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अगर तुम्हारी भी मेमोरी वीक है। मान लो कल तुम्हारा एग्जाम है। उसके लिए तुम पढ़ते बहुत हो। रात के 12:00 बजे तक तुम अपनी पढ़ाई खत्म करते हो और तुम सो जाते हो। अब सुबह तुम एग्जाम देने जाते हो और वहां तुम देखते हो कि तुम आधी चीजें भूल चुके हो।
अभी मेरे एग्जाम्स चल रहे हैं और तुम में से भी काफी लोगों के एग्जाम्स चल रहे होंगे। हम में से कई लोग और पहले मैं भी चीजों को याद करने के लिए सिर्फ उन्हें रटता था। चीजों को बार-बार दिमाग में रिपीट करते रहना जब तक वह हमें याद नहीं हो जाती। यह एक काफी कॉमन तरीका है जिससे मैक्सिमम लोग चीजों को याद करते हैं। लेकिन यह तरीका बिल्कुल बेकार है।
उसके अलावा तुमने नोटिस किया होगा कि जैसे हमारी ऐज बढ़ती है, वैसे हमारी मेमोरी पावर घटते चले जाती है। 40-50 साल की ऐज में लोगों को दूसरों के नाम नहीं याद रहते। लेकिन 10-12 साल की ऐज में तुम मुश्किल से मुश्किल चीजों को आसानी से याद कर पाते थे। जबकि उस टाइम तुम्हारा दिमाग पूरा डेवलप नहीं हुआ था। वो उस टाइम भी ग्रो कर रहा था।
तुमने YouTube पर उन लोगों की वीडियोस देखी होगी जो कुछ सेकंड्स में ही 50 नंबर याद कर लेते हैं। वह भी एक सीक्वेंस में या पूरे 50 कार्ड्स के नेम को कुछ सेकंड में मेमोराइज कर लेते हैं। तुमने जरूर ऐसी कोई वीडियो देखी होगी। और यह होते हैं मेमोरी एथलीट्स।
देखो हमारे ब्रेन में दो टाइप की मेमोरी होती है। शॉर्ट टर्म मेमोरी और लॉन्ग टर्म मेमोरी। और यह जो मेमोरी एथलीट्स होते हैं इनकी शॉर्ट टर्म मेमोरी अच्छी होती है। अगर उन्हीं मेमोरी एथलीट्स से तुम अगले दिन उन 50 कार्ड्स के बारे में पूछोगे तो वह नहीं बता पाएंगे क्योंकि उनका पूरा गेम शॉर्ट टर्म होता है। वो चीजों को कुछ घंटों या कुछ मिनट्स के लिए याद कर पाते हैं। लेकिन हमें फोकस करना है लॉन्ग टर्म मेमोरी पर। और अगर सच बताऊं तो इस टाइम तुम्हारी शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म मेमोरी में से दोनों ही अच्छी नहीं है। एटलीस्ट मैक्सिमम लोगों की तो बिलो एवरेज है।
हमारे ब्रेन में एबिलिटी है कई सारी चीजों को साथ में याद रखने की। लेकिन आज के टाइम पर हमारा ब्रेन वीक और स्लो हो चुका है। देखो मेमोरी को लेकर जो बेसिक्स हैं मैंने वो इस वीडियो में बताए हैं। और इसमें सिर्फ बेसिक्स नहीं है। इसमें कई चीजें बहुत इंपॉर्टेंट है। फिर भी मैं एक बार रिकैप दे देता हूं।
देखो ऐसा नहीं होगा कि इस वीडियो के बाद तुम कोई वीडियो देखो ही ना या सोशल मीडिया यूज करना ही बंद कर दो। लेकिन तुम्हें शॉर्ट्स की जगह लॉन्ग फॉर्म वीडियो देखनी है। क्योंकि शॉर्ट्स में लगातार तुम्हारे दिमाग में फालतू की चीजें स्टोर होती हैं। और इससे तुम्हारा अटेंशन स्पैन भी खत्म हो जाता है। उसके अलावा तुम्हें हफ्ते में चार दिन कम से कम वर्कआउट करना है। मतलब कोई फिजिकल एक्टिविटी करनी है। अब चाहे तुम रनिंग पर जा सकते हो या सच में कोई वर्कआउट या स्ट्रेंथ रूटीन फॉलो कर सकते हो।
