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नमस्कार। मैं हूँ सलामत अली और स्वागत है आप सभी का हमारे इस खास कार्यक्रम वूमेंस डे स्पेशल पर। आज हम एक ऐसी मेहमान के साथ मौजूद हैं, हमारे स्टूडियो में मौजूद हैं, जिन्होंने मुंबई में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। और पहचान के साथ-साथ मुंबई नहीं बल्कि पूरा देश, पूरी दुनिया आज उन्हें जानती है। हम बात कर रहे हैं मुंबई की लेडी डॉन शबनम शेख की, जिन्हें लोग प्यार से "आप" के नाम से भी बुलाते हैं। शबनम जी, सबसे पहले बहुत-बहुत स्वागत है। क्या कहना चाहेंगी? एक अलग पहचान आपने बनाई है समाज में, और महिला होते हुए भी इस तरह की पहचान बनाना और एक दबंग लेडी के नाम से अपने आप को जो है वो मशहूर करना, कितना मुश्किल रहा? ये पहले तो...
अस्सलाम वालेकुम, नमस्कार, जय हिंद दोस्तों। ये बहुत ही डिफिकल्ट सवाल है कि अपने आप को दबंग प्रोड्यूस करना। ये मैंने प्रोड्यूस नहीं किया। ये टेक्निकली डे बाय डे, जैसे हम कहते हैं ना कि हमें टॉप फ्लोर पर जाना है, तो पहले हमें पहली सीढ़ी चढ़नी पड़ती है। जी, तो पहली... शायद से वो पहली सीढ़ी, वो उस वक्त में चढ़ी हूँ कि मुझे खुद को याद नहीं है कि वो पहली सीढ़ी कब थी। जी, लेकिन आज मैं टेरेस पर खड़ी हूँ और मैं देख रही हूँ कि देश में क्या हो रहा है और वो टेरेस की कोई लिमिट नहीं है। जी, कोई हाइट नहीं है, कोई डिफेंस नहीं है कि हाँ, टेरेस यहां पर है। मैं यहां से देख रही हूँ कि हिंदुस्तान में क्या हो रहा है, महाराष्ट्र में क्या हो रहा है, दिल्ली में क्या हो रहा है, देश में क्या हो रहा है। ये सब कुछ देखते-देखते-देखते, धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे करके पता नहीं ये स्टेज कहाँ से आई कि आज जो धारावी, मुंबई नंबर 17, जिसे हिंदुस्तान का सबसे बड़ा खतरा कहते हैं, मेरी पैदाइश वहाँ की है। जी, कहते हैं ना कीचड़ में ही कमल खिलता है, तो कुछ मेरे दोस्त ऐसे ही मुहावरे दिया करते थे मुझे लेकर। जी, और वहाँ से मैंने यहाँ तक का सफर जो तय किया है, वो बहुत सारे सैक्रिफाइस, बहुत सारे बलिदानों के साथ में है। और यस, आई हैव डन द वर्क। 15 साल हो गए हैं मुझे इस फील्ड में और काम करते हुए। सिर्फ अपने आप को दबंग कहलाने में या लेडी डॉन कहलाने में खुशी हासिल नहीं होती, जिससे कहीं ज्यादा खुशी हमें हासिल होती है जब हमें लोग "आप" कह के बुलाते हैं। जी।
जिस तरह से अपनी पहचान आपने बनाई हुई है, "आप" के नाम से, तो फ़िलहाल आप काफी मशहूर भी हैं, लेकिन वह पहला कौन सा ऐसा मामला था जिसके बाद आपका यह जो दबंग चेहरा है या यह जो लेडी डॉन वाला जो चेहरा है, वह सबके सामने आया?
