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Srila Haridas Thakur - Drama

ISKCON BHOPAL1:20:09

Transcription

अजय को [संगीत] कि अभिषेक [संगीत] दिल धड़के तेरे [संगीत]। नमाम विष्णु बुद्धाय कृष्णा प्रस्ताव आया भूत अमेज़ श्रीमते भक्तिवेदांत स्वामी ना मिलने नमस्ते सारस्वत कि देवेगौड़ा वाणी प्रचारिणी [संगीत] निर्विशेष शून्यवादी पाश्चात्य देश अदाणी श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानंद झा लिए याद विदग्धा राशि वाले साधु भक्तवृंद झाल हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।

अधिकतर लोग सोचते हैं कि मुक्ति का रास्ता कोमल पुष्पों से ठगा हुआ है। अंधविश्वास, अनुशासन हीनता, मनमौजी व्यवहार, भावुकता को भक्ति के साधन समझने लगते हैं। परंतु शास्त्र और आचार्यगण समझाते हैं, यद्यपि प्रामाणिक भक्ति पथ से ही जीवन की सिद्धि संभव है, लेकिन भक्ति का रास्ता विषैले कांटो से भरा हुआ है। और विशेषतया कलयुग में यह रास्ता लाखों-करोड़ों पांचों से रहा है। इन कटुओं को हटाने के लिए भक्त निर्भय होकर उत्साह से हमेशा तत्पर रहते हैं, जब कि वह जानते हैं कि ऐसा करते हुए उनके हाथ में क्षति पहुंच सकती है। और तुम शुरू, आप जो झाड़ियों के पीछे छिपे हैं, उन्हें काट सकते हैं। बाद में आने वाले पति को कोई समस्या ना हो, इसलिए भक्तों द्वारा काटो और कृषि सांपों को हटाने में उत्साह और प्रयास दिन-प्रतिदिन बढ़ता चला जाता है।

आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में हम एक महान भक्त, नाम आचार्य श्री हरिदास ठाकुर, के चरित्र लीलाओं पर आधारित नाटक प्रस्तुत करने जा रहे हैं। आज से लगभग 500 वर्ष पूर्व स्वयं भगवान श्रीकृष्ण, श्री चैतन्य महाप्रभु, पश्चिम बंगाल के नवदीप मायापुर ग्राम में अवतरित हुए थे। उनके साथ साथ अन्य पार्षदगण भी वाहन के आंदोलन में सहभागी बनने के लिए अवतरित हुए। उनमें से एक भक्त, नाम आचार्य श्री हरिदास ठाकुर, थे, जिन्होंने एक मुस्लिम परिवार में जन्म लिया, परंतु वह बचपन से ही भगवान श्री कृष्ण के शुद्ध भक्त थे। वह प्रतिदिन भगवान कृष्ण के तीन लाख नाम का जप करते थे। उनके जीवन में बहुत सी विपदाएं, कठिनाई आई, परंतु हरिदास ठाकुर जी ने कभी हरि नाम लेना नहीं छोड़ा। अजय को कि अ [संगीत]।

शीला हरिदास ठाकुर पूरे पश्चिम बंगाल के कोने-कोने में जाकर हरिनाम का प्रचार करते थे। परंतु उनके प्रचार से वहां के मुस्लिम शासकों को बहुत चिंता होने लगी। जब उन्हें पता चला कि हरिदास भी एक मुस्लिम परिवार से हैं, तब वह और ज्यादा आग बबूला हो उठे। कर दो।

हरिदास! हरिदास! हरिदास! जहां देखो वहां हरिदास! इसने हमारे मजहब का नाम खराब कर दिया है। मुस्लिम परिवार में जन्म लेने के बाद भी इसने अपना नाम बदलकर हरिदास रख लिया। यह हमेशा हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, हरे कृष्ण का जप करता रहता है। ऐसा करने से वह हिंदू बन जाएगा।

जमींदार जी, ऐसा करने वाला वह अकेला नहीं है। इसके जैसे ही यौवन कुल में जन्मे हुए सभी लोग अब हरी नाम का जप करते रहते हैं। ब्राह्मण परिवार वाले काफी लोग अब हरिदास के दास बन गए हैं। वह एक अयोग्य व्यक्ति है। स्वयं को प्रसिद्ध करने के लिए ढोंग कर रहा है।

क्या करें, रामचंद्र जी? हरिदास का अनुसरण करने वाले हमारे नगर में बहुत लोग हैं, और उसका कारण हमारे हिंदू काफी हैं, जो विश्वास करते हैं कि वह हिंदू है। लेकिन हरिदास एक धोखेबाज है। उसकी रगों में एक मांसाहारी का लहू है, क्योंकि जन्मजात वह मुसलमान है, और वह कैसे एक दूल्हा बन सकता है? यदि हम ऐसे ही चुप रहेंगे, तो आगे जाकर हमारी जिम्मेदारी, बुद्धि और संपत्ति दोनों हमारे हाथ से निकल जाएंगे। यह व्यक्ति भविष्य के लिए बहुत ही घातक सिद्ध हो सकता है।

तो खान जी, उसके लिए हम कल कह सकते हैं कि उसके ढोंग को हमें सिद्ध करना होगा। जो उसका सम्मान करते हैं, उसका अनुसरण करते रहे हैं, उन्हीं के हाथों से उसे इस नगर से धक्के मार के निकालना होगा।

जो आप कह रहे हैं, बस सुनने में तो अच्छा लग रहा है, लेकिन क्या यह संभव है?

जमींदार जी, आपसे मिलने के लिए एक महिला आई है। वह अपना नाम पद्मिनी बता रही है।

उसे अंदर भेज दो।

जैसी आपकी आज्ञा है। [हंसी]।

जब, वक्त, तुम पूछ रहे थे ना, यह कैसे संभव होगा? अब देखो, यह असंभव कार्य केवल पद्मिनी ही पूरा कर पाएगी।

पद्मिनी कौन है?

वह है कि मेनका विश्वामित्र जैसे तपस्या को अपनी सुंदरता से कामुक बनाने वाली मेनका है। वह सिर्फ हमारी नगर में नहीं है, आसपास के 24 नगरों में अकेली सिर्फ यही एक बंदर की प्रतिमा है। अ यह जैसे खत्म हो देखकर एक विशाल हाथी बेकाबू हो जाता है, उसी तरह पद्मिनी को देखकर हरिदास, पद्मिनी दास बन जाएगा। वह एक दक्ष नृत्यांगना है। ढोंगी पुरुषों को वश में करना उसके लिए बाएँ हाथ का खेल है। इस विषय के द्वारा हम उस ढोंगी हरिदास का नकाब उतार देंगे।

परंतु यह भी हो सकता है कि वह वेश्या हरिदास ठाकुर की भक्ति से प्रभावित हो जाए और स्वयं हरि नाम लेने लगे।

साथ ही, यह कदापि नहीं हो सकता है, शर्मा। हम उसे मन चाहा उपहार देंगे, जिससे वह अपने लक्ष्य से कभी भी पीछे नहीं हटेगी।

ओह, इसका अर्थ है वह एक बिकाऊ है। मैंने सही कहा ना?

