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Ek Shahzada Aur Ek Naag Ka Ajeebo Ghareeb Qissa || Moral Stories in Urdu & Hindi

VibeElevate32:21

Transcription

पिछले जमाने की बात है कि सुल्तान हारून अल मंसूर औलाद ना होने की वजह से बहुत उदास और गमगीन रहता था।

अगरचे उसने तीन शादियां की थी मगर उसके दिल की कली ना खुली और वह अक्सर सोचा करता था कि मेरे मरने के बाद मेरे दुश्मन तीनों बीवियों और रैया के साथ ना जाने क्या सुलूक करेंगे और किस तरह इस सल्तनत को कायम रखी के सुल्तान का यह गम किसी से छुपा हुआ ना था। वजीरों और दरबारियों के अलावा रैया भी जानती थी कि वह औलाद के लिए दिन रात तड़पता है। दुआएं मांगता है। फकीरों और दरवेशों के पास जाता है। मजारों पर चादर चढ़ाता है और दरगाह में अपने हाथों से झाड़ू देता है।

इसी ममलक में एक मशहूर नजूमी खबीरी अल नजूमी रहता था। वह अपने फन में बहुत होशियार था। मगर किस्मत का मारा था। हर वक्त उसका हाथ तंग रहता था। एक रोज उसके दिमाग में एक तदबीर आई और वह नए कपड़े बदलकर सुल्तान की खिदमत में हाजिर हुआ और कहने लगा सुल्तान सलामत मुझे अपने नजूम के जरिए मालूम हुआ है कि अगर आप एक लड़की से शादी कर लें तो उसके वतन से जरूर औलाद पैदा होगी।

सुल्तान ने पूछा वह लड़की कौन है? नजूमी ने एक बूढ़ी औरत का पता दिया और कहा इस बूढ़ी औरत की एक ही बेटी है। हसीन खूबसूरत है। सलीका वाली है और बहुत ही खुशकिस्मत है। सुल्तान ने सोचा कि औलाद के लिए जहां तीन शादियां की हैं। वहीं एक और सही मुमकिन है। नजूमी की पैशगोई सच्चे साबित हो और तख्त का वारिस पैदा हो जाए।

फिर उसने नजूमी को मोतियों का एक हार दिया और कहने लगा अगर खुदा ने मुझे चौथी मलका से औलाद अता फरमाई तो मैं तुझे मालामाल कर दूंगा वरना याद रख तेरी खाल खींचवा कर तेरा गोश्त चील और कबूतरों में तकसीम करूंगा नजूमी ने झुककर निहायत अदब से कहा सुल्तान सलामत मेरी जान आपके लिए हर वक्त हाजिर है मगर आप यकीन कीजिए कि मेरी पैशगोई कभी गलत साबित नहीं होती आप इस बूढ़ी औरत की बेटी से शादी करके आजमा लीजिए।

खबीरी अल नजूमी ने यह बातें सुल्तान को बेवकूफ बनाने के लिए कही थी। वह मुफलिस था, हालात का मारा था, गरीब था। उसे गुजारे के लिए रुपयों की जरूरत थी। उसने सोचा कि मेरी एक गरीब बहन है। उसकी एक ही बेटी है जो बहुत खूबसूरत है। अगर इसकी शादी किसी तरह सुल्तान से हो जाए तो वह मलका बनकर महल में रहने लगेगी। फिर उससे रकम भी मिलती रहेगी और कीमती चीजें भी।

सुल्तान ने थोड़े दिनों के बाद खबीरी अल नजूमी की भांजी से शादी कर ली और उसे मलका बनाकर वह इज्जत बख्श दी जो कभी इस या इसकी बूढ़ी मां के ख्वाबों ख्याल में भी ना थी। मलका जहरा को अपने मामू खबीरी अल नजूमी की चाल का इल्म था। इसलिए उसने भी सुल्तान पर यह जाहिर ना होने दिया कि वह नजूमी की भांजी है और उसे बेवकूफ बनाने के लिए इससे शादी की है।

कबीरी अल नजूमी और इसकी बूढ़ी बहन जो मियाद से मसाइयब के दिन गुजार रहे थे अब मलका झारा की मदद से खूब ऐश उड़ाने लगे। हर दिन ईद और हर रात शब एररात हो गई। इसी तरह दो साल बीत गए। मगर नई मलका से भी कोई औलाद ना हुई तो सुल्तान की मायूसी बढ़ने लगी।

एक रोज गुस्से में आकर उसने खबीरी अल नजूमी को दरबार में बुलाया और कहा तुम्हारी पैशगोई झूठी थी। लिहाजा अब मैं तुम्हें सजा दूंगा। कबीरी अल नजूमी यह सुनकर बोला सुल्तान सलामत इस गुलाम का सर काटकर हुजूर के कदमों में गिरे उससे ज्यादा इस चीज की खुशकिस्मती और क्या होगी? मगर आप यकीन कीजिए कि पैश कोई गलत ना थी। औलाद इसी साल होगी और जरूर होगी।

सुल्तान ने खुश होकर एक बहुत ही कीमती हार इनाम में दिया और नजूमी सलाम करके रुखसत हुआ। नजूमी महल से निकल कर अपनी बहन के पास गया और उससे कहा थोड़े दिनों के बाद तुम यह मशहूर कर देना कि मलका जारा हामिला है। बूढ़ी बोली मशहूर करना तो कोई बड़ी बात ना है मगर झूठी खबर को निभाना बहुत मुश्किल है। इसका अंजाम बहुत बुरा होगा।

