्क रहेगा उसको हम बोलेंगे आप जाओ सीटी स्कैन कराओ, पता करो ब्लॉकेज कितनी है। सो दिस इज व्हाट इज द फ्यूचर। तो मैं समझता हूं यह सब आने के बाद हम लोग को स्केल अप कर सकते हैं, हम हर आदमी तक यह बात पहुंचा सकते और इंडिया खाली टारगेट नहीं है, पूरे वर्ल्ड में यह बात जा सकती है। तो यूएस और दूसरे कंट्रीज में भी यह बात पहुंचेगी। हम सो बेसिकली पेशेंट को पता होने से पहले ही उसको आप बता सकते हैं कि यार आपके लाइफस्टाइल के चॉइस के हिसाब से आप आपकी रिस्क कोर ज्यादा है, स्कैन कराना चाहिए। रिस्क कोर ज्यादा है करके। आई थिंक बहुत ही अच्छा कांसेप्ट है और एजुकेशन के ये नीड को भी ब्रिज कर देगा और साथ में अवेयरनेस क्रिएट करके प्रिवेंशन को भी क्रिएट करेगा।

नेचुरल बायपास क्या होता है? बायपास सर्जरी के बारे में सुना है, लेकिन नेचुरल बायपास क्या होता है? देखिए, गॉड ने हम लोग को एक एक्स्ट्रा सेट ऑफ ट्यूब दिया हुआ है जो स्पोर्ट्समैन होता है वो जब दौड़ता है तो वो एक्स्ट्रा ट्यूब खुल जाती है। ये समझ लीजिए सूटकेस है, उसमें एक चेन दिया हुआ है आपको, जब चाहिए उसको चेन को खोल दो, सूटकेस की एरिया एक्सपेंड हो जाए। ओके? वैसे हार्ट में भी एक सेट ऑफ ट्यूब गॉड ने लगा के छोड़ा हुआ है। स्पोर्ट्समैन जब हर दिन दौड़ता है तो वो ऑटोमेटिक चालू हो जाती है क्योंकि उसमें प्रेशर पड़ती है और प्रेशर जब पड़ता रहा तो खुलता रहा, ज्यादा ब्लड फ्लो, ज्यादा ब्लड फ्लो हो जाती है तो उससे वो सारे ट्यूब्स खुल जाते हैं। स्पोर्ट्समैन को बोला जाता है 10 चक्कर ग्राउंड के लगाओ तब जाके खेलने दूंगा, तो उसकी वो सारे ट्यूब्स खुल जाते हैं एक्स्ट्रा। इसको स्पोर्ट्समैन ट्यूब बोलते हैं। अब हार्ट के पेशेंट को हम दौड़ने नहीं दे सकते तो एक मशीन बनाई गई जिसका नाम है ईसीपी मशीन। इस पर लेटा देते हैं, पैरों में जैकेट लगा देते हैं, ईसीजी कंप्यूटर को फीड हो जाता है। जब हार्ट पंप करके ब्लड भेजता है तो इसको बोलते हैं सिस्टोल, सारे मसल्स में, पैरों में ब्लड भर गई, वो ब्लड वहां रहता नहीं है, डायस्टोल में हार्ट उसको वापस पुल करता है तो वो ब्लड हार्ट की तरफ जाता है। जिस वक्त वो हार्ट की तरफ जा रहा है तो पैरों के मसल्स को मसल स्क्वीज़ कर देता है, वो जैकेट्स है, तीन जैकेट इस पैर में, तीन जैकेट उस पैर में, सारे को स्क्वीज़ करता है और डबल ब्लड हार्ट में आती है। वो एक-एक घंटा मशीन चलती है तो 4000 बार उसमें एक्स्ट्रा ब्लड जाती है और ऐसा 40 घंटा दूं तो हार्ट में हजारों नई ट्यूब खुल जाती है। इसको बोलते हैं नेचुरल बायपास, मतलब गॉड ने हमें प्रोविजन दे के रखा था, रिजर्व दिया था उसको हमने खोल दिया। इनफैक्ट ये ट्यूब्स ओपन थे हमारे कब? जब हमें जरूरत था, कब? हजारों साल पहले हम जंगलों में होते थे और जानवर