अपनी जिव्हा पर नियंत्रण रख दीजिए। मैं कोई वस्तु नहीं, जो कुछ सोने के पड़कर यह बिक जाए। मैं अमूल्य हूं। मेरे मूल्य का कोई नहीं कर सकता। मैं इसका निर्णय स्वयं करती हूं।

क्यों जमींदार जी, लगता है इस नगर में मैंने यह पहले कभी नहीं सुनी। इनका नाम शर्मा है, इस नगर के उम्मीदवारों में से एक है। आसपास के सभी उम्मीदवारों से भली-भांति परिचित हो, क्योंकि तुम्हारे घर के आसपास मंडराते हैं। लेकिन यह वैसे नहीं है। नियमों और स्त्रियों को देखकर यह विचार रखते हैं। [हंसी]।

ऐसा कुछ नहीं है मेरे अंदर। थोड़ा सा वास्तव में एक महान पराक्रमी थे।

तो बस कीजिए प्रारंभ की कहानियां बताइए। आज की कहीं तूफान।

मैं बताता हूं, बताता हूं। इधर यहां तो आकर बैठो, पद्मिनी। तुमने कई बार अपने सौंदर्य की परीक्षा दी है, और सभी में तुमने विजय प्राप्त की है। परंतु आपकी बार यह सिर्फ सौंदर्य की परीक्षा ही नहीं है, एक अग्नि परीक्षा भी है, जिसमें तुम्हें अत्यंत सावधानी से विजय प्राप्त करनी होगी।

आप मुझे यह बताइए कि अपने जाल में फंसाना किसे है? [संगीत]।

इसके पश्चात् मैं देखूंगी कि अग्निपरीक्षा मेरी है या फिर उसकी। उसका नाम हरिदास है। वह जन्म से मुसलमान है, परंतु एक वैष्णव की वेशभूषा धारण करके वह हरि नाम का जप करते हुए लोगों को धोखा दे रहा है। तो मैं तो बस अपने सौंदर्य जाल में उसे फंसा कर उसको अपना प्रेमी बनाना है, जिससे उसके अनुयायियों को एक सबक मिल सके। और हां, एक मुख्य विषय यह है कि वह एक नवयुवक है। [संगीत]।

इतना मेरे लिए पर्याप्त है। वह तो मुझे देखते ही दुर्बल हो जाएगा मेरे सौंदर्य से। मैं इसे अपना दास बना दूंगी। [हंसी]।

स्वास्थ्य मंत्री ए.ए. कि हरिदास को बंदी बनाने का कार्य मैंने चंपा, रूपवती, शुक्राचार्य थे सुंदरियों को धोखा, परंतु वे दोनों भक्ति हरिनाम कहकर यहां से भाग गई। मैंने सोचा कि तुम भी वैसे ही भाग जाऊंगी, परंतु तुम तो बहुत ही बुद्धिमान और पराक्रमी हो। तुम्हारा आत्मविश्वास है तो हर्बल है। इस अद्भुत कार्य के तुम्हें कितने स्वर्ण के पड़ चाहिए, बोलो?

मैं पहले यह कार्य पूरा करूंगी, बाद में उपहार लूंगी।

ठीक है, ठीक है। यह बताओ, तुम अपना कार्यक्रम कब शुरू करोगी?

आज ही शुरू करूंगी। हरिदास नाम आज ही लुप्त हो जाएगा।

कैसे?

वह पद्मिनी का दास बन जाएगा। इस पर...

आज बहुत खान जी, अद्भुत! हरिदास को पराजित करने के लिए आपने का बोधक शब्द का प्रयोग किया है। आज के पश्चात वह सदैव के लिए विलुप्त हो जाएगा।

यह शर्मा, जैसे ही पद्मिनी हरिदास को अपने चंगुल में फंसा लेती है, तुरंत हमारे सिपाही हरिदास को रंगे हाथ पकड़ लेंगे और बंदी बना लेंगे, और समस्त जनता के सामने उसका वास्तविक चरित्र प्रकट कर देंगे। का यह अ [संगीत]।

[संगीत] हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। घड़ी हरे राम हरे राम राम।

कैसा आश्चर्य! पायल की झंकार से पुरुषों के हृदय में प्रेम उत्पन्न हो जाता है। मेरे केशों की सुगंध से वे भ्रम में पड़ जाते हैं। परंतु हरिदास एक चट्टान जैसे स्थित है। तुम्हें कैसे अपने वश में करना है, मैं अच्छी तरह से जानती हूं। अब देखना यह है कि मेरे गुरु हैं तुम्हारा नाम। अ [संगीत] है [संगीत] लेकिन ता ता ता ता चिंता ता ता [संगीत] चिंता ता चिंता ता चिंता ता धिन ताना धिन ताना धिन धा त्रक एग्जाम है के बाद विड्रा तांत्रिक डू धुंध के साथ सारे तांत्रिक दाग पिंपल तथा एक तथा एजुकेशन नेता निशान झाल और सुनाओ अजय को [संगीत] [संगीत] कर दो श्रवण लुट प्रॉब्लम है झालर झालर क्षमता [संगीत]।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। मीडिया आश्चर्य की बात! आखिर भूकंप से चट्टान गिरने लगती है। राम तो हरिदास का ध्यान में तनिक भी नहीं भटका पा रही हूं। लगता है यह ऐसे नहीं मानने वाला। कांटे को कांटे से निकाला जाता है। उन्हीं के रास्ते पर चलकर उन्हें फंसाना होगा। उर्स ई और हरे कृष्णा चाहिए आपको हरिदास ठाकुर।

आप महान प्रचारक और भगवान कृष्ण के परम भक्त हैं। आपकी ख्याति मैंने चारों ओर सुनी है, तो मैं आपके दर्शन के लिए यहां आई थी। आप यहां पर जप कर रहे थे, तो आपका मेरी ओर ध्यान केंद्रित करने के लिए मैंने नृत्य किया। तब आपने अपनी आंखें नहीं खोली, परंतु जब मैंने हरे कृष्ण बोला, तुरंत आपने खोली, और अभी आप पूछ रहे हैं कि मुझे क्या चाहिए।

मुझे आप चाहिए।

मैं समझा नहीं, माता। माता, यह देखिए कि कीजिए, यह मुझे प्रिय नहीं है।

अच्छा ठीक है, परंतु क्या आप मुझे यहां आने का कारण बताएंगी?

अच्छा, समझाती हूं। मैं यहां आई तो आपकी नव यौवन को देखकर आश्चर्यचकित रह गई। आप जैसे सुंदर युवा को मैंने अपने हृदय में बंदी बना लिया है। भला कौन ऐसी मूर्ख स्त्री होगी जो आपको देखकर कामातुर ना हो? आज से और अभी से मैं आपकी दासी बन गई हूं। मैंने खुद को आपके लिए समर्पित कर दिया है। यौन के आनंद को रोकने के बजाय क्यों नाम के जप से अपने मूल्यवान जीवन को नष्ट कर रहे हैं? आज से हम दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। हम अपना शेष जीवन सुखपूर्वक आज रात्रि की शुभ वेला में हम दोनों मिलकर पूरी तरह से यौन पर सुख भोगेंगे। अब तनिक भी देर मत कीजिए। मेरी इच्छा को पूरा कीजिए, अन्यथा मैं अपना जीवन समाप्त कर दूंगी।

मेरी परीक्षा ले रहे हो आप? क्या सोच रहे हैं आप?

कुछ नहीं। मैंने अपने गुरु को वचन दिया था कि प्रतिदिन हरे कृष्ण महामंत्र का जप करूंगा। वह जप मैंने अभी तक पूरा नहीं किया। जैसे ही मेरा जप पूरा हो जाता है, मैं आपकी इच्छा को पूर्ण करूंगा।

अच्छा ठीक है, परंतु आपने अपने गुरु को कितनी माला जप करने का वचन दिया था?