अगेन, इट्स डिफिकल्ट क्वेश्चन, बिकॉज़ इट्स बीन 15 इयर्स। 15 साल हो गए हैं इस फील्ड में मुझे काम करते हुए। तो पहला इंसिडेंट मैं बताऊंगी कि डोमेस्टिक वायलेंस, यानी कि घरेलू हिंसा। वह पहला एक स्टेप था जिसकी वजह से मैं इस फील्ड में आई। जी, और वह पहला डोमेस्टिक वायलेंस, मैंने किसी और का केस नहीं देखा था। मैंने मेरे ऊपर होने वाले डोमेस्टिक वायलेंस को सोच लिया था कि ये मैं पहली और आखिरी बार देख रही हूँ। अब मैं किसी और औरत को रोते हुए नहीं देखूंगी, ना मैं किसी और को बिलखते हुए देखूंगी। मैं हर उस औरत को इंसाफ़ दिलाऊंगी। भी शुरू की है और उसके जरिए जो है लोगों को मदद अब करती है। लोग सिर्फ़ मुंबई से ही नहीं बल्कि देश भर से, अलग-अलग राज्यों से लोग अब आपके पास आते हैं मदद के लिए। तो किस तरह से आप... जब इतना प्यार मिलता है आपको और कहीं ना कहीं जब दूसरे राज्य से भी लोग आते हैं, तो एक आपको लगता है कि एक रिस्पांसिबिलिटी जो है वो समाज के प्रति आपकी और बढ़ गई है और लोगों को और ज्यादा से ज्यादा इंसाफ़ आपको दिलाना है?
यस, यह आपने बिल्कुल सही कहा। जैसे देश भर से लोग आते हैं मेरे पास, बहुत उम्मीद लेके आते हैं और यह भी मैं आपको बता दूँ यकीनन कि जो आते हैं, उनके पास वापस जाने का किराया तक नहीं होता। जी, वो तक का हमें फंडिंग करके देना पड़ता है। और मैं आपको बता दूँ कि हेल्प केयर फाउंडेशन को फंडिंग करने वाला कोई एक सिंगल व्यक्ति नहीं है, व्यक्तिगत रूप पे या किसी कंपनी की तौर से या फिर कोई इंस्टिट्यूशन की तौर से, कोई स्पांसर, कोई सपोर्ट हेल्प केयर फाउंडेशन को नहीं मिलता। हेल्प केयर फाउंडेशन मैं मेरे हाथों से, मेरे शोल्डर पे 15 सालों से चला रही हूँ। हाँ, जब अब जिम्मेदारियों की बात आती है कि हाल ही में मैं काफी बीमार रही हूँ और लोगों से मैं बहुत कम मिल पाती हूँ, तो फिर मैं वो देखती हूँ कि जब मैं लोगों से नहीं मिल पाती हूँ और जिस दिन मैं बैठती हूँ, यानी कि मेरा बैठना, यानी कि मेरा दरबार लगना, जब दरबार लगता है, तब पता चलता है कि यस, ये मैंने आठ दिन या दस दिन जो भी मैंने छुट्टी ली खुद के लिए, ना मैं कोई गवर्नमेंट एम्प्लॉई हूँ, ना मैं गवर्नमेंट के लिए काम करती हूँ। यस, नॉन-गवर्नमेंट ऑर्गेनाइज़ेशन चलाती हूँ और पैरेलली गवर्नमेंट के साथ चलती हूँ और जिसे कि हमें सिर्फ़ हिंदुस्तान की बात नहीं करते हैं। हम हिंदुस्तान तो दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी है। जी, पूरे दुनिया भर में एनजीओज़ हैं। जी, हर एक कंट्री में है, हर स्टेट में है, हर सिटी में है। लेकिन मैंने जहाँ तक हम हिंदुस्तान की बात करें, तो मैंने हिंदुस्तान में किसी एक भी एनजीओ को परफेक्टली काम करते हुए नहीं देखा कि यस, दे आर डूइंग समथिंग व्हिच इज़ कॉज़ ऑफ़ द पीपल, फॉर द पीपल एंड बाय द पीपल। दे आर नॉट डूइंग सो। यहाँ पर हमारे देश में अगर हम बात करें, हम मुंबई शहर में बात करें एनजीओज़ की, तो लोगों ने समझ लिया कि एनजीओ का मतलब है नॉन-प्रॉफिटेबल ट्रस्ट चलाना और पैसे लेके अपने अंदर। जी, ये गलत एग्जांपल है। तो जब इस तरह के एनजीओज़ को आप देखती हैं, गुस्सा नहीं आता आपको कि यार ये क्या कर रहे हैं लोग? क्या करूँ मैं? फिर फिर वही वाला लुक सामने आ जाएगा, लेडी डॉन वाला, लेडी दबंग वाला। तो फिर वही होगा कि बीजेपी को मैं बेनिफ़िट दे दूंगी। बीजेपी मेरी, द फ़ेवरेट, द फ़ेवरेट पार्टी है, जिसे मैं इतनी नफ़रत करती हूँ कि आप आधी रात को दो बजे भी उठा के पूछेंगे बीजेपी, तो मेरे मुँह से निकलेगा, "आई हेट यू"। जी जी।