नजूमी ने कहा बहन तुम फिक्र ना करो। आगे चलकर जो कुछ होगा उसे मैं खुद संभाल लूंगा और ऐसी तदबीर करूंगा कि हम और तुम सुल्तानों जैसे मजे उड़ाएंगे। करज बूढ़ी ने भाई के कहने के मुताबिक महल में मशहूर कर दिया कि मलका झरा के वतन से औलाद होने की उम्मीद हो गई है।

सुल्तान ने खुश होकर गरीबों और मस्कीनों में रोटी कपड़ा तकसीम किया और नजूमी को बुलाया कर उसे भी बहुत कुछ इनाम व अकराम दिया। नजूमी कहने लगा सुल्तान सलामत मुझे अपने इल्म के जरिए यह भी मालूम हुआ है कि खूबसूरत शहजादा पैदा होगा मगर इसकी पैदाइश के वक्त से 14 साल आप पर सख्त गुजरेंगे।

सुल्तान ने घबराते हुए कहा मैं तुम्हारा मतलब ना समझा। नजूमी ने अर्ज की शहजादे को इसकी मां और नानी के अलावा किसी और ने देखा तो शहजादा बुत बन जाएगा और सल्तनत पर ज्वाल आ जाएगा। सुल्तान का खुला हुआ चेहरा यह सुनकर मुरझा गया और इसकी आवाज हल्का में दब कर रह गई और वह परेशान सा हो गया।

इसकी बेचैनी देखकर नजूमी कहने लगा सुल्तान सलामत यह क्या कम है कि आपके तख्त का वारिस पैदा होगा। अगर आप उसे ना देखी तो इसमें कोई ऐसी बात तो ना है। जब वह 14 बरस का हो जाए तो आप इसकी शादी कर दी। मगर बारात में शरीक ना हो। जब वह ब्याह कर वापस आए तो बेटे और बहू की सूरतें एक ही वक्त में देख ली।

सुल्तान नजूमी की बातें सुनकर बुत बन गया। उसे रहरह कर यही ख्याल आता था कि ऑल तो खुदा ने उसे औलाद ही ना दी और जब उम्मीद हुई तो इतनी सख्त पाबंदी लगा दी कि दिन और रात बेचैनी और बेकरारी में गुजरते रहे। आखिर सुल्तान ने मजबूर होकर आबादी से दूर एक महल बनाने का हुक्म दिया और कहा इस महल के चारों तरफ एक निहायत वसीिया और खूबसूरत बाग भी लगा दिया जाए ताकि शहजादे की परवरिश अच्छी तरह हो सके।

थोड़े ही दिनों में महल बनकर तैयार हो गया और बच्चा होने के दिन करीब आए तो मलका झारा को इस महल में पहुंचा दिया गया। इसकी देखभाल के लिए सुल्तान ने इसकी बूढ़ी मां को मुकर्रर कर दिया ताकि गैर औरत की निगाह बच्चे पर ना पड़े। दिन पूरे हो गए तो बूढ़ी ने अपने भाई से मशवरा किया और एक दरबान के जरिए सुल्तान को शहजादा होने की इत्तला दी।

सुल्तान की खुशी का कोई ठिकाना ना रहा। उसने ममलक में ढोल डमका पिटवा दिया कि वली-ए अहद के पैदा होने की खुशी में घर-घर जश्न मनाया जाए। रैया भी इस खबर से बहुत खुश हुई और सारे ममलक में जश्न मनाया गया। खेल तमाशे हुए, चिराग जलाए गए, मिठाई तकसीम हुई, नचगान हुए और मस्जिदों में शहजादे की उम्र दराज के लिए दुआएं मांगी गई।

सुल्तान ने भी खजाने का मुंह खोल दिया। कई रोज तक गरीबों, मुफलिस, यतीम और मस्कीनों को खाना खिलाया गया। कपड़े दिए गए। जरूरतमंदों की जरियात पूरी की गई। कैदियों को रिहा किया गया और उदेदारों को तरकक्की देकर उनके उदे बढ़ा दिए गए। अधर खबीरी अल नजूमी अपनी मकारी और चालबाजी पर फक्र कर रहा था कि उसने कितनी आसानी से ममलक के सुल्तान को बेवकूफ बना दिया। वह अपनी बहन और भांजी जहरा से कहता आप 14 साल तक तो खूब बेफिक्र से ऐश में बसर करो। उसके बाद अगर सुल्तान जिंदा रहा तो कोई नई चाल चलेंगे।

नजूमी अपने ऐशो आराम के लिए झरा से बहुत कुछ लेता रहता था। मगर फिर भी किसी खास चीज की जरूरत होती तो उनसे कहकर वह सुल्तान से भी मंगवा लेता था। इस तरह वह अपनी मसाइब से आजाद हो गया था। मलकाझरा और इसकी मां दोनों अक्सर सुल्तान से मिलने महल में जाती थी और उसे शहजादे के मनगढ़ंत में इसकी जहान की बातें और इसकी खूबसूरती का हाल मजे लेकर बयान करती थी। जिसे सुनसुन कर सुल्तान ताब होता और ठंडे-ठंडे सांसे लेने लगता मगर मजबूर था। उसे देख ना सकता था।

काबिरी अल नजूमी के बताए हुए 14 बरस खत्म होने आए तो सुल्तान को अपने शहजादे की शादी करने की फिक्र हुई। उसने यूं तो बहुत सी शहजादियों की तारीफ सुन रखी थी। इनके बराबर की सल्तनत से अच्छे ताल्लुकात थे। इसलिए उसने वहां के सुल्तान से बातचीत की और इसकी बेटी से रिश्ता तय कर लिया। शादी की तारीख ऐसी मुकर्ररा की गई कि जिस वक्त बारात दूसरी सल्तनत में पहुंचे शहजादे की उम्र के 14 साल पूरे हो जाए।

शहजादे की सूरत देखने की किसी को इजाजत ना थी। इसलिए इसकी मां और नानी इसे दूल्हा बना रही थी और महल से बाहर बारात की तैयारियां हो रही थी। खबीरी अल नजूमी से इसकी बहन ने पूछा बारात के जाने का वक्त हो गया है। अब क्या होगा और शहजादे को कहां से पैदा किया जाएगा?

