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दोस्तों, ममलकट बगदाद का शहजादा हसन बहुत शेरो शिकार का शौकीन था। वह आए दिन शेरो शिकार के लिए निकल खड़ा होता और कई कई दिन शेरो शिकार में मशरूफ रहता। बाहर अकात वह इतनी दूर चला जाता कि कई महीनों तक उसकी वापसी ना होती थी।
बादशाह सलीम इसको बहुत समझते कि अब वह सैर और तफरीहें छोड़कर ममलखती मामलात में उसका हाथ बटाए। वह बूढ़े होते जा रहे हैं। आखिरकार उनके बाद तख्त और ताज का वारिस वही है। अगर वह ममलकती मामलात में अभी से दिलचस्पी ना लेगा तो आगे चलकर वह ममलकत की बागडोर किस तरह संभाल सकेगा।
शहजादा हसन उनकी बात हमेशा टाल जाता और कहता कि वह अबकी बार सैर और स्याही से जब वापस लौटेगा तो आइंदा वह कहीं ना जाएगा। लेकिन अभी उसे लौटे कुछ दिन भी ना गुजरते कि उसके सर पर एक बार फिर शेरो शिकार का भूत सवार हो जाता और वह जबरन इजाजत हासिल करके निकल जाता।
इन दिनों भी इस पर सैर और तफरीह का भूत सवार था। वह सख्त परेशान था। उसकी परेशानी की वजह यह थी कि उसने पिछली बार बादशाह सलीम से पक्का वादा किया था कि यह उसकी आखिरी तफरीह होगी। इसके बाद चाहे कुछ भी हो जाए वह शेरो शिकार के लिए ना जाएगा। बादशाह सलीम ने उसकी बात मानकर साफ-साफ कह दिया था कि इसके बाद वह भी उसे कहीं जाने की कभी इजाजत ना देंगे। इसलिए शहजादे को परेशानी थी कि वह इस बार बादशाह सलीम से इजाजत किस तरह हासिल करेगा।
वह इस वक्त अपने कमरे में निहायत बेचैनी के आलम में इधर-उधर टहल रहा था। उसके दोनों हाथ पीठ पर बंधे हुए थे और चेहरे पर सोच और फिक्र की दवाई हुई टेप दे रही थी। इसी वक्त कमरे में एक मुहाफिज दाखिल हुआ। उसने निहायत मुदबान अंदाज में झुककर शहजादे को सलाम किया।
"शहजादा आलिम आपको बादशाह सलीम अपने कमरे खास में याद फरमा रहे हैं।" उसने मुदबान लहजे में कहा और शहजादा हसन चौंक पड़ा।
"अब्बा हुजूर ने हमें याद किया है। ओह क्यों? क्या कोई खास बात है?" शहजादा हसन ने कदर घबराए हुए लहजे में कहा। वह परेशान हो गया था कि कहीं बादशाह सलीम को उसके इरादे का इल्म तो नहीं हो गया। अगर उन्हें पता चल गया तो वह यकीनन उससे सख्त बाजपुर करेंगे। शहजादा अपने बाप से बहुत डरता था। शायद यही वजह थी कि मुहाफिज की बात सुनकर उसका रंग जर्द पड़ गया।
"मालूम नहीं शहजादा आलिम बादशाह सलीम ने हुक्म दिया था। इसीलिए मैं आपको उनका पैगाम देने चला आया। मेरे लायक कोई खिदमत?" मुहाफिज ने निहायत अदब से कहा।
"हां ठीक है तुम जाओ।" शहजादा हसन ने हुक्म भरे लहजे में कहा और मुहाफिज सिर हिलाकर उसे सलाम करता हुआ कमरे से बाहर निकल गया। उसके जाने के बाद शहजादा हसन अपनी घबराहट पर काबू पाने की कोशिश करने लगा। फिर वह फौरन कमरे से बाहर आया और मुख्तलिफ राहदारियों से होते हुए बादशाह सलीम के कमरे खास में आ गया।
"मैं हाजिर हो सकता हूं अब्बा हुजूर।" उसने कमरे में दाखिल होकर बादशाह सलीम की तरफ देखते हुए निहायत धीमे लहजे में कहा जो एक सर्फ करसी पर बैठे किसी गहरी सोच में गम नजर आ रहे थे। उसकी आवाज सुनकर उन्होंने चौंक कर उसकी तरफ देखा। कमरे में बादशाह सलीम के अलावा और कोई ना था।
"हां बेटा आओ मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था।" बादशाह सलीम ने सिर हिलाकर जवाब दिया और शहजादा हसन मुद्बान अंदाज में चलता हुआ बादशाह सलीम के सामने आकर यूं सिर झुका आकर खड़ा हो गया जैसे वहां कोई मुजरिम हो।
"हमारे करीब आओ बेटे। हम तुमसे एक जरूरी बात करना चाहते हैं।" बादशाह सलीम ने अपने करीब पड़ी एक करसी की तरफ इशारा करते हुए निहायत संजीदा लहजे में कहा।
"शुक्रिया अब्बा हुजूर हुक्म फरमाए मैं हाजिर हूं।" हसन ने उनके करीब करसी पर बैठकर बड़े अदब से कहा।
"बेटा मैं तुमसे ममलकत शाम की बात करना चाहता हूं। जहां सुल्तान सलाह का मतलब करता है। तुम क्योंकि ममालिक मामालिक की सैर करते रहे हो इसलिए तुम यकीनन सुल्तान सलाह के मुतालिक अच्छी तरह से जानते होंगे।" बादशाह सलीम ने सिलसिला कलाम जारी रखते हुए कहा।
"सुल्तान सलाह बादशाह नहीं अब्बा हुजूर मैंने यह नाम तो जरूर सुने हैं। लेकिन मुझे कभी शाम जाने का इत्तेफाक ना हुआ। वैसे मैंने सुना है कि सुल्तान सलाह बहुत जालिम और जाबिर सुल्तान है। उसने अपनी पूरी रियायत पर बेपनाह जुल्म उठा रखे हैं।" शहजादा हसन ने जवाब देते हुए कहा।
"हां बेटा तुमने ठीक सुना। सुल्तान सलाह वाकई बहुत जालिम और सख्त सुल्तान है। उसके जुल्म और सितम से उसकी पूरी रियायत नाला है। लेकिन कोई शख्स उसके खिलाफ जुबान ना खोल सकता है। क्योंकि इस सुल्तान ने ममलकत में चारों तरफ अपने जासूस फैला रखे हैं। जो सुल्तान को पल-पल की खबर देते हैं। और जो शख्स सुल्तान की शान के खिलाफ कोई बात कहता है, जासूस उसे जंजीरों में बांधकर घसीटते हुए सुल्तान के पास ले जाते हैं। और सुल्तान उस शख्स को इस कदर भयानक अंदाज में हलाक करता है जिसके तस्सवुर से भी रूह कांप उठती है।"