अब बात करते हैं कुछ नई चीजों की। इसके अलावा क्या तुम्हें पता है कि जिस परफेक्ट मेमोरी को हम चेस कर रहे हैं, वह एक्चुअल में एक डिजीज है। एचएसएएम। यह एक ऐसा डिजीज है जिससे तुम जो चीज देखोगे, तुम उसे परमानेंटली याद कर लोगे। सोचो कैसा होगा किसी चीज को देखना और उसे देखते ही दिमाग में स्टोर कर लेना। अब यह सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन यह उतना भी कुछ काम का नहीं है।
देखो, हमारे साथ सिर्फ अच्छी चीजें नहीं होती है। देखो, हम सबके पास कुछ बुरी मेमोरीज भी होती हैं। क्योंकि लाइफ में अच्छे और बुरे का साइकिल चलता रहता है। और जब हम बुरी मेमोरीज को भूलते हैं, तभी हम अच्छी मेमोरीज बनाने पर ध्यान देते हैं। यानी प्रेजेंट में फोकस करते हैं। लेकिन कोई ऐसा इंसान जो चीजों को भूल ही नहीं सकता, उसके दिमाग में हमेशा कुछ ना कुछ चलता रहेगा क्योंकि वह चीजों को भूल ही नहीं सकता।
पॉइंट नंबर वन लेयर्स। अगर तुमने मेरी पुरानी वीडियो देखी है तो तुम्हें पता होगा कि हमारे ब्रेन में मेमोरीज की लेयर होती हैं। मतलब अगर तुमने 1 घंटे पढ़ाई की तो उसकी अलग लेयर। उसके बाद अगर तुमने 2 घंटे शॉट्स या रील्स देखे तो उसकी एक अलग लेयर तुम्हारी पढ़ाई वाली लेयर के ऊपर आ जाएगी। तो अब तुम्हारी पढ़ाई वाली लेयर नीचे आ गई है। तो तुमने जो भी चीजें पढ़ी हैं उनमें से तुम कुछ चीजें भूल जाओगे। क्योंकि ब्रेन को फर्क नहीं पड़ता कि जरूरी क्या है।
अगर तुम्हें किसी भी चीज में आगे बढ़ना है तो तुम्हें उस पर फोकस करना है। तुम्हारा सारा फोकस उसी पर होना चाहिए। ऐसी लाइंस तुमने सुनी होगी और यह सुनने में काफी नॉर्मल लगती हैं। सोचो अगर तुमने ज्यादातर टाइम अपना पढ़ने में बिताया है तो तुम्हारे ब्रेन में पूरी मेमोरी भी सिर्फ पढ़ने की ही है। ऐसे में अगर तुम कुछ सोचोगे भी तो हो सकता है वह पढ़ाई के रिलेटेड ही हो।
इसके अलावा हमारा ब्रेन इस कैपेबल है कि वह पैटर्न को रिकॉग्नाइज कर पाए। अगर तुम चीजों को एक दूसरे से पैटर्न बना के यानी कि कनेक्ट करके पढ़ोगे तो तुम्हारे ब्रेन के लिए उन्हें स्टोर करना आसान हो जाएगा। यानी कि अब वो टॉपिक भूलने के पहले तुम्हें उनके बीच का पैटर्न भूलना होगा जो कि तुम कभी भूलोगे ही नहीं अगर तुम फालतू की चीजें अपने दिमाग में स्टोर ना करो। जैसा कि मैंने पहले भी बोला है अगर तुमने पढ़ाई करके 200 शॉट्स देख लिए तो तुम्हारी पढ़ाई वाली चीज 200 लेयर्स नीचे चली गई है।
एक तो हम जब चीजों को सिर्फ बार-बार लगातार रटने की कोशिश करते हैं तो हम उसमें नॉर्मली क्रिटिकल थिंकिंग का यूज़ नहीं करते और ना ही कोई पैटर्न बनाते हैं। लेकिन तुम्हें ऐसा बिल्कुल नहीं करना है।