ज्यादा नहीं, बस प्रतिदिन 3 लाख बार।

तो क्या आप प्रतिदिन 3 लाख नाम का जप करते हैं? अब मुझे चक्कर आ रहा है। आप अपना पूरा करेंगे और मेरी इच्छा पूर्ण करेंगे।

चिंतित मत हो। बस और थोड़ा समय शेष है, फिर मेरा जप पूरा हो जाएगा। उसके पश्चात् मैं आपकी इच्छा को पूर्ण करूंगा। मुझे नारी के साथ छल करना आपको शुभ नहीं रहेगा। यदि आप ऐसा नहीं होगा, तब तक आप यहां बैठकर मेरे इस महामंत्र को कृपया ध्यान से सुनिए।

हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्ण राधे राधे तुम्हारे डुब। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम। हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। कर दो।

अब तक आपने अपनी जप को पूरा नहीं किया। यह देखिए, सुबह हो गई है।

मुझे क्षमा कीजिए। कल रात्रि मैं आपकी इच्छा को पूर्ण नहीं कर पाया।

मैंने सोचा था, वैसा ही हुआ। यदि आपने मेरे साथ छल किया है?

नहीं, नहीं, मेरा उद्देश्य आपके साथ छल करना नहीं था। चिंतित मत हो आप। आज रात्रि को आइए, मैं अवश्य आपकी इच्छा को पूर्ण करूंगा।

तो ठीक है, अब हमारा मिलन आज रात्रि को होगा। है कि अ [संगीत]।

आफत बन जाओ! क्या सोच रही हो? क्या वह ढोंगी हरिदास तुम्हारे जाल में फंसा नहीं?

कल योजना मैंने बनाई थी, वह विफल हो गई। हरिदास ने जप को पूरा करने का वचन दिया था, लेकिन सुबह हो गई, उसका जप भी पूरा नहीं हुआ। मैं कब तक उसकी प्रतीक्षा करती? तो मैं सो गई। रखते रहेगी।

मैंने तो पहले ही चेतावनी दे दी थी, यह तुम्हारे लिए एक अग्निपरीक्षा होगी। वह बहुत बड़ा धूर्त है। कटी, मैं तुम्हें दिखाऊं कैसे उसने बड़ी ही चालाकी से तुम्हें धोखा दे दिया था।

ओह नहीं, नहीं, अगर ऐसा होता, तो वह क्यों मुझे आज रात को अपने पास बुलाता?

आ हा! उस पर तुम्हें अपने समक्ष बुलाया है। का खेड़ा! तुम पकड़े गए, हरिदास! अर्थात तुम्हारी योजना पूरी न सही, आधी तो सफल हो गई। बस आज रात्रि उसे पूरा सफल कर देना।

लेकिन आप चिंता मत कीजिए। आज रात्रि मैं पूरी सफलता के साथ लौटूंगी। मेरी ओर तुम्हें ढेर सारी शुभकामनाएं। विजयी होकर लौटो। [हंसी] बहुत।

तुम्हारे प्रशंसकों को तुम्हारे ऊपर कालिख पोतने में ज्यादा समय शेष नहीं है, हरिदास। अब तुम्हारी हार निश्चित है। अ [संगीत]।

[संगीत] हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। [संगीत]।

आप क्या कर रहे हैं? आज प्रातः काल आपने कुछ कहा था, क्या हुआ, भूल गए? अभी भी आप अपने जप में व्यस्त हैं।

मैं क्या करूं? मैं असहाय हूं। मैं कितना भी प्रयत्न कर लूं, लेकिन उत्साहित होकर तेजी से जप नहीं कर पा रहा हूं। क्या आप मेरी एक सहायता कर सकती हैं? आज आप भी मेरे साथ हरे कृष्ण महामंत्र का जप कीजिए। बस और थोड़ी ही गिनती बाकी है। अगर आप जप करेंगी, तो आपके साथ मिलकर मैं भी तेजी से जप कर सकूंगा। उसके बाद आप जो चाहेंगी, वह होगा।

ठीक है, ठीक है। [संगीत] यह बताइए कि इस महामंत्र का उच्चारण कैसे करते हैं?

मैं अभी आपको दिखाता हूं। कृपया करके बैठ जाइए। ध्यान से सुनिए: हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे।

बस इतना सा ही? अरे, यह तो बहुत आसान है!

यही इस महामंत्र की विशेषता है। चलिए, अब जप शुरू करें। और हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। और हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम श्री राम राम हरे हरे। हरे [संगीत] कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे। [संगीत] अच्छी तालीम श्री राम राम हरे हरे। यह पृष्ठ श्री कृष्णा जी।

क्या हुआ? आप क्यों रो रही हो?

मुझे क्षमा कीजिए, प्रभु, मुझे क्षमा कर दीजिए। आपकी महान कृष्ण भक्त को जाने बिना मैंने बहुत बड़ा अपराध किया है। मेरा जीवन एक वेश्या के रूप में कट गया, जिसमें मैंने अनगिनत पाप किए हैं। और आप जैसे महान भक्त को पथभ्रष्ट करने का प्रयास किया है। मैंने बहुत जघन्य अपराध किया है। उस दुष्ट रामचंद्र खान की बातों में आकर, कुछ उपहार के बहकावे में, मैंने आपकी सर्वदृष्टि एवं बड़ी कृष्ण भक्ति को कम करने का प्रयत्न किया। परंतु आपने मुझे इस अमूल्य हरे कृष्ण महामंत्र का उपदेश देकर साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का मीडिया में दर्शन करवाया है। इस महापापिनी के ऊपर भी आपने अपनी दया दृष्टि की है, प्रभु जी। आज मेरा दिन तो आपकी कृपा से प्रकाशित हो गया है। इस मूढ़ संसार की पीड़ाओं से मेरी रक्षा कीजिए, स्वामी, मेरी रक्षा कीजिए, स्वामी, मेरी रक्षा कीजिए। अ।

मुझे रामचंद्र खान के षड्यंत्र के बारे में अच्छी तरह से ज्ञात था। इसलिए उसके षड्यंत्रों से मैं तनिक भी विचलित नहीं हुआ। जब आप इधर पहले दिन मुझसे मिलने आई थी, तभी मैं यहां से जा रहा था।

सकता था है, परंतु सबके हृदय में परमात्मा के रूप में वास करने वाले भगवान श्रीकृष्ण से मैंने आज्ञा मांगी कि हरे कृष्ण महामंत्र के दिव्य परम आनंद की अनुभूति मैं आपको कराऊँ। उनकी आज्ञा के अनुसार, प्राथमिक दो दिनों में मैंने हरे कृष्ण महामंत्र का आपके सामने जप किया और आज मेरे साथ उस मंत्र का जप से करवाया। जिस तरह एक रोग ग्रस्त व्यक्ति अगर बिना विश्वास के औषधि का सेवन करता है, तो भी औषधि अपना कार्य अवश्य करती है, उसी तरह आपके कानों में हरे कृष्ण महामंत्र की जो ध्वनि गई है, उसने आपकी चेतना, दूषित मन एवं सारे अनर्थों को दूर करके आपको पवित्र कर दिया है। तो यही हरे कृष्ण महामंत्र की महिमा है।

हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे।

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।

आपने सत्य कहा प्रभु। आपके मुंह से निकले हुए महामंत्र को मैं दो दिनों से सुन रही थी। आप जैसे पवित्र भक्तों का मिलने के कारण जीवन का वास्तविक अर्थ समझ पा रही हूँ। कृपया मुझे अपने शिष्य के रूप में स्वीकार करिए और मुझे दे दीजिए। इस अवधि के रोग से बचने का क्या उपाय है? कृपया मार्ग प्रशस्त करें प्रभु।