नजूमी मुस्कुराया और कहने लगा बहन महल में तुमने मजे भी तो उड़ाए हैं। ऐश भी तो किए हैं। अब इस मसाइयब को भी झेलना। मैं तो अब कहीं रोपश हो जाऊंगा। कबूतरों को खिला दूंगा। अरे जालिम तू हमें जहन्नुम में धकेल रहा है। तुझे शर्म ना आती। खाबीरी अल नजूमी बोला। भाई ने इतनी मियां तुम्हें जन्नत में रखा। इसका इनाम यह दे रही हो तुम। बहन कहने लगी। खाबीरी अगर तू रौपोश ना होगा तो दोजक का ईंधन बनेगा। काबिरी ने कहा बहन होश में आ। अब तक जो कारनामे तूने किए हैं क्या वे तुझे जन्नत में ले जाएंगे?

मलका झारा भी करीब आ गई और मामू की बातें सुनकर बहुत परेशान हुई और मां से लिपट कर रोने लगी। कबीरी उन्हें देखकर कभी मुस्कुराता और कभी गुनगुनाने लगता। आखिर जब दोनों की हिचकियां बंद गई तो नजूमी बोला रोने से क्या हासिल? मेरे साथ आओ। मैं बताता हूं कि अब हमें क्या करना चाहिए। यह सुनकर मां बेटी की जान में जान आई और वह खबीरी के साथ एक दूसरे कमरे में गई।

खबीरी ने कहा, यह देखो, मैं 14 साल के आदमी के बराबर यह बुत बनवा कर ले आया हूं। पालकी में इसे रख देना। रात के वक्त जब बारात कहीं ढाले, तो पालकी के पास से हट जाना और सुबह यह मशहूर कर देना कि रात को किसी ने छुप कर शहजादे को देख लिया और इसलिए वह बुत बन गया है। बस इस तरह हम सब बच जाएंगे। बूढ़ी की समझ में यह तदबीर आ गई और उसने खुशी-खुशी बुद्ध को शादी का जोड़ा पहनाया। सहरा बांधा, गले में फूलों के हार पहनाए और पालकी में एक तरफ बिठाकर खुद भी बैठ गई। फिर पालकी के पर्दे छोड़कर कहारों को आवाज दी।

कहार पालकी उठाकर बाहर निकले। बारात बनी, गाने बजाने होने लगे, तोपें छूटने लगी। सजे हुए हाथियों और घोड़ों पर सल्तनत के ओहदेदार और फौजी सवार थे। गरज बड़ी धूमधाम से यह बारात रवाना हुई। बारात शाम तक चलती रही। फिर इस मुकाम पर पहुंच गई जहां पड़ाव डालने का पहले से ही इंतजाम कर रखा था। यहां सब ने खाना खाया। फिर तमाशे दिखाए गए। आगाजाही छोड़ी गई। इस तरह जब रात ज्यादा गुजर गई तो सब लोग सोने के लिए लेट गए।

दूल्हे की पालकी के एक दरख्त के नीचे रखवा दी गई थी और बूढ़ी ने यह कहकर सबको दूर हटा दिया कि शहजादे को ताजा हवा की जरूरत है। लिहाजा पालकी के करीब कोई ना आए। अगर किसी की नजर शहजादे पर पड़ गई और उसे कुछ हो गया तो इसकी जिम्मेदारी मुझ पर ना होगी। जब तमाम लोग दूर हट गए और अपने-अपने बिस्तर में सो गए तो बूढ़ी भी खामोशी से निकल और बिन के सजे हुए खेमे में जाकर आराम से लेट गई।

पुराने जमाने में सांप बातें भी करते थे और अपनी सूरतें भी बदल देते थे। वह सच्चे जमाने थे और उस जमाने की बातें भी सच्ची थी। जिस दरख्त के नीचे दूल्हे की पालकी रखी हुई थी, उसकी शाख पर एक नाग और एक नागिन बैठी हुई थी। नाग ने नागिन से कहा, तूने देखी यह बारात? यह निकाली बारात है। इस पालकी में दूल्हे की जगह एक बुत रखा हुआ है। और यह बूढ़ी सुबह होते ही यह कहकर रोना पीटना शुरू कर देगी कि रात को किसी ने दूल्हे को देख लिया और वह इंसान से बुत बन गया है। यह मकारी और फरेब इसके भाई का है जो एक नजूमी है और इससे इनको नजात मिल जाएगी। मगर सुल्तान इसे हकीकत समझेगा और इसे इतना सदमा होगा कि वह जिंदा ना रह सकेगा।

