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Facebook Ads Mistakes To Avoid In 2025 | #facebookadsmistakes #facebookadscourse #marketingfundas

Marketing Fundas21:58

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आज के इस वीडियो में हम डिस्कस करेंगे व्हाई Facebook एड्स फेल। दोस्तों, 100 में से 90 बार ऐसा होता है कि Facebook के एड्स हमारे परफॉर्म नहीं करते। तो आज हम अपने कंप्लीट एक्सपीरियंस के संग, जो हमने अलग-अलग कंपनीज़ के संग डिजिटल मार्केटिंग की सर्विज देते वक्त सीखा, आज भी हम बहुत सारी प्रॉब्लम्स फेस करते हैं, उनके सॉलशंस निकालते हैं। तो मैं आज आपको वो सबसे इंपॉर्टेंट रीज़ंस बताऊंगा एक-एक करके कि जो आपके Facebook एड्स के फेल होने के कारण बन सकते हैं। और अगर आप Facebook एड्स रन कर रहे हैं और उसमें आपको सक्सेस नहीं मिल रही है तो भी क्या इनमें से कोई ऐसा चीज है? कारण है जो आप कर रहे हैं तो अभी स्टॉप कर दीजिएगा। बिकॉज़ यह वो रीज़ंस हैं जो आपको सिर्फ ऐसी किताब से निकाल के मैं नहीं बता रहा हूं। ऑलरेडी हम सालों सालों से एज अ डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी मल्टीपल ब्रांड्स के लिए अलग-अलग देशों में काम कर रहे हैं। तो जो हमारे पास एक्सपीरियंस है, उस एक्सपीरियंस से मैं आज आपको ये सारे पॉइंट्स शेयर कर रहा हूं। तो बहुत ही इनेटिव वैल्यूुएबल वीडियो है क्योंकि हमारा जो Facebook एड्स का कोर्स है, विद ए बिलकुल लेटेस्ट कोर्स है। उम्मीद करता हूं पूरा कोर्स आपने अच्छे से सीखा होगा। प्रैक्टिस कर रहे होंगे। मगर साथ के साथ कुछ चीजें जानना आपके लिए इंपॉर्टेंट है कि जब आप एड्स रन करें अपने बिजनेस के लिए या किसी और के बिजनेस के लिए तब आप ये गलतियां स्टार्टिंग से ही अवॉइड कर दीजिए ताकि आप अच्छे रिजल्ट्स लेकर आ पाएं। तो दोस्तों आइए शुरुआत करते हैं इस इंपॉर्टेंट वीडियो की और जानते हैं एक-एक करके व्हाई Facebook एड्स फेल सारे रीज़ंस।

फर्स्ट रीज़ स्टिकिंग टू सेम क्रिएटिव। दोस्तों, मैक्सिमम यह देखा गया है कि लोग एक ऐड क्रिएटिव बनाते हैं। चाहे वो वीडियो है, इमेज है, क्राउज़ है और उसी क्रिएटिव पे कई महीनों तक एड्स रन करते रहते हैं। अगर उनको रिजल्ट आ रहा है या कई बार रिजल्ट्स बिलो एवरेज आ रहा होता है तब भी आप सेम क्रिएटिव के ऊपर लोग एड्स चला रहे होते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं। पहला या तो आप वो मेहनत नहीं करना चाहते हो कि बार-बार कौन क्रिएटिव बनाए, बार-बार कौन इतने एफर्ट्स लगाए, कॉस्टिंग लगाए। या फिर आपको उस चीज की नॉलेज नहीं है कि आप किस तरीके के ट्रेंड चल रहा है। किस तरीके का क्रिएटिव बनाना चाहिए? क्या क्रिएटिव बदलने से मेरी परफॉर्मेंस हैंपर हो जाएगी या वो इंप्रूव हो जाएगी? लोगों को इसकी शायद समझ नहीं होती। तो एक बात हमेशा ध्यान रखिएगा कि सबसे बड़ा कारण क्या है कि अगर आप ऐड क्रिएटिव को सेम रखेंगे और वही कैंपेन बार-बार चलने देंगे महीनों तक तो आपकी