अच्छा, इसके अलावा आपकी हम बात करते हैं, तो ऐसा पहला इंसिडेंट कौन सा था जब आपने, जो आपका अवतार अब लोग देखते हैं कि आप बातें कम करती हैं और आपकी हाथ जो है, आपके हाथ ज्यादा बात करते हैं, तो ये पहला इंसिडेंट कब था कि जब आपको लगा कि नहीं यार ये सुन रहा नहीं है ना, मेरा काम कर रहा है और यहाँ पर मुझे अपना अवतार जो है दिखाना होगा? सुन रहा नहीं वाला सिस्टम तो आता ही नहीं है। जी, अपनी-अपनी साइकोलॉजी जो है, जो चलने का थ्योरी जो है इसमें सुनने नहीं वाले वाला सिस्टम नहीं है। जी, जो प्यार से सुनते हैं, अच्छी बात है। नहीं प्यार से सुनते, हम उनको कानूनी समझाते हैं। लेकिन कुछ ऐसे मामलात सामने आते हैं जहाँ पर मेरे हाथ उठते हुए आप लोगों ने देखा है, वो ऐसे होता है जब भी अगर मैं किसी को देख लूँ, मैंने जैसे कि देखा था कि किसी हस्बैंड ने अपनी वाइफ़ को तलाक दिया, मैसेज पे। जी, इतना छोटा सा फ़ोन, उसमें उसने तीन बार तलाक लिख के भेज दिया और कहता है कि यस, तेरा तलाक हो गया, मैंने तुझे छोड़ दिया। जी, वो पहला इंसिडेंट था और पता नहीं वो कितने साल पहले का इंसिडेंट है। जी, जब मैंने लाइव में, यानी कि लाइव आकर के लोगों के सामने, पूरी दुनिया मुझे देख रही है, जानते हुए, इसके बाकी के मुझे पता था कि मेरे ऊपर कानूनी कार्रवाई हो सकती है, इसके बावजूद मैंने उसके जबड़े को तोड़ दिया।
तो क्यों किया ऐसा आपने? लोग आरोप लगाते हैं कि आप जो हैं, आप के पास जाने से सिर्फ़ आप जो है वो मारती है, पीटती है और इस तरह के बर्ताव करती है, तो कहीं ना कहीं लोगों का आपके प्रति जो जो है वो नफ़रत बढ़ता जा रहा है, तो क्यों आप ऐसा क्यों मारती हो लोगों को? देखो, अगर ऐसा लगता है नफ़रत बढ़ती जा रही है, तो नफ़रत उन लोगों के दिल में बढ़ रही होगी जो खुद गलत होंगे। जी, जो सही लोग होंगे, क्योंकि मैं आपको एक चीज और बता दूँ, आप एक अच्छे पत्रकार हो, तो आप राइट्स बनता है कि आप ये जाने। जी, कि मैं सिर्फ़ और सिर्फ़ औरतों के लिए नहीं लड़ती हूँ। जी, आई फ़ाइट फ़ॉर मेल्स, बच्चों के लिए। डोमेस्टिक वायलेंस तो बहुत छोटा सा सब्जेक्ट हो गया है आज की तारीख़ में जो कि औरतें कंप्लेंट करती थीं। जी, बट प्रैक्टिकली देखें तो आज 65 परसेंट मेल्स जी आर गेटिंग हैरेस्ड बाय डोमेस्टिक वायलेंस। वो अपनी बीवियों से इतना परेशान है क्योंकि बीवियों को पता है एक छोटी सी एफ़आईआर, एक छोटा सा कंप्लेंट हस्बैंड को पुलिस स्टेशन ले जाएगा। जी, हस्बैंड पुलिस स्टेशन जाने से डरता है। जी, उसको वो जितना मेंटल हैरेसमेंट कर सकती है वो उतना मेंटल हैरेसमेंट करती है। प्रैक्टिकली जितना पॉवर्टी दिखा सकती है उतनी पॉवर्टी वो दिखाती है। जी, तो बेसिकली अगर आप कहेंगे कि लोग मुझसे डरते हैं, तो डरेंगे वही लोग मेरे पास आने से जो झूठे हों, जो गलत हों या जिन्होंने कुछ गलत किया हो। जी, जिन्होंने जो गलत किया होगा वही जाहिर सी बात है, क्योंकि जो गलत करता है डरता भी वही है।
और जिस तरह से आपने अभी बताया है और जो लोग ये इंटरव्यू देख रहे हैं, जाहिर है आप आपके दरबार को हमने देखा है, वहाँ पर बड़े तादाद में महिलाएँ आती हैं, बच्चे आते हैं, लेकिन अब लग रहा है कि पुरुष भी वहाँ पर आएंगे क्योंकि जिस तरह से आपने बताया कि डोमेस्टिक वायलेंस पुरुषों के साथ भी हो रहा है, तो अब मुझे लगता है कि आपके लिए एक अलग से इंतज़ाम पुरुषों के लिए भी करना होगा?