"बेटा इस ममलकत से कुछ लोग बड़ी मशक्कतों से छुपते छुपाते यहां पहुंचे हैं। उन्होंने मुझसे दरख्वास्त की है कि मैं इस जालिम और सख्त दिल सुल्तान को उसके जुल्म से रोका जाए। वरना वह एक-एक करके सारी रियायत को हलाक कर देगा। और बेटा मैंने सुना है कि इस जालिम सुल्तान ने एक बहुत बड़ी फौज बना रखी है। वह अपनी फौज से दूसरे मलिक पर चढ़ाई का इरादा कर चुका है। तो उसकी जद में आने वाला सबसे पहले ममलकत हमारी होगी। और तुम अच्छी तरह से जानते हो कि सुल्तान सलाह के मुकाबले में हमारी ममलकत बहुत छोटी और पसमांदा है। हमारे पास इतनी बड़ी फौज भी नहीं है जो सुल्तान सलाह की फौज का मुकाबला कर सके।"
"मैंने इस मामले में अमरा और वजीरों से भी मशवरा मांगा है। मगर इस बात का हमें कोई हल नजर नहीं आया। इसलिए हमने तुम्हें बुलवाया है। तुम जवान और ज़हनत हो। हो सकता है तुम इस मसले का कोई हल निकाल सको।" बादशाह सलीम ने इसकी तरफ देखते हुए निहायत संजीदा लहजे में कहा।
"तो यह बात है। लेकिन अब्बा हुजूर यह भी तो हो सकता है कि सुल्तान सलाह किसी ममलकत पर चढ़ाई करने का इरादा ही ना रखता हो। और यह हमारी गलतफहमी भी हो सकती है।" शहजादा हसन ने सोचते हुए कहा।
"पहले मैंने भी यही सोचा था, लेकिन हमारे महम को ने हमें आज ही मुतला किया है कि सुल्तान सलाह ने हमारी ममलकत की सरहद पर अपनी फौज जमा करना शुरू कर दी है। और फौजियों का सरहद पर जमा होना झूठ या फरेब ना हो सकता।" बादशाह सलीम ने इसकी बात का जवाब देते हुए कहा।
"यह तो आप वाकई बुरी खबर सुना रहे हैं। अब्बा हुजूर, फिर आपने क्या फैसला किया?" शहजादा हसन ने भी इस बार परेशान लहजे में कहा।
"मैं खुद भी परेशान हूं बेटा। मैंने मशवरे के लिए तुम्हें बुलवाया है। इस जालिम सुल्तान से बचने की कोई सूरत दिखाई ना देती। अगर उसने हम पर वाकई हमला कर दिया, तो यह हमारे हकम में बहुत बुरा होगा। बहुत बुरा।" बादशाह सलीम ने तक और बयान भरे लहजे में जवाब दिया।
कुछ देर तक शहजादा फिक्रमंद अंदाज में सोचता रहा और फिर उसने सर उठाकर बादशाह सलीम की तरफ देखा। "अब्बा हुजूर जंग से बचने के लिए मेरे नाक ज़हन में सिर्फ एक ही तरीका आई है। अगर आप हुक्म दें तो अर्ज करूं।" शहजादा हसन ने अपने बाप से कहा।
"हां हां बेटा जरूर। अगर जंग से बचने के लिए कोई तरीका निकल आए तो इससे बढ़कर और खुशी की बात क्या हो सकती है?" बादशाह सलीम ने मुसर्रत भरे लहजे में कहा।
"अब्बा हुजूर जहां तक मेरी मालूमात है मैंने सुन रखा है कि सुल्तान सलाह की एक बेटी भी है जिसका नाम शहजादी नूर है और मैंने सुना है कि शहजादी नूर अपने बाप के नजदीक बहुत नेक और रहम दिल लड़की है। उसके दिल में लोगों का दर्द कोटक-कोट भर हुआ है। और क्योंकि शहजादी नूर सुल्तान सलाह की अकेली बेटी है। इसलिए सुल्तान सलाह उसकी बात मुश्किल से ही टालता है। मेरा ख्याल है अगर किसी तरह शहजादी नूर से बात की जाए तो मुझे यकीन है वह भी बेगुनाह लोगों का खून बहता देखना पसंद ना करेगी और वह यकीनन अपने बाप की मुखालिफत करेगी और हो सकता है सुल्तान सलाह अपनी बेटी की बात मान जाए और जंग का ख्याल दिल से निकाल दे।" शहजादा हसन ने सोचते हुए लहजे में कहा।
"तुम्हारा ख्याल किसी हद तक दुरुस्त है लेकिन यह भी तो सोचो कि तुमने यह बात शहजादी के मुतालिक सिर्फ सुन रखी है और सुनी सुनाई बातों पर कभी यकीन ना करना चाहिए। हो सकता है शहजादी भी सुल्तान सलाह जैसी हो। अगर ऐसी बात हो तो तुम्हारा क्या इदाम होगा?" बादशाह सलीम ने खतशा जाहिर किया।
"वाकई यह सोचने वाली बात है। ठीक है अब्बा हुजूर। आप मुझे चंद दिन का वक दें और मुझे इजाजत दें। मैं खुद ममलकत ए शाम जाकर हालात का जायजा लेता हूं और आपको यकीन दिलाता हूं कि मैं किसी ना किसी तरह सुल्तान सलाह को उसके इरादों से रोक लूंगा। सुल्तान सलाह हमारी ममलकत तो क्या आइंदा किसी दूसरे ममलकत पर भी हमला करने का सोच भी ना सकेगा।" शहजादा हसन ने अचानक बड़े पुर लहजे में कहा। उसकी आंखों में अजीब सी चमक उभर आई।
बादशाह सलीम उसकी बात सुनकर चौंक पड़े और हैरत भरी निगाहों से उसकी तरफ देखने लगे। "क्या मतलब? यह बात तुम इस कदर यकीन से कैसे कह सकते हो बेटा?" उन्होंने हैरत भरी निगाहों से उसकी जानिब देखते हुए पूछा।
"अभी मेरे जेहन में कोई खास तकबीर नहीं है अब्बा हुजूर। लेकिन अगर आप मुझे ममलक शाम जाने की इजाजत दे दें तो मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि मैंने जो कुछ कहा है बिल्कुल वैसा ही होगा।" शहजादा हसन ने एतबार भरे लहजे में कहा।
"ठीक है यह क्योंकि ममलकत और आवाम की भलाई का मामला है इसलिए हम तुम्हें ना रोकेंगे लेकिन बेटा जो कदम उठाना सोच समझ कर उठाना दुश्मन को कभी कमजोर मत समझना वरना बहुत बड़ा नुकसान उठाओगे।" बादशाह सलीम ने सर हिलाकर कहा और शहजादा हसन ने भी जवाबन सर हिला दिया। उसका चेहरा खुशी से खिला हुआ था क्योंकि वह तो खुद सैरो तफरीह के लिए कहीं जाना चाहता था। उसके लिए बादशाह सलीम से इजाजत लेना मुश्किल हो रहा था और अब बादशाह सलीम ने खुद उसे इजाजत दे दी थी।