नागिन बोली क्या सुल्तान ने शहजादे को नहीं देखा? नाग ने कहा नहीं यही तो इन लोगों की मकारी और बदमाशी है। यही तो इन मक्कार और बदमाशों ने जाल फैलाया है। सुल्तान बेचारे को तो इल्म ही ना है कि उसके यहां शहजादा पैदा ही ना हुआ। इसका कोई बेटा नहीं। नागिन को सुल्तान के हाल पर बहुत रहम आया और कहने लगी इन मकार लोगों का कुछ ना बिगड़ेगा। मगर सुल्तान की जान मुफ्त में जाएगी। अगर इसकी जान किसी सूरत से बचा सकते हो तो बचा।

नाग ने थोड़ी देर सोचा फिर इधर-उधर देखकर बोला, एक सूरत हो सकती है कि मैं इस बुत की जगह 14 साल का शहजादा बनकर बैठ जाऊं। नागिन ने कहा, बूढ़ी जब तुम्हें देखेगी, तो शहजादा कैसे मान लेगी? नाग ने कहा, बूढ़ी ने तो पहले ही मकारी का जाल फैलाया रखा है। जब वह एक जिंदा शहजादे को देखेगी, तो इसमें इतनी तड़प ना होगी कि वह झूठ बोल सके। अगर वह झूठ बोलेगी तो मैं कहूंगा कि अगर तू सच्ची है तो असली शहजादे को मेरे सामने ले आ। फिर वह क्या करेगी?

नागिन बोली, बात तो ठीक है, मगर फिर क्या होगा? नाग ने कहा, मैं शहजादा बनकर जाऊंगा और दुल्हन को ब्याह कर सुल्तान के पास पहुंचूंगा। फिर एक हफ्ता ठहर कर किसी बहाने से तेरे पास चला आऊंगा। नागिन के दिल में सुल्तान के लिए हमदर्दी तो पैदा हो ही गई थी। इसलिए उसने नाग को इजाजत दे दी। मगर यह शर्त लगा दी कि एक हफ्ते में वह जरूर वापस आ जाए।

फिर नाग ने अपनी काया पलट दी और 14 साल का एक बहुत ही खूबसूरत शहजादा बन गया और पालकी में से बुत को निकालकर दूर झाड़ियों में छुपा दिया और खुद इसकी जगह बैठ गया। सुबह होते ही बूढ़ी खेमे से निकल और अपनी मकारी का खेल खेलने की गरज से पालकी का पर्दा उठाया। मगर जैसे ही अंदर निगाह डाली तो बुद्ध की जगह जिंदा शहजादा दूल्हा बना हुआ नजर आया। वह हैरान रह गई और कहने लगी तुम कौन हो?

नाग शहजादे ने मुस्कुराते हुए कहा, "तुम्हें नहीं मालूम कि मैं इस बारात का दूल्हा हूं।" बूढ़ी बोली, तुम कहां से आए हो? कहने लगा, तुम्हें इससे क्या गरज? बिन दूल्हे के बारात ले जा रही थी। अब खुदा का शुक्र अदा करो कि तुम्हें मुफ्त में एक दूल्हा मिल गया। गरज बूढ़ी ऐसे ही सवाल करती रही और वह इनके जवाब देता रहा। आखिर बूढ़ी ने सोचा कि अपनी बात बच जाएगी। इसे पालकी में बिठा रहने दो और वह बारात लेकर रवाना हुई।

दूसरी सल्तनत में पहुंचते ही इनका शानदार इस्तकबाल हुआ और बड़ी धूमधाम से सुल्तान के महल पर बारात पहुंची। एक रोज मेहमान ठहराने के बाद दूसरे दिन निकाह पढ़ाया गया। सुल्तान ने अपनी हैसियत के मुताबिक जहेज में कीमती और नायाब सामान के अलावा बहुत से हाथी और घोड़े भी दिए। और जिस शान से बारात आई थी, उसी शान से इसे रुखसत किया।

सुल्तान ने 14 साल कैसे गुजारे थे, यह तो इसका दिल ही जानता होगा। मगर 14 साल की बेचैनी से कहीं ज्यादा अब इसके दिल में बेकरारी थी। बारात की वापसी की खबर सुनते ही वह हाथियों और घोड़ों को सजाकर सरहद पर ले गया और बेसब्र से बारात का इंतजार करने लगा। खुदा-खुदा करके बारात सरहद में दाखिल हुई तो उसने हाथी से उतर कर बारात को रोका और पालकी का पर्दा उठाकर अपने खूबसूरत बेटे को देखा। इसे गले से लगाया। इसका मुंह चूमा, सर पर हाथ फेरा। फिर दोनों हाथों में इसका चेहरा थाम कर देर तक देखता रहा। इसका दिल खुशी से उछल रहा था और वह चाहता था कि अपने बेटे को सीने से लगाकर खूब रोए। इसके मुंह को चूमे और एक पल के लिए भी जुदा ना होने दे। मगर वजीर ने आगे बढ़कर इसे समझाया और बारात लेकर महल में पहुंचे।

सुल्तान ने ममलक में खूब जश्न मनाया और दुनिया की निमतें अपने बेटे और बहू के लिए मुहैया कर दी। इनके महल को इतना सजाया गया कि देखने वाले इसका तसवुर भी ना कर सकते थे। सुल्तान ने दोनों की खिदमत के लिए हजार कनीज और गुलाम मुकर्रर कर दिए थे और सबको हिदायत की थी कि दोनों में से किसी के भी मुंह से निकली हुई बात की तकसीम में एक लम्हा की भी दीर ना हो। वरना इसकी सजा मौत से कम ना होगी।