नहीं, बड़ा कॉमन सा है हमारा दरबार, चाहे मेल हो या फ़ीमेल हो, सबको एक लहजे से इज़्ज़त दी जाती है और उनको मान-सम्मान एक लहजे से दिया जाता है और वह कोई डिफ़रेंस, यानी कि कोई भेदभाव नहीं होता है। जी, तो दरबार में अभी भी मेल जाते हैं और बहुत बड़ी तादाद में मेल आते हैं, मेल जाते हैं अपनी परेशानियों को लेकर और अपनी दुविधा को लेकर कि हम शबनम शेख के पास जब जा रहे हैं तो हमें सलूशन मिलेगा। तो अगर मैं वो सलूशन नहीं दे दे पा रही हूँ, अगर मैं नहीं दे सकती हूँ, तो फिर मुझे मेरी चेयर पर बैठने का हक़ ही नहीं बनता। जी, यह मेरी मनोबल, यह मेरी... आपके पास तो... जी, आपके पास वैसे देखा जाए तो हज़ारों की तादाद में लोग आते हैं रोज, जिस तरह से जब भी आप दरबार लगाती हो तो वहाँ पर बड़ी तादाद में लोग आते हैं। कोई एक ऐसा केस आपको याद होगा कि उस केस को सुनने के बाद या देखने के बाद आपके आँसू निकल गए हों कि इस तरह से भी आज भी समाज में इस तरह के वाक़िए हो रहे हैं?
मैं अभी आपको हाल ही, फ़िलहाल वेरी रिसेंट दिन बता रही हूँ, अभी इसको दो महीना भी नहीं हुए हैं। जी, चेंबूर आरसीएफ़ पुलिस स्टेशन में एक श्वेता पाटिल, पीएसआई श्वेता पाटिल, मैं आपसे बहुत जल्दी मिलूंगी, पीएसआई श्वेता पाटिल, मेरे पास फ़िलहाल वक़्त नहीं है, मैं अब तक मिल नहीं पाई हूँ। ये ऑफ़िसर ने एक झूठा केस बनाया, एक सीनियर सिटीज़न लेडी को। जी, किसी का बच्चा गिराने के आरोप में उसे अंदर करवा दिया, जो कि वो लेडी की सगी बहन है। जी, जिसका वो बच्चा गिरने का वो झूठा एलिगेशन है। एक्चुअल में ये डोमेस्टिक वायलेंस और मेंटल हैरेसमेंट का केस था जो केस मेरे पास आया हुआ था। जी, लिली डॉग, लिली को अपने हस्बैंड से ज्यादा परेशानी हो रही थी, वो मेरे पास आकर बहुत रो रही थी। फ़ाइनली जब उसने अपने हस्बैंड के डोमेस्टिक वायलेंस और मेंटल हैरेसमेंट को अनबेअर करते हुए केरोसिन डाल के खुद को जलाने की कोशिश की। जी, जब उन्होंने केरोसिन डाला, तब आस-पड़ोस के लोगों ने उनके ऊपर पानी डाल के उनको रोका और इमीडिएटली मुझे कॉल किया गया, तब मैं वहाँ पर पहुँची और मैंने देखा कि अब ये कंडीशन वैसी नहीं है कि मैं न पेपर्स छोड़ दूँ। जी, मुझे प्रैक्टिकली कुछ करना पड़ेगा और जब मैंने प्रैक्टिकली चेंबूर आरसीएफ़ पुलिस स्टेशन में उसका एफ़आईआर बनवाया, जब कि मैं पुलिस स्टेशन गई भी नहीं। नाइट राउंड डीसीपी थे हमारे, जो नाइट राउंड डीसीपी थे, जोन 10 के, उन्होंने बड़ी ही खूबी से मेरी बात को सुना और उसको बिल्कुल नज़रअंदाज़ नहीं किया। नाइट राउंड डीसीपी, नाइट