परफॉर्मेंस डाउन होगी ही होगी। ऐसा हो ही नहीं सकता कि एक क्रिएटिव आप सालों महीनों तक चलाएं और वो आपको परफॉर्मेंस देता रहे। उसका कारण है। आप रियल लाइफ से उसका कारण समझिए कि बड़ी से बड़ी कंपनीज़ भी जब एडवर्टाइजमेंट करती हैं, वह भी नए-नए एड्स बनाती है, ऐड क्रिएटिव्स बनाती हैं। नई-नई चीजें लेकर आती हैं ताकि एक फ्रेशनेस आती है ब्रांड के अंदर, प्रोडक्ट्स में, एक नया नजरिया। ठीक है? तो, यह रिकमेंड करता है Facebook भी कि जब कभी भी आप एड्स रन करें, तो मल्टीपल क्रिएटिव्स का यूज़ करें। मल्टीपल क्रिएटिव्स का मतलब आप वीडियोस भी यूज़ करें, इमेजज़ भी यूज़ करें, क्राउज़र्स भी यूज़ करें। और एक ही ऐड के अंदर अलग-अलग ऐड क्रिएटिव्स का यूज़ करें। मान लीजिए अगर एक ऐड सेट बन रहा है और एक ऐड बन रहा है तो उसके अंदर आप एक ऐड बना सकते हो, इमेजज़ से एक बना सकते हो, वीडियो से एक बना सकते हो, क्राउज़ से। वैसे भी एक एडसेट के अंदर दो या तीन ऐड तो बनते ही हैं। तो इसलिए टाइम टू टाइम आपको ट्रेंड्स के हिसाब से, रिक्वायरमेंट के हिसाब से क्रिएटिव्स बदलने चाहिए। और जो आप कैंपेन रन कर भी रहे हैं, उसमें भी आपको मल्टीपल क्रिएटिव्स या एडसेट्स का यूज़ करना चाहिए।

सेकंड रीज़न लर्निंग फज़। दोस्तों, बहुत से लोग जब एड्स रन करते हैं Facebook पे, तो अगर जो लर्निंग फज़ होता है एक कैंपेन का उसमें रिजल्ट्स नहीं आते या बहुत कम रिजल्ट्स आते हैं, तो वो दो तीन चार दिन के अंदर ही उस कैंपेन को बंद कर देते हैं या जल्द जल्दी से जल्दी उसमें चेंजेस कर देते हैं। मगर एक बात हमेशा ध्यान रखिएगा हर एक चीज़ में जो लर्निंग फज़ होता है, इट टेक्स टाइम। बिकॉज़ वहां पर आपकी सेटिंग्स, डाटा, कैंपेन वार्म अप बहुत सारी चीजें बैक एंड में चल रही होती है जो आपको नहीं पता। तो हमेशा एक प्रो टिप आपको दे रहा हूं। अगर कैंपेन लर्निंग फज़ में है तो उसको कई दिनों तक रन कीजिए। वहां पर जब कन्वर्ज़ंस आ जाए कम से कम 15 20 तो आप वहां पर कुछ ट्वीक चेंजेस या एक्शन लीजिए। क्योंकि दोस्तों अगर कोई भी चीज आपने बनाई और तुरंत ही आप उसको रिजल्ट नहीं दे रहा और आपके एक्सपेक्टेशंस बहुत ज्यादा है और आप फटाफट उसमें चेंजेस करे जा रहे हो या उसको बंद कर रहे हो दोबारा बना रहे हो तो कैसे रिजल्ट्स आएंगे आप कोई भी इवन क्रिकेट का मैच ले लीजिए अगर क्रिकेट मैच में एक क्रिकेटर एक मैच के अंदर परफॉर्म नहीं कर रहा तो क्या टीम उसको उठा के बाहर कर देगी क्या नहीं ना उसको और मौका दिया जाता है ना तो इसलिए लर्निंग फेस का मतलब ही ये है ये हो सकता है कि किसी कैंपेन लर्निंग फज़ में बहुत जल्दी अच्छे रिजल्ट्स आ जाए। किसी में थोड़ा लेट रिजल्ट्स आए। ठीक है? तो इसलिए लर्निंग फज़ में वेट कीजिए कन्वर्ज़ंस का और उसके हिसाब से अपने आगे के एक्शनंस या ऑप्टिमाइजेशनंस वगैरह कीजिए।