नाग को यह ऐशो आराम कहां हासिल थे। अब इसको यह मौका मिला तो वह इतना खो गया कि अपनी पहली जिंदगी को बिल्कुल भूल गया। अगर नागिन का किसी वक्त ख्याल भी आता तो यह सोचकर खामोश हो जाता कि वह अपने दिन किसी ना किसी तरह गुजार ही लेगी। मैं इस ऐशो आराम को छोड़कर क्यों जंगल में रहूं। हदर नागिन बेचारी इंतजार करते-करते जब थक गई तो उसने इरादा किया कि वह अपने नाग की तलाश में जाए और इसे वादा याद दिलाकर अपने साथ वापस ले आए। फिर उसके कंधे के तमाम नागों और नागिनों को जमा किया और उन्हें नाग का हाल सुनाया और बोली अब मैं अपने नाग की तलाश में जा रही हूं। तुम सब हमारा ख्याल रखना।

नागिन कंधे वालों से रुखसत होकर रवाना हुई। दिन में कहीं छुप रहती और रात होते ही चल पड़ती। इस तरह कई दिन और कई रातों के बाद वह शहजादे के महल में पहुंच गई। नागिन दिन भर महल के बाग में छुपी रही और रात होते ही दरवाजे पर गई। मगर महल में जाने के तमाम रास्ते बंद नजर आए। वह बहुत परेशान हुई मगर कोई सूरत ऐसी ना नजर आई कि वह अंदर चली जाती। आखिर मजबूर होकर बाग में छुप गई।

सुबह के वक्त एक खादिम ने महल का दरवाजा खोला तो वह बेचैनी से अंदर दाखिल हुई। खादिम ने इसे देख लिया और सांप सांप का शोर मचाता हुआ इसके पीछेछे दौड़ा। अधर शोर गुल सुनकर बहुत से खादिम भी आ गए और सब ने मिलकर नागिन को घेर लिया। नागिन को बहुत गुस्सा आया और उसने दो खादिमों को दस लिया। मगर तन्हा इतने खादिमों का मुकाबला कैसे करती? बेचारी का मुंह कुचल गया।

नाग शहजादा भी शोरगुल सुनकर अपने कमरे से निकल आया और पूछा यह क्या तमाशा है कि सुबह होते ही शोर मचा दिया। खादिम ने हाथ बांधकर अर्ज की। हुजूर, एक सांप बाग से निकल कर महल में दाखिल हो गया था। इसने दो खादिमों को दस लिया है। मगर बाकी खादिमों ने मिलकर इस मौजी का मुंह कुचल दिया है। शहजादे ने दौड़कर मरे हुए सांप को देखा तो इसकी आंखों में आंसू भर आए और अपनी नागिन की मौत और अपनी वादा खिलाफी के ख्याल से इसके दिल को बहुत सदमा हुआ और वह देर तक आंसुओं से रोता रहा। इसकी बीवी और सुल्तान ने इसकी उदासी और यूं रोने का सबब पूछा। मगर इसने उन्हें कुछ ना बताया।

शहजादे का गम जब कुछ दिनों के बाद कम हुआ तो इसने सोचा कि नागिन तो अब मर ही गई है। अब वापस जंगल में जाने से क्या फायदा? अगर मैं चला भी गया तो यहां बीवी और सुल्तान मेरे गम में तड़प-तड़प कर मर जाएंगे। इसलिए महल में ही ऐशो आराम की जिंदगी बसर करता रहूं। मगर फिर इसे ख्याल आया कि जब कंधे वालों को मेरी बेवफा बेवफाई और नागिन की मौत का हाल मालूम होगा तो वे मेरी बीवी के दुश्मन हो जाएंगे और इसे मेरी नागिन का कातिल ठहरा कर जरूर डस लेंगे। इस ख्याल से वह बेचैन हो गया और खूब गौर करने के बाद बीवी के पास जाकर बोला मैं तुम्हें कुछ नसीहतें करता हूं। इनका हमेशा ख्याल रखना। बीवी ने कहा आप बताइए मैं हमेशा इस पर अमल करूंगी।

नाग शहजादा कहने लगा कांच की चूड़ियां पहनना, मटर की फलियां खाने, गवालों से दूध लेकर पीना और फूलों के गुजरे पहनना हमारी रीत नहीं है। इसलिए इनसे बचना। बीवी ने वादा किया, आप मुझ पर भरोसा रखें। मैं इन बातों को हमेशा याद रखूंगी और इनसे बचकर रहूंगी।

कुछ दिन ही गुजरे थे कि महल में एक चूड़ियां बेचने वाली मेहरी आई और अपनी चूड़ियों की खूब तारीफ करने लगी। बेगम ने चूड़ियां देखकर कहा, चूड़ियां तो बहुत अच्छी है, मगर क्या करूं? कांच की चूड़ियां पहनना हमारी रीत नहीं। इस बात को सुनकर वह चूड़ियां बेचने वाली हैरान रह गई और बोली, "अगर अगर कांच की चूड़ियां पहनना आपकी रीत नहीं है तो जरा अपने शौहर से पूछना कि इनकी जात क्या है?" रात को बेगम ने शहजादे से इसकी जात पूछी, तो इसने कहा, "मेरी जात ना मालूम करो, नहीं तो हमेशा पछताना पड़ेगा।" बेगम खामोश हो गई।

दो-तीन रोज के बाद एक मालन फूलों के गुजरे और मटर की फलियां बेचती हुई आई और बेगम से अपनी चीजों की बहुत तारीफ की। मगर इसने कहकर खरीदने से इंकार कर दिया।

कि फूलों के गुजरे पहनना और मटर की फलियां खाने हमारी रीत नहीं। मालन भी यह सुनकर हैरान रह गई और बोली बेगम अगर फूलों के गुजरे पहनना और मटर की फलियां खाने आपकी रीत नहीं तो अपने शौहर से पूछना कि इनकी जात क्या है?