पीआई, कंट्रोल, कंट्रोल नाइट पीआई, ये जो लोग हैं यह आप लोगों को तब मदद करते हैं जब बेसिकली आपको स्टेशन हाउस, यानी कि पुलिस स्टेशन का जो स्टेशन हाउस होता है उसे हम बोलते हैं, जो ऑन ड्यूटी ऑफ़िसर होता है वो आपकी मदद जब नहीं करें तो आप कंट्रोल पीआई से बात कर सकते हैं, आप नाइट राउंड डीसीपी से बात कर सकते हैं क्योंकि नाइट राउंड में एसीपी, डीसीपी, सीनियर सारे अवेलेबल होते हैं। जी, और क्या है ना, पाँचों उंगलियाँ एक बराबर नहीं होती, तो पाँचों के पाँचों करेक्ट नहीं होते। तो अभी भी डिपार्टमेंट में ऐसे लोग हैं जो सही मायनों में सही काम करते हैं। जी, मैंने वो केस बनवाया और अगले दिन मुझे सुनने में आ रहा है, श्वेता पाटिल नाम की कोई एक पीएसआई ने एक झूठा एफ़आईआर बनाया, ऑन व्हाट मेडिकल बेसिस, यह अभी तक सिद्ध नहीं हुआ और दो महीने से वो लेडी जो है अभी भी भायखला जेल में है। जी, और यह बात मुझे सोने नहीं देती है। आज अगर मैं ग्यारह दिनों से लोगों से नहीं मिली हूँ तो इसकी वजह कोई और नहीं है, लिली डॉग। जी, लिली का केस मुझे सोने नहीं दे रहा है। वजह यह है कि झूठी कन्सपिरेसी है पुलिस स्टेशन में। एफ़आईआर मतलब के फ़र्स्ट इन्फ़ॉर्मेशन ऑफ़ रिपोर्ट जब लिखी जाती है उसमें वो बिल्कुल नहीं देखते कि सामने वाला सही बोल रहा है या गलत बोल रहा है। ऑफ़िसर्स को आप अगर पूछेंगे तो वो आपको बोलेंगे, मैडम हमारा काम है सिर्फ़ कंप्लेंट लेना, ये कंप्लेंट सही है, गलत है ये कोर्ट में साबित होगी, लेकिन इस बीच में जो भी जो भी विक्टिम फँसते हैं। जी, उसका जिम्मेदार कौन होता है? ये करप्टेड डिपार्टमेंट के ऑफ़िसर्स या फिर इंडिविजुअल वो लोग जो ये काम कर रहे हैं, तो उनको डिपार्टमेंट में रखने देना नहीं चाहिए। ऐसे लोगों को सस्पेंड करके इनको निकालना चाहिए डिपार्टमेंट से। जी।
इसके अलावा आप अगर बात करें जिस तरह से समाज में महिलाओं को लेकर अगर बात करें तो अब भी वह जगह नहीं मिलती है। कई सारी ऐसी महिलाएँ हैं जो अब भी कहीं ना कहीं प्रताड़ना का शिकार होती हैं और डोमेस्टिक वायलेंस जिस तरह से आपने कहा है, सिर्फ़ डोमेस्टिक वायलेंस ही नहीं बल्कि बराबरी का दर्जा आज भी महिलाओं को नहीं मिलता है। वूमेंस डे स्पेशल है, वूमेंस डे स्पेशल है, वैसे ही आजकल मर्दों का अगर माफ़ करना आप भी मत, लेकिन जिस तरीके से वूमेंस डे सेलिब्रेट किया जाता है, क्या वूमेंस को वाकई में उतनी इज़्ज़त दी जाती है? जी, और कंपैरिज़न करें दोनों का और दोनों को हम पढ़ने के लिए बिठा दें, मेल और फ़ीमेल को। मैं हमेशा कहती हूँ मेरी हर स्पीच में, जब भी एक