हमें मारे तो भागना पड़ता था, जान बचा के, उस वक्त भागना होता था घंटों भर और आप जानवर को मारना चाहो वो भागेगा, उसके पीछे भागो, उस वक्त ये सारे ट्यूब एक्टिव थे। अब हमने फिजिकल एक्टिविटी कम कर दिया, दौड़ना बंद कर दिया, सारे बंद पड़े हैं तो हार्ट के पेशेंट को इसको हम खोल देते हैं उस मशीन से। ये एफडीए अप्रूव्ड ट्रीटमेंट है और सावल के सारे क्लीनिक में ट्रीटमेंट अवेलेबल है, वो हम लोग ये करते हैं वहां पे। तो इससे बॉडी कटी नहीं, एडमिशन हुआ नहीं और आपके बिना काटे बायपास हो गई। मतलब मैं कभी-कभी अननेचुरल ट्यूब लगाने की जरूरत ही नहीं, नेचुरल ट्यूब को ओपन कर दिया। मैं कभी-कभी समझाता हूं मेरे घर पे दो सेट बर्तन है, हां, तो कुछ लोग आ गए, मुझे डबल जरूरत है तो मैं खोल लूंगा एक बर्तन का सेट। हां, तो हमारे हार्ट में एक रखा है, है भाई, उसको खोल लो। हां, तो ये मेरे को लगा हमारे ट्रीटमेंट के संग सिंक है तो इस ट्रीटमेंट को हमने अपनाया है एंड इट इज अ वेरी हाईली प्रूवन ट्रीटमेंट। अमेरिका में यह चलती है और वहां पे इंश्योरेंस कंपनी उसको पे करती है, हालांकि कार्डियोलॉजिस्ट इसको बहुत पसंद नहीं करेंगे क्योंकि उनके ट्रीटमेंट में यह बायपास सर्जरी का रिप्लेसमेंट बनता है यह तो। इसलिए वह नहीं जा रहा है, पर अगेन आम आदमी को अगर मैं बोलता हूं, बोलता है सर मुझे कटवाना नहीं है, नेचुरल बायपास कर दो, इससे मैं ठीक हो जाऊं तो मेरे को क्या? और लाइफस्टाइल चेंज तो करूंगा ही, दवाई तो करना ही है, ये एक्स्ट्रा है, एक्स्ट्रा है तो ये एक्स्ट्रा अगर कर लिया जाए इससे बहुत इंप्रूवमेंट हो जाता है। उसके साथ कुछ दवाइयां हम लोग ऐसा देते हैं जिसमें ब्लॉकेज की रिवर्सल की स्पीड बढ़ जाती है, इसको डिटॉक्स थेरेपी बोलते हैं। तो इट वर्क्स वेरी वेल। ये जो रिजर्व वाला ब्लड वेसल होता है बेसिकली तो इसमें कितना परसेंटेज ब्लड फ्लो बढ़ जाएगा? 20-30 बढ़ जाती है, ली। तो वो 30, मतलब एक आदमी रनिंग के जितना ब्लड है उसमें पास एक्स्ट्रा है। ओके? ओके। तो बॉडी में देखिए आप सोचिए कुदरत की ब्यूटी सोचिए, जरूरत है 30 पर की ट्यूब में 70 एक्स्ट्रा दिया, उसको हमने बंद कर दिया, उसके बाद और 30 रखा हुआ अलग से रिजर्व, मतलब पूरा एक एक्स्ट्रा सेट बर्तन है। एक्टन गॉड ने जैसे हम लोग बोलते हैं ना बेटी को ये भी दो और साथ में एक रिजर्व भी दे दो तो वो गॉड ने बना के दिया। हमारी ह्यूमन बॉडी से अच्छा मशीन बन ही नहीं सकता, खुद को रिपेयर कर सकता है। एक हाथ में स्क्रैच कर दीजिए, 10 दिन बाद स्क्रैच हील कर गया। हार्ट को हील कर सकते हैं आप और अगर हील कर सकते हैं तो क्यों हम कोई ऑपरेशन या उसके बाद में सोचे और क्यों ना हम इसको अपनाए? इसमें लाइफस्टाइल में पैसे ही नहीं लगते हैं, इनफैक्ट पैसे बचते हैं, राइट?