बेगम ने रात को फिर नाग शहजादे से इसकी जात पूछी तो इसने कहा बेगम तुम मेरी जात मालूम ना करो वरना तुम पछताओगी।

एक हफ्ते के बाद एक गवाली आई और अपने दूध की तारीफ करने लगी। मगर बेगम ने इससे भी यही कह दिया कि ग्वालों से दूध लेकर पीना हमारी रीत नहीं। गवाली हैरत से बेगम की सूरत तकने लगी और बोली बेगम साहिबा यह तो बताइए कि आपके शौहर की जात क्या है?

अब तो बेगम की हैरानी और भी बढ़ गई और वह सोचने लगी या अल्लाह यह क्या माजरा है जो हर शहजादे की जात पूछती है। आज कुछ भी हो मैं इनसे इनकी जात पूछ कर ही रहूंगी।

रात को बेगम ने शहजादे से कहा आप मुझे अपनी जात क्यों ना बता दें। आज मैं पूछ कर ही रहूंगी। शहजादा बोला मैं तुमसे कई बार कह चुका हूं कि मुझसे मेरी जात ना पूछो वरना नुकसान उठाओगी और हमेशा पछताओगी।

बेगम ने कहा मुझे कितना ही नुकसान क्यों ना बर्दाश्त करना पड़े मगर मैं आपकी जात पूछ कर ही रहूंगी।

शहजादा बहुत परेशान और कहने लगा अगर तुम्हारी यही अदावत है तो सुबह मेरे साथ दरिया के किनारे पर चलना। मैं तुम्हें अपनी जात बता दूंगा।

सुबह दरिया के किनारे पहुंचकर शहजादे ने फिर कहा बेगम मैं फिर तुमसे कहता हूं। मेरी जात ना पूछो तो अच्छा है। बेगम कहने लगी मैंने तो आहद किया है कि मैं आज पूछ कर ही रहूंगी।

शहजादे ने आसमान की तरफ देखा और कपड़े उतार कर दरिया में कूद पड़ा और कहा बेगम आखिरी बार कहता हूं कि मेरी जात ना पूछो नहीं तो पछताओगी। बेगम बोली मैं तो पूछ कर ही रहूंगी।

शहजादा तिरता हुआ गहरे पानी में चला गया और बोला एक बार फिर कहता हूं कि अपना आहत तोड़ दो और जात ना पूछो।

बेगम ने सोचा कि यह अजीब मजाक है। बार-बार यही कहता जाता है कि जात ना पूछो। इसने कहा मैं जात पूछ कर ही रहूंगी।

शहजादा मजबूर हो गया और अचानक सांप बनकर पानी पर तिरने लगा। बेगम इसे देखकर पीली पड़ गई और इसका दिल धड़कने लगा और दीवानों की तरह वह पानी पर तिरते हुए स्याह नाग को देखने लगी।

नाग थोड़ी देर के बाद पानी में चला गया और इसने इरादा किया कि गोती लगाकर गायब हो जाए। इसी वक्त बेगम यह भूल गई कि इसका शौहर एक स्याह नाग है। इसके दिल में सिर्फ यह बात पैदा हुई कि यह कुछ भी है मगर मेरा शौहर है और मुझे इसका साथ ना छोड़ना चाहिए।

इस ख्याल के आते ही वह खुद भी दरिया में कूद पड़ी और जल्दी ही इस नाग की दुम पकड़ ली। नाग ने एक गोती मारी और दरिया की तह की तरफ चल दी। तह के करीब पहुंचते ही बेगम के हाथ से नाग की दुम छूट गई और नाग गायब हो गया।

बेगम के पैर जमीन पर टिक गए। इस पाताल के अंधेरे में इसे कुछ सुझा ना देता था। जहां पैर उठता चल पड़ती ठोकर लगती गिर जाती। फिर संभल कर उठती और दिल ही दिल में अपनी अदावत और अपनी हट पर पछताती। गिरती पड़ती रोती आंसू बहाती शहजादे की तलाश में चली जा रही थी कि एक गार दिखाई दी और वह इसमें दाखिल हो गई। यह गार ज्यादा बड़ा ना था। वह जल्दी से करके दूसरी तरफ पहुंच गई। यहां हल्कीहल्की नीली रोशनी थी और अजीब समा था।

मलका चलते-चलते एक सेजा झार में पहुंची। यहां बैठकर इसने दम लिया। फिर खड़ी हुई और शहजादे की तलाश में रवाना हुई। शहजादा इससे बिछड़ने के बाद कहां गया? वह अब किस जगह मिलेगा? अगर ना मिला तो वह क्या करेगी? ऐसी ही बातें इसके दिल में पैदा हो रही थी और वह गिरती पड़ती जहां मुंह उठता चली जा रही थी।

रह-रह कर इसे ख्याल आता कि इसने शहजादे की जात क्यों पूछी? वह जब कह रहा था कि जात ना पूछो वरना पछताओगी तो इसने शहजादे की बात क्यों ना मानी।