क्योंकि शहजादे ने जिस काम की हामी भरी थी, वह इंतहाई मुश्किल था। लेकिन हसन ने सोचा कि वह कोई ना कोई ऐसा तरीका इस्तेमाल करेगा कि किसी तरह सुल्तान सलाह अपने इरादों से बाज आ जाए। इसलिए वह खास मुतमिन था। बादशाह सलीम उसे काफी देर बातें करते रहे। फिर उन्होंने शहजादे को जाने की इजाजत दे दी।
शहजादा हसन मंजिलों पर मंजिलें तय करता हुआ तीन रोज के बाद ममलकत एशा शाम पहुंच गया। क्योंकि ममलकत शाम का रास्ता इस कदर तवील ना था। लेकिनकि सरहद पर फौज जमा हो रही थी। इसलिए शहजादे ने मुतादिल रास्ता इख्तियार किया। जिसकी वजह से उसे शाम पहुंचते-पहुंचते तीन दिन लग गए।
अभी वह ममलकत ए शाम में दाखिल भी ना हुआ होगा कि एक जोरदार हवा का झोंका उठा और उसके घोड़े के सामने एक सब्ज रंग का अजीब और गरीब शख्स नमूदार हुआ। जैसे ही वह शख्स नमूदार हुआ शहजादे का घोड़ा जोर से हिनहिनाया। यह मुसीबत अचानक और नागहानी थी। इसलिए शहजादा हसन खुद को संभाल ना सका। दूसरे ही लम्हे वह उछल कर जमीन पर आ गिरा।
इससे पहले कि घोड़ा बिदक कर किसी तरफ भाग निकलता नमूदार होने वाला सब्ज इंसान अचानक बिजली किसी तेजी से हरकत में आया। उसने अपना हाथ सीधा किया। फौरन ही उसकी उंगलियों से शरारे निकले और दूसरे ही लम्हे घोड़ा पत्थर का बन गया। शहजादा हसन जमीन पर गिरकर जल्दी से उठ खड़ा हुआ। उसने जब अपने घोड़े को पत्थर का बुठ बने देखा तो एक लम्हे के लिए उसके चेहरे पर खौफ फैल गया।
"क्या मतलब? कौन हो तुम और मेरे घोड़े को क्या हुआ है? यह पत्थर का कैसे बन गया?" शहजादा हसन ने सब्ज बूढ़े इंसान की जानिब फटी फटी निगाहों से देखते हुए पूछा।
उसकी बात सुनकर सब्ज बूढ़ा जोर से हंसा और फिर वह जोर-जोर से किकें लगाने लगा। उसका सारा वजूद सब्ज रंग में रंगा हुआ था। "मेरा नाम उस्मान जादूगर है। तुम्हारे घोड़े को मैंने पत्थर का बनाया है।" सब्ज बूढ़े ने शोरशराबे से किकें लगाते हुए जवाब दिया।
"उस्मान जादूगर ओ लेकिन तुमने मेरा रास्ता क्यों रोका है? क्या चाहते हो तुम मुझसे?" शहजादा हसन ने पहले से भी ज्यादा घबराए हुए लहजे में पूछा।
"तुम जिस मकसद के लिए ममलकते शाम जा रहे हो, तुम्हारा वह मकसद कभी पूरा ना होगा। शहजादी नूर तुम्हारी बात हरगिज़ ना मानेगी। बल्कि तुम्हें शहजादी तक पहुंचने ही ना दिया जाएगा। हां, अगर तुम मेरी मदद करने का फैसला करोगे, तो मैं तुम्हारी यह मुश्किल आसानी के साथ हल कर सकता हूं।" सब्ज बूढ़े ने जिसने अपना नाम उस्मान जादूगर बताया था। शहजादा हसन की जानिब देखते हुए मुस्कुराते हुए कहा।
"क्या मतलब? तुम कैसे जानते हो कि मैं किस मकसद के लिए ममलक एशाम जा रहा हूं।" शहजादा हसन ने बुरी तरह से चौंक कर कहा। उसकी हैरत वजा थी क्योंकि वह भेष बदलकर एक आम से इंसान के रूप में ममलकते शाम जा रहा था और वह शख्स ऐसे कह रहा था जैसे वह उसे पहचानता हो।
"मैं दुनिया का सबसे बड़ा जादूगर हूं शहजादे मुझसे कुछ भी ना छुपा हुआ। मुझसे डरो ना मैं तुम्हारा दुश्मन ना हूं। तुम्हारा दोस्त हूं।" उस्मान जादूगर ने निहायत संजीदा लहजे में कहा। लेकिन शहजादा हसन अभी तक उसकी जानिब शक भरी निगाहों से देख रहा था। उसका हाथ बेखयाली में पहलू में लटकी तलवार के दस्ते पर जा पड़ा।
"लेकिन मैं तुम्हारी बात पर कैसे यकीन कर लूं कि तुम मेरे दोस्त हो। और सबसे बड़ी बात यह कि तुम मुझसे क्या चाहते हो?"
"मैं तुमसे जो चाहता हूं, इस बात का जवाब मैं तुम्हें यहां ना दे सकता। इसके लिए तुम्हें मेरे साथ चलना होगा।" उस्मान जादूगर ने इस बार निहायत संजीदा लहजे में जवाब दिया।
"कहां चलना होगा मुझे?" शहजादा हसन ने हैरानी से पूछा।
"घबराओ ना। मैं तुम्हें कहीं और नहीं अपने महल में ले जाना चाहता हूं। तुम मुझ पर यकीन करो। मैं तुमसे वादा करता हूं। मैं तुम्हारी मदद जरूर करूंगा।"
शहजादा हसन ने कुछ लम्हों के लिए सोचा। फिर उसने सर हिला दिया। "ठीक है। मैं तुम्हारे साथ चलने के लिए तैयार हूं। लेकिन याद रखना अगर मेरे मिजाज के खिलाफ कोई बात हुई या तुमने मुझे धोखा देने की कोशिश की तो मुझसे बुरा कोई ना होगा और मैं तुम्हें जिंदा ना छोडूंगा।" और उस्मान जादूगर ने उसकी बात सुनकर मुस्कुरा कर सर हिला दिया।
उस्मान जादूगर ने अपना दाया हाथ उठाकर शहजादे के घोड़े की जानिब करके हल्का सा झटका दिया। उसकी उंगलियों से लाल लहरें निकल कर घोड़े पर पड़ी। दूसरे ही लम्हे पत्थर का घोड़ा अपनी असली हालत में वापस आ गया। उस्मान जादूगर ने शहजादे को घोड़े पर सवार होने का कहा और फिर वह खुद भी उसके साथ घोड़े पर बैठ गया।
शहजादे ने घोड़े को डर लगाई और दूसरे ही लम्हे घोड़ा निहायत तेजी से एक तरफ भागने लगा। "घोड़े की रफ्तार बहुत सस्ती है। इस तरह तो हम सदियों तक महल ना पहुंच सकेंगे। खैर ओ शहजादे मैं इस घोड़े को उड़ने वाला घोड़ा बना देता हूं।" उस्मान जादूगर ने कहा। शहजादा उसकी बात सुनकर हैरान हुआ मगर उसने जवाबन कुछ ना कहा।