सो अभी सर, डिटॉक्स थेरेपी के बारे में बताइए जिससे हार्ट में अगर कोई ब्लॉकेजेस है तो वो बहुत ही फास्ट रिवर्स हो जाते हैं। देखिए, लाइफस्टाइल में जब हम लोग बोलते हैं 14-15 कारण है, सबको आपने रॉक मिला दिया। अब कोलेस्ट्रॉल ब्लड में इतनी कम है और ब्लॉकेज में पड़ी है, बीच में एक मेंब्रेन है, उस मेंब्रेन के थ्रू ब्लॉकेज वापस आती है। यह स्पीड अगर लाइफस्टाइल पूरा फॉलो करते हैं तो डॉक्टर डीन नीस ने दिखा के दिया है अमेरिका में रिसर्च करके कि ब्लॉकेज एक-दो परसेंट पर ईयर कम हो जाती है। जिस स्पीड में ब्लॉकेज बड़ी है उसी स्पीड में कम होती है पर एक-दो परसेंट बड़ा स्लो होता है। तो हम लोग जो डिटॉक्स थेरेपी करते हैं उसमें क्या होता है वो जो मेंब्रेन है उसको क्लीन कर देता है, उसके ऊपर का कचरा हटा देता है कोलेस्ट्रॉल को, उसको निकाल दिया जाता है, उससे वो होल्स बड़े हो जाते हैं और डिफ्यूजन जल्दी होती है। तो रिवर्सल की स्पीड जो एक-दो परसेंट है उसको 10-20 परसेंट तक ले आते हैं और अगर 10-20 परसेंट कम हो गया, सबका अलग-अलग है, पर 10 परसेंट भी कम हो गई तो पेशेंट आगे के लिए पाँच साल पीछे हो गया। ये डिटॉक्स थेरेपी आजकल बहुत पॉपुलर हो रहा है। लोग बोलते हैं सर वो तो करवा ही दो मेरे को तो। उसमें करना भी कुछ नहीं है और कॉस्ट भी बहुत ज्यादा नहीं है, बट इसमें ड्रिप्स लगते हैं और उससे वो ब्लॉकेज कम होने में मदद करता है। पर अगर उसको लाइफस्टाइल के साथ नहीं किया तो उल्टा भी होता है। अगर आप बिल्कुल आपकी कोलेस्ट्रॉल हाई है ब्लड में और उसको मेंब्रेन को आपने क्लीन किया और ज्यादा ब्लॉकेज हो जाएगी। तो अगर आप कोलेस्ट्रॉल को कम नहीं करते हो, खाना-पीना नहीं चेंज करते हो और सिर्फ डिटॉक्स करते हो, काम नहीं, उल्टा कर लेगा। तो यू हैव टू नो, लाइफस्टाइल रिवर्स कर रहा है, वो फैसिलिटेट कर रहा है। सो ब्लड कोलेस्ट्रॉल को एक सिंपल से लिपिड टेस्ट से मालूम पड़ जाएगा, पता चल जाएगा। हमें 130 रखना है, ट्राइग्लिसराइड्स 100 रखना है और खाने में सप्लाई बंद करना है, रिवर्सल प्रोसेस ऑन हो जाएगा। एंड इफ यू कंट्रोल ऑल द फैक्टर्स, रिवर्सल चलता रहेगा। आपका एक जादू डाइट है जिससे वेट जादू से कम हो जाता है तो डाइट क्या है, जरा बताना?

देखिए, बहुत सिंपल सा कंसेप्ट है, इसमें देखिए हमारा स्टमक इतना सा है, इसमें खाना भरेंगे। इसमें अगर हाई कैलोरी फूड भरेंगे तो वजन बढ़ जाएगा, हम लो कैलोरी भरेंगे, पेट तो भर जाएगा पर कैलोरीज नहीं जाएगी। तो जादू डाइट में हम लोग क्या करते हैं, एक सिलेक्शन ऑफ लो कैलोरी फूड देते हैं। अच्छा, कोई को भूखे रखो ना, वो शाम तक सारा खाना खा लेता है, जितना चाहिए वो जो सामने मिलता है खा लेता है। शाम तक इतनी भूख लग जाती है, हम लोग बोलते हैं भूखे रहो ही मत, पेट भर के खाओ और ये कम कैलोरी वाला खाओ। तो कम कैलोरी वाले बेसिकली क्या है? फ्रूट्स, वेजिटेबल, सलाद। हम लोग उनका एक डाइट बना के दिए, जादू डाइट में। ब्रेकफास्ट में ये खाओ, लंच में ये खाओ, डिनर में ये खाओ, बस पेट भर के खाओ। इन बिटवीन ये-ये खा सकते हो, 10 बार खाओ, पेट भरे रहो पर लो कैलोरी