मैं सर्वप्रथम आप अपने पाप कर्मों से संचित किए हुए धन को भगवान की सेवा करने वाले ब्राह्मणों और वैष्णव व को दान दे दीजिए और उसके पश्चात हरे कृष्ण महामंत्र का प्रतिदिन जप कीजिए और यहां पर इस तुलसी महारानी को प्रणाम और प्रदक्षिणा कर उसकी पूजा कीजिए। तो इस तरह से आप शीघ्र अति शीघ्र भगवान के चरणों की शरण ले पाएंगे।

भक्तवत्सल भगवान श्रीकृष्ण आपके समस्त पापों को क्षमा करके आपको इस जन्म-मृत्यु के भवसागर से मुक्त कर देंगे और वह आपको अपने साथ गोलोक धाम भी जाएंगे। जिसने भी वास्तव में परिणाम की शरण ली है, उसकी रक्षा भगवान श्रीकृष्ण ने अवश्य की है।

जैसी आपकी आज्ञा प्रभु। कृष्णमूर्ति रस तू तू का नाम आचार्य श्री हरिदास ठाकुर की कृपा से उस वेश्या का हृदय परिवर्तन हो गया कि अब वह भी हरिदास ठाकुर का अनुसरण करते हुए हरिनाम का 3 लाख बार नाम जप करने लगी। उसने अपने सारे जेवर गहने ब्राह्मणों को दान में दे दिए और अपने सर के बाल मुड़वाकर वह सादे सफ़ेद साड़ी पहनकर नित्य हरिदास ठाकुर जी की कुटिया में बैठकर जप करती। उस वेश्या का उद्धार करने के पश्चात ठाकुर जी शांति नगर की ओर प्रस्थान किए। वहां के प्रबंधक काजी नाम आचार्य के यहां आने से बहुत अप्रसन्न न थे। वे शहंशाह के दरबार में जाकर हरिदास ठाकुर जी की शिकायत करने पहुंच जाते हैं।

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

आओ का ब्याव पूरे नजदीक के संचालक और पूर्व वजीर लगता है आज पहली बार हमारे दरबार में तशरीफ रख रहे हैं। हां जी, शहंशाह आपने मुझे पश्चिम बंगाल में प्रबंधक के पद पर नियुक्त किया है।

जिसे निभाना मेरा फर्ज है। हुजूर, मैं अपनी जागीरदारी के कामों में मशगूल था, इसलिए इतने दिनों बाद आज हाजिर हुआ। ऐसी कौन सी आफत आ गई है जिससे आपको यह तकल्लुफ करना पड़ा?

इस तकल्लुफ के लिए माफी, जहांपना। आफत इतनी नहीं है जितना हम उसे समझ रहे हैं, लेकिन एक मुजरिम के साथ खड़ा मुकदमा होना चाहिए। वह आत्मा कौन है? वह मुझे इस बंगाल में किसने हमसे गुस्ताखी की है? और बताओ जी, बताओ।

टूटना गांव से शांतिपुर इलाके में हरिदास नाम का एक शख्स है। मुझे बड़ी हैरानी हुई जब मुझे अपने मुलाज़िम पता चला कि हरिदास पैदाइशी एक मुसलमान। क्या जब उसका नाम मैरी 10 है, तो वह मुसलमान कैसे हो सकता है? मेरे खबरी ने मुझे बताया कि हरिदास नाम उसके हिंदू गुरु निरख बल्कि वह यौवन खानदान में पैदा हुए।

या अल्लाह! उस फकीर ने अपना मजहब क्यों बदल लिया? ताज्जुब है कि नवाब है यह वंश का, फिर को फकीर का दर्जा हर बार है। डुबो, उससे हमारे पास इस्लाम मजहब का मजाक बना दिया है। वो बहुत लाचार, कमजोर हिंदू मजहब का पैरोकार बना हुआ है। वह फिर नहीं, हमारे मजहब के अनुसार पांच बार नमाज पढ़ता है और नाखून पड़ता है। जब देखो हरे कृष्ण हरे कृष्ण करते चिल्लाता रहता है। उसका इंसाफ व अल्लाह ताला जरूर करेंगे। वह इसका नतीजा कर उठेगा।

उसके बारे में जिक्र करना छोड़ दो। नहीं, हुजूर। यह मुजरिम हरिदास पूरे नवद्वीप के लिए बड़ा खतरा बन गया है। हिंदुओं के बीच अपना नाम शोहरत कमाने के लिए वह साधु बनकर ढोंग कर रहा है। लेकिन इससे ज्यादातर हिंदू ब्राह्मण लोग ही इसका विरोध कर रहे हैं। वे लोग कहते हैं कि यह उनके मजहब का अपमान कर रहा है। उनका मानना है कि भगवान का नाम केवल हिंदू ही नहीं सकता है। यवन और मलेच्छों को इसका अधिकार नहीं है।

मुझे हिंदुओं से कोई शिकायत नहीं है। अगर हरिदास उनके मजहब का अपमान कर रहा है, तो हमें तो उसे खुशी-खुशी इनाम देना चाहिए। सदा नहीं है, उससे हमारे मजहब का भी नुकसान है। ऐसा अगर हमने उसे सजा नहीं दी, तो हमारे मुसलमान भाई भी उसकी बातों में आकर हिंदू मजहब में धर्मांतरण कर लेंगे। उसके बाद पूरे पश्चिम बंगाल में हरिदास का ही नाम होगा। सिर्फ यही नहीं, आवाम को इकठ्ठा करके वह हमारे खिलाफ बगावत कर सकता है और आपकी रियासत को कब्जे में ले सकता है। नव, आप यह हमारे सारे मंसूबे में पानी फेर देगा। इसका जल्द से जल्द खत्म किया जाना चाहिए।

तो क्या उसमें इतनी हिम्मत है? तो अब हमें क्या करना चाहिए? वजीर को मजबूर वक्त, आप एक अब से अल्लाह ताला ने आपको वहां बुलंद विपक्षी है। वह बुलंद विपक्षी है। आप एक क्या, सैकड़ों हरिदास कुचलकर हमारे मजहब को बचा सकता है। कहां है वह दास? उसको तुरंत दरबार में पेश किया जाए। हम जल्द से जल्द उसका इंतजाम करते हैं।

मुझे ना चीज के होते हुए आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। रूप, मेरे मुलाज़िम अभी हरिदास अपनी हिरासत में लेकर नवाब वे जीवन के सामने पेश करें। जल्दी लेकर आओ उसका फिर को।

[संगीत]

इस भौतिक जगत में हर व्यक्ति के अंदर कुछ ना कुछ इच्छाएं रहती हैं, जैसे अपना नाम, धन, प्रतिष्ठा, आ पुत्र, सुंदर पत्नी, घर द्वार आदि। वह पाना चाहता है। ऐसे इच्छाएं उनके सुख और दुख का कारण बनती है, परंतु उनकी संतुष्टि का कारण नहीं। हर व्यक्ति संतुष्टि चाहता है, परंतु माया के प्रभाव में बहुत दुख, कष्ट, आखिरी भोगता रहता है और सोचता है वह सुखी और संतुष्ट है। यह क्षणिक सुख हमारे स्वप्न के समान है, जो आंख खुलते ही नष्ट हो सकता है।

इसलिए हर जीव मात्र का कर्तव्य है कि वह भगवान श्रीकृष्ण की सेवा करें और उनके शरणागत हो जाए। क्योंकि हमें बड़ा ही दुर्लभ मनुष्य यह प्राप्त हुआ है कि जन्म-जन्मांतर के बाद इस मनुष्य जीवन में हम भगवान को समझ सकते हैं और उनसे अपना नित्य संबंध कृष्ण दास के रूप में उन्हें प्राप्त कर सकते हैं। यह बहुत कठिन नहीं है, अपितु सरल। आप सभी मेरे साथ उच्चारण कीजिए:

हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे।

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।

इसे प्रतिदिन ध्यान पूर्वक जप कीजिए। हरिदास जी, क्या इसके लिए हमें अपना धर्म जाति बदलना पड़ेगा? त्यौहार जी, हां। बताइए हरिदास जी, बताइए। नहीं-नहीं। देखिए, भगवान श्रीकृष्ण की सेवा करने के लिए हमें अपनी जाति धर्म परिवर्तन करने की कोई आवश्यकता नहीं। हम किसी भी धर्म या मजहब में रहकर अपने स्वधर्म का पालन कर सकते हैं।

जैसे हमें अपने राजा की आज्ञा पालन करने के लिए अपना देश, जाति, धर्म, व परिवार का त्याग नहीं करना पड़ता, ठीक उसी प्रकार भगवान की सेवा के लिए हमें धर्म आदि परिवर्तन करने की कोई आवश्यकता नहीं। आप किसी भी काल, समय और इसी में रहकर हरि नाम का निरंतर जप कर सकते हैं।

पकड़ लो उसका फिर हरिदास को। यह हमारी आवाम को भड़का रहा है। यह हमारे मजहब के लोगों को हिंदू बना रहा है। भरोसे छोड़ने, छोड़ दो, रोष है कि गुना नेवर ओड ओर। उन्होंने कभी हमसे अपना मजहब बदलने के लिए नहीं कहा था।

फोड़ दो, बजे मुझे छोड़ दो। ने अ

शुरू भाइयों, हम सबको नव आपके पास जाना चाहिए और उन्हें बताना होगा कि हरिद्वार में रोष है।

[संगीत]

को

[प्रशंसा]

मजबूर, हमने उसका सिर को जंजीर में चतुर्थ हिरासत में ले लिया। उसे हमारे दरबार में पेश किया जाए।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।

हरे कृष्ण हरे राम बनकर रह जाएगी हरिदास। हमने सुना है तुम्हारा जन्म एक मजहबी पाप खानदान में हुआ था, तो फिर क्या वजह है कि तुमने मजहबी उसूलों के खिलाफ हरि नाम लेना शुरू कर दिया? क्या रखा है उसको? हिंदू धर्म में हमारा मजहब सबसे ऊंचा है और ताकतवर है। हमें एक खुदा ने असीम रहमत फरमाई है। जरा देखो खुद को कैसे भिखारियों की तरह के लिए बना रखा है। छोड़ दो हरी नाम को, वापस हमारे मजहब को स्वीकार कर लो।

मजहब है कि मजहब का वास्तविक अर्थ क्या है? हम कहीं जन्मों और काल से भगवान से अपने नित्य संबंध को बुलाकर बैठे हुए हैं।

और उसे उन्हें प्राप्त कर भगवान से प्रेम करना तथा उनकी सेवा करना ही एक अच्छे मजहब या धर्म का उद्देश्य है। शास्त्रों में वर्णन है कि प्रश्न ही पूर्ण पुरूषोत्तम भगवान हैं। अतएव उनसे प्रेम करना ही हमारे जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य। भगवान हित्य और सनातन है और हम उनके अंश। इसीलिए हमारी संवैधानिक स्थिति उनकी सेवा करना है। कि गर्म या मजहब तो वह है जो हमें भगवान से प्रेम करना तथा उनकी सेवा करना सिखाया है।

बस बहुत हुआ। मेरे सामने या फालतू बातें मत करो। देखो, तुम यौवन खानदान से हो, इसलिए हमारे भाई जान, मैं तुम्हारे सभी गुनाहों को माफ कर दूंगा। अगर इस पुराण के कलमा को तुमने पड़ गया, तो अल्लाह तुम्हें माफ कर देंगे, तो फिर से मुसलमान बन जाओगे। नहीं तो अल्लाह की रहमत तुम पर कभी नहीं बरसेगी।

इस कलयुग में माया के प्रभाव को देखकर मैं आश्चर्यचकित हूं। उस माया के प्रभाव से राजा से लेकर अधिकारी तक सभी उसके गुलाम बने हुए हैं। आप भी एक बादशाह हैं, अतएव आपको भी यह तथ्य स्वीकार करना होगा। इस जगत में पूर्ण पुरूषोत्तम भगवान सिर्फ एक ही है। बस हम हिंदू और मुस्लिम उन्हें अलग-अलग नाम से पुकारते हैं।

जिस तरह मुस्लिम कुरान को पढ़कर अल्लाह को प्रेम करना चाहते हैं, उसी तरह हम पुराणों, ट्रांसफरों से उस परम दयालु भगवान की शरण ग्रहण करते हैं। अगर हम आध्यात्मिक दृष्टि से देखें, तो परमात्मा सिर्फ एक ही है। यह स्पष्ट रूप से जान जाएंगे। फिर चाहे भगवत गीता हो या कुरान, इन सभी का उद्देश्य यही है कि भगवान सिर्फ एक है और हम उनकी संतान हो। पूर्ण पुरूषोत्तम भगवान सच्चिदानंद बिशप के ह्रदय में परमात्मा के रूप में विराजमान हैं।

मजबूर, इनकी बातों से मुझे ऐसा लगता है कि यहां बेगुनाह है। मेरी आपसे दरख्वास्त है कि इन्हें आप यहां कर दें। हमारी आवाम भी हरिदास कोरिया करने की दुआ मांग रही है।

या अल्लाह, क्या फैसला सुनाओ? मुझे तो समझ नहीं आ रहा है। मेरा मन बहुत उलझन है। युद्ध के इस बात की सहसा, यह ढोंगी है। अपने बातों से यह सब को गुमराह कर रहा है। इसकी इतनी मजाल कि यह समझ आपको एक बता रहा है। अल्लाह को हिंदू भगवान कृष्ण के बराबर बताने के गुना में इसका सिर कटवा देना चाहिए।

जहां बना, है क्यों नहीं? बुजुर, अगर हमने ऐसा किया, तो खुदा हम पर कयामत बरसा देगा। हमारे वजीर, यह न भूलें कि हरिदास हमारी विरादरी का है। हो, जहांपना, लगता है या मुलाज़िम अपनी हैसियत फूल गया है। और अगर तुम भूल गए हो, तो मैं तुम्हें बता दूं कि तुम भी एक बार फिर की औलाद। तुम्हारे जिसमें पूर्ण काफिरों का खून दौड़ रहा है। हमारे जहांपना और खुदा ने तुम पर रहमत बरसती। मजहब बदलने का मतलब यह नहीं कि तुम हमसे ऊंची जुबान में बात करोगे। तुम और तुम्हारी औलादें हमारी मुलाज़िम है। यह बात फूलों, मुलाज़िम, तुम भी कभी हिंदू हुआ करते थे, लेकिन आज तुमने अपना मजहब बदल लिया है।

इसकी वजह बताओ। हरिदास को बताओ। उसे हुआ जिसमें जब का पालन कर रहा है, वह कमजोर, जर्जर हो चुका है। जीना बढ़ाओ। यह देखो, हरिदास नवाब साहब का कहना मान लो। मेरी तरह, वे तुम्हें भी शानो-शौकत और दौलत से खुशहाल कर देंगे। अब छोड़ भी दो यह जिद। हिंदू धर्म में कुछ नहीं रखा है। असली जीवन का आनंद मुसलमान बनने में है।

हरिदास, अभी भी वक्त है। कलमा पढ़ लो। तुम्हें शाही खजाने से मालामाल कर दिया जाएगा।