उस्मान जादूगर ने कोई मंत्र पढ़कर घोड़े पर फूंका। एक जोरदार हवा का झोंका हुआ और दूसरे ही लम्हे अचानक घोड़े के दो पर नमूदार हो गए। "हवा के घोड़े। जिस कदर जल्दी मुमकिन हो सके हमें सब्ज महल तक पहुंचाओ।" उस्मान जादूगर ने घोड़े को हुक्म देते हुए कहा। घोड़ा जोर से हिनहिनाया और उसने भागते-भागते अचानक लंबी छलांग भरी और फिर देखते ही देखते पर मारता हुआ किसी परिंदे की तरह आसमान की जानिब ऊंचा उठता चला गया।
शहजादा हसन पर वाले घोड़े को इस तरह फिजा में ऊंचा होते देखकर बहुत घबराया था। अगर वह खुदा ना खास्ता इस कद्दर ऊंचाई से गिर पड़ा तो उसका क्या हश्र होगा? घोड़ा निहायत तेज रफ्तार से उड़ता हुआ एक जानिब जा रहा था। इनका यह सफर कई घंटों तक जारी रहा। फिर अचानक घोड़े की रफ्तार हल्की होने लगी।
जैसे ही घोड़े की रफ्तार हल्की हुई, दूसरे ही लम्हे वहां भयानक शक्लों वाले कई खौफनाक देव नुमायाओं हो गए। इन सब देव के रंग उस्मान जादूगर की तरह सब्जे थे। इन्होंने हाथों में बड़े-बड़े गज उठा रखे थे। शहजादा इन देव को देखकर खौफदा हो गया। देव ने झुककर उस्मान जादूगर को सलाम किया।
"हुकमा अली जा यह आदमी जाद कौन है? अगर यह आपका दुश्मन है तो इसे हमारे हवाले कर दें। हम गज मार मार कर इसके जिस्म का कीड़ा बना देंगे।" इनमें से एक देव ने उस्मान जादूगर की जानिब देखकर निहायत मुद्दत बाना लहजे में कहा।
"नहीं यह आदमी जाद हमारा दुश्मन ना दोस्त है। इसे हम खुद यहां लाए हैं। घूल देव को हमारी आमद की इत्तला दो और उससे कहो कि हम सब्ज महल जाना चाहते हैं। वो हमें रास्ता दे।" जादूगर ने इसकी जानिब देखकर तहकुमामेज लहजे में कहा।
"जो हुक्म आली जा मैं अभी घूल देव को मुतला कर देता हूं।" सब्ज देवों ने मुद्दत बाना लहजे में कहा। फिर उसने हाथ में पकड़ा हुआ गज फजा में घुमाया और इसे पूरी कहूत से एक जानिब उछाल दिया। गज बिजली की तेजी से एक जानिब उठता चला गया। इस गज में से आग के शोले निकल रहे थे। चंद ही लम्हों बाद गज इनकी निगाहों से गायब हो गया।
अभी कुछ ही देर हुई होगी कि अचानक एक भयानक और लरजाखेज चीख से पूरा आसमान झंझना उठा। चीख की आवाज इस कदर तेज थी कि शहजादा हसन को अपने कानों के पर्दे फटे हुए महसूस हुए। "क्या बात है मुहाफिज देव? तुमने आग का गज क्यों फेंका है? जानते ना मैं इस वक्त आराम कर रहा था।" इस चीख के बादल जैसे घन गहराव वाली आवाज ने हल्का फाड़ कर चीखते हुए कहा।
"मुकद्दस घाली जा हाजिर हुए हैं। वो सब्ज महल जाना चाहते हैं। तुम इनके लिए सब्ज महल में जाने का रास्ता खोल दो। इनके हमराह एक आदमी जात भी है।" देव ने इस तरफ देखते हुए निहायत मुद्दत बाना लहजे में कहा। जिस तरफ इसका फेंका हुआ गज गायब हुआ था।
"ओ गाजी काका ठहरो। मैं अभी इंतजाम करता हूं।" उस्मान जादूगर का नाम सुनकर शाह घूल की घबराई हुई आवाज आई और फिर चंद लम्हों बाद अचानक बिजली सी चमकी और दूसरे ही लम्हे जैसे वहां कोई कूझा कुजा बनती चली गई।
"चलो शहजादे घोड़े को इस तरफ डाल दो।" उस्मान जादूगर ने शहजादा हसन से मुखातिब होकर कहा।
"क्या हम हमें इस कूझा कुजा में सफर करेंगे?" शहजादा हसन ने जो फटी फटी आंखों से यह सब कुछ देख रहा था। इसने खोए खोए अंदाज में कहा।
"हां, यही रास्ता सब्ज महल में जाता है। चलो घोड़े आगे बढ़ाओ।" उस्मान जादूगर ने मुस्कुरा कर कहा और शहजादे ने अपनी हैरत पर काबू पाते हुए घोड़े को कुजाक कुजा के बने रास्ते पर डाल दिया। दूसरे लम्हे घोड़ा कुजा कुजा में इस तरह दौड़ने लगा जैसे वह जमीन पर दौड़ रहा हो। इनका यह सफर भी कई घंटे जारी रहा।
आखिर दूर से शहजादे को एक आलीशान सब्ज महल दिखाई देने लगा। उस्मान जादूगर शहजादे को लेकर महल में आ गया। बिलाशक इसने कभी ख्वाब में भी इस कदर खूबसूरत और आलीशान महल ना देखा होगा। उस्मान जादूगर इसे ले जाते हुए एक निहायत खूबसूरत कमरे में आ गया।
"यह तुम मुझे कहां ले आए हो? आखिर तुम चाहते क्या हो?" शहजादे ने परेशान निगाहों से जादूगर की जानिब देखते हुए पूछा।
"शहजादे पहले आराम कर लो। फिर मैं तुम्हें सारी तफसील बता दूंगा।"
"नहीं मैं बिल्कुल भी थका हुआ ना हूं। तुम मुझे अभी सारी बातें बताओ। ना जाने तुम क्या चाहते हो। मेरी समझ में तुम्हारी अब तक कोई बात ना आई।"
"ठीक है। अगर तुम अभी सुनना चाहते हो तो सुनो। मैं तुम्हें यहां इसलिए लाया हूं ताकि तुम ममलकत शाम जाने के बारे में कभी सोच भी ना सको।" जादूगर ने इसकी जानिब देखकर मुस्कुराते हुए कहा और जादूगर की बात सुनकर शहजादा हसन बुरी तरह से उछल पड़ा। उसकी आंखें हैरत से फैलती चली गई।
"क्या क्या मतलब कि तुम क्या कह रहे हो?" शहजादे ने हड़बड़ा कर कहा।