थर्ड रीज़ ऐड बहुत अच्छा है। क्रिएटिव बहुत अच्छा है। ऐड कॉपी बहुत अच्छी है। क्लिक्स भी बहुत आ रहे हैं। इंपेशंस भी बहुत आ रहे हैं। बट कन्वर्ज़ नहीं आ रही। क्यों? क्योंकि जब कस्टमर लैंडिंग पेज पे जाता है तो वो इंप्रेस इंप्रेस नहीं होता। उसको वहां वो नहीं मिलता जो एक्सपेक्ट करके वो गया था। दोस्तों, लैंडिंग पेज अगर आपका इंप्रेसिव नहीं बना है। वहां पर पॉइंट टू पॉइंट आपने बात नहीं करी है। वहां पर सही तरह से आपने सीटीए नहीं दिया है तो कन्वर्ज़ंस या तो बहुत कम हो जाएंगे या कन्वर्ज़ंस नहीं आएंगे। इसलिए परफेक्ट लैंडिंग पेज बहुत इंपॉर्टेंट होता है ऐड की क्वालिटी के लिए भी और ऐड की परफॉर्मेंस के लिए भी। बिकॉज़ एंड ऑफ द डे कितना भी अच्छा ऐड बने, कितने भी अच्छे हमारे ऐड के रिजल्ट्स आए बट कन्वर्शनंस आएंगी जब बंदा हमारी वेबसाइट या लैंडिंग पेज पे जाएगा और वो प्रोडक्ट और सर्विस से रिलेटेड वो एग्जैक्ट जो चीज़ देख रहा है उधर वहां उसको मिलेगी सही से सीटीए होगा और वहां पर क्लटर्ड नहीं होगा हमारा लैंडिंग पेज बहुत ही वहां पर यूजर फ्रेंडली तरीके से बनाया होगा रिस्पांसिव होगा ठीक है तो वहां पर बहुत ही कम स्टेप्स में सामने वाला अपना एक्शन ले एक्शन ले सकता है तो बहुत सारी बातों का लैंडिंग पेज में ध्यान रखना पड़ता लेंडिंग पेज हो या वेबसाइट हो हमेशा वो होना चाहिए आपके ऐड से रेलेवेंट। ठीक है?

रॉन्ग ऑडियंस टारगेटिंग मतलब ऑडियंस तो हम टारगेट कर रहे हैं बट हमारी ऑडियंस हमारे लिए परफेक्ट सेगमेंट नहीं है। वो हमारी हाई पोटेंशियल सेगमेंट नहीं है। ऑडियंस टारगेट करने का मतलब ये नहीं होता दोस्तों कि आपको रिजल्ट आ जाएगा। बिकॉज़ देखो मार्केटिंग के अंदर भी सिखाया जाता है कोर मार्केटिंग कांसेप्ट्स का। दूसरा पॉइंट है जो हम पढ़ाते हैं अपने लाइव कोर्सर्सेस के अंदर टीएसपी टारगेट मार्केट मतलब किस लोकेशन के ऊपर आपको टारगेट करना है कहां आपका ऑडियंस है मगर हर टारगेट मार्केट के अंदर सारी ऑडियंस ही तो आपकी सारी पब्लिक तो आपकी ऑडियंस नहीं हो सकती ना तो परफेक्ट सेगमेंटेशन चूज़ करना राइट ऑडियंस चूज़ करना ठीक है बहुत ज्यादा ब्रॉड ऑडियंस ना लेना तो आपको मैं एक बहुत प्रो टिप देने जा रहा हूं देखो ऑडियंस कभी भी टारगेट करो एक तो बहुत ब्रॉड नहीं होनी चाहिए मान लो मेरा डिजिटल मार्केटिंग का कोर्स है। एक एग्जांपल से समझना। तो डिजिटल मार्केटिंग के कोर्स को मेरे को सेल करना है। तो क्या मैं अपनी ऑडियंस टारगेटिंग के अंदर लिख दूं? डिजिटल मार्केटिंग में जो इंटरेस्ट रखते हैं वो मेरी ऑडियंस है। अगर मैं वो क्लिक कर दूं तो करोड़ों करोड़ों करोड़ों ऑडियंस आ जाएगी जो Facebook में डिजिटल मार्केटिंग में इंटरेस्ट रखते हैं। तो क्या सारी मेरी ऑडियंस है? क्या मेरे को सबको ऐड दिखाना चाहिए? बिल्कुल भी नहीं। क्योंकि डिजिटल मार्केटिंग में इंटरेस्ट आजकल हर कोई रखता है। चाहे वो पढ़ने के लिए रख रहा है, चाहे वो कुछ अपडेट के लिए रख रहा है। मगर वो जरूरी तो नहीं मेरा कोर्स बाय करेगा। तो इसलिए वहां पर भी अगर मैं ब्रॉड ऑडियंस टारगेट करूंगा तो मेरा पैसा वेस्ट होगा। तो ब्रॉड ऑडियंस को नैरो डाउन करना पड़ता है कि भाई डिजिटल