मर्द पढ़ता है तो वो अकेला, सिर्फ़ वो अकेला मर्द पढ़ता है, वो अकेला बनता है, चाहे वो डॉक्टर बने, आईपीएस बने या लॉयर बने या वो कुछ और बने, चाहे वो गुंडा क्यों ना बने, लेकिन एक औरत अगर पढ़ती है तो वो पूरे परिवार को पढ़ाती है, पूरे खानदान को पढ़ाती है और वह अपने साथ में ज़िम्मेदारी लेकर चलती है कि जहाँ वह ब्याह के जाए वहाँ पर भी पूरे के पूरे खानदान को जो है अपने साथ में लेकर चलती है और वहाँ भी अपनी शिक्षा का वह उपयोग करती है और वहाँ भी वो पढ़ाती है। तो आज की तारीख़ में आप कहेंगे कि आपको बेटा होना चाहिए, बेटी होनी चाहिए, तो मेरे हिसाब से बेटी होनी चाहिए। जी, बेटा जब तक बेटा होता है, जब तक उसकी शादी नहीं होती। जी, बेटी मरते दम तक बेटी होती है और शिक्षा बहुत ज्यादा ज़रूरी है। शिक्षा एक ऐसी चीज है जो मेल और फ़ीमेल को बराबर का दर्जा दिला सकती है। जी।
इसके अलावा शबनम शेख हमारे साथ लगातार मौजूद हैं। शबनम शेख और सलमान खान की कंट्रोवर्सी पर हम बात करेंगे और साथ ही साथ शेरा को लेकर जो कंट्रोवर्सी हुई थी उस पर भी चर्चा करेंगे। साथ ही साथ शबनम शेख का यह जो दबंग अवतार है, यह इन्होंने किस तरह से मैनेज किया हुआ है, इस पर भी बात करेंगे। लेकिन यहाँ रुकेंगे एक छोटे से ब्रेक के लिए। अगर आप बीमार हैं और उम्मीद खोते जा रहे हैं, तो जुड़िए नवजीवन से। बना चाहता हूँ कि आप ये दवा लीजिए, इससे आपके शरीर को भी आराम पड़ेगा, आपके जो डिसीज़ है, बीमारी है उसमें भी काफी फर्क पड़ेगा, जैसा मुझे फर्क पड़ा है। आ डोज़ में पूरा हमारा पेशेंट पूरा नॉर्मल है, अच्छे कंडीशन में है। लॉट ऑफ़ द पेरेंट्स हू हैव स्पेशल किड्स, ऑल ओवर द वर्ल्ड, टू ट्राई आउट साइंटिस्ट मुनीर खान मेडिसिन, बॉडी रिवाइवल। इट वर्क्स लाइक एन अमृत, के जैसा काम किया है मेरे मम्मी के लिए। उन्होंने, इन जस्ट वन डे, आई कुड एंड ही इज़ रियली अ सेवियर। पहला डोज़ मैंने लिया बॉडी रिवाइवल का और मेरे को पहले दिन से बहुत रिलैक्स महसूस हुआ। खान साहब की वजह से आज मेरा बच्चा ठीक हो रहा है और मैं साइंटिस्ट मुनीर खान का बहुत-बहुत धन्यवाद करना चाहती हूँ। फॉर डेज़ ए प्रूफ़ इज़ इफ़ इट्स वर्किंग।
ब्रेक के बाद आप सभी का फिर एक बार स्वागत है हमारे साथ। लेडी डॉन ऑफ़ मुंबई, शबनम शेख हमारे साथ मौजूद हैं। शबनम जी, बहुत-बहुत स्वागत है फिर एक बार ब्रेक के बाद। और साथ ही साथ यह जानना चाहेंगे, ब्रेक पर जाने से पहले हमने दर्शकों को बताया था कि आपका और सलमान खान का जो कंट्रोवर्सी था, वो एक्चुअली क्या था? किस तरह से वो कंट्रोवर्सी हुई थी?