"वही जो हकीकत है। मैं ना चाहता था कि तुम ममलकत शाम में जाकर सुल्तान सलाह का खेल बिगाड़ दो क्योंकि तुम एक बहुत खतरनाक इंसान हो। तुम्हारे मुतालिक जादू देवता ने मुझे पहले से आगाह कर दिया था। इसलिए मैं शाम की सरहद से बाहर तुम्हारा इंतजार कर रहा था और जैसे ही तुम आए तुम्हें धोखे में लाकर मैं यहां ले आया।"
"तुम सोच रहेगे कि मैंने तुम्हें हलाक क्यों ना किया। तुम मेरे और मेरे शानदार मुस्तकबिल के दुश्मन थे। अगर मैं चाहता तो हकीकत में तुम्हें हल्की सी फूंक से जलाकर भस्म कर सकता था। लेकिन इसके लिए मुझे जादू देवता ने मना कर दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर तुम हलाक हो गए तो तुम्हारे साथ मेरी जिंदगी को भी खतरा लायक हो सकता है। उनके कहने के मुताबिक मेरी आधी जान तुम्हारे जिस्म के अंदर मौजूद है। इसलिए मैंने तुम्हें हलाक ना किया।"
"अब तुम यहां से इस हवाई महल में रहोगे। यहां रहकर तुम ऐश करो। आज के बाद तुम कभी जमीन पर अपनी-अपनी दुनिया में ना जा सकोगे। यहां पर राज करो। यहां पर मौजूद हर चीज तुम्हारी है। मेरे गुलाम, जिन देव और परियां अब सब के सब तुम्हारे गुलाम और बंदे हैं। तुम्हारा बड़े से"
बड़ा काम कुछ मिनट में हो जाएगा। तुम उनसे जो भी चाहो तलब कर सकते हो। बस यहां से भागने की कोशिश मत करना। यह ठीक है कि तुम्हें हलाक ना किया जाएगा। लेकिन भागने में तुम्हें जो तकलीफें और अज़यतें उठानी पड़ेंगी, उसके बारे में तुम अंदाजा भी ना लगा सको।
उस्मान जादूगर कहता चला गया। और शहजादा हसनहों की तरह मुंह खोले उसकी जानिब इस तरह देख रहा था जैसे किसी उल्लू को पकड़ कर धूप में बैठा दिया हो। उस्मान जादूगर ने उसे इस हालत में देखकर हल्का सा कीका लगाया। फिर उसने जोर से ताली बजाई। फौरन ही एक जोरदार हवा का झोंका हुआ और एक निहायत खूबसूरत परी नुमायान हुई।
हुक्म अलीजा परी ने सर झुकाकर निहायत मुद्दुबाना अंदाज में उस्मान जादूगर को सलाम करते हुए कहा शहर परी आज से शहजादा हमारा मेहमान है अब यह यहीं रहेगा सब्ज महल में सबको यह बात पहुंचा दो तुम सब लोग शहजादा हसन के ताबिक हो यह तुम्हें जो हुक्म दे उसका हर हुक्म माना जाए अगर यह सब्ज महल से निकलने की कोशिश करें या किसी को उकसाए तो तुम इसे आग के कुएं में फेंक देना यह सारी उम्र उस आग में पड़ा जलता रहेगा ना इसे कभी मौत आएगी और ना ही वह वहां से कभी निकलने की कोशिश कर सकेगा।
उस्मान जादूगर ने शहर परी को हुक्म देते हुए कहा जो हुक्म ली जा परी ने सर झुकाकर मुद्दुबाना अंदाज में जवाब दिया। फिर शहजादे की जानिब देखते हुए बोली आइए शहजादा हुजूर मैं आपको आपकी आरामगाह तक पहुंचा दूं। आप बहुत थके हुए लग रहे हैं। सहर परी ने शहजादे के करीब आकर उसका हाथ पकड़ते हुए कहा।
शहजादा हसन ने एक झटके से उससे अपना हाथ छुड़ा लिया। उसने बिजली की तेजी से पहलू में लटकी हुई तलवार के दस्ते पर हाथ डाला और एक झटके के साथ उसने मियान से अलग दी। अगर किसी ने मुझे हाथ लगाया तो उस्मान जादूगर। मैंने तुमसे कहा था कि अगर तुमने मेरे साथ धोखा या फरेब किया तो बहुत बुरा होगा। मैंने तुम पर ऐतबार किया लेकिन तुमने मुझे धोखा दिया। अब तुम्हें इसका खमियाजा भुगतना पड़ेगा। मैं तुम्हें जिंदा ना छोडूंगा।
शहजादा हसन ने गुस्से से भरे लहजे में कहा और वह उछल कर उस्मान जादूगर के करीब आ गया। उसने तलवार की नोक उस्मान जादूगर की गर्दन पर रख दी। फजूल है शहजादे तुम इस वक्त सबज महल में हो और यहां मेरे हुक्म के बगैर एक मामूली परिंदा भी पर ना मार सकता।
उस्मान जादूगर ने कहा और उसने शहजादे की तरफ मुंह करके हल्की सी फूंक मारी। अचानक शहजादे को एक जोरदार झटका लगा। उसे यूं महसूस हुआ जैसे उसका जिस्म अकड़ता जा रहा हो। शहर पड़ी ले जाओ इसे। इसका ख्याल रखना। मैं ममलकते शाम जा रहा हूं। मेरा वहां रहना बहुत जरूरी है। वरना शाह शाम मेरे असर से निकल आएगा। और यह मेरे लिए निहायत खतरनाक बात होगी।
उस्मान जादूगर ने शहर परी की तरफ देखते हुए कहा। और शहर परी ने उसके बाद सर हिला दिया। और उस्मान जादूगर वहां से यूं गायब हो गया। जैसे वहां कभी उसका वजूद ही ना था। शहजादा हसन अपनी जगह पर दोनों हाथों से सर पकड़ कर खड़ा था। उसे यूं महसूस हो रहा था जैसे किसी ने उसके सर पर हथौड़ा दे मारा हो। शहर पर ही उसके करीब खड़ी उसकी ओर गौर से देख रही थी। कुछ पल तक शहजादे की यही हालत रही। फिर उसका दिमाग तिलपिटा गया।
चलो शहजादे मैं तुम्हें तुम्हारी आरामगाह में पहुंचा दूं। परी ने उसकी ओर देखते हुए तैमल आमेज लहजे में कहा। काजी जादूगर कहां है? शहजादे ने गुस्से से हंठ बजा ते हुए कहा हलीजा ममलकत शाम चले गए हैं। मेरा मशवरा मानो शहजादे अपने दिमाग से यह ख्याल निकाल दो। तुम भी अब मेरी तरह सबज महल के कैदी बन चुके हो। जादूगर की इजाजत के बिना तुम यहां से हरगिज़ ना निकल सकोगे। जिद मत करो और मेरे साथ चलो। शहर परी ने प्यार भरे लहजे में कहा, नहीं मैं तुम्हारे साथ कहीं ना जाऊंगा। मुझे इस महल से निकलना है हर हाल में। इसके लिए चाहे मुझे कुछ भी करना पड़े।