मार्केटिंग के अंदर जो एसइओ कर रहा है या डिजिटल मार्केटिंग के अंदर कोई परफॉर्मेंस मार्केटर है या पेड ऐड स्पेशलिस्ट है या फिर जॉब टाइटल्स के अंदर जो लोग एमबीए मार्केटिंग में कर रहे हैं बीबीए मार्केटिंग में कर रहे हैं या कंपनीज़ के अंदर जो लोग सेल्स के अंदर हैं, मार्केटिंग के अंदर एडवरटाइजिंग के अंदर है उनको स्पेसिफिक मेरा स्पेसिफिकली मेरा ऐड दिखे तो उस ऑडियंस को मैं टारगेट करूंगा बेसिकली वो मेरा हाई पोटेंशियल ऑडियंस होता है। तो सिर्फ ऑडियंस टारगेट करने से कुछ नहीं होगा। परफेक्ट ऑडियंस राइट सेगमेंट को टारगेट करना जरूरी है। इफ यू वांट रिजल्ट्स।

फिफ्थ रीज़न इनकरेक्ट ऑब्जेक्टिव या हम कह सकते हैं सही ऑब्जेक्टिव ना चूज़ करना भी कारण हो सकता है कि हमें डिजायर्ड रिजल्ट्स ना आए। जो रिजल्ट्स हम चाहते हैं एक्सपेक्ट कर रहे हैं वो हमें ना आए। दोस्तों देखिए अगर ऑब्जेक्टिव्स चूज़ करना इंपॉर्टेंट नहीं होता तो सबसे पहला स्टेप ही किसी भी कैंपेन का ऑब्जेक्टिव चूज़ करना क्यों होता? क्योंकि आप कोई भी कैंपेन रन करने जा रहे हो Facebook के ऊपर तो सबसे पहला उसके अंदर पड़ाव क्या आता है कि आप बताइए Facebook को कि आप ये कैंपेन क्यों चाह रहे हो? सिर्फ अवेयरनेस और रीच के लिए चाह रहे हो या आप इससे लीड जनरेट करना चाहते हो या ज्यादा से ज्यादा ट्रैफिक लेकर आना चाहते हो या आप सेल्स चाहते हो, एंगेजमेंट चाहते हो या कुछ और। तो दोस्तों, मैक्सिमम लोग राइट ऑब्जेक्टिव चूज़ नहीं करते हैं। अकॉर्डिंग टू व्हाट रिजल्ट्स दे आर एक्सपेक्टिंग। तो हमेशा इस बात को ध्यान रखिएगा। ऑब्जेक्टिव सही चूज़ करेंगे तो सही मैसेज जाएगा कैंपेन बनाने के वक्त Facebook के एआई सिस्टम को।

सिक्स्थ रीज़ दोस्तों हमेशा इस बात का ध्यान रखिएगा कि जो बजट है जो आप डेली बजट अपने ऐड में लगा रहे हैं वो आप हमेशा कम लोअर साइड मत रखिए। क्योंकि कई बार क्या देखा गया है कि लोग जो आपको पढ़ा रहे हैं, सिखा रहे हैं वो बोलते हैं कि बजट स्टार्टिंग में बहुत कम रखो, बहुत कम रखो। दोस्तों, देखिए वो अगर आपकी मजबूरी है तो बात अलग है। मगर हमेशा बजट को लोअर साइड रखना आपके कैंपेन की परफॉर्मेंस को हैंपर करेगा ही करेगा। बिकॉज़ आपको नहीं पता कि आप जिस इंडस्ट्री के लिए काम कर रहे हैं, अगर आपको एक्सपीरियंस नहीं है कैंपेन चलाने का। ये मैं तब कह रहा हूं अगर आप एक बिगिनर हैं। ठीक है? तो वहां पर जब आप हो सकता है एक फ्रीलांसर हैं, मल्टीपल अलग-अलग क्लाइंट्स हैं आपके पास। अलग-अलग इंडस्ट्री के क्लाइंट्स हैं तो आपको नहीं आईडिया है कि इस इंडस्ट्री के अंदर कितना बजट डेली लगना चाहिए। ऑन एन एवरेज क्या कॉस्टिंग आएगी। तो वहां पर लोअर साइड पे बजट रखना इज़ नॉट अ गुड साइन। बिकॉज़ उससे क्या होगा कि अगर आप कैंपेन तो बहुत बढ़िया बना रहे हो बट बजट बहुत लोअर साइड है। तो अगर वो जो उसकी जो बिडिंग ही मीट नहीं हो रही है। ठीक है? उसमें उस पे जो कॉस्टिंग लगनी चाहिए वो सही से नहीं लग पा रही है तो जो आपके कॉम्पिटिटर्स हैं उनके ऐड ज्यादा शो होंगे। आपका ऐड कम शो होगा। उसको विज़िबिलिटी कम मिलेगी। तो रिजल्ट कैसा आएगा? तो हमेशा ध्यान रखिएगा। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि बजट को टू हाई रखिए। मगर एक डिसेंट जो अमाउंट होता है एज कंपेयर टू अब आप अब देखो ब्रांड अवेयरनेस कैंपेन चला रहे हो तो ऑब्वियसली बजट आप थोड़ा सा लोअर साइड रख सकते हो बट आप लीड जनरेशन चला रहे हो आप सेल्स कैंपेन चला रहे हो तो वहां पर बजट थोड़े से हायर साइड होंगे आप दोनों टाइप के एंगेजमेंट ब्रांड अवेयरनेस रीच जो इस तरीके के कैंपेन होते हैं यहां पर बजट दिन का 500 वगैरह या 50000 काम चल जाता है। ठीक है? लोग तो पहले क्योंकि पहले इतना एक्सपेंसिव नहीं हुआ करता था क्योंकि हम तो 10ों साल से ऐड चला रहे हैं। तो उस समय क्या होता था कि जो कैंपेन वगैरह में अगर हम ₹500 की जगह ₹1200 भी लगा देते तो Facebook ऐड चल जाते बट आज क्योंकि बडिंग और सारी कॉस्टिंग हाई हो चुकी है तो इस समय ₹150 में कोई काम होता नहीं है। तो अगर आप अवेयरनेस रीच और इंगेजमेंट जैसे कैंपेन चला रहे हो तो वहां पर ₹500 ₹1000 पर डे का एनफ होता है। टू स्टार्ट विद मैं ये नहीं कह रहा हूं कि मतलब कि उससे ज्यादा लगाना ही नहीं है। मैं ये कह रहा हूं टू स्टार्ट विद अगर आप लोअर साइड रहना चाहते हो। मगर अगर आप सेल्स कैंपेन चला रहे हो, आप लीड जनरेशन कैंपेन चला रहे हो तो वहां पर कम से कम 1000, 2000, 3000 डेली का बजट होना चाहिए। डिपेंड करता है कि आप किस पर्टिकुलर नीश या कैटेगरी के लिए ऐड चला रहे हो। क्योंकि कुछ नीश के अंदर कंपटीशन बहुत ज्यादा होता है। बिटिंग्स वगैरह हाई होती है। कॉस्टिंग ज्यादा होती है। कुछ नीश के अंदर कम होती है। तो ये तो आपको डिसाइड करना है कि आपका नीश कौन सा है। उसके लिए थोड़ा रिसर्च करो। कॉम्पिटिटर्स के ऐड देखो। ठीक है? तो और कुछ हमारे जैसे चैनल्स वगैरह को भी देखो तो आपको पूरा आईडिया लग जाएगा कि किस तरीके से आपको एक परफेक्ट शुरुआत करनी है।

सेवंथ रीज़ पुअर ट्रैकिंग। दोस्तों, सिर्फ कैंपेन चलाने से और रिजल्ट लाने से आप कभी भी बिज़नेस को स्केल नहीं कर पाओगे। अगर आपने अपने एड्स की या अपने एड्स के परफॉर्मेंस की ट्रैकिंग सही से नहीं करी है। ठीक है? चाहे आपके ऐड की ट्रैकिंग है, आपकी वेबसाइट पे जो ट्रैफिक आ रहा है उसकी ट्रैकिंग है, जो रिजल्ट्स आ रहे हैं, उसकी ट्रैकिंग है। अगर आपकी ट्रैकिंग में कमी है तो आपके जो एड्स की जो ऑप्टिमाइजेशन है या आपकी अलग ट्रेंड के हिसाब से या आने वाले टाइम के हिसाब से जो स्ट्रेटजी बदलनी होती है। ठीक है? ताकि आप इंप्रूव कर सको अपने एड्स को, उनके रिजल्ट्स को बेहतर कर सको, ऑप्टिमाइज कर सको। ठीक है? स्केल अप कर सको। वो नहीं हो पाएगा अगर आप सही से ट्रैकिंग नहीं करते या आपको ट्रैकिंग एनालिटिक्स वगैरह मैनेज या चेक करना नहीं आता है। तो इसलिए ट्रैकिंग सही से होना एनालिटिक्स सही से आपको समझ आना चाहिए। आपको करना आना चाहिए। कैसे एनालिटिक्स को यूज़ करते हैं। अगर यहां पर आपका वीक पॉइंट है तो इसको स्ट्रांग कर लीजिए। बिकॉज़ विदाउट रैकिंग विदाउट एनालिटिक्स आप चीजों को ग्रो नहीं कर पाओगे। स्केल नहीं कर पाओगे।