अ पहले तो मैं ये बता दूँ कि जैसे कि मेरे पास कोई भी कंप्लेंट लेकर आए और कोई भी अपनी कंप्लेंट लेकर आता है तो मैं बिल्कुल नहीं पूछती हूँ कि वो किस दर्जे से बिलोंग करता है। जी, वैसे ही जुबैर खान नामक का एक व्यक्ति मेरे पास आया था। उसने कंप्लेंट दी के सलमान खान ने मैनिपुलेट किया, उसको बहुत ज्यादा परेशान किया, उसकी मानसिक स्थिति ख़राब की और उसने खुद को ख़त्म करने की कोशिश की, यानी कि आत्महत्या करने का प्रयास किया। लेकिन जब यह केस मैंने हाथ में लिया, तो प्रैक्टिकली मैं हर केस को जब मैं लेती हूँ तो मैं उसको पर्सनली इन्वेस्टिगेट करती हूँ। तो जब इस केस को मैंने इन्वेस्टिगेट किया, तब पता चला कि जुबैर खान जो है वो कंप्लीटली झूठ बोल रहा है और सलमान खान की वजह से अगर उसने आत्महत्या की कोशिश की होती तो उसकी एमएलसी बनती, मेडिकल रिपोर्ट बनती, ठीक है, मेडिकल लीगल डॉक्यूमेंट बनते, जिसके बेस पे मैं एफ़आईआर बनाती। लेकिन जब मैं लोनावला पहुँची, बिग बॉस के सेट के पास और उस हॉस्पिटल पहुँची जहाँ पर जुबैर खान को लेके गया गया था, तो पता चला कि ऐसा कोई सीन था ही नहीं। इस बंदे ने कोई नींद की गोलियाँ नहीं खाई थी और ना ही इसने आत्महत्या का प्रयास किया था। तो मैं जब भी किसी से बात करती हूँ तो मैं सबसे पहली बात यही कहती हूँ कि झूठ से मुझे नफ़रत है, झूठ मुझे बोलना नहीं है। जी, सच में आप मुझे सच जो बोलोगे मैं सुनने के लिए तैयार। और सलमान खान के केस में एक बात थी के जैसे ही सलमान खान के अगेंस्ट मैंने स्टेटमेंट देना शुरू किया। जी, तो उसके बॉडीगार्ड शेरा ने कॉल किया। जी, उसने मुझे उठा लेने की धमकी दी। मेरा ये कॉल वाकई शेरा खान, शेरा की तरफ़ से था या फिर कोई फ़ेक कॉल था?
देखिए, फ़ोन पे तो शेरा ही था, जहाँ तक मैं जानती हूँ। एफ़आईआर भी शेरा के ऊपर हुई है। जी, अभी तक भी केस जो चल रहा है वो शेरा के ऊपर ही चल रहा है। वो पुलिस का काम है, वो इन्वेस्टिगेट करे कि वो शेरा था या शेरा का भाई था। जी, ठीक है, वो मुझे नहीं पता, लेकिन फ़ोन पे शेरा ही था। सलमान खान ने ही करवाया था ये कॉल और आज तक की जितनी मेरी प्रॉब्लेम्स होती हैं या जितना भी मेरे साथ में कंट्रोवर्शियल स्टोरी जो चल रही है, कहीं ना कहीं बीजेपी के एक विधायक जो हमारे बैरा क्षेत्र के हैं, वो हैं, उनके खास दोस्त सलमान खान हैं। जी, ये सारे लोग जो हैं मिल के कंट्रोवर्सी करते हैं। ये सारे क्रिमिनल कॉर्पोरेट करके कैसे लोगों को फँसाया जाए, यह सिर्फ़ इतना ही देखते हैं। जी।
इसके अलावा शबनम जी, बात करें वूमेंस डे की, तो जाहिर है वूमेंस डे पर जब भी वूमेंस डे आता है तो एक दिन के लिए लोग जो हैं वो मतलब दिखाने का प्रयास करते हैं कि हम कितना रिस्पेक्ट करते हैं महिलाओं की, और लेकिन क्या वाकई बाकी के जो दिन हैं, क्या उसमें वह चीज़ें नज़र आती हैं? आप खुद बतौर एक महिला हैं, जब आप निकलती हैं, जब आपके पास में केसेस आते हैं, तो जिस तरह के केसेस आप देखती हैं, क्या आपको लगता है कि समाज बदल रहा है या अब भी बहुत सारी चीज़ें हैं समाज में बदलाव की?
अभी भी समाज में बदलाव की बहुत सारी चीज़ें हैं। सिर्फ़ वूमेंस डे एक दिन के लिए पूरी दुनिया लग जाती है डे बोलने के लिए, बाकी के 364 डेज नहीं रहती। 364 दिन वो औरत नहीं रहती है, वो सिर्फ़ एक दिन के लिए औरत बनती है जो हैप्पी वूमेंस डे होता है और बाकी सारे दिन डे, रियली सॉरी टू से, अभी औरतों को वो दर्जा नहीं दिया जाता जो उनको मिलना चाहिए। अगर औरतें होंगी ही नहीं, आप देखेंगे, कैलकुलेशन ऑफ़ वूमेन पॉपुलेशन, राजस्थान, हरियाणा, ये सारे क्षेत्रों में बहुत कम है। जी, मर्दों की पॉपुलेशन ज्यादा है, औरतों की कम है। दे डू द चाइल्ड डिटेक्शन, मतलब वो पहले ही जान लेते हैं कि लड़का हो रहा है, लड़की हो रही है। अगर लड़का हो रहा है तो उसे जन्म होने देते हैं, लड़की हो रही है तो उसका...