तुम हमारे शहंशाह की रहमत का नाजायज फायदा मत उठाओ। उन्होंने तुम्हें पैदाइशी मुसलमान होने की वजह से एक और मौका बख्शा है। कि आज तुम है इस पुराण की कलमा को पढ़ लेना चाहिए। नहीं तो तुम पर हमारे नवाब का ऐसा कहर पर से का, ऐसा कहर बरसा का, जिससे इस पश्चिम बंगाल तो क्या है, कि पूरे भारतवर्ष में तुम्हारी सजा से हिंदुओं के रौंगटे खड़े हो जाएं।

काजी, ठीक कहता है। यही तुम्हारे लिए आखिरी मौका है। हरि नाम के जाप को छोड़कर कलमा पढ़ना शुरू कर दो। ए वर्मा, इसका अंजाम बहुत बुरा होगा।

भगवान श्रीकृष्ण के आदेशों का पालन करना ही मेरा स्वधर्म है। आज मैं आपके तथा बेरहम का जी के प्रलोभन में नहीं आने वाला। अगर आपने मेरे शरीर के सौ टुकड़े भी कर दिए, तब भी उसके एक-एक अंग का टुकड़ा हरि नाम का जप करता रहेगा। और हरिनाम के समक्ष तारा ऐश्वर्या कुछ यही मेरे जीवन का सार सर्वस्व है। यही परम आनंदमयी हैं। मुझे हरि नाम लेने से कोई भी नहीं रोक सकता।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण। मैं तुम्हारी इतनी हिम्मत? तुझे अपने हरि नाम पर इतना गुरूर है? मार मार कर तेरा जिस्म से तारीख आलू उठा दो, फिर देखते हैं क्या करता है तेरा। हां, सही कहा। तेरी सदा अब मेरा वजीर छोड़ेगा। बताओ, वजीर, इसे क्या सजा सुनाए? हरिदास, क्या तुम्हारा हरि नाम तुम्हें 22 हजार में कूड़े पड़ने से बचा सकता है? बता, हरि नाम समस्त दुखों का निवारण करने में समर्थ है। आखिरी है, हरिदास, मैं हरि नाम पर इतना भरोसा है। हां, तो ठीक है। 22 बाजारों में कोड़े पड़ने पर भी अगर तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ा, तो हम मान जाएंगे कि तुम्हारे हरि नाम विदेशी ताकत है और तुम एक सच्चे फकीर। और अगर तुम झूठे साबित हुए, तो ख्याल रखना। इस हरिनाम के साथ-साथ या हरिदास भी हमेशा हमेशा के लिए खत्म हो गए। कुछ समझे?

कर दो।

दूध ले जाओ इसे पास बाजार में कोड़े मारकर इसका परिणाम छील लोग, जैसे खत्म कर दो ताकि फिर कोई हरिदास पैदा ना हो सके।

तो कि शेषा, आज का दरबार यही ख़तम करते हैं। तक लिया था को चुनो। 225 1000 से हरिदास को जिंदा नहीं लौटना चाहिए। अगर मुझे दोबारा इस की बदसूरत शक्ल देखी करें, तो तुम दोनों जिंदा नहीं रहोगी। तब ही इसे ऐसी मौत देना, ऐसी मौत देना जिससे हमारी आवाज में हरि नाम लेने का आखिरी जाए।

[हंसी]

ले जाओ इसे। हरिदास, हात से हरिनाम और तुम्हारी कहानी खत कर दो।

कर दो।

[संगीत]

वह कृष्णा है।

कि कृष्णा, पब्लिक कृष्णा। तेरी नाम की भूख को शांत करता हूं। तू हमसे अपनी जान की भीख मांगे है, तो वह कृष्णा। और मत मारो, मत मारो। लेने हैं वो बेगुनाह है। यह सुना है। बस मार्लिन मुनरो ने छोड़ दो, छोड़ दो। यह भावना है। यह मेघवर्ण के कहने पर। और तूने कलमा पढ़ लिया होता, तो आज यह नौबत नहीं आती। देख, परिणाम की वजह से नौकरी मरने वाला है। और है।

[संगीत]

हरे कृष्णा।

मरने की चिंता मुझे नहीं है। कि आज नहीं तो कल हमें मरना ही है। और वैसे भी जीवन-मरण तुम्हारे और नवाब के हाथ में नहीं है। हमारे हाथ में ले। और ले कृष्णा, कृष्णा। तेरी जिंदगी हमारे हाथों में है। भगवान को क्वेश्चन ओं।

[संगीत]

हु, क्या हुआ?

हैंड्स फ्री कृष्ण ने विशेष प्रभाव धुंध 140 है।

हरे राम हरे राम राम राम हरे कृष्णा हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।

आज अगर मैं उनकी बात मान भी लूं, तो कल कल कोई और मुझे धमका कर अपने भगवान को और कोई काम करने को कहेगा, तो क्या? तो क्या मार खाने के डर से मैं उसकी बात मान लूं? तो हम तुम्हें मनवा कर रहेंगे। इन दो।

[संगीत]

क्यों नहीं? मैं इस नश्वर शरीर के कष्ट से बचने के लिए अपनी आत्मा का सौदा नहीं करूंगा। सीधे लिए, कई पर फाइल नहीं। देखो, हिंदू धर्म में कुछ नहीं रखा। मेरी बात मानो। हम तुम्हें यहीं खत्म कर देंगे। कि तुम सिद्ध हो? क्यों फालतू में लाश बनना चाहते हो? बंधु, जो जो हरी नाम का जप नहीं करता, वह खुद एक जिंदा लाश के समान है। इसलिए मैं आपसे निवेदन करता हूं कि आप भी हरे कृष्ण महामंत्र का जप कीजिए।

तो जाकर हफ्ते जीवन में कल्याण का योग न? तो हमसे नाम का जप करवाना चाहता है? देख, अभी तेरी क्या हालत करता हूं। और यह कि वह एग्जांपल, मैं मेरा राम राम राम हरे हरे। और अंडर खंड और गद्य जाए, यदि प्राण प्रभु अनुबोधन ए ना छड़ी परिणाम। अगर अगर आप मेरे शरीर के टुकड़े-टुकड़े भी क्यों न कर दें, और मेरे प्राण ही क्यो न चले जाएं, फिर भी मैं हरी नाम लेना नहीं छोड़ूंगा, नहीं छोड़ूंगा। आज मैं तुझे मार मार कर सचिव जिंदा लाश बना दूंगा। और और और और।

[संगीत]

इस तरह चला दो ने हर एक बाजार गली नगर में हरिदास पर कोड़े बरसाएं, परंतु इससे राम आचार्य श्री हरिदास ठाकुर और उत्साह कि अगर हरि नाम का जप करते रहे। उनके हरिनाम के प्रभाव को देखकर रूरल लागत भी आश्चर्य चकित लुट और सुनाओ।

[संगीत]

हैंड्स फ्री कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे।

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।

हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे।

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।

हरे कृष्ण हरे राम हरे राम लीला बंद क्यों नहीं कर रहा है?

हां, भाई जान, मैं इसको इतना मारा, अपना मारा, लेकिन यह है कि और जोर-जोर से हरि नाम ले रहा है। इसे कुछ और क्यों नहीं पढ़ रहा? मैं ऑल कृष्णा कृष्णा हरे हरे।

लुट हां, मेरा तो यह भरवां कूड़ा है। इसे मारते मारते हुए घोड़े टूट रहे हैं। जो किंग, तो उसके लाइक शेयरिंग कोर्ट, कुछ नहीं हो रहा है। कहां हो?