अब अगला पॉइंट काफी आसान है लेकिन सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है। पॉइंट नंबर टू रिफ्लेक्शन। इसमें बस रात में तुम्हें सोने से पहले सोचना है कि तुमने दिन भर में क्या कुछ किया है। मतलब सोने के पहले सेल्फ रिफ्लेक्शन करना है। तुम्हें हर एक डिटेल सोचनी है कि तुमने कोई काम कैसे किया और कैसे तुम उसे अलग तरीके से कर सकते थे। और देखो इससे चेंज आने में तुम्हें महीनों लगेंगे क्योंकि तुम्हें चेंज भी लॉन्ग टर्म चाहिए। वैसे भी कई लोग सोने के पहले फालतू की ओवरथिंकिंग करते हैं। तो उससे अच्छा तुम अपने दिन के बारे में सोच सकते हो। बाकी कहना मेरा काम था करना तुम्हारी मर्जी है।
लर्न इन रिदम। यह तीसरा पॉइंट है और तुमने नोटिस किया होगा कि कई बार जब हम कोई गाना सुनते हैं तो उसे याद करना हमारे लिए काफी आसान होता है। और इस चीज से शायद काफी लोग रिलेट कर पा रहे होंगे कि सॉन्ग्स को याद करना काफी आसान है। कंपेयर टू तुम्हारे जो भी क्वेश्चन आंसर्स होते हैं। क्योंकि सॉन्ग्स एक रिदम में है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि तुम्हें क्वेश्चन आंसर्स को गाने में कन्वर्ट करना है।
मैं इसे समझाने के लिए तुम्हें अपना साइकिल बताता हूं। मैं क्या करता हूं चीजों को याद करने के लिए? मैं रात में देर तक पढ़ता हूं और फिर सो जाता हूं। सुबह उठने के बाद मैं उस चीज को रिवाइज करता हूं। रिवाइज करने के बाद या तो तुम दोबारा सो सकते हो या अपना कोई भी काम कर सकते हो जो भी तुम दिन में करते हो।
देखो यह सब करने से तुम्हारी मेमोरी, पावर और इंटेलिजेंस स्ट्रांग होगा। लेकिन इसके अलावा भी एक चीज है जो तुम कर सकते हो अपने ब्रेन में किसी भी चीज को परमानेंटली स्टोर करने के लिए। मतलब तुम्हें सुबह चीजों को रिवाइज करने के बाद ही या तो कॉफी पीनी है और या तो कोल्ड शावर लेना है। देखो कॉफी में कैफीन होता है जिससे हमारा एड्रेनालाईन स्पाइक होता है। वैसे यह सुबह कोल्ड शावर लेने से कई लोगों की तबीयत खराब हो सकती है। तो कॉफी वाला ऑप्शन बेटर है। और उसके अलावा जब भी तुम पढ़ते हो उस टाइम तुम कैफीन कंज्यूम कर सकते हो अपना फोकस बढ़ाने के लिए। लेकिन तुम्हें हमेशा कैफीन सोने से कई घंटे पहले कंज्यूम करना है। वरना तुम्हें सोने में दिक्कत हो सकती है।
लेकिन पर्सनली मेरी नींद बहुत खतरनाक है। मुझे अगर अपनी नींद को खत्म करना है तो मुझे बहुत ज्यादा अमाउंट में कैफीन को कंज्यूम करना पड़ता है। मतलब मुझे दो या तीन कप कॉफी एक साथ पीनी पड़ती है ताकि मुझे नींद ना आए। और मैंने पर्सनली खुद तो कई बार रात में भी कॉफी पी है। लेकिन मुझे फिर भी नींद आ जाती थी। लेकिन तुम में से कई लोगों को इससे सोने में दिक्कत होगी क्योंकि तुम्हें रात में कोई फोकस नहीं करना है। इसीलिए रात में कॉफी मत कंज्यूम करना।
बाकी मुझे बताओ कि क्या तुम्हारे भी एग्जाम्स चल रहे हैं और मैं सोच रहा था स्टडी के ऊपर एक प्रॉपर गाइड बनाने की जो मैं अभी फॉलो कर रहा हूं। बाकी मेरी गट फीलिंग कह रही है कि हम सेप्टेंबर तक 100 के क्रॉस कर जाएंगे। तो सब्सक्राइब कर सकते हो। बाकी यह है मेमोरी वाली वीडियो का फर्स्ट पार्ट और अगर अब तुमने सब्सक्राइब कर दिया है तो हम दोबारा मिलेंगे। नहीं तो शायद ही हमारी आखिरी मुलाकात थी। बाय-बाय।