शहजादा हसन ने भी जवाबन सख्त लहजे में कहा और फिर उसने झपट कर जमीन पर गिरी हुई तलवार उठा ली। इससे पहले कि शहर परी कुछ समझती शहजादा हसन ने तेजी से घूमते हुए तलवार पूरी ताकत से शहर परी की गर्दन पर मारी। शहर परी की गर्दन एक झटके से काट कर दूर जा गिरी।
जैसे ही शहर परी की गर्दन काटी तेज जोरदार हवा का झोंका हुआ और तेज-ते बिजली कड़कने लगी शहर परी का बिंसरधड़ जमीन पर गिर कर बुरी तरह से तड़पने लगा शहजादे ने नफरत भरी नजर शहर परी के तड़पते हुए जिस्म पर डाली और निहायत तेजी से एक तरफ भागा मगर उसके आसपास एक के बाद एक कई जोरदार हवा के झोंके हुए और उसके सामने अजीब और करीब ऊंट जैसी शक्लों वाली बदरू नजर आने लगी उनके नाखून बहुत बड़े हुए थे और छुरियों की तरह तेज दिखाई दे रहे थे। यहीं रुक जाओ शहजादे अगर तुमने भागने की कोशिश की तो हम नाखून से तुम्हारी खाल उधेड़ कर रख देंगे।
एक बदरूह ने शहजादा हसन की ओर देखते हुए चीख कर कहा। साथ ही उसने हाथ को हवा में घुमाया तो उसके नाखूनों से चिंगारियां सी फूटने लगी। तुम मेरा कुछ ना बिगाड़ सकते। शहजादे ने घूर कर कहा और उसने बिजली की तेजी से तलवार घुमाकर पूरी ताकत से एक बदरूह के हाथ पर मारी। बदरूह का हाथ काट कर दूर जा गिरा। उस बदरू के गले से एक खौफनाक चीख निकली और वह उलट कर गिर पड़ा और बुरी तरह से तड़पने लगा।
पकड़ लो इस बदबख्त को। अलीजा ने हुक्म दिया था कि मारा ना जाए। लेकिन अगर कोई शरारत करे तो उसे ले जाकर आग के कुएं में फेंक दिया जाए। उसने मेरी गर्दन काटी है और बानी बदरू को भी जख्मी कर दिया है। उसे पकड़ लो। अचानक शहर परी की काटी हुई गर्दन ने चीख कर कहा। इसका हुक्म सुनकर दूसरी बदरूें बेहद आक्रामक अंदाज में शहजादा हसन पर झपटी। मगर शहजादा हसन ने उनसे भी ज्यादा तेज रफ्तार का मुजाहरा किया। वह बिजली की तेजी से ना सिर्फ छलांगे लगाकर दूर हट गया बल्कि उसने तलवार घमाते हुए एक और बदरूह का सर काट डाला।
अब तो बदरूहों पर जैसे जुनून सवार हो गया। वह बेहद खौनक अंदाज में शहजादा पर हमला करने लगे। सैरपरी काटा हुआ सर उन्हें चीख-चीख कर हिदायत दे रहा था कि किसी तरह शहजादा हसन उनके कब्जे में आ जाए। लेकिन शहजादा हसन तो इस वक्त बिजली बना हुआ था। उसने तलवार के ऐसे जौहर दिखाए कि देखते ही देखते तमाम बदरूें जमीन पर गिर कर ढेर हो गई। उन्हें हलाक करके शहजादा निहायत तूफानी अंदाज में एक बार फिर भाग पड़ा।
शहर परी लगातार घूमती हुई उसके सर पर वार कर रही थी। शहजादा हसन ने इस पर कई बार तलवार मारने की कोशिश की। लेकिन सैरपरी का कांटा हुआ सर तेजी से हवा में ऊंचा उड़ जाता। वह उन्हें गाजर मूली की तरह काटता हुआ महल के दरवाजे के बाहर पहुंच गया। दरवाजे से बाहर निकलकर उसकी रूह फना हो गई। उसने देखा वह जिस महल में मौजूद था, वह हवा में तैर रहा था और दूर-दूर तक के आसमान और खुला आसपास उसे कुछ दिखाई ना दिया। जिस किसी खोजा कजा वाले रास्ते पर वह जादूगर के साथ उसके महल में आया था। अब वह रास्ता भी दिखाई ना दे रहा था।
हां हां हां क्या हुआ शहजादे? रुक क्यों गए? जाओ जाओ। तुम बाहर क्यों नहीं जा रहे? सहरपरी के काटे हुए सर ने कीखे लगाते हुए कहा, कुछ भी हो, मैं हरगिज़ यहां ना रहूंगा। शहजादा हसन ने रूठे हुए कहा, उसने होठ बजाते हुए अचानक बाहर छलांग लगा दी। उसे यूं छलांग लगाते देखकर परी बुरी तरह से चीख उठी।
शहजादा हसन का जिस्म जैसे ही हवा में ऊंचा हुआ, उसके आसपास बिजली चमकी। दूसरे ही पल उसके पास एक निहायत भीषण शक्ल वाला दैव नजर आ गया। उसने बिजली की तेजी से झपट्टा मारकर गिरते हुए शहजादे को दबोच लिया और उसे पकड़ कर वापस महल की ओर ले आया। शहजादा हसन ने गुस्से से उसे तलवार मारने की कोशिश की। लेकिन देव ने उसके हाथ से तलवार खींच कर हवा में उछाल दी।
बहुत खूब घोल देव। उसे महल में ले आओ। हम उसे यहां से भागने की इस कदर भीषण सजा देंगे जिसकी यह तसवुर भी ना कर सके। महल के दरवाजे के करीब शहर परी के कांटे हुए सर ने चीखते हुए कहां उसकी बात सुनकर घोलदेव तीर की तरह सीधा उड़ता हुआ महल के करीब आ गया उसने शहजादे को महल के खुले हुए दरवाजे में उछाल दिया जैसे ही शहजादा महल में गिरा ठीक उसी वक्त शहर परी का काटा हुआ सर अपनी जगह पर ठहर गया उसकी आंखों से एकदम जर्द रंग की रोशनी निकलने लगी और शहजादा हसन पर पड़ने लगी शहजादा हसन के मुंह से जोरदार चीखें बाहर होने लगी जैसे उसे जिंदा आग में जला रहा हो।
ठीक उसी पल एक जोरदार हवा का झोंका हुआ और वहां उस्मान जादूगर नजर आ गया। उसका चेहरा बुरी तरह से बिगड़ा हुआ था। उसने कहर भरी निगाहों से शहर परी की तरफ देखा जिसकी आंखों से जर्द रंग की रोशनी लगातार बाहर निकल कर शहजादा हसन पर पड़ रही थी। शहर परी यह क्या कर रही हो? रुक जाओ। मैं कहता हूं रुक जाओ। उसने शहर परी के काटे हुए सर की तरफ देखकर बुरी तरह से चीख कर कहा।