आखिर बेगम चलती-चलती एक कुएं पर पहुंची और इसकी मंडेर पर बैठ गई। यहां कुछ लड़कियां बार-बार पानी भरने आ रही थी। इनमें से हर लड़की खूबसूरत थी और हर लड़की की आवाज मीठी और रसीली थी। मगर किसी की बाजुओं में चूड़ियां ना थी। नाक, कान और गले में जवर ना था। वह आपस में बातें करती और बेगम को एक नजर देखकर चली जाती। फिर थोड़ी देर के बाद आकर पानी भरने लगती।

आखिर बेगम ने पूछा, "तुम इतना पानी क्यों ले जा रही हो?" एक लड़की ने जवाब दिया, "हमारे मामू इंसान बनकर इंसानों में रहने लगे थे। अब बहुत दिनों के बाद सांप बनकर वापस आए हैं। तो इनके जिस्म में से इंसानों की ब आ रही है। इसलिए हम सब मिलकर इन्हें खूब मलमल कर नहला रहे हैं।"

इस बात को सुनकर बेगम को यकीन हो गया कि लड़की का मामू ही इसका शौहर है। और इसने लड़कियों की निगाह बचाकर अंगूठी उतारी और चुपके से लड़की के मटके में डाल दी।

नाग हीरे की एक जोड़ियों चौकी पर बैठा हुआ था। और लड़कियां इसके बदन पर खुशबुओं की सफरें मल रही थी। अतर छिड़क रही थी। कुछ लड़कियां अपनी नरमनम हथेलियों से बदन को मल रही थी और पानी ले जाने वाली लड़कियां बारी-बारी इस पर पानी डाल रही थी। जब नाग की भांजी ने अपने मटके का पानी इस पर डाला तो बेगम की अंगूठी चौकी के सामने गिर पड़ी।

नाग इस अंगूठी को देखते ही पहचान गया कि यह इसकी बेगम की अंगूठी है। इसने अपनी भांजी से पूछा, "यह तुम्हारे मटके में अंगूठी कहां से आ गई?" इसने हिरानी से अंगूठी को देखते हुए कहा, "मुझे तो खबर ना है कि मेरे मटके में यह अंगूठी किसने डाल दी?" नाग बोला, "कुएं पर कोई औरत तो ना थी।" सब लड़कियों ने एक जबान होकर कहा, "हां, एक औरत बैठी हुई थी।" वह बहुत ही थकी हुई दिखाई दे रही थी। चेहरा पीला पड़ा हुआ था और आंखों से वाहशत सी टपक रही थी।

यह सुनकर नाग का दिल भर आया और वह सोचने लगा कि मेरी बेगम मेरी तलाश में यहां तक आ पहुंची है। इसके दिल पर क्या गुजर रही होगी। फिर इसके दिल ने कहा, बेगम को तेरी जात मालूम हो गई। मगर फिर भी वह तेरी तलाश में है। कितनी वफादार औरत है और एक तो है कि इसे छोड़कर यहां चला आया है। उठो बेमुरबी और इसके टूटे हुए दिल को तसल्ली दे।

दिल की आवाज पर वह चौकी से उठा और निहायत तेजी से दौड़ता हुआ कुएं पर पहुंचा। देखा तो बेगम नीची निगाहें किए खामोश बैठी हुई थी। जैसे किसी ख्याल में डूबी हुई थी। इसका खुलता हुआ चेहरा देखकर शहजादे का दिल इसके काबू में ना रहा। और इसने फौरन ही अपनी काया पलटी और शहजादा बनकर सामने खड़ा हो गया।

बेगम की नजर इस पर पड़ी तो इसकी बड़ी-बड़ी स्याह आंखों में मोटे-मोटे आंसू भर आए और वह टकटकी बांधकर इसकी सूरत देखने लगी। नाग शहजादा इसकी हालत देखकर बोला बेगम मेरा ख्याल था कि तुम बहुत ही अदावती हो। इसलिए मैं तुमको छोड़कर यहां चला आया था। मगर अब तुम्हारा दिल भी देख लिया और समझ लिया कि तुम्हारे दिल में मेरे लिए बहुत-बहुत ज्यादा जगह है और तुम मुझे बहुत चाहती हो।

बेगम प्यासी निगाहों से इसे तकती रही। होठों को मामूली सी हलचल हुई मगर जुबान से कोई बात ना निकल। आखिर शहजादे ने आगे बढ़कर इसका हाथ पकड़ लिया और कहने लगा उठो बेगम और मेरे साथ मेरे कंधे वालों के पास चलो। मैं उन्हें तुम्हारा हाल सुनाऊंगा। मुमकिन है उन्हें रहम आ जाए और वे मुझे तुम्हारे साथ रहने की इजाजत दे दी।

बेगम के सूखे होठों पर मुस्कुराहट की एक लहर दौड़ गई और शहजादे का हाथ पकड़ कर इसके साथ रवाना हुई। रास्ते में शहजादे ने अपनी सारी कहानी बयान की और इसे बताया कि सुल्तान को खबीरी अल नजूमी ने किस तरह बेवकूफ बनाया और निकाली बारात ने जंगल में पड़ाव डाला तो वह सांप से शहजादा बनकर पालकी में बैठ गया। और जब नागिन महल में गई तो खादिम ने इसे हलाक कर डाला। उस वक्त इसके रोने का सबब यह था कि वह इसकी मादा थी और वह इसकी जुदाई का गम बर्दाश्त ना कर सका था।