एट्थ रीजन है नॉट सेटिंग अप पिक्सल करेक्टली या कई बार देखा गया है कि लोग पिक्सल लगाए बिना ही ऐड चला रहे हैं। दोस्तों देखिए अगर आपको किसी भी प्लेटफार्म के ऊपर स्केल करना है चाहे वो Google Facebook या Lindin है कोई भी प्लेटफार्म अगर उसका ट्रैकिंग कोड pixels कुछ भी आप बोल लीजिए हर अलग-अलग प्लेटफार्म ने अलग नाम दे रखा है। अगर आपने अपनी वेबसाइट ऐप या लेंडिंग पेज में पिक्सेल्स नहीं इनकर्पोरेट करे ऐड करे सही से और वह सही से ट्रैक नहीं कर पा रहे हैं तो आपको जो रिजल्ट्स आने हैं वो कभी भी वैसे नहीं आएंगे जो आप सोच सकते हैं और कई तरीके के कैंपेन तो आप चला ही नहीं सकते। जैसे री मार्केटिंग या रीिटारगेटिंग कैंपेन नहीं चल सकता अगर पिक्सल नहीं लगा हुआ या फिर आप लगा लीजिए कि अगर आपको सेल एड्स की ट्रैकिंग करनी है वो आप नहीं कर सकते हो। ठीक है? आप लीड जनरेशन की ट्रैकिंग नहीं कर सकते हो। आप इवेंट सेटअप नहीं कर सकते हो। पर्टिकुलरली आपको इवेंट सेट करना चाहते हो। उनको ट्रैक करना चाहते हो तो पिक्सल्स लगाना बहुत इंपॉर्टेंट है अगर आप Facebook एड्स रन कर रहे हो तो।

नाइंथ दोस्तों ऐड कॉपी वन ऑफ़ द मोस्टेंट फैक्टर्स अगर आपको अपने जो यूज़र्स हैं आप चाहते हो कि वो आपके ऐड पे क्लिक करें वो वहां से आपकी लैंडिंग पेज पे जाएं तो ऐड कॉपी बहुत स्ट्रांग होनी चाहिए। आई कैंची होनी चाहिए। दोस्तों अगर क्रिएटिव बहुत बढ़िया है तो क्या ये गारंटी है कि आपका जो कंप्लीट ऐड है वो बहुत बढ़िया परफॉर्म करेगा? नहीं। बिकॉज़ ऐड कॉपी भी उतनी इंपॉर्टेंट है जितना इंपॉर्टेंट आपका ऐड क्रिएटिव है। ऐड क्रिएटिव मतलब वीडियो इमेज या क्राउज़। मगर ऐड कॉपी वो टेक्स्ट वो कैप्शंस लाइक प्राइमरी टेक्स्ट हेडलाइंस हमारी डिस्क्रिप्शंस जहां पर हम अपने पर्टिकुलर ऐड या प्रोडक्ट या ब्रांड के बारे में या उस कैंपेन के बारे में बताते हैं ऑफर के बारे में बताते हैं। ठीक है? उससे रिलेटेड हम डिस्काउंट्स बताते हैं। उससे रिलेटेड हमारी यूएसपीस बताते हैं। ठीक है? और रीज़ंस देते हैं। क्यों आप हमारे इस ऐड पे क्लिक करो। तो अगर ऐड कॉपी बहुत स्ट्रांग बनाई है। बिल्कुल उसमें अच्छे से कॉपीराइटिंग करी गई है। ठीक है? कॉमटीटर से बेहतर है तो वो आपके ऐड क्रिएटिव के जो कन्वर्शनंस के रेश्यो है उसको बढ़ा देगी। आपके रिजल्ट्स को बेहतर कर देगी। और हमेशा ध्यान रखिएगा जब कभी भी कैंपेन बनाते हैं जैसे कि मैंने आपको Facebook एड्स बनाना सिखाया, एक-एक कैंपेन बनाना सिखाया। हमेशा मैंने आपको यह टिप दी है कि जब कभी भी आप ऐड कॉपी के अंदर प्राइमरी टेक्स्ट, हेडलाइंस या डिस्क्रिप्शनंस ऐड करो। तो वो हमेशा टॉप क्वालिटी का कंटेंट होना चाहिए। कम शब्दों में ज्यादा बात होनी चाहिए और मल्टीपल होना चाहिए कि एक अगर आप ऐड बना रहे हो तो उसके अंदर जो भी क्रिएटिव आप यूज़ कर रहे