उसकी आवाज सुनकर शहर परी चौंक पड़ी। अच्छा हुआ अलीजा आप आ गए। यह शहजादा यहां से किसी तरह भाग जाना चाहता था। उसने बानी बदरू को भी हलाक कर दिया है। अलीजा और उसने मेरा सर भी काट दिया है। अगर आप ना आते तो मैं इस बदबख्त को जलाकर मार डालती। बदबख्त परी मैंने तुम्हें बताया था कि शहजादे को किसी किस्म की तकलीफ ना पहुंचाई जाए। तुम जानती हो जादू के देवता ने मेरी आधी जान उसके शरीर में डाल रखी है। अगर उसे कुछ हो जाता तो जानती वो मेरी सारी ताकत खत्म हो जाती और मैं एक आम इंसान बनकर रह जाता। अगर मुझे वक्त पर पता ना चल जाता तो तुम शहजादे को मार ही डालती और मेरा सारा किया धरा बिगड़ जाता।
उस्मान जादूगर ने शहर परी को बुरी तरह से डांटते हुए कहा। शहजादा हसन उसकी बातें सुनकर बुरी तरह से चौंक पड़ा। अब उसके दिमाग में सारी बात साफ हो गई थी कि सुल्तान सलाह इतने जालिम और सख्त क्यों बन गए हैं। इस पर उस्मान जैसा खतरनाक जादूगर ने अपना जादू कर रखा है और सुल्तान अपनी मर्जी से कुछ ना करता हर काम उस्मान जादूगर ही करवाता है। शहजादे ने फैसला कर लिया कि वह सुल्तान सलाह को इस जैसे खतरनाक और सख्त दिल जादूगर के कायद से जरूर रिहाई दिलाएगा। मगर इसके लिए उसे सुल्तान सलाह के पास जाना जरूरी था। वह इस वक्त जमीन से बहुत दूर आसमान पर मौजूद जादूगर के महल में कैद था। वह सोचने लगा कि वह यहां से रिहाई पाकर कैसे जमीन पर पहुंचे।
शहर परी ने उसे जिंदा जलाने की कोशिश जरूर की थी। लेकिन जैसे ही उसकी आंखों से रोशनी निकलना बंद हुई थी। साथ ही शहजादा हसन की तकलीफ भी खत्म हो गई थी। वह जानबूझकर जमीन पर गिरा हुआ था ताकि उसकी बातें सुन सके। अचानक उसे ख्याल सूझा। उसने निहायत गैर महसूस अंदाज में अपनी कमर में छुपाया। बुआ खंजर निकालकर हाथ में ले लिया। उस्मान जादूगर क्योंकि सिर उठाकर शहर परी की ओर देख रहा था। इसलिए वह शहजादे को खंजर निकालते ना देख सका। लेकिन शहर परी का सिर उसे खंजर निकालते हुए देख चुका था। लेकिन उससे पहले कि वह उस्मान जादूगर को खबरदार करती शहजादा हसन बिजली की तेजी से उठा और उसने हाथ घुमाकर खंजर पूरी। ताकत से जादूगर की पिंडली पर दे मारा।
जादूगर के मुंह से एक जोरदार चीख निकली। एफ दडम से उलट कर गिर पड़ा। इसी वक्त शहजादा हसन ने एक झटके से उसकी पिंडली से खंजर खींचा और कर्बला बदलकर निहायत तेजी के साथ जादूगर के सीने पर सवार हो गया। उसने खंजर जादूगर की गर्दन से लगा दिया। तकलीफ की वजह से जादूगर का चेहरा बुरी तरह से बिगड़ा हुआ था। वह फटी फटी आंखों से शहजादे की ओर देख रहा था। जैसे उसे अपनी आंखों पर यकीन ना आ रहा हो कि शहजादा हसन ऐसी हरकत भी कर सकता है।
इससे पहले कि मैं खंजर से तुम्हारी शहर रख काट कर तुम्हें मौत के घाट उतार दूं। तुम मुझे जमीन पर वापस जाने का रास्ता बता दो। मैं हर हाल में जमीन पर वापस जाना चाहता हूं। शहजादा हसन ने रूठे हुए कहा, नहीं शहजादे मुझे मत मारना। अगर तुमने मुझे मारा तो तुम भी जिंदा ना रहोगे। मैंने तुम्हें बताया था ना कि मेरी आधी जान तुम्हारे शरीर में है। इसी तरह तुम्हारी आधी जान भी मेरे शरीर में मौजूद है। अगर तुमने मुझे हलाक कर दिया तो तुम भी बिल्कुल उसी तरह मर जाओगे जिस तरह तुम मुझे मारोगे।
जादूगर ने डर भरे लहजे में कहा। उसकी बात सुनकर शहजादा हसन के चेहरे पर अजीब उलझन और तनाव आ गया। वह बेयकीनी के आलम में जादूगर की ओर देखने लगा। उसका लहजा बता रहा था कि वह वाकई सच बोल रहा है। तो इसका मतलब है अगर मैं खुद को हलाक कर दूं तो तुम भी हलाक हो जाओगे। शहजादा हसन ने उसकी ओर परेशान निगाहों से देखते हुए पूछा हां ऐसा ही है। इसीलिए तो मैंने तुम्हें इस महल में कैद किया था। मेरा मशवरा मानो शहजादे अपने इरादे से बाज आ जाओ। तुम यहां जिंदा रहकर ऐशो आराम से जिंदगी बसर कर सकते हो। यहां से जाने के बारे में मत सोचो।
उस्मान जादूगर ने उसे समझाते हुए कहा, "अच्छा, क्या तुमने मुझे असली हालात बता दी?" अगर तुमने अब मेरी बात ना मानी और मुझे दोबारा जमीन पर ना पहुंचाया तो मैं अपने हाथों से अपने सीने में खंजर उतार दूंगा। एक शैतान को मारने के लिए अगर मुझे अपनी जान की कौरानी भी देनी पड़े तो मुझे कोई परवाह नहीं।
शहजादा हसन ने जादूगर के सीने पर से उठते हुए बेहद सख्त लहजे में कहा नहीं नहीं शहजादे ऐसा गजब मत करो अगर तुम मर गए तो मैं भी मर जाऊंगा शहजादे मेरी बात गौर से सुनो तुम अपनी जिंदगी और मैं अपनी जिंदगी हासिल कर सकते हैं उस्मान जादूगर ने कहा और शहजादा हसन उसकी बात सुनकर चौंक पड़ा क्या मतलब क्या ऐसा मुमकिन है उसने हैरान भरे लहजे में कहा हां शहजादे मैं तुम्हें जमीन पर ले चलता हूं तुम सुल्तान सलाह को हलाक कर दो। उसके हलाक होते ही जादू देवता के उसूलों के मुताबिक हमें अपनी जिंदगी वापस मिल जाएगी और हम अपनी मर्जी से जी सकेंगे। वैसे भी तुम जानते हो यह सुल्तान सलाह किस कदर जालिम इंसान है। इस दुनिया से जुल्म का खात्मा हो जाना ही बेहतर है। बोलो शहजादे तुम क्या कहते हो?