बेस्ट, बहुत हुआ। अब तो मैं थक गया हूं।

सवार थे मार्केट।

[संगीत]

मैं ठीक हूं। देखो, मेरे हाथों में छाले पड़ गए हैं। इसे कितना भी मार लो कि यह हरे कृष्ण हरे कृष्ण का जप करता रहता है। अब और मुझसे नहीं होगा।

मुझे लगता है, यह सच में इन पर अल्लाह ताला की दुआ है। लेकिन क्या तुमने कभी किसी का हक नहीं सुना? दो।

अगर मुझे दोबारा इस की बदसूरत शक्ल देखनी पड़ी, अब तो तुम दोनों जिंदा नहीं रहोगी। तब ही मौत ऐसी मौत देना, जिससे हमारी आवाज में हरि नाम लेने का आखिरी जाए।

[हंसी]

अच्छी तरह बचा ढ, ढ, ढ, ढ।

[हंसी]

[संगीत]

आप सिर्फ आप ही हमें बचा सकते हैं। कार्स में हमें धमकी दी है। अगर हमने आपको नहीं मारा, तो वह हमें अपने परिवार के साथ तुम हटा लेगा। कि वह एक बेर हम इंसान है। हरिदास जी, कि आप एक सच्चे फकीर हैं। हम पर रहम कीजिए। हमें बचाइए। हरिदास जी, हमें बचाइए।

कि हमें बचा ढक। हम आपके गुनहगार हैं। हमें माफ कर दीजिए। हमें माफ कर दी ढ, ढ, ढ।

उठ जाइए।

कि तुम लोग व्यर्थ चिंता मत करो। कि अगर मेरे जीवित रहने से तुम्हें और तुम्हारे परिवार पर संकट आ सकता है, तो फिर मैं स्वयं ही अपने प्राण त्याग देता हूं। कि तुम लोग चिंता मत करो। मैं यह नहीं होने दूंगा।

हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे।

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।

[संगीत]

अरे, यह क्या हुआ? लगता है, यह सचमुच मर गए। हां, यह सच। अरे, क्या हुआ?

दूर अपनी जान दे दी। वह बेवकूफ। इन्होंने अपनी जान दे दी।

[संगीत]

अरे, क्या हुआ? ऐसी हजारों लाखों कोड़े मारने के बाद को कुछ नहीं हुआ। इन्होंने हमारी दुआओं को लिया और अपनी जान दे दी।

मैं सच में एक महान फकीर थे। ऐसे महान फकीर को मारने के कारण अल्लाह ताला हमें जहन्नम भेज देंगे।

आप महान हैं, हरिदास जी। आप महान हैं।

कि तुमने सही कहा, भाई जान। लेकिन हमारे पास और कोई दूसरा रास्ता भी तो नहीं था। कि हम तो अपने मालिक के कुत्ते हैं। कुत्ते, हम पर लानत है। कि हरिदास जी, हमें माफ कर दीजिएगा। हमें इन्हें जल्दी शहंशाह के पास ले जाना होगा, वरना वह अच्छी तरह में मौत के घाट उतार देने का। यह चलो, इन्हें उठाओ। चलो।

[संगीत]

कर दो।

[संगीत]

हुआ है।

[संगीत]

हैं हमारे मजहब से दगाबाजी करने के लिए अल्लाह ने इसे सही सजा बढ़ाइए। कि यहां आने वाले सभी पुस्तकों के लिए एक सबक हो। आज के बाद फिर कोई हरिदास पैदा नहीं होगा। लेकिन उसके बदन पर कोड़े मारने के एक भी निशान मौजूद नहीं है। काजी, हुजूर-ए-आला, यह मर चुका है। इसके शरीर से रुक गायब हो गई। शायद इसलिए उसके घाव अंदर छुप गए। वैसे भी हमें निशान से क्या ले रहा था? बस हमारे लिए हरिदास मर गया। यही तो हम चाहते थे। ठीक कहा तुमने। हरिदास की लाश को श्मशान में ले जाकर जला दो। नहीं, शहंशाह। अगर हमने इसे जला दिया, तो हिंदू धर्म के अनुसार इसे मुक्ति मिल जाएगी। अगर दफना दिया, तो हमारे मजहब के अनुसार यह जन्नत में चला जाएगा। इसलिए जनाब, मेरी राय है कि इसे ना तो जलाना चाहिए और ना ही दफन करना चाहिए।

इसके अलावा और हम कर भी क्या सकते हैं? इसे गंगा नदी में फेंक दीजिए। क़ाज़ी, मैं तो तुम्हें चालाक समझता था, लेकिन तुम को बेवकूफ हो जैसी बात कर रहे हो। माफी, जहांपना, इस नाचीज से कौन सी गुस्सा? क्यों है? तुम्हें पता होना चाहिए कि गंगा हिंदुओं के लिए एक पवित्र नदी है। इसीलिए मौत के वक्त वह लोग मुंह में गंगाजल डालते हैं। अगर हमने हरिदास को गंगा में फेंक दिया, तो हिंदू मजहब के अनुसार उसे मुक्ति मिल जाएगी।

[हंसी]

पुत्र, उन लोगों के लिए गंगा नदी बहुत पवित्र एवं शुद्ध हो, लेकिन हमें पता है कि ऐसी नदियों में बड़े बड़े मगरमच्छ भी होते हैं। क्या आप यह नहीं देखना चाहते कि उसका फिर हरिदास के टुकड़े-टुकड़े कर सारे मगरमच्छ खा जाए? पूरे आवाम को यह पता चलना चाहिए। अगर वह हमारे मजहब से दूसरे मजहब में धर्मांतरित होंगे, तो उनकी लाश भी मगरमच्छ के लिए लुट उठा लो। अच्छा, तो तुम्हारे कहने का यह मतलब था? फिर ठीक है। गंगा में जहां ज्यादा भूख मगरमछों, वह इस की लाश को बिकवा दो। जो रुक जा।

[संगीत]

कर दो।

[संगीत]

हां, बस यही रुक जाऊं। मुलाज़िम, यहां पर बहुत सारे भूख है, मगरमच्छ रहते हैं। यहीं पर हरिदास को फेंक देना चाहिए। कि काजी, एक बार और सोच लो। हमें सोच समझ कर फैसला लेना होगा। पुत्र, मैंने पता किया है कि आधार पर हिंदू आने से डरते हैं। वे लोग ज्यादातर उस किनारे पर ही रहते हैं। हां, जी शहंशाह। मैंने भी कई बार इस घाट के पास कई मगरमच्छ देखे हैं। यह क्या है कि अचानक बिजली की चाहिए में बहुत अंधेरा भी हो चुका है। कभी भी बारिश शुरू हो सकती है। चलो, का जी ओ। मैं इसको मौका है दस्तूर कहते हैं। साथ बहुत रात हो चुकी है। बेचारे मगरमच्छ भूख से तड़प रहे हैं। आपकी रहमत से आर अश्विन की दावत हो जाएगी। और ही है।

थे, हेग, तो इसका फिर को।

हरिदास की लाश गंगा में डूब चाहिए। बस थोड़ी ही देर में मगरमच्छ लाश के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। गंगा नदी आज खून से लाल हो जाए, तो आज का ज़ी लगता है। बहुत जोरों से पारित होने वाली। अब यहां रुकना खतरे से खाली नहीं होगा।

इसका फिर हरिदास की लाश को मगरमच्छ ने खा लिया। तुम यह फरमान कल सुबह पूरे बंगाल में फैला दो।

हरिदास की दर्दनाक मौत देखकर आइंदा हमारे नगर में कोई भी परिणाम है जब नहीं। कि अगर फिर कोई हरिदास गलती से पैदा भी हो गया, तो काजू सब बस सिर्फ पत्थर सजा हुआ था।