हो चाहे वो वीडियो है चाहे इमेज है उसके संग मल्टीपल प्राइमरी टेक्स्ट मल्टीपल हेडलाइंस मल्टीपल डिस्क्रिप्शन होना चाहिए सो दैट कि वहां पर एबी टेस्टिंग हो सके जब आपका ऐड चल रहा है वो अलग-अलग कॉपी ऐड कॉपीज़ के संग आपके क्रिएटिव्स को शो करेगा तो जो ऐड कॉपी ज्यादा परफॉर्म करेगी आपके क्रिएटिव के संग उसको पर्टिकुलरली वो ज्यादा बूस्ट करेगा और आपके लिए बेहतर रिजल्ट्स लेकर आएगा। क्योंकि सारी ऑप्टिमाइजेशन, सारी टेस्टिंग एi खुद नहीं कर सकता जब तक आप उसको इनपुट नहीं दोगे। अच्छा क्वालिटी क्रिएटिव या ऐड कॉपी नहीं दोगे।

10थ हमारा जो पॉइंट है बहुत ही इंपॉर्टेंट है और ये एक्सपीरियंस्ड लोगों को इस बात के बारे में पूरा तजुर्बा होगा। दोस्तों रॉन्ग टाइमिंग आप कितना भी बढ़िया ऐड चला लो। अगर आपके ऐड चलाने की टाइमिंग गलत है तो आपको रिजल्ट्स कभी आ ही नहीं सकते। अब ये अलग-अलग तरीके से एग्जांपल से आप समझो। मान लीजिए आपका कोचिंग सेंटर है और इस तरीके की आप कोचिंग प्रोवाइड करते हो जो पूरे साल नहीं चलती वो एक पर्टिकुलर सीजन पे चलती है। अब अगर आप सीजन पे कैंपेन रन करोगे तो रिजल्ट्स अलग आएंगे और जब उनका ऑफ सीजन होता है जब बच्चे होते ही नहीं है उस पर्टिकुलर कोचिंग के लिए अवेलेबल तो आपको कहां से रिजल्ट्स आएंगे? हम बात करते हैं विंटर के कपड़ों की। एग्जांपल ले लेते हैं। आप सर्दियों के कपड़ों की सेल लेकर आनी है। आपकी वेबसाइट पे जैकेट और अलग-अलग तरीके के विंटर के कपड़े बेचने हैं। तो गर्मियों के अंदर अगर आप ऐड चलाओगे तो कहां से रिजल्ट लेकर आ जाओगे? गर्मियों के कपड़ों में अगर सर्दियों में ऐड चलाओगे तो कैसे रिजल्ट्स आ जाएंगे? तो अलग-अलग नेचर ऑफ़ बिज़नेस के हिसाब से टाइमिंग भी मैटर करती है। और अगर मान लीजिए आपका ऐसा कोई बिज़नेस है जो 12 महीने चलता है। मगर कौन से ऐसे दिन हैं जब आपको ज्यादा बेटर रिजल्ट्स आते हैं। जब आपकी ऑडियंस ज्यादा एक्टिव होती है। कौन से ऐसे टाइम है जब वो ज्यादा एक्टिव होती है। तो उन डज़ और उन टाइम को भी आपको कंसीडर करना पड़ेगा कि उसी टाइम में आपका जो ऐड स्पेंट है, बजट खर्च हो तब आपके ऐड दिखे। तब आपकी ज्यादा ऑडियंस एक्टिव होगी। वो दिन आपके लिए बेस्ट है। तो बाकी के दिन या बाकी के टाइमिंग्स को आप एक्सक्लूड कर दो क्योंकि आपका पैसा लिमिटेड होता है। तो जिस दिन या जिस टाइम पे हमारा ऐड चलाने का फायदा ही नहीं है तो हम उसको खर्च क्यों करें? तो बजट ऑप्टिमाइजेशन की बेस्ट टेक्निक है। और आप हम कितनी भी कोशिश कर लें अगर राइट टाइम पे हम राइट चीज नहीं चला रहे तो कभी भी रिजल्ट्स नहीं आएंगे। जैसे मैंने आपको कपड़ों का बताया, कोचिंग का बताया। अब इसमें एक चीज़ मैं आपको और ऐड ऑन करना चाहता हूं राइट टाइमिंग के अंदर। कि दोस्तों जब कभी भी आप एड्स रन करते हो। ठीक है? आप बहुत अब टाइमिंग सिर्फ यहां मैटर नहीं करती जो मैं आपको एग्जांपल्स दे रहा हूं। सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट ये भी है कि जब आप अपने कोई ऑफर्स लेकर