से भरेगा और धड़ाम से वजन कम होती है। इसको जादू डाइट बोलते हैं। एक महीने में 7 किलो एश्योर्ड है और पैसा कुछ नहीं लगना है। तो मेरे पास अभी ये जो मेरी जादू डाइट की वीडियो, YouTube पे लाखों लोगों की कमेंट देखें, मैंने 10 किलो, मैंने 15 किलो, मैंने 20 किलो। कुछ नहीं करना है आपको सिर्फ खाने में पेट भर के खाना है, जितनी मर्जी खानी है पर खाना लो कैलोरीज है, वो लो कैलोरीज क्या-क्या उसमें हमने दिखाया हुआ है। बेसिकली फ्रूट्स से ब्रेकफास्ट, जूस पियो, जब भी चाय-वाय पियोगे तो उसमें कैलोरीज ना हो, मतलब दूध ना हो और ब्लैक टी पियो, उसमें सैकरीन, शुगर फ्री दे सकते हो और उधर आप लंच में दाल में बहुत सारे कचूमर लेके खाओ, दाल में गरम-गरम दाल लो, उसमें खीरा, गाजर, कचूमर, काल के व पूरा कटोरी खा लो और उसे प्रोटीन भी मिल जाएगी और शाम को सूप और सलाद और बॉयल्ड वेजिटेबल। ये आप एक महीना खाओ, ये जिंदगी भर के लिए नहीं है, एक-दो-तीन महीने में आपके 10-15 किलो जो गिरना है गिर जाएगा, 20 किलो गिर जाएगा। अभी एक लेडी आई थी कलक में, शी वाज़ 86, नाउ 62। ओ हो, वो जस्ट बोलती है मैं जादू करते रही अपने आप, अच्छा, पेट भर के खा रही हूं, वजन गिरते जा रहा है। तो इट्स अ जादू डाइट, इट वर्क्स वेरी वेल। आप ट्राई करके देखो, इट वर्क्स वंडरफुल। सो बहुत जल्दी कैलोरी डेफिसिट क्रिएट हो जाता है बिकॉज़ हमारे स्टमक में मैकेनिकल क्या बोलते हैं, वॉल्यूम रिसेप्टर्स होते हैं, राइट? तो उसके वजह से उनको ऐसा लगता है कि खाना तो खा लिया, पेट सेटी फील आ जाती है बट एट द सेम टाइम कैलोरीज आपको मिल नहीं रहे, राइट? राइट? सो ये बहुत अच्छा कांसेप्ट है। सो थैंक यू सर, आपने बहुत सारे इनसाइट शेयर किए रिगार्डिंग हार्ट हेल्थ एंड हार्ट अटैक्स एंड हाउ टू प्रिवेंट देम। सो बहुत ही इनसाइटफुल पॉडकास्ट था एंड होपफुली एक और एक कन्वर्सेशन इसी विषय पर हम लाएंगे बहुत जल्द। थैंक यू सो मच फॉर शेयरिंग ऑल दिस वंडरफुल डिटेल्स विद आवर मेंबर्स एंड विद आवर ऑडियंस। एनी मैसेज दैट यू वुड लाइक टू गिव? लास्ट मैसेज?

मैं सभी को यही मेसेज दूंगा कि आप हार्ट की बीमारी के लिए चिंता नहीं करने की जरूरत है, आपको खाली नॉलेज इकट्ठा करना है, क्या ठीक है क्या गलत है। अगर ठीक-ठीक आप करते रहोगे, 80 परसेंट भी फॉलो करोगे तो यह प्रिवेंशन हो जाएगा। अगर हो चुका है हार्ट की बीमारी तो भी लेट नहीं है, आप 100% फॉलो करो तो रिवर्सल होगी। ओके? तो प्रिवेंशन और रिवर्सल के डिफरेंस समझिए। अगर आप डोज बढ़ाओगे तो रिवर्सल होगा, डोज थोड़ा 80 परसेंट लेवल में रखोगे तो कभी-कभी थोड़ी-बहुत खाली इधर-उधर। बट अगर 80 परसेंट भी फॉलो करोगे हमारी बातों को तो ब्लॉकेज बढ़ेगी नहीं, प्रिवेंशन है और रिवर्सल के लिए 100% करना पड़ेगा। एंड एनी टाइम यू नीड एनी ऑफ माय हेल्प, वी आर देयर। थैंक यू सो मच। हमारी पूरे इंडिया भर में 110 सिटी में क्लीनिक है, हमारे वेबसाइट sawal.com में जाइए, सारी डिटेल मिल जाएगी और मुझे ऑनलाइन कंसल्ट भी कर सकते हो आप हमारी वेबसाइट में जाकर, आप बटन दबाइए ऑनलाइन कंसल्टेशन एंड यू कैन टॉक टू मी डायरेक्टली।