चलो, का जी। बहुत देर हो चुकी है। हमें आराम भी फरमाना है।

जो हुकुम, शहंशाह।

हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे।

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।

हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे।

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।

[संगीत]

अरे, यह कैसा चमत्कार है? एक मुर्दा फिर से कैसे जिंदा हो सकता है? कि मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि मैं कोई सपना है? क्या यह कोई सपना नहीं, बल्कि सच है? शहंशाह, चेहरा देखिए। सच में, यह हमारे हाथों से नहीं मरे। 22 बाजारों तक हमने इन्हें लगातार चाबुक से मरवाया था, लेकिन यह बिना किसी दर्द के खुशी-खुशी हरि नाम का जप कर रहे थे। उन जल्लादों ने इन से विनती की कि अगर आप नहीं मरे, तो ताजी हमें मरवा देगा। कि उनको बचाने के लिए ही यह महान फकीर हरि नाम का जप करते-करते मानो मर गए, लेकिन दूसरे पल यह खुशी-खुशी इस खतरनाक घाटी से निकल कर हरी नाम का जप कर रहे हैं। सच में, यह एक महान फकीर है। शहंशाह, सच में, यह एक महान फकीर है।

हरिदास जी, मुझे माफ कर दीजिए। आपकी महानता को जाने बिना मैंने आपको बहुत सताया है। एक सच्चे फकीर को मारने का गुना तो कभी अल्लाह ताला भी माफ नहीं करेंगे। अब मैं इसमें आपका कोई दोस्त नहीं।

इस भौतिक संसार में हम जो भी सुख-दुख का भोग करते हैं, कि वह सब हमारे पूर्व जन्म के कर्मों का ही फल है।

22 बाजारों में कोड़ों से मार खाना और अंततः वृद्धि होकर गंगा में गिरना, कि यह सब मेरी विधि थी। परंतु उन पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्रीकृष्ण ने मुझे हर समय रक्षा प्रदान करिए है। नहीं तो भला है कोई ऐसा जो इन दर्दनाक घोड़ों के बारंबार पढ़ने के पश्चात भी जीवित खड़ा रहे? कि यह सब इस दोस्त का जी की वजह से हुआ है। कि कहने को तो मैं एक नवाब सिंह शाह, लेकिन आज मैं इस वजीर के इशारों पर नाचने वाला खिलौना बनकर रह गए। इसमें एक महान फकीर को अपनी खुदगर्जी के कारण होंगी साबित कराकर अपने साथ-साथ मुझे भी खुदा का गुनहगार बना दिया।

कृपा कर लो इसे।

[संगीत]

स्वामी जी, मैं बेवकूफ था जो उसकी बातों में आ गया। कि इस गुनाह के बदले अगर आप मुझे कोई सजा देना चाहे, तो वो मुझे मंजूर होगी। तो कुछ नहीं। मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए। को दो वक्त का प्रसाद और यह वस्त्र मुझे भगवान श्रीकृष्ण ने पहले ही प्रदान कर दिए हैं। भला इसके अलावा मेरी क्या आवश्यकता हो सकती है?

परंतु मैं आपसे सिर्फ एक अनुरोध करना चाहता हूं।

ओके, स्वामी जी, मैं आपको सब कुछ देने के लिए तैयार है। कि आप बाजी को रिहा कर दीजिए। कि यह सब अपराध उन्होंने अनजाने में किया है, तो कृपया कर उन्हें क्षमा कर दीजिए।

हरिदास जी, मैं आपके गुनाहों की माफी के लायक नहीं। कि इस जल लाभ काल के लिए आप रहम कर रहे हैं। मैंने एक बाहर फकीर को जान से मरवाने की गुस्ताखी चीज है। आप जैसा सजा क्यों नही देते? मुझे भी पाकिस्तान हजारों में एक मेज़ रॉय देश फ्लू, लेकिन जापान उर्स पागल हूं।

[संगीत]

कुछ ठुकरा दी तो मैं तुमसे नाराज नहीं हूं।

उठो।

हे कृष्णा, यह आपकी कैसी लीला है? जो व्यक्ति कभी इतना कठोर हुआ करता था, जो मुझे सजा दिलवाने के लिए हमेशा तत्पर रहता था, वह आज, वह आज मुझ पति के चरणों में गिरकर अपने लिए सजा मांग रहा है। आप वास्तव में बहुत कृपालु हैं, भगवान। कि आप एक पत्थर को भी पिघला सकते हैं। यह आज आपने सिद्ध कर दिया।

देख लिया तुमने, वजीर हैं जिन्हें तुम मरवाना चाहते थे, वहीं तुम्हारी जिंदगी बच रहे हैं। तो क्या अब भी तुम इन वैष्णव फकीर को मारना चाहोगे? बताओ मुझे।

वहीं फटीर, मेरी आंखें खोलने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। मैं अपने अल्लाह की कसम खाता हूं कि आज के बाद कभी भी वैष्णव पर अत्याचार नहीं करूंगा। जो कोई भी हरि नाम का जप करता है, उससे उसे और बढ़ावा दूंगी। अब मेरी जिंदगी का उद्देश्य आप लोगों की सेवा करना है। इसके अलावा में मौत को गले लगाना पसंद करूंगा।

हरे कृष्णा। साधु, साधु, साधु।

को आप सभी भक्तजनों को सबक सिखाने के लिए भगवान ने इस परिस्थिति की संरचना की है। आज आपका समय हैं। आज के बाद धर्म के नाम पर मनुष्यों का विभाजन करना छोड़ दीजिए। कि हिंदू, मुसलमान, ईसाई, यह सब हमारे अहंकार की एक झूठी पहचान बन कर रह गई है।

इस भौतिक जगत के सारे जीव भगवान श्रीकृष्ण के दास है।

यही सत्य हैं। हम सब भगवान की संतान है। अतएव हम सबको मिलकर उनकी सेवा करनी चाहिए।

कि हमें इसको सही सिद्धांत मानकर पालन करना चाहिए। इस संसार में व्यर्थ उत्पात कल यह को उत्पन्न करने से अपना मानव जीवन नष्ट मत करो। सदैव हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे।

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।

का जप कीजिए और अपना मानव जीवन सफल बनाइए।

मैं जरूर हरिदास जी। अरे, हर एक को और सुनाओ।

कर दो।

नाम आचार्य श्री हरिदास ठाकुर की।

जय नाम आचार्य श्री हरिदास ठाकुर की जय हो।

इस तरह नाम आचार्य श्री हरिदास ठाकुर ने नगर-नगर ग्राम-ग्राम में कृष्ण भावनामृत का प्रचार किया है।

कि मैं अपने अंतिम समय में सांस लेते हुए भी परिणाम का जब कर रहे थे। उनकी समाधि का आयोजन स्वयं भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने किया और उन्हें नाम आचार्य की उपाधि। हमारे धर्म व गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय में ऐसे कई आचार्य हुए। उसी गुरु-शिष्य परंपरा में आए महान आचार्य श्री कृष्ण कृपा मूर्ति श्रीमद अभय चरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी ने पूरे विश्व भर में कृष्ण भावनामृत का प्रचार प्रसार किया।

कि उन्होंने देश के कोने-कोने में हरे कृष्ण महामंत्र को सारे मधु जी को तक पहुंचाया और उनके उपरांत उनके अनुयाई शिष्य इस हरे कृष्ण महामंत्र को अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ के माध्यम से सबको पहुंचा रहे हैं।

256 सुना दो।

श्री राम।

झाला।

तुझा रे।

[संगीत]

शो मोर।