आते हो, स्पेशल सेल लेकर आते हो, तब आप किस तरीके से किस तरह से आप क्या कहते हैं? अपने डज़ को मैनेज करोगे, टाइम को मैनेज करोगे। बिकॉज़ आप सेल तो बहुत बढ़िया लेकर आ रहे हो। मगर आपने सही दिन ही नहीं चुना। ठीक है? आपका ऑफर तो बहुत बढ़िया है मगर आपने राइट टाइम ही नहीं चुना यह सेल्स किस तरीके से लगानी चाहिए। तो दोस्तों ये भी बहुत ज्यादा मैटर करता है। चाहे हमारा जो बिज़नेस है वह सीजनल टाइप का बिज़नेस है या हमारे बिज़नेस तो 12 महीनों का है बट वह 12 महीनों के अंदर कौन से डज़ और टाइम्स को एक्सक्लूड करना है या फिर अगर हमें स्पेशल सेल्स लेकर आनी है स्पेशल मतलब ओकेज़ंस के ऊपर लानी है या डज़ के ऊपर लानी है या हफ्ते में लानी है तो किस दिन लानी है कैसे लेकर आनी है ठीक है कितने देर के लिए लेकर आनी है लोगों को ये भी आईडिया नहीं होता बिकॉज़ उनको एक्सपीरियंस नहीं होता जो कि समय के संग आता है तो ये सब चीज़ ही हम हम आपको अपने कोर्स के अंदर सिखाते हैं और बताते हैं।

अब दोस्तों बात करेंगे हमारे लास्ट और 11थ पॉइंट के बारे में जो कि है ऑफर्स। दोस्तों, मैं अपनी मार्केटिंग की क्लासेस में ऑफर्स के बारे में बहुत समझाता हूं। दोस्तों ऐसा पिछले रिसेंट कई सालों में डिजिटल मार्केटिंग में देखा गया है कि कुछ नई कंपनीज आई और उन्होंने अपने ऑफर्स के बेसिस पे बड़ी से बड़ी कंपनियों की सेल्स को टक्कर दी जो 10ों 20ों साल से मार्केट के अंदर अपना नाम बना के बैठी हैं। बिकॉज़ ऑफर अगर आप सिर्फ नॉर्मल ऐड के अंदर एक ऑफर चला दो कि अप टू 50% ऑफ अप टू 100% ऑफ अप टू सॉरी 80% ऑफ। अब आप फिजिकल मार्केट में भी घूमने जाते हो तब शोरूम के बाहर लिखा होता है अप टू 70% ऑफ आप बहुत सारे दिन में ऐड देखते हो लिखा होता है अप टू 70% ऑफ 80% ऑफ तो आप क्या सब पे क्लिक कर देते हो सारे शोरूम में चले जाते हो नहीं दोस्तों ऑफर इतना सॉलिड होना चाहिए कि सामने वाला मना ही ना कर सके यार एक बारी जाके देखो तो सही ऐसा क्या ऑफर मिल रहा है ठीक है कहीं मेरे से मिस ना हो जाए तो ऑफर्स बनाना ऑफरिंग बनाना ही अपने आप में एक चैलेंज है अपने आप में एक कला है कि हम कैसे मार्केट में जो हमारे कॉम्पटीिटर्स दे रहे हैं उनसे बेहतर ऑफर दें। बेहतर उसको तरीके से प्रेजेंट करें कि हमारा ऑडियंस जो है वह एक बार तो हमारे ऐड के ऊपर क्लिक करें। तो ऑफरिंग या ऑफर बनाना इट्स अ चैलेंज और इट्स अ आर्ट। अगर यह आपको आ गई, तो आप कम पैसों में भी अपने कॉम्पिटिट से ज्यादा बेहतर रिजल्ट्स लेकर आ सकते हो।

दोस्तों, कैसा लगा यह वीडियो? उम्मीद करता हूं कि आज आपको सारे ज्यादातर रीज़ंस पता लगे होंगे जो Facebook एड्स को जिससे Facebook एड्स फेल हो जाता है या लोगों को फेलियर का सामना करना पड़ता है या वो रिजल्ट्स नहीं लेकर आ पाते हैं। उम्मीद करता हूं अब इन सब चीजों को आप प्रैक्टिकली अपने एड्स के अंदर उतारोगे, सीखोगे, इंप्लीमेंट करोगे और अपने एड्स में रिजल्ट लेकर आओगे और एक बेहतर एड्स स्पेशलिस्ट बनोगे। थैंक यू दोस्तों।