अबॉर्शन करा दिया जाता है। जी, मैं वूमेंस डे के दिन ये एक ही मैसेज देना चाहूंगी—चाहे लड़का हो या लड़की, जो मां है वो खुद एक लड़की है, वो खुद एक औरत है। तो वो चीज को ध्यान में रखें और लड़ जाए अपने बच्चे के जन्म के लिए, चाहे उसके लिए उसको मर के मिटना क्यों ना पड़े जी। और अपने बच्चे को वो जन्म दे, चाहे वो लड़का हो या लड़की हो।
इसके अलावा, शबनम जी, जिस तरह से आपने खुद ने बताया कि कई सारे ऐसे मामले आपके पास आते हैं जहां पर महिलाएं जो है वो अपने—अ जो उनके जो राइट्स हैं उनका दुरुपयोग करते हैं, उसका भी असर कहीं ना कहीं इन महिलाओं पर पड़ता है जो कहीं ना कहीं चुप रहती हैं, खामोश रहती हैं। उनको उनका जो खामियाजा है वो भुगतना पड़ता है। आपको लगता है कि महिलाओं को इस तरह से अपने जो राइट्स हैं उनका दुरुपयोग नहीं करना चाहिए? बिल्कुल नहीं करना चाहिए जी। वो कहते हैं ना, फिर मैं कहूंगी—पांच उंगली एक बराबर नहीं होती। वैसे हर औरत एक जैसी नहीं होती। लेकिन औरतों ने आज का फैशन बना लिया है। आज तो, आजकल का फैशन तो यह भी हो गया है जैसे पति, बॉयफ्रेंड, गर्लफ्रेंड से थे और बीवी को बताते थे, उसके सामने बैठ के चैट करते थे। आज मोदी गवर्नमेंट ने वो चीज को औरतों के लिए सिद्ध कर दी है। आज औरत भी वही कर रही है जी। वो भी आजकल बहुत स्टाइल में और ट्रेंड के साथ बॉयफ्रेंड रख रही है और कह रही है, "छोड़ के बता तो मैं तुझे बताती हूं।" वही हो गया कि कहीं ना कहीं यह दुरुपयोग होने की वजह से ही जी। मर्द भी बहुत परेशान हो रहे जी।
इसके अलावा, जाते-जाते, क्योंकि समय कम, जाते-जाते क्या मैसेज होगा आपकी ओर से वूमेंस डे पर? प्लीज पढ़ाइए। एजुकेशन मस्ट जी। आई विल अगेन रिपीट सेम—एक औरत पढ़ती है तो वो पूरे परिवार को पढ़ाती है, चाहे वो छोटी सी बच्ची क्यों न हो। लेकिन एक मर्द पढ़ता है तो वो सिर्फ खुद पढ़ता है। तो एजुकेशन मस्ट। और तो उनको उनका वो दर्जा दीजिए। हर बाप को कहूंगी, जितना बेटे से प्यार करता है बाप, उतना ही बेटी से भी प्यार करना चाहिए बाप को। हर पिता का यह फ़र्ज़ है जी, चाहे वो हिंदू हो या मुसलमान हो, किसी और धर्म के हो। हमारे देश में वो कहते हैं, हमारा देश जो है दुनिया का सबसे बड़ा डेमोक्रेसी है। तो फिलहाल, शबनम शेख हमारे साथ मौजूद थीं, लेडी डॉन के नाम से जानी जाती हैं और दबंग अवतार के लिए काफी मशहूर हैं। शबनम जी, हमसे बात करने के लिए और वूमेंस डे पर यहां हमारे साथ आने के लिए, हमारे स्टूडियो में आने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। तो फिलहाल हमारे इस खास पेशकश में आज के लिए बस इतना ही। तो मुझे, यानी सलामत अली और मेरी पूरी टीम को दीजिए इजाजत। नमस्कार।