जादूगर ने उसकी ओर मंजीर निगाहों से देखते हुए पूछा। उसकी बात सुनकर शहजादा हसन सोच में पड़ गया। कुछ पल बाद उसने यूं सर हिलाया जैसे वह किसी खास फैसले पर पहुंच गया हो। मुझे तुम्हारी बात मंजूर है। तुम मुझे अभी और इसी वक्त सुल्तान सलाह के पास ले चलो। मैं अभी उसे हलाक करके अपनी जिंदगी पूरी करना चाहता हूं।
शहजादा हसन ने जादूगर से मुखातिब होकर कहा, जादूगर का चेहरा खुशी से गुलाब की तरह खिल उठा। शहजादे मैं जानता था कि तुम यही फैसला करोगे। अपनी आंखें बंद करो शहजादे। मैं तुम्हें अभी सुल्तान सलाह के महल में ले चलता हूं।
जादूगर ने खुशी से भरपूर लहजे में कहा। साथ ही उसने हवा में हाथ घमा कर एक खंजर हासिल किया और शहजादे को दे दिया। शहजादा हसन ने फौरन खंजर ले लिया और फिर उसने उस्मान जादूगर के कहने पर आंखें मूंद ली। दूसरे ही पल एक जोरदार झटका लगा। वह मुश्किल से गिरते-गिरते संभल आओ।
आंखें खोलो शहजादे। तुम इस वक्त सुल्तान सलाह के कमरे खास में हो। मैंने सुल्तान सलाह पर वक्त तौर पर जादू करके उसे पत्थर बना दिया है। तुम जल्दी से उसे हलाक कर दो।
उस्मान जादूगर की सरगोशियां ने जल्दी से आंखें खोल दी। उसने देखा वह वाकई एक निहायत खूबसूरत और आलीशान कमरे में खड़ा था। एक तरफ चौबूतरा था। चौबूतरे पर एक बूढ़ा सुल्तान हाथ बांधे और सर झुके खड़ा था जैसे वह वाकई पत्थर का बुत हो। उसके करीब एक निहायत खूबसूरत लड़की जिसने जर्द रंग का निहायत खूबसूरत कपड़ा पहना हुआ था। निहायत परेशानी के आलम में बूढ़े सुल्तान को झाड़ रही थी। अब्बा हुजूर अब्बा हुजूर क्या हुआ? अब्बा हुजूर आप बोलते क्यों नहीं? वह निहायत परेशानी के आलम में चल रही थी। फिर उसकी नजर शहजादा हसन पर पड़ी तो वह हैरान रह गई। शहजादे के हाथ में एक खंजर चमक रहा था। कौन हो तुम? और बिना इजाजत तुम्हें अंदर आने की हिम्मत कैसे हुई? उसने शहजादे की ओर देखकर तेज लहजे में कहा।
शहजादे ने जवाब देने के बजाय खौनाक निगाहों से सुल्तान की ओर देखता हुआ आगे बढ़कर चौबूतरें की। सीढ़ियां और चढ़ने लगा। उसका अंदाजा बता रहा था जैसे वह हाथ में पकड़ा हुआ खंजर सुल्तान सलाह के सीने में खौफना चाहता हो। यह देखकर जर्द कपड़े वाली खूबसूरत लड़की जो शहजादी नूर थी। घबराई और जल्दी से सुल्तान सलाह के सामने हाथ फैलाकर यूं खड़ी हो गई जैसे वह सुल्तान सलाह का रक्षा करने वाली हो। शहजादी नूर ने उसकी ओर देखकर बुखलाए हुए लहजे में कहा एल इसी पल शहजादा हसन के दाएं तरफ दीवार पर मौजूद उस्मान जादूगर का बड़ा सा चेहरा नजर आया।
देर मत करो शहजादे मेरा जादू खत्म होने वाला है। सुल्तान अगर मेरे जादू से आजाद हो गया तो यह तुम्हें मार डालेगा। यह तुम्हें पहचानता है और यह जानता है कि मेरी जान तुम्हारे शरीर में है। उस्मान जादूगर ने चीख कर शहजादे को हुक्म देते हुए कहा। उसकी बात सुनकर शहजादा हसन उसकी ओर घूमा। उसने खंजर वाला हाथ उठाया और फिर एक ही झटके से उसने खंजर अपने सीने में मार लिया। यह सब कुछ उसने इस कदर तेजी से किया था कि उस्मान जादूगर को और शहजादी नूर को कुछ सोचने का मौका ही नहीं मिला।
जैसे ही शहजादे ने अपने सीने में खंजर उतारा, एक जोरदार कड़क हुआ जैसे बिजली चमकी हो। दूसरे ही पल अचानक शहजादे के सामने उस्मान जादूगर अपनी असली शक्ल व सूरत में उसके करीब आ गया और साथ ही सुल्तान सलाह को हल्का सा झटका लगा और वह जादूगर के जादू से आजाद हो गए। शहजादा जख्मी है और उस्मान जादूगर आम इंसानों के रूप में आ चूका है। इसका मतलब है उस्मान जादूगर की सारी ताकत बेकार हो चुकी है। बुजुर्ग पीर ने कहा था कि अगर उस्मान जादूगर तुम्हारे सामने आम इंसानों के रूप में नजर आए तो उसे तुरंत हलाक कर दिया जाए।
सुल्तान सलाह बड़बड़ाते अंदाज में बोलता चला। गया और फिर उसने ताली बजाकर तुरंत जल्लाद को बुलाने का हुक्म दिया। जल्लाद आए तो उन्होंने सुल्तान सलाह के हुक्म पर जादूगर का सिर तुरंत कलम कर दिया। जादूगर बहुत चीखा चिल्लाया लेकिन सुल्तान सलाह ने उसकी एक ना सुनी। जख्मी शहजादा हसन को तुरंत तबीबी इमदाद मुहैया कराई गई।
सुल्तान सलाह ने उसे सारी तफसील बताई कि पिछले कई वर्षों से उस्मान जादूगर उसके सिर पर मनसूब था और उससे जबरन रियायत पर जुल्म करवा रहा था। उन्हें एक अल्लाह वाले बुजुर्ग ने खबरदार किया था कि उस्मान जादूगर की मौत सिर्फ यही हालत बे मुमकिन है कि किसी तरह ममलकत बगदाद का शहजादा अपने हाथों से अपने सीने में खंजर घोंप ले। असल में उस्मान जादूगर की आधी जान उस्मान जादूगर के एक गलत अमल की वजह से तुम्हारे जिस्म में चली गई थी। उसने इस अमल के जरिए मेरा तख्तोताज हासिल करना चाहा। लेकिन मंत्र उल्टे पड़ जाने की वजह से उसकी सारी ताकतें तुम्हारे जिस्म में एक फल के खाने की वजह से चली गई थी जो तुमने एक जंगल में अपनी भूख मिटाने के लिए खाया था।
शहजादा यह सारी तफसील सुनकर बहुत हैरान हुआ। शाही तबीब ने उसके सीने का चारखन बहुत जल्द ठीक कर दिया। शहजादा हसन ने तंदुरुस्त होकर इस मलकत की खूब सैर और शिकार की। इस तरह उसकी अपनी ख्वाहिश भी पूरी हो गई और उसने एक खतरनाक मसला भी हल कर लिया। एक दिन उसने सुल्तान सलाह से शहजादी नूर के बारे में बात की कि वह उससे शादी करना चाहता है। सुल्तान सलाह ने उसकी बात तुरंत मान ली क्योंकि शहजादा हसन तुरंत अपने वतन बगदाद की ओर रवाना हो गया ताकि जल्द से जल्द अपने मां-बाप से कहकर शहजादी नूर को अपनी दुल्हन बनाकर ले आए।
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