शहजादे ने कहा, महल में जो गवाली, मेहरी और मालन आई थी, वह इसके कंधे की नागिनें थी। इनसे बचाने की गरज से इन चीजों के खरीदने को मना किया गया था। बेगम यह तमाम बातें सुनकर हैरान रह गई। मगर जुबान से कुछ ना कहा और खामोश रही।

नाग शहजादा बेगम को लेकर अपने कंधे में पहुंचा और सबको मुखातिब करते हुए कहा इस औरत से जब मैंने शादी की तो इसे यह मालूम ही ना था कि मैं एक सांप हूं और ना बाद में मेरी हकीकत मालूम हुई। अब इससे यह भी मालूम हो गया है कि मैं इंसान नहीं हूं बल्कि सांप हूं। तब भी यह मुझे पहले की तरह चाहती है और मेरी तलाश में यहां तक चली आई है। अगर आप सब मुझे इसके साथ रहने की इजाजत दे दी तो मैं इसके हमराह चला जाऊंगा।

शहजादे ने यह भी कहा, "मेरी नागिन तो मर चुकी है, इसलिए तन्हा रहना मेरे लिए वैसे भी मुश्किल है। अगर मैं इसके साथ चला जाऊं, तो इसकी जिंदगी भी खुशी से गुजरेगी और मुझे भी तन्हाई का ख्याल ना होगा।"

कंधे वालों ने बेगम से कहा, "हें तुम्हारी वफा और सच्चाई देखकर बहुत मुसर्रत हुई। इसलिए हम खुशी से अपने सांप भाई को तुम्हारे हवाले करते हैं। जाओ और हंसी-खुशी जिंदगी बसर करो।"

नाग शहजादा और बेगम वापस महल में पहुंचे तो सब खुश हो गए और इनके मुरझाए हुए चेहरे खिल गए। सुल्तान शहजादे और बेगम की जुदाई से बहुत गमगीन था। इनके ख्याल से वह अक्सर बेहोश हो जाता था। मगर उस वक्त इसके जिस्म में नया खून दौड़ने लगा और इसने बिस्तर से उठकर इन दोनों को गले से लगा लिया और शहजादे से पूछा तुम इतने दिनों से कहां गायब थे?

शहजादे ने बैठकर सारा हाल बयान किया और हर बात सच-सच कह सुनाई। सुल्तान हैरान रह गया और सोचने लगा कि नजूमी इसकी बहन और भांजी कितना अरसा से इसे बेवकूफ बना रहे थे और दिन रात इसे ठग रहे थे।

सुल्तान का जिस्म गुस्से से कांपने लगा और इसने उसी वक्त नजूमी और इसकी बहन को बुलाया कर हुक्म दिया कि इन दोनों को सूली पर चढ़ा दिया जाए। यह मखार और चालबाज जब ममलक के सुल्तान को फरेब दे सकते हैं तो रैया को ठगने और लूटने में तो कोई कसर ही ना छोड़ेंगे।

खबीरी अल नजूमी और इसकी बूढ़ी बहन बहुत रोए बहुत गड़गड़ाए। मगर सुल्तान ने इनकी एक ना सुनी बल्कि गुलामों से कहा इन्हें फौरन मेरी निगाहों से दूर कर दो। मुझे इनकी मनहूस सूरतों से नफरत है। गुलाम दोनों को खींचते हुए सुल्तान के सामने से ले गए और दूसरे दिन सुबह के वक्त दोनों मकारों को सूली पर चढ़ा दिया गया।

बूढ़ी खबीरी अल नजूमी और मलका जरा को सजाए देने के बाद सुल्तान कुछ उदास और रंजीदा सा रहने लगा। नाग शहजादे ने समझा कि शायद इसकी वजह से सुल्तान की यह हालत बनी है। इसलिए वह सुल्तान की खिदमत में हाजिर हुआ और कहने लगा आपको मेरी हकीकत मालूम हो चुकी है। इसलिए शायद आप मेरा यहां रहना पसंद ना फरमाएं। लिहाजा अगर इजाजत हो तो मैं अपनी बीवी के साथ कहां और चला जाऊं।

सुल्तान पहले तो इसकी सूरत तकता रहा। फिर इसके सर पर हाथ फेरते हुए बोला तुम इंसान हो या नाग हो मुझे इससे कोई वास्ता ही ना है। मैंने हमेशा तुम्हें अपना बेटा समझा है और अब भी तुम्हें उसी निगाह से देखता हूं। तुमने भी मेरे साथ कभी ऐसी बात ना की जिससे मैं यह समझता कि तुम मेरे बेटे ना हो। इसलिए तुम्हारी जुदाई मुझसे हरगिज़ बर्दाश्त ना होगी।

शहजादा सर झुकाए बैठा हुआ था। इसके दिल पर सुल्तान की बातों का बहुत गहरा असर हुआ और वह दिल में कहने लगा कि मैं सुल्तान की हमेशा दिलो जान से खिदमत करता रहूंगा।

सुल्तान कहने लगा तुम्हारी नागिन ने मेरा ख्याल करते हुए तुम्हें काया पलटने की इजाजत दी थी। इसलिए अपनी मरई हुई नागिन और मेरी खुशी का ख्याल करते हुए तुम्हें चाहिए कि हमेशा मेरे बेटे बनकर मेरे साथ रहो और मेरे मरने के बाद मेरे तख्त के मालिक बनो।

नाग शहजादे ने उठकर सुल्तान के हाथों को बूसा दिया और फिर हंसीखुशी इसके साथ जिंदगी बसर करने लगा।